फरवरी 2018 डोनाल्ड ट्रंप के यूएस के 45 वें प्रेसिडेंट बनने के सिर्फ एक ही साल बाद यूएस ने इंडिया के बारे में एक बहुत ही विचित्र बात कही अमेरिका इंडिया को विश्व का एक सुपर पावर बनाना चाहता है यस बिलीव इट र नॉट लेकिन 2021 में जब अमेरिकन इंटेलिजेंस एजेंसी सीआई का एक सीक्रेट डॉक्यूमेंट द यूएस स्ट्रेटेजिक फ्रेमवर्क फॉर द इंडो पैसिफिक डी क्लासिफाई किया गया था तब उसके पेज नंबर फाइव में क्लियर ये लिखा हुआ कि अमेरिका इंडिया को एक लीडिंग ग्लोबल पोजीशन पर देखना चाहता है और इसके लिए वह किसी भी हद तक
जाने को तैयार है प्राइम मिनिस्टर मो आई लुक फॉरवर्ड टू वर्किंग विद यू ट मेक आ नेश इन मोर प्रस्सन एवर बफर लेकिन जरा एक मिनट अमेरिका वो देश जिसने भारत के जन्म से ही हमेशा भारत की बर्बादी ही चाहिए पाकिस्तान का साथ दिया जो देश इंडिया और रशिया की नजदीकियों से आज तक इनसिक्योर है जिस देश ने हमारे फादर ऑफ न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी डॉकर होमी जहांगीर बाबा और प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी की तक हत्या करवा दी थी आज वही देश इंडिया को एक ग्लोबल सुपर पावर बनाने के ख्वाब क्यों देख रहा है सोचने वाली
बातें है ना वेल इसका जवाब छुपा हुआ है इन तस्वीरों में जो कुछ ही महीने पहले चाइना से लीक हुई है बीजिंग चाइना की कैपिटल सिटी से सिर्फ 32 किमी दूर चाइना एक मेगा मिलिट्री सिटी बना रहा है जो पूरे 1500 एकड़ में फैला हुआ है फॉर कंपैरिजन यह है यूएस का पेंटागन वर्ल्ड्स लार्जेस्ट मिलिट्री हेड क्वार्टर्स जो लिटरली एक वॉर मशीन [संगीत] है यूएस मिलिट्री का दिमाग है ब्रेन लेकिन चाइना का यह नया मिलिट्री सिटी यूएस पेंटागन से भी ऑलमोस्ट 10 गुना बड़ा होने वाला है और यह भी चाइना की इकलौती मिलिट्री सिटी नहीं
है इंडिया के हिमालयन बॉर्डर से लगकर ये जो ग्रीन डॉट्स आपको दिख रहे हैं ना यह चाइना की एक दूसरी मिनी मिलिट्री सिटी है जो चाइना लिटरली हमारे ही देश में बना रहे हैं अगस्त 2023 में जब अक्साई चीन से कुछ सैटेलाइट इमेजेस लीक हुए थे तब जाके पता चला कि चाइना तो हमारे ही देश में नए मिलिट्री बेसेस प्लांट कर रहा है जहां पर उसकी सेना के कैंप्स और उनकी एक बहुत बड़ी आर्म है उन्हीं सैटेलाइट इमेजेस से यह पता चला कि चाइना ने यहां पर अपने सीक्रेट अंडरग्राउंड बंकर्स भी बना के रखे हुए
हैं जहां पर उनके मिसाइल लॉन्चर्स हिडन है ओवरऑल चाइना ने ऐसे 37 मिलिट्री सिटीज बना के रखे हुए हैं जिसने भारत को चारों तरफ से घेर लिया है इन्हीं मिलिट्री कॉम्प्लेक्टेड है और मिलिट्री हेलीकॉप्टर्स के लिए हेली पोर्ट्स और रनवेज भी बनाए जा रहे हैं और कई तो बन भी चुके हैं जैसे शिगा से पीस एयरपोर्ट और निंगी मेन लिंग एयरपोर्ट जहां से चाइनीज एयरफोर्स मिनटों में ही उड़ान भरके इंडिया पर आराम से एर स्ट्राइक्स कर सकते हैं अब ये बेसिस का डिस्टेंस इंडिया के सारे मेजर मेट्रोपॉलिटन सिटीज से काफी कम है सो इससे चाइना
