आज के दौर में एक आर्गुमेंट किया जाता है और वह यह है कि सोशल मीडिया की फ्री एक्सेस हर शहरी हर सिटीजन का बुनियादी राइट होना चाहिए बुनियादी हक होना चाहिए यह बेसिक ह्यूमन राइट बन चुका है और इसकी फ्री एक्सेस को रियासतों को गवर्नमेंट्स को इंश्योर करना चाहिए लेकिन इसके साथ-साथ जब हम यह देखते हैं कि जदीद दुनिया जिसमें कैपिट ज्म का एक निजाम राइज है बहुत से मुमा के अंदर वहां पर तो अगर हमने दुकान से भी कोई चीज लेने के लिए जानी है तो हमारे पास कोई ना कोई करेंसी अपनी जेब में
होनी चाहिए वहां कोई भी कमोडिटी हमने कंज्यूम करनी है चाहे वह खाने पीने की अया हैं चाहे वह अद्वित है मेडिसिंस हैं पहनने के लिए कपड़े हैं या चलाने के लिए गाड़ी या कोई भी ऐसी चीज तो उसके लिए हमें कोई अल्टरनेटिव करेंसी चाहिए सिंस द एडवेंटो ह्यूमैनिटी हम यह करते आ रहे हैं कभी बाटर सिस्टम था कभी मर्केंटाइलिज्म था कभी रॉ मटेरियल एक्सचेंज होते थे आज के दौर में सोशल मीडिया जिसके ऊपर लिमिटलेस चीजें आपको देखने को मिल रही हैं कंज्यूम करने को मिल रही हैं इसमें ड्रामासोनलाइन प्लेटफॉर्म्स भी हैं प्रोडक्टिव ू चैनल्स भी
हैं इसके अलावा लर्निंग प्लेटफॉर्म्स भी हैं और साथ-साथ यह कि हर किस्म की चीज हर किस्म का स्किल सीखने के एवेन्यूज भी मौजूद है और नेगेटिव यूसेज के भी लिमिटलेस अपॉर्चुनिटी मौजूद हैं तो फिर इतना कुछ आपको मुफ्त में क्यों मिल रहा है हैव यू एवर आस्क योरसेल्फ द क्वेश्चन दैट व्हाई डू यू गेट ऑल ऑफ दिस फॉर फ्री व्हाई इज दिस डील सो गुड कि आपको देना भी कुछ नहीं पड़ रहा आपकी जेब से पैसे भी कुछ नहीं जा रहे और सिर्फ और सिर्फ आप एक अकाउंट बनाइए किसी भी वेबसाइट के ऊपर क्या है
वह है आपकी तवज्जो आपकी अटेंशन आपके आई बॉल्स जहां पर रुकते हैं ढाई सेकंड के लिए भी जहां पर रुकते हैं वहां पर एडवर्टाइजमेंट कंपनीज यह जांच लेती हैं कि थ्रश होल्ड है इस ऐड का और उसके बाद में उस ऐड को सक्सेसफुल इश्तिहार कहते हैं जिस इश्तेहार को देखने के लिए आप ढाई सेकंड के लिए रुक गए इतनी बड़ी वैल्यू है आपकी तवज्जो की जिसको आप और मैं शायद जानते भी ना हो जब तक हम इस कांसेप्ट को एक्सप्लोर ना करें जिस पर आज हमने बात करनी है जिस कांसेप्ट का नाम है अटेंशन इकॉनमी
आज से कुछ अरसा पहले मुझे इस कांसेप्ट के बारे में जो सुपरफिशियल डिटेल्स थी वो पढ़ने को मिली बट आई नेवर एक्सप्लोर इट फुली लेकिन जब मैंने इसको डिग इन किया तो यकीनन हैरान कुन चीजें यह अपने आप में एंटेल करता है सबसे पहले तो मैं आपको यह बता दूं कि अटेंशन किस तरह से मोनेटाइज होती है यानी कि जो हमारी तवज्जो है सोशल मीडिया पे उसको यह प्लेटफॉर्म्स मोनेटाइज करते हैं स्लोगन एरिंग क्या होती है नारे क्या लगाए जाते हैं कि यह प्लेटफॉर्म्स आपको एंटरटेन करने के लिए एजुकेट करने के लिए हैं कनेक्टिविटी के
