सलाम वालेकुम। वेलकम टू क्लास नंबर फाइव। पिछली क्लास में हमने स्ट्रक्चर के हवाले से बात की थी। स्ट्रक्चर की बेसिक चीजें पढ़ी थी। आज उससे हम आगे चलेंगे। जो चीजें हमने पिछली क्लास में कवर की थी उनमें से दो चार चीजें जो इंपॉर्टेंट थी जो आपको पता होनी चाहिए ये क्लास लेने से पहले। तो वो मैं यहां पे डिस्कस कर लेता हूं। अगर आपने ये क्लास अब आप देख रहे हैं। लाइव देख रहे हैं। अगर आपने इससे पिछली क्लास नहीं देखी तो मुमकिन है कुछ चीजें आपको तंग करेंगी। कुछ चीजें आपको समझ नहीं आएंगी। तो
इसलिए आप ये बेहतर है कि ये क्लास भी ले लें। लेकिन इससे पिछली क्लास का आपको देखना है क्योंकि पूरी एक सीरीज है तो स्ट्रक्चर की पहली क्लास का देखना आपके लिए बहुत जरूरी है। वह देखेंगे तो अगली चीजें आसानी से समझ आ जाएंगी। अच्छा जी हमने पढ़ा क्या था? सबसे पहले हमने पढ़ी थी कैंडल फॉर्मेशन पढ़ी थी। कैंडल फॉर्मेशन ये होती है कि कैंडल की जो शक्ल होती है वो कैसे बनती है? किसी अब ये कैंडल है। मैं यहां पे कैंडल ड्रॉ कर देता हूं। इस कैंडल की ये शक्ल कैसे बनी? ये विक्स क्यों
बनी? नीचे बड़ी विक क्यों आई? ऊपर छोटी विक क्यों आई? इसकी ओपनिंग कहां पे आई? क्लोजिंग कहां पे आई? ये सब चीजें हमने बड़ी डिटेल से डिस्कस की थी। यह पता होना आपके लिए बहुत जरूरी है। कैंडल का ही नहीं पता होगा। उसकी मूवमेंट का ही अगर आपको अंदाजा नहीं होगा तो फिर अगली चीजें समझ नहीं आएंगी। दूसरी चीज जो हमने पढ़ी थी वो था हमारा मार्केट स्ट्रक्चर। मार्केट स्ट्रक्चर ये होता है कि प्राइस कितनी तरह की मूवमेंट्स दे सकती है आपको प्राइस। यानी एक मूवमेंट होती है कि प्राइसेस मुसलसल अप जा रही हैं। इसको
हम बुलिश ट्रेंड कहते हैं। ये बुलिश ट्रेंड क्यों है? किस वजह से है? इसकी ऐसी क्या कररेक्टरिस्टिक्स है जिसकी वजह से हम कहते हैं कि ये बुलिश है। वैसे तो देखने में भी नजर आ रहा है कि ऊपर जा रही है। लेकिन टेक्निकल रीज़न क्या होती है? तो यह आपको पता मैंने बताया था कि उसमें जब तक प्राइसेस अपना हाई ब्रेक करती जाएंगी तो हम कहेंगे कि प्राइसेस बुलिश हैं। हाई ब्रेक करती जाएंगी और अपना लो होल्ड करेंगी। यानी लो इनका ब्रेक नहीं होता। कोई भी लो ब्रेक नहीं हुआ। ठीक है? सिर्फ हाई ब्रेक हो
रहे हैं। तब तक आप कहेंगे कि प्राइसेस बुलिश ट्रेंड में है। इसके अलावा प्राइसेस नीचे आती हैं जब तो यह बेरिश मार्केट होती है। एक ट्रेंड मार्केट का होता है बुलिश। एक होता है बेरिश। इनको बुलिश और बरिश क्यों कहा जाता है? यह भी आपको बताया था। बेरिश मार्केट में प्राइसेस जो अपना लो लगाती हैं, इनको होल्ड करती हैं। ठीक है? और अपने जितने भी हाई लगाए होते हैं इन्होंने उसको अपना लो ब्रेक करती हैं और अपने हाईज़ को प्राइस अपने होल्ड करती है। यानी इसको ब्रेक नहीं होने देती। तो ऐसे ट्रेंड को हम बेरिश
ट्रेंड कहते हैं। इसके अलावा एक ट्रेंड ये होता है कि जिसमें मार्केट किसी एक तरफ कोई सिग्निफिकेंट मूव नहीं देती बल्कि साइड बेस्ड मूवमेंट देती है। इसको हम रेंज भी कहते हैं, कंसोलिडेशन भी कहते हैं और डिफरेंट सल्स के साथ-साथ इसके मुख्तलिफ नाम है। मतलब किसी जगह पे इसको हमको एक्यूमुलेशन कहते हैं। किसी जगह पे डिस्ट्रीब्यूशन कहते हैं। चीजें हम डिटेल से पढ़ेंगे इंशाल्लाह। लेकिन आप यह याद रखें कि इस मूवमेंट को रेंज की मूवमेंट कहा जाता है कि यह रेंज कर रही है प्राइस। अच्छा उसके बाद आपको जो बहुतेंट चीज पता होनी चाहिए वह
आपको यह बताई थी के वेव्स जो हैं वो कितनी टाइप की होती है। मसलन बुलिश ट्रेंड है हमारा प्राइसेस ऊपर जा रही हैं। तो इसमें कौन सी वेव को हम इंपल्स वेव कहेंगे? कौन सी वेव को रिट्रेसमेंट कहेंगे? ठीक है? अब यहां पे जो देखें ना आप चल हम बड़े टाइम फ्रेम में नीचे आ जाते हैं। अभी मेरे पास फोर आवर का चार्ट ओपन है। तो फोर ऑवर में अगर आप देखें तो ये कौन सी वेव्स चल रही हैं। इसमें इंपल्सिव वेव कौन सी है? इसमें रिट्रेसमेंट कौन सी है? अगर आप यहां पे देखें तो
आपको साफ नजर आ रहा है कि यह जो वेव थी इसको हम इंपल्स वेव कहते हैं। क्यों? क्योंकि इसने प्रीवियसली इस स्ट्रक्चर को ब्रेक किया है। तो जब प्राइस किसी स्ट्रक्चर को ब्रेक करती है तो इसको हम कहते हैं कि यह इंपल्स वेव है। और जिस तरह अब यहां पे आप देखें इस जगह पे यहां से भी प्राइस ने एक इंपल्स वेव लगाई क्योंकि इसने पूरा स्ट्रक्चर ब्रेक किया ये वाला। ठीक है? उसके बाद रिट्रेसमेंट आई है। रिट्रेसमेंट की वेव थी। फिर एक इंपल्स वेव लगी। अब फिर रिट्रेसमेंट चल रही है। और यहां से उम्मीद
है कि और इंपल्स वेव आ जाएगी। ठीक हो गया? तो आपको इंपल्स वेव और रिट्रेसमेंट के बारे में पता होना चाहिए। ये अगर आपको नहीं पता होगा तो आगे मुश्किलात होंगी आपको। उसके बाद सबसेेंट चीज जो इस क्लास में थी पिछली क्लास में वह यह था कि आपके पास एक कोई भी स्ट्रक्चर है तो इसमें आप हाई लोस कैसे मार्क करते हैं? जैसे यह आपका लो है, यह आपका हाई है। ठीक है? फिर आपका हायर लो इन दोनों में से आपका हायर लो कौन सा होगा? हालांकि इंपल्स वेव यहां से स्टार्ट हुई है। इंपल्स वेव
है आपकी ये वाली। ठीक है जी। तो इस इंपल्स वेव में आपने क्या इसको हायर लो कहना है या इसको हायर लो कहना है। तो मैंने आपको बताया था कि जो सबसे डीप पॉइंट होता है उसको आप हायर लो कहते हैं। कब कहते हैं? जब प्राइस अपना प्रीवियस स्ट्रक्चर ब्रेक कर चुकी होती है। यहां पे इसने ब्रेक कर दिया। जब ब्रेक कर दे अब आप सबसे डीप पॉइंट ढूंढ लें। सबसे डीप पॉइंट आपका हायर लो होगा। फिर प्राइस नीचे आई। ठीक है? अब इसने इसको ब्रेक कर दिया तो ये आपका हायर लो है। फिर प्राइस
नीचे आती है। जब तक प्राइस अब ये वाला हाई ब्रेक नहीं करेगी उस वक्त तक कोई भी कंफर्म नहीं है पॉइंट कि कौन सा पॉइंट आपका हायर लो बनेगा। अब इसने ब्रेक कर दिया तो अब ये आपका हायर लो कंफर्म हो गया। सबसे डी पॉइंट। ठीक हो गया? इसी तरीके से जब प्राइसेस नीचे आती है तो इसमें भी आप इसी तरीके से जो आपका हाईएस्ट पॉइंट होता है उसको आप मार्क कर लेते हैं कि ये हमारा लोअर हाई है। हायर लोअर हाई की कंफ्यूजन भी मैंने आपको खत्म कर दी थी कि किस तरीके से आप
