हिंदी में यूपीएससी की तैयारी से संबंधित प्रोग्राम्स को देखने के लिए सब्सक्राइब करें स्टडी आईक्यू आईएस हिंदी नमस्कार पीवा क्यू की सीरीज में आपका स्वागत है पिछली बार देखते हैं कौन से सवाल पर हमने छोड़ा था और उसका आंसर लेकर आगे बढ़ेंगे आइए जल्दी से देखें मूल अधिकार डीपीएसपी और मूल कर्तव्य यह वाला पार्ट चल रहा है मैंने आपसे पूछा था भारत के मैंने नहीं यूपीएससी में ने पूछा था यूपीएससी ने 2020 में सवाल पूछा था भारत के संविधान के भाग चार में अतविष्टिक निम्नलिखित कथनों में से कौन सा से सही है यह है पहला
पूछा गया है कि वे न्यायालयों द्वारा प्रवर्तनीय होंगे और दूसरा कथन है व किसी भी न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं होंगे अब ओबवियसली इन दोनों में से कोई एक ही होगा जो सही होगा ठीक है फिर पूछा गया है इस भाग में अधिक ित सिद्धांत राज्य के द्वारा कानून बनाने को प्रभावित करेंगे तो आर्टिकल 37 से ये सीधे-सीधे क्वेश्चन है आर्टिकल 37 में सीधा लिखा हुआ है कि डीपीएसपी राज्य के नीति निर्देशक तत्व जो है वोह गैर प्रवर्तनीय होते हुए भी गैर प्रवर्तनीय होते हुए भी अब गैर प्रवर्तनीय का मतलब क्या है कि आप इनके उल्लंघन
पर अदालत नहीं जा सकते यह न्यायोचित नहीं है न्याय के योग्य नहीं है आप इनके उल्लंघन पर अदालत जाकर यह नहीं कह सकते कि भाई संविधान में तो लिखा हुआ है भाग चार में लेकिन राज्य इसको पूरा नहीं कर रहा जैसे यूनिफॉर्म सु कोड आर्टिकल 44 में है लेकिन अभी तक बना नहीं है लागू नहीं हुआ है तो आप इसके लिए यूनिफॉर्म सिविल कोड के लिए आप नहीं जा सकते कि भैया यूनिफॉर्म सिविल कोर्ट आज तक नहीं बना डीपीएस में लिखा हुआ है आर्टिकल 44 में इसका मेंशन है ऑलरेडी क्यों क्योंकि य गैर प्रवर्तनीय है
ठीक है और आर्टिकल 37 साफ साफ कहता है कि राज्य के जो नीति निर्देशक तत्व हैं वह गैर प्रवर्तनीय होते हुए भी शासन के लिए मूलभूत सिद्धांत है मूलभूत है और दूसरी बात कि राज्य विधि बनाने में इसे प्रयुक्त करेगा इसका इन सिद्धांतों के हिसाब से विधि बनाएगा तो आर्टिकल 37 पर ही यह पूरा क्वेश्चन बेस्ड है ठीक है आर्टिकल 37 भाग चार में है राज्य के नीति निर्देशक तत्व सीधा सधा है चलिए न्यायालयों द्वारा प्रवर्तनीय होंगे गलत है जबकि मूल अधिकार न्यायालयों द्वारा प्रवर्तनीय है ठीक है आर्टिकल 32 अपने आप में एक मूल अधिकार
है जिसमें आपका मूल अधिकार उल्लंघन हो जाने पर आप सीधे सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं और सुप्रीम कोर्ट में रिट पिटीशन दाखिल कर सकते हैं ठीक है किसी भी न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं होंगे यह बात बिल्कुल सही है और यह सिद्धांत राज्य के द्वारा कानून बनाने को प्रभावित करेंगे यह भी बात बिल्कुल सही है क्योंकि आर्टिकल 37 में यही लिखा हुआ है तो केवल दो और तीन इसका सही उत्तर है आंसर इसका डी ठीक है चलिए आगे बढ़े भारत में न्यायपालिका का कार्यपालिका से पृथक करण किसने किससे व्यादेश है संविधान की उद्देशिका के द्वारा राज्य
