नमस्कार आप देख रहे हैं हिंदुस्तान हॉटलाइन न्यूज की खास पेशकश आयुष्मान भवा जहां हम आपको मिलवा हैं उन बेहद ही खास स्वास्थ्य विशेषज्ञों से जो ना सिर्फ सेहत के रहस्यों से पर्दा उठाते हैं बल्कि हमें एक स्वास्थ्य और बेहतर जीवन जीने के अनमोल सूत्र भी देते हैं इसी कड़ी में आज हमारे साथ है डॉक्टर विनोद कुमार यादव जो सीएमओ और एमडी पंच कर्मा है और पिछले 20 सालों से अधिक आयुर्वेद चिकित्सा के क्षेत्र में काम कर रहे हैं वर्तमान में वे नई दिल्ली स्थित सीजीएचएस आयुर्वेद अस्पताल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं डॉक्टर विनत कुमार
से हम बात करते हुए आज हम जानेंगे कि क्या आयुर्वेद इलाज एलोपैथी से बेहतर है क्या आयुर्वेद गंभीर बीमारियों का स्थाई इलाज दे सकता है और हमारी गलत जीवन शैली से हमें क्या नुकसान हो रहा है तो चलिए अब बिना देर किए शुरू करते हैं नमस्कार सर आपका बहुत बहुत स्वागत है आयुष्मान भव में हमारा पहला सवाल है क्या आयुर्वेद आधुनिक चिकित्सा एलोपैथी से बेहतर है इस पर आपकी क्या राय है नमस्कार देखिए हम इसको इस तरह से समझे ना समझे कि कौन बेहतर है और कौन खराब है बल्कि यह इस तरह से समझना चाहिए
हमें दोनों चिकित्सा पद्धतियां मानव समाज को क्या दे सकती है और किस तरह से हमारे देश और राष्ट्र का एक बेहतर स्वास्थ्य का निर्माण कर सकती है जहां तक प्रश्न है आयुर्वेद का यह निसंदेह रूप से आयुर्वेद पूर्ण रूप से पूरे देश का ही नहीं संपूर्ण विश्व को एक बेहतरीन चिकित्सा दे सकता है और आप जीवन के चारों पुरुषार्थ धर्म अर्थ काम मोक्ष इन चारों पुरुषार्थ को अपनी सर्वांगीण में जी सकते हैं अपने जीवन को सरोकार कर सकते हैं इसमें आयुर्वेद अपने आप में पूर्ण समृद्ध है पूर्ण रूप से पूर्ण है इसमें हम एलोपैथी चिकित्सा
से कोई क पेरिजन से हम किसी पद्धति को छोटा या बड़ा करके आयुर्वेद का यह विषय नहीं है आयुर्वेद का विषय वसुधैव कुटुंब कम यानी हम क्या कर सकते हैं तो निसंदेह यह बेहतर चिकित्सा पद्धति है और संपूर्ण मानव जाति की यह देखभाल कर सकती है इसमें कोई संशय नहीं बिल्कुल लेकिन आमतौर पर लोगों का जो मन में कई तरह के थॉट होते हैं आयुर्वेद को लेके इसमें एक थॉट आमतौर पर ये देखा जाता है कि आयुर्वेदिक इलाज जो है वो काफी धीमा असर करता है जबकि एलोपैथी जल्दी असर दिखाता है यह आम जनता की
धारणा है क्या यह सही है नहीं नहीं यह बिल्कुल ही गलत धारणा है दोनों ही पद्धतियां अपनी अपनी जगह विशिष्ट है जहां तक आयुर्वेद चिकित्सा की बात है आयुर्वेद चिकित्सा भी उतनी ही तीव्रता से आशु कारी कार्य करती है बशर्ते कि उन औषधियों का उपयोग जो है प्रयोग जो है कुछ योग्य वैद कर पाते हैं इसकी वजह से इनकी प्रैक्टिस कम होती है मैंने अपने चिकित्सा कार्यकाल में बहुत तेजी से हमारे साधारण ता आम जनमानस में जैसे बुखार हो जाना तो बुखार के लिए व सोचते हैं कि एलोपैथी लेने से ही उनका बुखार उतर सकता