जब चाहे हम पर आसानी से एयर स्ट्राइक्स कर सकता है पर हमारे एयर स्ट्राइक्स का अनफॉर्चूनेटली चाइनीज बेसिस पर कुछ ज्यादा असर नहीं होगा जस्ट बिकॉज ऑफ देयर अंडरग्राउंड बंकर्स लेकिन अब यहां पर सवाल यह आता है कि यह सब की जरूरत क्या है चाइना के पास तो ऑलरेडी वर्ल्ड की सबसे लार्जेस्ट आर्मी है वर्ल्ड्स फर्स्ट ऑपरेशनल मोबाइल हाइपरसोनिक मिसाइल है वर्ल्ड्स वन ऑफ द मोस्ट पावरफुल इंटरकॉन्टिनेंटल लिटिक मिसाइल है कई वरशिप्स है चाइना के पास पूरे विश्व में वन ऑफ द लार्जेस्ट नेटवर्क ऑफ मिलिट्री बेसेस तक है सो पेंटागन से ऑलमोस्ट 10 गुना बड़ी
मिलिट्री सिटी बनाने की क्या जरूरत है वेल इसका जवाब है चाइना की फाइव फिंगर्स एंड पाम स्ट्रेटेजी टू कंट्रोल इंडियाज हिमालयाज चाइना को ना हमारे देश के इस पूरे रीजन में बहुत ज्यादा इंटरेस्ट है और इसी बात से यूएस को बहुत ज्यादा प्रॉब्लम है और इसीलिए आज सीआईए और रॉ मिलकर चाइना के खिलाफ एक सीक्रेट वॉर चालू है स्पेशली हिमालयन रीजन में एक ऐसी जंग जिसकी शुरुआत होती है 1959 से जब यूएसएसआर ने इंडिया और चाइना की दोस्ती करवाई थी थोड़ा कॉम्प्लिकेटेड मामला है लेकिन बड़े आसानी से समझाता हूं जरा इस स्टैचू को देखो हर
साल कई चाइनीज इस इंडियन की पूजा करते हैं आज भी इनके मूर्ति के आगे अपना सर झुकाते हैं उन्हें फूलों से सजाते हैं इनफैक्ट चाइना में तो ये एक तरह से एक प्रथा ही है कि हर एक चाइनीज प्रेसिडेंट जब इंडिया आते हैं तो इनके फैमिली के आगे अपना सर झुकाए बिना इनसे मिले बिना जाते ही नहीं है दरअसल 1938 में सीनो जपनीज वॉर के दौरान जब कई चाइनीज सोल्जर्स बुरी तरह से घायल हो चुके थे तब चाइनीज जनरल जूडे ने जवाहरलाल नेहरू से मदद मांगी थी कि वह चाइना को मेडिकली हेल्प करे और इंडिया
से डॉक्टर्स भेजे तभी जवाहरलाल नेहरू के बोलने पर खुद नेताजी बोस ने ₹ 2000 एक एंबुलेंस और पांच डॉक्टर की एक टीम को चाइना भेजा था जिन डॉक्टर्स में से ही एक थे डॉकर द्वारकानाथ कोटनीस लेकिन चाइनीज इन्हे भगवान का दर्जा इसीलिए देते हैं क्योंकि इन्होंने वॉर के दौरान अपनी आखिरी सांसों तक चाइना के सरहद पर रहकर जंग में लड़ रहे चीनी सिपाहियों का इलाज किया था एक बार तो डॉक्टर कोटने ने बिना सोए लगातार ती दिनों तक 800 जख्मी सोल्जर्स का इलाज किया था और इसीलिए आज यह कुछ गिने चुने फॉरेनर्स में से है
