[संगीत] आप सबका इस सेमिनार में स्वागत है आज का जो हमारा सेमिनार है वो स्ट्रेटेजी टॉक का एक हिस्सा है हिंदी माध्यम का परिणाम अंग्रेजी माध्यम की तुलना में थोड़ा सा खराब रहता है इस साल पहले से इंप्रूवमेंट है ठीक इंप्रूवमेंट है इसके बाद भी अभी उतना तो नहीं है जितना होना चाहिए और मेरी व्यक्तिगत राय हमेशा से ही रही है मैं सबसे कहता भी हूं कि अगर आपको आईएएस बनना है तो अगर कोई एक स्किल आपको चाहिए तो वह है केवल उत्तर लिखने के स्किल और मुझे ऐसे बहुत सारे एग्जांपल्स याद आते हैं जिन
लोगों ने अपने उस प्रयास में सफलता हासिल की जब उनकी पढ़ाई का स्तर बहुत ऊंचा नहीं था कम पढ़े उसके बाद भी सफल हुए और जब मैं सोचता हूं कि ऐसा क्यों हुआ तो मेरे पास कोई दूसरा उत्तर आता ही नहीं है ऐसे बहुत सारे आईएस टॉपर्स है उनकी प्रकृति से उनके अभ्यास से पढ़ाई करने की मात्रा से पढ़ाई करने की शैली से परिचित हूं और बहुत विश्वास के साथ यह बात कह सकता हूं कि अधिकांश टॉपर्स वो है जिनके पास सबसे बड़ा गुण लेखन शैली का था उनको यह पता था कि कैसे अपनी बात
को प्रस्तुत करना है देखिए परीक्षक आपको नहीं जानता उसकी आपको जानने में रुचि भी नहीं है है उसके पास तो आपका विजिटिंग कार्ड है आपकी उत्तर पुस्तिका आपकी उत्तर पुस्तिका से ही आपके पूरे व्यक्तित्व को समझेगा और इस परीक्षा में 2025 में से 1750 अंक आपके लिखे हुए पने हैं लेखन सुंदर होना चाहिए लेखन में प्रभाव ऐसा हो कि कोई परीक्षक आपका उत्तर पढ़े तो उसके मन में यह भाव है कि बस इसी बच्चे को ढूंढने के लिए सारा प्रपंच रचा गया था और वह आपको बहुत अच्छे अंक देके कम से कम उसकी तरफ से
आपके आईस बनने की बाए समाप्त हो जाए आगे तो ठीक है इंटरव्यू भी है बाकी पक्ष भी तो क्योंकि परीक्षक के लिए आप केवल एक उत्तर पुस्तिका है इसलिए सारा फोकस हमारा इस बात पर आज के सेमिनार में रहेगा कि आपकी उत्तर पुस्तिका ऐसी कैसे बने कि परीक्षक को रिलाइज हो कि इसी व्यक्ति को चुनने के लिए मुझे नियुक्त किया गया था आज आपको कुछ पेज मिले होंगे व पेजेस हम अपने सामने लगातार रखेंगे मैं सोच रहा था कि उत्तर लेखन को अमूर रूप में समझाना एक कमजोर बात है कि मैं आपसे कहूं कि ऐसा
लिखो वैसा लिखो रियल क्वेश्चन देखकर आपको जो समझ में आएगा उसकी बात अलग होगी यह सारे प्रश्न वही है जो पिछले तीन सालों में यूपीएससी में आए जीएस में और उनमें से भी चुन चुन के मैंने वो प्रश्न निकाले जो किसी ना किसी सेंस में थोड़े से चुनौती देने वाले प्रश्न है ऐसा नहीं कि मैं सारे प्रश्न करेंगे मैं जो भी बताऊंगा उसमें एग्जांपल के तौर पर इनमें से कोई प्रश्न लूंगा और आपसे कहूंगा कि इस प्रश्न के आलोक में इस बात को हम समझ सकते हैं तो सबसे पहला पक्ष मैं बता चुका हूं वो
ये कि उत्तर लेखन का महत्व इतना ज्यादा है कि आपकी सारी सफलता टिक इसी के ऊपर इससे अंतर इतना पड़ता है कि मतलब दो तरह के लोग अगर मैं आपको एग्जांपल देके बताऊं निशांत जैन को इतना ऊंचा रैंक मिला म लाख कारण आप सब उसके गिन लीजिए मुझसे जब जब पूछा जाएगा मैं निशान से भी कहता हूं सबसे कहता हूं कि सबसे बड़ा कौशल उसका लेखन कौशल है एक लड़का 36 रैंक आईस में पहले अटेंप्ट में और उसको खुद पर भरोसा नहीं था उसने मेंस देने के बाद तय किया कि विषय बदल के फिर तैयारी
करूंगा उसने हिस्ट्री और हिंदी साहित्य से 2008 में एग्जाम दिया जेएनयू से वो हिंदी साहित्य का विद्यार्थी था जब उसने दे दिया एग्जाम तो उसको लग रहा था कि मैं हिस्ट्री में बहुत अच्छा लिख नहीं पाया हूं मुझे भरोसा नहीं जम रहा मैं हिस्ट्री छोड़ के फिलॉसफी लेना चाहता हूं तब मैं फिलॉसफी पढ़ाई करता था उस समय उसने मेंस देने के बाद फिलॉसफी में एडमिशन लिया फिलॉसफी पूरा तीन महीने पढ़ भी लिया तैयार कर लिया उसके बाद मेंस का रिजल्ट आया उसने इंटरव्यू दिया इंटरव्यू उसका बहुत अच्छा नहीं हुआ संयोग से हुआ ये कि जो
इंटरव्यू बोर्ड के चेयर पर्सन थे बहुत आध्यात्मिक व्यक्ति थे उनको ईश्वर अध्यात्म बहुत रुचि थी वो हर उम्मीदवार से पूछते थे ईश्वर के बारे में उमीद और अध्यात्म के बारे में और जब कोई आध्यात्मिक बात करता था तो सुर से सुर मिल जाता था उन बहुत खुश होते थे यह जेएनयू से पढ़ा हुआ था जेएनयू में ह्यूमैनिटीज बैकग्राउंड में विचारधाराओं का जो असर है उसमें गैर आध्यात्मिक विचारधारा केंद्र में रहती थोड़ा बहुत वामपंथ का तड़का अंबेडकर वाद स्त्रीवाद यह सब मुद्दे वहां पर ज्यादा केंद्र में रहते हैं तो यह विद्यार्थी भी कुछ कुछ उस बट
ऑफ माइंड का था चेयर पर्सन ने पूछा अध्यात्म को ले दो चार सवाल पूछे ईश्वर को लेकर पूछे इसने खुल के कहा कि मेरे ईश्वर में कोई रुचि नहीं है क्या विश्वास करते हैं जी नहीं मेरा विश्वास है कि ईश्वर नहीं है ऐसी बातचीत हुई पा सा मिनट तक वो लगातार कोशिश करते रहे कि किसी तरह से मान जाए बच्चा लेकिन बच्चा माना ही नहीं बच्चा हड़ रहा अपनी बात उसने कहा है ही नहीं ईश्वर तो मैं क्यों मानू और जब उसको बाद में ये पता लगा कि बोर्ड के जो चेयर पर्सन थे वो ये
वाले सवाल इसलिए पूछते हैं क्योंकि उनकी बहुत ज्यादा रुचि है उन चीजों में तो उसने सिर पेट लिया और उसने कहा कि अच्छा हुआ विषय चेंज कर लिया अगली बार ठीक से दूंगा और सिलेक्ट हो जाऊंगा और जब रिजल्ट आया तो उसका 36 वा रंक आया उसी साल इंटरव्यू में बहुत अच्छे नंबर नहीं आए साधारण अंक आए लेकिन मेंस में उसने झंडे गाड़ दिए दोनों विषयों में 350 की रेंज उससे ज्यादा नंबर उसके आए और वह इसलिए आए क्योंकि उसको इस बात का एहसास नहीं था कि उसकी आंसर राइटिंग स्किल्स इतनी शार्प थी कि हिस्ट्री
