ओम नमो भगवते [प्रशंसा] वासुदेवाय ओम नमो भगवते वासुदेवाय ओम नमो भगवते वासुदेवाय क्या हाल चाल है ठीक है कि बढ़िया [संगीत] है आदि पुरुष स नाम उ चारण मात्रण निर् दूत कलि भवती भगवान आदि पुरुष के नाम उच्चारण करने मात्र से कलयुग के दोष निवृत्त होते हैं कली संत्र उपनिषद में लिखा है भागवत में लिखा है या वं तो विषय पृष्ठा त्रिलोक क्या मज तेंद्र न शक अंती ते सर्वे प्रति पूतु तम भगवान बलि से कहते हैं कि राजन संसार के सब के सब प्यारे विषय एक मनुष्य को मिल जाए सबसे सारी ऊंचे से ऊंची
चीजें एक व्यक्ति को मिल जाए फिर भी उनकी कामनाएं पूर्ण नहीं होती यदि वह अपने इंद्रियों को वश में रखने वाला संतोषी ना हुआ तो दुनिया की सब चीजें एक व्यक्ति के आधीन कर दो फिर भी वह दुखी रहेगा क्यों कि उसने अपने मन को अपने आत्मा के आधीन नहीं किया तो उसकी वासना बढ़ती रहेगी दुख का अंत नहीं होगा कभी ना छूटे पिंड दुखों से जिसे ब्रह्म का ज्ञान नहीं है भगवान कृष्ण राजा बलि को कहते हैं सारे संसार के सारे विषय सारे पद एक व्यक्ति को दे दिए जाए लेकिन मन में अंतरात्मा का
ज्ञान नहीं है अंतरात्मा की विश्रांति नहीं है अंतरात्मा का सत्संग देने वाला संतों का प्रसाद नहीं है तो उसको इतना मिलने के बाद भी वो अशांत और दुखी रहता है कैसट में सुना होगा कि अमेरिका के बड़े-बड़े धना व्यक्तियों की लिस्ट बनाई सत्ताद और धना व्यक्तियों 25 साल के बाद में धना लोग किसी को पैरालाइज हो गया किसी ने सट्टा किया और जेल में पड़ा है कोई रिबा रिबा के मर गया तो किसी की मिल्कत मुनिम खा गए किसी की मिल्कत छोरों ने उड़ा दी तो शास्त्र वचन का दर्शन होता है अनि त्यानी शरीरा शरीर
नित्य है वैभव नव शाश्वता धन दौलत और सत्ता शाश्वत नहीं है जो राज करते थे प्राइम मिनिस्टर थे वह कहीं जेल में देखे हमने और जो जेल में थे उनको प्राइम मिनिस्टर बनते हमने देखा सुना मुरार जी भाई जेल में थे तो प्राइम मिनिस्टर बने नरसिंह आरा प्राइम मिनिस्टर थे तो भी जेल में पड़े सत्ता शाश्वत नहीं धन शाश्वत नहीं है सौंदर्य शाश्वत नहीं लेकिन जीव का आत्मा शाश्वत है और वह सुख स्वरूप है रात्रि को सो जाते हैं कुछ खाने पीने भोगने का नहीं होता है फिर भी सुबह उठते तो जरा शांति सुख मिलता
है वह कहां से मिलता है औषधि से अथवा वस्तुओं से आपका मन और शरीर खुश होता है ऐसी बात नहीं है आपका आत्मा है तभी कहीं औषधि काम करती है आपके मन में आस्था है औषधि के प्रति अथवा किसी के प्रति तब वह वस्तु प्यारी लगती है तो आपका आत्मा है तभी औषध काम करती है सुबह आलाराम घंटी बजा सकता है लेकिन कंबल नहीं हटा सकता है पत्नी या पति कंबल हटा सकते तुम्हें जगा नहीं सकते तुमको तो तभी जगाया तुम तभी जगते हो जब तुमको जगाने वाला चैतन्य परमात्मा तुम्हारे साथ है तभी तुम नींद