लिए हैं बिलियंस ऑफ डॉलर्स कमाना एडवरटाइजर्स की जेबों से निकाल के खुद न्यूट्रल होकर बैठ जाना यानी के कंटेंट क्रिएटर्स भी कोई और हैं कंटेंट कंज्यूमर्स भी कोई और हैं एडवरटाइजर्स भी कोई और हैं प्लेटफार्म सिर्फ बैठ के पैसे खा रहा है सबको आपस में रहा है और किसी का क्या जाता है क्या नहीं जाता इससे किसी को ऐतराज नहीं है 2025 के आगाज में इस पूरी जो बैंड वैगन है इस इकॉनमी की अटेंशन इकॉनमी की उसकी वैल्यू होगी 400 बिलियन डॉलर्स 400 अरब डॉलर की यह इकॉनमी है जिसमें बेचने के लिए जो प्रोडक्ट है
वह आपकी तवज्जो है और आज के दौर में सबसे ज्यादा वैल्युएबल करेंसी दुनिया में अगर कोई है ना जो शायद किसी भी क्रिप्टो करेंसी से भी ज्यादा वैल्युएबल है वह आपकी अटेंशन है आपकी तवज्जो है और उसको एक्सचेंज किया जाता है दूसरे वैल्युएबल एसेट के साथ यानी के इन्फ्लुएंस या पैसे या कुछ भी आप लिमिटलेस कमा सकते हैं अगर आपने अटेंशन ग्रैब कर ली है या किसी और की अटेंशन किसी और को बेच दी है तो इतनी बड़ी वैल्यू है इस कॉस्ट की इस प्राइस की जो हम पे करते हैं लेकिन हम समझते हैं यह
सब तो फ्री है हमारा तो कुछ नहीं जा रहा लेकिन उसके बदले में जो हमारा हशर होता है जो हमारे बच्चों का हशर होता है जो आपका अपना हशर होता है आज जरा इसको भी हम एक्सप्लेन करेंगे लेकिन इससे पहले हम ये सब्सटेंशिएट कर लें कि अटेंशन होती क्या है अटेंशन इकॉनमी की फिलोसॉफिकल बेसिस क्या है तो हरबर्ट साइमन हु इज अ वेरी नोटेल नेम इन द फील्ड 1969 के एक लेक्चर में इस कांसेप्ट की बुनियाद रखते हैं इस मॉडर्न फॉर्म में तो नहीं लेकिन अर्ली फॉर्म्स में और वह यह कहते हैं कि एंडेंजर्मेंट ऑफ
अटेंशन तक लीड करती है अब यह दोबारा सुनिए जुमला अब एेंस ऑफ इंफॉर्मेशन यानी कि जब ला तादाद ला महदूद किस्म की चीजें आपको सुनाई जाएंगी दिखाई जाएंगी तो उससे मसला क्या होगा पॉवर्टी ऑफ अटेंशन का यानी कि तवज्जो बहुत ही कम रह जाएगी इसी तरह कि अगर मैं एक छोटे से बच्चे को बिठाऊ और उसके सामने मैं 250 ऑब्जेक्ट रख दूं और उसे कहूं तुम्हारे पास एक सेकंड है इन सब पर फोकस करके मुझे बताओ कि क्या चीज कहां पड़ी हुई है क्या हुआ इससे उस बच्चे की अटेंशन में पॉवर्टी क्रिएट हो गई यानी
कि वह फोकस ही नहीं कर पाएगा इतना बड़ा नंबर ऑब्जेक्ट्स का जो उसके सामने है सोशल मीडिया भी हमारे साथ यही कर रहा है रोजाना की बुनियाद पर करोड़ों ईमेल्स लोग एक दूसरे को भेजते हैं करोड़ों वीडियोस अपलोड और कंज्यूम की जाती हैं करोड़ों ट्वीट्स किए जाते हैं पढ़े जाते हैं रिट्वीट्स किए जाते हैं और करोड़ों स्टेटसे सोशल मीडिया पर और से बेहतर है सोशल मीडिया पर सिर्फ एक चीज कि जिस कंटेंट को आप तवज्जो दे रहे हैं दैट बिकम बेटर और जिसको नहीं तवज्जो दे रहे वह चाहे जितना भी मीनिंगफुल पर्पसफुली इंपॉर्टेंट हो भाड़
में गया बर्बाद हो जाए हमें कोई फर्क नहीं पड़ता इसका मतलब यह है कि सिर्फ जिस कंटेंट के पीछे सबसे बड़ी करेंसी यानी कि आपकी तवज्जो है वह सबसे टॉप पर और बाकी सारे नीचे हां इसकी क्वालिटेटिव एनालिसिस या कौन सी चीज किससे बेहतर थी वह वैसे ही इरेलीवेंट हो गई ट्रुथ भी रेलीवेंट हो गया और सबसे बड़ी चीज यह है कि क्वालिटी और नॉन क्वालिटी बराबर हो गए चाहे वह सियासत हो चाहे वह फैमिली ब्लॉगिंग हो जिस पर हम बात कर चुके हैं चाहे वह सोशल इनफ्लुएंसर्स हो चाहे कोई बिजनेस हो या चाहे कोई
