क्या आपने कभी सोचा है कि कुछ लोग पूरी जिंदगी मेहनत करते रहते हैं? फिर भी उनके पास कभी पैसे नहीं टिकते? जबकि कुछ लोग ऐसे होते हैं जो शुरुआत में बिल्कुल साधारण होते हैं। लेकिन समय के साथ इतना धन बना लेते हैं कि उनकी आने वाली कई पीढ़ियों को काम करने की जरूरत [संगीत] नहीं पड़ती। क्या उनके पास कोई जादुई शक्ति होती है? क्या उन्हें कोई ऐसा रहस्य पता होता है जो बाकी दुनिया से छुपा हुआ है? या फिर सच कुछ और है? आज जो बातें आप सुनने वाले हैं वे सिर्फ पैसे कमाने के बारे
में नहीं है क्योंकि दुनिया में ऐसे लाखों लोग हैं जो अच्छी कमाई करते हैं लेकिन फिर भी हमेशा पैसों की कमी से जूझते [संगीत] रहते हैं। असली सवाल पैसे कमाने का नहीं है। असली सवाल है पैसे को संभालने का क्योंकि पैसा कमाना एक कौशल हो सकता है। लेकिन पैसे को बचाना, बढ़ाना और सही दिशा में लगाना एक कला है। और जो इस कला को सीख लेता है, वह धीरे-धीरे [संगीत] आर्थिक आजादी की ओर बढ़ने लगता है। कल्पना कीजिए कि आपके हाथ में एक बाल्टी है जिसमें आप लगातार पानी भर रहे हैं। लेकिन उस बाल्टी के
नीचे छोटे-छोटे छेद हैं। आप जितना पानी भरते हैं, उतना ही पानी बाहर निकलता रहता है। यही स्थिति अधिकांश लोगों की है। वे मेहनत करते हैं, [संगीत] कमाते हैं, संघर्ष करते हैं, लेकिन महीने के अंत तक उनके हाथ खाली रह जाते हैं। उन्हें लगता है कि समस्या उनकी कमाई में है, [संगीत] जबकि सच्चाई यह है कि समस्या अक्सर उनकी आदतों में होती है। पैसा उनके जीवन में आता तो है लेकिन रुकता नहीं। दुनिया के सबसे सफल निवेशकों में से एक वारेन बफेट ने कभी यह नहीं कहा कि अमीर बनने के लिए आपको सबसे ज्यादा कमाने वाला
व्यक्ति बनना [संगीत] होगा। उन्होंने बार-बार एक ही बात पर जोर दिया कि धन का निर्माण छोटी-छोटी समझदार आदतों से होता है। हर बड़ा साम्राज्य एक छोटी ईंट से शुरू होता है। हर विशाल पेड़ कभी एक छोटा बीज था और हर बड़ी दौलत की शुरुआत भी एक छोटे लेकिन सही फैसले से होती है। लेकिन समस्या यह है कि हमें बचपन से पैसे के बारे में बहुत कम सिखाया जाता है। स्कूल हमें गणित सिखाता है। विज्ञान सिखाता है। इतिहास सिखाता है। लेकिन शायद ही कोई हमें यह सिखाता है कि पैसे को कैसे संभालना है। परिणाम यह होता
है कि लोग डिग्रियां तो हासिल कर लेते हैं [संगीत] लेकिन वित्तीय समझ नहीं। वे नौकरी पा लेते हैं लेकिन आर्थिक [संगीत] स्वतंत्रता नहीं। वे कमाई शुरू कर देते हैं लेकिन संपत्ति बनाना नहीं सीख पाते। हो सकता है आप इस समय अपने जीवन के ऐसे दौर में हो जहां आपको लगता हो कि आपकी आय पर्याप्त नहीं है। हो सकता है आप कर्ज के दबाव में हो। हो सकता है आप बार-बार कोशिश करके भी बचत ना कर पा रहे हो या शायद आप पहले से अच्छी कमाई कर रहे हो। लेकिन फिर भी मन में एक डर रहता
हो कि भविष्य सुरक्षित नहीं है। अगर ऐसा है तो यह वीडियो आपके लिए है क्योंकि आने वाले समय में हम उन सिद्धांतों को समझेंगे जिन्होंने साधारण लोगों को असाधारण आर्थिक सफलता तक पहुंचाया। हम उन गलतियों को पहचानेंगे जो अधिकांश [संगीत] लोग बार-बार करते हैं। और हम उन आदतों को जानेंगे जो धीरे-धीरे धन को आपकी ओर आकर्षित करती हैं। लेकिन एक बात याद रखिए जो बातें आप सुनने वाले हैं, [संगीत] वे कोई जादुई फार्मूला नहीं है। वे कोई रातोंरात अमीर बनने का सपना नहीं बेचती। वे वास्तविक हैं, व्यावहारिक हैं और समय की कसौटी पर खरी उतरी
हुई हैं। इन्हें अपनाने के लिए धैर्य चाहिए, अनुशासन चाहिए और सबसे बढ़कर अपनी सोच को बदलने [संगीत] की इच्छा चाहिए। क्योंकि धन पहले जेब में नहीं दिमाग में बनता है। जब सोच बदलती है तभी आदतें बदलती हैं और जब आदतें [संगीत] बदलती हैं तभी परिणाम बदलते हैं। इसलिए मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि इस वीडियो को केवल सुनिए मत। इसे महसूस कीजिए। हर विचार पर रुक कर सोचिए। अपने जीवन से जोड़कर देखिए। क्योंकि हो सकता है कि आज सुनी गई एक छोटी सी बात आपके अगले 10 20 या 30 वर्षों की आर्थिक दिशा बदल दे।
