अपने पास कुछ ना कुछ हथियार होना चाहिए जैसे घोड़े सवार का हथियार है लगाम ड्राइवर का हथियार है स्टेयरिंग और ब्रेक सैनिक का हथ्यार है बंदूक आदि ऐसे तुम्हारे पास कर्म करने के लिए मन को ठीक चलाने के लिए भगवन नाम जप का हथियार होना चाहिए ताकि मन ठीक से चले उस हथियार में चार बातें चाहिए मंत्र में चार बातें होती एक तो शब्दों की रचना रचना उस ढंग की होती जो आपके अंतःकरण पर आपके मूलाधार केंद्र पर आपके स्वाधिष्ठान केंद्र पर जहां आप हो वहां असर हो ऐसे मंत्रों के शब्दों की गुं दूसरा होता
है आपको मंत्र भगवान के प्रति श्रद्धा हो तीसरी बात आप एकाग्रता की कला सीख ले आपको मैच देखते देखते जो मजा आता है उसमें भी एकाग्रता होती है रात को अगर नींद नहीं है और मन तुम्हारा चंचल है तो मैच देखने में मजा नहीं आएगा आप अगर फ्रेश होकर मैच देखते हैं तो देखते देखते जब ए ए करते तो अनजाने में एकाग्रता का रस आता है भले हार जीत बाहर होती है लेकिन मजा तुम्हारे को भीतर आता है वो मजा एकाग्रता का है आइसक्रीम खाने में या लड्डू खाने में या उत्सव मनाने में जब जब
मजा आता है तो जाने अनजाने आपका मन एकाग्र होता है तभी मजा आता है जितना जितना तुम्हारा मन एकाग्र है उतना उतना जिस काम में तुम लगाओगे उसी काम में आपको रस आने लगेगा और वो काम ईश्वर की प्रीति के लिए कर लोगे तो आपका कर्म योग हो जाएगा तो एक बात मंत्रों शब्दों का गुं दूसरी बात एकाग्रता आप देव दर्शन करिए एक टक दो पाच मिनट देखिए गुरुजी को देखिए एक दो पाच मिनट एक टक एक अग्रता बढ़ेगी नाक के अग्र भाग से आप दृष्टि मिलाइए श्वास भीतर जाए शांति बाहर आए एक भीतर जाए
राम बाहर आए दो 50 की गिनती करो आपकी एकाग्रता कुछ बढ़ेगी खूब थके मांधे हैं मन चंचल है होठ बंद कर दिए ऊपर और नीचे के दांतों के बीच आधा सेंटीमीटर का अंतर रख दिया जीभ तालू में नहीं नीचे नहीं उसमें मन लगा दो कि जीभ को इस जगह पर रखना है दो मिनट करो शरीर की थकान और मन की चंचलता कुछ अंश में नियंत्रित होने लगेगी और भी कई उपाय है आप आपके जीवन में एक तो मंत्र के शब्द होने चाहिए इष्ट के भगवान के दूसरा कुछ एकाग्रता हो तीसरी बात आपका संयम और चौथी
बात श्रद्धा ये चार बातें है और मंत्र जपते हैं तो आपकी योग्यताएं विकसित होने में कोई अर्चन नहीं आ सकती श्रद्धा संयम श्रद्धा श्रद्धा संयम एकाग्रता और मंत्र जो वृक्ष कहे कि मुझे पेड़ से संयत होने की क्या जरूरत है मैं तो मन माना घूमता फिरता रहूंगा तो फिर उसके पत्ते हरे भरे नहीं रहेंगे फूल खिलेंगे नहीं फल लगेंगे नहीं वृक्ष की जड़े अगर संयत है तो रस खींच सकती है ऐसे ही तुम्हारा मन संयत है तो आत्मा की शक्ति और सामर्थ्य खींच सकता है अगर संयत नहीं है तो जैसे जड़े उड़ती फिरे तो वृक्ष
सूख जाता है ऐसे अंतःकरण सूखा रहता है और सूखे अंतःकरण को फिर लोग डिस्को करके रंगना चाहते हैं सूखे अंतः कण को वाइन पीकर रसमय बनाना चाहते हैं नहीं नहीं इससे तो अल्कोहल आ जाता है ब्लड में जो सतत शराब पीते रहते सुखी होने के लिए उनके ब्लड में अल्कोहल का प्रभाव पड़ जाता है और ऐसे पुरुषों के बच्चे को आंख का कैंसर होने की संभावना है अगर बेटे को नहीं हु तो बेटे के बेटे को बेटे के बेटे को 10वी पीढ़ी के बच्चे को आंख का कैंसर हो सकता है ऐसा जीव विज्ञान ने जाहिर
किया है जब बोतल की शराब 10 पीढ़ियां आंख की कैंसर की बर्बादी कर सकती है बच्चे की तो हरि नाम का कीर्तन जप करने से तुम्हारे रक्त के कण पवित्र होंगे तुम्हारे भाव पवित्र होंगे और तुम्हारी 21 पीढ़ियां आबाद हो जाए तो क्या आश्चर्य है सिगरेट पीता है एक व्यक्ति और छह आदमी कमरे में है तो उसके धुए से छह आदमी को निकोटिन पोइजन का उतना ही हानि होती है जितना पीने वाले को होती है जब सिगरेट मैं पिऊ और मेरे कुटुंबी छह मेरे कमरे में है तो उन छह की सत्यानाश कर सकता हूं तो
मैं भगवान का भजन करूं और मेरे कुटुंब हों का छह का कल्याण हो जाए उस वाइब्रेशन से तो यह भी तो इतना ही सत्य है मैं एक बार कहीं सत्संग के बाद सुबह शाम घूमने जाता हूं तो कहीं खेतों में घूमने गया तो लोग पहचान गए किसान लोग बापू बापू फ मेहरबानी जरा इधर से बापू इधर से इधर से इधर तो मैं क्या इतना हरा भरा खेत है किसका है बोले फलाने का बापू यह अपना है मैं कहा तुम्हारे खेत में तो बाढ़ है ढोर ढकड़ ना घुसे इसके खेत में वाढ क्यों नहीं है बोले
बापू य तो तंबाकू छ मारू बेटू मैं क्या तंबाकू हरा भरा तो खेत है तो तंबाकू में क्या ढोर बोर नहीं घुसते बापू गाय भैंस बकरी तो क्या बापू गाय भैंस तो नहीं आती गधा भी नहीं आता यहां तंबाकू के खेत में मेरे को याद आया एक योगी की बात योगी ने योग शक्ति देकर गधे से पूछा मिस्टर डोंकी तू तंबाकू के खेत में क्यों नहीं जाता है मिस्टर डोंकी ने कहा आई वास ए ग्रेट ऑफिसर मैं अगले जन्म में बड़ा ऑफिसर था कैप्टन सिगरेट पीता था तो तंबाकू सेवन करने से मेरा तमोगुण बढ़ गया
तो मेरे को यह गधे की योनि मिली तामसी योनि अगले जन्म में खूब सिगरेट खींचे तो अभी गधे की योनि मिली तो तंबाकू के प्रभाव से तो मैं गधा हूं अब अगर तंबाकू के खेत में जाऊंगा तो क्या हाल होगा इसलिए मैं उधर जाता ही नहीं [प्रशंसा] अभी विज्ञानियों ने प्रयोग किया 50 ग्राम तंबाकू का निकोटिन पोइजन निकालकर इंजेक्शन बनाया और कुत्ते को लगाया तीन मिनट में कुत्ता मर गया फिर दूसरा उतने का उतना 50 ग्राम तंबाकू का निकोटिन निकालकर मेडक को मला मेडक को कैंसर पकड़ा और मेडक छटपटा के मर गया ऐसी चीजें हम
खाते मजा लेने के लिए क्योंकि भीतर सुख नहीं भीतर रस नहीं आ रहा घर में मजा नहीं आता ना इतवार को या माई को घर में मजा नहीं आता तो पड़ोस के फ्लैट में जाती उधर मजा नहीं आया तो थोड़ा इधर टहलने को जाते जब घर में मजा नहीं आता है तो इधर-उधर झांकना पड़ता है ऐसे अपने दिल में मजा नहीं आता है तो फिर हे सिगरेट तू मजा दे दे हे डिस्को तू मजा दे दे हे वाइन तू मजा दे दे हे ब्रांडी तू मजा दे दे हे रॉक एंड रोल तू मजा दे दे
