इंसान नजरिया के लिए है या नजरिया इंसान के लिए ये एक बड़ी पुरानी रिडल है जिसको आपने ट्रांसलेट किया है नेशन स्टेट्स जिस तरीके से बनी थी वो पूरा तसव्वुर ही ढह गया है मैं तो फ्रीविल पे अग्री नहीं करता वो फॉल्ट लाइंस क्या थी एक थोड़ी सी ह्यूमिन और शर्म का एहसास हुआ मुझे इंसानी तारीख में कोई ऐसा वाकया याद नहीं कि सिर्फ लोगों की एजुकेशन से कुछ चेंज हो गया हो मैं जिस जगह से ताल्लुक है मेरा वहां अब भी खानदानी फैसले भी पंचायत के जरिए होते हैं कि मुझे पता है कि यार
मैं पैदा तो हो गया हूं न सुकरात को उसने अगली कहा मुझे लगता है कि हमें अपनी कॉज के लिए प्रॉप गंडा करना पड़ेगा जो पाकिस्तानी नौजवान है 72 पर जो लोग हैं इनकी पर्सनालिटी को वो क्या चीजें हैं जो शेप कर रही है टेक्नोलॉजी दरअसल वो इंजन है जिसके ऊपर थॉट ने बैठ के सफर करना कहानियां और नजम ट्रांसफर होती है बस मतलब जो सबसे आखिर में बेदार हुए हैं ना पाकिस्तान की रियासत के मसले से वो कह रहे हैं हम सबसे ज्यादा बाशह आपको ह्यूमन कॉन्शियस पे कितना बिलीव है ह्यूमन कॉन्शियस इसका मुकाबला
कर पाए एक लिहाज से रिवाइवलिस्ट पॉलिटिक्स की बात हर जगह हो रही है पहले अच्छा था वो वापस लेके आना है पहला कैपिट किसान था एग्रीकल्चर दौर ने आका और गुलाम पैदा किया गैदरर्स में कोई आका गुलाम नहीं पेसिम जम इन थॉट ऑप्टिमिस इन विल आइसोलेटेड पॉजिटिव थिंकिंग बड़ी नुकसान देती है मुझ पे पहला अटैक यही हुआ ना मनफी सोचते हो तुम तो वो मक्खी हो जो सिर्फ गंद प बैठती है तो क्या आप किसी अनार्की की बात कर रहे हैं एमपीएस की तनखा डे लाख थी अब 9 लाख हो गई है तमाम पार्टीज के
एमपीएस ने साइन कर दी यहां हम सिर्फ दो सिस्टम्स में फस गए हैं पॉपुलर हाइब्रिड सिस्टम और अन पॉपुलर हाइब्रिड सिस्टम मेरे नजदीक तारीख में अनपुर अथॉरिटेरियन जम ज्यादा सेफ रहा हमारे किसी बड़े से पूछा नहीं गया पंजाब काटने के नहीं न आप ने बात की वो तो एंपैथी के ऊपर बड़ा अजीब सा व्यूज है उसके इस लिहाज से मैं नीचे को 10 में से ना दो मार्क्स भी मुश्किल से दूंगा आपको ये नहीं लगता कि ये शोपन हार की जरा थोड़ी सी रिफाइंड शक्ल था उसकी बहन ने पूरी किताब ट की ये नीचे आर्काइव
के नाम से ना एक इंस्टीट्यूशन बनाया था हिटलर ने जिस मोरालिटी की बात करता है वो तो मोरालिटी है ही नहीं एथिक्स ही नहीं है बहरहाल जहां तक नीचे का ताल्लुक है तो वो मोरालिटी को सिरे से ही एक सेकेंडरी चीज समझता है वो कहता है विल नंबर वन पे है वो उसको जू कहता है बार-बार 100 किताबों में जो लिखोगे मैं एक में लिखने की कोशिश करता हूं मुझे होप क्यों नजर नहीं आती मैंने आपको बता दिया आपको क्यों नजर नहीं आती एक मोनोपोली एंड वायलेंस है राइट विंग ऑर्गेनाइजेशन के पास एक है सिविक
ऑर्गेनाइजेशन के पास पाकिस्तान लॉस आर अनरिटन लॉस प्रोफेसर्स बहुत है जो पीएचडी करके आए हैं पास बैठोगे फील ही नहीं होगा पढ़े लिखे मैंने एक बात कर दी थी यही वाली लोगों ने कहा ये क्या कह दिया कि मैंने कहा बैंकट तो अब नहीं हुए पहले दिन से थे अमेरिका से जो बेहतरीन नेगोशिएशन करेगा वो फ्रंट सीट पर बैठेगा कैसे हैं दोस्तों हमने कई साल पहले जब पाकिस्तान की हिस्ट्री और दुनिया की हिस्ट्री के ऊपर वीडियोस बनाना शुरू की तो बहुत से सवालात इस तरह के होते थे कि हम करंट अफेयर्स पर भी बात करें
लेकिन जाहिर है हमारी सारी एनर्जी और सारा काम इस एंगल से था कि हम लोगों को सोचने के लिए कुछ मवाद दें उनको ऐसी तारीख और वो उनको हिस्ट्री के एंगल फिलॉसफी के एंगल अपनी सोसाइटी का उस एंगल से देखने का मौका दें जिसको आमतौर पर वो नहीं देख रहे या स्टेट या ताकतवर लोग उनको वो जगह नहीं देखने मिते उसके लिए हमने आपके सामने वीडियोस रखी इसी दौरान हमारे सामने एक और नौजवान आते हैं सैयद मुजम जिन्होंने पाकिस्तानी नौजवानों को पाकिस्तानी सोसाइटी को एक टेबल पर रखा और उसका ऑपरेशन शुरू कर दिया और उन्होंने
बहुत खूबसूरत वीडियोस बनाई क्रिटिकल एनालिसिस के ऊपर और लोगों को सोचना सिखाया और हमारी सोसाइटी का वो तजिया किया जो इससे पहले अगर कोई लोग कर भी रहे थे तो किताबों में था वीडियोस में नहीं कर रहे थे और इतनी बहादुरी से नहीं कर रहे थे तो हमारे साथ आज है सैयद मुजम और हम इनसे उन तमाम चीजों में से कुछ चीजों पर बात करेंगे जो आप इनसे पूछना चाहते हैं या मैं पूछना चाहता हूं कैसे हैं बिल्कुल ठीक आप बताइए कैसे हैं आप बहुत अर्से से हम कोशिश कर रहे थे कि पाकिस्तान की फॉल्ट
लाइंस पर गुफ्तगू करें और जो आपने सोसाइटी को जन जोड़ना शुरू किया हुआ है जरा उस पर मिलकर बात करें जी तो आप तैयार हैं बिल्कुल है इट्स अ प्लेजर टू बी हियर बाय द वे बड़े अरसे से वाकई एमबी किया हमने और मेरा ख्याल है लेट हो गए हैं लेकिन अच्छा है कि बैठ गए हैं अच्छा मुझे ये बताइए जब आपने अपने ख्यालात का इजहार आके करना शुरू किया सबसे पहले लॉक पर तो पाकिस्तान की कौन सी फॉल्ट लाइंस थी जो आपके सामने बड़ी प्रोमिन होके आई कि ये पाकिस्तान के फॉल्ट लाइंस है अगर
ये दुरुस्त हो तो हम हमारी सिमत दुरुस्त हो सकती है वो फॉल्ट लाइंस क्या थी सबसे टॉप जो आपके ख्याल में है वहां से शुरू करें देखि सबसे बड़ी चीज ये है कि एक जो आम सहाफी अप्रोच होती है जो कि मेरे इर्दगिर्द हो रही थी क्योंकि मैं उससे चार साल पहले टीवी पर काम कर रहा था 2016 में मैंने जवाइन किया और 2020 में य पर शुरू हुआ तो उन तीन चार साल का तजुर्बा यह था कि यह मसला सिर्फ पॉलिटिकल नेचर का या चंद शक्स याद का नहीं है कि एक को जेल से
निकाल दो और दूसरे को प्राइम मिनिस्टरशिप से हटा दो या इतना सुपरफिशियली ये चीज फिक्स नहीं हो सकती उसकी वजह यह है कि बचपन में पंजाब में पैदा होकर मेन स्ट्रीम एक जो आप आइडेंटिटी है पाकिस्तानी जो पंजाबी आइडेंटिटी है या फिर बैकग्राउंड भी आपका ऐसा हो कि आप किसी माइनॉरिटी से ताल्लुक ना रखते हो तो हमने जो पर्सपेक्टिव लर्न किया मशर लूम वाला वो वही था जिसमें एक अल्ट्रा पैट्रियोटिज्म था स्कूल के अंदर तो हम भी उसी तरह के थे जाहिरी बात है कि जो नैरेटिव पहले रोज से पढ़ाया जा रहा था उसको हाथों
हाथ लिया हमने बाय भी किया लोगों को भी बताया लेकिन मसला किताबों ने पैदा कर दिया थोड़ा सा क्योंकि जब शुरू में मतलब जो सुपरफिशियल सी रीडिंग्स थी के के अजीज साहब की मर्डर ऑफ हिस्ट्री पकड़ ली या एक दो किताबें इस तरह की तो वो जिस तरह एक शॉक की स्टेट होती है जिसमें एक आदमी को किसी चीज से बहुत मोहब्बत होती है और बाद में उसको बताया जाता है कि यार वो धोखा था सारा सो द इनिशियल शॉक वाज हिस्ट्री जिसमें एक थोड़ी सी ह्यूमिन और शर्म का एहसास हुआ हम कि यार अगर
अपनी तारीख को टटोला हमने जो आपकी वीडियोस के थ्रू भी लोग देखते हैं तो उसमें शायद ही कोई ऐसी बात हो जिस पर बहुत प्राइड ली जा सकती है सो फर्स्टली एज अ सिटीजन ऑफ दिस कंट्री जब सेंस ऑफ हिस्ट्री मैंने अपनी देखी ना कि ये पले ही कुछ नहीं है फिर मैंने कहा कि इसको तो एनालाइज करना चाहिए फिर यह सिर्फ कंटेंपरेरी आज कल की हालिया सियासत का तो बात ही नहीं ये रही ना उसके बाद में तो एक बड़ा मसला सोशल क्रिटिसिजम जो मुझे लगा जो बिल्कुल मिसिंग था क्योंकि मुझे लगा कि मुश
मुश के के लेवल पे एक अकाई एक इंडिविजुअल जब वो रिफॉर्म नहीं है तो डेमोक्रेसी की प्रिजंस ये है कि एक आदमी इतना रैशनल होगा कि वह अपनी मर्जी से कोई लीडर का इंतखाब करके सही फैसला भी कर लेगा हम मैंने कहा कि जब वह एक इंडिविजुअल के ऊपर काम नहीं हुआ तो ओवरऑल रियासत प क्या मारपीट चल रही है यहां पे तो सोशल क्रिटिसिजम से इसीलिए आगाज किया जिसमें खवातीन की तहरी कों पर बात शुरू कर दी फंडामेंटलिज्म के खिलाफ बोलना शुरू कर दिया या फिर ऑपरेशन के खिलाफ इस तरह से तो एक आइडेंटिटी
का बहुत बड़ा इशू दिखाई दिया जो आपने फॉल्ट लाइन बताई कि हम हैं कौन जाना कहां पे है जिस तरह एक शख्स की एक मीनिंग क्राइसिस होती है ना कि मुझे पता है कि यार मैं पैदा तो हो गया हूं लेकिन एक शख्स अगर वाकई इतना नायलेट हो जाए कि उसे आईडिया ही ना हो कि वेयर टू गो और मैं आ कहां से रहा हूं और मुझे यह लगा कि दिस इज अ स्टेट इन मीनिंग क्राइसिस जो पैदा तो हो गई है 47 में लेकिन यह नहीं पता कि ऑब्जेक्टिव क्या था और जाना कहां पे
है उसपे इतने नैरेटिव हैं कोई दो कमी नजरिए प अब भी अड़ा हुआ है 1971 के बाद भी अच्छा कोई कहता है कि जना साहब सेकुलर थे कोई कहते हैं राइट विंग थे तो ये कंफ्यूजन जो थी ये आइडेंटिटी की कंफ्यूजन थी कि ऑब्जेक्टिव क्या था एंड वेयर टू गो तो उसकी क्लेरिटी लेने के लिए ही फिर बाकी चीजें मैंने की जो भी की ये आपके ख्याल में सबसे बड़ी फॉल्ट लाइन जो पाकिस्तान की है वो यह है कि हमारा एक बहुत बड़ा आइडेंटिटी क्राइसिस है कि हम है कौन जी पाकिस्तान के लोग कौन है
ये शदीद किसम के मुसलमान है ये कोई इंडिया की नफरत में बनी हुई कौम है या अरबों की मोहब्बत में बनी ये हम हमें अभी तक नहीं ये आप आपके ख्याल में सिर्फ लोगों को ये बात समझाकर लोगों को इस पर क्रिटिसाइज करके उनको आईना दिखाकर उनको हम यह बात उनको समझा सकते हैं देखि इसमें ना दो किस्म की अप्रोचेबिलिटी तीन अधारे हैं उनको ठीक कर दो सारी स्टेट में फंक्शनल बेहतर हो जाएगी और दूसरा नजरिया सोशल कांट्रेक्चुअल जिसमें इरानी मायदे की डिस्कशन होती है कि पहले एक पीपल क्रिएट होते हैं लेट्स से कि एक
सोसाइटी ने पहले एग्री किया कि वी आर रेडी टू बिकम वन पीपल जो जॉन लॉक ने बात की या थॉमस ने बात की जिनके अपने अपने सोशल कांट्रैक्ट डिफरेंट है अब इसमें यह है कि एक प्रेसमन यह है कि पहले दो किस्म के जो हब्स बात करता है कि दो किस्म के इरानी महदे होंगे पहला यह कि मैं दूसरे लोगों के साथ एक अलायंस बनाकर यह तय करूंगा कि वी आर रेडी टू फॉर्म अ स्टेट सो फर्स्टली यू अग्री एस पीपल कि हमने एक रियासत का कयाम करना है उसके बाद में आपका और स्टेट का
सोशल कांट्रैक्ट होगा तो हम इसको तो रोते रहते हैं हर वक्त जो हमारा और रियासत का इरानी मुदा है जिसमें कांस्टिट्यूशन भी आता है सिविक एथिक्स भी आती है और चीजें भी आती है बट ड वी एवर एग्री टू बिकम वन पीपल इन द फर्स्ट प्लेस यह सवाल जब आप इसको एक्सप्लोर करें तो आपको दिखाई देता है कि गिलगित बल दिस्तान तो आज तक फॉर्मली हिस्सा नहीं बन सका पाकिस्तान का यही सूरते हाल कश्मीर की है यही सूरते हाल हमें एफसीआर के अंडर रहने वाले फाटा की रही जो एक्स फाटा तो बन गया है ऑन
पेपर लेकिन आप देख लीजिए कि वहां भी जरगा फैसला करता है एक रियासत में मल्टीपल जूस्ट हां जस्टिस सिस्टम तो मैं जिस जगह से ताल्लुक है मेरा साउथ पंजाब से वहां अब भी खानदानी फैसले भी पंचायत के जरिए होते हैं क्योंकि लोग कहते हैं कि हम क्यों थाने कचहरी में पड़े वना तो लीवन वाली मैंने किताब पढ़ी पाकस्तान हार्ड कंट्री तो वो यही कहता है कि ये मल्टीपल जुडिशियस प्रोसेसस जो है ना उसने एक सर्वे भी करवाया पेशावर यूनिवर्सिटी में जाके जिसमें उसने क्लास में कहा कि आप सब पश्तून वली चाहते हैं या शरिया हम
तो 50 % डिवाइड हो गई ओपिनियन वहां पे अच्छा उन दोनों में ही पाकिस्तान का वो कोड नहीं था जो होता है तो आधे एक के हामी आधे एक के हामी खवातीन ने वहां पे शरिया को चूज किया अगेंस्ट पश्तून गली हम क्योंकि उनको यह लगा कि इसमें पश्तम वली से ज्यादा स्पेस है हमारे लिए तो अब ये चीजें हैं कंट्रोवर्शियल लेकिन इसका मतलब यह है कि सोसाइटी ने यूनानिमिटी मुआद पे अग्री नहीं किया अभी तक और उसके लिए फर्स्ट यू बिकम वन पीपल तो आपका जो सवाल है कि क्रिटिसिजम से क्या ये चीज रिफॉर्म
हो सकती है अगर लोग ये जान ले कि हमने किन लाइंस पे इस रियासत को तश्न देना है ओनली देन आई थिंक द ट्रू चेंज कुड कम अदर वाइज ऊपर से दो चार चीजें मेकअप बदलने से रियासत का वोह तो ठीक नहीं होंगी तो जो फॉट लाइंस है वो मेरा ख्याल है बॉटम अप अप्रोच से ठीक होती है टॉप डाउन से नहीं अच्छा लेकिन इसमें मुझे एक मसला यह है कि लोगों को आप जितना मर्जी समझा ले जब तक पावर स्ट्रक्चर साथ ना मिले लोगों के या लोग उस पावर स्ट्रक्चर का हिस्सा ना बन जाए
