आपने कभी सोचा है पहला एक करोड़ कमाना इतना मुश्किल क्यों माना जाता है? क्यों? हर सक्सेसफुल इन्वेस्टर जैसे चार्ली मंगर या वारेन बफेट यही कहते हैं। द फर्स्ट मिलियन इज द हार्डेस्ट। सच क्या है? क्या इसमें कोई सीक्रेट [संगीत] फार्मूला है या सिर्फ बोरिंग डिसिप्लिन? आज इस वीडियो में हम मोटिवेशन नहीं। रियल स्ट्रेटजी समझेंगे। कैसे जीरो से स्टार्ट [संगीत] करके माइंडसेट लीवरेज और पेशेंस से पहला एक करोड़ बनाया जाता है। पार्ट एक [संगीत] हार्ड ट्रुथ नोबडी टेल्स यू चार्ली मंगर किसी रिच फैमिली से नहीं थे। वो किसी सिल्वर स्पून के साथ पैदा नहीं हुए थे।
ना उनके पास कोई इन्हहेरिटेड एंपायर था। ना कोई पावरफुल बैकग्राउंड। वह भी उन्हीं लोगों में से थे जो मिडिल क्लास रियलिटी से आते हैं। जहां हर डॉलर की वैल्यू होती है। उन्होंने शुरुआत की ग्रोसरी स्टोर में काम करके बफेद सांड में। हां, वही स्टोर जो बाद में जुड़ा वारेन बफेट के परिवार से 121 घंटे काम। सप्ताह दर सप्ताह [संगीत] और बदले में मिलते थे सिर्फ $2 पर डे। आज के हिसाब से वह रकम बहुत छोटी लगती है। लेकिन उस समय भी वह कोई बड़ी कमाई नहीं थी। और यहीं से शुरू हुआ पहला ब्रूटल लेसन। उन्होंने
देखा दिन भर खड़े रहो, शेलफ भरो, कस्टमर संभालो, कैश [संगीत] काउंट करो। लेकिन दिन के अंत में इनकम लगभग वही रहती है। तब उनके दिमाग में एक बात बैठ गई। [संगीत] हार्ड वर्क अलोन डजंट स्किल। अगर आपकी इनकम सिर्फ आपके घंटों पर डिपेंड करती है तो आपकी अर्निंग की लिमिट [संगीत] भी आपके 24 घंटों से बंधी है। आप 8 घंटे काम कर सकते हो, 10 घंटे कर सकते हो, 12 घंटे भी कर सकते हो लेकिन 24 से ज्यादा नहीं। यही वो इनविज़िबल सीलिंग है जो सिर्फ मेहनत से पैसा कमाने वालों को रोक देती है। अब
इसे नंबर्स से समझते हैं। अगर आपके पास 5000 हैं और आप 20% रिटर्न कमा लेते हो तो कितना बड़ा? 1000 1000 से क्या बदलता है ना आपकी लाइफ सिक्योर होती है ना कोई बड़ा डिसीजन पॉसिबल होता है ना फियर कम होता है अब वही कैलकुलेशन 1 करोड़ पर करो 20% रिटर्न [संगीत] 20 लाख 20 लाख सिर्फ नंबर नहीं है वो ऑप्शंस है वो सेफ्टी है वो ब्रीथिंग स्पेस है यही गेम बदलता है गेम मेहनत से नहीं बदलता गेम बेस से बदलता है जब बेस छोटा होता है तो ग्रोथ इनसिग्निफिकेंट लगती है। जब बेस बड़ा होता
है तो [संगीत] वही परसेंटेज एक्सप्लोसिव इंपैक्ट देता है। चार्ली मंग ने बहुत जल्दी समझ लिया था कि जिंदगी का असली लक्ष्य सिर्फ इनकम कमाना नहीं है। लक्ष्य है कैपिटल बेस बनाना। क्योंकि कैपिटल बेस बनते ही कंपाउंडिंग मीनिंगफुल हो जाती है। छोटे नंबर्स पर कंपाउंडिंग थ्योरी लगती है। बड़े नंबर्स पर कंपाउंडिंग पावर बन जाती है। यही रीजन है कि पहला 1 करोड़ [संगीत] इतना मुश्किल लगता है। क्योंकि इस फेज में रिटर्न स्लो लगते हैं। प्रोग्रेस इनविज़िबल लगती है। एफर्ट ज्यादा और रिजल्ट कम दिखता है। पेशेंस टूटने लगता है। आपको लगता है इतनी मेहनत कर रहा हूं।
फिर भी लाइफ क्यों नहीं बदल रही? लेकिन सच यह है आप फाउंडेशन बना रहे होते हो। फाउंडेशन बोरिंग होता है। विजिबल नहीं होता लेकिन वही बिल्डिंग को संभालता है। पहला करोड़ ग्लैमरस नहीं होता। वो ग्राइंड होता है। आप खर्च काटते हो। आप टेंपटेशंस इग्नोर करते हो। आप शॉर्ट टर्म थ्रिल छोड़ते हो। आप कंपैरिजन बंद करते हो और धीरे-धीरे [संगीत] बेस बिल्ड होता है। लोग पूछते हैं रिच बनने का सीक्रेट क्या है? सीक्रेट सिंपल है। पहले अपने नंबर्स को मीनिंगफुल बनाओ। जब तक बेस छोटा है, परसेंटेज का फायदा नहीं दिखेगा। लेकिन जिस दिन बेस बड़ा हो
