आप ट्रेंस में इतने बार सफर किए हो आप यह नोटिस करना कि जो स्टेशंस आते हैं वो बहुत अलग-अलग तरह के होते हैं जैसे कि आप किसी स्टेशन में देखते होंगे सेंट्रल लिखा हुआ है जैसे कि कानपुर सेंट्रल किसी और स्टेशन में आप देखोगे जंक्शन लिखा हुआ है किसी और स्टेशन में आप देखोगे टर्मिनल लिखा हुआ है जैसे कि आनंद विहार टर्मिनल तो ये आखिर क्या होते हैं सब अलग-अलग क्यों होते हैं देखो स्टेशन तो आखिर का टेशन हुआ तो यह क्या अलग-अलग देते हैं तो असल में इसका भी डीप मीनिंग है जो कि इतने
लोग ट्रेन में सफर करते हैं लेकिन कभी लोग सोचते ही नहीं इसके बारे में देखो जब भी जंक्शन आए कोई भी जंक्शन स्टेशन तो समझ लो वो एक मीडियम साइज्ड स्टेशन है यानी किसी भी जंक्शन से एटलीस्ट तीन डिफरेंट रूट आपको मिल जाएंगे एक स्टेशन है और तीन अलग-अलग रूट उस जगह पे कनेक्ट हो रहे हैं मिनिमम तीन तो वो जंक्शन बन जाता है जंक्शन के बाद आता है सेंट्रल स्टेशंस पूरे भारत में सिर्फ पांच सेंट्रल स्टेशंस हैं जैसे कि कानपुर सेंट्रल मुंबई सेंट्रल चेन्नई सेंट्रल त्रिवेंद्रम सेंट्रल और मैंगलोर सेंट्रल सेंट्रल स्टेशंस को ओरिजिनल गैंगस्टर
कहा जाता है इसे ओजी कहते हैं ना वो स्टेशंस ये वो स्टेशंस है जहां पे अगर आप जाओगे तो आपको भारत के किसी भी कोने का ट्रेन मिल जाएगा जी हां सबसे पावरफुल स्टेशंस को सेंट्रल स्टेशंस कहा जाता है और पूरे यूपी बिहार बंगाल एरिया में सिर्फ कानपुर एक जगह है जो कि है सेंट्रल स्टेशन अब आते हैं टर्मिनल जैसे कि आनंद विहार टर्मिनल या या फिर ऐसे बहुत टर्मिनल स्टेशंस आपको दिख जाएंगे टर्मिनल स्टेशंस मतलब वो स्टेशंस जहां पर ट्रैक खत्म हो जाता है लिटरली टर्मिनल शब्द ही टर्मिनेशन से आया है टर्मिनेशन मतलब किसी
चीज को टर्मिनेट कर देना खत्म कर देना और आप ये नोटिस करना कि आप अपना टिकट बुक करोगे और ट्रेन का रूट चेक करोगे तो ज्यादातर टाइम जो आखिरी स्टेशन होगा जहां पर ट्रेन रुकती है वो टर्मिनल ही होगा टर्मिनल वो स्टेशन होता है जहां से ट्रेन वापस बैक हो जाती है क्योंकि वहां पर ट्रैक खत्म हो जाता है अब आते हैं कैंट स्टेशन में देखना आगरा सीए एनटीटी कंटोनमेंट अंबाला कैंट ऐसे कई स्टेशंस आपको दिख जाएंगे जो कि कैंटोनमेंट रेलवे स्टेशंस होते हैं कैंटोनमेंट रेलवे स्टेशंस वो स्टेशंस होते हैं जो कि मिलिट्री कैंटोनमेंट यानी
मिलिट्री एरिया के आसपास हो आर्मी से जुड़े हुए चीजों की सामानों की मूवमेंट अच्छे से हो पाए वो होता है कैंट कैंटोनमेंट स्टेशंस दिल्ली कैंट भी आपको मिल जाएगा मेरठ कैंट भी आपको मिल जाए जाएगा क्योंकि ये कैंटोनमेंट रीजन में होते हैं यानी मिलिट्री एरिया में जहां पर मिलिट्री का कैंप हो इंडिया में रोज करोड़ों लोग स्टेशंस और ट्रेंस में जाते हैं लेकिन बहुत कमी लोगों को इसके बारे में पता था बढ़ते हैं अगले फैक्ट पर याद है आपका वो फैंटेसी जिसमें कि हम सोचते थे कि मान लो मोबाइल रखा हुआ है या कंप्यूटर रखा