इसको देखेंगे नोट करेंगे लिखेंगे तो आपको इसकी कोई कंफ्यूजन नहीं होगी। ये हमारे पिछली क्लास के टॉपिक्स थे। आपको उम्मीद है थोड़ा-थोड़ा मैंने इनको आपको रीकैप भी दे दिया हल्का सा इसका ताकि आपको रिवाइज हो जाए चीजें। अच्छा अब आज हमने क्या पढ़ना है? आज का जो हमारा टॉपिक है उसमें सबसे पहले चीज हम पढ़ेंगे। इंटरनल और एक्सटर्नल स्ट्रक्चर। आपने सुना होगा कि इंटरनल स्ट्रक्चर है या एक्सटर्नल स्ट्रक्चर है। वो क्या होता है? तो सबसे पहले आप इसकी एग्जांपल इस तरीके से ले लें कि आप एक घर में रहते हैं। ठीक है जी। आपका 10
मरले का, एक कनाल का, पांच मरले का जितना भी घर है। अब ये जब आपका घर है तो ये इसकी बाहर बेशक आपकी ये एक्सटर्नल वार है। एक्सटर्नल वॉल। ठीक है? या आपकी ये इस तरफ इस साइड पे आपका कोई रूम है। ये उस रूम की दीवार है। जो भी इसके बाहर का स्ट्रक्चर है। उसको आप कहते हैं कि ये एक्सटर्नल स्ट्रक्चर है। ये भी आपका एक्सटर्नल स्ट्रक्चर है जो बाहर की दीवारें हैं। ठीक हो गया? इसी तरीके से अब अंदर क्या होता है? बाहर के स्ट्रक्चर बड़े मजबूत होते हैं। अंदर के स्ट्रक्चर्स कैसे होते
हैं कि जैसे यह एक आपका रूम है। ठीक है? साथ यहां पे आपने एक किचन बना लिया इस तरह। तो रूम और किचन के दरमियान आमतौर पे एक छोटी सी वाल्व हो सकती है या ओपन भी रह सकता है। दरमियान से कोई खिड़की विंडो भी हो सकती है। मुमकिन है आप एक छोटा सा पर्दा कर लें। वो एलुमिनियम का भी हो सकता है। वो ग्लास का भी हो सकता है। यानी कोई भी पार्टीशन हो सकती है। तो ये जो पार्टीशन थी ये इसका एक्सटर्नल स्ट्रक्चर नहीं है। ये सब कुछ इसका इंटरनल स्ट्रक्चर है। यानी यह
आपका रूम हो गया। यह आपका किचन हो गया। ठीक है? यह आपका इधर कोई वाशरूम हो गया। जो भी चीज़ है आपका कोई लॉन हो गया। तो अंदर आप जो कुछ भी बना रहे हैं 10 कमरे बना रहे हैं पांच कमरे बना रहे हैं जो कुछ भी अंदर आपका बन रहा है वो आपका इंटरनल स्ट्रक्चर है और जो भी आपका बैरूनी आपकी दीवार है ये आपका एक्सटर्नल स्ट्रक्चर इतनी बात समझ आ गई अब आप यहां पे देखें जरा जब हम मार्केट स्ट्रक्चर में आते हैं तो यहां पे दो तरह के स्ट्रक्चर आपको मिलते हैं पहला
स्ट्रक्चर आपको ये मिलता है हम फॉर एग्जांपल हम कहते हैं कि जी 4 घंटे का टाइम फ्रेम है ठीक है ये प्राइसेस ऊपर जा रही हैं ये लें जी अब इसमें एक्सटर्नल स्ट्रक्चर कौन से हैं इसमें एक्सटर्नल स्ट्रक्चर ये है ये आपका लो ये आपका हाई हाई। ठीक है? यह आपका हायर लो और यह आपका हायर हाई। इसी तरीके से यह आपका हायर लो। देखिए पीछे वाले से तो ऊंचा ही है ना थोड़ा सा। कई बार अभी ये क्यों करीब आती है? इस तरह यहां तक क्यों आ जाती है प्राइस? यह भी आपको आज इंशा्लाह
पढ़ाना है। हायर लो और फिर ये आपका हायर हाई। इसको हम कहते हैं कि ये हमारा एक्सटर्नल स्ट्रक्चर है। अब बात इतनी सीधी नहीं होती जितनी यहां पे आपको नजर आ रही है। ठीक है ना? अभी आपको ये मसला होगा कि आप यहां पे सीखेंगे चीजें समझ आ रही होंगी। चार्ट पे जाएंगे। वहां पे समझ नहीं आ रहा होगा। उसकी आपको वजह बताता हूं क्योंकि इतनी सिंपल चीजें आपको नहीं मिलेंगी वहां पे। वहां पे आपको कुछ और तरीके से मिलेगा। वहां पे आपका स्ट्रक्चर ऐसे मिलेगा। यह लो हो गया। ठीक है जी। यह हाई लग
गया। उसके बाद प्राइस ऐसे मूव करती है। ठीक है? इस तरह की मूवमेंट आपको देखने को मिल रही होती है। अब ये देखें इन दोनों में कितना फर्क है। चीज़ कॉम्प्लेक्स हो गई। अगर आप चाहें तो मैं आपको यहां पे ये दिखा सकता हूं। ये देखें। यहां पे देखिएगा अभी ये चीज़ एक बनी हुई है। और ये देखें। तो ये वैसी ही चीज़ बनी है जैसे मैंने आपको ऊपर बना के दी है। देखिए ना इस जैसी। इससे मिलतीजुलता स्ट्रक्चर बनता है। अब इसमें हो जाती है कंफ्यूजन बहुत ज्यादा कि हमारा लो कौन सा है? हाई
कौन सा है? कुछ चीजें समझ नहीं आ रही होती। अब इसमें समझें जरा चीजें ये कैसे काम करती हैं? ये देखें। पहले आपने इसमें मार्क करना है एक्सटर्नल स्ट्रक्चर। एक्सटर्नल स्ट्रक्चर कैसे मार्क होगा? ये था आपका लो। ये आपका हाई। यहां तक तो क्लियर है ना? उसके बाद प्राइस नीचे आती है। ठीक है? फिर प्राइस ऊपर चली गई। फिर यहां पे इसने एक लो लगाया। ऊपर गई। फिर नीचे आ गई। अब अगर आप देखें तो ये आपका एक्सटर्नल स्ट्रक्चर है। ये और ये आपके इस घर की बैरूनी दीवारें हो गई। ठीक है? इनके दरमियान जो
भी होता रहे 4 घंटे के टाइम फ्रेम में या जो भी आपका टाइम फ्रेम है उसमें जो भी होता रहे यह इसका इंटरनल मैटर है। कहीं पे कमरा है, कहीं पे किचन है, कहीं पे वाशरूम है, कहीं पे बाथरूम है, कहीं पे कुछ चीज है। समझ आ गई? तो, आपने इस चीज से परेशान नहीं होना होता। आपने ट्रेंड के लिए एक्सटर्नल स्ट्रक्चर आपको पता होना जरूरी है। इसका हाई और इसका लो। अब इसके दरमियान में जो कुछ भी हो रहा है, यह इसी स्ट्रक्चर का इंटरनल मैटर है। ठीक है जी। इसमें भी ट्रेडिंग होती है।
यह नहीं कि इसमें आप ट्रेडिंग छोड़ देते हैं। ट्रेडिंग इसमें भी होती है। लेकिन अभी आपको स्ट्रक्चर मार्क करने का तरीका बता रहा हूं। उसके बाद प्राइस ऊपर निकल जाती है। ठीक है जी। अब इसका नया एक्सटर्नल स्ट्रक्चर कौन सा हो गया? इसको हम डिलीट करते हैं। नया जब इसने ये वाला एक्सटर्नल स्ट्रक्चर तोड़ दिया। ठीक है? अंदर जो मर्जी होता रहा एक्सटर्नल स्ट्रक्चर ऊपर ब्रेक कर दिया। अब इसका नया एक्सटर्नल स्ट्रक्चर कौन सा है? न्यू। वो ऐसे था कि पहले ये लो था और ये हाई था। अब जब इसने ब्रेक कर दिया ना तो
मैंने आपको कहा था जब ये ब्रेक कर दे अपसाइड तो फिर आप सबसे डीप लो पे आ जाए। सबसे डीप लो इसका बनता है यह वाला। इसको यह आपका नया लो बन गया। यानी पहले आपके घर की दीवार यहां पे थी। ठीक है? स्ट्रक्चर की दीवार। अब वो स्ट्रक्चर की दीवार उठ के ऊपर आ गई है जिसको अब आप कहेंगे हायर लो है ये भी आपकी दीवार घर की स्ट्रक्चर की दीवार है लेकिन स्ट्रक्चर की दीवार अब शिफ्ट हो गई है ऊपर अब हायर लो आपका नया बन गया तो ये और ये हाई भी आपका
नया बन गया ये आपका नया हायर हाई बन गया ठीक है तो ये आपका शिफ्ट हो गई है ये दीवार भी यहां से खत्म हो गई है ऊपर चली गई है ये भी ऊपर चली गई अब इसके दरमियान जो कुछ भी हो रहा है ये इसका इंटरनल स्ट्रक्चर है समझ आ रही है आपको चीजें यहां पे समझ आ जाती है आसानी से चार्ट पे जाके मुश्किल होगी उसे घबराना नहीं है क्योंकि मैं यहां पे आपको समझा रहा हूं अभी आपको समझ आ रही है मैं आपके साथ हूं ठीक ठीक है? आप ये समझ ले ना
