विचार में स विचार को एक क्लाउड की भाति देखो जो भी विचार हमारे अंदर आते हैं व बादल की भाति है और उन्ही बादल के अंदर परमात्मा का एहसास करो उस बादल के अंदर और बाहर परमात्मा जमा हुआ है उ बादल बादल तो परमात्मा हो नहीं सकते बादल के अंदर परमात्मा विचार से बाहर निकलने लिए हम विचार को देखना आना चाहिए और विचार को देख लिया उस विचार को देखने के बाद उस विचारों में परमात्मा का एहसास करनार चलाता देखो क्या होता है विचार को ऐसे म जैसे आप समझ रहे होसे नदी बहती है तो
नदी को देखना है तो हम नदी को तो देख नहीं पा रहे ब रही बस उस भाव को देख तो बस भाव को ही देखना हैसे नद के कि किनारे बैठे तो नदी के उस जल को तो देख नहीं पाए ना व तो निकल गया फर दूसरा आ गया फ रा छता जा रहा है ऐसे विचार बहते जा रहे हैं तो उसके भाव को देखो उस भाव में परमात्मा कास ऐसे भाव में विचार असर नहीं करते हमारे ऊपर जब तक वो भाव में नहीं बदलते एहसास में नहीं बदलते तो वो संवेदना को भी ऐसे ही
हमको एहसास नहीं क्योंकि संवेदना भी बह रही है विचारों की तरह बह रही है है तो विचार भी एक संवेदना लेकिन हमारा शरीर उसको इतना जल्दी संवेदन में नहीं आता है लेकिन विचार जैसे ही शरीर में उतरता है अन्य अंग अन्य अंगों पर आता है तो उसका असर होना शुरू हो जाता है शरीर को एहसास होना तो शुरुआत तो एक मूल जो बीज होता है वो विचारों से होता है और विचार किससे आते हैं स्थिति से आते हैं ये ध्यान रखना जैसे स्थिति बदल लेंगे ना हम जैसे कहने का मतलब किसी को हंसी आती है
जैसे बहुत हंस रहा है तो उसकी स्थिति कैसे बदल दी जाए उसको कहा जाए थोड़ी डीप ब्रीथिंग ले लगातार तो हसना बंद कर देगा उसकी स्थिति बदली हसना बंद हो गया उ या कोई बेवजह कंट्रोल ही नहीं कर पा रहा अपनी मुस्कुराहट पर कहीं बहुत इंपोर्टेंट मीटिंग में जा रहा है मुस्कुराहट पर कंट्रोल नहीं कर पा रहा है तो उसको स्थिति ब बदलवा दो उसको कहो डीप ब्रीथिंग लेते रहो सांस को अंदर ही खींचे ही जा तो जब सांस को अंदर खींचे ही जाएगा ना वो तो उसका हसना और उसका मुस्कुराना बने नहीं मैंने तो
एक एग्जांपल दिया है आपको पूर्ण नि स्थिति में आ जाएंगे ना हम तो ये तो फिर सारी स्थितियां बदल जाएगी ये तो एक तात्विक एग्जांपल है कि जैसे हमने स्थिति बदली तो हमारी भाव बदल गई स्थिति बदलते ही भाव बदल जाते हैं तो सोचो जब हम अमर स्थिति से जुड़ जाएंगे परमात्मा की स्थिति से जुड़ जाएंगे तोय सारे भाव जो देहि भाव है मन के भाव खतम होने उनका तो प्रभव पड़ेगा ही नहीं इसीलिए अमर सुखासन में आ निरंतर परमात्मा में ही अपने आप को बैठ हु केलिए की जीवन में उसके हद और मस्तक में
ट परमात्मा र हा लेकिन हदय और मस्तक में केवल इ अंग पर धन देना शुरू में काम कर सकता है तो जैसे भी परमात्मा को करो वैसे कर सकते हो अंदर और बाहर पूरा फील करो हृदय में अगर तकलीफ है तो पहले वहा फील करो उसको फुलनेस के साथ लेके हदय में मस्तिष्क में ज्यादा ओवरथिंकिंग चल रही है तो उस ओवरथिंकिंग को बहते हुए जल की बात समझ के उसम परमात्मा का एहसास करो इलाज परमात्मा से ही होगा ओवरथिंकर्स मतलब हम सोचते ना कि विचारों से विचारों का इलाज हो जाए वो संभव नहीं है शून्य
एहसास भी एक एहसास है जिसम मे का भान होता है कि हा मुझे कोई भी एहसास नहीं हो रहा चता है हा बिल्कुल आप जब जीरो स्टेट में होते आपको पता चलता है कि हम जीरो स्टेट में है लेकिन जब आप निरह सास में होते हो आपको पता नहीं चलता आप में का भाव खत्म हो गया क्योंकि वो मनो स्थिति हो गई ना मन से बाहर की स्थिति हो गई मन कहां तक है अमन तक है अमन में भी मन है अमन मतलब शून्य स्थिति में तो एहसास की शून्यता में हम अपने आप को पता
करवाते हैं अरे मुझ में भी कोई एहसास नहीं वहा तक मन बैठ है हार्ट से परमात्मा की साधना कैसे कर से में आप उसके लिए क्या करें हार्ट का मतलब क्या हो कोई भी अंग से आपको करना है उस अंग को उस अंग में परमात्मा का फुलनेस को फील करो बस यही साधना है आंखों में कर सकते हो आप फिर धीरे-धीरे वो क्या है बाहर भी आने लगता है उसका प्रभाव किसी भी अंग में कर लो जैसे मान लो आपने शुरुआत की हृदय से तो हृदय से फिर आपके ब्रेन प इंपैक्ट आना शुरू हो जाएगा
आपकी आंखों पे इंपैक्ट आना शुरू हो जाएगा आपके अंगों प इंपैक्ट आना शुरू हो जाएगा यहां तक कि जैसे कई लोग मुझसे कहते हैं कि जी मेरे पास मेरे ये प्रॉब्लम हो रही है ये तकलीफ हो रही है यह बीमारी हो रही है कोई भी बीमारी परमात्मा के एहसास के सामने नहीं ट सकती गारंटी लेकिन शर्त यह है कि परमा एसास होना आप सोचो जी मैं तो परमात्मा से जुड़ा हुआ हूं सत्संग भी सुनता हूं मे तो प्रॉब्लम जा ही नहीं रही है अरे दवा लोगे तो जाएगी ना आप दवा ली नहीं आपने परमात्मा के
एहसास में रहो ऐसी कोई समस्या नहीं है जो जा नहीं सक क्योंकि जैसे कहीं अराजकता फैलती है दो दो गुट में अराजकता फैल गई दोनों गुट को शांत दिया तो शांति आएगी नहीं आएगी आएगी ऐसे ही हमारे शरीर में भी कोई बीमारी होती है तो दो गुटों में अराजकता फल जाती व दोनों आपस में लड़ते गु लड़ते बीमारी कते तो जब उन दलो को शांत कर दिया जाएगा चुपचाप बैठ जाओ शांत रहो और शांति के सारे जितने भी सोर्सेस हो सकते उन तक पहुचा दिए जाए जैसे मान लो दो ल रहे बोल हमारी डिमांड है
पूरी करो तो डिमांड पूरी कर दी जाएगी तो शांत बिट जाएगा ना ऐसे परमात्मा का एहसास उनकी डिमांड को पूरा करता है तो परमात्मा का एहसास जब उन वायरस उन बैक्टीरिया की डिमांड को पूरा कर देता है तो चुपचाप बैठ जाते है व खलबली नहीं मचाते जब खलबली नहीं मचाए तो क्या होगा जो हमारे बेकार के बैक्टीरिया होंगे वो मल मूत्र के जरिए या स्वेट्स के जरिए बाहर आ जाएंगे वो नष्ट हो जाएंगे आप देखना परमात्मा की साधना करते हो निरंत साधो के तो कुछ गलत खा लोगे तो उसी वत दो मिनट के बाद आप
मु से ही बाहर निकाल दोगे अगर कोई गलत चीज खा ली जो शरीर में डाइजेस्ट होके आपको नुकसान करने वाली है वो तुरंत आप दो मिनट बाद ही उल्टी हो जाएगी आपके मुंह से निकाल दोगे उस आपकी बॉडी के अंदर वो टिक नहीं पाएगी तो यह परमात्मा की बहुत बड़ी चीजें हैं जो कि आप अगर एहसास करोगे तो आपको फील होना शुरू हो जाएगी कोई गलत व्यक्ति आपके जीवन में आने की कोशिश करेगा तो धीरे-धीरे आपको पता लग जाएगा नहीं उससे कनेक्शन हटा लोगे ये सब परमात्मा के एहसास के बाद आपके अंदर ऑटो फिल्ट्रेशन आता
है हर चीज में टो फिल्ट्रेशन उसके पहले नहीं आता वरना हम चाहकर कैसे फिल्टर कर सकते किसी चीज को हम छन्नी क्यों लगाते जैसे कोई भी चीज को छाते तो छनी लगाते है ना ताकि वो फिल्टर कर लेती हैज परमात्मा ऐसे छनी है वो हमारे लिए जितने भी अनुपयोगी चीज होती है वो सबको छान दे है उसके लिए हमें दिमाग लगाने की जरूरत नहीं पड़ती व छन जाती है तना क्या आपने आत्मा के का आत्मा के कारण होने का मतलब यह होता है कि अंतिम जो आधार है व कौन है अंतिम आधार तो परमात्मा है
