दोस्तों क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ कि आपके दिमाग में एक अच्छा सा वीडियो बनाने का आईडिया आया हो? आपने उस वीडियो को बनाने के लिए किसी एआई टूल को एक टेक्स्ट टू वीडियो प्र दिया हो और नतीजे में जो वीडियो हासिल हुई हो वो बिल्कुल भी वैसी ना हो जैसी आप सोच [संगीत] रहे थे। मतलब उस वीडियो में कुछ ऐसी चीजें शामिल होने से रह गई थी जिन्हें आप शामिल करना चाहते थे या उसमें कुछ ऐसी चीजें शामिल हो गई थी जिन्हें आप शामिल नहीं करना चाहते थे। तो दोस्तों, इस तरह की प्रॉब्लम्स की
दो वजूहात हो सकती हैं। पहली वजह तो यह हो सकती है कि जिस एआई टूल से आपने वो वीडियो बनवाई है, वो एआई टूल ही इतना अच्छा नहीं है। उसकी कुछ लिमिटेशंस हैं और जाहिर है कि वो उन लिमिटेशंस के अंदर रहते हुए ही आपको आउटपुट देगा। और दूसरी जो वजह हो सकती है वो सबसे ज्यादा कॉमन है और इन मोस्ट ऑफ द केसेस यही वजह होती है और वो वजह है कि आपने जो उस एआई टूल को प्र्प दिया है वो प्र्प ही इतना अच्छा नहीं है। मतलब आप उस एआई टूल को अपनी बात
ही ठीक तरीके से नहीं समझा सके। उस एआई टूल का कोई कसूर नहीं है। तो दोस्तों, इसी प्रॉब्लम को तो आज हम ठीक करने जा रहे हैं क्योंकि आज हम सीखेंगे कि यह प्रोफेशनल लोग आखिर कैसे टेक्स्ट टू वीडियो प्रप लिखते हैं कि [संगीत] उन्हें बहुत ही शानदार रिजल्ट्स हासिल होते हैं। दोस्तों, यहां पे मैं आपको एक हैरानी की बात बताऊं कि अगर आप किसी एi वीडियो जनरेटर टूल को सिर्फ इतना भी लिख देते हैं ना अ बॉय। बस सिर्फ इतना आपने लिखा अ बॉय और उसको सेंड कर दिया तो एi जो है वो फिर
भी आपको कोई ना कोई वीडियो बना के दे देगा। लेकिन आपका कंट्रोल सिर्फ उसी पे होगा जितना आपने कहा है। आपने लिखा है ना बॉय तो वीडियो के अंदर होगा तो बॉय ही लेकिन वह किस ओरिजिन का दिखाई देगा? कौन से इलाके का दिखाई देगा? उसकी ऐज कितनी होगी? उसने कपड़े कैसे पहने होंगे? उसका मूड कैसा होगा? लाइटिंग कैसी होगी? वो कर क्या रहा होगा? वीडियो का स्टाइल क्या होगा? बैकग्राउंड ब्लर होगा या नहीं होगा? अगर होगा तो कितना होगा? उसके अंदर कैमरा मूवमेंट कैसी होगी? इन सारी चीजों पे एi खुद कंट्रोल कर लेगा। तो
हमने एआई के कंट्रोल में तो कुछ देना ही नहीं है। हमने सारी चीजों को अपने कंट्रोल में लेना है और इसी के लिए हम सीख रहे हैं टेक्स्ट टू [संगीत] वीडियो प्र्ट्स बनाना। दोस्तों जैसा कि आपको पता है कि हम लोग प्रों्ट्स के पीछे हाथ धो के पड़े हुए हैं। और इससे पहले हम टेक्स्ट टू इमेज, इमेज टू वीडियो और फ्रेम्स टू वीडियो प्र्टिंग के बारे में बड़ी तफसील से जान चुके हैं। अगर आपने इससे पहले मेरी प्र्प्ट से रिलेटेड यह वाली वीडियो नहीं देखी, तो जरूर देखिए। आपको बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। तो दोस्तों
