[संगीत] [हंसी] [संगीत] अंकित जी कैन श्री हर महाराज जी आपके चरणों में कोटि कोटि प्रणाम गुरु जी आपने अपनी साधना में सबसे कठिन और निर्णायक क्षण कौन सा अनुभव किया था जिससे आपको श्री जी के प्रेम में पूरी तरह डुबोने का कार्य किया उस जब किडनी फेल हुई जब किडनी फेल हुई काफी समय हो गया 20 22 वर्ष तब हमको लगा कि ब्राह्मण कुल में जन्म हुआ बाल्यावस्था से भगवान के मार्ग में निकले नेटिक ब्रह्मचर्य वान प्रस्थ सन्यास जो और अब जब प्रिया लाल के प्रेम में है तो प टूट गए गाड़ी के तो अब
कैसे चले तो जब के पहे टूट गए तो फिर ऐसे हो गए अब मेरे बनाए ना बनेगी अब मेरे से कोई साधन नहीं बन सकता शरीर भयानक रोग और यह असाध्य रोग है केवल श्री जी का जो पूर्ण आश्रय भगवत आश्रय तो बचपन से था 13 वर्ष की अवस्था से निकल पड़े थे लेकिन कहीं नान कहीं साधना का पक्ष था लेकिन फिर एक मोड़ आया जहां ना तो हम आसन पर बैठ सकते हैं और ना हम कोई साधना कर सकते हैं तब रोने के सिवा दूसरा कोई रास्ता नहीं बचा वहीं से एक रास्ता खुला प्रियालाल
के प्रेम मार्ग का गुरुजी एक शब्द बस कि राधा जी ही क्यों आपके आपको क्या लगता है कि आपकी जिंदगी में शिव जी के बाद श्री राधा का ही आगमन कैसे भगवान शिव ने दिया यह हमारा स्वयं का निर्णय नहीं था ये भगवान विश्वनाथ विश्वेश्वर काशी के जो भगवान है ये उनका कृपा प्रसाद हां उन्हीं का हां तो मतलब इतना भी कम नहीं जो विश्वनाथ जी से प्रेम हु किशोरी जी से जो किशोरी जी से व विश्वनाथ जी से सही पूछो तो दोनों एक ही है आपसे वो लोक सुना था कांतिक पहले म परमत वाला
जग वही है पर फिर आपसे वो देवी पुराण वाला सु जी जी शिवजी हमारी प्रिया जू हा भगवान शंकर भगवान शंकर तो भगवान शंकर है आशुतोष है उन्हीं की कृपा से सब है सब कुछ ने की कृपा से मुझे वृंदावन आना रास का दर्शन होना प्रिया प्रीतम के शरणागत होना यह रस मिलना ये सब महादेव जी की कृपा से किंचित मात्र इसमें मेरी कोई साधना नहीं कोई तपस्या नहीं यह केवल करुणा भगवान शंकर की और उन्हीं की कृपा से शिवम जी कनाडा राधे राधे राधे राधे महाराज जी महाराज जी क्या जीवन में अकेलेपन का अनुभव
होना वास्तविकता में आध्यात्मिक जागरूकता के संकेत है या कि यह केवल मन की एक अस्थाई स्थिति है यदि यह आध्यात्मिक संकेत है इसी अकेलेपन की भावना में तो फिर जीव फस जाता है ये कोई आध्यात्मिक असंगोहम पुरुष का थोड़ी अनुभव है य अकेलेपन का अभाव विषय संयोग की आकांक्षा से युक्त है ये कोई परमात्मा प्राप्ति वाला संगो हम थोड़ी है अगर यही शास्त्र स्वाध्याय हो सत्संग श्रवण हो और राग का नाश होकर के वैराग्य होने लगे और फिर य आने लगे यहां मैं के सिवा कोई नहीं परमात्मा के सिवा कोई नहीं यहां सब नानाम मिथ्या
है ये तो समझ में आवे कि हां मेरा ये सब मिथ्या है ऐसा समझ में आता है हा त तो बहुत उत्तम बात है किसी साथी की आवश्यकता की नहीं है नहीं काम वेदना की पीड़ा काम वेदना कुछ भी नहीं नाम जप नाम जप रोज होता है शास्त्र स्वाध्याय वो कभी कभार नहीं नियम पूर्वक नियम पूरक कीजिए तो आग और भड़क उठेगी अध्यात्म की श्रीमद् भागवत का पाठ कीजिए अर्थ सहित कीजिए और ब्रह्मचर्य ब ठीक से चल रहे हो चलो भगवान की विशेष कृपा लेकिन अभी कोई स्थाई वृत्ति नहीं है इस पर कोई विश्वास ना
कर ले क्योंकि मन जो है ना बहुत चंचल है व कभी किसी भी क्ण बदल सकता है कपा सब कुछ सही होता है एकांत ल तो अच्छा लगता है 90 प्र समय तो मतलब बहुत ही वो आनंदमय आनंदम राधा राधा और मां बाप की सेवा और बाकी सब पिया से जितना हो सके दान पूण बहुत पूर्व जन्म का कोई सुकृत है जिससे ऐसी मंगलमय भावना उद पर इसको गुप्त रखो और इसको सजो इसको बढ़ाओ और इसको बचाओ जब पच जाएगा तब य स्थाई माना जाएगा ठीक है खूब नाम जप करो स्वाध्याय जरूर करो हो सके
तो एक विवेक चूड़ामणि ले लो आद्य गुरु भगवान शंकराचार्य जी की है ज्ञानगनगोठरी सतोगुण क्या है रजोगुण क्या है तमोगुण क्या है कर्म इंद्रिया क्या है ज्ञान इंद्रिया क्या है स्थूल शरीर क्या है सूक्ष्म शरीर क्या है कारण शरीर क्या है पंचकोष क्या है तो पता चलने लगेगा कि मैं कौन हूं पूरा बहुत आराम से थोड़ा थोड़ा पढ़िए लेकिन उसे मनन कीजिए ठीक है जागृति बिजलानी जी राधे राधे महाराज जी महाराज जी यदि ज्ञान किताबों से परे है तो धर्म ग्रंथ क्यों है और क्या अध्ययन के बिना ज्ञान धर्म ग्रंथ को किताबें कैसे कसे सकते
किसका है आप किताबें कैसे कह सकते सांसारिक जिसमें आध्यात्मिक पढ़ाई होती है तो उनको धर्म ग्रंथों को पहले तो शब्द सही सांसारिक पढ़ाई को किताबें कहते हैं बच्चा यह तो हमारे जीवन है यह तो हमारे साक्षात वांगम ब्रह्म स्वरूप है इनको किताबें नहीं कहा जा सकता धर्म ग्रंथ कहा जाता है अब धर्म ग्रंथ में जो लिखा हुआ है वो बिना गुरु के कैसे समझ सकते हो कैसे समझ सकते हो पढ़ के समझ सकते हो क्या जो उसमें सूत्र लिखा हुआ है मान लिखा है सर्वम लमदम ब्रह्म ने नाना किंचन ब्रह्म के सिवा कुछ नहीं है
तो मुझे स्त्री दिखाई दे रहा पुरुष दिखाई दे रहा है हे गुरुदेव अब इसको हम क्या कहे तो गुरुदेव कृपा करके फिर उसे बताते हैं तो गुरुदेव फिर ऐसा कैसे तो पूरा ग्रंथ का जो रहस्य है वह हमें गुरुदेव बताते हैं गुरुदेव जो शब्द ब्रह्म के पारगाव और परब्रह्म के अनुभूत महापुरुष है वह हमें शास्त्र के रहस्य को बताते हैं शब्दार्थ भावार्थ रहस्य अथ तो रहस्य गुरु के बिना नहीं बता सकते शास्त्र ऐसे वर्णन करते हैं पूर्व को जाना है और ठीक 10 कदम बाद राइट मुड़ जाना है अब यह कौन बात बतावे यह तो
गुरु बताएगा कि यहां के बाद इसमें लिखा नहीं है लेकिन इसमें राइट मुड़ो यहां से ऐसे चलो तब आप पहुंच पाओगे लक्ष्य पे बिना गुरु के ज्ञान नहीं होता और शास्त्र स्वाध्याय स्वयं तभी सफल होता है जब किसी महापुरुष के सानिध्य में किया जाए क्या बिना अध्ययन किए ज्ञान प्राप्त हो सकता है हां हो सकता है बिना अध्ययन के भी ज्ञान प्राप्त हो सकता है यदि गुरु चरणों की सेवा की जाए और निरंतर गुरु अधीनता रखी जाए तो एक भी क कारा ना पड़े तो भी चारों वेद उसके हृदय में स्पित हो जाएंगे एक बार