की नीति निदेशक तत्वों के द्वारा सातवी अनुसूची के द्वारा और परंपरागत व्यवहार के द्वारा देखिए सातवीं अनुसूची में तो शक्ति का बंटवारा है शक्ति का विभाजन किसके किसके बीच में है संघ और राज्य के बीच में मैंने पिछली बार भी आपको बताया था कि सातवीं अनुसूची में तीन तरह के लिस्ट बने हुए हैं वो लिस्ट कौन-कौन से हैं एक तो संघ सूची है जिसको आप कहते हैं यूनियन लिस्ट स्टेट यानी राज्य सूची स्टेट लिस्ट और तीसरी सूची है एक यह हो गया दो यह हो गया और तीसरा है कॉन्करेंट लिस्ट या फिर समवर्ती सूची जिसका
सीधा मतलब है कि संघ सूची के विषयों पर संसद द्वारा कानून बनाया जाएगा संघ के स्तर पर राज्य सूची के स्तर पर राज्य सूची में विषयों पर जो है शामिल है इसमें उस पर राज्य के विधानमंडल बनाएंगे और समवर्ती सूची पर दोनों बना सकते हैं ठीक है यही मतलब हुआ तो शक्ति का बटवारा है और मैंने पहले भी कहा था कि शक्ति का विभाजन इसको शक्ति का पथक मत समझ लीजिएगा यह सेपरेशन ऑफ पावर्स नहीं है डिवीजन ऑफ पावर्स है तो सातवी अनुसूची द्वारा तो यह तो ऐसे ही गलत होगा परंपरागत व्यवहार द्वारा यह भी
गलत होगा संविधान के उद्देशिका द्वारा अगर आपको आर्टिकल नहीं याद है तो ऐसे निकाल सकते हैं ठीक है क्योंकि संविधान की उद्देशिका में आपको पता है कि क्या-क्या चीजें बताई गई भाई संविधान का स्रोत बताया गया है संविधान की प्रकृति बताई गई संविधान का उद्देश्य बताया गया है ठीक है और संविधान तिथि बताई गई है कि लागू होने की तिथि क्या है लागू होने के विषय में लागू होने की तिथि नहीं बताइए सॉरी कब अधिनियमित किया गया स्रोत प्रकृति उद्देश्य और अधिनियमित या अंगीकृत होने की तिथि ठीक है 26 नवंबर 1949 यह सब आप पढ़ते
ही हैं तो इसमें तो हो नहीं सकता अब बच गया राज्य के नीति निर्देशक तत्व राज्य के नीति निर्देशक तत्व में अगर आपको आर्टिकल 50 पता है तो आर्टिकल 50 सीधे-सीधे कहता है कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच पृथक करण की करना है राज्य को ठीक है देखि 1973 तक क्या स्थिति थी 1973 तक जब तक सीआरपीसी नहीं आया था तब तक की स्थिति यह थी कि बहुत जो एग्जीक्यूटिव होते थे डीएम डिस्ट्रिक्ट का मजिस्ट्रेट जो होता था वह कई मामलों की सुनवाई करता था यहां तक कि आपराधिक मामलो की भी सुनवाई करता था आपराधिक कुछ
मामलों की भी सुनवाई कर लेता था और डीएम क्या है एग्जीक्यूटिव का पार्ट तो कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच पृथक करण शुरू से नहीं था इसका मतलब लेकिन 1973 में जब सीआरपीसी लागू हो गया उसके बाद अब अपराधिक मामलों में डीएम सुनवाई नहीं करता सिर्फ और सिर्फ न्यायपालिका से सुनवाई होती है तो यही आर्टिकल 50 में कहा गया था कि कार्यपालिका और न्यायपालिका के कार्यों का पृथक करण के बारे में प्रोविजन है तो ऑप्शन बी इसका सही उत्तर है चलिए आगे बढ़े उससे मैं पहले बता दूं कि 19 सितंबर सुबह 8 बजे एक बैच आ
रहा है और यह बैच इस समय बहुत ही कम कीमत पर है 2500 में है तो अगर आप चाहे इसमें एडमिशन ले सकते हैं ठीक है यह ऑफर अब खत्म हो गया है डबल वैलिडिटी वाला तो इसको अभी आप कंसीडर मत कीजिएगा अमृत लाइव कोड यूज करने पर आप इस बैच में प्रतिज्ञा प्लस बैच में एडमिशन ले सकते हैं इस बैच में जो भी प्रारंभिक परीक्षा पास करेगा उसकी पूरी फीस वापस हो जाएगी और हर हफ्ते एक टेस्ट चल रहा है जिसमें फर्स्ट रैंकर को 000 जीतने का मौका मिलता है तो आप चाहे तो अपने