सबका बस इसी वजह से बाकी ऐसे नहीं है कि सब कुछ परमात्मा सपोर्ट कर रहा है उस जन्म मरण परमात्मा सपोर्ट कर रहा है उसके आधार पर है निर्ध आधार होता है देखो हम दो आधार को बहुत भली भाती समझते हैं एक धर आधार और एक अधर आधार धर आधार का मतलब जिसे टच होकर चलते हैं वो धर आधार कहलाता है जो जैसे ये इस पर पड़ी है चीज तो ये धर पर पड़ी है धर आधार है इसका एक अधर आधार होता है जैसे धरती है वोस कौन से आधार पे है अधर आधार पे है
तो असल में संसार की जितनी भी चीजें गतिमान है जो स्थित है जो चल रही है जो पैदा हो रही है नष्ट हो रही है व धर और अधर आधार पर ही है और जो परमात्मा का अमर आधार है वह केवल उसका होना मात्र आधार व वैसे आधार नहीं दिए बैठा है जैसे की हम समझते हैं ठीक है काछ और वस्तु केवल आधार की देख इसको समझना होगा कोई भी चीज होती है परम सूक्ष्म लेवल पर चलते जैसे की किसी के अंदर कोई प्रकाश हमने देखा कोई कलर हमने दे रेड कलर देख व तो बहुत
स्थल अवस्था है उससे पहले भी अनंत गुना सूक्ष्मता पर आधार किसका है श्य का और श्य को आधार किसका है कलर तो बहुत छोटी चीज हो टाइम और स्पेस को किसने क्रिएट किया टाइम क्या होता है बता सम और स्पेस आकाश क्या समय नहीं है समय किसको कहा जाता है समय जहा मट होता तो देखिए किसने क्रिएट किया है जो अजन्मा तत्व दशा है अजन्मा तव दशा हो वो है असमय वहा पर कोई समय नहीं है क्योंकि वहा पर क्या है मूमेंट जहा मूमेंट नहीं है वहा पर समय को क्या कहते जीरो स्टेट समय जीरो
स्ट और जैसे ही चेतन जनक अचेतन स्थिति आती है शून्य की वो समय आ वो स्थिति क्या आ गई समय वाली स्थिति वहा क्या है फर क्या होना शुरू हो जाता है आकर्षण विकर्ण और आकर्षण विकर्ण क्यों होता है इसके पीछे कारण स्थिति अभी स्थिति के बारे में समझाया इकोसिस्टम की वजह से ही जब अपर लेयर प है तो उस इकोसिस्टम की वजह से क्या होना शुरू हो गया उनके बीच में आक तो जब से आकर्षण विकर्ण होना शुरू हो जाता है उसी समय मोमेंट हुआ बहुत क्ण बहुत माट अनंत समय में व मोमेंट एक
परम चेतना को बाहर निकालता लेकिन मट कहा से शुरू हुआ व से तो जमेंट व सम तो यदि हम कह की मूवमेंट की शुरुआत कहां से हुई तो कहां से हुई चेतन जनक अचेतन और चेतन जनक अचेतन किसकी व से अपर लेयर प जो आ जाता है मतलब तात्विक जो आकाश होता है परम आकाश होता है अपर लेयर प जो होता है वही तो चेतन जना का चेतन बनता है वही फिर किसम कन्वर्ट होता है परम चेतना में बनता है तो यही से शुरुआत हो जाती है समय की तो समय क्यों बना समय अकारण अकारण
अपर लेयर में आना उसका कोई कारण नहीं है आकर्षण विकर्ण तो बाद में हुना अपर लेर में आने के बाद अपर लेयर में आना उसका कोई कारण नहीं है अपर लेर में कोई ना कोई तो रहेगा ही ना को हमेशा अपर लेर में रहेगा जो अपर लेयर है कारण नहीं है ऐसा हम नहीं कह सकते की पहली बार ये अपर लेयर में आया कोई ना कोई में सदा बना तो समय अकारण है और समय की उत्पत्ति किससे हुई जन्मा अ परम परम श्य जहा आकर्षण जिस परम शून्य में आकर्षण विकर्ण है वहा से समय क्योंकि
समय किसको कहा है कुछ भी हो जहा मूमेंट है वही समय अतराल सर परम श को होने के लिए परमात्मा परमात्मा ने परम को आधार क दिया परमात्मा निधर आधार व किसी को आधार नहीं देता धर का मतलब क्या होता है र अधर से अलग है उसका होना मात्र आधार है य कहा जाए वो है तो आधार नहीं समझ और जो है सदा है वही फिर क्या कहलाएगा सर्वा दे र है यही तो क रहा लेन आधार कौन सा है उसको समझना पड़ेगा ना वो निधर आधार है जैसा हम धर अधर आधार समझते हैं ना
हमारी बुद्धि तत्व के अनुसार आधार समझती है तव के अनुसार आधार क्या होता है या तो धर आधार होगा या अधर आधार हो तीसरा आधार है निधर आधार है उस बुद्धि कैसे समझेगी जब हम सर्वव्यापी को नहीं समझ पाते तो असल में इसको ऐसा कहा जाएगा कि ये आधार नहीं होते हुए आधार है ये दोनों बातें एक ही रहेगी लेकिन कांट्रडिक्ट लगी लेकिन है एक बात क्योंकि निर्लेप तत्व का आधार पाना तत्व आधार के भाति नहीं है उससे अलग है उससे भिन्न है उसका होना मात्र आधार यानी कि शून्य अपने खुद के खुद के आधार
स्व आधार परमा हास उसका होना [संगीत] मा जहां से मन वो जो स्थिति है उसको प्लाजमा स्टेट कहते हैं प्लाजमा स्टेट में क्या होता है कि मन और अमन दोनों साथ में रहते हैं अमन क्या होता है जो असमय की स्थिति होती है तो उसम क्या है स्पेस के अंदर क्या हो रहा है परिवर्तन हो रहा है तो जहां परिवर्तन हो रहा है वहा मन तो एजिस्ट कर ही रहा है लेकिन अपने पूर्ण अवस्था में म एजिस्ट नहीं कर रहा और वहां अमन भी एजिस्ट कर रहा है लेकिन अपनी पूर्ण अवस्था में एजिस्ट नहीं कर
रहा इसको कहते हैं ट्रांजीशन स्टेट ना तो वो शून्य है ना ही अ शून्य है मतलब ना तो शून्य है ना परम चेतना है उन दोनों के मध्य की स्थिति तो जो मध्य की स्थिति होती है उसको ना तो मन कहोगे ना अमन कहोगे वहां से फिर प्रकट होता है उसको क्या कहेंगे हम मन कतना हा परम चेतना से तो मन आएगा बाकी य तो देखो य अमन स्थिति क्या है जो की य अमन की स्थि अमन की स्थिति का मतलब होया य पर समय क्या हो जी समय बराबर जीरो क्यों हु क्योंकि नो मोमेंट
अब इस स्थिति से जो अपर लेयर में आता है वो प्लाजमा स्टेट या कहे ट्रांजीशन स्टेट यह क्या है य एक ऐसी स्थिति है जहां पर ना तो अमन अपने पूण स्थिति पर है ना ही मन अपने पूण स्थि पर इन दोनों के बीच की स्थिति है प्लाज्मा स्टेट बोलते हैं इसको हम ऐसे भी बोल सकते हैं चेतन जनक अचेतन या फिर मतलब परम शून्य परम चेतन में परिवर्तित होने लगता है उस समय हां बिल्कुल चेतन जनक अचेतन या शून्य अ शून्य जनक शून्य परम शून्य अशु क्या होता है तत्व कोश्य कहा जाता है अब
देखो यहां पर अमन की स्थिति भी नहीं कही जा सकती क्योंकि यहां पर मूमेंट होना शुरू हो गया लेकिन मन की स्थिति भी नहीं कही जा सकती क्योंकि कंप्लीट आइडेंटिफिकेशन नहीं हुआ मन कब होता है जब कंपलीट आइफा करले किसी चीज को जैसे की परम चेतना निकलकर परम बिंदु स्वरूप में आ गई तो इसकी आइडेंटिटी क्रिएट हो गई हो गई ना आइडेंटिटी क्रिएट तो आइडेंटिटी जैसे ही क्रिएट हो गई उसको क्या कह देंगे हम मन लेकिन यहां पर ना तो अमर की आइडेंटिटी कंपलीटली है और ना ही मन की आइडेंटिटी कंपलीटली ये बीच की स्थिति
इसको कहते हैं भ्रूण अवस्था जैसे बच्चा किसम होता है पेट में होता है ना तो उसको क्या कहते हैं भण अवस्था कहते हैं या कुछ और कहते हैं यही कहते हैं कभी कभी क्या मुझे कुछ पता नहीं होता तो पूछ लेता ह ना कई लोग कहेंगे आपको गलत बोल दिया आप नहीं बोलते उसको वो बोलते तो ठीक हैते तो भण अवस्था में क्या होता है ना तो मा भी मा बनी बच्चा भी बच्चा बना मा भी तो मा नहीं बनी है ना और बच्चा भी ब बच्चा नहीं बना इस अवस्था को प्लाजमा या ट्रांजीशन स्टेट