है लेकिन मैंने अपनी प्रैक्टिस में कभी भी एलोपैथी औषध के द्वारा बुखार नहीं उतारा हमेशा आयुर्वेद चिकित्सा के द्वारा ही बुखार की चिकित्सा की चाहे वोह 104 डिग्री में ही हो लेकिन यह एक विशिष्टता है कि आप किन औषधियों का प्रयोग करके और बहुत ही उग्र और तीव्र औषधिया है जिन्ह बड़ी सावधानी से प्रयोग किया जाना चाहिए अन्यथा वह दुष्प्रभाव भी उत्पन्न करती है तो यह बिल्कुल गलत बात है कि यह बहुत धीमा है या कार क्रियाशील नहीं है या कार्य नहीं करता है रोगी को लाभ नहीं देगा यह पूर्ण रूप से लाभ देगा और
जितने समय में आप चाहते उतने निश्चित समय में य लाभ देता है बिल्कुल समय घड़ी देख के आप इसके लाभ ले सकते य एक सवाल उठता है कि क्या आयुर्वेद कैंसर डायबिटीज या हाई बीपी जैसी गंभीर बीमारियों का स्थाई इलाज देने में सक्षम है देखिए जहां तक व्याधि की बात तो व्याधि कोई भी हो किसी भी प्रकार की उसकी पूर्ण चिकित्सा उसकी पूर्ण संप्राप्ति यानी किसी व्याधि जो किसी मनुष्य को व्याधि होती है और व्याधि होने के बाद उसकी चिकित्सा किस प्रकार की जाए कि वो बीमारी ठीक हो सके बीमारी ठीक होने की योजना वो
संप्राप्ति विघटन जो आयुर्वेद में प्लान की जाती है वह इतनी सुंदर है और इतनी सटीक है कि सबसे पहले तो रोग आयुर्वेद जो समझता है वह है कि एक रोग को पूर्ण रूप से ठीक किया जाए ना कि अन्य रोग को उत्पन्न किया जाए जो आयुर्वेद की औषधियां है वह रोग को समूल जड़ से नष्ट कर देती है तो इसमें की कोई बड़ी बड़ी बीमारियों का नाम ले लिया जाए लोग तो खांसी जुकाम से भी मर सकते हैं साधारण बीमारी से भी मर सक बात यह नहीं है किसी भी बीमारी पे सटीकता से काम करना
और जो कुछ ऐसी बीमारियां जो एक मानव समाज के लिए चैलेंजिंग है जैसे आपने कैंसर का नाम लिया कैंसर एक चैलेंजिंग बीमारी है तो उसमें आयुर्वेद लगातार काम कर रहा है नए नए शोधों का प्रयोग करके इस पर धीरे-धीरे अपनी बात को रखा जाए केवल चमत्कार जैसी कोई व्यवस्था आयुर्वेद में नहीं है जो भी है पूरा वैज्ञानिक रूप से किसी व्याधि को ठीक किया जाता है इवन की जो आपने मधुमेह डायबिटीज की बात की या हाई ब्लड प्रेशर बीपी की बात की इससे तो इतनी अच्छी तरीके से ठीक किया जा सकता है लगातार आप औषधियों
का प्रयोग करके पंचकर्म चिकित्सा से अपना शोधन करा के रसायन चिकित्सा का प्रयोग करा के दीर्घ काली ष बीमारियां जिसे लाइफ स्टाइल डिसऑर्डर जो आज आधुनिक समाज के लिए बड़ी समस्या बनी हुई है इन्हें बड़े सुंदरता तरीके से इसको आप ठीक कर सकते हैं और इसकी सफलता के कारण आज आयुर्वेद में हर जगह आयुर्वेद की चर्चा हो रही है और समाज इससे लाभान्वित हो रहा है और उसके प्रति बड़ी उम्मीद की दृष्टि से देख रहा है कि आयुर्वेद किस प्रकार से हमें इन रोगों से मुक्त करें हम अभी भी देखते हैं कि कि जब भी
