एक दिन तुम्हें समझ आएगा कि लोग तुम्हें इसलिए इग्नोर नहीं करते क्योंकि तुम कमजोर हो बल्कि इसलिए क्योंकि तुम अब उनके कंट्रोल में आना बंद कर चुके हो। सबसे खतरनाक इंसान वो नहीं होता जो जोर से चिल्लाता है। सबसे खतरनाक इंसान वो होता है जो शांत रहकर लोगों को खुद से दूर कर देता है। बिना लड़ाई बिना बहस बिना एक्सप्लेन किए। क्योंकि जिस दिन इंसान को लोगों की वैलिडेशन की जरूरत खत्म हो जाती है, [संगीत] उसी दिन वह खतरनाक बन जाता है। लोग अटेंशन चाहते हैं, रिप्लाई चाहते हैं, रिएक्शन चाहते हैं। लेकिन जो इंसान यह
सब देना बंद कर देता है, वही गेम बदल देता है। और आज तुम सीखोगे कि साइलेंस कैसे कमजोरी नहीं बल्कि ऐसी पावर बन जाती है जो इंसान को अंदर से अनटचेबल बना देती है। चैप्टर वन साइलेंस सबसे खतरनाक हथियार। बचपन से तुम्हें एक चीज बार-बार सिखाई गई। हर बात का जवाब दो। लोगों को समझाओ। खुद को सही साबित करो। अगर कोई नाराज हो जाए तो उसे मनाओ। अगर कोई गलत समझे तो तुरंत क्लियर करो। लेकिन किसी ने यह नहीं सिखाया कि हर जगह [संगीत] बोलना जरूरी नहीं होता। क्योंकि जिंदगी में कई लड़ाईयां ऐसी होती हैं
जिन्हें शब्दों से नहीं बल्कि साइलेंस से जीता जाता है। और सच तो यह है कि कई बार तुम्हारी चुप्पी तुम्हारे हजार शब्दों से ज्यादा ताकतवर होती है। जब कोई तुम्हें उकसाता है और फिर भी तुम शांत रहते हो। उसी पल [संगीत] पावर तुम्हारे हाथ में आ जाती है। क्योंकि सामने वाला तुम्हारी रिएक्शन चाहता था। वह तुम्हारा गुस्सा [संगीत] देखना चाहता था। वह चाहता था कि तुम टूट जाओ। लेकिन तुमने उसे वह ताकत दी ही नहीं। याद रखना हर बहस दो लोगों से चलती है। एक इंसान हट जाए तो लड़ाई अपने आप खत्म हो जाती है।
लेकिन ज्यादातर लोग हट नहीं पाते क्योंकि उन्हें आखिरी शब्द चाहिए। उन्हें [संगीत] अपना ईगो बचाना होता है। उन्हें हर कीमत पर खुद को सही साबित करना होता है। और यहीं से इंसान कमजोर बनना शुरू करता है। आज की दुनिया में लोग अटेंशन के इतने भूखे हो चुके हैं कि एक रिप्लाई ना आए तो दिमाग बेचैन हो जाता है। फोन बार-बार चेक होता [संगीत] है। उसने जवाब क्यों नहीं दिया? उसने मैसेज देखा लेकिन रिप्लाई क्यों नहीं किया? क्या मैं उसके लिए इंपॉर्टेंट नहीं हूं? धीरे-धीरे इंसान अपनी खुशी दूसरों के बिहेवियर से जोड़ देता [संगीत] है और
यही सबसे बड़ी मानसिक गुलामी है। क्योंकि जिस इंसान की शांति दूसरों के जवाब पर टिकी हो, उसका कंट्रोल हमेशा दूसरों के हाथ में रहेगा। लेकिन जिस दिन तुमने खुद को खुद से वैलिडेट करना सीख लिया, उसी [संगीत] दिन खेल बदल जाएगा। क्योंकि साइलेंस सिर्फ चुप रहना नहीं है। साइलेंस एक मैसेज है कि मेरी एनर्जी इतनी सस्ती नहीं कि मैं हर जगह खुद को साबित करता फिरूं। तुमने नोटिस किया होगा जब तुम किसी को ज्यादा अटेंशन देते हो तो वह तुम्हारी वैल्यू कम करने लगता है। लेकिन जैसे ही तुम पीछे हटते हो [संगीत] वैसे ही वही
इंसान तुम्हें नोटिस करना शुरू कर देता है। क्योंकि दुनिया हमेशा उसी चीज की वैल्यू करती है जो हर समय आसानी से उपलब्ध ना हो। और यही वजह है कि सबसे पावरफुल इंसान वो होता है जिसे लोगों की जरूरत कम पड़ती [संगीत] है। क्योंकि जिसे कम जरूरत होती है कंट्रोल भी उसी के पास होता है। और जिस दिन तुमने अपनी इमोशंस को कंट्रोल करना सीख लिया उसी दिन तुम बाकी लोगों से अलग बन जाओगे। चैप्टर 2, वैलिडेशन की लत सबसे खतरनाक कैद। दुनिया का सबसे बड़ा जाल पैसा नहीं है, प्यार नहीं है बल्कि लोगों की अप्रूवल
