मैं एक बेवकूफ आदमी हूं अब लोग मुझे पागल कहते हैं अगर ऐसा है तो यह तरक्की होती पर उनकी नजरों में मैं आज भी उतना ही बेवकूफ हूं पर मुझे बुरा नहीं लगता सब मुझे प्यारे लगते हैं भले ही जब वे मुझ पर हंसते हैं बल्कि जब वे हंसते हैं तो और भी प्यारे लगते हैं काश मैं भी उनके साथ हंस सकता खुद पर नहीं पर उनके लिए पर मैं उदास हो जाता हूं क्योंकि वह सच्चाई नहीं जानते और मैं जानता हूं सच्चाई को अकेले जानना कितना मुश्किल है पर वे नहीं समझेंगे कभी नहीं समझेंगे
पहले मुझे बेवकूफ लगने में दुख होता था बेवकूफ दिखने में नहीं बल्कि होने में मैं हमेशा से बेवकूफ रहा हूं और यह बात मुझे शायद बचपन से पता थी सा साल की उम्र से मुझे इसका एहसास था स्कूल गया फिर विश्वविद्यालय में पढ़ा जितना सीखा उतना ही समझा कि मैं बेवकूफ हूं ऐसा लगा जैसे विज्ञान मुझे यही साबित करने के लिए बना हो जिंदगी भी ऐसी ही थी हर साल के साथ मैं और भी पक्का हो गया कि हर हाल में मैं बेवकूफ दिखता हूं सब मुझ पर हंसते थे लेकिन कोई नहीं जानता था कि
मैं खुद जानता था कि मैं बहुत बेवकूफ हूं और यह बात मुझे सबसे ज्यादा खलती थी पर यह मेरी गलती थी मैं इतना मंडी था कि किसी को यह बताने की हिम्मत नहीं करता अगर मैंने कभी किसी से यह बात कह दी होती तो शायद उसी दिन खुद को खत्म कर लेता मेरे अंदर यह घमंड बढ़ता गया जब युआ था तो डरता था कि कहीं यह सच मेरे मुंह से ना निकल जाए पर बड़े होने के बाद मैं शांत हो गया क्यों यह मुझे नहीं पता शायद इसलिए कि मेरी आत्मा में कुछ और बड़ा दुख
बस गया था वह दुख था यह जानना कि दुनिया में कुछ भी मायने नहीं रखता मुझे यह आभास लंबे समय से था पर पिछले साल अचानक यह पूरी तरह समझ में आया मैंने महसूस किया कि यह सब बेकार है जैसे कुछ भी नहीं है पहले लगता था पहले कुछ रहा होगा फिर समझा पहले भी कुछ नहीं था और भविष्य में भी कुछ नहीं होगा तब मैं लोगों से नाराज होना छोड़ दिया उन्हें देखना तक बंद कर दिया तब मुझे सच्चाई मिली मैंने यह सच्चाई पिछले नवंबर में जानी वह 3 नवंबर की शाम थी वह शाम
बहुत उदास थी बारिश हो रही थी सब कुछ गीला और ठंडा था और उसी शाम मैंने आकाश में एक तारा देखा वह तारा मुझे एक विचार दे गया मैंने उसी रात खुद को खत्म करने की ठान ली जैसे ही मैं आसमान देख रहा था एक छोटी बच्ची ने मेरी कोहनी पकड़ ली सड़क सुसान थी दूर एक गाड़ी वाला अपनी गाड़ी में सो रहा था वह बच्ची आठ साल की थी उसके सिर पर एक रूमाल था और उसने गीला फटा पुराना कपड़ा पहना हुआ था उसके जूते टूटे और भीगे हुए थे यह बात मुझे सबसे ज्यादा
याद है उसने मुझे कोनी पकड़कर खींचा और पुकारा वह रो नहीं रही थी पर उसके बोलने में रुकावट थी वह कांप रही थी और डर के मारे मम्मी मम्मी कह रही थी मैंने उसकी तरफ देखा कुछ नहीं कहा और आगे बढ़ गया पर वह मुझे खींचती उसकी आवाज में वह डर था जो बच्चों की आवाज में तब होता है जब वे हताश होते हैं उसने ठीक से नहीं कहा पर मैं समझ गया कि उसकी मां बीमार थी शायद मर रही थी वह मदद मांगने निकली थी मैंने उसका साथ नहीं दिया उल्टा मैंने उसे दूर करने