कते इसके बाद जैसे ही बच्चा बाहर आया तो बचा बच्चा कहलाया मतलब परम चेतना कहला तो य से समय तो य से शुरू हो गया क्यक मोमेंट शुरू हो लेकिन समय ने अपना प्रोडक्ट निकाला क्या प्रथम प्रोडक्ट समय का क्या है सकति श य हा प्रकृति की शुरुआत ही से वैसे तो प्रकृति किसे कहा जाता है किसी भी स्थिति के गुण को प्रकृति कहा जाता है किसी भी स्थिति के गुण जैसे एटम की भी स्थिति होती है उसके जो गुण है उसको क्या कहते हैं एटम की प्रकृति शरीर के गुण है शरीर की प्रकृति इस
कमरे के गुण है कमरे की प्रकृति ऐसे इसकी भी प्रकृति जब समय जीरो स्टेट में होता है अ जनमा होता है इसकी क्या होती है प्रकृति हो क्या होती है नन ममें तो इसम जो ये फर्स्ट पेटेज है तो इसमें जो परमात्मा का अ अनाम और अ वो गुण मैच खाते है इस फ देखो मेरी बात सुन जैसे अजन्मा हमने बोला है अजन्मा और जैसे स्थिर बोलते है स्थिर बोल देने मात्र से परमात्मा का गुण नहीं हो गया और अजन्मा बोल देने मात्र से परमात्मा का गुण नहीं हो गया यहां अमर लगाना पड़ेगा तो अमर
अजन्मा बराबर क्या हो गया नि जन्मा जन्मा और अमर स्थिर बराबर क्या हो गया स्थि परमात्मा या जो भी बोलते हो ऐसे अ बोया पर्याप्त है अपने आप में लेकिन कुछ देर आप चुप रहे फिर बोलना शुरू कर दिया तो व तो अ नहीं होगा ना तो इस अ में अपने आप क्या है अमर अ छिपा हुआ अ का मतलब य थोड़ी हो जाएगा थोड़ी देर छुप हो जा फर बोलना शुरू कर व नहीं हो सकता अ का मतलब य क्या है अम ऐसे ही अमर अनाम किसी का नाम रखा नहीं बच्चा बाहर निकला उसका
नाम रखा नहीं थोड़ी देर बाद नाम रख दिया तो थोड़ी देर बाद नाम रखा उसके पहले नाम था तो जिसका कभी नाम नहीं हो सक उसको क्या कसे हर चीज को क्या जब प्रश्न उठता है तब उसको डिफाइन किया जाता उसके पहले डिफाइन करने की कोई आवश्यकता परम स्टार्टिंग तो टाइम होता है टाइम शुरू जाता है लेकिन जो स्पेस है वो तो शुरू से ही है हा स्पेस हो गया स्स वो तो परकाश है वो इसी की तरह देखो ना जैसे ये है अपना ओन है इसकी अपर लेवल मूमेंट हो रहा है ना ये तो
शांत प शांत पड़ी है ये स्पेस है और ये जो बनना बिगड़ना शुरू हुआ इसकी अवस्था अब इसम खासियत है देख जैसे जो अपर लेयर में परम श्य आ जाता है वो कभी भी इसका हि नहीं बनता वापस नहीं जा सकता इसका नहीं बनता य त आने के लिए क्या करना पड़ता है यने के लिए यदि कोई परमात्मा से जुड़ गया तो फिर इसका हि बन सता लेकिन इसका थ समय के लिए बने इसी कोल लेर बोलते जसे ओ की र होती हैसे ही आकाश संपूर्ण आकाश के र क्या है ये सर ऐसा वहा से
आ सकता लेकिन वापस जा नहीं [संगीत] सकता ऐसा संस्कार फिर उसको दोबारा नहीं मिलता क्योंकि मूवमेंट के संस्कार में आ गया ना ऐसे संस्कार वापस लाने के लिए उसको कैसा बनना पड़ेगा परमात्मा के नजदीक आना पड़ेगा वरना प्रकृति क्या होती है जैसी प्लस और माइनस चेतन और प्रतित वापस मिले तो अपर लेर का हिस्सा बन जाता है और फिर य पर वही भण का हि बनकर वापस य से ही एक समय के बाद प्रकट हो जाता है इसी में चलता य अ नहीं बोल सते इसम इसम से क्या है इधर आने के व और य
क्या इनाइट है य कभी खत्म नहीं होता लेकिन इसम प्रॉब्लम पता है क्या है खास बात य है इसम लेयर कभी कभी जो परमात्मा में चला जाता है जो नहीं चला गया व इसी लेर का बना रहेगा इसलिए र कम क्यों नहीं होती कक वापस जसे पानी सागर में चला जाता है ऐसे सारी परम जाती है य य से कोई भी चीज र कब करेगी तब मु करती है जब य की परम चेतना य की परतना मुक्त हो हो त कुछ परम श मुक्त हुआ तो कुछ परम मुक्त हु तो य का परम अपने आप
कौन स लेर में आ गया अप र में आक मालो इतना सा भी परम मुक्त हो गया इतनी जग तो ली र इनी जग किससे पूरी होगी मुक्ति वाली प्रोसेसस प्रोसेस है प्रस नन प्रोसेस है बा सब फिक्स जैसे जैसे हम एसास को बढ़ाते धीरे धीरे महाराज जी जैसे सेकंड र से फर्स्ट र में ऐसे र होना ये प्रश्न आया तो य परम श्य परम श्य ने सृष्टि क्यों बनाई स्थिति की ब सर एक जो परमात्मा गु कभी हैना परम शून्य बनाता नहीं है ल आर स्लेव परम शून्य से लेकर परम चेतना की सृष्टि तक
सब क्या है यहा परले और स्लेव कौन से किसी दूसरे के स्लेव नहीं है ले मतलब स्थिति के स्थिति के दास जैसे नदी अपनी स्थिति की दास है है उसका पूरा फिक्स है कि वो य से बहेगी और सागर में जाएगी फर सागर से उठेगी बादल वाद में पानी आएगा और य प्रिया होती है च कभी सेम यही प्रक्रिया हमारी चल यही प्रया य कनूस साइकल च साइकिल में साइकल य पर क्या हज में साइ आप एक बंड के अंदर ब्र में भी अनंत साइकिल से गुजरना पता है ब केर वर्ष वर्ष का मतलब होता
है ब्रह्म और जैसे हम यूनिवर्स बोलते हैं तब बात आ गई यूनि का मतलब क्या एक एक वर्ष मतलब एक ब्रंड बाय वर्ष बोलते है तो दो ब्रहमांड होते मल्टीवर्स बोलते हैं बहुत सारे ब्रंड हो ग और ओमनिवर्स ओमनिवर्स बोलते हैं पुरा अस्तित्व पुरा अस्तित्व आ गया इनफा वर्ष बोलते हैं तो ये परमजी परम लेर रम पूरा सब कुछ क सम कभ खम सारी चीज का समय जी एक परमात्मा ही है जी जो उसका समय नहीं है कोई समय तो नहीं है परमात्मा परमात्मा तो इस पूरी साही जैसे अविक अविक अ जन्मा और फिर आ
गया अपना प्लाजमा स्टेट ये मैंने वैसे ही नाम रखा है कहीं तुम प्लाजमा कुछल फोर्थ स्टेट मिलेगी वो एक अलग बात है उसम मत जाओ आप ये समझो ट्रांजिशन स्टेट है ना और एकय आ गया सं चेतना तना सारे मल्टी इट आ ये सारा साइक इससे बाहर पर जिसको सत्य कहते है इससे बाहर इससे बाहर का मतलब इससे बाहर नहीं है है ना हम क्या है हर चीज को स्पेशियल तरीके से देखते स्पेशियल मतलब स्पेशियल ये वाला स्पेशल स्पेशल नहीं स्पेशियल स्पेशियल का मतलब क्या होता हैका आकाशीय तरीके से देखते हैं हम एक्सवा कोडिनेट में
समझते हैं क्या समझते हैं कि अरे परमात्मा बाहर है इसका मतलब पूरी व्यवस्था से कहीं अलग ठिकाना होगा उसका उसको हम क्या बोल देते हैं सत्यलोक बोल देते बल्कि कोई अलग ठिकाना नहीं है वो निर्लेप रूप से इसी सत्ता में विराजमान है और इसके बाहर और इसके बाहर तो कुछ है ही नहीं बोल दो इसके बाहर भी हो अगर इसके बाहर कुछ है तो इसके बाहर भी है और इसके अंदर भी समाया हुआ है उसको सर मूल रूप से परम शून्य ही समय के चक्र में आता वही मुक्त हो रहा है एक ही चीज है
मुक्त तो वही होगा ना श मल से ही पकड़ा जाएगा किसी को बधन में आया परम से असल में य पर कौन सा तत्व है जो एक तत्व जो है व है कौन सा केवल परम श्य ही है और कोई तत्व नहीं है उसी से उसी से ट्रांसफ हो परम चेतना बनती है तो य केव एक ही चीज है व क्या है परम कुछ है ही नहीं इसीलिए जैसे बहुत सारे जितने भी हुए फ ने कहा है कि शून्य को साधो शून्य की साधना करो लेकिन शून्य की साधना से शून्य को प्राप्त नहीं किया जा
