एक बार हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैहि इस्लाम का पैगाम फैलाने की नियत से अपने कुछ मुरीदो के साथ अजमेर शरीफ के एक स्थान पर तशरीफ लाए जिस मुकाम पर हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैही ने कयाम किया वहां के करीब ही एक बड़ा तालाब था जिसे स्थानीय हिंदू लोग अना सागर कहते थे उस दौर में इस तालाब की बसात और पवित्रता के कारण हिंदू समाज में इसका बहुत एहतराम किया जाता था उनका यह अकीदा था कि जो शख्स दिन भर गुनाह करने के बाद इस तालाब में गौस करता है उस के तमाम गुनाह धुल
जाते हैं इसी वजह से वे इस तालाब को हमेशा दियों से सजाए रखते थे कहा जाता है कि इस तालाब में हर रात दिए जलाने के लिए तकरीबन तीन मन तेल की जरूरत होती थी तालाब की पवित्रता के कारण वहां सभी हिंदुओं को दाखिल होने की इजाजत नहीं थी सिर्फ आला तबके के ब्राह्मण ही वहां गस्ल कर सकते थे और तालाब के पानी को छू सकते थे उनका यह मानना था कि अगर ब्राह्मणों के अलावा कोई और तालाब के पानी को छू ले तो पानी नापाक हो जाएगा हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैही और उन
के मुरीद लंबे सफर से थके हुए थे कुछ देर आराम फरमाने के बाद जब नमाज का वक्त हुआ तो ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैही ने हजरत बख्तियार काकी रहमतुल्लाह अलैहि को अजान देने का हुक्म दिया हुक्म पाकर हजरत बख्तियार काकी रहमतुल्लाह अलैही ने अजान देना शुरू किया उस वक्त हिंदुस्तान में तौहीद का पैगाम और अजान के अल्फाज किसी ने नहीं सुने थे जब लोगों ने पहली बार अजान के अल्फाज सुने तो उनके दरमियान हलचल मच गई लोग अपने घरों से बाहर आकर एक दूसरे से कहने लगे यह फकीर लोग कहां से से आ गए और
यह क्या पढ़ रहे हैं अजान खत्म होने के बाद हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैही और उनके साथियों ने अना सागर तालाब पर जाकर वजू करना शुरू किया जब हिंदू पुजारियों ने देखा कि एक अजनबी दरवेश उनके मख सूस तालाब का इस्तेमाल कर रहा है तो उनके दिल में गुस्से की आग भड़क उठी एक पुजारी बोला यह दरवेश कहां से आ गया बिना हमारी इजाजत के इसने हमारे पाक तालाब को हाथ लगा दिया हम इस तालाब को कितना मुकद्दस मानते हैं और इन मुसाफिरों ने इसे नापाक कर दिया है इसका कोई हल नहीं निकालना ही
होगा इसके बाद हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैही ने तमाम साथियों के साथ मिलकर जमात के साथ नमाज अदा की लोग यह मंजर देखने लगे और कहने लगे यह तो कोई अजीब फकीर है हमारे मंदिरों में सब देवी देवता मौजूद हैं और यह उनकी इबादत ना करके किसी नए खुदा की इबादत कर रहा है अगर मंदिर के बाहर भी कोई खुदा है तो उसे भी मंदिर में रखा जाना चाहिए ताकि लोग उसकी भी पूजा कर सकें शाम ढलने लगी शाम होते ही राजा पृथ्वीराज के ऊंटों के चरवाहे अपने ऊंट लेकर उस जगह पहुंचे इत्तेफाक से
हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलही उसी जगह पर तशरीफ फरमा थे जहां आमतौर पर राजा के ऊंट आराम किया करते थे चरवाहों ने देखा कि एक दरवेश का काफिला उनके मुकाम पर आकर बैठा है उन्होंने हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलही और उनके साथियों से कहा अरे फकीर बाबा आप कहां से तशरीफ लाए हैं और यहां आकर बैठ गए क्या आपको मालूम नहीं कि यहां रोजाना राजा पृथ्वीराज के ऊंट आराम फरमाते हैं राजा के ऊंट यहां आराम करते हैं यह जानते हुए भी आपने यहां बैठने की जुर्रत कैसे की हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैही
ने उन चरवाहों को नरमी से जवाब दिया बाबा हम मुसाफिर हैं और अनजान है हमें मालूम नहीं था कि इस मुकाम पर राजा के ऊंट आराम करते हैं क्योंकि हम पहले ही यहां रात गुजारने का इरादा कर चुके हैं तुम अपने ऊंटों को आज किसी और जगह आराम देने ले जाओ आसपास बहुत सी जगह हैं हजरत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैही का जवाब सुनकर पृथ्वीराज के चरवाहे बोले फकीर की हिम्मत तो देखो कहता है कि राजा के ऊंटों को कहीं और ले जाए और खुद यहां बैठ रहेंगे फकीर बाबा यह तो हरगिज मुमकिन नहीं है
राजा के ऊंट अपने ही मुकाम पर बैठेंगे यह कहकर चरवाहों ने हजरत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलही और उनके साथियों को वहां से उठाने के लिए दुर्व्यवहार करना शुरू कर दिया हजरत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैही बहुत ही सरल स्वभाव के थे जब उन्होंने देखा कि चरवाहे दुर्व्यवहार कर रहे हैं तो उन्होंने बख्तियार काकी रहमतुल्लाह अलही से कहा बख्तियार हम यहां बैठकर क्या करेंगे जब राजा के ऊंटों को यहीं बैठाना है तो रहने दो ऊंट यहीं बैठे हम यहां से जा रहे हैं यह कहकर हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलही अपने साथियों के साथ वहां
से चले गए अगली सुबह जब ऊंटों को फिर से चरागाह में ले जाने का समय आया तो चरवाहे ऊंटों को उठाने की कोशिश करने लगे लेकिन बार-बार कोशिश के बावजूद वे ऊंटों को उठा नहीं सके क्योंकि अल्लाह के वली हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैहि ने कहा था कि ऊंट यहीं बैठेंगे अल्लाह रब्बुल आलमीन ने उनकी यह दुआ कबूल कर ली थी थी और ऊंटों को आदेश दिया था कि जब तक मोइनुद्दीन चिश्ती खुद नहीं कहेंगे तब तक वे यहीं बैठे रहेंगे इसके बाद चरवाहे ऊंटों के ना उठने का कारण जानने लगे उनमें से एक
नेक चरवाहा था जिसने कहा क्या तुम्हें याद है कि हमने कल यहां से एक दरवेश को उठाया था जाते-जाते उन्होंने कहा था कि हम जा रहे हैं राजा के ऊंट यहीं बैठेंगे मुझे लगता है कि उनके कहे शब्दों के कारण ही राजा के ऊंट उठ नहीं पा रहे हैं शायद वह कोई बड़े वली हैं या अल्लाह का कोई अवतार है इस बात को महामहिम राजा के समक्ष रखते हैं इसके बाद चरवाहे पृथ्वीराज के पास पहुंचे और हाथ जोड़कर निवेदन किया महाराज हमने बहुत कोशिश की लेकिन आपके ऊंटों को उनके स्थान से नहीं उठा सके और
उन्हें चरागाह में घास चराने नहीं ले जा पा रहे हैं राजा पृथ्वीराज ने आश्चर्य से पूछा क्या ऊंटों को कोई बीमारी है जिस कारण वे उठ नहीं पा रहे चरवाहों ने कहा महाराज ऊंट पूरी तरह स्वस्थ है उन्हें कोई बीमारी नहीं है पृथ्वीराज ने कहा तो फिर वे अपनी जगह से क्यों नहीं उठ रहे चरवाहों ने कहा महाराज कल उस स्थान पर एक दरवेश बैठे थे हमने उनके और उनके साथियों के साथ काफी दुर्व्यवहार किया और उन्हें वहां से उठा दिया था जाते-जाते उन्होंने कहा था राजा के ऊंट यहां बैठेंगे और उठेंगे नहीं हमें लगता