जिनको चाइना के वॉर हीरो सिमेट्री में दफनाया गया है खैर भारत और चाइना की दोस्ती का यह तो बस एक छोटा सा किस्सा है इससे भी बड़ी बात तो यह है कि जब 1949 में चाइना एक हार्डकोर कम्युनिस्ट देश बनके आजाद हुआ एक ऐसा देश जिसका सिर्फ एक ही मकसद था दुनिया से धर्म और लोकतंत्र को हटाकर कम्युनिज्म फैलाना द चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टी इज शटिंग डाउन हंड्रेड्स ऑफ बस्ट इन निशिया एंड गांसू प्रोविंसेस दिस सिने साइन ऑफ इस्लाम इज बीइंग कॉल्ड ऑपरेशन कंसोलिडेट देश तब जाहिर सी बात है यूएसए कंप्लीट एंटी चाइना था और नतीजा
पूरे विश्व के बड़े-बड़े देश चाइना के भी विरोध में आ गए लेकिन तब 1949 में इंडिया वो पहली डेमोक्रेटिक कंट्री बनी जिसने चाइना को एक देश की मान्यता दी और उससे डिप्लोमेटिक टाइज बनाए और सबसे आइकॉनिक बात बताऊं जो नक्सल टेररिस्ट आज इंडिया में आतंक फैला रहे हैं जो तालिबान आ इसिस और बोक हराम के बाद पूरे दुनिया के सबसे क्रूर आतंकवादी माने जाते हैं ये टेररिस्ट जिस माओ जेडो की विचार धारा पर चलकर आज तक इंडिया में आतंक फैला रहे हैं 2050 तक भारत में माओ गवर्नमेंट लाना चाहते हैं हंसने वाली बात तो यह
है कि उसी माउस डोंग ने खुद 1959 में भारत को टेलीग्राम में लिखकर बताया था कि आपसे हम वॉर कैसे कर सकते हैं हमारा दुश्मन तो यूएस है इंडिया तो हमारा दोस्त है और रही बात बॉर्डर इश्यूज की तो उसे तो हम सॉल्व कर लेंगे यार सो क्या इसका मतलब यह हुआ कि पहले इंडिया और चाइना दोस्त हुआ करते थे वेल नॉट एगजैक्टली यह काफी कॉम्प्लिकेटेड है जिस माउ जेडो ने 1959 में इंडिया की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया था उसी माओ की सोच यह थी माओ जेडो की विचारधारा पर लिखी गई एक किताब में
क्लियर लिखा हुआ है कि तिबेट चाइना का कटा हुआ दायना हाथ है और लद्दाख नेपाल सिक्किम भूटान और अरुणाचल प्रदेश उसके पंजे से बिखरी उंगलियां जिन्हें वेस्ट यानी कि पश्चिम की रणनीतियों ने काटक चाइना से अलग कर दिया था मगर अब वो इन उंगलियों को फिर से जोड़कर चाइना को अपना खोया हुआ गुरूर लौटाने वाले हैं अपने इसी ख्वाब को वो कहते हैं चाइना की फाइव फिंगर्स एंड पाम स्ट्रेटेजी जो हमारे हिमालयाज में छिड़ी इस पूरी जंग की नवज है एक्चुअली में चाइना जो इंडिया के साथ दोस्ती दिखा रहा था वह तो सिर्फ एक डिप्लोमेटिक
दोस्ती थी जो चाइना यूएसएसआर के आदेश पर कर रहा था हिंदुस्तान टाइम्स में पब्लिश माउ एडोंग और यूएस एसआर के प्रेसिडेंट निकिता ख्रुश्चेव के एक डी क्लासिफाइड कन्वर्सेशन से यह पता चला कि 1959 में यूएसएसआर ने चाइना को इंडिया से अच्छे रिलेशंस मेंटेन करने के लिए प्रेशराइज किया था और इसीलिए मजबूरन माओ एडोंग को अपनी सोच अपनी विचारधारा और हिंदुस्तान के प्रति अपनी नफरत को बाजू में रखकर कुछ सालों के लिए इंडिया के सामने दोस्ती का नकाब पहनना पड़ा था मगर 1960 में जैसे ही चाइना और यूएसएसआर के बीच दूरिया आई चाइना और इंडिया के