कि आप किसी नई जगह पे जाते हैं, किसी नए शहर में जाते हैं। आपके साथ एक गाइड है। वो आपको कहता है ये रास्ता फला जगह पे जा रहा है। ये रास्ता फला जगह पे जा रहा है। तो एक दिन समझाने के बाद या एक घंटा समझाने के बाद आपको अकेला छोड़ देते हैं। तो आपको वहां भी मुश्किल आएगी। तो ये कोई नई ऐसी चीज नहीं है कि सिर्फ यहां पे भी मुश्किल है। उस शहर में भी आपको मुश्किल आ जाएगी। आपको कुछ चीजें समझ आ गई होंगी उसके समझाने से और बहुत सी चीजें कंफ्यूज
कर रही होंगी। यहां भी ऐसा ही होगा। लेकिन आप उसी शहर में जब एक हफ्ता गुजार लेते हैं, फिर एक महीना गुजार लेते हैं, फिर एक साल गुजार लेते हैं, तो आपको हर जगह हर चीज उंगलियों पे याद हो जाती है। तो यहां पे भी ऐसा ही होगा। सेम यह आपका नया स्ट्रक्चर लो बन गया। यह आपका हाई बन गया। क्या इसके अंदर अब जो कुछ भी होता रहे इससे हमारा कंसर्न नहीं है। हमारा यह टर्मनी स्ट्रक्चर बन चुका है। जब प्राइस इसको दोबारा अपसाइड ब्रेक कर देगी। अब फिर चेंज हो जाएगा सिनेरियो। ऊपर की
दीवार हो गई ये नीचे की दीवार हो गई ये क्योंकि ये इसका सबसे डीप लो था। ठीक है? तो इसको एक्सटर्नल अभी मैं इतनी बताऊंगा ज्यादा आपको नहीं उसमें उछलाता। बस आपको अब ये पता होना चाहिए। अब हर दफा आप क्या करेंगे कि ये लो और ये हाई मार्क कर लिया। उसके बाद सबसे डीप लो ये लगा था। प्राइस ने स्ट्रक्चर ब्रेक कर दिया था अपसाइड। तो अब आप कहेंगे कि यह हमारा नेक्स्ट हायर लो और यह नेक्स्ट हायर हाई। बुलिश स्ट्रक्चर में आप याद रखें ट्रेडिंग के दौरान बुलिश स्ट्रक्चर में आपको अपना लेटेस्ट हायर
लो पता होना बहुत जरूरी है। इस स्ट्रक्चर में जो मैंने यहां पे डॉ किया है उसमें आपका लेटेस्ट हायर लो ये है। ठीक है? हायर हाई जो भी हो इससे आपका कंसर्न नहीं है। हायर हाई जहां मर्जी जाके लगे। हायर लो कौन सा कंफर्म है वो पता होना बहुत जरूरी है। क्योंकि अगर आपको यह पता नहीं होगा तो फिर आप ट्रेंड रिवर्सल में और इन चीजों में परेशान हो जाएंगे। समझ आ गई यहां तक बात? अब एक और चीज देखें। अब होता क्या है कि हम आ जाते हैं चार्ट पे। इसकी एग्जांपल आपको चार्ट पर
दिखाता हूं पहले। हां जी। यहां पर कैसे इसको मार्क करना चाहिए हमें? मेरे ख्याल दूसरे चार्ट पे चलते हैं क्योंकि यहां पे कुछ ड्राइंग ज्यादा है आजकल। मैं आम तौर पे इतनी ड्राइंग नहीं रखता अपने चार्ट पे। लेकिन आजकल कॉम्प्लिकेटेड है मार्केट थोड़ी। ठीक है? ये रेंज चल रही है। इसमें इसके ट्रेड करने के लिए थोड़ी सी मुश्किल होती है। हम किसी और चार्ट पे चलते हैं। इस पे आ जाते हैं। जी। अच्छा जी। यहां पे मैं आपको थोड़ा सा इसका आईडिया देता हूं। मैं आपको चीजें समझाता हूं जो आसानी से समझ आ जाएंगी आपको।
ओवरऑल के चार्ट पे चले जाते हैं। अब देखें यहां पे। अच्छा जी। अब ये देखें यहां पे मैंने क्या किया? ये मैं फॉर एग्जांपल यहां से स्टार्ट करता हूं कि जी ये हमारा लो है। कहीं से भी आप स्टार्ट कर सकते हैं। स्ट्रक्चर मार्किंग आप कहीं से भी स्टार्ट कर स्टार्ट कर दें। ये लो था हमारा। ये हाई लग गया। ठीक है जी? प्राइस नीचे आ गई। अब ये जो काम हो रहा है, ये इसका इंटरनल स्ट्रक्चर बन रहा है। ये कभी प्राइस ऊपर जा रही है, कभी नीचे। अब देखिए इसने ब्रेक तो नहीं किया
ना ऊपर सिर्फ विक लगाई है। फिर नीचे आ गई। फिर ऊपर चली गई। फिर नीचे आ गई। फिर ये वेव लगी। फिर ये वेव लगी। इसको मैं लाइन चार्ट पे लेके जाता हूं। आपको ज्यादा बेहतर समझ आ जाएगी। ये देखिए जैसे मैंने मार्क किया। सेम तकरीबन वैसा वैसे ही मार्क हो गया। ठीक हो गया? अच्छा। उसके बाद मज़द प्राइस ये ऊपर गई। फिर ये ऊपर गई। फिर नीचे फिर ऊपर गई। फिर इस रेड कैंडल में नीचे फिर प्राइस ऊपर। फिर हल्की सी नीचे फिर ऊपर। अब इसने यहां पे क्या किया कि जो एक्सटर्नल आपकी वॉल
थी, इसको ब्रेक कर दिया अपसाइड। जब यह ब्रेक हो गई तो अब यह सब आपका एक्सटर्नल स्ट्रक्चर चेंज हो जाएगा। पहले आपका यह लो था। यह आपका हाई था। अब आपका यह हायर लो बन गया। ठीक है? कब बना? देखिए मैं यह भी तो कह सकता था कि यहां पे हायर लो बन गया। तो ये मेरी बात गलत हो जाती। क्यों नहीं यहां पे हायर लो बना? क्योंकि इसके बाद प्राइस ने हाई ब्रेक नहीं किया ऊपर। अगर यहीं से हाई ब्रेक कर जाती ऊपर तो मैं कहता ये हमारा हायर लो है। ठीक है? तो ये
हायर लो नहीं बना। प्राइस नीचे नीचे आ गई एक और लो लगा दिया प्राइस ने। लेकिन इसको भी मैं ये नहीं कह सकता कि ये हायर लो है। क्यों है? ये हायर लो क्यों नहीं है? क्योंकि प्राइस ने यहां से हाई ब्रेक नहीं किया। ये एक्सटर्नल वाल का हाई ब्रेक नहीं किया प्राइस ने यहां पे। समझ आ गई? अच्छा। हाई कब ब्रेक किया? इस डीप लो के बाद। तो जब हाई ब्रेक कर दिया अब हम कह सकते हैं कि ये हमारा हायर लो है। इस तरीके से आपने पहले सिर्फ ये सीखना है। इन छोटी-छोटी अंदर
की वेव्स को छोड़ दें। इनका आपसे लेना देना नहीं है। आपने मेन सिर्फ वेव्स लेनी है और उसके दरमियान में जो भी हो रहा है उसको होता रहने दें। फिर जब एक्सटर्नल स्ट्रक्चर ब्रेक हो जाए। फिर अब आप कह सकते हैं कि ये हायर लो। तो मोटा-मोटा स्ट्रक्चर मार्क करें। बारीकी में भी आपने नहीं जाना। बारीकी में जाएंगे तो फिर परेशानी शुरू हो जाएगी। अब यहां पर मैं जरा सा आपको और अच्छे तरीके से इसको मार्क करके देता हूं। यह देखें वॉल्यूम ऑफ कर देते हैं। इसकी जरूरत नहीं है। फिलहाल अब देखिएगा जरा। यह आपका
लो। ठीक है जी? यह हाई। फिर ये लो और यह हाई। समझ आ गई? तो अब इसका एक्सटर्नल स्ट्रक्चर कैसे है? कि ये आपका हायर लो है और यह आपका हायर हाई है। अब प्राइस इसके अंदर जो सी जैसी भी मूवमेंट करे, जो भी मूवमेंट करे इससे आपने परेशान नहीं होना। जब तक प्राइस अपना हाई ब्रेक नहीं कर देती तब तक आपका नया हायर लो कोई नहीं है। यही आपका हायर लो लगा हुआ है। जब यह ब्रेक कर देगी तो अब आप इसको शिफ्ट करके यहां पे ले आएंगे और यहां पे हायर लो लिख देंगे।
आसान चीज है ना? बिल्कुल कोई मुश्किल चीज नहीं है। बिल्कुल सिंपल तरीके से आपको समझा रहा हूं। उम्मीद है आपको समझ आ भी रही होगी इसकी। बस अभी तक आप इतना सीखें। समझ आ गई? जी? अच्छा यह तो हो गया इसका एक्सटर्नल स्ट्रक्चर। अब हम एक पल के कोई बुलिश बेयरिश साइड पे भी कुछ देख लेते हैं। वैसे तो उसके लिए हमें बरिश ट्रेंड चाहिए होगा। लेकिन चले हम यहां पर ढूंढ लेते हैं। इसकी बात कर लेते हैं। देखिए हालांकि यह भी है तो कुछ और है लेकिन चले हम इसको मार्क कर लेते हैं। प्राइसेस
