इस कहानी के लेखक है संजय कामले उसने टॉज अतुल की तरफ डाली और जैसे सन रह गया चारों और फैले घने काले अंधेरे के बीच सचिन के कांपते हुए हाथ से अतुल के चेहरे पर पड़ने वाली टॉर्च की रोशनी और उस सफेद रोशनी की सीधी लकीर में दहशत भरा अतुल का चेहरा यह सचिन के लिए दिल दहला देने वाला मंजर अतुल उस अलमारी के खुले दरवाजे के भीतर डेरी सहमी दहशत भरी नजरों से झांक रहा था मानो जैसे अतुल ने अपनी मौत को सामने देखा वह वहां से दूर भागना चाहता था मगर जैसे किसी ने
उसके दोनों पैर कसकर पकड़ रखे थे अतुल की य हालत देख सचिन का भी दिल डर के मारे जोर जोर से धड़कने लगा डर के उन कुछ ही पल में मानो उसका गला सोख गया था अतुल को इस तरह देख सचिन की हालत ऐसी हो गई थी कि उसके की सारी ताकत किसी ने निचोड़ कर निकाल दी हो पर खुद को संभालते हुए उसने धीमी आवाज से अतुल को अलमारी का दरवाजा बंद करने को कहा सचिन की तरफ देखकर अतुल रो रहा था ना में अपनी गर्दन हिलाते हुए वह सचिन को अपने नजदीक आने से
रोकने लगा शायद वह अलमारी का दरवाजा बंद करने की ही कोशिश कर रहा था पर अलमारी के अंदर छिपी व अनजानी ताकत शायद उसे ऐसा करने से रोक रही थी अतुल ने सचिन की और एक दहशत भरी नजर से देखा और चिल्लाने के लिए अपना मुंह खोला पर उसके मुंह से आवाज नहीं निकली टॉज की रोशनी में अतुल का दहशत भरा चेहरा देखकर सचिन का भी जैसे दिल ही बैठ गया पर थोड़ी हिम्मत जुटाकर सचिन धीरे-धीरे आगे बढ़ता रहा अब वह अतुल से कुछ ही कदमों की दूरी पर था अतुल को अपनी तरफ खींचने के
लिए सचिन ने अपना हाथ आगे बढ़ाया वह अतुल का हाथ पकड़ नहीं वाला था कि तभी किसी ने अतुल को एक ही पल में अलमारी के अंदर खींच लिया और अगले ही पल झटके से अलमारी का दरवाजा बंद हो गया अतुल के हाथ में जलने वाली टॉर्च जमीन पर धड़ाम से गिर गई जिसके साथ वह टॉर्च बंद हो गई वह खौफनाक नजारा देखकर सचिन के दिल की धड़कने तेज हो गई मगर वह नींद चिल्ला सकता था ना ही अतुल को आवाज लगा सकता था अगर ऐसा किया तो वह आत्मा उसका भी वही हस्र करेगी जो
अभी-अभी उसके सामने अतुल का हुआ अब सारे दोस्त अलग-अलग हो चुके थे राहुल को बचाने निकले सभी दोस्त अब खुद उस जगह फंस चुके थे कुछ देर तक वह सन्नाटा कायम रहा अपने सामने सबसे अजीज दोस्त के इस तरह मौत देखकर सचिन को रोना आ रहा था वह बिल्कुल बेबस लाचार जैसा उस जगह पर खड़ा था पर यह तो बस शुरुआत थी अगले पल जो उसने देखा उससे मानो पहरों के नीचे से जमीन सरक गई वह बेबस लाचार बना कमरे के चारों तरफ रोशनी डाल रहा था कमरे की हर दीवार पर रोशनी डालकर गौर से
