बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम अल्लाह तबारक वी ताला के नाम से शुरू जो बड़ा मेहरबान और निहायत रम करने वाला है अल्लाह तबारक वी ताला कराने पाक की सूरा अल इमरान में इरशाद फरमाता है और बेशक अल्लाह तबारक वी ताला का पहले घर जो लोगों के लिए मुकर्रर किया गया वो मक्का में है जो तमाम दुनिया के लिए बरकत वाला और हिदायत वाला है प्यार दोस्तों क्या आप जानते हैं की दुनिया में सबसे पहले अल्लाह तबारक वी ताला ने अपने घर खाना कबू को किस तरह और कब बनाया क्या यह बात सच है की अल्लाह तबारक वी ताला ने
खाना कब को पैदा किया और खाना कब की तामीर सबसे पहले किसने की और खाना कब का हज और तवाफ करने वाले सबसे पहले क्या है [संगीत] प्यार दोस्तों खाना कब है एक ऐसा मुकद्दस मुकाम है जिसको देखने के लिए हर मुसलमान तड़पता है और जिसका तवाफ करने के लिए हर मुसलमान का दिल तरसता है प्यार दोस्तों खाना कब है की मौजूदा इमारत 404 साल पुरानी है खाना कब को अब तक 10 मर्तबा आमिर किया जा चुका है प्यार दोस्तों खाना कब की सबसे पहले तामीर हजरत आदम अलैहिस्सलाम की तकलीफ से 2000 साल पहले हुई
और खाना कब की सबसे पहले तामीर फरिश्तों ने की जी तरह की तस्वीर लिखा है की जब अल्लाह तबारक वी ताला से फरिश्तों ने कहा की इंसान तो तकलीफ के बाद जमीन में फसाद बर्प करेगा और बहुत खून रेजी होगी जी पर अल्लाह पाक ने फरमाया के जो कुछ मैं जानता हूं वो तुम नहीं जानते फरिश्ते यह गुमान करने लगे की अल्लाह तबारक वी ताला हमसे नाराज हो गया है उसे वक्त फरिश्ते अल्लाह तबारक वी ताला को राजी करने के लिए अल्लाह तबारक वी ताला के अर्श के नीचे तवाफ करने लगे और अल्लाह पाक की
तस्वीर बयान करने लगे [संगीत] [संगीत] प्यार दोस्तों बैतूल मामूर फरिश्तों का कब है और ये सातवें आसमान में अर्श के सामने कब शरीफ के बिल्कुल ऊपर है फरिश्तों के दरमियां बैतूल महामूर की ऐसी ही हुरमत है जैसे जमीन पर कब मौजमा की हुरमत है ये आसमान वालों का किला है और हर रोज 70 हजार फरिश्ते इसका तवाफ करते हैं और नमाज के लिए हाजरी देते हैं जो फरिश्ता एक बार बैतूल महानोर में तवाफ कर लेट है यह नमाज पढ़ लेट है इसके बाद दोबारा उसको कभी मौका नहीं मिलता बल्कि हर रोज नए 70 हजार फरिश्ते
बैतूल मामूर में हाजिरी देते हैं और अल्लाह तबारक वी ताला की इबादत करते हैं बुखारी और मुस्लिम शरीफ की हदीस है की हजूरे पाक सल्लल्लाहु ताल अलेही वल्लम को भी बैतूल महामूर दिखाए गया प्यार दोस्तों सबसे पहले अल्लाह तबारक वी ताला ने फरिश्तों के लिए कब बनाया जिसको बैतूल मामूर कहा जाता है इसके बाद अल्लाह तबारक वी ताला ने फरिश्तों को हम दिया के जमीन पर भी इस बैतूल मामूर की मदद मेरा घर बना ताकि जी तरह जमीन पर मेरे बंदे उसे घर का तवाफ करें और मेरी इबादत करें प्यार दोस्तों खाना कब की दूसरी