हुआ है और हम बस सोच के मोबाइल कंप्यूटर या टीवी को कंट्रोल कर पाएं सिर्फ सोच के तो व्हाट अ टाइम टू बी अलाइव बिकॉज ऐसा हो चुका है अब एलोन मस्क का न्यूरलिंक प्रोजेक्ट में इतने डेवलपमेंट्स आ गए हैं जो कि आप सोच भी नहीं सकते हो किसी को पैरालिसिस है एक ऐसा इंसान जो कि अपना हाथ पैर नहीं हिला पाता सर भी नहीं हिला पाता वो बस सोच के अब कंप्यूटर्स में चेस खेल सकता है और खेल रहा है सोच के मैसेज में टाइप कर सकता है वो मन में ए सोचेगा तो ए
टाइप होगा बी सोचेगा तो बी टाइप होगा इनफैक्ट एक्स प्लेटफॉर्म यानी 324 को पोस्ट किया गया था ये एक बहुत ही ऐतिहासिक ट्वीट है क्योंकि यह विश्व का पहला ऐसा ट्वीट है जो कि बस सोच के किया गया है न्यूरलिंक के जरिए यानी अगर यह चिप आपके दिमाग में लगा दिया जाए तो आप बस सोचोगे और आप टीवी का चैनल चेंज कर पाओगे सोचोगे और रील को स्क्रॉल कर पाओगे ये अभी तक बस एक फैंटेसी थी एक ऐसी फैंटेसी जो बस मूवीज में ही पॉसिबल हो पाता था लेकिन अब ये ऑफिशियल एक्चुअल रियलिटी बन चुका
है बढ़ते हैं अगले फैक्ट पर क्या आपने उस लॉ सूट के बारे में सुना जिसमें कि को चाहिए डाटा कि लोगों के मन में क्या चल रहा है तो जो लोग आपस में facebook's को और नए शोज बना पाएगा तो यही चीज facebook.com का ये आर्टिकल देखो google's टू डिलीट यूजर्स इनकॉग्निटो ब्राउजिंग डाटा इन लॉसूट सेटलमेंट मतलब ये क्या है भाई क्या है यह इनकॉग्निटो का मतलब ही यही होता है कि हम क्या चला रहे हैं नेट पे क्या देख रहे हैं यह किसी को भी नहीं पता होना चाहिए और ब्राउजर में ऑटो डिलीट हो
जाना चाहिए तो यह हेडिंग क्या है google2 में नेट चलाते थे तो जो डाटा हम स्टोर करते थे उसको हम डिलीट कर रहे हैं तो काहे का इनकॉग्निटो हद है आखिरकार कोट ऑफ लॉ ही इन कंपनीज को ट्रैक पे लाती है सिर्फ एक ही कंपनी है जो एक्चुअल में अपने वूलो पे टिकी हुई है अपने नियम पे टिकी हुई है वो है [संगीत] appleid.com एल का एक बाइट भी रिकवर करके दिखा दे नहीं हो सकता इंपॉसिबल एल एल है भाई अपना सेव है वो बढ़ते हैं अगले फैक्ट पर ये एक दिन पहले का ही पिक्चर
है और ये बहुत लोगों का फैंटेसी था कि ऐसा कुछ हो स्टैचू ऑफ लिबर्टी स्टक बाय लाइटनिंग ये एक्चुअल में लाइटनिंग से स्टक हुआ और परफेक्ट टाइम पे हाई फ्रेम कैमरा ने इसको कैप्चर किया ये एक एक्चुअल रॉ फोटो है साल 2011 के बाद ये पहला अर्थक्वेक है न्यूयॉर्क का जिस दिन लाइटनिंग स्ट्राइक हुआ उसके अगले दिन ही 4.8 मैग्निटिया इसी टाइम के दौरान जापान में भी अर्थक्वेक हिट किया था और इसी टाइम के दौरान भारत के हिमाचल प्रदेश में भी अर्थक्वेक हिट किया था आपको पता है वैज्ञानिक ये कहते हैं कि जो छोटे-छोटे अर्थक्वेक्स
होते हैं ये हमारे धरती के प्लेट्स के लिए अच्छा होता है क्योंकि अगर ज्यादा टेंशन धरती के प्लेट्स में बिल्ड हो जाए तो एक बड़ा सा अर्थक्वेक आ सकता है जो कि सबके लिए बहुत ज्यादा खतरनाक हो सकता है सात आठ मैग्निटिया तो अगर छोटे-छोटे अर्थक्वेक आ रहे हैं और मल्टीपल टाइम्स पे आ रहे हैं तो ये अच्छा है धरती के लिए इसका मतलब टेक्टोनिक प्लेट्स की एनर्जी रिलीज हो रही है जिसका मतलब कि अर्थक्वेक आएंगे लेकिन कोई बड़ा अर्थक्वेक नहीं आएगा अगर कभी नौ या 10 मैग्निटिया इसको अनुपम खेड़ जी ने अपने चाहता था