हुकूमत हो या स्टेट हो या गवर्नमेंट हो जिस भी एंटिटी के पास अटेंशन सोशल मीडिया पर है दैट इज गोइंग टू स्वीप द फील्ड विल डि य एवरीथिंग तो वो यह कहता है कि एंडेंजर्मेंट पॉवर्टी ऑफ अटेंशन क्रिएट करती है और यह भी एक्सप्लेन करता है अपने इस लेक्चर में कि जो पोस्ट इंडस्ट्रियल दुनिया थी यानी कि इंडस्ट्रियल रेवोल्यूशन के बाद की दुनिया थी उसमें एक बहुत बड़ा सवाल फिर यह पैदा हो गया कि हम किस तरह से ऐसे निजाम बनाएं जिसमें हम कम अटेंशन वाली दुनिया को कटेल कर सकें और अपनी तरफ इनकी तवज्जो
मरकू कर सके यानी कि ये 70 में दुनिया ने सोचना शुरू कर दिया था हमें तो 2024 में समझ नहीं आ रही यहां बैठ के कि यह जो हमारे मुल्क में पोलराइजेशन हुई है इसका सोर्स क्या है आधे लोग टीवी पर बैठ के 60 70 साल के तजिया निगार बैठ के कह रहे हैं एक सच पर खड़ा हुआ है और बाकी सारे चोर हैं इसीलिए आवाम को होश आ गई है लेकिन उन्हें पता ही नहीं है इन डावर्स मैकेनिज्म का कि यह कितना मल्ट लेयर्ड एनालिसिस चाहिए इस चीज को डिकोड करने के लिए जो हम
पोलराइजेशन आज एक्सपीरियंस कर रहे हैं मुशे में किसी भी मुल्क में दुनिया में कि जिसके पीछे आई बॉल्स हैं पॉलिटिकल लीडर भी वही है इन्फ्लुएंस भी वही है अ इसके अलावा कोई भी फील्ड में इवन स्पोर्ट्स में या एथलेटिक्स में भी जो सोशल मीडिया प फेमस है उसके लिए अपॉर्चुनिटी ज्यादा है स्टैट्स भी रेलीवेंट होते जा रहे हैं आगे चलके अ इंटरनेट की जहां तक अगर हम बात करें तो इंटरनेट की एज आने के बाद यह मजीद रेलीवेंट हो गया क्योंकि इंफॉर्मेशन लिमिटलेस हो गई साथ-साथ यह कि इंटरनेट पे जो एंडेंजर्मेंट थी वो अटेंशन को
इतना वैल्युएबल बना दे है कि करोड़ों वीडियोस में से जिस वीडियो पर आप रुकेंगे वह बहुत ही वैल्युएबल चीज बन जाएगी क्योंकि आपकी अटेंशन उसकी तरफ मरकू है साथ-साथ यह के जिस तरह से हम देखते हैं कि टीवी पर और प्रिंट पर पहले क्या था के टीवी के ऊपर एक प्रोग्राम लगना है और वह सबके लिए है किसी भी घर में किसी भी मकान में किसी भी शहर में किसी भी गांव में एक आदमी बैठ के वही प्रोग्राम देख रहा है वो उसके लिए पर्सनली अल्टर या चेंज नहीं होगा सोशल मीडिया ने क्या किया कि
हर किसी की टाइमलाइन को पर्सनलाइज कर दिया टारगेटेड एल्गोरिथमिक एक्टिविटी से यानी कि लेट्स से कि मैं इमरान खान का फॉलोअर हूं तो मेरी टाइमलाइन ही सोशल मीडिया ऐसे क्रिएट करेगा कि मैं उस रियलिटी से बाहर देख ही नहीं सकता क्योंकि यह मुझे लिमिटलेस डोज देता जाएगा एक ही पार्टी के प्रोपोनेंट्स की उसके हक में जाने वाले आर्गुमेंट की उसकी पर्सनालिटी को बड़ा बनाक पेश करने वाले आर्गुमेंट की और अगर मैं क्रिटिक हूं इमरान खान का तो मुझे एक ही तरह का कंटेंट मिलेगा जो कि उसको बैश कर रहा है तो यह हमें एक एल्गोरिदम
