मेरे अजीज दोस्तों आज की यह रूह कंपा देने वाली दास्तान एक बुजुर्ग खातून अम्मी जान की है जिन्हें रमजान के मुकद्दस महीने में उन्हीं की बहुओं ने घर से निकाल दिया जलते सूरज के नीचे तपती जमीन पर वह बेजार बेहाल और बेसहारा पड़ी थी भूख और प्यास ने जिस्म की आखिरी ताकत तक निचोड़ ली थी आंखों के सामने अंधेरा छा रहा था लू के थपेड़ों ने जिस्म को बेहिस कर दिया था कोई उनका हाल पूछने वाला तक ना था कांपते होठों से बस एक दर्द भरी सिसकी निकली या अल्लाह मुझसे अब और नहीं चला जाता
उनकी हर हड्डी जवाब दे रही थी आंखों से आंसू बह रहे थे मगर पसीने से तर चेहरा और सूखे होठ यह गवाही दे रहे थे कि उनके सब्र की इंतिहा हो चुकी थी इस दर्दनाक दास्तान को जानने के लिए आखिर तक हमारे साथ रहिएगा गांव के बीचोंबीच एक पुरानी मगर शानदार हवेली जैसी बड़ी कोठी थी इसी घर में अम्मी जान अपने छह बेटों के साथ रहती थी उनका असल नाम हलीमा बीवी था मगर पूरे गांव में लोग उन्हें अम्मी जान कहकर पुकारते थे क्योंकि वह हर किसी के लिए एक मां जैसी थी उनका दिल समुंदर
की तरह ससिया था हर किसी के लिए खुला हुआ गांव के लोग उनकी बड़ी इज्जत करते थे अगर किसी के घर झगड़ा होता तो वह अपने प्यार और अखल मंदी से सुलह करा देती कोई भूखा होता तो अपने हिस्से की रोटी दे देती गांव की औरतें कहती अमी अमी जान का दिल दरिया जैसा है उनके छह बेटे थे सादिक अयान नौमान रेहान फिरोज और असद अम्मी जान ने अपनी पूरी जिंदगी अपने बेटों की परवरिश में लगा दी थी वह खुद भूखी रह जाती मगर अपने बच्चों को किसी चीज की कमी महसूस नहीं होने देती वक्त
गुजरता गया बेटे बड़े हो गए और उनके घर में बहुओं के आने का वक्त आ गया अम्मी जान ने अपनी हैसियत से बढ़कर अपने बेटों की शादिया की अच्छे घरों से बहुएं लाई ताकि घर में बरकत आ खुशियां बढ़े जब पहली बहू आई तो अम्मी जान ने अपनी कोठरी छोड़कर उसे सबसे अच्छा कमरा दे दिया जब दूसरी बहू आई तो खुद अपने हाथों से घर की दीवारें चमकाई ताकि नई बहू को अच्छा लगे इस तरह एकएक करके छह बहुएं घर में आ गई शुरुआत में सब कुछ ठीक था घर में रौनक थी हर तरफ चहल
पहल थी मगर धीरे-धीरे अम्मी जान को महसूस हुआ कि अब बहुएं उन्हें पहले जैसा नहीं मानती जो बहुएं शादी से पहले बड़ी मीठी बातें करती थी अब तीखे बोल बोलने लगी थी अगर अम्मी जान कुछ कहती तो बहुएं तंज से कहती अब तो हम भी इस घर की मालकिन है हर चीज आपके हिसाब से थोड़ी चलेगी पहले अम्मी जान को लगा कि यह सिर्फ छोटी मटी नोकझोंक है मगर उन्हें क्या पता था कि यह छोटे-छोटे ताने एक दिन जुल्म की शक्ल इख्तियार कर लेंगे अब घर की फिजा बदलने लगी थी पहले जहां उनके खाने पीने
