कुछ समय पहले की बात है दिल्ली के एक प्रतिष्ठित और समृद्ध राजपूत परिवार में जसवंत सिंह नाम का एक युवा पुरुष रहता था जो कि बड़ा ही लालची स्वभाव रखता था एक बार जसवंत सिंह अपनी ससुराल जा रहा था जब वह शहर से दो-चार मील आगे निकल गया तो रास्ते में उसे बहुत तेज प्यास लगी वह पास ही के एक गांव में पहुंचा तो देखा कि एक बंजारे की खूबसूरत लड़की अपने मकान के दरवाजे पर खड़ी थी जब जसवंत सिंह की नजर उस पर पड़ी तो वह गश खाकर जमीन पर गिर पड़ा और आह भरने
लगा जसवंत सिंह को बेहोश होकर गिरते देखकर आसपास के बहुत से लोग इकट्ठा हो गए और उसके मुंह पर पानी के छींटे डालकर उसको होश में लाने का यत्न करने लगे थोड़ी देर बाद जब जसवंत सिंह को होश आया तब लोगों ने पूछा ठाकुर साहब आपको यह क्या हो गया था लोगों की बात सुनकर उसने कहा वह स्त्री कहां चली गई जो कुछ देर पहले उस मकान के दरवाजे पर खड़ी थी जसवंत सिंह की यह बात सुनकर वहां उपस्थित लोगों ने समझ लिया कि यह व्यक्ति इस बंजारे की लड़की का आशिक हो गया है यह
बात जानकर लोग उसे समझाने लगे ठाकुर सा अब जरा होश में आओ आप राजपूत हैं और वह नीची जात की है आपको उसे दिल नहीं लगाना चाहिए क्योंकि यह हुस्नो जवानी चार दिन की मेहमान है लोगों की बात सुनकर आह भरते हुए जसवंत सिंह बोला मुझे दीन ईमान से कुछ काम नहीं है जब तक यह चांद से मुखड़े वाली मेरे साथ ब्याही ना जाएगी तब तक मैं अपना जीना मुश्किल समझता हूं आप लोग मेहरबानी करके इस रूपसी के मां-बाप से कह दो कि एक बेचारा मुसीबत का मारा उनकी बेटी के नयन बाणों से घायल होकर
तड़प रहा है या तो उसके साथ वे अपनी बेटी की शादी कर दें नहीं तो वह उनके दरवाजे पर सिर पटक-पटक कर मर जाएगा जसवंत सिंह की बातें सुनकर दो-चार आदमियों ने जाकर सारा हाल उस बंजारे से कहा वह बेचारा उसी समय जसवंत सिंह के पास आया और बोला ठाकुर साहब जरा सोच समझकर बात करें क्योंकि आप तो जात के राजपूत हैं और मैं बंजारा हूं आपके साथ मेरी बेटी की शादी किस तरह हो सकती है और यदि आप मेरी बेटी से शादी करेंगे तो आपको फायदा क्या होगा क्योंकि हमारा पेशा तो इधर-उधर घूमने का
है और अगर आप मेरी लड़की से शादी करेंगे तो आपको भी यही काम करना पड़ेगा फिर आप अपने जात बिरादरी में किसी काम के ना रहेंगे बेचारे बंजारे ने जसवंत सिंह को हर तरह से ऊंच नीच की बातें समझाई लेकिन जसवंत सिंह की समझ में कुछ भी नहीं आया आखिरकार मजबूर होकर उस बंजारे ने अपनी लड़की का ब्याह जसवंत सिंह के साथ कर दिया विवाह के बाद जसवंत सिंह और बंजारे की लड़की में इतना प्रेम बढ़ा कि जसवंत सिंह को उस लड़की के सिवा दुनिया में कुछ भी नजर नहीं आता था इसी तरह ऐशो आराम