आद्य गुरु भगवान शंकराचार्य जी के शिष्य जन बैठे थे व गंगा स्नान करके आए तो श्री जो त्रोचायक भगवान शंकराचार्य जी की शरीर सेवा में रहते थे उनके सुख विधान में लगे रहते थे तो किसी सूत्र की ब्रह्म सूत्र की व्याख्या करनी थी तो उन्होने का गुरुदेव भगवान सूत्र की व्याख्या कर दो उनका त्रुटच जी के लिए तो कहा प्रभु उनको क्या सुनाना कभी वो वेदांत पढ़ते नहीं कभी वेदांत श्रवण नहीं करते हर समय शरीर सेवा में लगे रहते हैं आपकी तो उनका गुरु सेवा को इतना लघु मान लिया आने दो उनको आए बोले बेटा
इस सूत्र की व्याख्या कर दो तो बिना पढ़े ब्रह्म सूत्र के तभी वो आचार्य पदवी पर ोट काचार्य जी गुरु सेवा से जो ज्ञान है शुद्ध ज्ञान गुरु चरणों की सेवा से प्राप्त होता है यदि गुरु भगवान को समर्पित हो जाए अब आप देखो देव ऋषि नारद जी गुरु है और उन्होंने उपदेश किया राम राम कहो व राम राम भी नहीं कह पाए मरा मरा मरा मरा भगवान के प्रकट होने के पहले ही भगवान की लीला की रचना कर दी ब्रह्मऋषि कहलाए तो नाम जो जो गुरु ने दिया उसमें सब कुछ छुपा हुआ है जैसे
राम तोय दो अक्षर में पूरा ब्रह्म ज्ञान छुपा हुआ है जो भगवन नाम है जो गुरु प्रदत मंत्र है उसी में समस्त शास्त्र छुपे हुए है तो ऐसा नहीं कि ब्रह्मा भूति नहीं कर सकते वो भगवत प्राप्ति नहीं कर सकते कर सकते हैं गुरु कृपा ही केवलम गुरु कृपा ही केवलम गुरु कृपा से सब कुछ हो सकता है महाभारत में एक प्रसंग आता है उपमन्यु जी के सम चरणा आश्रित हुए वेद पढ़ने के लिए उन्होंने कह दिया गाय चराओ तो उनकी बहुत सी बड़ी गौशाला थी जंगल में चले जाते और गाय चराते 15 दिन बाद
आए तो बड़े हष्ट पुष्ट तो उन्होंने कहा तुम हष्ट पुष्ट कहते हो तो उ कहा गुरुदेव भिक्षा मांग लेते हैं बोले बिना गुरु आज्ञा के भिक्षा कैसे पाते हो हमने तो आज्ञा नहीं करी 15 दिन फिर चराने के लिए गए जब आए फिर हष्ट पुष्ट तो उन्होने कहा तुम स्वस्थ कैसे हो बोले गओ का द पी लेते हैं बोले गए हमारी है हमारी आज्ञा के बिना तुम कैसे दूध पी लेते हो 15 दिन के बाद फिर आए फिर स्वस्थ तो उ कहा तुम स्वस्थ कैसे हो तो उनका बछड़ों को जो फेन निकलता है उसे चाट
लेते बोले हमारे बछड़े दयालु बहुत है तुम्हारे लिए छोड़ देते मेरी बिना आज्ञा के तुम ऐसा अब य सब बंद हो गया तो उनको ज्ञान नहीं था अ कौड़े का वृक्ष होता छोटा सा पौधा उसमें फूल होते हैं भगवान शंकर को चढ़ाए जाते हैं वो उनके पत्ते खा ले और वो जहरीले होते हैं उनकी आंखें अंधी हो गई वो एक कुए में गिर गए 15 दिन बाद गए नहीं तो शिष्यों के साथ खोज की जहां गए चरा रहे थे आवाज लगाई तो उन्होने कहा गुरुदेव मैं कुआ में पड़ा हुआ हूं कैसे मुझे पता नहीं किसी
वृक्ष के हमने पत्ते खा लिए जिससे हमारी आंखों की जति चली गई और मैं इस अंधेरे कुए में गिर गया तो उन्होंने मंत्र बताया अश्वनी कुमार जी का इस मंत्र का जप करो उच्चारण करो देखो अभी देव वैद्य अश्विनी कुमार आ जाएंगे मा भ में इसकी कथा ज भी उच्चारण किया सुनी कुमार आ गए उन्होंने दिव्य पुए की रचना की औषधि मिला के और कहा खा जाओ उन्होने कहा अब नहीं गुरु आज्ञा के बिना अब कभी अपनी जबान में कुछ नहीं रखूंगा क्योंकि मैंने देख लिया मैंने गुरु आज्ञा का उल्लंघन किया 15 दिन उपवास करके
मुझे गुरु जी के पास पहुंचना चाहिए था और फिर वो मुझे उपदेश करते क्या खाना है तब मैं खाता लेकिन मैंने अपनी मनमानी की आज के बाद कभी नहीं तो बोले फिर अंधे बने रहोगे तो उन्होने कहा जन्म अंधा रहना ठीक है लेकिन गुरु आज्ञा का उल्लंघन नहीं करूंगा तो उनके गुरुदेव ने कहा पालो तो जे भी पुआ पाए स उनकी दिव्य दृष्टि जागृत हो गई बाहर निकले और गुरु जी ने गले से लगाया तो बिना पढ़ाए चारों वेद उनके हृदय में स्पित हो गए गुरु साक्षात पर ब्रह्म तस्मै श्री गुरुवे नमः गुरु कृपा से
बिना पढ़े लिखे भी ज्ञान आ जाएगा योगेश बजाज जी म जी आपके चरणों में कोटि कोटि प्रणाम महाराज जी दास भारतीय वायु सेना में कार्यरत है और आपका एकांतिक एवं सत्संग सुनना सुनते हैं और चलने का प्रयास भी कर रहे हैं महाराज जी अज्ञानता और परमाद वश दास ने जीवन में परम लक्ष्य को नहीं पहचाना अनेकों त्रुटियां करके व्यर्थ समय गवाया मेरा प्रश्न है कि महाराज जी मुझे राधा रानी की कृपा से गुरु मंत्र मिला और मैंने उसका मनन नहीं किया इसके इसका पश्चाताप एवं गलानी दोनों है क्या मुझे भगवत प्राप्ति के मार्ग पर साहस
एवं कृपा मिलेगी और मुझे अपने गुरुदेव से दोबारा गुरु मंत्र की प्रार्थना करनी चाहिए क्या मंत्र याद है हां तो तो फि बहुत ही हानि हो गई मंत्र नहीं याद है तो फिर बहुत बड़ा मतलब प्रमाद हो गया इसे प्रमाद कहते हैं फिर जल्दी करो जीवन की कब आखिरी शवास हो इसका तो अपने को पता नहीं है ना तो गुरु मंत्र ले लो और फिर सांगोपांग उपासना करो प्रकट में आपके गुरुदेव विराजमान है हां उनसे पुनः जाकर के प्रार्थना करो मंत्र ले लो और फिर भजन शुरू कर दो समय नष्ट मत करो ठीक है जितनी
जल्दी हो सके आज कल परसों क्योंकि पता नहीं शाम मिले कि ना मिले और हम वंचित हो जाए अभी नाम जप करते हो हां नाम जप करो और गुरुदेव से मंत्र ले लो पवित्र अवस्था में व मंत्र का जप किया करो और आखिरी शवास अगर हमारी अभ्यास वस नाम में छूटी तो हमें भगवत प्राप्ति हो जाएगी अजामिल ने अपने पुत्र के बहाने नारायण पुकारा भगवत प्राप्ति हो गई ना हम नारायण को जानकर नारायण नारायण बजेंगे तो हमें भगवत प्राप्ति नहीं हो जाएगी जितनी स्वास उतने में ही भगवत प्राप्ति हो जाएगी पर लगन पूर्वक अब लगो