तब तक वो चेंज नहीं आ सकता आप कुछ भी कर ले मुझे इंसानी तारीख में कोई ऐसा वाकया याद नहीं कि सिर्फ लोगों की एजुकेशन से कुछ चेंज हो गया हो हां इस तरह जरूर हुआ है कि बहुत स्लो रफ्तार से फिर वो लोग पावर में आए हैं जो चीजों को समझ चुके थे उन्होंने चेंज किया लेकिन उसमें भी एट द एंड ऑफ द डे पावर ही चीजों को चेंज कर रही होती है और जिन जगहों पर पावर पहले चेंज होगी जैसे आपने [संगीत] के ऊपर चलना है जो हमने कर लिया ठीक है ऑन पेपर
कर लिया या बाकी किया या नहीं ये तो लोग बताएंगे लेकिन उसकी प्रेसमन यह है कि ट्रुथ इज इक्वल टू वैलिडेशन जिस भी सच के ऊपर 51 पर अग्री करते हैं वो सच है डेमोक्रेसी की एक सपोजिशन ये है जैसे ब्रेक्जिट में आपने देखा क्या हुआ अब इसको मेजोरिटी कहते बट डेमोक्रेसी भी टेरनी ऑफ मेजॉरिटी कह सकते हैं आप उसको यस वो और बात है कि उसमें बहुत से जो है वो माइनॉरिटी की प्रोटेक्शन की बातें हो सकती हैं या बिल ऑफ राइट्स जो अमरिक का हिस्सा अमेंडमेंट का हिस्सा है वो हो सकती है लेकिन
उसकी सपोजिशन और फंक्शनल इसी चीज प ऊपर है कि मेजोरिटी अथॉरिटी ठीक है दो ताई अरी है तो सादा अरी है तो हुकूमत फॉर्म कर ले तो अगर हम इस पैराडाइम को डिसाइड करें या इसको आइडियल माने तो फिर हमें क्या करना पड़ेगा कि कंसेंसस लेस से इतना बन जाए कि किसी आइडिया को मटेरियल हम करवा सकते हैं तो आज तमाम सियासत दन जो इस्लामिक टच देने की बात करते हैं या लोगों को जज्बाती याद भेज के बेवकूफ आते हैं वो इसलिए कि उन्हें पता है कि मेजॉरिटी भी इन्हीं इमोशंस पर खड़ी है अगर मेजॉरिटी
का इमोशन तब्दील कर दिया जाए और मैं इमरान खान या नवाज शरीफ या जरदारी साहब हूं और मैं सोसाइटी का एक एनालिसिस करूं कि इस मुश में 70 60 फीसद लोग सेकुलरिज्म की बात कर रहे हैं तो मैं भी वही करूंगा तो पावर स्ट्रक्चर तो वैलिडेट करेगा जनरल विल को कांस्टेंटिन ने ख्वाब से उठकर क्या कहा कि मुझे रात को सोते हुए क्रॉस नजर आया पहले सेंटीमेंट एनालिसिस किया कि मेरे यहां जो स्लेव क्लास है ना इसमें क्रिश्चन मोरालिटी बहुत ज्यादा आती जा रही है तो अगर रियासत को आगे टो करना है तो इसी इमोशन
को वैलिडेट करो सो आई थिंक अगर यह इमोशन तब्दील हो जाए तो हुक्मरान अशराफुल [संगीत] रेवल की मल जितनी भी ऑटोक्रेटिक पावर स्ट्रक्चर होगी अगर व वैलिडेट नहीं कर रही जनरल सेंटीमेंट को तो मारी जाएगी तो हम उस सेंटीमेंट को चेंज करेंगे पावर स्ट्रक्चर भी रिफॉर्म होगा लेकिन आप देखें कि आप बहुत ज्यादा रिलाई कर रहे हैं फ्री विल पे तमाम लोगों की लेकिन आपको पता है कि फ्री विल जो है वो उतनी इतनी फ्री नहीं है लोग फ्रील अग्री नहीं करता एकली इफ यू डोंट एग्री ऑन फ्री विल तो फिर फिर यहां पर सबसे
बड़ा क्वेश्चन अराइज होता है कि लोग तो वही चीज अब्जॉर्ब करेंगे जो उनको सोसाइटी में ऑक्सीजन की तरह सबसे ज्यादा मिल रही है अच्छा इंटरटेनमेंट के जराय किसी जगह पर जो होंगे लोग वहां से इंटरटेनमेंट सबसे पहले हासिल करेंगे चंद एक बागी आपकी तरह के होंगे जो और तरफ जाएंगे सोसाइटी को आप बहुत ज्यादा ब्लेम कैसे कर सकते हैं जब आप किसी फ्री विल प यकीन ही नहीं करते देखि फ्रीविल से अगर आपका मुराद यह है कि मेरी कॉन्शियस डिसीजन मेकिंग जो होती है वह भी किसी और पैराडाइम से कंट्रोल होती है तो फिर यह
तो एक मेटा फिजिकल सवाल है जिस तरह कांट ने जो है वो ट्रांसंट डिम की बात की या उसका एक कटेगो कल इंपरेटिव है या मुख्तलिफ फलस जो इस पर डिस्कशन करते हैं नीचे का हिमसेल्फ फ्रीविल पर यकीन नहीं था क्योंकि वो डिटरमिनिस्टिक मोरालिटी की बात करता है या बायोलॉजी की बात करता है जिसमें वह कहता है कि इंपल्सेस और नेचर के अंदर जो कोड है ना वही इंसान की थिंकिंग में आपको दिखाई देगा इनफैक्ट एक जगह पर तो व यह कहता है कि थॉट्स आर द शैडोज ऑफ फीलिंग कि जो मुझे महसूस होता है
ना अंदर से जो मेरी जिबल का हिस्सा है मेरी सोच सिर्फ उसका अक्स है सोच इन इट सेल्फ इज नॉट इंडिपेंडेंट और उसके पीछे क्या है बायोलॉजिकल मेकअप है जिस तरह से आजकल क्रिमिनोलॉजी में रिसर्च भी होती है कि कुछ लोग एक्चुअली दे आर मोर इंक्लाइंड टुवर्ड्स क्राइम बायोलॉजिकली तो हमने ये सिर्फ बिहेवियर को स्टडी करके नहीं पता चला सकते किसी का कि यह कल को क्रिमिनल बनेगा या नहीं लेकिन अब तो जेनेटिक लेवल पर रिसर्च हो रही है तो मैं उस फ्रीविल की बात नहीं कर रहा जिसमें वो कहते हैं ना कि आई गस
शोपन ने यह बात की थी के आप विल को विल करने में फ्री नहीं है विल के थ्रू जो आप करेंगे वो ठीक है लेकिन आप ये नहीं विल कर सकते कि मैं क्या विल करूं वो तो अंदर से ही आएगी आपको ग्रीन कलर शायद बहुत अच्छा लगता हो लेकिन आपको क्यों लगता है ये आपको नहीं पता बिल्कुल लेकिन जहां आपका ये सवाल है कि हम फ्रीविल पर फिर इतना एतमाद क्यों कर रहे हैं कि लोग जो है वो कॉन्शियस एफर्ट करेंगे तो उसके लिए मुझे लगता है कि हमें अपनी कॉज के लिए प्रोपेगेंडा करना
पड़ेगा बिकॉज यू हैव टू टेल पीपल और स्टेट के अंदर कभी भी ऐसा नहीं होता कि जनरल मैसेज इतनी क्रिटिकल और इतनी रैशनल हो कि वो इंपल्स के बगैर फैसला कर ले अमेरिका की पॉलिटिकल ऑर्डर में चेंज कहां से आया जब एडवर्ड बर्नेस ने फ्रॉड को ट्रांसलेट करके पढ़ाना शुरू किया वहां पे ही वाज द वन एडवर्ड बर्नेस वो आदमी था जिसने वाइट हाउस की पॉलिटिकल कम्युनिकेशन की स्ट्रेटेजी डिजाइन की ही वाज द फर्स्ट मैन जिसने हॉलीवुड के सेलिब्रिटीज को वाइट हाउस में बुलाना शुरू किया क्योंकि उसको फ्रॉड की थेरी से समझ ये आई कि
फ्रॉड तो मायूसी के आलम में मरा है और उसने कहा कि जम्हूरियत से मुझे कोई उम्मीद नहीं है क्योंकि इंसान डार्क माइंड से फैसला करता है और डार्क माइंड क्या होता है इंपल्स इंपल्सिव माइंड कि जो मेरी पसंद की बात करेगा उस परे मैं जान नहीं चावर करूंगा जज्बाती नारा लगाओ और मेरा वोट ले लो तो मैंने यह कभी भी नहीं कहा कि वोटर 100 फीस रैशनल फैसला करेगा मैंने यह कहा है कि अगेंस्ट द फोर्सेस ऑफ योर अपोजिशन यू हैव टू डू प्रोपेगेंडा फॉर योर ओन सेक अभी आपने यही कहा ना कि लोगों की
बातें सुन के उनकी ओपिनियन कैसे बदलेगी तो हम जो यह बातें कर रहे हैं इफ दे बिकम मेजोरिटी ऑपिनियंस हर वो मुशरा जहां पर एक आईडिया कंपलीटली स्वीप कर देता है डोमिनेट कर देता है वहां आता है टोटलिटेरियन जम चाहे वो सेकुलर ऑर्डर भी क्यों ना हो कोई भी ऑर्डर क्यों ना हो वो इसके ऊपर आपको नीचे की एक फिलोसॉफिकल पर्सपेक्टिव मिलती है डायोसिस और अपोलो का वो कहता है कि आइडियल मुशरा वो होगा जहां रीजन और इमोशन का बैलेंस होगा दोनों जस बात एजिस्ट करेंगे ग्रीक सोसाइटी को बहुत से लोग बड़ा ग्लैमराइज करते थे
कि वहां रीजन साइंस लॉजिक की बात होती थी तो नीचे ने कहा कि उसकी स्ट्रेंथ नहीं थी उसकी स्ट्रेंथ उसका इमोशन आर्ट और हाई कल्चर था तो इन दोनों की सुकरात को उसने अगली कहा अगली कहा और उसको तो बहुत क्रिटिसाइज किया उसने क्योंकि वो एक लंबी डिबेट है क्योंकि वो सोक्रेटिक जो एथिक थी उसको बिल्कुल बहुत ही डिस रिगार्ड करता था कि इसने पॉइजन कर दिया थॉट को यहां तक जो कि हमारे नजदीक बहुत बड़ा आदमी है लेकिन बात यह है कि इसके अंदर आपको यह दिखाई देता है कि एक मुशे में जब डिस्कोर्स
का बैलेंस खत्म हो जाएगा तो फिर काम खराब होगा तो वह कहता है कि आई एम इन सपोर्ट ऑफ एवरी आइडिया अंट्स द रूल एवरी एक्सेप्शन अंट्स द रूल हर वो आईडिया जो माइनॉरिटी आईडिया है मुझे उसको इसीलिए सपोर्ट करना है कि अभी वो टोटलिटेरियन शक्ल इख्तियार नहीं किया जब वोह कर जाएगा मैं उसके खिलाफ हो जाऊंगा तो मी एज अ कांट्रेरियन जो कि हमेशा से जनरल एक मेजॉरिटेरियन ओपिनियन को डिसलाइक करता है आई एम दैट मैन हम मुझे कभी भी वोह आईडिया अपील नहीं किया जो मैस ड्रिवन आईडिया है तो इसीलिए मैं चाहता हूं
कि यह जो आइडियल बैलेंस होगा हम इससे आप एक सोसाइटी बना सकते हैं अदर वाइज पॉसिबल नहीं क्या कभी कोई आइडियल थॉट आइडियल थ्योरी आ सकती है जो बहुत अच्छी हो जो परफेक्ट हो मैं तो पर्सपेक्टिव जम को मानने वाला आदमी हूं जो थोड़ा सा पोस्ट मॉडर्न आईडिया है हालांकि मुझे पोस्ट मॉडर्न से भी मसला है मतलब इसको देखि ना एक मेरा इशू या इस इस फिलॉसफी का इशू यह है कि यह सिस्टम की फिलॉसफी नहीं है यानी कि सिस्टमिक फिलॉसफी जिसमें तमाम सवालों के जवाब हो पोस्ट मॉडलिज्म भी यही कहता है ना जो नीचे
का को यू हैव योर वे आई हैव माय वे एस फॉर द राइट वे इट डज नॉट एजिस्ट भाई आपका अपना तरीका है मेरा अपना तरीका है लेकिन जो आइडियल तरीका है वो मुझे नहीं पता क्या है पर्सपेक्टिव जम मेरा अपना पर्सपेक्टिव है आपका अपना तो ऑब्जेक्टिव रियलिटी की निगेशन है ये इसीलिए मैं अगर कहूंगा भी कि ये आइडियल है वो तो मेरा हुआ ना मुझे क्या पता कि वो आपके लिए है या नहीं है सो ट्स वय यह नहीं कह सकता मैं कि एक ऐसा सिस्टम एक है जिसको मैं कंपलीटली अडॉप्ट कर लू अपनी
थॉट के अंदर दो पोस्ट मॉडम की बहुत सी चीज से मुझे बहुत इख्तिलाफ है लेकिन यह मेरा ख्याल है कि क्लोजेस्ट टू नेचर चीज यही है कि पर्सपेक्टिव्स के थ्रू इंसान आइडियल बनाता है इसीलिए कोई भी जनरल आइडियल पर मैं बात ही नहीं कर सकता अच्छा आपके ख्याल में हमारा जो पाकिस्तानी नौजवान है 72 पर जो लोग हैं 72 फीसद जो लोग हैं पाकिस्तान के यंग है अंडर 27 इयर्स ऑफ एज है इनके जनों को इनकी पर्सनालिटी को वो क्या चीजें हैं जो शेप कर रही है चाहे वो माज से आ रही है चाहे वो
आज है क्योंकि ये सवाल मेरे नजदीक इसलिए बहुत अहम है क्योंकि वो उन्हीं चीजों को सामने रखते हुए फैसला कर रहे हैं और उस वेव की तरफ जा रहे हैं और उस तरीके से अपनी जिंदगियों को शेप कर रहे हैं ये 72 फीस लोग जो इनको शेप कर रहे हैं हां ये सब लोग 72 पर जो पाकिस्तान की यूथ है आपके ख्याल में इनकी जहन साजी में कौन से एलिमेंट्स हैं जो सबसे बड़ा किरदार अदा करें देखिए इसका बड़ा फिलोसॉफिकल जवाब देने से बेहतर यह है कि जो आजकल के हालात है उस लिहाज से जवाब
दिया जाए इसका एक एक लफ्ज का जवाब है वो है टेक्नोलॉजी मैंने जो देखा है ना इंसानी तारीख के अंदर जिसने सबसे बड़े कल्चरल चेंजेज किए हैं वो टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन क्योंकि इवन लिखने को भी अगर हम एक टेक्नोपोले कहे जो नील पोस्टमैन बात करता है तो ग्रीक मुश की सबसे बड़ी स्ट्रेंथ ये थी कि उन्होंने आईडियाज को पेपर पर पेन डाउन करना शुरू कर दिया लिखना शुरू कर दिया तो थॉट जो है वो लिखे हुए में फ्रीज हो जाती है रल कल्चर में जहां बोल के आइडियाज कन्वे हो रहे थे वहां पर कोई सॉलिड थिंकिंग
सिस्टमैटिक डिवेलप ही नहीं हो सकी हम और ट्रांसफर भी नहीं हो सकती ट्रांसफर भी नहीं हो सकी क्योंकि उसका रिकॉर्ड भी नहीं कहानियां और नजम ट्रांसफर होती है बस हां बिल्कुल तो ये चीज है ना कि ये आज के दौर की अगर पॉलिटिक्स की हम बात करें तो सोशल मीडिया के आने के बाद जो कन्वेनस ऑफ आइडियाज है उसकी मशीनरी ही तब्दील हो गई तो टेक्नोलॉजी दरअसल वो इंजन है जिसके ऊपर थॉट ने बैठ के सफर करना है आजकल की पाकिस्तानी स्टेट को या तमाम स्नोत की स्टेट को जो इरेलीवेंट होती जा रही है अपने
नैरेटिव के लिहाज से उन्हें टेक्नोलॉजी की समझ नहीं आ रही क्योंकि इवन सहाफत आपने भी कर रखी है हम भी कर रहे हैं उसके अंदर आप देखिए कि प्रिंट के सहाफी जब टीवी का दौर आने पे ट्रांजीशन नहीं कर पाए तो उनकी रेलीवेंस बहुत कम हो गई और वो मुशे में ओपिनियन मेकर्स की जो हैसियत थी उसको लूज कर गए एटली तो इसी तरह से जब प्रिंट की एपिस्टम जिसको हम कह सकते हैं वो जब जाती है टीवी के ऊपर और टीवी से सोशल मीडिया पे कन्वर्ट होती है तो उसके बाद में एक डेमोक्रेटाइजेशन ऑफ
प्लेटफॉर्म्स हो जाती है आज आपने मैं भी बना सकता हूं यहां जो आपका स्टाफ है यह भी बना सकता है कोई भी बना सकता है पहले एक सहाफी की क्या टेरर क्या था मुश के अंदर यहां पे जिसमें मैंने बहुत लोगों को ब्लैकमेलिंग करते हुए भी देखा वो यही था कि माउथ पीस मैं हूं मैं मैं वो प्लेटफार्म हूं जिससे फाइनल वर्ड निकलेगा इसीलिए अगर मेरा मूड खराब हुआ तो मैं आपको छोडूंगा नहीं और अब यह है कि एक डेमोक्रेटाइजेशन है कि अगर मैंने इशारे प किसी से बदतमीजी की है मेरी छोटी सी वीडियो बना
