झाला कर दो कर दो कि श्रीमद् भागवत ज्ञान कथा ए के किस कंधा एक अध्याय 11 श्लोक अद्भुत है कि श्रीमद् भागवत महापुराण है श्रीमद्भागवत कल्पद्रुम महेश श्रीमद् भागवत का प्रमाण सहित है और श्रीमद्भागवत का चौथा नाम है श्रीमद्भागवत श्रीमद भागवत का एक श्लोक हम लोग आज उच्चारण करते हैं आप बोर्ड पर पढ़ सकते हैं कि श्रीमद् भागवतम् पुण्यं श्रीमद् भागवत श्रीमद् भागवतम् पुण्य मुख श्रीमद्भागवतम् कि आयुर्वेद आरोग्य पुष्टि दम ब्राह्मणों के पुत्र छीतर आई और आरोग्य लुटेरे थम बट नाथ शरणागत अपील पठन अथवा श्रवण सर्वपापै प्रमुच्यते बसपा पहले यह पावन पुराण श्रीमद्भागवत आयु आरोग्य
और पुष्टि को देने वाला है इसका पाठ अथवा श्रवण करने से मनुष्य सब पापों से मुक्त हो जाता है श्रीमद्भागवत पुण्यदाई ग्रंथ है श्रीमद् भागवत ज्ञान देने वाला ग्रंथ है श्रीमद् भागवत कल जो के दोस्तों को हरने वाला क्रम था है मनुष्य में परस्पर प्रीति प्रेम और दया का भाव आस्था कॉल करने में इससे बढ़कर और कोई साथ नहीं है यह ऐसा मुद्दा इस युग की मांग है कि इस युग में श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान हर देश में हर समाज में हर जाति में प्रचलित हो है जो इस भागवत ग्रंथ का अध्ययन करता है इस
श्रवण करता है वह अहिंसक प्राणी पर हुआ हार नहीं करेगा जय राम जी की जी हां हिंसक पर जरूर बचाव के लिए करेगा लेकिन अहिंसक जीवन पर वार नहीं करेगा के निर्देश पर वह बाहर नहीं करेगा मैंने वर्ल्ड रिलीजियस पार्लियामेंट में इस बात को कि हर प्रवचन में दोहराया है है कि दुनिया के सब देशो में सर्वे कर लो ऐसा कोई सच्चा भारतवासी सच्चा भारतवासियों से कहते जो भागवत के ज्ञान से संपन्न है थोड़ा या गीता को भागवत को मानता है राम को मानता है कृष्ण को मानता है ऐसा भारतवासी दुनिया के जिन भी देश
में है आज तक किसी भारतवासी ने उस देश का अन्न खाया जल गया उस देश से बम ब्लास्ट इन करके गद्दारी नहीं की है इतिहास देखो यह राम भारत के पड़ोसी देश के लोगों ने आकर भारत का अन्न खाया भारत में फल-फूल और भारत के उस मुंबई इलाके में बम ब्लास्ट इन किया लेकिन वह भागवत ज्ञान से रहित थे साजन जय राम जी की भारतीय संस्कृति के ज्ञान से रहित थे वह सज्जन और अहिंसक प्राणी पर भागवत का ज्ञान वाला वार नहीं करेगा मदन मोहन मालवीय के थे गांधी जी ने जब भागवत की कथा सुनी
तो गांधी जी ने बोला कि इतना रस इतना ज्ञान और इतना आनंद भगवत कथा मैं है मुझे पता ही नहीं था मैं धन्य हो गया भागवत की कथा सुना दो कि अ कि महाराज व की संख्या दृश्यों को नारद जी कहते के उदय विलाप कर रहे थे तो कि हर उसने अपनी व्यथा सुनाई मैंने संकल्प किया कि तुम्हारे पुत्रों का दुख में दूर करूंगा अवश्य दूर करूंगा है भले तू रो मत देखो मत इस कलयुग में मैं तुझे घर-घर में स्थापना करूंगा गांव-गांव में में मैं तेरी स्थापना करूंगा राधे-राधे मैं तेरी स्थापना करूंगा हर जाति