गया, परसेंटेज आपका सर्वेंट बन जाएगा। चार्ली मंग ने यह ग्रोसरी स्टोर में सीखा था कि मेहनत [संगीत] जरूरी है। लेकिन सिर्फ मेहनत काफी नहीं है। अगर आप सिर्फ टाइम बेच रहे हो तो आप इनकम कमा रहे हो। अगर आप कैपिटल बिल्ड कर रहे हो तो आप फ्यूचर खरीद रहे हो और यही वो हार्ड ट्रुथ है जो बहुत कम लोग समझते हैं। गेम वहीं बदलता है [संगीत] जहां बेस बड़ा होता है और बेस बड़ा होता है। कंसिस्टेंट सेविंग स्मार्ट इन्वेस्टिंग और बोरिंग डिसिप्लिन से यही पहला कदम है। पहले 1 करोड़ की तरफ। पार्ट दो [संगीत] पेन
बिल्स पावर। चार्ली मंगर की जिंदगी 1950 के दशक [संगीत] में सचमुच टूट गई थी। ऊपर से देखने पर वह एक एजुकेटेड लॉयर थे। हार्व ग्रेजुएट, ब्राइट फ्यूचर, रेस्पेक्टेबल करियर लेकिन जिंदगी सीवी नहीं देखती। पहले डिवोर्स, एक इमोशनल शॉक, घर बिखर गया, [संगीत] रिश्ते टूट गए। अंदर से कॉन्फिडेंस हिल गया। और जब इंसान इमोशनली स्टेबल नहीं होता, तो हर दूसरा प्रॉब्लम डबल भारी लगने लगता है। लेकिन असली तूफान अभी बाकी था। उनके 8 साल के बेटे को ल्यूकेमिया डायग्नोस हुआ। एक पिता के लिए इससे [संगीत] बड़ा डर कोई नहीं होता। हॉस्पिटल विजिट्स, टेस्ट, रिपोर्ट्स, डॉक्टर की
गंभीर आवाज और उस समय मेडिकल इंश्योरेंस भी नहीं था। हर [संगीत] ट्रीटमेंट, हर इंजेक्शन, हर हॉस्पिटल बिल उनकी पॉकेट से जा रहा था। दिन में वो काम करते थे। रात में हॉस्पिटल में बैठते थे। [संगीत] इमोशनली टूटे हुए, फिजिकली थके हुए, फाइनेंशियली ड्रेंड, धीरे-धीरे सेविंग्स [संगीत] खत्म हो गई। जो कुछ जमा था वो इलाज में चला गया। वो फाइनेंशियली लगभग जीरो पर आ गए। सोचिए [संगीत] एक तरफ बेटे की बीमारी, दूसरी तरफ बेल्स, तीसरी तरफ फ्यूचर की अनसर्टेनिटी। इसी फेज में उन्होंने [संगीत] एक ब्रूटल रियलाइजेशन किया। इफ यू डोंट हैव अ बेस, लाइफ स्टेज फ्रेजाइल,
फ्रजाइल यानी [संगीत] नाजुक। जिंदगी बाहर से स्टेबल दिख सकती है। अच्छी डिग्री, अच्छी जॉब, रिस्पेक्टेबल इमेज। लेकिन अगर आपके पास फाइनेंशियल बेस नहीं है तो एक अनएक्सेक्टेड इवेंट सब कुछ हिला सकता है। इमरजेंसी [संगीत] फंड नहीं, एसेट्स नहीं, पैसिव इनकम नहीं तो हर प्रॉब्लम आपको जीरो लाइन पर ला सकती है और यही उनके साथ हुआ। उन्होंने महसूस किया कि इनकम और वेल्थ अलग चीजें हैं। इनकम आती है और खर्च हो जाती है। [संगीत] वेल्थ बचती है और आपको बचाती है। उस दौर में उनका वेट कम हो गया। स्ट्रेस बढ़ गया। मेंटल प्रेशर एक्सट्रीम था। लेकिन
इसी दर्द के बीच उनके अंदर क्लेरिटी पैदा हुई। [संगीत] उन्होंने समझा कि फाइनेंशियल सिक्योरिटी ऑप्शनल नहीं है। यह लग्जरी नहीं है। यह सर्वाइवल टूल है। [संगीत] लोग सोचते हैं पहला एक करोड़ स्टेटस के लिए होता है। बड़ी कार, लग्जरी लाइफस्ट कंफर्ट। लेकिन असली सच यह है पहला 1 करोड़ लग्जरी नहीं देता। पहला एक करोड़ स्टेबिलिटी देता है। स्टेबिलिटी का मतलब क्या? अगर घर में मेडिकल इमरजेंसी हो [संगीत] तो पैनिकिक ना हो। अगर जॉब चली जाए तो लाइफ कोलैप्स ना हो। अगर मार्केट क्रैश हो तो स्लीप डिस्टर्ब [संगीत] ना हो। जब बेस नहीं होता तो हर