की आदत है। क्योंकि इंसान धीरे-धीरे इतना आदि हो जाता है कि उसकी खुशी दूसरों की राय पर टिक जाती है। कोई तारीफ कर दे तो मूड अच्छा और कोई इग्नोर कर दे तो पूरी रात बेचैनी। यही वजह है कि आज ज्यादातर लोग अपनी असली जिंदगी नहीं जी रहे। वो सिर्फ लोगों को इंप्रेस करने की जिंदगी जी रहे हैं। बचपन से हमें कंडीशन किया गया। अच्छा पढ़ोगे तो तारीफ मिलेगी। अच्छा बिहेव करोगे तो लोग पसंद [संगीत] करेंगे। धीरे-धीरे दिमाग यह मान लेता है कि प्यार पाने के लिए खुद को साबित करना जरूरी है और वहीं से
शुरू होती है वैलिडेशन की लत। आज सोशल मीडिया ने इस लत को और खतरनाक बना दिया है। लोग फोटो डालते हैं फिर बार-बार लाइक चेक करते हैं। स्टोरी डालते हैं फिर देखते हैं किसने देखा, किसने रिप्लाई किया और अगर किसी खास इंसान ने जवाब ना दिया तो दिमाग ओवरथिंकिंग शुरू कर देता है। शायद मैं इंपॉर्टेंट [संगीत] नहीं हूं। शायद वह मुझसे दूर हो रहा है। लेकिन सच यह है कि इंसान को इग्नोर होने से ज्यादा दर्द इस बात का होता है कि उसकी वैल्यू कंफर्म नहीं हुई। क्योंकि वह अंदर से अटेंशन का भूखा बन चुका
होता [संगीत] है और यही भूख इंसान को कमजोर बना देती है। क्योंकि जो इंसान बार-बार खुद को समझाता है, बार-बार पूछता है, सब ठीक है ना? तुम नाराज तो नहीं? मैंने कुछ गलत तो नहीं किया। वो धीरे-धीरे अपनी खुद की वैल्यू गिराने [संगीत] लगता है। याद रखना नीडीनेस कभी रिस्पेक्ट पैदा नहीं करती। नीडीनेस सिर्फ डिपेंडेंसी पैदा करती है और जहां डिपेंडेंसी होती है वहां पावर खत्म हो जाती है। सबसे खतरनाक बात यह है कि वैलिडेशन [संगीत] की लत इंसान को उसकी असली पहचान से दूर कर देती है। वह वही बनने लगता है जो लोग पसंद
करें। अगर लोग [संगीत] बोल्ड पसंद करते हैं तो वह बोल्ड बनने की कोशिश करता है। अगर लोग शांत पसंद करते हैं तो वह शांत बनने की कोशिश करता है। धीरे-धीरे उसकी असली पर्सनालिटी गायब होने लगती है और वह सिर्फ एक मास्क बनकर रह जाता है। लेकिन असली फ्रीडम तब शुरू होती है जब तुम्हें लोगों की अप्रूवल की जरूरत खत्म हो जाती है। जब कोई तुम्हारी तारीफ ना करे फिर भी तुम कॉन्फिडेंट रहो। जब कोई तुम्हें नोटिस ना करे फिर भी तुम अपने काम पर फोकस रखो। क्योंकि उसी दिन तुम्हारी वैल्यू बाहर से नहीं अंदर से
बननी शुरू हो जाती है। चैप्टर थ्री इग्नोर करने की डार्क साइकोलॉजी। अब तक तुम समझ चुके हो कि साइलेंस सिर्फ चुप रहना नहीं [संगीत] है। लेकिन अब सबसे खतरनाक सच सुनो। कई बार इग्नोर करना सिर्फ सेल्फ रिस्पेक्ट नहीं होता बल्कि लोगों को कंट्रोल करने का हथियार भी बन जाता है। और ज्यादातर लोग इस गेम को समझ नहीं पाते। इस दुनिया में सबसे कीमती चीज पैसा नहीं है। सबसे कीमती चीज है अटेंशन। [संगीत] क्योंकि जिसे अटेंशन मिलता है वही इंपॉर्टेंट महसूस करता है और जिसे इग्नोर किया जाता है वह खुद पर शक करने लगता है। यही
वजह है कि कुछ लोग जानबूझकर हॉट एंड कोल्ड बिहेवियर करते हैं। कभी बहुत प्यार दिखाएंगे फिर अचानक दूर हो जाएंगे। कभी घंटों बातें करेंगे फिर बिना वजह गायब हो जाएंगे। क्योंकि इंसान का दिमाग क्लेरिटी से ज्यादा अनसर्टेनिटी में फंसता है। जब किसी [संगीत] को पूरी तरह खो देते हो तो दर्द होता है। लेकिन जब कोई इंसान कभी पास आए और कभी दूर जाए तो दिमाग उसके पीछे और ज्यादा भागने लगता है। क्योंकि उसे उम्मीद रहती है शायद अगली बार सब ठीक हो जाएगा और यही चीज [संगीत] इंसान को इमोशनली एडिक्ट बना देती है। कुछ लोग