के व्यक्ति के चित्र में तेरी स्थापना को अगर मैं तेरे इन पुत्रों का दुख दूर नहीं कर सका तो मैं श्रीहरि का दास भी नहीं है कि भगवान का सेवक गुरु का सेवक भगवान का सेवक फैलाने का भी गर्व होता है पवित्र पर्व होता है है हैं नारद जी कहते हैं कि मैंने कई प्रयत्नों की है कई ध्वनियां कि अवैध की ध्वनियां सुनाई थोड़ी सी उनकी उम्र चाटे फिर मानसून को अनजाने में थोड़ा आत्मिक सुख मिलता हूं फिर मूर्छित हो जाए तो है इसलिए अब मैं उनका उपाय खोजने को निकला हूं और मैं किसी से
उपाय पूछता हूं तो उस कोई मोनी बाबा बन जाते कोई आश्रम छोड़कर बाकी सब जानते मुझे उपाय नहीं मिल रहा है आकाशवाणी हुई कि नारद उद्योग करो उपाय मिलेगा लेकिन आकाशवाणी ने भी स्पष्ट नहीं करा कहा कि क्या उद्योग करें कैसे इनका मूर्छा दूर होंगे कैसे कल जपले दोस्त दूर महाराज इसलिए में विशाला नगरी से जल्दी जल्दी गुजर रहा हूं कि बद्रिकाश्रम जाकर तब समाधि करूं क्या करूं आप ही उपाय बताए नहीं तो थे तब लंका दृश्यों ने कहा कि के उन ज्ञान और वैराग्य को श्रीमद्भागवत की कथा सुनाओ उससे उनकी मूर्छा दूर होगी कि
अगर ज्ञान वैराग्य बुड्ढे रहे तो भक्ति रोटी रहेगी हम भक्ति करते हैं रोती रहती है भक्ति क्योंकि ज्ञान और वैराग्य डे है भक्ति करते हैं उसका ज्ञान तो चाहिए वह परमात्मा कैसा है कि भक्ति करने वाला जीवात्मा कैसा है वह ज्ञान तो हमारा पोस्ट होना चाहिए उस ज्ञान की ओर वृंदावन में भी ध्यान नहीं देते कि भक्ति के ग्रह तो वृंदावन में बहुत है लेकिन यह नोएडा के ग्राहक तो बिंद्राबन में भी नहीं मिलता है में ज्ञान और वैराग्य कैसे पुष्ट हो है जिसकी भक्ति करते हो उस परमेश्वर का ज्ञान तो चाहिए और जो भक्ति
कर रहा है वह जीवात्मा को अपना ज्ञान तो चाहिए था इस व्रत में अपने को मानना में बाबू लाल मिर्च मैं मोहनलाल हूं मैं गोविंदलाल हूं अरे गोविंद लाल जन्म तब तो नाम नहीं था छह दिन के बाद रखा बाबूलाल का चेहरा दिन के बाद नाम रखा के यह तो शरीर का नाम है मैं क्या हूं पत्तों कोई नहीं यह दुनिया का पता रहता है शिव को अमेरिका का फलाना प्रेसिडेंट है चीन का फल आना है कि फलाना इस जगह का प्रधानमंत्री है दुनिया का तो ख्याल है लेकिन तेरे शरीर का कौन मंत्री है कौन
प्रेसिडेंट है उसका ज्ञान नहीं यह कलयुग का प्रभाव मैं कल उसके दोस्त से हमारी मति पेट भरने वाली मृत्यु हो गई मंद सुगंध बताया कलहप्रिय आ टॉर्च बंद भाग या हम हो गए महाराज लोग दुखी हैं का ज्ञान वैराग्य पुष्ट होना चाहिए और ज्ञान को पुष्ट करने के लिए श्रीमद्भागवत की कथा है वगैरह कि जिस पर पंच से जिस चिंता मुसीबत से छूटना है उसके प्रति वैराग्य भी होना चाहिए कि भगवान शंकर आदि कहते हैं कि नारद जी हैं उनको तुम श्रीमद्भागवत की कथा सुना नारदजी ने ज्ञान व इराक के को श्रीमद्भागवत की कथा सुनायी
