यह कहानी एक गरीब दर्जन की है जो अपनी मेहनत से अपने परिवार का पेट पाल रही थी वह एक छोटी सी सिलाई की दुकान चलाती थी और पूरे मोहल्ले में उसकी सिलाई की खूब तारीफ थी उसकी सिलाई इतनी बेहतरीन थी कि गांव की सबसे अमीर जमींदार की बेगम भी अपने कपड़े उसी से सिलवा थी एक दिन उसने देखा कि उसकी बनाई हुई सिलाई किए हुए कपड़े तैयार थे लेकिन जमींदार की बेगम ने उन्हें लेने के लिए किसी को नहीं भेजा घर में उसके अब्बा की तबीयत बहुत खराब थी और उसे उनकी दवाइयां लानी थी वह
कपड़े लेकर खुद हवेली पहुंच गई वहां जाकर उसने देखा कि बेगम साहिबा अभी तक नहीं आई थी वह एक घंटे तक इंतजार करती रही फिर आखिरकार बेगम साहिबा सीढ़ियों से नीचे उतरती नजर आई बेगम साहिबा ने सुर्ख लाल साड़ी पहन रखी थी भारी भरकम गुलूबंद गले में झूल रहा था और वह नाज नखरो से चलती हुई आ रही थी उन्होंने तिरछी निगाहों से देखा और तंज भरे लहजे में बोली इस बार बहुत देर कर दी तुमने साढ़ा सिलने में दर्जिन घबराई तुरंत सफाई दी बेगम साहिबा मैंने तो दो दिन पहले ही सिलाई पूरी कर ली
थी सोचा कि आपकी नौकरानी आकर ले जाएगी लेकिन जब वह नहीं आई तो मैं खुद ही ले आई बेगम साहिबा ने गुस्से से होठ भींच लिए और बड़बड़ा से हुए बोली इस सकीना की बच्ची को तो आने दो उससे पूछती हूं फिर वह एकएक करके कपड़े खोलकर देखने लगी थोड़ी देर बाद उनकी थरियां कुछ कम हुई और तारीफ करते हुए बोली सिलाई तो बहुत अच्छी की है पहनकर देखूंगी कि फिटिंग ठीक है या नहीं दर्जिन ने राहत की सांस ली उसे लगा कि अब उसे मेहनत की मजदूरी मिल जाएगी लेकिन तभी हवेली के एक कोने
से शोरगुल उठा ऐसा लग रहा था जैसे कोई बड़ा हंगामा हो गया हो सारे मुलाजिम उस ओर दौड़ पड़े किसी के हाथ में मोटा डंडा था तो किसी के हाथ में लाठी बेगम साहिबा भी बेचैनी से उठ खड़ी हुई और चौकीदार को बुलाकर पूछा क्या हुआ चौकीदार घबराई आवाज में बोला बेगम साहिबा अब अभी अभी माली ने लॉन में बहुत बड़ा इच्छाधारी नाग देखा है वह एक दरख्त से लिपटा हुआ बैठा था शुक्र है कि माली ने देख लिया जल्दी ही उसे पकड़ लेंगे इतना सुनते ही हवेली के सारे लोग इकट्ठा हो गए दर्जिन भी
घबरा गई लेकिन उसे अपनी मजदूरी की फिक्र थी वह कांपती आवाज में बोली बेगम साहिबा पैसे दे दीजिए मुझे जाना है बेगम साहिबा ने एक नजर उस पर डाली और लापरवाही से बोली हां मैं सकीना के हाथ पैसे भिजवा दूंगी और भी कपड़े सिलवाने हैं तुमसे दर्जिन की उम्मीदें टूट गई वह मायूस होकर हवेली से निकली और पड़ोस की खाला रुकैया से उधार मांगने चली गई लेकिन खाला ने उसे तिरस्कार भरी नजरों से देखा और गुस्से से बोली हम कोई बैंक नहीं है जो हर बार तुम्हें उधार दें लेकिन उनकी बड़ी बेटी नगीना बाजी मेहरबान
थी उन्होंने दर्जिन को पैसे दे दिए दर्जिन ने तसक भरी नजरों से उन्हें देखा और जल्द वापस करने का वादा किया घर आकर उसने अब्बा की दवाइयां खरीदी और थोड़ी सब्जी भी ले आई अब्बा चारपाई पर लेटे थे और छोटा भाई सुहेल ट्यूशन से लौट आया था यह तीनों ही एक दूसरे का सहारा थे अम्मा का इंतकाल कबका हो चुका था और अब्बा मजूर हो चुके थे अगर दर्जिन के हाथ में सिलाई का हुनर ना होता तो शायद वे भूखे मर जाते रात को जब वह अब्बा को हवेली में नाक दिखने वाली बात बता रही