तामीर उसे वक्त हुई जब अल्लाह तबारक वी ताला ने हजरत आदम अलैहिस्सलाम को तकलीफ करने के बाद जमीन पर उतारा इस तरह जब हजरत आदम अलैहिस्सलाम जन्नत से जमीन पर तशरीफ़ ले तो हजरत आदम अलैहिस्सलाम ने अल्लाह तबारक वी ताला की बारगाह में अर्ज की या रबल आलमीन मैं यहां ना तो मालिका की तस्वीर और तकबीर सुन सकता हूं और ना ही कोई इबादत ग देखा हूं जैसा की आसमान में बैतूल महामूर को देखा करता था जिसके इर्द-गिर्दफरिष्ट तवाफ किया करते थे हजरत आदम अलैहिस सलाम की ये फरियाद सुनकर अल्लाह तबारक वी ताला ने हजरत
आदम अलैहिस सलाम से फरमाया की जो जहां पर हम निशान बताएं वहां का बनाकर उसके इर्द-गिर्द तवन भी कर लो और उसकी तरफ मुंह करके नमाज भी अदा करो हजरत जिब्रील इस्लाम को अल्लाह तबारक वी ताला ने हजरत आदम अलैहिस्सलाम की रबड़ी के लिए उनके साथ भेजो कराची कम पर ले जहां से जमीन बनी थी यानी जी जगह सबसे पहले जमीन की जाग पैदा हुई थी और फिर वही जग फेल कर पुरी जमीन बनी उसे मकान पर हजरत इब्राहिम ने अपने पर को जमीन पर मारा तो सातों जमीनों तक खाना कब की बुनियाद दाल दी
पांच पहाड़ों के पत्थरों की मदद से भारत और उन बुनियादों पर चारों तरफ दीवारों खड़ी कर दी उन पांच पहाड़ों में कोहल अबनान कोहेतूर कोई जूते हीरा वगैरा भी शामिल थे इस तरह इस दूसरी तामीर में हजरत ए जिब्राइल इस्लाम हजरत आदम अलैहिस सलाम और हजरत अल्लाह ने भी शिरकत की हजरत आदम अलैहिस्सलाम खाना कब की तामीर करते जब खाना कब की तामीर का कम मुकम्मल हो गया तो फिर अल्लाह तबारक वी ताला ने हजरत आदम अलैहिस्सलाम को तवाफ करने का हम दिया और साथ ही फरमाया के आप पहले इंसान हैं और ये पहले घर
है फिर हजरत आदम अलैहिस्सलाम खाना कब की तरफ मुंह करके नमाज अदा किया करते और अल्लाह तबारक वी ताला की इबादत ने मशहूर रहा करते खाना कब की तीसरी तामीर प्यार दोस्तों तमिरे आदम के बाद वक्त के साथ-साथ खाना कब की दीवारों भी कमजोर होने लगी तो हजरत आदम अलैहिस सलाम के बेटे हजरत शीश अली सलाम ने मिट्टी और पत्थर से खाना कब दूसरी मर्तबा आमिर किया जब के बाद मुफसीर इनका ये कहना है की हजरत सलाम ने सिर्फ खाना कब की मरम्मत का कम किया उसकी तामीर नहीं की यार दोस्तों बात करते हैं खाना
कब की चौथी तामीर के बड़े में खाना कब की चौथी तामीर उसे वक्त हुई जब अल्लाह तबारक वी ताला ने हजरत नूह अली सलाम की कॉम पर तूफान का अजब भेजो तूफाने नो में खाना कब की इमारत गायब हो गई और ताकत की इमारत को उठा लिया गया और यह जगह सिर्फ एक ऊंचे और सुर्ख टाइल की तरह र गई थी इस तूफान के बाद जब हजरत इब्राहिम अलैहिस सलाम इस दुनिया में तशरीफ़ ले तो अल्लाह तबारक वी ताला ने हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम को खाना कब की तामीर करने का हम दिया हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम ने