और उन आ भागों के पास मजा है एक शराबी पहुंचा शराब के अड्डे पर भाई साहब एक पैसे का दारू दे दे अड्डे वाला बोलता है पैसे का खून क्यों करता है एक पैसे का दारू कितना होगा एक आचमन होगी चुल्लू भर भी नहीं आएगा बोले बस इतना काफी है मैं अपने मूछों को लगाऊंगा महफिल में जा रहा हूं लोग यह समझे कि मैं पी के आता हूं पी के आया हूं नशा तो अपना होता है शराब में अगर नशा होता तो बोतलें नाचने लग जाती नशा तो अपना होता है भाई मैं अपने नशे से
ऊंगा जाम पर जाम पीने से क्या फायदा रात बेती सुबह को उतर जाएगी तू हरि नाम की प्यारिया पी ले तू निष्काम कर्म योग की प्यारिया पी ले तेरी सारी जिंदगी सुधर जाएगी अल्जेरी का टापू तुमने सुना होगा अल्जेरी वहां किसी किसी पीडब्ल्यूडी के ऑफिसर ने बंदर पाल रखा था और कांटेक्टर ने उस पीडब्ल्यूडी के ऑफिसर को भोज दिया क्योंकि रोड में जो भी कुछ चल जाए इधर उधर माल हेरा फेरी करे फिर चाहे समाज के वही कलों का अरबों रुपया बिगड़ जाए लेकिन ठेकेदार और ऑफिसर को दो पाच लाख फायदा हो जाए तो देश
का भले सत्यानाश हो ऐसा चलता है आजकल ठेकेदार ने आमंत्रित किया उस साहब को साहब खुद तो गया लेकिन अपने फ्रेंड को भी ले गया मिस्टर मंकी को भी पेग शुरू हुए सबको एक एक प्याला मिला तो दोस्त को भी एक प्याला पकड़ा दिया गया बंदर मनुष्य की नकल करता य घटित घटना है जो सब साहब ने चुस्की लेना शुरू किया त्य मंकी साहब ने भी चुस्की लिया अब मंकी साहब का खोपड़ी तो इतना अल्कोहल की हुई असम एक तो पहले ही बंदर फिर चढ़ा नशा अब खाना तो साहब लोग खा रहे लेकिन यह साहब
बड़ा परेशान व पीडब्ल्यूडी का साहब भोजन करके अपने दोस्त को ले गया घर बंदर को बंदर वहां भी खाता पीता नहीं तीन दिन तक वह भूखा रहा उसके नशे से जो कुछ उसको हानि हुई वह उसकी क्रिएट फिर उस साहब को दूसरी महफिल में कहीं जाना था और अपने दोस्त को ले गया मंकी को वहां भी पलियां बट रही थी बंदर के सामने प्याली धरी तो उसको याद था कि प्याली पी थी तो क्या हुआ था उसने मुंह मोड़ लिया देने वाले बहरे ने फिर से पी ले उसने मुंह मोड़ दिया फिर साहब ने लिया
ले पी उसने पकड़ा प्याला और उठा के साहब और और साहब के मुंह पर ऐसा तो पटका के महफिल का रंग ही बदल गया इतनी बंदर को भी अकल है कि शराब पीने से मती मारी जाती है यह अकल अगर हम लोगों के पास रहे तो कितना मजा आएगा नारायणा हरि नारायणा हरि नारायणा हरि आपको अपना रस आए ऐसा प्रयोग सीख लीजिए सुबह नींद में से उठते हैं तुरंत चाय को इधर उधर को ना जाके रात को दिन भर के कर्मों की थकान मिटाने के लिए रात को हमारा मन बुद्धि जिस पर त्मा में डूबा
था उसी परमात्मा से हमारा मन इस समय शांत और मधुर है हम उस परमात्मा को नमस्कार करते हैं चाहे तुम मुसलमान हो उसको अल्लाह बोललो हमें कोई आपत्ति नहीं है हमको अल्लाह बोलने में डर नहीं लगता तो तुमको राम बोलने में क्यों सुगाती है जय राम जी की कृष्ण बोलने में तुमको क्यों एलर्जी होती है भैया सब एक नूर ते ला इला इला जब उस मालिक के सिवा कोई नहीं है तो फिर इसको तोड़ो और उसका फर को मारो या काटो या खुदा बस्त देगा नहीं नहीं यह बात नहीं है जिसमें सबकी भलाई है उसी
में तेरी भलाई है उसी से खुदा और भगवान राजी रहता है जय राम जी की सुबह दो मिनट बिस्तर पर ही एक दो मिनट शरीर को खींचो ताकि वह जीवनी शक्ति ज्यादा आए जैसे डॉक्टर इंजेक्शन खींचता है ऐसे नींद में से उठो दो-तीन मिनट शरीर को खींचो फिर ढीला छोड़ो ताकि जहां तुम्हारा घिसा हो है शरीर को जरूरत है वहां एनर्जी सेट हो फिर दो मिनट शांत होकर बैठो श्वास भीतर जाए शांति बाहर आए गिनती और आखिरी दो मिनट जोर से हंसो आपके स्वास्थ्य को तो आनंद होगा आपके स्वास्थ्य की तो रक्षा होगी आपके मन
को प्रसन्नता मिलेगी और यह शराब कबाब और डिस्को विस्को की गुलामी भी छोड़ने में आप सफल हो जाएंगे हरि की शराब सुबह से पीना चालू कर दीजिए रात को जब आप बिस्तर पर जाते हैं तो दिन भर में जो आपने काम किए उन पर सिंहावलोकन कीजिए काम करने की सत्ता तो उसी से आई है मानो चाहे ना मान तुम्हारे हाथ पैर तो मशीन मात्र है पावर हाउस तो वह चैतन्य आत्मा है बुद्धि को भी उसी से सत्ता आई मन को भी वहां से आई और तन को भी वहां से आई हे परमेश्वर दिन भर मैंने
जो कर्म किए वह आज जो मैंने कर्म किए उसमें अभी योग नहीं था तेरी स्मृति नहीं थी मेरे को इतना रस नहीं आया मेरे कर्मों में कमी थी आज जो भी संभाल के अच्छे काम किए कल इससे भी ज्यादा बढ़िया करो अभी थोड़ा सा अच्छा करता हूं बा भाई की वासना सताती थोड़ा सा करता हूं और अहंकार उभर आता है करण करावन हार तो तुम हो लेकिन बीच में मेरा अहम घुस जाता है हे प्रभु बुरे काम तो छुप-छुप के कर लेता हूं लेकिन अच्छे काम करता हूं और दिखाने की आदत में अच्छे कामों का
मजा ही चला जाता है अब अच्छे काम तो तू देखता और बुरे भी तू देखता है कल से बुरे ना करूं और अच्छे करने में तेरा साथ और सहकार मिले ऐसी प्रभु कृपा करना छोरा क छोरा हो सकता है लेकिन मावतर कु मावतर नहीं होता है मैं तेरी शरण हूं बुद्धम शरणम गच्छामि ब शरणम गच्छामि मैं ज्ञान की शरण जाता हूं संगम शरणम गच्छामि सत्यम शरणम गच्छामि आत्मम शरणम गच्छामि या गुरुम शरणम गच्छामि है तो वही का वही गुरु का गुरु भी वही है बध स्वरूप वही है ऐसा चिंतन करते करते आप सोइए मैं कर्म
तो करता हूं लेकिन मेरे कर्मों में अभी योग की बहुत कमी है उस कमी को तेरे सिवा और कौन पूरी करेगा मैं जो काम करूं सेवा का का करू मन लगा के करूं और फल का भिखारी ना बनू फल दता तो ख्याल रखता है हम छुप के पाप करते हैं तो उसका भी फल मिलता है तो अगर शुभ कर्म करें तो उसके फल की इच्छा क्यों रखें वो अनंत गुना होकर आएगा प्रभु लेकिन इस बात का अभी मुझे ज्ञान नहीं है दाता तेरी प्रीति के लिए सेवा करो गौरांग महाप्रभु चैतन्य महाप्रभु और दूसरे ऐसे कोई
