किसी इंसान को उसकी गलती की सजा देना जायज है लेकिन पुराने जमाने में ऐसी खौफनाक सजा दी जाती थी जिसे सुनकर ही हमारी रूह कांप जाए मध्यम युग को मनुष्य के इतिहास का सबसे खौफनाक दौर माना जाता है इस दौर में अपने दुश्मनों या कानून तोड़ने वालों को सजा देने के लिए ऐसे खौफनाक वी तरीके इजाद किए गए जिनके बारे में सुनकर ही आपकी रूह कांप उठेगी आज वीडियो में हम आपको दुनिया भर में दी जाने वाली इतिहास की 15 सबसे खौफनाक होश उड़ा देने वाली सजा के बारे में बताएंगे लेकिन कमजोर दिल वाले इस
वीडियो को सोच समझ कर देखना दोस्तों वीडियो स्टार्ट करने से पहले एक छोटा सा लाइक करके चैनल को सब्सक्राइब कर दीजिए चलिए शुरू करते हैं नंबर 15 पियर ऑफ एंग्विश नास पाती जैसे दिखने वाले इस घातक हथियार को द चौक पियर कहा जाता है इसकी शुरुआत 1626 में फ्रांस में हुई थी जब एक चोर एक पति-पत्नी के घर में चोरी करने घुसा लेकिन जब उस चोर को उस घर में कुछ नहीं मिला तो उसने इस हथियार से उस पति-पत्नी की हत्या कर दी जिसके बाद उस चोर को पकड़ लिया गया और जब राजा को इस
घातक हथियार के बारे में पता चला तो उन्होंने सबसे पहले इस चोर को इसी हथियार से सजा दी और बाद में इसको सजा की लिस्ट में शामिल कर लिया गया इस हथियार का इस्तेमाल बच्चा गिराने वाली महिलाओं झूठ बोलने वालों और होमोसेक्सुअल लोगों पर किया जाता था यह नुकीला हथियार ऊपर लगा पेंच घुमाने पर चारों हिस्सों में बढ जाता था और इस हथियार को झूठ बोलने वालों के मुंह में अबॉर्शन करने वाली महिलाओं की योनि में और होमोसेक्सुअल लोगों के गुदा में डालकर इसके पेंच को घुमाया जाता था जैसे-जैसे पेंच घूमता यह बड़ा होता जाता
जिससे विक्टिम को असहनीय दर्द होता था फिर उसकी खाल फट जाती थी और हड्डियां टूट जाती थी और अंत में विक्टिम की मृत्यु हो जाती थी नंबर 14 जुडास क्रेडल यानी यहूदी पालना यह इंसान को तड़पा तड़पा कर मारने वाला हथियार था लोगों को नग्न कर यहूदी पालना पर बैठाया जाता था सजा देने की यह प्रक्रिया बेहद खौफनाक होती थी इसमें विक्टिम को तीन जगह से बंधे एक रेग नुमा खाली सीट पर लटका दिया जाता फिर इसके नीचे यहूदी पालने को लगाया जाता और विक्टिम के पैर को रस्सी से बांध दिया जाता जिसे खड़े कुछ
लोग पकड़े होते थे सजा का आदेश मिलते ही लोग रस्सी को एकदम से खींचते थे पुरुष हो तो उसके गदा में और महिला है तो उसके यनि में उस नोक को घुसे दिया जाता तब तक ऐसा किया जाता जब तक वह मर नहीं जाते इस प्रक्रिया में इंसान को मरने में 10 घंटे से 10 दिन लगते थे गौर तलब है कि महिला को उल्टा और पुरुष को सीधे इस जानलेवा हथियार पर बिठाकर सजा दी जाती थी नंबर 13 ब्रेस्ट रीपर ब्रेस्ट रीपर लोहे से बना एक ऐसा हथियार था जिसे सिर्फ महिलाओं पर इस्तेमाल किया जाता
