[संगीत] अब मेन देखते हैं 79 यह बहुत जरूरी है संसद क्या चीज संसद पार्लियामेंट क्या है पार्लियामेंट क्या होता है पार्लियामेंट भैया संसद पार्लियामेंट या संसद देश में संसद बहुत जरूरी चीज है देश का सबसे पावरफुल जगह कौन है संसद पूरे देश का सबसे पावरफुल जगह है संसद क्योंकि भारत के लोग वहां बैठे हैं देखिए हम लोग अप्रत्यक्ष लोकतंत्र में रहते हैं लोकतंत्र का मतलब क्या होता है जो कुछ पूछिए वो जनता से पूछिए जो काम करना है जनता से पूछिए बट हमारी आबादी 140 करोड़ है हम लोग जनता से पूछने जाएंगे बर्बाद हो जाएंगे
पूछने पूछते इसलिए कहा गया है कि एक काम करो 10 लाख जनसंख्या के एक आदमी को चुन लो तो जो वोट होता है ना वोट आप सांसद के लिए नहीं चुनते हैं आप अपना मालिक चुने हैं कि हमारे बदले फैसला यह लेगा उसे कहते हैं प्रतिनिधि संसद को लाया गया है ब्रिटेन से संसद कहां से लाया गया है ब्रिटेन संसद की जननी किसे कहते हैं ब्रिटेन को संसद यहीं पर शुरुआत किया था संसद नहीं इसे ब्रिटेन को कहते हैं यहां पर जबकि संसद शब्द कर कहेगा तो फ्रांस से आया है पार्लियामेंट शब्द कहां से आया
शब्द से क्या मतलब है यहां पर पार्लियामेंट शब्द किससे आया है फ्रांस लेकिन संसद की व्यवस्था कहां से है ये ब्रिटेन संसद की व्यवस्था ब्रिटेन से देश का सारा शक्ति किसके पास है संसद उसे हम संप्रभुता कहते हैं क्या कहेंगे संप्रभुता संप्रभुता या पावर या सोव निटी प्रभुता या सोव निटी सोव निटी क्या होती है भैया संप्रभुता या सोव निटी या पावर कहेंगे इसे मतलब संप्रभुता का मतलब क्या होता उसके डिसीजन के आगे कोई कुछ नहीं बोल सकता है उसे क्या कहेंगे संप्रभुता संप्रभुता तो देश में मुख्यमंत्री ज्यादा बोलेंगे तो प्रधानमंत्री कह देगा ऐसे नहीं
ऐसे लेकिन अगर संसद ने कुछ बोल दिया अब आपको एनी हाउ मानना है तो मानना है संसद ने कह दिया कि धारा बदल जाएगी 1 जुलाई से कानून बदल जाएगा सुप्रीम कोर्ट भी मान लिया हां भैया बदल जाएगी तो हम भी बदल जाएंगे सुप्रीम कोर्ट भी मान लिया समझ में आ और कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट अब इस हिसाब से फैसला सुनाएंगे समझ में आ रहा है कि नहीं आ रहा है तो सुप्रीम कोर्ट संसद से पास हुए कानून प ही चलता है कल को संसद पास कर दे कि आपको सड़क पर दाहिने से चलना
है तो हम लोग को दाहिने से चलना पड़ेगा हम लोग कुछ नहीं कर सकते तो संप्रभुता का मतलब होता है कि जो भी डिसीजन लेने के लिए फ्री होता है वह संप्रभुता हाई कोर्ट संप्रभु है सुप्रीम कोर्ट बैठल है हाई कोर्ट के डिसीजन को कौन पलट देगा सु लेकिन न्यायालय के मामले में संप्रभुता किसके पास है सुप्रीम कोर्ट के उसका फैसला कोई पलट पाएगा दे दिया फैसला तो दे दिया अब आप नहीं पलट सकते वहा पर तो देश की संप्रभु किसके पास है संसद के पास देश की संप्रभुता वो कोई डिसीजन ले लिया तो कोई
पलट नहीं सकता पलटे का तो खुद और पलटे का तो खुद जैसे मोदी जी 2020 में लॉकडाउन के बीच में किसानों के लिए किसान आंदोलन जो नहीं हो गया था बवाल तो विधेयक लाए थे तीन को विधेयक पास करा दिए थे दु पूरे भारत के लोग परेशान हो गए कि भैया संप्रभुता तो संसद के पास है तो संप्रभुता तो कोई हटा नहीं सकता फिर बबाल हुआ ़ किसान आंदोलन पर बैठे रहे तब जाकर खुद सरकार ने उसे वापस लिया तो देश की संप्रभुता किसके पास नोट चेंज कर देती हम लोग कुछ कर पाते हैं सारे
लोग अपना अपना नोट बदलवा नहीं समझे सब लोग नोट बदला चुपचाप बदला होहे संसद से पास संसद से पास हो गया देखो अब संसद के बारे में हम लोग समझते हैं संसद की चर्चा तो हो गई किसमें आर्टिकल 79 संसद की चर्चा आर्टिकल 79 ये हो गया संसद देखो यह संसद जो है इसमें दो सदन होते हैं पार्लियामेंट में कितने हाउस होते हैं दो एक होता है लोकसभा एक होता है राज्यसभा लोकसभा राज्यसभा तो संसद के कितने सदन दो लेकिन संसद का अगर अंग कहेगा तो राष्ट्रपति है कितने अंग होते हैं तीन क्योंकि कोई विधेयक
एक बार लोकसभा से पास होगा राज्यसभा से पास होगा फिर राष्ट्रपति साइन करेंगे तभी होगा अदर वाइज में राष्ट्रपति अगर पॉकेट बटो लगा दिया तो पास ही नहीं हो पाएगा तो संसद के अंग कितने संसद के अंग न न आगे बढ़े और संसद में सदन कितने दो सदन को हाउस कहते हैं कितने हाउस दो लोकसभा और राज्यसभा अंग कितने न तीन अंग होते हैं समझ में आ रहा है कि नहीं आ रहा कितने अंग होते हैं तीन 1927 में हमारा पुरा संसद भवन बन के तैयार हुआ था एडविन लुटियन और बेक ने उस समय बनाया
था एडविन लुटियन और बेक नाम कितना जबरदस्त रखा था लुटियंस तो जितना एरिया दिल्ली में सरकारी भवन है ना चाहे गृह मंत्रालय यह मंत्रालय में जितने मंत्रियों के आवास है यह सब सब लुटियंस नामक विद्वान ने आर्किटेक्चर ने डिजाइन किया था नाम क्या था उसका लुटियंस लुटियंस दिल्ली तो लुटियंस दिल्ली ही कहा जाता है जहां संसद भवन राष्ट्रपति भवन गृह मंत्रालय वित्त मंत्रालय जितने मंत्री वगैरह उस सारे एरिया को क्या कहते है लुटियंस दिल हालांकि उस जगह का नाम है सेंट्रल विस्टा जगह का नाम क्या है सेंट्रल विस्टा लेकिन बनाने वाला कौन था लुटियंस तो
पूरा एरिया ले लिया गया सेंट्रल विस्टा और उसका निर्माण किसने कराया लुटियंस और बकड ने बेक उतना बड़ा नहीं था मेन कौन था लुटियंस लुटियंस था यहां पे समझ में आ रहा है कि नहीं आ रहा अभी नया संसद भवन बन रहा है 100 साल पुराना हो जाएगा संसद 2027 में तो भाई पुराना हो गया उतना जगह नहीं है तो यहां संसद भवन त्रिभुजाकार बन रहा है कैसा बन रहा है त्रिभुजाकार बन रहा है अरे भैया क्या बन गया हो इस आकार में बन रहा है तीन गेट हो जाएंगे यहां पर कौन-कौन गेट तीन गेट
तीनों का नाम याद रहना चाहिए ज्ञान द्वार शक्ति द्वार कर्म द्वार कितने गेट हो जाएंगे अब तीन ज्ञान द्वार शक्ति द्वार कर्म द्वार तो एक हो गया कौन द्वार ज्ञान द्वार शक्ति द्वार और कर्म द्वार अब पुराना संसद अब क्या हो जाएगा उसको क्या कर दिया जाएगा भैया पुराने संसद भवन को एज ए म्यूजियम में कन्वर्ट कर दिया जाएगा समझ में आ गया कि नहीं किसम कन्वर्ट कर दिया जाए म्यूजियम क्योंकि पुराने संसद भवन में बीच में एक हॉल था जिसका नाम था सेंट्रल हॉल इसी सेंट्रल हॉल में बैठ के संविधान लिखा गया था और
जब दोनों की संयुक्त बैठक कराई जाती थी तो सेंट्रल हॉल में होती थी किसम होती थी सेंट्रल तो इससे हमारी बहुत सारी याद जुड़ी हुई है समझ में आया कि नहीं आ गया इसलिए इसे हम हटा तो नहीं सकते हैं तो इसे किसम बदल दिया गया म्यूजियम में अब बाकी सारा किसम शिफ्ट हो गया नए संसद में किसम शिफ्ट हो गया नए संसद भवन में समझ में आ गया लोकसभा हरे रंग का है मोर के पंख की तरह और राज्यसभा लाल रंग का समझ में आ गया कमल के फूल का थीम है उसमें तो कमल
हल्का पिंक रेड में नहीं होता है ऐसे हल्का तो समझ में आ गया कि नहीं आ गया तो अभी हम लोग किसम शिफ्ट हो गए हैं नए संसद नया संसद हो गया जिसमें अभी आपको पानी के टपकने की समस्या आ गई तो होता है कभी कभी बड़ी बिल्डिंग में बनने के बाद कहीं कहीं से वाटर लीकेज हो जाता है बाद में उसका ड्रेनेज सिस्टम सही हो जाता है समझ में आ गया कि नहीं उतना बड़का बिल्डिंग इतना जल्दबाजी में बनेगा तो दरार आ जाएगा फिर बंद कर देगा सब दरार पानी टपकना कोई बहुत भीड़ समस्या
नहीं है सम ज्ञान द्वार शक्ति द्वार कर्म द्वार है नया वाले संसद पुराने वाले संसद के डिजाइन कर कौन थे लुटियन लुटियन और बकड बकड बता सकते हैं इस नए वाले संसद का वास्तुकार विमल पटेल जी विमल पटेल विमल साह जो है ना दिलवाड़ा का जैन मंदिर विमल सा दिलवाड़ा का जैन मंद नए संसद के डिजाइन कर विमल पटेल समझ में आ गया यही डिजाइन सोमालिया में बनाया गया था बट उसने रिजेक्ट कर दिया था एजेक्ट यही वाला तो जो सोमालिया का डिजाइन है ना संसद भवन का हम अपनी जरूरत के हिसाब से बनाते हैं
बिल्डिंग ही तो है बढने के लिए चाहिए क्योंकि 2026 में ना हम आपको पढ़ाएंगे आगे कि जो लोकसभा की सीटें हैं 545 इसे बढ़ा दी जाएगी समझ में आ गया तो 2026 में जब बढ़ेगी तो बैठने के लिए जगह भी तो चाहिए होगा ना यहां पे और लोकसभा में क्या है ना कि अब डिजिटलाइजेशन हो गया है मीडिया के भी बैठने का एक जगह चाहिए होता है तो मीडिया भी बैठती है यहां पे वहां अंदर लाइव टेलीकास्ट होता है क्या-क्या हो रहा है क्या नहीं हो रहा है तो देखिएगा आपके एरिया का सांसद मतलब घर
डुक सांसद तो नहीं है घर डुक सांसद समझते हैं खाली घर में बैठल रता है संसद में को सवाल नहीं पूछता है अरे संसद में तुम अपने बारे में पूछो जो तुम्हारे य की समस्या है यहां पर नहीं समझ में आ गया अब जैसे आपके यहां कोई यूनिवर्सिटी नहीं है तो आपके यहां का सांसद खड़ा होकर कहेगा ना कि हमारे यहां कोई यूनिवर्सिटी नहीं है बच्चे दूर तक जाते हैं पढ़ने के लिए जिस वजह से आधे बच्चे पढ़ाई छोड़ देते हैं लड़कियां नहीं जा पाती है दूर पढ़ने के लिए हमारे एरिया में एक यूनिवर्सिटी खोला
जाए नहीं तो स्पष्ट कहा जाए कि ना खोल तो नहीं समझ में आ गया और संसद में आप कुछ भी बोलेंगे तो उसका उस विभाग का सचिव को लिखित देना पड़ेगा आंसर उसका कि क्या कारण है यूनिवर्सिटी ना खोले जाने की ब्रांचे खोल दे ब्रांच खोल दो भैया एक तो यूनिवर्सिटी नहीं खोल सकते हो तो तो संसद भवन में आपके सवाल पूछे जा सकते हैं बशर्ते आपका सांसद घर ढकवा सांसद नहीं होना चाहिए ठीक है ले टाइप का हो सवाल पूछे तब सही लगता है य घर ढकवा सांसर से कुछ नहीं होता आगे बढ़ जाए
घर ढकवा मतलब क्या होता मुंह चोर नहीं समझा गया आगे बढ़ते हम लोग नया संसद समझ में आ गया कि नहीं आ देखो ध्यान से य तो लटन और बेक ने बना हम लोग जिसे लोकसभा कहते हैं हम लोग इसे क्या कहते हैं लोकसभा और इसे हम लोग क्या कहते हैं राजसभा लेकिन यूके मतलब क्या होता है ब्रिटेन ब्रिटेन वाला इसे हाउस ऑफ कॉमन कहता है क्या कहता है हाउस ऑफ कॉमन हाउस ऑफ कॉमन मतलब कॉमन लोगों का घर है और यूएसए वाला इसे कहता हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव हाउस ऑफ री प्रेजेंट टिव रिप्रेजेंटेटिव मतलब प्रतिनिधियों
का घर तो सही तो बात है हमारे प्रतिनिधि कहां जाते हैं लोकसभा हमारे प्रतिनिधि कहां जाते हैं लोकसभा में आप जिसे वोट डालते हैं कहां जाके बैठता है लोकसभा तो अमेरिका में उसे क्या कहा जाता है हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव ब्रिटेन में क्या क जाता हाउस ऑफ कॉमन हम लोग क्या कहते हैं लोकसभा हम लोग क्या कहते हैं लोकसभा अगर आप लोग वोट डाले होंगे तो आप दो जगह वोट डालते हैं एक केंद्र में सरकार बनाने के लिए एक राज्य में सरकार बनाने के लिए तो जो राज्य में सरकार बनाने के लिए अपने विधायकों को वोट
दिया था जैसे हमने 2024 में वोट डाल दिया केंद्र में सरकार बनाने के लिए अब ध्यान से समझो लोग हरियाणा वाला अभी अपना वोट डाला है राज्य में सरकार बनाने के लिए हम बिहार वाले हैं तो 2025 में हम लोग वोट डालेंगे अपने बिहार में सरकार बनाने के लिए तो जिन्हें हम लोग बिहार में सरकार बनाने के लिए वोट डालेंगे ना फिर अब वो लोग अपनी ओर से कुछ नेताओं को भेजेंगे कहां पे राज्यसभा में तो राज्यसभा का चुनाव डायरेक्ट जनता नहीं करती है जनता जिन्हें राज्य सरकार के लिए भेजी रहती है वो चुन के
कहां भेजती है राज्यसभा में तो राज्यसभा को हम लोग राज्यसभा यह बोलते हैं और यह ब्रिटेन वाला क्या कहता है इसे राज्यसभा को हाउस ऑफ लॉर्ड हाउस ऑफ लॉर्ड्स और अमेरका क्या करता है सीनेट अमेरिका क्या कता है सीनेट बताइए हम लोग में राज्यसभा का इलेक्शन होता है हम लोग में राज्यसभा का इलेक्शन नहीं आपके एरिया का विधायक जाकर वोट देता है राज्यसभा को कौन राज्यसभा में जाएगा यह कौन डिसाइड करेगा विधायक कौन डिसाइड करेगा विधायक बताइए हम लोग जिसे राज्यसभा कहते हैं अमेरिका उसे क्या कहता है सीनेट हम लोग जिसे राज्यसभा कहेंगे अमेरिका क्या