चौथी मर्तबा खाना कब को किस तरह तामीर किया इस वाक्य का पैसे मेजर कुछ यूं है की जब अल्लाह तबारक वी ताला के हम के मुताबिक हजरत इब्राहिम अलैहिस सलाम ने अपनी बीबी हजरत बीबी हाजिर राजी अल्लाह ताला अंह और अपने प्यार बेटे हजरत इस्माइल अलैहिस्सलाम को मक्का की बंजारों वीरान जमीन और पहाड़ों के दरमियां छोड़ दिया जहां पर कोई इंसानी आबादी का नमो निशान ना था और ना ही खाना कब की इमरती खाना कब की जगह बस एक सुर्ख रंग का टीला था उसे वक्त हजरत इब्राहिम अलैहिस सलाम ने अपने बीबी और बच्चों को
छोड़कर अल्लाह तबारक वी ताला के हम के मुताबिक मक्का की तरफ पहले सफर किया इसके बाद जब दूसरी दफा हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम अपने खानदान से मिलने के लिए फलस्तीन से मक्का आए तो तब हजरत इस्माइल अलैहिस्सलाम की कुर्बानी का वाक्य पेस आया और तीसरी बार जब हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम मक्का में तशरीफ़ ले तो हजरते इस्माइल अलैहिस्सलाम की शादी हुई और उसे वक्त हजरत ए हाजरा राजी अल्लाह ताला अंह का इंतकाल हो चुका था चौथी मर्तबा जब हजरत इब्राहिम अलैहिस सलाम मक्का में तशरीफ़ ले तो आपकी मुलाकात आपके बेटे हजरत इस्माइल इस्लाम से ना हुई फिर
पांचवी मर्तबा जब हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम मक्का में तशरीफ़ ले तो उसे वक्त अल्लाह तबारक वी ताला ने हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम को बैतुल्लाह की तामीर करने का हम दिया हजरत इब्राहिम अलैहिस सलाम ने हजरत इस्माइल इस्लाम से फरमाया की मेरे बेटे अल्लाह तबारक वी ताला ने मुझे हम दिया है की मैं इस घर की तामीर करूं तो हजरत इस्माइल अलैहिस सलाम ने अर्ज किया की जरूर कीजिए मैं खिदमत के लिए हाजिर हूं एक रिवायत के मुतबा खाना कब की बुनियादों की निशान दही हजरत इब्राहिम अलैहिस सलाम ने की उसे पर हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम और हजरत इस्माइल
अलैहिस सलाम ने तामीर का कम शुरू किया जब खुदाई शुरू हुई तो कभी भी बुनियाद है जाहिर होने लगी जिन पर हजरत आदम अलैहिस सलाम ने बैतुल्लाह शरीफ की तामीर की थी हजरत आदम अलैहिस्सलाम की बुनियादों के जहीर हो जान के बाद खाना कब की तामीर शुरू हुई हजरत इब्राहिम अपने उसे बुढ़ापे में एक कारीगर और हजरत इस्माइल इस्लाम एक मजदूर की हैसियत से खाना कब की तामीर करने लगे लेट और हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम काबे में लगाते फिर हजरत से जबले अब्दुल कबीर के केन से दो पत्थर मिले हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम उन पत्थरों को उठाकर
ले उनमें से एक पत्थर हजारे असावा था और दूसरा पत्थर मक्का में इब्राहिम के नाम से मशहूर हुआ प्यार दोस्तों मक्का में इब्राहिम वी मशहूर पत्थर है जी पर खड़े होकर हजरत इब्राहिम अलैहिस सलाम ने कब की दीवारों बुलाने की जैसे जैसे खाना कब की दीवारों बुलंद होती जाति वैसे-वैसे यह पत्थर भी हवा में बुलंद होता जाता प्यार दोस्तों नबी ये करीम रऊफ और रहीम सल्लल्लाहु ताल अलेही वल्लम ने इरशाद फरमाया की हजारे अश्वत जब जन्नत से उतारा गया तो दूर से भी ज्यादा सफिया था फिर इंसानों के गुनाहों ने उसे सिया कर दिया और