साइलेंस का इस्तेमाल पनिशमेंट की तरह करते हैं। अगर उन्हें कोई बात पसंद ना आए तो वह अचानक [संगीत] चुप हो जाते हैं। ना जवाब, ना एक्सप्लेनेशन, ना बातचीत और सामने वाला अंदर ही अंदर टूटने लगता है। वो सोचता है शायद गलती मेरी [संगीत] थी। शायद मुझे ऐसा नहीं कहना चाहिए था। धीरे-धीरे वो अपनी असली पर्सनालिटी दबाने लगता है। सिर्फ इसलिए ताकि सामने वाला नाराज ना हो और यही इमोशनल कंट्रोल है। लेकिन यहां सबसे जरूरी बात समझो। हर साइलेंस पावरफुल नहीं होता। कुछ लोग सिर्फ इसलिए चुप रहते हैं क्योंकि उनके पास कहने को कुछ नहीं होता।
लेकिन [संगीत] असली पावरफुल साइलेंस वो होता है जहां इंसान रिएक्ट करने की बजाय ऑब्जर्व करता है। वह हर चीज पर तुरंत जवाब नहीं देता। वह हर लड़ाई में नहीं कूदता क्योंकि उसे पता होता है कि हर जगह [संगीत] अपनी एनर्जी खर्च करना कमजोरी है। याद रखना दुनिया हमेशा उसी इंसान की वैल्यू ज्यादा करती है जो खुद पर कंट्रोल रखता है। जो हर बात पर टूटता नहीं हर इग्नोर पर भागता नहीं और हर रिजेक्शन के बाद खुद को खोता नहीं। क्योंकि जिस इंसान ने अपनी इमोशंस को संभालना सीख लिया उसे फिर कोई आसानी से कंट्रोल नहीं
कर सकता। चैप्टर फोर जब इग्नोर करना सेल्फ रिस्पेक्ट [संगीत] बन जाता है। हर बार चुप रहना कमजोरी नहीं होता और हर बार जवाब देना ताकत नहीं होता। क्योंकि जिंदगी में एक समय ऐसा आता है जब इंसान को समझ आ जाता है कि हर किसी को समझाना जरूरी नहीं है। कुछ लोग तुम्हें समझना ही नहीं चाहते। [संगीत] वह सिर्फ तुम्हारी एनर्जी लेना चाहते हैं। और अगर तुम बार-बार खुद को साबित करते रहोगे [संगीत] तो धीरे-धीरे तुम अपनी ही नजरों में छोटे होने लग। सेल्फ रिस्पेक्ट का मतलब एटीट्यूड नहीं है। इसका मतलब सिर्फ इतना है कि अब
तुम अपनी मानसिक शांति हर किसी के हाथ में नहीं दोगे। अगर कोई बार-बार तुम्हें डिसरिस्पेक्ट करे अगर कोई तुम्हें हमेशा कंफ्यूजन में रखे। अगर कोई सिर्फ तब याद करे जब उसे जरूरत हो और फिर भी तुम उसके पीछे भागते रहो तो यह प्यार नहीं यह [संगीत] खुद के साथ अन्याय है क्योंकि जहां इंसान खुद की वैल्यू भूल जाता है वहीं [संगीत] से लोग उसकी वैल्यू कम करना शुरू कर देते हैं। बहुत लोग कहते हैं मैं उसे इग्नोर नहीं कर सकता। [संगीत] मैं इमोशनली अटैच्ड हूं। लेकिन असली सवाल यह नहीं कि तुम अटैच्ड हो। असली सवाल
यह है कि क्या तुम खुद की रिस्पेक्ट करते हो? क्योंकि जो इंसान खुद की इज्जत नहीं करता, दुनिया भी उसे सीरियसली नहीं लेती। याद रखना हर बार रुक जाना लॉयल्टी नहीं होता। कई बार खुद को बचाने के लिए दूर जाना जरूरी होता है। सेल्फ रिस्पेक्ट वहीं शुरू होता है जहां ओवर एक्सप्लेनिंग खत्म होती है। हर बात पर सफाई देना, हर बार खुद को सही साबित करना, हर बार डरना कि सामने वाला क्या सोच लेगा, यह सब इंसान को अंदर से कमजोर बना देता है। [संगीत] पावरफुल लोग हर किसी को जवाब नहीं देते। वह सिर्फ अपना
स्टैंडर्ड क्लियर रखते हैं। अगर सामने वाला रिस्पेक्ट देगा तो वह रहेंगे नहीं, देगा तो वह शांत होकर आगे बढ़ जाएंगे और यही सबसे मुश्किल चीज है क्योंकि ज्यादातर लोग अकेले रहने से डरते हैं। इसलिए वह गलत रिश्तों में भी टिके रहते हैं। [संगीत] लेकिन सच यह है कि गलत लोगों के साथ रहने से बेहतर है कुछ समय अकेले रहना क्योंकि अकेलापन इंसान को तोड़ता नहीं। अगर [संगीत] वह खुद के साथ खड़ा होना सीख जाए तो वही अकेलापन उसे मजबूत बना देता है। याद रखना सेल्फ रिस्पेक्ट का मतलब लोगों से नफरत करना नहीं है। इसका मतलब