कहेगा सीनेट क्या कहेगा सीनेट और ब्रिटेन क्या करेगा हाउस ऑफ लड लेकिन इन हाउस का पावर उतना नहीं होता है इस हाउस का पावर उतना नहीं होता क्योंकि जनता ने इन्ह वोट नहीं दिया पावर मेन किसका है हाउस ऑफ कॉमनस या हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव बट हमारा नाम नहीं है हमारा नाम क्या है लोकसभा तो ज्यादा पावर किसका लोकसभा अभी 2024 में किसका इलेक्शन हुआ है लोकसभा का राज्यसभा का इलेक्शन आपको पता नहीं चलेगा राज्यसभा का इलेक्शन आपको पता ही नहीं चलेगा जिसका पावर रहेगा उसी का ना पता चलेगा राज्यसभा का इलेक्शन का पता चले समझ
में आया तो लोकसभा ज्यादा पावरफुल की राज्यसभा ज्यादा पावरफुल लोकसभा होती है नया संसद किस डिजाइन का त्रिभुजाकार है ज्ञान द्वार कर्म द्वार और शक्ति द्वार संसद के कितने अंग कितने सदन संप्रभुता किसके पास संसद संसद के दोनों सदनों में पावरफुल सदन लोकसभा को अमेरिका में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव और ब्रिटेन में हाउस ऑफ कॉमन राज्यसभा को अमेरिका में सीनेट और ब्रिटेन में हाउस ऑफ लड समझ में आ गया कि नहीं आ गया किसी को दिक्कत हमारे यहां क्या हो गया संसद संसद में बैठने वाला व्यक्ति सांसद कहलाता है क्या कहलाएगा सांसद बस एक मात्रा जोड़
दीजिएगा सांसद में बैठने वाला व्यक्ति सांसद यानी पार्लियामेंट में बैठने वाला कौन सा पार्लियामेंट पार्लियामेंट में बैठने वाला व्यक्ति मेंबर ऑफ पार्लियामेंट पार्लियामेंट में बैठने वाला मेंबर ऑफ पार्लियामेंट उसे क्या कहेंगे एमपी मेंबर ऑफ पार्लियामेंट मतलब एमपी मेंबर ऑफ पार्लियामेंट मतलब एमपी समझ में आ गया आपके ए आपके आपके जिला का एक एमपी गया होगा अगर जिला बड़ा है तो दो एमपी जाता है जैसे पटना बहुत बड़ा जिला है तो पाटलीपुत्र से एक और एक पटना साहिब से समझ में आ गया कि नहीं आ गया दो सांसद पटना से जाते हैं तो अभी एक है
र शंकर प्रसाद इस एरिया से पटना साहिब से और पाटली पुत्रा से मिशा भारती समझ में आ गया कि नहीं आ गया तो दो सांसद है पटना से संसद की चर्चा किसम है 79 राज्यसभा 80 लोकसभा 81 लोकसभा 81 संसद 79 को 8993 कितना एक क संसद एक काम 0 लोकसभा 81 राज्यसभा समझ में आ गया किसी को दिक्कत राज्यसभा का चुनाव हम लोग करते हैं भाग लेते हैं राजसभा के हम लोग किसम चुनाव राज्यों में जितने मंत्री विधायक बैठे हैं वो लोग किसम चुनते हैं लोग राजस किसमें राज्यसभा से चलो अब देखते हैं संसद
के आगे आर्टिकल 80 और 81 80 में है राज्यसभा और 81 में है लोकसभा लोकसभा दोनों सदन है यहां पर समझ में आ रहा है कि नहीं आ रहा है अभी राज्यसभा में कितने सीट है 550 अब समझो ध्यान से 245 बोले गया अब यह चीज तो हो गई राज्यसभा के लिए कितनी सीट है 250 और लोकसभा के लिए सा लेकिन हमारा कश्मीर का एरिया जो है ना यह पाकिस्तान ने कब्जा कर रखा है तो हम लोगों ने ना अपना विरोध दिखाने के लिए कहा कि इसमें हमारा पांच को सीट जा रहा है तो इसमें
हम लोग कहते हैं कि पांच को सीट फिलहाल खाली है पांच को सीट में हम लोग क्या रखते हैं खाली रखते हैं ताकि दिखाने के लिए कि हम कश्मीर भूले नहीं है और यहां भी क्या करते हैं पांच को सीटवार हैं तो ये भी हो गया 545 वो 245 ये हो गया 545 समझ में आ रहा है कि नहीं आ रहा है तो पीओके के लिए कितना छोड़ दिए हैं लोग 500 अब इसमें ना दो एंग्लो इंडियन का भी मनोनयन कि करना था लोकसभा में तभी एंग्लो इंडियन का व्यवस्था खत्म कर दिया गया आपको पढ़ा
दिए हैं एंगलो इंडियन उसे कहते हैं जिसके पिता यूरोपीय थे क्या थे यूरोपीय जब देश गुलाम था तो अंग्रेज यही शादी कर लेते थे तो उनका बाल बच्चा क्या कहलाया था एंगलो इंडियन अब एंगलो इंडियन की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि उनका जो बच्चा ब शादी किया भी होगा तो 1947 के बाद तो नहीं किया होगा 1947 में तो चले गए होंगे तो जो 19 40 के हाल फिलहाल में 1940 42 45 हाल फिलहाल में जो बियाह किया होगा जो उसके बाल बच्चे होंगे वो तो बूढ़ हो गए होंगे और बुढ़ऊ के जो बाल बच्चे
हो तो कंप्लीट इंडियन होंगे भले व एंगलो इंडियन होंगे यहां पर तो अभी एंगलो इंडियन के व्यवस्था खत्म कर दिया गया तो कितना है 543 इलेक्शन कितना पे हो रहा है 543 दो एंगलो इंडियन जोड़िए तो कितना आ जाएगा 545 हां पीओके वाला भी जोड़ दज तो 550 राज्यसभा में 200 45 अब 250 ऐसे और रियलिटी में समझ रहे हैं कितना है 245 लोकसभा और राज्यसभा समझ में आ गया कि नहीं आ गया किसी को कोई दिक्कत तो वर्तमान में बताइए अगर हम देखें तो सीटे को देखेंगे तो इधर 543 यहां पास 245 245 किसी
को दिक्कत लोकसभा में संख्या ज्यादा है राज्यसभा में किसम है राज्यसभा कम है यहां पर अब समझिए लोकसभा हो या राज्यसभा हो इसमें कौन जाएगा यहां पे तो मेनली हम लोग को ध्यान देना है लोकसभा पे क्योंकि जनता यहीं पे वोट देती है तो संविधान में कहा गया है कि 10 लाख जनसंख्या पर एक सांसद होगा 10 लाख की जनसंख्या पर एक सांसद 10 लाख की जनसंख्या पर एक सांसद तो सोचिए इसीलिए सांसद की इतनी वैल्यू है कि वो 10 लाख जनता से नहीं पूछ सकती है सरकार कि आप क्या चाहते हैं क्या नहीं चाहते
हैं तो एक सांसद अगर बोलेगा कि हां ये विधेयक पास होना चाहिए तो समझा जाएगा 10 लाख लोगों ने बोला इसलिए 10 लाख लोगों के बराबर अकेले वैल्यू है किसकी सांसद की और तुम गुंडा मवाली चुन के भेजोगे तो 10 लाख को क्या समझा जाएगा गुंडा मवाली समझा जाएगा और अगर तुम पढ़े लिखे लोगों को चुन के भेजोगे वहां तुम्हारे लिए संसद में जाकर सवाल पूछेंगे तुम्हारे लिए काम करेंगे 10 लाख की जनसंख्या प कितने सांसद होने चाहिए एक 10 लाख की जनसंख्या प एक सांसद समझ में आ गया कि नहीं आ गया किसी को
दिक्कत अब प्रॉब्लम ये आ रही है कि जब भी जनगणना होती है तो सपोज कीजिए कि किसी की जनगणना हुई जनगणना कितने साल प होती है 10 साल प कितने साल प होती है 10 साल अब सपोज कीजिए कि किसी 2021 में जनगणना हुई कब हुई 2021 में जनगणना किसी जगह की आबादी है 97000 जनसंख्या कितनी आई 97 क्या इसे सांसद मिलेगा नहीं 10 लाख प ना मिलना चाहिए लेकिन बताइए कि यही जब अब जनगणना जब 2031 में होगा तो यह पक्का 10 लाख क्रॉस कर गया होगा नहीं क्रॉस कर गया होगा हमारे यहां जनसंख्या
बढ़ता है बाप रे बाप समझ में आ गया तो बताओ बहु 10 साल में आबादी बढ़ेगी कि नहीं बढ़ेगी तो यही बात बोला कि हर 10 साल के बाद प्रत्येक कब जनगणना के बाद प्रत्येक जनगणना के बाद लोकसभा और राज्यसभा की सीटों में समायोजन होगा समायोजन समायोजन का मतलब होगा कि अगर आबादी बहुत घट गई है बीमारी आ गया कोरोना आ गया किसी एक जगह पर मान के चलिए चपाक उल्का पिंड गिर गया 5 लाख लोग दबा गए तो वहां से लोकसभा की सीट क्या करनी पड़ेगी कम करनी पड़ेगी तो समायोजन में बढ़ भी सकता
है और घट भी सकता है तो प्रत्येक जनगणना के बाद लोकसभा और राज्यसभा की सीटों में समायोजन किया जाएगा किसके तहत 82 बताइए लोकसभा 81 राज्यसभा 80 संसद 79 संसद 79 दोनों के सीटों में समायोजन समझ में आ रहा है कि नहीं आ रहा किसी को कोई दिक्कत अब समझते हैं आगे हम लोग देखो हमारी लोकसभा की सीट जो है 200 543 कितना है भैया लोकसभा राज्यसभा 245 राज्यसभा राज्यसभा लोकसभा हमारा जो संसद भवन है जो अभी जिसम हम लोग बैठते हैं प्रेजेंट वो 1927 का बना हुआ एडमिन लटन और बकट के समय था उस
समय न के समय बनाया गया था अपनी मैक्सिमम कैपेसिटी से बाहर हो गया था अब उसमें संख्या ही नहीं थी बढ़ाने की 1971 में जो जनगणना हुई थी ना कब हुई थी यहां हो गया बवाल कहा गया कि अरे भैया 1971 के बाद जब 1981 में जनगणना होगी तो सीटों की संख्या क्या करना पड़ेगा बढ़ाना पड़ेगा सीटों की संख्या बढ़ाना पड़ेगा तो कहा गया कि हर जनगणना के बाद तो सीटों की संख्या बढ़नी चाहिए तो जेनन बाटर है जेनन बात है बढ़ना चाहिए 10 लाख की आबादी पर लेकिन संसद भवन इतना छोटा हो गया है
कि अब उसम जगह नहीं है बैठने का आसा हो जाएगा एकदम सकेत होने लगेगा नहीं समझ में आ आसा समझते हैं एकदम वहां प जगह नहीं है नहीं समझ आ गया में मार हो जाएगा घस हो कौन है बनारस के सांसद चलिए हो मोदी जी है बनारस के सांसद नहीं समझ में आ गया ककला ककली हो जाएगा जगह नहीं था संसद भवन में अब कहां कुर्सी लेके बैठे ललका टेबल लेके हम य बैठेंगे य प बवाल हो गया भाई ए भैया जनसंख्या तो बढ़ाने की व्यवस्था है लेकिन संसद भवन तो हैय नहीं है तो संशोधन
करना पड़ा क्या हो जनगणना होते रगा हटा यहां प 2026 तक सीट नहीं बढ़ेंगी 2026 तक सीट नहीं बढ़ेगी समझ में आ गया कि नहीं आ गया तो बताइए हमारी वर्तमान लोकसभा और राज्यसभा की सीट किस वर्ष की जनगणना पर आधारित है हा 1971 क्योंकि अगर उसे हम बढ़ा के 81 प करें 91 प करे या 2001 प करे या या 2021 में करे सीट ही नहीं थी संसद में जगह नहीं था य नहीं समझ में आ गया किसी को दिक्कत अब जगह नहीं रहेगा तो जैसे मान कीज क्लास में जगह नहीं है तो क
देंगे ना अब नया एंट्री बंद अब भाई कोई अब कोई कहे नहीं सर हम गांव से आए ना भैया बंद जगह नहीं है बंद समझ में आ गया कि नहीं आ गया किसी को कोई दिक्कत संसद में धक्का मुक्की हो जाएगा तो बताइए वर्तमान संसद की सीटों की संख्या किस वर्ष की जनगणना पर आधारित है 1971 अच्छा इस कब तक इसमें चेंजिंग नहीं होगा 2026 अब प्रधानमंत्री चाहे नरेंद्र मोदी रहते हैं चाहे लाल कृष्ण आडवानी या मनमोहन सिंह ही रहते या कोई भी रहता उनकी मजबूरी थी 2026 से पहले नया संसद भवन बनाकर तैयार करना
नहीं समझे मजबूरी है भैया क 2026 में बढ़ेगा सीटों की संख्या फिर लोकसभा में 700 बैठेगा लोकसभा में कितना बैठेगा 700 पुरनका संसद में 700 का जगह नहीं है ढकल ढकल हो जाएगा यहां नहीं समझ मेंगा एक प द को सीट अच्छा वो लोग हेल्दी रहता भी है आगे बढ़ जाए तो बताइए लोकसभा की सीटें किस वर्ष की जनगणना पर आधारित कब तक चेंजिंग नहीं होगा 2026 में चेंजिंग होगा तब नया संसद बनाना जरूरी हो गया मजबूरी थी यहां पर बनाना ही पड़ेगा यहां प नया संसद भवन थोड़ा सा ज्यादा बढ़िया बनाया गया है ठीक
है अपना अलग-अलग है नया चीज कोई भी नई टेक्नोलॉजी आती है तो पहले से अच्छा ही रहता है पुराना जमाना का टीवी अब 1971 1927 का बिल्डिंग और अभी के बिल्डिंग में अंतर आएगा य पर आगे बढ़े अब थोड़ लोकसभा और राज्यसभा का हम कंपैरिजन देख लेते हैं लोकसभा और राज्यसभा का कंपैरिजन बताइए संसद की चर्चा किसम है संसद की चर्चा हम इधर देख लेते हैं लोकसभा इधर दे राज राज्यसभा की चर्चा लोकसभा की चर्चा हां अब एक बात बताओ इसमें वोट कौन देता है जनता लोकसभा में वोट कौन देता है जनता वोट देती है
और इसमें कौन देता है विधायक इसे इसका वोट कौन देता है विधायक लोग जाके वोट डालते हैं तभी जाके क्या बनता है राज्यसभा क्या बनता है राज्यसभा समझ में आ गया जब जनता वोट देती है इसलिए इस वाले सदन को हम कहते हैं प्रत्यक्ष सदन क्या कहेंगे इसे हम क्या कहेंगे अप्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष सदन अप्रत्यक्ष सदन मतलब ठीक लिखा है जी प्रत्यक्ष डायरेक्ट हाउस और इनडायरेक्ट हाउस समझ में क्या जनता वोट डालती है इसलिए इसे प्रत्यक्ष सदन और उसे विधायक लोग वोट डालते हैं इसलिए अप्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष सदन समझ में आ गया कि नहीं आ गया किसी
को कोई दिक्कत अब जनता के पास ही देश का असली पावर है देश का असली पावर किसके पास है जनता इसीलिए कहा गया है कि मंत्री जब भी बैठेगा तो किधर बैठेगा लोकसभा मंत्री किधर बैठेगा मंत्री लो मंत्री राज्यसभा में बैठेगा मंत्री किधर बैठेगा लोकसभा अत मंत्री परिषद किसके प्रति उत्तरदाई है लोकसभा इसलिए इस सदन को हम कहते हैं प्रथम सदन कौन सा सदन प्रथम सदन इसे क्या कहेंगे द्वितीय सदन कौन सा सदन द्वितीय सदन प्रथम सदन इसलिए कहेंगे क्योंकि जनता की म चुने गए मंत्री किधर बैठते हैं लोकसभा और उसे कौन सदन कहेंगे द्वितीय