के अपलोड करो मेरा करियर खत्म तो लोग इसको भी बाद में देखेंगे कि ये किस प्रेक्ट किस पर्सपेक्टिव में चीज हुई है या नहीं हुई वो उन्होंने फैसला करना है आप इसे इसको कंट्रोल नहीं कर सकते इस नैरेटिव को तो अब आकर जो टेक्नोलॉजी का चेंज आया है ना उस परे एक इंप्रेशंस की दुनिया है जो स्क्रीन के ऊपर बेहतर लगेगा मेरी स्ट्रेंथ क्या है आपकी स्ट्रेंथ क्या है कि आपने इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के थ्रू आईडियाज को कन्वे किया तो जिसकी स्क्रीन के ऊपर अपीयरेंस इफेक्टिव है व रूल करेगा इसको मोनोपोली न ट्रुथ कहते हैं
कि कुछ लोगों को सच पर मोनोपली मिल जाएगी तो आजकल की सियासी क्लास को जिस चीज प मोनोपोली मिली है वो ऑडियो विजुअल प्लेटफॉर्म है क्योंकि इतना ताकतवर प्लेटफार्म जि जिंदगी में इंसानियत की तारीख में नहीं आया एक मैं अगर अपनी बात करूं अपने शोरूम में बैठ के मैंने य चैनल शुरू किया था कुछ भी नहीं था ना कोई इनोवेटिव चीजें ना टेक ना कुछ भी नहीं लेकिन क्या वजह है कि बहुत से लोगों तक वह बात पहुंची जो पहले पॉसिबल भी नहीं थी बहुत से पब्लिश राइटर्स जो कि मरने के बाद प्यूम सली फेमस
हुए उनका काम दुनिया तक पहुंचते हुए ही 10 10 20 20 साल लग गली 18 साल तो मार्क्स को लग गए थे अपना मैगनम ओपस लिखने में तो यह है कि अब आकर क्या है कि जो ट्रांसफरेंस ऑफ आइडियाज की रफ्तार है ना वो बहुत ज्यादा तेज हो चुकी है यही इसकी ताकत है और यही इसकी क वीकनेस है क्योंकि इसमें सोसाइटी की सोसाइटी को वीक किया है इसने अंडरस्टैंड उनकी जो अंडरस्टैंडिंग एक नौजवान की सोसाइटी की कैपेसिटी थी वो बड़ी शिद्दत से मुतासिर हुई है क्योंकि अभी पिछली चीज को समझ नहीं पाता है कि
नली आ जाती है तो वो उसकी फ्रीक्वेंसी वो नील पोस्टमैन की जो किताब है एम यूजिंग ल सेल्स टू डेथ मैं हमेशा कोट करता हूं वो कहता है कि ये जो प्लेटफॉर्म्स है ना ये इंफॉर्मेशन को महदूद नहीं करते इतना बढ़ा देते हैं कि वो रेलीवेंट हो जाती है क्योंकि जब हमें यही नहीं पता कि इन सब में से रेलीवेंट आईडिया कौन सा है क्लेरिटी खत्म क्लेरिटी खत्म तो डिसीजन मेकिंग का कैसे आप कह सकते हैं कि रैशनल होगी वो और जिस तरह उस टॉक में जिसमें हम इकट्ठे थे मैंने वहां भी कोट किया जर्मन
आईडियोलॉजी में मार्क्स ने बोला था कि अलीस जिसको हम कहते हैं कि बड़ा ताकतवर और मस्कुलर फिगर था अगर उसके दौर में एक बंदूक इजाद होती तो एक फायर मार के गिरा देते उसको एटली टेक्नोलॉजी क्रिएट न्यू मोनोपोली तो अब जो नई मोनोपोली आई है ये नौजवानों के दिमाग को कंट्रोल करती है और इसीलिए आप पुल बनाएं सड़कें बनाएं अमेंडमेंट्स करें लेजिसलेशन करें या रियल चेंज लाए इट इज ऑल इरेलीवेंट जो स्क्रीन पर मोनोपोली ले चुका है वो रूल करेगा अच्छा आपको नहीं लग रहा कि जो दुनिया भर में चेंजेज आ रही है अब वो
किसी भी छोटी से छोटी सोसाइटी से उतनी इरेलीवेंट नहीं है जितनी पहले थी अगर अमेरिका में यूरोप में अफ्रीका में को बड़ा चेंज आता है तो पाकिस्तान भी उससे उतना ही इफेक्ट होगा जितने के वह मु मालिक होंगे या उससे आखरी का किसी ना किसी तरह इफेक्ट होगा अब उस तरह से दुनिया नहीं रही कि अगर कोई बड़ा चेंज कहीं और आ रहा है तो हम उसे बिल्कुल नहीं हमें कोई फर्क नहीं पड़ रहा खास तौर पर जो भी आपने बात की टेक्नोलॉजी की टेक्नोलॉजी ने जो बहुत बड़ा एक काम किया है मेरे नजदीक जो
उसने चेंज की है चीज बहुत ग्रास रूट लेवल तक आकर वो यह कि उसने डेमोक्रेसी की जो एक डिबेट थी जो उसके कई ऐसे एंगल्स को रोक रखा था कि यार यह बातें हम इनको डिस्कस ओपन नहीं करेंगे क्योंकि सोसाइटी जान चुकी है इंटेलेक्चुअल्स फैसला कर चुके थे कि यार ये डिबेट्स अब हमने नहीं करनी क्योंकि ये ये रंग है उसने वो तमाम डिबेट्स फिर सामने लेके आ गई जो कि वाक ही गलत थी उसने डेमोक्रेसी को बहुत वीक कर दिया वो जो माचू मैन था वो जो एक नफरत वाले लोग थे जो नफरत फैला
के शोहरत हासिल करते थे वो फिर टॉप पे आ गए तो इस टेक्नोलॉजी ने डेमोक्रेसी को मेजॉरिटेरियन जम में इस तरह से बदला है कि आप और हम तो मुंह देखते रह गए बिल्कुल सही कह रहे हैं 100 फीसद मुत्त फिक हूं उसकी वजह यह है कि मैं ना इसके लिए एक टर्म भी यूज करता हूं अक्सर जिसको हम एल्गोरिथमिक जेल्स कहते हैं कि एल्गोरिदम आपके लिए एक जेल बना देगा क्योंकि अगर मैंने इस कमरे में बैठ के आज यह बात की है ना कि यार मैंने बाजार से यह चीज लेनी है दो मिनट बाद
मुझे इश्तिहार दिखाई देगा उसका टाइमलाइन और बाद में वो उसी को इसको पॉजिटिव फीडबैक लूप भी कहते हैं कि जो मैं सोच रहा हूं इसी को रिपीटेडली रिइटरेट करवाए जाओ अगर मुझे कोई मख सूस सियासी पार्टी पसंद है मुझे सिर्फ उसका कंटेंट दिखाई देगा मैं अपनी उस एल्गोरिदम की बायस से बाहर देख ही नहीं सकता तो हमारी सपोजिशन यह थी कि फ्रीली फ्लोइंग इंफॉर्मेशन से ह्यूमन थॉट डिवेलप हो जाएगी हुआ क्या रिग्रेस कर गईली तो बहुत से लोग जो आज आकर मुझे कहते हैं अब जो अवेयरनेस आ गई है ना पाकिस्तान के अंदर य कभी
भी नहीं आई मैं कहता हूं किय इसका बेंचमार्क क्या है कि कौन सी अवेयरनेस आ गई है क्या आपको गाली देनी आ गई सोशल मीडिया प किसी को या आपको अब मतलब जो सबसे आखिर में बेदार हुए हैं ना पाकिस्तान की रियासत के मसले से वो कह रहे हैं हम सबसे ज्यादा बशर है ठीक है तो ये चीज है कि मुझे ये लगता है कि इसमें इमोशन को एमप्लीफाई किया जाता है क्योंकि व्यूज तब आएंगे देखा तब जाएगा जब किसी इमोशन को अपील किया जाएगा इसीलिए यह जो थंबनेल पर हम एब्सर्डिटीज लिखी हुई देखते हैं
थंबनेल कल्चर में थंबनेल कल्चर जो है वो क्या करता है वो सिर्फ आपको एक ऐसा थंबनेल दिखाएगा जो आपकी इमोशनल अपील पे बे बेस्ड होगा सिर्फ उसमें फैक्ट ना भी हो वो मैटर नहीं करता बकुल तो इसी को तो मैं जो आपने कहा ना कि दुनिया भर में एक चेंज आ जाता है पहले ऐसा नहीं था कि एक सोसाइटी चेंज हुई दूसरी हुई जैसे रेनेसांस हुई रिफॉर्मेशन हुई या फिर इनलाइटनमेंट की मूवमेंट शुरू हुई वो इस्लामिक वर्ल्ड में आई नहीं आई नहीं वो एक डेढ़ सदी तक तो अपने अपने अंदर ही लोगों को चेंज करती
रही करती रही तो इसीलिए कि वहां पर एक इंटेलेक्चुअल क्वांटन का लफ्ज यूज करते हैं ऑटोमन के अंदर था और लोगों में था प्रिंटिंग प्रेस नहीं आने दे रहे थे और चीजें नहीं गुडन बर्ग जो जर्मनी में आ गई नहीं आने दी अब ये इसीलिए पॉसिबल नहीं है कि एक तरफ जो हमने बड़ा चैंपियन किया इस चीज को कि एक ग्लोबल विलेज बन जाएगा लेकिन वो पोस्टमैन कोर्ट एन कोर्ट ये कहता है सरेंडर ऑफ कल्चर टू टेक्नोलॉजी कल्चर हथियार फेंक देगा टेक्नोलॉजी के आगे इसीलिए अब आप गांव में जाएं लाहौर जाएं इस्लामाबाद जाएं हर कोई
टिकटॉक स्क्रोल कर रहा है यू वांट फील द कल्चरल शिफ्ट वेर एवर यू ट्रेवल आपको ह्यूमन कॉन्शियस प कितना बिलीव है कि वो ये फिल्थ फैल गया है सोशल मीडिया और टेक्नोलॉजी की हेल्प के साथ जो कि पहले किसी ना किसी जमन में थोड़ा बहुत छुपाया हुआ था क्या यह टेंपरेरी है या मुश्किल मतलब एक लॉन्ग टर्म के लिए आ गया ह्यूमन कॉन्शियस इसका मुकाबला कर पाएगा देखि यह सोशल से ज्यादा ना साइकोलॉजिकल सवाल है और साइकोलॉजी को क्वीन ऑफ ल साइंसेस भी कहते हैं क्य नवा साइकोलॉजिस्ट फसर मोर ऑफ साइकोल उसको साइकोलॉजिकल फिलोसोफर भी
कहते हैं तो इसलिए मैं आपको य जवाब देना चाहिए बिल्कुल देखिए इसमें यह है इसका जवाब दे उसमें यह है कि मुझे यह लगता है कि जो ट्रेजे क्ट्री इंसानी सिविलाइजेशन की रही है ना उसमें कभी भी यह चीज नहीं हुई कि सिस्टमैटिक ऑर्डर में वर्ल्ड हिस्ट्री डेवलप करती रहे बहुत सी चीजें आप ग्रीक मुशे की रोमन मुशे की आज पढ़े ना तो वो आज के लिहाज से हजार साल आगे लगेंगे आपको जिस तरह रेनेसांस की तहरीक में आप फ्लोरेंस जो इटली की स्टेट थी और जगह थी वहां पर आर्टिस्ट को फिलोसोफर को इंटेलेक्चुअल को
राइटर को स्टेट जो है वह स्टाइपेंड देकर कह रही थी कि आप घर बैठक सिर्फ सोचे हम आपको पैसे देंगे आज की रियासतें इन्हीं लोगों को घरों से उठा रही है ठीक है इसके अलावा आप इंफ्रास्ट्रक्चर अगर उस दौर का देखें जिसमें और सबसे बड़ी चीज कि इंटेलेक्चुअल रिचस देखें मैं 17 18 सेंचुरी के जर्मनी का जब कल्चर पढ़ता हूं तो वहां पर डिनर की टेबल पर थीसिस डिस्कस हो रहे हैं एक दूसरे के कि अच्छा आपने अब इस चीज पर रिसर्च की है तो इसका जवाब मैंने इस तरह स्कॉलरली देना है आज की डिनर
टेबल की डिबेट क्या है रॉयल सोसाइटी ऑफ साइंस जो थी रॉयल इसकी ब्रिटेन की जहां से यह सारे सारे लोग आए हैं न्यूटन वगैरह वो वो इसी वजह से आप आए कि उसकी स्टेट बादशाह उसकी हेल्प कर रहा था बिल्कुल ऐसे ही है क्योंकि वो ताकत जो है व अपने पलड़े में डाल दी ना उसके तो यह है कि मुझे नहीं लगता कि ये ट्रेजे इतनी लीनियर है कि कल को यह तमाम मसाइल अपने हल करते जाएंगे इनफैक्ट ह्यूमैनिटी की वो हरारी की मैं इस बात से अग्री करता हूं कि उसने कहा कि अपने कंफर्ट
के लिए हमने जो भी चीज बनाई उसने हमें बर्बाद कर दिया एग्रीकल्चरल भी अपने कंफर्ट के लिए लाई गई एक तहरीक थी जिसमें इंसान ने यह कहा कि मैं जंगलों में खूनखार जानवरों के शिकार करने के पीछे अपनी जान भी खतरे में डालता हूं लड़ाई भी करता हूं एक ब्लडी कॉन्फ्लेट में पड़ता हूं इससे बेहतर यह है कि उन्हीं जानवरों को डोमेस्टिक करो एक जगह पर बंद करो ठीक है ऑर्गेनाइज रिलीजन के के हवाले से आईडियाज आपको बढ़ते हुए दिखाई देंगे उस दौर में और साथ यह कि जरा को डोमेस्टिक कर लो तो हरारी ने
यह कहा कि जरा को हमने डोमेस्टिक केट नहीं किया जरा ने हमें डोमेस्टिक कर लिया क्योंकि हम उसके कैदी बन गए और अंदर क्या था कि सिर्फ सुकून से बैठ के पूरा सालाना ओनरशिप भी उसी के बाद आई उसी के बाद आई और आज तो बहुत रिलीजन उसकी पैदावार बिल्कुल आज से बहुत आजकल बहुत से हमारे कम्युनिस्ट दोस्त जो है वो किसान के लिए तहरीक चलाते हैं लेकिन पहला कैपिटल किसान था हा क्योंकि उसने ये कहा कि मैं वेल्थ को अमले कर रहा आका वहां से आया एग्रीकल्चर दौर ने आका और गुलाम पैदा किए बिल्कुल
अर गैदरर्स में कोई आका गुलाम नहीं था हां ऐसे ही है क्योंकि वो फ्री सोसाइटी थी स्टेट ऑफ नेचर थी ना जिसको हब्स कहता है कि नासरी ब्रूटस शर्ट सॉलिड तो ये ह्यूमन कॉन्शियस प आए सवाल संगल से मैंने पूछा कि क्या ह्यूमन कॉन्शियस प आपको इतना बिलीव है कि ये जो सारा फिल्थ अब हो रहा है और पावर में आ रहा है पूरी दुनिया में इसका मुकाबला कर पाएगा नहीं बिल्कुल नहीं मुझे तो इस इसीलिए बिलीव नहीं है कि मैं नहीं समझता कि ह्यूमन बीइंग्स आर रैशनल एंटिटीज दे आर मोर ऑफ इमोशनल एंटिटीज बट
देर सर्वाइवल एंटिटीज आल्सो दे आर बट इसका यह मतलब नहीं है कि हम डिस्ट्रक्शन में इवॉल्व नहीं रहे पिछले 5000 साल की तारीख में मेरा ख्याल है 280 साल पीस है बाकी वॉर है सो वॉर इज अ परमानेंट स्टेट ऑफ एक्जिस्टेंस तो आप आगे भी अगर चलती रहेगी तो फर्क यह है कि पहले क्यों सरवाइव कर गए टेक्नोलॉजी इतनी डिजास्टर्स नहीं थी जो अब हो चुकी है बिकॉज इन केस ऑफ ग्लोबल वर एट दिस स्टेज इट मींस डिस्ट्रक्शन ऑफ दिस करंट ऑर्डर 10 20 टाइम्स क्योंकि इतना सामान हमने इकट्ठा कर लिया है कि मल्टीपल टाइम्स
डिस्ट्रॉय कर दे इस दुनिया को और जिस तरह के लोगों के हाथों में आज की रियासतें आ रही है अमेरिका में देखिए अभी हम बात भी कर रहे थे क्या चेंज आया और जगहो में जो पॉप जमनी में जर्मनी में उसका नया जो चांसलर आने वाला है जो सबसे जदा ज्यादा पॉपुलर है उसके आप व्यूज देख ले अमेरिका में देख ले फ्रांस में बड़ा क्लोज अभी वो मैवा जो जीता वो उनकी अपोजिशन आप देख ले फार राइट थी इंडिया में देखें मुसलसल थर्ड टर्म एक ऐसा बंदा आया है जो इंतहा राइट विंग है बिल्कुल और