करते जिंदगी के कुछ दिन गुजर गए एक दिन जसवंत सिंह को अपने घर की याद आई वह अपनी पत्नी से कहने लगा अब तो मेरा दिल अपने घर जाने को चाहता है अगर तेरे माता-पिता आज्ञा दें तो उनसे कह कि तेरी विदाई कर दें इस बात को सुनकर बंजारे की लड़की बोली मुझे कोई ऐतराज नहीं है क्योंकि मैं तो आपकी आज्ञा का पालन करना अपना धर्म समझती हूं बंजारे की लड़की ने अपने मां-बाप से सारा हाल कह सुनाया उन्होंने प्रसन्न होकर बहुत सा सामान देकर बेटी और दामाद को विदा कर दिया जसवंत सिंह अपनी पत्नी
के साथ अपने घर की ओर चल पड़ा कई दिनों न के सफर के बाद जब उसका घर कुछ मील दूर रह गया तब जसवंत सिंह ने सोचा मैंने बहुत बुरा किया जो जरा सी सुंदरता देखकर अपने धर्म को खो बैठा मेरे माता-पिता को जब यह मालूम होगा तो वे मुझसे क्या कहेंगे इससे तो अच्छा है कि इसका कत्ल करके यहीं किसी कुएं में डाल दूं कम से कम मेरा परिवार मुझ पर लज्जित तो नहीं होगा फिर रात को जब वह सो गई तो जसवंत सिंह ने उसे छुरी से घायल करके कुएं में डाल दिया और
सब जेवर व सामान लेकर अपने घर की ओर चल पड़ा जब वह घर पहुंचा तो उसके मां-बाप ने पूछा हम तो तेरी ही फिक्र में थे तू इतने दिन से कहां था जसवंत सिंह ने कहा मुझे रास्ते में एक अमीर आदमी ने अपने साथ व्यापार करने का मौका दिया था अब मैं उससे आज्ञा लेकर ही यहां आया हूं बेटे की बात सुनकर मां-बाप दोनों बहुत खुश हुए जसवंत सिंह मन ही मन सोचने लगा खैर सब ठीक हो गया लेकिन जब जसवंत सिंह ने अपनी पत्नी को घायल कर कुएं में डाल दिया था तब ईश्वर की
कृपा से पानी की ठंडक पाकर उसकी पत्नी को होश आ गया और उसने कुएं की जंजीर पकड़ ली इत्तेफाक से एक पथिक पानी पीने के लिए वहां आ गया उसने जैसे ही कुएं में डोल डाला वैसे ही उस स्त्री ने वह डोल पकड़ लिया और चिल्लाई बचाओ रक्षा करो पथिक ने कुएं में नीचे देखा एक घायल स्त्री डोल पकड़े हुए हैं उसने उससे पूछा आप कौन हैं वह स्त्री बोली भाई साहब मैं मुसीबत की मरी अबला हूं मुझे इस कुएं से निकालकर तुम मेरी जान बचाओ यह सुनकर उस पथिक ने औरत को कुएं से निकाला
और पूछा आप कौन हैं और आपका यह हाल कैसे हुआ उस औरत ने बताया मैं और मेरा पति अपने घर जा रहे थे अचानक डाकुओं ने हमें घेर कर हमारा माल व सामान लूट लिया तथा मुझे घायल करके इस कुएं में डाल गए यह सब सुनकर पथिक को उस पर बड़ी दया आई उसने रास्ते की कई विपत्तियां सहकर उसको उसके मां-बाप के पास पहुंचा दिया मां-बाप ने जब अपनी भूखी प्यासी घायल लड़की को देखा तो बेहद परेशान हुए और बेटी को सीने से लगाकर पूछा बेटी तेरा यह हाल कैसे हुआ हमें बता उस पतिव्रता स्त्री
ने अपने पति के कुकर्म को छुपाकर अपने मां-बाप से कहा रास्ते में डाकुओं ने हमला करके हमारा सारा माल लूट लिया और मुझे जख्मी कर के कुएं में डालकर भाग गए मेरे पति का क्या हुआ मुझे मालूम नहीं यह बात सुनकर उसके बाप ने समझाया बेटी ईश्वर को याद कर उसे धन्यवाद दे जिसने तेरी जान बचाई वही तेरे पति को भी तुझसे मिला देगा थोड़े ही दिनों में भगवान की कृपा से वह बंजार बिल्कुल भली चंगी हो गई कुछ समय बाद जब जसवंत सिंह को वापस आए हुए दो-चार महीने हो गए और वह सारा माल