का पूरा ख्याल रखा जाता था अब उन्हें वकत पर खाना भी नहीं मिलता था पहले बहुए अदब से पेश आती थी अब कोई सीधे मुंह बात तक नहीं करता था पहले बेटे हर छोटी बड़ी बात में उनकी राय लेते थे अब बीवियों के कहने पर कहते अम्मी अब आप बूढ़ी हो गई हैं हर चीज में दखल मत दिया कीजिए फिर एक दिन अम्मी जान को तेज बुखार हो गया कमजोरी की वजह से वह उठ भी नहीं पा रही थी उन्होंने छोटी बहू से कहा बेटी जरा पानी दे दो बहुत प्यास लगी है छोटी बहू झुंझला
करर बोली इतना काम करते करते मेरी कमर टूट गई है और आपको बस हुक्म चलाने की पड़ी है अगर इतनी तकलीफ हो रही है तो बेटों से कहिए आपके लिए अलग से नौकरानी रख ले तीसरी बहू ने तो हद ही कर दी अम्मी जान अब आप अपनी आखिरी उम्र में आराम कीजिए हमसे घर के कामों की उम्मीद मत रखिए अम्मी जान हैरान रह गई जिन बेटों के लिए उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी कुर्बान कर दी उन्हीं के घर में उनके लिए अब कोई जगह नहीं बची थी जब बेटे घर लौटे तो बहुओं ने बड़ी आसानी से
कह दिया अरे यह तो बस हल्का सा बुखार है बुढ़ापे में तो आए दिन ऐसा होता ही रहता है किसी ने अम्मी जान का हाल तक ना पूछा उन्होंने खुद ही कांपते हाथों से पानी उठाया बिस्मिल्लाह कहकर पिया और रूंधी हुई आवाज में अल्लाह से फरियाद की या अल्लाह तू ही मेरा सहारा है कई दिनों की तकलीफ के बाद अल्लाह के कर्म से उनकी तबियत कुछ बेहतर हुई उसी दौरान रमजान का मुकद्दस महीना शुरू हो गया रमजान हमेशा से अम्मी जान के लिए सबसे प्यारा वक्त होता था बचपन से ही वह इस मुबारक महीने का
बेसब्री से इंतजार करती थी इस बार भी जैसे ही पहली रमजान का चांद नजर आया उनके चेहरे पर एक अजीब सुकून छा गया उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े या अल्लाह तूने मुझे एक और रमजान देखने की तौफीक दी तेरा लाख-लाख शुक्र उन्होंने खुद को धीरे-धीरे संभाला और सहरी की तैयारी में लग गई हालांकि अब उनका जिस्म पहले जितना मजबूत नहीं रहा था म दिल में अल्लाह की मोहब्बत का जोश बरकरार था लेकिन जैसे ही बहुओं ने देखा कि अम्मी जान रोजा रखने की तैयारी कर रही हैं उन्हें यह बात जरा भी पसंद नहीं आई
बड़ी बहू ने ताने मारते हुए कहा इस उम्र में रोजे रखने की क्या जरूरत है अब तो तुमसे चला भी नहीं जाता फिर भी इतनी जिदा दूसरी बहू बोली अगर रोजा रखना ही है तो घर के कामों में भी हाथ बटाओगे सिर पर मत डालो वह जानबूझकर अम्मी जान को तंग करने लगी कभी सेहरी की चीजें वक्त पर ना देती कभी उनका खाना छुपा देती तो कभी खाने में इतना नमक ज्यादा कर देती कि वह खा भी ना पाती जब अम्मी जान इबादत के लिए बैठती तो कोई ना कोई बहू बहाना बनाकर उन्हें परेशान करने