नीचे आती हैं। फिर रिट्रेसमेंट लेती है। फिर नीचे आती है। फिर रिट्रेसमेंट लेती है। ये स्नेक लो है। अब यहां पे आपने देखना है क्या करना है। मैं आपको इसकी एग्जांपल नहीं दे रहा। आपको ऐसे मैनुअली यहां पे समझा देता हूं। फिर आपको चार्ट पे एग्जांपल भी दिखा देंगे। एक हाई लगाया प्राइस ने। प्राइस ऊपर आई। ये लो लगाया था। अब यहां पे जो मर्जी होता रहे ये ले। ठीक है? ठीक है? जो मर्जी होता रहे जब तक प्राइस बियरिश ट्रेंड में अपना लो ब्रेक नहीं करती ये वाला उस वक्त तक आपका यह हाई है
और यह लो है। जैसे इसने एक्सटर्नल स्ट्रक्चर को ब्रेक कर दिया। अब ये सारा इसका इंटरनल स्ट्रक्चर था। ठीक है? ये अंदर की इसकी मूवमेंट है। इसको छोड़ दें। जैसे ही लो ब्रेक किया। अब आप क्या कहेंगे कि अब आपका नेक्स्ट लोअर हाई यह पॉइंट बन गया। जैसे मैंने आपको बताया था कि ऊपर जाती हुई मार्केट में आपको अपना कंफर्म हायर लो पता होना बहुत ज्यादा जरूरी है। इसी तरीके से नीचे आती हुई मार्केट में आपको अपना लोअर हाई का पता होना बहुत जरूरी है। पहले यह लोअर हाई था। पहले यह हाई था। यह लो
था। प्राइस ऊपर गई और अपना लो ब्रेक कर दिया। यह आपका लोअर हाई बन गया। फिर प्राइस ऊपर गई। ऊपर जाने के बाद इसने यह वाला लो ब्रेक कर दिया। जैसे ही लो ब्रेक किया, आपका नेक्स्ट लोअर हाई चेंज हो के यहां पे आ गया। क्यों? क्योंकि उसने स्ट्रक्चर एक्सटर्नल स्ट्रक्चर यह ब्रेक कर दिया प्राइस ने। फिर प्राइस नेक्स्ट स्ट्रक्चर ब्रेक कर दिया यह वाला। ठीक है? तो फिर आपका यह लोअर हाई बन गया। यह आपका लोअर लो बन गया। फिर प्राइस ऊपर जाती है। यहां पे जो मर्जी जैसी मर्जी मूवमेंट करें। हमें इससे कोई
सरोकार नहीं है। जब तक प्राइस अपना लोअर लो ब्रेक नहीं करेगी, हम यह नहीं कहेंगे कि प्राइस ने अपना स्ट्रक्चर चेंज कर लिया। अब प्राइस का नया लोअर हाई यह है और नया लोअर लो नीचे आ जाएगा। जहां तक प्राइस जाएगी। ये इतनी सिंपल चीज है। बस इस तरीके से याद रखेंगे तो आपका ना कोई सवाल पैदा होगा ना कोई आपको चीज़ कंफ्यूज करेगी। अच्छा जी। अभी अच्छा ये अभी हमने सब चीज डिटेल में नहीं पढ़ी। अभी मैं आपको सिर्फ इसका मोटा-मोटा ये कांसेप्ट समझा रहा हूं। बिल्कुल जनरल जनरल चीजें बता रहा हूं। इंशाल्लाह आहिस्ता-आहिस्ता
जैसे ही हम इसके डीप होते जाएंगे आपको चीजें समझ आती जाएंगी। अब जो अगला पॉइंट है वो ट्रेंड कंटिन्यूशन के बारे में है। जैसे मैंने अभी आपको बताया था के ट्रेंड कंटिन्यूशन के लिए क्या चीज जरूरी है कि अगर बुलिश ट्रेंड चल रहा है तो ट्रेंड कंटिन्यूशन के लिए जरूरी यह है कि प्राइस हर दफा अपना हाई ब्रेक करे। अब इसका हाई कौन सा था? यह वाला। अब ये जो नई वेव लगी है, इसमें आपका कंफर्म हायर लो कौन सा है? यह यह कंफर्म हायर लो क्योंकि प्राइस ने अपना प्रीवियस स्ट्रक्चर हाई ब्रेक कर दिया
तो यह कंफर्म हायर लो बन गया। अब जब तक प्राइस इसके ऊपर ऊपर रहती है ऐसे और अपने हाई को ब्रेक करती रहती है। जो भी यह हायर हायर हाई बन गया था। जब तक प्राइस अपने हाई को ब्रेक करती जाएगी और अपने कंफर्म हायर लो को ब्रेक नहीं करेगी। अब कंफर्म हायर लो नेक्स्ट कौन सा है? यह वाला। ठीक है? यह नया हाई लग गया। फिर प्राइस नीचे आती है। फिर अपना हायर हाई ब्रेक कर देती है। अब कंफर्म हायर लो कौन सा है? यह वाला। हायर लो कंफर्म भी उस वक्त होता है जब
प्राइस अपना स्ट्रक्चर ब्रेक करती है। फिर प्राइस नीचे आती है। इंटरनल स्ट्रक्चर में जो मर्जी मूवमेंट करे कोई लेना देना नहीं हमारा। जैसे ही प्राइस अपना हाई ब्रेक करेगी जो डीप लो होगा उसे हम कहेंगे कि यह हमारा हायर लो बन गया। जब तक प्राइस अपना हायर हाई ब्रेक करती जाएगी और हायर हायर लो को सेफ रखेगी। इसको टच नहीं कर। टच से मुराद है कि इसको इस तरह ब्रेक नहीं कर देगी। जब तक जब तक ब्रेक नहीं करती आपका ट्रेंड बुलिश है। जब ब्रेक कर देगी, फिर हम देखेंगे कि अब हमने क्या करना है।
ठीक है? ठीक है? तो ट्रेंड कंटिन्यूशन के लिए क्या जरूरी है कि बुलिश ट्रेंड में लो सेफ रहें और हाई ब्रेक हो। हाई ब्रेक हो, लो सेफ रहें। बस ये इस बुलिश ट्रेंड की निशानी है। इसी तरीके से जो बियरिश ट्रेंड होता है, बियरिश ट्रेंड की कंटिन्यूशन कैसे पता चलती है? नीचे आती हुई मार्केट में आपके लो ब्रेक होते जाएं। ये लो लगा, फिर ये लो लगा, यह ब्रेक होते जाए, हर दफा ब्रेक हो जाए। और जितने भी हाई लग रहे हैं, आपके एक्सटर्नल हाईज़ जितने भी लग रहे हैं, वो अपने अपना होल्ड करें। यह
भी होल्ड करें। फिर यह हाई था आपका, यह भी होल्ड करें और लो जो भी लग रहा है, वह ब्रेक होता जाए। जब तक ये प्रैक्टिस चलती रहेगी, जब तक ये काम चलता रहेगा, उस वक्त तक आप कहेंगे कि ये ट्रेंड कंटिन्यू करेगा। ट्रेंड कंटिन्यूशन की निशानी है। ठीक है जी? यहां तक समझ आ गई चीजें? अच्छा जी। ट्रेंड कंटिन्यूशन के बाद अगली चीज जो सबसे इंपॉर्टेंट आज की है, आज की क्लास की सबसे इंपॉर्टेंट चीज जो आज हमने पढ़नी है वो है जी वैलिड रिट्रेसमेंट्स कौन सी होती हैं? अच्छा जी। जी अब देखें अब
मैं आपको एक चीज बताता हूं। कुछ लोगों को कंफ्यूजन हो जाती है। आपको भी ज़हन में बात कुछ बातें आई होंगी। मैं आपको उसकी एग्जांपल देता हूं। अब ये देखें जी समटाइ्स आप इस चीज में कंफ्यूज हो जाएंगे कि जो प्राइसेस नीचे आई हैं थोड़ी सी क्या ये रिट्रेसमेंट थी या नहीं थी? मिसाल के तौर पे मैं आपको यहां पे दिखा देता हूं। ये देखें। अब इसकी बात कर लेते हैं। ये बड़ी अच्छी एग्जांपल मिल गई है। अब देखें जी। ये प्राइस अगर इस तरह की मूवमेंट देती है आपको किसी जगह पे के ये प्राइस
ने एक वेव लगाई उसके बाद प्राइसेस नीचे आई और फिर ऊपर चली गई तो क्या ये रिट्रेसमेंट थी ये जो प्राइस नीचे आई है क्या ये रिट्रेसमेंट थी अगर हम इसको लाइन चार्ट में देखें तो बिल्कुल इसी तरीके से आपको नजर आएगा जैसे मैंने यहां पे मार्क किया है ये देखिए प्राइस नीचे आई है ना यहां पे रिट्रेसमेंट तो आई है ये देखें इस जगह पे रिट्रेसमेंट तो आई है लेकिन क्या ये वैलिड रिट्रेसमेंट थी या इनवैलिड थी ये दो तरह की रिट्रेसमेंट्स होती हैं। एक वैलिड होती है एक वैलिड नहीं होती। अब यहां पे