रिलेशंस भी खराब होने लग गए सन 1962 भारत के उत्तर पूर्वी इलाके में चीनी सेना ने हमला कर दिया सब कुछ इतनी जल्दी हो गया कि भारतीय सेना इस हमले को रोक तक नहीं पाई नतीजा हम यह जंग हार गए और हमें हिंदुस्तान के ताज लद्दाख का यह वाला इलाका अक्साई चीन गवाना पड़ गया और कुछ ही सालों में हिंदी चीनी यह दोनों भाई एक दूसरे के जानी दुश्मन बन गए मगर इसी जंग के साथ चाइना ने अपने फाइव फिंगर्स एंड पाम स्ट्रेटेजी का एक अहम पड़ाव पार कर लिया अक्साई चीन लेकिन अब बारी थी
अरुणाचल प्रदेश की यहां पर तो अगर आज के तारीख की बात करें तो चाइना ने बॉर्डर के 5 किमी अंदर सारी चू नदी के तट पर एक पूरा का पूरा गांव ही बसा दिया है हियर इज दैट क्लोस अप द एरिया ओवर देयर शोज द लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल एंड दैट ब्लू डॉट शोज द लोकेशन ऑफ दैट विलेज इस पूरे गांव के कंस्ट्रक्शन की शुरुआत 2019 में हुई थी जब उसके सैटेलाइट इमेज में भी आप देख सकते हो आपको ये पूरा जमीन एकदम साफ दिखेगा लेकिन फिर इसके बस एक ही साल में यह सैटेलाइट इमेज
जरा देखना यह सैटेलाइट इमेज नवंबर 1 2020 का है जिसमें आप क्लियर देख सकते हो कि यहां पर एक फुल फ्लेज विलेज बन चुका है जिसमें हजारों लोग रह सकते हैं सिर्फ एक ही साल में अब आप ही सोचो किस रफ्तार से चाइना हमारे हिमालयन रीजन पर एक्टिव हो रहा है रिपोर्ट्स के हिसाब से इंडियन बॉर्डर के आसपास चाइना ऐसे 600 गांव बना चुका है जिन्हें वो शाओ कांग बॉर्डर डिफेंस विलेजेस बोलते हैं बहुत ही सिमिलर स्ट्रेटेजी चाइना ने अपने सो कॉल्ड तीसरी उंगली भूटान में भी रची है इस रीजन बेऊल नपा जंग जो भूटान
डायनेस्टी की पूर्वजों की जमीन है उसके सैटेलाइट इमेजेस पर अगर आप देखोगे तो चाइना ने वहां पर भी कब्जा करके सिर्फ एक दो सालों के अंदर ही यहां पर भी एक अपनी पूरी टाउनशिप बसा दी है जिसमें बाई द वे एक प्रॉपर मिलिट्री पोस्ट भी मौजूद है इस पूरे एरिया को चाइना ऑक्यूपाइड टिब से कनेक्ट करने के लिए उन्होंने कनेक्टिंग रोड्स तक बना रखे हैं जाहिर सी बात है भूटानी गवर्नमेंट इज वेरी वेरी अनहैप्पी विद दिस और इसीलिए आज के तारीख में चाइनीज गवर्नमेंट के साथ उनके ऑलमोस्ट जीरो डिप्लोमेटिक टाइज है इज देर एनी ट्रुथ