वो दूसरा ये कि एक लिहाज से रिवाइवलिस्ट पॉलिटिक्स की बात हर जगह हो रही है पहले अच्छा था वो वापस लेके आना है तो ये चीज है कि मुझे इसीलिए फेथ नहीं है कि हमने बहुत ज्यादा डिस्ट्रॉय किया हैबिटेट को कल्चर को और एनवायरमेंट का जो असर कर रहे हैं वाटर डिप्लीशन के मसाइल पाकिस्तान में जहां हम बैठे हुए हैं इतनी बड़ी पॉपुलेशन है रिसोर्स का नहीं पता कैसे पूरा करना है मुझे अभी कोई रिसेंटली पंजाब की हुकूमत से एसोसिएटेड एक शख्स बता रहा था कि लाहौर में ग्राउंड वाटर 1015 साल के बाद हमें नहीं
पता कैसे मैनेज करना है हम तो मुझे नहीं समझ आती कि ये जो रिसोर्स पे हम जो है बेतहाशा एक अटैक कर रहे हैं और जो एक पॉपुलेशन बूम है और ये सब कुछ है ये कैसे मैनेज होगा तो इतना रैशनल मैं नहीं समझता ह्यूमन एंटिटी को कि वो बहुत ही साउंड फैसले करेगी लंगर टर्म तो यह तो पूरी एक ना उम्मीदी की बात है नायम की तरफ जा रहे हैं देखि नायम भी दो फॉर्म्स में होता है एक एक्टिव नाजम है एक पैसिव नाजम पैसिव नाजम वो शॉपर वाला है कि अच्छा मैं पैदा हो
गया हूं एक्जिस्टेंस भी सफरिंग है और इसके अलावा बच्चे भी ना पैदा करो एंटी नेटलिस्ट बन जाओ और दूसरा यह कि कोई फायदा किसी भी एक्ट का है ही नहीं और एक एक्टिव नाजम है जिसमें एल्बर्ट कम का एब्सर्डिज्म खिदमत इंसानियत के लिए हमारी यह हो सकती है कि हम स्पीशीज की जो टैलेंट है या इसकी सर्वाइवल की जो कैपेसिटी है उसको बढ़ा दे इसीलिए वो कहता है कि नेशन इ डी टूर ऑफ नेचर च गोज अराउंड एंड कम्स टू अ फ्यू ग्रुप ऑफ इंडिविजुअल और मेन कहता कमो वगैरह से कुछ तब्दील नहीं होता वो
थोड़े से कुछ लोग होते हैं जो कि फिर उसम मिसाल देता है नेपोलियन की ठीक है गटा की मिसाल देता है जो फिलोसोफर था थिंकर था तो इसमें यह है कि अब आकर नायल ज्म की अगर हम बात करें कि उसका यह मतलब है कि सब कुछ ही करना छोड़ दो दैट्ची करता हूं वह यह है कि पैसिमिस्म इन थॉट ऑप्टिमिस इन विल हम यानी कि थॉट के लिहाज से मैं पेसिम मिस्ट ही रहूं ताकि लोगों को पूरी तरह डराया जा सके कि यह आप खतरे की तरफ जा रहे खतर की तरफ उन्हे कॉशन में
रखें और उनको तबाही से बचाने के लिए प्लान बी दें अभी ऑप्टिमिस्ट जो थिंकर्स थे या ऑप्टिमिस्ट लीडर थे पॉलिटिकल उन्होने दुनिया का इतना बुरा अशर किया कि मेरा ख्याल है कि तबाही ज्यादा है ही उनके क्रेडिट के ऊपर कि उन्होंने सोचा कि हम इस सोसाइटी को इवेडर उसको करेंगे कुछ भी नहीं होगा हमारी अपनी स्टेट ने चार जंगे इसलिए लगाई कि उन्होंने सोचा कुछ भी नहीं होगा आगे से हमें कश्मीर भी मिल जाएगा हम अपने सबर्स को भी मिल जाएगा सब मिल जाएगा मतलब आपने इस पर डिटेल में बात भी की हुई है लेकिन
वो क्या था पॉजिटिव थिंकर्स थे हम हिटलर को भी इसीलिए लेट लूज किया गया शुरू में कि चलन पॉजिटिव थिंकर था असल में आइसोलेटेड पॉजिटिव थिंकिंग बड़ी नुकसान देती है जो मैंने देखा है जिनको हम पॉजिटिव भी कहते हैं जब ये आइसोलेशन में आइसोलेशन में अपने ग्रुप के लिए सोचते हैं ट्राइबल थिंकिंग करते हैं तो बहुत बड़ा नुकसान कर देते हैं उनको लगता है कि हम बहुत अच्छा काम कर रहे हैं लेकिन बेसिकली वो अपनी स्मल सोसाइटी के लिए मतलब कुछ दिन कुछ दिन पहले उसका डोनाल्ड ट्रंप के बारे में उसका एक बड़ा करीबी एडवाइजर
बात कर रहा था कि ही इ वेरी एंपैथेटिक तो मैं सोच रहा था कि एंपैथेटिक जो डोनाल्ड ट्रंप को एमथे कह रहा है सोचे वो शख्स खुद कैसा होगा और वो उसका वो कितनी स्मल वो पॉपुलेशन होगी जिसके बारे में एंपैथेटिक होगा जो कहता है कि हिस्ट्री की सबसे बड़ी मैस डिपोर्टेशन करूंगा मैं ठीक है वो एंपैथेटिक है लेकिन इस पे वो यही है ना कि जो यूक्रेन के प्रेसिडेंट को कहता है कि तुमने जंग शुरू की थी जंग शुरू की थी एंड यू हैव एब्सलूट फेल्ड और गजा को कहता है मैं इसको एथिकली क्लींज
करूंगा एप ही इ एंपैथेटिक आपको बड़ा मजेदार वाकया बताऊं चंगेज खान का एक इसी तरह वाक ब मशर है एक बच्चा रो रहा था तो उसको बताया गया कि इसकी मां आपने जो हमला किया ना उसम कत्ल हो गई है तो ये बेचारा अपना यतीम हो गया वो बहुत उसको तस आया बहुत एंपैथी उसके दिल में जा गई उस दिन उस बच्चे को भी नेजा मारा उसने कहा मुझसे इसका रोना देखा नहीं जा य इसी तरह की एंपैथी की बात हो रही है जी आइसोलेशन में है ना एंपैथी आप आपने लोगों को तमाम इंसानियत को
एक फैमिली समझा ही नहीं हां नहीं वो मुझे वो अब मुझे नाम नहीं याद आ रहा उस एसएस के उस जर्नल का वो जब ट्रायल्स हुए थे सेकंड वर्ड सेकंड वर्ड हा तो उसमें जब उसमें से एक जो एसएस का जनल था उसने आर्गू किया कि माय मैन हैव सफर्ड नरम बर्ग ट्रायल नरग ट्रायल क्योंकि टोक्य ट्रायल्स थे जापान वाले और न्यूबर्ग वाले जर्मनी वाले थे टोक वाले तो बहुत शॉर्ट थे असल में य असल ये थे जिसकी प्रोसीडिंग भी पढ़ने का मजा आता आपको तो उसमें एक जरनल ने आर्गू ये किया कि माय मेन
हु हैव सरवाइव सफर मो मोर देन दोज ू हैव डाइड बिकॉज दे हैव सीन सो मच हैपनिंग अराउंड देम जो मर गए वो तो मर गए नाली लेकिन ये ज्यादा सफर किया इन्होंने क्योंकि इनकी एंपैथी भी थी और इन्हें बहुत तकलीफ हुई है इतने लोगों को मार के वेरी गुड तो ये वैसे ही आर्गुमेंट है लेकिन इसपे अब बात यही है कि अब आकर पॉजिटिव साइकोलॉजी जो है हमारे मुशे को भी बल्कि मैंने शुरू में भी इनिशियल वीडियोस में भी कुछ चीजें इसी को डिस्कस किया ये बहुत नुकसान देती है मुझ पर पहला अटैक यही
हुआ ना कि मनफी सोचते हो तुम तो वो मक्खी हो जो सिर्फ गंद प बै तुम्हें तो सिर्फ नेगेटिव पहलू ही बोलने आते हैं तो मैंने कहा मैंने आज तक जिंदगी में सफत पॉजिटिव नहीं देखी आपको मक्खी क भिड़ नहीं यही है ना कि वो जब तक ये मनफी चीज उजागर होती रहेंगी तभी वो फिक्स हो सकती है अरवा आपने एक वीडियो में कहा कुछ अरसा पहले मेरा खल दो हफ्ते पहले आपने वीडियो बनाई जिसके आखिर में आपने य बताया कि आपने तमाम अपने व्यू से नौजवानों सेय कहा लोगों से देखने वालो से जो भी
पॉलिटन इस वक्त है किसी पर तबार ना करें किसी पर लाना कर बल्कि आप खुद लीडर बने अच्छा जाहिर है उनके लीडर बनने में तो बहुत टाइम है तो क्या आप किसी अनार्की की बात कर रहे हैं इस तरह की बात करना चाह रहे हैं नहीं अनार्किस्म में तो राकी बिल्कुल ही खतम हो जा आप कहते कि किसी पर भी ट्रस्ट नहीं करना तो हमारे पास तो यही कुछ है अगर कुछ करना है तो कम से कम जो गुड है उसको तो लेना चाहिए ना आपने उसम य यं लगा के जैसे आप ये कह रहे
किसी पर भी ट्रस्ट नहीं करना आई एग्री कोई भी इस काबिल नहीं है कि आप उस उस बली ट्रस्ट कर सके लेकिन चेक तो रख सते हम लेकिन बिल्कुल तो उनको फेंक नहीं सकते देखि उसमें चीज यह है कि मेरे नजदीक एक स्टेट की तश्न हमेशा से मतलब मेरी तरह के इंडिविजुअल के लिए सबके लिए नहीं एक रिलक्टिविटी एक शहरी के लिए आई है मेरा ख्याल है कि ह्यूमन फ्रीडम इतनी कम आज तक नहीं हुई जो पोस्ट 91 वर्ल्ड में हो गई होमलैंड सिक्योरिटी का डिपार्टमेंट बना अमेरिका में रियासत सर्वेस स्टेट्स बन गई पाकिस्तान के
अंदर या और जगहों पर यहां पर जो 9 मई हुआ या और चीजें हुई उसमें आप सर्वेस देख ले व मिशेल फुको जो पन ऑप्टिन की बात करता है वही लगती है कि अब स्मार्टफोन जेब में है तो सारा डाटा लेकर तो पहले ही फिर रहे हो इंडिपेंडेंस हो गई कटेल हमारी तो इसीलिए मेरे नजदीक स्टेट को सेलिब्रेट करना या पॉलिटिकल अथ को खुश सलूब से एंब्रेस करना कभी भी किसी कॉन्शियस आदमी का काम हो ही नहीं सकता ठीक है लेकिन अगर मैं यह कहूं कि मैं वैसा अनार्किस्ट हूं जो जिस तरह एक स्टेज पर
जाकर मार्क्स ने भी कह दिया रियासत अबॉलिश हो जाएगी ठीक है और जैसे नम चोमस्की कहता है हा क्रिटिक ऑफ द गोता प्रोग्राम जो मार्क्स की किताब है उसके एंड पर वो य अग्री करता है कि सारी राकी अबॉलिश हो जाएंगी और कैपिटल खत्म हो जाएगा तो मुझे नहीं लगता कि बगैर राकी के रहना भी सेफ है क्योंकि मैं बिजन हूं थोड़ा सा जो समझता है कि अगर हरार की खत्म होगी तो वायलेंस आ जाएगा वायलेंस आ जाएगा क्योंकि मैं हमारा हमारा सर्वाइवल ही खतरे में पड़ खतरे में पड़ जाएगा तो इसीलिए हमने रिलक्टिविटी करें
तो मुझे यह समझ नहीं आती जो पाकिस्तान के अंदर एक ये चीज है कि जब मैं भी लोगों के आगे माइक रखता हूं और वो कहते हैं कि मैं उसके लिए जान दे दूंगा उसके लिए मर जाऊंगा तो मैं कहता हूं तुमने पैराडाइम ही रिवर्स कर दिया ही शुड हैव बीन डाइंग फॉर यू यू आर नॉट सपोज टू डा फॉर योर ओन एंप्लॉई एकली तो चूंकि वो सोशल कांट्रैक्ट की सेंस नहीं है इसलिए जब मैं यह बात करता हूं उसका मतलब यह होता है कि उनकी मोहब्बत में ना मारे जाए वोट देने को भी रिलक्टिविटी
को वोट दे दियाली यहां ये है कि पोजीशन ले लेंगे कि जी ये चूंकि हमारा लीडर है वो आपका है और ये पोलरिटीज अराफिया का होगा अभी रिसेंटली एमएनएस की तनख हों का बिल आया जब सारी पार्टियों ने एग्री किया एमपीएस की तनख ढ लाख थी अब 9 लाख हो गई है तमाम पार्टीज के एमपीएस ने साइन कर दिए माय गॉड 9 लाख मिलियन हां तकरीबन एक मिलियन तो उसपे किसी को कोई डिसएग्रीमेंट नहीं है तो वो बहुत गरीब लोग हैं गरीब है वो काम बहुत कर रहे बहुत चेंज ला रहे हैं तो ये है
कि मैं यह कहता हूं कि आप इनको देखो तो सही कि एलीट कैप्चर 18 बिलियन डॉलर की इंडस्ट्री है पाकिस्तान में लेकिन आपने सवाल ही नहीं करना पूछना ही नहीं है क्योंकि यही बा आ जाएगा और दूसरा मुझे पार्लिन निजाम जो पाकिस्तान का है वो इतना रबर स्टैंप हो चुका है कि उससे उम्मीद भी नहीं है मैं अगर सच कहू तो अच्छा यहां मैं एक और आपसे सवाल करूं कि जब पूरी दुनिया में डेमोक्रेसी और डेमोक्रेटिक सिस्टम जो है इसके चेक्स जो है लिबरल चेक्स वो तमाम फेल होते जा रहे हैं अच्छा वहां पाकिस्तान जैसी
डेमोक्रेसी इसका इसका सर्वाइवल कहां है देखि ये तो बहुत ही एक कह सकते हैं कि पाकिस्तान जैसी डेमोक्रेसी के सर्वाइवल की तब बात करेंगे जब डेमोक्रेसी बची होगी ऑलरेडी बहुत कमजोर है मैं इसलिए बात करर क्योंकि ये ओपिनियन अब रही नहीं है पहले एक इस पे हम बहस करते थे 2001 दो के अराउंड टाइम में या उससे पहले के मुशर्रफ दौर में भी ये आर्गुमेंट होते थे कि कभी डेमोक्रेसी आई थी नहीं आई थी अब तो इंटरनेशनल डेमोक्रेसी का जो इंडेक्स है उसने पाकिस्तान की रैंकिंग 2022 में गिराई हाइब्रिड स्टेट से ऑफिशियल पाकिस्तान इज कॉल्ड
एन अथॉरिटेरियन स्टेट नाउ यह मेरी राय और आपकी राय का ताल्लुक ही नहीं बचा क्योंकि जो इंडिपेंडेंट चेक एंड बैलेस वाली ऑर्गेनाइजेशन है वो खुद कह रही हैं कि अथॉरिटेरियन स्टेट है तो अब तो हमें यह आर्गू करना है कि क्या डेमोक्रेसी जो कभी थी या जिस तरह भी फंक्शन कर रही थी हाइब्रिड फॉर्म में कर रही थी वो होनी चाहिए या उसको बेहतर करना चाहिए या नहीं लेकिन फिलहाल तो चेक्स एंड बैलेंसस जीरो है क्योंकि मोंटे स्क्यू की जो सेपरेशन ऑफ पावर की थरी है वही सोल है जम्हूरियत की के थोड़ा सा चक अदलिया
का सियासत दानों प सियासत दानों का अदलिया प उसका एग्जीक्यूटिव पे एग्जीक्यूटिव का पॉलिटिकल क्लास प और पॉलिटिकल क्लास का एटिव प सो इट्स अ सर्कल ऑफ चेक एंड बैलेंसस वेर एवरी बडी हैज एन आय ऑन एवरीवन सो दैट कोई भी डिक्टेटर ना बन जाए और बीच में जर्नलिस्ट होगा जो ये सब कुछ आवाम को बताएगा और उसको एक्सेस होगी ये है वो पूरा सेटप अच्छा लेकिन मैं ये कई सालों से खास तौर पर पिछले 12 साल से तो मुसलसल पाकिस्तान में देख रहा हूं कि यहां हम सिर्फ दो सिस्टम्स में फस हुए हैं पॉपुलर
हाइब्रिड सिस्टम और अन पॉपुलर हाइब्रिड सिस्टम इस वक्त अन पॉपुलर हाइब्रिड सिस्टम है और एक पॉपुलर हाइब्रिड सिस्टम उसको ओवरलैप करने की कोशिश कर रहा है ऐसे में हमने क्या एडवोकेट करना है बिल्कुल सही मैं अभी रिसेंटली एक यूनिवर्सिटी में भी जाकर ना मैंने यह आर्गुमेंट किया तो लोग बहुत कंफ्यूज हो गए मैंने कहा 8 फरवरी को आपके पास दो चॉइस थी या एस्टेब्लिशमेंट को वोट दे देंगे तालिबान को ठीक है और आपने तालिबान चूज कर लिए लेकिन बाद में हुआ यह कि रिजल्ट तब्दील हो गया और एस्टेब्लिशमेंट के हक में फैसला हो गया तो
