[संगीत] स्टडी आईक्यू आईस अब तैयारी हुई अफोर्डेबल [संगीत] दोस्तों यूपीएससी मेंस एग्जामिनेशन के जीएस पेपर थ में सिक्योरिटी इश्यूज एक बेहद इंपॉर्टेंट टॉपिक है जिससे हर साल लगभग 50 मार्क्स के सवाल पूछे जाते हैं सिक्योरिटी इश्यूज के सिलेबस पर नजर डाल तो वह ब्रॉडली पांच हेड्स में डिवाइडेड है पहला है लि इट इज बिटवीन डेवलपमेंट एंड स्प्रेड ऑफ एक्सट्रीमिस्म दूसरा है रोल ऑफ एक्सटर्नल स्टेट एंड नॉन स्टेट एक्टर्स इन क्रिएटिंग चैलेंज टू इंटरनल सिक्योरिटी तीसरा है चैलेंज टू इंटरनल सिक्योरिटी थ्रू कम्युनिकेशन नेटवर्क्स रोल ऑफ मीडिया एंड सोशल नेटवर्किंग साइट्स इन इंटरनल सिक्योरिटी चैलेंजेबल सिक्योरिटी मनी
लरिंग एंड इट्स प्रिवेंशन चौथा है सिक्योरिटी चैलेंज एंड देयर मैनेजमेंट इन बॉर्डर एरियाज लिंकेजेस ऑफ ऑर्गेनाइज्ड क्राइम्स विद टेररिज्म और पांचवा है वेरियस सिक्योरिटी फोर्सेस एंड एजेंसीज एंड देयर मैंडेट इंटरनल सिक्योरिटी चैलेंज जैसे टेररिज्म नक्सलिज्म एक्सट्रीमिस्म साइबर सिक्योरिटी ऑर्गेनाइज्ड क्राइम और मनी लरिंग इत्यादि की समझ इस पेपर के लिए बेहद आवश्यक है इसके अलावा बॉर्डर मैनेजमेंट और देश की सिक्योरिटी फोर्सेस की अंडरस्टैंडिंग भी काफी क्रुशल है इस लेक्चर सीरीज के माध्यम से हम इन सभी टॉपिक्स का इन डेप्थ स्टडी करेंगे दोस्तों देश की सिक्योरिटी यानी सुरक्षा के डली दो डायमेंशन होते हैं पहला है इंटरनल
सिक्योरिटी यानी देश की सुरक्षा को देश के बॉर्डर्स के अंदर मैनेज करना दूसरा है एक्सटर्नल सिक्योरिटी यानी देश की सुरक्षा को किसी विदेशी ताकत या फिर दूसरे देश के अग्रेशन के खिलाफ इंश्योर करना लेकिन सिक्योरिटी या सुरक्षा आखिर होती क्या है सुरक्षा का सीधा और सरल मतलब है देश में इंटरनल या एक्सटर्नल फैक्टर्स के सामने लॉ एंड ऑर्डर को बनाए रखना शांति इंश्योर करना और देश की सोव निटी या संप्रभुता को बरकरार रखना जो हमारे संविधान का इंटीग्रल एस्पेक्ट भी है सिक्योरिटी किसी भी देश की ग्रोथ और डेवलपमेंट और उसमें रह रहे सिटीजंस के ओवरऑल
प्रोस्पेरिटी के लिए बेहद आवश्यक है क्योंकि बिना सिक्योर एटमॉस्फियर के देश में अराजकता फैलाई जा सकती है जिसके चलते किसी भी प्रकार का इकोनॉमिक सोशल या फिर कल्चरल ग्रोथ नामुमकिन हो जाता है इतिहास इस बात का गवाह है कि जो भी राष्ट्र अपनी इंटरनल सिक्योरिटी और इंटरनल स्टेबिलिटी को इंश्योर करने में सफल रहे हैं उन राज्यों में इकोनॉमिक डेवलपमेंट और कल्चरल ग्रोथ दोनों ही चरम पर रहे हैं फिर वो चाहे मौर्य अंपायर हो मुगल्स हो या फिर चोला लेकिन जो राज्य कमजोर पड़ गए उनका पतन हुआ और उनके लोगों को भी दिक्कतें झेलनी पड़ी आज
के दौर में हम अफगानिस्तान सीरिया या फिर यमन की तरफ देखते हुए इस बात का अंदाजा लगा सकते हैं कि एक अराजक माहौल में देश और उसके लोगों को क्या-क्या झेलना पड़ता है खैर इंटरनल सिक्योरिटी को इंश्योर करने का जिम्मा हमारे देश में मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स का है है और एक्सटर्नल सिक्योरिटी को इंश्योर करने का काम मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस का लेकिन यह डिफरेंशिएबल थोरेट्स और इंटरनल सिक्योरिटी आपस में इंटरलिंक्ड है उदाहरण के तौर पर हम पाकिस्तान और इंडिया के रिश्तों को देख सकते हैं वैसे तो जम्मू एंड कश्मीर की मिलिटेंसी एक इंटरनल सिक्योरिटी इशू
भी है लेकिन उसमें पाकिस्तान का हाथ एक मेजर फैक्टर है जो यह दर्शाता है कि इंटरनल और एक्सटर्नल सिक्योरिटी को रिलेटेड होते हैं वहीं दूसरी ओर नक्सलिज्म जैसे इंटरनल सिक्योरिटी इशू में भी कई बार इंटरनेशनल फंडिंग की बात होती रहती है जो हमारे आर्गुमेंट को और बल देता है दोस्तों एक सवाल मन में यह भी उठता है कि डिफेंस और सिक्योरिटी में क्या अंतर है ये दोनों शब्द वैसे तो सिमिलर ही है लेकिन एक हिसाब से डिफेंस को हम सिक्योरिटी के सबसेट की तरह देख सकते हैं जहां एक तरफ डिफेंस का संबंध लार्जली एक एक्सटर्नल
थ्रेड के अगेंस्ट देश की आर्म फोर्सेस की कैपेबिलिटीज को बढ़ाना है वहीं दूसरी ओर सिक्योरिटी एक मल्टी डायमेंशन का कांसेप्ट है जो ये इंश्योर करता है कि आर्म्ड कैपेबिलिटीज के साथ-साथ उन कारणों पर भी काम किया जाए जो इंटरनल सिक्योरिटी जैसे थ्रेट्स को जन्म देते हैं उदाहरण के तौर पर हम पॉवर्टी इलिटरेसी और डेवलपमेंट जैसे इश्यूज की बात कर सकते हैं जो कई प्रकार के इंटरनल सिक्योरिटी थ्रेट्स को जन्म देते हैं इसके अलावा समाज में बढ़ रहे सामाजिक टकराव जो देश में कम्युनिज्म और एथनिक कॉन्फ्लेट को जम देते हैं ऐसे मुद्दों का संबंध भी नेशनल
सिक्योरिटी स्ट्रेटेजी का भाग होता है है यही वजह है कि लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिस्म को काउंटर करने के लिए सरकार ना केवल सीआरपीएफ की कैपेबिलिटीज पर काम करती है बल्कि रोड कनेक्टिविटी स्पेशल सेंट्रल असिस्टेंसिया स में ऑलमोस्ट हर गवर्नमेंटल इंस्टीट्यूशन का कुछ ना कुछ रोल होता है उदाहरण के रूप में हम डिप्लोमेसी की बात कर सकते हैं जो इंश्योर करती है कि दूसरे देशों के साथ हमारे रिश्ते शांतिपूर्ण रहे इंटरनेशनल एजेंसीज जैसे यूएन और एफएटीएफ में कोऑपरेशन से ग्लोबल सिक्योरिटी थ्रेट को कम कर सकें और यूएनएससी जैसे इंस्टीट्यूशंस की मदद से कलेक्टिव सिक्योरिटी को इंश्योर किया
जा सके जैसे-जैसे हम इन सभी विषयों को डिटेल में पढ़ेंगे वैसे-वैसे हमें डिफेंस और सिक्योरिटी के बीच का अंतर और भी अच्छे से क्लियर हो जाएगा अब नजर डालते हैं सिक्योरिटी से संबंधित कुछ बेसिक कांसेप्ट पर जिनका जिक्र आने वाले वीडियोस में बार-बार होगा [संगीत] दोस्तों जब हम इंडिया के सिक्योरिटी चैलेंज की बात करते हैं तो उसमें सबसे पहला शब्द जो हमारे दिमाग में आता है वह है टेररिज्म या फिर आतंकवाद दोस्तों टेररिज्म एक कॉम्प्लेक्टेड इशू है और हम आपको बता दें कि टेररिज्म से दुनिया भर में हुए वाइड स्प्रेड डिस्ट्रक्शन के बावजूद इंटरनेशनल कम्युनिटी
आज तक इस शब्द की परिभाषा ये डेफिनेशन पर एक मत नहीं हो पाई हैं इंडिया ने 1996 में यूएन जीए में कंप्रिहेंसिव कन्वेंशन ऑन इंटरनेशनल टेररिज्म या फिर सीसीआईटी के तहत टेररिज्म पर एक अंतरराष्ट्रीय सहमति या कंसेंसस बनाने का कदम लिया था लेकिन यह कन्वेंशन आज तक यूएन के सारे मेंबर्स ने एक्सेप्ट नहीं किया है और यही वजह है कि इसकी डेफिनेशन पर अभी तक कोई भी इंटरनेशनल सहमति नहीं बन पाई है टेररिज्म के खिलाफ लड़ाई में यह एक बड़ा ऑब्स्ट कल भी है खैर अपनी समझ के लिए हम कह सकते हैं कि टेररिज्म व
कोई भी एक्ट है जिसका मकसद लोगों में दहशत फैलाकर देश को डिस्टेबलाइज करना हो इसके अलावा आतंकवाद को हम जनरली धार्मिक आतंकवाद या रिलीजियस टेररिज्म से भी एसोसिएट करते हैं लेकिन रिलीजियस टेररिज्म केवल एक तरह का टेररिज्म है रिलीजस टेररिज्म के अलावा आइडियो जिकल टेररिज्म एथनिक टेररिज्म स्टेट टेररिज्म साइबर टेररिज्म इत्यादि भी टेररिज्म के ही प्रकार हैं इन सभी टाइपिफिकेशन को हम टेररिज्म के लेक्चर में डिटेल में सम समझेंगे टेररिज्म के बाद हमारे लिए यह जानना जरूरी है कि यह दो और सिमिलर साउंडिंग वर्ड्स मिलिटेंसी और इंसर्जनल हैं जी हां दोस्तों वैसे तो न्यूज़ पेपर्स
में ये तीनों शब्द इंटरचेंजेबली यूज होते जाते हैं लेकिन टेक्निकली इन तीनों में कुछ अंतर भी है सबसे बड़ा अंतर यह है कि टेररिस्ट का टारगेट जनरली सिविलियंस होते हैं जिन पर अटैक करके वो स्टेट पर दबाव बनाते हैं पर जनरली मिलिटेंट्स मोस्टली स्टेट पुलिस या आर्म्ड फोर्सेस पर अटैक करते हैं इसीलिए सिविलियंस के सिलेक्टिव टारगेटिंग या सिविलियंस पर बॉम्बिला ऑफ टेरर कहेंगे लेकिन सिक्योरिटी फोर्सेस पर अटैक को हम मिलिटेंट अटैक्स का भी दर्जा देंगे वहीं इंसर्जनल लोगों द्वारा लंबे समय से चलने वाले ऑर्गेनाइज्ड आर्म स्ट्रगल है जिसकी वजह आइडल कल पॉलिटिकल एथनिक और लिंग्विस्टिक
डिफरेंसेस इत्यादि हो सकते हैं फॉर एग्जांपल नागा सेपरेटिज्म इसके अलावा कुछ एक्सपर्ट्स कहते हैं कि मिलिटेंसी बिना एक्सटर्नल सपोर्ट के भी एजिस्ट कर सकती है लेकिन एक इं सर्जेंस बिना एक्सटर्नल सपोर्ट के थ्राइव नहीं कर सकती और तो और टेरर अटैक्स और मिलिटेंट अटैक्स स्पोरेडिक या कभी-कभी होते हैं आफ्टर लॉन्ग प्लानिंग लेकिन इंसर्जनल स्ट्रगल है एक बात जो ध्यान देने वाली है वो यह कि इं सर्जेंट्स का मॉडेस्ट अपरेंडी टेररिज्म और मिलिटेंट अटैक्स दोनों हो सकते हैं और आज के समय में इन रियलिटी टेररिज्म इंसर्जनल मिलिटेंसी के बीच एक ऑर्गेनिक नेक्सस और लिंकेज देखने को
मिलता है और इनके बीच अंत मोस्टली किताबी ही है खैर अब चलते हैं अगले कांसेप्ट एक्सट्रीमिस्म की ओर दोस्तों एक्सट्रीमिस्म को उग्रवाद या चरम पंथ भी कहते हैं यह एक तरह की विचारधारा है जो समाज की मान्यताओं से हटकर रेडिकल विचारों को प्रमोट करता है एक्सट्रीमिस्म खुद में इंटरनल सिक्योरिटी थ्रेट क्रिएट नहीं करता क्योंकि हर तरह के एक्सट्रीमिस्ट विचार देश की सुरक्षा से संबंधित नहीं होते और सभी एक्सट्रीमिस्ट विचार इल्लीगल भी नहीं होते यहां तक कि आर्टिकल 19 के तहत हर तरह के विचारों को रखने की आजादी संविधान खुद देता है लेकिन विद सर्टेन टर्म्स
एंड कंडीशन केवल ऐसे विचार जो संविधान में दिए गए टर्म्स एंड कंडीशंस जैसे पब्लिक ऑर्डर सिक्योरिटी ऑफ स्टेट और यूनिटी एंड इंटीग्रिटी ऑफ कंट्री को थ्रेटें करें वही विचार देश की सुरक्षा नीति के लिहाज से इंपॉर्टेंट है इसके अलावा एक्सट्रीमिस्ट आइडियाज तब और खतरनाक हो जाते हैं जब उन्हें एक ऑर्गेनाइज तरीके से समाज में फैलाया जाए एक दो इंडिविजुअल्स अगर एक्सट्रीमिस्ट आइडियाज को सपोर्ट करते भी हैं तो उसे समाज या देश को कोई बड़ा खतरा नहीं होता लेकिन जब कोई बड़ा ऑर्गेनाइजेशन ऐसे विचारों को फैलाने लगे तो सिक्योरिटी थ्रेट बढ़ जाता है इसीलिए नक्सलिज्म रिलीजियस
रेडिकलाइजेशन या फिर कम्युनलिज्म वो एक्सट्रीमिस्ट आइडियाज हैं जो सिक्योरिटी थ्रेट की तरह देखे जाते हैं क्योंकि ये सभी पीस स्टेबिलिटी और देश की सिक्योरिटी को थ्रेटें करते हैं और इनका स्केल काफी बड़ा है ऐसे एक्सट्रीमिस्म को हम वायलेंट एक्सट्रीमिस्म भी कहते हैं इसके अलावा हम यह भी कह सकते हैं कि एक्सट्रीमिस्म टेर मम इंसर्जनल मेंसी इत्यादि को आइडियो जिकल बैकिंग प्रोवाइड करता है इन एलिमेंट्स के लिए मोटिवेशन की तरह एक्ट करता है और ऐसे ग्रुप्स को रिक्रूटमेंट में मदद करता है यानी एक्सट्रीमिस्म इंटरनल सिक्योरिटी चैलेंज का बैकबोन है अब चलते हैं अगले कांसेप्ट रेडिकलाइजेशन की
तरफ दोस्तों रेडिकलाइजेशन एक सोशल और साइकोलॉजिकल प्रोसेस है जिसके द्वारा समाज के लोगों में एक्सट्रीमिस्ट पॉलिटिकल और रिलीजियस आइडियाज के प्रति कमिटमेंट को बढ़ाया जाता है किसी भी प्रकार का रेडिकलाइजेशन एक वेल थॉट आउट स्ट्रेटेजी के तहत होता है समाज के वह तबके जो किसी भी प्रकार के अभाव में जीते हैं या फिर किसी भी प्रकार का डिस्क्रिमिनेशन फेस करते हैं वो जनरली रेडिकलाइजेशन के प्रति ज्यादा वल्नरेबल होते हैं उसके अलावा वो इलाके जहां डेवलपमेंट की कमी होती है वहां भी रेडिकलाइजेशन ज्यादा तेजी से फैल सकता है एज कंपेयर टू वेल डेवलप्ड एरियाज रेडिकलाइजेशन इंटरनल
सिक्योरिटी थ्रेट इसीलिए क्रिएट करता है क्योंकि इसके चलते समाज में कॉन्फ्लेट और वायलेंस बढ़ने के चांसेस बढ़ जाते हैं और रेडिकलाइज लोग आसानी से उन गुटों का भाग बन जाते हैं जो वायलेंस को प्रमोट करते हैं रेडिकलाइजेशन के कई तरीके होते हैं उदाहरण के तौर पर हम आईएसआईएस की बात कर सकते हैं जो इंटरनेट के माध्यम से दुनिया भर में रेडिकलाइजेशन फैलाने की कोशिश करता है इसके अलावा ओवरग्राउंड वर्कर्स के माध्यम से सिविल सोसाइटी ऑर्गेनाइजेशंस के रूप में ऑपरेट करने वाले फ्रंट ऑर्गेनाइजेशंस एक्सट्रा भी रेडिकलाइजेशन फैलाते हैं कई दफा तो मेन स्ट्रीम ऑर्गेनाइज जैसे कि
मीडिया के द्वारा भी समाज में रेडिकलाइजेशन फैलाया जाता है इसमें रवांडा के रेडियो रवांडा का उदाहरण महत्त्वपूर्ण है जिसने रवांडा में टू और टूसी के बीच कॉन्फ्लेट को इस कदर बढ़ाया कि 1994 में वहां टूसी माइनॉरिटी का मैसिव जेनोसाइड हुआ रेडिकलाइजेशन के मकसद कई प्रकार के हो सकते हैं जैसे कि वोट बैंक पॉलिटिक्स से लेकर कुछ खास किस्म की आइडियो जीी को प्रमोट करना और एक विशेष प्रकार के समाज की परिकल्पना को सिद्ध करना इत्यादि खैर अब बात करते हैं इंडिया की इंटरनल सिक्योरिटी सिचुएशन की दोस्तों हमारा प्यारा भारत विविधताओं या डायवर्सिटीज का देश है
यह तो हम सभी जानते हैं भारत की डाइवर्सिटी रिलीजियस लिंग्विस्टिक रेशल कल्चरल और ज्योग्राफिकल लगभग सभी पैमानों में देखने को मिलती है हर ग्रुप के लोगों के अपने एस्पिरेशंस और एक्सपेक्टशंस हैं हर ग्रुप का अपना कल्चर और इतिहास है हर ग्रुप समाज की परिकल्पना अपने-अपने हिसाब से करता है ऐसे में इस विशाल देश को करना खुद में ही कठिन काम है और यहीं से जन्म होता है देश के अंदर चल रहे इंटरनल सिक्योरिटी प्रॉब्लम्स का इसके अलावा कई और फैक्टर्स हैं जो देश के इंटरनल सिक्योरिटी प्रॉब्लम्स को जन्म देते हैं तो चलिए एक बार उन
फैक्टर्स को ब्रीफ समझ लेते हैं जो देश के इंटरनल सिक्योरिटी चैलेंज को जन्म देते हैं अनफ्रेंडली एंड हॉस्टाइल्स जैसे चाइना और पाकिस्तान इं सर्जेंट्स को सेफ हेवन प्रोवाइड कर या फिर आईएसआई जैसे एक्सटर्नल स्टेट इंस्टीट्यूशंस टेरर ग्रुप्स को फंडिंग और डायरेक्ट सपोर्ट प्रोवाइड कर हमारे देश में इंस्टेबिलिटी क्रिएट करते हैं अनइंप्लॉयमेंट और अंडर एंप्लॉयमेंट के चलते बेरोजगार लोग जल्दी रेडिकलाइज होते हैं और वायलेंट आइडल की तरफ आकर्षित हो जाते हैं नक्सल प्रभावित इलाके इसके सबसे बड़े उदाहरण हैं एडमिनिस्ट्रेटिव फेलर्स जैसे इनिक्विटेबल ग्रोथ के चलते समाज के लोगों के बीच दरार का जन्म होता है और
कॉन्फ्लेट बढ़ता है 90 के दशक में बिहार में हुए कास्ट वायलेंस हो या फिर नॉर्थ में पनप रही इंसर्जनल ग्रोथ इन इश्यूज का वन ऑफ द मोस्ट इंपॉर्टेंट कारण है इसके अलावा सिक्योरिटी फेलियर टू कटेल ऑर्गेनाइज्ड क्राइम भी इंटरनल सिक्योरिटी चैलेंज का कारण है पार्टिजन पॉलिटिक्स या वोट बैंक पॉलिटिक्स के लिए समाज में कमल डिवाइड कास्ट टेंशंस एथनिक या लिंग्विस्टिक टेंशंस को बढ़ावा देना भी इंटरनल सिक्योरिटी चैलेंज को बढ़ा देता है उसके अलावा जम्मू एंड कश्मीर और नागालैंड में चल रहे ससेशम यह सेपरेटिस्ट मूवमेंट्स और सेंट्रल और ईस्ट इंडिया में चल रहे नक्सलिज्म के अपने