संत बैठे किसी ने कहा हम हरि बोल हरि बोल करें कीर्तन करें तो क्या फायदा होगा बाबा ने कहा यह कोई खास बनिया दिखता है सब काम पैसा कमाने के लिए होता है क्या बच्चे खेलते तो क्या फायदा मिलेगा उनको खेलते समय मेहनत होती है लेकिन खेलने में इतना रस आता है कि उनको मेहनत मेहनत नहीं दिखती ऐसे तुम कर्म को ईश्वर की प्रसन्नता के लिए खेल समझकर करो कुलीन राजकुमार की नहीं तुम कर्म को करो ना कि मजदूर की नाई एक भाई साहब जा रहे थे क्यों साहब नौकरी पर जा रहे थे बोले नहीं
नहीं मॉर्निंग वॉक लेने को जा रहा हूं कैसे हो आप ठीक है कैसा साहब आप ठीक है क्या हां देखो घूमने जा रहा हूं उसके पैरों में पायल थी चेहरे पर मुस्कान थी हृदय में प्रसन्नता थी क्यों कि मन भावन कर्म करने जा रहा है प्रसन्नता से करने जा रहा है सहज भाव से शयर करने जा रहा है वही साहब थोड़ी देर के बाद गुजरा क्यों साहब सहर करने जा रहे हो उसने सिर कूटा अरे यार क्या सैर करने ड्यूटी पर जा रहा ह माथा कूटा पैर तो वही के वही सड़क तो वही के वही
साहब तो वही का वही लेकिन अब ऑफिस में जा रहे मानो मुसीबत में जा रहे हैं यार ड्यूटी प जा रहा हूं नहीं जैसा सैर करने को जा रहे हो ऐसा ही ड्यूटी पर जाते समय तुम्हारा चित आनंद का अनुभव करें क्योंकि यह भी मेरा एक कर्म कर्तव्य है बोझा समझकर काम ना करो और जो भी कठिन काम मिले कुछ ऐसे पलाइन वादी साहब होते हैं के फाइल पर यह हमारा नहीं उस डिपार्टमेंट का उस डिपार्टमेंट के पास गए बाबा तो बोले उधर जाओ धके खिलाते क्यों कि सिग्नेचर करने में डरते कहीं फस ना जाए
और बाबा जब पैसे मिलते हैं और कुछ फाइल पर वजन पड़ता है तो फिर जरा कर लेते उस पर उसके हिस्से उसके पल्ले उसके पल्ले नहीं अपने हिस्से का काम तो आप करो कभी कभार दूसरे के हिस्से के काम में भी आप उत्साह से हाथ बटाओं आएगा और काम करने की आपकी योग्यता बढ़ेगी क्या करें काम कितना भी करे पगार तो उतना ही मिलता है फिर क्यों इतना काम करे दो घंटा काम करने वाले को भी उतना ही पगार मिलता है और हाजरी भर के भटकते रहते हैं ऐसे हरामखोर को भी उतना ही पगार मिलता
है तो बाबा जी हमें तो छ कलाक करते हैं फिर हम क्यों कस के काम करें कस के काम करोगे तो पसीने का अन्न और पसीने का धन तुम्हारे बच्चे बच्चों को और तुम्हारे मन को प्रसन्नता देगा और सही करके भागते फिरो ग तो तुम्हारा मन तुम्हारे को भूत किनाई भटका रहेगा और तुम्हारे बेटी बेटों को लवर लयों के चक्कर में सत्यानाश कर देगा यह कर्म का सिद्धांत [प्रशंसा] है तुम न्यायाधीश है तो किसी नेता के दबाव में आकर या की लालच में आकर अन्याय मत करना नहीं तो वही कर्म आपको बांधने वाला हो जाएगा
हां कोई बेगुना है तो आप न्यायाधीश और समझते तो अपने पूरे बलबूते से उसको न्याय दिलाए उसे बरी करिए लेकिन कोई खून करके आया बदमाश है और पुलिस उनसे मिल मिलाकर आप भी दे देते कि फ्री तो यह आपका कर्म आपके लिए भूजा हो जाएगा गुंडा को आप पोषण देने में सहायक बने तो आप प्रकृति के विधान के अनुसार दंडनीय हो जाएंगे डोंगरे महाराज जी कथा करते थे भागवत की कथा में डोंगरे महाराज ने कहा एक न्यायाधीश था उसके पास केस गया केस क्या गया कि कौवा बैठा था और हंस हंसिनी वहां से गुजरे रात
वासा वहां गया कौवे की दिल बेईमान हो गई हंसनी को अपना पत्नी बनाना चाहता था कैस कोर्ट में गया न्यायाधीश के पास कवा पहुंच गया कि प्लीज आप इतना काम कर दीजिए तो मैं आपको भी आपके पिता दादा के पूर्वजों के दर्शन करा दूंगा न्यायाधीश आ गए कोई छाबड़ी लेकर जाते कोई कवर लेकर जाते कवा छाबड़ी कैसे उठाया कवर कैसे ले जाए कवा ने कहा मैं तुमको बाप दादाओ का दर्शन करा दूंगा पितरों का दर्शन करा दूंगा न्यायाधीश ने कहा कि ऐसा करो कि हंसिनी को अलग जगह पर छुपा के रख के आओ और मैं
ऑर्डर दूंगा कि जिसका प्यार पक्का वह हंसिनी के पास पहले पहुंचेगा तो हंस को तो पता नहीं रहेगा तू पहले पहुंच जाएगा तो मेरे को जजमेंट देने में कोई आपत्ति नहीं है मैं कह दूंगा कि कौवा का हंसिनी से प्यार है अतः हंसिनी कौवे की ही पत्नी हो सकती है यह कायदा कहता है इस प्रकार का जजमेंट मिल गया कौवा को अब न्यायाधीश साहब कहते कि मेरे को अपना दक्षिणा के रूप में पितरों का दर्शन कराओ कवा बोलता है वेलकम सर जहां कूड़ा कर कटता और कीड़े य खत बता रहे थे कने बोला यही तुम्हारा
बाप दादा चाचा हो सकता है बोले उनकी ऐसी गति बोले जिसका पुत्र और पौत्र अन्याय की कुर्सी पर अन्याय करेगा तो उन पितरों का तो यही हाल होगा और क्या होगा लेकिन तुम न्याय की कुर्सी पर बैठकर जो गुनाहगार है उसको 302 के अथवा की सजा दे देते हो और वह मर जाता है तो आपको पाप नहीं लगता है उसको पाप कर्म से रोकने के भाव से और कर्तव्य कर्म के भाव से आपने किसी को फांसी की सजा दी आपको पाप नहीं लगेगा लेकिन किसी निर्दोष को आप किसी के दबाव में आकर अन्याय देते हैं
तो आपको कर्म का बंधन लगेगा आप व्यापारी है ग्राहक की भलाई देखकर चीज लाइए ग्राहक को मिले और ग्राहक संतुष्ट हो आप की आए चले आपके लिए कर्म कर्म योग हो जाएगा लेकिन है तो खसखस उसमें रेता मिलाकर कोई सस्ती बेच रहा आप सस्ती लाकर महंगी बेच रहे हो और खसखस खाने वाला खसखस हो जाए तो हो जाए लेकिन मेरे को रुपया मिले आपका व्यापार बंधन वाला हो जाएगा ग्राहक के रूप में ठाकुर जी की सेवा आप अगर उद्योगपति है तो यह विचार कि मेरे पास जो लेबर काम कर रहा है उसको भर पेट खाना
तो मिलता है वस्त्र तो मिलते हैं अथवा पठानी ब्याज 10 और 5का भरकर कहीं दब के तो मर तो नहीं रहा अगर ऐसी स्थिति है तो अपने तरफ से प्यार से उसको छुप के बिना ब्याज के थोड़े पैसे दीजिए और ऐसे ढंग से उसको ट्रीट करिए ताकि वह अपना घर ग्रहस्ती का गड़ा ठीक से चलाए आप अपने मजदूरों को क्या प्यार करो तो मजदूर तुम्हारे काम को प्यार करेंगे भोजन करें तो चबा चबा के करें स्नान करें तो रगड़ रगड़ के करें बात करें तो विचार करके करें आप जिनसे बात करते हैं वे मनुष्य है