और यह पश्चाताप का विषय तो है ही कि गुरु मंत्र मिला और हम गुरु मंत्र ही भूल गए कम से कम जप नहीं पाए पर हमें याद तो होना चाहिए तो अब दोबारा जल्दी ले लीजिएगा माला कौशल जी धे राधे राधे आदरणीय गुरुदेव आपके चरणों में कोटि कोटि प्रणाम महाराज जी जब हम कुछ करना चाहते हैं और मेहनत और आलस्य के कारण नहीं कर पाते परंतु मन को समझाने के लिए भाग्य में नहीं होगा यही सोच बैठ जाती है अर एक कायरों का निर्णय दैव दैव आलसी पुकारा दव माने प्रारब्ध भगवान के विधान ऐसे छोड़
देते हैं काल कर्म ईश्वर मिथ्या दोष लगाए यह झूठी बात है हमको उत्साह संपन्न होना चाहिए हमको जो कार्य मिला है उसमें दृढ़ता रखनी चाहिए पूरा प्रयास किया इसके बाद हार गए अब दव का निर्णय है कि हमने प्रयास किया पूरी सफलता के जितने सूत्र है हमने सब स्वीकार किए लेकिन सफलता नहीं मेरी मेरे भाग्य का विषय लेकिन सफलता के असफलता के निर्णय के पहले ही हम उस कार्य को ही ना करें और कह दे मेरे भाग्य में नहीं यह कायर पुरुष का लक्षण है यह आलसी पुरुष का लक्षण है यह उद्योग शल का उद्योग
शल का नहीं है इसलिए प्रयत्नशील बनो संघर्ष जीवन को बहुत मिलेंगे उनसे लड़ना पड़ेगा देखो कितना बड़ा संघर्ष भगवान को सुबह होना है राज तिलक चक्रवर्ती सम्राट अवध पति बनना है और सामई के 14 वर्ष का वनवास कितना बड़ा संघर्ष नंगे पैर जहां राज महलों में कोमल रुई जैसे गद्दो पर चलना होता प्रभु को वहां कंकड़ पत्थर जंगल में कोई ऐसा थोड़ी कि सुदृढ़ मार्ग बने नहीं नहीं वहां तो कंकड़ की कांटे भगवान उनमें 14 वर्ष रहे किसी गांव नगर जाना निषेध था 14 वर्ष भगवान का जो वनवास था उसमें किसी नगर में नहीं गए
किसी गांव में नहीं गए भगवान जंगल में ही रहे तो अब आप विचार करो हम लोग तो उनके अंश है जब हमारे परमात्मा को संघर्ष करना पड़ा इस मृत्यु लोक में आने पर तो हम तो जीवात्मा है हमारे तो सैकड़ों संघर्ष होंगे तो हमको निराश नहीं होना उदास नहीं होना नाम जप करना है गंदे आचरण नहीं करने अपने कर्तव्य में प्रमाद नहीं करना चाहे व किसानी हो व्यापार हो पढ़ाई हो नौकरी हो डॉक्टरी हो मास्टरी हो जो हमें कर्तव्य मिला है हम उसे भरपूर करें और उसे भगवान की सेवा माने भगवान की पूजा माने और
नाम जप करें बढ़िया जीवन हो जाएगा आप करके देख लो कोई और प्रमाद स्थिति में तो फिर मर के चले गए पशु पक्षियों की तरह कुछ अध्यात्म नहीं कर पाए परोपकार नहीं कर पाए दूसरों की सेवा नहीं कर पाए तो मनुष्य जीवन का मतलब क्या रह गया खाना पना मैथुन करना बस यही सांसारिक चिंतन करके मर जाना यह तो हर जीव में है निद्रा भय आहार मैथुन य सबके है केवल मनुष्य के नहीं तो फिर बड़े भाग मानुस तन पावा सुर दुर्लभ सद ग्रंथन गावा इसका मतलब क्या रह गया इसका मतलब यही है भगवान का
भजन करके अध्यात्म में जीवन पवित्र जीवन दूसरों का उपकार जीवन तब तो लाभ मिले आलस्य प्रमाद के लिए गुंजा नहीं मनुष्य जीवन में मनुष्य जीवन प्रयत्नशील होकर हम अच्छी उन्नति प्राप्त करें लोगों के सुख देने वाली हमारे अंदर वृत्ति आ जाए परहित सरिस धर्म नहीं भाई दूसरे को सुख पहुंचाने जैसा कोई धर्म नहीं है सनी जी गुजरात से श ह मराज जी आपके चरणों में कोटि कोटि प्रणाम मराज जीी पिछले थोड़े महीनों से बाल भोग राज भोग और सन भोग के बाद प्रिया पीतम को मानसिक पान का भोग बिना भूले लगाता हूं अब मेरी इच्छा
है कि मुझे प्रिया प्रीतम का पर्सनल पान वाला निकुंज में बनना है महाराज जी इस पर मेरी कृपा करें कि मैं कैसे पान वाला ये तो श्री जी श्री जी कर सकती है तो आप पान की जब बीड़ी पए भाव से तो प्रियाज से यही मांगे कि लाडली जो ऐसी कृपा करो कि मुझे यही सेवा मिले कि जब आप भोग पा लो तो हम पान की बीड़ी आपको अपने कर कमल से पवे लाडली जो ऐसी तो कुछ दुर्लभ नहीं है ली जो जिनकी सेवा में जाना वह स्वीकार कर ले तो हमारे लिए कुछ दुर्लभ नहीं
उन्हीं से प्रार्थना करो श्री जी से प्रार्थना करो खूब राधा नाम जप करो और जब पान की बीड़ी पवाओ भाव से तो उस समय श्री जी से ऐसे भावना में प्रार्थना करो कि महारानी ज लाडली जू यह सेवा मुझे स्थाई दे दो कि मैं आपके समीप आऊ और ऐसी ही सेवा करूं जी और श्री जी का सबसे प्रिय लाडला भक्त बनने के लिए क्या करना पड़ेगा मोन आश्रित श्री जी के सिवा किसी का भरोसा नहीं जैसे गोस्वामी तुलसीदास जी कह रहे एक भरोसो एक बल एक आस विश्वास एक ही आशा एक ही विश्वास एक ही
आस बस केवल श्री जी श्री जी एक राम घनश्याम हित चातक तुलसीदास जैसे चातक केवल स्वाति की बूंद को ऐसे ही हमारे माई श्यामा जी को राज मन से बुद्धि से चित्त से हम से केवल लाडली जू के आशी वो लाडली जू का प्यारा होता है बहुत आ भाव से रोता हूं बट कब श्री जी मिलेंगे अब ये रोना सार्थक श्री जी स्वीकार करें तब है श्री जी के लिए यह दिखावा ना बन जाए यह आंतरिक भाव बना रहे तो श्री जी कृपा कर देंगे मां बाप की भी खूब सेवा करता हूं हां कर 22
साल से नहीं चल पा र हा बहुत सुंदर खूब सेवा करो बढ़िया अवसर है जैसे बोला वैसे राधा नाम फिर पांच संतो के उठते वक्त सया में नाम बहुत सुंदर पूरा कर्म समर्पण पूरा दिन का सुबह से शाम का अरे बाजी जीत जाओगे बाजी जीत जाओगे देख लेना जितना आपने बोला उतना पकड़ के रख बस पकड़ के रखो तुम्ह श्री जी तुम्हे पकड़ लेंगे चिंता मत करो नेहा कौशल जी नोएडा से राधे राधे महाराज जी पिछले लगभग 15 साल से भक्ति मार्ग पर चलने की कोशिश कर रही हूं बहुत बार संकल्प लेकर तोड़ देती हूं
माला जाप करने का बार-बार माला पकड़ती हूं फिर छूट जाती है अपने मन की कमजोरी के कारण जो विषय भोगों संसार में यह मन भागता रहता है क्या करूं जप माला नियमित रूप से नहीं कर पा रही किसका है हां श्री जी से प्रार्थना करो ठाकुर जी से प्रार्थना करो जो काम हमारे संकल्प से नहीं बनता वो भगवान की जब हम प्रार्थना करते हैं तो उनकी कृपा शक्ति से मिल जाता है देखो प्रार्थना से भगवान का अवतार हो गया जब गौ ब्रह्मा जी भगवान शंकर सब देवता मिलकर भगवान से प्रार्थना किए तो भगवान का अवतार