एक जेल में बंद कर देते हैं हमसे हमारी तवज्जो से पैसे कमाने के लिए और हम समझते हैं कि रियलिटी मुकम्मल तौर पर है ही ऐसी आज की वीडियो का पर्पस भी यह है कि हम आपको यह बताएं कि किस तरह से परसेप्शन ऑफ रियलिटी डिस्टोर्ट हो रही है इस एल्गोरिथमिक एक्टिविटी से जो सिर्फ और सिर्फ अटेंशन इकॉनमी से पैसे जनरेट करने के लिए आगे चले तो इस पर और भी बहुत से थेरिस काम कर चुके हैं एच गोल्ड हार्बर हैं जो कहते हैं कि ऑडियो विजुअल डायवर्सिटी और फीडबैक जो है ना वह सोशल मीडिया
को इंटरनेट को अन पैरेलल कर देता है यानी कि टीवी प्रोग्राम किसी ने देखा किसी ने कोई गलत बात की अच्छी बात की ऑडियंस उनसे जाके इंगेज नहीं कर सकती सोशल मीडिया ने यह फाल्स परसेप्शन दी है कि ऑडियंस भी हिस्सा है उस सारी कंटेंट क्रिएशन का जबकि वह नहीं है उसको तो एल्गोरिदम फीड ही वो कर रहा है जो वो देखना चाह रही है हालांकि सच जानने के लिए तो आपके प्री एसिस्टिंग बिलीव्स को हर्ट करना जरूरी है लेकिन सोशल मीडिया इंश्योर करता है कि वह हर्ट ना हो जाए वह आपको सिर्फ वह चीज
दिखाएगा जिसके लिए आप मरे जा रहे हैं देखने के लिए परपे चुएट करेगा आपकी स्टूपिडिटी को इसके साथ-साथ यह कि वेब 2.0 हो या बिग डाटा हो व भी पैसिव कंज्यूमर्स को कंट्रीब्यूटर बना देता है और साथ-साथ एक्सप्लोइटेटिव डायनेमिक्स होते हैं सोशल मीडिया एल्गोरिथम्स के जिनकी मैं आपके हवाले से बात कर रहा हूं तो डेफिनेशन विलियम जेम्स ने एक्सप्लेन की प्रिंसिपल्स ऑफ साइकोलॉजी में जो कि 1890 का काम है वह कहता है कि अटेंशन की डेफिनेशन क्या है अब यह बहुत ही सोफिस्टिकेटेड वे है अटेंशन को एक्सप्लेन करने का द टेकिंग पोशन बाय द माइंड
इन क्लियर एंड विविड फॉर्म ऑफ वन आउट ऑफ व्ट सीम सेवरल साइमल नियस पॉसिबल ऑब्जेक्ट्स और ट्रेंस ऑफ थॉट इट इंप्लाइज विड्रॉल फ्रॉम समथिंग्स इन ऑर्डर टू डील इफेक्टिवली विद दी अदर्स यानी कि व यह कहता है कि आपका दिमाग जो है है जब किसी भी जगह पर तवज्जो मरकू उस कर लेता है विविड फॉर्म में या क्लियर फॉर्म में जिसमें यह दिखाई देता है कि एक ट्रेन ऑफ थॉट सिस्टमैटिकली फनल डाउन हो रही है एक तरफ जा रही है और साथ-साथ यह के अगर आप कुछ दीगर चीजों से तवज्जो हटा के किसी एक चीज
की तरफ ले जाए तो उसको अटेंशन कहते हैं इसके अलावा हरबर्ट साइमन कहता है कि व्ट इंफॉर्मेशन कंज्यूम्स इज राद ओबवियस इट कंज्यूम्स द अटेंशन ऑफ इट्स कंज्यूमर यानी के इंफॉर्मेशन जिस चीज को खा रही है कंज्यूम कर रही है जिसकी कॉस्ट पर चल रही है वह आपकी अटेंशन है और कंज्यूमर की अटेंशन को कंज्यूम कर रही है इंफॉर्मेशन साथ-साथ यह कि वह कहता है हेंस अ वेल्थ ऑफ इंफॉर्मेशन क्रिएट्स अ पॉवर्टी ऑफ अटेंशन एंड अ नीड टू एलोकेट दैट अटेंशन इफेक्टिवली अमंग द ओवर अबेस ऑफ इंफॉर्मेशन सोर्सेस दैट माइट कंज्यूम इट इस पर दीगर
काम भी मौजूद है फ्रेडरिक हाइक एक्सप्लेन करता है सेंसरी ऑर्डर में के एक बड़ा क्लोज रिलेशन है का और कॉन्शसनेस का यानी कि जिस चीज को अटेंशन देंगे हम किसी भी चीज के बारे में इल्म हासिल करने का प्रोसेस ही अफेक्ट करवा बैठेंगे उसकी वजह से इसके अलावा द अटेंशन मर्चेंट्स के नाम से एक टिम वू का काम है जो कि आप पढ़ सकते हैं इसमें वो कहता है कि वी हैव एक्सेप्टेड द अनरिस्ट्रिक्टेड अनरेगुलेटेड माइनिंग ऑफ द ह्यूमन कॉन्शियस द हार्वेस्टिंग ऑफ ह्यूमन अटेंशन वी आर द रिसोर्स एंड आई थिंक इट टेक्स द टॉल