रोबट नहीं है वे कोई मशीन नहीं है जो दूसरों के मन का ख्याल करके नहीं व्यवहार करता व व्यवहार में विफल हो जाएगा जय राम जी की जो दूसरों के मन का ख्याल करके व्यवहार नहीं करता वह व्यवहार में विफल हो जाएगा और जो दूसरों के मन का ख्याल करके दूसरे के मन को संभालता हुआ वर करता है वह चाहे छोटे से छोटा आदमी है फिर भी बड़े से बड़े व्यवहार करने में सफल हो जाएगा जो सेवा कार्य करने के लिए निकलते हैं जो सचमुच सेवा का मूल्य जानते हैं वह तो तत्परता से सेवा खोज
लेते हैं लेकिन कुछ ऐसे लोग हैं कि सेवा के बिल्ले लेकर खूब वट मारते घूमेंगे बाहर से तो देखेंगे वह सेवा सेवा लेकिन अंदर से उनको वोह आनंद नहीं आता है जो सेवा खोजने वाले सेवक को सेवा करने से जो आनंद आता है वो खा वट करने वाले को नहीं आता जरूरी नहीं है कि जिन्होंने सेवा की वे सारे के सारे मंच पर फुहारा अर्पण करने को पहुंच गए होंगे नहीं यह जरूरी नहीं कि जो सेवा करते सबके पास बिल्ले होंगे संभव नहीं है लेकिन जिन्होंने भी सेवा की होगी इस देवी यज्ञ में उनके अंतर
आत्मा ने तो देखा होगा जिन्होंने कुछ भी किया होगा इस देवी कार्य के लिए चाहे उनको मैंने कुछ ना धन्यवाद दिया किसी ने शाबाश नहीं दी लेकिन उनका निष्काम कर्म होगा तो उनका अतरा आत्मा उनको संतोष देता होगा और दिखाव होगी तो अंतरा आत्मा खोखला होगा बिल्कुल सच्ची बात है दिखावे से कुछ नहीं मिलता जितना तुम बिना दिखावे के उसको संतुष्ट करते हो सेवा करते हो कोई के उत्साह के लिए आप दिखावे का अवसर मिलता है करो थोड़ा दिखावे में आओ लेकिन आपका लक्ष्य होना चाहिए कि अंतर आत्मा संतुष्ट हो मेरा कर्म कर्म योग बने
प्रभु की प्रसन्नता ग हार पहरान के बहाने मुझे सत्संग मिला मैंने पहरा मुझे बाबा जी ने प्रसाद दिया वाह ऐसा करके आप करते हो तो आनंद है लेकिन इधर से उधर से झूठ कपट दक दबाव करके लोगों के सामने हार पहना और फिर कैची चलती रही तो वो हार पैराना भी किस काम का और हार पहनना भी किस काम का तेरा तो अहम हार जाए तेरा तो पाप हार जाए और परमात्मा की जीत हो जाए तो ये भला [प्रशंसा] मिली हुई सेवा में मिले हुए कर्म में आसक्ति और अहंकार छोड़कर तत्परता से करते हो तो
वह कर्म आपके लिए कर्म बंधन काटने वाला हो जाता है एक होता है शर दूसरा होता है अक्षर शरीर और यह वस्तुएं क्षर है लेकिन तुम्हारा आत्मा परमेश्वर अक्षर है वो क्षर होने वाला नष्ट होने वाला नहीं है उसकी प्रीति के लिए उसका स्मरण करते हुए आप कर्म करो एक मंत्र दूसरी एकाग्रता तीसरी श्रद्धा और चौथा संयम वीणा की तार कहे कि मैं क्यों बंधी रहूं क्यों संयत रहू मैं तो बेपरवाह रहूंगी तो उस तार से गीत नहीं गूंज वीणा की तार से गीत गजाने होंगे तो उसके दो दोनों छेड़े संयत होंगे तभी वीणा की
तार से गीत छिड़ नदी कहे मैं दो किनारों के बंधन में क्यों रहूं इधर आए उधर आए घूमू फिरू मज करू तोव नदी सागर तक नहीं पहुंचेगी और कई गांवों को बर्बाद कर देगी जो कैनाल या नदी किनारों की मर्यादा में संयम में जीती है वह गांव को हरा भरा करती है और वह नदी गंगा सागर तक पहुंच जाती है ऐसे जीवन में सदाचार और संयम के दो किनारे छूकर जो चलता है वह जीवनदाता तक पहुंचता है और जो उछलकर है व भटक जाता है बाप कहे मैं क्यों बंधी र हूं बॉयलर में मैं तो
यूं ही घूमू तो तेरी कोई कीमत नहीं रहेगी बाप अगर बॉयलर में है संयत है तो हजारों पैसेंजर को यहां से उठाकर दिल्ली और दिल्ली से उठाकर कहीं का कहीं पहुंचा देती माशप संयत है तो हजारों टन वजन खींचने की ताकत ऐसे ही तुम्हारा मन और विचार संयत है तो तुम संसार सागर से पार होने का सामर्थ्य पाकर मुक्त हो सकते हो इसलिए अपने जीवन में थोड़ा संयम भी होना चाहिए कुछ ब्रेक भी होनी चाहिए बिना ब्रेक के साइकिल का जो हाल होता है ऐसे बिना संयम के मनुष्य का हाल हो जाता है विदेश में
यह बुरा हाल हो रहा है अपना अपना कर्तव्य करो यह समाज रूपी ईश्वर की पूजा है हम बुहारी से कर रहे हैं शबरी भीलन गुरु के आश्रम में आने वाले लोग उनको कहीं कचरा ना दिखे बुहारी लगा रही मां घर में बुहारी लगा रही है और हरिजन महिला फुटपाथ पर बुहारी लगा रही है वो बुहा लगा रही है और अपनी नौकरी समझकर ईमानदारी से करती है उसकी वो ड्यूटी हो गई व अपना कर्तव्य कर रही धर्म कर रही है मां बुहारी लगा रही वह सेवा धर्म कर रही है लेकिन शबरी बिलन बुहारी लगा रही भगवान
की प्रीति के लिए वोह पूजा कर रही है बुहारी से भी भगवान की पूजा हो सकती है रसोई से भी भगवान की पूजा हो सकती है अरे युद्ध से भी भगवान की पूजा हो सकती है हनुमान ने की अपना स्वार्थ छोड़कर ईश्वर की प्रीति के लिए आप करने योग्य कर्म करते हैं तो आपका कर्म बंधन से मुक्ति दिलाने वाला हो जाता है लेकिन आप करते हैं अच्छा लगेगा और मौका मिले तो नियत बद्ध रोटी रद नियत साफ करके कर्म करते हैं तो आप बहुत ऊंचे उठते हैं फिर आपको यूं करके करना नहीं पड़ेगा आपके पीछे
घूमेगी वस्तु में आपके पीछे घूमेगा धन धिक्कार है उन अप्सराओं को यक्ष और गंधर्व को और उ देवताओं को जो तुम्हारी सेवा में हाजिर ना हो जाए और दूसरों को प्रेरित ना कर दे ऐसे यक्ष गंधर्व किन्नरों को अधिकार है आप अपना कर्म योग किए फिर आपको जो जरूरत है अपने आप आपको ढूंढे गी इसका मैंने प्रत्यक्ष किया है इसलिए मैं दावे से बोलता हूं एक बार नहीं तीन-तीन बार में सब कुछ यमुना जी हो एक बार तो मैं सब कुछ फेंक दिया और जिसको गर्ज होगी आएगा सृष्टिकर्ता खुद लाएगा और उस बेचारे ने भेजे