हो गया जय जय सुरनायक जन सुखदायक प्रणतपाल भगवंता ये प्रार्थना तो हम भगवान से प्रार्थना करें कि प्रभु मैंने तो प्रयास करके देख लिया मैं तो हार गई अब आप कृपा करो और मेरा भजन बन जाए मेरे हृदय से आपका सुमिरन बन जाए हे नाथ परोपकार बन जाए यह मानव जीवन सार्थक हो जाए आप हमें ऐसी बुद्धि दो और नाम जप करो नाम जप के ब मतलब नाम जप नीव है हर कार्य की पूर्ति के लिए नाम जप आवश्यक है हर ज्ञान के लिए नाम जप आवश्यक है आपके पास कितना धन है नाम जप रूपी
धन कबीराज सब जग निर्धना धनवंता नहीं कोई धनवंता सोई जानिए जाके राम नाम धन होए जो जितना नाम जप करेगा चाहे लौकिक उन्नति हो चाहे पारलौकिक उन्नति हो चाहे आध्यात्मिक उन्नति हो उसमें सरसब्ज हो जाएगा अब भजन नहीं तो हमारी बातें नहीं समझ पाओगे अगर भजन नहीं तो तुम्हारी बुद्धि हमारी पूरी बात नहीं समझ पाएगी यहां से से निकल जाएगी बोल तो रहे थे कुछ क्या बोल रहे थे ऐसे और भजन कर रहे तो एक एक बात समझ में आएगी हमारी ऐसा लगेगा कि अमृत जा रहा कानों में इसलिए भगवान से प्रार्थना करो वह कृपा
करेंगे वही सामर्थ्य देंगे नंदि का जी चंडीगढ़ से राधे राधे महाराज जी महाराज जी विश्वास और अंधा विश्वास में क्या अंतर संसार में बिना विचार करके अंधविश्वास नहीं करना चाहिए और भगवान में बिना विचार करके विश्वास कर लेना चाहिए भगवान और संसार में अंतर है संसार में किसी व्यक्ति वस्तु स्थान पर सहसा विश्वास मत करो बिना विचारे जे करे ते पाछे पछताए काम बिगो आपनो ज में होत हसाय पहले विचार करो परीक्षा लो उसकी अगर तुम्हारी परीक्षा में पास है जानकारी में पास है तो फिर विश्वास कर लो लेकिन भगवान में नहीं भगवान में तो
सीधे विश्वास करो तब उनको जान पाओगे बिन विश्वास भगत नहीं ते बिन द्रव न राम राम कृपा बिन सपन जीवन लह विश्राम भगवान में अंधा विश्वास करो सीधे वो सर्वत्र है वो सब जगह हैं वो हमारी रक्षा करेंगे वो मंगल भवन है कभी अमंगल नहीं हो सकता मैं भगवान की हूं भगवान मेरे हैं इसमें विचार की जरूरत नहीं लेकिन संसार में किसी को अपना बनाने के पहले उसकी परीक्षा लो वह स्वार्थी तो नहीं है वह हमारा शोषण तो नहीं करना चाहता स ऐसा विश्वास मत करो किसी से भी विश्वास मत करो विश्वास तब करो जब
कुछ दिन उसको परख लो जांच लो तब विश्वास करो संसार में अंधा विश्वास मत करो लेकिन भगवान में अंधा विश्वास कर लो अगर झूठे से भी मान लिया प्रभु मेरे तो तुम्हें पकड़ लेंगे तुम्हारा कल्याण हो जाएगा क्यों संसार में विश्वास ना करो चाहे कोई कितना भी सगा हो संसार में विश्वास ना करें परीक्षा लेकर के जांच पड़ताल करके ही विश्वास स्थापित करें लेकिन भगवान में ना उनकी परीक्षा ले सकते हैं और ना उनकी जानकारी हमें हमें अंधा विश्वासी करना होगा और जब जान जाएंगे तब हमें सच्चा विश्वास हो जाएगा पहले मान जाते हैं कि
भगवान है हमारी रक्षा ा कर रहे हैं हम पर बड़ी कृपा है उनको हम अपना मानते हैं फिर वो हमको जना देंगे सोई जाने ज देव जनाई जानत तुम्ह तुम्हे हो जाई समझ पाए ना बच्चा जी कल्पना भारद्वाज जी राधे राधे महाराज जी महाराज जी आपके चरणों में कोटि कोटि प्रणाम महाराज जी कह रहे हैं कि इन्होंने अपने बेटे का नाम अभिमन्यु रख दिया बट अभी जब इन्होने शास्त्रों की जो ये थोड़ी है कि वो वीर गति को प्राप्त हो जाएगा ऐसा डर र क कि उनकी अल्प आयु में क नहीं ऐसा नहीं नहीं किसी
जैसे उस घर में उत्सव वगैरह करते हैं तो ऐसा कानों में पड़ा कि किसी ने ऐसा कहा कि अभिमन्यु नाम है वो तो अल्पायु था एक किसी का नाम हो और व अल्पायु हो तो पूरे भारत में वही जब नाम रखा जाएगा तो अल्पायु हो जाएगा ऐसा नहीं आप चिंता ना कीजिए नाम से अल्पायु नहीं होता है कर्म से अल्पायु होता है जैसे कहते ना नाम का भी छवि प असर पड़ता है मतलब मनुष्य पर इस तरीके से कुछ अभिमन्यु नाम दूषित नाम थोड़ी तो वीर गति को प्राप्त हुए थे युद्ध के क्षेत्र में भगवान
के भांजे थे उनका केवल उतना ही समय था जीवन का तो ये थोड़ी कि अभिमन्यु किसी का नाम रख दिया जाए तो अल्पायु में मर जाए भारत में लाखों लोगों का नाम अभिमन्यु होगा लाखों लोगों का नाम अभिमन्यू होगा आप इस नाम से आपके बच्चे की हानि होने वाली नहीं कर्म से हानि होती है जैसे कर्म कोई पा पाप कर्म बन गए तो फिर आयु क्षीण हो जाती है फिर अल्पायु हो जाती है साधु अवज्ञा तुरत भवानी कर कल्याण अखिल के हानी कोई महत अपराध बन जाए तो फिर अकाल मृत्यु का योग बन जाता है
ऐसे थोड़ी कि नाम रख दिया तो ऐसा नहीं है बहुतों के नाम ऐसे हैं जो बड़े पवित्र नाम है आचरण बहुत गंदे हैं बहुतों के नाम हम देखे ना कि बहुत पवित्र नाम है उनका जैसे भगवन नामों में उनका नाम है बहुत गंदे आचरण है तो ऐसा थोड़ी कि नाम जो रखा गया उसका उसके ऊपर प्रभाव ही पड़ेगा ऐसा नहीं ऐसा नहीं कि अभिमन्यु नाम रख दिया तो वो क साल का है अभी छ साल का हो पा साल का हुआ है अच्छा तो तुम डरो मत तो डरो मत ठीक है कुछ भी उसको होता
है तो मन में बस यही ख्याल आता है कि ऐसा सोचा नहीं पहले बाद में किसी ने ऐसा बोला तो नहीं डरो मत डरो मत अरे दूसरा नाम रख लेगा तुम्हें डर लग रहा हो मैंने पति से कहा था तो उन्होंने कहा कि नहीं सब ऐसा नहीं होता है हां होता तो नहीं लेकिन तुम्हें डर तुम मां हो ना तो तुम्हें अगर उसको जुखाम भी होगा तो आपको ध्यान आ जाएगा अभिमन्यु नाम का जल्दी चला तो नाम बदल दो भाई वही लिखा है कह र कि बुखार भी हो जाता है या जुकाम हो जाता उसके
लिए नाम बदल दो वता कुछ नहीं होता इससे पर उसके लिए बदल दो लेकिन मैंने समझाया नहीं फिर भी उसको ना मां है मां को अपने बच्चे से जो प्यार होता है प्यार में समझ नहीं होती अधिक प्रीति मन भा संदेह जब अधिक प्रीति होती तो मन में संदेह उत्पन्न हो जाता है तो इसलिए आप दूसरा नाम रखवा दो ठीक है राधे राधे महाराज जी महाराज जी मैं सेना में एक अधिकारी हूं जीवन में बहुत सम्मान मिला और अब तक हर ड्यूटी मैंने पूरे मन से की और राष्ट्र हित की सर्वो परर ही रखकर ऐसे
