देखिए, सुबह की शुरुआत होती है सादे चावलों से। गांव वाली चावलों को पानी में भिगो देती है ताकि दाने धीरे-धीरे नरम हो। दूसरी तरफ आलू छीले जाते हैं। छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर स्टीमर में रख दिए जाते हैं। थोड़ी ही देर में चावल और आलू भाप में अच्छे से पक जाते हैं। अब दोनों को पत्थर के ओखल में डाला जाता है। मूसल की हर चोट के साथ चावल और आलू आपस में घुलते जाते हैं और बदल जाते हैं एक मुलायम चिकने पेस्ट में। अब आती है स्वाद की बारी। इस पेस्ट में थोड़ी सी चीनी और चावल
का आटा मिलाया जाता है। जब मिश्रण थोड़ा गाढ़ा हो जाता है तो इसे फैलाकर पतले-पतले टुकड़ों में काट लिया जाता है। अब हर टुकड़े को घी में हल्का सा डुबोया जाता है। ऊपर से ब्रेड क्रम्स की परत चढ़ाई जाती है। एक-एक कर इन्हें गर्म तेल में उतारा जाता है। तेल में जाते ही हल्की सी आवाज और खुशबू पूरे आंगन में फैल जाती है। कुछ ही पलों में बाहर से करारे और अंदर से नरम टुकड़े तैयार हो जाते हैं। और इस तरह चावल और आलू से बनता है सर्दियों का गरमागरम स्वादिष्ट देसी नाश्ता।