ऐतिहासिक कारण हैं जो देश की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा है ज्योग्राफिकल फैक्टर्स भी इंटरनल सिक्योरिटी चैलेंज को बढ़ा देते हैं वो एरियाज जहां के लोग बाकी के देश से आइसोलेटेड हो या फिर डिफिकल्ट टेरेंस में रहते हो वहां एक्सट्रीमिस्म के बढ़ने के चांसेस ज्यादा होते हैं और दोस्तों ऐसा दो कारणों की वजह से होता है पहला तो यह कि ऐसे इलाकों में डेवलपमेंट नहीं हो पाता आसानी से और दूसरा यह कि ऐसी जगहों में एक्सट्रीमिस्म को रोकना स्टेट के लिए भी एक टफ टास्क हो जाता है यही वजह है कि नक्सलिज्म देश के
उन एरियाज में ज्यादा प्रभावी है जहां जंगल ज्यादा हैं क्रॉस बॉर्डर इश्यूज भी ऐसे ही इलाकों में होते हैं जहां बॉर्डर पोरस हैं जंगल पहाड़ों और नदियों से घिरे हुए इलाकों को मैनेज कर पाना बेहद कठिन है और उसका फायदा असामाजिक तत्व उठाते हैं गवर्नेंस डेफिसिट भी इंटरनल सिक्योरिटी चैलेंज प्रोड्यूस करता है देश का पुअर क्रिमिनल जस्टिस डीप रूटेड करप्शन और नेताओं क्रिमिनल्स और पुलिस का अनहोनी नेक्सस इंटरनल सिक्योरिटी थ्रेट को बढ़ा देता है इसके अलावा इंटरनेट रिवोल्यूशन के दौर में डिसर अपटिवो क्नो जीी जैसे एआई बीसीटी क्रिप्टोकरेंसीज ड्रोन एक्सट्रा के इमरजेंस ने भी इंटरनल
सिक्योरिटी थ्रेट्स को बढ़ावा दिया है रैपिड डिजिटाइजेशन के चलते आज साइबर सिक्योरिटी वन ऑफ द मोस्ट इंपॉर्टेंट इंटरनल सिक्योरिटी इशू बनकर उपरा है दोस्तों इन सभी वजहों के चलते हमारे देश के सबसे बड़े इंटरनल सिक्योरिटी थ्रेट्स कुछ इस प्रकार हैं नक्सलिज्म और लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिस्म इन इंडिया टेररिज्म एंड नेक्सस विद ऑर्गेनाइज्ड क्राइम जैसे कि ड्रग ट्रैफिकिंग मनी लरिंग ह्यूमन ट्रैफिकिंग इ आ साइबर क्राइम एंड साइबर सिक्योरिटी रिलीजियस वर्स एंड कास्ट क्राइम्स कोस्टल एंड बॉर्डर सिक्योरिटी इंसर्जनल ईस्ट मिलिटेंसी एंड क्रॉस पॉडर टेररिज्म इन जम्मू एंड कश्मीर इंडिया की इंटरनल सिक्योरिटी सिचुएशन के बारे में पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग
कमेटी ऑन होम अफेयर्स की 43 रिपोर्ट का कहना है कि हमारे देश के 535 डिस्ट्रिक्ट्स में से 210 डिस्ट्रिक्ट्स आज सीरियस इंटरनल सिक्योरिटी प्रॉब्लम और पब्लिक डिसऑर्डर फेस कर रहे हैं और ऑलमोस्ट 40 पर एरियाज में किसी ना किसी प्रकार का डिसऑर्डर है यही वजह है कि यूपीएससी एग्जाम में इंटरनल सिक्योरिटी के बारे में जानकारी होना आवश्यक है दोस्तों डेवलपमेंट और एक्सट्रीमिस्म आपस में एक दूसरे के साथ बहुत ही कॉम्प्लेक्टेड में तो डेवलपमेंट एक बेहद कॉम्प्लेक्शन के लिहाज से इसका सीधा और सरल मतलब है देश के लोगों के पास वो रिसोर्सेस होना जिनकी मदद से
वो अपना स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग इंश्योर कर सके विद एडिक्ट फूड क्लोथिंग हाउसिंग क्वालिटी एजुकेशन हेल्थ और एक डिग्निफाइड लाइफ जब कोई सोशल ग्रुप या इंडिविजुअल इनमें से किसी से भी या सभी से परपे चुली डिप्राइव्ड होता है तो उसमें निराशा का भाव जन्म लेगा यह ओबवियस है डेप्रिसिएशन से जन्मी निराशा को जब कुछ ग्रुप्स ऑर्गेनाइजेशंस या फिर इंडिविजुअल्स पॉलिटिकली चैनला इज करने की कोशिश करें तब वायलेंट अपहे ल्स और एक्सट्रीमिस्म पनप सकता है जो एक इंटरनल सिक्योरिटी थ्रेट है हालांकि ऐसा हमेशा नहीं होता और कई दफा नॉन वायलेंट रूप से ऐसी समस्याओं का समाधान निकाला
जा सकता है स्पेशली इन अ डेमोक्रेटिक कंट्री खैर डेवलपमेंट और एक्सट्रीमिस्म का इतिहास सबसे बड़ा उदाहरण है कॉलोनियल रूल के दौर में जब हमारे देश ने बड़े-बड़े फैमन या अकाल देखे भुखमरी देखी और कॉलोनियल रूलरसोंग्स के बाद हमारे देश के हालात कई पैमानों में सुधरे कॉलोनियल स्टेट को एक डेमोक्रेटिक स्टेट ने रिप्लेस कर वेलफेरिज्म को ऑफिशियल स्टेट पॉलिसी का हिस्सा बनाया और लोगों के पास पॉलिटिकल इकोनॉमिकल और सिविल राइट्स आए लेकिन सदियों की प्रतारक की कंडीशंस अंग्रेजों ने क्रिएट की उसे एक दिन में बदल पाना नामुमकिन था इसके अलावा देश में जाति व्यवस्था की समस्याएं
भी खत्म नहीं हुई थी जिसके चलते समाज में डिफरेंट सोशल ग्रुप्स के बीच टकराव और दरार बरकरार थी पार्टी के चलते जन्म धार्मिक तनाव ने भी समाज को तोड़ कर रख दिया इस लैक ऑफ डेवलपमेंट और गवर्नेंस फेलियर के चलते इंडिया के कई हिस्सों में कई प्रकार के एक्सट्रीमिस्ट एलिमेंट्स और मूवमेंट्स का उदय हुआ खैर ये बात सच है कि अंडर डेवलपमेंट वायलेंट एक्सट्रीमिस्म और इंसर्जनल ग्राउंड को जन्म देता है लेकिन हर अंडर डेवलप्ड रीजन में इंसर्जनल एक्सट्रीमिस्म जन्म नहीं लेता यह भी एक सत्य है ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या एक्सट्रीमिस्म के
जन्म के लिए अंडर ड डेवलपमेंट एक सफिशिएंट कंडीशन है या फिर इसके पीछे और भी कुछ है दोस्तों सवाल का जवाब इतना सरल नहीं है कई सोशियोलॉजिस्ट पॉलिटिकल साइंटिस्ट और साइकोलॉजिस्ट ने इस सवाल के जवाब को ढूंढने की कोशिशें की हैं जिन पर नजर डालने पर हमें इस मुद्दे की डीपर पिक्चर दिखती है ऐसे कई और फैक्टर्स हैं जो अंडर डेवलपमेंट के साथ आवश्यक हैं किसी इंटरनल सिक्योरिटी थ्रेट को जन्म देने के लिए आइए देखते हैं इन फैक्टर्स को बियोंड लैक ऑफ डेवलपमेंट दोस्तों सबसे पहला फैक्टर है परसेप्शन का किसी एक ग्रुप या रीजन में
डेवलपमेंट का ना होना और इस लैक ऑफ डेवलपमेंट के बारे में लोगों का परसेप्शन दोनों अलग-अलग बातें हैं जनरली जब तक लोगों को अंडर डेवलपमेंट या डिस्क्रिमिनेशन की समझ नहीं होती तब तक वह अंडर डेवलपमेंट को अपनी डेस्टिनी मानकर उसमें एडजस्ट करते हैं केवल तब जब उन्हें इसका अभाव या परसेप्शन होता है व ऐसी प्रॉब्लम्स को सॉल्व करने के तरीके खोजते हैं डेमोक्रेटिक देशों में मोस्टली लोग पीसफुल तरीकों से अपने डिमांड को गवर्नमेंट के सामने रख अपनी समस्याओं और डिमांड्स को गवर्नमेंट के सामने रखते हैं पॉलिटिक्स में पार्टिसिपेट करके भी वह यह काम करते हैं
अगर उनकी समस्याओं का निवारण या फिर उनकी डिमांड्स मीट हो जाते हैं या फिर उन्हें यह फील होता है कि उनकी डिमांड्स मीट हो गई हैं तो चीजें पीसफुल रहती हैं लेकिन अगर ऐसा नहीं होता तो एक्सट्रीमिस्ट टेंडेंसीज के खतरे बढ़ने लगते हैं यानी कि लैक ऑफ डेवलपमेंट के अलावा परसेप्शन ऑफ लैक ऑफ डेवलपमेंट और उसके बाद फेलियर ऑफ स्टेट टू मीट डिमांड्स ऑफ डिप्राइव्ड ग्रुप्स ये सब फैक्टर्स मिलजुलकर वायलेंट एक्सट्रीमिस्म को जन्म देते हैं हम आपको बता दें कि लोगों की डिमांड्स लेजिटिमेसी नहीं है इसलिए यह पॉसिबल है कि कई बार कुछ कम्युनिटीज या
ग्रुप्स स्टेट के सामने ऐसी डिमांड्स भी रख देती हैं जो इलेजिटिमेसी होता है सेपरेट नेशन स्टेट जैसी डिमांड्स ऐसी ही इलेजिटिमेसी कैटेगरी में आते हैं अगर कोई ग्रुप इस तरह की डिमांड्स एक सोवन स्टेट के सामने रखता है तो उस केस में एक् मम का खतरा सबसे ज्यादा रहता है लेकिन कई फैक्टर्स के चलते कई बार लेजिटिमेसी मिज़्मर इज होता है और ऐसी लेजिटिमेसी करप्ट पॉलिटिक ब्यूरोक्रेटिक एंड माफिया नेक्स ओवरऑल गवर्नेंस फेलियर इत्यादि होते हैं इसके अलावा यह भी ध्यान देने की बात है कि परसेप्शन और रियलिटी में कई बार जमीन और आसमान का अंतर
हो सकता है कई दफा कुछ लोग रियलिटी को डिस्टोर्ट कर जनता के सामने एक ऐसा परसेप्शन डेवलप करते हैं जो उन्हें डिप्राइव्ड फील करवाता है ऐसा मोस्टली कुछ सेल्फ इंटरेस्टेड इंडिविजुअल्स अपने बेनिफिट्स के लिए करते हैं वोट बैंक पॉलिटिक्स के लिए समाज में कम्युलस को बढ़ावा देना हो या कुछ स्टेट्स में माइग्रेंट्स के खिलाफ वायलेंस को फ्यूल करना ये सब इसी परसेप्शन बिल्डिंग का खेल है नाज जर्मनी में जूस के खिलाफ ऐसा ही प्रोपेगेंडा चलाकर उनका जेनोसाइड किया गया था नाजी वादियों ने पूरे समाज में एक परसेप्शन बनाया और प्रोपेगेंडा फैलाया कि जर्मनी में चल
रहे इकोनॉमिक क्राइसिस के जिम्मेदार एक्चुअली में जूज हैं जिन्होंने अपने इकोनॉमिक माइट का इस्तेमाल कर जर्मन के खिलाफ डिस्क्रिमिनेशन किया है ऐसी बातों से पूरे जर्मन समाज में एक्सट्रीमिस्म काफी तेजी से फैला और नतीजा आपको पता ही है इंडिया के केस में ऐसी सिचुएशंस मोस्टली कम्युलस रेशल अटैक्स अगेंस्ट पीपल ऑफ नॉर्थ ईस्ट मॉब लिंचिंग्स इत्यादि में देखी जा सकती हैं लैक ऑफ क्वालिटी एजुकेशन जो डेवलपमेंट का एक इंपॉर्टेंट फैक्टर है ऐसी प्रॉब्लम्स की इंटेंसिटी को और बढ़ा देता है और यही यही वजह है कि ऐसे इंटरनल सिक्योरिटी प्रॉब्लम्स के स्टॉर्म सेंटर्स मोस्टली गेटोस या स्लम्स
में होते हैं जहां एजुकेशन लेवल काफी कम होता है दोस्तों लैक ऑफ डेवलपमेंट के परसेप्शन के अलावा रिलेटिव डेप्रिसिएशन कहते हैं यानी कि सिर्फ डेवलपमेंट की कमी नहीं बल्कि दूसरे ग्रुप के कंपैरिजन में किसी ग्रुप का लेवल ऑफ डेवलपमेंट क्या है यह भी एक्सट्रीमिस्म को जन्म देता है इस रिलेटिव डिप्रिवेशन से समाज के कई ग्रुप्स में कॉन्फ्लेट होता है और इंटरनल सिक्योरिटी चैलेंज बढ़ते हैं जब हम नॉर्थ ईस्ट इंसर्जनल हम मणिपुर में इंटर ट्राइबल कॉन्फ्लेट के बारे में जानेंगे फॉर एग्जांपल नागाज और कुकीज के बीच होने वाला इंटर ट्राइबल कॉन्फ्लेट एक मेजर इंटरनल सिक्योरिटी इशू
है जिसका एक कारण रिलेटिव डेप्रिसिएशन साथ समाज से कुछ ग्रुप्स का एलियने या अलगाव भी एक्सट्रीमिस्म को फ्यूल करता है चाहे नॉर्थ ईस्ट हो या सेंट्रल और ईस्ट इंडिया यहां कई ऐसे ट्राइबल ग्रुप्स हैं जो देश के बाकी सोशल ग्रुप से डेवलपमेंट के पैरामीटर्स में लेस डेवलप्ड तो है ही पर साथ में वो एक दूसरे से प्रॉपर्ली कनेक्टेड भी नहीं है एक डावर्स देश में वेरियस सोशल ग्रुप्स के बीच इंटरेक्शन ही यूनिटी इंड डाइवर्सिटी क्रिएट करता है और सोसाइटी को स्टेबिलिटी देता है लेकिन सोशल ग्रुप्स के बीच दूरी और लैक ऑफ कनेक्ट कुछ ग्रुप्स को
एलनेट कर देती है और ऐसे में उन ग्रुप्स में एक्सट्रीमिस्ट एलिमेंट्स के राइज होने की प्रोबेबिलिटी बढ़ जाती है अर्बन सेंटर्स में होने वाले रेडिकलाइजेशन के शिकार भी सबसे ज्यादा वो ग्रुप्स होते हैं जो समाज से अलग थलग गेटोस में रहते हैं कई सोशल ग्रुप्स इंट्रा ग्रुप यूनिटी और डोमिनेंट कम्युनिटीज द्वारा डिस्क्रिमिनेशन फेस करने की वजह से गेटोस में रहना प्रेफर करते हैं जो उन्हें सेंस ऑफ सिक्योरिटी देता है लेकिन लैक ऑफ डाइवर्सिटी के चलते ऐसे गेटोस में रेडिकल एलिमेंट्स ज्यादा हावी हो जाते हैं जब यह सब लक ऑफ एजुकेशन और बैकवार्डनेस के साथ मिक्स
होता है तो सीरियस लॉ एंड ऑर्डर प्रॉब्लम को जन्म देता है इसीलिए शहरों में वायलेंस और कम्युनल राइट्स के शिकार ऐसे गेटोस ज्यादा होते हैं ऐसे में यह स्टेट के लिए जरूरी है कि वह रिलीजन रीजन लैंग्वेज एक्सट्रा के पैरामीटर्स पर बनते सोशल ग्रुप्स में सद्भावना और डायलॉग को प्रमोट करें ताकि एलिशन कम हो और समाज में रेडिकलाइजेशन कम हो दोस्तों इंटरेस्टिंग बात यह है कि लैक ऑफ डेवलपमेंट के अलावा इंडिया में गवर्नमेंट द्वारा लिए गए कई डे डे मेंटल एफर्ट्स भी एक्सट्रीमिस्म का कारण बनते हैं जी हां हमारे देश में कई सालों तक डेवलपमेंट
टॉप डाउन रूप से ऑपरेट करता आया है यानी कुछ पॉलिटिकल लीडर्स और ब्यूरोक्रेट्स मिलकर ये डिसाइड करते हैं कि लोगों के लिए क्या अच्छा है और क्या नहीं इस हिसाब से पॉलिसी मेकिंग में लोगों की आवाज दबकर रह जाती है इस टॉप डाउन डेवलपमेंट मेथड का एक और नुकसान यह है कि डेवलपमेंट वन शू फिट्स ऑल अप्रोच की तरह काम करता है जबकि हर रीजन और एरिया की अपनी समस्याएं हैं और बिना लोगों के पार्टिसिपेशन के उनकी जी जीवन की असल समस्याओं को समझ पाना मुश्किल है उसके अलावा कई बार कुछ रीजंस जो रिसोर्स रिच
हैं वहां के लोगों में यह परसेप्शन पैदा होता है कि देश के बाकी लोगों के फायदे के लिए उनके रिसोर्सेस को एक्सप्लोइट किया जा रहा है और इसीलिए उनमें एक इंजस्टिस का भाव भी पैदा होता है ऊपर से थोपे गए डेवलपमेंटल प्रोजेक्ट्स जैसे रोड्स रेलवेज इंडस्ट्रीज माइनिंग एक्सट्रा के लिए लैंड की जरूरत पड़ती है फॉरेस्ट का डिस्ट्रक्शन होता है और जहां कई ट्राइबल सदियों से रहते आए हैं और कई बार बड़े-बड़े पहाड़ तोड़ दिए जाते हैं जो पूरी इकोलॉजी को खराब कर देता है ऐसी सिचुएशंस में लोगों के डिस्प्लेसमेंट का खतरा बना रहता है और
अगर रिहैबिलिटेशन और कंपनसेशन सही तरीके से ना हो तो इंटरनल सिक्योरिटी चैलेंज बढ़ जाते हैं उड़ीसा के नियामक हिल्स में बॉक्साइट माइंस को लेकर चले लंबे प्रोटेस्ट का केस इसका एक छोटा सा एग्जांपल है खैर टॉप डाउन डेवलपमेंट प्रॉब्लम को कम करने के लिए प्लानिंग कमीशन को 2015 में खत्म कर देना एक सही स्टेप रहा लेकिन डिसेंट्रलाइज इस प्लानिंग पर अभी भी हमें बहुत कुछ अचीव करना है दोस्तों यह तो बात हुई कि कैसे लैक ऑफ डेवलपमेंट और इप्रॉपर्टी मजम को जन्म देता है अब देखते हैं एक्सट्रीमिस्म और लैक ऑफ डेवलपमेंट के बीच के टू
वे रिलेशनशिप को जिसके चलते एक सेल्फ परपे चुएट विशय साइकिल का जन्म होता है दोस्तों कोई भी इन्वेस्टमेंट या बिजनेस डर के माहौल में और अनस्टेबल सिक्योरिटी सिचुएशन में ऑपरेट नहीं नहीं कर सकता सिक्योरिटी डेवलपमेंट और इन्वेस्टमेंट के लिए एसेंशियल है इसीलिए परसिस्टेंट इंसर्जनल एक्सट्रीमिस्म से सफर कर रहे एरियाज के डेवलपमेंटल स्टैग्नेशन का सबसे बड़ा कारण है कई दफा यह होता है कि एक्सट्रीमिस्म का राइज लैक ऑफ डेवलपमेंट बैकवार्डनेस और ऑपरेशन के चलते होता है लेकिन धीरे-धीरे एक्सट्रीमिस्म खुद में एक ऑर्गेनाइज सिस्टम बन जाता है जिसकी खुद की अपनी पॉलिटिक्स होती है अपने फायदे के
लिए एक्सट्रीमिस्ट लीडर्स जानबूझकर डेवलपमेंट के लिए बाधा क्रिएट करते हैं और जिन रीजंस में एक्सट्रीमिस्म एक बार आ जाता है वह काफी समय तक बैकवर्ड ही रह जाते हैं ऐसा इसलिए क्योंकि एक्सट्रीमिस्ट लीडर्स जानते हैं कि डेवलपमेंट एंप्लॉयमेंट और एजुकेशन से लोग एक्सट्रीमिस्म को गिव अप करके प्रोडक्टिव चीजों में लग जाएंगे और यह एक्सट्रीमिस्ट लीडर्स की पॉलिटिक्स को खत्म कर देगा यही वजह है कि नक्सल प्रभावित इलाकों में कई दफ़ा नक्सल्स स्कूल्स गवर्नमेंटल प्रोजेक्ट्स रोड्स और ब्रजेस को डिस्ट्रॉय कर देते हैं और लैक ऑफ डेवलपमेंट का ब्लेम लगातार सरकार पर लगाकर अपनी राजनीति को बल
देते हैं इसके अलावा रिसोर्स बेस्ड इंडस्ट्रीज जैसे पेट्रोलियम या टी गार्डन से एक्सटॉर्शन और उनके एग्जीक्यूटिव्स का अब्दक्ट यह सब इं सर्जेंट्स का मॉडेस्ट ऑपरेंडी होता है ऐसे अटैक्स एक नेगेटिव इन्वेस्टमेंट का माहौल क्रिएट करते हैं और कोई भी इन्वेस्टर ऐसे माहौल में इन्वेस्ट करने से डरता है हम आपको बता दें कि इंसर्जनल के रिसोर्स रिच एरियाज भी हैं जिनका यूटिलाइजेशन नेशनल इकॉनमी के लिए क्रुशल है लेकिन इंस अर्जेंसी रिसोर्सेस के एक्सट्रैक्शन और उनके यूटिलाइजेशन के लिए एक बड़ा चैलेंज बन जाता है 10 इंपिडिंप करता है वो है इंसर्जनल एरियाज की नॉर्मल जनता या तो