आ जाती एक दिन अफता के बाद अम्मी जान बहुत कमजोरी महसूस कर रही थी उन्होंने छोटी बहू से कहा बेटी जरा सा पानी दे दो बहुत कमजोरी लग रही है छोटी बहू ने पानी तो ला दिया मगर हिकारत से बोली अगर रोजे र रखने का इतना ही शौक है तो सहने की भी आदत डालो बार-बार हमें हुक्म मत दिया करो अम्मी जान का दिल बहुत दुखा मगर उन्होंने सब्र किया जब भी बहुए उन्हें सताती वह बस एक ही जवाब देती अल्लाह सब देख रहा है मेरा रोजा सिर्फ भूखा रहने के लिए नहीं बल्कि सब्र करने
के लिए भी है उनकी यह बात सुनकर बहुओं को और गुस्सा आ जाता मगर अम्मी जान हर बार अल्लाह का नाम लेकर सब कुछ बर्दाश्त कर लेती जब वह के लिए हाथ उठाकर दुआ मांगती तो उनकी आंखों से अश्कों की धार बहने लगती उनकी बस एक ही फरियाद होती या अल्लाह मुझे हिम्मत और ताकत अता फरमा ताकि मैं तेरी इबादत से दूर ना हो जाऊं लेकिन बहुओं का जुल्म बढ़ता ही जा रहा था अब जब अम्मी जान नमाज पढ़ने बैठती तो बहुए जानबूझकर अपने छोटे बच्चों को उनके पास छोड़ देती मासूम बच्चे चीखते रोते झगड़ते
और अम्मी जान को मजबूर होकर इबादत छोड़नी पड़ती बहुएं तंज कसती अम्मी जान जरा इन बच्चों को संभाल लेना हमें बहुत सिर दर्द हो रहा है बड़ी बहू हर रोज यही बहाना बनाकर अपने कमरे में जा लेटती छोटी बहू कहती अम्मी जान हमें बहुत थकान हो रही है जरा खाना बना देना और फिर बेफिक्र से मोबाइल लेकर बैठ जाती अम्मी जान खुद भी कमजोर थी लेकिन किसी तरह घर के सारे काम निपटा देती फिर भी बहुओं को कोई ना कोई शिकायत करने का मौका मिल ही जाता अम्मी जान दाल में नमक ज्यादा क्यों है अम्मी
जान बच्चे गिर गए थे आपने ध्यान क्यों नहीं दिया अम्मी जान हमें अपने ही घर में सुकून नहीं मिलता सबसे दर्दनाक बात यह थी कि अब उनका छोटा बेटा भी बहुओं की तरफ था जब अम्मी जान ने हिम्मत करके एक दिन अपनी तकलीफ जाहिर की तो बेटे ने उल्टा उन्हीं को डांट दिया अम्मी आप घर में हर वक्त झगड़ा क्यों करती है बहुओं को तंग मत किया करो यह सुनकर अम्मी जान का कलेजा छलनी हो गया उन्होंने अपनी सारी ताकत समेटकर अल्लाह के सामने रोते हुए दुआ मांगी ऐ अल्लाह अगर मुझसे कोई गलती हुई हो
तो मुझे माफ कर दे लेकिन अगर मैं बेगुनाह हूं तो तू ही मेरा इंसाफ कर अभी उनकी आंखों से आंसू गिर ही रहे थे कि तभी बड़ी बहू गुस्से में तेज कदमों से उनके कमरे में दाखिल हुई उसका चेहरा गुस्से से तमतमा रहा था अम्मी जान आप यहां आराम से बैठकर नमाज अदा कर रही हैं और उधर मैं अकेली सारा घर संभाल रही हूं बड़ी बहू गुस्से से चीख पड़ी बाकी सारी बहुएं तो अपने माय के चली गई हैं और आप बस इबादत में लगी रहती हैं घर का सारा काम आखिर कौन करेगा चलिए उठिए