देख रहा था और बेबस होकर वह घुटनों पर बैठ गया क्योंकि जिस कमरे के भीतर वह था उस कमरे को दरवाजा ही नहीं था जैसे एक खाली बक्सा होता है उसी तरह से वह कमरा दिखाई दे रहा था यह डरावना दृश्य देखकर उसके दिमाग ने जैसे काम करना बंद कर दिया लेकिन अगले ही पल वह सब कुछ समझ गया खुद की ही बात उसे याद आ गई यह छलावा है जो हमारे दिमाग के साथ खेलेगा जो सच होगा वो नजरों के साथ होते हुए भी नजर नहीं आएगा और जो नजर आएगा वह सिर्फ दिमाग का
वहम होगा कुछ सेकंड वो वैसे ही जमीन पर बैठा रहा बिना कोई हरकत किए बिल्कुल शांत और धीरे-धीरे आंखें खोली दोबारा टॉर्च की रोशनी में चारों और देखने लगा और कुछ ही कदमों पर वह दरवाजा दिखाई दिया जिससे वह अंदर आए थे उसका डर थोड़ा कम हुआ आंखों से बहने वाले आंसू पोच करर व उठकर खड़ा हो रहा था कि तभी टॉर्च बंद होने लगी एक दो बार उसने हाथ पर टॉर्च मारते हुए शुरू करने की कोशिश की मगर कोई फायदा नहीं हुआ वह समझ गया था कि वह आत्मा उसे यहां से निकलने नहीं देगी
पर वह भी टूटने वाला नहीं था उसने अपने पॉकेट में से लाइटर निकाला और शुरू करने की कोशिश की उस काले घने अंधेरे में सचिन के हाथ के लाइटर की चिंगारी साफसाफ दिखाई दे रही थी भले ही उसने हिम्मत जुटा ली पर डर ने अपना असर दिखाना शुरू किया था सचिन के दिल की धड़कन काफी तेज हो होने लगी हरस पाक के साथ फैलने वाली रोशनी से सचिन के चेहरे पर डर के मारे जमा होने वाली पसीने की बूंदे साफ साफ दिखाई दे रही थी रह रह कर उसे अतुल के साथ हुई वह खौफनाक घटना
नजरों के सामने आ जाती थी और फिर वह दहल उठता वह लाइटर जलाने की लगातार कोशिश कर रहा था तभी अंधेरे में उसे महसूस हुआ कि कोई उसकी तरफ बढ़ रहा है कोई अंधेरे में सेे रंगता हुआ उसके करीब आ गया था कि तभी उसे अंधेरे में से एक दस्तक सुनाई दी दरवाजे पर हुई वह दस्तक उसके काफी करीब से आती हुई सुनाई दे रही थी और हाथ का लाइटर जल उठा वह उसी बंद अलमारी के सामने खड़ा था मतलब दस्तक अलमारी के अंदर से आ रही थी क्या अतुल जिंदा होगा अपने पास के बैग
से एक मोमबत्ती निकाली और लाइटर से जलाकर मोमबत्ती नीचे जमीन पर रखते हुए खुद नीचे घुटनों के बल बैठकर पॉकेट में से पेन और कागज निकाला अतुल को अपने सामने इस गाया हुआ देखकर उसे रोना आ रहा था पर वह दस्तक शायद वह जिंदा हो जैसे तैसे उसने खुद पर काबू रख लिया कांपते हुए हाथों से कागज पर अपना नाम लिखने लगा तभी उसे कुछ अजीब सी आवाज सुनाई दी लिखते लिखते वे वैसे ही बिना आवाज किए अपने पीछे से आ रही उस आहट को सुनने की कोशिश करने लगा उस कमरे के भीतर फैले खौफनाक
सन्नाटे में एक बेहद डरावनी आवाज आ रही थी जैसे से कोई उसके पीछे फैले गहरे अंधेरे में कमरे के नीचे बेजान पड़े अपने जिस्म को हाथों के सहारे चलकर खुद को घसीट हुआ ले जा रहा हो व आवाज सुनकर सचिन के कांपते हुए हाथ कागज पर ही जम गए डर के मारे वह एक शब्द नहीं लिख पा रहा था पर तभी उसके सामने वाली उस अलमारी के दरवाजे पर दस्तक हुई साथ ही एक अजीब सी हंसी अंदर से आती हुई सुनाई देने लगी वह बस मिट्टी के पुतले की तरह बिना हिले वैसे ही बैठा रहा
