[संगीत] गंगापुर गांव में एक घर के आंगन में एक बकरी चमेली अपने घर में आराम से सो रही थी। उसके बच्चे भूख के मारे जाग गए और उन्होंने अपनी मां को जगाना शुरू कर दिया। वे बार-बार उसे आवाजें देने लगे कि हमें भूख लगी है। मां उठो। चमेली को यह बिल्कुल अच्छा नहीं लगा कि उसे इतनी सुबह जगाया जा रहा है और उसकी नींद खराब की जा रही है। उसने उन्हें सोने देने की जिद की लेकिन बच्चे जिद पर उतर आए क्योंकि उन्होंने पिछली रात भी कुछ नहीं खाया था। चमेली को अनचाहे ही उठना पड़ा।
वह बड़बड़ाती हुई कहने लगी कि यह बच्चे उसे चैन से सोने भी नहीं देते। जब उसने बच्चों से पूछा कि कल लाया हुआ खाना कहां गया? तो बच्चों ने जवाब दिया कि वे खा चुके हैं। यह सुनकर चमेली को गुस्सा आया और कहने लगी कि तुम्हारे पेट तो जैसे कुएं हैं जितना लाती हूं सब खा जाते हो। आखिरकार चमेली मजबूर होकर खेत में खाने की तलाश में निकल पड़ी। वह सोचती जा रही थी कि इन बच्चों ने तो नाक में दम कर रखा है। इन्हें क्या पता कि खाना लाने में कितनी मेहनत लगती है। चमेली
एक कामचोर और सुस्त बकरी थी। उसे दिन भर सिर्फ सोना पसंद था। पिछली बार जैसे तैसे जंगल से खाना मिल गया था। लेकिन अब वहां के जानवर उसे कुछ देने को तैयार नहीं थे। वह सोचने लगी कि अब खाना कहां से लाए। इतने में उसे दूर एक बड़ा सा बाघ नजर आया जिसमें बहुत सारे फलों के पेड़ थे। वह खुश हो गई और सोचने लगी कि चलो यहीं से कुछ फल ले लेती हूं। जैसे ही वह फल तोड़ने के लिए आगे बढ़ी, एक बैल ने उसे रोक लिया। बैल ने उसे बताया कि यह फल खैरात
में नहीं मिलते और अगर फल चाहिए तो कीमत देनी पड़ेगी। चमेली के पास पैसे नहीं थे। उसने बैल से रहम की अपील की और अपनी हालत बताई। बैल को उस पर तरस आया और उसने शर्त रखी कि अगर चमेली रोज बाग में पानी दे और रखवाली करे तो वह उसे रोज खाना दे सकता है। मगर चमेली ने काम करने से इंकार कर दिया और वहां से चली गई। आगे जाकर उसके पैर चलते-चलते दुखने लगे। वह थक चुकी थी और कहने लगी कि थोड़े से खाने के लिए कितना चलना पड़ता है। इतने में उसे दूर एक
इंसान का घर नजर आया जहां दो बकरियां आंगन में खड़ी घास खा रही थी। चमेली ने सोचा कि यह मेरी ही जात की बकरियां होंगी। यह जरूर कुछ खाने को देंगी। वह उनके पास पहुंची। मगर वहां भी उसे साफ जवाब मिला कि यहां मुफ्त में खाना नहीं मिलता। इन बकरियों को रोज मालिक को दूध देना पड़ता था। तब जाकर खाना मिलता है। इतने में घर का मालिक आया जिसका नाम हरिया था। उसने चमेली से पूछा कि वह कहां से आई है? चमेली ने बताया कि उसके बच्चे भूखे हैं। उसे खाने की जरूरत है। हरिया ने
भी शर्त रखी कि अगर वह दूध दे तो रोज अच्छा खाना देगा। मगर चमेली ने इंकार कर दिया और वहां से भी चलती बनी। थोड़ा आगे जाकर चमेली को एक खेत नजर आया। जो खाली था और वहां बहुत सारी फसलें थी। चमेली ने सोचा कि यहां से तो मुफ्त का खाना मिल जाएगा। उसने मौके का फायदा उठाया और खूब पेट भर के खाया और अपने बच्चों के लिए भी बहुत सारी फसल तोड़ ली। खाने के बाद वह एक पेड़ के नीचे सो गई। कुछ देर बाद खेत का मालिक चमन आया। उसने देखा कि उसकी फसल