के जिन प्रश्नों को लेकर उसको लग रहा था कि उसने बहुत अच्छे नहीं लिखे हैं वह प्रश्न उसने बाकी लोगों की तुलना में इतने अच्छे लिखे थे कि परीक्षक उसकी उस मौलिकता से प्रभावित हुआ और इतने सारे नंबर उसको देकर आईएस बना दिया म मैं ऐसे लोगों को जानता हूं जो कम पढ़े थे और आईएस बने हैं और ऐसे पस को जानता हूं जो खूब पढ़े और उसके बाद भी आईस नहीं बने और इन दोनों के बीच का जो गैप है अंतराल है मेरी राय में उस अंतराल का संबंध उत्तर लेखन क्षमता से है इसलिए
थोड़ा ध्यान से केयरफुल होकर सारी बातों को समझिए और फिर आज से ऐसा लिखिए कि कालिदास को लगे कि मैं सही देश में पैदा हुआ था मेरे देश का सिलेक्शन गलत नहीं था ठीक है ऐसा लिखेंगे तो सबसे पहली बात एक काल्पनिक से बात करते हैं अच्छा उत्तर कैसा होता है यह बात आपने खूब सुनी होगी कि उत्तर अच्छा होना चाहिए पर अच्छा उत्तर कैसा होता उसको पहचाने कैसे तो कुछ पांच छह कसौट पहले दिमाग में रखते हैं और फिर हम स्टेप बाय स्टेप हर प्रश्न पर बात करेंगे कि अच्छे उत्तर के लिए हमें क्या
क्या करने की जरूरत है जो अच्छा उत्तर लिखने के चैलेंज है उन सब चैलेंस को एक एक करके एग्जांपल लेकर सॉल्व करेंगे ताकि आपको उदाहरण के साथ समझ में आ कि कैसे मैनेज करना है देख अच्छे उत्तर में कुछ कसौट है सबसे पहली कसौटी अगर आप मुझसे पूछेंगे तो मैं कहूंगा अच्छे उत्तर में जो विस्तार है या उसकी जो परिधि है वह उपयुक्त होनी चाहिए तो पहले हम केवल पॉइंट नोट करते हैं फिर उसकी व्याख्या करेंगे कि इसका मतलब क्या हुआ क्या होना चाहिए कैसे होना चाहिए दूसरी बात मैं कह सकता हूं कि उसमें अनुपात
और संतुलन इन दो बातों का विशेष रूप से ध्यान रखा जाना चाहिए अनुपात का संतुलन का तीसरी बात एक अच्छा उत्तर हमेशा प्रामाणिकता से भरा उत्तर होता है ऑथेंटिसिटी से भरा होता है या ऑथेंटिक होता है प्रामाणिक होता है तीसरी बात उसम प्रामाणिकता होनी चाहिए और यह प्रामाणिकता कि हम प्रश्न लेंगे एग्जांपल लेकर समझेंगे उसको यह तीनों बातें उत्तर के कंटेंट को लेकर है कि उत्तर की विषय वस्तु क्या है आप उत्तर में क्या लिखने वाले हैं और जो बाकी बातें हैं उनका संबंध उत्तर के प्रेजेंटेशन से है और जब प्रेजेंटेशन की बात करेंगे तो
सबसे पहली बात है कि आपकी जो भाषा है वह कुछ गुणों से युक्त होनी चाहिए भाषा में कौन से गुण होने चाहिए लिस्ट बनाते हैं अभी और पांचवी बात भाषा के अलावा जो नॉन लिंग्विस्टिक प्रेजेंटेशन है तो इसको हम प्रस्तुतीकरण कह के भी काम चला लेते हैं प्रस्तुतीकरण की कुछ तकनीक आपके पास ऐसी हो जो आपके उत्तर को खतरनाक बना दे यह चार पा बात दिमाग में रखते हैं इनमें से एक को लेकर समझना शुरू करते हैं सबसे पहली बात है कि आपके उत्तर का विस्तार और परि उपयुक्त हो उपयुक्त का मतलब क्या हुआ देखिए
खराब उत्तर लिखने वालों में जो कमी होती है उसमें से एक कमी यह होती है कि पूछा क्या गया है उसको ठीक से समझे बिना वह कुछ ऐसी बातों को शामिल कर देते हैं जो नहीं पूछी गई है कभी-कभी पूरा उत्तर ही इस बात पर चला जाता है जो नहीं पूछा गया है क्योंकि एगजैक्टली वो समझ नहीं पा रहे कि उनके द्वारा लिखे जाने वाले उत्तर के प्रश्न की सही परिधि और सही विस्तार कितना था तो विस्तार और पध के मामले में सबसे पहला नियम है जो पूछा गया है वही लिखे इस वही को मैं
उद्धरण चिन्ह में लिख रहा हूं जोर देक लिख रहा हूं जो पूछा गया है वही लिखे और वही का मतलब है ना उससे कम ना उससे ज्यादा अब वही के दो मतलब ये है एक तो अनावश्यक बातें ना लिखें ऐसा लालच कई बार हो जाता है जैसे आपने एक टॉपिक को बहुत गहराई से पढ़ा बहुत ही गहराई से पढ़ा प्रश्न उसके बारे में आया किंतु उस कंटेक्सचर्स उस समय अपने मन पर कंट्रोल करना नियंत्रण रखना बड़ा मुश्किल काम होता है बेहद मुश्किल है जैसे आपने द्वितीय विश्व युद्ध का घटनाक्रम ठीक से पढ़ा हुआ है पहले
किसने किस पर हमला किया फिर क्या हुआ फिर क्या हुआ स्टालिन ने क्या किया हिटलर ने क्या किया अमेरिका कब कूदा इंग्लैंड का क्या रोल था जापान जर्मनी सब आपने रटा हुआ अच्छे तरीके से और आपको किसी अध्यापक ने बता दिया कि इस बार सेकंड वर्ल्ड वॉर पर प्रश्न आने की खतरनाक संभावना है इससे आपका उत्साह और बढ़ गया है प्रश्न आया लेकिन बदल के आ गया और प्रश्न यह पूछा है अगर आप प्रथम विश्व युद्ध के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति होते तो वैसा क्या करते कि दूसरे विश्व युद्ध की नौबत ना आती प्रश्न यह
पूछ लिया है अब आप यह भी नहीं कह सकते कि सेकंड वर्ड वर से नहीं आया सवाल सवाल तो आया है बस यह है कि सवाल में वोह मसाला काम नहीं आ रहा जो आपने याद कर रखा था आपने अच्छे से तैयार किया हुआ था कि सैंडविच बना दूंगा मखन लगा लगा के लेकिन मक्खन बेकार हो गया सड़ गया सारा का सारा अब ऐसे में कई बच्चे ना अपना वह लालच जोश उत्साह रोक नहीं पाते और 200 में से 150 शब्दों में बताते कि पहले यह जान लेना जरूरी है कि द्वितीय विश्व युद्ध में हुआ
क्या-क्या था 150 शब्द में वह सब बकवास लिखने के बाद फिर कहते हैं अब सवाल है कि मैं ऐसा क्या करता कि यह सब ना होता मैं आपसे कह रहा हूं बार-बार आपने विषय को जितना भी पढ़ा है यह मानकर चलिए कि परीक्षक से कम पढ़ा हुआ है अगर परीक्षक से कम पढ़ा है तो आपका लिखा हुआ कुछ भी उसको रोमांचित नहीं करने वाला और विशेष तौर पर तब जबक वो पूछा ही ना गया हो तब तो बिल्कुल रोमांचित नहीं करने वाला और इसका मतलब यह हुआ कि अगर आपने अच्छे से अच्छी बात उस प्रश्न
के उत्तर में लिखी जहां उसकी जरूरत नहीं थी तो वह अच्छे से अच्छी बात आपके लिए घातक है नुकसान दे है फायदेमंद नहीं है तो क्या लिखना है जो पूछा है सिर्फ उतना लिखना है और दूसरी बात है जो पूछा है उसमें से कुछ ना छूटे कभी-कभी क्या होता है कि प्रश्न के एक से ज्यादा संदर्भ होते हैं और हम प्रश्न के उन सारे संदर्भों को समझे बिना किसी एक संदर्भ को फोकस कर लेते हैं या किसी एक दो संदर्भों को छोड़ देते हैं उन पर चर्चा नहीं करते हैं इसको हम दर्शन की भाषा में