थी तो उनके चेहरे पर अजीब सा तनाव आ गया उन्होंने धीरे से कहा एक दिन तो उसे लौटना ही था आखिर कब तक वह बदला लिए बिना रह सकता था दर्जन चौकी अब्बा आप क्या कह रहे हैं अब्बा ने गहरी सांस ली और बोले अगर उन्होंने उसे मार दिया तो वह फिर लौटेगा इच्छाधारी नाक कभी नहीं मरता 100 साल बाद फिर से जन्म लेता है दर्जिन हंस दी अब्बा आप भी ना यह सब बस किस्से कहानियां है मगर अब्बा के चेहरे की गंभीरता उसे उलझन में डाल रही थी शाम ढलते ही मौसम अचानक बिगड़ गया
तेज आंधी और लाल मिट्टी के गुब्बार से घर की कच्ची दीवारें कांप उठी नफीसा को डर लगने लगा उसने फौरन सुहेल को अंदर बुलाया और अब्बा की चारपाई कमरे में बिछा दी रात काफी बढ़ चुकी थी जब अचानक दरवाजे पर र की दस्तक हुई नफीसा चौक उठी इतनी रात को कौन आ सकता था अंदर से ही आवाज लगाई कौन है बाहर से भारी आवाज आई मुसाफिर हूं जखमी हालत में हूं एक रात की पनाह चाहिए नफीसा जानती थी कि उनका घर मुसाफिरों के लिए रास्ता था मगर इतनी रात को किसी अजनबी को अंदर बुलाना ठीक
होगा मगर जब उसने दरवाजा खोला तो सामने खड़े नौजवान को देखकर उसकी सांसें थम गई गहरी हरी आंखें गोरी चिट्टी रंगत और एक शहजादे जैसी शख्सियत लेकिन उसका हाल बुरा था जिस्म पर जगह-जगह गहरे जखम थे कपड़े खून में सने हुए थे नफीसा घबरा कर बोली आपको इतनी चोट कैसे लगी वह बोला लोगों ने मारा है कोई हिस्सा नहीं छोड़ा लेकिन मैं भी उन्हें नहीं छोडूंगा उसकी आवाज में अजीब सी दहशत थी नफीसा ने दरवाजा खोलकर उसे अंदर आने दिया वह पिलर के पास बैठ गया नफीसा सोच रही थी कि अब्बा को जगा दे मगर
फिर ख्याल आया कि उनकी तबीयत खराब है क्या आपके पास कोई कपड़ा होगा उसने पूछा नफीसा के पास सिर्फ नए कपड़े थे मगर उसे अपना पुराना दुपट्टा याद आ गया उसने वो दुपट्टा निकाल कर उसे दे दिया उसके हाथ जख्मी थे इसलिए नफीसा खुद उसकी मरहम पट्टी करने लगी उसका दिल जोर-जोर से धड़क रहा था इतनी करीबी से उसने पहले कभी किसी गैर मर्द को नहीं देखा था वह चुपचाप बैठा था जैसे अपना सब कुछ हार चुका हो नफीसा ने उससे खाने का पूछा तो वह बोला अगर थोड़ा खाना मिल जाए तो बड़ी मेहरबानी होगी
नफीसा ने जल्दी से रात का बचा हुआ खाना लाकर दे दिया उसे देखकर वह सोचने लगी कि इतना खूबसूरत आदमी गांव में किसके घर आया होगा उसकी आंखें किसी आम इंसान की नहीं लग रही थी वह बोला आपको मेरी वजह से आधी रात को तकलीफ हुई इसके लिए माफी चाहता हूं मगर क्या करूं बड़ी मुश्किल से जान बचाकर यहां भागा हूं वरना वह लोग मुझे मार डालते हैं नफीसा परेशान हो गई आपके दुश्मन इसी गांव के हैं उसने सिर हिलाया मैं ज्यादा कुछ नहीं बता सकता मगर आप मुझ पर एक एहसान कर सकती हैं जब
तक मेरे जखम ठीक ना हो जाए मुझे इस घर में रहने दें और किसी को मेरे बारे में मत बताइएगा नफीसा ने बिना सोचे कहा आप जितने दिन चाहे यहां रह सकते हैं हमारे घर में कोई आता जाता नहीं वह तसना निगाहों से उसे देखता रहा फिर जमीन पर लेट गया शायद थकान हद से ज्यादा थी नफीसा भी उसकी तरफ देखते देखते सो गई सुबह जब उसकी आंख खुली तो वह घबरा गई घर में उस अजनबी का नामो निशान तक नहीं था उसने तो कहा था कि वह तीन दिन रहेगा फिर अचानक कहां चला गया