हो सकता है कि आज समझा गया एक सिद्धांत आपको उन गलतियों से बचा ले जिनकी कीमत लाखों लोग पूरी जिंदगी चुकाते रहते हैं। तो तैयार हो जाइए एक ऐसी यात्रा के लिए जो सिर्फ पैसों की नहीं बल्कि सोच की यात्रा है। अध्याय एक सबसे बड़ी गलती जो गरीब और अमीर के बीच दीवार खड़ी करती है। अगर मैं आपसे एक सवाल पूछूं कि आखिर ऐसा क्या कारण है कि दो लोग एक जैसी शुरुआत करते हैं। एक जैसे शहर में रहते हैं। लगभग एक जैसी कमाई करते हैं। लेकिन 10 साल बाद उनमें से एक आर्थिक रूप से
मजबूत हो जाता है और दूसरा [संगीत] अभी भी पैसों की चिंता में डूबा रहता है। तो आपका जवाब क्या होगा? ज्यादातर लोग कहेंगे कि फर्क किस्मत [संगीत] का है। कुछ लोग कहेंगे कि फर्क अवसरों का है और कुछ लोग मानेंगे कि फर्क कमाई का है। लेकिन वारेन बफेट की सोच कुछ और कहती है। उनके अनुसार अमीर और गरीब के बीच सबसे बड़ी दीवार कमाई की नहीं बल्कि सोच की होती है। दुनिया में ऐसे अनगिनत लोग हैं जो बहुत अच्छी कमाई करते हैं। लेकिन उनके बैंक खाते हमेशा खाली रहते हैं। वहीं दूसरी तरफ ऐसे लोग भी
हैं जो शुरुआत में मामूली आय से अपना सफर शुरू करते हैं और धीरे-धीरे आर्थिक रूप से इतने मजबूत हो जाते हैं कि पैसों की चिंता उनके जीवन से लगभग खत्म हो जाती है। फर्क कहां है? फर्क इस बात में है कि पैसा उनके हाथ में आने के बाद उसके साथ क्या होता है? एक बार एक युवा लड़का वारेन बफेट से मिलने पहुंचा। उसने पूछा सर मैं भी अमीर बनना चाहता हूं। मुझे बताइए कि मुझे कौन सा व्यवसाय शुरू करना चाहिए, कहां निवेश करना चाहिए, कौन सा अवसर पकड़ना चाहिए? वारेन बफेट मुस्कुराए और बोले, उससे पहले
मुझे यह बताओ कि तुम्हारी कमाई का क्या होता है? युवक थोड़ा चौंक गया। उसे लगा था कि उसे कोई बड़ा निवेश रहस्य मिलेगा। लेकिन बफेट का ध्यान उसकी कमाई पर नहीं बल्कि उसकी आदतों पर था। यही वह बात है जिसे अधिकांश लोग समझ नहीं पाते। लोग सोचते हैं कि अमीर बनने का रहस्य अधिक पैसा कमाने में है। जबकि सच्चाई यह है कि अगर पैसा संभालना नहीं आता तो अधिक कमाई केवल अधिक समस्याएं लेकर आती है। कल्पना कीजिए कि किसी व्यक्ति की आय अचानक दोगुनी हो जाए। क्या वह तुरंत आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो जाएगा? अधिकांश
मामलों में नहीं। क्योंकि जो व्यक्ति छोटी आय को संभालना नहीं जानता, वह बड़ी आय को भी संभाल नहीं पाएगा। उसकी इच्छाएं बढ़ जाएंगी, खर्च बढ़ जाएंगे और कुछ समय बाद [संगीत] वह फिर उसी स्थिति में पहुंच जाएगा जहां पहले था। यही कारण है कि कई लोग वेतन बढ़ने के बाद भी तनाव में रहते हैं। उनकी आय बढ़ती है। लेकिन उनकी जीवनशैली उससे भी तेज गति से बढ़ जाती है। नई सैलरी [संगीत] आती है। नया फोन आ जाता है। नई बाइक आ जाती है। नए खर्च शुरू हो जाते हैं। और फिर वही इंतजार अगली सैलरी का।
धीरे-धीरे व्यक्ति पैसे का मालिक नहीं रहता बल्कि पैसा उसका मालिक बन जाता है। वारेन बफेट ने अपने जीवन में एक सिद्धांत को कभी नहीं छोड़ा। उन्होंने हमेशा अपनी कमाई से [संगीत] कम खर्च किया। यह सुनने में साधारण लगता है। इतना साधारण कि लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन सच यही है कि बड़ी संपत्ति अक्सर असाधारण सिद्धांतों से नहीं बल्कि साधारण सिद्धांतों को लगातार अपनाने से बनती है। आज अधिकांश लोग अपनी कमाई का उपयोग दूसरों को प्रभावित करने में करते हैं। वे ऐसी चीजें खरीदते हैं जिनकी उन्हें जरूरत नहीं होती। वे उन लोगों को प्रभावित
करने की कोशिश करते हैं जिनकी राय वास्तव में उनके जीवन में कोई मूल्य नहीं रखती। कुछ मिनटों की तारीफ के लिए कई लोग वर्षों की आर्थिक शांति खो देते हैं। लेकिन जो लोग धन बनाते हैं, वे अलग सोचते हैं। वे हर खर्च से पहले एक सवाल पूछते हैं। क्या यह चीज मेरी जेब से पैसा निकालने वाली है या मेरी जेब में पैसा डालने वाली है? यह एक छोटा सा सवाल है। लेकिन यही सवाल जीवन बदल सकता है। क्योंकि जिस दिन व्यक्ति खर्च और निवेश के बीच का अंतर समझ लेता है, उसी दिन उसकी आर्थिक यात्रा
की दिशा बदलने लगती है। समस्या यह नहीं है कि लोग पैसा नहीं कमाते। समस्या यह है कि वे पैसे को टिकने नहीं देते। उनका पैसा उनके लिए काम करने से पहले ही कहीं और चला जाता है और फिर वे सोचते हैं कि उन्हें और अधिक कमाने की जरूरत [संगीत] है। जबकि असली जरूरत अपनी आदतों को बदलने की होती है। याद रखिए धन का निर्माण बैंक खाते में जमा बड़ी रकम से शुरू नहीं होता। धन का निर्माण उस निर्णय से शुरू होता है जिसमें आप तत्काल खुशी के बजाय भविष्य की स्वतंत्रता को चुनते हैं। हर बार