अपनी नजरें तीर्थ करके अपनी दाई तरफ से आने वाली उस आवाज की तरफ देखने की कोशिश करने लगा और उसे एक सफेद धुंधली पर छाई नजर आ रही थी नीचे की जमीन पर रंगती हुई व परछाई धीरे-धीरे दीवार पर जड़ने लगी अब कुछ भी करके सचिन को उस कमरे से बाहर निकलना था पर व परछाई उसके सर के ऊपर ही छत से चिपकी नीचे सचिन की हलचल पर नजर रखे हुए थी इधर विवेक दरवाजा खोलकर एक कमरे के भीतर आ गया कुछ ही कदम आगे आया था पीछे से झट से कमरे का दरवाजा बंद हो
गया साथ ही उसके हाथ का टॉर्च भी बंद होने लगा यह देखकर डरपोक विवेक की सांसे तेज हो गई झट से उसने अपने पॉकेट में से लाइटर निकाला और मोमबत्ती जलाई अब तक टॉर्च बंद हो चुकी थी जली हुई मोमबत्ती सामने की तरफ पकड़कर वह चलने लगा उसने देखा कि एक कोने में जमीन पर सुनैना बेहोशी की हालत में पड़ी हुई है सुनैना आवाज लगाते हुए वह सुनैना के नजदीक गया सुनैना को इस हालत में देखकर वह काफी डरा हुआ था जैसे तैसे मोमबत्ती साइड में खड़ी करके सुनैना को जगाने की कोशिश करने लगा पर
वह पूरी तरह बेहोश थी हाथों से सुनैना के गालों पर हल्के से चपा मारते हुए उसे जगाने की कोशिश करने लगा पर उसे कोई फायदा नहीं था पर एक बात विवेक ने नोटिस की और वह यह कि मोमबत्ती की हल्की सी रोशनी में सुनेना बेहद खूबसूरत लग रही थी उसका बदन पसीने से पूरी तरह से भग चुका था उसके गोरे गालों पर माथे पर जमी पसीने की बूंदे मोतियों की तरह चमक रही थी विवेक धीरे से उसके चेहरे पर बिखरे हुए बालों की लट अपनी उंगलियों से हटाते हुए उसके चेहरे को निहारने लगा कमाल की
खूबसूरत थी सुनना जैसे चांदी को पिघलाकर उसकी नाजुक सी मूरत बनाई हो उसके खूबसूरत चेहरे पर बिखरे रेशमी बाल देख लग रहा था कि पूनम के चांद को काले बादलों ने ने घेर लिया हो ऐसा लग रहा था मानो वो बेहोश नहीं बल्कि आराम से सो रही हो तेज सांसों की वजह से सुनैना का उभरता हुआ सीना देख विवेक की आंखें चौंदी आ गई अपने उल्टे हाथ से वह सुनैना के चेहरे को गालों को सहलाने लगा हाथ पर लगे सुनना के चेहरे के पसीने को हल्के से संगते हुए लंबी सांस ली जैसे वो मदहोश हो
रहा था अब उसे खुद पर काबू रखना मुश्किल हो गया ममत्ती की हल्की धीमी रोशनी में मानो सब कुछ जैसे बेहद ही खूबसूरत लग रहा था विवेक ने अपने हाथ को सुनैना के गालों को सलाते हुए हाथ धीरे-धीरे उसके गले तक ले आया उसकी आंखों में अजीब सा वैशी पन जागने लगा बला की खूबसूरत हो तुम सुनैना के नाजुक मखमल जैसी काया को छूकर विवेक अपने पर से आपक हो चुका था नीचे से ऊपर की तरफ नजरें गड़ा हुए सुनेना के चेहरे को निहारते हुए बोलने लगा तुझे क्या लगा मैं उस बेवकूफ राहुल के लिए