छोटी घटना भी बड़ी लगती है। जब बेस होता है तो बड़ी घटनाएं मैनेजेबल लगती हैं। [संगीत] चार्ली ने समझा कि पैसा सिर्फ अर्निंग का खेल नहीं है। पैसा प्रोटेक्शन का खेल है। प्रोटेक्शन अगेंस्ट फियर, प्रोटेक्शन अगेंस्ट अनसर्टेनिटी, प्रोटेक्शन अगेंस्ट हेल्पलेसनेस। उन्होंने महसूस किया [संगीत] कि फ्रैजाइल लाइफ में फ्रीडम पॉसिबल नहीं है। अगर आप हमेशा डर में जी रहे हो कि अगर यह हो गया तो क्या होगा? अगर वह हो गया तो क्या होगा? तो आप बोल्ड डिसीजन नहीं ले सकते और फ्रेजाइल लाइफ में ग्रोथ स्लो रहती है। उन्होंने यह भी देखा कि इमोशनल पेन और
फाइनेंशियल स्ट्रेस मिलकर इंसान को तोड़ देते हैं। लेकिन अगर फाइनेंशियल बेस हो तो [संगीत] कम से कम एक टेंशन कम होती है। दर्द कम नहीं होता लेकिन डर कम हो जाता है। यही फर्क है। पहला एक करोड़ आपको इनसेंसिटिव नहीं बनाता। वो आपको प्रिपयर्ड [संगीत] बनाता है। प्रिपयर्ड फॉर शॉक्स प्रिपयर्ड फॉर डाउन टर्न्स। प्रिपयर्ड फॉर अनसर्टेनिटी। उस समय चार्ली के पास चॉइस नहीं थी। उन्हें पेन सहना पड़ा। लेकिन उसी पेन ने उनके अंदर फाइनेंशियल डिसिप्लिन की आग जला दी। उन्होंने ठान लिया कि अब जिंदगी फ्रजाइल नहीं रहेगी। अब बेस बनेगा। अब इमरजेंसी उन्हें डिस्ट्रॉय [संगीत]
नहीं करेगी। और यहीं से माइंडसेट बदल गया। पहले वह अर्निंग पर फोकस्ड थे। अब वह फाउंडेशन पर फोकस्ड [संगीत] हो गए। पहले वह इनकम देखते थे। अब वह नेटवर्थ देखने लगे। पहले वह सैलरी सोचते थे। अब वह सिक्योरिटी सोचने लगे। दर्द ने उन्हें वीक [संगीत] नहीं बनाया। दर्द ने उन्हें अवेयर बनाया और अवेयरनेस ही पावर है। क्योंकि जब [संगीत] तक इंसान पेन फील नहीं करता वो चेंज की अर्जेंसी नहीं समझता। चार्ली ने उस फेज में एक चीज डीपली समझ ली। फाइनेंशियल फ्रीडम एक्साइटमेंट से नहीं आती। फाइनेंशियल फ्रीडम प्रिपरेशन से आती है और प्रिपरेशन शुरू होती
है बेस से। इमरजेंसी फंड, एसेट्स, कैपिटल कुशन बिना बेस के लाइफ फ्रजाइल है। बेस के साथ लाइफ स्टेबल है और स्टेबिलिटी ही पहला स्टेप है। रियल फ्रीडम की तरफ। [संगीत] पहला एक करोड़ ट्रॉफी नहीं है। पहला एक करोड़ शील्ड है। एक शील्ड [संगीत] जो आपको गिरने से नहीं रोकता लेकिन गिरकर टूटने से बचाता है। यही दर्द आगे चलकर उनकी स्ट्रेंथ बना। [संगीत] पेनबर्स पावर और पावर आती है। जब आप फ्रेजिलिटी को पहचानते हो और उसे खत्म करने का फैसला लेते हो। पार्ट तीन स्मार्ट लीवरेज वर्सेस ब्लाइंड रिस्क। [संगीत] चार्ली मंगर ने बिजनेस शुरू किया ट्रांसफार्मर
कंपनी। उस समय माहौल उनके फेवर में था। टाइम चल रहा था। फैक्ट्रियां लग रही थी। इंफ्रास्ट्रक्चर [संगीत] एक्सपेंड हो रहा था। हर इंडस्ट्रियल सेटअप को ट्रांसफार्मर्स चाहिए थे। डिमांड हाई थी। ऑर्डर्स आ रहे थे। रेवेन्यू [संगीत] फ्लो स्टेडी था। बाहर से सब परफेक्ट दिख रहा था। यहीं से उन्होंने लीवरेज लिया, [संगीत] लोन लिया, कैपिटल लगाया, स्केल करने की कोशिश की। शुरुआत में सब स्मूथ था, ग्रोथ दिख रही थी, कॉन्फिडेंस बढ़ रहा था। [संगीत] लेकिन फिर वॉर खत्म हो गया। और जैसे ही वॉर खत्म हुआ, डिमांड गिरने [संगीत] लगी। फैक्ट्रियों की एक्सपेंशन स्लो हो गई। नए