टेक्स्ट टू वीडियो प्र्ट का मतलब होता है एक ऐसा प्र्प्ट जिसको जब हम किसी एi टूल को देते हैं तो बदले में हमें डायरेक्ट एक एआई वीडियो [संगीत] हासिल होती है। वो जो एक प्रॉब्लम का मैंने जिक्र किया ना आपके साथ कि आपने जो एआई वीडियो बनवाई उसमें कुछ ऐसी चीजें आ गई जिनको आप शामिल नहीं करना चाहते थे। उस प्रॉब्लम पे हम काबू पा सकते हैं नेगेटिव प्र्ट की मदद से। अब ये नेगेटिव प्र्ट का मतलब क्या होता है? आपको बिल्कुल मुख्तसर बताऊं। तो पॉजिटिव प्र्ट का मतलब होता है वो चीजें जो आप एआई
से करवाना चाहते हैं जो आप चाहते हैं कि एआई ये काम करे उसे पॉजिटिव प्र्प कहा जाता है और वो चीजें जिनके बारे में आप एआई को मना करते हैं कि ऐसा ना करना उसको नेगेटिव प्र्ट कहा जाता है। मिसाल के तौर पे आप अपने किसी बच्चे को बाजार में भेजते हैं दही लाने के लिए और आप उसको कहते हैं कि बेटा बाजार में जाओ 2 किलो दही लेके आओ और ताजा दही लेके आना है। जब वो दही लेने के लिए जा रहा होता है तो आप उसको रोकते हैं कि बेटा एक मिनट जरा रुकना
बात सुनना। आप उसको कहते हैं कि यार बासी दही ना लेके आना। और वो जो फलां वाली दुकान है ना नुकर पे उससे दही नहीं लेके आने उसकी दही अच्छी नहीं होती। [संगीत] तो ये अब आपने क्या किया? वो जो शुरू में आपने उसको कहा ना कि बाजार जाओ दही लेके आओ। ये पॉजिटिव प्रोप्प आपने उसको दिया और वो जो एंड पे आपने उसको रोक के बोला है ना कि बेटा बस ही दही ना लेके आना और फला वाली दुकान से ना लेके आना। जी आपने उसको नेगेटिव प्र्प दिया है। बिल्कुल इसी तरह जब आपको
किसी एआई टूल के बारे में भी यह डाउट हो ना कि यह एआई टूल यह गलत ही कर सकता है तो आप उसको भी नेगेटिव प्रम्प दे सकते हैं और [संगीत] उसको कुछ चीजों से मना कर सकते हैं। मिसाल के तौर पे कई बार ऐसा होता है कि जो एआई वीडियो बनती है उसके ऊपर जो टेक्स्ट लिखा हुआ आ जाता है कैप्शनंस लिखे हुए आ जाते हैं जो कि हमें नहीं चाहिए होते। तो हम उसको नेगेटिव प्र्ट में मना कर सकते हैं कि आपने कोई कैप्शन नहीं डालना। कोई टेक्स्ट आपने नहीं डालना। दोस्तों, कुछ ए
टूल्स ऐसे हैं जिनमें नेगेटिव प्र्ट के लिए बकायदा अलग से एक सेक्शन बना होता है। जैसा कि आप यह देख सकते हैं कि lनाo ऐप का जो वीडियो जनरेशन मॉडल है मोशन टू फास्ट इसके अगर हम सेटिंग्स पे क्लिक करें तो यहां पे हमें ये नेगेटिव प्र्ट का ऑप्शन देखने को मिलता है। हमने इसको ऑन कर लेना है। तो जैसे ही आप इसको ऑन करेंगे आप यह देख सकते हैं कि दो बॉक्सेस बने हुए हैं। टाइप ए प्र्ट वाले बॉक्स में आपने वो लिखना है जो जो चीजें आपको अपनी वीडियो में चाहिए। और ऊपर जो
नेगेटिव प्र्ट है इस वाले बॉक्स में आपने वो चीजें लिखनी है जो आपको अपनी वीडियो में नहीं चाहिए। और अगर आप जिस एआई टूल से वीडियो बनवा रहे हैं उसमें नेगेटिव प्र्ट के लिए कोई अलग से ऑप्शन नहीं है तो फिर आप क्या कर सकते हैं? आप उस एआई टूल को जो प्र्प रहे हैं उस प्र्प के एंड पे आप उसको नेगेटिव प्र्ट भी लिख सकते हैं। दोस्तों आई होप कि अब आपको नेगेटिव प्र्ट की अच्छे से समझ आ चुकी होगी। अब हम चलते हैं अपने असली काम की तरफ और वो है एक टेक्स्ट टू