यहां आया हूं मैं तो तुम्हारे लिए आया हूं जान कई बार तुझसे नजदीकी बढ़ाने की कोशिश की पर तू हाथ में नहीं आई मगर कभी सोचा नहीं कि इस तरह हाथ आएगी उसने हल्के से सुनेना के गालों पर किस किया और मदहोशी भरी नजरों से सुनैना को पसीने पसीने हुए बदन को देखने लगा सुनैना के गुलाबी होठों पर उसने ने अपनी नजर गढ़ाई और धीरे-धीरे वह सुनैना के होठों की तरफ बढ़ने लगा उसकी सांस भी काफी तेज हो गई थी उसने अपने होठों को हल्के से सुनैना के होठों पर रख दिया और चूमने लगा तभी
एक कागज दरवाजे की दूसरी तरफ से अंदर की ओर सरकने लगा उस पर कुछ लिखा था पर विवेक का ध्यान उस पर नहीं गया तभी एक हल्के हवा के झोंके से साइड में रखी हुई मोमबत्ती बूझ गई और पूरा कमरा एक काले घने अंधेरे में डूब गया और उसके साथ एक अजीब सी आवाज उसके कानों में लगातार गूंजने लगी आवाज जैसे कई सारी मक्खियां उसके इर्दगिर्द मंडरा रही हो अपने चारों ओर फैले घने अंधेरे में गूंजती धू धू धू इस तरह की वह आवाज अब इतनी तेज होने लगी कि वह बर्दाश्त नहीं कर पा रहा
था विवेक को कुछ समझ में नहीं आ रहा था उसने अपने पॉकेट से लाइटर निकाला और जलाने की कोशिश करने लगा एक ही बार में लाइटर शुरू हो गया लाइटर की रोशनी में उसे अपने आसपास कई मक्खियों का झुंड दिखाई दिया हाथ से उनको हटाते हुए उसने लाइटर की रोशनी जमीन पर लेटी सुनैना की तरफ की और मानो डर के मारे उसकी आवाज हलक में ही अटक गई नीचे का व डरावना दृश्य देखकर उसकी आंखें फटी की फटी रह गई नीचे एक सड़ी हुई लाश थी जिससे कई सारे मांस खाने वाले लालवा कीड़े लकर जमीन
पर इधर उधर फैल रहे थे और वह मक्खियां उसी लाश के ऊपर मंडरा रही थी वह जमीन पर नीचे जिस जगह बैठा था वहां पर भी बहुत से कीड़े उसके शरीर के नीचे आकर कुचल चुके थे उस लाश के मुंह से भी कई सारे कीड़े मक्खियां बाहर निकल रही थी तभी विवेक को भी अपने मुंह पर कुछ सरसरा नहीं की हलचल महसूस हुई उसने लाइटर अपने चेहरे की तरफ किया और उसकी बची खुची हिम्मत भी टूट गई उसके मुंह के बाहर और अंदर भी कुछ मांस खाने वाले लारवा चले गए थे अपने मुंह के भीतर
उन कीड़ों की हलचल से साफ साफ महसूस हो रही थी उस बेहद घिनौनी हलचल से उसकी हिम्मत जवाब दे गई अब वह सब कुछ उसके बर्दाश्त के बाहर था जोर जोर से चीखते हुए डर के मारे उसने जमीन पर थोक दिया सच में उसकी थोक से कुछ लारवा जमीन पर रंगते हुए दिखाई देने लगे विवेक को मानो जैसे उल्टी आने लगी व जोर जोर से दरवाजा पीटने लगा उसकी उल्ट की आ आज उसी कमरे के बाहर कुछ कदमों पर कोई खड़ा होकर साफ-साफ सुन रहा था रात के सन्नाटे में विवेक की लगातार उल्टिया करने की
वो आवाज काफी डरावनी लग रही थी उल्टिया करते हुए उसकी नजर दरवाजे के नीचे से अंदर आई उस कागज पर गई उसने कागज उठाया और नाम देखा यह कहानी आपको अच्छी लगी हो तो हमें सब्सक्राइब करें हमारा [संगीत]