सिर्फ इतना है कि अब तुम अपनी वैल्यू कम नहीं होने दोगे। [संगीत] अगर रिश्ता म्यूचुअल है तो तुम पूरा दिल लगाओगे। लेकिन अगर सामने वाला सिर्फ तुम्हारी मौजूदगी का फायदा उठा रहा है तो तुम बिना शोर किए चुपचाप आगे बढ़ जाओगे। और वही पल होगा जब तुम सच में अंदर से मजबूत बनना शुरू करोगे। चैप्टर फाइव इमोशनल डिटचमेंट की असली ताकत। अटैचमेंट गलत नहीं है। किसी से प्यार करना गलत नहीं है। किसी की परवाह [गला साफ़ करने की आवाज़] करना भी कमजोरी नहीं है। लेकिन कमजोरी तब [संगीत] शुरू होती है जब तुम्हारी पूरी खुशी किसी
एक इंसान पर टिक जाती है। जब उसका मूड तुम्हारा मूड बन जाए जब उसका रिप्लाई तुम्हारी शांति तय करे। जब उसकी मौजूदगी के बिना तुम्हें खुद की जिंदगी खाली लगने लगे। तब इंसान प्यार में नहीं बल्कि डिपेंडेंसी में जी रहा होता है। इमोशनल डिटचमेंट का मतलब यह नहीं कि तुम्हें फर्क पड़ना बंद हो जाए। इसका मतलब सिर्फ इतना है कि अब तुम खुद को खोकर किसी से जुड़ोगे नहीं। तुम किसी को चाह सकते हो लेकिन उसके बिना टूटोगे नहीं क्योंकि असली ताकत वहीं से शुरू होती है जहां इंसान खुद के साथ भी [संगीत] पूरा महसूस
करना सीख जाता है। ज्यादातर लोग इसलिए ओवर अटैच हो जाते हैं क्योंकि उन्हें अकेले रहने से डर लगता है। उन्हें डर होता है कि अगर वह इंसान चला गया तो उनका क्या होगा और यही डर इंसान को कमजोर बना देता है। वह बार-बार मैसेज करता है। बार-बार रीअशोरेंस मांगता है। बार-बार सामने वाले को पकड़ कर रखने की कोशिश करता है। लेकिन सच यह है कि जितना ज्यादा तुम किसी को पकड़ने की कोशिश करोगे, उतना ज्यादा वह दूर जाने लगेगा क्योंकि प्यार [संगीत] प्रेशर में नहीं टिकता। इमोशनली स्ट्रांग इंसान हर चीज पर तुरंत रिएक्ट नहीं करता।
अगर कोई रिप्लाई लेट करे तो [संगीत] वह पूरी रात ओवरथिंक नहीं करता। अगर कोई थोड़ी दूरी बनाए तो वह खुद की वैल्यू पर शक नहीं करता क्योंकि उसकी जिंदगी सिर्फ एक इंसान के आसपास नहीं [संगीत] घूमती। उसके पास अपना मिशन होता है, अपने गोल्स होते हैं, अपनी पहचान होती है और यही चीज उसे अंदर से स्टेबल बनाती है। याद रखना डिटचमेंट का मतलब हार्टलेस बनना नहीं है। इसका मतलब सिर्फ इतना है कि अब तुम अपने इमोशंस के गुलाम नहीं रहोगे। तुम प्यार करोगे लेकिन खुद को मिटाकर नहीं। तुम किसी के साथ रहोगे लेकिन अपनी सेल्फ
रिस्पेक्ट गिरा [संगीत] कर नहीं। क्योंकि जिस इंसान ने खुद के अंदर स्थिरता बना ली उसे फिर कोई आसानी से तोड़ नहीं सकता। और सबसे बड़ी [संगीत] बात जितना ज्यादा इंसान खुद में पूरा होता जाता है उतना ही लोग उसकी तरफ खींचने लगते हैं क्योंकि डेस्पिरेशन लोगों को दूर करती है लेकिन इनर पीस लोगों को आकर्षित करता है। यही वजह है कि सबसे पावरफुल इंसान वो नहीं होता जिसके पीछे सबसे ज्यादा लोग हो बल्कि वो होता है जो अकेले रहकर भी अंदर से शांत और मजबूत रह सकें। चैप्टर सिक्स सोशल पावर का असली खेल। हर जगह
एक अदृश्य खेल चल रहा है। ऑफिस में, दोस्ती में, रिलेशनशिप में यहां तक कि परिवार में भी और ज्यादातर लोगों को इसका एहसास तक नहीं होता क्योंकि बाहर से सब नॉर्मल दिखता है। लेकिन अंदर ही अंदर हर जगह पावर डायनामिक्स चल रहे होते हैं। [संगीत] कौन ज्यादा इन्वेस्टेड है, कौन ज्यादा चस कर रहा है, कौन ज्यादा डरता है खोने से? और सच यह है कि जहां डर ज्यादा होता है, वहीं इंसान कमजोर पड़ने लगता है। जिस इंसान को खोने का डर ज्यादा होता है, वही ज्यादा समझौते करता है। वही बार-बार खुद को एक्सप्लेन करता है।