सदन उसे द्वितीय सदन कहेंगे जनता की समस्या पहले इधर सॉल्व होती है बाद में उधर सॉल्व होती है क्योंकि मंत्री इधर ही है और जनता का समस्या सॉल्व करने वाले क्या है मंत्री हैं क्योंकि विधायक और सांसद तो जाके मंत्री के पास कहेंगे कि आपके विभाग से यह काम कर दीजिए समझ में आया कि नहीं आ गया तो प्रथम सदन किसे कहते हैं द्वितीय सदन जनता का सदन हां जनता का सदन विधायको का सदन प्रत्यक्ष सदन अप्रत्यक्ष सदन किसी को कोई दिक्कत प्रथम सदन द्वितीय सधन आगे बढ़े और भी बहुत सारी तुलना है देखा जाए
यहां प प्रथम सदन द्वितीय सदन यहां प हो गया य पर अब यहां एक खराबी ये है समझिए ध्यान से इस सदन का कार्यकाल कितने साल होता है पा साल इसका कार्यकाल पा साल इसके सदस्य का कार्यकाल 6 साल इसके सदस्य का कार्यकाल इसके सदस्य का कार्यकाल छ स अब यहां ये चीज कहा गया है समझिए कि इसके सदस्य जो बनते हैं सदस्य सदस्य सदस्य का कार्यकाल 5 साल इसके सदस्य का कार्यकाल कितना साल छ साल बट प्रॉब्लम कहां है कि यहां कहा गया है कि मंत्री यानी सरकार वही बना पाएगा जिसके पास अकेले कम
से कम 50 पर सीटें हो लोकसभा का कुल सीटों का अकेले 50 पर वो रखता हो या उसके साथ चुनाव लड़ रही गठबंधन की पार्टी रखती हो अकेले तभी क्या बना पाएगा सरकार तभी क्या बना पाएगा सरकार अब जैसे अभी वर्तमान में नरेंद्र मोदी के पास अपना 240 सीट है कितना सीट है 2 लेकिन 50 पर के लिए 272 चाहिए 50 पर के लिए क्या चाहिए 272 एक तो ज्यादा रखता है कोई भी य पर तो 50 पर के लिए क्या चाहिए 272 लेकिन मोदी जी के पास है कितना 240 अच्छा ये कितना 272 272
300 जी 240 है ना 272 चाहिए तो बताइए है 240 अ चाहिए कितना तो इनको किसी ना किसी से साथ लेना पड़ेगा क्या करना पड़ेगा साथ उनके साथ देने में किसका योगदान है बिहार के लोग काहे नीतीश कुमार का भी साथ है वह अभी अपनी पार्टी खींच सकते हैं चिराग पासवान का साथ है वह भी अपनी पार्टी यहां पर हम पार्टी हैं उनका भी एक सीट है है कि नहीं है एक सीट है तो बिहार से उनको कम से कम कितना 181 सीट का समर्थन है बिहार से 12 को तो अपने इनके हो गए हैं
नीतीश कुमार जी के पार्टी के पासो चिराग 12 पा 17 हम पार्टी से 18 तो 40 को में से इ इनके पास जीते कितना 240 करना कितना है 2 272 करना है 18 का नहीं तो कहां से मिल गया इनको बिहार से चंद्र बाबू नायडू तेलंगाना से तेलंगाना से मिल ग ना आंध्र प्रदेश से कहां से आंध्र प्रदेश तो सोचिए उतना समर्थन है कि नहीं है अगर बीच में किसी का दिमाग घूमा क किना प ब क्या हो गया ब्रेक अप तब तो वापस 27 से कहां चल जाएंगे तो सरकार क्या हो जाएगी गिर जाएगी
सरकार क्या हो जाएगी गिर जाएगी लोकसभा को वापस भेज दिया जाएगा जाओ घर जाओ घर जाओ दोबारा इलेक्शन होगा क्या होगा दोबारा लोकसभा की खराबी यही है कि अगर बहुमत खो देंगे अगर बहुमत खो देंगे तो यह भंग हो जाता है क्या हो जाता है भंग हो जाता है इसलिए इसे कहा जाता है अस्थाई क्या है अ समझो लोकसभा का इलेक्शन 2024 में हुआ था अगला कब होगा 2029 में लेकिन अगर गठबंधन की सरकार में किसी ने अपना समर्थन खींच लिया तो चुनाव 2029 में ना होकर बीचवे में चुनाव कराना पड़ेगा कि भैया ये सब
तो ब्रेक अप कर लिया हो नहीं समझ में आ गया क्या कर लिया ब्रेक अप तो लोकसभा की खराबी क्या है इसमें क्या हो सकता है ब्रेकअप इसमें क्या हो सकता है ब्रेकअप अत यह भांग हो सकता है यही खराबी अटल बिहारी वाजपेई की सरकार गिर गई थी कि नहीं बस समर्थन खींच लेने के वजह से सरकार गिर गई थी समझ में आ रहा है कि नहीं आ रहा है वीपी सिंह भी थे वीपी सिंह की समय में भी सब घटना हुई थी अब आगे जब सरकार देखा जाएगा ना तो ये सब समझाएंगे आप लोग
आगे बढ़े तो लोकसभा की खराबी क्या है भंग हो सकता लोकसभा की खराबी भंग हो सकता है ये इसकी सबसे बड़ी खराबी इसलिए इसे अस्थाई सदन कहते क्या राज्यसभा कभी भंग होगा राज्यसभा कभी भंग नहीं होगा भैया हमको सरकार नहीं चलाना है तो हमको भंग क्या करेंगे आप नहीं समझ में आ गया नहीं समझे अरे वो कहा कहते हैं कि भैया इसको सरकार ही नहीं चलाना है राज्यसभा लोग को तो इसे सरकार से बाहर क्या कीजिएगा नहीं समझे राज्यसभा को सरकार चलाना है इसे भंग करके सरकार से बाहर कैसे करिएगा अरे लोकसभा को सरकार चलाना
है मंत्रियों के थ्रू भंग करके बाहर कर दीजिए इसको सरकार नहीं चला ना तो भंग करके क्या करेंगे क्या यहां पर कुछ कर सकते हैं इसको इसको तो भंग किया ही नहीं जा सकता है वही नहीं है वो गाना सम में फरोसे को आंधी से डराते हो हम भी किसको उर्दू बता रहे हैं क्या होता है मतलब इस सम में फरोसे को आंधी से डराते हो अरे भैया चलो तुम लोग को नहीं बुझाएगा य य बताओ राज्यसभा भंग करेंगे क्यों भंग करके करेंगे क्या नहीं समझे आगे बढ़े तोय भंग होगा यह कभी भी भंग नहीं
हो सकता भंग कर गया इसलिए क्या है अस्थाई सदन कैसा सदन है अस्थाई अस्थाई सदन कैसा सदन है उसे भांग नहीं किया जा सकता लोकसभा को भंग करके इसका पावर खत्म कर देंगे उसके पास पावर ही नहीं है तो भंग करके खत्म कोज करिएगा नहीं समझ में आ गया देखो ये भंग हो सकता है इसकी खराबी ही है कि नहीं है अटल बिहारी वाजपेई की सरकार भंग हो गई थी भंग का मतलब इसे क्या कहेंगे अपर इसे कहेंगे उच्च सदन उच्च सदन क्योंकि भंग ही नहीं होता हैय निम्न सदन क्योंकि भंग हो जा लेकिन पावरफुल
कौन है क्योंकि मंत्री किधर बैठते हैं अ मंत्री बैठने के कारण प्रथम सदन मंत्री ना बैठने के कारण किस सदन को लोकप्रिय सदन कहते हैं इसे लोकप्रिय सदन क्यों कहते हैं जनता वोट दाती है अ इसे लोकप्रिय सदन कहा जाएगा इसे हम लोग कहेंगे शिक्षित का सदन किसका सदन शिक्षित लोगों का सदन क्योंकि 12 लोगों का इसमें मनोनयन किया जाता है 12 लोगों को क्या किया जाता है मनोनयन मनोनयन का मतलब इसमें 12 ऐसे लोगों को भेजा जाता है जो चुनाव नहीं लड़ते हैं बल्कि विज्ञान कला साहित्य में अच्छा काम किए रहते हैं वैज्ञानिक रहते
हैं कोई कला में रहता है कोई क्रिकेटर रहता है तो शिक्षित लोग उसमें जाते हैं यहां पर इसलिए इसे शिक्षित का सदन कहते हैं और इसे हम लोग क्या कहेंगे लोकप्रिय सदन इसे कौन सा सन उसे कौन सदन शिक्षित का सदन याद रहेगा प्रथम सदन किसे कहेंगे उच्च सदन अरे उच्च सदन राज्यस भंग हो सकता है संख्या में ज्यादा है संख्या में कम जनता का सदन प्रत्यक्ष सदन अप्रत्यक्ष मंत्री बैठेगा प्रथम सदन द्वितीय सदन भंग हो सकता है भंग नहीं होगा अस्थाई अस्थाई लोकसभा अस्थाई सदन अस्थाई उच्च सदन क्योंकि भंग नहीं होता इसलिए उसे क्या
कहते हैं उच्च निम्न सदन निम्न सदन याद रहेगा निम्न सदन आगे बढ़े दोनों में कंपैरिजन याद रहेगा य पर 2024 में राज्यसभा का इलेक्शन हुआ था या लोकसभा का लोकसभा का इलेक्शन हुआ राज्यसभा का इलेक्शन नहीं राज्यसभा का इलेक्शन कब होगा आपको पता नहीं चले आर्टिकल 83 में कहता है सुनिए ध्यान से कि जो सदन है उसकी अवधि यानी टेनर कितना है अवधि मतलब टेनर कितने समय तक सदन रहेगा किसम है 83 में और योग्यता किसम है सदन की योग्यता 84 किसम अब 85 में व सत वसान और आहत वगैरह हम आगे बढ़ाएंगे चलो पहले
इतना समझते हैं अवधि पहले समझते हैं उसके बाद हम आगे समझेंगे योग्यता में सदन की अवधि देखिए इसमें बैठने वाले सदस्य का कार्यकाल होता है 5 साल बैठने वाले सदस्य का कार्यकाल अगर 5 साल पूरा हो गया ना तो इन सबको एक ही बार में वापस भेज दिया जाता है जैसे 2019 में चुनाव हुआ था लाइव वाले सब ध्यान से समझना 2019 में जब चुनाव हुआ था तो 5 साल के लिए सारे लोगों का इलेक्शन हुआ इसमें और इसमें खराबी क्या है कि जितने सदस्य हैं इसमें 550 जो सदस्य होते हैं उनमें सबका इलेक्शन एक
ही बार में हो जाता है जब सबका इलेक्शन एक ही बार में होता है तो जब 5 साल का टेनर खत्म होगा तो सब के सब चले जाएंगे सब के सब चले जाएंगे अब इससे दिक्कत क्या होगा कि देश की प्रभुता और जितना बड़ा डिसीजन है वो संसद को लेना है और हमने यहां गलती क्या कर रखा है कि सदन जो बुलाए हैं जो पावरफुल सदन है लोकसभा उसमें इलेक्शन एक ही बार में होता है और एक इसी कारण एक ही बार में सब खत्म भी हो जाता है जैसे 2024 में एक ही बार में
सबको भेज दिया गया घर कि जाइए चुनाव जीत के आइएगा और 2024 में चुनाव जीते और जून में सब लोग जीत के फाइनल रिजल्ट लेके वापस संसद में चले गए अब ये सब का सब 550 फिर आ गया है कहां पे संसद में अब ये लोग 2014 से कब तक रहेंगे 2029 तक अब इसमें खराबी क्या होती है आप एक ही बार में बुलाए और इलेक्शन ज पा साल खत्म होगा तो एक ही बार में भेज देंगे जब आप भेजेंगे कि जाओ चुनाव लड़ो और उसी समय देश पर कोई संकट आ जाए तो देश के
लिए कोई डिसीजन लेना हो तो ले ही नहीं पाएंगे उनका टेनर खत्म हो गया चुनाव में बिजी आचार संहिता लगा हुआ है वहां पर तो भाई देश का संकट अगर आ गया कोई युद्ध हो गया आक्रमण हो गया कोई चेंजिंग करना है कोई बड़ा अमेंडमेंट करना करेगा कौन तब कहा गया है तब एक ऐसा सदन बनाया गया राज्यसभा और राज्यसभा में जो बैठने वाला सदस्य है उसका कार्यकाल जानबूझ के रखा गया 6 साल क्या रखा गया 6 साल रखा गया जानबूझ के रखा गया 6 साल अब बताइए अगर यह नहीं रहेगा तो कौन रहेगा लेकिन
और दिमाग लगाए ग राज्यसभा में कहा गया कि जो राज्यसभा में लोग बैठेंगे जो लोग किसम बैठेंगे राज्यसभा में इसको इधर से यह तो है भैया लोकसभा आइए राज्यसभा इधर 543 इधर 200 अब यहां तो कार्यकाल हो गया 6 साल कार्यकाल हो गया ल 6 साल किसी को कोई दिक्कत नहीं अब यहां एक और गड़बड़ी सपोज कीजिए कि इसका पा साल का कार्यकाल पूरा हो गया है लोकसभा का कार्यकाल पा साल पूरा हो गया और यह चला गया चुनाव में इसको चुनाव में हो गया लेट दिक्कत हो गया बाढ़ आ गया कोरोना आ गया या
कुछ ऐसा हो गया कि चुनाव हो गया लेट तब तक इसका भी 6 साल पूरा हो गया किसका राजसव अब तो फिर संसद ीरान हो जाएगा ीरान हो गया संसद अब देश का कोई रहा ही नहीं नहीं समझ कोई नाथ ही नहीं रहा देश का संभालेगा कौन भैया ये तो दिमाग ठीक है कि एक हो का पा साल रखिए एक का छ साल रखिए तो क्या होगा एक खत्म होगा जब तक एक का टेनर बचा रहेगा लेकिन लोग सभा का इलेक्शन में अगर लेट हो जाए ईवीएम चोरी हो जाए या बैलेट पेपर पर इलेक्शन होने
लगे चुनाव नतीजों में देरी होने लगे या कोई जीत ही ना पाए दोबारा चुनाव की नौबत आ जाए धांधली इतनी ज्यादा हो जाए कि चुनाव आयोग डिसीजन ले कि दोबारा इलेक्शन कराना है तो अगर इस कंडीशन में ऐसा होता है तो हम लोग तो यह सोचते हैं कि राज्यसभा के पास एक साल का टेनर ज्यादा है तो वो मैनेज करेगा लेकिन अगर लोकसभा ही एक साल लेट हो गई तो इधर लोकसभा एक साल लेट हो गई इधर इसका 6 साल हो गया वो पहले से बाहर था य भी बाहर हो जाएगा बताओ भैया संसद में
इसी समय कोई युद्ध कर आक्रमण कर दे डिसीजन लेने वाला कोई नहीं बचा इमरजेंसी लगाने वाला कोई नहीं बचा संसद की संप्रभुता गई देश की संप्रभुता सारा सोवर निटी पावर किसको दिया गया अब क्या किया जाएगा अब तो भैया देश गड़बड़ हो जाएगा इस तरह से देश चलेगा चलो अब इसमें नियम बना दिया क्या चीज कि देखिए इसमें जितने लोग हैं उनका सबका इलेक्शन एक ही बार होगा एक ही बार बाहर कर दीजिएगा इसमें दिया कि नहीं इनमें सबका इलेक्शन एक बार में नहीं हो इसको तीन पार्ट में बांट देंगे एक तिहाई एक तिहाई और
एक तिहाई यानी इसमें तीन पार्ट में क्या होगा बाट दिया जाएगा एक ही बार में इलेक्शन नहीं होगा समझ आ गया नहीं एक बार में इलेक्शन नहीं होगा इससे क्या होगा फायदा समझो एक बार में इलेक्शन ना होने से फायदा अब इतना तो समझ गए इधर लोकसभा इधर राज्यसभा है ये कौन सा है राज्यसभा अब इससे समझो क्या हो कार्यकाल कितना साल है अब इन लोगों का जो इतने लोग है लोग मतलब न बाय थड है उन लोगों का इलेक्शन होगा उसके बाद फिर कुछ क्या होगा तीन पार्ट में सबका एक बार में नहीं होगा