कोई कैंसर या किसी तरीके की गंभीर बीमारी होती है तो लोग आमतौर पर एलोपैथी दवाइयों की ओर ज्यादा भागते हैं तो क्या आपको लगता है कि एलोपैथी दवाइयों को जबरन हाइट दी गई है जब कि वही काम आयुर्वेद की दवा भी कर सकती है देखिए ये एक मतलब विषय में ये नहीं कह सकता हूं कि हा ये तो जो जिस पद्धति का होता है वो अपनी पद्धति के लिए प्रचार प्रसार और अपनी मार्केटिंग की स्थिति को मजबूत करने की समस्या है मैं यह बाता हूं कि मूलभूत सिद्धांत के रूप में किस प्रकार एक चिकित्सा पद्धति
आपके रोग को पूर्ण रूप से ठीक करें और दूसरे अन्य रोग को उत्पन्न ना करें फॉर एग्जांपल जैसे मान ली आप हाइपर एसिडिटी के लिए कोई मेडिसिन ले रहे हैं और वो हाइपर एसिडिटी ठीक कर रही है लेकिन आपकी बोन डेंसिटी को कमजोर कर रही है आपके पेट में अन्य दूसरी तकलीफों को पैदा कर रही है तो हमारी आयुर्वेद चिकित्सा में सबसे अच्छी और खास बात यही है कि वह एक रोग को समन करती है या ठीक करती है लेकिन अन्य रोग को उत्पन्न ना किया करे यही सबसे सफल और उचित चिकित्सा है तो इसमें
को दो राय नहीं कि आयुर्वेद पूर्ण रूप से आपको अच्छे से ठीक कर सकता है उसकी दवाई ज्यादा कारगर है उनके साइड इफेक्ट या एडवर्स इफेक्ट ह्यूमन बॉडी पर बहुत ही मिनिमल है वो भी आहार के साथ हमारे जो प्राकृतिक रूप से उपलब्ध संसाधन है उन्हीं से औषध बना के उसकी पूर्ण रूप से वास पित्त कफ का क्या शरीर में बैलेंस है क्योंकि संपूर्ण सृष्टि के साथ ये शरीर भी एक बैलेंस पर चलता है आपको बैलेंस को कैसे मेंटेन कर ना है एक ऋतु के अनुसार 24 घंटे एक दिनचर्या के रूप में तो इस तरीके
से आयुर्वेद इस सबसे बेहतरीन तरीके से काम करता है और आयुर्वेद आपको बीमार ही नहीं होने देगा जहां तक बड़ी गंभीर बीमारियों की बात है हमारे पास मैंने देखा है जब लोग कह देते हैं कि अब यह ठीक नहीं हो सकता या वहां से इलाज कराते कराते थक जाते तो आयुर्वेद में आते हैं लास्ट में फिर हम उनकी चिकित्सा करते हैं मेरा यह कहना है यदि आप पहले ही आ जाए और आप बंद करके नहीं आप सभी प्रकार की इन्वेस्टिगेशन कराएं आपको दूसरी पद्धति में योग्य चिकित्सकों की सलाह लेनी है आप उनकी सलाह ले उनकी
देखरेख ले और सबसे बड़ा जो मित मैं ये बताना चाहता हूं कि हमारी दवाई किसी भी चिकित्सा के साथ चल सकती है हमारा कोई एलोपैथी से ऐसा नहीं है कि उनकी दवाई चल रही तो हमारी दवाई नहीं चल सकती है हमारी दवाई एडिटिव इफेक्ट डालती है जिसमें ये कैंसर के साइड इफेक्ट को रिड्यूस कर सकते हैं और शुरुआती दौर से ही अगर आयुर्वेद का चिकित्सा ली जाए पंचम कराया जाए जीवन शैली को सुधारा जाए आहार विहार यानी लाइफ स्टाइल चीजों को डाइट में चेंजेज किए जाए तो निश्चित रूप से आप बेहतरीन तरीके से अपने रोगों