इस कोर्स को अपनी तरफ से अपने उद्यम से फ्री करा सकते हैं ठीक है साथ ही बाकी सुविधाएं जो किताबों का 18 किताबों का सेट है हज प्लस घंटों के लाइव कक्षाएं हैं सीसेट है निबंध है यह सारी चीजें आपको मिलेंगी और बाकी क्रक्स वगैरह सब कुछ मिलेगा चलिए अमृत लाइव कोड यूज कर लीजिएगा और अमृत लाइव कोड यूज करके एडमिशन ले सकते हैं भारत के संविधान का कौन सा अनुच्छेद अपनी पसंद के व्यक्ति से विवाह करने के किसी व्यक्ति के अधिकार को संरक्षण देता है 2019 का यह सवाल है ठीक है तो भाई यह
इंपॉर्टेंट सवाल 2019 मेंही क्यों पूछा गया इसलिए पूछा गया कि उसी समय एक जजमेंट आया था सुप्रीम कोर्ट का ठीक और जजमेंट आया था हाद या केस में हाद या केस में यह केस 2018 में इसका जजमेंट आया हालाकि केस पहले केरल हाई कोर्ट गया केरल हाई कोर्ट से फिर हाद के पक्ष की हार हुई उसके बाद फिर सुप्रीम कोर्ट में अपील हुई और सुप्रीम कोर्ट में फाइनली इनके पक्ष में जजमेंट आया केस क्या था हाद का असली नाम अखिला है असली नाम इन द सेंस दोनों असली ही नाम है लेकिन अखिला अशोकनगर हाई कोर्ट
में केस किया कि इनका जबरन इस्लाम में अंतरण कराया गया है कन्वर्जन कराया गया है और इनका नाम अब आदिया हो गया है और उस लड़के पर जिससे इनकी शादी हुई थी उस पर आरोप लगाया इनके पिता ने कि वह कुछ एक्सट्रीमिस्ट जो ग्रुप है उनके कांटेक्ट में है सिरिया जा चुका है इस तरह के भी आरोप लगे केरला हाई कोर्ट ने इसमें जजमेंट देते हुए इनकी शादी को रद्द कर दिया जब केरला हाई कोर्ट ने इनकी शादी को रद्द कर दिया तो फिर फाइनली यह लोग सुप्रीम कोर्ट गए और सुप्रीम कोर्ट ने हाद या
केस में कहा केरला हाई कोर्ट के जजमेंट को पलट दिया और सुप्रीम कोर्ट ने हा दिया केस में कहा कि भाई अपनी पसंद से विवाह करने का अधिकार आर्टिकल 21 के तहत है ठीक है प्राण और दैहिक स्वतंत्रता के अधिकार के तहत शामिल है तो इसीलिए क्वेश्चन पूछा गया था और इसका सही उत्तर आर्टिकल 21 है ठीक है ऑप्शन बी अगला है निजता के अधिकार को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार के अंतर्भरती है भारत के संविधान में निम्नलिखित में से किससे उपर्युक्त कथन सही एवं समुचित ढंग से अर्थ होता है 2018 18 का सवाल
है अनुच्छेद 14 और संविधान के 42 व संशोधन के अधीन उपबंध अनुच्छेद 17 एवं भाग चार में दिए गए राज्य की नीति के निर्देशक तत्व अनुच्छेद 21 एवं भाग तीन में गारंटी की गई स्वतंत्रता या फिर अनुच्छेद 24 एवं संविधान के 44 व संविधान के संशोधन के अधीन उपबंध देखिए मैंने आपको पिछले एपिसोड में क्या बताया था एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण निर्णय जो हमेशा आपको याद रखना है और उसका नाम था के एस पुट्टापर्थी केस पुट्टापर्थी शर्मा जजमेंट को पलटते हुए यह बताया कि भाई निजता का अधिकार भी आर्टिकल 21 जो हम पहले ही जिक्र