करता रहा कुछ वर्ष पूर्व अधिक लोभ और लालच में आकर मैंने स्टॉक मार्केट में काफी धन अपनी हानि किया इस दौरान धन की हानि के अलावा मेरी रेपुटेशन भी खराब हुई हानि हुई महाराज जी उस समय बहुत बुरे समय चल रहा था रिश्तेदारों और मित्रों ने किसी ने मदद की किसी ने नहीं की बट जिन्होंने मदद की महाराज जी मैं उनका ऋण कैसे वापस करूं या करूंगा अपने माता-पिता का वह सम्मान जिससे जो क्षति हुआ उसको कैसे पूरा करूं अब क्या करूं अब नाम ज भगवान का नाम जप करो भगवान की ही प्रसन्नता से सब
प्रसन्नता हो जाएगी एक भगवान प्रसन्न हो जाए माता-पिता मित्र गुरु सबकी प्रसन्नता हो जाए ज पर कृपा राम की हुई ता पर कृपा करे सब कोई भगवान का स्मरण कर लो भगवान के नाम जप के द्वारा भगवान की प्राप्ति कर लो सब पूर्णता हो जाएगी सारे ऋणों से मुक्त हो जाओगे भागवत में एकादश स्कंध में लिखा हुआ है जो भगवान का भजन करते हुए भगवत प्राप्ति कर लेते हैं मात ऋण पित ऋण देव ऋण ऋषि ऋण सब ऋणों से मुक्त हो जाते हैं तो कभी-कभी हम प्रलोभन वश गलतियां कर बैठते हैं तो उन गलतियों का
समाधान अध्यात्म से है प्रकृति में नहीं जैसे हमसे कोई पाप कर्म बन गया कोई गलती बन गई तो हम सीधे भगवान से क्षमा मांगे तो सबकी क्षमा हो जाएगी जीव जंतु कहीं भी हमारा अपराध बना है क्योंकि भगवान सब जगह विराजमान है एकमात्र भगवान को प्रणाम करने से सबका प्रणाम हो जाता है भगवान से क्षमा मांगने से सब गलतियों का क्षमा हो जाता है इसलिए हम भगवान से प्रार्थना करें और भगवान का नाम जप करें और यह तो अनुभव हो ही गया होगा कि संसार में कोई अपना है नहीं बिगड़ जाए ना जब हमारा बिगड़
अभी तो आप चलने लायक हो इसलिए सहयोग भी कर दिया होगा अगर आप चलने लायक ना हो किसी काम के ना हो तो कुछ दिन बाद देखेंगे कुछ दिन तो चले कुछ दिन बाद देखेंगे आपके पास कोई आना पसंद नहीं करेगा क्योंकि संसार स्वार्थी है जब तक आपसे स्वार्थ बनता है जब लग रहा है कि अगर आज हमने 00 रुप दिए तो कल य 200 का सहयोग कर देगा तो आपका सहयोग हो जाएगा जब पता है कि इसके पास है ही नहीं 100 गए तो गए तो फिर कोई तुम्हारा सहयोग करने वाला नहीं यहां स्वार्थ
लाग करे सब प्रीति सुर नर मुनि सब ही की रीति स्वार्थ से ही प्रीति होती है य संसार में और स्वार्थ रहित प्रीत करने वाले तो भगवान और भगवान के प्रेमी भक्त जन है थ रहित जग जुग उपकारी तुम तुम्हार सेवक असुरारी नाम जप करो शास्त्र स्वाध्याय करो सत्संग सुनो और अब जितना बन जाए दूसरे का हित करो जिन्होंने तुम्हारा हित किया उनका तो करो ही जिन्होंने तुम्हारा हित नहीं किया उनका भी हित करने की सोचो तो तुम अध्यात्म में प्रवीण बन जाओगे प्रलोभन कभी-कभी हमको गिरा देता है लोभ कभी-कभी हमको नीचे गिरा देता है
तो हम उठे अध्यात्म के द्वारा ऊपर उठे महाराज जी आपके चरणों में में कोटि कोटि प्रणाम महाराज जी कुसंग के कारण मैं हस्त मैथुन जैसी गंदी क्रियाएं करता आ रहा था फिर मैंने आपका वीडियो देखा और आपकी वाणि हों से इतना बल मिला कि आपकी कृपा से एक साल तक ब्रह्मचर्य का पालन कर पाया परंतु अभी कुछ दिन पहले गलती महाराज जी बहुत प्रश्न आ रहा है कि वह काफी समय से दृढ़ता पूर्वक चले फिर किसी एक दृश्य के कारण या गिर गए अभी वो फिर गिरते ही जा रहे हैं महाराज जी फिर कैसे उत्साह
आए और फिर कैसे आगे बढ़े इस मार्ग पर इसमें क्या बालू का बांध है खुला तो फिर पूरा उड़ा देगा जितना तुम्हारा संयम है ये बहुत गंदी आदत है य ऐसा रोग है कि इसकी औषधि नहीं है और नए बच्चों में बहुत फैल रहा है छोटे-छोटे बच्चे छोटे-छोटे बच्चे अब जैसे आपने एक वर्ष तक रोका और किसी कारण गलती हुई तो आपको दो तीन दिन उपवास करना चाहिए और दृढ़ नियम लेना चाहिए अब गलती नहीं करूंगा फिर मानो हो जाए फिर उपवास करो धीरे-धीरे ठीक हो जाएगा नाम जप साथ में होना चाहिए नाम जप करते
हो महाराज जी 24 मिनट करता था अभी कुछ दिन पहले व भी अले वो भी सिद्ध हो गए 24 मिनट से आपको दो घंटे में बढ़ना चाहिए कि छोड़ देना चाहिए फिर कैसे चलेगा अब फिर संभालो एक बार फिर हि मत करो ठीक है हां बहुत ही मतलब यह इतना गंदा है कि इसमें डिप्रेशन और फिस करने का भी मन होता है 00 बच्चे आ चुके हैं ऐसे जो इसके बहुत शिकार अभी तो मान लो थोड़ा संयम में आप चल लिए नहीं तो दिन में कई कई बार तो उन बच्चों की हालत क्या हो गई
कमर दर्द गांठ दर्द सब एक तो आए थे जिनको डॉक्टर ने बताया था कि तीन बार म जी इनका भी प्रश्न है नितेश सोनी जी म जी कह रहे हैं कि मैं युवाओं को हस्त मैथुन के प्रति जागृत कर रहा हूं पर कुछ असामाजिक तत्व और इन्फ्लुएंस उनको प्रेरित करते हैं हम भी तो इसी के कि बच्चे बच जाए पवित्र जीवन उनका होय बहुत निकृष्ट बात है इसमें कई तरह की बहुत हानियां हो जाती इसमें हानि ही यानी लाभ तो है ही नहीं उसमें नस नाणिज हो जाती कि कुछ समय बाद स्पर्श मात्र से या
संकल्प मात्र से वीर्यपात हो जाएगा या जो गृहस्थ में अत्यंत आवश्यक जो उसमें योग्यता ही खो देगा व संतान उत्पत्ति की योग्यता ही खो देगा यह छोटे-छोटे बच्चे सब अपने जीवन को बर्बाद कर रहे हैं अब इस विषय में क्या कि कोई बोलना नहीं चाहता अच्छा जो ग्रह माता पिता है व इस विषय में बच्चों के पास बैठकर समझना नहीं चाहते बच्चे जिधर बहना चाहते बह रहे व इस विषय पर कोई और डॉक्टर है कुछ फिल्म है कुछ वेब सीरीज है जो इसका सपोर्ट करते हैं ब्रह्मचर्य शीतलता प्रदान करता है गंभीरता प्रदान करता है ब्रह्मचर्य
बल प्रदान करता है बुद्धि प्रदान ब्रह्मचर्य से लाभ ही लाभ है एक भी हानि नहीं है मराज कुछ महिलाए डॉक्टर है वो भी सजेस्ट करती है और बच्चों को दिक्कतें हो रही है सैकड़ों बच्चे पढ़े वीडियो में जो यहां आकर कह रहे थे कि अगर मोबा आपका मोबाइल से ना सत्संग मिलता तो मैं कर लेता हजारों कमेंट है हा जो पढ़ने में आते हैं तो उ डॉक्टरों की भी बुद्धि माया से प्रेरित है क्योंकि बड़े लोगों के द्वारा जब किसी बात का समर्थन मिलता है वैसे हमारा मन राजी है ऐसे गंदे कामों में फ और