आप लोगों के साथ सम पीपल टॉक टू यू इन देयर फ्री टाइम एंड सम पीपल फ्री देयर टाइम टू टॉक टू यू ये बहुत ही गहरी बात है और सबके लाइफ में अप्लाई होती है कुछ लोग आपसे बात करने के लिए फ्री टाइम निकालते हैं और कुछ लोग अपने टाइम को फ्री करते हैं ताकि वो आपसे बात कर पाए ट्स गजब कभी गर्लफ्रेंड और फ्रेंड से लड़ाई हो ना तो यह भेज देना उसको मस्त सूट करेगा बढ़ते हैं अगले फैक्ट पर आपने उन टावर के केसेस के बारे में सुना होगा जिसमें एक घर का इंसान
टावर के कंपनी के ऊपर केस करता है कि मेरे घर के बहुत पास ही ये टावर लग रहा है टावर से बॉडी में प्रॉब्लम्स होते हैं यह बात बहुत ही ज्यादा प्रचलित है लेकिन जब यही बात कोर्ट में जाती है तो कोर्ट या फिर गवर्नमेंट इस बात को नकार क्यों देती है और वह कहीं भी शहर के बीच में ही टावर क्यों लगा पाती है मतलब कोई इंसान अगर केस करेगा टावर कंपनी के ऊपर या गवर्नमेंट के ऊपर ही फाइल कर दे केस फिर भी कोर्ट ज्यादातर केसेस में इस बात को नकार क्यों देती है
और टावर कंपनी को क्यों कर देती है कि वह आपके घर के सामने ही टावर लगा पाए ऐसा इसलिए जनरली ऐसा इसलिए होता है क्योंकि टावर से नॉन आयनाइजिंग रेडिएशन निकलता है यानी एक ऐसा रेडिएशन जो कि बॉडी के सेल को ब्रेक नहीं कर सकता है और ना ही कोई सीरियस डिजीज कॉज कर सकता है यानी अभी तक जितना विज्ञान ने जाना है मोबाइल टावर्स हार्मफुल नहीं होते भले ही वो 4g हो या 5g हो अब कोर्ट्स और गवर्नमेंट सिर्फ साइंटिफिक डाटा को ही मानेगी किसी क्लेम किसी दावे को कोर्ट कभी नहीं मानेगी जो साइंटिफिक
रिसर्चस में प्रूव हुआ है उसी को मानेगी हां लेकिन और कई रीजंस है जिसके चलते कभी-कभी इंसान जीत जाता है टेलीकॉम कंपनीज के खिलाफ जैसे मान लो जो नॉयज है वो बहुत ज्यादा हो रहा है जिससे कि लोगों को डिस्टरबेंस हो रही है तो उस बेसिस पे टावर को हटाया जा सकता है लेकिन यह कहना कि टावर से रेडिएशन निकलता है उससे कैंसर होता है ये वो ये दुनिया की कोई कोर्ट ने कभी भी नहीं माना है यूवी रे एक्स रे ये सब होते हैं खतरनाक रेज आयनाइजिंग रेज जो कि बॉडी के सेल को ब्रेक
कर देते हैं यानी हर सेल में जो डीएनए मौजूद है उसको ब्रेक कर देते हैं जिससे बॉडी का जो इंस्ट्रक्शन बुक होता है वही टूट जाता है और बॉडी कैसे नॉर्मली ग्रो होगा यह बॉडी को पता ही नहीं होता जींस ब्रेक होने के बाद और फिर आउट ऑफ कंट्रोल ग्रोथ हो जाता है सेल्स का जिसे कि कैंसर कहते हैं लेकिन जो मोबाइल टावर से निकलती है नॉन आयनाइजिंग रेज वो बॉडी पे जरा भी इफेक्ट नहीं करती बढ़ते हैं अगले फैक्ट पर इस पूरे धरती के एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में यानी बॉली लीवुड और हॉलीवुड सबको कंबाइन कर