यही सोचते हुए वह अब्बा और सुहेल के लिए नाश्ता तैयार करने लगी लेकिन उसका दिल बेचैन था जब उसके अब्बा ने अचानक उसे आवाज दी उसने चाय का प्याला रखा और उनके पास चली गई अब्बा के चेहरे पर हैरानी थी यह सहन में अजीबोगरीब निशान कैसे हैं अब्बा ने गंभीर लहजे में कहा नफीसा ने उनकी निगाहों की सीध में देखा तो सच में फर्श पर अजीब से निशान थे उसने अनजान बनते हुए कहा अब्बा ना जाने किस चीज के हैं आप ही बताइए आप ज्यादा तजुर्बे का हैं अब्बा ने गहरी सांस ली और बोले ऐसे
निशान तो खेतों में दिखते थे जहां नागों का बसेरा होता था लगता है यहां से कोई नाग रंग कर गया है अब्बा की बात सुनकर नफीसा के चेहरे का रंग उड़ गया लेकिन अगले ही पल वह हंसने लगी अब्बा नाग हवेली में था यहां नहीं आप मुझे डराने की कोशिश कर रहे हैं अब्बा ने संजीदगी से कहा डरा नहीं रहा बेटा मैंने अपनी जिंदगी में बहुत कुछ देखा है यह निशान मुझे नागों के ही लगते नफीसा ने उनकी बात को हल्के में लिया लेकिन उसके मन में कुछ सवाल उठने लगे वह मन ही मन किसी
और के बारे में सोच रही थी आखिर वह कौन था कहां चला गया काश वह दोबारा लौट आए ताकि वह उसका नाम पूछ सके इस बेचैनी के बीच उसने पड़ोस की खाला के बेटे की शादी के लिए कपड़े सिलने शुरू कर दिए थोड़ी देर बाद खाला अपने कपड़े लेने आई उन्होंने नफीसा को ध्यान से देखा और कहने लगी तुझे तो सारी जिंदगी कंवारा ही रहना पड़ नफीसा हैरानी से उनकी तरफ देखने लगी खाला ने ठंडी सांस भरी देख एक तरफ तेरा बाप मजदूर है घर में खाने को कुछ नहीं तेरा छोटा भाई अभी बच्चा है
ऐसे में तेरी शादी कैसे होगी नफीसा ने धीमे स्वर में जवाब दिया खाला मुझे शादी की कोई जल्दी नहीं मैं अपने अब्बा और भाई की जिम्मेदारी उठा लूं यही मेरे लिए काफी है खाला ने उसके सिर पर हाथ रखा अल्लाह तुझे हिम्मत दे बेटी लेकिन तुझे देखकर रहम आ आता है नफीसा ने उनकी बातों पर कोई जवाब देना जरूरी नहीं समझा उसे इस तरह की बातें सुनने की आदत हो गई थी शाम को सुहेल ट्यूशन से लौटा और कहने लगा बाजी ट्यूशन वाली फीस मांग रही थी नफीसा ने उसकी तरफ देखा और सिर हिलाकर कहा
एक दो दिन में मिल जाएगी उसे मालिक पर गुस्सा आ रहा था जिसने अभी तक नौकरानी के हाथ पैसे नहीं भिजवाए थे शायद उसे फिर से जाना पड़ेगा रात के वक्त जब वह कपड़े सिलाई कर रही थी तभी उसके पीछे से एक धीमी मगर जानी पहचानी आवाज आई कैसी हो तुम व चौक गई उसने गर्दन घुमाई और देखते ही उसके होश उड़ गए वही नौजवान उसके सामने बैठा था नफीसा घबराई हुई बोली तुम अंदर कैसे आए उसने दरवाजे की तरफ इशारा कर दिया दरवाजा खुला रह गया था नफीसा के पैरों तले जमीन खिसक गई उसने
तो सुहेल को ताकीद की थी कि दरवाजा अच्छी तरह बंद कर दे घबराते हुए उसने जल्दी से दरवाजा बंद कर दिया तुमने कहा था कि तीन दिन तक रहोगे फिर कहां चले गए थे नफीसा ने पूछा नौजवान हल्का सा मुस्कुराया तो तुम मेरा इंतजार कर रही थी नफीसा को उसकी बात पर शर्मिंदगी महसूस हुई शायद उसने उसकी बेचैनी को भांप लिया था फिर उसने धीमे लहजे में कहा मैं तुम्हारी भलाई के लिए ही चला गया था अगर इस घर में किसी ने मुझे देख लिया तो मुश्किल खड़ी हो जाएगी नफीसा उसे देखते हुए बोली क्या