[संगीत] जब आप अनावश्यक खर्च को रोकते हैं। आप अपने भविष्य को मजबूत [संगीत] बनाते हैं। हर बार जब आप अपने पैसे को बचाते या निवेश करते हैं। आप अपने लिए एक नया कर्मचारी नियुक्त करते हैं। और समय के साथ यही कर्मचारी आपकी सबसे बड़ी संपत्ति बन जाते हैं। लेकिन यहां एक और सवाल पैदा होता है। अगर केवल बचत और समझदारी ही सफलता का रास्ता है तो फिर इतने सारे लोग इसे [संगीत] अपनाने में असफल क्यों हो जाते हैं? ऐसी कौन सी अदृश्य ताकत है जो लोगों को बार-बार गलत वित्तीय फैसले लेने पर मजबूर करती है
और क्यों अधिकांश लोग जानते हुए भी वही गलतियां दोहराते रहते हैं जो उन्हें आर्थिक रूप से कमजोर बनाती हैं। अगले अध्याय में हम मानव मन [संगीत] के उस छिपे हुए जाल को समझेंगे जो लोगों को बिना सोचे समझे पैसा खर्च करने पर मजबूर करता है और जिसे समझ लेने के बाद आप अपने पैसों पर पहले से कहीं अधिक नियंत्रण महसूस करेंगे। अध्याय दो वह अदृश्य जाल जो आपकी जेब खाली कर रहा है। क्या आपने कभी ऐसा अनुभव किया है कि आप किसी दुकान, वेबसाइट या शॉपिंग ऐप पर केवल देखने के लिए गए हो। जिंदगी को
कंट्रोल करता रहता है। यही डर इंसान को बड़े फैसले लेने से रोकता है। नए रास्ते पर चलने से रोकता है। और उसे पूरी [संगीत] जिंदगी उसी जगह कैद रखता है जहां वह आज है। सबसे बड़ा डर कौन सा होता है? पैसे खोने का डर। गरीब इंसान हर वक्त इसी डर में जीता है कि अगर नौकरी चली गई तो क्या होगा? अगर बिजनेस फेल हो गया तो अगर लोग हंसने लगे तो और यही सवाल उसके सपनों का गला घोट देते हैं। तुमने नोटिस किया होगा ज्यादातर लोग अपने सपनों को इसलिए नहीं छोड़ते क्योंकि वह इंपॉसिबल होते
हैं। वो उन्हें इसलिए छोड़ देते हैं क्योंकि सोसाइटी ने उनके अंदर फेलियर का डर भर दिया होता है। बचपन से तुम्हें सिखाया गया गलती मत करना। स्कूल में गलती पर पनिशमेंट मिली। घर में गलती पर डांट मिली। समाज ने फेलियर को शर्म बना दिया और धीरे-धीरे इंसान इतना डरपोक हो जाता है कि वह कोशिश करना ही बंद कर देता है। लेकिन सच क्या है? हर अमीर इंसान हर सक्सेसफुल इंसान किसी ना किसी समय बुरी तरह फेल हुआ है। फर्क सिर्फ इतना था कि उन्होंने फेलियर को अंत नहीं समझा। उन्होंने उसे लेसन समझा। गरीब माइंडसेट वाला
इंसान एक बार हारता है और जिंदगी भर डर में जीने लगता है। लेकिन अमीर माइंडसेट वाला इंसान हर हार के बाद और खतरनाक बन जाता है। क्योंकि उसे पता होता है असली हार तब होती है [संगीत] जब इंसान कोशिश करना छोड़ देता है। अब सोचो अगर एक इंसान पूरी जिंदगी सिर्फ सेफ खेलता रहे तो क्या वह कभी एक्स्ट्राऑर्डिनरी जिंदगी जी पाएगा। कभी [संगीत] नहीं। सेफ जिंदगी हमेशा एवरेज जिंदगी बनाती है और एवरेज जिंदगी बाहर से शांत दिखती है। लेकिन अंदर से इंसान को धीरे-धीरे मार देती है। [संगीत] हर सुबह अलार्म पर उठना, हर महीने बिल्स
भरना, हर साल वही रूटीन दोहराना और फिर एक दिन पछताना कि काश मैंने कोशिश की होती। यह पछतावा दुनिया की सबसे भारी चीज है क्योंकि फेलियर कुछ समय के लिए दर्द देता है लेकिन रिग्रेट पूरी जिंदगी जलाता रहता है। अमीर लोग इस बात को जल्दी समझ जाते हैं। इसलिए वह डर के बावजूद एक्शन लेते हैं। उन्हें भी डर लगता है। लेकिन वह डर को अपने फैसलों का मालिक नहीं बनने देते। यही डिफरेंस है। गरीब इंसान फियर से कंट्रोलोल्ड होता है। अमीर इंसान फियर के बावजूद [संगीत] आगे बढ़ता है। अब एक और डेंजरस डर समझो। लोगों
की राय का डर। दुनिया का आधा टैलेंट सिर्फ इसलिए मर जाता है क्योंकि लोग सोचते रहते हैं। लोग क्या कहेंगे? अगर तुम बिजनेस शुरू करोगे, लोग हंसेंगे। अगर तुम कुछ अलग करोगे, लोग क्रिटिसाइज करेंगे। अगर तुम फेल हुए, लोग मजाक उड़ाएंगे। लेकिन सुनो जब तुम गरीब रहोगे तब भी यही लोग बातें करेंगे। जब तुम जिंदगी भर स्ट्रगल करोगे तब भी यही लोग तुम्हें जज करेंगे। तो फिर क्यों ना ऐसी जिंदगी जी जाए जहां कम से कम तुम्हारे सपने तो पूरे हो। याद रखना दुनिया हमेशा उस इंसान पर हंसती है जो अलग सोचता है। लेकिन कुछ