वही हर छोटी बात पर बेचैन हो जाता है। लेकिन जो इंसान खुद में स्टेबल होता है, वह हर समय लोगों को पकड़ कर रखने की कोशिश नहीं करता क्योंकि उसे पता होता है कि उसकी वैल्यू किसी एक इंसान पर डिपेंड नहीं करती। तुमने नोटिस किया होगा कुछ लोग बहुत कम बोलते हैं। लेकिन फिर भी उनकी प्रेजेंस भारी लगती है क्योंकि असली पावर आवाज ऊंची करने से नहीं आती। असली पावर आती है कंट्रोल से। जो इंसान हर बात पर रिएक्ट नहीं करता, हर मजाक पर टूटता नहीं। हर क्रिटिसिज्म पर खुद को साबित करने नहीं लग जाता।
[संगीत] लोग उसे अलग नजर से देखने लगते हैं। क्योंकि स्टेबल इंसान हमेशा रेयर होता है। आज ज्यादातर लोग सिर्फ इसलिए थक चुके हैं क्योंकि वह हर जगह अपनी इमेज बचाने में लगे हैं। कौन क्या सोच रहा होगा? किसने क्या कहा? किसने मुझे नोटिस किया, किसने नहीं। लेकिन पावरफुल लोग हर समय लोगों के दिमाग में रहने की कोशिश नहीं करते। वह सिर्फ अपनी जिंदगी बनाने में बिजी रहते हैं [संगीत] और यही चीज उन्हें अलग बना देती है। सोशल पावर का सबसे बड़ा नियम है जो इंसान खुद को कंट्रोल कर सकता है वही माहौल को कंट्रोल कर
सकता है। अगर कोई तुम्हें उकसाए और तुम तुरंत गुस्से में आ जाओ तो कंट्रोल उसके पास चला गया। लेकिन अगर तुम शांत रहो, मुस्कुराओ और सही समय पर जवाब दो तो पावर तुम्हारे पास रहती है। क्योंकि रिएक्शन इमोशन से आती है लेकिन रिस्पांस क्लेरिटी से आता है। बहुत लोग पॉपुलर बनने के पीछे भागते हैं लेकिन रिस्पेक्ट और पॉपुलैरिटी दोनों अलग चीजें हैं। पॉपुलर इंसान हर किसी को खुश करने की कोशिश करता है। लेकिन रिस्पेक्टेड [संगीत] इंसान अपने स्टैंडर्ड्स पर चलता है। वो हर जगह फिट होने की कोशिश नहीं करता। वो सिर्फ वहीं रहता है जहां
उसकी वैल्यू हो। और यही वजह है कि लोग धीरे-धीरे उसे सीरियसली लेने लगते हैं। याद रखना सबसे बड़ा स्टेटस यह नहीं कि कितने लोग तुम्हारे पीछे हैं। सबसे बड़ा स्टेटस [संगीत] यह है कि अगर माहौल तुम्हारी वैल्यू कम करे तो क्या तुम वहां से उठकर चले जा सकते हो? क्योंकि जो इंसान गलत जगह छोड़ सकता है वही सच में पावरफुल होता है। और जिस दिन तुमने खुद को हर जगह साबित करना बंद कर दिया उसी दिन लोग तुम्हें अलग नजर से देखना शुरू कर देंगे। चैप्टर से रिलेशनशिप में इग्नोर का खेल। रिलेशनशिप वो जगह है
जहां इंसान सबसे ज्यादा इमोशनल होता है और जहां इमोशन ज्यादा होते हैं वहीं सबसे ज्यादा माइंड गेम्स भी होते हैं। शुरुआत में सब अच्छा इंडिकेट है। बातें लंबी [संगीत] होती हैं। अटेंशन भरपूर मिलता है और इंसान धीरे-धीरे सामने वाले से अटैच होने लगता है। [संगीत] लेकिन फिर अचानक चीजें बदलने लगती हैं। रिप्लाई लेट होने लगते हैं। बिहेवियर बदलने लगता है। कभी बहुत प्यार, कभी अचानक दूरी और यहीं से इंसान का दिमाग फंसना शुरू हो जाता है। क्योंकि इंसान को सबसे ज्यादा दर्द क्लेरिटी की कमी देती है। जब सामने वाला साफ-साफ कह दे कि उसे जाना
है तब भी इंसान संभल जाता है। [संगीत] लेकिन जब कोई कभी पास आए और कभी दूर जाए तब दिमाग हर समय उसी के बारे में सोचता रहता है। शायद वह बिजी होगा। [संगीत] शायद उसका मूड खराब होगा। शायद मैं ही ज्यादा सोच रहा हूं और यही अनसर्टेनिटी इंसान को इमोशनली कमजोर बना देती है। बहुत लोग रिलेशनशिप में ओवरचेजिंग करने लगते हैं। बार-बार मैसेज करना, बार-बार पूछना सब ठीक है ना? तुम बदल तो नहीं गए? मैंने कुछ गलत तो नहीं किया। वह सोचते हैं कि वह प्यार दिखा रहे हैं, लेकिन धीरे-धीरे वह अपनी ही वैल्यू कम