टू अ लॉट ऑफ टॉक अबाउट द चाइनीज गवर्नमेंट ओपनिंग एन एंबेसी इन थिंपू वी डोंट इवन हैव डिप्लोमेटिक रिलेशंस हाउ कैन यू ओपन एन एंबेसी विदाउट डिप्लोमेटिक रिलेशंस लेकिन नेपाल से लड़ने के लिए चाइना को अस्त्रों शस्त्रों की जरूरत बिल्कुल नहीं पड़ी जरूरत पड़ी तो सिर्फ तर्क वितर्क की एक ऐसे इकोनॉमिक स्ट्रेटेजी की जिससे नेपाल छोड़ो आज चाइना एक झटके में 145 देशों पर अपना इन्फ्लुएंस फैला चुका है चाइना बेल्ट एन रोड इनिशिएटिव बीआर आई जिसे इनफेमस चाइना डेट ट्रैप स्ट्रेटेजी भी कहा जाता है इसे एकदम शॉर्ट में अगर मैं बताऊं तो चाइना हर एक
देश को इंफ्रास्ट्रक्चर लोन देता है लेकिन हैवी इंटरेस्ट रेट्स पर और इसे अगर वह देश सही टाइम पर चुका नहीं पाया तो चाइना उनके सबसे स्ट्रेटेजिक एरिया पर कब्जा कर लेता है जैसे श्रीलंका का हंबनटोटा पोर्ट पाकिस्तान का ग्वादर पोर्ट और जिबूती का दोरा ले पोर्ट सो नेपाल भी ऑफकोर्स इसी बीआरआईएनएक्स के इस पूरे इलाके पर अपना कब्जा जमा लिया है पर नेपाल कुछ नहीं बोल पा रहा चाइना का बी आरआईपीडी सक्सेसफुल फॉर चाइना ऑफ कोर्स आप मैप में देख सकते हो आज के तारीख में 156 में से 145 कंट्रीज चाइना के इस प्रोजेक्ट से
जुड़ चुके हैं यानी कि चाइना का इन 145 कंट्रीज पर स्ट्रंग इन्फ्लुएंस है व्च इज अ वेरी बिग थ्रेट नॉट फॉर जस्ट इंडिया बट फॉर यूएसए टू देखो आप जानते ही हो ऑलरेडी यूएसए और चाइना के बीच में एक आइडियो कल डिफरेंस है अमेरिका एंड जापान स्टैंड फमली टुगेदर इन द फेस ऑफ अग्रेसिव एंड कर्सिव एक्शन बाय द कमुन चाइनीज वी सीक पीस ब एज माय फर्स्ट पलटून मट सेज दोज हु लंग परर पीस मस्ट प्रेपर फॉर वर वी मस्ट बी प्रपे यूएस एक डेमोक्रेटिक कैपिट देश है जबकि चाइना एक हार्डकोर कम्युनिस्ट देश और इसीलिए
दोनों देशों के बीच दरार तो शुरुआत से ही है लेकिन अब बीआरआर को और ज्यादा बढ़ा दिया है ऊपर से अमेरिका के जले पर नमक छिड़कने के लिए 2018 में चाइना ने तो यह तक कह दिया था ओपनली अनाउंस कर दिया था कि 2049 तक चाइना दुनिया का इकलौता सुपर पावर बन जाएगा यूएस को पीछे छोड़कर और इसीलिए आज सीआईए और ने मिलकर चाइना के साथ एक जंग छेड़ दिया है एक ऐसी जंग जो एक सिंपल से सिद्धांत पर आधारित है दुश्मन का दुश्मन अपना दोस्त और सीआई और रॉ की यही अननेचुरल फ्रेंडशिप आज से
नहीं बल्कि 1950 से जारी है बस सिर्फ गवर्नमेंट चेंज होने पर डायनामिक्स भी बदलने लगते हैं 7थ अक्टूबर 1950 चाइना ने तिबेट को इवेडर लिया 1950 द चाइनीज आर्मी ऑलरेडी क्रश अराउंड से टू 8000 टिपटन सोल्जर लेकिन यूएस ने हमारी सादा को अपने लिए एक अवसर में बदल दिया उन्होंने चाइना से आजादी के लिए लड़ने वाले कुछ टबस को हथियार और ट्रेनिंग देकर एक टिब लिबरेशन मूवमेंट की शुरुआत कर दी पर सीआई का यह मिशन इतना इंपैक्टफुल नहीं था अंट्स कम बिल्कुल ताजे थे और इसीलिए तब हमारी इंटेलिजेंस एजेंसी आईबी ने एक बहुत ही डेरिंग