और उनका बुढ़ापा दूर हुआ था भक्ति देवी संतुष्ट हुई यह भागवत की कथा कलियुग के दोषों को हरने वाली यह भागवत की कथा से अकाल मृत्यु उतर जाती है इस भागवत कथा को सुनने से जीव का अहंकार कम हो जाता है जीव के सब गुण विकसित होते हैं और श्री हरि उनको अपना आत्मा लगता है इस भागवत की कथा से धुंध बनता है इस भागवत की कथा से आदमी पर उपकारी बनता है कि युधिष्ठिर ने पूछा कि मरने वाले व्यक्ति का मित्र कौन है वह है जो मर रहा है उसका मित्र तो दान है और
जो संसार की आसक्ति में मर रहा है उसका भी मित्र दान और सेवा है में शुकदेवजी महाराज कहते जिसने हरिकथा नहीं सुनी उनके कान सांप के बिल जैसे स्वास्थ तो धूप ने भी ले रही है उनके दिल ने स्वास्थ्य लिया तो क्या हो गए जिनके हृदय में भगवान की लीला है की मृत्यु करते हुए कलियुग के दोषों से बच जाते हैं अशांति दुख और बांधों में दिव्य शांति और आनंद से जी सकते श्रीमद्भागवत की कथा जीव को प्रेम देती मोहब्बत करने वाला बना देते हो ऐसा मोहब्बत करता है कि त्रिभुवनपति उसके आगे नाचने में भी
संकोच नहीं करता जो त्रिभवन को नाच नचावे बाइक को हिरण की छोरियां नाच नचावे यह प्रेम की ऐसी कुछ उन्माद सकता है प्रेम तो प्रभु को भी नचाता है अपना मन आता है देवता को भी अपना बना देता है प्रेम भाई मनुष्य भी जाता है प्रेम तो पक्षी कुत्ता घोड़ा गधा भी प्रेम से वर्ष हो जाता है और भागवत शुद्ध प्रेम को प्रकट करने का अवसादन है प्रेम किए बिना हम रह नहीं सकते हैं कि अगर प्रेम परमात्मा को नहीं किया तो वह प्रेम पति-पत्नी के शरीर में भंडारे का तो काम बन जाएगा वह प्रेम
अगर पगे इस परिवार में भंडारे का तो वह बन जाएगा जीव का बंधन का कारण बन जाएगा वह प्रेम अगर पद प्रतिष्ठा में लगा तो अहंकार का रूप लेकर जीव को फंसा देगा लेकिन भागवत की कथा सुनकर प्रेम जब परमात्मा के तरफ मुड़ता है तो जीवात्मा को परमात्मा मैं बना देता है यह तरह की है कि शरीर को कितना भी पोस्ट रखा नहीं जो शरीर से वालों में नहीं लेगा उसके शरीर का क्या है जो मन भगवान में नहीं लगा उस मन का होना क्या और जो बुद्धि बुद्धि लाता के ज्ञान में आगे नहीं बढ़ी
बुद्धि पेट पाल उधर ई और दूसरी मत भागवत की कथा आयु आरोग्य पोस्टिंग को देने वाली है ज्ञान वैराग्य पोस्ट करती है और जीवात्मा को परमात्मा से मिलाती है ने परीक्षित भागवत सुनते हैं परीक्षक की मौत है साथ में दिन भागवत सुनते हैं भागवत सुनते-सुनते परीक्षित को ब्रह्म ज्ञान हो गया है अब तक चक्कर काटेगा मुझे भय नहीं महाराज शरीर मरता है मैं नहीं मरने वाला यह ज्ञान भागवत से हुआ शुक देव जी की कृपा से परीक्षित को कर दो कि स्वामी रामतीर्थ जब पढ़ते थे मैं तुम्हें में की परीक्षा देने के वक्त उनके पास
पेपर देने के लिए जो फीस भरनी है वह पैसे नहीं थे इधर उधर से उद्धार सुधार लिया फिर भी ₹5 कम रह गए हैं मैं उदास होकर जा रहे थे तो चंदू हलवाई के पास वह दूध पीते थे डार्क कि उस समय दो पैसे का दूध एक बड़ा गिलास भर के मिलता था कि में चंदू हलवाई ने पूछा कि उदास क्यों है रे विद्यार्थी हैं श्री रामतीर्थ ने कहा के बस ऐसे ही इन्हें क्यों उदास हूं थे ब्लैक फीस भरनी है नहीं तो मैं परीक्षा में नहीं बैठ सकूंगा ऑफिस के लिए पैसे नहीं है ₹5