करने लगते हैं। क्योंकि जहां इंसान खुद को खोने लगता है, वहां सामने वाला उसे हल्के में लेना शुरू कर देता है। सिक्योर इंसान रिलेशनशिप में गेम नहीं खेलता। [संगीत] वह क्लियर रहता है। अगर उसे कोई बात पसंद नहीं तो वह बोलता है। अगर वह केयर करता है, तो कंसिस्टेंट रहता है। लेकिन इनसिक्योर लोग साइलेंस का इस्तेमाल कंट्रोल के लिए करते हैं। कभी अटेंशन देंगे फिर अचानक गायब हो जाएंगे ताकि सामने वाला बेचैन रहे। और यही चीज रिलेशनशिप को टॉक्सिक बना देती है। याद रखना हर बार साइलेंस प्यार नहीं होता। कई बार साइलेंस सिर्फ मैनपुलेशन होता
है। अगर कोई इंसान तुम्हें बार-बार कंफ्यूजन में रखता है, बार-बार मिक्स सिग्नल्स देता है, [संगीत] बार-बार तुम्हें अपनी वैल्यू पर शक करवाता है, तो वह प्यार नहीं तुम्हारी इमोशनल कमजोरी [संगीत] को कंट्रोल कर रहा है। और सबसे खतरनाक बात यह है कि लोग अक्सर उसी इंसान के पीछे सबसे ज्यादा भागते हैं जो उन्हें सबसे ज्यादा अनसर्टेन रखता है। लेकिन जिस दिन [संगीत] तुमने खुद को चुनना शुरू कर दिया, सब बदलने लगता है। जब तुम चज़ करना बंद कर देते हो, जब तुम अपनी सेल्फ रिस्पेक्ट को रिश्ते से ऊपर रखना शुरू कर देते हो, तब या
तो सामने वाला सच में तुम्हारी वैल्यू समझने लगता है या फिर हमेशा के लिए चला जाता है। और दोनों ही चीजें तुम्हारे लिए अच्छी होती हैं। क्योंकि सच्चा रिश्ता तुम्हें मानसिक शांति देता है। कंफ्यूजन [संगीत] नहीं। सबसे पावरफुल पोजीशन रिलेशनशिप में यह नहीं कि कौन ज्यादा कंट्रोल करता है बल्कि यह है कि कौन खुद को खोए बिना प्यार कर सकता है। [संगीत] क्योंकि जो इंसान खुद के साथ भी पूरा है वही किसी और के साथ हेल्दी रिश्ता बना सकता है। बाकी लोग सिर्फ खालीपन भरने के लिए रिश्ते ढूंढते रहते हैं। चैप्टर आठ [संगीत] जब तुम्हारा
मिशन लोगों से बड़ा हो जाता है। एक समय के बाद इंसान समझ जाता है। सबसे बड़ा नुकसान ब्रेकअप नहीं होता। सबसे बड़ा नुकसान होता है अपना फोकस खो देना। क्योंकि जब आपका पूरा ध्यान लोगों पर होता है तो आपकी जिंदगी रुक जाती है। आप हर वक्त सोचते रहते हो उसने रिप्लाई क्यों नहीं किया? वह बदल क्यों गया? वह मुझे इग्नोर क्यों कर रहा है? और इसी बीच आपकी खुद की ग्रोथ [संगीत] रुक जाती है। सच सुनो। जिस इंसान के पास कोई मिशन नहीं होता, वह लोगों को ही अपनी दुनिया बना लेता है। फिर एक मैसेज
उसका मूड बना देता है, एक इग्नोर उसका पूरा [संगीत] दिन खराब कर देता है। एक रिजेक्शन उसे तोड़ देता है। लेकिन जिस इंसान के पास बड़ा गोल होता है, वह छोटी चीजों में नहीं उलझता। वह हर नोटिफिकेशन पर नहीं भागता। वह हर बहस में नहीं कूदता। वह हर इंसान को पकड़ के नहीं बैठता क्योंकि उसे पता है उसका समय बहुत कीमती है। यहीं से शुरू होती है रूथलेस ग्रोथ। रूथलेस मतलब हार्टलेस नहीं। रूथलेस मतलब [संगीत] क्लियर। किस पे एनर्जी देनी है, किसे इग्नोर करना है, किस चीज को छोड़ना है यह समझ आ जाना। ज्यादातर लोग
इसलिए दुखी नहीं है क्योंकि [संगीत] लोग उन्हें छोड़ दें। वह इसलिए दुखी हैं क्योंकि उनके पास खुद की जिंदगी बनाने का कोई कारण नहीं है। खाली दिमाग हमेशा अटैचमेंट ढूंढता है। बिजी दिमाग पर्पस ढूंढता है। सोचो अगर रोज के 3 घंटे जो आप ओवरथिंकिंग ना बर्बाद करते हो उन्हें स्किल सीखने में लगा दो तो एक साल बाद आपकी जिंदगी बदल सकती है। लेकिन लोग ग्रोथ से ज्यादा अटेंशन के पीछे भागते हैं। यही वजह है कि वह हमेशा इमोशनली कमजोर [संगीत] रहते हैं। रूथलेस ग्रोथ का मतलब है कुछ चीजों को काट देना। लेट नाइट चैट्स बेकार,