रीजनिंग या लॉजिक की भाषा में कहते हैं कि प्रश्न समझने की प्रक्रिया में या उत्तर लिखने की प्रक्रिया में ना तो अति व्याप्ति हो ना ही अव्यायाम है अभी अभ्यास करेंगे अभी तोक रेंडम सी बात में करना चाह रहा हूं समझ ले क्या क्या आपको ध्यान रखना है यह तो ई विस्तार और परिधि की बात दूसरी बात है अनुपात और संतुलन की बात देखि अगर प्रश्न ऐसा है जिसम एक ही बात पूछ गई है तब इसमें समस्या नहीं अगर प्रश्न ऐसा है जिसमें एक से ज्यादा पक्ष बनते हैं जो अच्छे प्रश्न है उनमें अक्सर दो
तीन चार पाच पक्ष बनते हैं उन सारे पक्षों पर आपको लिखना होता है अगर ऐसा प्रश्न है जिसमें एक से ज्यादा पक्ष हैं तो इनको हम कह लेते कि बहुपक्षीय जो प्रश्न है उन बहुपक्षीय प्रश्नों में ध्यान रखना कि आपके उत्तर में विभिन्न पक्षों में जो अनुपात प्रश्न की नेचर में है वही अनुपात उत्तर के नेचर में हो अनुपात प्रश्न की मांग के अनुसार हमसे जो मिस्टेक्स होती है उनमें से एक यह भी है कि एक पक्ष बहुत छोटा हो गया एक पक्ष बहुत बड़ा हो गया तो उससे उत्तर लंगड़ा सा लगता है ऐसा लगता
है कि एक तरफा झुका हुआ है सीधा चली पा रहा है क्योंकि परीक्षक ज्यादा जानना चाह रहा था यह वाली बात और आपने ज्यादा मात्रा में लिखी है दूसरे वाली बात तो फिर वो अंततः परीक्षक जो अंक देगा ना य एक मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया है परीक्षक को उत्तर पढ़ के अच्छा महसूस होना चाहिए और अच्छा महसूस होने में बहुत सारे पक्ष काम करते जिसमें एक पक्ष यह भी है कि जो वह जानना चाह रहा था वो उसे मिला या नहीं मिला ठीक से मिला या नहीं मिला असली बात केवल मनोविज्ञान इंटरव्यू की क्लास में कहता हूं
इंटरव्यू में नंबर लेना केवल मनोवैज्ञानिक मसला है अगर आप उस मनोविज्ञान को समझ जाएंगे जिस मनोविज्ञान से परीक्षक आपसे सवाल पूछ रहा है इंटरव्यू में तो आप अच्छे नंबर ले आएंगे ठीक यही बात मुख्य परीक्षा में अगर आप परीक्षक के मनोविज्ञान को कैच कर पा रहे हैं तो आपको सारी युक्तियां समझ में आ जाएंगी कैसे हम अच्छे नंबर ला सकते हैं तो अभी मोटी मोटी बातों में एक बात यह है कि आपके अनुपात और संतुलन बना रहे दूसरी बात यह केवल विस्तार पध के मामले में नहीं है अगर किसी प्रश्न में आपकी राय पूछी गई
है तो कभी भी अपनी राय देते हुए हमेशा ध्यान रखें कि सकारात्मकता और नकारात्मकता का या जो भी दो प्रश्न दो पक्ष हो सकते हैं उस राय के मामले में उनके बीच का संतुलन संतुलन का मतलब 50 50 नहीं होता है कि हमेशा बराबर की बात करेंगे जैसे यजी कोई आपसे कोई ऐसा सवाल पूछ ले क्या आपको लगता है कि भारत में संसदीय शासन से ज्यादा बेहतर अध्यक्ष शासन प्रणाली है अब इसमें आपको 5050 नहीं करना आपको संसदीय शासन पद्धति के पक्ष में करीब 70 75 प्र झुके होना है और 20 2 फीसद आपको अध्यक्षीय
शासन के अच्छे होने के बारे में बताना है पक्ष और विपक्ष की बात करते हुए एक संतुलन बना रहे एकदम एक तरफा ना हो जाए अगर आप ऐसा कर लेते हैं संतुलन साध लेते हैं तो इसका मतलब ठीक बात है आपके उत्तर के अच्छे होने का तीसरा और शायद इन की टक्कर का महत्वपूर्ण पक्ष है प्रामाणिकता देखिए प्रामाणिक व्यक्ति और एक अप्राम व्यक्ति में अंतर यही है मैं उत्तर लेखन के संदर्भ में बात कर रहा हूं दर्शन के संदर्भ में बात नहीं कर रहा हूं अगर आप कुछ क्लेम करते हैं तो उस क्लेम के पक्ष
में आपके पास प्रमाण होना चाहिए हवा में नहीं होना चाहिए जैसे अगर आप किसी की शिकायत भी करते हैं आप कह रहे कि मुझे यह व्यक्ति बहुत परेशान करता है तो राज्य यानी कि पुलिस आपसे पूछेगी प्रमाण दीजिए कुछ तो ऐसा दीजिए जिससे हमें लगे कि हा सच परेशान करता है फिर आप कहेगे देखिए मैं इसको जानता बुझता नहीं हूं और यह मुझे रोज मैसेज कर धमकी देता है यह देखिए इसके मैसेज आए धमकी है इसमें अने दूसरे व्यक्ति का मोबाइल नंबर चेक किया व उसी का नंबर है मैसेज उसी के नंबर से गया है
एक बारने 10 बार गया हुआ है तो एक बेसिक प्रमाण हो गया कि हां आरोप सही है फिर आप उस व्यक्ति से पूछेंगे आपका क्या जवाब है वो कहेगा कि इसका फोन चेक किया मेरा भी चक चेक कर लो मैंने 10 भेजे हैं उससे हर बार उससे पहले इसका मैसेज आया है और इसके तीन मैसेज आए उसके बाद जाकर मैंने एक भेजा बात पलट गई क्योंकि प्रमाण और बेहतर आ गए जब तक प्रमाण नहीं होगा आपकी बात में वजन नहीं होगा बात में दम नहीं होगा और हल्की बात करने से आईएस नहीं बन सकते हैं
कच्ची बातें मत कीजिए अगर आप भूगोल के विद्यार्थी है दो तीन बच्चों ने कहा कि मैं भूगोल विषय का विद्यार्थी हूं भूगोल में उत्तर कैसे लिखे दिक्कत है कि मैं भूगोल का विद्यार्थी नहीं हूं तो मैं कैसे बताऊ भूगोल का उत्तर कैसे लिखे लेकिन मेरी समझ है कि उत्तर लेखना अगर आपको एक विषय में आता है तो हर जगह ट्रांसलेट हो जाता है उसमें अंतर केवल ये होता है कि इस विषय में यह तो इस विषय में ये कांसेप्ट जो कांसेप्चुअल लेवल है आंसर राइटिंग का वह हर एक विषय में एक ही तरह से काम
करता है तो भूगोल के उत्तर में मेरा ख्याल है कि जब तक आप अगर भौगोलिक विशेषताओं को लेकर प्रश्न है या इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर है रिसोर्सेस को लेकर है जब तक आप नक्शे के साथ किसी बात को प्रेजेंट नहीं करेंगे तब तक लगेगा थोड़ ना कि भूगोल का विद्यार्थी लिख रहा है उत्तर हिंदी साहित्य के बहुत सारे विद्यार्थी मुझसे पूछते हैं पूछते हैं कि क्या हम किसी कवि के बारे में लिखते उसकी कविता का उल्लेख करें क्या ये जरूरी है तो मैं उनसे उत कहता हूं कि जरूरी नहीं है जरूरी तो आईस का एग्जाम देना