उस प्यारे ने भेजा खिलाने वाले को भेजा और हमने खाया ऐसा एक बार नहीं तीन-तीन बार हमने करके देखा घोर जंगल में जहां कोई पहचानने वाला आदमी ना मिले वहां भी हम अपना कर्तव्य करते फिर हमको रोटी के लिए किसी का मुंह देखना पड़े नहीं हम यहीं बैठेंगे तेरे को गर्ज होगी तो खिलाएगा इस घोर जंगल में और प्रभात का सूर्य उधर उदय होता है और दो आदमी के रूप में ना जाने किसको प्रेरित किया वो दो आए फल दूध लेकर महाराज लो मैं क्या इस घोर जंगल में तुम कहां से आए बोले रात को
3:00 बजे स्वपना आया और तीन माइल दूर हमारा गांव है इस जंगल में तो कोई आता नहीं मैंने कहा किसी के लिए लाया होगा कोई साधु के लिए बोले साधु वाधू नहीं तुम्हारे लिए हमको प्रेरणा हुई मैंने सोचा कि मां बाप कुटुंब यों ने भी इतनी चिंता नहीं की जितनी चिंता तू रखता है अभी तो मैंने नियम पूरा नहीं किया और नाश्ता हाजिर है फल और दूध का नाश्ता हाजिर है वो लोग बोलते हैं तुमको गांव ले चलेंगे वाजते गाते महाराज हम रहने की और तुम्हारे भजन की व्यवस्था करेंगे मैंने उनको समझा बुझा जाके रवाना
किया धरती पे लिख दिया जोगी तो रमता भला वहां से भागे फिर दूसरी जगह बैठो जानबूझ के ऐसी जगह बैठे के कोई कोई आदमी पहचाने नहीं देखे नहीं फिर देखो देता है कि नहीं देता उसने दिया खिलाया और अभी तक मैं जिंदा हूं आप ईश्वर के काम आ जाए और आपको रोजी रोटी नहीं मिलेगी अरे एक साहब के काम आता है पटा वाला तो उसको भी मिलता है पटा वाला के काम कुत्ता आता है तो उस कुत्ता को भी मिलता है तो क्या तुम भगवान का सनातन तुम्हारे को रोजी रोटी की इतनी फिकर लगी मुर्दे
को प्रभु देत है कपड़ा लकड़ा आग जिंदा नर चिंता करे उसके बड़े अभग उसका मतलब यह नहीं कि आप नौकरी करो और साहब पगार के दिन आप पगार लेने ना जाओ ऐसा मैं नहीं कहता हूं अगर कहूंगा तभी आप ऐसा करने वाले भी नहीं है जय राम जी की लेकिन आप पेट के लिए नौकरी धंधा करते आठ घंटा कुछ तो निष्काम कम भी करिए सेवा भाव से करिए ईश्वर की प्रीति के लिए करिए स्वार्थ छोड़कर करिए अहंकार को पोछने की भावना या मेरा नाम हो मैं आ गया हूं कई संस्थाओं में आगे आने के लिए
वाहवाही के भूत के लिए उनकी कार्य योग्यता ही मर जाती है वो बोले मैं बड़ा वो बोले मैं बड़ा वो बोले मैं बड़ा आई आउट यू आउट हु विल कैरी डर्ट आउट वो बोले मैं क्लोज हो जाऊं वो बोले मैं क्लोज हो जाऊं मैं क्लोज अरे तू सच्चा क्लोज तो भीतर ही होगा चाहे फिर रा नाम आए ना आए तेरे को कोई देखे ना देखे लेकिन तू क्लोज होना चाहता है तो निष्काम होता जा राजा की सवारी जा रही थी सड़कों पर भीड़ खड़ी थी एक बेटे ने मां को कहा कि मां मुझे राजा से
मिलना है बेटा तेरा बाप बचपन में तुझे छोड़ गया एक विधवा अबला मेरी कहां पहचान राजा से मिला मां मुझे राजा से ही मिलना मां ने थोड़ी शांति से जरा आईडिया लगाई बेटा तू राजा से मिलना चाहता है एक युक्ति है राजा का महल बन रहा है वहां दिन भर लोग काम करते हैं उनको रोटी मिलती है और हफ्ते हफ्ते में उनको पगार मिलता है पेट भरने के लिए तो शरीर की रक्षा के लिए रोटी तो खा लेना जब पगार देने को आए मंत्री मत लेना बस इतना कहना कि राजा साहब का काम है राजा
तो हमारे हैं हम उनका काम करते इसमें क्या बड़ी बात है इतना कह देना लड़के ने एक हफ्ता दो हफ्ता मंत्री को ऐसा सुना दिया मंत्री ने जाकर राजा से बात किया राजा ने कहा अच्छा ऐसा लड़का पैसे नहीं लेता बोले काम बड़ा तत्परता से करता है ऐसा नहीं कि आलसी है या रोटी खाने के लिए आया वो काम करने के लिए ही आया है लेकिन पैसा नहीं लेता तत्परता से काम करता है और काम करने में उसको एक खुशी आती है आनंद आता है पहले तो मजदूर जैसा काम करता था लेकिन अब तो कारीगर
के साथ इतना तत्पर हुआ कि कारीगर भी उसको स्नेह करता और कारीगरी भी थोड़ी सीख गया है जो उत्साह से स्नेह से काम करते हैं वह बहुत आगे आ जाते हैं अच्छा तो उस लड़के को यहां ले आओ लड़के लड़के का निष्काम कर्म योग हो गया प्रसन्नता थी निस्वार्थ होता थी राजा से बातचीत हुई राजा का मन पिघला राजा ने कहा इसको मैं अपना महल में सेवा में रखता हूं महल की सेवा में रख गया अब महल में रहने को मिल गया और रोज राजा को देखता है रानी को देखता है बड़ा खुश हो रहा
है और मां ने कैसी आईडिया दी मैं एक अबला विधवा और राजा से तेरे को बेटा कैसे मिला सकती हूं फिर भी मां की युक्ति ने निष्काम कर्म की आईडिया दी वो रोज राजा से मिलता है अरे राजा से मिलने की इच्छा रखने वाले को भी मिलाने में पहले इसका हाथ चाहिए कुछ दिन बीते कुछ महीने बीते कुछ समय बीता लड़के की असाधारण योग्यता निष्काम भावना से उसकी योग्यता आत्मशक्ति निखरती गई राजा रानी का मन जीत लिया उसने मस्का लगा के नहीं दिखा दिखा के नहीं तत्परता से सेवा करने के लिए सेवा करता था उसमें
अपना प्राण रटता था उसमें अपना जी जी सीखता था अपने आप के प्रेम को सीखता था उसका सेवा कार्य चमक निकलता था एक दिन राजा ने रानी को कहा कि हम इस बेटे को गोद लेर तो कैसा रहेगा रानी बोलती है कि मेरे मन में तो कब से आ रहा था लेकिन संकोच के कारण नहीं बोल रही थी अपना जाया भी इतना तो आदर नहीं करता अपना जाया भी इतना तो सेवा नहीं करता है ये किसी श्रेष्ठ माई की औलाद है इसका बाप भी नहीं है तो आप इसको पुत्र रूप में ले लेंगे मेरा तो
बेटा होगा मैं तो बड़ी प्रसन्न हूं बेटे को गोद ले लिया समय जाते उसका राज तिलक हुआ और कीर्त शोभा यात्रा निकली उस भीड़ में वोह बूढ़ी मां लकड़ी टकती हुई देखती है कि राजा नया राजा कौन सा बनाए लड़के ने कहा राजा साहब जिस मां ने आपसे मेरे को मिलाया है वो मां खड़ी है मैं उसके चरणों में मथा टेक के आऊ राजा बोलता है कि जिस मां ने ऐसा निष्काम कर्म योगी पैदा किया उस मां के तू अकेला पैर क्यों छुए पागल मैं भी चलता हूं उस देवी के पैर छुए बच्चों को सिखाओ