तुम्हें कुछ खाने के लिए चाहिए नौजवान ने हां में सिर हिलाया अगर थोड़ा सा दूध मिल जाए तो नफीसा ने बिना कुछ कहे अब्बा के लिए रखा हुआ दूध लाकर उसे दे दिया उसने देखा कि वह दूध इस तरह पी रहा था जैसे उसे इसकी सख्त जरूरत थी दूध खत्म करके उसने खाली प्याला लौटा हुए कहा तुम बहुत मेहरबान लड़की हो नफीसा उसकी बात सुनकर चुप रही मगर मन में बहुत कुछ चल रहा था वह उससे पूछने लगी तुम्हारे दुश्मन कौन हैं मुझे बताओ मैं तुम्हारी मदद कर सकती हूं नौजवान ने नफीसा की बात को
टालते हुए कहा नहीं मुझे अपना बदला खुद लेना है बस थोड़ा वक्त चाहिए नफीसा उससे बातें करने में इतनी मसरूफ थी कि उसे अब्बा की आवाज सुनाई ही नहीं दी मरियम मरियम बेटी इधर आओ अब्बा की आवाज आई नफीसा घबराकर उठी और अंदर चली गई अब्बा कहने लगे बेटा इतनी देर से देख रहा हूं बाहर बैठकर किससे बातें कर रही हो तुम्हारी आवाज तो साफ सुनाई दे रही थी नफीसा का दिल जोरों से धड़कने लगा उसने सहन में झांका लेकिन वहां कोई नहीं था वह कहीं चला गया था जल्दी से खुद को संभालते हुए उसने
कहा अब्बा किसी से नहीं आपको वहम हुआ होगा अब्बा बेचैनी से बोले नहीं मैंने देखा ऐसा लग रहा था जैसे कोई तुम्हारे सामने बैठा है नफीसा ने बड़ी मुश्किल से उन्हें समझाया कि उन्हें कोई वहम हुआ है जब अब्बा सो गए तो वह फिर सहन में आई मगर वहां कोई नहीं था उसे दुख हुआ कि वह बिना बताए चला गया सुबह जब नफीसा नाश्ता बना रही थी तभी बाबा की चिल्लाने की आवाज आई मरियम इधर आओ बेटी यह देखो आज फिर वैसे ही निशान है नफीसा बाहर आई तो देखा कि वहीं अजीबो गरीब निशान सहन
में फैले हुए थे अब्बा घबराते हुए बोले मरियम तुमने कहा था कि हवेली में नाग दिखा था मगर अब तो ऐसा लगता है कि वह जिंदा है और हमारे गांव में घूम रहा है अब्बा की आंखों में डर था मगर नफीसा के चेहरे पर बस खामोशी थी नफीसा और उसके अब्बा के दरमियान गरीब बातें होने लगी थी अब्बा का यकीन था कि हवेली में जो नाग देखा गया था वह अभी भी जिंदा है और पूरे गांव में घूम रहा है यह सुनकर नफीसा परेशान हो गई और कहने लगी अब्बा वह सांप तो हवेली के मुलाजिमों
ने मार दिया था लेकिन अब्बा को उसकी बात पर यकीन नहीं हो रहा था उसी दिन नफीसा ने अब्बा से कहा मालकिन ने अभी तक मेरी सिलाई के पैसे नहीं भिजवाए हैं मुझे नगीना बाजी के पैसे वापस करने हैं तो मैं हवेली जा रही हूं उसने सुहेल का बनाकर रख दिया और पैदल ही हवेली की ओर चल पड़ी रास्ता कठिन और सुनसान था लेकिन उसे महसूस हो रहा था कि कोई उसका पीछा कर रहा है हवा में अजीब सी सरसराहट थी जबकि चारों ओर हब्स फैली हुई थी नफीसा ने पलट कर देखा तो हैरान रह
गई वह उसके सामने खड़ा था उसकी आंखों में वही चमक थी जो हमेशा नफीसा को बेचैन कर देती थी वह मुस्कुराते हुए बोला जहां तुम जाओगी वहां मैं भी पहुंच जाऊंगा न सासा ने उसे सवालिया नजरों से देखा और बोली तुम हवेली क्यों नहीं जा सकते क्या वहां किसी से दुश्मनी है उसने सिर हिला दिया और बोला जल्द ही तुम्हें सब पता चल जाएगा लेकिन जब तक सच्चाई सामने आएगी हो सकता है कि मैं इस गांव में ना रहूं नफीसा ने घबराकर कहा खुदा ना करे तुम हमेशा यहीं रहो उसके दिल की धड़कने तेज हो