की कोशिश की मैंने कहा कि किसी पुलिस के पास जाओ पर व हाथ जोड़कर रोती रही और मेरे साथ-साथ दौड़ती रही आखिरकार मैंने पैर पटका और चिल्लाया वह साहब साहब कहकर एकदम सड़क पार भाग गई एक और आदमी दिखा और वह उसकी तरफ भागी मैं अपने पांचवें माले पर पहुंचा मेरा एक कमरा है जिसमें और भी किराएदार रहते हैं मेरा कमरा छोटा और साधारण है एक खिड़की है कमरे में एक सोफा है जो पुराना है एक मेज है जिस पर किताबें रखी हैं और दो कुर्सियां है और एक पुरानी आराम कुर्सी मैंने बैठकर मोमबत्ती जलाई
और सोचना शुरू किया मेरे कमरे के बगल वाले कमरे में तीन दिन से हंगामा चल रहा था वहां एक रिटायर्ड कप्तान रहता था उस के पास अजीब लोग आते थे शराब पीते थे और ताश खेलते थे एक रात उन्होंने लड़ाई भी की मकान मालकिन शिकायत करना चाहती थी पर कप्तान से डरती थी एक और किराएदार थी जो अपने तीन बच्चों के साथ थी वे सब बीमार थे वे भी कप्तान से डरती थी उनकी हालत इतनी खराब थी कि सबसे छोटा बच्चा डर से बेहोश हो गया था पर कप्तान की हरकतों से मुझे कभी फर्क नहीं
पड़ा मैं उसे अनदेखा करता था मैं रात भर जागता था मेज पर बैठा रहता था कुछ नहीं करता था बस दिन में पढ़ता था रात भर बस बैठा रहता था उस रात मैंने मेज पर अपना रिवॉल्वर रखा खुद से पूछा क्या यह सच है और जवाब हां यह सच है मैंने तय कर लिया था कि उसी रात खुद को खत्म कर लूंगा पर शायद मैं ऐसा कर देता अगर वह छोटी बच्ची मुझे ना मिली होती देखो भले ही मुझे कुछ भी मायने नहीं रखता था पर मुझे दर्द महसूस होता था अगर कोई मुझे मारता तो
दर्द होता यही बात भावनाओं पर भी लागू होती थी अगर कुछ दुखद होता तो मुझे दुख होता जैसे पहले हुआ करता था जब जिंदगी में चीजें मायने रखती थी उस रात मैंने दुख महसूस किया मैं निश्चित रूप से उस बच्ची की मदद करता तो फिर मैंने उसकी मदद क्यों नहीं [संगीत] की क्योंकि जब वह मुझे खींच रही थी मेरे मन में एक सवाल उठा यह सवाल बेकार था पर मैं उलझ गया मैं सोच रहा था कि अगर मैं उसी रात अपनी जान लेने वाला हूं तो कुछ भी मुझे क्यों प्रभावित करें पर अचानक मुझे उस
बच्ची पर तरस आया मुझे खुद पर अजीब सा गुस्सा आया मैंने सोचा जब तक मैं जिंदा हूं मैं दुख गुस्सा और शर्म महसूस कर सकता हूं पर अगर मैं दो घंटे में मरने वाला हूं तो इस बच्ची से मेरा क्या लेना देना मेरे बाद सब कुछ खत्म हो जाएगा फिर भी क्यों यह सोच मुझे उस बच्ची के लिए दया करने से रोक नहीं सकी मैंने गुस्से में उस बच्ची को डांटा जैसे कहना चाहता था कि मैं अमानवीय बन सकता हूं क्योंकि सब खत्म होने वाला है पर अब मुझे लगता है मैं इसलिए चिल्लाया था क्योंकि
