[संगीत] कई लोग सेवा कार्य करके [संगीत] [संगीत] दूसरे को उल्लू बनाए ना हम किसी के द्वारा [संगीत] हम आत्मा है आत्मा का स्वभाव है सत्य आनंद सत्य माना जो सदा रहे चित्रा माना जो बुद्धि में ज्ञान प्रकाश देता है मच्छर की बुद्धि में भी ज्ञान प्रकाश देता मैं दुनिया के सभी राष्ट्रपतियों को और प्रधानमंत्री और बापूजी से प्रसिद्ध बाबा लोगों और आसाराम बापू को चैलेंज करता हूं क्या मच्छर के साथ अगर मच्छर पकड़ने का खेल खेलोगे तुम आप हर जाओगे मच्छर कम के आगे गाना गाएगा और आप पकड़ने में 10 बार यूं करोगे नौ बार
उसकी ही तो भी शायद एक बार आपकी जीत होगी तो मानना पड़ेगा की मच्छर की बुद्धि में भी चेतना है जो सर्वव्यापक परमात्मा चेतना है उसको सच्चिदानंद कहते और उसे चेतना के द्वारा जीने की लालच से शरीर में फांसी है जन्म लेता है श्री कृष्ण का अवतार सभी के मंगल के लिए आप देखोगे तो श्री कृष्ण का जीवन समस्याओं के से भरा श्री कृष्ण के आने के निमित्त उनके छह भाइयों की बाली चली जाती मैन बाप को जेल मिलता है और स्वयं जन्म है तो जन्मतिथि [संगीत] और चौदस को भूतनाथ [संगीत] पराए घर ले और
दूध की जगह पर मिश्रित दूध जहर वाला पीला पड़ा श्री एक श्री कृष्ण एक हुए छठ का सुराग कभी धन का सुरैया निगल गया कृष्ण पूरा जीवन बढ़ा निंदा संघर्ष और आकर्षण प्रेम माधुरी सब था प्यार प्रेम भी बहुत था और विरोध विघ्न भी बहुत द ना प्यार प्रेम में फंसे वृंदावन छोड़ दिया तो छोड़ दिया [संगीत] और प्रजा का शोषण हो रहा अर्जुन को उत्साहित किया और दुर्योधन ऐसा ही बना रहेगा तो समाज का क्या हाल होगा समाज का शोषण होता रहे और युद्ध क्यों किस कम का क्रांति के बाद शांति आती शोषित व्यक्ति
शोषित होते रहे और हम युद्ध रोकने का प्रयास करें तो यह धर्म होगा [संगीत] अर्जुन ने इधर-उधर की धार्मिक बातों को देख सुनकर छटक ना चाहा लेकिन श्री कृष्ण ने उसके सारे तर्क बेबुनियाद कर दिए तो ज्ञान में श्री कृष्ण ऐसे प्रकार ऐसी गीता है अपने व्यवहार और जीवन में देखो तो चतुर्भुज नारायण के रूप में प्रकट होते [संगीत] लेकिन साधु संतों को चरण बुलाते हैं और पत्तल देते हैं [संगीत] तो उसको अपने कर चलाना भी शर्म लगता है अपना बड़प्पन संभाले में कितना खो जाता है पागल हो जाता है लेकिन भगवान का [संगीत] द्रोपती
ने सुना के दुष्ट दुर्योधन ने वृद्ध भीष्म पितामह को उकसाया की आप धनुर्विद्या सीखते समय पहाड़ियों से गिर जाते तो पहाड़ी टूट जाती और आपको कभी फैक्चर नहीं हुआ आपके पास इच्छा मृत्यु है और आप हमारे सेनापति और दुर्योधन के सेनापति भीष्म पीतमा ह दुर्योधन के सैनिक मारे गए पितामह आप अगर थन लो इन पांडवों के बच्चों की क्या ताकत है कल की शाम नहीं देख सकते आपकी शक्ति से हम परिचित हैं [संगीत] पहुंचा दूंगा श्री कृष्ण हथियार एन लिया तो shrikhandine मेरे सामने तीन भीष्म पितामह ने प्रतिज्ञा की है पांडवों में गुप्तचर के द्वारा