ये चीज है कि ये आपने किस जगह कहा कौन सी यूनिवर्सिटी पंजाब यूनिवर्सिटी अच्छा तो वो यह है कि अगर मैं वोट डालने जाऊं और मेरे पास जो मेनू मेरे सामने आएगा जिसमें से मैंने एक डिश ऑर्डर करके अगले पा साल खानी है वो लिखा ही मैंने नहीं है ठीक है एंड आई एम बाउंड बाय दस चॉइस विच आर नॉट मेड बाय मी तो इसका मतलब यह कैसे है कि वो फ्रीविल एक्सरसाइज हो रही है या अगर मेरा कंसेंट ही मैन्युफैक्चर्ड है क्योंकि अगर मैंने पा साल आपकी सोच पर इतना काम किया कि आपका कंसेंट
मैन्युफैक्चर किया गया जो चोमस्की जो टर्म यूज करता है मैन्युफैक्चरिंग कंसेंट उसकी और हरमन की एक किताब है 1980 की बड़ा ब्रिलियंट आईडिया है तो जो कंसेंट ही मैन्युफैक्चर्ड है जब उसकी बेसिस पर एक वोटर पैदा हो गया वो आजादी से एक्सरसाइज कैसे कर रहा है मुझे नहीं पता लेकिन जो आप कह रहे हैं कि हाइब्रिड पॉपुलर और अन पॉपुलर का फर्क वह बिल्कुल ठीक इस तरह है कि हमने यह चूज करना है कि पॉपुलर अथॉरिटेरियन जम चाहिए या अन पॉपुलर चाहिए क्योंकि एक अथॉरिटेरियन के पीछे आवाम खड़ी हुई है और दूसरी के पीछे कोई
भी नहीं है तो अगर इस तनाज में देखूं तो वैसे लोग बहुत माइंड करेंगे इस बात को लेकिन मेरे नजदीक तारीख में अन पॉपुलर अथॉरिटेरियन जम ज्यादा सेफ रहा है क्यों क्योंकि जिस अथॉरिटेरियन जम के पीछे आवाम और मैस खड़ी हो गई है ना उसने तो फिर डिमोलिश कर दिया मशर को इंकलाब ले आए इंकलाब क्या ले आए इंकलाब लाने के बाद काउंटर रेवोल्यूशन आई और इंकलाब वो कहते हैं ना अपने ही बच्चों को मार देता एटली सबसे पहले अपने बच्चों को मार बोलशेविक रेवोल्यूशन के बाद क्या हुआ जब गुला बने पहले बात कर रहे
थे होंग शो वाली यंगर ब्रदर ऑफ जी चाइना वो भी सबसे पहले अपने अपने जनलो ने अपने बंदे मार किया तो वो इसलिए हो जाता है कि एक अनस्टेबल फॉर्म से ली गई हुकूमत जो है वो सस्टेनेबल नहीं बनती इतनी हां बहुत से हमारे सोशलिस्ट मार्क्सिस्ट दोस्त इस बात को नहीं मानते बट मैं समझता हूं कि इंसानी तारीख में शायद ही इतना सक्सेसफुल इंकलाब कोई आया हो जो अमेरिका का क्योंकि 1776 में ठीक है एक लोकल आर्मी ने खड़े होकर एक इंपीरियल पावर को पहले तो भगा दिया और उसके बाद में उन्होंने एक पॉलिटिकल ऑर्डर
भी सस्टेनेबल बना लिया जो कि होता ही नहीं है ठीक है बिल ऑफ राइट्स भी बन गया स्लेवरी का मसला 90 100 साल लगाए वो साइड प कर दिया फिर सेग गश जम आ गया सिविल राइट्स मूवमेंट ने वो भी साइड प कर दिया तो वो एक सेल्फ करेक्टिंग मैकेनिज्म होता गया जो स्लेव रखने प भी तन कीद है उसके भी बहुत से जवाब है कि ग्रैजुअली मसिप या फिर उसके ऊपर भी आप देखिए कि जो स्लेव ट्रेड अटलांटिक स्लेव ट्रेड थी उसको सबसे पहले जो बैन करने वाले लोग थे वो भी थॉमस जेफरसन था
एकली ठीक है तो एक ऐसी रियासत बनी जो पहली रियासत थी जिसने क्लर्जी को स्टेट से सेपरेट कर दिया और उसने इतनी आजादी दी इंसान को कि उसने कहा कि इफ द स्टेट आर्म्स इट सेल्फ अगेंस्ट यू आर्म योरसेल्फ अगेंस्ट द स्टेट और पर्सनल ऑटोनोमी वो और बात है कि अब आके उसकी जो भी शक्ल हो रही है तो वो प्लेटो का इसपे आईडिया है कि चेंज को अरेस्ट कर लो यानी कि सबसे करीबी ए सेंस जो एक रियासत का है ना जब तक वो उस परे चलती रहेगी तो बेहतरीन काम करेगी और प्लेटो ये
कहता है कि चेंज इज इवल हमारे यहां तो नारा ही चेंज का लगता है क्योंकि हम समझते हैं कि चेंज से बहुत वो चीजें होंगी लेकिन जो एक स्टेट का बुनियादी आइडियल है उस परे खड़े रहने से ही उसका सर्वाइवल है हिंदुस्तान का जो बुनियादी नरो वियन सेकुलरिज्म था जब तक उस परे खड़ी रहेगी सही चलेगी जितना दूर जाएगी कल को खतरा आएगा सिविल सोसाइटी के कोलप्पन जाना कहां है हमारा इशू यह है कि हमारे आइडियल का ही नहीं था पता कहां जाना ट्स वाई कैन नॉट अ अरेस्ट चेंज सो यू एग्री विद दिस आईडिया
कि जब हम स्टेट बना रहे थे तो स्टेट तो हम तैयार कर रहे थे बनाने की पूरी कोशिश कर रहे थे कामयाबी लेकिन उसको रन कैसे करना है ये किसी के पास कोई आईडिया नहीं नहीं था नहीं क्योंकि हम बना नहीं रहे थे इंपोज की गई थी मैं पंजाबी हूं मेरे वालदैन पंजाबी हैं हमारे किसी बड़े से पूछा नहीं गया पंजाब काटना कि नहीं ठीक है यूनियनिस्ट पार्टी ने मुस्लिम लीग से अलायंस की और वो वडेर की सारी पार्टी थी इंपीरियल पार्टी थी वो उसकी कोई रूट्स ही नहीं थी आवाम के अंदर तो इकबाल ने
भी इसपे एक आर्टिकल लिखा जब यूनिस्ट पार्टी के साथ लीग की अलायंस हुई तो इकबाल ने कहा किय आप क्या कर रहे हैं मतलब आप जनन लीडरशिप क्रिएट करें आप उस अराफिया की जाकर बैठ गए गद में जिसने यहां पर वही स्त साल फैलाया हुआ इसी तरह बाकी जगहो पर आप देख ले पखत ख का रेफरेंडम कैसे हुआ कहने की जरूरत नहीं है कलात में क्या हुआ भी देख लीजिए तो लाहौर से साहीवाल तक अगर कोई आप स्टेट कह रहे हैं इसको तो फिर मैं तो नहीं समझता कि पॉपुलर कंसेंसस है इसके ऊपर क्योंकि हर
वो फैसला हर वो कानून जिसके बनने में मेरी शामिल नहीं थी उसको मुझ पर लागू नहीं होना चाहिए ट्स द प्रिंसिपल ऑफ डेमोक्रेसी जो कि यहां पर नहीं है अब वहा पछत नेशनलिस्ट क्या बात कर रहे हैं वो यही कह रहे हैं कि सर मोर टाइम डरें के पास अफगान किंग गया एक कमरे में साइन हुए तो लाइन बन गई हमसे तो नहीं पूछा हम तो नहीं माने तो क्राइसिस यही है कि वो एक नए सोशल कांट्रैक्ट का क्राइसिस है नेशनल इंटीग्रेशन का और साथ साथ यह कि आइडेंटिटी की रिडेफिनेशन का क्राइसिस है जो कि
सॉल्व करना चाहिए स्टेट को य आपको बड़ा संजीदा क्राइसिस नहीं महसूस स रहा कि नेशन स्टेट्स जिस तरीके से बनी थी और जिस तरीके से उनको चलाने का एक तसव्वुर था वो पूरा तसव्वुर ही ढह गया है क्योंकि वो नेशन स्टेट्स जहां कोई एक कौम थी जैसे कि तुर्क को आप आप ले ले वो तो किसी ना किसी हद तक रहे कामयाब लेकिन जो जो भी बाउंड्रीज खुद बनाई गई वो तमाम ही ऑलमोस्ट स्ट्रगल कर रही है हां नहीं ऐसे ही है उसकी वजह ये है कि मॉडर्न वर्ल्ड का क्राइसिस अब और हो गया है
नेशन स्टेट भी मैं नहीं समझता कि बड़ी जनरल विल के साथ या बड़ी खुश सलबी से क्रिएट की गई थी क्योंकि जितनी इंपीरियल पा थी वो अनेक्स करती थी टेरिटरीज को और अपने जो है ना वो दूध बढ़ा लिया करती थी लेकिन एंपायर फॉर्मेशन का जो दौर था अब 30 इयर्स वर होती है 1618 से 48 तक और इतना खून बहना और इतना जो है वो ब्लड स्पिलिंग करने के बाद यूरोप ये डिसाइड करता है कि यार अब बहुत हो गया है यू स्टे इन योर टेरिटरी वी विल स्टे इन आवर टेरिटरी मु सम्मल भाई
एक बात बताएं कि एक बहुत बड़ा सवाल है तारीख में और मुझे अक्सर ये सवाल परेशान करता है फलसफा पढ़ते हुए या पाकिस्तान और दुनिया में जो चेंजेज हो रही है उसको देखते हुए कि इंसान नजरिया के लिए है या नजरिया इंसान के लिए नहीं सवाल तो यह काफी फिलोसॉफिकल है अब इसके भी देखि ना मुख्तलिफ लोगों ने मुख्तलिफ तरीके से इसको एक्सप्लेन किया लेकिन अगर देखा जाए यह वही बात है ना कि यह एक बड़ी पुरानी रिडल है जिसको आपने ट्रांसलेट किया है एक्जिस्टेंस प्रोसीड एसेंस एसेंशियलिज्म की एक डिबेट थी और एक यह थी
तो अब उसमें यह था कि जो ह्यूमन क्वालिटीज है हम वहां से ह्यूमन हिस्ट्री का आईडिया से आगाज करें या फिर जो है वह एक्जिस्टेंस इन इट सेल्फ जन्म देती है सेंस को इंसानी ए सेंस को तो इसको एक्सप्लेन करने की काफी चीजें हो सकती है मेरा जहां तक इस पर पर्सपेक्टिव हो सकता है वह यही है कि सबसे बड़ी कॉज जो है ना अब इसको गोजम भी बहुत से लोग कह देंगे इसमें बहुत से फिलस ने हिस्सा भी डाला एक बड़े इंटरेस्टिंग फिलोसोफर थे मैक्स टर्नर उनकी किताब है ईगो एंड ओन तो उसमें वो
पोरली य आर्गू करते हैं कि ईगो और सेल्फिश वल जो होती है वही असल में ह्यूमैनिटी का एंड होना चाहिए और जिसकी भी जो ईगो है वो उसको परसू करे मुझे उससे कोई मसला नहीं है और इसी तरह आइन रंड जो फिलोसोफर थी जिनको पुअर मैन नीचे भी कहते हैं गरीब आदमियों का नीचे उन्होंने वर्चू ऑफ सेल्फिश पर बात की कि सबसे बड़ा वर्चू क्या है सेल्फिश होना अपने लिए जीना ठीक है तो इसमें जो है वो एथिकल गोजम भी आता है खैर यह बहुत लंबी बहस हो जाएगी बट मुझे यह लगता है कि ह्यूमैनिटी
सर्वाइवल के लिए अपनी कॉज के लिए आइडियाज को [संगीत] अपोप्रोटीन इट सेल्फ अपनी सर्वाइवल के लिए सबसे पहले स्ट्राइव करती है और आइडियाज को इस्तेमाल करती है अपनी कॉज के लिए ट्स व्ट आई थंक नय की आपने बात की वो तो एमपी के ऊपर बड़ा अजीब सा व्यूज है उसके वो इवन मोरालिटी को भी उसने कहा जो यूनिवर्सल मोरालिटी है उसको बहुत खिलाफ बहुत खिलाफ था स्लेव मल्टी कहते है लेकिन आपको नहीं लगता बहुत सिंपलीफाई कर दिया गया इसको क्योंकि इसमें इंसानों की हमदर्दी भी है उन लोग एक दूसरे से मोहब्बत भी करते हैं जिसमें
हर दफा यह एक स्लेव मोरालिटी नहीं होती बिल्कुल तो और उसमें उसकी इतनी इतनी इतनी कॉम्प्लेक्टेड मेंट ऑफ फिलॉसफी कि मैंने अगर एक फलसफा दिया तो क्या मैंने जिंदगी पर उस पर अमल भी किया या नहीं किया इस लिहाज से मैं नीचे को 10 में से ना दो मार्क्स भी मुश्किल से दूंगा उसकी वजह है कि एक तो उसने फिर मर ग हां उसकी उसकी वजह ये है कि एक तो उसने कहा हायर आइडियल के लिए खड़े हो जाए और बेहतरीन इंसान वो है जो जंग में अपने आप को जो है वो जाके अनफोल्ड करें
लेकिन जब जनाब बजाते खुद फ्रैंको प्रशियन वॉर में लड़ने के लिए गए तो मेडिक के तौर पे जो दवाइयां सिर्फ बैटल फ्रंट प बांटने जाता है वो नौकरी मिली नीचे को और दो चार लोगों का कत्ल होते हुए देख के उल्टियां आना शुरू हो गई और आइडियल कौन था नेपोलियन ठीक है पहली चीज तो ये हो गई दूसरी ये कि जब दो खवातीन ने प्रपोजल को रिफ्यूज किया उसम लू सालो में भी थी तो उसको बाकायदा ब्रेक कर दिया उसके बाद तो फिर वो ठीक ही नहीं हुआ ना पहाड़ों में चला मेरे ल उसने दो
दफा ब्रेक किया दो दफा ूज किया हा क्योंकि एक उसका दोस्त था पहले उसके थ्रू पॉल री उसका नाम था उसके थ्रू प्रपोजल भिजवाया तो उसने आगे कहा कि भाई वो नहीं मान रही जनाब ने कहा कि तुम्हें कहना नहीं आया होगा मैं खुद कहता हूं खुद भी जाके जलील हो के आया तो ये है कि इसमें आपको दिखाई ये देगा कि वहां भी उससे इतनी चीज बर्दाश्त नहीं हुई कि माय लव इज रिजेक्टेड तो अब अपनी पर्सनल लाइफ में तो ही वाज अ वेरी वीक वल्नरेबल मैन जो कि इतना तंग था अपने घर की
दो खवातीन से उसकी मां और उसकी बहन एलिजाबेथ से उसने कहा कि मैं दोबारा पैदा हूं और मुझसे पूछा जाए कि जिंदगी में एक चीज क्या नहीं होनी चाहिए तो मैं कहूंगा ये दोनों ना हो ठीक है सम बडी हु इ वेरी फबल वीक वल्नरेबल लेकिन उसका फलसफा क्या है सुपरमैन का फलसफा जिसमें आपको एक मस्कुलर इंपल्स दिखाई देगी और स्ट्रांग मैन करैक्टर दिखाई देगा तो एंबॉडी मेंट तो उसने नहीं की इस पर तो मैं बिल्कुल क्लियर हूं जहां तक एमपी का तालुक है ना अब उसपे उसकी फिलोसोफी की इंटरप्रिटेशन इतनी मुख्तलिफ लोगों ने की
है यह इंटरेस्टिंग ऐसा आदमी है जिसने फार राइट फार लेफ्ट पोस्ट मॉडर्निस्ट सबको इंस्पायर कर दिया नाजी भी इसके फलसफे से मुतासिर हो गए इसके अलावा फार लेफ्ट जो आज बनी हुई है दुनिया में जिसकी बेसिस आइडेंटिटी पॉलिटिक्स है मिशेल फुको इसको अपना मास्टर कहता है जिसने पोस्ट मॉडर्निस्ट की बुनियाद डालने वालों में से एक फलसफे से एक है फिर वो जो फ्रैंकफर्ट स्कूल बना जिसमें लियोटा डेरिडा बाकी सब सब थे वो भी इसी के फलसफे को यूज करते हैं अच्छा अमेरिका में फार राइट जो आल्ट राइट है कुक लक्स क्लन या इस तरह की
ऑर्गेनाइजेशन वो भी इसको सपोर्ट करती हैं क्योंकि ये पर्सनल ईगो को बहुत सपोर्ट करता है ये इसकी फिलॉसफी और आपको पता है किसी आदमी को अगर आप उसकी पर्सनल ईगो को थोड़ा सा मालिश करें मालिश उसको अहमियत बताए उसकी तो वो तो जाहर है उसका फैन हो जाएगा हां लेकिन इसम ना मैं एक किताब और और अगर सॉरी आपको आपको काट रहा हूं आपको ये नहीं लगता कि ये शोपन हार की जरा थोड़ी सी रिफाइंड शक्ल था बिल्कुल शोपन हार का देखें वो जो उसकी किताब थी वर्ड एज अ विल एन आईडिया एंड रिप्रेजेंटेशन भी
