मक्के के सरदारों में से एक हम सरदार था जो कुफ्रो शक का बहुत बड़ा पेशवा और इस्लाम और मुसलमान के हक में रहे जमीन का एक बहुत बड़ा शैतान था एक दिन उसको पता चला की उसके किसी गुलाम ने भूतों को पूजने से इनकार करके किसी और को महबूब बना रखा है उसने गुलाम को फौरन बुलाकर यह पूछा की मैंने सुना है की तुमने कोई और माबूद बना लिया है सच सच बताओ की तुम किसकी इबादत करते हो गुलाम ने कहा की मोहम्मद सल्लल्लाहु अलेही वल्लम के खुदा की उमिया गुस्से से लाल पीला हो गया
और खाने लगा की मोहम्मद की खुदा की प्रकाश करने का यह मतलब हुआ की तुम हमारे मुकद्दस बटन के दुश्मन बन गए हो वरना जिल्लत के साथ मारे जाओगे मैं यह हरगिज़ बर्दाश्त नहीं कर सकता हूं की तुम भूतों की पूजा करने वाले के गुलाम रहकर मोहम्मद के खुदा की उपस्थित करो वो गुलाम जो तू हिट का सच्चे दिल से हो चुका था उसने बेधड़क उमइया को जवाब दिया की मेरे जिस पर तो तुम्हारा जोर चल सकता है लेकिन मैं अपना दिल और अपनी जान मोहम्मद सल्लल्लाहु अलेही वल्लम और उसकी खुदा के पास रख चुका
हूं अब अल्लाह की इबादत ही मेरी जिंदगी का मकसद है और तुम्हारी खुद से बनाए हुए भूतों को पूजन मेरे बस की बात नहीं है ये जवाब सुनकर ओ मैया पी खलफ गैस जो गजब से दीवाना हो गया एक गुलाम ने उसे बेधड़क जवाब दे दिया था उसने कड़क कर कहा की अच्छा तो फिर अपनी बेदिनी का मजा चक देखूंगा मैं की मोहम्मद और उसके खुदा तुझे कैसे बचते हैं उमिया के तशदूत शुरू हो गए मक्का की जमीन गर्मी की शबाब बड़ी मशहूर थी वो मुझे अपने गुलाम को दोपहर की ताप्ती धूप में जमीन पर
लेट कर साइन पर भारी पत्थर रख देता था की वो करवट ना ले सके फिर कहता था की मोहम्मद के दिन से बाज ए जो लेकिन इस जुल्म के बावजूद भी उसे गुलाम के मुंह से शिवाय अहद अहद के कुछ नहीं निकलता था उमिया माजिद गजब ना खोकर अजियाते माजिद बढ़ता जाता एक मर्तबा तो मायणी जुलम की इंतहा कर दी पूरा एक दिन और पुरी एक रात गुलाम को भूख प्यासा रखा और ताप्ती हुई रेट पर लेट कर उसे तड़पने का तमाशा देख रहा था उसकी ये कोशिश भी गुलाम को हक से ना हटा सके
आखिर तक हर कर उमिया ने मक्के के बदमाश लड़कों को बुलाया और उनसे कहा की इस गुलाम को इतनी अजीयतें दो की यह मोहम्मद और उसकी खुदा का नाम लेना भूल जाए ये लड़के मैया की खुशी हासिल करने के लिए उसे बेब्स गुलाम को बुरी तरह मारते पीटते थे जिस के कपड़े उतरवाकर लोहे की चादर पहनकर ताप्ती धूप में खड़ा कर देते थे लेकिन गुलाम की जबान से आहट के शिवा कुछ नहीं निकलता था इस्लाम की र में यह बेपनाह अजीयती सहने वाले सहाबी कोई और नहीं बल्कि हजरते बिलाल हब्शी राजी अल्लाह ताला अन्हू होते