था अगर कोई महिला दूसरे पुरुष के साथ अवैध संबंध बनाती पाई जाती थी या फिर उस पर इस तरह का आरोप साबित हो जाता था तब ब्रेस्ट रीपर के जरिए उस महिला को सजा दी जाती थी जिसमें ब्रेस्ट रीपर को महिला के ब्रस्ट से लगाकर जोर से दबा दिया जाता था हालांकि हैवानियत के इंतहा इतनी ही नहीं बल्कि चिमटा नुमा इस हथियार को पहले आग पर तपाया जाता इस सजा के दौरान पीड़िता के उभार को पूरी तरह से बाहर निकाल लिया जाता था इस सजा में ज्यादातर महिलाओं की मौत हो जाती थी जो भी जिंदा
बच जाती थी उनकी जिंदगी मौत से बदतर होती थी नंबर 12 इंपल मेंट 15वीं सदी का राजकुमार बलाड तृतीय बहुत ज्यादा बेरहम था वह ऐसी सजा देता था जिसमें अपराधियों को नुकीले खंबे के ऊपर बांध दिया जाता था फिर धीरे-धीरे इंसान नीचे आता था और खंबे की नोक उसके शरीर में घुसती चली जाती थी पोल की मोटाई इतनी होती थी कि उसे देखकर किसी भी इंसान की रूह कांप उठे जिस शख्स को यह सजा मिलती थी उसे जबरन धारदार पोल पर बैठने के लिए मजबूर किया जाता था पोल धीरे-धीरे उसके शरीर को चीरता हुआ बाहर
निकल जाता था अपराधियों को पोल पर इस तरह से बिठाया जाता था कि पोल का नुकीला हिस्सा शरीर से होता हुआ ठोड़ी पर आकर एक बार रुक जाए फिर धीरे-धीरे ठोड़ी की हड्डी को पार करें ऐसा इसलिए किया जाता था ताकि मुजरिम को ज्यादा समय तक पीड़ा भुगतनी पड़े इसमें इंसान को मरने में तीन से चार दिन लगते थे कहते हैं कि बलाड ने अपने शासनकाल में 2 लाख से लेकर 3 लाख लोगों को यह सजा दी थी बलाड इस कदर जालिम था कि उसे खाना खाते वक्त ऐसा देखने में बड़ा आनंद आता था जरा
सोचिए उस वक्त हैवानियत किस कदर सर चढ़कर बोलती थी नंबर 11 फ्लाइंग 850 बीसी में एक राजा रहता था जिसका नाम था असुर सिरपाल द्वितीय यह अपराधियों को कई तरीके से सजा देता था उसी में से एक सजाती फ्लाइंग राजा अपने पास कुछ खास लोगों को रखता था जो अपराध करने वाले अपराधियों की खाल उतारते थे राजा के उन खास लोगों को ट्रेनिंग दी जाती थी ताकि जब वह अपराधी की खाल उतारे तो वह इस तरह उतारे कि अपराधी जल्दी नहीं मरे और वह अपने शरीर की खाल उतरते हुए खुद ही को देखे उसके बाद
उस अपराधी की खाल को शहर के चौराहे पर टांग दिया जाता था ताकि लोग उसे देखें और कभी अपराध के बारे में सोचे भी ना नंबर 10 फ्राक यह सजा अमेरिका में शुरू हुई थी जिसमें एक लोहे के डिवाइस को अपराधी के गले पर बांध दिया जाता था यह डिवाइस दोनों तरफ से नुकीला होता था जिसकी वजह से अपराधी अपने सर को ना तो ऊपर से नीचे कर पाता था और ना ही दाएं या बाएं जितनी बार वह गर्दन नीचे करने की कोशिश करता उतनी बार ऊपर का भाग गर्दन में घुसता और नीचे का भाग