खबर पद गई बड़ी चिंता व्याप एम पुरुष पांडवों का शिविर दोनों स्थल बड़ी गंभीर खाई में गोटा लगाने लगे द्रोपती भयभीत हो गई माधव गोविंद कृष्ण द्रोपती के चित्रा अंतर्यामी बना भी पावरफुल है जय राम जी बोलना पड़ेगा माधव कृष्ण तुमने सुना है की दुष्ट दुर्योधन ने भीष्म पितामह को प्रतिज्ञा किए के पंच पांडव कल शाम का सूर्यास्त नहीं देखेंगे [संगीत] ऐसे नहीं तो क्या दुखी हो जाए जब भी कोई दुख और मुसीबत है उसको इतना महत्व ना दो की आपकी शांति और मधुरता छीन जाए है कृष्ण तेरी जय हो पूरे विश्व के लिए संदेश
दिया कितना सुंदर दुख और मुसीबतें तो आप दुख और मुसीबत को इतना महत्व जाए क्या ये मुसलमान को ज्ञान नहीं चाहिए ईसाई और पारसी को ज्ञान नहीं चाहिए और इधर जाती वालों को यह ज्ञान नहीं चाहिए कृष्ण की जन्माष्टमी मोमाई वैन शो जीवन के jivbhutas सनातन तुम मेरे वंशज हो तुम सनातन हो तुम आज हो तुम अमर हो वसंत विहार जैसे पुराने कपड़े त्याग कर नया पहनते ऐसे ही शरीर छूट जाते हैं इस शरीर को मैं मानकर शरीर की पीड़ा अपने पर टोपी मत मैं बीमार हूं मैं बीमार हूं तू कभी भी मार नहीं हो
सकता जब भी बीमार होता है पंच भौतिक शरीर बीमार होता है जब भी दुखी होता है तो यह चंचल मैन दुखी होता है जब भी चिंता होती है तो चित्त में चिंता होती है तो अपने को उनसे जोड़कर परीक्षित एन देह के साथ एकाकार होकर तू अपने को कोष मत अपने को टच मैन मत ईस्ट जागृत प्राप्त varanbodh updeshantitva ज्ञानम ज्ञानी नट तत्वदर्शी ना उठो जागो और उसे श्रेष्ठ पुरुषों के चरणों में जाओ आत्मज्ञानी के पास मूत्र में उपदेश देंगे अगर तुम मुझे अपना मानता है यश श्रद्धा कम है तो sujataon के पास अर्जुन की
थोड़ी बहुत laparvahik अथवा तो अति सानिध्य अति सानिध्य होता है तो व्यक्ति अवज्ञा करता है श्री कृष्ण ने अर्जुन को ऐसा वाट सिखाया और फिर प्रश्न ऐसा कर दिया की उसको भूख लगे मनुष्य जीवन के उद्देश्य आदि भौतिक किसको बोलते आदि देवी kamjkin अध्यात्म की आदि भौतिक क्या होता है आदि देवी क्या होता है अध्यात्म क्या होता है अर्जुन को प्रश्न ऐसा मिला की जिज्ञासा जागी और श्री कृष्ण ने उसकी जिज्ञासा की पूर्ति करके अर्जुन को ऐसी जगह पहुंचा जहां स्वयं पहुंचे द ऐसा कोई जगत का गुरु ऐसा कोई जगत का हितेषी कभी-कभी धरती पर
आता है जहां स्वयं पहुंचा हो आत्मदेव में [संगीत] छेद बंद क्यों हरि ओम सरवटे दुर्गा की क्षय [संगीत] आज मटकी फोड़ कार्यक्रम होगा मक्खन मिश्री यह मटकिया तो fodenge लेकिन उसके पहले तुम्हारे हम की मटकी फूटे ऐसा कन्हैया प्रेम भरा कुछ लग जाएगा ताकि मंगल हो जाए यह मटकिया तो देश भर में विदेशों में कहीं पुट्टी होगी मटकी फोड़ना मेरा उद्देश्य नहीं है लेकिन मटकी के भीतर छुपा हुआ है वह मक्खन नित्य नवीन रस वो ब्रह्म सुख प्रति श्री कृष्ण ने वही जीवन भर किया और मेरा उद्देश्य भी वही है आप ध्यान से सन रहे
आपने अभी वैदिक प्रार्थना सुनी दुर्जन सज्जन हो हमारा वेद कितना विशाल दृष्टि करता है ऐसा नहीं की दर्जनों का सत्यानाश सुने दुर्जन सज्जनों सज्जनों को शांति मिले और खाली शांति शांति के भोगी ना बने नहीं तो शांति कब होगी कभी अशांति का शिकार हो सकता है उसे परमात्मा तत्वों को मैं के रूप में जानो तो फिर शांति और अशांति दोनों आपके लिए खिलवाड़ हो जाए जीवन और मृत्यु आपके लिए खिलवाड़ हो जाएगा मैन और अपमान आपके लिए खिलवाड़ हो जाएगा क्योंकि यह संसार एक खिलवाड़ संसार सत्य नहीं है ठोस नहीं है सत्य भी नहीं है