से लड़ने में ज्यादा सक्षम होंगे और हानिकारक प्रभावों से आपको रोका जाता है इसके साथ-साथ मैं यह कहना चाहता हूं यदि कोई पद्धति आपको और अच्छा बेहतर देती तो हम उसका साथ में उपयोग कर सकते हैं तो आप आयुर्वेद के साथ-साथ उनका भी उपयोग उनके विशेषज्ञों की सलाह ले सकते हैं और हम दुनिया को एक बेहतरीन चिकित्सा पद्धति दे सकते हैं जहां हम विभिन्न विभिन्न चिकित्स चिकित्सा सिद्धांतों पद्धतियों के आधार पर एक मनुष्य को बेस्ट चिकित्सा पद्धति उपलब्ध कराते हैं आयुर्वेद इसमें सहयोगी है किसी भी प्रकार से किसी से श्रेष्ठता साबित नहीं करना हमें हमें
तो मानव समाज और कल्याण के लिए औषध का एक उत्कृष्ट तरीके से प्रयोग करके स्वास्थ्य लाभ देना आजकल यह भी देखा जाता है कि बाजार में ऐसे कई प्रोडक्ट आते हैं जो अपने आप को 100% आयुर्वेदिक या जड़ीबूटी होने का दावा करते हैं यह प्रोडक्ट आखिर कितने अदार होते हैं क्या इसका कोई नुकसान भी होता है आम जन के लिए देखिए जहां तक बड़ी स्टैंडा कंपनियां है जो भारत सरकार से अनुमोदित है और जिनको लाइसेंस मिला हुआ है उनके प्रोडक्ट अच्छे हैं इसमें नो डाउट लेकिन कोई फाल्स क्लेम करता है फेक क्लेम करता है तो
हमारे देश में कानून है उसके ऊपर एक्शन लिया जा सकता है कि गलत रूप से आम जनमानस में धारणा ना फैले इस तरह चमत्कार जैसा चमत्कार जैसा कुछ नहीं है हर औषध या हर प्रोडक्ट अपने दिए हुए गुण धर्म के अनुसार शरीर पर काम करती है अगर उसका सही उपयोग करेंगे किसी चिकित्सक की देखरेख में निश्चित रूप से आपको लाभ मिले जहां तक कुछ खाने पीने या ऐसी चीजें जो आहार के स्वरूप में भी हम कई बार एडवाइस करते हैं एडवोकेट करते हैं कुछ कंपनी उन प्रोडक्ट को एडवोकेट करते हैं तो एक सीमित मात्रा में
उनको आप अपने स्वविवेक से निर्णय करके ले सकते हैं लेकिन जहां कोई गंभीर समस्या है व्याधि है रोग है वहां अपने चिकित्सक की सलाह से अगर आप लेंगे तो उसके आपको बेहतर रिजल्ट और बेहतर स्वास्थ्य लाभ मिलेगा तो चलिए इंटरव्यू के इस पड़ाव में दर्शको को हम विनोद कुमार जी के निजी व्यक्तित्व से मिलवा हैं सर हम जानना चाहते हैं कि आयुर्वेद को लेकर आपका विजन क्या है आप इसे आम जनता तक कैसे पहुंचाना चाहते हैं देखिए हम लोग बड़े भाग्यशाली है कि इस भारत भूमि में जन्म लिया और जिसकी मिट्टी में हर जन जन
को आयुर्वेद सुलभ है लेकिन कालखंड के इस यात्रा में हम अपनी चिकित्सा पद्धति को कहीं खो गए हैं हम उसका सदुप योग नहीं कर पा रहे हैं लेकिन आज भी हमारा ग्रामीण भारत आज भी आयुर्वेद को अपने जीवन में अपना रहा हमें केवल उनका विश्वास लौटाना है और हम एक बीमारी की कल्पना ही क्यों करें भगवान ने हमें बीमार पैदा नहीं किया है इसलिए सबसे पहले हम अपने स्वास्थ्य नियमों का 24 घंटे की दिनचर्या में जो प्रकृति ने हमारे लिए स्वास्थ्य नियम बनाए हैं जो दिन ऋतुचर्या में यानी एक मौसम में जो पूरे साल में
चक्र चलता है वो एक नियम है जो आयुर्वेद में बेहतरीन तरीके से रखे गए हैं वो हम जनमानस तक पहुंचाए और इसको हम एक छोटे लेवल पर हमारे यहां क्या है कि इंडिविजुअलिस्टिक यानी एक प्रति व्यक्ति स्वास्थ की सोच को रखा गया है तो हम अपने गांवों से अगर हम शुरू करें और एक गांव से दो गांव इस तरह धीरे धीरे व्यवस्था ऐसी बनाए कि लोग बीमार ना हो सबसे पहले मेरा एक विजन है कि लोग बीमार ही ना हो यदि हम लोगों को बीमार होने से बचा लेते हैं तो हमारा स्वास्थ्य खर्चा बहुत कम