मैंने सोचा कि सब कुछ मुझ पर निर्भर करता है जैसे मेरी मौत के बाद यह दुनिया मेरे लिए खत्म हो जाएगी मुझे लगा यह पूरी दुनिया मेरी चेतना का हिस्सा है अगर मैं नहीं रहूंगा तो यह भी गायब हो जाएगी यह सब सोचते हुए मेरे दिमाग में एक नई बात आई मान लो मैं चांद या मंगल पर रहता और वहां कोई शर्मनाक काम करता अगर मैं अब धरती पर हूं और कभी वापस ना जाऊं तो क्या मुझे उस काम पर शर्म आएगी [संगीत] यह सब सवाल बेकार थे क्योंकि मेरे सामने रिवॉल्वर रखी थी [संगीत] पर
इन सवालों ने मुझे बेचैन कर दिया मैंने तय किया बिना इन सवालों का हल निकाले मैं मर नहीं सकता उस बच्ची ने मुझे बचा लिया मैंने गोली चलाने का इरादा टाल दिया तब कप्तान के कमरे का शोर कम हो गया वे सोने की तैयारी कर रहे थे मैं अपनी कुर्सी पर बैठा रहा फिर बिना जाने मैं सो गया ऐसा पहली बार हुआ था सपने बहुत अजीब होते हैं कुछ हिस्से इतने साफ होते हैं कि जैसे गहनों की तरह चमकते हो बाकी हिस्से ऐसे निकल जाते हैं जैसे समय और जगह के पार भाग रहे हो सपने
दिल की सुनते हैं दिमाग की नहीं फिर भी सपने में दिमाग क्या-क्या खेल करता है मैंने अपने भाई को सपने में देखा वह 5 साल पहले मर चुका था पर सपने में हम साथ थे मुझे पता था कि वह मर चुका है फिर भी मैं हैरान नहीं हुआ ऐसा कैसे हो सकता है अब मैं अपने सपने की बात शुरू करता हूं वह सपना मैंने 3 नवंबर की रात देखा लोग मुझसे कहते हैं वह बस एक सपना था पर क्या फर्क पड़ता है कि वह सपना था या हकीकत अगर उस सपने ने मुझे सच्चाई दिखा दी
एक बार सच्चाई जान लो तो वह सपना हो या हकीकत फर्क नहीं पड़ता मेरे सपने ने मुझे नई जिंदगी दिखाई वह जिंदगी खूबसूरत थी सुनो मैंने पहले बताया था कि मैं अनजाने में सो गया था ऐसा लगा जैसे मैं अ भी उन्हीं विचारों में खोया हुआ हूं मैंने सपना देखा कि मैंने रिवॉल्वर उठाया और सीधा अपने दिल पर निशाना साधा पहले मैंने तय किया था कि मैं अपनी कन पट्टी पर गोली मारूंगा लेकिन मैंने सीने पर निशाना लगाया फिर कुछ पल रुका अचानक मेरी मोमबत्ती मेज और दीवार हिलने लगे मैंने जल्दी से ट्रिगर दबा दिया
सपने में जब हम गिरते हैं चाकू से घायल होते हैं या मार खा रहे होते हैं तब हमें दर्द महसूस नहीं होता मेरे सपने में भी ऐसा ही था मुझे दर्द नहीं हुआ पर ऐसा लगा जैसे गोली चलने से सब कुछ हिल गया हो सब काला हो गया मैं किसी सख्त जगह पर पीठ के बल लेटा हुआ था कुछ दिख नहीं रहा था मैं हिल भी नहीं पा रहा था आसपास लोग शोर मचा रहे थे कप्तान चिल्ला रहा था मकान मालकिन चीख रही थी फिर सब रुक गया मैंने खुद को एक बंद ताबूत में पाया
मुझे लगा कि मैं मरा हुआ हूं यह बात मैं पूरी तरह जानता था मैं हिल नहीं सकता था देख नहीं सकता था लेकिन सोच सकता था मैंने इसे मान लिया जैसे सपनों में हम सच को बिना सवाल किए मान लेते हैं अब मुझे जमीन में दफना दिया गया सब लोग चले गए मैं अकेला रह गया मैंने हिलने की कोशिश नहीं की मुझे ठंड महसूस हो रही थी खासकर पैरों की उंगलियों पर पर मैं कुछ महसूस नहीं कर रहा था न जाने कितना समय बीता शायद एक घंटा शायद कई दिन अचानक मेरे बंद बाए पलक पर
