1192 ईसवी में मोहम्मद गोरी ने पृथ्वीराज चौहान को पराजित किया और उन्हें अफगानिस्तान ले जाकर मार डाला गया कहा जाता है कि गोरी की कब्र के पास पृथ्वीराज चौहान के लिए एक स्मारक था लेकिन वहां जाने से पहले लोगों को उनका अपमान करना पड़ता था शेर सिंह राणा एक राजपूत युवक जब इस अपमानजनक परंपरा के बारे में सुनते हैं तो उनका खून खोल उठता है राजपूत शान के लिए कुछ करने की ठान लेते हैं लेकिन उनकी राह आसान नहीं थी हत्या के एक मामले में उन्हें तिहाड़ जेल भेज दिया गया पर वे वहां से फरार
हो गए फिर जोखिम भरी यात्रा कर अफगानिस्तान पहुंचे जहां उन्होंने रूप से पृथ्वीराज चौहान की अस्थियों का पता लगाया अपनी जान की परवाह किए बिना वे उन अस्थियों को भारत वापस लाने में सफल रहे भारत लौटकर अपनी मां के सहयोग से उन्होंने गाजियाबाद के पिलखुवा में पृथ्वीराज चौहान का मंदिर स्थापित किया यह घटना राजपूत गौरव का प्रतीक बन गई क्या आप शेर सिंह राणा के इस सासिक कार्य से सहमत हैं अपने विचार कमेंट में साझा करें