इं सर्जेंट्स के डर से उन्हें फोर्सफुली इंसर्जनल करवाया जाता है सिंपैथाइजर बनवाया जाता है या फिर लैक ऑफ एजुकेशन के चलते वो खुद भी एक्सट्रीमिस्ट आइडल जीी के शिकार हो जाते हैं जो जॉइन नहीं करते उनके पास भी डेवलपमेंट के ऑप्शंस बेहद कम होते हैं और अजीवन गरीबी में उन्हें अपना जीवन बिताना पड़ता है इसलिए हम कह सकते हैं कि एक्सट्रीमिस्म और इंसर्जनल डेवलप्ड एरियाज को और ज्यादा अंडर डेवलपमेंट की तरफ पुश करता है खैर अब आखिरी में हम डेवलपमेंट से रिलेटेड उन इंपॉर्टेंट और माइक्रो इश्यूज की बात करते हैं जो इंडियन एक्सट्रीमिस्म से डायरेक्टली
कनेक्टेड [संगीत] हैं दोस्तों इंडिया के कॉन्टेक्स्ट में एक्सट्रीमिस्म से रिलेटेड डेवलपमेंटल इश्यूज में सबसे पहला है फॉरेस्ट पॉलिसी ब्रिटिश टाइम से ही फॉरेस्ट पॉलिसी को लेकर वाद विवाद होता रहा रहा है ब्रिटिश राज में अंग्रेजों की फॉरेस्ट पॉलिसी के खिलाफ कई वायलेंट अपराइज देखे गए इंडिपेंडेंट इंडिया की फॉरेस्ट पॉलिसी में बदलाव आए लेकिन बदलाव स्लो रहे फॉरेस्ट कंजर्वेशन एक्ट 1980 के तहत कई फॉरेस्ट रिजर्व फॉरेस्ट डिक्लेयर कर दिए गए हैं जहां ह्यूमन एक्टिविटीज पर रिस्ट्रिक्शंस थे स्कॉलर्स का कहना है कि इसका नुकसान फॉरेस्ट ड्वे करस और ट्राइब्स को हुआ जिन्हें डिस्प्लेसमेंट फेस करना पड़ा कई
एरियाज में ट्राइब्स को अपने ट्रेडिशनल लैंड ओनरशिप राइट से भी हाथ धोना पड़ा इन सबने एक्सट्रीम आइटल जिी को ब्रीडिंग ग्राउंड प्रोवाइड किया इसका सबसे ज्यादा फायदा नक्सल आइडल जीी को हुआ और यही वजह है कि फॉरेस्टेड एरियाज में नक्सल प्रॉब्लम आज सबसे ज्यादा है इसी समस्या को सॉल्व करते हुए इंडियन गवर्नमेंट ने फॉरेस्ट राइट्स एक्ट 2006 को एनेक्ट कर ट्राइबल राइट्स को रिकॉग्नाइज करने का हिस्टोरिक कदम उठाया इसके अलावा नॉन फॉरेस्टेड एरियाज में लैंड ओनरशिप राइट्स को लेकर चल रहे विवाद के चलते भी एक्सट्रीमिस्म को ताकत मिली आप जानते हैं कि अंग्रेजों की लैंड
सेटलमेंट पॉलिसी जैसे परमानेंट सेटलमेंट बेहद एक्सप्लोइटेटिव थी हाई लैंड रेवेन्यू और जमींदर्स के ऑपरेशन का शिकार बने गरीब किसान भुखमरी और गरीबी की चपेट में चले गए 75 पर से ज्यादा लैंड पर जमींदारों के दबदबे के चलते एक्चुअल कल्टीवेटर्स या तो लैंड लेबरर्स बनके रह गए या फिर टेनेंट्स जिनसे काफी ज्यादा लगान वसूला जाता था इसीलिए इंडिपेंडेंट इंडिया में लैंड रिफॉर्म्स इंट्रोड्यूस किए गए ताकि ये सर्किल ऑफ एक्सप्लोइटेशन खत्म हो और जमींदारों का जमीन पर दबदबा कम हो लेकिन लैंड रिफॉर्म कई सारे कारणों के चलते सक्सेसफुल नहीं हो पाया पंजाब केरला और वेस्ट बंगाल में
लैंड रिफॉर्म्स कुछ हद तक सफल रहा लेकिन देश के बाकी इलाकों में अमीर जमींदारों ने करप्शन और पॉलिटिक्स के साथ अपने नेक्सस का इस्तेमाल कर इंश्योर किया कि उनकी जमीन गरीब किसानों में ना बांटी जाए इसलिए आज भी हमारे देश में लगभग 86 पर किसान स्मॉल और मार्जिनल फार्मर्स हैं और 40 पर रूरल हाउसहोल्ड के पास तो कोई लैंड ही नहीं है हम आपको बता दें कि देश के सबसे बड़े इंटरनल सिक्योरिटी थ्रेट नक्सलिज्म का जन्म जब 1967 में नक्सलबाड़ी में हुआ तो उसका कॉन्टेक्स्ट लैंड को लेकर चल रहे गरीब किसानों और अमीर किसानों के
बीच का कॉन्फ्लेट ही था लेकिन ये कॉन्फ्लेट सिर्फ नक्सलवाड़ी में नहीं था बल्कि देश के कई इलाकों में था और इसीलिए नक्सलबाड़ी में शुरू हुआ वायलेंस धीरे-धीरे देश के बाकी इलाकों में भी फैला खैर लैंड से ही रिलेटेड एक और मुद्दा एक्सट्रीमिस्म और डेवलपमेंट के बीच के लिंक को दर्शाता है ये मुद्दा है डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स को लेकर होने वाले लैंड एक्विजिशन डिस्प्लेसमेंट और उससे जन्म लेने वाला कॉन्फ्लेट जैसा हमने पहले देखा डेवलपमेंट वैसे तो एक पिव शब्द है लेकिन कई दफा जिस कॉस्ट पर डेवलपमेंट होता है उसको लेकर विवाद होते हैं लैंड एक्विजिशन और लोगों
का डिस्प्लेसमेंट वैसे ही एक कॉस्ट है ऊपर से कई दफा करप्ट ब्यूरोक्रेट्स नेता और बिजनेसमैन मिलकर ऐसा खेल रचते हैं कि ना तो गरीब का रिहैबिलिटेशन होता है और ना ही उस तक कंपनसेशन पहुंचता है बिना जमीन और बिना पैसे के गरीब किसान पवटी और डिप्रिवेशन में चला जाता है और निराशा फैल जाती है देश में कई बार ऐसे मुद्दों को लेकर नॉन वायलेंट सोशल मूवमेंट्स भी हुए हैं और गवर्नमेंट ने उसका समाधान भी किया है लेकिन कई बार इस निराशा का फायदा उठाते हुए समाज के उपद्रवी तत्त्वों को एक्सट्रीमिस्म और वायलेंस की शह मिल
जाती है अगर आप देश के नक्सल प्रभावित या फिर नॉर्थ ईस्ट के इंसर्जनल इलाकों को देखेंगे तो पाएंगे कि इन रीजंस में मिनरल्स की भरमार है मिनरल्स एक्सट्रैक्शन को लेकर लोगों का डिस्प्लेसमेंट देश में सबसे कंट्रोवर्शियल इशू है और यही वजह है कि इन एरियाज में कॉन्फ्लेट सबसे ज्यादा है डम्स को लेकर होने वाले डिस्प्लेसमेंट भी क्रुशल मुद्दे हैं खैर किसी भी प्रकार के इंजस्टिस के खिलाफ आवाज उठाने के अगर रास्ते हो तो एक्सट्रीमिस्म फैलने के चांसेस कम हो जाते हैं यही वजह है कि हमारे देश में एक इंडिपेंडेंट जुडिशरी है जो लोगों की समस्याओं
का समाधान करती है लेकिन हमारे इस विशालकाय देश में जुडिशियस सिस्टम भी कई प्रॉब्लम्स फेस कर रहा है लैक ऑफ पर्सनल इंफ्रास्ट्रक्चर कॉम्प्लिकेटेड लॉज और लैक ऑफ पीपल्स एक्सेस टू जुडिशरी इत्यादि मिलजुलकर जुडिशियस प्रोसेस को इतना धीमा कर देते हैं कि लोगों में फ्रस्ट्रेशन कम होने की बजाय और बढ़ जाती है दोस्तों लगभग 130 करोड़ के हम हमारे देश में आज भी इंडस्ट्रीज उतने नहीं हैं जो पूरी पॉपुलेशन को एब्जॉर्ब कर उन्हें लाइवलीहुड प्रोवाइड कर पाएं एग्रीकल्चर पर जरूरत से ज्यादा डिपेंडेंसी के चलते उस पर काफी प्रेशर है सर्विसेस सेक्टर का एंप्लॉयमेंट इलास्टिसिटी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर
से कम है ऐसे में अनइंप्लॉयमेंट हमारे देश की बड़ी समस्या है जो एक्सट्रीमिस्म को फ्यूल करती है पीएलएफएस 2020 एंड 21 के हिसाब से हम 4.2 अनइंप्लॉयमेंट रेट झेल रहे हैं यानी 2 करोड़ से ज्यादा जॉब ढूंढने वाले लोग अनइंप्लॉयड हैं ऊपर से एग्रीकल्चर में डिसगाइज अनइंप्लॉयमेंट की प्रॉब्लम डीप रूटेड है जहां छोटे से खेत में पूरी फैमिली काम करती है इस अनइंप्लॉयमेंट के चलते यूथ में इनसिक्योरिटी एंगर और डिस सेटिस्फैक्ट्रिली कल बेनिफिट्स के लिए यूज करते हैं फिर वो चाहे कम्यून राइट्स में हो टेररिज्म में हो या फिर इंसर्जनल मोस्ट हर इंटरनल सिक्योरिटी थ्रेट
में अनइंप्लॉयमेंट रोल प्ले करता है नॉर्थ ईस्ट इंसर्जनल में नॉर्थ ईस्ट का बाकी के स्टेट्स का आइसोलेशन भी एक्सट्रीमिस्म का एक बड़ा कारण है इंडिया के पार्टीशन के बाद केवल एक नैरो सिलगुरी कॉरिडॉर के रास्ते ही इंडिया नॉर्थ ईस्ट से कनेक्टेड है जो नॉर्थ ईस्ट रीजन के डेवलपमेंट को बुरी तरह प्रभावित करता है ये आइसोलेशन और लैक ऑफ डेवलपमेंट जब इस रीजन के यूनिक सोशल और कल्चरल कैरेक्टरिस्टिक के साथ मिल गया तब नॉर्थ ईस्ट इंसर्जनल ब्रीडिंग ग्राउंड मिला इसके अलावा लैक ऑफ हेल्थ केयर लैक ऑफ एजुकेशन एंड अवेयरनेस लैक ऑफ एक्सेस टू इलेक्ट्रिसिटी इंटरनेट कनेक्टिविटी
एंड कम्युनिकेशन यह सब भी एक्सट्रीमिस्म को फैलाने में मदद करते हैं देश के रिमोट एरियाज में इरेगुलर एडमिनिस्ट्रेशन अब्सेंस ऑफ गवर्नेंस पुअर इंप्लीमेंटेशन ऑफ स्कीम्स और मिस हैंडलिंग ऑफ गवर्नमेंट रिसोर्सेस यह सब देश के लोगों में देश की गवर्नमेंट के प्रति फ्रस्ट्रेशन को बढ़ाते हैं और उग्रवादी विचारधारा की जड़ें मजबूत होने लगती हैं तो दोस्तों यह था हमारा लेक्चर डेवलपमेंट और एक्सट्रीमिस्म के लिंकेज के ऊपर हम आपको बता दें कि डेवलपमेंट और स्प्रेड ऑफ एक्सट्रीमिस्म का हमारे देश में सबसे बड़ा और सीधा उदाहरण लेफ्ट वे विंग एक्सट्रीमिस्म या नक्सलिज्म है जिसकी चर्चा एल डब्लू यानी
लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिस्म के वीडियो में डिटेल में होगी इसके अलावा डेवलपमेंट बाकी के एक्सट्रीमिस्ट आइडियो जीी से भी किसी ना किसी प्रकार से लिंक्ड है इसीलिए यह ध्यान में रखना आवश्यक है कि जब-जब इंटरनल सिक्योरिटी पर चर्चा हो तब तब डेवलपमेंट पर चर्चा होना अति आवश्यक [संगीत] है बात करेंगे रोल ऑफ एक्सटर्नल स्टेट एंड नॉन स्टेट एक्टर्स इन क्रिएटिंग चैलेंजेबल हम जानते हैं कि इंडिया इंडिपेंडेंस के दौर से ही कई तरीके के इंटरनल सिक्योरिटी थ्रेट्स झेल रहा है इन सिक्योरिटी थ्रेट्स को अगर सॉल्व करना है तो इन थ्रेट्स के कॉसेस के साथ-साथ इनके सोर्सेस को
समझना भी जरूरी है सोर्सेस को हम ब्रॉडली दो कैटेगरी में क्लासिफाई कर सकते हैं स्टेट एंड नॉन स्टेट एक्टर्स आज के वीडियो में हम देखेंगे कि वो कौन से मेजर स्टेट और नॉन स्टेट एक्टर्स हैं जो इंडिया के इंटरनल सिक्योरिटी थ्रेट्स को जन्म देते हैं और ये थ्रेट्स किस प्रकार के हैं दोस्तों एक्सटर्नल स्टेट एक्टर्स वो एंटिटीज हैं जिन्हें किसी दूसरे सोवन स्टेट या गवर्नमेंट का फॉर्मल बैकिंग हो एग्जांपल के तौर पे पाकिस्तान का इंटेलिजेंस विंग आईएसआई आर्मी और ब्यूरोक्रेसी एक्सट्रा नॉन स्टेट एक्टर्स वो ग्रुप हैं जो स्टेट से इंडिपेंडेंटली ऑपरेट करते हैं और उनके
पास कोई फॉर्मल पावर नहीं होती इसमें हम टेररिस्ट ग्रुप जैसे अलकायदा या फिर नक्सल ग्रुप्स जैसे बैंड सीपीआई मास्ट की बात कर सकते हैं इसके अलावा एनजीओस सिविल सोसाइटी ऑर्गेनाइजेशंस मल्टीनेशनल कंपनीज एक्सेट्रा भी नॉन स्टेट एक्टर्स का भाग है चलिए सबसे पहले हम स्टेट एक्टर्स द्वारा पोजड इंटरनल सिक्योरिटी थ्रेट्स की बात करते हैं खैर एक्सटर्नल स्टेट एक्टर्स द्वारा पोटेड सिक्योरिटी थ्रेट किसी भी देश के लिए सबसे बड़ा चैलेंज होते हैं ऐसा इसलिए क्योंकि एक स्टेट इकोनॉमिकली और मिलिटर नॉन स्टेट एक्टर से कहीं ज्यादा पावरफुल होते हैं स्टेट के पास वहां के रिसोर्सेस पर मोनोपोली होती
है जिन्हें वो अपने पॉलिसीज के लिए मनचाहे तरीके से यूज कर सकते हैं मॉडर्न वर्ल्ड में स्टेट के पास इंटरनेशनल और पॉलिटिकल लेजिटिमेसी भी होती है इसके चलते उसके खिलाफ एक्शन लेना कठिन हो जाता है उदाहरण के तौर पर हम पाकिस्तान की बात कर सकते हैं जिसने दशकों से इंडियन सोइल में टेररिज्म को सपोर्ट किया है अगर उसके खिलाफ कई तरह के प्रूव्स होने के बावजूद हमारे ऑप्शंस लिमिटेड हो जाते हैं किसी भी प्रकार का एक्शन वॉर का थ्रेड भी पैदा करता है ऊपर से जब दोनों देश न्यूक्लियर पावर्ड हैं तब इंटरनेशनल पीस भी खतरे
में पड़ जाता है इंटरनेशनल पॉलिटिक्स में कई तरीके के अलायंस के चलते भी काउंटर एक्शंस के ऑप्शंस लिमिटेड रहते हैं खैर एक्सटर्नल स्टेट एक्टर्स द्वारा पोजड इंटरनल सिक्योरिटी थ्रेट्स की बात करें तो वो कई प्रकार के है सबसे पहला सिक्योरिटी थ्रेट है लिमिटेड या प्रॉक्सी वॉर फेयर प्रॉक्सी वॉर का मतलब है किसी देश द्वारा दूसरे देश पर कंटिन्यूड अटैक लेकिन मिलिट्री की मदद से नहीं बल्कि नॉन स्टेट एक्टर्स जैसे इंसर्जनल की मदद से प्रॉक्सी वर का सबसे बड़ा उदाहरण पाकिस्तान है जिसने टेररिज्म को स्टेट पॉलिसी के टूल की तरह इस्तेमाल कर इंडिया को कमजोर करने
की कोशिश करी है 1947 से लेकर आज तक पाकिस्तान इंडिया से चार फुल फ्लेज वॉर्स हार चुका है और वहां के पॉलिसी मेकर्स यह जानते हैं कि क नेशनल वरफेन में वो इंडिया के सामने टिक नहीं सकते इकोनॉमिक मिलिट्री और पॉलिटिकल स्टेबिलिटी हर मामले में इंडिया पाकिस्तान से कहीं ज्यादा आगे है यही वजह है कि कन्वेंशनल वरफेन को गिव अप करके पाकिस्तान प्रॉक्सी वर्स का सहारा लेता आया है इस प्रॉक्सी वॉर का एपीसेंटर मेनली जम्मू एंड कश्मीर रहा है जहां से सेपरेटिस्ट टेररिस्ट और इंसर्जनल सिक्योरिटी थ्रेट क्रिएट किया है इसके अलावा चाइना ने भी हिस्टॉरिकली
कई तरह के एंटी इंडिया इंसर्जनल किया है इनमें नागा मिजो मीटी और यूएलएन ग्रुप्स का नाम क्रुशल है जिन्हें चाइना में सेफ हैवन प्रोवाइड करना और उनके नेटवर्क्स को शह देना मेजर फॉर्म ऑफ एक्सटर्नल स्टेट सपोर्ट है इंडिया के मास्ट इंसर्जनल सॉफिक मोरल और फाइनेंशियल सपोर्ट मिलता रहा है बांग्लादेश से इमर्ज होने वाले थ्रेट में इलीगल इमीग्रेशन एक बड़ा मुद्दा है जिसने नॉर्थईस्ट में कई तरीकों के सोशल कॉन्फ्लेट्स को जन्म दिया है यहां पर बांग्लादेश स्टेट का कोई खास डायरेक्ट इवॉल्वमेंट नहीं है लेकिन इन प्रॉब्लम्स के खिलाफ स्टेट इन एक्टिविटी ने भी इन थ्रेट्स को
जन्म दिया है जो इंडिया के लिए एक बड़ा चैलेंज है म्यानमार से इमर्ज होने वाला रोहिंग्या इमीग्रेशन भी ऐसा ही एक मेजर सिक्योरिटी थ्रेड बन सकता है जिस पर सिक्योरिटी एजेंसीज की नजर बनी हुई है दोस्तों एक्सटर्नल स्टेट से इमर्ज होने वाला अगला सिक्योरिटी थ्रेट है स्पोरेडिक टेरर अटैक्स का इंडिया में जम्मू एंड कश्मीर के बियोंड बाकी एरियाज में पाकिस्तान का प्रॉक्सी वॉर स्पोरेडिक टेरर अटैक्स के थ्रू होता है 2008 के मुंबई अटैक्स के बारे में तो आप जानते ही हैं जिसमें आईएसआई और पाकिस्तान बेस्ड टेरर आउटफिट्स का हाथ था इसके अलावा एलटी द्वारा 2010
में हुए पुणे बॉम्ब बिंग्स वन ऑफ द मेनी बॉम ब्लास्ट का एग्जांपल है जिसमें पाकिस्तान के आईएसआई का हाथ रहा है स्पोरेडिक टेरर अटैक्स के अलावा एक्सटर्नल स्टेट एक्टर्स द्वारा पोस्ट सिक्योरिटी थ्रेट्स में ऑर्गेनाइज्ड क्राइम को शह देने का थ्रेड भी आता है हम जानते हैं कि इंडिया की लोकेशन दुनिया के दो सबसे बड़े ओपियम प्रोड्यूस ंग एरियाज के बीच में है एक है अफगानिस्तान ईरान और पाकिस्तान में लोकेटेड ओपियम प्रोड्यूस ंग एरिया गोल्डन क्रेसें और दूसरा है साउथ ईस्ट एशिया में म्यानमार थाईलैंड और लाउस के ट्रा जंक्शन में लोकेटेड गोल्डन ट्रायंगल पंजाब के ड्रग
मेनेस के बारे में तो आपने सुना ही होगा इंडिया के इंटरनेशनल बॉर्डर्स के अक्रॉस चल रही ड्रग ट्रैफिकिंग का मेन सोर्स पाकिस्तान है और बॉर्डर्स के अक्रॉस बिना स्टेट सपोर्ट के इतने बड़े लेवल का ड्रग मेनेस एजिस्ट नहीं कर सकता इसके अलावा अफगानिस्तान में तालिबान के पावर में आने के बाद वेस्टन बॉर्डर्स में ड्रग मैनेस बढ़ने की आशंकाएं भी बढ़ गई गई है क्योंकि तालिबान के लिए हमेशा से ओपियम प्रोडक्शन और ओपियम ट्रेड एक मेजर सोर्स ऑफ इनकम रहा है इसी प्रकार का ड्रग ट्रैफिकिंग और ओपियम ट्रेड हमें म्यानमार बॉर्डर के अक्रॉस भी देखने को
मिलता है लेकिन नॉर्थ ईस्ट में गोल्डन ट्रायंगल से इमर्ज होने वाले ड्रग मेनेस के लिए किसी एक्सटर्नल स्टेट के डायरेक्ट इवॉल्वमेंट से ज्यादा वहां के नॉन स्टेट एक्टर्स जैसे इंसर्जनल और क्रिमिनल ग्रुप्स ज्यादा रिस्पांसिबल हैं नॉर्थ ईस्ट के अपने ज्योग्राफिकल चैलेंज भी हैं जिसके कारण भी वहां बॉर्डर मैनेजमेंट खुद में एक टास्क है जिसके चलते यहां ड्रग मेनेस काफी रपें है ड्रग मेनेस के अलावा ह्यूमन ट्रैफिकिंग आर्म्स ट्रैफिकिंग बांग्लादेश बॉर्डर के अक्रॉस कैटल ट्रैफिकिंग एक्सट्रा भी एक्सटर्नल स्टेट्स द्वारा पोजड थ्रेट्स में आते हैं पर पाकिस्तान के अलावा बाकी के एक्सटर्नल नेबरिंग स्टेट्स को हम इन