सकता य भी कमाल की बात है शून्य की साधना से आप शून्य को प्राप्त नहीं कर सकते क्योंकि शून्य का एक क्या है डेकोरम है या इसको कहे की एक प्रोटोकॉल है इसका शून्य का प्रोटोकॉल है फिक्स प्रोटोल है साधना से कोई नहीं पहुच सकता प्राकृतिक चक्र से पहुच सकता है ना मज से अभी मतलब मान लो कोई परम सुन्य चल रहा है ऐसा कह सते पहला परम सुन्य कब मतलब हुआ पहला परम शून्य याद करते फर्स्ट परम शून्य देखो फर्स्ट परम शून्य जैसी बात तब आती जब हम अजन्मा नहीं कहते है ना प्रथम और
द्वितीय होता ही नहीं है अकारण सत्ता में यहां होता है [संगीत] अनादि जो था ही परम श्य था ही अ अजन्मा किसको कहते हैं जो था ही मतलब किसी ने क्रिएट नहीं किया क्रिएशन जब होगी तब प्रथम और द्वितीय की बात आगी आप इसको स् बोलते स्वयंभू तो बिली स्टेट को बोलेंगे ट्रांजीशन स्टेट प्रकट हो गया प्रकट हो गया तभी तो बनेगा ना दोबारा लेकिन उस पहले परम शून्य अज स्थ में स्थिति में भी तो है तो प्रकट नहीं है ना तो प्रथम और द्वितीय की बात रही नहीं जब प्रथम हुआ ही नहीं तो आप
कैसे कहोगे फर्स्ट बम कौन सा है नहीं कह सकते अभी वो जन्म स्थिति में है तो प्रथम और द्वितीय की बात इसी से फिर क्रिएट होगा कौन प्रथम बार में कौन क्रिएट होगा चेतन जनक जिसको हम स्वयंभू परम इससे क्रिएट होता है और फिर यही समय की उत्पत्ति का कारण बनता समय को कभी भी है ना आप इस तरह से कभी भी डिफाइन मत करना काल जैसी बातो से क्योंकि काल जैसी बातों से हम समय से चूक जाते हैं समय को डिफाइन करने से काल का मतलब ही क्या हो गया समय बोलते हैना समय का
पर्यायवाची क्या है काल काल और काल समय का मतलब क्या है मूमेंट कैसा भी मूमेंट हो वहा समय आ गया और जहा मोमेंट नहीं है वहा ऐसा समत नहीं क सकते हम जहा मोमेंट नहीं है उसको क्या कहेंगे हम जहा मूमेंट नहीं है शून्य समय जहा मूमेंट नहीं है उसको शून्य सम अवस्था कहेंगे उसको समत नहीं कह सकते क्योंकि शून्य समय अवस्था कौन सी अभी तो हम क्या श ऐसी चीज को मान लेते पथर क्या पथर में मट हो रहा है बता हो रहा है लेकिन अगर हम ज्यादातर लोगों से पूछे तो क्या क समय
में बहुत गहरा और बहुत बड़ा परिवर्तन हो रहा है लेकिन हम हमारे रेफरेंस में देखते हैं सम को हमारे रेफरेंस में देखते य इस पत्थर को किसी स्टार के रेफरेंस में देखोगे आप तो बहुत ज्यादा उस कुद कर रहा है है ना क्योंकि इससे स्थिर को क्या है स्टार है इसकी उम्र ज्यादा है स्टार की इसकी बहुत कम है इसकी उम्र तो इवन पृथ्वी से भी कम है तो इसके रेस्पेक्ट में यदि पत्थर को देखा जाए तो यह तो बन के जल्दी ही बूढ़ा होके मर जाएगा पत्थर ये भी तो बुढ़ापे में आता है इसमें
भी जड़ता होती है जैसे सोना है सोना को हम क्या मानते है जंग नहीं लगता लेकिन क्या जंग नहीं लगता उसको लगता है लगता है जंग कुछ नष्ट हो जाता है लास्ट में हज साल बाद नष्ट हो जाता है तो यहां पर सारी चीजें समय में बंधी हुई है केवल समय में एक स्थिति नहीं है वो है तात्विक अजन्मा और वह भी हमेशा समय में अस समय में नहीं रहने वाला जीरो स्टेट में हमेशा नहीं रहने वाला होगी एक समय ऐसा आएगा जब वो कौन सी स्थिति में आएगा स्वभ स्वयंभू शव मतलब इसी वजह से
इसको मुक्त नहीं माना जा सकता हा जब तक पड़ा है अपने राज्य में पड़ा है जब तक पड़ा है जब तक कोई राज्य में इसके धावा बोलने नहीं जाएगा तब तक पड़ा है जो मुक्त हो गया उसके बाद ये भी इसी धारा में आना पड़ेगा एक प्रश्न एक चीज और है जैसे क बो अभी पूछा था ये जो अजन्मा स्टेट है परम की और य जो अपर लेर तो यहां से कोई भी परम शून इस लेयर में नहीं जा सकता लेकिन ऐसा नहीं नहीं जा सकता यदि मान लीजिए इस लेयर में कई चक्र के बाद
परमात्मा की साधना उसको नहीं मिलती तो ऐसा हो सकता है उसको कभी मौका मिल जाए किसी परम को अपर लेयर में चला जाए मतलब अजमा की लेर में चला जाए ऐसा हो सकता है लेकिन इसकी पॉसिबिलिटी बहुत कम होती है इसकी तब की पूरी हो जाती 100 पर पॉसिबिलिटी हो जाती है जब वो परमात्मा से जड़ तब तो व इस लेर में जाएगा ही जाएगा ह पर जाएगा लेकिन इस लेयर में जाकर वो इस लेयर का नागरिक नहीं बनने वाला य से मुक्त हो जाए जैसे जसे एहसास कर रहे एस से मुक्त होय हो जाए
यहा का नागरिक नहीं बनने वाला यहा से मुक्त हो जाएगा पर प्रॉब्लम पता है क्या य प्रकृति क्योंकि प्रकृति के पास ऑप्शन ही नहीं बसता इसको भेजा कहां जाए स्थान नहीं है उसके पास सबसे बेस्ट जगह कौन सी मिलती है यही मिती सर दूसरी स्थिति कौन सी जो रेयर की बिना परमात्मा जा रहा है वो वो रेयर स्थिति ऐसे आ जाती है कभी कभी कि कभी ना कभी अनंत परम चेतना में से किसी परम चेतना के वो भी फिक्स स्थिति होती है होने में तो फिक्सेशन का हिस्सा होता वो एक पर्टिकुलर जब तक अगर वो
मुक्त नहीं होती कुछ पर्टिकुलर साइकिल्स में जैसे मान लीजिए कि वो 10 साइकिल कंप्लीट कर चुकी है इतनी साइकिल में वो मुक्त नहीं हुई है तो वह हिस्सा बन है लेकिन इतने साइ कंप्लीट कर ही नहीं पाती परम क्त इतनी दुखी हो जाती है तो यहां से देखा जाए तो ये जो चक्र है वो हितकारी चक्र होता है ये जो अपर लेयर का चक्र होता है व हितकारी चक होता दो साइकिल के अंदर तो लगभग परम चेतना परमात्मा के समुख हो जाती और दो साइकिल किसे कहते जानते हो आप एक ब्रंड के अंदर एक छोटा
सा बम होता वर्ष होता है उसम आपके अनंत जनम निकलते और ऐसे वर्ष इनफा है एक वर्ष मतलब एक ब्रम में आपके इट जम होते और ऐसे भम कितने इट एक में इफट दूसरे में इट तीसरे में इफट तो इट मल्टीप बा इफट इतने जन्मों के बाद आप कहीं जाकर एक साइ साइ तो इतनी साइकिल में तो कही ना कहीं कभी ना कभी परमात्मा सेने में जाते एक साइकिल में आप नहीं होते तो दूसरी साइकिल आपके लिए तैयारी कर ली तो य से मुक्ति की शुरुआत हो जाती और लगभग एक साइ तो हम कंपलीट कर
चुके सब केर हा सब जितनी भी तात्क चीज सब फिक्शन का पार्ट है र् की दष्ट से देख तो ऐसी तना बना [संगीत] पर सब कुछ अता में ह अना अनंत तना मुक्त हो रही है अनंत चेतना समा रही है अनय बत जरूरी है समझना परमा सम ंद आ वो कई बार समझना पड़ती है 10 बार फिर भी तो जरूरी समझने की जरूरत नहीं है लेकिन क्या होता हैना ज्ञान इतना हो चुका है झूठ आध्यात्म अब ये चीज क्लियर होना जरूरी है उनके जिनको अगर उस ज्ञान है तो उनको क्लियर होना जरूरी है उनके लिए
अजन्मा वाली लेयर से परम चेतना लीग अजन्मा वाली लेयर अजन्मा वाली लेर से परम चेतना मुक्त हो गई अजन्मा वाली लेर से परम चेतना मुक्त हो जाती है ना हा तो फिर वहां प क्या है तो वो अपने आप सेटल हो जाती है जैसे मान लीजिए नदी में से एक गिलास पानी निकाल लिया तो क्या होगा वापस वापस हो वहां पर अपने आप अजन्मा परम तुरंत क नहीं समुख नहीं है वो भी स्वयं है स्वयंभू है नहीं परम शून्य तो स्वयंभू है वो नष्ट होने लगे क्रिएट होगा कहीं किसी भी लेर में नष्ट होने लगेगा