सीने में ना खा पा ना सो पाता और देखते ही देखते उसकी मौत हो जाती नंबर नाइन डेथ बाय साविंग इस सजा में बीच चौराहे पर समाज के बीचोबीच एक खंबे के सहारे विक्टिम का पैर बांधकर उसे उल्टा लटका दिया जाता था उल्टा इसलिए लटकाया जाता था ताकि उसके दिमाग तक ब्लड सप्लाई चालू रहे और वह इंसान ज्यादा समय तक जिंदा रहे और अपनी मौत खुद अपनी आंखों से देख सके इसके बाद शुरू होता था मौत का खेल और फिर दो लोग एक बड़ी आरी लेकर उसके पैरों के बीच में से धीरे-धीरे काटना शुरू करते
धीरे-धीरे इसलिए काटा जाता था ताकि उसे ज्यादा समय तक दर्द झेलना पड़े कुछ मुजरिमों को दो फाड़ कर दिया जाता था जबकि किसी-किसी को आधा काट कर ही छोड़ दिया जाता था इस सजा को मेरी बलहरा यूरोप में उन लोगों को दिया जाता था जो चोरी चकारी मार काट दंगे फसाद रेप या फिर किस बड़े अपराध में पकड़े जा ते थे नंबर एट द ब्रान बुल प्राचीन ग्रीस में एक समय ऐसा भी आया जब लोग अपराध करने से पहले हजार बार सोचते थे क्योंकि उन्हें पता था कि उनके द्वारा किए गए अपराधों की सजा उन्हें
हद से ज्यादा खौफनाक मिलने वाली है लेकिन ग्रीस में सजा देने का यह तरीका जितना डेंजरस है उतना ही दिल तहला देने वाला भी इस सजा में पीतल का एक बहुत बड़ा सा होता था जो ऊपर यानी अपनी पीठ की तरफ से खुल जाता था अपराधी को पकड़कर इस बैल के अंदर डाल दिया जाता था फिर नीचे से आग लगा दी जाती थी अब आप समझ सकते हैं कि अंदर उस इंसान की क्या हालत होती थी और जब उस इंसान की चीख निकलती थी तो इस बैल के मुंह में कुछ ऐसी डिवाइस लगी थी कि
उसकी चीखें किसी म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट से निकलने वाली आवाज की तरह सुनाई देती थी आदमी के जलने से जो धुआ निकलता था उसमें बदबू ना हो इसके लिए कुछ सुगंधित परफ्यूम इस्तेमाल किया जाता ताकि वहां से निकलने वाला धुआं खुशबूदार रहे जिस व्यक्ति ने इसकी खोज की थी उसने जब इसे राजा के सामने रिप्रेजेंट किया तो उसे लगा कि राजा की तरफ से इनाम मिलेगा लेकिन राजा ने तो सबसे पहले इसे ही उस बैल के अंदर डाल दिया कहा यह भी जाता था कि जिसने इसे बनवाया और जिसने इसे बनाया दोनों का अंत इसी बैल के
अंदर हुआ नंबर सेवन थम स्क्रू यह सजा उन अपराधियों को दी जाती थी जो अपना जुर्म कुबूल नहीं करते थे यह सजा 15वीं शताब्दी में शुरू हुई थी और 18वीं शताब्दी तक चली थी इस सजा में अपराधी की उंगलियों और अंगूठे को थम स्क्रू के अंदर फिट करके टाइट कर दिया जाता था इसमें अपराधी को इतना दर्द होता था कि वह एक या दो मिनट तक ही टिक पाता था और अपना जुर्म कबूल कर लेता था लेकिन बाद में उस अपराधिक की उंगलियां जिंदगी भर के लिए बेकार हो जाती थी नंबर छह आयरन चेयर टॉर्चर
जो अपराधी अपना जुर्म कबूल नहीं करते थे उन्हें सजा के तौर पर 1500 किलो की मदद से बनाई गई इस कुर्सी पर बिठाया जाता था और बैठते ही वह सभी कीले उस व्यक्ति के शरीर में घुस जाती थी इसके बाद वह व्यक्ति इस दर्द को उस वक्त तक बर्दाश्त करता था जब तक वह मर नहीं जाता दोस्तों इस सजा की शुरुआत अपराधि से सच उगलवाने के लिए की गई थी जिसमें व्यक्ति कीलों के टॉर्चर के बाद में अपना मुंह नहीं खो बोता था तो फिर कुर्सी के नीचे जलते हुए अंगारे रख दिए जाते थे जिसका