प्रॉब्लम्स के लिए डायरेक्टली ब्लेम नहीं कर सकते क्योंकि वो टेरर को स्टेट पॉलिसी की तरह इस्तेमाल नहीं करते वहां से इमर्ज होने वाले थ्रेट्स लार्जली उन स्टेट्स के गवर्नेंस प्रॉब्लम्स नेगलिजेंस और पुअर बायलट कोऑपरेशन के चलते होते हैं दोस्तों अगला थ्रेट है रेडिकलाइजेशन का वैसे तो रेडिकलाइजेशन का प्रॉब्लम मेनली नॉन स्टेट एक्टर से इमर्ज होता है लेकिन पाकिस्तान की छत्र छाया में पल रहे कई नॉन स्टेट एक्टर्स यह काम करते हैं और इसीलिए रेडिकलाइजेशन एक एक्सटर्नल स्टेट द्वारा पोज थ्रेट की कैटेगरी में भी रखा जा सकता है पंजाब में खालिस्तानी एक्सट्रीमिस्ट आइडियो जीी को फ्यूल
करना हो या फिर जम्मू एंड कश्मीर और बाकी के देश में इस्लामिक फंडामेंटलिज्म और रेडिकलिस्ट को इन सब में किसी ना किसी प्रकार से आईएसआई सपोर्टेड नॉन स्टेट एक्टर्स का हाथ देखा गया है इसके अलावा कई रेडिकल ग्रुप्स बांग्लादेश में भी ऑपरेट करते हैं जिनके खिलाफ स्टेट इन एक्शन के चलते इंडिया लगातार नॉर्थ ईस्ट और वेस्ट बंगाल में रेडिकलाइजेशन के थ्रेट्स फेस करता है एक्सटर्नल स्टेट से इमर्ज होने वाला अगला मेजर थ्रेट है साइबर वरफेन का दोस्तों पिछले एक दशक में इंडिया ने कई तरीकों के साइबर वरफेन के केस झेले हैं इन साइबर वरफेन में
स्टेट और नॉन स्टेट एक्टर्स दोनों का हाथ रहा है स्टेट सपोर्टेड साइबर अटैक्स नॉन स्टेट एक्टर्स द्वारा किए गए अटैक से कहीं ज्यादा लीथल और डेंजरस होते हैं सिंपली बिकॉज़ ऑफ एक्सेस टू हाई एंड टेक्नोलॉजी साइबर वरफेन में एडवांस पर्सिस मेंट थ्रेट यानी एपीटीसी ही डेंजरस साइबर थ्रेट है जो मोस्टली स्टेट या फिर स्टेट स्पंस ग्रुप्स ही लॉन्च कर सकते हैं एपीटीडी कर पाना विक्टिम के लिए काफी ज्यादा चैलेंजिंग भी होता है उदाहरण की बात करें तो सिक्योरिटी रिसर्चर टमोर ने बताया है कि आज चाइनीज स्टेट का एपीटीसी केप काफी ज्यादा स्ट्रांग है और वेल
एस्टेब्लिश भी जिसके की मदद से चाइनीज गवर्नमेंट साइबर एस्पिना आज कमिट करती है पीएलए यूनिट 6139 या फिर एटी व पीएलए यूनिट 61 486 या फिर एटी 2 ये चाइनीज स्टेट सपोर्टेड साइबर एस्पीज यूनिट्स के नाम है जिनको टमोर ने दुनिया के सामने रखा है एस्पिना आज के अलावा सेबो आज प्रोपेगेंडा मैनिपुलेशन और इकोनॉमिक वरफेन भी स्टेट लेड साइबर वरफेन का हिस्सा है 2016 यूएस इलेक्शंस में रशियन इंटरवेंशन साइबर मैनिपुलेशन का उदाहरण है हां पब्लिक ओपिनियन को मैनिपुलेट कर इलेक्शंस को इन्फ्लुएंस करने की कोशिश की गई थी दोस्तों अब बात करते हैं नॉन स्टेट एक्टर्स
द्वारा पोजड इंटरनल सिक्योरिटी थ्रेट की इंटरनल सिक्योरिटी चैलेंज फ्रॉम नॉन स्टेट एक्टर्स नॉन स्टेट एक्टर्स द्वारा पोजड सबसे मेजर थ्रेड इंसर्जनल वायलेंट स्ट्रगल अगेंस्ट इंडियन स्टेट इंडिया में इंसर्जनल प्रॉब्लम्स जम्मू एंड कश्मीर और नॉर्थ ईस्ट में है नॉर्थ ईस्ट की बात करें तो एथनिक आइडेंटिटी को लेकर असर्शन और कॉन्फ्लेट के चलते वहां कई ऐसे नॉन स्टेट एक्टर्स हैं जो इंसर्जनल करते हैं यूएलएन डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड एनडीएफबी नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड एनएससीएन केएल एक्सट्रा नाम के इंसर्जनल हैं इनमें से कुछ ग्रुप्स सेपरेट नेशन की डिमांड करते हैं तो कुछ ग्रेटर ऑटोनॉमी को लेकर स्ट्रगल
कुछ ग्रुप्स का मोटिव इंडियन स्टेट के खिलाफ स्ट्रगल है तो कुछ इंट्रा ट्राइबल सुप्रीमेसी और कॉन्फ्लेट को लेकर स्ट्रगल करते हैं नॉर्थईस्ट इंसर्जनल हम डिटेल में देखेंगे तो इन ग्रुप्स के इतिहास और इनके बीच के डिफरेंसेस की चर्चा करेंगे खैर जम्मू एंड कश्मीर में चल रही इंसर्जनल के नॉन स्टेट फैक्शंस एक्टिव हैं यहां की यूनिक बात यह है कि अनलाइक नॉर्थ ईस्ट जम्मू एंड कश्मीर की इंसर्जनल जियस रेडिकलाइजेशन एक इंपॉर्टेंट एलिमेंट है इसके अलावा जम्मू एंड कश्मीर में एक्सटर्नल स्टेट यानी पाकिस्तान का सपोर्ट भी काफी विजिबल है हालांकि नॉर्थईस्ट इंसर्जनल की बातें होती रही है
लेकिन यह सपोर्ट कंसिस्टेंट नहीं है और सपोर्ट की इंटेंसिटी में भी अंतर है करर जम्मू एंड कश्मीर में एक्टिव नॉन स्टेट एक्टर्स में एलटी हिज्बुल मुजाहिदीन इत्यादि का नाम शुमार है जो पाकिस्तान की मदद से यहां इंसर्जनल देते रहे हैं 1990 में कश्मीरी पंडित के खिलाफ हुई एट्रोसिटी भी इसी इंसर्जनल ईस्ट एंड जमन कश्मीर इंसर्जनल द्वारा यूज होने वाले मेथड्स में मिलिटेंसी टेररिज्म बॉमिस प्रोपेगेंडा अगेंस्ट स्टेट ये सब शामिल है इसके अलावा 80 के दशक में पंजाब में चली खालिस्तानी इंसर्जनल इंटरनल सिक्योरिटी थ्रेट था जिसमें जरनल सिंह भिन्न वाले नाम के मिलिटेंट के अंडर खालिस्तानी
इंसर्जनल पर पहुंच गई थी स्टेट एफर्ट्स के बाद खालिस्तानी मूवमेंट काफी हद तक कमजोर कर दिया गया लेकिन आज भी छोटे-मोटे खालिस्तानी नेटवर्क्स के एसिस्टेंसिया का दावा है नॉन स्टेट एक्टर्स द्वारा पोजड अगला थ्रेट है टेररिज्म या आतंकवाद दोस्तों टेररिज्म इंसर्जनल एरिया में एक बड़ा प्रॉब्लम तो है ही लेकिन देश के बाकी एरियाज में भी यह एक बड़ा थ्रेट है जहां एक और इंसर्जनल एरियाज में टेररिज्म वन ऑफ द टूल्स ऑफ इंसर्जनल इलाकों में यह स्पोरेडिक अटैक के रूप में देखा जाता है इंटरनेशनल टेरर ऑर्गेनाइजेशन जैसे अलकायदा आईएसआईएस एलटी हिज्बुल मुजाहिदीन जैशे मोहम्मद इत्यादि से
इस तरह के थ्रेट्स बने रहते हैं मिडिल ईस्ट में आईएसआईएस के राइज के बाद हमने न्यूज़ में कई दफा देखा कि इंडिया के कई स्टेट्स में आईएसआईएस के ऑपरेटिव्स गिरफ्तार हुए हैं यह रेडिकलाइजेशन के थ्रेट की ओर इशारा करता है इसके अलावा 2008 टेरर अटैक से लेकर जगह-जगह हुए बॉम ब्लास्ट में आतंकवादी संगठनों का डायरेक्ट हाथ रहा है और कई दफा इन्हें पाकिस्तान का सपोर्ट भी रहा है दोस्तों नॉन स्टेट एक्टर्स द्वारा पोजड अगला थ्रेट है कम्युनल स्ट्राइफ रेडिकलाइजेशन और एसोसिएटेड चैलेंजेबल आर्टिकल 19 के तहत लोगों को ऑर्गेनाइजेशंस और ग्रुप फॉर्म करने का फंडामेंटल राइट
देता है और फ्रीडम ऑफ स्पीच की आजादी भी इसके चलते कई तरह के सिविल सोसाइटी ग्रुप्स और एनजीओस हमारे देश में एक्टिव हैं लेकिन इनमें से कई ग्रुप्स टेरर ऑर्गेनाइजेशंस और एनिमी स्टेट के मुखबीर या फिर फ्रंट ऑर्गेनाइजेशन के रूप में ऑपरेट करते हैं और देश के लोगों को रेडिकलाइज करने का काम करते हैं रेडिकलाइजेशन के चलते समाज में लोगों के बीच कॉन्फ्लेट बढ़ता है और वायलेंस और राइट्स का खतरा भी बढ़ जाता है कई ग्रुप्स एक्सट्रीमिस्ट आइडल जीी और फंड मेटलिस्ट आइडल को सपोर्ट कर लोगों में नफरत फैलाते हैं पिछले कुछ सालों में हमने
यह सारे काम सोशल मीडिया के थ्रू होते हुए भी देखा है मॉब लिंचिंग की खबरें तो हम सबने सुनी है उसके अलावा कम्युलस जैसे मुजफ्फरनगर दिल्ली राइट्स इत्यादि भी इस तरह के रेडिकलाइजेशन का नतीजा माने जाते हैं दोस्तों नॉन स्टेट एक्टर्स देश को इकोनॉमिक थ्रेट भी पहुंचाते हैं इकोनॉमिक थ्रेट्स में सबसे बड़ा चैलेंज है पैरेलल इकोनॉमी का जो ब्लैक मनी और मनी लरिंग इत्यादि के चलते पैदा होता है ट्रांस नेशनल ऑर्गेनाइज्ड क्राइम ग्रुप्स जैसे डी कंपनी देश में अवैध धंधों को चलाते रहे हैं और करप्ट ऑफिशल्स की मदद से देश में एक पैरेलल ब्लैक मार्केट
को जन्म देते रहे हैं इकोनॉमिस्ट बताते हैं कि ब्लैक मनी के सर्कुलेशन से देश की मोनेटरी पॉलिसी कमजोर पड़ती है और इसीलिए नेशनल इकोनॉमी के लिए यह एक बड़ा खतरा है इसके अलावा फेक करेंसी नेटवर्क्स भी देश को इकोनॉमिकली रुन करते हैं इस तरह के ग्रुप्स समाज में सोशल और मोरल हजार्ड को भी जन्म देते हैं इसमें ड्रग मैनेस और ह्यूमन ट्रैफिकिंग एक्सेट्रा शामिल है आर्म्स ट्रैफिकिंग जैसे धंधों के चलते देश में क्रिमिनल एक्टिविटीज बढ़ जाती हैं और लोकल माफियाज का जन्म होता है कई दफा यह पाया गया है कि ऑर्गेनाइज क्रिमिनल नेटवर्क्स और टेररिस्ट
नेटवर्क्स एक ही होते हैं और यह दोनों तरह के ग्रुप्स एक दूसरे के साथ इंटरलिंक्ड होते हैं एक तरह से यह दोनों ग्रुप्स के बीच में सिंबायोटिक रिलेशनशिप होता है टेरर ग्रुप्स इन ग्रुप्स को सिक्योरिटी प्रोवाइड करते हैं और ऑर्गेनाइज्ड क्राइम नेटवर्क्स टेररिज्म को फंड करते हैं कई बार तो ऑर्गेनाइज्ड क्रिमिनल्स खुद इतने बड़े हो जाते हैं कि वह भी टेरर ग्रुप्स के तरीकों को अपनाकर देश में इंटरनल सिक्योरिटी थ्रेड्स क्रिएट कर देते हैं डी कंपनी का उदाहरण यहां एकदम फिट बैठता है जिसे 1993 मुंबई ब्लास्ट को अंजाम दिया था नॉन स्टेट एक्टर्स द्वारा पोजड
अगला थ्रेट है नक्सलिज्म का फॉर्मर पीएम मनमोहन सिंह ने लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिस्म को इंडिया का सबसे बड़ा इंटरनल सिक्योरिटी थ्रेट बताया था सीपीआई माउस नाम के बैंड नक्सल नॉन स्टेट ग्रुप के बैनर तले इंडिया में नक्सलवाद ऑपरेट हो रहा है इस एक्सट्रीमिस्म ने इंडिया के बैकवर्ड एरियाज में अपनी पकड़ बनाई हुई है और वहां के लोगों को परपे चुअल बैकवार्डनेस और डिप्रिवेशन की ओर ढकेल दिया है साइबर सिक्योरिटी थ्रेट में भी नॉन स्टेट एक्टर्स का हाथ है हालांकि स्टेट लेट साइबर अटैक थ्रेट्स ज्यादा लीथल और स्ट्रांग होते हैं लेकिन नॉन स्टेट एक्टर्स द्वारा लेड साइबर
सिक्योरिटी थ्रेट भी कुछ कम खतरनाक नहीं है नॉन स्टेट एक्टर्स द्वारा पोजड साइबर थ्रेट्स के मकसद कई प्रकार के हैं कुछ ग्रुप्स साइबर क्राइम्स को प्योर मॉनेटरी गेंस के लिए अंजाम देते हैं तो कुछ ग्रुप्स इन्हें देश को डिस्टेबलाइज करने के लिए करते हैं फिशिंग एस्पियो नाच डेटा थेफ्ट रैंस वेयर अटैक्स स्कमिंग हैकिंग इत्यादि नॉन स्टेट एक्टर्स द्वारा पोजड साइबर सिक्योरिटी थ्रेट्स हैं इन्हें भी हम आने वाले लेक्चर में डिटेल में समझेंगे तो दोस्तों यह था लेक्चर जिसमें हमने ब्रीफ देखा कि इंडिया में एक्सटर्नल स्टेट और नॉन स्टेट एक्टर्स किस तरह के इंटरनल सिक्योरिटी थ्रेट्स
क्रिएट करते हैं ध्यान में रखने वाली बात यह है कि ऊपर डिस्कस किए गए थ्रेट्स आइसोलेशन में ऑपरेट नहीं करते हैं स्टेट और नॉन स्टेट एक्टर्स भी आपस में इंटरलिंक हैं और उनके द्वारा पोजड थ्रेट्स भी ऐसा इसलिए क्योंकि बिना फंडिंग के कोई टेरर ग्रुप ऑपरेट नहीं कर सकता और बिना स्टेट सपोर्ट के कोई भी टेरर ग्रुप लॉन्ग टर्म में सरवाइव नहीं कर सकता कई दफा यह होता है कि जो ग्रुप्स टेररिज्म करते हैं वो ऑर्गेनाइज्ड क्राइम में भी इवॉल्वड होते हैं द डेफिनेशनल प्रॉब्लम दोस्तों कॉमन सेंस परसेप्शन में टेररिज्म या आतंक आवाद की एक
वेग या अस्पष्ट छवि एजिस्ट करती है मीडिया नैरेटिव ने कई तरीकों के वायलेंट एक्टिविटीज को टेररिज्म का नाम दिया है बॉम ब्लास्ट हो या सिविलियंस का मैसे करर मिलिट्री यूनिट्स पर अटैक्स हो या फिर किसी बड़े नेता का एसिनेट इन सब एक्टिविटीज को जनरली टेरर एक्टिविटीज में गिना गया है लेकिन यूपीएससी एस्परेंस होने के नाते हमारे लिए ये जानना बेहद जरूरी है कि क्या टेररिज्म शब्द का कोई प्रेसा इज और एक्यूरेट डेफिनेशन एजिस्ट करती है और यदि हां तो वह क्या है हम आपको बता दें कि एज अ सोसाइटी जब हम किसी शब्द को डिफाइन
करते हैं तो उसमें कंसेंसस का मेजर रोल होता है इस कंसेंसस से इमर्ज होते हैं लीगल डॉक्यूमेंट और लॉज जो टेररिज्म जैसे सिक्योरिटी प्रॉब्लम्स को डिफाइन करके उनके खिलाफ पॉसिबल एक्शंस को आउटलाइन करते हैं लेकिन सच यह है कि आज तक इंटरनेशनल कम्युनिटी टेररिज्म की एक यूनिवर्सल डेफिनेशन बना पाने में असमर्थ रही है 1970 और 80 में यूनाइटेड नेशंस ने स्टम को डिफाइन करने के लिए कई सीरियस अटेम्प्ट्स लिए लेकिन मेंबर स्टेट्स के बीच डिफरेंसेस के चलते यह संभव नहीं हो पाया इंडिया के एफर्ट्स के बाद कंप्रिहेंसिव कन्वेंशन ऑन इंटरनेशनल टेररिज्म को इंटरनेशनल लेवल पर
पुश किया गया जिसने टेररिज्म की एक यूनिवर्सल डेफिनेशन टैब्लिक्स के यूनिवर्सल डेफिनेशन पर कोई एग्रीमेंट नहीं हुआ है लेकिन सवाल यह भी है कि टेररिज्म को डिफाइन करने में कॉन्फ्लेट और समस्या क्या है दोस्तों यह कॉन्फ्लेट इसीलिए इमर्ज होता है क्योंकि वायलेंस का इस्तेमाल कब लेजिटिमेसी नहीं इस पर कई तरीके के डिस्प्यूट्स हैं इसके अलावा कॉन्फ्लेट ऑफ इंटरेस्ट के चलते कॉन्फ्लेट में इवॉल्वड एंटिटीज एक दूसरे पर टेररिज्म का आरोप लगाते हैं उदाहरण के तौर पर पैलिस्सरी और यूएसए पर टेररिज्म का आरोप लगाते हैं तो वहीं इजराइली गवर्नमेंट पैलिस्सरी बोलती हैं कुर्दिश फाइटर्स टर्की को टेररिस्ट
स्टेट बोलते हैं तो वही टर्की जैसे स्टेट्स उन लोगों को टेररिस्ट बोलते हैं जो उनके खिलाफ लड़ रहे होते हैं हर ग्रुप अपने एक्ट को जस्टिफाई और लेजिटिमेसी कई बार ऐसा भी होता है कि एक इंसान का फ्रीडम फाइटर दूसरे इंसान के लिए टेररिस्ट हो जाता है इसके अलावा मॉडर्न पॉलिटिक्स में नेशन स्टेट्स जिस तरह की ताकत और डोमिनेंस एंजॉय करते हैं उस कॉन्टेक्स्ट में टेररिज्म की डेफिनेशन क्या होगी उस पर सबसे ज्यादा से नॉन स्टेट्स का ही होता है इसीलिए कई स्कॉलर्स टेररिज्म पर डोमिनेंट व्यूज को स्टेट सेंट्रिक और बायस मानते हैं स्कॉलर्स दावा
करते हैं कि नॉन स्टेट एक्टर्स के अलावा कई ऐसे स्टेट्स भी हैं जो टेरर एक्ट्स में इवॉल्वड होते हैं और अपने सिविलियंस पर अत्याचार करते हैं लेकिन इस तरह के टेररिज्म को लेकर अकाउंटेबिलिटी काफी कम है इस तरह के टेररिज्म का सबसे बड़ा एग्जांपल नाज जर्मनी था इसके अलावा पाकिस्तान द्वारा सपोर्टेड टेररिज्म के बारे में हम जानते ही हैं इसके खिलाफ एक्शंस को लेकर जियोपोलिटिकल कॉम्प्लेक्शन लॉज में भी गवर्नमेंट द्वारा परफॉर्म अत्याचारों को जनरली टेररिज्म की डेफिनेशन से एक्सक्लूड किया जाता है इन सब कॉम्प्लेक्टेड ज्म की डेफिनेशन डिस्प्यूटेड रही है एटलीस्ट इंटरनेशनल लेवल पर पर
इसके बावजूद इस फिनोम के कुछ एस्पेक्ट्स पर कस्टमरी या पार्शियल एग्रीमेंट देखा जा सकता है पर क्या है ये एस्पेक्ट्स दोस्तों इनमें सबसे पहला तो यह है कि जब कोई एंटिटी या इंडिविजुअल टेरर इंटिमिडेशन वायलेंस हार्म थ्रेट इत्यादि को रैंडम और इंडिस्क्रिमिनेट तरीके से यूज़ करता है तो उसे हम जनरली टेररिज्म की कैटेगरी में रखते हैं इसके अलावा एक टेरर एक्ट का कोई ना कोई पॉलिटिकल मोटिवेशन भी होता है टेररिस्ट लगातार ये कोशिश करते हैं कि टेरर एक्ट को पब्लिसाइज किया जाए इसके अलावा वायलेंस टेररिज्म का फंडामेंटल मेथड और टूल है टेररिज्म लॉ इंफोर्समेंट एजेंसीज