ऑर्डर्स कम होने लगे और तभी एक और प्रॉब्लम आई। कंपटीशन। जैसे ही लोगों ने देखा कि ट्रांसफार्मर [संगीत] इंडस्ट्री प्रॉफिटेबल है, कई नए प्लेयर्स मार्केट में आ गए। सप्लाई बढ़ी, प्राइस [संगीत] वॉश शुरू हो गए। मार्जिनस स्क्वीज होने लगे। जो कल तक प्रॉफिट था, आज लॉस में बदलने लगा। बिजनेस धीरेधीरे स्ट्रगल [संगीत] करने लगा। कैश फ्लो टाइट हो गया। लोन प्रेशर बढ़ गया। ऑपरेशनल स्ट्रेस एक्सट्रीम [संगीत] हो गया। चार्ली ने कोशिश की। एक्सपेंसेस कट किए। पर्सनल लाइफ स्टाइल मिनिमाइज किया। हर पॉसिबल एफर्ट लगाया। [संगीत] लेकिन बिजनेस इवेंचुअली डूब गया। यह सिर्फ फाइनेंसियल लॉस नहीं था।
यह इमोशनल ब्लो भी था क्योंकि उन्होंने रिस्क लिया था, [संगीत] लीवरेज लिया था और रिजल्ट नेगेटिव आया। लेकिन यही फर्क पैदा होता है। एग्जांपल बहुत लोग फेलर के बाद कंक्लूजन निकाल लेते हैं। रिस्क मत लो। लीवरेज डेंजरस है। सेफ खेलो। एंड [संगीत] लेकिन चार्ली ने अलग लेसन निकाला। लेसन लीवरेज गलत नहीं। रिस्क गलत नहीं। गलत है। ब्लाइंड [संगीत] ऑप्टिमिज्म। ब्लाइंड ऑप्टिमिज्म क्या है? मार्केट हाई है तो मान लेना कि हमेशा हाई रहेगा। डिमांड स्ट्रांग है तो अस्यूम करना कि हमेशा स्ट्रांग रहेगी। ग्रोथ दिख रही है तो मान लेना कि परमानेंट [संगीत] है। उन्होंने रियलाइज किया
कि उन्होंने डिमांड साइकिल को परमानेंट समझ लिया था। उन्होंने अपसाइड देखा लेकिन डाउन साइड डीपली कैलकुलेट नहीं किया और यही ब्लाइंड ऑप्टिमिज्म था। इस फेलोर ने उन्हें डराया नहीं। इसने उन्हें डिसिप्लिन बनाया। उन्होंने समझा कि लीवरेज पावरफुल टूल है। लेकिन तभी जब डाउन साइड लिमिटेड हो। [संगीत] अगर अपसाइड बड़ा है लेकिन डाउन साइड अनलिमिटेड है तो वह गैंबल है। और अगर अपसाइड अट्रैक्टिव है लेकिन डाउन [संगीत] साइड सर्वाइवेबल है तो वह कैलकुलेटेड रिस्क है। कुछ साल बाद उन्होंने फिर लीवरेज लिया। लेकिन इस बार माइंडसेट बदला हुआ था। इस बार इमोशन नहीं [संगीत] नंबर्स लीड कर
रहे थे। उन्होंने रियलस्टेट में इन्वेस्ट किया। एक प्रॉपर्टी अपॉर्चुनिटी सामने आई। 49 साल लीज वाली प्रॉपर्टी थी। रूल यह था कि बैंक लोन तभी मिलेगा जब लीज मिनिमम 50 साल की हो। यहां 49 साल थी। सिर्फ एक साल कम। टेक्निकली परफेक्ट [संगीत] डील। लोकेशन स्ट्रांग। रिसेल पोटेंशियल हाई। लेकिन लगभग हर बैंक ने लोन देने से मना कर दिया। क्यों? क्योंकि सिस्टम रिजिड [संगीत] था। पॉलिसी क्लियर थी। 49 साल इक्वल्स नो लोन। यही बहुत लोग हार मान लेते हैं। [संगीत] बैंक नहीं दे रहा तो छोड़ दो। रिस्की है। कॉम्प्लिकेटेड है। एक्स लेकिन इस बार चार्ली ब्लाइंड
ऑप्टिमिज्म से ऑपरेट नहीं कर रहे थे। उन्होंने नंबर्स [संगीत] देखे। उन्होंने कैलकुलेट किया। वर्स्ट केस क्या है? एम अगर डील डिले हो जाए तो अगर बायर लेट मिले तो अगर रिसेल प्राइस थोड़ा कम मिले तो उन्होंने डाउन साइड सिनेरियो मेंटली प्ले किए और उन्होंने कंक्लूड किया डाउन साइड मैनेजेबल है। फिर उन्होंने अप्रोच बदली। [संगीत] बड़े बैंक्स के पीछे भागने की बजाय उन्होंने स्मॉल लोकल बैंक ढूंढा। एक ऐसा बैंक [संगीत] जिसे डिपॉजिट्स डिप्लॉय करने थे जिसे बोरोअर्स चाहिए थे। उन्होंने बैंक के सामने पूरा केस रखा। प्रॉपर्टी डिटेल्स, मार्केट एनालिसिस, [संगीत] कैश फ्लो एस्टीमेट, एग्जिट प्लान। उन्होंने