इससे फायदा क्या है सपोज करो कि इसका इलेक्शन 2010 में हुआ तो इसका कब होगा 2012 में दो दो साल का गैप करके होगा 2012 में इसका कब होगा 2014 में अब फिर होगा 2016 में 2016 इनका कब होगा 2016 में तब तक इनका टेनर 6 साल का खत्म देखो र स कितना है जो इलेक्शन में आया है व कम से कम कितना दिन रहेगा 6 साल तो यह न एक तिहाई जो लोग आए थे एक तिहाई लोग म 2 स का एक तिहाई करेंगे तो कितना होगा 1 स 15 45 स स कैसे हो
जाएग 12 ऐसे ही जाएगा 80 83 के आसपास 81 81 के आसपास मतलब समझो कि लगभग 8081 लगभग 80 सदस्य का एक बार में इलेक्शन होता है कितने का 80 तो हम लोग समझते हैं इसको तो इसमें जो आए थे 80 एक बार हुआ फिर 80 एक बार हुआ फिर 80 एक बार हुआ 8 * 3 24 240 हो गया ना तो लगभग 80 आप समझिए क्योंकि 245 सीट है तो ऐसे ही करो ना भाई दशमलव क्या 245 सीट है ना इसका एक तिहाई करोगे लगभग 83 लगभग 82 83 तो आप 80 समझो इससे तो
जो 1 तिहाई सदस्य का इलेक्शन हुआ है उसका कार्यकाल कितने साल रखना है 6 साल तो क्या एक ही बार में 245 सदस्यों का इलेक्शन होगा एक तिहाई एक तिहाई एक तिहाई यानी लगभग 81 81 81 सदस्यों का होगा जो यहां इलेक्शन हुआ सपोज 2010 में फिर यह होगा 2012 में यह होगा 2014 में और फिर जब दो साल बाद यानी 2016 आएगा तब तक इसका छ साल कंप्लीट हो जाएगा फिर अगले दो साल बाद इलेक्शन हो 2018 इसका 6 साल कंप्लीट हो गया फिर 2020 इसका 6 साल कंप्लीट हो गया यानी लोकसभा का इलेक्शन
बड़ी सिंपल है लोकसभा का इलेक्शन बहुत ही सिंपल है जितने सदस्य आएंगे एक ही बार में इलेक्शन करो घुसा दो यहां प चलो चलो चलो चलो यहां पर पा साल खत्म हो ग जाओ जाओ जाओ जा जा य राज्यसभा ऐसा नहीं है राज्यसभा ऐसा नहीं है इसमें एक ही बार में सबका इलेक्शन नहीं होता कहा जा देखो 250 सीट है यानी 25 सीट है 245 का एक बार में इलेक्शन नहीं होगा पहले एक तिहाई आता यानी 81 को का इलेक्शन कर लेते हैं फिर अगले दो साल बाद एक तिहाई यानी 81 का फिर इलेक्शन करेंगे
फिर अगले दो साल बाद इलेक्शन करेंगे इससे होगा क्या तीन पार्ट में इलेक्शन करने से फायदा क्या होगा कि सबका कार्यकाल एक ही बार में खत्म नहीं होगा सबका कार्यकाल एक ही बार में खत्म नहीं होगा जैसे क्लासरूम में देखोगे तीन रो है एक दो तीन अब जैसे सपोज कीजिए कि कोई बैच स्टार्ट होता है तो बैच खत्म हो गया तो सबको जाना पड़ेगा एक काम करते हैं इस रो का एडमिशन हम लेते हैं जनवरी में इसका ले लेते हैं फरवरी में इसका लेते हैं मार्च में अब बताओ सिलेबस खत्म होगा तो सब जाएगा जिसका
पहले खत्म हुआ वो चल गया उसके बाद यह जाएगा उसके बाद वो जाएगा तो राज्यसभा को जानबूझ के स्तर रखा गया है कि एक ही बार में ना बुलाया जाए तो राज्यसभा के सदस्यों का कुल सदस्यों का इलेक्शन एक बार में होता है या तीन पार्ट में तीन कितने पार्ट में अब इन तीन पार्ट को कितने साल के लिए रखना है छ साल तो छह में कितना से भाग देंगे तीन से तो हर सद क्या इलेक्शन कितने ईयर पे होगा दो साल कितने साल पे दो साल तो एक तिहाई सदस्यों का चुनाव होता है और
एक बार में चुनाव होता है कि हर दो दो साल पे होता है जबकि लोकसभा का चुनाव एक बार एक बार में हुआ पा साल रहिए जाइए राज्यसभा ऐसा नहीं है उसम हर दो साल पे क्या होता है चुनाव होता है हर दो साल पे चुनाव होगा और चुनाव में क्या सारे सदस्यों को लाया जाएगा या एक तिहाई एक तिहाई तो एक तिहाई एक तिहाई एक तिहाई तीन बार आते हैं और हर कितने साल पे हर कितने साल पे दो कितना सिस्टमिक रखा है अब लोकसभा का इलेक्शन चाहे डिले हो चाहे पांचों साल ना हो
या तीन साल भी ना हो राज्यसभा एक ऐसा सदन है जो कभी खाली होने वाला नहीं है क्योंकि इसका एक बार में इलेक्शन ही नहीं हुआ समझ में आया कि नहीं आ गया किसी को कई बार हुआ जैसे क्लासरूम में ही देखो आप लोग का एडमिशन बहुत लोग का आगे पीछे होता है किसी का पहले किसी का बात और सिलेबस खत्म हो गया तो सब जाएगा सर हमारा तो बचा बाद में आए थे वैसे ही क्या है राज्यसभा क्या बा राज तो राज्यसभा के सदस्यों का निर्वाचन प्रत्येक दो साल पर होता है और केवल एक
तिहाई सदस्यों का अवकाश होता है निर्वाचन होता है यानी अगर कार्यकाल भी खत्म होता है तो सारे लोगों का कार्यकाल खत्म होगा कि केवल एक तिहाई का फिर दो साल बाद एक तिहाई फिर दो साल बाद एक ई मतलब जो इलेक्शन जितने लोग का होता है उतने लोगों का कार्यकाल भी तो खत्म होता है तो लोकसभा का हर पा साल पे चुनाव हो रहा है अर्थात लोकसभा के सभी सदस्यों का कार्यकाल हर पा साल पे खत्म हो रहा है समझ में आया कि नहीं तो क्वेश्चन ऐसे नहीं पूछेगा थोड़ा घुमा के पूछेगा कहेगा कि लोकसभा
के सदस्य कब अवकाश ग्रहण करते हैं मतलब छुट्टी कब लेते हैं 5 साल बाद लोकसभा सदस्य कब अवकाश ग्रहण करेंगे पा साल बाद समझ में आ गया राज्यसभा के सदस्य कब अवकाश ग्रहण करते हा दो साल बाद सब लोग हा इसमें दोनों बात बोलिए प्रत्येक दो साल पर केवल एक तिहाई सदस्य प्रत्येक दो साल पर केवल एक इसका मतलब हम यह कह सकते हैं कि लोकसभा जो एक हाउस यानी सदन है इस सदन का भी कार्यकाल 5 साल और इसमें बैठने वाले लोगों का भी कार्यकाल पा साल समझ में आ गया कि नहीं आ गया
लेकिन राज्यसभा में बैठने वालों का कार्यकाल 6 साल लेकिन राज्यसभा एक सदा बहार सदन है हमेशा कोई ना कोई मिलवे करेगा उसमें तो बताइए लोकसभा का कार्यकाल पाच सा और लोकसभा में बैठने वाले का कार्यकाल पा साल राज्यसभा का कार्यकाल अनंत राज्यसभा में हमेशा कोई ना कोई मिलेगा लेकिन राज्यसभा में बैठने वालों का कार्यकाल छ स समझे दोनों में अंतर समझ आ गया कि नहीं आ गया लोकसभा का कार्यकाल राज्यसभा का अनंत राज्यसभा का अनंत लोकसभा के सदस्य का राज्यसभा के सदस्य का सा ये 6 साल इस हाउस का टाइम पीरियड नहीं है 6 साल
इसमें बैठने वाले मेंबर का कार्यकाल है तो राज्यसभा का कार्यकाल अस्थाई है कोई स्थाई होती है तो उसका कोई कार्यकाल नहीं होता है समझ में आ गया कि नहीं आ गया एनी प्रॉब्लम राज्यसभा के सदस्यों का कार्यकाल 6 साल जबकि राज्यसभा सदन एक अस्थाई है कार्यकाल अनंत लोकसभा के सदस्य तथा लोकसभा का सदन इन दोनों का कार्यकाल 5 साल होता है पा साल में सबको बाहर कर दिया जाएगा अब बताओ देश पर कोई भी संकट आ जाए अगर लोकसभा नहीं है तो कौन संभाल ले जाएगा कौन संभाल ले जाएगा सिस्टमैटिक ढंग से संविधान बनाया गया
है अभी 2024 में इलेक्शन था अप्रैल मई जून सरकार बिजी थी किसम इलेक्शन में लोकसभा व्यस्त थी किसम इलेक्शन में उस समय अगर देश पर कोई विकट संकट आ जाता देश पर कोई समस्या आ जाती तो कौन संभालता कौन संभालेगा राज्यसभा समझ में आया कि नहीं गया कौन संभालेगा राज्यसभा संभालेगा समझ में आ गया इसी को कहते हैं सद की अवधि किसम है आर्टिकल 83 में इसमें आपको आर्टिकल याद रखने की जरूरत नहीं है आप पहले योग्यता समझ जाते हैं देखो बा लोकसभा और राज्यसभा इसके लिए है आपकी आयु 30 साल और इसके लिए है
25 साल 25 साल इसलिए लोकसभा को हम युवाओं का सदन कहेंगे क्योंकि यंग है 25 है किसके कंपेरिजन में यंग है तो राज्यसभा में जाने के लिए आयु और लोकसभा में जाने के बाकी सारी चीजें कॉमन है भारत का नागरिक हो पागल दिवालिया ना हो लाभ के पद पर ना हो हो गया अब इसमें योग्यता में तो कॉमन चीज है सब पर चिपका दो पागल दिवालिया ना हो लाभ के पद पर ना हो भारत का नागरिक बस यही याद रखिएगा लोकसभा में जाने के लिए राज्यसभा के लिए 30 लोकसभा में जाने के लिए राज्यसभा में
जाने के लिए अब देखो बाबू अगर आपको मंत्री बनना है क्या बनना है मंत्री तो आप मंत्री बनने के लिए आपको किसी एक सदन का सदस्य होना चाहिए हालांकि आप अगर चुनाव लड़े हैं और किसी के में भी नहीं जीत पाए हैं तो भी आप छ महीने के लिए क्या बन सकते हैं मंत्री ये तो हम पढ़ाए हैं कि बिना संसद सदस्य रहे भी छ महीने के लिए क्या बना जा सकता है छ महीने के लिए मंत्री बना जा सता छ महीने के लिए क्या किया जा सकता है मंत्री बना जा सकता है समझ में
आ गया कि नहीं आ गया किसी को दिक्कत हां राज्यसभा में जो 12 मनोनीत सदस्य राष्ट्रपति उसके लिए नॉमिनेट करेंगे गृह मंत्रालय से पूछेंगे कि देश इतना बड़ा है इसमें 12 अच्छे लोग कौन है जिन्हें हम मनोनीत कर दे तो गृह मंत्रालय उसको रिपोर्ट देगी कि ये 12 अच्छे लोग हैं इन्हें मनोनीत कर दीजिए तो पूछेंगे क्या अच्छाई किए हैं तो जैसे सचिन तेंदुलकर अच्छा क्रिकेट खेले हैं रेखा समझ में आ गया कि नहीं व हीरोइन में कोई इसरो का साइंटिस्ट हो सकता है कोई गजल संगीत गीत यह हो सकते हैं मंत्री बनने के लिए
कम से कम आयु कितनी होनी चाहिए हा दोनों रास्ते हैं मंत्री बनने के लिए राज्यसभा से जाएंगे तो कम से कम 30 और लोकसभा से जाएंगे तो 2 तो मंत्री बनने के लिए कम से कम 25 साल की उम्र में आप मंत्री बन सकते हैं अर्थात लोकसभा के सदस्य तो रहिएगा ना जी कम से कम अब यह समझो जो लोकसभा और राज्यसभा के लोग हैं यह तो जनप्रतिनिधि है जो पब्लिक रिप्रेजेंटेटिव है इनका काम है जनता की बातों को सुनना गांव शहर अपने एरिया में जाए कहां सड़क नाली यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल किस चीज की कमी है
उसे देखें कि दिन भर संसद में घुसल रहे काम क्या है मेन काम क्या है जनता के लिए करना समझ में गया तो यह लोग जनता के काम के लिए अपने यहां आए रहते हैं हमेशा ही अपने घर अपने क्षेत्र में रहते हैं लेकिन जब संसद को जरूरत पड़ती है तो राष्ट्रपति बुलाते हैं उसी को कहते हैं आहूत करना संसद के सदस्य को बुलाने के लिए चलो संसद में चलो चलो चलो तो उसी को क्या कहेंगे आहूत क्या कहेंगे आहूत और जब संसद में बैठेंगे लोग एक आत महीना डिस्कस होगा जीएसटी में कुछ सुधार करना
है कि नहीं वक्त बोर्ड अमेंडमेंट में क्या करना है महिला ये सशक्तिकरण के लिए या उनके लिए कुछ आरक्षण देना है कि नहीं देना है यह सब पे क्या होगा चर्चा होगा और जब चर्चा हो जाएगा तो दिल्ली में बैठा लगा लोग भाई संसद में बैठे का खर्चा ज्यादा आता है ना वहा कैंटीन वगैरह सब चलते रहता है बड़ी सस्ता खाना मिलता है वहां प समझ में आ गया कि नहीं आ गया ऐसा बाहर में तो महंगा होता वहां प आधा खाना गवर्नमेंट की ओर से ना रहता यहां पे तो जब सारा काम हो जाएगा
तो वापस देगा जाओ सत्र को नास दिए सत्र खत्म नास दिए 17 वसान क्या हो गया 17 वसान तो बुलाए थे बुलाए हैं आ अब भेज दिए बुलाएंगे आहु कोई विधेयक पास करना है किसी चीज प चर्चा करना है अब वहां सारे सांसद को बुलाया जाएगा हे घूम लिए लोग सब लोग घूम लिए तो हां हां आ जाओ संसद को आहत किया जाता है बुलाया जाता है क्या किया जाता है आहु बैठा जाएगा अब सारे सांसदों को बोलने का मौका दिया जाएगा कि हां आप खड़े हुइए सांसद महोदय महज एक मिनट आपको टाइम दिया जाता
है क्योंकि ज्यादा टाइम नहीं देगा ना पाच मिनट से ज्यादा टाइम नहीं देता है पांच पांचों मिनट टाइम देगा तो एक घंटा में कितने लोग आ पाएंगे 12 को एक घंटा में कितने लोग बोल पाए 12 और क्वेश्चन पूछने के लिए एक घंटा टाइम में होता है प्रश्न काल तो बताइए 545 में कितना पूछ पाया 12 को तो फिर अगले दिन 12 ठो को बुलाएंगे फिर अगले दिन बुलाएंगे या तो आप प्रश्नकाल में पूछ लीजिए या तो शून्यकाल में पूछिए तो दो समय है पूछने के लिए तो दो घंटा में 24 को पूछ सकता है
तो सबको मौका मिलना चाहिए तो एक ही दिन में सबको मौका मि मिल पाएगा तो सबको लिस्ट हो जाएगा उनका एप्लीकेशन होता है एक उसम बता दिया जाता है ये आपका सवाल पूछने का ये इस दिन है आपका इस दिन है इतने मिनट है आपको इतना टाइम दिया जाता है तो जो अध्यक्ष होंगे या उधर सभापति वो बोल देंगे कि आपको इतने मिनट का टाइम दिया जाता है तो खड़े होंगे तो पहले तो धन्यवाद देंगे धन्यवाद अध्यक्ष महोदय आपने मुझे बोलने का मौका दिया अब अपना बात बोलेंगे लोग सत वसान और आह दोनों कौन करते