कंटेंट्स और सिविलियंस में डिस्क्रिमिनेट नहीं करता और सब पर अटैक करता है और यही बात इसे लेजिटिमेसी होता है लेकिन उस वॉर में पार्टिसिपेट करने वाले लोग कॉमिटेंट होते हैं यानी आर्म्ड लोग उन्हें भी यह हिदायत होती है कि सिविलियंस और नॉन आम लोगों पर अटैक करना वॉर क्राइम है और ये एथिकली रॉन्ग है लेकिन टेररिस्ट का फंडामेंटल टारगेट ट ऐसे ही नॉन कॉमिटेंट होते हैं खैर टेररिज्म की एक अंडरलाइन फिलॉसफी भी होती है जिसके एम्स पॉलिटिकल रिलीजियस कल्चरल एथनिक इत्यादि हो सकते हैं इसके अलावा इसके फंडामेंटल इंटेंशन लोगों में और गवर्नमेंट में फियर क्रिएट
करना होता है ताकि उन्हें कोइसस कर टेररिस्ट अपनी डिमांड को मीट करवा सके क्लोजेस्ट डेफिनेशन के लिए हम यूएन जनरल असेंबली के रेजोल्यूशन 49 बा 60 को भी कोट कर सकते हैं इसके हिसाब से टेररिज्म इज दोज क्रिमिनल एक्ट दैट आर इंटेंडेड टू प्रोवोक टेरर इन द पब्लिक और अ ग्रुप ऑफ़ पर्स संस फॉर पॉलिटिकल पर्पसस दैट आर इन एनी सरकमस्टेंस अनज सिफाइबेस्ट ऑफ अ पॉलिटिकल फिलोसॉफिकल आइडियो कल रेशियन एथनिक रिलीजियस और एनी अदर नेचर दैट मे बी इन्वोक्ड टू जस्टिफाई देम दोस्तों अब चलते हैं टाइप्स ऑफ़ टेररिज्म क्यूर टाइप्स ऑफ टेररिज्म टेररिज्म को क्लासिफाई
करने के कई तरीके हैं इनमें सबसे पहला क्लासिफिकेशन इस बेसिस पर होता है कि टेररिज्म कि किसने कमिट किया है इस तरह से टेररिज्म के ब्रॉडली तीन टाइप्स हैं स्टेट टेररिज्म स्टेट स्पंस टेररिज्म और नॉन स्टेट टेररिज्म स्टेट टेररिज्म वो होता है जिसे एक स्टेट या उसकी गवर्नमेंट डायरेक्टली कमिट करती है जब कोई गवर्नमेंट खुद के लोगों पर इंडिस्क्रिमिनेट तरीके से वायलेंस करती है तो उसे स्टेट टेररिज्म कहते हैं ऐसे केसेस में स्टेट सपोर्टेड मैस केयर्स जेनोसाइड एक्सट्रा आते हैं इसके एग्जांपल में एलज साउदी गवर्नमेंट एजेंट्स द्वारा साउदी जर्नलिस्ट जमाल कशो कीी की हत्या या
फिर रशियन इंटेलिजेंस एजेंट्स द्वारा एक्स रशियन स्पाई और उसकी बेटी की जहर देकर हत्या इत्यादि आते हैं नाजर द्वारा जीयस का जेनोसाइड हो या फिर कंबोडिया में खमे रूज द्वारा किया गया जेनोसाइड ये भी स्टेट टेररिज्म के एग्जांपल्स हैं अगला टाइप है स्टेट स्पंस टेररिज्म इस तरह के टेररिज्म में गवर्नमेंट नॉन स्टेट एक्टर्स को इनडायरेक्टली सपोर्ट करती है जो वायलेंट एक्टिविटीज में इवॉल्वड होते हैं स्टेट स्पंस टेररिज्म में हम पाकिस्तान का उदाहरण ले सकते हैं जो एलटी और हिज्बुल मुजाहिदीन जैसे ऑर्गेनाइजेशंस को कश्मीर और इंडिया के बाकी की हिस्सों में आतंकवाद फैलाने के लिए सपोर्ट
प्रोवाइड करता है पाकिस्तान ऐसे ग्रुप्स को सेफ हाउसेस फंड्स रिक्रूटमेंट और आर्म्स फैसिलिटी प्रोवाइड कराने का काम करता रहा है आज के दौर में स्टेट स्पॉन्सर टेररिज्म का प्राइम मोटिव जिओ पॉलिटिकल लेवरेज है राद देन आइडियो जिकल रिलीजियस या एथनिक मोटिव नॉन स्टेट टेररिज्म की बात करें तो ये लार्जली नॉन स्टेट आर्म्ड एक्टर्स या ग्रुप्स द्वारा कमिट किया जाता है नॉन स्टेट एक्टर्स गवर्नमेंट से पूरी तरह या पार्शियली इंडिपेंडेंट रूप से ऑपरेट करते हैं ऐसे ग्रुप्स अपने गोल्स को अचीव करने के लिए वायलेंस थ्रेट और इंटिमिडेशन का तरीका अपनाते हैं इनके मोटिव्स कई तरीकों के
होते हैं जो आइडियो जिकल रिलीजियस एथनिक पॉलिटिकल सोशल इकोनॉमिक इत्यादि हो सकते हैं इसीलिए इस तरह के टेररिज्म में काफी डाइवर्सिटी देखी जाती है नारकोटिक्स कार्ट्स पॉपुलर लिबरेशन मूवमेंट रिलीजियस एंड आइडल जिकल ऑर्गेनाइजेशंस सेल्फ डिफेंस मिलिशिया पैरामिलिट्री ग्रुप्स इत्यादि ऐसे टेररिज्म का हिस्सा होते हैं इसके अलावा कुछ नॉन स्टेट एक्टर या तो गवर्नमेंट्स को अपोज करते हैं या फिर गवर्नमेंट का साथ देते हैं नाजी जर्मनी में एसएस नाम का नॉन स्टेट ऑर्गेनाइजेशन टेरर एक्ट्स में इवॉल्व था और यह प्रो गवर्नमेंट मिलिशिया ग्रुप था ऐसे ही रवांडा जेनोसाइड में कई ऐसे नॉन स्टेट ऑर्गेनाइजेशंस थे जो
प्रो स्टेट थे और उन्होंने वहां के माइनॉरिटी पर अत्याचार किए नॉन स्टेट एक्टर्स के टेरर फैलाने के तरीके भी काफी डावर्स होते हैं टारगेटेड किलिंग से लेकर बॉम ब्लास्ट साइबर वरफेन से लेकर किडनैपिंग और एक्सर्शंस तक दोस्तों टेररिज्म को हम टाइप ऑफ स्ट्रेटजी और गोल्स के बेसिस पर भी क्लासिफाई कर सकते हैं इसमें सबसे पहला टाइप है साइबर टेररिज्म का जब टेररिस्ट कंप्यूटर नेटवर्क्स इंटरनेट सोशल मीडिया इत्यादि का इस्तेमाल टेरर फैलाने के लिए करते हैं या फिर क्रिटिकल नेटवर्क्स को हैक कर वह गवर्नमेंट या लोगों को इंटिमिडेट या कोर्स करते हैं तो उसे साइबर टेररिज्म
का दर्जा दिया जाता है यह एक इमर्जिंग और अन कन्वेंशनल मेथड ऑफ टेररिज्म है अगला है एथनो नेशनलिस्ट टेररिज्म इस तरह के टेररिज्म का फोकस या तो एक सेपरेट नेशन स्टेट को क्रिएट करना होता है या फिर एथनिक ग्रुप्स के लिए बेटर सोशल एंड पॉलिटिकल गोल्स को अचीव करना श्रीलंका में तमिल इंसर्जनल नागालैंड में नागा इंसर्जनल टेररिज्म के अंदर क्लासिफाई किए जाते हैं अगला है न्यूक्लियर टेररिज्म दोस्तों न्यूक्लियर टेररिज्म का मतलब है टेररिस्ट द्वारा न्यूक्लियर मटेरियल का अलग-अलग तरीकों से इस्तेमाल जो लोगों में पैनिक क्रिएट कर सकता है इसमें न्यूक्लियर फैसिलिटी पर अटैक न्यूक्लियर वेपंस
को बना या परचेज करना और उनका गलत इस्तेमाल करना शामिल है किसी न्यूक्लियर फैसिलिटी में एक टेरर अटैक न्यूक्लियर मटेरियल को रिलीज कर सकता है जिसके कंसीक्वेंसेस बेहद खतरनाक हो सकते हैं 1986 में हुए चन्नो बिल डिजास्टर से जिस तरीके की राजदी यूएसएसआर में देखी गई थी न्यूक्लियर टेररिज्म उससे कहीं ज्यादा खतरनाक राजदी को जन्म दे सकता है ऐसे में न्यूक्लियर वेपंस सिक्योर और रिस्पांसिबल हाथों में रहे यह बेहद जरूरी है पाकिस्तान जैसे इरिस्पांसिबल देश के पास भी आज न्यूक्लियर वेपन है और वहां जिस तरह की पॉलिटिकल इंस्टेबिलिटी एजिस्ट करती है और जिस तरह से
टेररिज्म प्रोलिफ्ट करता है उससे पूरी दुनिया कंसर्न दिखाई देती है अगला है आइडल जीी ओरिएंटेड टेररिज्म जो राइट विंग और लेफ्ट विंग दोनों रूप में देखा जा सकता है कम्युनिस्ट या फिर मार्क्सिस्ट लेनिनिस्ट या मोइस्ट वायलेंट ग्रुप्स को लेफ्ट विंग टेररिस्ट का दर्जा दिया जा सकता है इंडिया का नक्सलिज्म ऐसा ही एक टेररिज्म है इसके अलावा राइट विंग टेररिज्म में नाजिम फासिज्म इत्यादि जैसे आइडियाज को फॉलो करने वाले कंजरवेटिव या फंडामेंटलिस्ट ग्रुप्स आते हैं राइट विंग टेररिस्ट का एम करंट गवर्नमेंट या ऑर्डर को बदलकर एक फासिस्ट स्टेट को एस्टेब्लिश करना होता है और उनके मेन
टारगेट्स माइनॉरिटी होते हैं वहीं लेफ्ट विंग टेररिस्ट का टारगेट वायलेंट मेथड्स को यूज कर एक क्लासले सोसाइटी को एस्टेब्लिश करना होता है जहां क्लास डिवाइड एजिस्ट ना करें नार्को टेररिज्म भी एक टाइप का टेररिज्म है इसमें नारकोटिक्स ट्रैफिकर्स टेररिज्म का इस्तेमाल गवर्नमेंट पॉलिसीज को इन्फ्लुएंस करने या गवर्नमेंट ऑफिशल्स को डराने के लिए करते हैं ताकि उनका ऑर्गेनाइज्ड क्राइम फ्लोरिश करता रहे ट्रांस नेशनल ऑर्गेनाइज्ड क्राइम नेटवर्क्स नारकोटिक्स के अलावा आर्म्स ह्यूमन कैटल लग्जरी गुड्स एनिमल बैंड गुड्स की ट्रैफिकिंग जैसे एक्टिविटीज में इवॉल्वड रहते हैं और ये ग्रुप्स टेररिज्म को अपने इकोनॉमिक बेनिफिट्स के लिए यूज करते
हैं बायोटेररिज्म वो टेररिज्म है जिसमें लोगों को टेरलाइटलागजागी तरह के टेररिज्म में इस्तेमाल किए जाते हैं इसके अलावा कई तरीके के डेंजरस केमिकल्स जैसे क्लोरीन गैस का इस्तेमाल भी सिविलियंस को इंडिस्क्रिमिनेट तरीके से मौत के घाट पहुंचा सकता है और टेरर फैला सकता है दोस्तों इस तरह के क्लासिफिकेशन की लिस्ट एग्जॉस्ट नहीं हो सकती और उनमें कैटेगरी और सब कटेगरी बनाए जा सकते हैं लेकिन ये टाइप्स मेजर और मोस्ट इंपॉर्टेंट है जिन पर ध्यान देना जरूरी है चलिए अब देखते हैं इंडिया के मेजर टेरर एक्टिविटीज के इतिहास को दोस्तों सबसे पहले बात करते हैं जम्मू
एंड कश्मीर की जम्मू एंड कश्मीर में इंसर्जनल ज्म के रूट्स 1947 से ट्रेस किए जा सकते हैं जब इंडिया के इंडिपेंडेंस के वक्त पाकिस्तान ने जम्मू एंड कश्मीर को कैप्चर करने के लिए इंडिया पर अटैक किया था तब से ही वहां सेपरेटिज्म का एक माहौल बना हुआ है जो विथ टाइम पाकिस्तान के सपोर्ट के चलते स्ट्रन भी हुआ इनमें से कुछ ग्रुप्स मिलिटेंसी में इवॉल्व हुए और इन्होंने टेररिज्म को एक टूल की तरह इंडिया के खिलाफ यूज किया 30 के दशक में जब यहां अलकायदा और बाकी की टेरर ग्रुप्स ने एंट्री ली तो यहां इस्लामिक
फंडामेंटलिज्म का उदय हुआ और इसने जम्मू एंड कश्मीर इंसर्जनल को ऐड कर दिया एक्सट्रीमिस्म और टेररिज्म का माहौल पंजाब में भी देखा गया आजादी के कुछ दशकों बाद एक सेपरेट सिख आइडेंटिटी को लेकर चल रहे असर्शन के चलते पाकिस्तान में भी सेपरेटिज्म का एक माहौल बना जर्नल सिंह भिन रन वाले की लीडरशिप के अंडर 70 और 80 के दशक में पंजाब अपने वर्स्ट फेज से गुजरा खालिस्तानी एलिमेंट्स द्वारा यहां टेररिज्म को एक टूल की तरह यूज़ किया गया जो बाद में स्ट्रिक्ट स्टेट एक्शन के चलते कम हुआ ओवरऑल इंडिया में टेररिज्म की बात करें तो
उसका इवोल्यूशन कुछ इस प्रकार से हुआ बांग्लादेश लिबरेशन वॉर के बाद पाकिस्तान को यह रिलाइज हो गया था कि वह कन्वेंशनल वरफेन में इंडिया से जीत नहीं सकता अब तक उसने इंडिया से तीन वॉर्स में मात खाई थी इसलिए पाकिस्तानी इस्टैब्लिशमेंट ने सब कन्वेंशनल या प्रॉक्सी वॉर का इस्तेमाल किया जिसका मोटो बना ब्लीडिंग इंडिया विथ अ थाउज कट्स और इस फिलॉसफी के तहत एक प्लान और ऑर्गेनाइज तरीके से पाकिस्तान ने इंडिया के अलग-अलग हिस्सों में टेररिज्म को अपना हथियार बनाया 1980 और 1990 के बीच आज के टेररिज्म के सीट्स एक्चुअली में खालिस्तान मूवमेंट के रूप
में बोए गए कुछ स्कॉलर्स कहते हैं कि खालिस्तान मूवमेंट में पाकिस्तानी सपोर्ट का एक कारण था पंजाब को जम्मू एंड कश्मीर और बाकी के इंडिया के बीच एक बफर स्टेट के रूप में एस्टेब्लिश करना हालांकि पाकिस्तान का यह मंसूबा सफल नहीं हुआ पाकिस्तान में खालिस्तानी मूवमेंट के सप्रे के बाद पाकिस्तान ने डायरेक्टली कश्मीर को को टारगेट करना शुरू किया और उसने लेट 1980 में कश्मीर में एंटी इंडिया सेंटीमेंट्स को फ्यूल किया यही वजह है कि जम्मू एंड कश्मीर इंसर्जनल फेज इसी दौर में देखा और यही व दौर था जब वहां से कश्मीरी पंडित्स का एक्सोडस
हुआ पाकिस्तान बेस टेरर ग्रुप्स द्वारा सपोर्टेड ये टेररिज्म आज भी जिंदा है दोस्तों इसके अलावा इंडिया में एक फंडामेंटलिस्ट इस्लामिक ऑर्गेनाइजेशन स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया या एसआई एमआई का फॉर्मेशन भी हुआ इसका मकसद इंडिया के मुस्लिम यूथ को रेडिकलाइज करना था धीरे-धीरे ये ऑर्गेनाइजेशन और रेडिकल हुआ और फाइनली इसे यूएपीए के तहत बैन कर दिया गया 1992 में अयोध्या इंसीडेंट के बाद पूरे देश में रिएक्शनरी एक्टिविटीज का ग्रोथ हुआ जिसने आईएसआई को एक लुक्रेटिव अपॉर्चुनिटी दी इसका इस्तेमाल आईएसआई ने इंडिया में कम्युनिज्म रेडिकलाइजेशन और टेररिज्म को स्प्रेड करने के लिए किया 21वीं सदी में
इंडियन मुजाहिदीन का क्रिएशन हुआ जिसका मेन परपज टेररिज्म के साथ-साथ प्रोपेगेंडा था इस प्रोपेगेंडा के तहत दुनिया में में यह बताया जाने लगा कि इंडिया में टेररिज्म पाकिस्तान से एक्सपोर्ट नहीं होता बल्कि वो लोकली जन्म ले रहा है इस प्रोपेगेंडा ने दुनिया को यह दिखाने की कोशिश की कि इंडियन स्टेट द्वारा इंडियन मुस्लिम्स पर किए जा रहे बुरे बर्ताव के चलते यह टेररिज्म जन्म ले रहा है जो एक बेसलेस आरोप था इंटरनेशनल लेवल पर इंडिया द्वारा पाकिस्तान पर किए जा रहे कंटीन्यूअस अटैक्स को कमजोर करने के लिए यह साजिश रची गई इसके अलावा नॉर्थ ईस्ट
इंडिया में चल रहे टेररिज्म और नक्सलिज्म का भी अपना इतिहास है जिसकी चर्चा डिटेल में हम आने वाले वीडियोस में करेंगे खैर इंडियन गवर्नमेंट के कई एफर्ट्स के चलते टेरर एक्टिविटीज में आज काफी सुधार आया है यही वजह है कि ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स 2020 में जहां इंडिया आठवीं रैंक पर था वहीं 2022 के इंडेक्स में इंडिया 12वें स्थान में चला गया है जहां एक तरफ इंडिया ने टेररिज्म से 2001 में लगभग 600 डेथ पर ईयर रिकॉर्ड करी थी वहीं 2019 में यह 200 डेथ पर ईयर तक कम हो गया है लेकिन इन सबके बावजूद पठानकोट
पुलवामा उरी एक्सट जैसे अटैक्स कंसर्निंग रहे [संगीत] हैं रीजंस फॉर टेररिज्म दोस्तों सबसे पहले कारण पर हमने डिटेल में वीडियो बनाया है जिसे आप लेक्चर नंबर टू यानी लिंकेजेस बिटवीन डेवलपमेंट एंड स्प्रेड ऑफ एक्सट्रीमिस्म में देख सकते हैं वहां लैक ऑफ डेवलपमेंट पॉवर्टी एलिशन डिस्क्रिमिनेशन कंपटीशन फॉर स्कार्स रिसोर्सेस गवर्नेंस फेलियर इत्यादि किस तरह से टेररिज्म और एक्सट्रीमिस्म को कॉस करते हैं इस पर डिटेल में चर्चा करी हुई है उस वीडियो में हमने देखा कि क्यों टेररिज्म के हॉटस्पॉट्स मोस्टली वो एरियाज हैं जहां डेवलपमेंटल इंडिकेटर्स कमजोर हैं खैर अगला मेजर कारण है आइडियो जिकल डिफरेंसेस एंड
कॉन्फ्लेट ओवर आइडियो जीी दोस्तों डाइवर्सिटी से भरपूर हमारे देश में लोगों के बीच लैंग्वेज रेस कल्चर हिस्ट्री रिलीजन वे ऑफ लाइफ लेवल ऑफ डेवलपमेंट इत्यादि के बेसिस में डिफरेंसेस हैं इसलिए देश में लोगों की विचारधाराओं में भी काफी अंतर है विचारधाराओं में अंतर अग अगर पॉजिटिवली यूज हो तो वह समाज में ग्रोथ डेवलपमेंट और इनोवेशन को इनकरेज करता है और इसीलिए इंडियन कॉन्स्टिट्यूशन का आर्टिकल 19 सबको फ्रीडम ऑफ स्पीच एंड एक्सप्रेशन का अधिकार देता है लेकिन बढ़ते एक्सट्रीमिस्म रेडिकलाइजेशन पॉलिटिकल एस्पिरेशंस और इनटोलरेंस के चलते कई बार ये आइडियो जिकल डिस्प्यूट्स इतने कट्टर हो जाते हैं
कि कॉन्फ्लेट्स जन्म लेते हैं और जब ये स्थिति चरम पर पहुंचती है तो टेररिज्म का भी रूप ले सकती है आइडियो जिकल टेररिज्म जैसे लेफ्ट विंग और राइट विंग टेररिज्म का ये सबसे बड़ा कार है इसके अलावा रिलीजियस एथनो नेशनलिस्ट और बाकी के टेररिज्म में भी आइडियो जीी इंपॉर्टेंट है अगला बड़ा कारण है पॉलिटिक्स और पॉलिटिकल एस्पिरेशंस दोस्तों इंडिविजुअल्स और ग्रुप्स के अपने-अपने पॉलिटिकल एस्पिरेशंस होते हैं और यही कारण है कि देश में सबको चुनाव लड़ने और पॉलिटिकल प्रोसेस में पार्टिसिपेट करने का अधिकार है लेकिन कई बार कुछ इंडिविजुअल्स या ग्रुप्स के पॉलिटिकल एस्पिरेशंस फुलफिल