के बिस्तर से उठ सकते हो नहीं तो नहीं उठ सकते और दुनिया के कोई लोग छाती कूट के बोले कि मैं तुम्हारा हूं तुम्हारा हूं उसका कोई ज्यादा भरोसा नहीं वास्तव में जीवात्मा का तो सच्चा तो परमात्मा ही सहारा है सेठ छाती खो ठोक के चला गया बनिया था बैठो चन बनिया था मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री मैं बैठा हूं मैं बैठा हूं मैं बैठा हूं लेकिन वही मैं हार गया बरा जय राम जी की दूसरा सेठ छाती ठोकता होगा चिंता मत करना मैं बैठा हूं आधा घंटे के बाद फोन आया के तो चला गया शरीर
अनित्य है वैभव शाश्वत नहीं और जीव रोज मौत के तरफ आगे बढ़ा जा रहा है कर्तव्य क्या है कि धर्म का संग्रह करे शांति सुख और पुण्य का संग्रह करे मौत आकर गला दबोच ले उसके पहले मौत जहां नहीं पहुंचती उस आत्मा में पहुंचने का अभ्यास करें भगवान कहते हैं अभ्यास योग युक्त चेत सा नान्य गामिन परम पुरुषम दिव्यम याति पार्थ अनु चिंतन हे अर्जुन जीव को अभ्यास करना चाहिए अभ्यास तो सबके पास है रोटी बनाने का अभ्यास थर्मल में जाने का अभ्यास लाइट सप्लाई करने का अभ्यास भाषण करने का अभ्यास झगड़ा करने का अभ्यास
कंप्रोमाइज करने का अभ्यास अभ्यास तो सबके पास है लेकिन इस अभ्यास को योग में मिला दे अभ्यास का उपयोग करें आत्मा से योग करने का तो उसका अभ्यास योग हो जाएगा चेत सा इधर उधर जाए तो उसको घुमा फिरा के उसकी गहराई में अपने आत्मा परमात्मा की तरफ ले जाए जैसे बच्चा मां-बाप का होता है बच्चा स्कूल में है तो अपने मां-बाप का और दुकान में है तो मां-बाप का बाजार में ऐसी कौन सी क्षण है कि पुत्र पिता का नहीं है पत्नी पति की नहीं है वो डावर्स नहीं दिए तब तक तो पत्नी चाहे
कहीं हो पति की है ऐसे जीवात्मा चाहे कहीं हो लेकिन है परमात्मा का पिता और पुत्र का संबंध तो एक जन्म का है लेकिन जीवात्मा और परमात्मा का संबंध तो शाश्वत है हजार जन्म लाख जन्म द लाख जन्म नहीं नहीं शाश्वत है सनातन है इसीलिए बोलते सनातन सत्य का अनुभव कराने की विद्या जिस धर्म में उसको बोलते सनातन धर्म सनातन ध कुछ लोग बोलते सृष्टि 5000 वर्ष से कुछ बोलते 25000 वर्ष से कोई लोग बोलते 6 हज वर्ष से लेकिन सनातन धर्म कहता है कि सृष्टि अनादि काल से है अनादि काल से कहां से 6
हजार लाख दो लाख करोड़ दो करोड़ नहीं नहीं अनादि काल से आदि नहीं यहां से शुरू हुई नहीं अनादि काल से ईश्वर अनादि काल से है सृष्टि अनादि काल से है जीव अनादि काल से माया अनादि काल से लेकिन ये अनादि काल से है जब तक ईश्वर को जाना नहीं तब तक जीव जन्मता है मरता रहता है राम जी थे तभी आप हम थे श्री कृष्ण थे तभी आप हम थे लेकिन कौन से चोले में थे पता नहीं भगवान बुद्ध बोलते थे केहे भिक्षु को यह बड़ा दरिया समुद्र दिख रहा है समुद्र जैसा यह डम
दिख रहा है तलाव इस तलाव में जितना पानी उससे भी ज्यादा तुमने आंसू बहाए होंगे हर जन्म के आंसू कट्ठा कर दिया जाए तो यह तलाव से भी ज्यादा तुम्हारे आंसू हो सकते हैं और यह जो पहाड़ खड़ा है हिमालय जैसा बड़ा डूंगर खड़ा है तुमने जितने जन्म लिए और हर जन्म की हड्डी अगर कट्ठी करे तो यह डूंगर को भी छोटा बना दे इतनी बार तुम जन्मे और मरे हो तो अभी अपना कल्याण करो बार-बार जन्मे और बार-बार मरे बच्चे हुए खिलौने चाहिए जवान हुए तो यह चाहिए वह चाहिए बूढ़े हुए तो लाचारी अंत