भी नहीं है क्यों जरूरी है कौन सी फांसी हो जाएगी आपको उसके बिना अब आप किसी कवि की विशेषता बता रहे हैं आप कह रहे हैं कि कबीर दास ने इन मुद्दों पर ऐसा विचार दिया था और विचार के नाम पर धेला भर आपके पास है नहीं लिखने के लिए कोई क्यों माने कि आपने ठीक से पढ़ाई की है आप संविधान की बात कर रहे हैं संविधान में एक आर्टिकल आपको पता नहीं है कैसे भरोसा करें आपके ऊपर कि आपने सच में पढ़ा है इसलिए जब भी कुछ कहे ठोस तरीके से कहे और ठोस तरीके
से कहने का मतलब है कि प्रमाण देकर कहे बस प्रमाण उतने ही आए जितना आपकी बात को साबित करने के लिए है इतने ज्यादा ना जाए कि प्रमाण प्रमाण देखे बात दिखे नहीं बीच में कई लोग इतने ज्यादा प्रमाण देना शुर कर देते हैं कोई मीनिंग स बात हो जाती है और प्रमाण का मतलब क्या है हर विषय में अलग-अलग जैसे पॉलिटी का आंसर लिखते हुए आप संविधान के किसी आर्टिकल या किसी एक्ट के किसी सेक्शन की बात कर सकते हैं कि भारतीय दंड संहिता की धारा 377 के अनुसार समलैंगिकता को अपराध घोषित किया गया
है अब जैसे आप यह वाक्य लिखेंगे और एक दूसरा वाक्य समलैंगिकता को दुनिया के कई देशों में अपराध माना जाता है अब भारत लिख क कंफर्म नहीं मानते कि नहीं मानते हैं ये जो गोल मटोल लैंग्वेज है ये काम नहीं करती स्पेसिफिक ठोस भाषा और उसके लिए जरूरी है कि प्रमाण आपके हाथ में फिर आप दिखाना चाह रहे हैं आईआर के पेपर में कि इजराइल और फिलिस्तीन का झगड़ा क्या है या भारत और चीन के बीच में अभी क्या झगड़ा चल रहा है जब तक आप वहां पर मैप बनाकर नहीं दिखाएंगे आप सोच के देखिए
कि आईआर के उत्तर में एक विद्यार्थी ने भारत चीन विवाद के संदर्भ में मैप बना के समझा दिया कि ये डिस्प्यूट है इतनी जमीन ये है इतनी जमीन ये है ये रेखा यहां से जा रही है ये रेखा यहां से जा रही है डिस्प्यूट यहां है दुनिया का कोई ऐसा परीक्षक नहीं है जो इस अदा से प्रभावित नहीं हो जाएगा उसको लगेगा कि इसने बात को ठीक से समझाया है और जो हवाई तरीके से लिख रहे हैं उनसे कैसे प्रभावित होगा परीक्षक इसी तरह से यदि आप दर्शन की बात कर रहे हैं एथिक्स की बात
कर रहे हैं और किसी महान विचारक का जिक्र करना है तो उस महान विचारक की किसी बात को कोटेशन के तौर पर या उसकी पुस्तक का नाम अगर आप एक वाक्य लिखते हैं कि डार्विन ने कहा है कि ऐसा ऐसा होता है और आप दूसरा लिखा डार्विन ने अपनी दूसरी पुस्तक द डिसेंट ऑफ मैन ब्रैकेट में 187 में लिखा है कि पर्यावरण के साथ हमारा संबंध इस तरह से काम करता है क्या आपको लगता है कि परीक्षक पर एक जैसा असर पड़ेगा असर पड़ जाएगा इस बार आप कितना सफाई से प्रभावित कर रहे हैं उसे
कि डार्विन ने अपनी दूसरी पुस्तक इसमें निहित कि आपको पता है कि दूसरी पुस्तक है पहली भी थी पुस्तक का नाम ब्रैकेट में कौन से वर्ष लिखी गई थी उसमें यह सिद्धांत प्रतिपादित किया तथ्यों की बर्ड मेंट नहीं करनी है बहुत तथ्य नहीं लिखने और आपके उत्तर में दो तीन चार ऐसे तथ्य आए जिनको पढ़कर यह एहसास हो कि आपने ठीक से मेहनत की है हसी मजाक में नहीं पहुंच गए मुख्य परीक्षा में और इसी तरह से कहीं कहीं ऐसा हो सकता है जैसे अगर आप साहित्य के विद्यार्थी हैं तो साहित्य में किसी कविता को
कोट करना हो सकता है किसी लिटरेचर के और किसी पीस को कोट करना हो सकता है जो भी आपका विषय है उस विषय के हिसाब से आप इसको देख ले बस ध्यान रखना इनकी भरमार ना हो यह उतनी ही मात्रा में हो कि आपके लिखे हुए को साबित कर पा रहे हो अगर उतना आप लिखते हैं तो परीक्षक की निगाह में आप बहुत प्रामाणिक अभ्यर्थी बन जाते हैं ऐसे ही अभ्यर्थियों की तलाश यूपीएससी कर रही होती भाषा कैसी हो भाषा को लेकर दो तीन बेसिक पॉइंट केवल समझेंगे अभी बाद में विस्तार में समझेंगे भाषा में
सबसे महत्त्वपूर्ण गुण होता है प्रवाह मतलब जैसे मैं कहता हूं ना कि उत्तर लेखन सबसे महत्त्वपूर्ण है मुझसे कोई पूछे कि उत्तर लेखन की इन सारी बातों में सबसे महत्त्वपूर्ण क्या है तो थोड़ा मुश्किल होगा मेरे लिए कि मैं पहले वाले को काउंट करूं या प्रमाण को काउंट करूं या प्रवाह को काउंट करूं लेकिन बहुत नजदीकी संघर्ष में अंततः शायद मैं प्रवाह को नंबर एक पर रखूंगा नजदीकी संघर्ष है एक तरफा नहीं पर मैं अपनी राय अगर बताऊंगा तो मेरे ख्याल से प्रवाह नंबर एक पर है क्योंकि मैंने ऐसे कुछ उत्तर पढ़े हैं अगर लिखने
वाले की भाषा में प्रवाह हो तो कभी-कभी वह प्रवाह में परीक्षक को इस तरह से बहा के ले जाता है कि परीक्षक यह भी भूल जाता है कि उत्तर उस प्रश्न का है ही नहीं पूछा गया था वो खो जाता है क्या लिखा है वाह और नंबर दे देता है उसको बाद में रिलाइज होता है रात को सोते हुए सपने में आता है कि अरे वो तो उस प्रश्न का उत्तर था ही नहीं और तो नंबर दे चुका हूं अगर प्रवाह आपके पास है प्रवाह का मतलब बहते हुए पढ़ा जाए एक एक शब्द में आपस
में लिंक हो एक एक वाक्य में लिंक हो हर वाक्य पढ़ते हुए लगे कि पिछले वाक्य का रिजल्ट है और अगले वाक्य की भूमिका है अगर ये प्रवाह आपके उत्तर लेखन में प्रवाह कैसे आता है बात हो उस लंबी बात होगी लेकिन सबसे पहला गुण है प्रवाह दूसरा गुण है यथा संभव शुद्धता इस बात को लेकर लोग बड़े नाराज हो जाते हैं कई बच्चे पूछते क्या शुद्ध हिंदी लिखना जरूरी है शुद्ध भी नहीं बोलते कम वक्त क्या शुद्ध हिंदी लिखना जरूरी है बो शुद्ध नहीं लिखना जरूरी है शुद्ध लिखना जरूरी है अ कई लोग तो