वीडियो प्रप लिखना। तो दोस्तों एक टेक्स्ट टू वीडियो प्रप लिखने के लिए आप ये वाला फार्मूला इस्तेमाल कर सकते हैं। फार्मूला है ट्रिपल एस डी एम फार्मूला। इस फार्मूला में पहले एस से बनता है सब्जेक्ट। दूसरे एस से बनता है सीन, तीसरे एस से स्टाइल और उसके बाद जो एम आता है उससे बनता है मूवमेंट या मोशन और एंड पे जो डी आता है उससे बनता है डिटेल्स। अभी ये फार्मूला मैं आपको तफसील से समझाता हूं। लेकिन इससे पहले मैं आपको थोड़ा सा याद करवा दूं कि इससे पहले हमने जो टेक्स्ट टू इमेज प्र्ट बनाने
का तरीका सीखा था उसमें भी हमने कुछ इससे मिलताजुलता फार्मूला सीखा था और वो फार्मूला था ट्रिपल एस डी फार्मूला। तो दोस्तों अब ये टेक्स्ट टू इमेज और टेक्स्ट टू वीडियो फार्मूला जो है ये इतने सेम सेम क्यों है? इसकी वजह यह है कि इमेज और वीडियो में थोड़ा सा ही तो फर्क होता है। मोशन का फर्क होता है। जो इमेज होती है वो स्टैटिक होती है। यानी उसमें कोई मोशन नहीं होती। कोई मूवमेंट हरकत नहीं होती। जबकि जो वीडियो होती है उसमें मूवमेंट होती है, मोशन होती है। और दोस्तों क्या आपको पता है कि
वीडियो कोई अलग से चीज नहीं होती। ये असल में बहुत सारे इमेजेस ही होते हैं जो हमको दिखाए जा रहे होते हैं तेजी के साथ। और हमें ऐसा लगता है कि हम कोई वीडियो देख रहे हैं। मसलन जब आप अपने मोबाइल के कैमरा को 30fps पे रख के रिकॉर्ड करते हैं, शूट करते हैं तो यह 30fps क्या होता है? ये 30fps का मतलब होता है 30 फ्रेम्स पर [संगीत] सेकंड। तो बेसिकली क्या हो रहा होता है कि आपका जो कैमरा होता है वो 1 सेकंड के अंदर 30 इमेजेस ले रहा होता है और एक सेकंड
में उन 30 इमेजेस को दिखा रहा होता है। मिसाल के तौर पे मैं अपने मोबाइल का कैमरा जो है वो स्टैंड पे लगा के एक छोटी सी वीडियो बनाता हूं और उस वीडियो में मैं सिर्फ यह करता हूं। ये बस ये करता हूं। इस वीडियो को अगर मैंने 30fps पे रिकॉर्ड किया है तो मेरे मोबाइल के कैमरा ने असल में क्या किया है? यहां से यहां तक पहुंचने में उसने 30 इमेजज़ फ्री सेकंड के हिसाब से लिए हैं। मसलन उसने यहां पे एक इमेज लिया। फिर जब हाथ यहां पे आया तो उसने एक इमेज लिया।
फिर यहां पे [संगीत] फिर यहां पे फिर यहां पे ऐसे करके उसने हर एक फ्रेम का इमेज लिया। और उन फ्रेम्स को उसने 30 फ्रेम्स पर सेकंड के हिसाब से दिखाया। और वो क्योंकि एक सेकंड के अंदर 30 इमेजज़ बहुत ज्यादा होते हैं। तो वो हमें महसूस नहीं होता कि हम इमेजज़ देख रहे हैं। हमें यही पता चलता है कि हम वीडियो देख रहे हैं। तो मतलब इमेज और वीडियो में सिर्फ यही फर्क है कि इमेज होता है वो सिर्फ एक फ्रेम होता है। जबकि जो वीडियो होती है उसमें हमें बहुत सारे फ्रेम्स जो है
वो एक साथ बहुत स्पीड के साथ दिखाए जा रहे होते हैं। तो दोस्तों इसी वजह से टेक्स्ट टू इमेज प्र्ट और टेक्स्ट टू वीडियो प्र्ट जो है उसमें बहुत सारी सिमिलरिटी है। और सिर्फ और सिर्फ फर्क किसका है? मूवमेंट का फर्क है। मतलब बाकी ज्यादातर चीजें तकरीबन वही है। सिर्फ और सिर्फ फर्क कहां पे है? मूवमेंट में फर्क है। तो इस फार्मूला में सबसे पहले एस आता है जिसका आपको पता है कि एस का मतलब होता है सब्जेक्ट। सब्जेक्ट आपका कोई इंसान, जानवर, परिंदा, कोई ऑब्जेक्ट वगैरह हो सकता है। उसके बाद आता है सीन। सीन