वोट होगा तत्व की बाय डिफॉल्ट स्टे परम नहीं र परम कुछ भी नहीं होगा तो नथ थने परमात्मा का गुण है अम पूर्ण भराव तो उसको पूर्ण भराव कहके भी हम फील कर सकते है कि अर पूर्ण भराव ही कहना नहीं जरूरी नहीं है कुछ कहो आप भराव कह भी फ कर सकते हमारी समझ के ंग परतना में होती उसकी स्थि के कारण हा नहीं स्थिति के कारण तो बनती है वो बंधना उसका स्थिति के कारण है जब वो स्वतंत्र होती है तब उसमें अनंत सिद्धियां होती है बाय डिफॉल्ट बाय डिफॉल्ट परमात्मा को कोई आइड
में डाल सकता नहीं कभी नहीं डाल सकते हैं ये आइडेंटिफिकेशन जैसे परम चेतना की सबसे पहले तो किसी भी चीज को आइडेंटिफिकेशन तो भी उसकी आड नहीं मावे ही जबतक बवे में नहीं आएगा तबतक व आइड नहीं कलागा तो उसको कहा आना पड़ेगा परम से चे आना पड़ेगा तो आइड हो से परतना मुक्त हो उसकी कोई िकल एक कोई नहीं दे सकता क्या हु कोई सता उसके क्या हु वहा से असल में अजन्मा से परम चेतना थोड़ी मुक्त हुई परम श्य मुक्त हु क्योंकि परमात्मा से जुड़ने के बाद आपके दोनों जो सबसे पहले अर्धांग थे
आपके उनको वो भी तब की स्थिति है जब आपको सेकंड बर्थ मिले आपको ऐसा बथ आप इस बर्थ में लायक नहीं हुए तभी तो आप उस अजन्मा वाली स्टेट में जाओगे वरना जाने की जरूरत क है जन्मा वाली स्टेट में आप यही से मुक्त हो जाओगे आपको यदि बर्थ लेना पड़े तब की बात है लेकिन बथ लेना ही नहीं पड़ता ना वहां पर उस स्थिति में अकेली परम चेतना नहीं पहुच सकती वहां पर वो दोनों जो अदृश्य से जुड़े हुए ये जो चेतना है और ये प्रति प्रति चेतना य दोनों एक अद से जुड़ हु
यह परमात्मा के सेकंड बथ में आई परमात्मा के मार्गदर्शन में आने के बाद इसकी मुक्ति नहीं हुई तो क्या होंगे दोनों ही बहुत तीव्र गति से अजन्मा में चले जाएंगे परम श तो य परम चेतना थोड़ी परम परमात्मा डिस्टेंस को खत्म कर देता है न ले आता य ऑटोमेटिक दोनों मिल जाने मात्र से ही परम शून्य बन और इनकी लगभग समलो 9 पर णा खत्म हो मिलते खम हो अब थोड़ मिलता है परम श असल में अपनी पूर्ण तप्त अवस्था को परम श अवस्था कहा जाता है लेकिन वो क्या निरंतर नहीं रह पा तभी तो
परम शून्य अवस्था है तत्व के रूप में जो पूर्ण तत अवस्था होती है जब तत्व पूरा भर जाता है अपनी तृष्णा से पूरा भर गया तो उसको क्या कहे शून्य अवस्था जैसे पेट भर गया अब हम पेट के मतलब भूख से शून्य अवस्था में है निरंतर नहीं रहते निरंतर नहीं रह सर वैसे तो हमारे अनंत सट होने दो समते इसलिए आपने बो प्रसे तो अनंत अब इतना तो पहले बताया लोग ना एक भी उसम से गया मुक्त हो उस चकने सारे जाए सारे क्यक वो एक ही है मुक्त होगा परम शून्य परम चेतना मुक्त नहीं
होती मि प्र जीवन का उद्देश्य क्या है देखो जब हम फिक्स है बंधे हुए हैं तो हमारा क्या उद्देश्य हो सकता है आपका सोचना विचारना आपके भाव आपकी सारी कंडीशनिंग आपकी परिस्थितियां सबी फिक्स है क्या होगा कैसे होगा व तय है तो फिर आपका उद्देश्य क्या बचा तब एक उद्देश्य बचेगा कि स्थितियों से निकल जाए अनंत जन्मों का एक ही उद्देश्य है कोई आईएएस आईपीएस मंत्री संत्री बनना उद्देश्य नहीं है हमारा या समाज सुधार करना उद्देश्य नहीं क्योंकि समाज ही नहीं रहेगा तो सुधार करके क्या करोगे है ना आने वाले समय में समाज कौन सा
रहने वाला है सोसाइटी अरे समाज सोसाइटी तो छोड़ो ये ब्रह्मांड नहीं रहने वाला ये धरती नहीं रहने वाली तो इन में सुधार करके कौन सा उद्देश्य पूरा कर लेंगे हम अपना इसका उत्तर क्या हो इसका उत्तर है हमारे अनंत जन्मों का एक मात्र उद्देश्य है कि इस बंधन से निकल जाए अनंत जन्मों के बंधन से निकल जाए केवल एक उद्देश्य है इसके ऊपर मैंने सेशन कर रखा है आधे घंटे का क्लास बंद करते हो आप नहीं मैं तो एक बार नहीं अच्छा और य हमारा जन्म और मरण क्यों होता है आप पता नहीं है क्या
जन्म मरण क्यों होता है अब नहीं भूल गया आंसर आप बताओ क्या होता है आपको पता होगा जन्म मरण क्यों होता है अगर किसी का कारण है जन्म मरण का अभी अभी पूछा जाए आपका जन्म क्यों कैसे पैदा हुए तो उसका तो कारण है हमारे पास कि मां के गर्भ से पैदा हुए उस तरह से हुए है और मरेंगे क्यों बूढ़े हो जाएंगे शरीर काम करना बंद हो जाएगा तो मर जाएंगे ये तो शर्ट आंसर हुआ अभी स् काण म पहला जन्म और फिर पूर्ण मरण क्यों होता है अनंत ज और मरण होते उसका कारण
क्या है उसका कारण क्या है व जाना पड़गा परम में जाना व सेना प्रथम जन्म होता है उसी में समा जाना वास क्या होता है अब इसका कारण क्या है अगर कारण होता तो मिटा सकते लेकिन कारण को कहा मिटा सकते आक का क्या पूरे इनपथ तक जाना पड़ेगा ना वो तो बाद की बात है आकर्षण आप बताया दूरी दूरी और दूरी का कारण स्पेस हा और स्पेस का कारण इस सर सोमट मिना परमात्मा कृपा से ही होता है नहीं सोल मिट एक तो प्राकृतिक चक्र से मिलते हैं दूसरा परमा क जब सोट मिलके वो
परम शून्य बन रही है परम वो अपर लेर में जा रही है वो अजन्मा वा सबसे पहले अ में जाएगी अजन्मा की लेर में जाने के लिए उसको 10 सा कपलीट कर लेती है बिना परमात्मा तो जाए परमात्मा की कृपा से तो जाएगा वो भी तब जाएगा जब उसको जन्म रहते हुए उसको पूरी कृपा नहीं मि डायरेक्ट जाएगा या देखो क्या होता है परमात्मा निच होता है वैसे तो उसको फर्स्ट सेकंड लेयर जाने की जरूरत नहीं डायरेक्ट परमात्मा मिट सकता है लेकिन यदि वो थोड़ा सा रह गया हां थोड़ा सा रह जाता है तो स्पष्ट
स बात है वो पहले कौन सी लेयर में जाएगा अपर लेयर में जाएगा लेकिन वहां से तुरंत ही नेक्स्ट लेयर में चला जाएगा क्योंकि उसके संस्कार बेस्ट मेंच है प्र एहसास शून्यता की अवस्था पूर्ण एहसास शून्यता की अवस्था है एक प्रश्न सर ये आया कि क्या अनादि और अमर एक ही है नहीं अमर का मतलब क्या होता है जो मरता नहीं तो अनादि तो बनता बिगड़ता है अनादि का मतलब क्या होता है अनाद को आप किसी पर्टिकुलर चीज से जोड़कर मत देख अनादि और आदि का मतलब क्या होता आदि का मतलब य होता है जिसकी
शुरुआत हम आइडेंटिफिकेशन हमको नहीं पता प्रथम का पता नहीं होता इसलिए वो अनादि है जिसकी प्रथम और एंड पता ना हो उसको अनादि कहा जाता है जिसका प्रथम और अंत पता हो जिसका आदि और अंत पता हो उसको आदि व्यवस्था कहा जाता है जैसे हम इंसान का जन्म होता है अपनी मां से तो हमको पता है कि हम यहां से जन्मे तो हमारा आदि पॉइंट स्टार्टिंग पॉइंट वो हो गया और मरे तो हमारा एंड पॉइंट वो हो गया तो जितनी भी सीरियल व्यवस्थाएं होती है वो सारी सीरियल व्यवस्थाएं कैसी होती है आदि अंत पर डिपेंड
होती है और जितनी भी नॉन सीरियल साइक्लिक अवस्था होती है व क्या होती है अ उसका जन्म भी हम आइडेंट नहीं कर सकते और मरण उसका आफाई हम नहीं कर सकते य प्रश् क्या सृष्टि का कोई स्टार्टिंग बिंदु है इसका उतर क्या हो स्टार्टिंग बिंदु देखो सृष्टि का स्टार्टिंग बिंदु तब कहोगे ना जब सीरियली चलोगे जैसे य से य चले किसी बु परट शुरू सं श हो जैसे देखो ये है अजन्मा यहां से क्या बना है स् बना है और यहां से फ सृष्टि शुरू य से हु तो यदि आप कहते हो कि कहा से