एक पानी की बूंद गिरी फिर हर मिनट एक और बूंद गिरती रही यह बात मेरे दिल में गुस्सा पैदा कर रही थी मैं सोचने लगा यह गोली का घाव है बूंदे गिरती रही मैंने पूरी ताकत से अंजान शक्ति को पुकारा कहा अगर तुम हो और कुछ भी इससे बेहतर हो सकता है तो इसे बदल दो अगर तुम मुझे इस बेकार और अजीब जिंदगी के लिए सजा दे रहे हो तो जान लो कि यह सजा मुझे फर्क नहीं डालती एक मिनट तक सब शांत रहा फिर एक और बूंद गिरी और मुझे भरोसा हुआ कि अब सब
कुछ बदलने वाला है अचानक मेरी कब्र खुल गई मुझे एक अनजान शक्ति ने उठा लिया हम अंतरिक्ष में उड़ने लगे मुझे मेरी दृष्टि वापस मिली रात का समय था और ऐसा अंधेरा मैंने कभी नहीं देखा था हम धरती से दूर अंतरिक्ष में उड़ रहे थे मैं डर नहीं रहा था मुझे गर्व हो रहा था कि मैं निडर हूं अचानक मैंने एक तारा देखा मैंने पूछा क्या यह सीरियस तारा है मेरे साथी ने कहा नहीं यह वही तारा है जिसे तुमने घर लौटते समय देखा था उसकी शक्ल इंसानों जैसी थी पर मुझे उससे गहरी नफरत हो
रही थी मैंने सोचा मौत के बाद भी जीवन है पर मैं इसे स्वीकार नहीं करता हम अज्ञात अंतरिक्ष में उड़ रहे थे मैंने परिचित तारों को देखना बंद कर दिया था फिर मैंने हमारे सूरज जैसा एक तारा देखा मेरे दिल में एक अजीब सा जी जीवन का एहसास हुआ मैंने पूछा अगर यह सूरज है तो धरती कहां है मेरे साथी ने दूर एक तारा दिखाया जो हरा सा चमक रहा था हम उस तारे की ओर बढ़ने लगे जैसे जैसे हम करीब पहुंचे मैंने महासागर और यूरोप का आकार देखा मुझे लगा कि यह हमारी धरती जैसा
है मैंने सोचा पर मैं सिर्फ अपनी धरती से प्यार कर सकता हूं मेरे साथी ने कहा तुम सब कुछ देखोगे और फिर मैंने खुद को एक नई धरती पर पाया वहां का सूरज चमक रहा था पेड़ फूल पक्षी सब ऐसे लग रहे थे जैसे मुझसे बात कर रहे हो फिर मैंने वहां के लोगों को देखा वे सुंदर थे उनकी आंखें चमक रही थी उनके चेहरे शांति से भरे थे वे मेरे पास आए उन्होंने मुझे छूमा बच्चों जैसी मासूमियत से उन्होंने मुझे घेर लिया वे मुझे घेर ले गए उन्होंने मुझसे कुछ नहीं पूछा जैसे उन्हें सब
कुछ पहले से पता हो वे मेरी तकलीफ मिटाना चाहते थे क्या तुम्हें पता है मान लो यह सिर्फ एक सपना था फिर भी उन मासूम और खूबसूरत लोगों का प्यार मेरे दिल में हमेशा के लिए बस गया ऐसा लगता है कि उनका प्यार अब भी वहां से मुझ तक बह रहा है मैंने उन्हें देखा था जाना था और यह समझा था कि वे कितने प्यारे थे मैं उनसे प्यार करता था उनके लिए मैं बाद में दुखी भी हुआ पर कई चीजें मैं समझ नहीं सकता मुझे हैरानी होती थी कि वे हमारी तरह विज्ञान के बिना