का मतलब यह होता है कि आपका जो सब्जेक्ट है वो कहां पे है? वो किसी पार्क में है, वो स्कूल में बैठा हुआ है, वो लाइब्रेरी के अंदर है। उसका या उसके आसपास क्या चीजें हैं? एनवायरमेंट क्या है? माहौल क्या है आसपास का? पिछली वीडियो में हमने बहुत सारे इमेज स्टाइल्स की बात की थी। और आज हम बात करेंगे कुछ वीडियो स्टाइल्स की। मैं आपको बहुत सारे वीडियो स्टाइल्स दिखा देता हूं। मैं आपको कुछ वीडियोस दिखाऊंगा। उन वीडियोस के ऊपर टाइटल लिखा होगा। मतलब स्टाइल का वीडियो स्टाइल का नाम लिखा होगा। आप उस वीडियो को
देखें और नीचे वो जो स्टाइल का नाम लिखा हुआ है उसको पढ़ें ताकि आपको अच्छे से आईडिया हो जाए कि जो वीडियो आप बनवाना चाहते हैं उसमें आपने स्टाइल [संगीत] कौन सा रखना है। दोस्तों चौथे नंबर पे जो एम आता है ना उससे बनता है मूवमेंटकि वीडियो है तो इसमें मूवमेंट तो लाजमी होगी ही होगी तो हम किस-किस चीज की मूवमेंट या मोशन के बारे में बात करेंगे हम अपने सब्जेक्ट की मूवमेंट और मोशन के बारे में बात करेंगे कि सब्जेक्ट हमारा क्या कर रहा है और उसका जो आसपास का एनवायरमेंट है उसके पीछे जो
माहौल है जो बैकग्राउंड है वहां क्या हो रहा है क्योंकि वीडियो है तो बैकग्राउंड भी जो है वो डायनेमिक होना चाहिए स्टैटिक तो नहीं होना चाहिए ना। मतलब रुका हुआ नहीं दिखाई देना चाहिए। हरकत करता हुआ दिखाई देना चाहिए। तो दोस्तों आइए जरा अब एक परफेक्ट टेक्स्ट टू वीडियो प्र्ट को हम एनालाइज करते हैं। तो दोस्तों थोड़ी सी मैं आपको सिचुएशन बता दूं कि हम एक वीडियो बनवाना चाहते हैं जिसमें एक पुख्ता उम्र का शख्स किसी पार्क में बैठा हुआ न्यूज़पेपर पढ़ रहा हो। तो इस फॉर्म के अंदर जितने भी एलिमेंट्स हैं वो सारे के
सारे मैंने ये अलग करके लिखे हुए हैं। सब्जेक्ट में मैंने लिखा है मिडिल एज्ड मैन इन कैजुअल शर्ट रीडिंग न्यूज़पेपर सीन लिखा हुआ है सिंग ऑन पार्क बेंच स्टाइल लिखा हुआ है सिनेैटिक रियलिस्टिक स्टाइल इसके बाद मूवमेंट है कि मैन क्या कर रहा है? मैन टर्निंग न्यूज़पेपर पेजेस कि वो उस न्यूज़पेपर के पेजेस को जो है वो पलटा रहा है। और उसके बाद डिटेल्स में लिखा हुआ है शॉर्ट मॉर्निंग सनलाइट। तो इन सारे एलिमेंट्स को मिला के हम अपना जो फाइनल टेक्स्ट टू वीडियो प्र्ट है वो किस तरह से लिखेंगे आइए देखते हैं। तो दोस्तों
हमारा फाइनल जो टेक्स्ट टू वीडियो प्र्ट है वो कुछ ऐसा होगा। मैन अ मिडिल एज्ड मैन इन कैजुअल शर्ट रीडिंग न्यूज़पेपर सिंग ऑन पार्क बेंच अंडर ट्री इन सनी मॉर्निंग पॉक सिनेमेटिक रियलिस्टिक स्टाइल विद नेचुरल कलर्स मैन टर्निंग न्यूज़पेपर पेजेस स्लोली जेंटल ब्रीज़ मूविंग लीव्स कैमरा स्लोली मूविंग क्लोजर टू ह फेस शैलो डेप्थ ऑफ फील्ड वार्म नेचुरल लाइटिंग तो इसमें क्या-क्या अब शामिल है जी आइए थोड़ा सा एनालाइज़ करते हैं और आई रिकमेंड यू कि इस पार्ट को आप स्किप ना कीजिएगा क्योंकि इस वीडियो का जो देखने का मेन पर्पस है वही तो है यहां