में सब कमाया रखा जो कुछ यह वो करा सब छोड़ के मरना है सब छोड़ के मरे उसके पहले जिसका सब है उसके साथ दिल मिलाने वाला मंत्र दीक्षा मिल जाए गुरु की कृपा मिल जाए जाए मौत के सिर पर पैर रख के अमर यात्रा करने की कुंजी मिल जाए यह कर्तव्य है कि सभी को उसका फायदा उठाना चाहिए अनित्य शरीरा वैभव नैव शाश्वत नित्य सन्निहित मृत्यु कर्तव्य धर्म संग्रह संग्रह है कि अपने धर्म का संग्रह दो प्रकार का कर्तव्य होता है एक होता है हिक कर्तव्य आप पिता है तो पुत्र का भरण पोषण करो
आप पुत्र हो तो पिता की आज्ञा में रहो आप शिष्य है तो गुरु जी के चित्त को ठेस ना लगे ऐसा पवित्र धर्म युक्त व्यवहार करो आप पुत्र हैं तो पिता की आज्ञा और पिता का ख्याल रख के अपने निर्णय लो आप पति है तो पत्नी का ख्याल रखो पत्नी है तो पति का ख्याल रखो आप नेता है तो अपने इलाके के लोगों का ख्याल रखो और आप जनता है तो अच्छे नेता को वोट देने का ख्याल करो वोट का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए और वोट जरूर देना चाहिए हमारा कोई भी साधक अपना वोट देने
का काम नहीं छोड़े जरूर वोट देना चाहिए क्योंकि साधक वोट देगा तो अच्छे आदमी को तो पहचाने का साधक इसीलिए हमारा कई जगह पर प्रवचन में कहा गया है कि हमारे कोई भी साधक है मंत्र दीक्षित खुद तो वोट दें और अपने परिचित वाले से भी वोट दिलाए ताकि अच्छे लोगों की पसंदगी का कोई अच्छे आदमी आए जय राम जी की हालांकि सब नेता के दूध के धोए हुए नहीं है लेकिन फिर भी जो और नेताओं की अपेक्षा जो कम से कम सत्संगी है वो तो उसमें तो कुछ तो सद्गुण है तब तो सत्संग में
आता है कुछ तो अच्छा ही है भले 100 टच सोना नहीं है तो 90 टक से भी तो गरना बन जाएगा ऐसी टच से भी घरना बनाओ और क्या करो कृष्ण कन्हैया लाल की बाकी तो एक दूसरे के चुनाव में तो कई लोग एक दूसरे पर आरोप रखते रहते हैं न सत्संगी नेता होता तो जरा ठीक रहता है सत्संगी भाई हुए तो देखो पाच 25 भाइयों ने मिलकर कितना सुख शांति का पुण्य का आयोजन कर दिया तो अच्छे लोग जब किनारे करते कि बापू मैं राजनीति से नहीं आज बहुत खराब हो गया मामला में राजनीति
से हट जाता हूं तो अच्छे लोग और भी हट जाएंगे तो फिर मनस्वी लोग आ जाएंगे निगरे लोग आ जाएंगे इसलिए दे दमादम आज पछवा या कि मोटेरा में फलाना फलाना है बापू जी क नहीं नहीं वो भले चुनाव में आवे और जीत जाएगा उसको बोलो र रे पाची पानी नहीं करो कोई बैकवर्ड भक्त है उसने दे च मोटे आ जाएगा उसको हिम्मत करो आ जाएगा तो अच्छे आदमी को अपना कर्तव्य निभाने में अच्छाई उसको साथ देती है बुरे आदमी की आदत है तो कर्तव्य निभाएगा तो बुराई की तरफ का निभाएगा इसलिए संसार को भी