दें तो क्रिश्चन बेलही एक ऐसे एक्टर हैं जिनको कि ट्रांसफॉर्मेशन किंग माना जाता है ट्रू सेंस में ऐसा इसलिए क्योंकि ये बहुत बार अपने आप को ट्रांसफॉर्म किए हैं जो कि बहुत ही मुश्किल टास्क है जिसके लिए अनलिमिटेड लेवल का डेडिकेशन चाहिए होता है जैसे कि द मशीनिस्ट मूवी के लिए ये अपने बॉडी वेट को 54 किलोज पे लाए थे और इतने पतले हो गए थे बैटमैन बिगिंस के लिए 86 किलो पे लाए थे अपने बॉडी को द फाइटर के लिए 65 केजी पे अमेरिकन हसल नामक मूवी के लिए 104 केजी पे लाए थे वाइस
मूवी के लिए 103 केजी पे लाए थे फर्ड वर्सेस ferrari's का जो नॉर्मल एनर्जी होता है वो डिस्टर्ब होता है बहुत जब कोई ट्रांसफॉर्म करता है तब बढ़ते हैं अगले फ एक्ट पर साल 2003 एयरपोर्ट पे आपने बहुत सारे प्लेंस को रखे हुए देखा होगा वो अक्सर वहां पार्क्ड रहते हैं जब तक उनका टेक ऑफ टाइम नहीं आता तब तक पर एयरपोर्ट की घमासान सिक्योरिटी को देखने के बाद क्या आपको ऐसा लगता है कि एयरप्लेन को चोरी करना उतना आसान होगा जीटीए जैसे गेम्स में तो इजली प्लेन को चोरी करो कार को चोरी करो बहुत
आसान है ऐसा लगता है लेकिन एक्चुअल में प्लेन चोरी करना यह बस एक लोगों का फैंटेसी है एक नोट सा फैंटेसी जो कभी भी पूरा नहीं हो सकता सकता है इस पूरे इतिहास में सिर्फ एक बार ऐसा हुआ है जिसमें लिटरली एक पार्क्ड प्लेन को दो इंसानों ने चुरा लिया है और उड़ा के ले गए हैं और कहां ले गए हैं वो आज तक नहीं पता चला 25 में 2003 एक बोइंग 727 223 एयरलाइनर क्वाटो डी फरेरो एयरपोर्ट लवांडा अंगोला से चोरी हो गया था अंगोला अफ्रीका में है जैसे ये प्लेन चोरी हुआ लोगों को
ये उम्मीद था कि रडार टेक्नोलॉजी है क्योंकि तो वो ट्रेस कर लेंगे कि कहां उड़ा के ले जा रहे हैं वो दो चोर लेकिन वो कभी मिला ही नहीं वर्ल्ड वाइड लेवल पे एक सर्च जारी की गई लॉ इंफोर्समेंट इंटेलिजेंस एजेंसीज द्वारा लेकिन उस एयरक्राफ्ट का ट्रेस आज तक फाइंड नहीं हुआ है बेन सी पैडिला और जॉन एम मोटें ये दोनों फ्लाइट इंजीनियर और मैकेनिक्स थे वहां के विटनेसेस के द्वारा ये दोनों लोग जिसका रिकॉर्ड पासपोर्ट या आईडी किसी के पास नहीं है वो दोनों एयरक्राफ्ट के अंदर गए और बिना कंट्रोल टावर को कम्युनिकेट किए
टेक ऑफ कर लिए और फिर प्लेन बढ़ गया अटलांटिक ओशन के ऊपर ना वो प्लेन मिला ना वो दोनों इंसान का पता लग पाया और ना ही आज तक उस प्लेन का डेब्रेक यानी उस प्लेन का मलवा मिला बढ़ते हैं अगले फैक्ट पर क्या आपको पता है साइंटिफिक रिसर्चस के अनुसार बर्थडे केक में जब कैंडल लगता है और कैंडल को हम जलाते हैं इससे केक के ऊपर का बैक्टीरिया 1400 पर से बढ़ जाता है क्योंकि कैंडल में बहुत सारे बैक्टीरिया होते हैं लेकिन फिर भी इट्स नॉट अ बिग डील बिकॉज हमारा बॉडी बैक्टीरिया को हैंडल