ऑप्टिमिज्म सेल नहीं किया। उन्होंने कैलकुलेशन प्रेजेंट किया। स्मॉल लोकल बैंक कन्विंस हो गया। लोन मिल गया। डील एग्जीक्यूट हुई। प्रॉपर्टी खरीदी गई। शॉर्ट पीरियड होल्ड किया। राइट बयर मिला। डील फ्लिप हुई। [संगीत] प्रॉफिट अर्न हुआ। यह जैकपॉट नहीं था। यह मिरेकल नहीं था। यह स्ट्रक्चरर्ड लीवरेज था। इस बार उन्होंने साइकिल समझी थी। पॉलिसी समझी [संगीत] थी। रिस्क क्वांटिफाई किया था। और सबसे इंपॉर्टेंट उन्होंने डाउन साइड सर्वाइव करने लायक रखा था। यहीं से उनका फाइनेंशियल बेस बिल्ड होना शुरू हुआ। एक सक्सेसफुल डील कॉन्फिडेंस देती हैं। [संगीत] दो डील्स कैपिटल देती हैं। तीन डील्स फाउंडेशन देती हैं।
और फाउंडेशन ही आगे कंपाउंडिंग की जमीन बनती है। उन्होंने समझ [संगीत] लिया था लीवरेज एक्सीलरेटर है। लेकिन स्टीयरिंग व्हील कैलकुलेशन होना चाहिए। अगर एक्सीलरेटर है और स्टीयरिंग [संगीत] कंट्रोल नहीं तो क्रैश निश्चित है। अगर एक्सीलरेटर है और स्टीयरिंग डिसिप्लिन है तो स्पीड कंट्रोलोल्ड ग्रोथ बनती है। ब्लाइंड रिस्क इमोशन से आता है। स्मार्ट लीवरेज क्लेरिटी से आता है। ब्लाइंड रिस्क सब [संगीत] ठीक होगा पर चलता है। स्मार्ट लीवरेज अगर गलत हुआ तो से शुरू होता है। यह ट्रांसफार्मर बिजनेस ने उन्हें पेन दिया। [संगीत] रियलस्टेट डील ने उन्हें पावर दी। दोनों में कॉमन क्या था? लीवरेज। लेकिन
डिफरेंस क्या था? अप्रोच। पहली बार उन्होंने फ्यूचर अस्यूम किया था। दूसरी बार उन्होंने फ्यूचर एनालाइज किया था। और यही शिफ्ट उन्हें ऑर्डिनरी बिजनेसमैन से एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी थिंकर बनाती है। यहीं से उनका फाइनेंशियल बेस बनना शुरू हुआ। [संगीत] क्योंकि अब हर मूव कैलकुलेटेड था। हर रिस्क मेजर्ड था। हर लीवरेज स्ट्रक्चर था। स्मार्ट लीवरेज वेल्थ बनाता है। ब्लाइंड ऑप्टिमिज्म वेल्थ मिटा देता है। और यही लेसन पहले 1 करोड़ की जर्नी में सबसे क्रिटिकल होता है। पार्ट चार द रियल सीक्रेट चार्ली मंगर का पावरफुल कांसेप्ट था। एव्री डॉलर इज माय एंप्लई। यह सिर्फ एक मोटिवेशनल लाइन नहीं थी।
यह उनका पूरा फाइनेंशियल ऑपरेटिंग सिस्टम था। जब वह यह कहते थे कि हर डॉलर मेरा एंप्लई है [संगीत] तो उसका मतलब बहुत डीप था। एंप्लई क्या करता है? काम करता है, [संगीत] वैल्यू क्रिएट करता है, रेवेन्यू जनरेट करता है और आइडियली आपके लिए प्रॉफिट बनाता है। चार्ली ने पैसे को खर्च करने वाली चीज नहीं माना। [संगीत] उन्होंने पैसे को वर्कर माना। एक डिसिप्लिन वर्कर जो 24 घंटे काम करता है, जो छुट्टी नहीं मांगता, जो इमोशनल नहीं होता, जो कंप्लेन नहीं करता, जो स्ट्राइक पर नहीं जाता और यही माइंडसेट गेम बदल देता है। पहला करोड़ कमाने
से पहले आप अकेले काम कर रहे होते हो। आपकी स्किल काम कर रही होती है। आपका टाइम काम कर रहा होता है। आपकी एनर्जी काम कर रही होती है। अगर आप काम बंद करते हो, इनकम रुक जाती है। लेकिन जैसे ही पहला करोड़ बनता है, इक्वेशन बदल जाती है। अब सिर्फ आप नहीं काम [संगीत] कर रहे। अब आपका पैसा भी काम कर रहा है। यही शिफ्ट रियल सीक्रेट है। पहले फेज में आप वर्कर होते हो। दूसरे फेज में आप ओनर बनते हो। वर्कर टाइम बेचता है। ओनर कैपिटल डिप्लॉय करता है। चार्ली ने बहुत जल्दी समझ
[संगीत] लिया था कि अल्टीमेट फ्रीडम इनकम से नहीं आती। फ्रीडम एसेट से आती है। इनकम आपको सर्वाइव करवाती है। एसेट्स आपको [संगीत] सिक्योर करते हैं। कंपाउंडिंग आपको ग्रो करवाती है। जब पहला करोड़ बनता है तो आपके पास एक आर्मी तैयार हो जाती है। [संगीत] ₹1 करोड़ का मतलब क्या है? अगर उस पर 10% भी रिटर्न मिले तो ₹1 लाख। अब इमेजिन करो आपको 10 लाख मिले बिना एक्स्ट्रा आवर काम किए। आप सो रहे हो, आप ट्रैवल कर रहे हो, आप फैमिली के साथ हो और आपका पैसा क्वाइटली ग्रो कर रहा है। यही कंपाउंड इफेक्ट की