साल बाद वही दुनिया उसी इंसान की सक्सेस स्टोरी सुनाती है। हर बड़ा बदलाव पहले मजाक बनता है। फिर विरोध झेलता है और आखिर में रियलिटी बन जाता है। लेकिन वहां तक पहुंचने के लिए तुम्हें [संगीत] अपने डर से लड़ना पड़ेगा। और सबसे बड़ा युद्ध बाहर नहीं तुम्हारे दिमाग के अंदर चलता है। तुम्हारा दिमाग हर वक्त तुम्हें सेफ रहने के लिए कहेगा। रिस्क मत लो नया मत करो। जो चल रहा है वही चलने दो। क्योंकि दिमाग का काम सर्वाइवल है। फ्रीडम नहीं। लेकिन अगर इंसान सिर्फ सर्वाइव करने के लिए जीने लगे तो फिर इंसान और मशीन
में फर्क ही क्या रह जाएगा? जिंदगी का असली मजा तब शुरू [संगीत] होता है जब इंसान डर के बावजूद अपने सपनों की तरफ कदम बढ़ाता है। हो सकता है शुरुआत में रास्ता मुश्किल हो। हो सकता है लोग तुम्हें गलत समझें। हो सकता है तुम कई बार गिरो। लेकिन हर बार गिरने के बाद तुम पहले से ज्यादा मजबूत बनोगे। और धीरे-धीरे एक दिन ऐसा आएगा जब तुम्हें एहसास होगा कि तुम्हारी सबसे बड़ी कैद कोई [संगीत] नौकरी नहीं थी। कोई गरीबी नहीं थी। तुम्हारी सबसे बड़ी कैद तुम्हारा डर था और जिस दिन इंसान अपने डर को हराना
सीख जाता है उसी दिन उसकी असली आजादी शुरू होती है। अध्याय पांच अमीर बनने से पहले इंसान को अपने दिमाग को बदलना [संगीत] पड़ता है। अगर तुम्हें एक गरीब इंसान और एक अमीर इंसान के बीच सबसे बड़ा फर्क समझना हो तो उनके कपड़े मत देखो। उनकी गाड़ी मत [संगीत] देखो। उनका घर मत देखो। उनके दिमाग को देखो। क्योंकि इंसान पहले अपने माइंड में अमीर बनता है। उसके बाद ही उसकी जिंदगी बदलती है। ज्यादातर लोग सोचते हैं कि अगर मेरे पास ज्यादा पैसा होगा तब मैं कॉन्फिडेंट बनूंगा। तब मैं बड़ा सोचूंगा तब मैं जिंदगी बदललूंगा। लेकिन
सच इसका उल्टा है। पहले इंसान बड़ा सोचना सीखता है। पहले वह [संगीत] अपने माइंडसेट को बदलता है और फिर निवेशकों में शामिल कर दिया। अगले अध्याय में हम उस सिद्धांत को समझेंगे जिसे जानने के बाद आप महसूस करेंगे कि पैसा केवल बचाने की चीज नहीं है। पैसा एक ऐसा कर्मचारी है जिसे सही तरीके से काम पर लगाया जाए तो वह दिन रात आपके लिए काम कर सकता है। अध्याय तीन अपने पैसों को कर्मचारी बनाओ। गुलाम मत बनो। मान लीजिए कि आज सुबह आपकी आंख खुली और आपने देखा कि आपके घर के बाहर एक ऐसा कर्मचारी
खड़ा है जो 24 घंटे काम करने को तैयार है। उसे छुट्टी नहीं चाहिए। उसे आराम नहीं चाहिए। वह कभी शिकायत नहीं करेगा। वह दिन हो या रात लगातार आपके लिए काम करता रहेगा। और सबसे बड़ी बात वह जितना काम करेगा उतने ही नए कर्मचारी आपके लिए पैदा करता जाएगा। सुनने में [संगीत] यह किसी कहानी जैसा लगता है। लेकिन सच यह है कि ऐसा कर्मचारी वास्तव में मौजूद है। उसका नाम है आपका पैसा। दुर्भाग्य से अधिकांश लोग इस कर्मचारी को नौकरी पर लगाने के बजाय उसे हर महीने खर्च करके बाहर भेज देते हैं। यही वह अंतर
है जो अमीर और सामान्य लोगों के बीच [संगीत] दिखाई देता है। अधिकांश लोग अपने समय के बदले पैसा कमाते हैं। [संगीत] लेकिन अमीर लोग अपने पैसों से और पैसा कमाते हैं। यहीं से वास्तविक धन निर्माण शुरू होता है। वारेन बफेट ने [संगीत] एक बार कहा था कि अगर आप सोते समय पैसा कमाने का तरीका नहीं खोजते तो आपको जीवन भर काम करना पड़ेगा। इस एक वाक्य [संगीत] में आर्थिक स्वतंत्रता का पूरा रहस्य छिपा हुआ है। सोचिए जब आप नौकरी करते हैं [संगीत] तो आपकी कमाई आपके काम करने पर निर्भर होती है। अगर आप काम नहीं
करते तो पैसा भी नहीं आता। [संगीत] लेकिन जब आपका पैसा आपके लिए काम करना शुरू कर देता है तब स्थिति बदलने लगती है। तब आपकी कमाई [संगीत] केवल आपके समय पर निर्भर नहीं रहती। तब आपका पैसा भी आपके साथ कमाने लगता है। समस्या यह है कि अधिकांश लोग पैसा आते ही उसे खर्च करने के लिए तैयार बैठे होते हैं। उनका ध्यान हमेशा इस बात पर रहता है कि वे क्या खरीद सकते हैं। [गला साफ़ करने की आवाज़] जबकि सफल लोगों का ध्यान इस बात पर रहता है कि वे क्या बना [संगीत] सकते हैं। यही सोच
का अंतर धीरे-धीरे परिणामों का अंतर बन जाता है। कल्पना कीजिए दो व्यक्तियों की। दोनों के पास ₹10,000 हैं। पहला व्यक्ति तुरंत कोई महंगी वस्तु खरीद लेता है। दूसरा व्यक्ति सोचता है कि [संगीत] इस पैसे को ऐसा कहां लगाया जाए जहां से भविष्य में और पैसा पैदा हो सके। पहले व्यक्ति का पैसा वहीं समाप्त हो जाता है। दूसरे व्यक्ति का पैसा काम पर लग जाता है। कुछ समय बाद दोनों के बीच अंतर दिखाई देने लगता है। फिर यह अंतर बढ़ता जाता है और वर्षों बाद यही छोटा अंतर विशाल खाई में बदल जाता है। यही कारण है