इन्हीं जुल्मी सितम के दौरान एक दिन हजरते आबू बाकर सिद्दीक राजी अल्लाह ताला अन्हू का उधर से गुर्जर हुआ आप तो जिला तालाब हो न्यू माइक फरमाया इस बेकर्स और मजलूम पर इतने जुल्मी सितम ना कर उसने तुम्हारा क्या बिगड़ा है वो खुदाई वाहित की इबादत करता है अगर तू इस पर एहसान करें तो ये एहसान आखरत में तेरे कम आएगा उसे पर उमिया ने निहायत हिकारत से कहा की मैं तुम्हारी इस ख्याली आखिरत के दिन को नहीं मानता जो मेरे दिल में आएगा मैं तो वही करूंगा सिद्धि के अकबर उसे जवाब पर काफी अफसोसरता
हुए लेकिन फिर भी आप राजी अल्लाह ताला अन्हू ने उसे समझाया की इस मजलूम पर जुल्मी सितम के पहाड़ तोड़ना तेरी सयानी नहीं है जी पर मैया ने टांग आकर कहा की अगर तुम इसके इतने हमदर्द हो तो इसे खरीद क्यों नहीं लेते हजरत आबू बाकर सिद्दीक झट तैयार हो गए और फरमाया के बोलो क्या दम लोग भैया ने कहा की तुम्हारे पास एक गुलाम है जिसका दम फैन्सटाट रूमी है वो मुझे दे दे और इसको ले जा| फौरन ही राजी हो गए जबकि ओ मैया का ख्याल था की फसल एक निहायती करामत गुलाम है
जिसकी कीमत ज्यादा है और हजरते आबू बाकर सिद्दीक राजी अल्लाह ताला ने उसे देने से इनकार कर देंगे मगर आप फौरन राजी हो गए तो मैया को सख्त मायूसी हुई और उसने साथ ही 40 रुपया चांदी की फरमाइश की उसे भी हजरते आबू बकर सिद्दीक राजी अल्लाह ताला नॉन ने बखुशी अदा कर दिया हजरते बिलाल राजी अल्लाह ताला अन्हो को साथ लेकर दरवाजे रिसालत में हाजिर हुए और सर माजरा का सुनाया आप सलातो सलाम निहायती खुश हुए और फरमाया के आबू बाकर इस कार्य शहर में मुझे भी शरीफ कर लो सिद्दीकी अकबर माया के या
रसूल अल्लाह मैं इसे खुदा की र में आजाद कर चुका हूं यह सुनकर जुबानी रिसालत से सिद्दीकी अकबर राजी अल्लाह ताला अन्हू के लिए कलम रहमत जारी हो गए हजरत बिलाल राजी अल्लाह ताला अन्हू ने इस गुलामी में 28 साल गुर्जर दिए लेकिन आप चूंकि निहायती निक और पाकीज़ह तबीयत के थे लिहाजाब ए हजरत सल्लल्लाहु अलेही वल्लम ने दावते तोहिद दी तो आपने फौरन उसे काबुल कर लिया और यूं आप सबने कुंडल अवलूं के मुकद्दस जमाई में शामिल हो गए रिहाई अपने के बाद हजरत बिलाल हमेशा आप सल्लल्लाहु अलेही वल्लम की खिदमत में हाजिर रहते
थे और दिलों जान से नबी ए पाक सल्लल्लाहु अलेही वल्लम की खिदमत पे जलते हैं आप सलातो सलाम हजरत बिलाल को किसी भी चीज का हुकुम देते तो आप अपनी जान भी लाडा देते कस्बा बदर से लेकर खजवाए तब्बू तक तमाम गज़्बात में शामिल रहे लेकिन हजरते बिलाल की इस्लाम के लिए सबसे बड़ी खिदमत और उनके लिए सबसे बड़ी शहादत इस्लाम का सबसे पहले मोहसिन होना है [संगीत] पास निहायती दिलनशी थी और उसमें एक ऐसी तासीर थी की अजान की आवाज सुनकर लोग सब कम छोड़ चढ़कर मस्जिद की तरफ तोडतेजरी में जब मक्का फतेह हुआ