गौरव से कहते हैं कि मैं शुद्ध हिंदी नहीं लिख पाता हूं क्या इससे फर्क पड़ेगा गलत फहमी है कई लोगों को ये गौरव का भाव लगता है कि मैं शुद्ध हिंदी नहीं लिख पाता हूं तो हिंदी माध्यम क्यों चूज किया था अंग्रेजी कर लेते अच्छा वो अशुद्ध भी नहीं लिख पाते हैं इसमें तो शुद्ध में दिक्कत है तो जो भी माध्यम है आपका जो भी भाषा आप लिख रहे हैं कहने कहने को कुछ लोग कहते हैं कि साहित्य को छोड़कर बाकी विषयों में फर्क नहीं पड़ता कि आपकी भाषा शुद्ध है या नहीं ये कहने की
बात है और अनुपातिक अर्थ में बात सही है कि साहित्य के विद्यार्थी के लिए भाषा थोड़ी और शुद्ध हो साफ सुथरी हो यह अपेक्षा रहती है ठीक बात है कि भूगोल का विद्यार्थी लोक प्रशासन का विद्यार्थी अगर थोड़ा बहुत शब्द गड़बड़ करेगा तो परीक्षक शायद बुरा ना माने और इसमें जो अजमन है वह यह कि लोक प्रशासन भूगोल का परीक्षक भी शायद थोड़े बहुत शब्द गलत लिखता होगा संभवत है ऐसा मान लेते हैं पर मैं दावे से आपसे कह रहा हूं कि अगर आप आसान किस्म के शब्दों को गलत लिख रहे हैं तो परीक्षक किसी
भी विषय का हो उसका मिजाज बिगड़ जाता है और यदि उसका मिजाज बिगड़ा तो फिर ऐसा नहीं है कि आपके नंबर नहीं कटेंगे और शुद्ध लिखने का मतलब दोनों अर्थों में ना ग्रामेटिकल मिस्टेक्स हो ना स्पेलिंग मिस्टेक और जो विद्यार्थी आमतौर पर करते हैं वह वर्तनी के मिस्टेक्स ज्यादा करते हैं वर्तनी यानी स्पेलिंग स्पेलिंग मिस्टेक्स कई बार इतनी ज्यादा होती है कि पढ़ते हुए ना हर पांच छ शब्दों के बार में किसीने खरोच लगा दी हो इतना खुच परीक्षा के दिल को तो कैसे आपको अच्छे नंबर मिलेंगे और सही भाषा हो तो पढ़ते हु बड़ा
सुख महसूस होता है कि कितना प्यारा लिखा है और कुछ लोग व्याकरण में गलती करते हैं जैसे वाक्य रचना में मिस्टेक करते हैं वाक्य शुरू कहां से हो रहा है वाक्य खत्म कहां हुआ कोई बीच में लिंक नहीं बन रहा है भारत के स्वाधीनता संघर्ष में महात्मा गांधी और नेहरू जी जी का विवाद हो गया हूं अगर आप ऐसा वाक्य लिखेंगे शुरू कहां से हुआ खत्म अचानक कहां हो गया कोई लिंक समझ में नहीं आ रहा तो परीक्षा क्यों प्रभावित होगा लंबे वाक्य लिखिए उसमें दिक्कत नहीं ऐसा आपसे कोई नहीं कहेगा कि लंबा वाक्य मत
लिखिए बस लंबा वाक्य लिखिए जब लंबे वाक्य की जरूरत हो और उसको आप एक प्रवाह में लिख ले जिनकी भाषा में प्रवाह है वो लंबा वाक्य ही ज्यादा अच्छा लिखते हैं छोटे वाक्य की तुलना में इसलिए लंबे वाक्य से परहेज मत कीजिए लेकिन उस ठीक तरीके से लिखिए और भाषा में तीसरी बात है आपकी शब्दावली शब्दावली के बारे में पहली बात है कि थोड़ी प्रांजल शब्दावली होनी चाहिए प्रांजल का मतलब है साफ सुथरी सी साफ सुथरे शब्दों का प्रयोग करें जो डिसेंट किस्म के शब्द है हल्के शब्द ना लिखे दूसरा एक भाव मन में य
आता है कि शब्दावली में हम कैसी शब्दावली इस्तेमाल करें जैसे एक शब्दावली थोड़ी उर्दू फर्स प्रधान शब्दावली होती है एक होती थोड़ी संस्कृत निष्ठ शब्दों वाली शब्दावली तत्सम शब्द इनको बोलते हैं आप समझ रहे इस बात को जो मैं आपसे कहना चाह रहा जैसे वजीर आजम साहब के मिजाज नासाज है एक यह तरीका होता है कहने का और दूसरा द प्राइम मिनिस्टर इज नॉट फीलिंग गुड वही बात कही है कुछ और नहीं कहा है प्रधानमंत्री जी का स्वास्थ्य अच्छा नहीं है तीनों बातें एक जैसी है अब क्योंकि हिंदी माध्यम में तो इंग्लिश वा चलेगा नहीं
बिल्कुल भी चलेंगे पहले दो म पहला और तीसरा इनम से कोई तोम से कौन सा ठीक है शब्द चयन आपके लिए सिविल सेवा परीक्षा में वजीर आजम साहब कई मुल्कों की तफरी पर गए हैं या प्रधानमंत्री जी कई देशों की यात्रा पर गए हैं प्रधानमंत्री कई देशों की यात्रा पर गए देखिए पहली बात तो है कि उर्दू फारसी शब्दावली से बचिए जी मत बचिए सिविल सेवा परीक्षा में बचिए जीवन में इसके बहुत फायदे हैं जहां आपने तीन चार वाक्य ठीक से बोल द एक दो गजल सुना दी तो शायद वो आपको उपलब्ध हो जाए जिसके
लिए आप लंबे समय से प्रयास कर रहे हैं तो जीवन में तो इसके फायदे बहुत सारे हैं अच्छे शेर याद कर लीजिए सुना दीजिए उसमें थोड़ा उच्चारण में नक्तो का ध्यान रखिए उससे अदा आती है और उस अदा के फायदे मिलते हैं जीवन में वहां अगर आपने ऐसा सुना दिया संस नि टाइ का तो बात बिगड़ जाएगी वहां पर तो आप समझ पा रहे हैं मैं क्या कहना चाह रहा हूं जीवन में उर्दू फारसी चलाइए परीक्षा में चलाइए संस्कृत निष्ठ हिंदी क्योंकि जो परीक्षक है इसकी वजह सिर्फ इतनी है कि उर्दू फारसी वाली जो हिंदी
है अब तक वो ऑपचारिक भाषा के रूप में स्वीकृत नहीं हो पाई है क्योंकि जहां जहां उर्दू माध्यम के विद्यार्थी हैं वहां भी बहुत सारे शब्द विकसित हुए नहीं तकनीकी शब्द विकसित नहीं हुए तो एक ऐसा माहौल है कि अगर आप हिंदी माध्यम में तो आपसे परिष्कृत हिंदी और परिष्कृत में भी थोड़ा तत्सम हिंदी की डिमांड परीक्षक के मन में रहती है इसका मल य नहीं कि बहुत मुश्किल हिंदी लिखनी है आसान भाषा लिखिए लेकिन जब भी आपको शब्दों का चयन करना हो तो उसमें कोशिश कीजिए कि आप थोड़ा सा तत्सम शब्दों को प्राथमिकता प्रदान
करें तो प्राथमिकता जैसे शब्द है तत्सम है यह यूपीएससी में अच्छा माना जाएगा और परीक्षक आमतौर पर यूपीएससी में वही है जो उस दौर से गुजरे हैं जिस दौर में तत्सम हिंदी को बेहतर माना जाता था तो उनका माइंडसेट वैसा है कि उन तत्सम हिंदी ज्यादा अच्छी लगती है और यह मैं अपनी राय नहीं बता रहा हूं यह मैं बता रहा हूं बहुत सारे विद्यार्थियों की सफलता विफलता की यात्रा को देखकर जिनकी भाषा में थोड़ा सा तत्सम टच ज्यादा था उनको कुछ अवैध अंक अतिरिक्त रूप से मिले हैं फायदे में तो फायदा आपको भी नसीब