पड़ोस का बूढ़ा बुजुर्ग है जाओ बेटे उनकी थोड़ी सेवा करो और बच्चे सेवा में उत्साही होते हैं रवि शंकर महाराज गांधी के शिष्य कहीं अकाल पड़ा वह अन्न वस्त्र एकत्रित करने के लिए सूरत के इलाके में आए लोगों ने कोई खास एक जगह पर भाषण किया बस भाषण हो गया बड़े-बड़े सेठ को तो नाम चाहिए वह ऐसे क्यों देंगे चुपचाप पर वो संत के पास देंगे तो नाम होने वाला नहीं उधर तो असली काम होने वाला है ऐसे सेठों को अकल भी नहीं थी तो रविशंकर महाराज थोड़े उदास हो गए सेठों की मीटिंग में कोई
हारू जोई कर मीटिंग लाश टाल टोल के चले गए रविशंकर महाराज का दिल उदास हो गया वह गए किसी स्कूल में स्कूल में गए और बाहर से इतने लोग पीड़ित हैं और वे भी मनुष्य हैं हमारे देश के हैं बेचार को खाने तक का नहीं ऐसा कहा बच्चों का हृदय पिघल गया एक बच्चा चालू लेक्चर में उठा आंखों को पहुंचते हुए बोले साहेब थोड़ी बार में आऊ छ वो गया और कितने कपड़े ले आया थोड़ा अनाज की दो थैलियां भर के ले आया बस उस लड़के को देखकर सब बंदर कीना कूदते कूदते अपने मां-बाप को
बोला के ऐसा काल पड़ा हमको कुछ दीजिए अपनी खर्ची के पैसे अपने कोई पुराने कपड़े का अपनी जोड़ी बच्चों ने ऐसा ढेर लगा दिया कि कहलाने वाले जो सेठ लोग थे बाह भाई के बिना एक रुपया नहीं खोलते थे उनकी जेबें भी खुलने लग गए रविशंकर महाराज का वो सेवा का कार्य ऐसा चमका कि महाराज लोग को तृप्ति हो गई निर्दोष हद अपना क्या बेटा क्यों देता है विवेकानंद छोटे थे देखते गरीब गुरब को चुपके से उसको दे आती मां बोलती मैं टोक नहीं और दे दे लेकिन ऐसा नहीं कि गरीब गुरब का रूप लेकर
बंबई में कोई ठग घूमते हो और आपके बेटे देते ही जाए इस बात पर भी मेरा विश्वास नहीं है जय राम जी की दन शलता सहनशीलता उद्योग शलता और निष्काम ता यह चार गुण चाहे किसी भी व्यक्ति में हो छोटे से छोटे व्यक्ति में वो एक दिन महान से महान बनक ही रहेगा य प्रकृति का अकाट्य नियम है और चिंता जलसी आलस्य प्रमाद अपने कर्तव्य में लापरवाही वह चाहे कितना भी बड़ा आदमी हो छोटा होता जाएगा बैठा दो ये बकरियों उभा दोय ऊंट जेव वायरो दे पठ जैसे हवा लगे इस प्रकार का कर्म करना चाहिए
तत्परता से करना चाहिए मनोयोग से काम करना चाहिए सत्संग सुने तो बस श्रोता बन जाए सत्संग करते हैं तो ऐसा वक्ता मिल जाए कि एक एक श्रोता का हित कैसे हो सभा में छोटी से छोटी अकल वाला छोटी से छोटी व्यक्ति छोटी से छोटी परिस्थिति वाले को भी लाभ हो और बड़े से बड़ी अकल बड़े से बड़ी परिस्थिति बड़े से बड़ा इंडस्ट्रियल हो उसको भी लाभ हो ऐसा ख्याल करके अगर बोलता है तो वह संतवाणी है हित के भावना से बोलता है तो संतवानी श्री कृष्ण संतों के संत है ऐसा बोले हैं कि छोटे से
छोटे आदमी को भी काम आए बड़े से बड़े आदमी को भी काम आए और सर्वांगी कार्य युद्ध के मैदान में श्री कृष्ण ने तंदुरुस्ती की बात बोलना भी नहीं भूली कहां तो दोनों सेना में एक दूसरे के लोह के प्यासे हाथी चिंगार रहे हैं घोरे हुंकार रहे हैं और प्रतिशोध की आग से बस हथ्यार तप तपाए हुए हैं ऐसे मौके पर भी कृष्ण ने जो कर्म योग का उपदेश दिया ध्यान योग भक्ति योग का दिया स्वास्थ्य की बात भी कृष्ण ने नहीं छोड़ी कितनी होगी कृष्ण की समझ और करुणा युक्ता हार विहारस्य कृष्ण कहते हैं
जब युद्ध के मैदान में कृष्ण तंदुरुस्ती की बात को नहीं भूलते तो मैं सत्संग के मैदान में कभी तंदुरुस्ती की बात बोल दिया तो क्या घाटा किया जय राम जी बोलना चाहिए हमारा धर्म एकांगी नहीं है वन में ट्रैफिक नहीं है भारतीय धर्म यह तो बहु आयामी है बहुत सारी व्यवस्था इसमें आपके बच्चों को और आपके मित्रों को भगवान के नाम की माला घुमाने का थोड़ा संस्कार डालो फ उठाते हो हाय बाय करते हो उसकी अपेक्षा हरि ओम करके बोलो तो आपके फिजिकल शरीर को तो फायदा होगा मन को भी फायदा होगा भगवान की भक्ति
भी होगी और सुनने वाले को भी पुण्य होगा आज से आप दक्षिणा में यह वचन दे दो हाय बाय की जगह पर हरि ओम बोलना शुरू कर देते हैं आए किसी का फन हरि ओम तो वह भी सुनेगा कि है कोई सत्संग वो भी बदले में हरि ओम बोलेगा फुल यागा एक मुसलमान लड़का गौरांग के कीर्तन में इतना तो रंग गया कि हरि बोल हरि बोल में वह तो रंग गया आखिर उसने चैतन्य महाप्रभु से दीक्षा ली और अपना नाम उसने हिंदू नाम रख दिया मेरा नाम हरिदास हरिदास हरि कीर्तन करता और कई युवकों को
हरि नाम में झु माता है हरि नाम का प्रभाव कुछ ऐसा है चित्त पावन होने लगता है जब यह गोराई काजी तक बात पहुंची वो नरो माइंड था उस मुसलमान युवक को बुलाकर धाक धमकी दिया कि तू अपने मजहब का प्रचार कर इन काफिरों के चक्कर में क्यों आता है बोले कौन सा उन्होंने कुफर किया कौन सा कर ज्यादा बात मत कर अगर तू आ जाता है तो ठीक है नहीं तो तेरे पर मुख दमा बाजी होगी उसने कहा चाहे मेरा शरीर कट जाए अंग अंग काट दो लेकिन हरि नाम तो नहीं छोड़ सकता हूं
गोराय का जीी ने अपना सत्ता का दुरुपयोग करके उसके ऊपर मुकदमा जारी कर दिया पेशी पड़ी मुल्क पति नाम के न्यायाधीश के सामने उसको कठघरे में खड़ा रहना पड़ा तब वह मुसलमान लड़का कहता कि हिंदू कोई मुसलमान बन जाता है तो उसको इतना जुल्म करके हिंदू जाति वाले वापस तो नहीं खींचते अगर मैं हिंदू मजहब में चला गया तो आप मेरे पर इतना क्यों नाराज होते हैं मुल्क पति उसकी नम्र और तर्क संगत बात सुनकर थोड़ा सा ढीला हुआ लेकिन गोराय का जी ने मुल्क पति न्यायाधीश पर दबाव डाला और मुल्क पति न्यायाधीश ने जजमेंट
दिया कि या तो कलमा पढ़ ले और हरि बोलनाथ छोड़ देने का प्रॉमिस करले या तो तुझे बैत लगाते लगाते पुलिया गांव की 22 बाजारों से घुमाया जाएगा और अंत में गंगा में फेंका जाएगा उसने कहा भगवान का नाम लेते लेते अगर बेत पढ़ते हैं और मरना पड़ता तो मैं मर जाऊंगा लेकिन सत्य को छोड़कर मुझे जीने की जरूरत नहीं है मैं स्वधर्म में मरना कबूल करता हूं जिस धर्म में मुझे रस आ रहा है आनंद आ रहा है और शास्त्र सम्मत है वह मेरा स्वधर्म है शास्त्र सम्मत जो आपको रस आ रहा है वह