राजी हो जाएगा मतलब यह भगवान की माया का कलयुग का प्रभाव है हम यह कहते हैं कि वर्ष तक ब्रह्मचर्य रहो फिर आपका ब्याह हो तो खूब आराम से ब्याह गृहस्ती के जो संयोग है जो एक धर्म पूर्वक है अब य गंदी आदत नशा बॉयफ्रेंड गर्लफ्रेंड मतलब जहां उन्नति का चिंतन होना चाहिए वहां पतन का चिंतन हो रहा है जहा उन्नति के लिए हमें बलवान बनना चाहिए वहा पतन करके अपना निर्बल बनते जा रहे हैं जो हस्तमैथुन करेगा उसकी स्मृति शक्ति नष्ट हो जाएगी याददास्त काम करने का मन नहीं होगा शरीर में एक आलस्य भरा
रहेगा और एक कुछ दिन बाद अजीर होता सी होने लगेगी लीवर काम करना कम कर देगा बहुत सी परेशानियां है अब कैसे इन बच्चों को समझाए माता-पिता इस विषय पर ध्यान नहीं दे रहे और दोस्त इस विषय को और बढ़ावा दे रहे हैं और डॉक्टर बढ़ावा दे रहे हैं कुछ ऐसे वेब सीरीज बन गई है जिनसे बहुत हानि हो रही तो हमें तो यही हाथ जोड़कर प्रार्थना कि आप बच्चे खुद संभलो नहीं तो आपका जीवन बर्बाद हो जाएगा आप नियम निष्ठ बनो अब विरोध करने वाले तो बताओ सच्चाई धर्म भजन सबका म आज आपका एक
और प्रश्न है कि भारत के युवा बहुत बेरोजगार होकर अपना भविष्य और समय दोनों बर्बाद कर रहे हैं वह बाहर की पद्धति को अपना रहे हैं और बाहर की पद्धति क्या यूएस टाइम जैसे बाहर दिन है यहां रात होती है सारी रात तो जगते रहते हैं दिन में पूरे दिन में सोते हैं काम एक का भी नहीं है सारी रात फोन चलाएंगे सुबह 5:00 बजे सोएंगे फिर शाम को 7:00 बजे उठते हैं तो उनका वो दिन शाम को 7:00 बजे शुरू होता है कितना निकृष्ट बात नाइट आउट करते हैं अरे दिन मिला है उ उज्जवल
काम करने देखो आजकल लेवरी में भी 00 मिलते हैं पा 550 मिलते हैं आठ घंटे ईट गारा कर लो तो 00 मिलते हैं 00 में एक परिवार चलाया जा सकता है अच्छे से रोज 500 आ जाए तो सब्जी रोटी ऐसे खानपान की व्यवस्था यार मनुष्य जीवन मिला सो के गवा दे इस तरह व्यर्थ कर दे तो क्या रात्रि में क्या काम करेगा उद्दंडता करेगा नशा करेगा गंदे आचरण करेगा यही करेगा यह तो बहुत हानि का विषय है भजन के बिना अध्यात्म के बिना संसार बिल्कुल व्यर्थ का जीवन व्यतीत करता है अगर थोड़ा सा भी नाम
जप करने लगे तो बुद्धि शुद्ध हो जाए देखो ब्रह्म मुहूर्त में उठकर देखो आप 4:00 बजे 4:00 बजे उठिए थोड़ा जल पीजिए सोच जाइए फिर इसके बाद कपड़ा पहनिस होके और फिर दौड़ लगाइए ंड बैठक मारिए थोड़ी देर घंटा आध घंटा नाम जप कीजिए भगवत ध्यान कीजिए और फिर अपने काम में चले जाए देखो आपका चेहरा आपका जीवन प्रकाश में रहेगा अब ब्रह्म मुहूर्त में जो सोता है उसकी आयु नष्ट होती बुद्धि नष्ट होती अब कहां बुद्धि रह गई जरा सा मां बिगड़ गई तो मां को जान से मार डाला एक ने लड़का तो अपने
मां को गोली मार दिया वो गेम खेलने के लिए रोकी तो हां गेम खेलने बिल्कुल ये बहुत हानि हो रही है अध्यात्म के बिना बहुत हानि हो रही है जागरण करेंगे तो करेंगे क्या हम लखता है गंदी बातें देखेंगे गंदी बातें सोचेंगे नशा करेंगे फिर इसके बाद गंदी क्रियाओं का प्लान बनाएंगे जो हम देखते हैं जो हम सुनते हैं वही हमारा मनन चलता है और जब मनन चलता है तो वही प्लान बन जाता है तो प्रैक्टिकल के लिए इच्छा जागृत होगी अब प्रैक्टिकल के लिए जब करेंगे तो जेल जाएंगे तो इसलिए बहुत बेरोजगारी बढ़ रही
है बहुत गंदी बातें भी बढ़ रही हैं गंदी बात इतनी हिम्मत हो गई बच्चों में की दो बच्चियां जा रहे हैं गली में उनको छेड़ रहे हैं तो कितनी मलिन होता जो देखा ना मलिन विचार तो वही क्रिया करने के लिए उनकी भावनाएं बनती हैं वीडियो शूट करते हैं कुछ होता है तो हां बिलक हां बचाने की जगह वीडियो हां बिल्कुल बात बहुत बुद्धि मलिन हो रही भगवान कृपा करें पर काफी सुधर भी रहे हैं जी हैं जर्मनी से वो भी कह रहे हैं कि बहुत गलत आदतों में फंस गए थे और आपकी वीडियोस देख
के अभी पूरा एकदम सब कुछ छूट महाराज जी ऐसा होता है कि जैसे जो दोस्त होते हैं अगर जैसे तुम सही मार्ग पर चलने की कोशिश करोगे तो अगर तो दोस्त कहते हैं कि तुम इसमें सामर्थ्य नहीं हो इसलिए तुम ऐसा बोल रहे हो कि हां तो असमर्थ बना रहे तो हमें लगता है ज्यादा अच्छा है गंदे आचरण के लिए दिग विजय योधा बनना जरूरी है क्या वो कह रहे तुम असमर्थ हो कायर हो तुम समर्थ बनो विश्व विजेता बनो तो जाओ अपने को सुव्यवस्थित रखो बच्चा बहुत गंदा इसमें क्या है जो किसान किसान है
कोई इसमें हां किसान गेहूं जब गलित प आता है गलित का मतलब समझते हो बाली निकलने के पहले बल बाली निकलने वाली होती है उस समय अगर काट लिया जाए तो एक भी दाना नहीं मिलेगा हा एक भी दाना नहीं मिलेगा तो ये नए बच्चे क्या गले में जैसे 20 2 वर्ष की आयु हो गई अब गेहूं पक गया अब वीर परिपक्व हो गया अब जैसे गृहस्ती में जाएंगे तो उनकी हानि नहीं होगी एक मन गेहूं दाना डालने पर 40 मन 50 मन गेहूं काटा जाता है समझ रहे हो ना परिपक्व अवस्था पे अगर बीच
में उड़ा दे तो एक दाना नहीं मिलेगा ये लोग बीच में उड़ा रहे हैं पूरी खेती परिपक्व 2025 तक ब्रह्मचर्य रहना चाहिए वीर पुष्ट होता है उससे फिर उससे बलवान सुंदर संताने उत्पन्न होती है अ नए नए बच्चे सब नाश कर रहे हैं पूर्वज हमारे जो पूर्वज हुए हैं गुरुकुल में इसीलिए बच्चे भेजे जाते थे कि बचपन से लेकर 20 22 तक वो संतों के पास रहे तो सब आचार्य परंपरा गुरु परंपरा और शास्त्रों का स्वाध्याय ब्रह्मचर्य संयम नियम और फिर गृहस्थ में गए तो बहुत अच्छे गृहस्थ होते थे अब जो हॉस्टल में रह रहे