है कि दरवेश की बददुआ के कारण ही ऊंट अपनी जगह से नहीं उठ पा रहे हैं तब पृथ्वीराज ने हुक्म दिया अच्छा जाओ और उस दरवेश को मेरे पास ले आओ जब हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलही पृथ्वीराज के दरबार में पहुंचे तो पृथ्वीराज ने उनसे पूछा ऐ दरवेश आपने मेरे ऊंटों को क्यों पंगु बना दिया है मेरे ऊंट भूखे मर रहे हैं कृपया अपना जादू उनसे हटा ले अगर जादू नहीं हटाया तो मेरे ऊंट भूखे मर जाएंगे पृथ्वीराज की बात सुनकर हजरत ख ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैही मुस्कुराते हुए बोले हे अल्लाह के बंदे
हम मुसलमान हैं और मुसलमान कभी जादू नहीं करते तुम्हारे ऊंटों को मैंने नहीं बल्कि इस संसार के पालनहार महान अल्लाह रब्बुल आलमीन ने बैठाया है उनकी आज्ञा से ऊंट बैठे हैं और उनकी आज्ञा से ही उठेंगे लेकिन मैं उस सर्वशक्तिमान से प्रार्थना कर सकता हूं कि वह तुम्हारे ऊंटों को उठने की अनुमति दे इसके बाद हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैही ने अल्लाह से दुआ की हे अल्लाह इन ऊंटों को उनकी जगह से उठने की तौफीक दें हजरत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैहि की दुआ करते ही चरवाहों ने देखा कि ऊंट अपनी जगह से उठकर
चरागाह की ओर बढ़ने लगे यह दृश्य देखकर चरवाहे चकित रह गए और हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैहि की करामत की खबर पूरे अजमेर में फैल गई जैसे जैसे हिंदुओं के बीच हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैही की करामत की बातें फैलने लगी और इस्लाम की महानता उनके सामने प्रकट होने लगी मंदिर के पुजारी भयभीत हो गए वे सोचने लगे अगर यही चलता रहा तो सभी हिंदू मुसलमान बन जाएंगे तब वे पृथ्वीराज के पास पहुंचे और निवेदन किया महाराज यह दरवेश हमारे राज्य में अशांति फैला रहे हैं यदि आपने अभी इनका कोई उचित समाधान नहीं
निकाला तो यह दरवेश सभी हिंदुओं को मुसलमान बना देंगे और तब हमारे देवताओं की पूजा करने वाला कोई नहीं बचेगा आप इन्हें यहां से भगा दें नहीं तो यह हमें यहां से बाहर निकाल देंगे महाराज हम आपको एक और भयावह बात बताना चाहते हैं यह दरवेश कहते हैं कि जिन मूर्तियों की हम पूजा करते हैं वे पूजनीय नहीं है उनका कहना है कि यह केवल निर्जीव पत्थर है जिनमें कोई शक्ति नहीं है यह साधारण लोगों को इस तरह की बातें बताकर भ्रमित करना चाहते हैं सबसे आपत्तिजनक बात यह है कि यह दरवेश हर दिन पांच
बार हमारे पवित्र तालाब में हाथ लगाकर उसे अपवित्र कर रहे हैं पुरोहितों की बात सुनकर पृथ्वीराज ने हजरत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैही को बुलाया जब हजरत ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैही उनके दरबार में पहुंचे तो पृथ्वीराज ने कहा ऐ दरवेश हम देख रहे हैं कि आप गौ माता का मांस खाते हैं और हमारे देवताओं का अपमान करते हैं हम धर्म के बारे में तरह-तरह की उल्टी सीधी बातें कर रहे हैं हम यह सहन नहीं कर सकते हम यह भी देख रहे हैं कि आप हमारे पवित्र तालाब को अपने अपवित्र हाथों से खराब कर रहे
हैं आप तुरंत हमारे देश से चले जाएं हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैही ने कहा बाबा हम लोग तो केवल वजू करते हैं नहाते नहीं अगर पूरी देह के स्पर्श से आपके तालाब का पानी खराब नहीं होता है तो केवल हमारे हाथ और चेहरे के पानी से तालाब अपवित्र कैसे हो सकता है यह सुनकर पृथ्वीराज ने कहा वे सभी लोग हमारे धर्म के हैं जबकि तुम लोग कहीं और से आ गए हो तुम हमारे धर्म के नहीं हो इसलिए तुम्हारे हाथ लगाने से हमारा तालाब अपवित्र हो जाता है तब हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैही
ने कहा अच्छा बाबा हम अब आपके तालाब के पानी को हाथ नहीं लगाएंगे लेकिन हमें पानी की जरूरत है तो हम चाहते हैं कि केवल एक बर्तन में पानी ले ले पृथ्वीराज ने कहा ठीक है तुम पानी ले सकते हो लेकिन तुम्हारा बर्तन तालाब में लगे तुम्हारे हाथ नहीं अगर तुम्हारे हाथ स्पर्श करें तो हम इसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे राजा के साथ सहमती के बाद हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैहि ने अपने मुख्य खलीफा बख्तियार काकी रहमतुल्लाह अलही से कहा बख्तियार जाओ और राजा के तालाब से एक बर्तन में पानी ले आओ लेकिन बहुत
सावधानी से पानी लेना ताकि तुम्हारा हाथ तालाब के पानी को छू ना सके बख्तियार काकी रहमतुल्लाह अलैही हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्ला अलही के आदेश का पालन करते हुए आना सागर से पानी लेने गए उन्होंने बर्तन को तालाब में डुबोया और उनका हाथ पानी को नहीं छू सका क्योंकि चमत्कार वश पूरा तालाब एक छोटे बर्तन में समा गया आना सागर पूरी तरह से सूख गया और उसकी तली में केवल सूखी रेत दिखाई देने लगी जब पुरोहितों ने देखा कि उनके पवित्र तालाब में एक भी बूंद पानी नहीं बची है और वह मरुस्थल की तरह सूख
गया है तो वे घबराते हुए राजा पृथ्वीराज के पास गए और बोले महाराज यह तो भारी संकट हो गया है पृथ्वीराज ने पूछा क्या हुआ पुरोहितों ने कहा उस दरवेश ने हमारे पूरे तालाब का पानी ले लिया है अब हमारे पवित्र तालाब में एक बूंद भी पानी नहीं है अगर इस तालाब में पानी नहीं होगा तो हम अपने पापों का प्रायश्चित कैसे करेंगे दूर-दूर से हजारों हिंदू लोग इस तालाब में स्नान करने आते हैं ताकि वे अपने पाप धो सके अगर पानी नहीं रहेगा तो वे यहां आना बंद कर देंगे जिससे हमारा बड़ा नुकसान होगा
और अजमेर की मान मर्यादा मिट्टी में मिल जाएगी पृथ्वीराज गहरे विचार में पड़ गए वे हजरत खवाजा मोईनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलही के खिलाफ कोई कठोर कदम उठाने से झिझक रहे थे क्योंकि उन्हें आशंका थी कि अगर उन्होंने दरवेश के खिलाफ सैनिक भेजे और दरवेश ने सैनिकों पर भी जादू कर दिया तो उनकी परेशानी और बढ़ जाएगी इसलिए उन्होंने कहा तुम लोग जाओ और उस दरवेश को मेरे पास बुलाकर लाओ मैं देखता हूं कि वह क्या चाहता है अगर उसकी मांग उचित होगी तो हम उसे मान लेंगे और यदि उचित नहीं हुई तो हम माफी मांगकर
अपना तालाब का पानी वापस ले लेंगे जब हजरत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलही पृथ्वीराज के दरबार में पहुंचे तो पृथ्वीराज ने कहा ए बाबा आपने हमारे तालाब का सारा पानी ले लिया है हम अपने पापों का प्रायश्चित कैसे करेंगे पूरे दिन के पाप हम इस तालाब में स्नान करके धोते हैं अगर तालाब में पानी नहीं होगा तो हम अपने पाप कैसे धोएंगे हजरत खवाजा मुइनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलही ने उत्तर दिया देखो बाबा तुम्हारे पास आना सागर है पर दुनिया के हर कोने में ऐसा तालाब नहीं है तो क्या वे लोग अपने पाप कैसे धोएंगे पापों