कि वारेन बफेट निवेश को खर्च से अधिक महत्व देते थे। वे जानते थे कि हर रुपया एक बीज की तरह है। अगर उसे सही जगह बो दिया जाए तो वह भविष्य में एक विशाल [संगीत] पेड़ बन सकता है। लेकिन अगर उसी बीज को आज ही खा लिया जाए तो भविष्य का पेड़ कभी पैदा नहीं होगा। यह उदाहरण सरल है। लेकिन इसकी गहराई बहुत बड़ी है। अधिकांश लोग अपने बीज खा जाते हैं। बहुत कम लोग उन्हें बोते हैं और उससे भी कम लोग इतने धैर्यवान होते हैं कि [संगीत] पेड़ के बढ़ने का इंतजार कर सकें। यही
वजह है कि धैर्य [संगीत] धन निर्माण का सबसे महत्वपूर्ण गुण है। आज की दुनिया तत्काल परिणाम चाहती है। लोग चाहते हैं कि उनका पैसा कुछ ही दिनों में दो गुना हो जाए। वे जल्दी अमीर बनने के सपने देखते हैं। लेकिन वारेन बफेट की सफलता का आधार जल्दी नहीं [संगीत] बल्कि धीरे-धीरे बढ़ना था। उन्होंने समझ लिया था कि छोटी-छोटी बढ़तें समय के साथ असाधारण परिणाम देती हैं। एक बर्फ का छोटा गोला पहाड़ी से नीचे लुढ़कना शुरू करता है। शुरुआत में वह बहुत छोटा होता है, लेकिन जैसे-जैसे वह आगे बढ़ता है, वह और बर्फ इकट्ठा करता जाता
है। धीरे-धीरे वह इतना बड़ा हो जाता है कि उसे रोकना मुश्किल हो जाता है। धन भी बिल्कुल इसी तरह काम करता है। शुरुआत में प्रगति धीमी दिखाई देती है। कभी-कभी तो ऐसा लगता है कि कुछ हो ही नहीं रहा। लेकिन जो लोग लगातार सही फैसले लेते रहते हैं उनके लिए समय सबसे शक्तिशाली साथी बन जाता है। यहीं पर अधिकांश लोग हार मान लेते हैं। वे कुछ महीनों तक बचत करते हैं। कुछ समय निवेश करते हैं। फिर परिणाम तुरंत नहीं दिखते और वे निराश हो जाते हैं। लेकिन धन का खेल दिनों और महीनों का नहीं है।
यह वर्षों और दशकों का खेल है। वारेन बफेट की संपत्ति का बड़ा हिस्सा उनके जीवन के बाद के वर्षों में बना। क्यों? क्योंकि समय ने उनके पैसों को लगातार काम करने का अवसर दिया। उनका रहस्य केवल निवेश नहीं था। उनका रहस्य समय और धैर्य था। याद रखिए पैसा तब सबसे शक्तिशाली बनता है जब उसे बढ़ने के लिए समय दिया जाता है। हर दिन जब आप अपने पैसों को समझदारी से काम पर लगाते हैं। आप अपने भविष्य के लिए एक नया कर्मचारी तैयार करते हैं। कुछ वर्षों बाद वे कर्मचारी बढ़ जाते हैं। फिर वे और कर्मचारियों
को जन्म देते हैं। और एक दिन ऐसा आता है जब आपका पैसा आपके लिए उससे अधिक काम कर रहा होता है जितना आप स्वयं कर रहे होते हैं। यही आर्थिक स्वतंत्रता की शुरुआत है। लेकिन यहां एक और महत्वपूर्ण सवाल खड़ा होता है। अगर पैसा [संगीत] इतना शक्तिशाली कर्मचारी है तो फिर अधिकांश लोग धन निर्माण की इस यात्रा में बीच रास्ते में क्यों रुक जाते हैं? क्यों इतने सारे लोग निवेश शुरू तो करते हैं? लेकिन सफलता तक नहीं पहुंच पाते और क्यों कुछ लोग अवसरों के सामने होते हुए भी जीवन भर साधारण परिणाम ही प्राप्त करते
हैं। इसका उत्तर पैसों में नहीं। बल्कि एक ऐसी आदत में छिपा है जो किसी भी निवेश से अधिक मूल्यवान है। अगले अध्याय में हम उस आदत को समझेंगे जिसने वारेन बफेट को करोड़ों लोगों से अलग बनाया और जो किसी भी व्यक्ति को साधारण से असाधारण बना सकती है। अध्याय चार वह आदत जिसने वारेन बफेट को दुनिया से अलग बना दिया। अगर आपको यह चुनना पड़े कि धनवान बनने के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज क्या है? पैसा, [संगीत] प्रतिभा, शिक्षा, किस्मत या अवसर? तो आप क्या चुनेंगे? अधिकांश लोग शायद पैसा या अवसर चुनेंगे। लेकिन वारेन बफेट का
जवाब कुछ और होगा। वे कहेंगे कि दुनिया की सबसे मूल्यवान संपत्ति वह नहीं है जो आपके बैंक खाते में दिखाई देती है। सबसे मूल्यवान संपत्ति वह है जो आपके [संगीत] दिमाग के अंदर मौजूद है। क्योंकि पैसा खोकर वापस पाया जा सकता है। व्यवसाय बंद होकर दोबारा शुरू किया जा सकता है। नौकरी छूट कर फिर मिल सकती है। लेकिन गलत सोच के साथ सही परिणाम [संगीत] लंबे समय तक हासिल नहीं किए जा सकते। यही कारण है कि वारेन बफेट ने अपने जीवन का सबसे बड़ा निवेश शेयर बाजार में नहीं बल्कि खुद पर किया। जब वे युवा