नहीं होते ड्यू टू वेरियस रीजंस तब वो डेवियट तरीकों से इन्हें पूरा करने के लिए वायलेंट मेथड्स और टेररिज्म का इस्तेमाल करते हैं है एज अ फॉर्म ऑफ रिवेंज और असर्शन जनरली इंसर्जनल सेपरेटिज्म से लिंक्ड टेररिज्म के पीछे ऐसे ही पॉलिटिकल एस्पिरेशंस मेजर रोल प्ले करते हैं एक कारण जिओ पॉलिटिक्स से भी लिंक्ड है स्कॉलर्स का दावा है कि इंटरनेशनल पॉलिटिक्स में चल रही राइवल्रीज में स्ट्रेटेजिक एज पाने के लिए भी टेररिज्म का सहारा लिया जाता है स्टेट के लिए टेररिज्म का इस्तेमाल कॉस्ट इफेक्टिव है क्योंकि इसमें डायरेक्टली किसी स्टेट को दोषी ठहरा पाना कठिन
है और इसीलिए बिना डायरेक्ट वॉर के कई स्टेट्स इस मेथड को यूज करते हैं जैसे कि पाकिस्तान आप जानते हैं कि जम्मू एंड कश्मीर तीन देशों के ट्रा जंक्शन पर लोकेटेड भारत का वह यूनियन टेरिटरी है जिसकी जियोस्ट्रैटेजिक इंपॉर्टेंस किसी से छुपी हुई नहीं है हिमालया से घिरा हुआ जम्मू एंड कश्मीर इंडिया को नेचुरल डिफेंस भी प्रोवाइड कराता है जिस पर पाकिस्तान अपना कंट्रोल बनाकर इंडिया के सामने एक स्ट्रेटेजिक एज पाना चाहता है यह एक बड़ा कारण है कि वह लगातार यहां टेररिज्म को सपोर्ट करता है इसके अलावा इंटरनेशनल सिचुएशंस भी टेररिज्म को फ्यूल कर
सकती हैं इसका सबसे बड़ा उदाहरण है कश कश्मीर में 90 के दशक में मिलिटेंसी का राइज दोस्तों 90 का दशक ग्लोबल जिओ पॉलिटिक्स में कई तरह के बवंडर का दौर था यूएसएसआर डिक्लाइन हो रहा था और 1989 में व अफगानिस्तान छोड़कर चला गया लेकिन अफगानिस्तान में तब तक कई रिबल फोर्सेस अफगान मुजाहिदीन के अंडर ग्रो कर चुके थे इसी दौर में अलकायदा का भी राइज हुआ सोवियत विड्रॉल के बाद अफगानिस्तान में ये फोर्सेस और भी ताकतवर हुई जिनके पाकिस्तानी इंटेलिजेंस यानी आईएसआई के साथ लिंक्स थे इसलिए जब ये फोर्सेस ताकतवर हुई तो का असर जम्मू
एंड कश्मीर में भी देखने को मिला जहां टेरर ग्रुप्स ने अपनी पकड़ और मजबूत की जो पाकिस्तान और इंटरनेशनल टेरर ग्रुप्स के सपोर्ट से और ज्यादा मजबूत हो गया इसके अलावा हिस्टोरिकल रीजंस भी इंपॉर्टेंट हैं टेररिज्म के बर्थ और स्प्रेड में दोस्तों इतिहास में कई बार मूवमेंट्स ऐतिहासिक होते हैं यह तो हम सब जानते हैं इंडिया का पार्टीशन और आजादी ऐसा ही एक ऐतिहासिक मूवमेंट था हम जानते हैं कि कैसे आजादी के दौरान बड़ी मशक्कत से देश के दिग्गज नेताओं ने 500 से भी ज्यादा प्रिंसली स्टेट्स को यूनाइट किया और यूनाइटेड इंडिया का नया नक्शा
तैयार किया मोस्टली प्रिंसली स्टेट्स तो बिना किसी कॉम्प्लेक्शन तरीके से इंडिया में सीड कर गए लेकिन कुछ स्टेट्स जैसे जम्मू एंड कश्मीर में कुछ प्रॉब्लम्स आई पाकिस्तान ने इन कॉम्प्लेक्शन का फायदा उठाते हुए जम्मू एंड कश्मीर में अटैक किया लेकिन फाइनली जम्मू एंड कश्मीर ने भी इंस्ट्रूमेंट ऑफ एशन साइन कर खुद को इंडिया में जोड़ लिया लेकिन पाकिस्तान आज तक इस बात को लेकर इंडिया के साथ कॉन्फ्लेट में रहता है और वहां के सेपरेटिस्ट एलिमेंट्स को फ्यूल करता है है इस तरह से आप अफगान मुजाहिदीन के जन्म को 1979 में हुए अफगानिस्तान पर सोवियत इनवेजन
से जोड़ सकते हैं नक्सलिज्म से लेकर नागा इंसर्जनल हर प्रकार के सिक्योरिटी थ्रेट का अपना इतिहास है जिसकी चर्चा हम इन टॉपिक्स के स्पेसिफिक वीडियोस में करेंगे खैर हिस्ट्री के अलावा जियोग्राफी भी एक इंपॉर्टेंट एस्पेक्ट है जो टेररिज्म को सस्टेन और परपे चुएट करती है जब आप इंडिया में टेरर हॉटस्पॉट्स पर नजर डालेंगे तो पाएंगे कि इन एरियाज की ज्योग्राफिकल लोकेशंस भी काफी यूनिक है फॉरेस्टेड एरियाज रगड टेरेन और माउंटेनियर रीजंस में टेररिस्ट और इंसर्जनल फ्लरिज करते हैं ऐसा दो वजहों से होता है पहला ये कि ऐसे एरियाज में सिक्योरिटी एजेंसीज के लिए ऑपरेट करना
बेहद कठिन होता है और दूसरा यह कि ऐसे रीजंस में डेवलपमेंट और गवर्नेंस चैलेंज की इंटेंसिटी प्लेन एरियाज के मुकाबले ज्यादा होती है जो एक्सट्रीमिस्म को शह देता है इसके अलावा पोरस इंटरनेशनल बॉर्डर्स भी टेररिज्म को पनाह देता है टफ जियोग्राफी रिवन लैंडस्केप्स और लैक ऑफ फ अक्रॉस बॉर्डर्स के चलते इल्लीगल इमीग्रेशन ट्रैफिकिंग इफिल्टर इत्यादि इजली हो जाते हैं जिसके चलते टेररिज्म और एसोसिएटेड क्राइम्स को कंट्रोल करना कठिन हो जाता है फॉर एग्जांपल यूएलएनएसएससी ग्रुप्स चाइना और म्यानमार के पोरस इंटरनेशनल बॉर्डर के अक्रॉस सेफ हेवन से ऑपरेट करते हैं और सिक्योरिटी एजेंसीज के लिए चुनौती
पेश करते हैं इसके अलावा कई बार देखा गया है कि रिसोर्स रिच एरियाज में भी एक्सट्रीमिस्म और टेररिज्म मेजर सिक्योरिटी इशू है जनरली रिसोर्स रिच एरियाज में टेररिज्म और एक्सट्रीमिस्म का लिंक डेवलपमेंट से रिलेटेड होता है क्रुशल रिसोर्सेस के लिए कई दफा फॉरेस्ट और एग्रीकल्चर लैंड को एक्वायर कर माइंस में तब्दील कर दिया जाता है लेकिन रैंप एट करप्शन और नोक्स नेक्सस के चलते कई बार लोगों को प्रॉपर कंपनसेशन भी नहीं मिल पाता जिसका फायदा एक्सट्रीमिस्ट एलिमेंट्स उठाते हैं नक्सल प्रभावित इलाकों की कहानी भी यही है जो लार्जली इंडिया के रिसोर्स रिच रीजंस जैसे कि
दंड कारण्य छोटा नागपुर प्लेट इत्यादि में ऑपरेट करता है इसके अलावा रिसोर्स रीजंस में लगने वाले इंडस्ट्रीज और प्रोजेक्ट्स के ओनर्स को डरा धमका कर एक्सट्रीमिस्ट अपनी फंडिंग को भी सिक्योर करते हैं जो उनके सर्वाइवल में मददगार साबित होती है दोस्तों टेक्नोलॉजिकल फैक्टर्स भी टेररिज्म को फ्यूल करते हैं जैसे-जैसे समाज में टेक्नोलॉजिकल ग्रोथ होती है वैसे-वैसे टेररिस्ट भी इनमें से कुछ टेक्नोलॉजीज का इस्तेमाल कर अपने मंसूबों को नए तरीकों से अंजाम देते हैं इंटरनेट रिवोल्यूशन के दौर में साइबर टेररिज्म का उदय देखा गया है इसके अलावा इमर्जिंग एंड डिसर अपटिवो क्नो जीी जैसे एआई क्रिप्टो
करेंसी डोनस बिग डाटा इत्यादि ने समाज के सामने नए चैलेंज और अपॉर्चुनिटी को पेश किया है लेकिन इनका गलत इस्तेमाल समाज के लिए बड़ा खतरा है और इसीलिए टेररिस्ट ग्रुप्स ने इन टेक्नोलॉजीज को एक्सप्लोइट करने के रास्ते खोज लिए हैं आईएसआईएस द्वारा रिक्रूटमेंट के लिए सोशल मीडिया का रैंप एट यूज हो या फिर नक्सल ग्रुप्स द्वारा ड्रोसरा इस्तेमाल ये सब धीरे-धीरे नए सिक्योरिटी चैलेंज पेश कर रहे हैं इस तरह से टेक्नोलॉजिकल चेंजेज ने टेररिज्म के स्कोप मींस और वेज को रैपिड एक्सपेंड किया है अब बात अगले बड़े कारण की दोस्तों टेररिज्म के एक्सपेंशन और सस्टेंस
के लिए सिक्योरिटी और गवर्नमेंट पॉलिसीज में कई तरह की कमियां भी जिम्मेदार हैं आप जानते हैं कि देश में फेडरल पॉलिटी के चलते लॉ एंड ऑर्डर की प्राइमरी रिस्पांसिबिलिटी स्टेट गवर्नमेंट्स की है ऐसे में स्टेट गवर्नमेंट के बीच लैक ऑफ कोऑर्डिनेशन पर ध्यान देना आवश्यक है इसके अलावा अलग-अलग तरीके के क्राइम्स और प्रॉब्लम से डील करने के लिए अलग-अलग एजेंसीज हैं लेकिन टेररिज्म एक ऐसा मल्टीफेसटेड क्राइम है जिसे काउंटर करने के लिए इंटर एजेंसी कोऑर्डिनेशन भी जरूरी है पर ओवरलैपिंग जूरिस जिक्स और मल्टीपलीसिटी ऑफ एजेंसीज के चलते यह एक बड़ा चैलेंज बन जाता है ऊपर
से ब्यूरोक्रेटिक हर्डल्स इन्वेस्टिगेशन को स्लो बना देते हैं साथ में सिक्योरिटी एजेंसीज जैसे कि पुलिस में लैक ऑफ मॉडर्नाइजेशन इन टर्म्स ऑफ वेपंस ऑपरेटिंग प्रोसीजर्स इत्यादि भी टेररिज्म के अगेंस्ट प्रिपेयर्स को कमजोर करते हैं दशकों से रिक्वायर्ड पुलिस रिफॉर्म्स के लिए लैक ऑफ पॉलिटिकल विल ने भी इस प्रॉब्लम को एग्रीवेट किया है खैर हमारी साइबर सिक्योरिटी कैपेबिलिटी भी अब भी फॉर्मेटिव स्टेज में है इसके चलते साइबर टेररिज्म का खतरा लगातार बना रहता है ऊपर से टेररिज्म को एक होलिस्टिक एंगल से अप्रोच करने के लिए रिक्वायर्ड एक हॉलिस्टिक एंटी टेररिज्म पॉलिसी भी अभी तक मिसिंग है
तो दोस्तों ये थे कुछ मेजर फैक्टर्स जो टेररिज्म को जन्म देते हैं और उसे सस्टेन करते हैं चलिए अब देखते हैं इंडिया में टेररिज्म के चेंजिंग नेचर को चेंजिंग नेचर ऑफ टेररिज्म दोस्तों टेररिज्म के चेंजिंग नेचर में सबसे पहला पॉइंट यह है कि कैसे ओवर द टाइम टेररिज्म आज एक इंडस्ट्री की तरह उभर रहा है जी हां आपको जानकर हैरानी होगी कि जिस तरह से इकोनॉमी में डिफरेंट इंडस्ट्रीज के बीच कंपटीशन का माहौल रहता है वैसे ही आज वेरियस टेररिस्ट ग्रुप्स के बीच भी कंपटीशन देखने को मिलता है हर टेररिस्ट ग्रुप खुद की आइडेंटिटी को
एस्टेब्लिश करने के लिए टेरर फैलाने की होड़ में दिखाई पड़ता है यही वजह है कि 90 के दशक में जहां गिने चने कुछ ही टेरर आउटफिट्स एक्जिस्टेंस में थे वहीं आज इन ग्रुप्स का नंबर सैकड़ों की तादाद में जा चुका है साउथ एशिया टेररिज्म पोर्टल की माने तो साउथ एशिया में अकेले 180 से ज्यादा टेरर ग्रुप्स ऑपरेशन में हैं कश्मीर में अकेले अलकायदा से लेकर जे ईएम हिज्बुल मुजाहिदीन इंडियन मुजाहिदीन और एलईडी जैसे कई ग्रुप्स की खबरें आपने सुनी होंगी लेकिन इन इनफेमस ग्रुप्स के अलावा कई छोटे-बड़े टेरर ग्रुप्स भी अलग-अलग फॉर्म में ऑपरेट करते
पाए जाते हैं इसके अलावा टेररिज्म का एक इंडस्ट्री की तरह इमर्ज होना इस बात को भी दिखाता है कि कैसे धीरे-धीरे टेररिज्म में एक डिवीजन ऑफ वर्क देखने को मिल रहा रहा है जैसे एक कार को प्रोड्यूस करने में मल्टीपल छोटे-बड़े इंडस्ट्रीज इवॉल्व होते हैं वैसे ही टेरर एक्टिविटीज भी केवल एक ग्रुप द्वारा अंजाम नहीं दिए जाते हैं उदाहरण के तौर पर देखें तो ट्रांस नेशनल ऑर्गेनाइज्ड नेटवर्क्स जैसे डी कंपनी एलटी जैसे ग्रुप्स को आर्म्स फाइनेंस इत्यादि प्रोवाइड करवाते हैं दूसरी ओर जमात और दवा जैसे फ्रेंड ऑर्गेनाइजेशंस सोशल वर्क के नाम पर रेडिकलाइजेशन फैलाकर टेरर
ग्रुप्स के लिए रिक्रूटमेंट का काम करते हैं और यही रिक्रूटेड लोग फाइनली टेरर एक्ट्स को अंजा देते हैं छोटे-मोटे हवाला ऑपरेटर से लेकर साइबर हैकर्स और ओवरग्राउंड वर्कर्स तक सब अपने-अपने स्पेशलाइज डोमेन में ऑपरेट करते हैं और टेररिज्म एक ऑर्गेनाइज बिजनेस के रूप में पनप रहा होता है चेंजिंग नेचर में अगला इंपॉर्टेंट पॉइंट है टेररिस्ट द्वारा यूज किए जाने वाले मेथड्स और मॉडज ऑपरेंडी में बदलाव जहां पहले फाइनेंसिंग सिक्योर करने के लिए टेररिस्ट मोस्टली मनी लरिंग ड्रग कार्ट्स ह्यूमन ट्रैफिकिंग हवाला इत्यादि का सहारा लेते थे आज उनके सोर्सेस ऑफ फंडिंग और उनका नेटवर्क और ज्यादा
कॉम्प्लेक्शन और इंटरनेट रिवोल्यूशन के दौर में साइबर स्पेस के रास्ते होने वाली फंडिंग पर लगातार इंटेलिजेंस एजेंसीज की नजर बनी हुई है क्रिप्टो करेंसी के राइज ने भी सिक्योरिटी एजेंसीज के कान खड़े कर दिए हैं और उन्हें लगातार इस बात का डर रहता है कि कहीं क्रिप्टो करेंसी टेरर फाइनेंसिंग का बड़ा जरिया ना बन जाए फंडिंग के अलावा टेररिज्म के लिए यूज होने वाले हथियार और डिवाइसेसपोर्ट के पास आज पहले से ज्यादा लीथल वेपंस आ गए हैं कुछ रिपोर्ट्स ने दावा किया है कि 2019 में नक्सल्स ने ड्रोन का इस्तेमाल कर सीआरपीएफ ऑपरेशन पर नजर
रखने की कोशिशें की थी इसी तरह आज बॉर्डर पर से ड्रग्स और आर्म्स ट्रैफिकिंग का काम भी ड्रोन के जरिए हो रहा है जिसकी खबरें भी लगातार न्यूज़ में आती रहती हैं सोशल मीडिया का इस्तेमाल भी रेडिकलाइजेशन और रिक्रूटमेंट के लिए रैपिड किया जाने लगा है इसके अलावा जहां एक और ट्रेडिशनल मेथड्स ऑफ टेररिज्म में बॉम ब्लास्ट मिलिटेंट अटैक्स ए जैकिंग इत्यादि शामिल थे वहीं आज नए प्रकार के अटैक्स भी देखने को मिल रहे हैं इनमें सबसे इंपॉर्टेंट फॉर्म्स ऑफ टेरर अटैक्स हैं सुसाइड अटैक्स और लोन वुल्फ अटैक्स में राइस स्कॉलर्स का मानना है कि
ओल्ड फॉर्म्स ऑफ अटैक के कंपैरिजन में सुसाइड अटैक्स इसलिए ज्यादा डेंजरस हैं क्योंकि ये सोसाइटी में इंक्रीजड और डीप रूटेड रेडिकलाइजेशन की ओर इशारा करते हैं 2019 में पुलवामा में हुए टेरर अटैक में ऐसे ही सुसाइड अटैकर्स का हाथ था जिसमें 40 सीआरपीएफ जवान शहीद हो गए थे इसके अलावा यूरोप में ंग लोन वल्फ अटैक्स की खबरें भी आपने सुनी ही होंगी हालांकि इंडिया में लोन वुल्फ अटैक्स के केसेस काफी रेयर हैं लेकिन इंटरनेशनल ट्रेंड को देखते हुए सिक्योरिटी एजेंसीज को इस बात का डर अवश्य है कि आने वाले समय में ऐसे अटैक्स कहीं इंडिया
को भी ना इफेक्ट करें इसके अलावा जम्मू एंड कश्मीर के कॉन्टेक्स्ट में भी आज एक नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है जिके बारे में चर्चा करना आवश्यक है ये नया ट्रेंड है टारगेटेड किलिंग्स ऑफ ऑफिसर्स एंड माइनॉरिटी इन कश्मीर वैसे कुछ स्कॉलर्स ये भी कहते हैं कि टारगेटेड किलिंग्स एज अ फॉर्म ऑफ टेररिज्म कहीं ना कहीं ये दिखाता है कि टेररिस्ट की बड़े स्केल के टेरर अटैक्स करने की कैपेबिलिटीज अब कम हो गई हैं और इसीलिए वो टारगेटेड किलिंग्स का इस्तेमाल करके लोगों में डर फैलाना चाहता है लेकिन इसके बावजूद यह एक कंसर्निंग मुद्दा
है क्योंकि ऐसे अटैक्स समाज में चिलिंग इफेक्ट क्रिएट करते हैं स्पेशली अमंग द माइनॉरिटी दोस्तों इन सब के अलावा इंटरनेशनल लेवल पर भी एक मेजर चेंज हुआ है जो टेरर इंडस्ट्री का चेहरा बदल सकता है यह बदलाव है अफगानिस्तान में तालिबान का फिर से पावर में आना हम सब मानते हैं कि तालिबान का हमेशा से टेरर आउटफिट्स के साथ एक एनोक्स नेक्सस रहा है इसके अलावा ड्रग ट्रैफिकिंग उनका मेजर सोर्स ऑफ रेवेन्यू भी रहा है ऐसे में जब तालिबान ने अफगानिस्तान में अपनी सरकार बना ली है तो आने वाले समय में टेरर थ्रेट्स बढ़ जाएंगे
यह डर भी वाजिब है 90 के दशक में जब सोवियत अफगानिस्तान छोड़कर गया था तब यही हुआ था और ऐसे किसी भी खतरे के लिए हमें प्रिपेयर्ड रहना होगा सबसे पहले हम देखते हैं गवर्नमेंट द्वारा लिए गए लेजिस्लेटिव मेजर्स को दोस्तों इंडिया ने कई ऐसे लॉज एनेक्ट किए हैं जिनकी मदद से टेररिज्म को काउंटर किया जा सकता है इसमें सबसे पहला है नेशनल सिक्योरिटी एक्ट ऑफ 1980 नेशनल सिक्योरिटी एक्ट एक स्ट्रिजेंट लॉ है जो प्रीवेंटिव डिटेंशन के साथ डील करता है यह एक्ट स्टेट और सेंट्रल गवर्नमेंट को इंपावर करता है कि वह ऐसे लोगों को
डिटेन कर सके जो फ्यूचर में ऐसे एक्ट कमिट कर सकते हैं जो नेशनल सिक्योरिटी पब्लिक ऑर्डर या फिर एसेंशियल सप्लाईज के मेंटेनेंस के लिए खतरा हो इसके तहत एक इंसान मैक्सिमम 12 महीने के लिए कन्फाइंड किया जा सकता है और अगर गवर्नमेंट को कोई फ्रेश एविडेंसेस मिलते हैं तो उस कन्फाइनमेंट को एक्सटेंड भी किया जा सकता है अगला इंपॉर्टेंट लॉ है अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट 1967 जिसे 2004 2008 2012 और रिसेंटली 2019 में अमेंड किया गया है यह एक्ट टेररिस्ट और अनलॉफुल एक्टिविटीज को काउंटर करने के लिए स्पेशल प्रोसीजर्स प्रोवाइड करता है इसके सेक्शन 15