किसी ने तोड़ी है। वह गुस्से से चमेली को पेड़ से बांध देता है और इल्जाम लगाता है कि उसने चोरी की है। चमेली रहम की अपील करती है मगर चमन का दिल नहीं पसीजता। वह घर के अंदर चला जाता है और चमेली तीन दिन तक भूखी प्यासी बंधी रहती है। उधर चमेली के बच्चे घर में बैठे अपनी मां का इंतजार कर रहे थे और सोचने लगे कि मां कहीं फिर सो तो नहीं गई। वे कहते हैं कि मां कितनी सुस्त और कामचोर है। शायद उसे हमारी परवाह नहीं मगर हमें उसकी फिक्र है। चलो हम उसे
ढूंढने निकलते हैं। उधर चमेली बहुत कमजोर हो चुकी थी। रात के वक्त एक चूहा उसके पास आता है जो उसे पहचान लेता है। चमेली उससे विनती करती है कि उसके बच्चों का हाल बुरा है। उसे आजाद कर दे। पहले चूहा इंकार करता है। लेकिन जब चमेली उसे गणपति बप्पा का वास्ता देती है तो वह रस्सी काटकर चमेली को आजाद कर देता है। चमेली फौरन अपने बच्चों के लिए खाना लेकर घर पहुंचती है। मगर बच्चे गायब होते हैं। वह घबरा जाती है और उनकी तलाश में निकल पड़ती है। कई घंटों बाद वह दोबारा उस बैल के
पास पहुंचती है जो बाग का मालिक था। वह बैल बताता है कि बच्चे दो दिन पहले उसके पास आए थे और अपनी मां के बारे में पूछ रहे थे। मगर जब बैल ने उन्हें बताया कि उनकी मां एक कामचोर बकरी है तो बच्चे शर्मिंदा होकर वहां से चले गए। चमेली रोती हुई बच्चों की तलाश में हर तरफ भटकती है और चलते-चलते हरिया के घर पहुंचती है। हरिया उसे पहचान लेता है और पूछता है कि वह फिर चोरी करने आई है। चमेली बताती है कि वह सिर्फ अपने बच्चों की तलाश में आई है। हरिया बताता है
कि वे तीनों बच्चे उसके पास भूखे प्यासे आए थे और उसने उन्हें खाना खिलाकर रुखसत किया। वह बताता है कि खाने के बाद वे अपनी मां की तलाश में निकले। मगर एक शेर ने उन्हें पकड़ लिया। यह सुनकर चमेली के होश उड़ जाते हैं और वह फूट-फूट कर रोने लगती है। उसे एहसास होता है कि बच्चों की मौत की जिम्मेदार वह खुद है क्योंकि उसने काम ना किया। सिर्फ आराम को तरजीह दी। अगर वह उस दिन बैल की बात मानकर काम कर लेती या हरिया की शर्त मान लेती तो उसके बच्चे आज जिंदा होते। वह
गमगीन होकर चमन के खेत में वापस जाती है और उससे कहती है कि वह उसे दोबारा पेड़ से बांध दे क्योंकि वह अब जीना नहीं चाहती। चमन यह सुनकर हैरान हो जाता है मगर उसकी सच्चाई सुनकर उसे तरस आता है और कहता है कि वह सजा नहीं देना चाहता। चमेली कहती है कि अगर सजा नहीं दी जाएगी तो वह खुद ही कहीं जाकर मर जाएगी। इतने में पीछे से बच्चों की आवाज आती है। चमेली पीछे मुड़कर देखती है तो उसके तीनों बच्चे जिंदा खड़े होते हैं। वह खुशी से बेहाल हो जाती है और उन्हें गले
लगा लेती है। बच्चों को बचाने वाला चूहा बताता है कि जब उसे पता चला कि बच्चों को शेर ने घेर लिया है तो वह फौरन पहुंचा और शेर को डराकर बच्चों को बचा लाया। चमेली हरिया से कहती है कि वह अब हमेशा उसके खेत में मेहनत करके अपने बच्चों के साथ रहना चाहती है। हरिया कहता है कि अब उसे यकीन हो गया है कि मेहनत करने वाला कभी भूखा नहीं मरता। चमेली के बच्चे भी खुश होते हैं कि उनकी मां को अब मेहनत कीमत समझ आ गई है। उस दिन के बाद से चमेली और उसके
बच्चे हरिया के खेत में मेहनत से काम करते हैं और खुशी-खुशी अपनी जिंदगी गुजारने लगते