शुरुआत है। कंपाउंड इफेक्ट फ्लैशी नहीं होता। स्लो शुरू होता है, इनविज़िबल होता है, लेकिन अनस्टपेबल होता है। पहले साल ग्रोथ छोटी लगती है। दूसरे साल थोड़ा नोटिसेबल होती है। [संगीत] तीसरे साल कॉन्फिडेंस बढ़ता है। चौथे साल मोमेंटम आता है। पांचवें साल एक्सीलरेशन दिखता है और फिर एक स्टेज आता है। जहां ग्रोथ लीनियर नहीं रहती। एक्सपोनेंशियल हो जाती है। लेकिन यह तभी पॉसिबल है जब आप पैसे को एंप्लई ट्रीट करते हो। अगर हर बोनस आते ही [संगीत] लाइफस्टाइल अपग्रेड कर दोगे तो एंप्लई हायर ही नहीं होगा। अगर हर रेंज के बाद ईएमआई बढ़ा दोगे तो [संगीत]
कैपिटल बेस बिल्ड ही नहीं होगा। चार्ली का फोकस सिंपल था। पहले एंप्लई हायर करो। फिर एंप्लई को मल्टीप्लाई करो। यानी [संगीत] पहले सेविंग्स बिल्ड करो। फिर सेविंग्स को इन्वेस्ट करो। फिर इन्वेस्टमेंट को रीइ्वेस्ट करो। यह बोरिंग प्रोसेस है। कोई Instagram रील मोमेंट नहीं है। कोई ओवरनाइट थ्रिल नहीं है। [संगीत] लेकिन यही सस्टेनेबल है। जब आपका पैसा काम करना शुरू करता है, तो डिसीजन बदल जाते हैं। [संगीत] पहले आप सोचते हो मुझे यह काम करना ही पड़ेगा। अब आप सोचते हो क्या मैं यह काम करना चाहता हूं? पहले सर्वाइवल मोड होता है। अब चॉइस मोड होता
है। पहले फियर डोमिनेट करता है। अब क्लेरिटी डोमिनेट करती है। चार्ली ने एक और बात डीपली [संगीत] समझी थी। अगर आपका पैसा आइडल पड़ा है तो वह अनइंप्लॉयड है और अनइंप्लॉयड एंप्लई [संगीत] वैल्यू क्रिएट नहीं करता। इसलिए उन्होंने हमेशा कैपिटल एलोकेट करने पर फोकस [संगीत] किया। आइडल कैश नहीं प्रोडक्टिव कैश [संगीत] लेकिन प्रोडक्टिव का मतलब रेकलेस नहीं कैलकुलेटेड लॉन्ग टर्म ओरिएंटेड पेशेंस बेस्ड यही कंपाउंड इफेक्ट है। कंपाउंड इफेक्ट सिर्फ [संगीत] इंटरेस्ट नहीं है। कंपाउंड इफेक्ट डिसिप्लिन है। कंपाउंड इफेक्ट डिलेड ग्रेटिफिकेशन है। कंपाउंड इफेक्ट रीइन्वेस्टमेंट माइंडसेट है। पहला करोड़ माइलस्टोन नहीं है। वह लॉन्च पैड है।
[संगीत] वह उस फेज की एंट्री है। जहां आपकी मेहनत अकेली नहीं रहती। अब आपका पैसा आपके साथ मार्च करता है। ईच क्स मैस द ग्राम और जैसे जैसे कैपिटल बढ़ता है। एंप्लई फोर्स बढ़ती है। [संगीत] 1 करोड़ एक लेवल 5 करोड़ बिगर फोर्स 10 करोड़ इक्वल फाइनेंशियल इंजन [संगीत] 20 करोड़ इक्वल्स सेल्फ सस्टेनिंग सिस्टम। लेकिन शुरुआत वही [संगीत] है। पहला करोड़ जब तक बेस नहीं है, कंपाउंड इफेक्ट मीनिंगफुल नहीं है। [संगीत] जब बेस है तो टाइम आपका पार्टनर बन जाता है। टाइम प्लस कैपिटल एक्सप्पोनेंशियल पावर और यही रियल सीक्रेट है। रिच बनने का नहीं इंडिपेंडेंट
बनने का। [संगीत] क्योंकि जब आपके पास इनफ एंप्लई होते हैं तो आप मजबूरी में काम नहीं करते। आप पर्पस से काम करते हैं। पहला करोड़ आपको सेलिब्रेट करने के [संगीत] लिए नहीं मिलता। पहला करोड़ आपको एमावर करने के लिए मिलता है। उसके बाद आपकी मेहनत ऑप्शनल नहीं होती। लेकिन प्रेशर ऑप्शनल हो जाता है। और यही कंपाउंड इफेक्ट की असली शुरुआत है। जब एव्री डॉलर आपका एंप्लई बन जाता है [संगीत] तब लाइफ धीरे धीरे। फ्रेजाइल से स्टेबल और स्टेबल से पावरफुल बनती है। [संगीत] पार्ट पांच प्रैक्टिकल ब्लूप्रिंट। अब सबसे बड़ा सवाल सामने आता है। हम कैसे