हैं तो सब एक दूसरे गंदी बातें गंदा व्यवहार और ना टीचर इस बात पर ध्यान दे रहे ना माता-पिता इस बात पर ध्यान दे रहे हैं हालाकि स्कूल भी सिखाता है आजकल फिजिकल एजुकेशन में आता है यम नियम प्राणायाम प्रत्यया ध्यान ध्यान ना समाधि अच्छा आता है स्कूल में है अगर फिजिकल एजुकेशन बच्चे लेते हैं तो उसम बताया जाता है ये लेगा कौन ये आसन प्राणायाम प्रत्याहार ध्यान धारणा सवाय हां जरूर चाहिए आध्यात्मिक जरूर विद्या चाहिए क्योंकि आध्यात्मिक विद्या से ही सुधार होता है जैसे ऐसे चलते हैं तो अपने दोस्त सब प्रतिकूल हो जाते हैं
कि यह भाई साधु बन गए ये नहीं मान वैसे अच्छा और बुरा तो नहीं कहते साधु तो नहीं कहते हमको इन बातों पर ध्यान नहीं देना चाहिए अपने जीवन को संभालना चाहिए बच्चा ब्रह्मचर्य जीवनी शक्ति है उसका जितना नाश करोगे उतनी आपकी हानि होती चली जाएगी और जैसे ओवर है तो जो आपने कभी कुछ क्रियाएं नहीं की और स्वाभाविक आप सोक उठे और देखा वोह ब्रह्मचर्य नहीं होता संतान उत्पन करने वाला वीर्य नहीं होता वो स्वाभाविक जैसे दाल में फेन होता है ना वो फेर नष्ट होता है और जब आपका इस तरह का व्यवहार होगा
और फिर चिंतन होगा फिर जब निकलेगा तो असली निकल जाएगा तो उससे बहुत बड़ी हानि होती है किसी तरह हमारे नौजवान और नए बच्चों को यह बात समझ में आनी चाहिए कि हस्त मैथुन तो जहर है बहुत बड़ा जहर है इस पहले इस पर तो ब्रक मारनी चाहिए और फिर ये जो गर्लफ्रेंड बॉयफ्रेंड चला है यह भी बहुत खतरनाक है क्योंकि जैसे एक बच्चे से प्यार हुआ तो हम कह रहे दोनों प्यार करो हम मना नहीं कर रहे और आगे चलकर जब आपकी रास्ते परिपक्व हो जाए तो अपने माता-पिता से मिलकर ब्याह कर लो तब
आप गृहस्थ धर्म का प्रयोग करो तब तक दोनों ब्रह्मचर्य से रहो प्यार करो प्यार में कोई परेशानी थोड़ी है दोस्त बनाओ कोई परेशानी लेकिन बॉयफ्रेंड ब्रेकअप फिर बॉयफ्रेंड फिर ब्रेकअप इसे क्या कहते हैं ब विचार तो गर्लफ्रेंड ब्रेकअप गर्ल अब य क्या बच्चों के संस्कार बन रहे हैं गंदी वृत्तियां बढ़ रही बहुत नाश का कारण माता-पिता को सावधान हो जाना चाहिए अपने बच्चों को संभाले नहीं आगे चलकर के बहुत हानिकारक होगा यह बहुत हानि का अच्छा जैसे एक बच्ची का स्वभाव बन गया है कई पुरुषों से मिलने का अब उसका ब्याह होगा अपने पति से
संयम में रह पाएगी वो उसकी आदत उसके पूरी गृहस्ती को चौपट कर देगी इसकी वजह से आजकल लीगल मैटर्स इतने बढ़ रहे हैं आफ्टर लीगल मैटर बकल बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल अब वो हमारी बात बच्चों की खोपड़ी में घुस जाए तो है समझ में आ जाए कि बॉयफ्रेंड गर्लफ्रेंड बहुत बड़ा जहर है जो आपको पतन के मार्ग में ले जाए हम दोस्ती के लिए नहीं मना करते अच्छी दोस्ती करो अपने मनोनुकूल लड़का देख लो या लड़की देख लो और दोनों प्यार करो और उस प्यार को जीवन भर करो हम मना नहीं करते लेकिन जब तक ब्याह
ना हो जाए तब तक ब्रह्मचर्य से रहो ऐसी गंदी बात नहीं कि ब्रेकप और फिर दूसरा फिर तीसरा फि चौथा अगर आपका दोस्ती की तो निर्मल दोस्ती करो और जब माता-पिता से मिल मिलाकर ब्याह कर लो फिर पूरे आजीवन प्यार करो तब तो प्यार तुम्हारा यह ब्रेकअप कहां से आ गया हमें तो ऐसी बात सुनने को मिल र कि बच्चे बनाते इसीलिए कोई दोस्ती का निर्वाह करने के लिए थोड़ी बनाते हैं बाबा आजकल ये स्टेटस मैटर बन गया बच्चों का अगर नहीं है हमारी गर्लफ्रेंड नहीं है तो हमारा स्टेटस डाउन है डाउ मैं स्कूल में
रहा हूं रहा तो क्या अच्छा गर्लफ्रेंड बनाने के बाद वो पवित्र रहते हैं नहीं वो स्टेटस सिंबल है ना मेरे दोस्त की मेरी नहीं है बच्चों के अंदर एक ऐसा स्टेटस सिंबल बन कॉम्लेक्स क्रिएट हो गया उ पर गलत है ना यह सुधार होना चाहिए शब्द राधा नाम गाना चाह रहे हैं गा के सुनाओ श्री राधा श्री राधा राधा श्री राधा श्री राधा श्री राधा श्री राधा राधा श्री राधा श्री राधा श्री राधा श्री राधा राधा श्री राधा श्री राधा श्री राधा श्री श्री राधा राधा श्री राधा श्री राधा राधा रासे स्वरी रम्या कृष्ण मंत्रा
देवता सर्वधर्म वंध्या वृंदावन बिहार वृंदा राध रमा अश गोपी मंडल पूजिता सत्या सत्य परा सत्य भामा श्री कृष्ण वल्लभा वृष भानु सुता गोपी मूल प्रकृति ईश्वरी रा धरवा राध का आरम [संगीत] रुक्मणी परमेश्वरी परात्पर तरा पूर्ण पूर्ण चंद्र वि भानना भुक्ति मुक्ति प्रदा भव आधि विनाशिनी [संगीत] राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा [संगीत] राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा [संगीत] राधा राधा [संगीत] राधा बहुत सु एक दुपट्टा बहुत राधे राधे महाराज जी आपके पावन चरण कमलों में दासी का कोटि कोटि प्रणाम महाराज जी आत्म ज्ञान की
प्राप्ति कैसे होगी क्योंकि मन अभी भी काम क्रोध ईर्षा द्वेष रूपी विकारों में फस जाता है यह विकार बहुत हावी हो जाते इसलिए हम तुम्हें बता रहे इसे पकड़ना जब हम भजन करते हैं तो बगल में एक रील चलती रहती है मन की या तो भूत का चिंतन होगा या भविष्य की कल्पना होगी या वर्तमान का व्यर्थ चिंतन होगा एक रील अपने आप चलती है वो मन की है जब तक वोह निर्मल नहीं होगा तब तक वो फेंकता रहेगा जो उसमें भरा हुआ है जब हम गुरु मंत्र जपते हैं या भगवत ध्यान करते हैं या
ब्रह्म में विचार करते हैं तो साइड में वो अपने विचार फेंकता रहता है मन अब हमें उन विचारों पर ध्यान ना देकर ना राग करना है ना द्वेष और निरंतर गुरु प्रदत मंत्र और नाम का जप करें तो धीरे-धीरे जो मन की वृत्तियां है काम आदि क्रोध आदि की ये शांत हो जाएंगी एक मात्र भगवद आकार वृत्ति रह जाएगी वो रिले खत्म हो गई अब जो आप चला रहे हो वही मंत्र केवल चल रहा है वही नाम चल रहा है अब ये 50 वर्ष भी लग सकते हैं में और ये पाच महीने में भी हो
सकता है अब साधक की योग्यता है कि किस कोटि से वह तन्मयता धारण करता है चिंतन में इसके लिए हमें किसी के आशीर्वाद की जरूरत नहीं है इसके लिए हमको प्रयत्न की जरूरत है जो हमें नाम मिला है जो हमें उपासना मिली है जो मंत्र मिला है उसमें हम तन्मय हो और बहुत जल्दी मन को हम डिलीट करें निर्मल करने के लिए जो उसकी असद वृत्तियां है वो जब सद वृत्तियां हम जो जप रहे हैं ये उसमें भर रहे हैं और असद वृतिया निकल रही ऐसा चिंतन करो ना राग करो ना द्वेष करो उदासीन रहो