का संतुलन रखना है तो भगवान और देवता भी अच्छे लोगों को मदद करते हैं तो एक है संसारी कर्तव्य दूसरा होता है मुख्य कर्तव्य यह संसारी कर्तव्य अपना ऐसे ऐसा करना चाहिए ठीक है मुख्य कर्तव्य कि जीवात्मा जन्म जन्मों का पाप ताप मिटाकर अपने सच्चे सुख को पा ले सच्ची शांति को पा ले सच्चे शाश्वत रस को पाले ये मुख्य कर्तव्य तो दो कर्तव्य हुए एक हिक तव्य और दूसरा आत्मिक कर्तव्य एक कर्तव्य तो कितना ही निभालो आखिर जन्म और मरो और आत्मिक कर्तव्य एक बार निभा लिया तो फिर जन्म मरण से पार हो जाता
फिर तो आपका दर्शन करने वाले को जो फल होगा तीर्थ नाए एक फल संत मिले फल चार सतगुरु मिले अनंत फल कहत कबीर बचार तीर्थ दो प्रकार के होते हैं एक व तीर्थ होता है एक दूसरा जंगम तीर्थ होता है स्थावर तीर्थ उसको बोलते कि जो एक ही जगह पर है अब हरिद्वार का तीर्थ हरिद्वार में जाओगे तभी ना होगे अथवा तो गंगा सागर जाओगे गंगा में ना होगे अमुक जगह से गंगा बहती उधर जाओगे तभी ना होगे इसको स्थावर तीर्थ बोलते और दूसरा होता है सत्संग और संत जंगम तीर्थ चलते फिरते तीर्थ तो कभी
कभी स्थावर तीर्थ भी रूप बदलकर जंगम तीर्थों में नहाने को आते एकनाथ महाराज कथा करते हैं तो गोदावरी माता नारी का रूप लेकर सत्संग सुनने आ और और उच्च कोटि के संत सत्संग करते तो गंगा जी नारी का रूप लेकर उनके सत्संग में आते तो जंगम तीर्थ इतने महान होते कि स्थावर तीर्थ वान देवत्व का आश्रय लेकर उनके सत्संग में आते ये सत्संग महा तीर्थ है सत्संग महा पुण्य देता है सत्संग पाप नाशक औषधि है और भगवन नाम जप से कार्य साफल्यम् [संगीत] भगवतम पुण्यम आयु आरोग्य पुष्टि दम आयु आरोग्य पुष्टि दम श्रवण पठना तप
श्रवण पठना सर्व पापे ते सर्व पापे मु श्रीमद् भागवत की कथा अकाल मृत्यु को लती है आयु बढ़ाती है आरोग्य बढ़ाती है जैसे पलती मारकर भोजन करने वाले का पैर पलटी मारने के कारण उसके पैरों की ऊर्जा जठरा के तरफ बहती है अर्थात उसकी जठरा पलटी मार के भोजन करते हैं तो आमाशय को पुष्ट करती है पाचन तंत्र पुष्ट होता है आरोग्य के कण बढ़ाने में पलती मार के भोजन करना जितना हित कारक है उतना ही कुर्सी पर बैठकर भोजन करना हानिकारक है इसलिए आज कल देखो तो सब बीमार बीमार मोटापा कफ फलाना डिंगना ये
हो ऐसे ही भोजन के तुरंत स्नान करने वाला अथवा भोजन के तुरंत बाद स्नान करने वाले की मंदाग्नि हो जाती सुबह सूरज उगने के समय भी सोने वाले का प्रभाव और तेज और तंदुरुस्ती डाउन हो जाती संध्या के समय नींद करने वाले की लक्ष्मी और यश क्षीण हो जाती संध्या के समय सार व्यवहार करने वाले के बालक अगर हो गए तो विकलांग होते और स्वयं भी बीमार होता पूनम अमावस्या अष्टमी संसार व्यवहार करने से बालक विकलांग पैदा होते हैं तो इस प्रकार जो सामाजिक कर्तव्य है धार्मिक कर्तव्य उसको निभाते हुए जो आत्मिक कर्तव्य की तरफ
नजर रख लेते हैं उनके तो दोनों हाथ में लड्डू है यहां भी सुखी तंदुरुस्त और वहां भी भगवान मिले दाडी नहीं दाडी बाबा न बाबा कृष्ण कन्हैया लाल तो संसारी कर्तव्य निभाने के साथ-साथ जो मुख्य कर्तव्य निभाते उनका संसारी कर्तव्य भी अच्छा निता है [संगीत]