हो जाता है अब जो लोग बीमार हो रहे हैं उन्हें हम औषधियों से मिनिमम औषध के प्रयोग से उन्हें दिनचर्या ऋतुचर्या पंचकर्म के माध्यम से उन्हें ठीक कर लिया जाए जो कुछ लोग गंभीर रह रहे हैं उन्हें हम विशेष चिकित्सा के द्वारा उन्हें ठीक कर ले हमारे देश में एक ऐसी व्यवस्था की जाए जहां से प्रत्येक गांव को स्वास्थ्य स्क्रीनिंग हो और वहां कैसे स्वास्थ्य उपलब्ध कराया जाए एक गांव या प्रत्येक पांच गांव में एक हॉस्पिटल क्रिएट किया जाए एक फार्मेसी क्रिएट की जाए वो फार्मेसी वहां की लोकल जरूरतों को पूरा किया जाए जो किसान
है वह जड़ीबूटी को उपयोग वहां लगाए और उनसे हम उसको ले और औषध निर्माण करें इससे एक तरीके की व्यवसायिक रूप में भी हम इस तरह प्रोग्रेस कर सकते हैं कि हम आर्थिक रूप से संपन्न होंगे और चिकित्सा के ऊपर भारी भरकम यंत्रों या भारी भरकम बजट खर्चे सरकार के ऊपर एक बर्डन होना की चिकित्सा पर इतना खर्च करने से बचाया जा सकता है और धीरे धीरे धीरे धीरे इसको पूरे देश में हिस्सों में बांटते हुए हम इंप्लीमेंट करें जहां हम स्वास्थ्य सेवाओं को चिकित्सकों द्वारा पैरामेडिकल स्टाफ के द्वारा सेवाएं दे साथ में औषधियों की
गुणवत्ता और औषधियों का निर्माण यानी छोटी-छोटी यूनिट्स क्रिएट करें जो लोकल स्तर पर उन औषधियों की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हो उन जो वो प्रोडक्शन करें उनमें कुछ हिस्सा अन्य जगह भिजवाए जहां नहीं हो रहा है तो एक पूरे संपूर्ण देश में एक ऐसा वातावरण क्रिएट हो जाएगा जहां हमारी औषधियों की पूर्ति होगी चिकित्सा लाभ होगा उनका क्योंकि हमारे पास चिकित्सक और पैरामेडिकल स्टाफ होगा जो उनकी देखभाल के लिए और योग के द्वारा योग के द्वारा आप उनको जागृत करें कि वह किसी प्रकार से बीमारी ना हो और अधिक औषधिया या दवाइयों को
लेने के आदि ना हो और उनका आहार संतुलित हो बहुत सारे जो हम पेस्टिसाइड या केमिकल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं इनको रिड्यूस करके जैविक कृषि करें तो मैं समझता हूं हम शारीरिक के साथ साथ मानसिक स्वास्थ्य मानसिक स्वास्थ्य इस तरह हम पूरे संपूर्ण भारत को भी स्वस्थ नहीं कर सकते बल्कि विश्व व्यापत समस्याएं जो स्वास्थ्य के क्षेत्र में आ रही है उनमें हम लोगों के और हेल्थ टूरिजम को डेवलप कर सकते हैं जब दुनिया भर के लोग हमारे यहां स्वास्थ्य के लिए आए तो वो हमारे को हर तरीके से हेल्प होगी हमारा यहां व्यापार