[संगीत] स्क्रोलिंग, टॉक्सिक लोगों के पीछे भागना, हर किसी को खुश करने की आदत। क्योंकि हर डिस्ट्रैक्शन आपकी लाइफ की एनर्जी [संगीत] खा रहा है। और सबसे खतरनाक बात पता है क्या है? जब आप खुद पर काम करना शुरू करते हो तो बहुत [संगीत] लोग आपको बदल हुआ बोलेंगे। क्योंकि अब आप हर वक्त अवेलेबल नहीं हो। अब आप हर ड्रामे में शामिल नहीं होते। अब आपका फोकस खुद पर है और यही चीज लोगों को अनकंफर्टेबल लगती है। लेकिन याद रखो हर ग्रोथ [संगीत] के साथ लोनलीनेस आती है। कुछ दोस्त पीछे छूटेंगे। कुछ रिश्ते कमजोर होंगे, कुछ
[संगीत] लोग दूर चले जाएंगे। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आप गलत रास्ते पर हो। इसका मतलब है आप इवॉल्व हो रहे हो। सच्ची ग्रोथ हमेशा थोड़ी अकेली होती है। क्योंकि भीड़ [संगीत] डिसिप्लिन नहीं चुनती। भीड़ आराम चुनती है। चैप्टर नौ अनटचेबल बनने की असली ताकत। एक दिन आप महसूस करोगे कि लोग अभी भी वही हैं। लेकिन आप बदल चुके हो। पहले छोटी-छोटी बातें आपको हिला देती थी। किसी का इग्नोर करना, किसी का बदल जाना, किसी का गलत बोल देना। लेकिन अब अंदर कुछ शांत हो चुका है। अब हर बात पर रिएक्ट करने का मन
नहीं करता क्योंकि आपने समझ लिया है हर लड़ाई लड़ना जरूरी नहीं होता। अनटचेबल होने का मतलब घमंडी होना नहीं है। इसका मतलब है आपका दिमाग अब हर चीज को अपने ऊपर लेना बंद कर देता है। लोग क्या सोच रहे हैं? कौन आपको पसंद करता है? कौन नहीं करता? कौन सपोर्ट कर रहा है? कौन नहीं। अब [संगीत] यह सब आपकी शांति तय नहीं करता। सबसे खतरनाक इंसान वह नहीं होता जो हर समय गुस्से में रहता है। सबसे खतरनाक इंसान वह होता है जो खुद पर कंट्रोल रखना सीख चुका हो। क्योंकि जिसे अपने इमोशंस पर कंट्रोल आ
गया उसे दुनिया आसानी से कंट्रोल नहीं कर सकती। पहले कोई आपको इग्नोर करता था तो आप बेचैन हो जाते थे। बार-बार फोन चेक करते थे। खुद को डाउट करते थे। लेकिन अब आप समझ चुके हो हर साइलेंस रिजेक्शन नहीं होता और हर रिजेक्शन आपकी वैल्यू तय नहीं करता। अनटचेबल लोग हर [संगीत] चीज को पर्सनल नहीं लेते। अगर कोई दूर हो जाए तो वह टूटते नहीं। अगर कोई आलोचना करे तो वह बिखरते नहीं। अगर कोई छोड़ दे तो वह खुद को खत नहीं मानते। क्योंकि उनकी पहचान किसी एक इंसान पर टिकी नहीं होती और [संगीत] यही
असली पावर है। आउटकम इंडिपेंडेंस। आप मेहनत करते हो लेकिन रिजल्ट से चिपकते नहीं। आप प्यार करते हो लेकिन खुद को खोते नहीं। आप लोगों की इज्जत करते हो लेकिन अपनी सेल्फ रिस्पेक्ट बेचते [संगीत] नहीं। ध्यान से सुनो। प्रेडिक्टेबल इंसान हमेशा कंट्रोल किया जाता है। अगर लोगों को पता है कि कौन सी बात आपको ट्रिगर कर देगी तो [संगीत] वह उसी चीज का इस्तेमाल करेंगे। इसलिए अनटचेबल बनने का पहला स्टेप है अपने ट्रिगर्स पहचानना। कोई आपको उकसाए और आप तुरंत फट जाओ तो कंट्रोल [संगीत] सामने वाले के पास चला जाता है। लेकिन अगर आप शांत रहो,
ऑब्जर्व करो और सोच कर जवाब दो तो पावर आपके पास रहती है। अनटचेबल लोग खुद को साबित करने में एनर्जी बर्बाद नहीं करते। वह चुपचाप काम करते हैं क्योंकि उन्हें पता है असली वैल्यू आवाज से नहीं रिजल्ट [संगीत] से बनती है। दुनिया कुछ समय के लिए शब्द सुनती है लेकिन हमेशा काम याद रखती है। अगर आपका मूड हर दिन लोगों के बिहेवियर से बदल जाता है तो [संगीत] आप अभी भी इमोशनली डिपेंडेंट हो। लेकिन अगर आपका मूड, आपकी डिसिप्लिन, आपकी आदतों और आपके मिशन से चलने लगे तो समझ लो [संगीत] आप बदल रहे हो। अनटचेबल