रही थी लेकिन वह जल्दी से हवेली की ओर बढ़ गई जैसे ही हवेली पहुंची मालकिन ने उसे देखकर कहा मैं तुम्हारे पैसे देना भूल गई थी आजकल हवेली में बहुत परेशानियां चल रही हैं वह सिर पकड़कर बैठी थी और सकीना को आवाज दी जाओ मेरे कमरे से पर्स उठा लाओ सकीना ने नफीसा को गुस्से से देखा और जब नफीसा बाहर निकली तो पीछे से बोल पड़ी तुझे अब भी सुकून नहीं हवेली में इतनी परेशानियां हैं और तू अपने पैसे लेने आ गई नफीसा ने तम तमाते हुए कहा शर्म कैसी मैं घर चलाने वाली हूं हमारे
घर में खाने के भी लाले पड़े हैं सकीना फिर ताने देते हुए बोली यहां तो मालकिन को अपने बेटे और शौहर की पड़ी हुई है पूरा खानदान खतरे में है मालकिन बार-बार कहती रहती है कि जिसका डर था वही हुआ तीन दिन से हवेली में किसी ने कुछ नहीं खाया नफीसा यह सुनकर और भी परेशान हो गई आखिर ऐसी कौन सी आफत आ गई थी कि हवेली के लोग खाने तक से दूर हो गए थे जब वह घर पहुंची तो देखा कि चाचा फजल दीन अब्बा के पास बैठे थे वे हवेली के मुलाजिम थे और
अक्सर अब्बा से मिलने आ जाते थे दोनों धीरे-धीरे बातें कर रहे थे नफीसा ने सुना कि चाचा फजल दीन कह रहे थे कल बहुत बड़े सपेरे को बुलाने वाले हैं वह सातवें गांव में रहता है 90 साल का हो गया है वह जहां जाता है वहीं बता देता है कि नाग कहां छिपा है नफीसा यह सब सुन रही थी और भीतर ही भीतर डर भी रही थी अब्बा कहने लगे बुरे काम का बुरा नतीजा होता है उन्हें सोचना चाहिए था कि 20 साल बाद वह फिर लौटेगा और तबाही मचाएगा वे दोनों कोई गहरी बात कर
रहे थे लेकिन नफीसा को उसमें शामिल नहीं किया दूसरे दिन खबर फैली कि सपेरा गांव में आ चुका है पूरा गांव उस नाक को ढूंढ रहा था जो हवेली में घुस आया था और जिसे मारने की कोशिश की गई थी लेकिन वह घायल होकर कहीं गायब हो गया था ना तो हवेली में था और ना ही गांव में उसका कोई सुराग मिल रहा था इसी वजह से जमींदार ने सपेरे को बुलवाया था आधी रात को जब नफीसा बिस्तर पर लेटी थी तो उसे सहन में सरसराहट महसूस हुई उसकी आंखें फौरन खुल गई वह घबरा कर
बाहर आई और जो देखा उससे उसकी आंखें फटी की फटी रह गई वह नौजवान कोने में सहमा हुआ बैठा था उसकी हालत देखकर नाफिया उसने पूछा वह लड़का घबराई हुई आवाज में बोला मैं दीवार कूद कर आया हूं अगर ऐसा ना करता तो वह लोग मेरी जान ले लेते ना फिसाइल बेचैन हो जाता था उसने उस लड़के के जख्मों के बारे में पूछा लड़का हल्की मुस्कान के साथ बोला मैं बिल्कुल ठीक हूं लेकिन तुम्हें एक बात कहना चाहता हूं तुम बहुत खूबसूरत हो बिल्कुल मेरी रूपा जैसी यह सुनकर नाफसा चौक गई रूपा कौन थी उसने
पूछा लड़के की हरी आंखें आंसुओं से भर आई वह मेरी मोहब्बत थी तुम्हारी आंखें बिल्कुल उसी जैसी है तुम्हें देखकर बस उसी की याद आती है नाफसा के दिल में मायूसी उतर आई इसका मतलब वह पहले से ही किसी और से मोहब्बत करता था वह सोचने लगी मैं तो बस एक गरीब दर्जिन हूं और यह इतना खूबसूरत नौजवान इसे तो किसी शहजादी के साथ होना चाहिए उसने खुद को संभालते हुए पूछा तो कहां चली गई वह रूपा लड़के की सांस गहरी हो गई काश वह जिंदा होती लेकिन वह अब इस दुनिया में नहीं है उसकी
आवाज में इतना दर्द था कि नाफिया कि वह रूपा सच में बहुत खुशनसीब थी जिससे यह नौजवान इतनी मोहब्बत करता था लड़के की आंखों में गुस्से की चमक थी मेरी रूपा को मुझसे छीना गया था उसने कड़वे लहजे में कहा इस बात का सदमा मेरी रूह को खा गया है मैं अंदर ही अंदर जल रहा हूं अपने दुश्मनों से बदला लेने के लिए बेताब हूं नाफिया मैं फिर आऊंगा कहकर वह रात के अंधेरे में गायब हो गया अगले दिन फजल दीन चाचा नाफसा के अब्बा के पास आया वह कहने लगा चल आज सपेरा पूरे गांव