यानी के अब ये कितनी इनसाइटफुल बात है कहता है कि अनरिस्ट्रिक्टेड यानी कि जिसको हम रोक ही नहीं रहे जिस बारे में सोच ही नहीं रहे जिसकी हदबंदी ही नहीं कर रहे वह माइनिंग ह्यूमन कॉन्शसनेस की यानी कि इंसानी सोच की माइनिंग वह होती जा रही है बगैर किसी के रोके द हार्वेस्टिंग ऑफ ह्यूमन अटेंशन यानी के जिस तरह से एक खेत होता है ना जिसमें एक फसल उगती है इसी तरह ये डिजिटल खेत जो हैं इनकी जो सबसे बड़ी प्रोडक्ट है वह है अटेंशन आपकी जिसको काट के इस फसल लोगों को वो बेच देते
हैं और पैसे कमा लेते हैं तो यह तो हो गया थियोरेटिकल बेसिस अटेंशन इकॉनमी की जिसकी हमने आज बात करनी थी लेकिन यह किस प्रोसेस से गुजर के चलती है और इतनी इफेक्टिव कैसे है कि हम इससे पहले के जाने कि हम किस तरह से किन चीजों पर अपना टाइम स्पेंड कर रहे हैं और किस तरह से वह हमारी रियलिटी को मैनिपुलेट कर रही है यह अपना काम करके चली भी जाती है सबसे पहले सोशल मीडिया कंपनीज का बिजनेस मॉडल जो कि अटेंशन को रिटेन करने की ब पे खड़ा हुआ है और यह जो सबसे
ज्यादा बड़ा बिडर होता है उसको आपकी अटेंशन बेच देता है लेट्स से कि जो जितना बड़ा एडवरटाइजर है उतना बड़ा मार्केट कैप उसके हवाले कर दिया जाएगा आपका पर्सनल डाटा तो आप सोशल मीडिया को यह ना समझे कि यह कोई लर्निंग प्लेटफार्म या एंटरटेनिंग प्लेटफॉर्म या फिर एजुकेटिंग प्लेटफॉर्म है बल्कि सिर्फ और सिर्फ डाटा कलेक्शन का एक सोर्स है डाटा इकट्ठा करो हर कोई किस में इंटरेस्टेड है वहां पे एडवर्टाइज को लगा दो पैसे कमाओ बात खत्म ठीक है एडवर्टाइज करस इन रिटर्न कंज्यूमर के डिसीजन को अफेक्ट करते हैं जिस तरह से मार्शल मकल ने
यह बात की थी कि दरअसल बहुत सी प्रोडक्ट्स आप खरीदते हैं तो वह प्रोडक्ट इन इट सेल्फ आपको अच्छा नहीं फील करवाती लेकिन जब आप उसका इश्तेहार देखते हैं तो आपको दिल में एक ठंडक पैदा होती है अरमेचर्स मेंट इन इट सेल्फ बिकम अ मीनिंग नॉट द प्रोडक्ट ठीक है तो एडवर्टाइज पर कंज्यूमर के डिसीजन को भी अफेक्ट करना शुरू कर देते हैं कि क्या खरीदना है क्या खाना है क्या पहनना है और किसको वोट देना है सबसे टेरिबल एस्पेक्ट ये है कि आज की सियासी पार्टियां एडवर्टाइजमेंट कंपनीज बन गई हैं हम अपने ड्राइंग रूम्स
में बैठ के प्राउडली मशवरे देते हैं यार यह पीपल्स पार्टी और नून लीग को तो या इस तरह की दूसरी पार्टियों को तो ऐड ही चलाना नहीं आता सोशल मीडिया कैप्चर करना ही नहीं आता यह तो लोगों को बेवकूफ बनाना जानते ही नहीं है कि डिजिटल इकॉनमी में किस तरह से इंटीग्रेट करके ऐड कैंपेन चला के प्रोपेगेंडा करना है दैट्ची व्हाट आर वी सेइंग एक्चुअली हम क्या यह कह रहे हैं कि ये इतने जाहिल हैं कि ये हमें पागल ही नहीं बना सके और एक ने बना लिया और वो वोट ले गया हमारा अब आप