हो नसीब नहीं हो आपको भी उपलब्ध हो क्योंकि नसीब हो हासिल हो उससे फिर वो मामला वैसा होता है कुछ शब्द जो रोजमर्रा के जीवन में आ चुके हैं उसमें तनाव नहीं लेना है जैसे रोजमर्रा ठीक है हम ये नहीं कहेंगे दिन प्रतिदिन के जीवन में जो शब्द प्रचलित हो चुके हैं रोजमर्रा की जिंदगी में जो शब्द हमारे काम में आते हैं वह शब्द ठीक है य ठीक है सामान्य भाषा लिखिए लेकिन सामान्य में जहां जहां चयस हो विकल्प हो चयन की सुविधा हो थोड़ा सा तत्सम में हिंदी का प्रयोग ज्यादा कीजिए तो आप पाएंगे
कि उसका फायदा आपको तुरंत मिलना शुरू होगा तो दूसरा मैंने संकेत कर दिया तत्सम हिंदी तीसरी बात है कि अंग्रेजी अच्छा तत्सम पर आसान पर सरल तनाव पैदा नहीं करना है कि इतनी मुश्किल भाषा लिख के आएगी परीक्षक डिक्शनरी खोल के बैठ गया उसके बाद ऐसा नहीं करना है आसान किंतु तत्सम की र थोड़ा सा झुकाव रहे इतना ही करना है तीसरा है कि अंग्रेजी शब्दों का प्रयोग करें या ना करें इसमें कहीं कोई समस्या आप धूमधाम से अंग्रेजी शब्दों का प्रयोग कर सकते हैं जीएस में कई बार ऐसा होता होगा कि आपको अंग्रेजी का
शब्द पता है हिंदी का नहीं पता है हिंदी का पता भी है तो आपको भरोसा नहीं है कि परीक्षा को पता होगा या नहीं वाला आपको तो पता है आज मैं ऐसे कुछ प्रश्न लाया हूं जैसे अगर आप पहला ही पेज देखें 2015 में जो पहला प्रश्न है अगर यह अंग्रेजी में प्रश्न ना होता साथ में तो मैं तो नहीं समझ पाता इसका मतलब क्या है जबकि मैं हिंदी माध्यम का विद्यार्थी रहा हूं हिंदी साहित्य पढ़ता पढ़ाता रहा हूं अप सारी उपागम और रणनीतियों के बावजूद महात्मा गांधी और बी आर अंबेडकर का दलितों की बेहतरी
का एक समान लक्ष्य था अब मुझे दिक्कत यह होती है कि यूपीएससी के लोग अनुवाद करवाते मंगल ग्रह से पृथ्वी से नहीं करवाते हैं जबकि पृथ्वी पर भी अच्छे ट्रांसलेटर्स मौजूद है पर जानबूझ के मंगल ग्रह भेजते हैं ताकि ऐसा अनुवाद होके आए इसमें क्या समस्या है यह अपसारी उपागम पता नहीं आप शायद समझते होंगे मैं तो नहीं समझता हूं जब तक मैं अंग्रेजी में डायवर्जेंट स्ट नहीं पढ़ लूंगा तब या अप्रोच नहीं पढ़ लूंगा मैं नहीं समझ पाऊंगा डायवर्जेंट का मतलब है जिनम डाइवर्सिटी हो विभिन्नता हो विपरीत हो और अप्रोच को दृष्टिकोण भी कह
सकते हैं उपागम ही क्यों कहा जाए इतना किताबी अनुवाद क्यों किया जाए तो मैं इसको लिखना पसंद करता कि विभिन्न दृष्टिकोण या भिन्न दृष्टिकोण और रणनीतियों के बावजूद और आगे देखिए कमाल मंगल ग्रह के प्राणी जोली कमाल कीया है वो क्या है अंग्रेजी में लिखा है हैड ए कॉमन गोल ऑफ अरेशन ऑफ द डाउन ट्रोड डाउन ट्रोड का अनुवाद किया गया है दलित डाउन ट्रोड का मतलब है जो भी समाज में किसी भी रूप में पीछे रह गया हो वंचित डिप्राइव्ड जो कमजोर है वो प्रश्न है कि दृष्टिकोण अलग थे रणनीतियां अलग थी किंतु वंचितों
को समाज में बेहतर स्थान दिलवाने को लेकर दोनों की कमिटमेंट बराबर थी और हो गया हिंदी में अपसारी उपागम और काफी कुछ के बाद दलितों के उत्थान का दलितों की बेहतरी का एक समान लक्ष्य था तो यह सब संकट है यूपीएससी में इसलिए मैं हिंदी माध्यम से कहता हूं कि वह अंग्रेजी के प्रश्न को भी एक बार हल्का सा देख जरूर ले क्योंकि परीक्षक ने हो सकता है उस ग्रह की आबोहवा के हिसाब से अनुवाद किया हो इस ग्रह पर उसका अर्थ कुछ और चलता हो तो वो थोड़ा सा देख लेना है सवाल है कि
अंग्रेजी के शब्दों का प्रयोग हम कैसे करें कितनी मात्रा में करें दो स्थितियां हो सकती है एक तो यह कि आपको हिंदी में आता है लेकिन आपको डर है कि वह परीक्षक ठीक से समझेगा या नहीं आप अंग्रेजी में भी लिखना चाह रहे हैं तो इसका मतलब है कि आप अंग्रेजी में ब्रैकेट में किसी शब्द का प्रयोग करना चाह रहे हैं तो इसमें तो कोई दिक्कत है नहीं आप जब जब हिंदी में कोई तकनीकी शब्द लिखें अगर आपको लगता है कि परीक्षा को दुविधा हो सकती है आप ब्रैकेट में अंग्रेजी में रोमन लिपि में वो
शब्द लिख सकते हैं कोई भी ऐसा शब्द ले सकते हैं जो भी टेक्निकल शब्द है तकनीकी शब्द है उसका प्रयोग इस तरह से आप करले जैसे आप कह कि पितृ सत्ता ने स्त्रियों के जीवन में बहुत से संभावनाओं को निषेध किया है अब पितृ सत्ता हिंदी में प्रसत शब्द है लेकिन ऐसा हो सकता है कि कोई अंग्रेजी पढ़ने समझने वाला व्यक्ति पेट्रिया की समझता है उस कांसेप्ट को समझता है पर पेट्रिया की के लिए हिंदी में पित सत्ता चल रहा शायद उसकी वहा तक पहुंच ना हो तो जब पहली बार आपने लिखा पितृ सत्ता ब्रैकेट
में लिखिए पेट्रिया की उसके बाद हर बार पि सत्ता लिखिए फिर पटिया की मत कीजिए क्योंकि परीक्षक को एक बार बस पता लग जाए कि आप इस शब्द का प्रयोग इस संदर्भ में कर रहे हैं और उसके बाद उसके दिक्कत है नहीं कभी कभी यह भी हो सकता है कि आपको लगे पितृ सत्ता क्यों लिख पेट्रिया की ही क्यों ना लिख दो तो आप देवनागरी लिपि में अंग्रेजी के शब्द को सीधा का सीधा लिख के काम चला सकते हैं आप ऐसे लिखें पेट्रिया की ने भारतीय समाज में महिलाओं की स्थितियों को काफी कमजोर किया है
ऐसा लिख के आ जाइए और ऐसा धूमधाम से लिखिए मतलब इसके लिए ना ब्रैकेट की जरूरत है ना किसी और चीज की आप सीधे अपने फ्लो में ही इन शब्दों का प्रयोग करें ज्यादा से ज्यादा सावधानी बरतने के लिए ऐसे शब्द को उदाहरण चिन्ह में लिखें सिंगल जो कोमा होता है जैसे इसमें लिखा हुआ है एकल उदाहरण चिन्ह में लिखें इसका मतलब आपने स्पेसिफाई कर दिया कि यह शब्द मैंने किसी और भाषा से लिया है जानबूझ के ऐसा लिख रहा हूं क्योंकि अनुवाद से वह मर्म नहीं आ पा रहा जो मर्म मुझे इसका व्यक्त करना