नतीजा यह होता था जैसे-जैसे कुर्सी में लगी कीले गर्म होती थी उन गर्म कीलों की वजह से इंसान का शरीर भी पकने लगता था अगर कोई व्यक्ति निर्दोष होता था तो उसे छोड़ दिया जाता था नंबर पांच कॉफिन टॉर्चर इसे कॉफिन प्रताड़ना कहा जाता था अगर आपको ध्यान हो तो आपने किसी हॉलीवुड मूवी में इस तरह से सजा देते हुए जरूर देखा होगा इस सजा में विक्टिम को इस पिंजरे में कैद कर दिया जाता था ताकि वह अपनी जगह से हिल ना सके इसके बाद पिंजरे को किसी पेड़ में लटका दिया जाता था इस तरह
की सजा गंभीर अपराध के लिए दी जाती थी जिसके चलते विक्टिम को या तो आदमखोर जानवर काट खाते थे या फिर वह पक्षियों का निवाला बन जाते थे नंबर चार जिंदा दफनाना यूरोपीय देशों में 15वीं सदी में यह सजा सबसे ज्यादा आम थी इसमें अपराधियों को एक कफ में जिंदा बंद कर दिया जाता और कफन गुफा में या जमीन के अंदर काट दिया जाता था नंबर थ्री रक किलिंग इस सजा में इंसान को एक रेख पर लेटा दिया जाता उसके दोनों हाथ पैर अलग-अलग रस्सियों से बांध दिए जाते फिर रस्सी को तब तक खींचा जाता
जब तक उसके हाथ पैर पूरी तरह से अलग नहीं हो जाते नंबर दो इस सजा की शुरुआत 17वीं शताब्दी में रोम में हुई थी या एक ऐसी सजा थी जिसमें चूहे का इस्तेमाल बड़े ही खतरनाक तरीके से किया जाता था इसमें अपराधी को बेंच पर लेटा करर उसके हाथ पांव बांध दिए जाते थे और फिर उसके पेट के ऊपर एक लोहे का पिंजरा रख दिया जाता था उस लोहे के पिंजरे में एक चूहा मौजूद होता था और फिर पिंजरे के ऊपर जलती हुई आग का एक बर्तन रख दिया जाता जिसकी वजह से पिंजरा गर्म होता
था और चूहे को गर्मी लगती थी ऐसी सिचुएशन में चूहा पिंजरे से निकलकर भागने की के लिए आदमी के शरीर को ही उतरना शुरू कर देता था नंबर एक द ब्रेकिंग व्हील ब्रेकिंग व्हील को कैथरीन व्हील के नाम से भी जाना जाता है इससे पीड़ित जिंदा नहीं बचता था लेकिन यह उसे इतना तड़पा करर मारता था कि देखने वालों की रूह कांप उठती थी पीड़ित को व्हील से बांधकर उस पर हथौड़े से तब तक प्रहार किया जाता था जब तक उसके शरीर की हड्डियां नहीं टूट जाती फिर मरने के लिए उसे छोड़ दिया जाता था
कभी पीड़ित को एक ऊंचे वेल पर रखा जाता था ताकि पक्षी उस हाथ और पैर टूटे हुए इंसान को जिंदा खा सके ऐसा भी कहा जाता है जिन पर दया आ जाती थी उनको छाती और पेट पर ही हथौड़े से प्रहार किया जाता था हालांकि पीड़ित को किसी भी हालत में जिंदा नहीं बख्शा जाता था दोस्तों इन सब सजा के बारे में आपकी राय क्या है कमेंट करके बताइए अच्छा हुआ हम उस दौर में नहीं है आपको क्या लगता है इस बारे में भी कमेंट करके बता दीजिए अगर आपको आज का वीडियो जरा सा भी
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