में एक टेररिस्ट एक्ट को डिफाइन किया गया है जिसके लिए पनिशमेंट 5 साल से लेकर डेथ पेनल्टी तक हो सकती है यह एक्ट सेंट्रल गवर्नमेंट को एब्सलूट पावर्स देता है जिसके तहत वो ऑफिशियल गैजेट में अनलॉफुल एक्टिविटीज को स्पेसिफाई कर सकती है यूएपीए अमेंडमेंट एक्ट 2019 के तहत अब गवर्नमेंट इंडिविजुअल्स को भी टेररिस्ट डिक्लेयर कर सकती है पहले केवल ऑर्गेनाइजेशंस को ही इस एक्ट के तहत टेररिस्ट डिक्लेयर किया जाता था इसके अलावा नए अमेंडमेंट के अंडर एनआईए के डायरेक्टर जनरल के पास यह पावर है कि वह एक्यूज्ड की प्रॉपर्टी को सीज कर सके और अब
एनआईए के इंस्पेक्टर रैंक के ऑफिसर्स भी इन्वेस्टिगेशंस कर सकते हैं अपार्ट फ्रॉम डीएसपी एंड एसीपी अगला क्रुशल लॉ है एनआईए एक्ट 2008 जिसे 2019 में अमेंड किया गया था दोस्तों एनआईए एक्ट का क्रिएशन 2611 के मुंबई टेरर अटैक्स के बाद हुआ था यह एक स्पेशलाइज इन्वेस्टिगेशन एजेंसी यानी एनआईए को कई पावर्स देता है एनआईए का विजन इंटरनेशनल स्टैंडर्ड्स को मीट करते हुए एक प्रोफेशनल इन्वेस्टिगेटिव एजेंसी बनना है इस एक्ट के तहत टेरर केसेस का इन्वेस्टिगेशन डीएसपी या एसीपी रैंक के ऑफिसर्स कर सकते हैं और 2019 के बाद अब इंस्पेक्टर रैंक के ऑफिसर्स के पास भी
इन्वेस्टिगेटिव पावर्स हैं इसके अलावा यह एक्ट टेरर केसेस के लिए स्पेशल कोड्स भी क्रिएट करता है एनआईए अमेंडमेंट एक्ट 2019 के तहत इसमें कुछ बदलाव लाए गए सबसे पहला बदलाव यह था कि यह एक्ट एनआईए को ऐसे टेरर अटैक्स को प्रोब करने के लिए एंपावर करता है जो विदेश में इंडियंस या इंडियन इंटरेस्ट को टारगेट करते हैं इसके अलावा इस एक्ट के स्कोप को एक्सपेंड कर उसमें ह्यूमन ट्रैफिकिंग सर्कुलेशन ऑफ फेक करेंसी मैन्युफैक्चर एंड सेल्स ऑफ प्रोहिबिटेड आर्म्स साइबर टेररिज्म और एक्सप्लोसिव सब्सटेंसस एक्ट 1908 के तहत होने वाले ऑफेंसेस को भी ऐड किया गया है
लेजिसलेटिव एफर्ट्स के बाद अब देखते हैं इंस्टीट्यूशनल फ्रेमवर्क को यानी अब हम उन इंस्टीट्यूशंस की बात करेंगे जो टेरर एक्टिविटीज से इंडिया को बचाने के लिए बनाए गए हैं दोस्तों सबसे पहले बात एनटी ग्रिड की यह इंडिया की सिक्योरिटी और इंटेलिजेंस एजेंसीज के लिए वन स्टॉप डेस्टिनेशन है जिसकी मदद से वह टेरर केसेस से रिलेटेड डेटाबेस को इजली एक्सेस कर सकते हैं इमीग्रेशन एंट्री और एग्जिट से लेकर सस्पेक्ट के बैंकिंग और टेलीफोन डिटेल्स इत्यादि को एक्सेस करने के लिए यह एक सिक्योर्ड प्लेटफार्म है इसके अलावा नाड ग्रिड ने एनसीआरबी के साथ एक एमओयू साइन किया
है जिसके तहत नाड ग्रिड एफआईआर और टेरर अटैक्स के लिए यूज होने वाले स्टोलेन व्हीकल्स की डिटेल एक्सेस कर सकता है ये एमओयू ना ग्रेट को 14000 पुलिस स्टेशंस के साथ लिंक प्लेटफॉर्म क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम या सीसीटीएनएस के डेटाबेस के साथ भी कनेक्ट करेगा उसके अलावा इंटेलिजेंस कोआर्डिनेशन के लिए मल्टी एजेंसी सेंटर या एमएसी की स्थापना भी की गई है ताकि वेरियस सिक्योरिटी एजेंसीज के बीच इंटेलिजेंस कोआर्डिनेशन आसान हो सके साइबर टेररिज्म को काउंटर करने के लिए नेशनल साइबर कोऑर्डिनेशन सेंटर या एनसीसीसी की स्थापना भी की गई है जो इंडिया की
एपेक्स साइबर सिक्योरिटी और ई सर्व ंस एजेंसी है यह एजेंसी सीईआरटीआई एन के साथ भी कोऑर्डिनेट करती है जो इंडिया में हो रहे साइबर अटैक्स के लिए नोडल एजेंसी है ईडी और डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस जैसे एजेंसीज टेरर फाइनेंस और फंडिंग की रोकथाम के लिए काम करते हैं दोस्तों टेरर फाइनेंस का एस्पेक्ट भी बेहद क्रुशल है जिसके लिए भी गवर्नमेंट ने कई स्टेप्स लिए हैं यूएपीए 1967 के तहत प्रोडक्शन ऑफ स्मगलिंग और सर्कुलेशन ऑफ हाई क्वालिटी काउंटर फेट इंडियन करेंसी एक टेररिस्ट एक्ट डि ड है इसके अलावा एक टेरर फंडिंग और फेक करेंसी या टीएफएफ
स सेल एनआईए के अंडर कांस्टीट्यूट किया गया है जो टेरर फंडिंग और फेक करेंसी केसेस को इन्वेस्टिगेट करता है इसके अलावा फेक इंडियन करेंसी नोट्स या एफसीएन नेटवर्क को काउंटर करने के लिए मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स ने एफ आईसीएन कोआर्डिनेशन ग्रुप या एफसी आरडी एस्टेब्लिश किया है जो एफ आईसीएन रिलेटेड इंटेलिजेंस और इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी एजेंसीज के साथ शेयर करते हैं इंडिया ने बांग्लादेश के साथ एफ आईसीएन रिलेटेड एमओयू भी साइन किया है ताकि फेक करेंसी को बायलट लेवल पर भी काउंटर किया जा सके इसके अलावा प्रिवेंशन ऑफ मनी लरिंग एक्ट या पीएमएलए के तहत मनी
लरिंग और हवाला नेटवर्क्स पर भी चेक रखा जाता है अब बात करते हैं इंटरनेशनल एफर्ट्स की और इंडिया के इन इंटरनेशनल एफर्ट्स के साथ इवॉल्वमेंट की इंटरनेशनल इनिशिएटिव दोस्तों टेररिज्म से अफेक्टेड देशों में इंडिया वन ऑफ द टॉप मोस्ट पोजीशंस में रहा है इसीलिए इंडिया ने इंटरनेशनल लेवल पर टेररिज्म के अगेंस्ट एफर्ट्स को हमेशा प्रायोरिटी इज किया है सीसीआईटी या फिर कंप्रिहेंसिव कन्वेंशन औरन इंटरनेशनल टेररिज्म के तहत टेररिज्म की यूनिफॉर्म डेफिनेशन के लिए इंडिया ने 1996 में इसे इंट्रोड्यूस किया था ताकि इंटरनेशनल टेररिस्ट को एक्स्ट्रे डीट कर उन्हें प्रोसीक किया जा सके लेकिन जैसा कि
हम जानते हैं कि यह कन्वेंशन अभी तक इंफोर्स नहीं हो पाया है खैर इंटरनेशनल लेवल पर जीसीटीएफ या फिर ग्लोबल काउंटर टेररिज्म फोरम एक मल्टीलेटरल प्लेटफार्म है जो टेररिज्म को काउंटर करने के लिए बनाया या गया है इंडिया जीसीटीएफ का फाउंडिंग मेंबर रहा है जीसीटीएफ के तहत टेररिस्ट ट्रैवल इनिशिएटिव भी लॉन्च किया गया था जो नेशनल और लोकल गवर्नमेंट्स लॉ इंफोर्समेंट और बॉर्डर स्क्रीनिंग प्रैक्टिशनर्स और इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशंस को एक साथ लाता है ताकि वो इफेक्टिव काउंटर टेररिज्म वॉच लिस्टिंग और स्क्रीनिंग टूल्स को इंप्लीमेंट कर सकें इसके अलावा इंडिया ने यूएन के ग्लोबल काउंटर टेररिज्म स्ट्रेटजी
के क्रिएशन में भी एक्टिव रोल प्ले किया था जो 2006 में अडॉप्ट किया गया था यह स्ट्रेटजी स्टेट कैपेबिलिटी अगेंस्ट टेररिज्म कंडीशंस दैट कॉज टेररिज्म ह्यूमन राइट्स और रूल ऑफ लॉ पर फोकस करती है यूएन की एक्टिविटीज अगेंस्ट टेररिज्म को कोऑर्डिनेट करने के लिए काउंटर टेररिज्म इंप्लीमेंटेशन टास्क फोर्स या सीटीआई टीएफ का भी क्रिएशन किया गया है सीटीआई टीएफ में 30 से ज्यादा यूएन बॉडीज और इंटरपोल पार्टिसिपेट करते हैं इसके अलावा यूएनएससी के रेजोल्यूशन जैसे रेजोल्यूशन 1373 रेजोल्यूशन 1540 और रेजोल्यूशन 1267 का भी इंडिया ने सपोर्ट किया है रेजोल्यूशन 1373 एक काउंटर टेररिज्म कमिटी इस्टैब्लिशमेंट
लगाता है जो टेरर स्पेट करने की दोषी हैं इसके अलावा रेजोल्यूशन 2396 टेररिस्ट को इंटरनेशनल ट्रैवल से रोकता है रीजनल लेवल पर एससीओ या फिर शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन के अंदर भी एक एंटी टेररिज्म स्ट्रक्चर है जिसका नाम है आरटीएस या फिर रीजनल एंटी टेररिस्ट स्ट्रक्चर इसका मकसद एसईओ के मेंबर्स के बीच टेररिज्म रिलेटेड मुद्दों में कोऑर्डिनेशन को इंप्रूव करना है अगला क्रुशल इंटरनेशनल एफर्ट है फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स या एफएटीएफ ये g7 का एक बॉडी है जो टेरर फाइनेंसिंग को टैकल करने के लिए उन स्टेट्स पर नजर रखता है जो टेररिज्म को सपोर्ट करते हैं
यही वजह है कि एफटीएफ ने कई बार पाकिस्तान को ग्रेल लिस्ट में रखा है यूरोपियन यूनियन ने भी ईयू जुडिशियस कोऑपरेशन यूनिट यूरो जस्ट और ईयू पुलिस फोर्स का यूरोपोल को एस्टेब्लिश किया है जो टेररिज्म को रोकने का काम करती है ग्लोबल इंटरनेट फोरम टू काउंटर टेररिज्म या जीआईएफ सटी एक इंडस्ट्री लेड इनिशिएटिव है जो यूएन की काउंटर टेररिज्म एग्जीक्यूटिव डायरेक्टरेट या यूएनसी टीडी के साथ पार्टनरशिप में काम करती है ताकि टेररिस्ट के इंटरनेट और साइबर कैपेबिलिटीज को काउंटर किया जा सके दोस्तों अब बात करते हैं कि सिक्योरिटी स्ट्रक्चर को और पुख्ता करने के लिए
सरकार आगे और क्या कर सकती है वे फॉरवर्ड टेररिज्म के अगेंस्ट करंट सिक्योरिटी आर्किटेक्चर को इंप्रूव करने के लिए कई तरह के स्टेप्स लिए जा सकते हैं इनमें सबसे पहला है एक कंप्रिहेंसिव और डेडिकेटेड एंटी टेरर लॉ की नेसेसिटी जो टेररिज्म के वेरियस सस्पेक्ट्स के साथ होलस तरीके से डील करें इस लॉ के तहत फास्ट ट्रैक कोड्स सेटअप किए जा सकते हैं ताकि टेररिज्म के अगेंस्ट इन्वेस्टिगेशन और जुडिशियस प्रोसेस फास्ट इन हो सके और डिटेरेंस इंप्रूव हो पुलिस रिफॉर्म्स और पुलिस मॉडर्नाइजेशन की भी अर्जेंट नीड है पुलिस फर्स्ट लाइन ऑफ सिक्योरिटी प्रोवाइड करती है किसी
भी टेरर थ्रेड के दौरान लेकिन एज ओल्ड मेथड्स वेपंस और प्रोसीजर्स के चलते पुलिस की कैपेबिलिटीज आर्म्ड फोर्सेस से काफी कम है यही वजह है कि पुलिस में रिफॉर्म्स बेहद आवश्यक है इसके अलावा टेरर फाइनेंसिंग पर स्पेशल ध्यान देने की आवश्यकता है इसीलिए सेकंड एईआरसी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लरिंग एक्ट को अमेंड कर उसके स्कोप को इंक्रीज करने की बात की है पीएमएलए के अंडर एक्सेप्शनल केसेस में इन्वेस्टिगेटिव अथॉरिटीज के पास एडवांस सर्च एंड सीजर की पावर दी जा सकती है इमर्जिंग सोर्सेस ऑफ़ फंडिंग जैसे क्रिप्टो करेंसी और साइबर फ्रॉड को लेकर कैपेबिलिटीज को इंप्रूव
करना भी नीड ऑफ़ द आर बन चुका है इसके अलावा डिफरेंट एजेंसीज के बीच इंस्टीट्यूशनल कोआर्डिनेशन को स्मूथन करना भी आवश्यक है ताकि ब्यूरोक्रेटिक डिलेज को कम किया जा सके इस काम के लिए 2611 के बाद नेशनल काउंटर टेररिज्म सेंटर एस्टेब्लिश करने का सजेशन एक्स एक्सपर्ट्स द्वारा दिया गया था जिसे अभी तक इंप्लीमेंट नहीं किया गया है एनसीटीसी जैसी एक बॉडी का एस्टेब्लिशमेंट कोऑर्डिनेशन को बूस्ट कर सकता है कुछ एक्सपर्ट्स ने यह भी सजेस्ट किया है कि फ्यू आई एनडी जो इंडिया की फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट है उसका स्कोप रियल स्टेट ट्रांजैक्शंस में भी एक्सपेंड करना
चाहिए क्योंकि रियल स्टेट भी एक बड़ा एरिया है जहां ऐसे इलीगल काम होते हैं रेडिकलाइजेशन फेक न्यूज़ मीडिया नेगलिजेंस और इरिस्पांसिबल कवरेज से जन्मे थ्रेट्स को रोकने के लिए मीडिया में सेल्फ रेगुलेशन की भी आवश्यकता है 2611 मुंबई टेरर अटैक्स के दौरान इरिस्पांसिबल मीडिया रिपोर्टिंग के चलते सिक्योरिटी एजेंसीज को काफी परेशानियां झेलनी पड़ी थी और ऐसी रिपोर्टिंग से मीडिया को बचना चाहिए और इसका बेस्ट तरीका एक रिस्पांसिबल और वेल फॉर्मुले सेल्फ रेगुलेशन इंफ्रास्ट्रक्चर माना जाता है खैर साइबरस्पेस के बढ़ते इंपॉर्टेंस के दौर में एक डेडिकेटेड साइबर ट्रेनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की भी आवश्यकता बढ़ गई है इसके
अलावा साइबर रेजिल को लेकर हमें और भी ज्यादा डिलिजेंस के साथ काम करना होगा केरला के साइबर डोम प्रोजेक्ट से सीख लेते हुए एक ओवर आर्किट इंफ्रास्ट्रक्चर हम नेशनल लेवल पर भी क्रिएट कर सकते हैं साइबर डोम प्रोजेक्ट का फोकस साइबर रेजिल साइबर ट्रेनिंग ऑफ लॉ इंफोर्समेंट इवॉल्वमेंट ऑफ आईटी एक्सपर्ट्स अवेयरनेस जनरेशन इत्यादि पर होता है इसके अलावा साइबर स्पेस रिलेटेड लीगल इंफ्रास्ट्रक्चर को भी रैपिड अपडेट करने की जरूरत है लेकिन हमारे पास भी रैपिड चेंजिंग टेक्नोलॉजी के हिसाब से लीगल रूल्स को अपडेट करने की केप बिलिटी कम है इसीलिए इस मुद्दे पर भी ध्यान
देना होगा साइबर कैपेबिलिटीज को एनहांस करने के लिए क्रॉस प्लेटफॉर्म रिक्रूटमेंट ऑफ स्पेशलिस्ट की जरूरत है जिसमें सोशल मीडिया बिग डेटा एनालिसिस टेररिस्ट फाइनेंस और टेक्निकल इंटेलिजेंस में एक्सपर्ट लोगों को रिक्रूट किया जाना चाहिए इसके अलावा कुछ यूनिक बेस्ट प्रैक्टिसेस को भी हम अडॉप्ट कर सकते हैं इसमें सबसे इंटरेस्टिंग है मलयान डॉक्ट्रिन को स्ट्रन करना दोस्तों मलयान डॉक्ट्रिन कहती है कि एक टेरर थ्रेट के साथ डील करने के लिए सबसे पहले टेरर अफेक्टेड एरिया और वहां लोकेटेड फ्रंट ऑर्गेनाइजेशंस और ओवरग्राउंड वर्कर्स को आइडेंटिफिकेशन सिक्योरिटी एजेंसी को देना चाहिए ताकि वह काउंटर टेररिज्म मेजर ले सकें
काउंटर टेरर मेजर्स के बाद इस एरिया को पॉलिटिशियन के हाथों में देकर वहां पार्टिसिपेटिव डेमोक्रेसी को पुश करना चाहिए ताकि देश के डेमोक्रेटिक प्रोसेस पर लोगों का भरोसा बढ़े और वो वायलेंस को गिव अप कर दें पर इसके साथ किसी फ्यूचर थ्रेट को पनपने से रोकने के लिए इंटेलिजेंस एजेंसीज को ये रिस्पांसिबिलिटी लेनी चाहिए कि वो चौक अनने रहे इसके अलावा एक गुड गवर्नेंस डॉक्ट्रिन भी कई बार यूज़ की जाती है इसके अकॉर्डिंग जिन एरियाज में रेडिकलाइजेशन का थ्रेट होता है उन एरियाज में इंटेलिजेंस ऑफिसर्स को काम दिया जाता है कि वो वहां कॉमन लोगों
की तरह रह और समझे कि लोगों के इश्यूज और ग्रीवेंस क्या है इन ऑफिसर्स की रिपोर्ट के बेसिस पर गवर्नमेंट अगर लोगों की ग्रीवेंस को एड्रेस करने की कोशिश करेगी तो रेडिकलाइजेशन का थ्रेट कम हो जाएगा लेकिन ध्यान रखने वाली बात यह है कि यह डॉक्ट्रिन मेनली उन एरियाज में काम करती है जहां रेडिकलाइजेशन और टेररिज्म का मेन कारण डेवलपमेंट या बैड गवर्नेंस होता है खैर अर्ली प्रिवेंशन और डीरेडिकलाइजेशन को लेकर एक कंप्रिहेंसिव स्कीम की भी आवश्यकता है इसमें गवर्नमेंट के साथ-साथ नॉन गवर्नमेंट ऑर्गेनाइजेशंस के कोऑपरेशन की भी जरूरत है इनफ्लुएंशल रिलीजस लीडर्स लोकल लीडर्स
स्टूडेंट ग्रुप्स एक्सेट्रा की मदद से भी डीरेडिकलाइजेशन क्रुशल होता है है इंटरनेशनल लेवल पर भी कोलैबोरेशन को एनहांस करने की जरूरत है ताकि इंटरनेशनल टेररिज्म के इंपैक्ट्स को कम किया जा सके इसके लिए बायलट मल्टीलेटरल और इंटरनेशनल फोरम्स में डिप्लोमेटिक इंगेजमेंट्स को एनहांस करना पड़ेगा इंटरनेशनल लेवल पर टेररिज्म की एक कंप्रिहेंसिव और वाइडल एक्सेप्टेड डेफिनेशन को भी एनेक्ट करना पड़ेगा और इसीलिए सीसीआईटी जैसे प्रोटोकॉल पर एक्सेप्टेंस अचीव करना बेहद आवश्यक है पाकिस्तान जैसे स्टेट्स जो टेररिज्म को स्टेट पॉलिसी बना चुके हैं हैं उन्हें इंटरनेशनल लेवल पर एक्सपोज कर उन पर सैंक्शंस लगवाना भी हमारा डिप्लोमेटिक
एंडेवर होना चाहिए तो दोस्तों यह थे कुछ मेजर सजेशंस जिन्हें इंप्लीमेंट कर हम अपने सिक्योरिटी इंफ्रास्ट्रक्चर को और ज्यादा बूस्ट कर सकते हैं लेकिन ये एक नेवर एंडिंग लिस्ट है जिसमें आप अपने सजेशंस भी ऐड कर सकते हैं दोस्तों इंटरनल सिक्योरिटी पर अब हम चर्चा करेंगे लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिस्म की जो फॉर्मर पीएम मनमोहन सिंह के हिसाब से से इंडिया का सबसे बड़ा सिक्योरिटी इशू है लेफ्ट विंग टेररिज्म को हम दो वीडियोस में कवर करेंगे इस वीडियो में हम लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिस्म या एल डब्लू के बेसिक्स पर चर्चा करते हुए उसके इतिहास इवोल्यूशन और मॉड ऑपरेंडी