कहेंगे कि मैं एक की मिसाल क्यों दे रहा हूं उसकी वजह यह है कि पाकिस्तान में और कोई सोफिस्टिकेटेड एग्जांपल है ही नहीं जिसने सोशल मीडिया कॉन्शसनेस की माइनिंग करके और आपकी अटेंशन की हार्वेस्ट करके इतना बड़ा वोट बैंक क्रिएट कर लिया हो जितना पीटीआई ने कर लिया दैट्ची हैं जो ये कर रही हैं इसके अलावा जिस जिस तरह से हमें याद है कि हम सड़क पर जाते हुए एक पुराने जमाने का बिलबोर्ड देखते थे अब वह बिलबोर्ड लगा हुआ है वह इस चीज से कंसर्न नहीं है कि सामने से कौन गुजर रहा है कौन
नहीं अब इतना सोफिस्टिकेटेड डाटा है कि यह भी सोशल मीडिया एल्गोरिदम को पता है कि किसकी जिंदगी में क्या चल रहा है ताकि उसको वही बेचा जाए फर्नीचर की बात करोगे रात को फर्नीचर का ऐड आएगा अच्छा अगर कोई कपड़े खरीदने की बात करनी है तो रात को आपको अपनी टाइमलाइन प उसका ऐड दिखाई देगा उसकी वजह यह है कि इसको सर्वेस कैपिटल जम कहते हैं जिसमें दिन रात आपके ऊपर एक चीज सर्वेस कर रही है और वह आपके मोबाइल फोस और डिवाइसेज हैं जो सिर्फ और सिर्फ एडवर्टाइज करस को आपकी पर्सनल इंफॉर्मेशन बेच रहे
हैं कि अब यह क्या खरीदना चाहता है किसमें इंटरेस्टेड है वही दिखाया जाए इसके ऊपर अ आपको केरन नेलसन फील्ड का काम भी मिल जाएगा द अटेंशन इकॉनमी एंड हाउ द मीडिया वर्क्स उसमें वह कहती हैं कि हाइपर पर्सनलाइज्ड एल्गोरिथम्स मॉनिटर यू ऑन एंड ऑफलाइन कि इतने पर्सनलाइज एल्गोरिथम्स हैं कि आप ऑफलाइन है या ऑनलाइन है आपकी मॉनिटरिंग चल रही है जिस भी बारे में बात करोगे इंटरेस्ट शो करोगे 2 मिनट बाद उसी का इश्तेहार मिलेगा और एक लूप में फस जाओगे और उसने आपको दाना डाल दिया आपको खाना पड़ेगा बिकॉज आपको अपने आप प
कंट्रोल ही करना इंपॉसिबल हो जाएगा इतना बुरा ट्रैप है यह साथ-साथ यह के यूजर्स की परसेप्शन को मैनिपुलेट करना बहुत जरूरी है इन प्लेटफॉर्म्स के लिए अटेंशन इकॉनमी के लिए और साथ-साथ यह कि अगर इसकी जो जो स्ट्रेंथ जो ताकत है उसकी बात की जाए तो यह अब इससे अंदाजा लगा लीजिए कि जो अल्फाबेट है यानी कि पेरेंट कंपनी है ग की उसकी 2 ट्रिलियन डॉलर की नेटवर्थ है दो खरब डॉलर सही है और यह जो एल्गोरिदम है यह कंटीन्यूअसली अपनी टेक्निक्स को अपडेट भी करते रहते हैं ऐसा नहीं कि यह एक दफा सेट हो
गए तो फिर चेंज ही नहीं होंगे अगर आपने 250 रील स्क्रोल की है ना दिन में तो उसमें से जिन चार पर आपने स्टे किया उसकी कैटेगरी को एल्गोरिदम ऑब्टेन करके अगले दिन से आपको सारा वही दिखाना शुरू कर देगा एंड यू विल लूज टाइम लिमिटलेस विदाउट यू नोइंग यू विल लूज डेज आवर्स मिनट्स एंड सेकंड्स विदाउट एनी कॉन्शियस अनोले जमेंट ऑफ द फैक्ट दैट यू आर बर्निंग अ वेरी लिमिटेड अमाउंट ऑफ टाइम दैट यू हैव ऑन दिस अर्थ ठीक है साथ-साथ ये के फोब्स मैगजीन के मुताबिक एक एवरेज इंडिविजुअल अमेरिका में या मॉडर्न वर्ल्ड
के अंदर 10000 ब्रांड मैसेजेस देखता है एक दिन में 10000 ब्रांड मैसेजेस हिसाब लगाइए दिमाग का असर क्या होता होगा आपकी सारी जिंदगी एडवर्टाइजमेंट बन जाती है जिसको नील पोस्टमैन कहता है ना ग्रेट एज ऑफ अब्री एटर्स हर चीज छोटी होके एक इश्तिहार बन जाती है तो टीवी लगाओगे वहां पे इश्तिहार अखबार पढ़ोगे वहां पे इश्तिहार दीवार प देखोगे वहां पे इश्तिहार चिपका हुआ है रोड पर ट्रेवल कर रहे हो तो एलईडीज वाले अब कैची किस्म के बिलबोर्ड्स हैं ठीक है वहां पर इश्तिहार स्क्रोल करोगे वहां पर इश्तिहार कैसे बचेंगे इश्तिहार से कहां जाएंगे ठीक