संसार उसे कहते हैं जो सकता जाए जो बदलता जाए रामजी आए कृष्ण जी आए और भी कई अवतार है लेकिन संसार तुम अपनी गति से खून पसीना बता जतन के चादर सोता चाहिए नव तो हिलती जाएगी तू हंसता जाए रोता जा ये ज्ञान अगर आपके पास है तो बड़ी से बड़ी आपको ढाबा नहीं सकेंगे और बड़ी से बड़ी संपदा भी आपको अहंकारी अथवा भोगी बनाकर लाखों में नहीं भेजेगा वह अपने साथ मुसीबत गले में फंसा भगत मुसीबत का संसार के सुख सुविधा का मजा ले लो यह तुम्हारा नजरिया तुम्हें बड़ी सजा के तरफ धकेल देगा
आपकी बुद्धि का वस्तुओं का पद का उपयोग करके आप सुख बांटो तो उसके बदले में परमानंद प्रकट होगा [संगीत] ऐसी तपस्या के भगवान नारायण बेटे के रूप में मिले फिर भी दशरथ को संसार में दुख दिए बिना नहीं छोड़ा तो जो छोटा मोटा दुख आता है उसको पकड़ के मैं दुखी हूं दुखी हूं यह बेवकूफी छुड़ाने के लिए जन्माष्टमी का सत्संग है अनुकूलता आती है प्राकृतिक नियमों के अनुसार प्रारब्ध देख से कर्मों के प्रभाव से और प्रतिकूलता भी आती तो प्रतिकूलता और अन्य बोलता ऐसा कोई मैं का लाल नहीं है की जिसके जीवन में कभी
pratikuldham ना आई और ऐसा कोई मैं का लाल नहीं की जिसको प्रतिकूलता ही मिली है इसीलिए बोलते नहीं मैंने बहुत दुख देखे हर्ता तो दुख देखा फिर बीच में सुखाया नहीं तो सतत दुख होता तो एक ही दुख होता नहीं दुखी हूं नहीं मैंने बहुत दुख देखे तो दुख सुख दुख सुख दुख सुख ऐसा भी होता है यह तो पायदान है दुख का पायदान आया सुख का पायदान आया इसको छोड़ते चलिए बैठना है ना अच्छी सड़क देखकर चादर बिछा के वहां नमाज पढ़ना है आप तो चलते रहिए तो पहुंच जाएंगे नमाज की जगह पर सत्संग
की जगह जन्माष्टमी का उत्सव आज का सत्संग आपको यह संदेश देता है की आपके जीवन में जो कुछ घटित होता है उसके भोगी मत बानो परिस्थिति प्रतिकूल आई तो दुख होता है अनुकूल आई तो सुख होता है अब प्राकृतिक नियम से भी आती है अनुकूलता प्रतिकूलता जैसे आंधी धूप गर्मी प्राकृतिक नियम है यह सफलता मिल गई यश मिल गया है और प्रारंभ की नाराजगी से भी प्रतिकूलता पेश हुआ अथवा तो किसी ईर्षा को व्यक्तियों के द्वारा भी प्रतिकूलता बना दी जाती है जैसे भगवान बुद्ध द उनका यश देखकर कुछ लोग संगठित हो गए उनका यश
धूमल करने के लिए नानक जी के लिए बदमाशों ने क्या नहीं किया और नानक को दो बार जेल में जाना पड़ा फिर भी नाम रखकर प्यारे अभी भी जानते हैं की उनको जेल में भेजने वालों की नालायक है हमारे ननद जी लायक द महापुरुष द बुद्ध पर लांछन लगाने वालों की नालायक की थी बुद्धिमान पुरुष द साइन देवराम पर लांछन लगाने वालों की नालायक थी स्वामी रामसुखदास अभी हो गए उनका शरीर शांत हुआ आसपास ऐसी गंदी चाल चले लोग इतना गंदा को प्रचार किया रामसुखदास महाराज जी के अपने आश्रम में आए द मैं भी उनका
