झाल कि अ मैं अभी चतुर्मास शुरू हो रहा है इस चतुर्मास में एक आदमी ने नमक का त्याग करने से आदमी स्वर्गीय अधिकारी हो जाता है स्वर्गीय सुख अवतार बाद में फिर उसकी साधना आगे चलती है ऐसा लिखा गया है कि चतुर्मास में पत्तल पर भोजन करने समझा उसने उपवासी किया है लेकिन ऐसा नहीं कि पत्तल पर भोजन किया तो बराबर था उसके खाएं नपा-तुला कर दो कि ब्रह्मचर्य का व्रत रखे चतुर्मास में तो आयु आरोग्य तेज बढ़ेगा तो कि जो लोग उपवास रखते भगवान का स्मरण करते दूसरे दिन देखो तो उनके चेहरे पर चमक
आएगी मनोबल बढ़ेगा शरीर में फुर्ती रहे हैं कि डॉक्टर ने कहा उपवास करो तो यह मजबूरी हो गई शरीर की मुख्यता गई लेकिन धर्म कहता हु वास् करो वहां भगवान के मुख्य गई चतुर्वेदी ठीक हो जाएगा उपवास से अ ए टॉप टेन में एक दिन चुन लो वास 15 दिन में एक दिन चुन लो एकादशी का उपवास वह जो बुलटें बड़ा चतुर मासिक कि सभी एकादशियों के उपवास करने और फिर कोई कमजोर बंदर आदमी है डायबिटीज से तो वह किशमिश कमजोरी में बने हैं को तुच्छ चतुर्मास में जो ब्रह्मचर्य वक्त लेता है 3 महीने काव्य
हाथ ऊपर करो जो छह महीने का ब्रह्मचर्य व्रत लेता है वह हाथ ऊपर कर छह महीने तक संयम रहेगा पति-पत्नी होते हुए भी सही 3 महीने का व्रत लेना हो तो मैं अभी 3 महीने का संकल्प कर आता हूं छह महीने का ब्रहमचर्य व्रत लेते हो तो हाथों पर करो छह महीने का करूंगा अगर कोई 12 महीने का व्रत लेना चाहता है वह हाथों पर करें तुम्हारा मैंने वाला 12 महीना बोलना मन में छह वाले छह बोलना तीन वाले कठिन बोलना हम्म अ आप कौन बोलो हम ए होम ओम ओम ओम कि तम नमामि हरिम
परम [संगीत] कि साबरमती अट मोटेरा ग्राम आसाराम बापू के आश्रम में दो कि आज हम संकल्प करते हैं मैं अपना अपना नाम मैं संकल्प करता हूं कि मैं संकल्पना फलाना फलाना पलानी पलानी आज से 3 महीने का छह महीने का 12 मैंने काजू भी जिसने लिया मुगलों ने कि मैं छह महीने कांति मैंने कहा फलाना फलाना ब्रह्मचर्य व्रत का संकल्प करते हैं यह में हमारा पूर्ण हो भगवान की प्रभाव सिर पर हाथ रखो कि आप दोनों हाथ जोड़ो ॐ अर्यमायै नमः ॐ अर्यमायै नमः ॐ अर्यमायै नमः ओम हरि ओम जी इतने संयम ब्रह्मचर्य मे है
कि अभी पितृलोक में वे शाश्वत सुख भोग रहे गीता में भगवान ने कहा कि पितरों में अर्यमा तो मेरा स्वरूप है जो जो संयमी और वह ज जहां ज्यादा रखता है वह भगवान ने कहा कि मेरा ही स्वरूप है ऐसे ही मुन्ना व्यास व मुनियों में राशि में पांडवों में धनंजय मैं हूं विषयों में कपिल ऋषि मैं हूं शब्दों में ओंकार में हूं गांव में कपिला गांव में हूं वृक्षों में पीपल वृक्ष में हूं तो जहां-जहां विश्नोई व हर्बल है वह भगवान वैसे तो सब मैं भगवान है सभा इश्वर है लेकिन झारखंड विशेष देखें तो
उस वस्तु की उस परिस्थिति की विशेषता नहीं है उस विशेषता में भगवान का विशेष पूज ा [संगीत] कि अ [संगीत]