कम पड़ता चंदू हलवाई ने उठाकर ₹5 दे थी ग्राम स्थित आईएमए की परीक्षा में पास हुए उनको नौकरी मिल गयी लाहौर कॉलेज से कि हर महीने ₹5 चंदू हलवाई को बेचते हैं हर महीने में के लिए तो खाली ₹5 है लेकिन हर मैंने ₹5 थे कि नव महीने तक को ₹5 चंदू हलवाई पर पहुंचे फिर वह रामतीर्थ वहां पहुंचे दूध पीने को वो बोले तुम्हारे हर मैंने ₹5 पहुंचते हैं दूध पीने तो आते नहीं उपाय से तुम्हारे जमा है पिस्ता लिए रुपए जमा हो गए रामतीर्थ ने गांव पैसा जमा कराने को नहीं भेजा है आपने
जो मेरे को ₹5 दिए थे उसी के बदले में मैं भेज रहा हूं आपसे जो से वाली थी उस सेवा लेकर मैं बोझ क्यों चढ़ाऊं इसलिए आपकी सेवा में मैं भेज रहा हूं यह है भारत की संस्कृति वह झाइयों चढ़ाऊं है इसलिए मैं भेजना नहीं तो पड़े हैं आप दूध फिर कि नहीं तुम्हारे ₹5 मेरे बहुत काम में अगर उस समय तुम ₹5 नहीं देते तो मैं परीक्षा में नहीं बैठ पाता पास नहीं होता और मैं नौकरी से कम हो नहीं सकता यह तुम्हारे ₹5 में तो मुझे प्रोफेसर बना दिया है इसका मतलब में जितना
चुका हूं उतना कम है और ऐसा चुकाया के चंदू हलवाई का नाम आशाराम की जुबान पर भी आ रहा है रामतीर्थ के कारण दान की महिमा देख लो कि उस समय के ₹5 अभी के 50 100 200 समझा दूंगी समझो तुम कितना देते हो उसका महत्व नहीं तुम किस भाव से देते हो कि अगर तुम्हारे पास ₹2 हैं तो तुमने 50 पैसे दे दिए तुम्हारी मिल्क तो ₹2 है गुरु गोविंद सिंह के पास लोगों ने कुछ भेज रखा है कि मैं 1 महीने चवन्नी रखती गुरु गोविंद सिंह ने उठाकर उस चवन्नी को आंखों पर रखकर
अरे किसने 500 रखें किसी ने 50 रखें किसी ने कुछ रखा किसी ने अशर्फी रखा है गुरुजी चवन्नी को आंखों पर रख रहे गुरुजी ने कहा कि भाई को पता चल गया कि गुरु जी को दैवी कार्य करना है माई के पास कोई कीमत नहीं पैसा नहीं था माई अपनी रोजी वह जहां गुजारा कर दी थी उस हंसिए से बेहतर पसलियां तंग घास काटने का वहीं का वहीं मिलकर थी वह हस्तियां बेचकर मेरे को सर्वस्व दे रही है इसलिए मैं इसके सर्वस्व को आंखों पर रख आप अ मैं इसके पास असली आप अ दाता रहा
था वह धतणा जिससे घास काट कर गुजारा करती हैं इस दानवीर भाई है वह हंसी पेस्ट कर मेरे कुछ आ रहा के क्षेत्रों के पास तो लाख रुपये है तो हजार दिया कि वह इस आदमी आकर यह तो सब कुछ दे रही हैं कि भगवत कथा में बैठे रहना यह भी पुण्य का काम है अंदर अगर मन गड़बड़ है तो बैठे नहीं देगा तुलसीदास कहते हैं तुलसी पूर्व के पाप से हरिचर्चा न सुहाय किया हुआ कोई पाप कर्म मैं व हरि कथा में नहीं बैठने देता भगा देगा बाहर ले जाएगा अगर बैठे रहे तो पापा
को बाहर बैठना पड़ेगा और पाप नहीं भागा तो अपने को भगाकर ले जायेगा जय राम जी की सा कर दो कर दो अजय को कर दो कर दो [संगीत]