है इस तरह से लिखने में कोई समस्या नहीं कभी-कभी ऐसा हो सकता है कि आप अंग्रेजी का शब्द लिखना चाहे रोमन लिपि में ही लिखना चाहे और उसका हिंदी अनुवाद ना आता हो तो बिना ब्रैकेट के ही लिखना चाहे और आप कहना चाह रहे हैं कि पेट्रिया की ने भारत के ऐसे करके लिखना चाह रहे हैं यह भी असंभव नहीं कभी कभार कर लीजिए कोई दिक्कत नहीं पर कभी कभार जैसे एक पूरे प्रश्न में आपने एकद जगह ऐसा किया कोई परीक्षक बुरा नहीं मानेगा परीक्षक इतने मनहूस नहीं है कि व ढूंढ रहे कहां इसके नंबर
काटे ऐसा नहीं होता है परीक्षक चाह रहे हैं कि आपका मूल्यांकन करें और यदि एक शब्द तकनीकी शब्द आपने अंग्रेजी में लिख दिया इससे उनको फर्क नहीं पड़ता है वो बस देखेंगे कांसेप्ट कितना स्पष्ट है कितने अच्छे तरीके से आप बात कह पा रहे हैं इतना ही जब तक उनको शक ना हो जाए कि इसका मीडियम हिंदी है कि अंग्रेजी हो गया समझ नहीं आ रहा है तब तक कोई दिक्कत नहीं तो आप एक बार दो बार एक उत्तर में अंग्रेजी शब्दों का प्रयोग रोमन लिपि में करेंगे तब भी दिक्कत नहीं है ऐसा कर सकते
हैं उससे ज्यादा करने से बचिए यह हुआ शब्दावली का मसला अंतिम बात है प्रस्तुतीकरण प्रस्तुतीकरण का मतलब यह है कि परीक्षक को आपका उत्तर दिखे कैसा उत्तर है कैसा अलग बात है जैसे होता है ना कि इंसान है कैसा बात की बात है इंसान दिख कैसा रहा है पहले तो वो बात है सूरत और सीरत में ज्यादा महत्व सीरत का है पर पहले क्या सामने आता है सूरत और जिस व्यक्ति से लंबी बातचीत ना हो अंत में भी सूरत ही रहती है किसी को आपने देखा देखते रहे और वो चला गया सीरत आई ही नहीं
जीवन में कभी आपके सामने सूरत य सरत चली गई सूरत प आप मुग्ध होकर गाना गाते रहे ड्रीम गर्ल ड्रीम बॉय गाना गा रहे हैं क्योंकि आपने केवल सूरत देखी सीरत का नंबर आया ही नहीं बात नहीं हुई तो जब आपकी उत्तर पुस्तिका खुलेगी ना मैं अपने अनुभव से बता रहा हूं मैंने मतलब हजारों की संख्या में उत्तर चेक कि है यूपीएससी के लिए क्योंकि मेरा रोजगार ही ये है कुछ करना होता है और मेरे पेरेंट संयोग से विश्वविद्यालय में पढ़ाते रहे हैं तो वो भी उनके भी जीवन का एक बड़ा हिस्सा उत्तर पुस्तिका चेक
करने में गुजरा है घर मेंही चेक करते थे मैं देखता था कैसे चेक करते हैं तो मैंने पाया कि मिजाज हर परीक्षक का एक जैसा होता है अब जैसे मेरा हो गया पहले उनका हुआ करता था अगर उत्तर दिखने में सुंदर है तो मन करता है कि पढ़े इसको ठीक वैसे ही यदि कोई व्यक्ति दिखने में कैसा है लुभावना है लुभावना भले ना हो लेकिन कम से कम ठीक है प्रेजेंटेबल है कम से कम तो आपका मन होगा कि इससे बात की जाए या अगर वो आपसे बात करना चाह र आपका मन होगा चलो बात
कर ले अगर दिखने मेंही भुतहा टाइप का लग रहा हो मान और और भुतहा इसलिए नहीं कि उसको सहयोग से प्रकृति ने ऐसा बना दिया है उस सस में नहीं अगर आपको यह लगे कि उसके भुतहा होने में उसी का रोल ज्यादा है प्रकृति का नहीं है ईश्वर की मिस्टेक नहीं है उसका अपना रोल ऐसा है झाड़ झड़ बढ़ा के एकदम घूम रहा है और आपको लग रहा है कि मैं चिड़ियाघर में हूं या मैं बाहर हूं आदि मानव टाइप का लग रहा है बन मानुष बन के कोई आ गया उसके विचार हो सकता है
बहुत महान टाइप के हो लेन विचार तो दो चार पाच मिनट के बाद आएंगे उससे पहले तो बदबू आएगी और आप वो बदबू दे के ही भाग जाएंगे तो बात कैसे बढ़ेगी आगे इसलिए सुदर्शन व्यक्तित्व जैसे जरूरी होता है साफ सुथरा सा दिखे उसके बाद आपके अंदर उत्साह बढ़ता है जिज्ञासा बढ़ती है उत्सुकता बढ़ती है कि इसे और जानते हैं ठीक वैसे अगर उत्तर आपका सुदर्शन है दिखने में सुंदर है तो परीक्षक के मन में उत्साह आता है कि लगता है अच्छा लिखा होगा इसे पढ़ा जाए और यदि आपकी हैंडराइटिंग ऐसी है कि सिंधु घाटी
के बाद आपका ही नंबर आने वाला है इसको पढ़ने के लिए परीक्षक रात दिन एक कि हु और पढ़ नहीं तो फिर आप मान के चलिए परीक्षक सिर दर्द की दवाई खाता है बहुत स्ट्रांग चाय पीता है उसके बाद और जितना ना नुकसान करता उना नुकसान हिसाब तो बराबर करेगा किसी से किससे करेगा हिसाब बराबर आपसे ही करेगा मैं तो क्या करता थाब बहुत गंदी हैंडराइटिंग का उत्तर होता था ना उसको लास्ट में रखता था सबसे अंत में अच्छी हैंडराइटिंग वाला है चेक किया अच्छे से किया मैं बहुत तटस्थ होने का प्रयास करता हूं और
मैं उस प्रोसेस को समझने में रुचि रखता हूं कि व्यक्ति तटस्थ कब नहीं रह पाता है जब हम इंटरव्यू का बोर्ड बिठाते हैं तो उसमें पांच मेंबर्स बैठा करते थे कुछ साल पहले की बात कर रहा हूं चार मेंबर्स कौन होते थे कोई विश्वविद्यालय का प्रोफेसर सीनियर प्रोफेसर है कोई भारत सरकार में एडिशन सेक्रेटरी सेक्रेटरी सीनियर आईएस ऑफिसर और सीनियर प्रोफेसर्स और पांचवा मैं बैठता था मैं इसलिए कि मैं कोऑर्डिनेट करता था दृष्टि की तरफ से सवाल वो लोग ज्यादा पूछते थे मेरी ज्यादा रुचि थी मूल्यांकन करने में कहां कहा कोई बच्चा मिस्टेक कर रहा
है तो बहुत ध्यान से ऑब्जर्व करता था कि वह लोग कहां-कहां सब्जेक्टिव हो रहे हैं तो मैंने उनसे बाद में कहा भी शर्माने लगे इस बात को सुनके मैंने अक्सर पाया अक्सर मैं ऐसे ही कह रहा हूं मैंने हमेशा पाया दरअसल हमेशा मैंने हमेशा पाया कि सुंदर दि वाले व्यक्तियों को उन सबने हमेशा ज्यादा नंबर दिए जब तक कि उस व्यक्ति ने खुद अपना कवाड़ा ना किया हो अगर कोई सुंदर दिखता है और मैं इसमें जेंडर को भी शामिल करके बोल रहा हूं मैं उसे खारिज नहीं कर रहा मैं इसको बिल्कुल खारिज नहीं कर रहा
हूं मैं कर भी नहीं सकता हूं इस बात को खारिज क्योंकि मनोविज्ञान जो है ना मनोविज्ञान के सब बंदी है मनोविज्ञान के सब क्या है उसके शिकार है अगर बोर्ड मेंबर्स पांच या चार पुरुष बैठे हैं तो स्वाभाविक है कि थोड़ा बेनिफिट मिल सकता है किसी फीमेल कैंडिडेट को इसका रिवर्स भी हो सकता है अगर पांच स्त्रियां बोर्ड में बैठी है और एक स्मार्ट सा पुरुष इंटरव्यू देने गया है तो तो संभावना बनती है कि 10 12 नंबर तो एक्स्ट्रा मिल जाएंगे इस भाव से कि है तो सुंदर कुछ भी कहो ये भाव तो ये