पे तो दोस्तों यह जो एरिया मैंने हाईलाइट किया है इस एरिया एरिया में हमने अपने सब्जेक्ट के बारे में बताया कि सब्जेक्ट क्या है? उसने कपड़े कैसे पहने हुए हैं? और बेसिकली वह एक्शन क्या कर रहा है? वह कर क्या रहा है? और प्र्प के इस वाले पार्ट में हमने सीन के बारे में बताया है कि वो कहां पे बैठा हुआ है और उसके आसपास क्या है? और यहां पे इस वाले पार्ट में हमने बताया है कि आसपास का माहौल क्या है। जेंटल ब्रीज़ मूविंग लीव्स। मतलब बैकग्राउंड में जो हवा है वह पत्तों को हिला
रही है। और यहां पे इस वाले पार्ट में हमने कैमरा की मूवमेंट के बारे में बताया कि कैमरा जो है स्लोली मूविंग क्लोजर टू ह फेस। आहिस्ता-आहिस्ते उसके चेहरे पे आ रहा है। और यहां पे इस वाले पार्ट में हमने डिटेल्स लिखी हैं। यानी इसमें हमने लिखा है शैलो डेप्थ ऑफ़ फील्ड। शैलो डेप्थ ऑफ़ फील्ड का मतलब होता है कि आपका सब्जेक्ट जो है मेन वो क्लियर दिखाई देगा। जबकि बैकग्राउंड जो है वो ब्लर होगा। वार्म नेचुरल लाइटिंग और इसमें हमने लाइटिंग का भी जिक्र कर दिया। मतलब हमने अपने प्र्प्ट केस वाले पार्ट में अपने
सब्जेक्ट सीन, स्टाइल और मूवमेंट और डिटेल्स का जिक्र कर दिया है। और ये आप देख सकते हैं कि एक छोटा सा प्र्प है लेकिन इसके अंदर सारी चीजें इंक्लूडेड हैं। और उसके अलावा जो मैंने आपको नेगेटिव प्र्ट का बताया था वो आप इस प्र्प्ट में कैसे शामिल करेंगे? आप नीचे यह हेडिंग देके लिख लेंगे। नेगेटिव प्र्ट, लो क्वालिटी, ब्लड, डिस्टोर्टेड फेस और बॉडी, एक्स्ट्रा और मिसिंग फिंगर्स, अननेचुरल स्किन। तो मतलब एआई के बारे में आपको जिस चीज का डर है कि कहीं वो यह ना कर दे वो हमने यहां पे नेगेटिव प्र्ट के अंदर लिख
दिया है। मसलन यहां पे हमने यह लिखा है कि एक्स्ट्रा और मिसिंग फिंगर्स क्योंकि कई बार जो एi टूल्स वीडियोस बनाते हैं उनमें ऐसा होता है कि जो बंदा होता है उसकी छह फिंगर्स दिखाई दे रही होती हैं या पांच की बजाय चार दिखाई दे रही होती हैं। तो अब तो खैर एआई टूल्स अच्छे हो चुके हैं। ये मैं आपको एग्जांपल के तौर पे ये चीज समझा रहा हूं। और ये जितनी भी चीजें हमने नेगेटिव प्र्ट में लिखी हैं, इनको हमने कॉमा से सेपरेट किया है। ये मैंने एक यूनिवर्सल टाइप का नेगेटिव प्र्ट लिखा है।
इसे आप तकरीबन सभी प्रम्प्स के अंदर इंक्लूड कर सकते हैं। लेकिन आप अपनी रिक्वायरमेंट के हिसाब से थोड़ा बहुत इसमें चेंज भी कर सकते हैं। मसलन इसके अंदर नेगेटिव प्र्ट में मैंने कैप्शनंस लिखा हुआ है। तो इसका मतलब यह है कि जो वीडियो बनेगी उसके अंदर कैप्शंस शामिल नहीं होंगे। लेकिन अगर आप कैप्शंस शामिल करना चाहते हैं तो आप इस कैप्शन को यहां पे नेगेटिव प्र्ट में से हटा दें। तो मतलब आप अपनी जरूरत के हिसाब से इसमें नेगेटिव प्रम्प में भी चेंज कर सकते हैं। तो दोस्तों वीडियो कैसी लगी कमेंट्स में अपनी राय से
जरूर आगाह कीजिएगा। इंशाल्लाह जल्द एक अच्छी सी वीडियो में मिलते हैं।