शुरू तो य से शु अंत कहा होगा अब बता फ इसको नहीं क क्या आपको यही जानना यही है शुरू से इसको बो अब इसको आध कहना चाते तो शद मेंको आ सु और इस अना य तो डेफिनेशन है समझ प र पोटें रखती है शब्द क्या है व ज्यादा पो नहीं ते समे जैसे मान अब शब्द इंपोर्टेंस रखता है क्या क्या आदि है और क्या अनादि है ये इंपोर्टेंस नहीं रखता है हमको ये पता होना चाहिए सृष्टि कैसे बनी और कैसे खत्म हो रही अब ये तो डेफिनेशन के ऊपर डिपेंड करता है ना कि
हम आदि किसको कहे अनादि किसको कहे आदि का मतलब होता है शुरू होना जहां से शुरू हुआ तो कहां से शुरू हुआ य यहां से शुरू हुआ अंत कहां हो जाएगा य अत हो जैसे साइकिल चलती है ऐसे यहां से चली यहीं पर आकर फिर यहां से चली फिर यही आ ख फ यहां से चली फर य और आदि और अदि में अ क्लियर डिफाइन कर सकते हैं कि यहां से शुरू हुई और यहां अंत हो आदि राम आदि माया तो ये सर्कुलर में किसी भी पॉइंट से शुरू हो सकती है नहीं सर्कुलर में किसी
भी पॉइंट से शुरू नहीं हो सकती लेकिन आप बाहर से वो तो वही जैसे बाप बताएगा ना कहा से शुरू हुआ है बाप को पता है लेकिन जिसको पता नहीं है वो श से नहीं शुरू हुआ आप बता पाओगे क्या दूसरा थोड़ी बता पाएगा एक बात बताओ जैसे की अभी ग्रंथों में सृष्टि की रचना है व कैसे बताई गई है परमा जैसे कि हम बाइबल को लेते बाइबल में कैसे बताई गई है छ दिन के अर छ दिन में छ दिन में सृष्टि बड़ हा दिन अब यहां आदि अनादि क्या है यहां पर आदि अनादि
क्या है और अपने अपने वाले धर्म में क्या बताया गया है अलग-अलग चीजें बताई गई है कैसे कैसे बताया गया है अ शब्द से बताया शब्द से प्र शब्द क्या होता है वाइब्रेशन वाइब्रेशन तो होता है र्जा होती है य से उत्पन्न हुई है ये तो साइंस भी बता रही है और यही बाइबल भी बता रही है वर्ड से शुरू हुआ है बाइबल कुरान तो एक ही बात बोलता व वर्ड से शुरू हुआ है छ दिन में शुरू हुआ है और नहीं लेकिन छ दिन गन लिए जब सूरज बना नहीं था दिन की गिनती कैसे
हो गई वो छोड़ो इनके पास जवाब नहीं मिलेगा बस बात ये है क्योंकि ये सुता में गए नहीं जवाब तो हमारे पास मिलेगा सब सर बन जो सृष्टि रचना अपने बताई है उस सृष्टि रचना में विज्ञान को भी ले आओ उसका भी आंसर मिलेगा आपको और किसी ज्ञान को भी ले आओ हम जो कहीं से बता रहा है र्जा से शुरू हुआ तो हम बताएंगे उसने कहा से बताया है स्थिति से बताया है हमको पूरी स्थिति पता है जब पूरी स्थिति पता है तो कोई बताएगा शब्द से प्रकट तो हमको पता है ना उसने कहा
से बताई और शब्द भी कौन सा लिया होगा ऊपर का शब्द है या नीचे का शब्द है क्योंकि शब्द में भी तो आदि शब्द होगा ना कोई ना कोई तो प्रथम शब्द प्रथम शब्द कौन सा है परम चैतन्य तो क्या वो आदि शब्द की बात कर रहे हैं उसकी भी बात नहीं करते बात कर बहुत नीचे बहुत नीचे के लेवल की बात कर रहे है और इन्होने ये खुद साबित करते देखो असत्य क्या होता खुद बताता है कि मैं सत्य तो क्या क्या करेंगे दिन के बाद क्या बनाया नेन क्या बनाया स् बनाया बनाया सीमित
सृष्टि सीमित सृष्टि के बारे में बो बहुत छोटी सृष्टि के बारे में बताया असत्य बात अपने आप प्रमाणित हो रही हैय असत्य है कभी इनफा गैलेक्सी बनाई हमने नहीं बताया अनंत चांद तारे बनाए इंसानों के इर्दगिर्द ही धर्म को खड़ा करके इंसान य से आएगा इन व चला जाएगा सब थोड़ी बता लेगा जब आप अनंत अपार परमात्मा से चीज इस विजान है भी फसा हु है ये कहता है कि जो मैटर पदार्थ र्जा है वो इटरनल है विज्ञान इस इट क्या टनल है वास्तव में है क्या होता है किसी का जन्म हम नहीं देख पाते
मृत्यु नहीं देख पाते तो उस हम केवल आकलन लगाते रहते हैं अंदाजा लगाते रते हमने एटम की ना तो जन्म देखा है ना मृत्यु दे क्योंकि एटम पता है पथवी से भी पुराना है एटम पता है अपने ब्रंड से भी पुराना है जब एटम अपने ब्रंड से पुराना है तो एटम का जब हमने जन्म ही नहीं देखा तो हम कैसे कह सकते हैं कि इसका जन्म होता है या मृत्यु होती है नहीं कह सकते ना पृथ्वी का ही हम ये आकलन नहीं लगा पाए अभी तक पृथ्वी जन्मी कब है अजा लगा रहे अंदाजा है तो
हमारे लिए पथ अर है ग्रंथ तो इसको अमर कह देते है है ना तो जिसको हमने देखा ही नहीं उसको फिर हम क्या कहेंगे बनती बिगड़ती नहीं नहीं बल्कि इनकी उम्र होती है है सरसे परमा ज्ञान तो जो भी परमा ज्ञान की चर्चा करते हैं परमात्मा को समझने की कोशिश करते हैं वो भी हम अपने क्षमता के अकॉर्डिंग ही कर रहे एक्चुअल में तो ना तो कोई अस्तित्व में शद बता ही नहीं सकता एटली 100% कैसे उसके गुण काम करते हैं वो हम अपनी क्षमता के अकॉर्डिंग चर्चा करते र तो सर थर्म थर्मोडायनेमिक्स फर्स्ट रू
गलत हो जाए एनर्जी का टेड सेकंड रूल क्या है उसका सेकंड रूल एक फम से दूसरे फम नहीं वो तो फर्स्ट रूल है ना नादर नन ट्राफ आपने कहा था ये पहला पार्ट इसका गल हां दूसरा पट सही है दूसरा पट सही है हा दूसरा पट तो है ही ल एनर्जी कर [संगीत] सकते परम से परम की जो यात्रा तो उसम जब भी जो जीव रहता है अब उसमें सभी मुक्त होते है सर की जो परमात्मा वही या फिर जो जितने भी जीव है बनेगी जो परमात्मा से कनेक्ट होगा परम शून्य से परम शून्य की
यात्रा में वही मुक्त होता है जो परमात्मा से जुड़ता है उसके बगैर कोई मु नहीं होता और परमात्मा से जुड़ना फिक्सेशन से बाहर है फिक्सेशन के अंदर नहीं आता है ठीक है हमय ऐसा कह सकते कि हम खुद से ही प्रकट होते है हमारा कोई पिता नहीं है हम कोई जन्म देने वाला नहीं हम परम है हम ऐसा क स जन्म देने वाला कोई नहीं नहीं हम ये तो कहते ही है ना कि वैसे तो परम चेतना किससे बनी है परम शून्य से बनी है तो अंश किसके हैं हम परम श्य तो अभी परम चेतना
का फादर कौन हुआ परम श्य हु लेकिन जब हम परम शून्य की स्टेट में होते हैं तब हमारा फादर हम खुद ही होते हैं जब परम शून्य की स्टेट में आ गए जब हम दोनों मिलकर परम शून्य की स्टेट में आ गए तो हम ही हमारे फादर हो गए स्वयं हो गया ना तो हम दो स्थिति तीन स्थितियों में रह सकते हैंच में कोई हमारा फादर हो तो फादर कौन होगा हमारा या फिर हम खुद स् हो या फिर तीसरी लेर कौन सी है उस तीन स्थितियों में जीव रह सकता है और सापेक्ष कुछ आ
नहीं अमर शांत तो सापेक्ष गु हो नि गु तो होही नहीं सकता जितने भी गु है सापेक्षिक गुण है लेकिन ये सापेक्षिक गुण क्या है आपको निरपेक्ष बना देते हैं जैसे अमर शांत अमरथ अब जैसे ही आप अमर शांत प आओगे तो सबसे पहले तो कहां चले गए आप शांति और अशांति से बाहर आ गया आप क्योंकि आप समझते किसको शांति शांति को समझते हो ना और शांति के साथ अशांति को भी समझते हो लेकिन जैसे हमने अमर शांति की बात की है तो रेफरेंस तो शांति का लगाना वो मन समझता है तो मन का