दर्शन करने जाता था है उनसे मिलने जाता था ऐसा नहीं बोल रहा हूं दर्शन करने जाता था तो मेरे राजा में उनके प्रति श्रद्धा है तो वो क्या होंगे आप समझ गए ऐसे महान संत के लिए ऐसी बुरी में बोलूंगा तो मेरी जीव खराब होगी ऐसी कहानियां बनाई ऐसा को प्रचार किया जो श्याम सुख दास जी महाराज को ऐन और जल का त्याग करना पड़ा पर कोई संत या सज्जन ऐन और जल छोड़ता है तो जिनके निमित्त छूटता है उनके लिए मुसीबतें प्रकृति भेज देते जय राम जी हमारी हर हुई हमारी जीत हुई ऐसा करके
आपसे बीच में श्री रामचंद्र जी क्या करते द खेलते खेलते जब व्यक्ति के सामने का पक्ष हारने की कगार पर तो अपने मित्रों को इशारा करते और स्वयं भी हर जाते और सामने वाले को विजय देते द यह तो बड़े का बड़प्पन है किसी को यश दे दो आप बापूजी बापूजी करते हो यश दे रहे तो इसमें क्या मेरी बहादुर है क्या आपकी सज्जनता है अब मैं फुल फुल रहा हूं मैं बड़ा बापू हूं इसलिए इतना महान मिल रहा है तो मेरे को ही घटा पड़ेगा यह तो आपकी सज्जनता है आप अपनी सज्जनता देखा रहे
हमारा कर्तव्य हम dugnition जनता देखा है ऐसा नहीं की हम रावण के नाय मैन बाप हो जाएगी बहुत प्रभावित कर गया ऋषिकेश गया हरिद्वार सत्संग में शुरू कर रहे द सत्संग थोड़ा शुरू हुआ था और मैं उनके पास मंच पर पहुंच गया अब मैंने धीरे से कहा की महाराज जी अब मैं गुजरात जा रहा हूं तो मंच पर ही मेरे को प्रणाम करने लगे 40 साल तो होंगे अब मैं तो उनके आगे बच्चा अब मैं कहता हूं की स्वामी जब मैं जा रहा हूं मैं तो खाली हाथ जोड़कर शालीनता दिखा रहा हूं और वह महापुरुष
मंच पर सत्संग करते समय उनके भक्तों के बीच मेरे को मत्था टेक के परिणाम कर रहे हैं मैं क्या जोगी रे क्या जादू है तेरे प्यार में क्या जादू है तेरे जोग में क्या जादू है तेरी प्रेम भक्ति में और क्या जादू है तेरी नम्रता तब से मैं रामसुखदास जी का बड़ा भारी प्रशंसा की पड़ी नहीं थी तो मैं प्रशंसा करने आप जो चीज चाहते हैं वह छीन ली जाएगी ईश्वर के शिव कोई भी चीज आप चाहोगे तो वह छीन ली जाएगी और दुख दे जाएगी आप ईश्वर को चाह हो तो वह सब ठीक है
बाकी कुछ भी चाह ईश्वर को छोड़कर मनचाहा सफलता चाहा वही चाहिए ने अभ्यास बनाएंगे अब मैं श्री कृष्ण की क्षमता के विषय में जरा सी घटना कहता हूं द्रोपदी ने कहा की कन्हैया तुम्हें पता है की पांचो पांडव कल के शाम का सूर्यास्त नहीं देख पाएंगे सद्बुद्धि आएगी दरोगे द्वेष करोगे तो और बुद्धि होगी अभी तो कल सुबह अस्त होने के समय की तो बात है ना अभी से कहे को दुखी होगी शांत मानो शांत बनाओ दुर्योधन की पत्नी रोज सुबह पितामह को प्रणाम करने जाते हैं और वह उनको कहते हैं सदा सुहागन आज रात
को तू सावधान रहना ज्यादा सोना नहीं प्रभात को 4:00 बजे के बाद चार से 5:30 के बीच में कम तुझे करना है उनको प्रणाम ऐसे करना है की उनको पता चले चूड़ियां मुनिया हिला देना क्यों प्रणाम कर रही है [संगीत] [संगीत] अब देखो कर्म में कुशल कैसे हैं केवल उपदेश नहीं देते प्रैक्टिकल है श्री कृष्ण द्रोपदी कहीं गलती ना कर बैठे तो सुबह रास्ते पर खड़े हैं द्रोपदी जा रही के पगली तू पद प्राण पहन के जा रहे हैं तेरे चप्पल का आवाज़ पद प्राण का आवाज़ सुनकर कहीं आंख खोल देंगे तो बाजी बिगड़ जाएगी