कमाएं? पहला 1 करोड़। थ्योरी सुनना आसान [संगीत] है। इंस्पिरेशन लेना आसान है। लेकिन एग्जीक्यूशन वहीं असली गेम शुरू होता है। [संगीत] पहला करोड़ इमोशनल नहीं होता। पहला करोड़ प्रैक्टिकल होता है। और प्रैक्टिकल चीजें ग्लैमरस नहीं होती। क्लियर होती हैं। [संगीत] स्टेप एक राइट योर गोल। स्पेसिफिक टारगेट लिखो। मुझे अमीर बनना है। यह गोल नहीं है। मुझे फाइनेंशियल फ्रीडम चाहिए। यह भी वेग है। क्लियर लिखो। 1 करोड़ का कितने साल में? किस सोर्स से? एक्टिव इनकम से, बिजनेस से, इन्वेस्टमेंट [संगीत] से, मल्टीपल स्ट्रीम से विदाउट क्लेरिटी नो डायरेक्शन। अगर डेस्टिनेशन क्लियर नहीं है तो कोई भी
रोड सही लगेगी। और जब कोई भी रोड सही लगे तो अक्सर आप कहीं नहीं पहुंचते। गोल लिखने से मैजिक नहीं होता। [संगीत] लेकिन फोकस एक्टिवेट होता है। अगर आपने डिसाइड किया 5 साल में 1 करोड़ तो ऑटोमेटिकली ब्रेन कैलकुलेशन शुरू करेगा। 1 करोड़ 5 साल 20 लाख पर ईयर 20 लाख 12 लगभग [संगीत] 1.7 लाख पर मंथ अब करोड़ माउंटेन नहीं रहा। मंथली टारगेट बन गया। यही क्लेरिटी पावर है। स्टेप दो नंबर्स गेम समझो। [संगीत] 1 करोड़ इमोशनल टारगेट नहीं है। मैथमेटिकल टारगेट है। इसे ब्रेक करो। 100010 शून्य लोग 5000 2000 लोग 10 शून्य [संगीत]
जीरो 1000 लोग 1 लाख छर 100 लोग अब सोचो आपकी स्किल किस मॉडल में फिट होती है? अगर आप बिगिनर हो तो [संगीत] 1 लाख टिकट प्रोडक्ट बेचना मुश्किल होगा। लेकिन 1000 या 2000 का प्रोडक्ट पॉसिबल है। पहले टारगेट डिफाइन करो। फिर रिवर्स इंजीनियर करो। मनी फीलिंग्स से नहीं बनता। वॉल्यूम जीरो वैल्यू से बनता है। स्टेप तीन सॉल्व अ रियल प्रॉब्लम। सबसे बड़ी गलती मैं क्या बेचूं? [संगीत] सही सवाल है। लोग किस प्रॉब्लम से परेशान हैं? लोग प्रोडक्ट नहीं खरीदते। सॉल्यूशन खरीदते हैं। वेट लॉस में ट्रांसफॉर्मेशन बिकता है। [संगीत] करियर ग्रोथ में ओपोरर्चुनिटी बिकती है।
फाइनेंशियल क्लेरिटी में रोड मैप बिकता है। खुद से पूछो। आप किस प्रॉब्लम को डीपली समझते हो? करियर गाइड, डिजिटल स्किल, इन्वेस्टमेंट [संगीत] नॉलेज, लोकल सर्विस, मार्केट बड़ा है। लेकिन एक रूल याद रखो। शैलो सॉल्यूशन काम नहीं करेगा। डीप सॉल्यूशन ट्रस्ट बनाता है और ट्रस्ट लॉन्ग टर्म वेल्थ बनाता है। स्टेप चार बोरिंग कंसिस्टेंसी अब सबसे अनकंफर्टेबल पार्ट कंसिस्टेंसी क्रिप्टो शॉर्टकट ऑप्शंस ट्रेडिंग शॉर्टकट क्विक मनी स्कीम्स डिस्ट्रैक्शन है। चार्ली मंगर का रूल सिंपल था। अवॉइड स्टुपिडिटी इंस्टेड ऑफ चेजिंग ब्रिलियंस। ओवर लीवरेज अवॉइड करो। [संगीत] ग्रीड अवॉइड करो। गेट रिच क्विक ट्रैप अवॉयड करो। स्लो ग्रोथ बोरिंग लगती
है। लेकिन स्लो ग्रोथ टिकाऊ है। [संगीत] फास्ट स्पाइक फ्रजाइल है। कंपाउंडिंग को टाइम चाहिए। ब्रांड को टाइम चाहिए। स्किलस्ट्री को टाइम चाहिए। पहला करोड़ फायरवर्क से नहीं बनता। पहला करोड़ हैबिट से बनता है। डेली सेविंग्स हैबिट, लर्निंग हैबिट, रीइन्वेस्टमेंट हैबिट, [संगीत] पेशेंस हैबिट, कंसिस्टेंसी ग्लैमरस नहीं होती। लेकिन कंसिस्टेंसी अनबिटेबल होती है। फाइनल रियलिटी प्रैक्टिकल ब्लूप्रिंट सिंपल है। क्लियर गोल, [संगीत] क्लियर नंबर्स, क्लियर प्रॉब्लम, क्लियर डिसिप्लिन, इमोशन कम, कैलकुलेशन ज्यादा, नॉइज़ कम, फोकस ज्यादा। भारत में करोड़ बनाना इंपॉसिबल नहीं है। लेकिन शॉर्टकट माइंडसेट के साथ पॉसिबल नहीं है। पहला करोड़ ड्रामेटिक लीप नहीं है। इट्स ए