है साथ-साथ यह कि डेली स्क्रीन स्विचेबल स्विच होती है कभी टीवी कभी मोबाइल फोन कभी आईपैड आईपैड छोड़ा तो टीवी ऑन कर लिया टीवी बंद किया लैपटॉप ऑन कर लिया कंप्यूटर ऑन कर लिया वह छोड़ा स्मार्ट डिवाइस पकड़ ली सारा दिन इसमें गुजरता है मार्केटिंग ऑटोमेशन के जो प्लेटफॉर्म्स हैं इनकी आप बात अगर कर ले तो वो डाटा सेल करके लेट्स से मेरा बिजनेस शुरू हुआ है तो मैं एक सोसाइटी में मैंने रेस्टोरेंट खोला है और मैंने वहां पर एक डाटा हासिल करना है कि कितने यंगस्टर्स हैं और कितने यूनिवर्सिटी गोइंग यंगस्टर्स हैं मुझे डाटा
पैसों के एवज कंपनियां बेचें उनके नंबर मिलेंगे मैं उनको पर्सनली टेक्स्ट मैसेज करवाऊंगी कि यहां पे ये रेस्टोरेंट खुल गया यू कैन हैव द पिज्जाज एंड व्हाट एवर यू वांट यहां तक यह रिसर्च टेक्निक्स पहुंच चुकी हैं इस दफा इलेक्शन में भी पाकिस्तान के अंदर यह हुआ है कि कॉल्स आ रही थी फोन उठाओ तो आगे से इश्तिहार चल रहा है पार्टी का कि पीटीआई को नून ली को वोट दे दें और यह बिहेवियरल डाटा कलेक्शन आपके जाने बगैर चलती रहती है जितना टाइम आप स्पेंड करते हैं उतना डाटा जनरेट होता है इसीलिए यह सारे
एल्गोरिदम बेस्ट कोशिश करते हैं अपनी कि आपसे इतना टाइम कंज्यूम करवाएं ताकि उतना ही डाटा क्रिएट हो उतनी ही एक्यूरेसी हो उतना ही बड़ा बिडर आए और उतना ही पैसा आपकी अटेंशन को तवज्जो को बेच के हम कमा लें उसकी वजह यह है कि यह एल्गोरिदम लोगों की ओपिनियन को अन कोड कर देते हैं इस पर कैथी नायल जो सोशल डायलमाइट्रिप एक पूरा प्रोसेस होता है किसी को रिफ्लेक्ट करके सोचने का समझने का एल्गोरिथम्स को कुछ नहीं बताना वह सिर्फ आपकी सोशल मीडिया स्क्रोलिंग और अटेंशन की जो थ्रश होल्ड है ना वह पहले ही उससे
आपकी सारी जिंदगी का हिसाब लगा के ब्लूप्रिंट बना के आगे बेच भी चुकी है आपको पता ही नहीं है तो इसी तरह अटेंशन गैदर करने के लिए कंट्रोवर्शियल तरीन और सुपरफिशियल तरीन कंटेंट दिखाया जाता है जो कि लोगों को सिर्फ और सिर्फ बड़े नंबर में इकट्ठा करने का पर्पस रखता है और हमेशा ऐसी बात कभी भी इनसाइटफुल नहीं होगी इसकी वजह यह है कि सोशल मीडिया रियलिटी का एक आर्टिफिशियल वर्जन क्रिएट कर देता है आपकी एल्गोरिदम की जो जेल है उसमें आप जिंदा रहकर यह सोचते हैं कि जो सेंसेशनल तरीन रियलिटी मुझे दिखाई जा रही
है असल में भी वो है जबकि उसका पर्पस सिर्फ और सिर्फ अटेंशन इकॉनमी को बूस्ट करना होता है आप यह जान ही नहीं पाते और इसी वजह से आपकी रियलिटी मजीद सेंसेशनल हो जाती है डिस्कोर्स खत्म हो जाता है और सिर्फ सुपरफिशियल इंगेजमेंट क्रिएट होती है इसके साथ-साथ अंडरमाइंड करता है यह सोशल रिलेशनशिप्स को क्योंकि आप सारे फैसले यहां से कर रहे होते हैं अटेंशन और नेशन की डिसर पशन तबाही हो जाती है क्योंकि ढाई तीन सेकंड की अटेंशन के साथ आप क्या कर सकते हैं मॉडर्न जनरेशन में बच्चों के पास लर्निंग कैपेबिलिटी खत्म होती