आपका स्वधर्म है काजी ने जुल्म का आश्रय लेकर उसको मृत्युदंड सुनाया और आदेश हो गया बैत मारते जाओ पुलिस के लोग हुकुम के बंदे बेचारे उन्होंने मुसलमान लड़का जो हरिदास बना था घुमा घुमा के बैत मारा हरिदास कहता है कि प्यार से एक बार हरि बोल बोले हम हरि बोले हमको हरि बुलवा है हरि बोल हरि बोल ले हमको तेरे जैसा बनना हैगा हरि बोल हरि बोल आया ये ले हरि बोल बोले कोई बात नहीं एक और सही लेकिन फिर से हरि बोलो हम फिर से हरि बोले हरि बोल हरि बोल फिर से हरि बुलता
है हरि बुलता है हरि बोल हरि बोल बढा आया ले अब वह समझता है कि इनको तो ऑर्डर है मारेंगे अब रो रो के क्यों बैत खाना इससे तो हरी बुलवा बुलवा खाओ फिर एक एक बेत पढ़ता फिर से कहता कि ब एक और भी मारो लेकिन हरि बोलो बोले हम हरि बोले हरि बोले बड़ा आया हरि बोल हरि बोल ये ले उसके शरीर पर तो बैतो के निशान है लेकिन आंखों पर कुछ नूरानी नूर की चमक है पुलिस ऑफिसर ने पूछा पीएसआई ने पूछा थानेदार ने पूछा हरिदास यह इसरार समझ में नहीं आता कि
तुझे बैत लग रहे और तेरी आंखों में चमक है हरि बोल हरि बोल फिर से करवा रहा है क्या है इस में रहस्य क्या है बोले वेद तो ऐसे ही लगने वाले मृत्युदंड न्यायाधीश ने बोल दिया है फिर मैं हरि बुलवा बुलवा के खा लेता हूं तो मुझे गुरु का ज्ञान याद आता है कि वेद शरीर को लगता है मुझे हरिम आत्मा को चैतन्य को कुछ नहीं होता और हरि बोल हरि बोल करवाता हूं तो मैं बोलता हूं हरि बोल आपके आदमी बोलते हम हरि बोले हरि बोले हां हरि बोले इस माने निषेध उक्ति से
भी कई बार हरि बोल लेते तो देर सवेर इन मिया भाइयों का भी कल्याण होगा इस बात की खुशी में मैं बोलता हूं भारत का फुलिया गांव का युवक बैत खाते हुए भी हरि नाम बोलता और बुलवा है तो तुम रोटी सब्जी और आइसक्रीम और मजा से जीते हुए भी हरि बोले या फोन करते हुए हरि बोले या बुलवाएं नहीं है इसलिए आज से प्रण कर ले कि जब भी फोन आए तो हरि ओम हरि ओम आप हरि ओम हरि ओम करेंगे बच्चों को आदत पड़ेगी और आपके घर में भक्ति योग का साम्राज्य आ जाएगा
कलयुग का प्रभाव आपके घर से चला जाए जो लोग सत्संग सुनते हैं जो लोग ऐसे मीर ऐसी लगी लगन मीरा हो गई मगन वो तो गली गली हरि गुन गाने लगी यह सुनते तो 50 50 100 रप की टिकट देना पड़ता है और हमने तुमको 10 10 सुनाए आज गवा होगा तो बताओ कितने की टिकट होनी चाहिए आप लोगों को जय राम जी की तो दक्षिणा देना यहां टिकट नहीं होती दक्षिणा होता है दक्षिणा देना तुम्हारा कर्तव्य है मुफत का माल पचता नहीं है जय राम जी की तैयार रहना मुफत का माल पचता नहीं दक्षिणा
देना तुम्हारा नैतिक कर्तव्य मोरली कर्तव्य है और दक्षिणा लेना मेरा अधिकार है तैयार हो जाओ भांजे खिसकना मत दक्षिणा देने की तैयारी करो और दक्षिणा में पर्स पकेट मत संभालो कम से कम एक इतना वचन दे दो कि हम फोन बोन में आज से हेलो फलो नहीं हरि ओम बोलेंगे इतना वचन दे दो हमें दक्षिणा मिल गई नारायण हरि नारायण हरि अना शिता कर्म फलम अना शिता कर्म फलम कार्यम कर्म करोति कार्यम कर्म करोति स सन्यासी च योगी च स सन्यासी च योगी च न निराग निचा क्रिया नीरा निर चक्रिया हरि ओम [संगीत] हरि हरि
[संगीत] ओम हरि सम जग कछु वस्तु नहीं हरि सम जग कछु वस्तु नहीं प्रेम पंथ सम पंथ प्रेम पंथ सम पंथ सतगुरु सम सज्जन नहीं सतगुरु सज्जन नहीं गीता सम नहीं ग्रंथ गीता सम नहीं ग्रंथ हरि हरि [संगीत] ओ एकाएक दुर्घटना घटी मां मर गई एक सुंदर सुकुमारी को छोड़कर बाप अब्बास खान अकबर का सेनापति [संगीत] है वो अब्बास खा इतना तत्परता से काम करता है कि हुमायूं और बाबर को भी उसने मौत के मुंह से बचाया था अब्बास खान अकबर के कहने से लड़ाई करने गया और मर गया [संगीत] यति हमीदा जितनी खूबसूरत थी
उतनी वह कवित्री भी थी अकबर की नजर उस पर टिकी अकबर ने अपने राय वृंदावन [संगीत] दास की पुत्री लीलावती और बीरबल की पुत्री शोभावती उस अब्बास खान की पुत्री हमीदा के साथ कभी कभ मिलती थी हमीदा को पटा पटा के खूबसूरती के कारण अकबर ने उसको अपनी औरत बना रखी और कहा कि तू मेरे दिल की ताज है वास्तव में वह ताज थी कबीर के दिल की ताज नहीं सौंदर्य में और कवित में तो वह ताज थी और संग करने में भी वोह ताज थी हमीदा हमीदा का नाम ताज के नाम से लोक लेने
लगे शोभावती और लीलावती का संग था उस ताज को शोभावती और लीलावती संत विट्ठल दास के सत्संग में जाया करती थी ऐसी सत्संगी बच्चियों का संग मिला था उस अनाथ कन्या को जैसा संग ऐसा रंग अकबर के उस प्रोग्राम में विलासी प्रोग्राम में जीने वाली ताज का मन कुछ संत विट्ठल दास की बातें भी स्मरण कर लिया करता था और कभी कभार हे कृष्णा हे गोविंद हे गुरु बोल दिया करता था मंत्र की लीला कहो प्रभु की लीला कहो प्रभाव कहो सत्संगी बेटियों का प्रभाव कहो शोभावती के संग का प्रभाव कहो ताज को भगवान कृष्ण
के प्रति और गुरु के प्रति थ श्रद्धा जग समझो जिसका मंगल होने वाला है उसको भगवान और संतों के प्रति श्रद्धा जगती है और जिसको घोर नर को में पड़ना है उसको शराब और कबाब और बदमाशी में रुचि होती है बिल्कुल य अकाट्य सिद्धांत [प्रशंसा] है स्त्री जात चाहती है कि पति मेरे कहने में चले मेरे तरफ देखे मेरी माने यह स्त्री की मांग होती है जय राम जी की ओ के ऊप है व तो अब बहुत सारी स्त्रिया थी अकबर की तो हर हर औरत के मन में होता है कि मेरा विशेष मान विशेष
प्रभाव ताज ने भी अपनी सहेलियों को कहा कि कुछ भी करो मुझे विट्ठल दास संत से एक ताबीज ला दो वैसा तावीज पहनू के अकबर मेरे ही कंट्रोल मेरे ही हो रहे हैं उन्होने तावीज लाकर दिया लेकिन इस सोतों के बीच कोई ताबीज पहन के घूमे तो दूसरी सोते चुप कैसे रह सकती है और खबर लगाए बिना कैसे बैठ सकती उन्होंने खबर लगा दी कि किस बात का ताबीज है तो फिर तो और स्त्रियों को मौका मिल गया अकबर को भड़काने का ऐसा भड़काया कि जोधाबाई जो हिंदू रानी थी उसको भी इस ताज के तावीज