मिशन को अंजाम दिया हमने सीआईए की मदद से आज तक की सबसे सीक्रेट बट डेडली एक घोस्ट आर्मी ही खड़ी कर दी स्पेशल फ्रंटियर फोर्स एए एसएफएफ जिसे आईबी और सीआईए ने कोड नाम दिया एस्टेब्लिशमेंट 22 यह टिब न रिफ्यूजीस की बनी एक ऐसी घोस्ट आर्मी थी जिसका ना ही कोई ऑन पेपर एसिस्टेंसिया डेजिग्नेशन इनके सोल्जर्स ना दिखते थे और ना ही पहचाने जाते थे यह सिर्फ अपने काम से ही अपनी छाप छोड़ के जाते थे और बस बैटल रेडी होते ही इस आर्मी ने अपने पहले मिशन को अंजाम देना शुरू कर दिया प्रोजेक्ट जेमिनी
इनफैक्ट यह आईबी और सीआईए का पहला डॉक्युमेंटेड जॉइंट ऑपरेशन था इस मिशन में एसएसएफ ऑपरेटिव्स ने आम टिब नस के रूप में टिब में इफिल्टर करके दो मेजर काम किए सबसे पहला चाइनीज टेलीफोन लाइंस को टैप करना और दूसरा चीनी सेना की ट्रूप मूवमेंट्स की सारी जानकारी आईबी तक पहुंचाना यानी कि करके पहुंचाना इसी इंटेल से फिर 1965 में एसएसएफ ने एक और एक हाई रिस्क ऑपरेशन को अंजाम दिया नंदा देवी न्यूक्लियर स्पाई मिशन सीआई और रॉ ने प्लान बनाया कि नंदा देवी जो कि इंडिया की सबसे ऊंची पीक्स में से एक है वहां एक
सर्वेस डिवाइस इंस्टॉल किया जाए जिससे वह चाइना के न्यूक्लियर मिसाइल टेस्ट को सीक्रेट वली मॉनिटर कर सकते हैं अब यह एक एक्सेप्शनली डेंजरस ऑपरेशन होने वाला था क्योंकि नंदा देवी का पीक इज वन ऑफ द हाईएस्ट पीक्स इन द वर्ल्ड जहां पर हमारे एसएसएफ कमांड को एक्सट्रीम वेदर का सामना करना पड़ता सो इस मिशन के दौरान जब हमारी टीम पहाड़ के शिखर पर पहुंचने ही वाली थी तभी ही एक भयंकर सा तूफान आ गया जो एक एवलांच में तब्दील हो गया और इसीलिए मजबूरन में एसएसएफ को इस मिशन को मिडवे में ही अबोर्ड करके वापस
आना पड़ा लेकिन अगर यह मिशन सक्सेसफुल हो जाता तो शायद हमें आज तक चाइना की हर एक मिनट की खबर मिल रही होती अब ये तो चलो सारे जॉइंट ऑपरेशंस थे लेकिन इनके अलावा भी रॉ और सीआईए इंडिविजुअल लेवल पर भी चाइना के खिलाफ हिमालयन रीजन में कई सारे ऑपरेशंस कर रहे हैं जैसे 2019 में अल अरेबिया न्यूज़ ने एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट पब्लिश की इसमें लिखा हुआ था कि ट्रंप सीआईए से एक ऐसा ऑनलाइन कोव ऑपरेशन करवा रहा है जिससे चाइनीज सोशल मीडिया पर यह नैरेटिव फैले कि चाइना की शी जिंग पिंग गवर्नमेंट में बहुत
बड़े-बड़े करप्शंस चल रहे हैं और चाइना का बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव उनके देश के लिए एक बहुत ही बड़ा खतरा है इसके अलावा हाल ही में ही तेहरान टाइम्स ने एक अमेरिकन बज बिजनेसमैन इमाद जुबेरी के ऊपर एक न्यूज़ रिपोर्ट पब्लिश की थी जिसमें उन्होंने यह क्लेम किया कि इमाद बिजनेसमैन के भेस में एक सीआई एजेंट है जो कई पॉलिटिशियन को फंड करते हैं ताकि वह यूएस पार्लियामेंट में एंटी चाइना और एंटी बी आरआईए इन पॉलिटिशियन में एक और एक नाम है यूएस सेनेटर लिंसे ग्राहम का भी तेहरान टाइम्स का एक और एक एलिगेशन है