को धोने की ताकत इस तालाब के पानी में नहीं है पापों को माफ करने वाला केवल अल्लाह है जिसने आकाश धरती और पूरी सृष्टि बनाई है उसकी इजाजत के बिना एक पत्ता भी नहीं हिलता इसलिए मैं तुम्हें इस भ्रम को छोड़कर सही राह पर आने की दावत देता हूं वहां मौजूद हजारों हिंदू हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलही की बातें मंत्र मुग्ध होकर सुन रहे थे इसके बाद उन्होंने कहा जाओ बख्तियार जिस बर्तन में तुमने तालाब का पानी लिया था उसे वापस तालाब में डाल आओ बख्तियार काकी रहमतुल्लाह अलही हजरत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलही
के हुक्म से आना सागर में बर्तन का पानी डालने गए जैसे ही बर्तन का पानी तालाब में डाला आना सागर फिर से पानी से लबालब भर गया इस चमत्कार को देखकर वहां मौजूद कई हिंदुओं ने कलमा पढ़कर इस्लाम कबूल कर लिया यह देखकर हिंदू पुरोहितों और पंडितों की चिंता बढ़ गई वे पृथ्वीराज के पास गए और बोले महाराज यदि अब कोई उपाय नहीं किया गया तो सारे हिंदू मुसलमान हो जाएंगे पृथ्वीराज ने कहा मुझे सलाह दो इस दरवेश का मुकाबला कैसे किया जा सकता है पुरोहितों ने कहा यह दरवेश एक बड़ा जादूगर है इसलिए इसका
मुकाबला भी जादू से करना होगा हमारे बीच एक बड़े पुरोहित और जादूगर रामदेव हैं उन्हें इसके मुकाबले में भेजे अगर वह जादू से इसे हरा सके तो हम अपने हिंदू धर्म का गौरव फिर से प्राप्त कर सकेंगे पृथ्वीराज ने रामदेव को बुलाकर कहा रामदेव मैं तुम्हें इस दरवेश को जादू से हराने की जिम्मेदारी दे रहा हूं अगर तुम उसे हरा सके तो हम अपने धर्म का गौरव फिर से पा सकेंगे रामदेव ने पृथ्वीराज को आश्वस्त कर ते हुए कहा महाराज आप चिंता ना करें इस दरवेश को हराना मेरे लिए बहुत आसान है मैं आपके समक्ष
हमारे धर्म का गौरव वापस लाकर रहूंगा इसके बाद रामदेव अपने साथियों के साथ हजरत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलही के सामने मुकाबले के लिए पहुंचा उसने कहा मोइनुद्दीन अगर तुम में ताकत है तो मुझसे जादू का मुकाबला करो मैंने तुम जैसे बहुत से जादूगरों को हराया है तुम्हें हराना तो मेरे लिए साधारण बात है हजरत खवाजा मोईनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अल ने उसकी बातों का कोई जवाब नहीं दिया रामदेव ने देखा कि हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चुप है तो उसने गाली गलौज करना शुरू कर दिया जब रामदेव अपनी हदें पार कर गया तो हजरत खवाजा मोइनुद्दीन ने
उसकी आंखों में देखते हुए कहा रामदेव तू चिल्ला रहा है लेकिन मैं तेरे माथे पर ईमान की रोशनी देख रहा हूं हजरत खवाजा मोईनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्ला अलही की यह बात सुनते ही रामदेव कांपने लगा और उसी क्षण अल्लाह रब्बुल आलमीन ने उसके दिल में ईमान की रोशनी डाल दी रामदेव हजरत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती के चरणों में गिर पड़ा और बोला हे अल्लाह के वली मैंने आपके साथ बहुत बेअदबी की है मुझे माफ करें और मुझे कलमा पढ़ाकर इस्लाम की राह दिखाएं हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैहि ने रामदेव को कलमा पढ़ाया और उनका नाम रखा
मोहम्मद सादिक इतिहास बताता है कि बाद में रामदेव मोहम्मद सादिक के रूप में एक बड़े अल्लाह के वली बन गए प्रिय पाठकों सोच जो रामदेव हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती को पराजित करने आए थे वही अब उनके हाथ में हाथ देकर इस्लाम की शांति की छाव में आ गए यह अल्लाह रब्बुल आलमीन का चमत्कार और शक्ति है जो जिसे चाहे हिदायत दे सकता है आमीन [संगीत]