कहते हैं इसको एक दिन रैंडम एक बुक स्टोर प उसको एक किताब पे नजर पड़ी उठा ली उसे पता भी नहीं था शोपन और कौन है इतना इंस्पायर हुआ कि उसने वहां से थॉट डेवलप करना शुरू कर दी अपनी और वो ज्यादा गालियां देता था य कम देता बस इतना ही उसने सिर्फ यह कहा कि शोपन हर की जो विल है वो वीक है क्योंकि वो यह समझता है कि उसका जो नायल जम है उससे मैं मुत्त फिक नहीं हूं वो एक डार्क वर्ड बना के पेंट करता है तो आपने जो ईगो की बात की
ना उसमें ये मिस इंटरप्रेट भी है नीचे वो यह नहीं कहता कि हर दूसरे आदमी को मार के उसम हुकूमत शुरू कर दो ना वो यह बात करता है कि इतना केस ले आओ कि अगर मेरे पास ताकत आ गई मुश को प्लंडर कर दूं या वारियर बन जाऊ इनफैक्ट उसके नजदीक जो स्ट्रेंथ की डेफिनेशन है वह भी सिर्फ वो स्ट्रेंथ नहीं है जो अप्रेस स्ट्रेंथ हो इनफैक्ट वो यह कहता है कि हर वो आदमी जो कंट्रोल करने के लिए वायलेंस का इस्तेमाल करता है वो कमजोर है क्योंकि स्ट्रंग को फर्क ही नहीं पड़ता दूसरा
क्या कर रहा है वो कंट्रोल ही नहीं करना चाहेगा सेंसरशिप आजकल कौन करता है जो कमजोर होता है कि मुझ पर तन कीद मुझे एक्सपोज ना कर दे तो नीचे के आइडियल लोग वो थे जो आर्ट में क्रिएटिविटी में और इसके अलावा ह्यूमन जो कैपेबिलिटीज है उनको बढ़ाने में किरदार अदा करेंगे उसमें मिलिट्री लीडर भी हो सकता है फिलोसोफर भी हो सकता है और इसके अलावा थिंकर भी हो सकता है लेकिन नाजी ने एक ऐसी इंटरप्रिटेशन की कि यार इसने यह बात की है कि जो ताकतवर है उसके पास इख्तियार है कि वो वीक को
सिरे से ही तबाह कर दे हां कुछ एलिमेंट इसके फलसफे में ऐसा है अब विल टू पावर जो इसकी किताब है वो इसकी बहन ने एडिट कीटली जोग नाथजी थी आपको तो पता है इस बात का कि उसने हिटलर को इसके घर बुला के इसकी वॉकिंग स्टिक गिफ्ट की और तस्वीर खिंचवाई पीछे नीचे का बस बना हुआ था तो लोगों ने कहा कि अगर यह जिंदा होता तकलीफ में होता कि यह क्या हो रहा है तो फिर हिटलर ने प्रोपेगेंडा मूवी बनाई द विल द ट्रायंफ ऑफ द विल और उसको भी नीचे के फलसफे से
जोड़ा उसका पहला सीन था कि जी वो जहाज से उतर के आता है वही जारा तसरा जो पहाड़ से उतर के आता है तो उसने अपने आप को कहा कि जो नीचे ने कहा था ना जारा थसरा मैं हूं बबर मेंच मैं हूं हालांकि उसके फलसफे में नेशनलिज्म एंटीसेमिटिज्म यानी कि यहूदियों से नफरत और इसके अलावा हर वो आइडिया जो मैस सेंटीमेंट को पेट्रियट जम प प्रोवोक करे इससे शदीद नफरत थी तो एक ऐसा फलसफे है वो हिटलर को कैसे इसके ऊपर ना बहुत अच्छी किताब है स्टीफन हिक्स की उसका नाम है नींद नजीस तो
ये सबको जरूर पढ़नी चाहिए कुछ बातें वो मैं भी मानता हूं कि बियोंड गुड एंड इवल जो किताब है नीचे की उसमें है उसम पोरली रेसिस्ट बातें एटली वो तंज करता है बिटवीन द लाइन आपने तो उसकी किताब किताबें पढ़ी है वो एक लफ्ज ऐसा इस्तेमाल करता है जिससे उस कौम या उस उस पार्ट ऑफ सोसाइटी की तजक होती है फिर उसको बारे में उसके अपोलोजि कहते हैं कि उसका ये मतलब नहीं था बिल्कुल अगर उसकी ये वाली बुक बियोंड गुड एंड इवल तो उसने अपनी जिंदगी में जब वो होश में था या उसका अभी
ब्रेक डाउन नहीं हुआ था तो उसने पब्लिश की और शाया की और उसने खुद उसको देखा वो इसलिए हमें बहुत अच्छी भी लगती है बाकी उसके बाद में जो जो जो जो किताबें न उसकी उसकी लास्ट बुक्स उस उसको तो आप बिलीव ही नहीं कर सकते कि उसकी किताब माइंड लूज कर गया था ना और उसकी उसकी बहन ने पूरी किताब रिट की हां वो इसलिए कि उसकी बहन का भी प्रोजेक्ट यही था कि इसके फलसफे को नाजी पॉलिटिकल प्रोजेक्ट के साथ मिलाना है ये नीचे आर्काइव के नाम से ना एक इंस्टिट्यूशन बनाया था हिटलर
ने हम जिसमें एक आर्काइव बनाया जाएगा और नीचे के सारे फलसफे को नाजी पॉलिटिकल प्रोजेक्ट से मिला के आर्टिकल पब्लिश किए जाएंगे इंटरेस्टिंग मार्टिन डिगर जो बहुत फेमस फिलोसोफर है वो वहां काम करता था डिगर हिमसेल्फ वाज अ नाजी उसकी पर्सनल नोटबुक्स ने भी ये बात रिवील की कि वो सपोर्ट करता है नाजम को अब लोग ये समझते हैं कि नाजी शायद टोटली ब्रेनलेस थे पढ़े लिखे नहीं थे डबल डबल पीएचडी थे वो दे वर सो लिटरेट के कल्चरड भी थे म्यूजिक भी सुनते थे मतलब सेंस ऑफ हिस्ट्री भी थी सब पड़ा हुआ था गोबल
हिमसेल्फ मार्क्सिस्ट र है बहुत अरसा और उसने तो मार्क्स को बहुत क्रेडिट भी दिया कि वो मेनिफेस्टो लेक फिर रहा होता था जेब में अपनी तो हालांकि य नहीं की हेट में बना शुरू हुई थी उनके उनकी हिमायत में नहीं हुई थी बिल्कुल लेकिन ये है कि बहुत सी चीजें उसमें इंस्पिरेशनल भी थी बड़ी कंट्रोवर्शियल बात है वो उस पर एक लंबी डिबेट है कि इसमें मुमा असलत क्या थी इन दो चीजों में लेकिन यह है कि यह लोग खास से पढ़े लिखे लोग थे और इन्होंने यह बायोलॉजिकल थेरी को जो यूजे निक्स है अब
वो भी साइंस के थ्रू अप्रोपो क्रिएट करवाओ ग तो उसमें अमेज और गलाज आ जाएगी ये वही आइडिया है जो एरिस्टोटल और प्लेटो भी मानते थे जिनको हम चैंपियन समझेंगे आज जम्हूरियत का प्लेटो वा स्ट्रिक्टली एंटी डेमोक्रेसी ओपन सोसाइटी एंड इट्स एमी जो कार्ल पॉबर की किताब है उसम उसने प्लेटो को ऐसा एक्सपोज किया वो पढ़े पहले चार चैप्टर वो कहता है कि प्लेटो ने तो सीधा कहा तीन क्लासेस होंगी वरियर होगा इसके अलावा जी स्लेव होगा और साथ जो है वह फिलोसोफर किंग होगा बाकी सबका कोई तालुक ही नहीं है खातून भी बी क्लास
सिटीजन है उसका भी कोई माइंड नहीं है ठीक है शादी करनी भी है तो इसलिए करो कि अपनी सफरिंग देखनी है तो कर लो क्योंकि औरत का तो दिमाग ही नहीं है ठीक है इस तरह की बातें की तो ये है कि हमें यह देखना पड़ता है कि जो फलसफा जिस वक्त में लिखा जा रहा है उस वक्त हालात क्या थे जिस जिस मोरालिटी की बात करता है वो तो मोरालिटी है ही नहीं एथिक्स ही नहीं है वो तो बड़ा एक सख्त और पत्थर दिल से बात करता है लेकिन अपनी अमली जिंदगी में जैसे आपने
कहा कि वो इतना बुजदिल और इतना इतना सेंसिटिव है कमजोर है कि जंग से भी आपने बताया कि भाग वो और एक घोड़े को मार मार पड़ते हुए नहीं देख सका और उसका ब्रेकडाउन हो गया देखि इसमें ना वो घोड़े वाला जो इवेंट है ना वो टूरेन हॉर्स कहते हैं अब इस पर यह था कि उस परे दो पर्सपेक्टिव है पहला यह कि वह ओरिजनली उस घोड़े की सफरिंग देख के उसे बर्दाश्त नहीं हुआ दूसरा यह कि जो उसका एनालिसिस किया डॉक्टर्स ने और लोगों ने कि क्या कंडीशन होगी तो सिफलिस की जो बैक्टीरियल इंफेक्शन
था दिमाग का वो उसको लाक था उसके बाप को भी यही डिजीज थी तकरीबन क्योंकि ली ही वा यू नो बर्न इन अ फैमिली जो बहुत रिलीजस थी शदीद क्रिश्चन और पास्टर था बाप उसका लेकिन अपने वालिद को इतनी अर्ली जज में मरते हुए जब उसने देखा और बाद में जब ऑटोप्सी हुई और पता लगा कि आधा हिस्सा ही दिमाग का गायब है वो बैक्टीरिया इतना खौफनाक तरीके से उसको खा गया तो वही सिमम इसमें डेवलप हुए और कुछ लोग कहते हैं कि किसी प्रोस्टिट्यूट से उसने वो कांट्रैक्ट कर ली डिजीज और उसको फिर सि
फिलस हो गया इसीलिए सिवियर हेडेक होना ये बड़ा इंटरेस्टिंग फैक्ट है फैक्ट है कि वो चकि स्टाइल में लिखता था यानी कि शॉर्ट फॉर्म में उसका एक कोट भी है कि आई एस्पायर टू राइट इन वन सेंटेंस बट पीपल कांट राइट इन 100 बुक्स 100 किताबों में जो लिखोगे मैं एक जुमले में लिखने की कोशिश करता हूं तो उसकी वजह यह थी कि इतना शदीद सर दर्द और नजर का मसला था कि उसके पास जब पेन उठाया करता था तो वक्त ही इतना शॉर्ट था कि जल्दी से लिखना है इसीलिए उसके एक्सप्रेशन में बहुत सब्सटेंस
है और लेंथ बहुत कम है उसकी कोई किताब उठा ले लंबे लंबे पैराग्राफ नहीं मिलेंगे वनट टू थ फोर करके ना डिवाइड किया हुआ है डिफरेंट थॉट्स को और उसमें एरिस्टोटल के थे इस घोड़े वाले इवेंट से और दो चार दफा कोलप्पुरम के बाद जब वो सड़क पर गिर गया उसके बाद तो फिर कभी दोबारा वो कॉन्शियस उस तरह से हो नहीं सका ठीक है और फिर उसको ये भी एक बड़ा इंटरेस्टिंग फैक्ट है कि जो उसका साइकोलॉजिस्ट था जो उसके पास विजिट करता था कि उसको डिप्रेशन वगैरह से बचाने के लिए उसने भी सुसाइड
कर लिया था ठीक है ये आई एम अ डायनामाइट एक किताब है बायोग्राफी उसमें साइट करती है राइटर तो ये चीज है कि उसका जो माइंड था उसके बायोलॉजिकल डिजीज के भी मसले थे सिर्फ पर्सीवड रियलिटी उसकी पेनफुल नहीं थी वो और बात है कि सफरिंग उसने बहुत देखी और वो उसके एक्सप्रेशन में जब वो सिल्स मरिया चला गया पहाड़ों पे और बुरे हालात हैं किराया दे रहा है अपनी पेंशन से क्योंकि 23 साल की उम्र में फुल प्रोफेसर पीएचडी कर ली 23 इयर्स ऑफ एज ऑनरी पीएचडी बाद में नौकरी छोड़ दी कि यहां फजूल
डिपार्टमेंट है मैं बच्चों को पढ़ाऊंगा और बुराई में कन्वर्ट ही नहीं करता वह कहता है कि जो कमजोर है ना उसके पास बजाय यह कहने के कि कमजोरी में अजमत है इसका कल को रिवॉर्ड मिलेगा साथ-साथ यह कि मैं किसी को माफ करूंगा तो भी रिवॉर्ड मिलेगा और और साथ साथ ये कि जो ताकतवर चीज है उससे नफरत करो इसके अलावा उसके पास चारा ही नहीं है तो इसीलिए वो इस तमाम मोरल कोड को पसंद करेगा क्योंकि इसके अलावा उसके पास कोई एस्केप नहीं है और उसके पास मास्टर को हराने का भी कोई हथियार नहीं
है तो चूंकि आप लड़ नहीं सकते हैं इसीलिए अथॉरिटी को गिल्ट में डालो वो इसे जुड़ क्रिन मोरालिटी कहता है के जब उसका वो द पे जरा थसरा के अंदर भी यही थीसिस है कि जब 10 साल लगा के उसका जो सुपरमैन है वो पहाड़ से उतरता है तो पहली तक जब करता है मेला लगा होता है वहां पर उसमें य आकर यही कहता है कि तुम्हारी तबाही का सोर्स ही जुड़े क्रिश्चन मोरालिटी है क्योंकि तुमने कमजोरी को अजमत और ताकत को बुराई में कन्वर्ट कर दिया जबकि जो अरिस्टो क्रेटिक एथिक थी यानी कि जो
ताकतवर लोगों की लाकी आथ जिसमें बारबार की भी गुंजाइश है इसीलिए वह रोम के कल्चर की तारीफ करता है कि वहां जो ग्लेडिएटर वर हुआ करती थी गेम्स होती थी ब्लड देखकर रोमन तालियां बजाते थे तो वो कहता है कि ट ऑफ एक्जिस्टेंस यह थी दरअसल जिसमें कमजोरी नहीं स्ट्रेंथ की रिस्पेक्ट थी और वह डेमोक्रेसी को भी इसीलिए डिस्कस करता है कि वह इसको पॉइजन फॉर्म ऑफ गवर्नमेंट समझता है क्योंकि वह कहता है कि सबसे कमजोर को मद्देनजर रखते हुए एक रियासत तश्न दी जाए तो उससे घटिया रियासत ही कोई नहीं है ठीक है और
वो कहता है कि हर वो इंसान जो इक्वलिटी पे आमादा करने की बात करेगा वो सबसे इन इक्वल बात कर रहा है क्योंकि हर इंसान बराबर नहीं हो सकता तो इसीलिए एक छोटी सी डिस्टिंक्ट क्लास ऑफ इंडिविजुअल्स जो बड़े आर्टिस्ट होंगे जो वॉरियर्स होंगे बड़े और इसके साथ जो अपने आइडियल को क्रिएट करना जानते हैं वो मेरे नजदीक आइडियल लोग हैं वो रियासत चलाएंगे ठीक है और क्रिश्चियनिटी का भी क्रिटीक उसका यह नहीं है कि बिल्कुल आईडिया ही सिरे से गलत है वो कहता है जीसस वाज द लास्ट क्रिश्चन हु डाइड ऑन द क्रॉस यानी
कि जीसस की मेरे दिल में बहुत इज्जत है इसीलिए कि जीसस ने अपना एक आइडियल ऐलान किया उसका और उसके लिए मर गए वो उस परे खड़े हो गए वो उसको जू कहता है बारबार को जू तो एथनिक के लिहाज से बहुत से लोग कहते हैं या हिस्टोरिक किसने भी कहा है किसने नक्ष ने भी कहा है हां वो तो इनफैक्ट जुडे एक वैल्यूज भी कहता है इसको क्योंकि वो कहता है कि जूज वर द स्मार्टेस्ट पीपल ऑफ हिस्ट्री जो हर बादशाहत को सरवाइव कर गए हालांकि वो स्लेव क्लास का हिस्सा थे फिर भी सरवाइव
कर गए इनफैक्ट वो कहता है यूरोप में तो नोबलस्ट लोगों में से एक है जूस लोगों को नहीं पता लोग समझते हैं कि शायद वो जू है था हालांकि उसकी किताब बिकती इसलिए नहीं थी कि वो एंटीसीमेंट नहीं था अपनी बहन से नफरत भी इसलिए करता था कि उसकी बहन को शदीद नफरत थी जूस से और उसने एक ऐसे बंदे से शादी भी कर ली थी लिजबेथ ने जो कि एंटी समाइट था और इसी तरह उसको पब्लिशर मशवरे देते थे कि यार आप थोड़ा सा एंटी सेमिटिज्म फैलाओ फिर किताब दिखेगी उसने कहा मैंने नहीं करना