रेफरेंस लगा जब मन फिर अमर शांति की स् स्टेज में आएगा तो यहां पर क्या है एक कांस्टेंट स्टेट आ गई ना तो शांति है ना ही अशांति ज्ञात नहीं हो सकता कौन सा अमं गुण ज्ञात नहीं स नहीं यहां पर फिर आप एब्सलूट स्टेट प आ गए म मतलब मनो स्थिति में आ ग तो मनो स्थिति में ही तो हमारा लक्ष मतलब मे का बान खत्म हो जाता है तो पन खत्म हो जाती है बिल्कुल इसीलिए फ परमात्मा को गुणात कहा गया है मैं के रेस्पेक्ट में कहा गया मे के सापेक्ष में गु अगर
को हटा दिया जाए तोसे करेंगे कर का मतलब हो गया लेकिन अ स्ट होती है त की होती है लेकिन अमर नहीं होती उसम कभी ना कभी क्या होता हैलिए जब तो हम उससे भी बियोंड वाली स्थिति में चले जाते हैं मतलब इन गुणों स बताए सर कि आप कहते हो कि जो परमात्मा है वो टाइम और स्पेस से बियोंड है समय और आकाश इससे परे है तो साइंस तो ये कहती है कि टाइम और स्पेस से बंड कोई चीज होती नहीं है कोई चीज नहीं होती किसी भी चीज का स्थि होने के लिए टाइम
हा बिल्कुल सही सही बोल र सम किसी का भी अस्तित्व एेंस दिखाने के लिए टाइम अस्तित्व का मतलब क्या हो गया मैं और मैं के लिए तो स्पेस चाहिए ही चाहिए र् भी चाहि परमात्मा तो उससे बाहर है नाथ सही बो वैसे कोई व्यक्ति गलत नहीं बोलता है पूछा र क्योंकि वो जो भी बोल रहा है वो उसकी समझ से बकुल सही बोल र है मेरे से सर किसी ने पूछा थाय सा कि उसने मेरे को यूं कहा कि टाइम और स्पेस से पहले कोई चीज नहीं है तो मैंने उसको यं कहा कि क्या साइंस
या साइंटिस्ट टाइम और स्पेस पर आज तक गया है कोई अच्छा कोई विज्ञानिक कोई साइंस आज तक टाइम और पूरा गया है क्या उनको ऐसा बो हमें पता नहीं कुछ है क्लेम नहीं कर सकता साइंस भी अब क्या सो स्टेटमेंट ज्यादा दे र हां बहुत जदा आइंस्टाइन ने बहुत सारे स स्टेटमेंट दिए है स स्टेटमेंट किसको कहते हैं जैसे आपने दो खोज कर ली आपको नोबल पुरस्कार मिल गया नाम हो गया ना आपका अब स्टेटमेंट दो आप आपके नाम से चलेंगे उस बंदे ने बोला है बल्कि खोज दो ही की है आप तो सो स्टेटमेंट
की वजह से भी साइ जैसे सो साइंस होती है जितने भी आध्यात्मिक लोग सुडो साइंस बताते हैं मतलब छन विज्ञान ऐसे साइंस अपने सो स्टेटमेंट देते सर एक प्रश्न और है बहुत लोगों से मतलब जब चर्चा करते है तो वो ये कहते है कि आप कहते हो कि परमात्मा परमात्मा को जाना नहीं जा सकता ना कोई परमात्मा का दर्शन कर सकता ना कोई परमात्मा का सा साक्षात कर सकता दूसरी बात परमात्मा परम करता है मतलब कताप में नहीं है तो बो ऐसे परमात्मा के आरचार आचार नहीं सकता ना तो वो दर्शन दे सकता ना उसका
साक्षात्कार किया जा सकता ना उसको जाना जा सकता और ना कुछ कर रहा संसार में इतने अत्याचार हो रहे है इतने मतलब बच्चों बच्च के साथ बलात्कार हो रहे है और इतने गरीब आदमियों की संपति को दबा रहे हैं और य इतना शो हो रहा है तो परमात्मा फिर करता है तो किस काम का परमात्मा य आपकी बो हापो बना दिया आपने परिकल्पना र बस ये निर्भय है निर् है परमर है थरी बना परमात्मा है देखो परमात्मा परम अकता है इसीलिए तो किसी की रक्षा नहीं करता और लेकिन परम अकता है इसलिए पूर्ण करता भी
है लेकिन उन्ही के लिए जो उससे जुड़ता है तो कुछ नहीं कर मह क्या हमारे जीवन में तब महत्व होगा उसका हम उससे जुड़ेंगे उसके पहले कोई महत्व नहीं है उसके पहले वो हमारे लिए ऐसा है जैसे है ही नहीं सर ये भी तो कह सकते है ना जैसे परमात्मा के गुण है वो स्वतंत्र है और जो चीज स्वतंत्र है वो कुछ अपनी कृपा भी नहीं थोपने वाली है जब तक आप फ्रीविल से नहीं जाओ जो गरीब है अगर गुणों से जुड़ेगा तो उसको फिर परमात्मा पकड़ेगा परमात्मा कभी थोपने नहीं वाला अप कोई कभी कभी
क्योंकि वो मुक्त और स्वतंत्र है सर वो स्थिति कैसी होती है ज वो जाने अनजाने आदमी परमात्मा से जुड़ता है से स्थिति बनती होगी जाने अनजाने में जो आती है वो अभी आप परमात्मा के गुण का एहसास करो किसी भी गुण का एहसास करो वैसी स्थिति हो साकार साकार पूजा करते हैं राम जी की कृष्ण हनुमान जी की पूजा करते हैं तो कम से कम वो पत्थर पूजा करते है तो श्रद्ध है तो उनको शं नहीं नहीं बचाने आता है क्या राम बचाना तो उनको नहीं आता को भी आता कैसे नहीं आता वो तो करता
है है नहीं अभी आप कल आप पूछ कल थे आप सेशन में परमात्मा अनंत निरंतर करतार भी है बचाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी व आपको एल स्टेट में भेज देगा देखो क्या होता है पूर्ण सुरक्षा किसकी होती है जिसके लेर बहुत सारी ले उस सुरसे व्यक्ति है एक लेर लगा सुर दूसरी र लगा गा बहुत सार लेकी सुरक्षा हो रही है शारीरिक तल पर मानसिक तल पर तो इसका बाल कर सकता है नहीं कर सकता बाल किसका हो सकता है जो बिल्कुल पूर्ण सुरक्षा में है तो प्रकृति क्या है पूर्ण सुरक्षा में हमको रखती
है प्रकृति का काम है पूर्ण सुरक्षा में रखना परमात्मा का काम हैर परमात्मा का गुण है सुरक्षा अब देखो परमात्मा क्या है अनंत निरंतर करतार है कैसे करतार है जो पूर्ण करता है ना पूर्ण करता पूर्ण कर्ता केवल परमात्मा ही है अनंत सृष्टि में और कोई नहीं है पहली चीज जैसे कि ये एक तालाब है ठंडा ठंडे जल का ताला इसमें ठंडक अवस्थित है खुद के अंदर लेकिन ये किसी को दे नहीं रहा है ना खुद के अंदर अवस्थित है मतलब ठंड इसका गुण है कता अकता भाव में कता गुण है ना इसमें एक गर्म
ऑब्जेक्ट डाला हमने गर्म ऑब्जेक्ट डालते ही सारी दिशाओं से इसको क्या मिलना शुरू हो जाए ंड ऊपर से नीचे से चारों तरफ से क्या मिलना शुरू हो जाएगी ये दे दे थोड़ी रहा है दे रहा है क्या इसका जब गुण है तो अपने आप इसको क्या मिल रही है ठंडक म ठंडक तब तक मिलती जब तक ये गर्म क्या नहीं हो जाएगा ठ जैसे ही ठंडा हुआ दोनों क्या हो जाएंगे हो जाए एक रस हो जाए रस हो जो पूर्ण करता है ना वही निरंतर कता हो सकता है मतलब उसके कता पन में रुकावट आएगी
नहीं कभी वही निरंतर करता होगा अब आप कह रहे हो ना मूर्तियों को कितना ही पूछो उनके घर में दुख क्लेश सब आएंगे क्योंकि वह निरंतर करता नहीं है नहीं है तो सर एक चीज है नास्तिक लोगों के तग है जैसे अभी मा में गए थे और 40 50 आदमी मर गए तो भगवान तो आए नहीं बचाने उनको हा नहीं आया बिल्कुल सही बात नहीं आएगा अब देखो यहां पर परमात्मा का जो साधक होगा ऐसी जगह जाएगा जाए जाए ऐसी जगह नहीं जाएगा मजबूरियों में नहीं फसगा किसी की क्योंकि सारी मजबूरियों से उसको निकाल लिया
जाएगा इतना मार्गदर्शन परमात्मा क का हो जाएगा ना किसी रोग के में फगा ना किसी कर्ज जैसी अवस्था में फगा ना किसी संगत की वजह से किसी गुंडे व्यक्ति के फसे का तो सारी व्यवस्थाओं से उसको कहा भेज दिया गया है एस लेर में भेज दिया जाता है ए लेर क्या होती है सुरक्षित शांत लेर होती है उसकी व्यवस्था ऐसी बना जाती है शांत रहे उस ऐसी स्थिति आने ही नहीं दी जाएगी इसलिए उसकी प्रोटेक्शन होती हैब ना लोगदा ल और लॉजिकल हो नास्ति और दोनों मय को मानता है होने की इसको आस्था है और