जा रही है इसकी वजह से पोलराइजेशन पॉलिटिक्स में क्रिएट होती है दुनिया भर में पॉपलिन का जो सैलाब आया हुआ है ना उसका सोर्स यही गं है जिसका नाम है अटेंशन इकॉनमी जो सिर्फ वोह परपे चुएट कर रहा है उस रियलिटी को जो कि आप देखना चाह रहे हैं व यह तायन करवाना ही नहीं चाहता आपको कि क्या चीज ठीक और क्या गलत है किस पे आई बॉल्स ज्यादा है वो सबसे बेहतरीन है जिस परे अटेंशन नहीं है वह बकवास है बात कोई अच्छी कर रहा है या नहीं वो और चीज है ठीक है तो
इस तरह से दुनिया की सबसे वैल्युएबल करेंसी जो है अटेंशन जो दिन रात आप अपने पास अपने अपने पोजीशन में लेकर फिर रहे हैं इसका पॉजिटिव इस्तेमाल कीजिए सबसे बड़ी चीज यह है कि आपके अगर आपकी जेब में 00 ल हो आज क्या आप जाकर किसी ऐसी दुकान पर उसको फेंक कर आएंगे जहां से आपको कुछ मीनिंगफुल मिल ही नहीं रहा नहीं क्या आप उसको किसी ऐसी चीज पर स्पेंड करेंगे जहां से कुछ भी ऐसी चीज आपको नहीं मिलती जिसके आपकी जिंदगी में वैल्यू ऐड होती है नहीं लेकिन यह जो इतनी बड़ी करेंसी है इसको
आप सोचे समझे बगैर जाया करते रहते हैं बगैर यह जाने कि आपको इन रिटर्न मिल क्या रहा है क्योंकि आप सोचते हैं यह सब फ्री है मैं भी फारिग बैठा हुआ हूं तो मैं इसलिए स्क्रोल कर लेता हूं मेरा क्या जा रहा है सब कुछ जा रहा है थॉट जा रही है कॉन्शसनेस जा रही है ऑपिनियंस बर्बाद हो रही है सोशल इंबैलेंस क्रिएट हो रहा है इसके अलावा मेंटल हेल्थ तबाह हो रही है फिजिकल हेल्थ बर्बाद हो रही है कॉस्ट बहुत बड़ी है इस कीमती तरीन चीज को इस कीमती तरीन करेंसी को सही जगह पर
लगाना अगर आप सीख लेंगे तो फिर ही सेल्फ एक्चुलाइज कर सकते हैं अदर वाइज जिस कदर आज के दौर में अटेंशन डिसऑर्डर्स पैदा हो रहे हैं बच्चों के अंदर एडीडी की एडीडी की डिजीज हो रही हैं वो इसी वजह से हैं कि हम किसी भी चीज के ऊपर अटेंशन अपनी फिक्सेट ही नहीं कर पाते जब तक अपने आप को नहीं जानेंगे जब तक मीनिंगफुल डिस्कोर्स का हिस्सा नहीं बनेंगे जब तक रिफ्लेक्टिव एक्सरसाइज नहीं करेंगे थिंकिंग की इमेजिनेशन की तो जिंदगी कभी बेहतर नहीं हो सकती बिकॉज इट इज अ प्रोजेक्ट ऑफ मटेरियल इजेशन ऑफ योर इमेजिनेशंस
अगर इमेजिनेट ही नहीं कर पाते तो प्रैक्टिकल रल में क्या करेंगे सिफर कुछ भी नहीं इस कीमती चीज को इस कीमती करेंसी को एल्गोरिथम्स के य जो कसाई बैठे हुए हैं इनसे बचाइए अपनी रियलिटी को अलैदा समझिए सोशल मीडिया को अलैदा समझिए जो लोग सोशल मीडिया पर बेहतरीन लगते हैं उनको असल में जांच और यह देखिए कि क्या उन्होंने रियलिटी में कितना कुछ तब्दील किया है फिर फैसला कीजिए कि क्या वह अच्छे हैं या बुरे हैं सोशल मीडिया की बेसिस के ऊपर ऑपिनियंस ना बनाइए और सबसे बड़ी चीज इस कीमती चीज को स्पेंड करने का
तरीका का सीखने के लिए पहले यह जानना पड़ेगा कि इन लोगों की ट्रिक क्या है और अटेंशन इकॉनमी होती क्या है उसके बाद अपने आप को जाया करना आप खुद ही बंद कर देंगे थैंक यू i