कर सक सता है अब दिल्ली का हवा और बाकी पोल्यूटेड शहरों का हवा जब सिगरेट्स के बराबर है और फिर भी इंसान जी रहा है इससे आप बॉडी की क्षमता को देख सकते हो कि वो कितना झेल सकता है तो 1400 पर इंक्रीज इन बैक्टीरिया बॉडी के लिए कोई बड़ा डील नहीं है और इसलिए ऐसा नहीं है कि कैंडल रखना के के ऊपर बैन कर दिया हो या ऐसा कुछ बढ़ते हैं अगले फैक्ट पर आप कितना माइंडफुल रख पाते हो अपने आप को यानी अगर मैं आपको बोलूं कि भाई दिमाग शांत कर अपना तो आप
कहोगे नहीं हो रहा है यार शांत नहीं होता है मेरे दिमाग में हमेशा कुछ ना कुछ चलते रहता है शांत नहीं होता है तो देखो इसमें आपकी गलती नहीं है क्योंकि ऐसे कई साइंटिफिक रिसर्चस है जिसमें यह पता चला है कि माइंडफुल या फिर दिमाग को काम करने की प्रॉपर्टी एक्चुअल में आपके डीएनए के अंदर होती है यानी जेनेटिक्स डिसाइड करती है कि आपका ब्रेन कैसा होगा मतलब अगर किसी बच्चे का दिमाग बहुत चंचल है और आप देखते हो उसको आप मन में सोचते हो कि यार कितना चंचल है वो तो एक्चुअल में उसके डीएनए
में ही वो चीज होती है उसका जींस ही वैसा है यानी बहुत चीजें हैं जो कि जेनेटिक्स डिसाइड करती है बहुत लोग ऐसे मीम्स पोस्ट करते हैं कि यार यह जो कुछ बॉलीवुड एक्टर्स होते हैं उनका बाल कितना सही है 40 50 60 साल होने के बाद भी बाल कितना परफेक्ट है तो कुछ एक्टर्स तो ट्रांसप्लांट के जरिए ये काम करते हैं लेकिन कुछ एक्टर्स का नेचुरली ही अच्छा हेयर लाइन होता है तो एक्चुअल में उनका लक आप कह सकते हो क्योंकि उनका जेनेटिक्स बहुत हद तक हेयर लाइन को डिसाइड करता है और माइंड कैसा
है किसी का यह भी जेनेटिक्स से बहुत हद तक डिसाइड होता है अपने ये नोटिस किया होगा कि सोसाइटी में अगर किसी का इज्जत नहीं है जैसे फॉर एग्जांपल किसी फैमिली में किसी का बाप बेवड़ा है दिन भर पीते रहता है तो उसकी वाइफ या उसके बेटे का भी कोई खास इज्जत नहीं होता है सोसाइटी में जब तक उसका बेटा बहुत अलग ना हो तब तक क्योंकि जनरली लोग यही मानते हैं कि जैसा वो बाप होगा वही क्वालिटीज वही खून बेटे में भी जाएगा तो इसी चीज को अगर आप साइंटिफिकली देखोगे तो जींस की बात
हो रही है कि जींस ही वैसा है जींस इंटेलिजेंस को डिसाइड करती है हेयर लाइन को डिसाइड करती है माइंड फुलनेस कैपेबिलिटी को डिसाइड करती है यानी ब्रेन को काम करने की कैपेबिलिटी को कॉन्फिडेंस को डिसाइड करती है सोशल सिचुएशंस में एंजाइटी कितना होगा आपको उसको डिसाइड करती है आपके बॉडी में फैट कितना होगा उसको डिसाइड करती है कुछ लोग हैं जो कितना भी खाते हैं बॉडी पे नहीं लगता कुछ लोग है जो थोड़ा सा खाएंगे फैल जाएंगे ये सब आपकी गलती नहीं है मेरे भाई ये जेनेटिक्स है जेनेटिक्स और हम कुछ हद तक ही
कंट्रोल कर सकते हैं जैसे मान लो कोई बहुत पतला है वो चाहता है कि मैं थोड़ा फिट हू वो ट्राई कर रहा है बट नहीं हो रहा है तो ऐसा नहीं है कि वो फिट नहीं हो पाएगा हो पाएगा एफर्ट से सब कुछ पॉसिबल है आपके मेहनत से सब कुछ पॉसिबल है लेकिन थोड़ा ज्यादा मेहनत लगेगा आपको वही अगर आपका जींस ही अच्छा होगा तो आपको कम मेहनत लगेगा भाई ये यूनिवर्स का रैंडम नेस और लक कितना कुछ डिसाइड करता है हमारे लाइफ के बारे में ये यूनिवर्स एकदम रैंडम निस पे टिका हुआ है 90