कर चुके हैं पिछले एपिसोड में आर्टिकल 21 का पाठ निता का अधिकार लेकिन साथ ही आर्टिकल 21 एवं भाग तीन में दिए गए अधिकार में शामिल है तो आर्टिकल 21 के साथ साथ जो भाग तीन में स्वतंत्रता दी गई स्वतंत्रता के जो अधिकार है स्वतंत्रता के अधिकार स्वतंत्रता के अधिकार आपको पता है 19 से लेकर 222 तक है ठीक है सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आर्टिकल 21 एवं भाग तीन के अंदर जो स्वतंत्रता के अधिकार हैं उनमें शामिल है यह निजता का अधिकार तो स्वतंत्रता का अधिकार में 19 में वाक एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के
अधिकार है ठीक है उसके अलावा निरा युद्ध सम्मेलन करने का अधिकार है संघ बनाने का अधिकार है कहीं भी आबाद संचरण करने का अधिकार है कोई वृति पेशा व्यवसाय करने का अधिकार है यह जो पूरे स्वतंत्रता के अधिकार हैं ठीक है उसका भी पाठ है निजता का अधिकार तो केस पुट स्वामी केस के जजमेंट के आधार पर ही सवाल फ्रेम किया गया था और इसका सही उत्तर है आर्टिकल 21 और भाग तीन में गारंटी की गई स्वतंत्रता ठीक है स्वतंत्रता के अधिकार चलिए भाग फिर अगला सवाल किनको विधि के शासन के प्रमुख लक्षणों के रूप
में माना जाता है रूल ऑफ लॉ रूल ऑफ लॉ शक्तियों का परिसीमन विधि के समक्ष समता सरकार के प्रति जन उत्तरदायित्व या फिर स्वतंत्रता और नागरिक अधिकार रूल ऑफ लॉ क्या है जब हम संविधानवाद पढ़ते हैं तो उसके टूल के रूप में रूल ऑफ लॉ पढ़ते हैं और संविधानवाद क्या है संविधानवाद का मतलब है सीधा-सीधा अगर एक लाइन में कहे तो सरकार को करना है यानी सीमित सरकार की बात संविधानवाद करता है ठीक है सीमित सरकार का मतलब है कि सरकार मनमाना नहीं कर सकती सरकार मनमानी नहीं कर सकती ठीक है और सरकार मनमानी नहीं
कर सकती संविधान में सब कुछ इसलिए तो वर्णित है कि सरकार मनमानी ना करे तो कार्यपालिका के मनमाने पर रोक लगाने का की बात संविधानवाद और संविधानवाद इसका मतलब है कि सरकार को सीमित करने की बात करता है और सरकार सीमित कब होगी जब उसके एक उपकरण के रूप में रूल ऑफ लॉ रहे विधि का शासन हो विधि का शासन ब्रिटिश राजनीतिक राजनीतिक जो चिंतक थे डसी डायसी ने विधि का शासन का सिद्धांत दिया था और रूल ऑफ लॉ विधि की सर्वोच्चता की बात करता है ठीक है विधि के समक्ष समता की बात करता है
विधि के सामने सभी समान होंगे और किसी को भी विशेषाधिकार नहीं होगा विशेषाधिकार नहीं होगा ठीक है कानून के सामने विधि के सामने विधि सर्वोच्च है विधि के समक्ष समता है किसी को विशेष अधिकार नहीं है जिसका मतलब है कि सामान्य अदालतों में ऑर्डिनरी कोर्ट में समान कानूनों के जरिए सबकी सुनवाई होगी ठीक है तो आप देखिए शक्तियों का परिसीमन निश्चित तौर पर यह शक्तियों का परिसीमन करता है विधि के समक्ष समता विधि के शासन का ही एक पार्ट है सरकार के प्रति जन उत्तरदायित्व यह इसका हिस्सा नहीं होगा क्योंकि यह जनता के उत्तरदायित्व की
बात ही नहीं करता यह तो सरकार को सीमित करने की बात कर रहा है स्वतंत्रता और नागरिक अधिकार यह भी रूल ऑफ लॉ से जुड़ा हुआ है क्यों क्योंकि कार्यपालिका को मनमाने पर उतारू नहीं करने देने उससे रोकने का मतलब ही है कि व्यक्ति की स्वतंत्रता और उसके अधिकारों को वैल्यू देना उसकी स्वतंत्रता और उसके अधिकारों को बनाए रखना इसी के लिए तो राज्य को सीमित किया जा रहा है तो एक दो और चार इसका सही उत्तर होगा ऑप्शन सी अगला है समाज में समानता होने का एक निहितार्थ यह है कि उसमें विशेष अधिकारों का