कैसे रह सकते थे लेकिन मैंने जल्दी समझ लिया कि उनकी समझ अलग थी उन्हें हमारी तरह ज्ञान की तलाश नहीं थी क्योंकि उनकी जिंदगी पूरी थी उनका ज्ञान हमारे ज्ञान से गहरा और ऊंचा था वे बिना विज्ञान के जानते थे कि कैसे जीना है उन्होंने मुझे पेड़ दिखाया वे पेड़ों को ऐसे देखते थे जैसे उनसे बात कर रहे हो शायद सच में वे पेड़ों से बात करते थे जानवर उनके साथ शांति से रहते थे जानवर उन्हें प्यार करते थे उन्होंने मुझे तारों की ओर इशारा किया उन्होंने कुछ बताया जो मैं समझ नहीं पाया पर मुझे
लगा कि वे तारों से जुड़े हुए थे वे मुझे समझाने की कोशिश नहीं करते थे व मुझे वैसे ही प्यार करते थे मैंने भी उनकी पूजा की उनके पैर चूमे वे यह देखकर भी सहज रहे वे बच्चों जैसे खुश और निर्दोष थे उनकी जिंदगी सरल थी वे पेड़ों के फल खाते शहद लेते और जानवरों के दूध उनके काम हल्के थे वे बच्चों को नए मेहमान की तरह खुशी से अपनाते थे उनके बी बीच कभी लड़ाई झगड़ा नहीं होता था बुढ़ापा शांति से आता था जब कोई बूढ़ा मरता तो वे उसे मुस्कुराकर विदा करते वहां कोई
आंसू नहीं बस प्यार होता था ऐसा लगता था कि मौत के बाद भी वे अपने प्रियजनों से जुड़े हुए [संगीत] हैं उनके पास मंदिर नहीं थे पर वे पूरी सृष्टि के साथ एकता महसूस करते थे उनके पास कोई धर्म नहीं था लेकिन उन्हें यकीन था कि जब उनकी खुशी अपनी सीमा पर पहुंचेगी तो व पूरी सृष्टि के साथ और गहरे जुड़ेंगे रात को सोने से पहले वे गाते थे उनके गीत सरल थे वे दिन की तारीफ करते पेड़ों समुद्र और एक दूसरे की प्रशंसा करते उनके गीत दिल से निकलते और सीधे दिल तक पहुंचते कुछ
गीत इतने गहरे थे कि मैं उनके शब्द समझने के बाद भी उनका मतलब नहीं समझ पाता था लेकिन मेरा दिल उन्हें धीरे-धीरे अपनाता था मैंने उनसे कहा कि मैं इस खुशी को पहले से महसूस करता था मैंने धरती पर यह चाहत महसूस की थी पर उसके साथ हमेशा दुख होता था जब मैं उन्हें अपनी धरती की बात बताता वे कुछ समझ नहीं पाते पर उनकी आंखों में प्यार देखकर मेरा दिल भी उनके जैसा मासूम और शांत हो जाता था अब लोग मुझ पर हंसते हैं कहते हैं कि ऐसे सपने का हर हिस्सा याद रखना मुमकिन
नहीं पर मैं जानता हूं यह सपना मेरे दिल में सच की तरह बैठ गया वह सपना शब्दों में पूरी तरह नहीं उतारा जा सकता लेकिन मैं सोचता हूं क्या यह सचमुच सपना था क्योंकि जो भयानक घटना इसके बाद हुई वह सपने में नहीं गढ़ी जा सकती थी वह घटना इतनी सच्ची थी कि मेरा दिल उसे अपने आप नहीं बना सकता सुनो अब मैं सच बताऊंगा असल में मैंने उन्हें करप्ट कर दिया हां मैंने उन्हें करप्ट कर दिया यह कैसे हुआ मुझे नहीं पता लेकिन मुझे सब याद है मेरा सपना हजारों सालों का था मैं ही