भी बढ़ेगा व्यवसाय भी बढ़ेगा और स्वास्थ्य की सेवाएं भी दे सकते हैं ऐसा मेरा विजन है आपने शारीरिक स्वास्थ्य और नियमों के बारे में बात किया इसलिए मैं ये जानना चाहता हूं कि हमारी जो बदलती जीवन शैली है उसका हमारे शरीर और स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ता है क्या आयुर्वेद की नजरी से हमें क्या बदलाव करने चाहिए अपने जीवन शैली में देखिए मूलभूत आप यह समझ लीजिए कि हम जो है वो अपनी प्रकृति के सामंजस्य में जी रहे हैं यदि आप अपनी प्रकृति को खराब करते हैं आप मान लीजिए सड़क पर चल रहे हैं तो
आपके राज्य या देश सरकार के कुछ नियम है कानून है कि इस तरह से वाहन को चलाना है और इस नियम से चलाना इसी तरह प्रकृति कुदरत ने भी हमारे ऊपर कुछ नियम लगाए हैं कि आपको प्रातः सुबह उठना है ठीक स्नान करना है किस समय भोजन करना है किस समय आपको सोना है आपके शारीरिक जरूरतों के नियम बनाए हुए हैं कि किस ऋतु में किस मौसम में क्या आहार लेना है क्या खाना है तो इन सब नियमों का पालन करने के बाद मैं नहीं समझता हूं कि कोई बीमार हो सकता है अब समस्या क्या
आती है कि हम अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए इन नियमों को तोड़ते हैं तो जहां मान लो किसी काम की वजह से अगर कुछ नियम टूटते हैं तो हमें कोशिश करनी चाहिए उनका बेहतरीन प्रकृति के सामंजस्य के हिसाब से हम क्या नियम ला सकते हैं फॉर एग्जांपल मैं आपको बताता हूं जैसे कि किसी को नाइट ड्यूटी करनी रात में जागना तो उसका नियम यह है कि जितनी देर आप रात में जागे हैं उतना उसका आधा दिन में सोए तो इन तरीकों से आप अपने स्वास्थ्य को अपनी बदलती जीवन शैली के रूप में आप इसको
सुधार कर सकते हैं लेकिन कुछ भी कर लीजिए हमारा शरीर प्रकृति के सामंजस्य के साथ ही जुड़ा हुआ है यह बात आप आज समझे या 100 साल के विकास के बाद समझे यह बात आपको समझनी होगी कि जो कुछ भी है प्रकृति के साथ हमें सामंजस्य बिठा के चलना पड़ेगा हमें अपनी आर्थिक तरक्की विकास सामाजिक विकास राष्ट्र विकास इन सबको प्रक के साथ सामंजस्य ब के ही चलने से हमारा सर्वोत्कृष्ट विकास हो सकता है स्वास्थ होगा तभी आपके लिए आर्थिक लाभ है और आर्थिक रूप से आप संपन्न हो क्योंकि समय का थोड़ा सा अभाव है
इसलिए मैं आपसे संक्षिप्त में एक दो सवाल और समझना चाहता हूं कि क्या घरेलू नुस्खों से सच में बड़ी बीमारिया ठीक हो सकती है या यह सिर्फ एक अंधविश्वास है देखिए बड़ी बीमारियों से मैं समझता हूं दो ही बातें हैं हमारा शरीर आहार निद्रा ब्रह्म चय तीन आधारभूत स्तंभों में टिका हुआ है आहार यानी वह चीज जो आप नित्य प्रयोग करते हैं और रोज इस शरीर को चलाने के लिए लगातार आप खा सकते हैं जिसमें गेहूं चावल दालें इस तरह सामान्य आहार आप खा सकते हैं लेकिन जब आप बीमार हो रहे हैं यानी विशिष्ट बात
आ गई तो जो औषध है वो रूटीन में रेगुलर नहीं खाया जाता है वो अपने एक्टिव प्रिंसिपल से काम करता है और वह टारगेट ओरिएंटेड होता है यानी समझ उसको टारगेट रूप से वो अपने वीर या एक्टिव प्रिंसिपल पर काम करती है जो आहार है वह रस प्रधान है रस धातु के रूप में काम करता है तो दोनों बातों को समझना होगा कि घरेलू मान लीजिए जैसे कि हम घरेलू में तमाम चीजें आहार के रूप में प्रयोग करते हैं वो औषध के रूप में भी काम करती है जैसे कि हल्दी को मान लीजिए हल्दी एक