ये तो जर्मन कल्चर का हिस्सा पिछले 100 साल से था एंटी सेमिटिज्म जो लोग समझते हैं ना हिटलर ने नारा लगाया आके और सबका माइंड बदल दिया नहीं वो सेंटीमेंट पहले ही आवाम में था आपको लगता है कि आज भी यूरोप में ये सेंटीमेंट है देखि अब आकर तो लिड एक्सपीरियंस तो मेरा नहीं है वहां का जो मैं अथॉरिटी से बात कर सकूं लेकिन मेरा ख्याल है कि बहुत से रिलीजस इंस्टीट्यूशन ने इसको इंटरनलाइज कर लिया जिस तरह से हमें बचपन से बताया गया या वो एल्डर ऑफ द जाइन का एक पैंफलेट बड़ा डिस्कस होता
था कि दुनिया का सारा ऑर्डर जूज छुप के बना रहे हैं ये कंस्पिरेशन थरी तो बहुत है लेकिन कुछ ना कुछ असर उसका लोगों की मेंटालिटी पर भी हुआ है हां कत नजर इस बात से कि अब वो इजराइल और गाजा का कॉन्फ्लेट है उसमें क्या हो रहा है लेकिन एंटी सेमिटिज्म डिस रिगार्ड करोगे उससे वही होगा जो हिटलर ने किया मेरा ख्याल है एजिस्ट तो करते हैं यह सेंटीमेंट क्रिस्टन वर्ल्ड में भी है मुस्लिम वर्ल्ड में भी है क्योंकि दोनों ने एक एनवीस जो है वो अंदाज से भी देखा है इसराइली स्टेट को अभी
रिसेंटली अगर देखा जाए जो 20 सेंचुरी में वर्स हुई कोई भी नहीं जीत सके हमसे मुराद मुस्लिम वर्ल्ड में तो फिर ये वो एजिस्ट करता है वो सेंटीमेंट अब भी बहरहाल जहां तक नीचे का ताल्लुक है तो वो मोरालिटी को सिरे से ही एक सेकेंडरी चीज समझता है वो कहता है विल नंबर वन पे है हम मेरी अगर अंदर से विल है कि मैं एक वरियर क्लास का हिस्सा बनूं तो मैं वो बातें करूंगा जो कि मुझे सिक्योर कर सके और स्लेव की जो विल है वो अपनी सिक्योरिटी के लिए मोरालिटी इजाद कर लेगा हम
तो ये उसका अच्छा आपने फैमिली लॉगिंग पर डेली लॉगिंग पर एक पहला पत्थर फेंका और उसके बाद तो फिर एक तूफान आ गया बहुत से लोगों ने उस पर वीडियोस बनाई और फिर वो उन्होंने खुद भी एक दूसरे के खिलाफ बनाना शुरू कर दिया एक्सपोज करना शुरू किया लेकिन वो उनका एंगल और था जी आपका इंटेलेक्चुअल एंगल था तो यह आपको आप क्यों क्यों क्यों समझते हैं कि व जो उनको देखने वाले हैं उनका कसूर है क्योंकि उनके पास जो देखने वाले हैं उनके सामने दो चीजें हैं एक ये कि उनको व्यूज बहुत मिल रहे
हैं तो लिहाजा उनको जो लोग देखते हैं उनके बारे में मैंने स्टडी किया है कि 90 पर लोग तो इसलिए देखते हैं कि ये इतने व्यूज ले रहे हैं और बहुत से लोग इसलिए देखते हैं कि हम भी इन जैसा बन सकते हैं क्योंकि इसमें तो लगता है तो कुछ भी नहीं ना आपको पढ़ना पड़ता है ना कुछ तो लेकिन मेरा ख्याल है कि देखने वालों को ज्यादा क्रिटिसाइज इसमें नहीं करना चाहिए या उनको जरूर क्रिटिसाइज करें लेकिन उनका इतना कसूर नहीं है जितना कसूर उस टेक्नोलॉजी का है उन इदार का है जो इनको बनाते
ही एल्गोरिथम इस तरह के आए कि इस तरह के लोग पॉपुलर हो क्योंकि ये लोग उनकी प्रोडक्ट्स को ज्यादा बेच सकते हैं उसके बाद वो सोसाइटी जहां कोई और ऑप्शंस भी कम है हां तो आपने उसमें ज्यादा क्रिटिसाइज देखने वालों को किया ऐसा क्यों था देखि ये वही क्रिटिसिजम है कि अगर मैं यह कहूं कि एक सियासत दन ने आके मुशे को अटर डिस्ट्रॉय कर दिया और लोगों ने उसमें हिस्सा ही नहीं डाला तो रिस्पांसिबिलिटी की बात करना इसीलिए जरूरी है कि वो लोग जिनका मैंने जिक्र किया उस ब्लॉग में वह जो कर रहे हैं
वो उनकी कॉज के लिए सबसे बेहतरीन है वो कुछ इसीलिए इन्हेरेंटली गलत नहीं कर रहे वही नीचे वाली बात कि वो उनकी विल टू पावर है यानी कि अगर मैं इस तरह के ब्लॉग्स बनाऊं मेरे पास पैसे भी आए गाड़ियां भी तब्दील हो जाए मेरी सोशल क्लास भी चेंज हो जाए पॉपुलर भी आ जाए शोहरत मिल जाए तो मैं अपने हक में तो बेहतरीन इंसान हूं हम मैं अपने आप से तो कोई ज्यादती नहीं कर रहा हां जो दूसरे के साथ हो रहा है वो ट्रांजैक्शनल प्रोसीजर इसलिए नहीं है कि मैंने वह 20 मिनट अगर
रोज उसकी वीडियो पर स्पेंड किए तो मैंने क्या गैदर किया सिफर जीरो तो चूंकि मैं उन लोगों को तो ठीक नहीं कर सकता बिकॉज दे आर द क्रिएटर्स ऑफ द कंटेंट लेकिन जो कंज्यूमर है उस पर तो मैं असर रख सकता हूं ना उसको यह कायल करके कि आप जो चीज कंज्यूम कर रहे हैं यह सिर्फ उसको फायदा दे रही है आपको नहीं क्योंकि मेरे नजदीक कंटेंट क्रिएशन जो है ना वो म्यूचुअल एंपावरिंग फिनोमिना होना चाहिए लेट्स से के फैसल भाई की कोई वीडियो देखता है तो उसके रिजल्ट में आपको रिकग्निशन भी मिली पावर भी
मिली और अपोजिट तौर पर लोगों का भी पर्सपेक्टिव बेहतर हुआ वो भी एंपावर हुए तो यह विन विन गेम है तो मेरे नजदीक कंटेंट को का पैमाना यह है उसको जज करने का कि उसमें आपके लिए क्या गैदर करने के लिए अगर तो सिर्फ पेटी एंटरटेनमेंट है कि सुकून से नींद आ जाएगी एंजॉय कर लूंगा यह बहुत ही वल्गर कांसेप्ट है कि आप सिर्फ इसीलिए कोई चीज देखें कि मैं इसको देख के खुश हो जाऊंगा और उसके अलावा कुछ भी नहीं मिला आपको उसे मेरे नजदीक जो लोग हम बात करते हैं ना इस मुश में
इलेक्शन के हवाले से पॉलिटिक्स के हवाले से जो मैंने पहले की कि बहुत शर आ गया मैं समझता हूं कि ये रेफरेंडम है सोशल मीडिया क्योंकि अगर इनके चैनल्स पर आप जाए मेरे पे आपके पे आप तो चलें बहुत पहले से काम कर रहे हैं बहुत ज्यादा आपकी एक वाइड ऑडियंस है लेकिन जो लोग स्ट्रिक्टली एकेडमिक काम कर रहे हैं उनका असर देख लीजिए क्या है हजारों में लोग नहीं देखते ठीक है मिलियंस तो बहुत दूर की बात है अभी ये इस्लामाबाद में ब्लैक होल की जो एक प्लेटफार्म है 99 पर टॉक्स में दो रोज
से ऊपर नहीं भरती हम और आप इनमें से कोई जा हा बहुत अच्छा प्लेटफॉर्म बहुत अच्छा प्लेटफार्म है डिस्कोर्स होता है हर किस्म का आईडिया बताया जाता है तो यह चीज है कि मैं ये समझता हूं कि जहां अटेंशन है वो एक रेफरेंडम है कि भाई ये चाहिए हमें तो एंटरटेनमेंट का जो कल्चर है प्रवंता हूं डिस्ट्रक्टिव इसीलिए है कि वो सिर्फ और सिर्फ इमोशनल अपील के ऊपर इंसान को एक्सप्लोइट कर रहा है आजकल किसी व्यूअर के पास इससे बड़ी कोई ताकत ही नहीं है जो उसकी अटेंशन है अटेंशन इकॉनमी 300 बिलियन डॉलर की इंडस्ट्री
है तो वो आपकी अटेंशन से पैसा कमाते हैं ठीक है और आपको लगता है कि यह दरअसल म्यूचुअल ट्रांजैक्शन हो रही है कुछ नहीं हो रहा क्योंकि वो चीज आपकी थॉट का बनेगी और आपके बच्चे डिप्रेशन में इसीलिए जाएंगे कि कंज्यूमर जम के अलावा है ही कुछ नहीं आज नई गाड़ी ले ली कल ये कर लिया वो कर लिया मीनिंग कुछ भी नहीं है जीरो मीनिंग कुछ भी नहीं है तो लेकिन मेरा क्रिटिक वो नहीं था कि खवातीन दिखाते हैं घर की उससे मुझे इसलिए मसला नहीं है कि खवातीन भी इंसान ही है ना अगर
वो अपनी विल और कंसेंट से कैमरे पे आ रही है और अप्रोपो हूं कहने वाला कि अपने घर की खातून ना दिखाओ तो राइट विंग क्रिटिक नहीं है क्रिटिक मेरा ये है कि ये इंटेलेक्चुअली पॉइजन चीज है हम हम उसके सब्जेक्ट पे आपका क्रिटिक था उसके विजुअलिटी पे नहीं ये चीज है कि उसके ऊपर जो व्यूअरशिप का एक इन बैलेंस आपको देखने को मिलता है उससे पता चलता है कि लोग क्या देखना चाहते हैं पोस्टमैन ने कहा कि मीडिया का एक ही फंक्शन है गैदर एन ऑडियंस एंड सेल इट टू एन एडवरटाइजर अच्छा मुझे पाकिस्तानी
सोसाइटी को देखते हुए जितनी तीन चार दईयो से तो मैं इनको शोर की आंख से देख रहा हूं मुझे अब ये बड़ी तेजी से दो तरफ जाती हुई नजर आ रही है एक शदीद पॉपलिन एक हाइब्रिड सिस्टम जिसमें कि सिक्योरिटी के पास बहुत ज्यादा गुंजाइश आ गई क्योंकि जो भी पॉलिटिकल पार्टीज में थोड़ी बहुत हार्मनी होती थी वह बिल्कुल खत्म हो चुकी है अच्छा तीसरा फैक्टर इसमें यह है कि रिलीजस पापुलिज्म बहुत ज्यादा है जो कि खुद एक पापुलिज्म है खूस टीएल पी का जो जो राइज हुआ है एक एसिस्टेंट है पाकिस्तान के लिए क्योंकि
आपकी अर्बन क्लास में यह बहुत ज्यादा फैला एक तरफ अफगानिस्तान की वजह से एक जदी कल्चर बहुत बहुत ज्यादा फैला फिर पॉलिटिकल साइड पर जो लोग आए वो एक और पॉपलिन की तरफ चले गए फिर उस जो खिलाफ हुए वो एक और नफरत में एक और किस्म के पपम की तरफ चले तो ये सारी सोसाइटी मुझे बड़ी तेजी से एक ऐसी जगह पर जाती हुई नजर आ रही है जहां पर रैशनल डिस्कोर्स हो ही नहीं सकता तो मुझे ऑनेस्टली स्पीकिंग बहुत लोगों को शायद बुरा लग लगे लेकिन मुझे इस पर भी फिलहाल कोई होप नजर
नहीं आ रही आपको क्या लगता है देखि इस पर मैं तो पहले ही अपने आप को डी मोटिवेशन भी कर कहता हूं तो आपने होप का सवाल कर लिया लेकिन बात यह है कि लेकिन मैंने मुझे होप क्यों नजर नहीं आती मैंने आपको बता दिया हां बिल्कुल आपको क्यों नजर नहीं आती देखि उसमें यह है कि यह जो आपने मेंशन किया है ना यह असल में स्टेट क्राफ्ट का इशू था कि मुख्तलिफ एंटिटीज जिस तरह मैक्स वेबर की ना डेफिनेशन ही रियासत की ये है एन एंटिटी वच हैज अ लेजिटिमेसी जो कि लेजिटिमेसी है यानी
के मैंने किसी का कत्ल किया मुझे फांसी भी लटका दो किया ये वायलेंस ही है लेकिन लेजिटीमेट है तो इसका इख्तियार सिर्फ रियासत के पास होगा सोवन एक होगा मल्टीपल सोवन नहीं हो सकते जहां मल्टीपल सॉवरन है वो स्टेट नहीं है तो आपने डीएलपी की मिसाल दी वो भी एक सोवन है अपने आप में क्योंकि अगर वो सड़क पर एक लाख बंदा ले आए तो फिर उसके बाद में वजीर की काबीना उनके सामने बैठ के मुजा करराय एक चीज है उनके पास सिर्फ कौमी असेंबली में एक भी निशि नहीं है जिसके पीछे हम और आप
आर्गुमेंट कर कर के अपना वक्त बर्बाद करते हैं उनके पास तो कोई एमपी दे हैव अ सर्टेन मोनोपोली ऑन वायलेंस क्योंकि वो वायलेंस करने की पोटेंशियल रखते हैं इसीलिए रियासत उनके सामने बैठ के बात करेगी इसी तरह अगर मैंने इशारे पर किसी को दो चार बंदों को नीचे देकर मार दिया तो पहले लॉ मुझसे नेगोशिएट करेगा हम लॉ पहले मुझे कैलकुलेट करेगा इसके पास ताकत कितनी है अगर तो मैं खून बहा देक बचने का ताकत वो रखता हूं इतनी पोटेंशियल रखता हूं तो फिर मुझ परे लॉ अप्लाई नहीं होगा लॉ सबसे आखिर में अप्लाई होगा
जब ताकत नहीं होगी तो इसको वही वॉर ऑफ ऑल अगेंस्ट ऑल वाली बात है तो यहां पर एक मोनोपोली एंड वायलेंस है राइट विंग ऑर्गेनाइजेशंस के पास एटली एक है सिविक ऑर्गेनाइजेशंस के पास मेरा एमफिल का थीसिस भी इसी इशू के ऊपर है सोशल कैपिटल थरी पे कि जितना इंस्टीट्यूशनल सोशल कैपिटल बढ़ता है यानी के यह मुख्तलिफ ऑर्गेनाइजेशंस वकला के ग्रुप साफिया के ग्रुप इस्टैब्लिशमेंट मिलिट्री जितनी यह अपने इंस्टीट्यूशन को मजबूत करती हैं उतना जम्हूरियत को बर्बाद कर देती हैं क्योंकि यह फिर अपने स्टेट विदन स्टेट बना तो इसी तरह पाकिस्तान के अंदर अगर किसी
को मॉब लंच करने के लिए बाहर निकाल लिया है तो दुनिया का कोई जज नहीं ब बचा सकता यहां मैजिस्ट्रेट अपना अदालत छोड़ के भाग जाएगा पुलिस नहीं बचा सकती क्योंकि पुलिस फोर्स इतनी होती नहीं टी एएलपी की आपने मिसाल दी है ना वो उनके ही एक रहनुमा पिछले दिनों जलसे में खड़े होकर चीफ जस्टिस को उन्होंने कहा एक तो चूड़ा बोल दिया ठीक है और बाद में उन्होंने यह ख्वाजा आसिफ साहब जिन्होंने महमूद गजनवी के बारे में लुटेरा का लफ्ज इस्तेमाल किया मैंने उसको सेकंड किया उसे कहा तुम स्याल कोट में घुस के दिखाना
हम सिटिंग डिफेंस मिनिस्टर जज बीन प्रवोक्ड बाय समबे म पर्सन जिसकी कोई पॉलिटिकल वो कौमी असेंबली में नशत नहीं है वो ललकार सकता है कुछ भी नहीं होगा तो आपको पता यह चलता है कि पाकिस्तानी स्टेट जहां परसी की जाती है बहुत तगड़ी है वहां बहुत कमजोर भी है जैक्टली तो जब यह सारी ग्रुप्स के पास अपनी-अपनी मोनोपोली है वायलेंस पे तो फिर यह जब कोलप्पा उसके बाद एब्सलूट केस एक है एस्टेब्लिशमेंट का कॉर्नर जो थोड़ा बड़ा दिखाई देगा जैसे अगर एक केक है तो हाफ पाय इनके पास होगी और बाकी दो तीन ग्रुप्स में
बटी हुई है तो वी हैव मल्टीपल स्टेटस एक स्टेट नहीं है यहां प कहीं जरगा फैसला कर आपस में मिक्स भी है बहुत ज ओवरलैप भी है ओवरलैप भी है इस तरह नहीं है कि अलग है और पपम अलग है और रिलीजस फनेट अलग है ये सब आपस में कई जगह पर मिले इसलिए एक दूसरे के खिलाफ भी एक्शन लेने के काबिल नहीं है बिल्कुल नहीं है इस परे मैंने रिसेंटली बात भी की थी एंटोनियो ग्राम श एक फिलोसोफर है वो ना सिविल सोसाइटी की थेरी है उसकी वो कहता है पावर प्लस कंसेंट एक ताकत