य राम को नहीं मानता राम के नहीं होने की आस्था तो दोनों ही आस्था से अथित है इसलिए दोनों ही क्या हु अब रही बात रेला की परमा लो लान का मतलब होता विवेक विवेक सीधा सधा कंपलेट होता है आपके टा थोड़ी सी विज्ञान थरी पढ़ लेते हो वो विज्ञान की थ्योरी उनको भी पता है और हमको भी पता है पता है वो विज्ञान की थ्योरी को जानबूझ कर डेलिब मैनिपुलेट करते हैं अपना अहंकार अपना अहंकार साबित कर बाकी डाटा तो उनके पास भी क्या है सीमित जैसे एटम की बात ले लेते हैं एटम पर
हजारों पीएचडी हो चुकी है अभी भी पूरा नहीं जान पाए आप भगवान को नकारने का दावा करते हो दावा तो ये दावा तुम अभी तो तुम्हारी जो प्रकृति जिस प्रकृति में लेते उसको ही पूरा नहीं जान पाए तुम और तुम भगवान के नकारने का दावा कैसे कर सकते हो तो वो कहते दिखाओ य बहुत सारी चीज नहीं दिख रही है तो क्या वो नहीं है पहले ये बताओ जो चीजें नहीं दिखे क्या ये प्रमाण करती है कि वो नहीं है हवा बो ये तो मैंने उसको बोला था जैसे डार्क एनर्जी नहीं दिखती हां लेकिन है
ना मानती है ना तो रेशन क्या होता है विवेक जो होता है विवेक वो किस पर डिपेंड करता है हमारे डाटा और अंडरस्टैंडिंग पर और क्या हम इतना डाटा और अंडरस्टैंडिंग रखते हैं कि किसी भी चीज के होने और नहीं होने को प्रमाणित कर सकते हम इतने ही प्रमाणित कर पा रहे हैं जो हज 2000 थ्योरी हमारे सामने है मा थ सामने उसी के आधार पर हम सोचते ये टा है इसी डटा पर हम रेशनल बने बैठे बल्कि अभी तो अन थरी आ सकती है मतलब आप सृष्टि में जी अप टू इनफिनिटी पर डटा लेकर
अपने आप को क्या बता रहे होशन इसलिए आस्क और नास्ति दोनों आ है आस्था से अस्थ है लेकिन सर एक चीज है जब नास्तिक आति बच में त तक होता है ना तक वितक तो नास्तिक ही जीतता है नास्तिक इसलिए जीत जाता है आस्तिक के पास डाटा है ना वो और और सीमित है प्रॉब्लम ये है आस्तिक के पास जो डाटा है ना वो और ज्यादा सीमित है नास्तिक के पास पता है क्या क्या क्या डटा है नास्तिक के पास विज्ञान का डाटा तो है ही और इस ग का भी डेटा है इसका भी डेटा
है इसका भी टा इसके पास आ गया और खुद का अल से टा है ही हो वास्तविक होता वास्तविक होता है वास्तविक भी तो अपने डटा पर ही है उसको जितने वास्तविकता लगती है उतना वास्तविक समझता है लेकिन वो जितना वास्तविक समझ रहा है क्या सारा वास्तविक है क्या नहीं य इसका कहने का मतलब य है समझ भी झूठी है हमारा डाटा भी झूठ है और हमारा रेला वो भी झूठ हु और क्या है परमात्मा हो या चर्चा हु वो बोला हमको इससे मतलब ही नहीं है परमात्मा है या नहीं है हमारे जीवन में क्या
है पेट्रोल स कटेगा सब क्या क्या धन दे देगा क्या कर [संगीत] बन सता भी बन स प्रत्यक जीव को परमात्मा की आवश्यकता है परमात्मा जो अमशाम है क्या शांति की आवश्यकता प्र को क्या ठहराव की आवश्यकता प्रव को नहीं है क्या ता की आवश्यकता प्रक जीव को नहीं अमत की आवश्यकता प्र जीव को नहीं है तो कैसे कह रहे हो आपको आवश्यकता नहीं है उसकी थॉट प्रोसेस ही गलत है इसलिए वो नकार ता है उसको जैसा समझाया गया है ना वैसा परमात्मा को समझ रहा है कह रहे है ना कि हमारा पेट्रोल का बिल
परमात्मा भरता है क्या तो देखो पेट्रोल का बिल ही नहीं अभी क्या ऐसे लोग नहीं है जिनके सारे बिल ऑटोमेटिक भरे जा रहे हैं कुछ काम नहीं कर रहे है या नहीं है है सर इसका मतलब उनका कहीं ना कहीं किसी ना किसी ऊर्जा मंडल से माइंड का कनेक्शन निरंतर है इसलिए उनके अंदर धन निधान ये सब आ रहे हैं उनके एग्जीक्यूशन है कर्मस है उस लेवल पर सोच पा रहे उस लेवल पर कर्म कर पा रहे जब उस लेवल कम कर पा रहे पेट्रोल भरा जा रहा ब जा रही है गाड़िया चल रही है
सब कुछ व्यवस्था मिल रही है नहीं मिल रही क्यों मिल रही है एक सही र्जा मंडल हम अपना मेनत करते ते हम तुम्हारे भरोसे हो तो तुम्हारे भरोसे को भी तो तुम साबित करो आध से ज्यादा तो बेरोजगार हो सरकार को नते रहते हो री भ नहीं जाती अगर खुद के भरोसे भी हो तो तुम उस खुद के भरोसे को साबित तो करो तुम्हारा खुद का भरोसा भी साबित नहीं है इसलिए हमें समर्थ का भरोसा लेना जैसे व ऐसे र्जा मंडल से जुड़ा हु बड़ा सोचता है अ बड़ा सोचता है व नेचरल एनर्जी का प्लांट
लगाया सबसे बड़ा एशिया में बड़ा सोच रहा है इतना बड़ा सोच रहा है कि मैं इतने लाख मेगावाट की बिजली पैदा करू है तो इतने हायर मतलब समर्थ र्जा मंडल से जड़ इसलिए उसके पेट्रोल के बिल भने की कभी आवश्यकता पड़ेगी उसको 500 चल र उसके आगे पीछे तो ये जुड़ाव काम करता है तो परमात्मा नहीं आप किस ऊर्जा मंडल से जुड़ रहे हो वैसे ही आप बनते जा रहे हो देखो क्या होता है ना सबसे पहले तो बहस जो होती है जितने भी बहस वाले लोग होते हैं उनमें कमिया पाई जाएंगी किसी भी तरह
की फिजिकली मेंटली सोशली फाइनें आप देखना जो समर्थ किस्म के लोग होते हैं जिनके पास कुछ है कंटेनिंग है वो बहस करते नहीं पाए जाएंगे सहज सहज पाएंगे जो कुछ रखते हैं बहस नहीं करते तो रेशनल लोग कौन है जो भी अपने आप को र कहते हैं वो बहसी लोग है बहस करते हैं और आस्तिक लोग भी कौन है वो भी क्या करते है बहस कर और इनके गुरु कौन है नसे भी ज्यादा बहस करते इन्होने क्या सिखाया उनको बहस करना अपने आप को साबित करो यदि आप सही है तो साबित करने की जरूरत नहीं
है यदि आप रिजनल दूध पी रहे तोस को जा थोड़ी क न दूध प रहा घी खा रहा नहीं कहोगे ये कौन कौन उल करेगा जो नकली घी खा रहे है ना करते रहे क्यों उनके परर इक्ट आ रहा है उसका सर सीध सी बात है कोसे किसी पूछे सूरज नहीं होतास नहीं करेगा सर एकज हैसे बर्डन यदि आपको आपको कहा जाए या मालो मेरे को कहा जाए या अपनी जो थोरी है कि परमात्मा को सिद्ध करो तो परमात्मा को सिद्ध नहीं किया जा सकता ना नहीं किया क्योंकि वह भौतिक से परे है ना य
तो पहले बता ही रखा है नास्तिकों का एक स ये होता है कि जो चीज सब जगह हो सबग सबके लिए हो सबके लिए वो मत इसलिए नि जब सामने आ तब मा हमाम सी केम सब [संगीत] लेने ऐसी चीज सामने नहीं आती है अ वसे भी परमात्मा तो क्या है है अव्यक्त परमात्मा को सव शक्तिशाली और सव भी समस्त शक्तियों से परे समस्त ज्ञान से परे सत्य अवस्था को एट अवस्था कहा जाता है निरपेक्ष अवस्था जिस पर किसी भी सापेक्षता को नहीं लगाया जा सके उसको निरपेक्ष अवस्था कहा जाता एब्सलूट जो पूर्णता पर पर
महाराज जी अगर कोई नहीं मानता तो उसको जनवा के करना क्या है जो बताया गया उस पर ध्यान दिया जाए तो जदा नहीं वो तो ठीक बात है आपकी हम केवल डिस्कशन कर रहे हैं ये सब लोग तो जानते ही है मतलब लोगों के कैसे कैसे तर्क आ रहे हैं उस पर बातें कर