बेचकर खा गया खर्चे की तंगी होने लगी तो वह सोचने लगा कि पैसे तो खत्म हो गए अब उस बंजारे के पास चलना चाहिए और उससे कहना चाहिए कि तुम्हारी बेटी के लड़का हुआ है तो यह शुभ समाचार सुनकर वह कुछ रुपया पैसा अवश्य ही देगा यह सोचकर वह अपनी ससुराल पहुंच गया तो उसने देखा कि झोपड़ी के बाहर बंजारे की वही लड़की अर्थात उसकी पत्नी चारपाई पर बैठी है जब उसकी पत्नी की नजर उस पर पड़ी और दोनों की आंखें मिली तो जसवंत का चेहरा पीला पड़ गया वह डर के मारे कांप उठा और
सोचने लगा यह तो बहुत बुरा हुआ जो मैं यहां आ गया अब तो इसका बाप मुझे जिंदा नहीं छोड़ेगा उसे घबराया हुआ देखकर उसकी पत्नी उसके पास आई और बोली बेईमान नि ठर राजपूत आज तक मैंने तेरी करतूत को अपने माता-पिता पर या किसी दूसरे पर जाहिर नहीं किया है मेरे लिए तो तू मेरा पति परमेश्वर है तू अपने दिल में जो चाहे समझ पत्नी की बातें सुनकर जसवंत सिंह बहुत शर्मिंदा हुआ वह अपनी पत्नी से कहने लगा जो कुछ हुआ है उसके लिए मुझे माफ कर दे बंजारे की लड़की ने कहा अच्छा पहले भीतर
चलो उसकी बात मानकर जब जसवंत सिंह अंदर आया तो सास ससुर ने उसे सीने से लगा लिया कहने लगे धन्य है परमात्मा जिसने इतने दिनों के बाद तेरी सूरत दिखाई उन्होंने जसवंत से और भी बहुत सी बातें की और उसका बड़ा आदर सम्मान किया जब फिर इसी तरह उसके ऐशो आराम में कुछ दिन गुजर गए तो जसवंत सिंह ने अपनी पत्नी से कहा अब तो मेरा दिल यहां नहीं लगता अपने शहर की ओर चलना चाहिए बंजारे की लड़की ने यह सुनकर उससे कहा मुझे तो तुम्हारे साथ चलने में कोई ऐतराज नहीं है मगर सोच लो
कि कहीं तुम पहले की तरह धोखा तो नहीं दोगे यह सुनकर जसवंत सिंह बोला मैं परमात्मा की कसम खाकर कहता हूं कि अब ऐसा कुछ भी नहीं होगा तब बंजारे लड़की ने अपने मां-बाप से विदाई मांगी तो उन्होंने बहुत सा माल और जेवर देकर बेटी को विदा कर दिया जसवंत सिंह खुशी-खुशी मस्त होकर चल दिया और जब एक जंगल में पहुंचा तो उसने अपनी पत्नी को छुरी से घायल करके उस जंगल में फेंक दिया और सारा माल लेकर अपने घर की ओर रवाना हो गया बंजारे की लड़की छुरी से घायल वहीं पड़ी तड़पती रही लेकिन
इस बार भाग्य ने उसका साथ नहीं दिया और उसने वहीं दम तोड़ दिया यह कहानी हमें यह संदेश देती हैं कि यदि कोई व्यक्ति एक बार विश्वासघात कर सक सता है तो उस पर दोबारा विश्वास करना हमारी मूर्खता दर्शाता है उससे होने वाले परिणाम के लिए हम खुद ही जिम्मेदार हैं सच्चा प्रेम केवल बाहरी सुंदरता पर आधारित नहीं होता बल्कि त्याग वफादारी और सम्मान पर आधारित होता है आशा है आपको यह कहानी पसंद आई होगी अपनी बहन बेटियों के साथ शेयर कर उन्हें जसवंत सिंह जैसे दरिंदों की सच्चाई से अवगत कराए [संगीत] धन्यवाद i