थे तब उनके पास आज जैसी संपत्ति नहीं थी। लेकिन उनके पास एक ऐसी आदत थी जिसने उनकी पूरी जिंदगी की दिशा बदल दी। वह आदत थी लगातार सीखना। कहा जाता है कि वारेन बफेट अपने दिन का बड़ा हिस्सा पढ़ने में बिताते थे। रिपोर्ट पढ़ना, [संगीत] किताबें पढ़ना, व्यवसायों को समझना, लोगों के व्यवहार को समझना, दुनिया को समझना। क्योंकि वे जानते थे कि ज्ञान एक ऐसा निवेश है जिसका लाभ जीवन भर मिलता है। आज अधिकांश लोग पैसा कमाने में इतने व्यस्त हैं कि वे सीखना बंद कर देते हैं। उन्हें लगता है कि डिग्री मिलने के बाद
शिक्षा पूरी हो गई। लेकिन वास्तविक शिक्षा अक्सर स्कूल और कॉलेज के बाद शुरू होती है। यही वह जगह है जहां अधिकांश लोग पीछे रह [संगीत] जाते हैं। वे अपने कौशल को नहीं बढ़ाते, अपनी समझ को नहीं बढ़ाते, अपनी सोच को नहीं बढ़ाते और फिर आश्चर्य करते हैं कि उनके परिणाम क्यों नहीं बदल रहे? सच्चाई यह है कि आपकी आय अक्सर आपकी वर्तमान क्षमता का प्रतिबिंब होती है। जैसे-जैसे आपकी क्षमता बढ़ती है, वैसे-वैसे आपके अवसर भी बढ़ते हैं। लेकिन क्षमता बढ़ाने के लिए सीखना पड़ता है और सीखने के लिए धैर्य [संगीत] चाहिए। एक किसान की कल्पना
कीजिए। अगर वह हर दिन खेत में जाकर केवल फसल को देखता रहे, लेकिन बीज [संगीत] ना बोए, तो क्या होगा? कुछ भी नहीं। उसे पहले बीज बोना होगा। फिर समय देना होगा। [संगीत] फिर देखभाल करनी होगी। तभी फसल तैयार होगी। ज्ञान भी बिल्कुल ऐसा ही बीज है। जो व्यक्ति रोज थोड़ा-थोड़ा सीखता है, वह अपने भविष्य के खेत में बीज [संगीत] बो रहा होता है। शुरुआत में कोई बड़ा बदलाव दिखाई नहीं देता। लेकिन वर्षों बाद वही बीज अवसरों के रूप में [संगीत] लौटते हैं। बेहतर फैसलों के रूप में लौटते हैं। बेहतर कमाई [संगीत] के रूप में
लौटते हैं। बेहतर जीवन के रूप में लौटते हैं। यही कारण है कि सफल लोग केवल पैसा कमाने पर ध्यान नहीं देते। वे खुद को बेहतर बनाने पर ध्यान देते हैं क्योंकि वे जानते हैं कि जब व्यक्ति बेहतर होता है तो उसके परिणाम भी बेहतर होने लगते हैं। एक और दिलचस्प बात है अधिकांश लोग अवसर मिलने के बाद सीखना चाहते हैं। सफल लोग अवसर मिलने से पहले सीखते हैं। यही अंतर उन्हें आगे ले जाता है। जब अवसर आता है तब तक वे तैयार होते हैं। बाकी लोग तैयारी शुरू कर रहे होते हैं। याद [संगीत] रखिए, अवसर
हमेशा तैयार लोगों का साथ देता है। दुनिया में बहुत से लोग इसलिए पीछे नहीं रह जाते, क्योंकि उनके पास अवसर नहीं थे। वे इसलिए पीछे [संगीत] रह जाते हैं, क्योंकि जब अवसर उनके सामने आया, तब वे उसके योग्य नहीं बने थे। वारेन बफेट ने कभी [संगीत] जल्दी सफलता की तलाश नहीं की। उन्होंने पहले खुद को तैयार किया। उन्होंने अपने ज्ञान को बढ़ाया। अपनी समझ को मजबूत [संगीत] किया। अपने निर्णय लेने की क्षमता को बेहतर बनाया और फिर समय ने उनके [संगीत] पक्ष में काम करना शुरू किया। आज अगर आप अपने जीवन को बदलना चाहते हैं
तो सबसे पहले अपने दिमाग को बदलना [संगीत] होगा। आप जो पढ़ते हैं वही सोचते हैं। आप जो सोचते हैं वही निर्णय लेते हैं और आपके निर्णय ही आपका भविष्य बनाते हैं। इसलिए हर दिन खुद से एक सवाल पूछिए। क्या मैं केवल पैसा कमाने में व्यस्त हूं या खुद को भी बेहतर बना रहा हूं? क्योंकि जो व्यक्ति सीखना बंद कर देता है, [संगीत] उसकी प्रगति भी धीरे-धीरे रुक जाती है। लेकिन जो व्यक्ति लगातार सीखता रहता है, उसकी संभावनाएं लगातार बढ़ती रहती हैं। और यहीं पर एक और रहस्य सामने आता है। मान लीजिए आपने सीखना शुरू कर
दिया। अपने ज्ञान को बढ़ाना शुरू कर दिया। अपने पैसों को समझदारी से संभालना भी सीख लिया। फिर भी एक ऐसी चीज है जो आपके सारे प्रयासों को बर्बाद कर सकती है। एक ऐसी कमजोरी जो लोगों को सफलता के बेहद करीब पहुंचकर भी पीछे धकेल [संगीत] देती है। वारेन बफेट ने इसे कई बार देखा। उन्होंने देखा कि लोग सही जानकारी होने के बावजूद गलत फैसले लेते हैं क्योंकि उनका सबसे बड़ा दुश्मन बाहर नहीं उनके भीतर छिपा होता है। अगले अध्याय में हम उस अदृश्य दुश्मन का सामना करेंगे जिसने अनगिनत लोगों के सपनों को अधूरा छोड़ दिया