हैं राष्ट्रपति कुछ दिन के लिए बुलाएंगे तो उसे क्या कहा जाएगा आहत 10 दिन 15 दिन एक महीना दो महीना जब भी संसद का कार्यवाही चलता रहेगा संसद की कार्यवाही खत्म हो जाएगी तो वापस कौन भेजेगा हां राष्ट्रपति वापस भेजने को क्या कहेंगे वापस भेजने को सत वसान कहा जाएगा अब देखिए इसमें एक और चीज होता है यहां पर संसद की कार्रवाई बुला दिए राष्ट्रपति इधर सौंप दिए लोकसभा को एक सौंप दिए राज्यसभा को लोकसभा और राज्यसभा को क्या कर दिए सौंप दिए अब इसमें बैठे हैं लोग लोकसभा में और राज्यसभा में अब इसमें राष्ट्रपति
देखने नहीं जा रहा है बुलाया कौन है फाइनली वापस कौन भेजेगा कौन भेजेगा मौसम चेंज हो गया ना बड़ा अजीब हो जाता है इसमें एक चीज होता है सत्र का विगटन सत्र का एक होगा विगटन और एक होगा सदन की कारवाई को स्थगित करना तो सत वसान के बाद आपको पढ़ना स्थगित स्थगित ये पढ़ते हम लोग समझिए ध्यान से लोकसभा और राज्यसभा लोकसभा के अंदर जो कुछ क्रिया होगी यह अध्यक्ष के अंदर कंट्रोल होगी किसके कंट्रोल में और राज्यसभा में जो कुछ होगा वह सभापति कंट्रोल करेंगे कौन करेंगे सभापति कंट्रोल करते हैं इधर कौन कंट्रोल
करेंगे उधर कौन करेंगे देखिए अब सदन की मर्यादा का ध्यान रखना है इसमें हो हंगामा ना हो डिसिप्लिन का पालन हो अगर डिसिप्लिन का पालन नहीं होगा तो जिम्मेदार कौन है अध्यक्ष और वहां नहीं है तो सभापति तो जब कभी भी अध्यक्ष या सभापति को अध्यक्ष या सभापति को या आभास होता है कि सदन अपनी मर्यादा को खो रहा है हंगामा ज्यादा हो रहा है नियम का पालन नहीं हो रहा है या बहुत कम लोग आए हैं कार्यवाई को क्या करता है स्थगित करता हमेशा स्थगित जो होता है वो केवल और केवल कारवाई स्थगित होती
है स्थगन की क्रिया जो होती है वो एक घंटे के लिए भी हो सकती है अध्यक्ष कह सकते हैं कि सदन की कारवाई को एक घंटे के लिए एडजर्न यानी स्थगित किया जाता है उनका अच्छा इच्छा है वो कह देंगे कि आज के लिए कारवाई को स्थगित किया जाता है आज के लिए सदन की कारवाई को स्थगित किया उनकी इच्छा है वो कहेंगे कि दो दिन के लिए सदन की कारवाई को स्थगित करते लेकिन उनके पास इतना पावर नहीं है कि 17 वसान कर सके 17 वसान कौन करेगा राष्ट्रपति करते हैं 17 वसान में दोनों
को वापस भेजना होता है 1 वसान में दोनों को वापस भेजना होता है जबकि आहूत में दोनों को बुलाना होता है स्थगित करने में केवल एक ही सदन हो सकता है कई बार ऐसा होता है कि लोकसभा स्थगित होती है लेकिन राज्यसभा चल रही है कई बार ऐसा होता है कि राज्यसभा स्थगित है तो लोकसभा चल रही है कई बार दोनों स्थगित हो जाती है समझ में आ रही नहीं स्थगन समझ में आ गया हा आगे बढ़े ब बताइए आहूत कौन सतवन स्थगित स्थगित या स्थगित करने का अधिकार अध्यक्ष या सभापति का होता है अध्यक्ष
या सभापति अध्यक्ष या सभापति याद रहेगा ना किसी को कोई दिक्कत नहीं यह एक घंटे के लिए भी हो सकता है एक दिन के लिए भी हो सकता है एक हफ्ते के लिए भी हो सकता है यह डिसिप्लिन फॉलो करने के लिए आगे बढ़े अब एक हो गया आपका विघटन गग ठन विगटन वि गठन समझ में आ रहा है कि नहीं किसी को दिक्कत कोई मात्रा में गलती निकालेगा जब भी कोई कमी हो तुरंत उसका मेकअप कीजिए इसका हमने क्या कर दिया मेकअप विगटन का मतलब होता है कि अगर लोकसभा अपना बहुमत खोदे लोकसभा अपना
बहुमत खोदे तो वापस भेज दिया जाता है लोकसभा को कि अब दोबारा चुनाव होगा तो विगटन बहुत खतरनाक चीज है यह बड़ी अजीब चीज है ये तब होता है जब लोकसभा अपना क्या खोदे बहुमत खोदे अगर बहुमत नहीं है तो विगटन हो जाएगा और विगटन के बाद क्या होगा चुनाव कराना पड़ेगा क्या करना पड़ेगा चुनाव कराना पड़ेगा य तो बहुत खतरनाक कंडीशन है जी विगटन को स्थगन को एक मत सोच लीजिएगा स्थगन में आज भेज दिया हो सकता है शाम में बुला ले कल बुला ले दो दिन बाद बुला दे विगटन होना तो बड़ी खतरनाक
है और इसमें एक और चीज है विगटन जब भी होगा तो लोकसभा का होगा राज्यसभा का विगटन नहीं हो सकता क्योंकि राज्यसभा एक अस्थाई सदन समझ में आ गया कि नहीं आ गया आर्टिकल 85 में चार चीज याद रहेंगी आहूत तराव अ बीचवा में नौटंकी करता है तो क्या होता है स्थगन क्या होता है अ समझ में आ गया पूरा हो हंगामा हो गया सबको अपना अपना बात रखने का मौका मिल गया जब सारी चीज हो गई तो क्या होता है वापस भेजा जाता है 1 वसा बुलाएगा बुलाएगा ये हो गया लोकसभा यह हो गया
स बताओ इधर में कौन है भैया कंट्रोल करने के लिए अध्यक्ष इधर में सभापति अध्यक्ष और सभापति देखिए बुलाए सदन को बुलाएगा कौन बुलाने की क्रिया क्या कहलाए वापस भेजना और अगर कारवाही में कोई दिक्कत हुआ तो अ स्थगित हो गया स्थगन दो घंटे के लिए भी हो सकता है दो चार दिन के लिए भी हो सकता है उसका कोई फिक्स दिन नहीं है 10 दिन के लिए भी हो सकता है लेकिन फाइनल भेजने के लिए क्या करना पड़ेगा सत वसान और यह तो बहुत खतरनाक चीज हो जाती है भैया पूरे देश को भुगतना पड़ता
है विगटन अगर हो गया ना लोकसभा का विगटन बहुत बड़ा दिक्कत हो जाएगा दोबारा इलेक्शन कराने की नौबत आ जाएगी जैसे अभी तीन चार पार्टी समर्थन खींच ले सरकार से सरकार गिर जाएगी तो क्या हो जाएगा विघटन हो जाएगा क्या हो जाएगा विघटन भैया विघटन यानी स बड़ी खतरनाक चीज है य मोदी जी खुद कहे कि हम हम पा साल कार्यकाल नहीं चलाएंगे जाक राष्ट्रपति को लिखित शब देगी दोबारा चुनाव करा दीजिए तो क्या हो गया विघटन हो गया विघटन बहुत खतरनाक चीज होता है किसी लोकसभा में यानी एक लोकतांत्रिक देश के लिए विगटन एक
बहुत बड़ा चैलेंज आता है हालाकि हम लोग तो लोकतंत्र के बजाय भीड़ तंत्र में रहते हैं भीड़ को खुश रख दीजिए फिर आप लॉजिक बोलिए या इलॉजिकल बात बोलिए उसे कोई फर्क नहीं प य पर हम लोग एक चीज देखते हैं कि मतलब कुछ से कुछ वहा राजनीति का एक फेमस भाषा पहले गोली हम खाएंगे भीड़ खुश हो जाती है पुलिस के पास एक गोली है हम महिलाओं को तो इस सब सब से मतलब नहीं रहता है इनके सामने कोई बोलेगा नेता ना पहली गोली हम खाएंगे ले हमरा लड़की ठीक ले हमसे कालिए बोल रहा
है तो ये विगटन तो बहुत खतरनाक चीज हो गया यहां पर कंट्रोल कौन कर रहा है यहां पे देखिए साल में तीन बार संसद के सत्र को बुलाया जाता है संसद का जो सत्र होता है यानी बैठक सत्र मतलब क्या होता है बैठक बैठक को क्या कहते हैं सत्र अंग्रेजी में क्या कहेंगे सेशन अंग्रेजी में सेशन संसद के कितने सेशन बुलाए जाते हैं न कितने सेशन बुलाए जाएंगे तीन सेशन बुलाए जाते हैं सबसे पहले जो बुलाया जाता है उसका नाम है बजट सत्र कौन सत्र बजट सत्र बुलाया जाता है उसके बाद मानसून के समय में
बुलाया जाता है मानसून सत्र यानी बरसात के समय मानसून सत्र कौन सत्र अब ठंड के समय में शीतकालीन सत्र शीतकालीन सत्र ठंड के समय बुलाया जाएगा शीतकालीन सत्र शीतकालीन सत्र बुलाया जाता है अब इन सत्र में अगर आप ध्यान से देखेंगे तो बजट सत्र बुलाया जाता है फरवरी से और इसमें बहुत काम होता है इसलिए मई तक रहता है इस में पूरा बजट सरकार पैसा निकालती है हर एक डिपार्टमेंट का पैसे का खर्च बताती है कि कहां-कहां इसने खर्चा किया है समझ में आ गया और किस राज्य को कितना पैसा देगी बिहार को देती है
लगभग ाा लाख करोड़ रुपए यूपी को देती है ढ़ च लाख करोड़ रुपए हर राज्य को अपना अपना पैसे का बंटवारा करती है फिर सेना को देगी लगभग 7 लाख करोड़ फिर उनसे हिसाब मांगेगी ए सीएजी अपनी रिपोर्ट देंगे कितना पैसा खर्च किए बहुत लंबा प्रोसेस हो होता है बजट सत्र तीनों सत्र में सबसे बड़ा सत्र कौन होता है है भी तो भैया सबसे ज्यादा इसी में काम धाम करना है पैसे निकालने में हालत खराब हो जाता है वित्त मंत्री बजट प्रस्तुत करती है महिलाओं को कुछ छूट दिया जाता है बच्चों को कभी सोनार लोगों
को कभी एक्सपोर्टर को इंपोर्टर को जैसा जरूरत पड़ा उस हिसाब से इसी में कोई बोलेंगे चार को ट्रेन की उद्घाटन करते हैं यह करते हैं वो करते हैं दुनिया भर का सह बलिया घूम रहा है रेलवे में क्या नाम है इसका वंदे भारत नहीं समझ में आ गया 110 की स्पीड में चल रहा है कितना है 110 उसका एवरेज स्पीड 90 है कहीं कहीं 110 है र इतना ना हाई बने लोग ने इतना हाई गरीब आदमी के लिए हैय नहीं है व है नहीं गरीब आदमी के लिए यहां से दिल्ली का किराया 4500 है जहाज
का भी 4500 सब आदमी जहाज से नहीं जादा डर लगता है कोई आदमी को जा टुं में फट केगा ना जब डी में घुमाता है इस ट्रेन में रहेंगे डी लगेगा ना आगे पीछे झटका मारेगा दने डी में मारेगा आगे पीछे करेप नीचे मारता है हम लोग को अनुभव नहीं डी का जिनका पहला प ता है ना लगते हनुमान चालीसा पढ़ने तो बहुत सारे लोगों के पास फ्लाइट का ऑप्शन रहता भी है ना जाते लोग दूसरा इसके अला भी होता है फ्लाइट में रिस्ट्रिक्शन दुनिया भर के है य नहीं ले जा सकते हैं ये ऐसे
नहीं ले जा सकते हैं बहुत खाने पने का कोई सामान ले जाएगा तो बाहर कर देगा आप सोचिए लिटी छवा ले जा कगा बाहर कर इसमें पता नहीं क्या होगा यहां समझ में आया तो उसम रिस्ट्रिक्शन ज्यादा है आगे बढ़े तो सबसे बड़ा सत्र कौन होता है बजर से मानसून सत्र जुलाई में चालू होता है और अगस्त में खत्म हो जाता है जुलाई में चालू होगा अगस्त में खत्म हो जाएगा और यह नवंबर में चालू होगा दिसंबर में खत्म हो जाएगा इन सब में सबसे छोटा शीतकालीन होता है ठंड का दिन रहता है सबसे छोटा
होता है जैसे ये ना शुरुआत जुलाई में रहेगा लास्ट अगस्त तक जाएगा बट इसमें अलग है लास्ट नवंबर से शुरू होगा शुरुआत दिसंबर में खत्म हो जाएगा हर थोड़े-थोड़े दिन प सत्र बुलाया जाता है ताकि आप अपने क्षेत्र में जाइए जो समस्याएं दिख रही है उसको देखिए फिर संसद में वापस आइए फिर वा क्षेत्र में जाइए फिर संसद में आइए देख रहे हैं तो इसी तरह से चलते रहता है संसद के सत्र तो संसद में कितने सत्र होते हैं तीन सत्र संसद में कितने सत्र तीन स नियम ये है कि किन्हीं दो सत्रों के बीच
में छ महीने से ज्यादा का गैप नहीं होना चाहिए अगर कोई इमरजेंसी है तो आप कोई सत्र को खत्म कर सकते हैं जैसे सरकार ने एक सत्र खत्म कर दिया था मानसून सत्र मानसून सत्र 2020 में सरकार बुलाई ही नहीं थी क्योंकि भयानक कोरोना पड़ रहा था कोरोना के कारण मानसून सत्र नहीं बुलाई बजट सत्र बुलाई बजट सत में घोषणा किया गया मोदी जी ने बोला था कि जनता कर्फ्यू रहेगा फिर एक हफ्ता लॉकडाउन रहेगा फिर ऐसे करते करते देखिए सरकार की को भी दिक्कत यह था ना कि उनके लिए भी नया था असेसमेंट नहीं
कर पाई थी गवर्नमेंट अब मजदूर सबको बड़ी दिक्कत हुआ था पैदल आने में यहां पर वही अगर कह देते कि लौट के आ जाओ लोग यहां पे लेकिन उनको क्या लग रहा था कि कोरोना 10 दिन में कंट्रोल होगा 20 दिन में कंट्रोल हो जाएगा उन लोगों के लिए भी अनुभव नहीं था और दूसरा बड़े-बड़े जितने भी लोग होते हैं ये किसके दिमाग से चलते हैं सेक्रेटरी लोगों के दिमाग से सचिव लोगों को अब सचिव का पद इतना बड़ा होता है कि उसको धरातल पे उतरे हुए ना वो 20 साल पुराना आईएस होता है अब
डीएम के बंगला में बैठ के डीएम की गाड़ी में घुस के आप सड़क शहर घूमिए तो आपको एक लगेगा कि जाम कहां लगता है जाम तो लगता ही नहीं है क्योंकि आपकी गाड़ी के आगे चार को सायरन बजाते हुए जा रहा है सारा जाम हट गया उसको लगता है जाम की तो समस्या नहीं है यहां प तो वहां बाहर में बैठ के कुछ और लगेगा अंदर कुछ और लगता है य तो टोटल कितने सत्र होते हैं तीन लेकिन दो स किसी एक सत्र को आप गायब भी कर सकते हैं मजबूरी में जैसे कोरोना के समय
हटा दिया गया था समझ में आ रहा है कि नहीं आ रहा य लेकिन दो सत्रों के बीच अधिकतम कितना गैप हो सकता छ महीना से ज्यादा गैप नहीं हो सकता है देश के लिए कोई कानून बनाना होगा कौन बनाएगा सत्र में तो इसमें बुलाने के लिए अपने से को चल जाएगा आए थे दिल्ली तो नहीं संसद खोलो तो हमारा सिटव किधर है हम बैठ जाते हैं भगा देगे उठा के य भागे यहां से म्यूजियम समझाएगा जब मन तब आ जाओ जब राष्ट्रपति आहूत करेंगे तब आना समझ में आ गया अब और जब वापस भेजना