और फौरन मेरे साथ काम में लगी अम्मी जान ने ठहरते हुए नरमी से जवाब दिया बेटी मैं रोजे की हालत में हूं मुझसे ज्यादा मेहनत वाला काम नहीं होगा लेकिन जितना मुझसे हो सकेगा मैं कर दूंगी मगर बड़ी बहू को यह जवाब बिल्कुल पसंद नहीं आया उसने ताने मारते हुए कहा बस बहाने मत बनाइए जब खाने का वक्त आता है तो आपको भूख लगती है और जब काम करने की बारी आती है तो रोजे का बहाना बना लेती है जल्दी चलिए इतना कहकर उसने अम्मी जान का हाथ जबरदस्ती पकड़कर उन्हें खींचा और रसोई में ले
गई गर्मी और रोजे की कमजोरी ने पहले ही अम्मी जान को निढ़ाल कर दिया था मगर फिर भी उन्होंने सब्र से काम लिया और बहू की मदद करने लगी थोड़ी ही देर में उनकी हालत और बिगड़ने लगी हाथ कांपने लगे आंखों के आगे अंधेरा छाने लगा जिस्म जवाब देने लगा मगर बहू को कोई रहम नहीं आया अभी बहुत काम बाकी है जल्दी जल्दी हाथ चलाइए बड़ी बहू ताने देती रही अम्मी जान के जिस्म में अब और हिम्मत बाकी नहीं थी आखिरकार ज्यादा मेहनत की वजह से उनके कदम लड़खड़ाए सर चकराया और वह बेहोश होकर जमीन
पर गिर पड़ी लेकिन बड़ी बहू पर इसका कोई असर नहीं हुआ उल्टा वह और ज्यादा गुस्से में आ गई यह नाटक मेरे सामने मत कीजिए अम्मी जान उठिए और काम पूरा कीजिए मगर अम्मी जान दर्द के मारे हिल भी नहीं पा रही थी उनका जिस्म जैसे बेजान हो गया था बड़ी बहू का गुस्सा और बढ़ गया उसने बेरहमी से उनकी बाजू पकड़ी और जमीन पर घसीटते हुए दरवाजे तक ले गई फिर उन्हें बेदर्दी से घर के बाहर फेंक दिया अगर आपसे घर का काम नहीं होता तो बाहर बैठिए यहां रहने की कोई जरूरत नहीं अम्मी
जान दर्द से कराह रही थी मगर उन्होंने कोई शिकवा नहीं किया बस अपनी सूखी आंखों से आसमान की तरफ देखा और हल्की आवाज में कहा या अल्लाह तू सब देख रहा है वह वहीं जमीन पर पड़ी रही उनके जिस्म में अब हिलने की भी ताकत नहीं थी उधर बड़ी बहू चैन की सांस लेकर इत्मीनान से घर के अंदर चली गई मगर अल्लाह की लाठी बे आवाज होती है अगले ही पल जब बड़ी बहू किचन में वापस गई तो अचानक उसका पैर फिसला और वह सीधा उबलते हुए तेल के बड़े बर्तन पर जा गिरी आहा हा
तेज चीख से पूरा घर गूंज उठा जैसे ही उसका जिस्म गर्म तेल में गिरा वो दर्द से बुरी तरह चीख उठी बचाओ जल गई जल गई उसकी दहला देने वाली चीखें पूरे घर में गूंज रही थी घर में मौजूद उसका शौहर देवर और बाकी घर वाले घबरा कर दौड़ पड़े जैसे ही उन्होंने किचन का मंजर देखा सबके होश उड़ गए बड़ी बहू उबलते तेल में गिरी तड़प रही थी अल्लाह जल्दी करो इसे बाहर निकालो उसका शौहर चिल्लाया देवर ने किसी तरह कपड़ा लिया और बड़ी मुश्किल से उसे जलते तेल से बाहर निकाला मगर बहुत देर