अभाव अवरोधों का अभाव है प्रतिस्पर्धा का अभाव है विचारधारा का अभाव है बहुत ही आसान क्वेश्चन है सीधे-सीधे समानता कब होगी समाज में जब किसी के पास कोई विशेष अधिकार ना हो तो पूरा समाज समान रहेगा अगर आपने किसी को विशेषाधिकार दे दिया विशेष अधिकार दे दिए तो फिर समानता का सिद्धांत हिलने लगेगा तो यह बहुत सीधा स्पष्ट सवाल है कि भाई समाज में समानता का होने का एक निहितार्थ क्या है विशेषाधिकार का अभाव है समाज में ठीक अगला सवाल है निम्नलिखित कथनों में से कौन सा एक सही है 2017 का सवाल है अधिकार नागरिकों
के विरुद्ध राज्य के दावे अधिकार वे विशेषाधिकार हैं जो किसी राज्य के संविधान में समाविष्ट है अधिकार राज्य के विरुद्ध नागरिकों के दावे हैं या फिर अधिकार अधिकांश लोगों के विरुद्ध कुछ नागरिकों के विशेष अधिकार है देखिए बहुत कांसेप्चुअल क्वेश्चन है अगर जो कांसेप्ट समझता है उसके लिए 15 सेकंड का भी काम नहीं है और नहीं समझ तो फिर भारी सवाल है अधिकार दरअसल किसको मिले हुए हैं अधिकार राज्य को मिले हुए हैं य व्यक्ति के अधिकार है व्यक्ति को मिले हुए अधिकार तो भाग तीन भी आप जब पढ़ेंगे तो आप देखेंगे व्यक्ति और नागरिकों
को अधिकार दिया गया है नागरिकों के अधिकार अगर आपको अधिकार दिया गया है ठीक है तो अधिकार आपका दावा है ना भाई मैं अगर आपसे कहूं आपको यह अधिकार है इसका मतलब आप इस बात का दावा करेंगे ना कि अगर आपने मुझे अधिकार दिया है मान लीजिए आपको अधिकार दिया हुआ है कि आप किसी भी कक्षा में आकर पढ़ सकते हैं ठीक है और कल को अगर आपको रोक दिया गया कि आप इसमें नहीं पढ़ सकते तो आप कहेंगे ना कि भाई यह तो मेरा राइट है मेरा दावा है मैं दावा कर सकता हूं ना
कि भाई मुझे पढ़ने दिया जाए क्योंकि मेरा राइट है आपने अधिकार दिया था मुझे अब अधिकार अगर आपको दिया गया है इसका मतलब ही है कि यह व्यक्ति और नागरिकों के दावे हैं किसके विरुद्ध दावे हैं यह अधिकार आपको प्राप्त है किसके विरुद्ध आप दावा ठोकेंगे जो रोक सकता है कौन रोक सकता है राज्य रोक सकता है राज्य ही तो रोक सकता है सरकार ही तो रोक सकती है तो अधिकार राज्य के विरुद्ध व्यक्ति के दावे या नागरिकों के दावे यही तो बात कह रहा है अधिकार राज्य के विरुद्ध नागरिकों के दावे हैं तो यही
स्टेटमेंट सही पहला तो कह रहा है अधिकार नागरिकों के विरुद्ध राज्य के दावे हैं तो कांसेप्चुअली यह तो ऐसे ही गलत गलत है क्योंकि अध अकार नागरिकों को मिले हुए हैं राज्य को नहीं मिला हुआ है इसीलिए आप भाग तीन की भाषा में देखेंगे हर जगह क्या लिखा हुआ है राज्य इस बात से नागरिकों को वंचित नहीं करेगा किस पर लिमिटेशन लगाया गया राज्य पर व्यक्तियों को तो अधिकार मिला हुआ है उन अधिकारों का हनन राज्य नहीं करेगा राज्य पर वो किया गया और मान लीजिए अगर कर दिया तो इन अधिकारों का दावा है अधिकार