डिसिप्लिन क्लाइम स्टेप बाय स्टेप मंथ बाय मंथ ईयर बाय ईयर। और जो इस बोरिंग प्रोसेस को एक्सेप्ट कर लेता है उसी के लिए कंपाउंड इफेक्ट काम करना शुरू करता है। पहला एक करोड़ आपको रिच नहीं बनाता। सच तो यह है पहला एक करोड़ आपको बिलियनियर नहीं बनाता। हेडलाइन नहीं बनाता। वायरल स्टोरी नहीं बनाता लेकिन वह आपको एक चीज देता है जो उससे भी ज्यादा पावरफुल है। वह आपको फ्री बनाता है। फ्री फ्रॉम, सैलरी [संगीत] प्रेशर, इमरजेंसी फियर, टॉक्सिक बॉस, सर्वाइवल माइंडसेट। जब आपके पास बेस नहीं होता तो हर डिसीजन मजबूरी [संगीत] से लिया जाता है।
जॉब पसंद नहीं फिर भी करनी पड़ेगी। बॉस डिसरिस्पेक्ट करता है फिर भी सहना पड़ेगा। बिजनेस आईडिया है रिस्क नहीं ले सकते। क्यों? क्योंकि सर्वाइवल मोड में फ्रीडम लग्जरी होती है। लेकिन पहला 1 करोड़ सर्वाइवल मोड खत्म करता है। अब डिसीजन डर से नहीं क्लेरिटी से होते हैं। अब आप जॉब करते हो क्योंकि आप करना चाहते हो। ना कि इसलिए क्योंकि करना मजबूरी है। अब इमरजेंसी आने पर आपका दिल नहीं धड़कता। आपका कैलकुलेटर काम करता है। अब मार्केट गिरने पर पैनिकिक नहीं होता। प्लानिंग होती है और यही असली वेल्थ है। याद रखो पहला करोड़ पैसा नहीं
सिखाता। सब्र सिखाता है। वह सिखाता है। डिलीट ग्रेटिफिकेशन, डिसिप्लिन, कंसिस्टेंसी, इमोशनल कंट्रोल। [संगीत] पहले करोड़ की जर्नी में आपको कंपैरिजन जलाएगा। शॉर्टकट्स टेम करेंगे। [संगीत] स्लो ग्रोथ फ्रस्ट्रेट करेगी। लेकिन अगर आप टिके रहे तो वही पेशेंस कंपाउंड होकर वेल्थ बन जाता है। वही सब्र आगे चलकर करोड़ों बनाता है। क्योंकि असली कंपाउंडिंग सिर्फ पैसे की नहीं होती। माइंडसेट की भी होती है। पहले आप पैसे के पीछे भागते हो। फिर पैसा आपके सिस्टम का हिस्सा बन जाता है। पहले आप डिसिप्लिन फोर्स करते हो। फिर डिसिप्लिन हैबिट बन जाता है। पहले सेविंग मुश्किल लगती है। फिर इन्वेस्टिंग नेचुरल
लगती है। और धीरे-धीरे [संगीत] आप ऑर्डिनरी अर्नर से कैपिटल एलोकेटर बन जाते हो। अगर आप अभी जीरो पर हो तो परेशान मत हो। जीरो वीकनेस नहीं है। जीरो स्टार्टिंग पॉइंट है। हर बड़ा नंबर कभी जीरो ही था। गेम अनफेयर नहीं है। गेम डिसिप्लिंड है। मार्केट इमोशंस रिवॉर्ड नहीं करता। मार्केट पेशेंस रिवॉर्ड करता है। वर्ल्ड इंटेलिजेंस रिवॉर्ड नहीं करता। वर्ल्ड कंसिस्टेंसी रिवॉर्ड करता है। शॉर्ट टर्म एक्साइटमेंट, लॉन्ग टर्म रिग्रेट बन सकता है। लेकिन लॉन्ग टर्म डिसिप्लिन, परमानेंट फ्रीडम बन सकता है। सही माइंडसेट, सही लीवरेज, सही रिस्क कंट्रोल और लॉन्ग टर्म थिंकिंग से। आप भी बना सकते
हो अपना पहला एक [संगीत] करोड़। धीरे, स्टडी, सॉलिड। और जब पहला एक करोड़ बन [संगीत] जाएगा तो समझना आपने सिर्फ पैसा नहीं कमाया। आपने कॉन्फिडेंस कमाया, क्लेरिटी कमाई, कंट्रोल कमाया और वही कंट्रोल फ्यूचर के हर करोड़ की फाउंडेशन बनेगा। यह दौड़ स्पीड की नहीं है। यह दौड़ डायरेक्शन की है। यह गेम लक का नहीं है। यह गेम डिसिप्लिन का है। और अगर आप इस डिसिप्लिन को एक्सेप्ट कर लेते हो, तो टाइम आपका एनिमी नहीं रहेगा। टाइम आपका पार्टनर बन जाएगा। यही फिलॉसफी है, यही सिस्टम है, यही माइंडसेट है। दिस इज लेजेंड ऑफ फाइनेंस। जहां हम
सिर्फ पैसा कमाने की बात नहीं करते। हम फाइनेंशियल फ्रीडम बनाने की बात करते हैं। मिलते हैं अगले वीडियो में।