कि इमाद चाइना के अलग-अलग सिटीज के मस्जिदों में जाकर वहां की चाइनीज मुस्लिम कम्युनिटीज को भी फंड करते हैं ताकि शी गवर्नमेंट के सीक्रेट्स का पता लगा सके और एंटी चाइना एक्टिविटीज में भाग ले सके तेहरान टाइम्स का कहना है कि इस बात के उनके पास प्रूफ भी है इमाद ने अपने खुद के पर्सनल अकाउंट से ही उन चाइनीज मुस्लिम्स को पेमेंट्स तक किए हैं अब यार हम कहां यह सारे सीक्रेट ऑपरेशंस की बात कर रहे हैं 2024 में तो सीआईए ने ओपनली एडवर्टाइज कर दिया था कि उन्हें चाइना पर एस्पियो नाज यानी कि मुखबीर
के लिए जासूसों की जरूरत है कोई इंटरेस्टेड है तो सीआईए से कांटेक्ट करें अच्छा इसमें इंडिया भी पीछे नहीं है हां 2017 में पाकिस्तान के डिफेंस सेक्रेटरी ने ओपन मीडिया में एलिगेशंस लगा दिए थे कि रॉ ने 500 मिलियन डॉलर्स का बजट एलोकेट करके पाकिस्तान के अंदर एक एंटी चाइना सेल खोल दिया है जिसके थ्रू रॉ चाइना के पाकिस्तान में सारे इन्वेस्टमेंट्स और प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे करके डिस्ट्रॉय कर रही है बेसिकली पाकिस्तान का ये एलिगेशन है कि रॉ पाकिस्तान में बलोच और टीटी टीपी रिबेल्स को फंड करके पाकिस्तान में मौजूद चाइनीज प्रोजेक्ट्स को डिस्ट्रॉय कर
रही है अब जरा इस मैप को देखना यह है साउथ अफ्रीका फार ईस्ट एक ऑप्टिकल फाइबर अंडर सी केबल नेटवर्क जिसे इंडिया ने बाकी देशों के साथ जॉइंट बनाया तो एक दिल्ली बेस्ड मैगजीन का यह क्लेम है कि रॉ इस सेफ नेटवर्क के थ्रू चाइनीज नेवी के कम्युनिकेशंस और मूवमेंट को ट्रैक कर रहा है और शायद रिसेंटली इसी डिवाइस की मदद से रॉ ने एक चाइनीज शिप को पकड़ा भी था जो पाकिस्तान में चुपके से मिसाइल इक्विपमेंट्स लेकर जा रही थी अब देखो ऑनेस्टली हमने इन सीआईए और रॉ के हिमालयाज में ऑपरेशन को स्टडी करने
के लिए बहुत सारे सोर्सेस पढे कई बुक्स भी पढ़ी लेकिन इसके बावजूद क्योंकि ये सारे एक्सट्रीमली सीक्रेट जॉइंट ऑपरेशंस है तो इसके डिटेल्स इतने इजली पब्लिक में अवेलेबल नहीं है और इसीलिए ऐसा बिल्कुल हो सकता है कि आज से 10 या 15 साल बाद सीआईए इन सारे ऑपरेशंस को डी क्लासिफाई करते लेकिन फिलहाल जो भी सोर्सेस अवेलेबल है वो यही सारे राइवल कंट्रीज जैसे कि ईरान और सऊदी के मीडिया हाउसेस के रिपोर्ट्स है पर हां सीआई का एक ऑफिशियल डॉक्यूमेंट जरूर डी क्लासिफाई हुआ है जिससे ही हमें यह सारा कुछ पता चला कि यूएस और