देखें अगर यह डाउन साइड प्राइस आ रही है। मैं आपको दिखाता हूं। यहां पे अगर आप देखें तो यह प्राइस ने एक लो लगाया। ठीक है? उसके बाद प्राइसेस ऊपर गई हैं। ये देखें कितना ऊपर यहां तक आई है प्राइस यहां तक। ये देखें और फिर प्राइस नीचे गिर गई। तो क्या ये एक वैलिड रिट्रेसमेंट थी? डाउन ट्रेंड की वैलिड रिट्रेसमेंट थी। इसको माना जाएगा रिट्रेसमेंट या नहीं माना जाएगा? ये बड़ाेंट क्वेश्चन है। अब यहां पे देखें दोबारा। लाइन चार्ट में आके देखें जरा। ये देखें। यहां पे तो हमें यही पता चल रहा है लाइन
चार्ट में कि प्राइस नीचे आई। उसने रिट्रेसमेंट ली और फिर एक और लो लगा दिया। लेकिन क्या यह वैलिड है या वैलिड नहीं है? इसका आसान सा तरीका है। इसमें से कंफ्यूजन से निकलने का एक आसान सा तरीका है। वो मैं आपको सिखा दूंगा। आपको आइंदा कभी परेशानी नहीं बनेगी कि रिट्रेसमेंट वैलिड थी कि इनवैलिड थी। अच्छा जी। देखें जी आपने क्या करना है। वैलिड और इनवैलिड रिट्रेसमेंट देखने का एक छोटा सा कुलिया जो मैं आपको बताने लगा हूं। यह आपको कंफ्यूजन से निकाल के रखेगा। देखें इसका तरीका यह है कि मैं पहले आपको एक
कुछ कैंडल्स यहां पर बना देता हूं। अगर आपके पास बुलिश ट्रेंड चल रहा है इस तरीके से। ठीक है जी। अच्छा ये आ गई आपकी आखिरी बाय की कैंडल। ठीक है? आखरी बुलिश ट्रेंड है। हम ये अस्यूम कर रहे हैं कि बुलिश ट्रेंड में है। आखिरी बाय की कैंडल ये आ गई आपके पास। ये इसकी लोअर वेक आ गई। ये इसकी अप्पर वेक आ गई। अब आपने देखना यह है कि अगर तो कोई भी सेल की कैंडल चाहे वह एक कैंडल उसके बाद बने, दो के बाद, चार के बाद कोई भी सेल की कैंडल अगर
इसका लो ब्रेक कर देती है इस तरीके से। अब यहां पे आप देखें अभी तक लो ब्रेक नहीं हुआ। ठीक है? तीसरी कैंडल बनती है, चौथी बनती है। यहां पे मुमकिन है बीच में कोई दो चार कैंडल्स बाय की भी बन जाए। ऐसे ऐसे बन जाए। यानी एक प्राइस रेंज भी ले सकती है। यहां पे यह भी हो सकता है। उसके बाद प्राइस लो ब्रेक कर जाती है। डाउन साइड यह वाला लो। ठीक है जी। प्राइस ने लो ब्रेक कर दिया। लो ब्रेक ब्रेकउ का एक ही रूल है कि लो वॉल्यूम से मोमेंटम कैंडल से
होना चाहिए। बल चलिए यहां पर हम उसको भी अप्लाई नहीं करते। आप यह देखें कि प्राइस ने अपनी जो आखिरी बाय की कैंडल थी इसका लो ब्रेक कर दिया। चाहे वो एक कैंडल कर दे, दो कर दें, चार कर दें, 10 कर दें, जितनी भी कर दें। लो ब्रेक हो गया। जैसे ही लो ब्रेक होगा, आपकी रिट्रेसमेंट स्टार्ट हो गई। समझ आ गई? अब मैं आपको उसकी एग्जांपल सामने दिखाता हूं। एक ठहरे। यह देखें इस जगह पे। इसको हम यहां से रिमूव कर लेते हैं। यह देखें जी। आपके पास आखिरी बाय की कैंडल कौन सी
है? इस वक्त आपके पास आखिरी बाय की कैंडल ये है। ठीक है? यह बात गौर से समझनी। आपके नजदीक बाय की कैंडल आखिरी कुछ और अभी आपको नजर आ रही है। मैं आपको दिखाता हूं। मैं आपको बता रहा हूं कि मेरे पास आखिरी बाय की कैंडल यह है। ठीक है? आप यह कहेंगे कि आपके पास आखिरी बाय की कैंडल या तो यह है और या फिर एक कैंडल छोटी सी यह भी आ रही है। ठीक है? ठीक है? मैंने आपको यहां पे क्या बताया कि आखिरी बाय की कैंडल का जब लो ब्रेक हो जाए तो
आप तो कहेंगे कि आखिरी बाय की कैंडल तो फिर अब ये बन गई। ये आखिरी बाय की इंडिपेंडेंट कैंडल नहीं है। ये इंडिपेंडेंट कैंडल नहीं है। ये कैसी कैंडल है? ये इनसाइड बार है। इनसाइड बार क्या होती है? इनसाइड बार इस तरीके से बनती है कि बाय की कैंडल्स बनती जा रही हैं। ठीक है? इस तरीके से। अब इसी के अंदर एक और बाय की कैंडल बन जाती है। जैसे ये बनी हुई है। देखिए इस कैंडल को देखें। यह प्रीवियस जो बाय की कैंडल थी उसी के अंदर बनी हुई है। ठीक है? ठीक है? तो
इसको हम इनसाइड बार कहते हैं। जैसे ये वाली मैंने आपको बना के दिखा दी है। इसको भी इनसाइड बार कहते हैं। तो इनसाइड बार को आपने काउंट नहीं करना होता। इंसाइड बार को आप काउंट नहीं करेंगे। आप काउंट करेंगे जो मेन आपकी मेजर इंडिपेंडेंट कैंडल थी जिसने एक नया हाई इंडिपेंडेंट नहीं लगाया था। उसका जैसे ही लो ब्रेक होगा आप कहेंगे कि ये वैलिड रिट्रेसमेंट स्टार्ट हो गई है। ये आपके सामने एग्जांपल पड़ी हुई है। अब मैं इसको कैसे मार्क करूंगा? ये वाली कैंडल मार्क कर लूंगा। क्योंकि ये इंडिपेंडेंट कैंडल थी। इसने एक हाई लगाया
था। बाकी जितनी भी बाय की कैंडल्स हैं उसके अंदर आ रही हैं। तो मैं इसका लो मार्क कर लेता हूं यहां पे। यह लो मार्क कर लिया। जैसे इसका लो ब्रेक हुआ यहां पे। मैं कहूंगा कि रिट्रेसमेंट स्टार्ट हो गई है। यहां पे चलें। अगर यहां पे भी हो गया फिर भी रिट्रेसमेंट स्टार्ट। बस लो ब्रेक हो जाए। चाहे 10 पिप है चाहे 20 पिप्स है। लो ब्रेक हुआ। अब आपके पास जितनी भी कैंडल नीचे बनेगी डाउन साइड मैं कहूंगा कि ये रिट्रेसमेंट आपकी स्टार्ट हो गई है। ये आपकी वैलिड रिट्रेसमेंट है। रिट्रेसमेंट की वेव
है। ठीक हो गया? बस ये आपको पता होना जरूरी है। इससे इस ये पता होने का क्या फायदा होगा? आपको स्ट्रक्चर मार्क करना आ जाएगा ना कि कौन सा हाई है, कौन सा लो है। अभी मैं आपको और एग्जांपल्स दिखाता हूं। इसकी आगे चल के देखते हैं। ये देखिए। यहां पे हम देख लेते हैं कोई। ये देखें। अब यहां पे इस जगह पे अगर हम देखें तो यह आपके पास एक स्ट्रांग वेव लगी है। फोर ऑवर की बात कर रहे हैं हम। ये आपके पास एक स्ट्रांग वेव लगी है। अपसाइड इस वेव में आखरी बाय
की कैंडल कौन सी है? ये वाली ये जिसको मैं मार्क कर रहा हूं ये और ये जैसे इसका लो ब्रेक हुआ हमारे पास वैलिड रिट्रेसमेंट आ गई है। तो अब हम इसको कैसे मार्क करेंगे? ऐसे मार्क करेंगे। यह हमारा लो। ये हमारा हाई। ठीक है? अब ये हमारी रिट्रेसमेंट स्टार्ट हो गई है। अब हम कब कहेंगे कि हमारा हायर लो बन गया। जब ये वाला हाई ब्रेक हो जाएगा। ये वाला हाई यहां पे ब्रेक नहीं हुआ। सिर्फ विक लगी है। प्राइस नीचे आ गई। नीचे आने के बाद उसने यहां पे ब्रेक कर दिया। ये देखें
यहां पे इस कैंडल में ब्रेक हो गया। तो जब ब्रेक हो गया तो इससे सबसे डीप लो पे आ जाए। सबसे डीप लो ये है। तो अब मैं कहूंगा कि पहले हमारा ये लो था। अब हमारा नेक्स्ट लो ये है। लेकिन क्योंकि पिछले लो से ऊंचा है तो इसको हम हायर लो कह देंगे। बस इस तरीके से अब आपको देखिए कंफ्यूजन कम होगी। पहले दिन जो आपको कंफ्यूजन थी मार्क करने में अब वो कम हो जाएंगी। क्यों? क्योंकि अब आप वैलिड रिट्रेसमेंट निकालेंगे। वरना पहले आपको ये होता है कि ये लो है, यह हाई है।