पर से ज्यादा चीजें तो अपने हाथ में होती ही नहीं इसीलिए ये कहा जाता है पॉलिटिक्स में कि सत्ता यानी पावर का नशा इस दुनिया का सबसे बड़ा नशा होता है क्योंकि दुनिया की ज्यादातर चीजें हमारे कंट्रोल में नहीं होती तो अगर कंट्रोल में आ जाए सत्ता के जरिए तो ये ब्रेन को इतना डोपामिन देता है कि वो किसी ड्रग से भी ऊपर होता है ये बहुत ही डीप हो गया आई नो बट मजा आया होगा आपको ये जानने में बढ़ते हैं अगले फैक्ट पर जापान जैसे देश में इतने अर्थक्वेक आते हैं तो क्या आपको
लगता है वहां की गवर्नमेंट इसके लिए कुछ नहीं की होगी ऑफकोर्स की है जापान में जब अर्थक्वेक आता है तो जब तक बहुत ह्यूज एक्स्ट्राऑर्डिनरी अर्थक्वेक ना हो सुनामी इंड्यूस करने के लेवल का अर्थक्वेक ना हो तब तक वहां के बिल्डिंग्स खड़े रहते हैं और सालों साल खड़े ही रहते हैं और ऐसे कई वीडियोस को आपने देखा होगा जिसमें कि जब अर्थक्वेक आता है तो बिल्डिंग्स ऐसे राइट लेफ्ट हिल रहे होते हैं लेकिन वो गिरते नहीं है ये आखिर कैसे होता है भारत में तो ऐसा नहीं होता है भारत में बिल्डिंग एक जगह होते हैं
अर्थक्वेक में स्ट्रांग वाले बिल्डिंग्स लेकिन ऐसे हिलते हुए कभी नहीं दिखते हैं तो जापान के पास ऐसी कौन सी टेक्नोलॉजी है जिसके जरिए वो बिल्डिंग्स को स्प्रिंग की तरह बना देते हैं तो उसका आंसर है बिल्डिंग्स के नीचे मौजूद ये टेक्नोलॉजी जापान के बिल्डिंग्स के नीचे शॉक अब्जॉर्बर्स मौजूद होते हैं जो कि जब भी भूकंप आता है तो शॉक को एब्जॉर्ब कर लेती है और बड़े-बड़े स्प्रिंग्स होते हैं जो कि बिल्डिंग्स को अच्छा खासा लीन करने में और फ्लेक्सिबल बनने में मदद करते हैं और ऐसे ही वो बनाते हैं ट्रू अर्थक्वेक प्रूफ बिल्डिंग्स जब तक
हद वाला अर्थक्वेक नाना आए तब तक जापान के बिल्डिंग्स को कोई फर्क नहीं पड़ता और हम और आप जब जापान में जाएंगे तो ऐसा रिएक्शन होगा कि बाप रे ये बिल्डिंग हिल रहा है लेकिन जो लोग वहां रहते हैं उनके लिए ये कॉमन है बिल्कुल कॉमन वो कहेंगे कि हां देख हिल रहा है आया होगा अर्थक्वेक बढ़ते हैं अगले फैक्ट पर रुबिस क्यूब जिसके साथ आपने बचपन में जरूर खेला होगा ये 1974 में इन्वेंट हुआ था और अर्नो रबिक जिन्होंने इसको इन्वेंट किया था और जिनके सरनेम पे ही इस क्यूब का नाम रखा गया है
यह जब इसको पहली बार बनाए थे यानी 1974 में तब इसको सॉल्व करने में उनको एक मही महीने लग गए थे जी हां यह दुनिया के सबसे अजीब इन्वेंशन में से एक आपको लग रहा होगा लेकिन यह ट्रू है इसके इन्वेंटर ने खुद एक महीने लगा दिए थे तो अगर आपको रूबिक्स क्यूब को सॉल्व करने में कुछ घंटे लगे तो आपको चौक नहीं चाहिए क्योंकि इसका जो इन्वेंटर था उसने ही इतना समय लगा दिया था तो ये थे आज के फैक्ट्स ऐसे ही और फैक्ट्स के लिए चैनल को सब्सक्राइब करके बेल आइकन जरूर ऑन कर
लेना थैंक यू सो मच फॉर वाचिंग दिस वीडियो