एंटी कैंसरस ड्रग भी साबित हो रहा है हल्दी को हम खाने के रूप में प्रयोग करते हैं तो रूटीन में अगर भारतीय लोग करते हैं तो उनको कैंसर होता ही नहीं है ज्यादा जहां उसका एक्टिव कंपाउंड निकाल लेते हैं जब हम हल्दी से करक्यूमिन वो एंटी कैंसरस काम करता है तो यह हमको समझना होगा कि घरेलू उपचार की एक सीमा है और घर में उपयोग करने वाले जो नित्य है उनकी एक सीमा है जानकारी की भी सीमा है और उसका उतना प्रयोग किया जा सकता है जहां औषध की बात है वहां विशेषज्ञ की सलाह पे
और विशेष कार्य हेतु यानी विशेष बीमारियों की चिकित्सा के लिए एक कुशल वैद्य की देखरेख में उसका उपयोग एक डिफरेंट तरीके से किया जाता है इसलिए दोनों बातों में अंतर है यह जो प्रचार करना की घरेलू चीजें सब चीजों को ठीक कर देंगी यह समझ आयुर्वेद के मतलब ठीक नहीं है आयुर्वेद के हित में दोनों बातों को अलग-अलग हमें समझना होगा आखरी सवाल आपका ये सवाल नहीं है बल्कि एक संदेश जो आप दर्शकों को देना चाहेंगे जैसा कि हम सभी जानते हैं कि 28 29 और 30 मार्च को वर्ल्ड हेल्थ एंड वेलनेस एक्सपो हो रहा
है तो उसको लेकर आप आम दर्शकों को और लोगों को देश की जनता को क्या संदेश देना चाहते हैं देखिए मैं लोगों को यही कहना चाहता हूं कि ज्यादा से ज्यादा आप आयुर्वेद का उपयोग करें आप की पूण पूरी जीवन शैली आयुर्वेद की है सिर्फ आपको इसे जानना है समझना है सदुपयोग करना है आप बीमार जन्म नहीं लिए आप हमेशा स्वस्थ रहने के लिए जन्म लिया है इसलिए आप स्वस्थ रहे और आयुर्वेदिक चीजों का जो आपके लिए हेल्दी है प्राकृतिक रूप से हम इसको प्रयोग करते हैं इसका प्रयोग करें और अपने साथ-साथ अपने परिवार अपने
अड़ोस पड़ोस अपने राज्य और देश के साथ-साथ पूरे विश्व के लिए आप इसको प्रचार करें जब तक य जनमानस इसको नहीं लेगा उपयोग में और जनमानस इसका बीड़ा नहीं उठाएगा तब तक कोई भी चिकित्सा पद्धति महान चिकित्सा पद्धति नहीं बन सकती है इसलिए मैं लोगों से चाहूंगा कि आयुर्वेद का उपयोग करें प्रयोग करें अपने सवाल पूछे अपनी बातों में अपने मन में जो डर है उनको निकाले और अपने देश की चिकित्सा पद्धति है अगर हम इसका उपयोग करेंगे तो हमारे देश का जो धन है हमारे देश में ही रहेगा हमारे लोगों की तरक्की में काम
आएगा तो इसी सोच से मैं चाहता हूं कि आयुर्वेद सभी लोग उपयोग करें और इसको बढ़ चढ़ के हिस्सा ले धन्यवाद विनोद जी अपने सालों का अनुभव हमारे साथ साझा करने के लिए विनोद जी से हमने बात करते हुए समझा कि आयुर्वेद इलाज कैसे बेहतर एक पर्याय बन सकता है आयुर्वेद गंभीर बीमारियों का इलाज कैसे कर सकता है और हमारी गलत जीवन शैली में क्याक सुधार हो होने की संभावना और जरूरत है ऐसे ही स्वास्थ्य से जुड़ी खबरों के लिए आप देखते रहिए हिंदुस्तान हॉटलाइन न्यूज नमस्कार