फिर यह लो लगा, फिर यह हाई लगा। इस तरह मार्क करते हैं लोग। फिर यह लो लगा, फिर यह हाई लगा। ये कुछ भी नहीं है। ये फज़ूल तरीन हरकत है जो भी करता है ये। लोग करते हैं इस तरह आपने कैसे मार्क करना है जैसा मैंने आपको बता दिया आखरी बाय की सेल की बाय की कैंडल में ब्रेक हो गई तो यह आपकी एक वेव लग गई अब ऊपर गई है प्राइस इसको हाई ब्रेक करना चाहिए था नहीं किया ब्रेक फिर नीचे आ गई अब क्या ये वैलिड रिट्रेसमेंट है अब बताएं वैलिड रिट्रेसमेंट है
अभी तक वही काम चल रहा है क्योंकि आखिरी बाय की कैंडल अभी भी यही है सबसे ऊंची कैंडल अभी भी यही है ठीक है तो जैसे इसका हाई ब्रेक होगा बस अब आप कहेंगे कि रिट्रेसमेंट स्टार्ट हो गई है और पीछे चलते हैं जरा यह देखें अब यहां पर अगर आपने स्ट्रक्चर मार्क करना है। मैं कहता हूं यहां पर मार्क करके दिखाएं स्ट्रक्चर आए हम मार्क कर लेते हैं। यह देखें जी। यह हो गया आपका लो। यह आपका हो गया हाई। आखिरी बाय की कैंडल कौन सी है? सबसे ऊंचा हाई किसने लगाया है? इंडिपेंडेंट कैंडल
ये आपको नजर आ रही है। ठीक है? यही है। इसका लो ब्रेक हो गया। यहां पे जब लो ब्रेक हो गया तो रिट्रेसमेंट स्टार्ट है। जब रिट्रेसमेंट स्टार्ट हो गई तो आपने लिखा लो और यह हाई। अब इस रिट्रेसमेंट के बाद आपने वेट करना है हाई के ब्रेक होने का। हाई आपका ब्रेक हो गया। जब हाई ब्रेक हो गया तो आपने उठा के अपना लोअर हाई अपना हायर लो यह कर दिया। यह आपका हायर लो बन गया। ठीक है? अब हायर हाई जहां पर भी लगे कहां पर लगेगा? मुझे क्या पता? क्या पता मैं इस
कैंडल पे कहूं हायर हाई लग गया। इस पे तो नहीं लगा। फिर नेक्स्ट कैंडल लो और ऊंची बन गई। नेक्स्ट और ऊंची बन गई। नेक्स्ट और ऊंची बन गई। दूसरा आपने हायर हाई भी मार्क नहीं करना। हायर हाई कब मार्क करना है? जब प्राइस ने आखिरी बाय की कैंडल का लो फिर ब्रेक कर दिया। रिट्रेसमेंट स्टार्ट हो गई है। तो अब आप कह दें यह हमारा हायर हाई बन गया। क्योंकि रिट्रेसमेंट आ गई है ना। तो बस जहां तक प्राइस गई थी वो हायर हाई बन गया। हायर हाई के बाद प्राइस नीचे आई। नीचे आने
के बाद इसने अपना हाई फिर ब्रेक कर दिया। यह देखिए ब्रेक हो गया। जब दोबारा हाई ब्रेक हुआ तो इसको उठा के हम ले आएंगे अपने हायर लो को ऊपर इस जगह पर ले आएंगे। ठीक है? ये आपका हायर लो बन गया। इस तरीके से इसको स्ट्रक्चर को मार्क करना शुरू करें। अभी भी मैं बहुत डीप नहीं जा रहा। लेकिन आपको इतना भी मार्क कर आ गया। फिलहाल आपके लिए इतना बहुत है। अब ये क्या हुआ है? ये प्राइस अपने हायर लो के नीचे आ गई है। तो यह हम आगे चल के पढ़ेंगे। यह लिक्विडिटी
स्वीप है। ठीक है? अभी लोग समझते हैं पता नहीं आखिरी हायर लो कंफर्म हायर लो ब्रेक हो गया। मार्केट सेल होने लग जाएगी। ऐसा नहीं होता। यह लिक्विडिटी स्वीप है। इसको इंशाल्लाह हम अपने मॉडल नंबर टू में पढ़ेंगे। यह ब्रेक हुआ है। बिल्कुल हुआ है ब्रेक। लेकिन ये प्राइस इसकी लिक्विडिटी लेने आई थी यहां से दोबारा कंटिन्यू करके। तो इतनी जल्दी ऐसे नहीं होता कि एक कैंडल नीचे गिरी हम कहीं ट्रेंड चेंज हो गया। ट्रेंड ऐसे चेंज नहीं होते। वो हम कल की क्लास में पढ़ेंगे डिटेल्स। इंशाल्लाह कि ट्रेंड कैसे चेंज होते हैं। अभी हमारा
टॉपिक नहीं है वो। अभी हमारा टॉपिक ये है कि वैलिड रिट्रेसमेंट कौन सी होती है? अब मैं आपको और इसके एग्जांपल्स दिखाता हूं। ये देखिए यहां पे क्या है? ये क्या है? ये पूरी एक वेव लगी। आखिरी आपके पास स्ट्रांग बाय की कैंडल यही वाली बन रही है। ये वाली। ठीक है? यह भी इनसाइड बार है। देखिए इसके अंदर है। वीक के अंदर है। यह भी इनसाइड बार है। यह वाली बाय की कैंडल भी इनसाइड बार है। तो यह आपका आखिरी लो है। यह आपका कैंडल का आखिरी स्ट्रांग कैंडल का लो ये है ये वाला।
ठीक है? तो यहां पे ब्रेकआउट हुआ ही नहीं है। इसको आप ब्रेकआउट नहीं कहते। यानी ये चल अगर हो भी गया है। अगर इस कैंडल के नीचे थोड़ी सी कैंडल क्लोज हो भी गई है तो ठीक है। आप मार लें। आप कह दें कि ये रिट्रेसमेंट लग गई है। आपका जो पीछे लो था वो यहां पे आ गया। हायर लो यहां पे आ गया। अगर थोड़ी सी भी कैंडल क्लोज हो गई है। वैसे मोमेंटम कैंडल क्लोज होना जरूरी होता है। लेकिन चल अभी हम उस चक्कर में नहीं पड़ते। ठीक है? ठीक है? वो साथ-साथ हम
पढ़ते रहेंगे चीजें। यहां पे क्या है? ये भी देख लिया था हमने। पहले हम आ जाते हैं 15 मिनट्स में। छोटे टाइम फ्रेम के स्ट्रक्चर पे चेक करते हैं। यहां पे चेक करें। उस दिन मैसेज आया था जी लाइव मार्केट पे बताएं। स्ट्रक्चर मार्केटिंग लाइव मार्केट पे बताएं। तो ये जो मार्केट है ये क्या मैंने खुद बनाई है भाई यहां पे हाथों से या ये मार्केट है। ये मैंने खुद बनाई है। यह भी लाइव मार्केट थी। यह कल की थी तो वो आज की है। अब यहां पे तो हो ही नहीं सकता कि मैं आपके
लाइव बैठा रहूं और लाइव बैठ के आपको स्ट्रक्चर मार्क करता रहूं। तो बस जो चीज़ बता रहा हूं उस पे फोकस करें। बाकी आगे पीछे ना निकला करें। बाहर ज्यादा। यहां पे देखें जी। अब इधर आपको दिखाते हैं पीछे चल के। यह अब टाइम फ्रेम है छोटा 15 मिनट का। इसमें कैसे स्ट्रक्चर मार्क करना है मैं आपको मार्क करके दिखाता हूं। चल जी। कोई भी एक डीप पॉइंट लो हम पकड़ लेते हैं। चलिए यहां से पकड़ लेते हैं। यहां से स्ट्रक्चर मार्किंग स्टार्ट करते हैं। ये देखें। अब ये आपका लो है। यहां से स्टार्ट हुआ।
क्या कोई एक भी आखिरी बाय की कैंडल क्लोज हो रही है। ये एक बाय की कैंडल बनी थी। इसके बाद सेल की कैंडल बनी है। क्या इसने लो ब्रेक किया? नहीं किया। जब लो ब्रेक नहीं हुआ तो यह रिट्रेसमेंट नहीं है। अब अगर आप लाइन चार्ट पे देखेंगे तो मुमकिन है आपको यह रिट्रेसमेंट नज़र आए। इस जगह पर हम लाइन चार्ट देखते हैं। इस जगह पर लाइन चार्ट क्या बता रहा है? लाइन चार्ट आपको बता रहा है कि यह देखें रिट्रेसमेंट आई है। ठीक है? लेकिन मैं इस रिट्रेसमेंट को काउंट नहीं करता। यह रिट्रेसमेंट नहीं
है। प्राइसेस नीचे जरूर आई हैं। ये नहीं कि नीचे नहीं आई लेकिन रिट्रेसमेंट नहीं वैलिड हो गई। यानी आप यह नहीं कह सकते कि आपका यह लो है और यह हाई है और फिर यह आपका हायर लो है। यह आप नहीं कह सकते। ठीक है? क्योंकि एक कैंडल भी नीचे ब्रेक नहीं हुई। एक कैंडल भी ब्रेक नहीं हुई। सिर्फ रेंज हुई है थोड़ी देर यहां पे। समझ आ गई? अच्छा। उसके बाद चलिए कंटिन्यू करते हैं। यह आपका लो ब्रेक नहीं हुई जाने दें। यह फिर आगे बाय की कैंडल यह भी ब्रेक नहीं हुई। जाने दें