हो चुकी थी उसका पूरा बदन झुलस चुका था चेहरा इस कदर जल गया था कि पहचानना मुश्किल था उसी वक्त बाकी बहुए जो माय के गई हुई थी वापस लौट आई जैसे ही उन्होंने यह खौफनाक मंजर देखा उनकी रूह कांप उठी छोटी बहू कांपती हुई बोली या अल्लाह यह क्या हो गया बड़ी बहू दर्द से कराह रही थी उसका जल चुका चेहरा झुलसे हुए हाथ पैर बाकी बहुएं डर के मारे सहम गई एक और बहू हकीकत को समझते हुए बोली हमने तो कभी सोचा भी नहीं था कि ऐसा कुछ हो सकता है डॉक्टर ने पूरी
कोशिश की मगर आखिर में यही कहा हम इसे बचाने की हर मुमकिन कोशिश करेंगे मगर इनका चेहरा और जिस्म अब हमेशा के लिए जल चुका है यह पहले जैसी कभी नहीं हो सकेगी डॉक्टर की यह बात सुनते ही सब बहुओं के पैरों तले जमीन खिसक गई उसका शौहर अब तक सदमे में था ऐसी में घंटों इलाज चलता रहा जब उसकी हालत बेहतर हुई तो अतीत की सारी तस्वीरें उसकी आंखों के सामने घूमने लगी अम्मी जान को धक्के देकर घर से बाहर निकालना तेज धूप में उनकी बेबसी रोजे की हालत में उनकी लाचार अब सब कुछ
याद आ रहा था बड़ी बहू की आंखों से आंसू बह निकले उसने कांपते हुए अपने शौहर का हाथ पकड़ा और सिसकते हुए कहा अल्लाह ने मुझे मेरे गुनाहों की सजा दे दी यह सब मेरी करनी का अंजाम है शौहर अब तक नहीं समझ पाया था कि उसकी बीवी यह सब क्यों कह रही है तुम क्या कह रही हो उसने हैरानी से पूछा बड़ी बहू ने शर्मिंदगी से सर झुका लिया और सारा सच बयान कर दिया क्या तुम सच कह रही हो शौहर के मुंह से बस यही लफ्ज निकले हां मैंने अम्मी जान पर बहुत जुल्म
किए और अल्लाह ने मुझे इसी दुनिया में सजा दे दी जाओ उन्हें ढूंढ कर लाओ मैं उनके कदमों में गिरकर माफी मांगूंगी अब घर के हर फर्द को एहसास हो रहा था कि उन्होंने कितनी बड़ी गलती की है सारे घर वाले अम्मी जान को ढूंढने निकल पड़े कहीं वह बेहोश ना हो गई हो छोटी बहू घबराकर बोली गर्मी बहुत थी सूरज की तपती हुई किरणें जमीन को झुलसा रही थी हर कोई गली मोहल्ले और खेतों में दौड़ने लगा मगर अम्मी जान कहीं नजर नहीं आई तपती दोपहर भूख और प्यास से बेहाल क क जोर और
लाचार आखिरकार वो एक पेड़ के नीचे गिर पड़ी और बेहोश हो गई जब उनके बेटे और बहुएं उन्हें ढूंढते हुए वहां पहुंचे तो अम्मी जान की हालत देखकर उनके होश उड़ गए अम्मी जान बड़े बेटे ने दौड़कर उन्हें गोद में उठा लिया उनकी सांसें धीमी हो रही थी होठ सूख चुके थे चेहरा हल्कान था छोटे बेटों की आंखों से भी आंसू छलक पड़े या अल्लाह हमने अपनी मां के साथ यह क्या कर दिया सब मिलकर अम्मी जान को अस्पताल की तरफ दौड़े डॉक्टर ने जांच की और अफसोस से सिर हिलाया यह कई दिनों से भूखी