होगा तो 17 और अगर अंदर बैठे हैं तो डिसिप्लिन से रहिएगा वरना लोकसभा का अध्यक्ष और राज्यसभा का सभापति कारवाही को क्या कर देगा स्थगित स्थगन की जो क्रिया होती है यह पूरा सदन स्थगित होता है या सदन की कार्यवाही स्थगित होती सदन की कारवाई स्थगित होता है पूरा सदन स्थगित नहीं होता है अब विगटन की क्रिया कार्य बताइए कारवाई विघटित होती है या फिर लोकसभा ही विघटित हो जाती पूरा कंप्लीट लोकसभा विघटित हो जाएगी क्या कभी राज्यसभा का विगटन होगा राज्यसभा का विगटन नहीं होगा राज्यसभा एक अस्थाई सद राज्यसभा कैसा सदन है अस्थाई सदन
एनी प्रॉब्लम किसी को कोई दिक्कत राज्यसभा कैसा सदन है पत्र को कौन बुलाएगा वापस भेजेंगे कंट्रोलिंग कौन करेगा अध्यक्ष और सभापति कंट्रोल के बाहर है तो कारवाही को स्थगित अब बहुमत खो दिए तो वि लोकसभा का विन या राज्यसभा का आर्टिकल 85 समझ में आ गया सिंपल है कि नहीं है अब आर्टिकल 86 और आर्टिकल 87 समझते हैं इसमें राष्ट्रपति के अभिभाषण की चर्चा है किसकी चर्चा है अभिभाषण की चर्चा दोनों एक ही चीज है पहले समझ जाइए 86 भी वही है 87 भी ही राष्ट्रपति संसद के अंग होते हैं इसलिए वह संसद के बाहर
बैठते हैं ना कि लोकसभा में बैठेंगे ना ही वह राज्यसभा में बैठेंगे क्योंकि अगर उन्हें राज्यसभा और लोकसभा में बैठा दिए जाए तो समकक्ष लगने लगेगी समझ में आ गया कि नहीं आ गया आप कहीं भी पढ़िए देखिएगा आपके बगल में टीचर नहीं बैठे आप जिस बेंच पर बैठेंगे टीचर उस बेंच पर बैठते हैं नहीं बैठते उनका अलग जगह होता है उसी तरह लोकसभा और राज्यसभा में राष्ट्रपति नहीं रहते हैं वह बाहर रहते हैं कहते तुम लोग अपना बवाल कर लेना तुमको जो अच्छा लगेगा विधेयक पास कर लेना और जो खराब लगेगा मत पास कर
लेना लोकसभा पास करलेना राज्यसभा पास कर पास कर लेना तब मेरे पास भेजना तुम सामूहिक लोगों का जितना पावर है ना उतना अकेले लेकर बैठे हैं आप नहीं समझे पूरा लोकसभा पास कर दे पूरा राज पास करते राष्ट्रपति साइन नहीं करे पॉकेट बीटो लगाते तो कह रहे नहीं हमको तुम अपने बगल में मत बैठा तुम सामूहिक जितना पावर रखा है उतना हम अकेले रखें साइन नहीं करेंगे क्या कर लेगा तुम महाभियोग लाना इतना आसान होता है क्योंकि उपस्थित सदस्यों का दो तिही नहीं कुल सदस्यों का दती है उसमें विपक्ष साथ नहीं देगा यहां पर तो
राष्ट्रपति बहुत पावरफुल चीज है तो राष्ट्रपति को भाषण देने के लिए बुलाया जाता है जिसे राष्ट्रपति का अभिभाषण कहा जाता है क्या कहा जाता है राष्ट्रपति का अभिभाषण अब राष्ट्रपति का जब अभिभाषण होता है तो राष्ट्रपति जाकर बोलेंगे लोकसभा में राज्यसभा में संयुक्त रूप से बोलते हैं कहते हैं सबको बलाओ एकही जगह सबको बलाओ तो सेंट्रल हॉल है जो बीच में तो सेंट्रल हॉल में बुला के बैठाया जाता है कहता बैठो सब लोग बैठो बैठो इधर लोकसभा वाला बैठे राज्यसभा वाला लोकसभा को लेक कौन आएगा अध्यक्ष चलो चलो चलो नहीं नहीं उधर नहीं इधर उधर
कैसे स्कूल में पीटी होता था कभी-कभी तो अपने अपने क्लासरूम से क्लास टीचर लेके आते थे छड़ी लेके क्लास सिक्स वाले इधर खड़े रहो क्लास सेवन वहां ऐसे लाइन लगा लाइ तो उधर लोकसभा वालो को कौन ले आएगा अध्यक्ष ये तुम कुर्ता वाला इधर बैठो इधर हां चलो इधर बैठो राज्यसभा इधर ले आएंगे सबको बैठा देंगे सरा चीजें ठीक हो जाएगी तब किसे बुलाया जाएगा राष्ट्रपति को राष्ट्रपति आएंगे और संयुक्त रूप से बैठे लोगों के सामने भाषण देंगे जिसे कहा जाता है राष्ट्रपति का अभिभाषण राष्ट्रपति के इस अभिभाषण की राष्ट्रपति की ताकत कितनी है समझिए
राष्ट्रपति जो भाषण पढ़ते हैं ना उसको मंत्रिमंडल लिख के दिया होता है और वही पढ़ना है उनको यह है राष्ट्रपति का पावर तो साल में एक बार बलाया उनको भाषण देने के लिए वो आपने लिख के पढ़ा तुम सुनोगे राष्ट्रपति का अभ भाषण तो हसी आएगा राष्ट्रपति क्या बोलेंगे ना मेरी सरकार मतलब मोदी जी की सरकार को क्या बोलते हैं मेरी सरकार मेरी सरकार महंगाई कंट्रोल करने के लिए कृतज्ञ है समझ में आ गया राष्ट्रपति के अभिभाषण में केवल सरकार की तारीफ की रहती है और वह अपने नाम से तारीफ करते हैं मेरी सरकार शिक्षा
पर कार्य कर रही है शिक्षा को नई बुलंदियों पर ले जाएगी यहां पर मेरी सरकार परीक्षा में नकल करने को रोकने के लिए एकदम आतुर है मेरी सरकार पेपर लीक होने नहीं देगी मेरी सरकार दिन दुनी रात चौगुनी वैकेंसी निकालती जाएगी मेरी सरकार विद्यार्थियों की फीस में कटौती करके टैक्स कम कर देगी मेरी सरकार ऐसे करते करते खूब भाषण देंगे रीजन क्यों मेरी सरकार मेरी सरकार क्यों बोल रहे हैं मंत्रिमंडल को ही सरकार कहा जाता है और मंत्रिमंडल ने इनका भाषण लिख के दिए हैं यही तो है राष्ट्रपति का अभिभाषण अब जब राष्ट्रपति चले जाएंगे
ना तो सरकार के लोग खड़े होंगे धन्यवाद प्रस्ताव देंगे धन्यवाद वो चले गए अस देके चले गए अब वो खड़े होक ना वहां कोई नहीं है अब वहां कौन आ जाएगा अध लोकसभा अपने यहां चल जाएगा राज्यसभा अपने यहां चल जाएगा अब वहां भाषण दिया जाएगा धन्यवाद राष्ट्रपति महोदय को जो अपना उन्होंने बहुमूल्य समय हम लोगों के लिए निकाला और उनके अभिभाषण से हम पूर्णत संतुष्ट हैं सरकार कृतज्ञ है जनता की भलाई के लिए सरकार वाला अपना काम करके चल गया अब उठेगा विपक्ष वाला धन्यवाद प्रस्ताव में कौन उठेगा सब विपक्ष वाला कि हमारी सरकार
दिन पर दिन पेपर लिख हो रहा है पेपर लिख करने के लिए कानून बना रहे हैं यहां पर विपक्ष अपना डाटा लेकर बछ रहेगा मार तीन चार दिन तक हो हंगामा होगा धन्यवाद प्रस्ताव इनका धन्यवाद ही नहीं खत्म हो रहा है यहां एक को खूब तारीफ करेगा बवाल करेगा उसके बाद वोटिंग होगा कि चलो भाई धन्यवाद प्रस्ताव को हम लोग वोट कर देते हैं आधे से ज्यादा लोग कहना चाहिए ठीक है धन्यवाद है तो भैया जो सरकार बना के बैठा है उसके पास आधा से ज्यादा सीटता है तभी तो सरकार बनाया है तो जब आधा
से ज्यादा सीट ही है तो धन्यवाद प्रस्ताव में अटके ग कहां और अगर धन्यवाद प्रस्ताव अटक गया तो मंत्री मंडल पर महाभियोग लाया जाएगा मंत्रिमंडल आइए मंत्रिमंडल पर कहा जाएगा अविश्वास प्रस्ताव ला दिया जाएगा वो आगे पढ़िए कैसे अविश्वास प्रस्ताव लाता है तो समझ में आ गया धन्यवाद प्रस्ताव क्या होता है राष्ट्रपति का भाषण कौन तैयार करता है मंत्रिमंडल और ऐसा नहीं है कि वो बोल देते हैं कि मेरे लिए भाषण लिख देना मजबूरी है वही पढ़ेंगे ही पढ़ेंगे नहीं पढ़ेंगे ना तो इसे संविधान का उल्लंघन मान के उनके ऊपर महाभियोग लगा देगा हमारी सरकार
हमारी सरकार करते रह जाएंगे नहीं समझ क्या ऐसा ऐसा बात बोला जाता है यहां प इसे क्या कहा जाता है राष्ट्रपति का अभिभाषण अच्छा एक होता राष्ट्रपति का अभिभाषण साल में बस एक बार होगा राष्ट्रपति का अभिभाषण साल में एक बार और वो पहला भाषण होगा साल का पहला तो इतना तो समझ में आ गया यदि साल में पहला भाषण उन्हीं का होगा तो वह बजट सत्र का पहला दिन होगा बजट सत्र का पहला वही ना है भैया साल का पहला सत्र कौन सत्र होता है बजट सत्र आखिरी सत्र कौन होता है अब जब हम
ये कह रहे हैं कि साल का पहला ही भाषण राष्ट्रपति देंगे हर साल बस एक बार भाषण देंगे जिसे राष्ट्रपति का अभिभाषण कहा जाएगा तो बताइए वो कौन से सत्र में देंगे कौन से सत्र में बजट सत्र में देंगे और बजट सत्र का पहला दिन कि आखिरी दिन पहला दिन शुरुआत होता उन्हीं के भाषण से आते हैं भाषण देके चले जाते हैं और उधर धन्यवाद राष्ट्रपति महोदय उधर लगता है बुराई करने यानी शुरुआत ही बवाल से हो जाती है हर साल हर साल राष्ट्रपति आएंगे और स्टार्टिंग का दिन में अपना भाषण देके चल जाएंगे एक
धन्यवाद देगा एक सर आप यह हो गया राष्ट्रपति का अभिभाषण किसी को दिक्कत राष्ट्रपति के अभिभाषण कौन लिखता है राष्ट्रपति के अभिभाषण हा मंत्री एनी प्रॉब्लम अब हम लोग देखते हैं राष्ट्रपति का विशेष अभिभाषण अब यह क्या होता है भैया विशेष अभिभाषण देखो हर साल जो राष्ट्रपति भाषण देने आते हैं उन्हीं लोगों को देते हैं जो पिछली बार भाषण सुन रहे थे अगली बार फिर उन्ह देंगे लेकिन जिस साल चुनाव हुआ रहता है जैसे 2014 में चुनाव हुआ था 2019 में हुआ था 2024 में हुआ है फिर 2029 में चुनाव होगा समझ में आ रहा
है कि नहीं आ 2029 में चुनाव होगा अब जिस साल चुनाव होता है ना उस साल जो भाषण दिया जाता है उस भाषण को अभिभाषण ना कहकर उसके अगवा बस एक शब्द जोड़ दीजिए विशेष अभिभाषण क्या कहा जाता है विशेष अब विशेष अभिभाषण लिए कोई जरूरी नहीं है कि बजट सत्र में ही देंगे जिस महीने चुनाव रिजल्ट आया जैसे इस बार जून में आया था रिजल्ट कब आया था विशेष अभिभाषण कब हुआ था जून जुलाई में हुआ जून में तो इन लोग के मानसून सत्र में हुआ जुलाई में रीजन क्या जून में तो शपथ लेने
में सब बिजी हो गए शपथ लेने के टाइम प खूब हो हंगामा हुआ कोई जाकर कुछ बोल रहा है कोई कुछ बोल रहा है शपथ लेने के टाइम समझ में आ रहा है कि नहीं आ गया आप गौर से देखिएगा राष्ट्र के ऊपर हमारा स्वार्थ हावी हो गया है हम देश को बाद में सोचते हैं अपना स्वार्थ पहले सोचते हैं य पर देश में अगर किसी को 10 करोड़ रुप दे दीजिएगा ना कहिए य वाली सूचना दे दो तो दे देगा देश की सूचना किसी भी विभाग के किसी सरकारी कर्मचारी या प्राइवेट कर्मचारी आप दो
चार करोड़ में किसी को खरीद सकते हैं आप पर यानी देश से ऊपर क्या है राष्ट्र है राष्ट्र से ऊपर यहां देखेंगे राजनीति है राजनीति से ऊपर धर्म है चौथा नंबर पर भारत में देश को रखता है सबसे सर्वोपरि भारत में सर्व पर उसके बाद राजनीति जिसको वोट डाल के आया है ना उसको य नहीं समझ में नेता चुना है कि बाप चुन के आया है मतलब आप भारत में किसी के बाप के बारे में बोलिएगा उचार को सुन लेगा हां ऐसा हो सकता है लेकिन जिसको वोट डाल के आया उसके बारे में बोलिए सुन
में नहीं करेगा अच्छा तुम्हरे शासन काल में ऐसा हुआ था क्या जब हमारी सरकार हुआ करती थी दिन 30 घंटे का होता था पृथ्वी चपटी थी तुम्हारी सरकार आई दिन 24 घंटा का हो गया हमारे सरकार में सूरज दक्षिण से निकलता था तुम पता नहीं कहां से सरकार आया ऐसे तो भाषण देता है सब नहीं समझ आ गया आगे बढ़े तो जिस साल चुनाव रहेगा उस साल के भाषण को जिस साल चुनाव रहेगा उस साल नर्मल रहेगा तो अभिभाषक चुनाव रहेगा तो नर्मल में अभि भाष नर्मल में तो देखो 88 तो पढ 85 पढ़ा दिए
ना 86 में अभिभाषण 86 में क्या है अभिभाषण और 87 में है विशेष अभवा 87 में विशेष अभी खत्म नहीं हो रहा है जी तो खाते जा रहा है विशेष अभिभाषण अभिभाषण और विशेष अभिभाषण किसी को दिक्कत भाषण और विशेष अभिभाषण किसी को कोई दिक्कत नहीं है ये दोनों तो पढ़ा ही दिए आप लोगों को आगे बढ़े आगे पढ़ना है सत्र के बारे में सत्र के बारे में आगे पढ़ना है 85 में क्या था भैया सत्र सत्रावसान 86 में क्या था अभिभाषक 87 में वि यहां तक तो पढ़ाई दिए थे अब 88 जो आर्टिकल दिया
है ना इसमें दो लोगों के अधिकार की चर्चा किया है एक अटॉर्नी जनरल का क्या अधिकार होगा और दूसरा मंत्रियों का सदन में क्या अधिकार होगा समझ में आ गया कि नहीं आ गया एटर्नी जनरल और मंत्री सदन के अंदर यानी लोकसभा या राज्यसभा के अंदर इनके पास क्या-क्या अधिकार होगा इसकी चर्चा किया है अटॉर्नी जनरल आर्टिकल 76 में है यह पैसे से वकील होता है और केंद्र सरकार के मुकदमे को लड़ता है योग्यता सुप्रीम कोर्ट के जज के बराबर होती है अर्थात भारत के किसी न्यायालय में मुकदमा लड़ सकते निजी व्यक्ति का भी मुकदमा
लड़ सकता है अर्थात निजी प्रैक्टिस भी कर सकता है मुकदमा लड़ने को प्रैक्टिस बोला जाता है वहां समझ में आ गया कि नहीं आ गया किसी को दिक्कत तो लेकिन अगर सरकार के खिलाफ हीर कुछ बोल देंगे हम तो नहीं लड़ेगा हमारा मुकदमा नहीं लड़ेगा तो अटॉर्नी जनरल और मंत्री इनका सदन में कुछ अधिकार होते हैं आप अगर गौर से देखिएगा तो हम आपको पढ़ाए हैं कि संसद के दो सदन होते हैं एक का नाम है लोकसभा एक का नाम है राज्यसभा अब प्रॉब्लम यह आता है कि मंत्री बनने के लिए लोकसभा का सदस्य होना