आगे। यह भी ब्रेक नहीं हुई। यह भी ब्रेक नहीं हुई। यह देखें। ठीक है? यह भी ब्रेक नहीं हुई। यह विक लगी है लेकिन ब्रेक नहीं हुई। ब्रेक होने का मतलब यह होता है कि प्राइस ड्रॉप कर जाए। नीचे इस तरह मोमेंटम के साथ क्लोजिंग कर दे कैंडल एक। यानी आपको वो खुर्सबियन लेके देखना ना पड़े कि ब्रेक हुआ है कि नहीं। आपको एक अच्छी स्ट्रांग कैंडल नीचे इसके ब्रेक होती नजर आए तो आप कहेंगे रिट्रेसमेंट आ गई है। अदरवाइज़ कोई रिट्रेसमेंट नहीं है। यह विक लगी है इतनी बड़ी। ये भी मेरे ख्याल मेरे ख्याल
नहीं मेरी मेरे मेथड के मुताबिक ये भी रिट्रेसमेंट नहीं है। कैंडल का क्लोज होना जरूरी है। ठीक हो गया? अच्छा यानी अभी तक रिट्रेसमेंट नहीं आ रही। फिर आगे चलते हैं। ये बाय की कैंडल थी स्ट्रांग। इसका लो ब्रेक हुआ कहीं पे नहीं ब्रेक हुआ अभी तक। ठीक है? इसके अंदर रेंज चल रही है। ये रेंज चलना शुरू हो गया। रेंज के बाद ये इसने इसका एक ही कैंडल है। मैंने कहा था एक कैंडल भी कर सकती है, ज्यादा भी कर सकती हैं। एक ही कैंडल ने आखिरी बाय की जो स्ट्रांग कैंडल थी। अब यहां
पे ये कंफ्यूजन दूर कर लें। वो यह कि आखिरी बाय की कैंडल क्या यह है? यह आखरी बाय की कैंडल यह है। यह है। इनमें से कोई भी नहीं है। यह सब इनमें से कोई भी नहीं है। सिर्फ और सिर्फ यह है। क्योंकि यह वह इंडिपेंडेंट कैंडल थी। यह वह आजाद कैंडल थी जिसने एक नई प्राइस को टच किया था। ठीक है? ये जितनी भी इसके अंदर हैं इनको कहते हैं कि ये इनसाइड बार्स हैं। इनकी कोई ये इंटरनल स्ट्रक्चर है इस कैंडल का। इसकी कोई अहमियत नहीं है। जैसे ही प्राइस आखिरी बाय की स्ट्रांग
कैंडल का लो ब्रेक करेगी। ऐसे अब हम कहेंगे ये रिट्रेसमेंट आ गई है। अब इसको लाइन चार्ट पे देखें। ये रिट्रेसमेंट है। ठीक है? ठीक है? बेशक ये कैंडल से हुई है, दो से हुई है, चार से हुई है। ये रिट्रेसमेंट है। तो अब आप इसको कैसे मार्क करेंगे? आप इसको ऐसे मार्क करेंगे। ये हो गया आपका जी इधर लो। ठीक है? उसके बाद कोई रिट्रेसमेंट नहीं आई। ये आपका हाई लगा हुआ है। अच्छा हाई जरूरी नहीं है इसी कैंडल का। और नेक्स्ट ये जैसे अब इसकी थोड़ी वीक ऊपर गई है। यहां पे कोई वीक
लग जाती है इस तरह। उस वीक तक आपने लेना है कि यह आपका हाई है। लो हाई। उसके बाद यह आई रिट्रेसमेंट। यह और रिट्रेसमेंट के बाद अभी भी आपने यहां पे हायर लो अभी नहीं लिखना। आपने कब लिखना है? जब इसका हाई ब्रेक हो जाएगा। हाई ब्रेक हो गया। इसके बाद अब आपके पास डीपेस्ट पॉइंट यह है। अब आप कह सकते हैं यह आपका नेक्स्ट हायर लो बन गया। ठीक है? और हायर हाई कौन सा था? यह आपका हायर हाई था। क्योंकि इसके बाद प्राइस ने सबसे बड़ी कैंडल का लो ब्रेक करके रिट्रेसमेंट ली
है। तो अब आपके पास लो भी पता चल गया। हाई भी पता चल गया। हायर लो भी पता चल गया। और हायर हाई कहां पे बनेगा? अब दोबारा देखते हैं इसको ऊपर चल के। ये देखें। यहां तक प्राइस आई है। ठीक है? तो ये आपका हायर लो था। प्राइस ने यह वाला हाई प्रीवियस ब्रेक किया। यह ले जी। आपका नया एक्सटर्नल स्ट्रक्चर बन गया। ये हायर लो। अब क्या इसको हायर हाई कह सकते हैं? हां यहां पे देखें ये है सॉरी गलत मार्क हो गया। ये है जी उससे पहले ये आपकी ये देखें प्राइस ने
ब्रेक कर दिया हाई। हाई ब्रेक करने के बाद अब आखिरी स्ट्रांग बाय की कैंडल आपकी यही बन रही है या यह बन रही है। मैं इसको नहीं काउंट करता। मैं काउंट करता हूं इसको। ठीक है? क्योंकि ये जो कैंडल है ये इनसाइड बार है। इसके अंदर ही है। हां, विक इसने ऊपर लगा दी है। तो आप जो स्ट्रांग आखिरी कैंडल थी इसको मार्क कर लें। इसका हाई तो ब्रेक नहीं हुआ ना। इसका तो हाई ब्रेक नहीं हुआ। सिर्फ विक लगी है। तो विक इसका आप लो मार्क कर लें। जैसे इसका लो ब्रेक हुआ। यह भी
रिट्रेसमेंट आ गई। तो आपका जो यहां पे लो था वह उठके यहां पे आ गया। इसको अब आप कहेंगे हायर लो। और इसका हाई ब्रेक जब हो गया तो यह आपका नया हायर हाई बन गया। ठीक है जी? यानी एक्सपेक्टेड है कि ये बनेगा। कंफर्म कब होगा? जब आखिरी बाय की कैंडल का लो ब्रेक हो जाएगा दोबारा। अब यहां पे लो ब्रेक नहीं हुआ। इसलिए मैं इसको पूरी एक ही वेव काउंट करता हूं। ऐसे ऊपर। इसको मैं दरमियान में रिट्रेसमेंट नहीं मानता। रिट्रेसमेंट की बस यही वैल्यू थी। यह रिट्रेसमेंट का ज़ोन है। ठीक है जी।
इस तरीके से जब तक आपको अपने कंफर्म हायर लो का नहीं पता होगा, तब तक आप मार खाते रहेंगे। आपको पता ही नहीं होगा कि स्ट्रक्चर का लो कौन सा है। जब तक लो नहीं पता होगा तो आपको नेक्स्ट स्टेप समझ नहीं आएगा जो कि नेक्स्ट क्लास में है। ठीक हो गया? इसी तरीके से हम छोटे टाइम फ्रेम में अगर रहते हैं तो कोई बेरिश स्ट्रक्चर देख लेते हैं। अगर कहीं पे बेरिश स्ट्रक्चर बन रहा है तो चलिए इसको देख लेते हैं। अब देखिए यहां से हम स्टार्ट करते हैं। ये देखिए ये हो गया जी
हमारा हाई। अच्छा अब लो कौन सा लगा? कोई एक कैंडल भी बयरिश कैंडल स्ट्रांग बरिश कैंडल ब्रेक नहीं हो रही। देखिए इसमें आखिरी स्टंग बियरिश कैंडल कौन सी है? ये वाली ये है। इसके बाद की जितनी भी कैंडल्स हैं, यह भी इनसाइड बार है। यह भी इनसाइड बार है। यह बाय की भी इनसाइड बार है। यह भी इनसाइड बार है। इसी एक बड़ी कैंडल के अंदर ये कैंडल्स बन रही हैं। ठीक है? तो जब तक इसका लो ब्रेक नहीं होगा तब तक हम नहीं कहेंगे कि रिट्रेसमेंट आई है। तो प्राइस ने तो आगे चलती कंटिन्यू
करती गई। जब तक इसका हाई ब्रेक नहीं होगा। सॉरी ये हाई है। अब तक ब्रेक नहीं होगा। अब हमने हाई ब्रेकआउट देखने हैं ना। गिरती हुई मार्केट में आपको हाई का पता होना चाहिए। ऊपर जाती हुई मार्केट में आपको लो का पता होना चाहिए। बस ये पॉइंट याद रखें। अब यह पूरी एक एक वेव है। यह अब इसमें आखिरी सेल की कैंडल कौन सी है? आखिरी सेल की स्ट्रांग कैंडल यह है आपके पास। ठीक है जी? इसका हाई ब्रेक हुआ कि नहीं हुआ? हाई ब्रेक हो गया। जैसे ही हाई ब्रेक हुआ, हम कहेंगे रिट्रेसमेंट स्टार्ट
हो गई है। अब इसको जाने दें जहां तक जाती है। यहां तक गई। ठीक है? आप हमें क्या पता? हम कहते हैं कि यह हमारा हाई लग गया। यह हाई लग गया। कोई पता नहीं कोई भी लग सकता है। हाई और भी ऊपर जा सकता था। कब कंफर्म होगा? वेट करना है जब तक लो ब्रेक नहीं होता। यहां पे लो ब्रेक हुआ। जब लो ब्रेक हुआ। हमें पता चल गया कि यह हमारा लोअर हाई था। यानी यह भी जिस तरह यह हाई था ऐसे यह भी एक हाई है। हाई मार्क कर लिया साथ एल लिख