और जिसे जीतने वाला व्यक्ति धन सफलता और सम्मान की यात्रा में बहुत आगे निकल जाता है। अध्याय पांच आपका सबसे बड़ा दुश्मन कोई और नहीं। [संगीत] आप खुद हैं। जब लोग अपनी आर्थिक असफलताओं के बारे में सोचते हैं तो अक्सर वे किसी ना किसी बाहरी कारण को जिम्मेदार ठहराते हैं। कोई परिस्थितियों को दोष देता है। कोई महंगाई को, कोई अपनी नौकरी को, कोई अपनी किस्मत को और कभी-कभी लोग दूसरों को भी दोष देने लगते हैं। लेकिन वारेन बफेट की सोच एक बिल्कुल अलग दिशा में जाती है। वे मानते थे कि इंसान की सबसे बड़ी लड़ाई
बाजार से नहीं होती, पैसों से नहीं होती, परिस्थितियों से नहीं होती। [संगीत] उसकी सबसे बड़ी लड़ाई अपने ही मन से होती है। यही वह दुश्मन है [संगीत] जिसे अधिकांश लोग पहचान ही नहीं पाते। क्योंकि यह दुश्मन बाहर नहीं दिखाई देता। यह हमारे फैसलों में छिपा होता है। हमारी भावनाओं में छिपा होता है। हमारी अधीरता में छिपा होता है। हमारे डर और लालच में छिपा होता है। और यही कारण है कि बहुत से लोग सही जानकारी होने के बावजूद गलत परिणाम प्राप्त करते हैं। कल्पना कीजिए कि दो लोग बिल्कुल एक जैसी सलाह सुनते हैं। दोनों को
पता है कि बचत करनी चाहिए। दोनों जानते हैं कि निवेश करना चाहिए। दोनों समझते हैं कि अनावश्यक खर्च नुकसानदायक है। लेकिन कुछ वर्षों बाद एक व्यक्ति आर्थिक रूप से मजबूत हो जाता है और दूसरा [संगीत] वहीं का वहीं खड़ा रहता है। ऐसा क्यों होता है? क्योंकि ज्ञान और व्यवहार दो अलग चीजें हैं। जानना आसान है। करना मुश्किल है। यही वह जगह है जहां अधिकांश लोग हार जाते हैं। वारेन बफेट ने अपने जीवन में बार-बार साबित किया कि सफलता का संबंध [संगीत] केवल बुद्धिमत्ता से नहीं है। उसका संबंध भावनात्मक नियंत्रण से भी है। जब दुनिया घबराती
है तब क्या आप शांत रह सकते हैं? जब लोग लालच में अंधे हो जाते हैं तब क्या आप धैर्य रख सकते हैं? जब परिणाम आने में समय लगता है तब क्या आप इंतजार कर सकते हैं? यही सवाल तय करते हैं कि भविष्य में आप कहां पहुंचेंगे? एक छोटी सी कहानी समझिए। एक व्यक्ति ने एक पौधा लगाया। पहले दिन उसने देखा कुछ नहीं हुआ। एक सप्ताह बाद देखा [संगीत] कुछ नहीं हुआ। एक महीने बाद देखा फिर भी कोई बड़ा बदलाव नहीं। वह निराश हो गया। उसे लगा कि मेहनत बेकार जा रही है और उसने पौधे को
पानी देना बंद कर दिया। कुछ समय बाद वह पौधा सूख गया। दूसरे व्यक्ति ने भी एक पौधा लगाया। उसे भी शुरुआत में कोई परिणाम नहीं दिखाई दिया। लेकिन उसने पानी देना जारी रखा। धैर्य बनाए रखा। विश्वास बनाए रखा और समय के साथ वही पौधा एक विशाल [संगीत] पेड़ बन गया। धन निर्माण भी बिल्कुल ऐसा ही है। समस्या यह है कि अधिकांश लोग पेड़ चाहते हैं लेकिन बीज को समय नहीं देना चाहते। वे परिणाम चाहते हैं लेकिन प्रक्रिया को नहीं अपनाना चाहते। वे सफलता चाहते हैं लेकिन अनुशासन नहीं। यहीं पर उनका अपना मन उनका दुश्मन बन
जाता है। कभी डर उन्हें रोक देता है। कभी लालच उन्हें भटका देता है। कभी अधीरता उन्हें बीच रास्ते से वापस मोड़ देती है। और धीरे-धीरे वे अपने ही सपनों से दूर होते चले जाते हैं। वारेन बफेट का एक गुण था जो उन्हें करोड़ों लोगों से अलग बनाता था। वे भावनाओं के आधार पर फैसले नहीं लेते थे। वे सिद्धांतों के आधार पर फैसले लेते थे। जब लोग उत्साह में बह जाते थे, वे शांत रहते थे। जब लोग घबराकर भागते थे, वे सोचते थे। जब लोग भीड़ का पीछा करते थे, वे तथ्यों का पीछा करते थे। यही
कारण है कि समय के साथ उनके फैसले असाधारण साबित हुए। आज अगर आप अपने जीवन को ध्यान से देखें तो शायद आपको महसूस होगा कि आपकी सबसे बड़ी बाधा बाहर नहीं है। हो सकता है वह आपके भीतर हो। वह आवाज जो कहती है कल से शुरू करूंगा। अभी तो जिंदगी का मजा लेना चाहिए। इतनी छोटी बचत से क्या फर्क पड़ेगा? मेरे बस [संगीत] की बात नहीं है। मेरे पास पर्याप्त समय है। यही वे वाक्य हैं जो धीरे-धीरे लोगों के भविष्य को कमजोर करते हैं। क्योंकि जीवन में बड़े नुकसान अक्सर एक बड़े फैसले से नहीं होते।
वे छोटी-छोटी गलतियों के लगातार दोहराव से होते हैं। उसी तरह बड़ी सफलताएं भी किसी एक चमत्कार से नहीं आती। वे छोटे-छोटे सही फैसलों के लगातार दोहराव से बनती हैं। याद रखिए आर्थिक स्वतंत्रता केवल पैसों की स्थिति नहीं है। यह मानसिक स्थिति भी है। जब आप अपने डर पर नियंत्रण पा लेते हैं। जब आप अपनी इच्छाओं को नियंत्रित कर लेते हैं। जब आप अपने सिद्धांतों पर टिके रहना सीख जाते हैं। तब आप धीरे-धीरे उस स्तर पर पहुंचने लगते हैं जहां अधिकांश लोग कभी नहीं [संगीत] पहुंच पाते। लेकिन यहां एक अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न सामने आता