चाहिए या राज्यसभा का किसका होना चाहिए किसका बकलोल क की किसी भी सदन का सदस्य बन सकता है इवन बिना सदस्य बने ही छ महीना मंत्री बना जा सकता है बेकू सबको समझा समझा थक गए हैं कि किसी भी सदन से होता है प्रधानमंत्री रह गए 10 साल तक मनमोहन सिंह राज्यसभा से जयशंकर साहब की कहा लोकसभा का चुनाव लड़े कहां से राज्यसभा गजब हाल है लोग का मंत्री किसी भी सदन का हो सकता है लेकिन मंत्री बैठेगा कहां पर लोकस मंत्री बैठेगा कहां अटॉर्नी जनरल भी लो मंत्री किसी भी सदन का हो चाहे वह
लोकसभा का हो या राज्यसभा बैठेगा वो लोक क्योंकि लिखा गया है कि मंत्री परिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदाई है अच्छा य बताइए तब राज्यसभा वाले को किसी मंत्री से सवाल पूछना होगा तो यहां आता होगा सब नहीं वह अपने संसदीय सचिवालय को लेटर लिखते हैं सभापति को बोलते हैं कि हमें यह यह सवाल पूछना है तो उस मंत्री को कहा जाता है कि आप लंच के बाद इधर आ जाइएगा समझ में आ गया जैसे पांच को मंत्री को बुला लेगा कि आप इधर रहिएगा तो उन पांच से इधर सवाल पूछा जाएगा जो
रेस्ट बचे हैं इधर सवाल पूछा गया फिर ऐसे पलट दिया जाएगा यानी मंत्री कहां बैठेगा लो लेकिन मंत्री राज्यसभा से भी आ सकता है लोकसभा से भी आ सकता है मंत्री कहीं भी आ सकता है समझ में आ रहा है कि नहीं आ रहा अब और अटॉर्नी जनरल लोकसभा अगर सरकार की बातें राज्यसभा में रखनी है तो अटॉर्नी जनरल कहां जाएगा राज्यसभा लेकिन फिर आगे बैठ जाएगा लोकसभा में आके बैठ जाएगा कोई दिक्कत आगे बढ़े समझो ध्यान से अब ये तो मंत्री बैठ गए किसी विधेयक पर प्रस्ताव पास होना है जैसे कोई विधेयक लाना है
महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण की बात थी सीटों की संख्या आरक्षित करनी थी संसद में एक तिहाई तो मतदान होना जरूरी है बहस तो चल गया ठीक है अब मतदान करना जरूरी है विधेयक पास हो रहा है कि नहीं तो मतदान के समय मंत्री अपने ओरिजिनल सदन में लौट जाएगा जो लोकसभा का है वो बैठा रहेगा लोकसभा में ही और जो राज्यसभा का है अब वोटिंग के लिए लौटेगा कहां राज्यसभा और एटर्नी जनरल उठ के चले जाएंगे कि तेरा यहां कोई नहीं समझ में आ गया कि नहीं आ गया एटर्नी जनरल को उठके जाना
पड़ेगा वो वोटिंग के टाइम प नहीं रह सकते बाहर जाकर कैंटीन में चाहे सम सा बिस्किट खाएंगे अपना यहां पे अ नहीं तो वहीं टुकुर टुकुर बैठ रहेंगे वोटिंग की राइट छीन ली जाएगी उनके सीट प ना वोटिंग वाला बटन नहीं होता है जो सीट होता है ना वही बटन होता है यस नो कुछ भी नहीं करना है एब्सन समझ में आ गया कि नहीं आ गया तो अभी नहीं है किय बटन दबाइए उनका कैलकुलेशन करके कहां पहुंचा होता है अध्यक्ष के पास उनका सीट अलग होता है उनके पास बड़का कंप्यूटर होता है स्क्रन में
पैसे लगा रहता है वो बता देता है कि पक्ष में इतने वोट आए हैं विपक्ष में इतने वोट आए हैं अ विदया को पास किया जाता है समझ आ नहीं आ गया उनके पास होता लेकिन अटनी जनरल वाले के पास होता है बताइए सदन में मंत्री किस सदन का होता है दोनों सदन का हो सकता है हा लोकसभा दोनों का हो सकता है समझ लेकिन बैठता कहां है मतदान के समय मंत्री कहां जाएगा अपने वास्त सदन में जाएगा और अटनी जनरल बाहर जाए अटनी जनरल बाहर अटनी जनरल नहीं आने वाला य क्योंकि उसको पावर ही
नहीं दिया समझ में आ गया कि नहीं आ गया अब 89 देखते हैं सभापति और उपसभापति सभापति और उपसभापति सभापति और उप सभापति सभापति और उपसभापति सभापति और उपसभापति क्या होता है भैया इनके बारे में देखते हैं देखिए यह राज्यसभा है आपको पता दिए दो सदन होते हैं एक होता है लोकसभा एक होता है राज्यसभा राज्यसभा का जो चेयरमैन होता है क्या होता है चेयरमैन उसी को हिंदी में क्या कहते हैं सभापति क्या कहा जाएगा सभापति अब देखिए सभापति जो होते हैं उनका तो इलेक्शन होता ही नहीं है यह क्या होते हैं उपराष्ट्रपति सभापति क्या
होते उपराष्ट्रपति उपराष्ट्रपति को ही क्या बना दिया जाता है सभापति अतः सभापति राज्यसभा का सदस्य नहीं होता है जबकि उपसभापति का क्या होता है चुनाव होता है और यह चुनाव किसके बीच से होता है राज्यसभा अपने ही सदस्यों में से एक को क्या चुन लेती है उपसभापति जबकि सभापति का इलेक्शन नहीं होता है वह उपराष्ट्रपति को ही एक ठो पोस्ट दे दिया जाता है कि आपको यह काम संभालना है किसी को कोई दिक्कत तो सभापति उपसभापति में कौन सा है जो सदन का सदस ही नहीं है सभापति यानी चेयरमैन सदस्य नहीं होता है चेयरमैन इसका
सदस्य नहीं होता है आगे बढ़े उप सभापति का क्या होता है इलेक्शन होता है अब राज्यसभा के अंदर जो भी कार्यवाही होगी क्योंकि राष्ट्रपति तो आहत कर देंगे यानी बुला लेंगे अब हाउस को डिसिप्लिन से चलाना रूल रेगुलेशन से चलाना कोई प्रस्ताव पास हुआ या नहीं हुआ अंदर किसी को सजा देना है जो भी डिसिप्लिन मेंटेन करना है यह सारा काम किसका हो जाएगा सभापति और उपसभापति सभापति और उप अब राष्ट्रपति हस्तक्षेप नहीं करेंगे यहां राष्ट्रपति हस्तक्षेप नहीं करें अब जैसे रूल है कि अगर कोई लगातार 60 दिन तक अब्सेंट रहा संसद में तो उसके
जीते हुए कोई फायदा नहीं उसकी सदस्यता रद्द कर दी जाती है तो अगर वह 60 दिन तक लगातार राज्यसभा में एब्सेंट रहा है तो इधर से कौन रद करेगा सभापति और इधर से अगर लोकसभा में है तो अध्यक्ष बताइए सर्वे सरवा कौन होता है अपने सदन राज्यसभा का सर्वे सरवा इसीलिए सभापति को हम पदेन सभापति कहते हैं क्या कहेंगे पदेन सभापति सभापति को क्या कहेंगे पदेन सभापति पदेन का अर्थ होता है सर्वे सर्वा समझ में आ गया कि नहीं आ गया बताइए तो राज्यसभा का पदेन अधिकारी कौन होता है सभापति और उपसभापति यानी इनकी यह
इनके मतलब डिसीजन में कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकता है क्योंकि सभापति का तो इलेक्शन होगा नहीं उपसभापति से ही आ जाएगा अब उपराष्ट्रपति ही आ जाएगा अब समझिए ध्यान से कभी भी राष्ट्रपति का पद खाली रहता है तो उस इमरजेंसी पीरियड में लिए उपराष्ट्रपति जाते हैं उन्हें भरने के लिए अर्थात यहां से सभापति का पद खाली हो जाएगा तो उस कंडीशन में उपराष्ट्रपति क्या उपसभापति सभापति की कुर्सी प आके बैठ जाते हैं तो सभापति की कुर्सी पर तो बैठ जाएंगे वो चेयरमैन की कुर्सी पर तो बैठ जाएंगे लेकिन उपराष्ट्रपति नहीं कहलाएंगे उपराष्ट्रपति नहीं कहलाएंगे समझ
में आ गया कि नहीं अब बताइए उस दौरान उप सभापति का पद खाली रहेगा या भरा रहेगा खाली रहेगा सब थोड़े भरने की जरूरत है यहां पे किसी को कोई दिक्कत आगे बढ़े देखिए यहां में तो प्रॉब्लम नहीं होता प्रॉब्लम कहां होता है उपसभापति का पहले से खाली हो उपसभापति का पहले से खाली हो उपसभापति का पद क्या रहेगा पहले से सपोज कीजिए खाली है और उसमें और अब सभापति तो देख रहे होंगे सारा मेंटेन कौन कर रहा होगा सभापति सभापति तो देख ही रहे होंगे अब सभापति को अचानक राष्ट्रपति रिजाइन त्या पत्र दे दे
तो सभापति चकि उपराष्ट्रपति होता है उधर अचानक दिया तो इसको जाना पड़ेगा वहां पर तो पहले से उपसभापति का खाली था और इधर ही राष्ट्रपति बन के चल गया कारवा के राष्ट्रपति सभापति तब तो य तो दोनों पद खाली हो गया जब दोनों पद खाली हो जाए तो जो सबसे सीनियर होता है वही टेंपररी तौर पर क्या करता है हाउस को चलाता है यानी सदन को चलाता है तो बताइए जब दोनों में से कोई नहीं रहेगा तो सभी सीनियर अब ब हो जाएगा भैया हम सीनियर की तुम सीनियर तो जब कभी भी दोनों अनुपस्थित हो
अर्थात सभापति और उपसभापति दोनों अनुपस्थित हो दोनों ही नहीं है तो इस कंडीशन में पांच सीनियर मेंबर पांच सीनियर मेंबर राज्यसभा के सीनियर मेंबर की लिस्ट किसके पास जाएगी राष्ट्रपति के पास किसके पास जाएगी राष्ट्रपति के पास और राष्ट्रपति इन पांच सीनियर मेंबर में जिसको कहेंगे कि भैया आप इसकी अध्यक्षता संभाल लीजिए तो राष्ट्रपति उसको वो इंसान राज्यसभा को संभालने लगेगा और यह कोई बहुत लंबे समय तक तो संभालना नहीं है कुछ समय के लिए संभालना है क्योंकि जो उपराष्ट्रपति है वह कार्यवाहक राष्ट्रपति के तौर पर गया है मैक्सिमम छ महीना रहेगा कितना महीना रहेगा
छ मही वापस आ ही जाएगा यहां पर तो यह समझ में आ गया कि नहीं आ गया किसी को कोई दिक्कत सभापति उ सभापति का काम समझ में आ रहा है कि नहीं आ रहा है तो यह हो गया आपका सभापति बताइए राज्यसभा किसके अंडर में काम करेगा सभापति सभापति के नीचे उप सभा जब दोनों ही नहीं रहे तो कितने सीनियर में सिलेक्शन होगा व सिलेक्शन कौन करेगा राष्ट्रपति सभापति का चुनाव होता है किसका चुनाव होता है उपरा उसको एक्स्ट्रा प्रभार सझ जाता है सभापति का राज्यसभा का पदेन कौन होता है अब बता सभापति को
हटाने के लिए तो महाभियोग क्योंकि सभापति क्या होता है उपराष्ट्रपति तो अब आपको पढ़ना है किसे हटाने के लिए उपसभापति क्योंकि उपसभापति का चुनाव किसने किया था राज्यसभा तो राज्यसभा जैसे चुनाव करके लाई थी वैसे ही चुनाव करके इन्हें हटा भी सकती है तो यानी सभापति को हटाने के लिए तो महाभियोग लाना पड़ेगा क्योंकि उपराष्ट्रपति होता है लेकिन उपसभापति को हटाने के लिए केवल राज्यसभा अगर प्रस्ताव पास कर देगी तो उसे लोकसभा में जाने की जरूरत भी नहीं है समझ में आ गया किसी को कोई दिक्कत बताइए ये आर्टिकल भी याद रहेगा 89 ये बहुत
इंपोर्टेंट आर्टिकल आर्टिकल 89 आर्टिकल 89 किसी को कोई दिक्कत अब 93 देखते हैं आर्टिकल 93 89 के बाद सीधा 93 इसमें क्या है सभापति और उपसभापति सभापति और उप सभा पति सभापति और उपसभापति 93 में है अध्यक्ष और उपाध्यक्ष अध्यक्ष और उपाध्यक्ष अध्यक्ष और उपाध्यक्ष अब बीच का जो आर्टिकल है वो कहां गायब है वो सारी बातें हम आपको पढ़ा दिए हैं 93 में क्या है अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की चर्चा है अब देखो अध्यक्ष सभापति उपसभापति भी अपने अपने सदन के सर्वे सर्वा होते हैं अत उसे वर्ड क्या यूज करते हैं पदेन सभापति तो यह
भी अपने अपने सर्वे सर्वा होंगे इसलिए इनको भी क्या करेंगे पदेन अध्यक्ष पदेन अध्यक्ष अब इसके साथ प्रॉब्लम समझी क्या है कि अध्यक्ष जो होता है वो कहां बैठता है लोकसभा में अध्यक्ष कहां बैठेगा लोकसभा और सभापति कहां बैठते हैं तो यहां तो इसकी अध्यक्षता कौन करता है भैया अध्यक्ष कौन करेगा अध्यक्ष अध्यक्ष को अंग्रेजी में क्या कहेंगे स्पीकर और अध्यक्ष के नीचे कौन है भैया उपाध्यक्ष अध्यक्ष के नीचे उपाध्यक्ष इधर में कौन बैठा है सभापति इधर में सभापति सभापति के नीचे कौन है सभापति के नीचे है उपसभापति उप सभा पति सभापति के नीचे कौन
है सभापति के नीचे उपसभापति है तो वहां तो एक अलग कंडीशन है उप सभापति को अलगे पोस्ट लेके रख ले दूदू के पोस्ट लेके रख ले यहां पे क्या है कि अध्यक्ष और उपाध्यक्ष इसी 545 में से आना है तो अध्यक्ष का भी चुनाव होना है उपाध्यक्ष का भी चुनाव होना है और यहां पर केवल चुनाव किसका होना है उपसभापति इसका चुनाव नहीं होगा उसका चुनाव उपराष्ट्रपति के तौर पे होगा तो लोकसभा अपने में से ही एक को अध्यक्ष चुनती है और एक को उपाध्यक्ष चुनती है वर्तमान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला है जो कोटा से
लोकसभा के सदस्य हैं यह उनका तीसरा कार्यकाल है कौ सा कार्यकाल है तीसरा कार्यकाल है आप समझ में आ गया कि नहीं आ गया तो 545 में एक को क्या चुनना है अध्यक्ष एक को क्या चुनना है उपाध्यक्ष एक को अध्यक्ष और एक को उपाध्यक्ष किसी को कोई दिक्कत एक को अध्यक्ष चुन लेंगे और एक को क्या करेंगे स्पीकर और डिप्टी स्पीकर किसी को कोई दिक्कत नहीं है यहां पर अगेन वही अगर दोनों अनुपस्थित हैं तो पांच सीनियर में से राष्ट्रपति जिसे कहेंगे वो जाके क्या करेगा अध्यक्षता समझ में आ गया कि नहीं जब दोनों