यह पद प्राण मुझे दे दे अपने पीतांबर में भक्त आणि के जूते संभालने वाला भगवान गोद यह कम नहीं कर सकेंगे अल्लाह भी नहीं करेंगे लेकिन तुम्हारा कन्हैया [प्रशंसा] दुपट्टे में अपने दो सेल में अपने पीतांबर में इस वक्त आने की चप्पल रख दी गई प्रणाम किया और हिलाया हाथ को सदा सुहागन सदा पीतम आपके मुंह में भी शक्कर प्रभात की चिंता होती की कल रात को कृष्ण ने जो समझाया था कल रात को अपने pratigyaon से पंच पांडवों को सूर्यास्त के पहले भेज दूंगा और सूर्य उदय नहीं हुआ ऐसे प्रभात कल पीतमा चंद्रमा दिखाना
बंद हो जाए और सूरज उगने की बेला को सूरज ना हो उसे समय तो मंत्र जागृत होते उसे समय [संगीत] कृष्ण बंसी की आवाज़ आई बोले ए रहे द्रोपदी अपनी जगह जा 5 पांडवों के मैं अपने प्रतिज्ञा की थी लेकिन वरदान भी दे दिया है अब माधव वरदान तो दे दिया लेकिन मैं सत्य प्रतिज्ञा हूं अगर मारता हूं तो भी मेरा वरदान झूठा होता है और नई मारता हूं तो मेरी प्रतिज्ञा झूठी होती कृष्ण मैं मृत्यु को स्वीकार करूंगा लेकिन मेरी प्रति एन जाए ऐसा तुम ही हो तो मैंने हथियार एन उठाने की प्रतिज्ञा की
थी मैं अपनी प्रतिज्ञा तोड़ देता हूं मेरे भक्त राज की प्रतिज्ञा पुरी करता हूं ये कैसा भगवान है कैसा स्वामी है भगवान नहीं उठाऊंगा कृष्ण ने हथियारों उठाने की अपनी प्रतिज्ञा ना उठाने की प्रतिज्ञा तोड़ दी भीष्म की दोनों प्रतिज्ञा सच्ची हुई और पांडव बच गए कैसे बचाने वाला कितनी उदारता है कितनी सहायता है कर्म करने की कितनी कुशल इसी का भयंकर दुख मिटाने के लिए आपकी प्रतिज्ञा अलविदा होती तो होने दो आप सत्य निष्ठ हैं सत्य बोलो लेकिन सत्य हो हितकर हो मधुर हो और सत्य हो यह शास्त्र कहते आप जो बोलते हैं वह
सत्यम सत्यम बोल दिया और सिपाही और पुलिस वाला पकड़ जाएगा वो नहीं पकड़ेगा वो जानती झूठ भी बोलती है कटु भी बोलती है फिर भी मैन को पाप नहीं लगता क्यों की बच्चे के हिट की प्रधानता है तो वेद कहता है जहां हिट की प्रधानता है वो सब कर्म धर्म हो जाता है किसी ने बोला मैं चाकू मार दूंगा उठाने में फरियाद करो किसी ने चाकू दिखा दिया पुलिस कमिश्नर के पास जाओ लेकिन तीसरा है डॉक्टर एन मरने की धमकी दी नदी है सचमुच में तुम्हारे शरीर पर छुरी घुमा दी बहुत सारा कुछ निकाला कुछ
हुआ और तुम बेहोश रहे जब तुम होश में आए तो उसको चाकू घूमने का फीस देना पड़ता है हालांकि कई ऐसे होते हैं की जरूरत भी नहीं ऑपरेशन करके पैसा लूटने लेकिन उनको तो पाप लगेगा लेकिन जो तुम्हारे स्वास्थ्य के लिए दूसरा कोई उपाय नहीं और शैली क्रिया करता है उसको पाप नहीं लगेगी जन्माष्टमी का संदेश आपको परम पद तक पहुंचने का सुदृढ़ ज्ञान मिलता जो देश विदेश में लाखों करोड़ लोग जो भी सुनते होंगे ये आज के संदेश को अपने जीवन में लगे तो जन्माष्टमी का आपको हजार गुना कर लूंगा [संगीत]