है। मान लीजिए आपने अपने मन को नियंत्रित करना सीख लिया। आपने बचत करना सीख लिया। [संगीत] आपने निवेश करना सीख लिया। आपने सीखना और धैर्य रखना भी सीख लिया। फिर आखिर वह अंतिम सिद्धांत क्या है [संगीत] जो साधारण व्यक्ति और वास्तव में आर्थिक रूप से स्वतंत्र व्यक्ति के बीच सबसे बड़ा अंतर पैदा करता है। फॉरेन बफेट के जीवन में एक ऐसा नियम था जिसने उनकी पूरी यात्रा को दिशा दी। एक ऐसा नियम जिसे समझे बिना धन की कहानी अधूरी रहती है और यही नियम इस पूरी यात्रा का सबसे शक्तिशाली निष्कर्ष बनने वाला है। अगले और
अंतिम अध्याय में हम उस सिद्धांत को जानेंगे जो केवल पैसे कमाने की नहीं। बल्कि जीवन भर धन को सुरक्षित रखने और बढ़ाने की कला सिखाता है। तो अब जब हमारी यह यात्रा समाप्त होने जा रही है, मैं चाहता हूं कि आप कुछ क्षणों के लिए रुके और अपने जीवन के बारे में सोें। उस व्यक्ति के बारे में सोें जो [संगीत] आप आज हैं और उस व्यक्ति के बारे में भी सोें जो आप आने वाले वर्षों में बन सकते हैं क्योंकि सच यह है कि धन केवल बैंक खाते में जमा पैसों का नाम नहीं है। धन
एक सोच है। धन एक आदत है। धन एक अनुशासन है और सबसे बढ़कर धन उन छोटे-छोटे फैसलों का परिणाम है जो हम हर दिन लेते हैं। शायद आज आपके पास बहुत ज्यादा पैसा ना हो। शायद आप अभी भी अपने आर्थिक लक्ष्यों से काफी दूर हो। [संगीत] शायद आपके जीवन में चुनौतियां हो, जिम्मेदारियां हो और संघर्ष भी हो। लेकिन याद रखिए वारेन बफेट ने भी अपनी यात्रा अरबों डॉलर से शुरू नहीं की थी। उन्होंने शुरुआत की थी [संगीत] सही सोच से, सही आदतों से और उस धैर्य से जो अधिकांश लोगों के पास नहीं होता। दुनिया में
बहुत से लोग जीवन भर अधिक कमाई के पीछे भागते रहते हैं। लेकिन बहुत कम लोग यह सीखते हैं कि जो उनके पास है उसे संभालना कैसे है और यही कारण है कि कुछ लोग कम कमाई के बावजूद संपत्ति बना लेते हैं। जबकि कुछ लोग बड़ी कमाई के बावजूद हमेशा पैसों की चिंता में रहते हैं। आज आपने जिन सिद्धांतों को सुना वे कोई जादुई रहस्य नहीं है। वे साधारण लग सकते हैं। लेकिन इतिहास गवाह है कि असाधारण जीवन अक्सर साधारण सिद्धांतों पर ही खड़े होते हैं। जब आप अपनी कमाई से कम खर्च करना शुरू करते हैं।
जब आप अपने पैसों को अपने लिए काम पर [संगीत] लगाना शुरू करते हैं। जब आप दिखावे के बजाय भविष्य को प्राथमिकता देना शुरू करते हैं। जब आप सीखना कभी बंद नहीं करते और जब आप अपने डर, लालच और अधीरता पर नियंत्रण पाना सीख जाते हैं। तब धीरे-धीरे आपकी आर्थिक कहानी बदलने लगती है। याद रखिए सफलता एक दिन में नहीं आती लेकिन एक दिन जरूर आती है। हर बड़ी इमारत एक ईंट से शुरू होती है। हर विशाल पेड़ एक छोटे बीज से शुरू होता है और हर बड़ी संपत्ति एक छोटे लेकिन सही निर्णय से शुरू होती
है। हो सकता है आज का दिन वही निर्णय लेने का दिन हो। हो सकता है आज आप पहली बार अपने पैसों को अलग नजरिए से देख रहे हो। हो सकता है आज आपके भीतर वह बदलाव शुरू हो रहा हो जो आने वाले वर्षों में आपके पूरे जीवन को नई दिशा दे देगा। इसलिए जब यह ऑडियो समाप्त हो जाए तो केवल प्रेरित मत महसूस कीजिए। कार्य शुरू [संगीत] कीजिए क्योंकि ज्ञान तभी शक्तिशाली बनता है जब उसे कर्म में बदला जाए। आज एक छोटा कदम उठाइए। एक अनावश्यक खर्च कम कीजिए। एक नई वित्तीय आदत शुरू कीजिए। कुछ
बचत कीजिए। कुछ सीखिए और अपने भविष्य के लिए एक बेहतर निर्णय लीजिए क्योंकि आने वाला आपका भविष्य आज के आपके निर्णयों से बन रहा है और शायद वर्षों बाद जब आप पीछे मुड़कर देखेंगे तो आपको एहसास होगा कि आपकी आर्थिक स्वतंत्रता की यात्रा किसी बड़ी घटना से नहीं बल्कि इसी छोटे से निर्णय [संगीत] से शुरू हुई थी। याद रखिए पैसा उन लोगों के पास नहीं टिकता जो उसे केवल खर्च करना जानते हैं। पैसा उन लोगों के पास टिकता है जो उसे समझते हैं, उसका सम्मान करते हैं और उसे अपने लिए काम करना सिखाते हैं। इसी
सोच के साथ अपने सपनों पर विश्वास रखिए। सीखते रहिए, आगे बढ़ते रहिए और अपने भविष्य को संयोग पर नहीं, अपने निर्णयों पर बनाइए।