आपके दावे हैं इसलिए आप सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं आर्टिकल 32 के तहत आपको इस बात का भी मौलिक अधिकार है कि आप सुप्रीम कोर्ट जाकर वहां रेड पिटीशन दाखिल करके सुप्रीम कोर्ट से फैसला लेंगे कि भाई मेरे अधिकारों का हनन हुआ है क्योंकि आपके दावे और किसके विरुद्ध है राज्य के विरुद्ध तो ऑप्शन सी इसका सही उत्तर है अगला है भारत के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा अधिकारों और कर्तव्यों के बीच सही है अधिकार और कर्तव्य हमेशा एक दूसरे के पूरक होते हैं यह ध्यान रखिएगा अधिकार और कर्तव्य एक दूसरे के पूरक
है ठीक है पूरक का मतलब क्या है अधिकार के बिना कर्तव्य का कोई मतलब नहीं और कर्तव्य के बिना अधिकार का कोई मतलब नहीं अगर सिर्फ अधिकार दे दिया गया कर्तव्य नहीं दिया गया तो क्या स्थिति होगी ठीक है भाई आपको वोट डालने का अधिकार है वोट डालने का अधिकार है लेकिन आपका कर्तव्य भी तो है कि वोट डाले ठीक ध्यान रखिए अब वोट की अगर बात कर रहे हैं ना तो यह मौलिक अधिकार में नहीं है कहीं लिखा नहीं है मौलिक कर्तव्य में भी कहीं लिखा नहीं है हम इन जनरल बात कर रहे हैं
कि अगर किसी को अधिकार दिया गया है वोट डालने का तो फिर उस अधिकार के साथ वोट डालना आपका कर्तव्य भी तो है जाकर वोट डालिए इसीलिए तो आपको अधिकार दिया गया है इसी तरीके से किसी को कर्तव्य दे दिया गया कि भाई अच्छी सरकार चुननी है ऐसी सरकार चुननी है जिससे भारत देश का विकास हो जन समस्याओं की का समाधान हो लेकिन उसको वोटिंग राइट ही नहीं दिया गया तो कर्तव्य दे दिया गया और अधिकार नहीं दिया गया तो उसका भी कोई मतलब नहीं है इसका मतलब दोनों एक दूसरे के पूरक तो यहां यही
पूछा गया है कि अ अधिकार कर्तव्यों के साथ सह संबंधित हैं अधिकार व्यक्तिगत हैं अतः समाज और कर्तव्यों से स्वतंत्र है नहीं अधिकार के साथ साथ कर्तव्य भी है ठीक है नागरिक के व्यक्तित्व के विकास के लिए अधिकार ना कि कर्तव्य महत्त्वपूर्ण है यह भी गलत है ठीक है राज्य के स्थायित्व के लिए कर्तव्य ना कि अधिकार महत्त्वपूर्ण है यह भी गलत है अधिकार और कर्तव्य दोनों एक दूसरे के पूरक हैं और दोनों महत्त्वपूर्ण है यानी अधिकार कर्तव्यों के साथ सह संबंधित हैं यह इसका सही उत्तर होगा अगला देखिए भारत के संविधान में शोषण के
विरुद्ध अधिकार द्वारा निम्नलिखित में से कौन से परिकल्पित हैं 2016 17 का सवाल है देह व्यापार और बंधुआ मजदूरी या बेगारी का निषेध अस्पष्टता का उन्मूलन अल्पसंख्यकों के हितों की सुरक्षा कारखानों और खदानों में बच्चों के नियोजन का निषेध कह रहा है कि शोषण के विरुद्ध अधिकार शोषण के विरुद्ध अधिकार भाग तीन में है शोषण के विरुद्ध अधिकार यानी आर्टिकल 23 और 24 पढ़ा है आपने ठीक है जिसमें क्या-क्या बातें कही गई है आपको पता है ह्यूमन ट्रैफिकिंग के लिए मना किया गया है शोषण के विरुद्ध के अधिकार में मानव देह के व्यापार के लिए
ह्यूमन ट्रैफिकिंग का मतलब हुआ कि जब जैसे किसी का ट्रैफिकिंग इसलिए किया जाता है कि अंग निकाल लिया जाए किसी की ट्रैफिकिंग इसलिए की जाती है कि उनको प्रोस्टिट्यूशन में महिलाओं को डालने के लिए किया जाता है ठीक है बच्चों के साथ भी ऐसा हो जाता है ह्यूमन ट्रैफिकिंग के इश्यूज तो तो इस तरह के इश्यूज आते रहते हैं और इससे मना किया गया है ठीक संविधान में ही इसका प्रोविजन किया गया है बंधुआ मजदूरी या बेगारी इसका भी निषेध किया गया है शोषण के विरुद्ध अधिकार में तो ये तो बिल्कुल सही है अस्पष्टता का