में नाग को तलाश करेगा तुझे भी यह तमाशा देखना चाहिए अब्बा पहले तो इंकार करने लगे लेकिन फजल दीन ने उनके कान में कुछ कहा और वह फौरन तैयार हो गए थोड़ी देर बाद फजल दीन और अब्बा बाहर गए लेकिन जब लौटे तो अब्बा बेचैन थे वह बड़बड़ा रहे थे पूरे गांव में ढूंढ लिया लेकिन वह जख्मी नाग कहीं नहीं मिला ना फिसाइल कि अब्बा इतने परेशान क्यों थे लेकिन अगले दिन जो हुआ उसने सबके होश उड़ा दिए हवेली का मालिक अपने आदमियों के साथ उनके दरवाजे पर खड़ा था साथ में एक बूढ़ा सपेरा भी
था हवेली का मालिक गुस्से से गर्जा नूरुद्दीन तूने उस नाक को इस घर में छुपा कर रखा है फजल दीन ने सब बता दिया है अब्बा का सर झुका हुआ था मैं कुछ नहीं जानता उन्होंने धीरे से कहा मालिक हंस पड़ा अगर मेरी बात सच निकली तो सजा के लिए तैयार रहना मैं मुर्दों को भी कब्र से निकाल सकता हूं तभी सपेरे की बीन गूंज उठी अचानक दीवार के पास एक लंबा मोटा नाक दिखाई दिया वह झाड़ियों के पीछे जाकर गायब हो गया पूरा गांव उसके पीछे दौड़ा लेकिन वह नहीं मिला नाफसा कांप रही थी
उसने अब्बा से पूछा यह सब क्या हो रहा है हवेली का मालिक आपको इस तरह क्यों कह रहा था अब्बा ने गहरी सांस ली और बोले क्योंकि मैं उसके बहुत से राजे जानता हूं नाफसा हक्का बक्का रह गई तो क्या आप एक सपेरे थे अब्बा ने सर झुका लिया यह 20 साल पुरानी बात है जब इस गांव में मेरी और उस चौधरी की बहुत चर्चा थी मैं एक बहुत बड़ा सपेरा था लेकिन फिर एक हादसे के बाद मैंने यह काम छोड़ दिया हमारा गांव उस जगह पर था जहां पर रेत जमीन में दर्जनों सांप और
नाग रेंगते नजर आते थे उसी वक्त हवेली भी नई नई तामीर हुई थी लेकिन हवेली के एक खुफिया कोने में एक नाग जोड़ा भी आबाद हो गया वे दोनों अपनी दुनिया में मगन थे ना जाने वहां कौन तपस्या कर रहे थे लेकिन हवेली के मालिकों ने उन्हें देख लिया वे उस नाक जोड़े को जान से मारना चाहते थे क्योंकि नाक का खौफ हर किसी इंसान के जहन में था मैं हर वक्त अपने अब्बा के साथ रहता था मुझे आज भी वह दिन याद है जब हवेली के मालिक ने अब्बा को बुलाया था वे अब्बा से
कहने लगे कि तूने इस जोड़ी को खत्म करना है अब्बा ने साफ इंकार कर दिया और कहने लगे हरगिज नहीं मैं यह काम नहीं कर सकता अगर एक नाग मरता है तो उसकी नागिन सदियों तक तुम रा पीछा करेगी और अगर नागिन मरती है तो वह नाग तुम्हारा पीछा कभी नहीं छोड़ेगा कभी ना कभी लौटकर जरूर वापस आएगा अब्बा ने उनकी बात मानने से इंकार कर दिया तो हवेली के मालिकों को भी शदीद गुस्सा आ गया उस वक्त तो वे चुप हो गए लेकिन मैं क्या जानता था कि शहर से वापस गांव की तरफ लौटते
हुए अचानक डेरे के कुछ लोग मुझे अगवा कर लेंगे वे जबरदस्ती मुझे अपनी हवेली में ले गए और कहने लगे तू भी अपने सपेरे बाप का बेटा है अब यहां बीन बजा हम भी देखते हैं कि वह नाग और नागिन कहां छुपकर बैठे हैं अब्बा ने इस बात से साफ इंकार कर दिया था वे उस नाग जोड़े को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहते थे लेकिन इन्होंने मुझे गिरफ्तार कर लिया था तो अब मैं उनकी बात मानने पर मजबूर था उस रात एक बड़ी ही खौफनाक कहानी रची गई जैसे ही मैंने बीन बजानी शुरू की वे दोनों