ने टकाव पैदा कर दिया और अकबर को बराबर झक झोड़ दिया अकबर आया ताज के महल में बातचीत करते करते अनजान होकर उसने पूछा यह क्या है बोले इसको छोड़िए आप नहीं यह तो मेरी सौगात है ये है नहीं बता जब वो कुछ नहीं बता रहे थे अकबर ने बल का उपयोग करके उसके गले का ताबीज छीन लिया ताबीज खोला और उसकी चिट्ठी पड़ा अकबर दंग रह गया मुल्ला मौलवी तो ताबीज में टूना फना टोटका करके देते पति वश करने की विद्या लेकिन उस विट्ठल दास संत ने पति को वश करने की विद्या टूना टूटका
का सहारा नहीं लिया सत्य का उपदेश लिख लिया चिठी में लिखा था कि टूना फना टोटका सभी धोए पिया कहे त कीजिए आपे ही पति वश होए आप महिलाएं मत बजाओ चलेगा आदमी लोग जरूर बजाएंगे टूना फुना टोटका सभी दीजे धोए पिया कहे तू कीजिए आपे ही वश होए हिंदू संतों में कपट को पोचने की बात नहीं है सच्चाई को हालांकि मेरी औरत उनकी भक्त है तो मैं उनका हरीफ हुआ फिर भी उन्होंने अपने ह के प्रति भी टूना टोटका नहीं किया है हरीफ की भी भलाई चाहते हैं ऐसे संतों को मैं नमस्कार करता हूं
ताज ने मौका देखा जब आप नमस्कार करते तो आप एक बार चलिए मेरे गुरु जी के दर्शन करने को अकबर को ले गई अकबर प्रभावित हुए ताज ने अकबर को सहमत कर लिया कि मैं इनसे मंत्र दीक्षा लेना चाहती हूं अकबर ने मजहब बजब की थोड़ी गड़बड़ बताई लेकिन ताज दृढ़ रही अकबर ने कहा कोई बात नहीं ताज ने मंत्र दीक्षा ली मंत्र दीक्षा लेने से ताज की जो सूक्ष्म शक्तियां थी मूलाधार केंद्र स्वाधिष्ठान केंद्र डेवलप हुए और वैदिक मंत्र में तो य डेवलप करने की तो व्यवस्था है ताज को भगवान कृष्ण का वह जो
भोग म जो भोग भवन था वह भक्ति भवन हो गया जहां भोग विलास वहां भगवान का वास कर दिया उसने अब तो तुलसी का दल लगाकर भगवान को भोजन लगा भोग लगाती और वो खाती उसकी बुद्धि शुद्ध होने लगी अब तो अकबर मेरे वश हो या अकबर मेरे तरफ ही देखता रहे या एक दूसरे के चमड़े चाट कर हम एक दूसरे को नरक में ले जाए ऐसी उसकी दुर्बुद्धि चली गई सुबुद्धि उसकी प्रकट हुई कि एक दूसरे की आत्मा का उद्धार हो एक दूसरे की रूहानियत की यात्रा हो उस ताज की मती दैविक मति हो
गई अकबर के तरफ उसका वह आकर्षण नहीं रहा युवानी का वह अंधा काम का मंद मद बदल के राम के रस में आ गया अब अकबर के साथ कभी कभार जीती है लेकिन अकबर को सेक्सी कंपनी ज्यादा नहीं देती तो अकबर भी उधर ध्यान नहीं देता है व सोचते इससे मेरी भी रक्षा उनकी भी रक्षा समय बीतता गया वो अकेले अकेले चौरस खेलती है अकेली कैसे खेलू हे मेरे गोकुल गिरधारी हे नंद नंदन यशोदा नंदन तू आजा ऐसा करते करते एक हाथ कृष्ण का और एक हाथ अपना चौरस खेलती है 24 घंटे बैठे महल में
क्या करें एक हाथ भगवान का और एक हाथ अपना ऐसा खेलते खेलते उसकी भक्ति दृढ़ हो गई और कभी कभार व लाला उसको कंपनी देने को आ जाता था जय राम जी एक दिन ता ने कहा कि यह कैसे तुम भगवान कि औरत के हाथ से जब आते हो और हार के चले जाते हो लाला ने कहा अहम भक्तो पराध ना मैं अपने प्यारे भक्तों के आगे हार कर भी उनकी जीत देखकर मुझे बड़ा आनंद आता है मर्द का और औरत का मिश्रित आवाज सुनकर अकबर मिलने आ रहा था और आवाज सुना अकबर रुष्ट हो
गए जोर से दरवाजा पटका क्या तेरे को छूट छाट दी तो उसका यह नतीजा कौन से मर्द को कौन से प्रेमी को छुपा कर तु मैं जानता हूं पिछले कितने ही वर्षों से तुम मेरे तरफ से उदासी हो गई हो अब मुझे पता चला तू किसी और गैर पुरुष के साथ नहीं नहीं मैं गैर पुरुष के साथ नहीं जो सबका पुरुष है उस पुरुषोत्तम के साथ खेलती हूं कौन सबका पुरुषोत्तम मेरा बांका बिहारी कृष्ण क्या कृष्ण तेरे साथ आता है खेलने को हां आता है इसका प्रमाण ताज बोले सच्चे भाव से प्रार्थना करो तो मेरा
कन्हैया आपको पचा देगा अकबर कहता है कि हे कृष्ण अगर ताज की बात सत्य है तो इस दास को कोई परचा दो ये बुझा राख जल जाए तो मैं मानूंगा कि ताज की भक्ति सच्ची है और तुम्हारा आगमन और तुम्हारा बात सच्चा है और कोई मर्द नहीं तुम ही मर्दों के मर्द हो कथा कहती है छु बुझा हुआ चिराग जल पड़ा अकबर का सिर झुक गया और ताज को और छूट छाट मिल गई ताज कवित्री तो थी वे कविताएं ऐसी ऐसी बनाती थी कि कविताओं में कृष्ण के प्रेम उसके हृदय से फूट निकलती थी प्रेम
की धारा बहुत सारी कविताएं ता आज ने लिखी एक छोटी सी कविता का नमूना ताज का लिखा हुआ ताज ने लिखा सुनो दिल जानी मेरे दिल की कहानी अपने कन्हैया को कहती है सुनो दिल जानी मेरे दिल की कहानी तुम हस्त ही बकानी तेरे हाथों बकानी हूं कन्हैया दिखती तो बाहर से अकबर की हूं लेकिन मैं तो तेरी दासी तेरी सेविका हूं सुनो दिल जानी मेरे दिल की कहानी तुम हस्त ही बकानी बदनामी स हूंगी मैं देव पूजा ठानी और नमाज ह भुलानी अब देवताओं की पूजा मैं करती हूं देव पूजा करती हूं नमाज भुला
दी मैंने देव पूजा ठानी और नमाज हूं भुलानी तजे कलमा कुरानी वारे गुण गूंगी मैं कलमा और कुरान छोड़ दिए अब तो तुम्हारे गुण कहूंगी मैं सुनो दिल जानी मेरे दिल की कहानी तुम हस्त ही बकानी बदनामी सूंगी मैं जिस को अपने कर्म में रस आता है वह सब कुछ सह लेता है जब भगवत कर्म में रस आ जाए तो सहने में क्या बड़ी बात ताज लिखती है देव पूजा ठानी और नमाज ह भुलानी तजे कलमा कुरानी वारे गुणन गूंगी मैं सावला सलोना कन्हैया को कहती सावला सलोना सिर ताज मिर कुल हल दिए तेरे ने
दाग में निनी दाग हो जाऊंगी मैं तेरे नेह दाग में निनी दाग हो जाऊंगी मैं सुनो दिल जानी मेरे दिल की कहानी तुम हस्त ही बकानी बदनामी भी मैं स हूंगी नंद के कुमार कुर्बान तेरी सूरत पर हे वा कड़िया वाल वाला हे नंदना कुमार हे कन्हैया नंद के कुमार कुर्बान तेरी सूरत पर ह तो तुरका नहीं लेकिन अब तो हिंदवानी कहा ऊंगी कुर्बान तेरे नाम पर मैं तो अब जाऊंगी कैसा है भक्ति का रस हरि ओम [संगीत]