उन्मूलन की अगर बात करें तो आर्टिकल 17 आपको पता है अस्पृश्यता का उन्मूलन करता है और इसको दंडनीय बनाता है विधि के द्वारा लेकिन हमसे पूछ रहा है शोषण के विरुद्ध अधिकार में क्या शामिल है तो यह गलत हो जाएगा अस्पष्टता का अनमूलन तो समता के अधिकार में शामिल है आर्टिकल सम आपको याद है कि अगर समता का अधिकार किससे किस तक है समता का अधिकार भाग तीन में आर्टिकल 14 से 18 स्वतंत्रता का अधिकार कहां से कहां तक है 19 से 22 शोषण के विरुद्ध अधिकार कहां से कहां तक है 23 24 धार्मिक स्वतंत्रता
का अधिकार कहां से कहां तक है ठीक है ये सब आपको याद ही है अब नीचे जगह नहीं है आगे अपनी यादाश्त से काम चलाइए तो अल्पसंख्यकों के हितों की सुरक्षा यह इसमें नहीं है बल्कि कारखानों और खदानों में बच्चों के नियोजन का निषेध किया गया है ठीक है 14 साल से कम उम्र के बच्चों को कारखानों में खदानों में हजार्ड तरह के जो काम हैं हानिकारक तरीके के खतरनाक तरीके के काम है तो 14 साल से कम बच्चों को उनमें नियोजन यानी एंप्लॉयमेंट से मना किया गया है तो चार और एक यही सही उत्तर
होगा ऑप्शन सी केवल एक और चार निम्नलिखित में से कथनों में से कौन सा या से भारतीय नागरिक के मूल कर्तव्यों के विषय में सही है या है इन कर्तव्यों को प्रवर्तित करने के लिए एक विधाई प्रक्रिया दी गई है और वे विधिक कर्तव्यों के साथ परस्पर संबंधित हैं कह रहा है कि कौन सा सही उत्तर है देखिए स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर 42 व संविधान संशोधन अधिनियम 1976 के द्वारा 51 का क जोड़ा गया था जिसमें मूल कर्तव्य जोड़े गए थे पहले 10 जोड़े गए और बाद में
एक और जोड़ा गया तो अभी 11 है ठीक है अब यह कर्तव्य इनको प्रवर्तित कराने के लिए कोई भी विधाई प्रक्रिया नहीं दी गई है और यह गैर प्रवर्तनीय है ठीक उसी तरह जैसे कि डीपीएसपी गैर प्रवर्तनीय होते हैं ठीक है तो पहली बात तो मूल कर्तव्य भी गैर प्रवर्तनीय मूल अधिकार डीपीएसपी और मूल कर्तव्य में सिर्फ और सिर्फ मूल अधिकार ही हैं जो प्रवर्तनीय हैं एनफोर्सेबल है डीपीएसपी और मूल कर्तव्य दोनों गैर प्रवर्तनीय तो यह स्टेटमेंट गलत है और विधिक कर्तव्यों के साथ परस्पर संबंधित है यह भी स्टेटमेंट गलत है तो ना तो एक
और ना ही दो यह दोनों ही स्टेटमेंट गलत है ठीक है अब अगला क्वेश्चन 2017 का निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए भारत के संविधान के संदर्भ में राज्य की नीति के निदेशक तत्व विधायिका के कृत्यों पर निर्बंध करते हैं कार्यपालिका के कृत्यों पर निर्बंध करते हैं उपर्युक्त कथनों में से कौन सा य से सही है या है केवल एक केवल दो एक और दो दोनों ना तो एक और ना ही दो इसका आंसर आप मुझे कहां दीजिएगा कमेंट में कमेंट में दीजिएगा और इस प्रोग्राम को लाइक कर दीजिएगा जल्दी से और अपने दोस्तों के साथ
शेयर कर दीजिएगा अगले एपिसोड में मुलाकात होगी ख्याल रखिए कैसा लगा यह कार्यक्रम जरूर बताइएगा नमस्कार हिंदी में यूपीएससी की तैयारी से संबंधित प्रोग्राम्स को देखने के लिए सब्सक्राइब करें स्टडी आईक्यू आईएस हिंदी [संगीत]