दिया क्योंकि यह लोअर साइड पर जा रहा है। तो यह हमारा लोअर हाई बन गया। अब प्राइस ने पूरी एक और यहां तक वेव लगाई। अब क्या यह रिट्रेसमेंट है? अब आप बताएंगे चैट में। अब आप चैट में बताएंगे। मुझे उम्मीद है कि गलत जवाब नहीं आएगा कोई क्योंकि मैं काफी देर से एक ही चीज़ पे फोकस कर रहा हूं। आ भी जाए तो कोई मसला नहीं है। आप लर्निंग फज़ में डरना नहीं है जवाब देते हुए। लर्निंग फज़ में जितने मर्जी सवाल करें, जितनी मर्जी गलतियां करें। ट्रेडिंग के हवाले से इसमें कोई बस ये
गलतियां नहीं करनी। चार्ट पे ये काम शुरू कर देते हैं। ये काम से मुझे गुस्सा आता है। बस बाकी सवाल जवाब जितने मर्जी कर लें। अच्छा जी। अब यह प्राइस ने एक लो लगा दिया। आपने मुझे बताना है कि ये जो लो लगा है यह वाला इसके बाद क्या ये जो ऊपर वेव गई है मैं आपको लाइन चार्ट पे दिखाता हूं। यह जो ऊपर गई है वेव क्या यह रिट्रेसमेंट की वेव थी या इसको हमें रिट्रेसमेंट वेव नहीं कहना चाहिए। यस नो कर दें जल्दी से। यस नो करेंगे तो हो जाएगा। किसी एक ने भी
ऐसा नहीं लिखा। बहुत जबरदस्त है। जी। बेहतरीन है। बहुत अच्छा समझ रहे हैं। ठीक है। इंशाल्लाह बस थोड़ी सी तवज्जो से बैठेंगे तो इंशाल्लाह बहुत जल्दी आप लोग कामयाब हो के निकलेंगे। ये आपकी आखिरी सेल की कैंडल थी। जब तक आखिरी सेल की कैंडल का हाई ब्रेक नहीं हो जाता, रिट्रेसमेंट नहीं काउंट की जाएगी। ठीक है? तो यहां पे इसने रिट्रेसमेंट ली डू है। प्राइस ऊपर आई है। लेकिन वैलिड रिट्रेसमेंट नहीं है। इसलिए इस पूरी को हम एक ही वेव काउंट करेंगे यहां तक। ठीक है? यहां तक क्यों कह रहा हूं? यहां तक इसलिए कह
रहा हूं कि यहां पे आखिरी स्ट्रांग कैंडल सेल की यह थी जिसका प्राइस ने हाई ब्रेक कर दिया। तो यह जो वेव है इसको हम कहेंगे कि यह रिट्रेसमेंट आई है। तो आपका यहां पे ऊपर जहां पे कहीं पे हाई था तो लो यह लगा था लोअर लो। फिर प्राइस ऊपर गई। यह इसने यहां पे बना दिया लोअर हाई और फिर यह लगा दिया लोअर लो। ठीक है? फिर प्राइस ऊपर जाती है। फिर जब नीचे ड्रॉप करेगी तो आप कहेंगे कि यह हमारा एक और लोअर हाई बन गया और नीचे एक और लोअर लो बन
गया। तो बस इतना सा पॉइंट याद रखना है। बस आखिरी समरी देने लगा हूं। वो यह कि जब तक प्राइसेस ऊपर जा रही हैं, आपको अपना आखिरी हाई निकाल अपना आखिरी लो याद होना चाहिए। आखिरी लो याद होने से मुराद यह है मुझे जुबानी याद होते हैं गोल्ड के कि गोल्ड का लो आखिरी कहां पे है? बड़े टाइम फ्रेम में। फोर आवर पे कहां पे है? वन ऑवर पे कहां पे है। वो याद होता है तो मुझे जुबानी याद होता है कि प्राइस से नीचे आएगी तो स्ट्रक्चर चेंज हो सकता है। ठीक है? तो ऊपर
जाती हुई मार्केट में आपको अपना लास्ट लो यानी जिसको हम हायर लो कहते हैं। कंफर्म हायर लो वो पता भी होना चाहिए और निकालना भी आना चाहिए। इसी तरह जब प्राइसे नीचे गिर रही हैं तो आपको अपना लास्ट ठीक है जो भी आपका कंफर्म लोअर हाई निकल रहा है वह आपको पता होना जरूरी है। नीचे आती है मार्केट में लोअर हाई ऊपर जाती है मार्केट में हायर लो ये आपको पता होना बहुत जरूरी है। ये आपको पता होंगे ना तो कल की क्लास आपको बहुत आसानी से समझ आ जाएगी इंशाल्लाह। ठीक हो गया? अच्छा कल
मैं यहां पे नहीं आऊंगा। बल्कि कल मैं लाहौर आऊंगा और रात को क्लास आपकी इंशाल्लाह होगी अपने टाइम पे ना 9:30 बजे होगी। उसके बाद फिर आगे जो छुट्टी आएगी उसमें आपने ये चीजें कुछ असाइनमेंट्स मैं आपको देके जाऊंगा आपने बना के रखनी है। ठीक है? आप इस तरह का अगर आप रहेंगे ना कि मैं असाइनमेंट बनाऊंगा आप बनाएंगे फिर मैं चेक करूंगा फिर नंबर मिलेंगे वो काम भी होगा आगे चलके लेकिन अगर उसको बोझ समझ के बनाएंगे कि यार ये तो इस तरह आगे नहीं जाने देते या बोझ है या होमवर्क जैसे मिलता है
तो फिर बच्चे की तरह ही रहेंगे आप अगर अपने शौक से करेंगे ना कल दिन में बैठ जाए मुझे बेशक ना चेक करवाएं गलत बनाए ठीक बनाए अगर आप कोशिश करते रहेंगे वो चेक तो हो जानी है अभी चेक नहीं होगी तो ट्रेडिंग में जाके लाइव में जाके चेक हो जाएगी आप खुद उसको चेक करेंगे कि मैं ठीक मार्क करता हूं कि नहीं क्योंकि रिजल्ट्स आपके सामने आ जाएंगे तो इंशा्लाह बहुत जल्दी सीख जाएंगे अगर अपने शौक से करेंगे तो जो बोझ समझ के करेगा वह थोड़ा टाइम लेगा फिर अच्छा एक क्वेश्चन यह था मैं
इसे लाइव में बता दूं। वैसे तो मैंने जो हमारी पहली क्लास थी रोड मैप टू सक्सेस उसमें बताया था कि कितना टाइम लग सकता है इस कोर्स में। इस कोर्स में तकरीबन डेढ़ से दो माह लग सकते हैं। आपका कोर्स लंबा चलेगा थोड़ा सा फीस आपकी वही है। लेकिन आपका कोर्स क्योंकि आप बैच 40 में आए हैं तो बैच 40 एनुअल बैच होता है हमारा। उसमें आपको थोड़ा सा लंबा लगेंगे। क्लासेस लंबी चलेंगी। लेकिन ये है कि हर चीज इंशाल्लाह डिटेल से होगी। तो कल की जो क्लास है उसमें हम आगे अभी भी स्ट्रक्चर का
एडवांस शेप हमने पढ़नी है। तो कल वो पढ़ेंगे। उसके बाद इंशाल्लाह फिर नेक्स्ट टॉपिक्स अपने सपोर्ट रेजिस्टेंस पे चले जाएंगे। चल जी ठीक है। मिलते हैं इंशाल्लाह फिर नेक्स्ट क्लास में और क्वेश्चंस अपने नोट करते रहें। ये भी चीज़ रिकॉर्डिंग में बता दूं वो ये आपके ज़हन में आप चार्ट पे आते हैं, चार्ट पे मार्किंग करते हैं। आपके ज़हन में सवाल आते हैं 10। आपने वो 10 सवाल नोट कर लेने हैं अपने पास कॉपी पे। ठीक है? अब होगा क्या कि पहली क्लास के बाद 10 सवाल थे। उन 10 में से आपको मुमकिन है आज
चार का जवाब मिल गया हो। उन चार को काट दें वहां से। पीछे रह गए छह। कल की क्लास लेंगे। मुझे उम्मीद है कि कल की क्लास में चार और माइनस हो जाएंगे। पीछे रह जाएंगे दो। ठीक है? दो जो है फिर आप क्वेश्चन आंसर सेशन पे रह जाए। वैसे तो उम्मीद है कि ये भी निकल जाएंगे कल नहीं तो परसों निकल जाएंगे। लेकिन आहिस्ता-आहिस्ता फिर क्लासेस आपके क्वेश्चंस की तादाद कम होती जाएगी। क्योंकि अभी हमसा पढ़ते जाएंगे। जो सवाल आपके ज़हन में आता है वो थोड़ा सा एडवांस लेवल का होता है। वो हमने नेक्स्ट
क्लास में पढ़ना होता है। तो इसलिए इस हवाले से भी परेशान नहीं होना। दो महीने डेढ़ महीना दें। दो महीने बाद जितने भी सवाल होंगे आपको बिठा के सारे हल करवा देंगे। चल जी। ठीक है। इंशा्लाह मिलते हैं नेक्स्ट क्लास में। अल्लाह हाफिज।