होती है जो कि अपना विल इंपोज करती है और दूसरी तरफ से उसे सर्टेन ग्रुप से कंसेंट मिलता है कि हां तुम करो हम तुम्हारा साथ देंगे तो वो कहता है सिविल सोसाइटी अथॉरिटेरियन जम को आवाम के दिमाग पर नाफिटी है वो अच्छी चीज नहीं होती सिविल सोसाइटी और यहां भी यही इस सब में एक इंटेलेक्चुअल की स्पेस कहां है जो अपनी बात कह सके देखिए इंटेलेक्चुअल आजकल अगर उसको अपने अल्फाज इस तरह से बयान नहीं करने आते जो डायरेक्टली किसी को इंस्टिगेट ना करे इसको यूफेमिस्म कहते हैं कि सॉफ्टर अल्फाज का इंतखाब एक मुश्किल
आइडिया के लिए अगर वो नहीं आता अगर यह नहीं पता कि किस प्लेटफार्म की रेड लाइन क्या है मैं अपनी बात करता हूं टीवी पर प्रोग्राम करते हुए मैं इंकलाबी नहीं बन सकता मुझे पता है मुझे वहां कोई इंकलाब नहीं लाना सेमिनार में बोलते हुए मेरी रेडलाइन और है कल्चरल फेस्टिवल प बोलते हुए और है पॉडकास्ट प और है मजमे में और है लॉग प और है लॉग प और है अगर इन सबका एनालिसिस करते हुए एक कदम गलत रखा तो उसकी कॉस्ट मेरी लाइफ है दिस दिस आर द ऑड्स तो इसमें सरवाइव लंगर टर्म
में दो ही लोग कर सकते हैं एक जो कंपलीटली कॉम्प्रोमाइज कर जाए अपनी आडिल जीी प और छोड़ ही दे अपना मैदान दूसरे वह जो इतने स्मार्ट हो कि इन फ्रीक्वेंसी को देखते रहे हवा में कहीं प क्योंकि ये कहीं लिखी तो नहीं हुई बहुत टॉपिक हमारे सामने से आते हैं जिस पर रेड लाइन पता ही नहीं होती क्या है आपने गेस करना है कि कितना आगे जा सकते हो कितना बिकॉज रिटन लॉज ही नहीं है पाकिस्तान लॉस आर अनरिटन लॉस दे आर ल इन द एयर आपने गेस करना है उसके बाद से कितनी स्पेस
है कितनी नहीं है इंटेलेक्चुअल्स के लिए यही है कि डायरेक्ट डिसेंट इज ऑलमोस्ट इंपॉसिबल वी आर ऑलमोस्ट लिविंग अंडर मार्शल ल ऑलमोस्ट क्या मतलब वो रेटिंग के लिहाज से भी देख लीजिए एटली हम कई तरह के मार्शल आर् में है जिसकी हमने बात की अभी अच्छा मुझे आखिर में ये बताइए कि आप न्यूज चैनल में भी इंटरव्यू आपने लोगों के करने होते हैं डेली पॉलिटिक्स प फिर अपना लॉग भी आप करते हैं यूनिवर्सिटी गैर में जाकर भी बात करनी होती है तो पढ़ने के लिए वक्त अब कैसे निकालते हैं क्योंकि ये मसला मुझे भी खासा
दरपेश है क्योंकि अगर किसी महीने दो तीन जगह मैं चला जाऊ या इंटरव्यू दे लू या टीवी अपीयरेंस हो जाए अपना काम भी बहुत मुतासिर होता है और अपने अपनी पढ़ाई भी बड़ी मुतासिर होती है क्योंकि बगैर तैयारी के मैं कहीं नहीं जाता आप कैसे टाइम निकालते देखि इसमें ना दो चीजें है पहली यह कि मैंने 80 पर चीजें 80 पर कहूंगा जिनका मैं अगले 10 साल भी इस्तेमाल कर सकता हूं वो मैंने उस उम्र तक ग्रास्पर मैं कैमरे पे आया ही नहीं था और तब तक मैं बहुत ही आइसोलेटेड किस्म का आदमी जीरो सोशल
लाइफ नो फ्रेंड्स नो एक्टिविटीज जिंदगी में कभी वीडियो गेम नहीं खेली सीजन नहीं देखा इस तरह की हरका नहीं की तो वह सारा टाइम उसमें गुजर गया तो एक डीप सफरिंग पहले दिन से देखी बचपन में भी बहुत प्रॉब्लमैटिक बचपन गुजारा बुरे हालात में गुजारा ठीक है स्कूल लाइफ हो लाइफ हो सबका कोई बैलेंस नहीं था और इंटेंस सफरिंग के अलावा नो अदर स्टोरी टू टेल ठीक है तो उसमें क्या होता है कि आपका होराइजन वैसे ही बड़ा हो जाता है वाइड हो जाता है क्योंकि जब प्रॉब्लम सर पर खड़ी हो चारों तरफ तो सलूशन
तलाश करने के लिए तो पहले ही आप मारे मारे फिर रहे होते हैं जो कंफर्ट में रहेगा डिस्ट्रॉय तो वो होगा क्यों सलूशन ढूंढना ही नहीं उसने इस बड़ा जबरदस्त कोड है नीचे का वो कहता है कि वड आई एम बाय माय बाय माय हैप्पीनेस एंड ल फिज आर सफ यानी के मेरी खुशी ने जितना मुझे नुकसान पहुंचाया ना वो कोई चीज नहीं पहुंचा सकती और मेरा इलाज वो करेंगे जिन्होंने सफर किया हुआ है क्योंकि वो डीप सोच सकते हैं तो एक तो वो जो टाइम इस तरह का था ना उसमें सिर्फ गैदर ही किया
बोला ही नहीं ठीक है तो वो अब आगे ये है कि जितना मर्जी अरसा बोलते रहे लोगों को लगेगा अभी भी एक्टिवली इतना ग्रास्पर रहा है नहीं हो रहा दूसरी चीज यह है कि एक साइकोलॉजिकल एनर्जी होती है कुछ दिमाग जो है ना वो एक स्पेसिफिक फ्रीक्वेंसी से आगे जाके ऑपरेट कर सकते हैं हम मेरे साथ यह भी हुआ है कि मैं कहीं जाकर बोला हूं या किसी प्लेटफार्म पर गया हूं तो छछ घंटे लिटरली नॉट एजरेटिना रॉ पैशन हो ना वो थका नहीं है जब मैं इसको काम समझ लूंगा कि अच्छा अब किताब पढ़नी
है यह करना है तब थक जाऊंगा बहुत ज्यादा तो इसलिए कि यह सारे काम करने के बाद अब बहुत पंगे लिए हुए हैं उसकी वजह है कि आपका जो काम है आपको डिफाइंड है कि यार ये इस तरह से चलना है मैं इसका ऑर्डर डिसाइड करूंगा मेरा तो है ही नहीं क्योंकि कोई पॉलिटिकल इवेंट हो गया तो दफ्तर में बैठे हुए चैनल में एक्टिविज्म भी करना है यूनिवर्सिट में भी जाना है सोशल मीडिया की कल्चरल वॉज में भी घुसे हुए हैं लिख भी रहे हैं उधर जाके ठीक है और वीडियोस भी बना रहे हैं शो
भी कर रहे हैं तो बहुत ज्यादा हो चुका है अभी और जो चीज सफर कर रही है वो यह है कि जो क्रिएटिव राइटिंग की एक पोटेंशियल थी वो बिल्कुल ही लूज हो गई लिखने का टाइम ही नहीं है तो काफी एम्स है जो नहीं हो पा रहा लेकिन जो पढ़ने का जहां तक आपका सवाल है तो वो मैं कोई बिंज रीडर नहीं हूं कि चार चार दिन बैठ के पढ़ता रहूं जितना पॉसिबल होता है कोशिश यह करता हूं हफ्ते में एक दो नए आइडियाज एक्सप्लोर कर लू आज के दौर में हते में एक दो
नए आइडियाज बिग डील नॉ थियोरेटिकल फैक्ट्स छोटे से वो ये नहीं है कि लेट्स से मैंने अगर एक ही पर्सपेक्टिव पर किसी और राइटर का व्यू पॉइंट पढ़ लिया तो अच्छा उसने वो कहा हुआ है तो स्ट्रेंथ यह नहीं है कि कितना गैदर कर लिया गैदर बहुत लोगों ने किया हुआ है प्रोफेसर्स बहुत है जो पीएचडी करके आए हैं पास बैठोगे फील ही नहीं होगा पढे लिखें मुमल साहब आखिर में ये बताइए कि इस वक्त पाकिस्तान में जिस तरह का पॉलिटिकल सिस्टम चल रहा है एक हाइब्रिड सिस्टम अनपुर हाइब्रिड सिस्टम ये आपको कितनी देर तक
मैं आपको लगता है कि यह काम करेगा चलेगा इसी तरह वर्क कर सकता है देखिए इसमें जब तक ये जो फिलहाल मशीनरी है स्टेट की या पॉलिटिकल अथॉरिटी जो होती है वो जब तक बाहर से बेल आउट होती रहेगी ना चलती रहेगी क्योंकि इसकी स्ट्रेंथ पहले दिन से बॉर्डर से बाहर है हमने एक ऐसी अनफॉर्चूनेटली एक स्टेट क्राफ्ट सेट किया जो कि रियासत के बाहर से चलाया इसीलिए जाता है कि चूंकि इंडिजन सली कोई इंडस्ट्री बना नहीं सके कोई कैश काउस नहीं है जिस तरह से हर बड़े मुल्क के पास ना एक दो इंडस्ट्रीज होती
है इसम फोकस करके उसको बड़ा एमप्लीफाई कर देते हैं साउथ कोरिया वियतनाम की मिसाल देख ले जापान की मिसाल देख ले इवन ताइवान ताइवान या चीन चीन ने तो खैर काफी इंडस्ट्रीज अपनी बना ली तो यह है कि हमारी कोई भी स्ट्रेंथ आज तक नहीं बन सकी कि यार यह एक सेक्टर है जिससे हमने पैसा कमाना है या एक शहर जिस तरह दुबई बन गया एक दो शहर बना लिए उन्होंने जो कि ग्लोबल टूरिजम की हब बने और उन्होंने कहा कि यार अभी आगे हमें दईयो तक इन्हीं शहरों को डेवलप करके खाना है एमबीएस का
विजन 2030 भी यही है ना कि ऑयल इकॉनमी कोलप्पलुर की अपील बनानी है इसके अलावा इकोनॉमिक जनस बनाएंगे यह वो नम सिटी सारा जो कर रहा है बेसिकली बेसिकली सब कुछ वो होटलिंग है अगर आप उसको गर से देख इस तरह की चीजें अब वो बहुत एंबिशियस है उसमें कुछ चीजें मेरा नहीं ख्याल कि हो भी सकती है लेकिन फिर भी एक एंबिशन एक विल दिखाई देती है उसम समथ हमारा यह है कि वो स्ट्रेंथ कभी भी लोकल नहीं थी वो यह थी कि आसपास जंग लग जाए रेंटियर इकॉनमी जैसे यूटू यहां से उड़ा सीटो
सेंटो साइन हुआ फिर अफगान वर में हमने अपने जो है ना वो अड्डे किराए प दिए सारा कुछ हुआ तो वरन टेरर में भी यही हुआ तो हमारे पास तब तब पैसा आया जब कॉन्फ्लेट आया रीजन उसके अलावा हम चल ही नहीं सके मैंने एक बात कर दी थी यही वाली लोगों ने कहा ये क्या कह दिया कि मैंने कहा बैंकट तो अब नहीं हुए पहले दिन से थे वो तो आर्टिफिशियल इकोनॉमिक बूस्ट थे जो आपको तीन मिले अयूब का जया का और मुशर्रफ का तीनों का सोर्स क्या था जंग तो यह चीज है कि
अब भी अगर आपने सर्वाइवल का सवाल पूछा ना वी आर इन स्टेट ऑफ लिविंग डेड सोसाइटी लिविंग डेड नादर अलाइव नॉर डेड बीच में फसे हुए हैं ठीक है के हमेशा नाजुक मोड पर भी रहना है ठीक है और इकॉनमी भी बताया जाएगा कि अभी क्लैप्स कर जाएगी फिर दो दो बिलियन डॉलर आएगा दो साल और निकल जाएंगे दो साल से ऊपर की प्लानिंग नहीं है ऐसे ही चलेगा या तो बेल आउट खत्म हो जाए रिप्लेस उसको रिप्लेस फिर क्या करेगा नया ऑर्डर करेगा क्योंकि एसिस्टिंग ऑर्डर के पीछे जो ताकत है वो जीरो हो गई
तो गिर जाएगा और वो गिरेगा तो फिर नेचुरल प्रवल होगी जो ऑर्डर उसको रिप्लेस कर पाएगा जिस तरह से पाकिस्तान बनने के बाद मैं अक्सर कहता हूं कि पाकिस्तान हिंदुस्तान का डिफरेंस है ना वो मुस्लिम लीग का और कांग्रेस का डिफरेंस है क्योंकि पॉलिटिकल क्लास इतनी डाइवोर्स थी सोसाइटी से आवाम से रूट्स थी नहीं मुशे के अंदर अराफिया की कि उसको वैक्यूम को किस किसने फिल किया अशरफिया जो एस्टेब्लिशमेंट की थी उसने कर लिया क्योंकि 32 फीसद वो मिले हमें इन्हेरिटेंस रिसोर्स मिला सबकॉन्टिनेंट का 32 फीसद फौज मिल गई हम और पहले दिन से डिसीजन
मेकिंग पॉलिटिकल इतनी वीक थी और कानी साहब कोट करते हैं कि मुस्लिम लीग का पहला दफ्तर कराची में फौज ने बनाया था उसके उसका भी पहरा फर्ने लिया नहीं था क्या करना है लाहौर मार्शल लॉ 50 अर्ली 50 में लगता है फौज को बुला लिया आपने 5 साल रियासत बनने के बाद हम क्या आके कंट्रोल करो दूसरा यह कश्मीर शुरू हो गया 48 वॉर तो वह ड्राइविंग सीट पे ही आना था फिर क्योंकि आपने वैक्यूम इतना बड़ा दे दिया तो पावर तो वैक्यूम फिल करती है मेरा ख्याल है कि यह सारा कुछ इसलिए नहीं हुआ
कि सियासत दन बहुत अच्छे थे और वो हार गए वो ये था कि वो सिरे से पॉलिटिकल ऑर्डर था ही नहीं ब्यूरोक्रेसी चला रही थी अमेरिका से जो बेहतरीन नेगोशिएशन करेगा वो फ्रंट सीट प बैठेगा अयूब ने आइजनहावर को दोस्त बना लिया वो फ्रंट सीट पे आ गया बात खत्म तो आगे भी यही है कि बेल आउट होता रहेगा चलता रहेगा अदर वाइज इस ऑर्डर का कोलप्पन होने से हो सकता है अंदर से नहीं हो सकता क्योंकि अंदर से जो रियासत की ताकत है उसे कोई नोमई कुछ भी नहीं हरा सकता कोई बीएल नहीं हरा
सकती वो जिस तरह वो कहते हैं ना कि हॉब्स ने कहा कि इतना ताकतवर रहनुमा लेक आओ तो उस वक्त तो एक पॉलिटिकल लीडर को यह नहीं मालूम था कि अगले गांव में क्या हो रहा है अब तो उसको यह भी पता है कि आपने फ प कमेंट क्या किया हैली वो पहले ही उसे कटेल कर लेगा अभी 9 मई को जो पहुंचे हुए थे वहां प कैसे पकड़े गए क्योंकि उनके मोबाइल सिग्नल से जो लोकेशन ट्रेस हुई सीडीआर निकली सर्वेस स्टेट्स बहुत ताकतवर हो चुकी है अब खूनी इंकलाब या रिप्लेसमेंट नहीं हो सकती वही
कर सकते हैं अब सिर्फ यह है कि अगर इकोनॉमिक कोलबस आया तो ऑर्डर गया और नया ऑर्डर उसको रिप्लेस कर लेगा ट्स द आंसर बहुत शुक्रिया मुमल बहुत सी गुफ्तगू है जो हम अभी कर सकते हैं क्वेश्चन भी है मेरे जहन में उसको फिर किसी वक्त के लिए रखते हैं और आपका भी बहुत शुक्रिया मैंने आपके इस प्लेटफार्म से बहुत से लोगों को सीखते हुए अपने नोट्स बनाते हुए एग्जाम पास करते हुए और साथ साथ लर्न करते हुए भी सुना सबसे बड़ी चीज यह है कि किताबों की बेसिस पर बात करना ना आपकी बात को
एक अथॉरिटी देता है तो आपने जो काम किया हमने भी उसी को रेप्ट पर फॉलो किया एक लिहाज से कि बात वह नहीं है जो हवाई कहानी सुना दी जो यहां कल्चर था इस मुरे में बात वह है जिसकी एक सॉलिड फाउंडेशन है जिसको क्रिटिक करने के लिए भी आपको पढ़ने की जरूरत है वो जो आपने किया है रियली एडर यर बहुत शुक्रिया शुक्रिया दोस्तों शुक्रिया आपका भी आपने एक तवील पॉडकास्ट देखा यकीनन आपके जहन में बहुत से ऐसे सवालात होंगे जो आप सोचते होंगे कि हमें पूछने चाहिए थे हम बात करनी चाहिए थी लेकिन
जाहिर है इस मुख्तसर वक्त में यही कुछ हो सकता था देखने का बहुत शुक्रिया