उनकी बर्बादी का कारण था जैसे कोई बीमारी पूरे राज्य को खराब कर देती है वैसे मैंने भी उस मासूम और खुशहाल दुनिया को करप्ट कर दिया उन्होंने झूठ बोलना सीखा झूठ बोलने में मजा आने लगा छोटी छोटी छोटी बातों से यह शुरू हुआ पर यह झूठ उनके दिलों में बैठ गया फिर लालच आई लालच ने जलन को जन्म दिया जलन ने क्रूरता को और फिर पहला खून बहा वे हैरान हुए डरे फिर वे अलग-अलग गुटों में बट गए वे एक दूसरे के खिलाफ हो गए उनके बीच झगड़े होने लगे शर्म नाम की चीज आई और
फिर उसे छिपाने के लिए दिखावा उन्होंने इज्जत और झंडों की बातें शुरू की जानवरों पर जुल्म होने लगे जानवर जंगलों में भाग गए वे भी इंसानों से नफरत करने लगे इंसान अलग-अलग भाषाओं में बात करने लगे उन्होंने दुख को अपनाया और कहा कि सच्चाई तक पहुंचने का रास्ता दुख से होकर जाता है फिर विज्ञान आया वे खुद को बुरा मानते थे और मानवता की बा करते थे उन्होंने न्याय का आविष्कार किया पर न्याय के लिए गिलोटिन बनाई व यह भूल गए कि कभी वे खुश और मासूम थे वे अपनी पुरानी खुशी को मानने से भी
इनकार करने लगे लेकिन उनके दिल में फिर से उस मासूमियत और खुशी की चाहत [संगीत] थी उन्होंने एक नई मूर्ति बनाई उस मूर्ति को पूजने लगे अगर कोई उन्हें उनकी खोई हुई मासूमियत लौटाने की बात करता तो वे इंकार कर देते वे कहते हम जानते हैं कि हम झूठे और बुरे हैं लेकिन हमारे पास विज्ञान है विज्ञान से हमें सच्चाई मिलेगी सच्चाई जीवन से ऊपर है हर कोई अपने बारे में सोचने लगा उन्होंने दूसरों को दबाना शुरू किया गुलामी शुरू की कमजोर लोग ताकतवर लोगों के अधीन हो गए कुछ संत आए उन्होंने बताया कि वे
अपना संतुलन खो चुके हैं लेकिन लोग उन पर पत्थर फेंकते थे मंदिरों के दरवाजों पर खून बहा फिर कुछ लोग आए जिन्होंने सभी को जोड़ने की कोशिश की लेकिन उनके विचारों पर युद्ध शुरू हो गए लोग थक गए उनके चेहरों पर दुख दिखने लगा उन्होंने दुख को सुंदरता कहना शुरू किया अपने गीतों में उन्होंने दुख की प्रशंसा [संगीत] की मैं उनके बीच घूमता रहा हाथ मलता रहा उनसे प्यार करता रहा पर मैंने खुद को ही दोषी ठहराया मैंने उनसे कहा यह सब मेरी गलती है मुझे सजा दो मुझे सूली पर चढ़ा दो लेकिन उन्होंने मेरी
बातों पर हंस दिया कहा कि उनकी अपनी गलती है आखिरकार उन्होंने मुझे पागल घोषित कर दिया तब मेरा दिल टूट गया मुझे लगा जैसे मैं मर जाऊंगा और तभी मैं जाग गया सुबह थी मोमबत्ती बुझ चुकी थी सब शांत था मैंने तुरंत रिवॉल्वर को दूर फेंक दिया अब मुझे जिंदगी चाहिए थी मैंने ठान लिया कि अब मैं सच्चाई फैला आंगा मैंने सच्चाई देखी थी लोग मुझ पर हंसते थे लेकिन मुझे अब यह परवाह नहीं मैंने सच्चाई को अपनी आंखों से देखा है मैं गलतियां करूंगा पर रुका नहीं रहूंगा मैंने वह सच्चाई देखी है जिसे कोई
शब्द बयान नहीं कर सकते सपने और असल जिंदगी में क्या फर्क है जिंदगी भी एक सपना ही है अगर हर कोई बस दूसरों से प्यार करना सीख तो सब कुछ एक दिन में बदल सकता है यह सच्चाई पुरानी है लेकिन इसे अपनाया नहीं गया अब मैंने उस बच्ची को ढूंढ लिया है और मैं अब चलते जाऊंगा