तो कब को भूतों से पाक करने के बाद आप सलातो सलाम ने हजरते बिलाल से फरमाया के बिलाल काबे की छठ पर खड़े होकर अजान दो और ये मुबारक सिलसिला आज हुजूर सल्लल्लाहु अलेही वल्लम की हयाते मुबारक कब तक इस मोहब्बत और अकीदत के साथ जारी रहा लेकिन 11 हिजरी में जब आप सलाम ने सफर आखरत अख्तियार कर लिया तो इस आशिकी रसूल सल्लल्लाहु अलेही वल्लम पर गम का पहाड़ टूट पड़ा और मदीने में रहना अब आपके लिए दुश्वार हो गया आपको हर वक्त प्यार नबी सल्लल्लाहु अलेही वल्लम की याद सताती रहती थी आप सिलेट
सलाम से आपने सुना हुआ था की मन के लिए सबसे अफजल अमल जहाज भी सभी इल्लल्लाह में हाजिर हुए और जहाज पर जान की इजाजत तालाब की लेकिन हजरत आबू बाकर सिद्दीक राजी अल्लाह ताला नॉन ने आपको खुदा का वास्ता देकर कहा की मुझे इस बुढ़ापे में तन्हा छोड़कर मत जो तो हजरत बिलाल दे इस शर्ट पर आबू बाकर सिद्दीक राजी अल्लाह ताला अन्हू की बात मां ली की अब वो रसूलुल्लाह के बाद किसी के लिए जान नहीं देंगे हजरत आबू बाकर सिद्दीक राजी अल्लाह ताला अन्हू ने उनकी यह बात मां ली लेकिन आपके डर
खिलाफत के बाद खलीफा धूम हाजतें फारूक ए आजम राजी अल्लाह ताला नॉन के दूर में भी जब बैतूल मुकद्दस की तस्वीर के लिए शाम जाना पड़ा तो वहां ईसाइयों से सुलहनामतें अपने के बाद हजरते उमर फारूक राजी अल्लाह ताला अन्हू ने एक कुड़वा दिया और हजरते बिलाल से दरखास्त किया की आज जब के किबला यावल पर तौहीद का परचम लहरा दिया है तो इस बार अजमत मौके पर अगर आप जान दें तो हम आपके मशहूर रहेंगे हजरते बिलाल ने यही अजान देनी शुरू किरण को आदि नववी की मुबारक याद ताज हो गई और उन पर
रफ्तारी हो गई शाम के मार्केट के बाद हजरते बिलाल ने शाम ही के एक गांव में रिहाई शक्तियार कर ली क्योंकि मदीने में हर वक्त आपको आप सलातो सलाम की याद सताती रहती थी लेकिन एक दिन अपने ख्वाब में आपसे सलाम की जियारत की आप उनसे फार्मा रहे थे के बिलाल क्या अभी वक्त नहीं आया की तुम हमारी जियारत के लिए आओ इस ख्वाब ने आपको बहुत तड़प दिया और अब बेताब होकर फौरन मदीने रावण हुए मदीने पहुंचकर हजरत बिलाल ने रोज अख्तर हाजिरी दी और उसे दर्द से रो के हाजिरीन भी अश्क बाहर हो
गए हुसैन राजी अल्लाह ताला अन्हू भी मौजूद थे नाना के प्यार नवसो को आपने अपनी साथ चिपकाए और बेहद आशा चमन लगे हजरते हसन राजी अल्लाह ताला अन्हू और हुसैन राजी अल्लाह ताला ने आपसे अजनी फजर की फरमाइश की भला इसमें रेड करने की कहां गुंजाइश थी अगले दिन जब फजर का वक्त हुआ तो आपने जान देनी शुरू की लोगों की याद ताज हो गई और लोग इस तरह रोटी हुए मस्जिद की जैब चलने लगे जैसे की नबी ए पाक सल्लल्लाहु अलेही वल्लम का दूर वापस ए गया हो ऐसा दर्दनाक मंजर उसके अलावा कभी देखने
में नहीं आया