प्यासी है जिस्म बहुत कमजोर हो चुका है इन्हें सही से खाना भी नहीं मिला हालत नाजुक है अगर थोड़ी देर और होती तो शायद बेटों का दिल बैठ गया बड़ी बहू जो अपने बिस्तर पर दर्द से तड़प रही थी जब यह खबर सुनी तो उसकी चीखें निकल गई या अल्लाह मैंने क्या कर दिया अब बेटे भी पछता रहे थे हमने अपनी मां का खुद ख्याल क्यों नहीं रखा काफी देर बाद अम्मी जान को होश आया उन्होंने अपनी सूखी आंखें खोली सामने उनके बेटे खड़े थे आंखों में पछतावे के आंसू लिए हुए बड़ा बेटा उनके पास
आया उनका हाथ थामा और रंधे गले से बोला अम्मी जान हमें माफ कर दीजिए हम आपकी हालत से अनजान रहे हमें नहीं पता था कि घर में आपके साथ क्या हो रहा है छोटे बेटों ने सिर झुका लिया हमने आपको आपकी बहुओं के रहम और करम पर छोड़ दिया हमें माफ कर दीजिए अम्मी जान अम्मी जान ने नजरें उठाई और कमजोर आवाज में कहा बेटा अल्लाह सब देखता है मेरे लिए रोने की जरूरत नहीं बस सबक लो और आगे से किसी पर जुल्म मत करना अम्मी जान के लफ्ज सुनकर घर के हर शख्स का सर
शर्म से झुक गया थोड़ी देर बाद उन्होंने अपने बड़े बेटे से कहा बेटा मुझे मेरी बहू के पास ले चलो मैं उसे देखना चाहती हूं बेटों की आंखों में फिर आंसू आ गए उन्हें अपनी मां की दरिया दिली पर यकीन नहीं हो रहा था जब अम्मी जान बड़ी बहू के कमरे में पहुंची तो बड़ी बहू ने जैसे ही अपनी सांस को देखा उसकी आंखों से आंसू बहने लगे तड़पते हुए बोली अम्मी जान मैंने आपके साथ बहुत जुल्म किया अल्लाह ने मुझे मेरे गुनाहों की सजा दे दी लेकिन आप मुझे माफ कर दीजिए उसने कांपते हाथों
से अम्मी जान के पांव पकड़ने की कोशिश की मगर अब उसके हाथों में इतनी ताकत नहीं बची थी अम्मी जान ने अपने बेटे को देखा फिर बड़ी बहू की तरफ एक गहरी सांस ली और कहा बेटा मैंने तुम्हें हमेशा अपनी बेटी माना था लेकिन तुमने मेरे साथ क्या किया बड़ी बहू फूट फूट कर रोने लगी बाकी बहुएं भी वहां आ गई और सबने मिलकर अम्मी जान के कदमों में सिर रखकर माफी मांगी हमने आपको तकलीफ दी हमें माफ कर दीजिए अम्मी जान ने अपनी आंखें बंद की दिल ही दिल में अल्लाह से दुआ की या
अल्लाह मैंने अपनी तरफ से सबको माफ किया अब तू भी इन्हें हिदायत दे उस दिन से पूरे घर का माहौल बदल गया बेटों को अपनी मां की अहमियत समझ में आ गई बहुओं ने अब अम्मी जान की देखभाल शुरू कर दी मगर बड़ी बहू के चेहरे और जिस्म पर जले के निशान हमेशा के लिए रह गए अब जब भी वह आईने में खुद को देखती तो अपने की पर पछता काश मैंने अम्मी जान पर जुल्म ना किए होते अब वह रोजा रखती नमाज पढ़ती अल्लाह से माफी मांगती मगर जो हो चुका था उसे बदला नहीं
जा सकता अल्लाह के बंदों पर जुल्म मत करो वरना अल्लाह का इंसाफ बहुत सख्त होता है मां-बाप की इज्जत करो उनका दिल मत दुखाओ वरना अल्लाह की सजा इसी दुनिया में देखने को मिलेगी अगर किसी से गलती हो जाए तो जल्दी तौबा कर लेनी चाहिए ताकि अल्लाह माफ कर दे