एक और रिवायत के मुताबिक नबी अकरम सल्लल्लाहु ताल अलेही वाली सलाम ने इरशाद फरमाया हजारे आस्वाद और मक्का में इब्राहिम जन्नत के याकूतों में से दो याकूत हैं अल्लाह तबारक वी ताला ने इनके नूर की रोशनी को बुझा दिया अगर अल्लाह तबारक वी ताला उनके नूर की रोशनी को ना बुझाता तो ये मशरक से मगर अब तक सबको रोशन कर देते खाना कब की पांचवी और छठी तामीर खाना खाबो को पांचवी बार कॉम में माल का और छठी मर्तबा काबिले जुर्म ने तामीर किया काबिले जुर्म में से जी शख्स ने ये कम किया उसका नाम
हर्ष बिन मद दे असगर था खाने कब की सातवीं तामीर खाना कब के साथ भी तामीर करने वाले नबी अकरम हजरत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलेही वल्लम के पाक नजम में से एक बुजुर्ग हैं जिनका नाम हजरत कुसबीन किलाव था उन्होंने खाना कब की आश्चर्य नौतमर की और एक बेमिसाल पुख्ता इमारत आमिर कराई कब की आठवीं तामीर की जरूर को उसे वक्त पड़ी जब काबिले क्रश की सरदारी के दूर में एक जबरदस्त सैलाब आया जिससे खाना कब की दीवारों बेहद कमजोर हो गई तो मुत्तफिक का फैसला के तहत खाना कब को काबिले कुरश्नी दोबारा से तामीर
करवाया जिसका अमीर में नबी अकरम जमा हजरत ए मोहम्मद ए मुस्तफा सल्लल्लाहु ताल अलेही वल्लम की जाते अकदास ने भी शिरकत फरमाई लेकिन उसे वक्त शरमाया कम होने की वजह से क्रैश की तामीर में हातिम में कब को शामिल नहीं किया गया था खाना खंबा की नमिता अमीर उसे वक्त हुई जब जेजीडी फौजी की संगवारी की वजह से खाना कब की दीवारों सिकश हो गई तो हजरत अब्दुल्ला बिन जुबेर ने कब जो के कुश की तामीर में शामिल नहीं किया गया था उसको भी शामिल करके बुनियादी इब्राहीम पर हिजरी में फिर से खाना कब को
कुश वाली तामीर के मुताबिक बनवाया इसके दूर के [संगीत] बदला किया और हजरत अब्दुल्ला लेकिन इमाम आबू युसूफ ने यह कहकर उसे रॉक दिया की अगर यही तरीके कर रहा तो फिर हर आने वाला हुक्मरान अपनी शोहरत के लिए खाना कब को गिरकर नई तामीर करवाया करेगा और इस तरह लोगों के दिलों में इस घर की अजमत कम होती जाएगी फिर 440 हिजरी में सल्तनत है उस्मानिया के सुल्तान मुराद बिन अहमद खान साहब कुछ तुम ने हजारे आस्वाद वाले रोकन के अलावा साड़ी इमारत की बुनियाद को बुनियाद एजाज के मुआविक तामीर करवाया इस आमिर का
कम छह मा के अंदर मुकम्मल हुआ इसने खाना कब के अंदर संगमरमर का पत्थर लगवाया और निहायती खूबसूरत छठ बनवाई और बहिर की दीवारों संगे खर से चुनाव में चुन्नी गई और निहायती नफीस और रश्मि सिया रंग का पर्दा खाना कब पर डाला गया जी पर कलम तैयब तहरीर था और सुनहरी लफ्जों में सुल्तान का नाम भी लिखा हुआ था इस तरह सल्तनाट्यम का कम शुरू किया लिहाजा इस तरह खाना कब की मौजूदा इमारत कमोबेश 404 साल पुरानी है