झूमते हुए बाहर आ गए वे बहुत कम उम्र और मासूम लग रहे थे बहुत ही खूबसूरत सुनहरी रंग की वह नाग और नागिन की जोड़ी आज भी मेरी नजरों से झल नहीं हुई मैं यह खौफनाक मंजर देख रहा था जैसे ही मैंने उन्हें बाहर निकलते देखा मैं फौरन ही वहां से रफू चक्कर हो गया लेकिन मैं क्या जानता था कि इस रात व नागिन अपनी जिंदगी की बाजी हार जाएगी हवेली के मालिक के हुक्म पर उसके आदमियों ने उस नागिन को जान से मार डाला था जबकि नाग अपनी जान बचाने के लिए ना जाने कहां
छुप गया था अब हवेली में जश्न मनाया जा रहा था क्योंकि नाग नागिन की जोड़ी से हवेली पाक हो चुकी थी अब उन्हें कोई खतरा नहीं था फिर कई साल गुजर गए अचानक अब्बा का इंतकाल हो गया मैं अब भी यही काम कर रहा था लेकिन एक दिन एक जहरीले नाग ने मुझे दस लिया मैं वहीं पर गिर पड़ा शुक्र था कि उस नाग का जहर मेरे पूरे बदन में नहीं फैला सिर्फ मेरी टांगों को मुतासिर किया और आज मैं बिस्तर पर मजबूर बनकर लेटा हूं लेकिन आज वह बढेरा जो घर आया है वह समझ
गया था कि हमारे घर में वह नाग मौजूद है उसकी आहटें मैं भी पहचानने लगा था जब भी तू मुझसे पूछती कि अब्बा जमीन पर यह निशान कैसे हैं या जब मैं तुझसे पूछता कि यह निशान कहां से आए तो तू इस बात से इंकार कर देती तू जानती ही नहीं थी कि यह निशान कैसे हैं लेकिन मैं उसकी आहटें और उसके निशान अच्छी तरह पहचानने लगा था वह नाग हमारे ही घर में था फिर मैंने उसकी जान बचाने की कोशिश की और इस कोशिश में किसी को भी यह बात नहीं बताई मैं उसे दो-तीन
दफा दीवार पर रेंगते देख चुका था लेकिन आज वह यहां से भाग गया है ना जाने अब वह मेरा क्या हाल करेगा मुझे डर है कि कहीं लोग उसे भी ना मार डाले लेकिन वह पहले से बहुत ज्यादा ताकतवर होकर आया है हो सकता है कि अपनी ताकत से इस गांव में तबाही मचा दे जब अब्बा ने मुझे यह कहानी सुनाई तो अचानक उस डेरे के आदमी आए और अब्बा से गुस्से में कहने लगे एक बार फिर से वह बच निकलने में कामयाब हो गया लेकिन हम इसे तलाश करके ही रहेंगे तू पहले की तरह
उस नाक जोड़ी की जान बचाना चाहता है तू ही असल में हमारा दुश्मन है तभी तो तूने उस नाक को अपने घर में छुपा लिया था अब्बा ने उनकी बात का जवाब देना भी मुनासिब ना समझा वे फूंक हुए खुद ही धमकी देते हुए वहां से चले गए मैं अब्बा को तसल्ली दे रही थी कि ऐसा कुछ नहीं होगा जब हमने कुछ किया ही नहीं है तो फिर लोग हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकते अब्बा के चेहरे पर भी कोई फिक्र कोई गम नहीं था रात को मैं सिलाई मशीन पर बैठी अपने कपड़े सिल रही थी
जब अचानक मुझे मुझे अपने पीछे आहट सी महसूस हुई मैंने देखा सब्ज आंखों वाला वह खूबसूरत नौजवान मेरे पीछे ही बैठा था तुम यहां क्या कर रहे हो मैं हैरान होकर उससे कहने लगी वह कहने लगा मैं तुमसे आखिरी बार मिलने आया हूं यह सुनकर मेरी आंखों में आंसू आ गए मैं उसे कहने लगी क्या तुम यह गांव छोड़कर जा रहे हो उसने कहा हां मैं यह गांव छोड़कर जा रहा हूं क्योंकि मेरा इंतकाम पूरा हो गया है सुबह तक उस हवेली में हंगामा मचा होगा लेकिन क्या तुम यह जानना नहीं चाहोगी कि मैं कौन