बनने का मतलब यह नहीं कि आपको किसी की जरूरत नहीं। इसका मतलब सिर्फ इतना है कि अब आपकी खुशी किसी और की परमिशन पर डिपेंड नहीं करती। अब आप अकेले रह सकते हो बिना टूटे। अब आप रिजेक्शन झेल सकते हो बिना खुद को खोए। और यही वो स्टेज है जहां इंसान अंदर से सच में मजबूत बनता है। चैप्टर 10 अकेले लेकिन सबसे ज्यादा मजबूत। हर इंसान की जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आता है जहां उसे महसूस होता है कि अब वह पहले जैसा नहीं रहा। पहले उसे हर किसी की जरूरत महसूस होती थी। हर रिश्ता,
[संगीत] हर मैसेज, हर अटेंशन उसके मूड को कंट्रोल करता था। लेकिन अब अंदर कुछ बदल चुका है। अब शोर से ज्यादा सुकून [संगीत] पसंद आने लगता है। अब भीड़ से ज्यादा अकेलापन शांत लगने लगता है। यह कमजोरी नहीं है। यह ट्रांसफॉर्मेशन है ग्रोथ का। एक ऐसा फेज आता है जहां आपका सर्कल छोटा होने लगता है। कुछ लोग खुद दूर चले जाते हैं। कुछ रिश्ते धीरे-धीरे खत्म हो जाते हैं और कुछ लोग आपको बदल हुआ कहने लगते हैं। क्योंकि अब आप पहले की तरह हर चीज बर्दाश्त [संगीत] नहीं करते। पहले आप लोगों को खोने से डरते
थे। अब आप खुद को खोने से डरते हो और यही सबसे बड़ा बदलाव है। सच यह है कि हर कोई आपके साथ आपकी नई जर्नी तक नहीं आएगा। कुछ लोग सिर्फ आपके पुराने वर्जन से जुड़े थे। उस वर्जन से जो हमेशा अवेलेबल था। हमेशा लोगों को खुश करने में लगा रहता था। लेकिन [संगीत] अब आप बदल रहे हो। अब आप खुद को चुनना सीख रहे हो। शुरुआत में यह अकेलापन दर्द देता है क्योंकि इंसान आदतों से जुड़ा होता है लेकिन धीरे-धीरे वही अकेलापन आपकी ताकत बन जाता है क्योंकि तब आप समझते हो कि शांति भी
एक पावर होती है। लोनलीनेस और सॉलिट्यूड में फर्क होता है। लोनलीनेस कहती है मेरे पास कोई नहीं है। [संगीत] लेकिन सॉलिट्यूड कहती है मेरे पास मैं खुद हूं। और जिस दिन इंसान खुद के साथ कंफर्टेबल हो जाता है उस दिन दुनिया उसे डराना बंद कर देती है। अब आपको हर जगह फिट होने की जरूरत महसूस नहीं होती। [संगीत] अब आपको हर किसी को समझाने की जरूरत महसूस नहीं होती। अब आपको हर इंसान का अप्रूवल नहीं चाहिए क्योंकि आपकी वैल्यू अब अंदर से आने लगी है बाहर से नहीं। पहले अगर कोई छोड़कर चला जाता था तो
आप टूट जाते थे। अब आप सोचते हो अगर गया तो शायद वह मेरी कहानी का हिस्सा था। मंजिल नहीं। पहले आप खुद को साबित करना चाहते थे। अब आप खुद को बेहतर बनाना चाहते हो। यही असली मैच्योरिटी है। धीरे-धीरे आपका पूरा माइंडसेट बदल जाता है। अब आप [संगीत] हर बहस में नहीं पड़ते। हर ड्रामे में शामिल नहीं होते। हर इंसान को एक्सेस नहीं देते क्योंकि आप समझ चुके हो आपकी एनर्जी लिमिटेड है और उसे गलत जगह खर्च करना खुद के साथ धोखा है। लेकिन याद रखना मजबूत बनने का मतलब पत्थर बन जाना नहीं होता। आपको
अभी भी प्यार महसूस होगा। आपको अभी भी दर्द होगा। फर्क सिर्फ इतना होगा कि अब दर्द आपको तोड़ेगा नहीं। आपको [संगीत] मजबूत बनाएगा। अब आप साइलेंस से नहीं डरते। इग्नोर से नहीं टूटते। रिजेक्शन से नहीं बिखरते क्योंकि आपने खुद को पकड़ना सीख लिया है और यही असली पावर है। अल्टीमेटली जिंदगी में कोई हमेशा साथ नहीं रहने वाला। ना लोग ना रिश्ते ना भीड़। लेकिन अगर आपने खुद को [संगीत] बना लिया अगर आपने खुद के अंदर शांति पैदा कर ली तो फिर अकेलापन भी आपको कमजोर नहीं कर पाएगा। और शायद यही इंसान की सबसे [संगीत] बड़ी
जीत होती है। अकेला लेकिन फिर भी अंदर से पूरा महसूस करना। [संगीत] ओम