भाव चेतन मन में नहीं होता अब चेतन अचेतन में रहता है पर मूल्यांकन की प्रक्रिया में अचेतन वाला भाव ठीक ठाक काम करता है ऐसा असर पैदा करता है मैंने फील किया कि एक सुंदर व्यक्ति ठीक ठाक उत्तर देकर वैसे नंबर ले रहा है जितना एक कम सुदर्शन व्यक्ति बहुत अच्छे उत्तर देने के बाद ले पा रहा है मैं उनसे पूछा बाद मैंने ऐसा क्यों हो रहा है कि उसको आपने खुद कहा कि ठीक ठाक है और नंबर दिए इतने सारे इसके बारे में आपने कहा कि बहुत अच्छा है लेकिन नंबर इतना ही दे रहे
हैं तो मुस्कुरा के चुप हो जाते थे उनसे क्या बोलता बोले वहां भी ऐसे ही होता है यूपीएससी में भी ऐसे होता है बो मुझे चुप करने के लिए बोला वहा भी ऐसे होता है मैं चुप हो गया पर उत्तर चेक करते हुए मैंने इसको खुद महसूस किया कई बार कि हैंडराइटिंग अगर अच्छी है तो मेरे हाथ से दो तीन नंबर फिसल ही जाते हैं और हैंडराइटिंग खराब हो तो हिसाब बराबर किए बिना मन नहीं मानता है एक तो उसको अंत में रखता हूं लास्ट में जब तीन चार छटे हु उतर रह जाते फिर उनको
निकालता हूं जब कोई चारा नहीं बचता है फिर बहुत दुख के साथ उनको पढ़ता हूं तनाव लेकर पढ़ता हूं और अंत में एक खास तरीका अपना लेता हूं कि दो तीन लाइने पढ़ी बाकी अनुमान कर लिया और नंबर दे दिए यह तरीका यूपीएससी भी करती है सारी जगह होता है यूपीएससी के बहुत बहुत नामी परीक्षक है नामी अध्यापक है आपने उनकी किताबें पढ़ी है बहुत प्रसिद्ध व्यक्ति मैं नाम नहीं बोलूंगा क्योंकि कॉन्फिडेंशियल मामला है वो कॉपी चेक करते हैं तो मैंने एक बार उनसे पूछा कि आप कॉपी चेक करते हु क्या क्या ध्यान रखते हैं
उन्होंने कहा कि रेयरली ऐसा होता है कि मैं उत्तर पढ़ता हूं ये उनका पहला वाक्य था रेयरली ऐसा होता है कि मैं उत्तर पढ़ता हूं मैं उत्तर तभी पढ़ता हूं जब किसी में दम हो की उत्तर पढवा ले मुझसे तो बो 10 20 30 कॉपीज में से एकत कॉपी ऐसी होती है जो मुझे मजबूर करती है कि मैं उत्तर पढ परना मैं नहीं पढ़ता हूं तो मैंने फिर बिना पढ़े कैसे मतलब अकड़ बकड़ बबे ऐसे नंबर देते हैं कैसे नंबर देते हैं कोई तो तरीका होगा बोले हा तरीका है हर उत्तर पुस्तिका का पहला उत्तर
पढ़ता हूं और यह मान के चलता हूं कि वो उसका बेस्ट लेवल है आजकल तो व तरीका संभव नहीं रहा पहले तो यह था कि आप क्रम बदल सकते थे उत्तरों का तो हर व्यक्ति अपने सबसे अच्छा उत्तर सबसे पहले लिखता था बोले मुझे लग जाता था कि य इसका बेस्ट लेवल है और मैंने अनुमान कर लिया कि ये 10 में से छ के लायक है तो छह बेस्ट लेवल है तो मैं मान लेता हूं किय छ से लेकर चार तक जाएगा और धीरे धीरे उसी अनुपात को कम करते हुए नंबर देता रहता था पहले
मान लीजिए 60 है 36 नंबर दिए 60 प्र अगले में कर दिया 55 52 50 48 46 44 40 खतम पढ़ा एक ही उत्तर ऐसे बहुत परीक्षक पढ़ते पढ़ते नहीं एक उत्तर पढ़ा या हर उत्तर की शुरू की चार लाइने पड़ी उससे अनुमान कर लिया और यह मान के चलिए कि परीक्षक के लिए उत्तर करना बहुत झंझट वाला काम है उसका मन नहीं करता उत्तर पढ़ने का और उसके ऊपर अने हैंडराइटिंग ऐसी बना दी है कि समझ नहीं आ रहा किस ग्रह से लिखवा के लाए हैं अगर आप इसके बाद य सोचते हैं कि कोई
आपका उत्तर पढ़ेगा तो पहली गलतफहमी यही है पढ़ेंगे नहीं आपका उत्तर मुश्किल होगा इसलिए यह बड़ा महत्त्वपूर्ण है कि आपका उत्तर दिखने में कैसा है दिखने में स्मार्ट होना चाहिए आपका उत्तर उसको देख के मन हो कि पढ़ा जाए इसको तो उसके बहुत सारी तकनीक हैं उसकी तकनीकों पर हम आएंगे लेकिन अभी के लिए केवल एक संकेत मैं कर रहा हूं कि यदि अपने अपनी उत्तर पुस्तिका को ठीक से सजाया हुआ है तो मान के चलिए कि उसका बेनिफिट मिलेगा लेकिन सजावट का एक नियम होता है एक सीमा से ज्यादा सजाते हैं किसी को भी
तो आपको पता है कि वो मतलब खराब लगने की स्थिति आ जाती है ऐसा होता है ना कोई बहुत रूपवान व्यक्ति थोड़ा बहुत सजे तो और रूपवान हो जाता है अगर थोड़ा और सजे और सजे और सजे तो पता है आपको वो कैसा लगने लगता है उसके बाद समझ रहे तो ऐसे उत्तर के साथ भी थोड़ा बहुत सजाएंगे तो सौंदर्य निखर के आएगा ज्यादा सजा दिया तो फिर वह अजीब किस्म का विद्रूप किस्म का सौंदर्य होगा गंदा सौंदर्य हो जाएगा छिछला सौंदर्य हो जाएगा ऐसा ना लगे आपने कई लोगों को देखा होगा सुंदर बनने के
च भे बन जाते देखा ऐसा कभी सुंदर बनने के अतिरिक्त प्रयास में भे बन गए तो उत्तर भी सुंदर बनने के सीमित प्रयास तक रहे तो ठीक है वरना बंडा बन सकता है तो इसमें कुछ पक्ष केवल संकेत के लिए बता द फिर हम एक एक करके उनकी बात कर लेंगे जैसे प्रस्तुतीकरण में आपके पैराग्राफ का प्रयोग कैसा है आपने डायग्राम्स का यूज किया या नहीं किया डायग्राम का ग्राफ्स का पाई डायग्राम का वेन डायग्राम का इन सब का प्रयोग किया या नहीं नहीं किया नक्शों का प्रयोग किया या नहीं किया आपने जो पेन यूज
किया पेन किस कलर का यूज किया किन कलर्स के पेन यूज किए कौन सा पेन जेल पेन यूज किया या बॉल पेन यूज किया यह जो सारे पक्ष है इन सारे पक्षों को मैं कह रहा हूं कि आपका प्रस्तुतीकरण कुल मिलाकर कैसा है ये एक पक्ष बनता है और यदि आपका इन सारे पक्षों पर ठीक ठाक पकड़ है तो फिर मैं कई विद्यार्थियों को ऐसा बोलता हूं कि अगर ईश्वर बीच में आ गया तो अलग बात है वरना आपको आईएस बनने से कोई रोक नहीं सकता और ये बात बहुत आसान है मेरा ख्याल है कि
आईस जितना हआ है दरअसल एक बहुत ही आसान एग्जाम है बस आपको थोड़ा सा लिखने की क्षमताओं को डेवलप करना है उसके बाद इस एग्जाम में कुछ भी नहीं है बहुत आसानी से आप आईस बन सकते तो यह एक बेसिक चर्चा हमारी पूरी हुई [संगीत]