इंडिया चाइना को काउंटर करने के लिए एक नहीं बल्कि मल्टीपल फ्रंट्स पर रेगुलरली कोलैबोरेशन प्रोजेक्ट्स कर रहे हैं जैसे मैरीटाइम सिक्योरिटी इंटरनेशनल फोरम्स डिफेंस साइबर एंड स्पेस सिक्योरिटी और सबसे इंपॉर्टेंट इंटेलिजेंस शेयरिंग यह दोनों भी देश मिलकर चाइना के विश्व गुरु बनने के ख्वाब को नाकाम करने की पूरी कोशिशें कर रहे हैं इनफैक्ट इस डॉक्यूमेंट में यूएसए ने ओपनली ये लिखा है कि इंडो पैसिफिक में चाइना को काउंटर करने के लिए यूएसए को इंडिया को एक स्ट्रांग इन्फ्लुएंस बनाना ही पड़ेगा अमेरिका को यहां पर भारत के सुपर पावर बनने के एस्पिरेशन और एंबिशन को सपोर्ट
करना ही पड़ेगा प्राइम मिनिस्टर मडी आई लुक फॉरवर्ड टू वर्किंग विद यू टू मेक आवर नेश इवन मोर प्रोस्पेस न एवर बिफोर वी थैंक यू वी लव यू ए आ वा यू नो माय एडम फंग फर य एंड एव अब यूएस अपनी बोली बात पर कितना विश्वास रखते हैं या यूएस पर गवर्नमेंट कैसे चेंज होते हैं और उनके जो लॉन्ग टर्म विजनस है व कैसे चेंज होते हैं यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा बट यह बात भी हमें याद रखना चाहिए कि जिन भी देशों पर अमेरिका का इंटरेस्ट जागा है जिन्हें अमेरिका ने सो
कॉल्ड सपोर्ट किया है उन देशों का आज क्या हाल हुआ है और इसीलिए अब यहां पर एक बड़ा सवाल यह भी है कि क्या हम चाइना और यूएस के इस जंग के बीच सिर्फ एक प्यादा बनकर रहना चाहते हैं क्या द यूएस चाइना ट्रेड वॉर है रिइग्नाइटेड एंड दैट इज नॉट गुड न्यूज फॉर इंडिया क्या इस जंग में हम कुर्बान हो जाएंगे क्या चाइना इ प्रिपेयरिंग फॉर अ सी वर अगेंस्ट इंडिया एंड द यूएस या फिर इस जंग को एक सुनहरे अवसर में हम बदल कर दिखा सकते हैं इन दोनों देशों की दुश्मनी का फायदा
उठाकर हम वाकई में ग्लोबल लीडर बन के उभर सकते हैं इंडिया कुड बेनिफिट फ्रॉम द ऑन गोइंग यूएस चाइना ट्रेड वॉर एंड इफ यू आर वंडरिंग हाउ हिज मोर और यह अपने आप में दूसरे देशों के लिए भी एक मिसाल बन जाएगा आपको क्या लगता है आपके जो भी पर्सनल ओपिनियन हैं नीचे कमेंट्स में जरूर शेयर करना मेरे साथ और अगर आपको ऐसे वीडियोस पसंद आते हैं जहां पर हम इंडिया और दूसरे देशों के बीच के स्वीट एंड सॉर रिलेशंस को डाक्टर हैं तो आई एम श्यर आपको यह वाला वीडियो भी बिल्कुल पसंद आएगा यह
एक एक्सट्रीमली डिटेल्स का शॉर्ट वीडियो सीरीज है जहां पर हमने रॉ और पाकिस्तान की इंटेलिजेंस एजेंसी आईएसआई के बीच कैसे रिलेशंस है हमारे इंडिपेंडेंट से लेकर आज तक उसे डिटेल में एक्सप्लेन किया है अगर आप इस वीडियो को देखना चाहते हो तो क्लिक ओवर हियर एंड डू चेक इट आउट मिलते हैं अगले वीडियो में तब तक के लिए स्टे क्यूरियस कीप लर्निंग जय हिंद