हूं और तुम्हारे सामने बार-बार क्यों आता रहा उसकी बात सुनकर मेरा दिल धड़कने लगा मैं उसे कहना चाहती थी कि यह मेरे दिल की आवाज थी वह बार-बार मेरे सामने आ रहा था क्योंकि सच में ही मैं उसे दिल ही दिल में मोहब्बत करने लगी थी फिर उसने मुझे गौर से देखा और कहने लगा तुम अपने अब्बा से पूछ लेना मेरे बारे में कि मैं कौन हूं वे मुझे ना सिर्फ जानते हैं बल्कि पहचानते भी हैं अचानक उसकी आंखें चमकने लगी इसके धोखे में मत आओ बेटी यह इंसान नहीं बल्कि एक इच्छाधारी नाक है अचानक
मेरे पीछे अब्बा की आवाज सुनाई दी मैं खौफ जदा होकर पलटी तो अब्बा मेरे पीछे ही खड़े थे तभी मैं उसकी सब्ज चमकती आंखों को देखकर हैरान रह गई उसकी आंखें रंग बदल रही थी लेकिन वह अब्बा को मोहब्बत भरी नजरों से देख रहा था तभी वह अब्बा के सामने जाकर खड़ा हुआ और कहने लगा नूरदीन तूने पहले भी मेरी जान ब बचाने की कोशिश की थी और आज भी तूने मेरी जान बचाई इसके लिए मैं तेरा शुक्र गुजार हूं लेकिन तू मेरी नागिन को ना बचा सका तेरी वजह से वह मर गई लेकिन यह
बाद में मुझे पता चला कि तूने उसे बचाने की कोशिश की थी मुझे अफसोस है कि मैंने अपना झर तेरे जिस्म में छोड़ दिया था लेकिन तू बच गया यह तेरी खुशनसीबी थी अब मैं जा रहा हूं तेरी यह बेटी बहुत ही अच्छी है मैं चाहता हूं कि इसकी किस्मत भी इसी के जैसी खूबसूरत हो मैंने तुम्हारे साथ जो किया उसका अजर तो मैं नहीं दे सकता लेकिन जाते-जाते तुम्हारे घर में एक चीज छोड़कर जा रहा हूं जो तुम्हारे लिए और तुम्हारी बेटी के लिए बेहतरीन साबित होगी यह कहते ही उसने एक आखिरी नजर मुंह
पर डाली और अचानक ही नाक बनकर उस घर से इस तरह रंगता हुआ चला गया जैसे वह कभी आया ही नहीं था मैं वहीं सन्न खड़ी थी मुझे अभी तक यकीन नहीं आ रहा था कि मेरे सामने आने वाला वह खूबसूरत नौजवान जो हमारे ही घर में हर वक्त मौजूद रहता था एक इच्छाधारी नाक था मैं अभी तक सदमे की कैफियत में खड़ी थी अब्बा ने ही मुझे कंधे से हिलाकर अपनी तरफ मुतजेंस उड़ गए थे हवेली का मालिक मर गया था उसे किसी जहरीले नाग ने दस लिया था यह खबर सबके लिए लिए बहुत
बड़ी थी फिर उस दिन अब्बा कहने लगे हम यह गांव छोड़कर चलते हैं इससे पहले कि लोग इल्जाम हमारी तरफ लगाएं अब्बा परेशान थे मैं जल्दी-जल्दी घर का सारा सामान समेटने लगी लेकिन अचानक मेरी नजर एक चमकती हुई खूबसूरत चीज पर पड़ी मैंने जैसे ही उसे उठाकर देखा अब्बा उसे पहचान गए यह हीरा है जो नाग हमारे लिए छोड़कर गया है मुझे यकीन नहीं हुआ अब्बा ने उसे संभालकर अपनी हथेली पर रखा और फिर उसे एक सफेद कपड़े में लपेट लिया हमने यह गांव छोड़ दिया शहर में आकर हमने अपनी नई जिंदगी का आगाज किया
उस नाक के दिए हुए हीरे ने हमारी जिंदगी ही बदल दी उसकी कई मत करोड़ों में थी अब्बा का इलाज हो गया सोहेल अच्छे स्कूल में तालीम हासिल करने लगा जबकि मैंने अपना बहुत बड़ा बुटीक खोल लिया अब वह शहर का मशहूर और मारूफ बुटीक मेरे नाम पर था कोई यह नहीं कह सकता था कि यह लड़की कभी एक गरीब दर्जिन थी जो पैसों के लिए मारी मारी फिरती थी अब्बा मुझसे कहते अब तू भी शादी कर ले अपनी जिंदगी का नया आगाज कर लेकिन मैं अब्बा को कैसे कहती कि उस हरी आंखों वाले नाक
ने मेरा दिल अपने कब्जे में कर लिया था भले ही वह एक नाक था लेकिन वह मेरी जिंदगी में आने वाला पहला शख्स था