उपस्थित नहीं जब दोनों अनुपस्थित रहेंगे तो जब सबसे सीनियर होगा वही जाके क्या करेगा अध्यक्षता करेगा किसी को कोई दिक्कत नहीं है आगे बढ़े अब इनके पावर वगैरह को समझ जाते हैं तो समझिए ध्यान से यहां आप बताइए उपसभापति को हटाने के लिए तो हमें महाभियोग लाना पड़ेगा रीजन क्या है भैया उप राष्ट्रपति था वो सभापति का एक्स्ट्रा काम कर रहा था इसे थोड़े ना हटा दीजिएगा उसको समझ में आ गया कि नहीं गया लेकिन अध्यक्ष को हटाने के लिए कुछ झमेला नहीं है ये जो आधे लोग 545 में से जो आधे लोगों ने वोट
दिया था यानी बहुमत दिया था आधा यानी साधारण बहुमत जिसे कहते हैं उन्होंने साधारण बहुमत से जब किसे चुना था अध्यक्ष को तो साधारण बहुमत से ही अध्यक्ष को वापस भी भेज सकते हैं तो अध्यक्ष उपाध्यक्ष को हटाने के लिए महाभियोग नहीं लाना पड़ता है बल्कि नॉर्मल एक प्रस्ताव लाना होता है और उस प्रस्ताव में आधे से अधिक लोगों ने कह दिया कि नहीं हमें अध्यक्ष नहीं ठीक लग रहे हैं तो अध्यक्ष क्या हो जाएंगे हट जाएंगे तो बताइए अध्यक्ष उ अध्यक्ष को ज्यादा हटाना आसान है कि सभापति को अरे भैया अध्यक्ष को हटाने में
कोई झमेला ही नहीं है यहां पे लोकसभा प्रस्ताव लाए का काम खत्म और उसमें अरे भैया महाभियोग प्रारंभ करने के लिए एक चौथाई पास करने के लिए दो तिहाई और वो भी उपस्थित का दो तिहाई नहीं कुल क्षमता का दो तिहाई फिर 14 दिन टाइम दिया जाएगा अर्ध न्यायिक प्रक्रिया उसके लिए 14 दिन में वोट बैठेगी जिसमें लोकसभा राजसभा के सभी सदस्य रहेंगे वहां प्रस्ताव रखा जाएगा जांच होगी तब अगले सदन में जाएगा फिर वो दो तिहाई से पास करेगा बड़ा झमेला का चीज हो जाता है अब ध्यान से समझिए अध्यक्ष के ऊपर जिम्मेदारियां ज्यादा
हैं रीजन समझिए जिम्मेदारी ज्यादा क्यों है क्योंकि सारे मंत्री कहां बैठते हैं लोकसभा और मंत्री ही देश में काम करने के लिए जिम्मेदार है यानी जितना काम होगा वह लोकसभा के साइड से होने वाला है क्योंकि मंत्री किसके प्रति उत्तरदाई है लोकसभा के हा लोकसभा के प्रति मंत्रिमंडल उत्तरदाई है दूसरे के प्रति उत्तरदाई नहीं है किसी को कोई दिक्कत अब समझिए ध्यान से तो लोकसभा के अध्यक्ष के पास बहुत सारा काम होता है जितना सचिवालय हो गया य सब हो गया मंत्रिमंडल हो गया सब जितने काम धाम सब किसके अंडर में लोकसभा अध्यक्ष के अंडर
में सोचिए ना अध्यक्ष को प्रधानमंत्री को पूछना होता है सवाल बोलना होता है तो अध्यक्ष महोदय से पूछ के बोलते हैं बोलते हैं कि माननीय प्रधानमंत्री व स्पीकर अनाउंस करते हैं माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी अपना वक्तव्य रखें त व खड़े होते हैं कहते धन्यवाद अध्यक्ष महोदय लोकसभा के अंदर लोकसभा के अंदर सबसे सीनियर आदमी कौन है अध्यक्ष राज्यसभा के अंदर सभा प्रधानमंत्री और सारे मंत्री इन लोग के क्या होते हैं नीचे होते हैं हर्की के हिसाब से इन लोग के नीचे होते हैं अच्छा राष्ट्रपति किधर रहेगा अध्यक्ष मान के चलिए अध्यक्ष बैठे हैं तो
राष्ट्रपति आएगा तो राष्ट्रपति सीनियर रहेगा जूनियर राष्ट्रपति संसद का सदस्य नहीं है जो सीनियर और जूनियर होगा वह संसद का अंग है संसद का अंग है जैसे एक लोकसभा है राज्यसभा है वैसे अकेले अपने आप में क्या है राष्ट्रपति वो सीनियर जूनियर का बातें नहीं होता वो कहेगा कि हम तुम्हारा सदस्य है जो हमरा तुमरा में सीनियर करेगा नहीं समझ में आ गया अब जैसे आप स्टूडेंट है लोग ना तो स्टूडेंट में आपस में सीनियर जूनियर होगा कि तुम लोग अपना सनिर सीनियर जूनियर के चक्कर में हमरा से कहेगा कि हम आपसे जूनियर है कि
सीनियर हैं उस कैटेगरी में नहीं है हम नहीं समझ में आ गया सीनियर जूनियर का बातें नहीं हमारी सीनियर हमारा सीनियर जूनियर हमारे हिसाब से होगा समझ वो टीचर्स में होगा यहां पे किसी को कोई दिक्कत अब देखिए अध्यक्ष का चुनना क्या होता है अध्यक्ष सॉरी लोकसभा अपने में से एक को अध्यक्ष चुन लेती है एक को उपाध्यक्ष लेकिन जब चुनाव नहीं हुआ रहता है और ये 545 लोग इसमें गए रहते हैं व सब सीट के लिए झगड़ा कर लेगा य हम बैठेंगे तू कहेगा हम यहां बैठे गद्दा वाला कुर्सी हम यहां बैठे य बैठिए
बवाल नहीं कर देगा सब कहां बैठना है कहां नहीं करना है इस दुनिया भर का उन्हें लॉ एंड ऑर्डर कौन मेंटेन करेगा क्योंकि भैया जब तक चुनाव नहीं हो जाता है अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का तब तक कौन रहेगा नहीं समझे अध्यक्ष उपाध्यक्ष का एक बार चुनाव हो गया तब तो पूरी ल मेंटेन करने की जिम्मेदारी किसकी हो जाएगी अध्यक्ष और उपाध्यक्ष इधर हो गया लोकसभा इधर हो गया राज्यसभा इधर 245 इधर 545 अब लेकिन जब नया नया इसमें तो झमेला ही नहीं है इसमें एक बार में इलेक्शन ही नहीं होता है इसका इलेक्शन एक बार
में राज्यसभा का होता है हर दो साल पर एक तिया हर दो साल पर एक दिया और इधर क्या आता पूरा 545 एक बार हो जाएगा पूरा 545 एक बार में चला गया भैया अब क्या होगा कौन कहां बैठेगा सीट कौन लेगा शपथ कैसे लेगा कोई हैय नहीं है अध्यक्ष रहे तब ना लॉ एंड ऑर्डर मेंटेन करेगा डिसिप्लिन बैठी ऐसे नहीं अभी आपकी ब वहां कोई हैय नहीं है चुनाव कराना है कि अध्यक्ष का अध्यक्ष का चुनाव कराने के लिए भी कोई ना कोई चाहिए ना जी अध्यक्ष का चुनाव करने के लिए उसी में कोई
खड़ा हो कहेगा हम सोच रहे हैं अध्यक्ष बन जाए तो कहेगा तुम काहे सोच रहे हो विनोद हम काहे नहीं नहीं समझ में आ गया बवाल कर लेगा सब वहां पर तब क्या होगा तो इसमें कहा जाता है ना कि एक टेंपररी अध्यक्ष रहेंगे क्या रहेंगे अस्थाई अध्यक्ष अ अस्थाई अध्यक्ष बनाया जाएगा कैसा अध्यक्ष अस्थाई अध्यक्ष जिसे हम लोग कहते हैं प्रोटेम स्पीकर क्या कहेंगे प्रोटेम स्पीकर अस्थाई अध्यक्ष को क्या कहेंगे प्रोटेम स्पीकर प्रोटेम स्पीकर कौन नियुक्त कर देता है राष्ट्रपति कौन नियुक्त कर देगा राष्ट्रपति भेज देगा इन लोग को राष्ट्रपति नियुक्त करके प्रोटेम स्पीकर
प्रोटेम स्पीकर का काम क्या होता है यहां आके बैठ जाएगा इसका इलेक्शन की जरूरत नहीं है जो सबसे सीनियर आदमी है जैसे इलेक्शन में जितने लोग जीत के गए हैं उसमें कई जो सीनियर है पांच बार छह बार सांसद रहे हैं उसमें जो सीनियर आदमी है उसको क्या करना दिया जाएगा प्रोटेम स्पीकर प्रोटेम स्पीकर स्पीकर की कुर्सी पर जाकर बैठ जाएंगे उनको पता है कि हम ज्यादा दिन के मेहमान नहीं 10 दिन का काम है मेरा आग बैठ जाए प्रोटेम स्पीकर कहेगे कि आप सभी लोग को धन्यवाद आप सब लोग को बधाइयां आप सब लोग
लोकसभा के लिए चुनाव जीते हैं जहां जहां आपका नाम दिख रहा है वहां वहां बैठ जाइए सब लोग बैठ जाएंगे नियमावली बांट दिए जाएगा पीडीएफ की कैसे कैसे यहां काम होता है कौन सा सवाल कैसे पूछना उसके बाद ही कहेंगे कि एक काम करो लोग सब लोग आकर शपथ लो सब लोग आके क्या करो शपथ लो बगलिया में माइक लग गा समझ में आ टेबल और नाम बुलाएंगे वहां पर अपने अपने एरिया से सांसद जैसे तुम्हारा नाम बाबू हा सचिन कुमार जैसे मान के चलिए सांसद बन गया तो सचिन कुमार लोकसभा गया से हो हा
तो जैसे जो जिस एरिया के उस एरिया का नाम जैसे गया से य पर नाम लेंगे आके क्या करना पड़ेगा शपथ लेना पड़ेगा मैं शपथ लेता हूं कि मैं विधि द्वारा स्थापित और पूरा लिखा रहता है उसम पढ़ना होता है य पर समझ में आ गया कि नहीं पढ़ के उसम शपथ ले लिए अब नीचे जाकर नीचे उतरेगा सीढ़ से क् स्टेज प होता है वहां जाक साइन न करके चले जाइए बाप रे सोचो प्रोटेम स्पीकर का झमेला प्रोटेम स्पीकर का झमेला सचो कितना को शपथ दिलाना है 545 को शपथ दिलाना है बाप बाप हालत
खराब हो जाएगा शपथ इस बार शपथ में तो जिसको देखो कोई कुछ बोल रहा है कोई कुछ बोल रहा है आप नहीं समझ में आ गया कोई अपने राज्य के बारे में बोल रहा है कोई अपन जाति धर्म कोई कुछ अरे मत पूछो यहां पे इजराइल फिलिस्तीन गाजा हमामा जापान चीन ऑस्ट्रेलिया अरे भाई भारत का संसद है यार अब संसद का रूल है भाई उसके अंदर अब कुछ भी बोलेगा उस पर कोई कारवाई नहीं हो सकती संसद के अंदर कोई बोलेगा तो उस पर सुप्रीम कोर्ट कोई कारवाई नहीं कर सकता उसके लिए संसद की अपनी
एथिक्स कमिटी होती है वही कारवाई कर सकती है और कोई कारवाई नहीं कर पाएगा समझ में आ गया कि नहीं आ गया एनी प्रॉब्लम को दिक्कत चलिए तो प्रोटेम स्पीकर किसे बनाया जाता है बहुत वरिष्ठ हो जो य सब काम कराया हो आपने तो जो अपने पहली बार शपथ लेने जा रहा है व कहेगा बना दीजिए प्रोटेम स्पीकर ले अय कभी शपथ नहीं लिया बना देंगे उसको प्रोटेम स्पीकर नहीं ना बना सकते हैं तो प्रोटेम स्पीकर रिटी को देख के बनाया जाता है और यह बहुत टेंपररी पद होता है जैसे सारे लोग शपथ ले लेते
हैं सब लोग शपथ ले लिए प्रोटेम स्पीकर को अलग से राष्ट्रपति भेज देते हैं शपथ दिला के जाओ भैया तुम यहां से तो उसको राष्ट्रपति दिला दिए और बैठ के अपना सबको शपथ दिलाया 10 15 दिन लग जाता है शपथ दिलाने में क्योंकि संसद चा पा छ घंटा काम कर रहा है ऐसे थोड़ी होता है एकही बार में सामूहिक दिला देना डेली आएगा आप लोग देखते होंगे इस बार न्यूज प न्यूज पर देखे होंगे लोग शपथ लेने वाले लोगों को एक आदमी आता है तो 7 मिनट 10 मिनट लग जाता है उनको उठ के आना
है फिर शपथ लेना है फिर डायरी में उसको साइन करना है यहां पे फिर जाएंगे फिर उसकी जगह पर कोई और आएगा टाइम लग जाता है सारा शपथ लोग ले लेंगे तब प्रोटाइम स्पीकर कहेंगे कि देखो भाई बहुत भारी काम करा दिए हम बाप रे बाप सबको शपथ दिला दिए एकदम गला सूख गया एक काम और कर दो लोग तुम में से जो सबसे सीनियर है उसे हम क्या बनाएंगे इसमें से अस्थाई रूप से अध्यक्ष बनाएंगे हम तो अस्थाई है प्रोटेम है ना हम तो जाएंगे यहां पे लेकिन जब तक स्थाई नहीं बन जाते हैं
तो जो जिसकी सरकार है उसी के पास मेजॉरिटी है जिसकी सरकार है मेजॉरिटी उसी के पास है तभी ना वो सरकार में है तो उसे कहा जाएगा कि आप एक अध्यक्ष के नाम का प्रस्ताव दीजिए उधर से अध्यक्ष के नाम का क्या आएगा प्रस्ताव विपक्ष से प्रस्ताव दिया जाएगा आप भी हाथ आजमा लीजिए तो विपक्ष भी एक नाम का प्रस्ताव देगा कि हा ये आदमी क्या होना चाहिए स्थाई अध्यक्ष यानी अध्यक्ष होना चाहिए तो प्रोटेम स्पीकर दोनों के नाम प बोलेंगे कि ओम बिल्ला साहब का नाम इन्होंने प्रस्तुत किया और इधर कांग्रेस की ओर से
नाम इन्होंने प्रस्तुत किया माननीय सदस्य गण आप अपना अपना अपना अपना मत इस पर दे किसके नाम पर तो जो टेबल वाले के बैठ लो बटन होता है य दबा दिए सब उनके पास स्क्रीन होता है क देंगे धन्यवाद सदस्य महोदय प्रस्ताव पारित हुआ अब ओम बिल्ला साहब के पक्ष में 400 चल गया 300 जितना हो गया वहां पर और इनके पक्ष में इतना चला गया अब इन्हें क्या बनाया जाता है अध्यक्ष बनाया जाता है ताली बजेगा उठ जाएंगे कौन प्रोटेम स्पीकर आ जाएंगे कौन स्पीकर अरे तुम लोग काली ली मत बजाओ आ जाएंगे स्पीकर
आ जाएंगे प्रोटेम स्पीकर प्रोटे स्पीकर स्पीकर को कुर्सी देंगे एक सीढ़ से आएंगे ोट स्पीकर दूसरे सेढ़ से चल जाएंगे हो गया अब स्पीकर बैठ गए स्पीकर स्थाई रूप से बैठ जाएंगे धन्यवाद सदस्यगण हो गया अध्यक्ष बैठ गया समझ गया ऐसे अध्यक्ष उपाध्यक्ष दोनों का चुनाव कौन करा के जाता है प्रोटेम स्पीकर कौन करा के जाता है अध्यक्ष का भी और उपाध्यक्ष का दोनों लोगों को बैठा दिया अध्यक्ष की कुर्सी ऊपर होती है उपाध्यक्ष थोड़ी सी नीचे होती है हो गया बैठा के चले गए कौन प्रम स्पीकर बैठ के चले जाएंगे कौन प्र स्पीकर बैठ
व खत्म क अब बताओ बाबू क्या अध्यक्ष अलग से शपथ लेगा उपाध्यक्ष अलग से शपथ लेगा नहीं क्योंकि एक सामान्य सदस्य के रूप में वह ऑलरेडी प्रोटेम स्पीकर द्वारा शपथ दिलाया जा चुका रहता है प्रोटेम स्पीकर द्वारा शपथ दिलाया जा चुका होता समझ में आ रहा है कि नहीं आ रहा है किसी को कोई दिक्कत सोचिए और उसके बाद जैसे स्पीकर और अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव हो गया प्रोटेम स्पीकर का काम खत्म प्रोटेम स्पीकर का काम तम