तो वृत्तियां नष्ट हो जाएंगी और जहां वृत्तियां सब नष्ट हुई असत भगवता का फिर कहने की जरूरत थोड़ी पड़ेगी फिर तो ऐसा अमृतम आनंद है कि ब्रह्मादेवी विषय मृ तृष्णा में भ्रमित नहीं होता तो अभी क्या है हमारा देह भाव नष्ट नहीं हुआ जैसे कितना भी साधन करो आपको यही रहेगा मैं स्त्री हूं जब तक य स्त्री भाव है तो इसी अहम में काम क्रोध आदि का आक्रमण रहता है रहते नहीं है आगम पायनो अनि त्यास तास तिति भारत भगवान कह रहे हैं मात्रा स्पर्शा स्तु कौते शीतोषण सुख दुखदा आग मा पायनो अनि त्यास ये
आने जाने वाले नाशवान है काम स्थाई वृत्ति नहीं है देखना थोड़ी देर रहेगा फिर चला अगर आप चिंतन के द्वारा उसको बराबर संयोग देते रहे तो फिर स्थाई हो सकता है लंबे समय के लिए हो सकता है इसमें सावधानी यह है कि कुसंग ना होने पावे और कोई भी ऐसी गंदी बातें चिंतन में ना लावे स्वाभाविक जो चिंतन हो रहा है उसमें हमें कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए हमें नाम जप या मंत्र जप के द्वारा उसको नष्ट कर देना चाहिए और जहां हृदय निर्मल हुआ फिर आगे का तो मार्ग अपने आप भगवान हृदय में ही
प्रकाशित हो जाता लेकिन बहुत लंबी लड़ाई है ये कोई साल छ महीना की नहीं है इसीलिए जगत संतों को नमस्कार करता है क्योंकि पूरे जीवन युद्ध ही युद्ध है पूरे जीवन साधना ही साधना है अगर 10 मिनट मनोरंजन कर लिए तो 50 वर्ष की साधना को मिट्टी में मिला सकता है 10 मिनट का मनोरंजन इसलिए पूरे जीवन कापता हुआ भयभीत होता हुआ भगवान की शरण की तरफ भागता रहे जब अंतिम शवास है तब हम निहाल हो गए या फिर जीवन मुक्त हो जाए ब्रह्म बोध हो जाए तो फिर कोई बात नहीं इसलिए साधना में तत्पर
रहो डरो मत ये काम क्रोध आदि की वृत्तियां तुम्हारे नहीं सबके हृदय में उत्पन्न होती हैं इनको साधना के द्वारा क्षीण किया जाता है पूर्णतया नष्ट नहीं होती पूर्णतया तो ब्रह्म बोध होने पर या भगवत साक्षात्कार होने पर पूर्णतया ना समझ ले कोई यह क्षीण होती है स्पित हुई चली गई चिंगारी है पर उसको ज्वाला बनने में देर नहीं लगेगी अगर उसको मसाला मिल गया संयोग मिल गया तो ज्वाला बन जाएगी इसलिए साधक को चाहिए जीवन भर जब तक शरीर में प्राण है हम शास्त्र विरुद्ध आचरण का संयोग ना होने दें शास्त्र विरुद्ध ना आचरण
करें नहीं तो फिर नष्ट हो जाए कोई कितना भी बड़ा विवेकवानी हो यदि कुसंग करेगा शास्त्र आज्ञा का उल्लंघन करेगा मानो जैसे स्त्री पुरुष का एकांत में मिलना निषेध है साधना में कि आपका पुरुष शरीर तो कभी भी चाहे जितना पवित्र संबंध हो किसी स्त्री से एकांत में ना मिले अगर मिलेंगे तो चाहे जितने बड़े ज्ञानी आप हो आपको भ्रष्ट होना पड़ेगा अगर ब्रह्म बोध हो गया है सर्वम लमदम ब्रह्म तो अब नानाव ही नहीं है तो काम कहां से उत्पन्न होगा जो काम का मूल देहा भिमान वही नष्ट हो गया है पर ब्रह्म बोध
कोई करोड़ों साधकों में एक होगा लाखों में नहीं करोड़ों लाखों में ज्ञान हो जाएगा अध्यात्म का लेकिन ब्रह्म बोध होना आत्म बोध आत्मानुभूति यह तो परोक्ष ज बहुत बहुत वाणी के द्वारा ज्ञान का उपदेश कर देना अलग लेकिन हृदय में जब चोट लगती काम क्रोध की फिर उससे जो व्यथित ना हो सच्चा ज्ञानी वही है यम हीना तेते पुरुषम पुरुष सव सम दुखा सुखा धरम स् मतवा कल्प जो मन की व्यथा को सह जाए म जीी मैं एक सच्चा संत बनना चाहती हूं एक सच्चे संत की क्या पहचान है जो संसार का चिंतन छोड़ कर
के संसार का संग छोड़कर एकमात्र भगवान के चिंतन में वही संत है जिसका अखंड भगवत चिंतन होता है वही संत है जिस देखो तीन रेखाएं रखी गई हैं संत के लिए कंचन कामिनी और कीर्ति कंचन का मतलब रुपया में प्रीति होना कामिनी का मतलब काम भाव में प्रीति होना चाहे वो स्त्री शरीर हो चाहे पुरुष शरीर हो और देह भाव की परम पुष्ट का स्वरूप है इसका मान प्रतिष्ठा यस कीर्ति इन तीनों को जो मिटा दे वही संत है जो काम विजय है जिसमें किंचन मात्र धन के लिए लोभ वृत्ति नहीं मत्व बुद्धि नहीं है
जैसे जविन में पड़ा हुआ कूड़ा ऐसे ही रुपया समलोम कांचना पत्थर का टुकड़ा माटी का टुकड़ा सोने का टुकड़ा उसके लिए बराबर है जो मान अपमान सुख दुख लाभ हानि निंदा स्तुति में समान भाव रखता है जो निरंतर भगवत चिंतन परा है जो सहनशील है जो सबके प्रति करुणा भाव करता है जो किसी की अपेक्षा नहीं रखता जो निर्वैर है एक भी शत्रु जिसका विश्व में नहीं है वह भगवत कृपा पात्र संत है संतों के तो दिन भर गुण गाव तो भी पूरा नहीं होगा भगवान के चिंतन में हर मिनट व्यतीत हो यही संतों का
सहज सहज स्वभाव जैसे हम लोगों का सहज स्वभाव विषय चिंतन ऐसे संतों का सहज स्वभाव है भगवत चिंतन निरंतर तैल धारा वत भगवान का चिंतन और पाप आचरण बिल्कुल ना रह जाए प्रतिकूल स्य वर्जन जो शास्त्र प्रतिकूल गुरु प्रतिकूल भगवत प्रतिकूल है उनका विसर्जन हम कठोर नियम पालन करते हुए उनका त्याग कर दे सामने भोग उपस्थित है लेकिन मुझे नहीं भोगना अब इस वेश में स्त्री शरीर है बहुत बचा के रहना ऐसी जगह रहो जहां अधिक सखियों का सानिध्य मिल जाए कहीं ऐसा सानिध्य और निरंतर भजन परायण करके जीवन काट लो तो बहुत बड़ी बात
है और इच्छाएं जागृत होती रही उनको पूरी करते रहे तो भगवत प्राप्ति कभी होगी नहीं क्योंकि इच्छा त्यागी ही भगवत प्राप्ति होता है भगवत प्राप्ति का स्वरूप क्या है आशा ही परमम दुखम नैराश्य परमम सुखम जो नैराश्य को प्राप्त हो जाए जगत में कोई आशा नहीं रह गई आशा एक राम जी से दूजी आशा छोड़ दे नाता एक राम जी से दूजा नाता तोड़ दे तो भगवत प्राप्ति सहज हो जाएगी राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा रा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा राधा
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