को समझेंगे इसके अलावा एल डब्लू के चेंजिंग नेचर को समझते हुए हम यह भी देखेंगे कि आखिर सरकार ने इसे काउंटर करने के लिए क्या-क्या कदम उठाए हैं उनमें क्या कमी है और हमें आगे और क्या स्टेप्स लेने चाहिए तो चलिए शुरुआत करते हैं एक बेसिक इंट्रोडक्शन से बेसिक्स ऑफ लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिस्म लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिस्म एक ऐसा इंटरनल सिक्योरिटी थ्रेट है जिसका मेन ऑर्गेनाइजिंग प्रिंसिपल एक वेल फॉर्मुले आइडियो जीी है लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिस्म को इंडिया में माइज्म और नक्सलिज्म भी कहा जाता है यह एक्सट्रीमिस्म 20th सेंचुरी के फिलोसोफर कार्ल मार्क्स यूएसएसआर के फाउंडिंग फादर व्लादिमीर
लेनिन और कम्युनिस्ट चाइना के संस्थापक माओज दंग के आइडिया से प्रभावित है नक्सलिज्म इंडिया के डेवलपमेंट लिंग एक्सट्रीमिस्म का सबसे बड़ा प्रतीक भी माना जाता है क्योंकि जिस आइडियो जीी से नक्सलिज्म प्रभावित है उसका मेन फोकस इकोनॉमिक डेवलपमेंट और उससे रिलेटेड इश्यूज होते हैं क्योंकि हमने डेवलपमेंट इंड्यूस्ड एक्सट्रीमिस्म पर एक सेपरेट वीडियो बनाई है इसलिए इन वीडियोस में हम लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिस्म के कारणों पर चर्चा नहीं करेंगे एडब्ल्यू के मेजर कारण वही हैं जो लिंकेजेस बिटवीन डेवलपमेंट एंड स्प्रेड ऑफ एक्सट्रीमिस्म वाले लेक्चर में डिस्कस किए गए हैं खैर नक्सलिज्म एक ऐसे एक्सट्रीमिस्ट थॉट पर बेस्ड
है जो लोगों को उनके दुखों से उभारने के लिए करंट स्टेट के वायलेंट ओवरथ्रो और एक कम्युनिस्ट सोसाइटी की स्थापना की बात करता है यह एक्सट्रीमिस्म लैक ऑफ डेवलपमेंट से जन्म भी लेता है और उस पर ही फीड भी करता है इस आइडियो जीी को डिटेल में समझने के लिए हमें कार्ल मार्क्स को ब्रीफ समझना होगा दोस्तों कार्ल मार्क्स के विचारों के हिसाब से हमारी सोसाइटी में गरीबी भुखमरी एक्सप्लोइटेशन डिस्क्रिमिनेशन इत्यादि का सबसे बड़ा कारण इकोनॉमिक स्ट्रक्चर पर कुछ पावरफुल लोगों का कंट्रोल है इन पावरफुल ग्रुप्स और लोगों को मार्क्स बुर्जुआ या पूंजीपति कहते हैं
मार्क्स के हिसाब से कुछ पूंजीपति इकोनॉमी पर अपने कंट्रोल के चलते समाज के बाकी के इंस्टीट्यूशंस जैसे पॉलिटिक्स स्टेट गवर्नमेंट इत्यादि पर भी अपना डोमिनेंस इंश्योर करते हैं और पूंजीपतियों का ये डोमिनेंस असल में गरीब और वर्किंग क्लास जिन्हें वो प्रोलिटेरिएट कहते हैं उनके एक्सप्लोइटेशन पर डिपेंडेंट है उनका कहना था कि एक कैपिटल सोसाइटी में पूंजीपति एक वर्कर से मैक्सिमम काम करवाता है लेकिन उसे कम से कम पैसा देता है ताकि पूंजीपति मैक्सिमम प्रॉफिट बना सके मार्क्स के हिसाब से इस पूरी समस्या का सॉल्यूशन एक सोशलिस्ट और फिर एक कम्युनिस्ट सोसाइटी की स्थापना है और
यह कम्युनिस्ट सोसाइटी रिवोल्यूशन या क्रांति से ही स्थापित की जा सकती है मार्क्सवादी विचारों का सबसे पहला एक्सपेरिमेंट 1917 में रूसी क्रांति में देखा गया जब वलादर लेनिन के नेतृत्व में एक कम्युनिस्ट स्टेट यूएसएसआर की स्थापना हुई इसके बाद 1949 में चाइना में माउज दंग ने भी एक क्रांति को लीड किया और वहां भी एक कम्युनिस्ट राज्य की स्थापना हुई हम आपको बता दें कि भले ही नक्सलिज्म का फंडामेंटल इन्फ्लुएंस कार्ल मार्क्स के विचारों से जुड़ा हुआ है लेकिन इंडिया में जो नक्सलवाद है उसका सबसे बड़ा इंस्पिरेशन माओ ज दंग को ही माना जाता है
ऐसा इसीलिए क्योंकि माउस दंग ने मार्क्सिस्ट आइडल जीी को मॉडिफाई किया जहां एक तरफ कार्ल मार्क्स का कहना था कि जब कैपिट इज्म अपने पीक पर पहुंच जाएगा तब रिवोल्यूशन इनवेट बल या अनअवॉइडेबल हो जाएगा और केवल एक एडवांस कैपिट समाज में ही कम्युनिस्ट रिवोल्यूशन की नीव रखी जा सकती है लेकिन माउज दंग ने इसे मॉडिफाई किया और दावा किया कि कम्युनिस्ट रिवोल्यूशन चाइना जैसे एक पीजेंट या एग्रेरियन सोसाइटी में भी पॉसिबल है जहां एक तरफ मार्क्स का विश्वास वर्कर लेड रिवोल्यूशन में था वहीं माओ का रिवोल्यूशन गांव के किसानों के नेतृत्व में होना था
यही वजह है कि इंडिया जैसे एग्रेरियन देश में जहां कैपिट ज्म और इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट प्रिमिटिव स्टेज में था वहां के कम्युनिस्ट रेडिकल्स को माओ के आइडियाज पसंद आए इसके अलावा कार्ल मार्क्स और माओ में डिफरेंस को आप ऐसे भी समझ सकते हैं कि कि मार्क्स के लेखों में क्रांति और रिवोल्यूशन का मेंशन तो मिलता है लेकिन वह किस तरह से होगा और उसका डिटेल प्रोसेस क्या होगा इस पर ज्यादा चर्चा नहीं मिलती कम्युनिस्ट क्रांति कैसी होगी इसकी डिटेल्स लेनिन और माओ के आइडियाज में मिलती है जिसमें स्टेट पावर को कैप्चर करने का मॉडेस्ट ऑपरेंडी क्या
होगा इस पर बात की गई है माओ ने इस पूरे प्रोसेस को प्रोट्रैक्टेड पीपल्स वॉर कहा था जिसमें लोगों द्वारा मिलिट्री लाइंस के फॉर्मेशन और आर्म स्ट्रगल द्वारा स्टेट पावर को कैप्चर करने की बात थी और इंडिया में पनप रहा नक्सलवाद लार्जली इन्हीं स्ट्रेटेजी को फॉलो करता है और इसीलिए उसे नक्सलवाद या माओवाद कहा जाता है जबकि मार्क्सवादी आइडियाज को फॉलो करने वाले लोग वायलेंट और नॉन वायलेंट डेमोक्रेटिक मेथड्स दोनों के सपोर्टर्स हो सकते हैं खैर अब चलते हैं आगे और समझते हैं कि इंडिया में नक्सलिज्म के खतरे की इंटेंसिटी क्या है इसके लिए हमें
कुछ डाटा और फैक्ट्स का सहारा लेना पड़ेगा सम फैक्ट्स दोस्तों कई रिपोर्ट्स बताती हैं कि पिछले कुछ सालों में गवर्नमेंट एफर्ट के चलते नक्सल अटैक्स में काफी कमी आई है लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिस्म इंसीडेंट से रिलेटेड गवर्नमेंट डाटा बताता है कि 2015 से 2020 के बीच हुए नक्सल अटैक्स 2009 से 2014 के बीच हुए नक्सल अटैक से लगभग 45 पर कम रहे इसके अलावा रिसेंटली पार्लियामेंट को दिए अपने जवाब में मिनिस्टर ऑफ स्टेट ऑफ होम अफेयर्स ने बताया कि 2010 में नक्सल वायलेंस का ज्योग्राफिकल स्प्रेड जहां 10 स्टेट्स और 96 डिस्ट्रिक्ट था वह अब घटकर 46
डिस्ट्रिक्ट्स हो गया है नंबर ऑफ डेथ्स की बात करें तो नक्सल इंसीडेंट से हुई डेथ्स 2005 से 2018 के बीच 8000 से ज्यादा रही जिनमें लगभग 6300 सिविलियंस और 1900 सिक्योरिटी पर्सनल शामिल थे इसके अलावा रेड कॉरिडॉर नाम से फेमस इंडिया के ईस्टर्न बेल्ट में लोकेटेड स्टेट्स जैसे तेलंगना आंध्र प्रदेश छत्तीसगढ़ ईस्टर्न महाराष्ट्र इत्यादि नक्सलिज्म इफेक्टेड हाई इंटेंसिटी जन में आते हैं लेकिन इनका लिमिटेड स्प्रेड बाकी के बॉर्डरिंग स्टेट्स में भी है महाराष्ट्र का गढ़ चिरौली छत्तीसगढ़ में बस्तर और दंतेवाड़ा जैसे एरियाज वो नाम है जहां नक्सलवाद की पकड़ सबसे ज्यादा मजबूत मानी जाती है
लेकिन नक्सलिज्म की रिड्यूस इंटेंसिटी के बावजूद हम ये नहीं कह सकते हैं कि इसका खतरा पूरी तरह से टल गया है क्योंकि पिछले कुछ सालों में कई डेडली अटैक्स को नक्सलियों ने अंजाम दिया है दोस्तों अब सवाल यह पैदा होता है है कि इंडिया में नक्सलिज्म की शुरुआत आखिर हुई कैसे क्या है इसका इतिहास और किस तरह से यह इंडिया में फैला चलिए देखते हैं नक्सलिज्म के इतिहास और उसके इवोल्यूशन को हिस्ट्री एंड इवोल्यूशन ऑफ नक्सलिज्म इन इंडिया हम आपको बता दें कि भारत में कम्युनिस्ट आइडल जीी का ओरिजिन यूएसएसआर के फॉर्मेशन के वक्त से
ही देखा जा सकता है जब इंडिया में एम एन रॉय ने कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया की स्थापना की थी कम्युनिस्ट आजादी की लड़ाई के दौर में भी एक्टिव रहे लेकिन कम्युनिस्ट और सोशलिज्म पर विश्वास करने वाले नेताओं में सभी वायलेंट रिवोल्यूशन के आइडिया पर विश्वास नहीं करते थे और यही वजह है कि कुछ नेता गांधीवादी आंदोलन के साथ भी जुड़े रहे आजादी के बाद कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया ने इलेक्टोरल पॉलिटिक्स का रास्ता चुना और इसीलिए इस दौर में मार्क्सिस्ट रिवोल्यूशन पॉलिटिक्स बहुत लिमिटेड थी लेकिन 60 के दशक में चीजें बदलने लगी और यही वो दौर
था जहां से भारत के सबसे बड़े इंटरनल सिक्योरिटी थ्रेट यानी नक्सलिज्म की शुरुआत हुई 1964 में में सीपीआई में इंटरनल कॉन्फ्लेट के चलते यह पार्टी दो भागों में बट गई जिनमें एक थी सीपीआई मार्क्सिस्ट और दूसरी सीपीआई नाम से जानी गई पर ये दोनों पार्टीज डेमोक्रेटिक पॉलिटिक्स के ही सपोर्ट में थी जो पार्टी के कुछ रेडिकल नेताओं को एक्सेप्टेबल नहीं था पर इन रेडिकल नेताओं का एक्चुअल राइज 1967 में एक छोटी सी घटना से होता है जब प्रेजेंट डे नक्सलिज्म का जन्म हुआ दोस्तों इंडिया में लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिस्म या नक्सल इंसर्जनल शुरुआत 1967 में वेस्ट
बंगाल के डार्लिंग डिस्ट्रिक्ट के गांव नक्सलवाड़ी से होता है जिसके नाम पर ही इंडिया के लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिस्म का नाम नक्सलिज्म पड़ा 1967 से 1974 को नक्सलिज्म का फर्स्ट फेज माना जाता है नक्सलिज्म के शुरुआती दौर का प्राइजिंग चारू मजूमदार कानु सान्याल और जंगल संथ जैसे नेताओं द्वारा लीड किया गया था जो कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया मार्क्सिस्ट के विदन रेडिकल नेता थे लेकिन जैसा कि हमने बताया कि सीपीएम पार्लियामेंट्री मेथड पर विश्वास रखती थी इसलिए नक्सलवाड़ी अप राइजिंग के 2 साल बाद यानी 1969 में चारू मजूमदार ने कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया मार्क्सिस्ट लेनिनिस्ट का क्रिएशन
किया जिसने रिवोल्यूशन और वायलेंस पॉलिटिक्स को सपोर्ट किया यह इनिशियल अपराइज इंग एक तरह के पीजन रिवॉल्ट के फॉर्म में शुरू हुई थी जो धीरे-धीरे देश के बाकी इलाकों में फैलने लगी पर 1970 में गवर्नमेंट ने ऑपरेशन स्टेपल चेस के तहत नक्सलाइट्स पर हैवी क्रैक डाउंस किए और मूवमेंट की गति कम पड़ने लगी इस क्रैकडाउन में सैकड़ों नक्सलाइट्स मारे गए और हजारों अरेस्ट कर लिए गए फिर 1974 में चारू मजूमदार की मौत हो गई और यहां से नक्सलिज्म के सेकंड फेज का दौर शुरू होता है चारू मजूमदार की मृत्यु के बाद 1974 से 2004 के
दौर में नक्सलाइट मूवमेंट कहीं ना कहीं इंटरनल डिस्प्यूट्स और स्कब का शिकार हुआ इसका नतीजा यह हुआ कि नक्सल वायलेंस कोई एक ग्रुप लीड नहीं कर रहा था बल्कि कई छोटे-बड़े गुटों ने इसकी कमान अपने हाथों में ली उदाहरण के तौर पर पीपल्स वॉर ग्रुप इन आंध्र बंगाल में माउ कम्युनिस्ट सेंटर एमसीसी और सीपीआई एमएल एसएनएस एक्सट्रा चूंकि नक्सल्स केवल सरकार के अगेंस्ट वेपंस नहीं उठाते थे बल्कि उनका टारगेट लोकल जमीदार और पावरफुल लोग भी थे इसलिए इस दौर में हमें बिहार जैसे स्टेट्स में एंटी नक्सल्स मिलिशिया भी देखने को मिलते हैं इसके चलते लॉ
एंड ऑर्डर की सिचुएशन काफी खराब हुई खैर स्क्वेबमेल देश के कई स्टेट्स में पसारे और वेस्ट बंगाल के डार्लिंग से शुरू हुआ ये इंटरनल सिक्योरिटी थ्रेट इंडिया के लेस डेवलप्ड स्टेट्स जैसे बिहार उड़ीसा आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ तक फैल गया इंटरेस्टिंग बात यह है कि नक्सल प्रभावित इलाका ट्राइबल डोमिनेटेड मिनरल रिच और फॉरेस्टेड लैंड है जिसे रेड कॉरिडोर की परिभाषा भी दी गई है और यही वजह है कि डेवलपमेंट लिंक्ड एक्सट्रीमिस्म में नक्सलिज्म का नाम सबसे ऊपर आता है खैर 2004 में नक्सलिज्म के नेचर में एक और बड़ा बदलाव आया इंडिया में नक्सलिज्म को लीड
कर रहे दो सबसे बड़े ग्रुप्स मास्ट कम्युनिस्ट सेंटर एमसीसी और आंध्र बेस्ड पीपल्स वॉर ग्रुप का मर्जर हुआ और इससे जन्म लिया कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया मावे ने जो इंडिया के नक्सलिज्म का मेन सेंट्रल ऑर्गेनाइजेशन बना बाद में गवर्नमेंट सीबीआई मास्ट को यूएपीए के तहत बैन कर दिया गया इस यूनिटी के चलते इंडिया में नक्सलवाद ने अपने थर्ड फेज में रिसर्जेंस देखा और इंडिया में नक्सल वायलेंस में बढ़ोतरी हुई वायलेंस 10 से ज्यादा स्टेट्स और लगभग 76 डिस्ट्रिक्ट्स में फ गया मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स के डाटा के हिसाब से नक्सलवाद 2017 में लगभग 10000 आर्म्ड
फाइटर्स और 40000 से ज्यादा के कार्डर स्ट्रेंथ के साथ ऑपरेट कर रहा था इस दौर में नक्सलियों ने इंडिया में अपने इतिहास के कुछ सबसे खतरनाक वायलेंट अटैक्स को अंजाम दिया इनमें 2010 का दंतेवाड़ा अटैक जिसमें 76 सीआरपीएफ जवान शहीद हो गए और 2013 का दरभा या फिर सुखमा वायलेंस शामिल है जिसमें इंडियन नेशनल कांग्रेस के कुछ बड़े नेताओं के कन्वोय को अटैक किया गया था खैर ये तो बात हुई इतिहास और नक्सलिज्म के इवोल्यूशन की पर नक्सलिज्म इंडिया में एक्चुअली किस तरह से ऑपरेट करता है और उसका मॉडल ऑपरेंडी क्या है यह जानना हमारे
लिए बेहद जरूरी है ताकि एज एस्पायरिंग एडमिनिस्ट्रेटर्स हमें समस्या को सॉल्व करने के सॉल्यूशन ढूढ सक तो चलिए समझते हैं नक्सलवादियों के मेथड्स और मॉडेस्ट ऑपरेंडी को मॉडेस्ट ऑपरेंडी ऑफ नक्सलिज्म दोस्तों एल डब्लू या फिर नक्सल ऑर्गेनाइजेशन गवर्नमेंट को ओवरथ्रो करने के लिए आर्म्ड वायलेंस का इस्तेमाल करते हैं और इस वायलेंस का टारगेट गवर्नमेंट मशीनरी सिक्योरिटी फोर्सेस पॉलिटिशियन इत्यादि से लेकर इनोसेंट सिविलियंस भी होते हैं टेरर अटैक से लेकर इंडिविजुअल मडर्स अब्दक्टर्स एक्सेट का इस्तेमाल किया जाता है इसके अलावा कई केसेस में यह हाई प्रोफाइल मर्डर और किडनैपिंग्स भी करते हैं ताकि इनके स् फीयर
ऑफ इन्फ्लुएंस में रह रहे लोगों में डर का माहौल क्रिएट हो कई केसेस में नक्सली लोकल ट्राइबल पॉपुलेशन का सपोर्ट भी गेन करने में कामयाब हो जाते हैं क्योंकि इन एरियाज में यह खुद पैरेलल गवर्नमेंट चलाने की कोशिश करते हैं पैरेलल गवर्नमेंट चलाने का मतलब हुआ कि इन एरियाज में इलेक्टेड गवर्नमेंट का इन्फ्लुएंस कम होता है और नक्सलियों का इन्फ्लुएंस ज्यादा और इसका फायदा उठाकर यह खुद को बेसिक एमेनिटीज के सर्विस डिलीवरीज की तरह प्रोजेक्ट करते हैं लेकिन इन एरियाज में नक्सल्स उन गरीब ट्राइब्स को भी नहीं बख्ते जिन पर वो गवर्नमेंट इनफॉर्मर्स होने का
आरोप लगाते हैं इसके अलावा लोकल लेवल पर लोगों को डेमोक्रेटिक पॉलिटिक्स और इलेक्शन से दूर रखने के लिए नक्सल्स लोकल लीडर्स पर भी अटैक करते हैं लोगों को रेडिकलाइज करने के लिए और अपने सपोर्ट को मेंटेन करने के लिए गवर्नमेंट के खिलाफ कंटीन्यूअस प्रोपेगेंडा का भी सहारा लेते हैं इसे इंश्योर करने के लिए नक्सलवादी गवर्नमेंट के किसी भी प्रकार के डेवलपमेंट एफर्ट्स को सक्सीडेंस पोट्रे कर अपनी हेजम नहीं को मेंटेन कर सकें इसीलिए रोड प्रोजेक्ट से लेकर इंडस्ट्रीज और बाकी के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर अटैक्स भी नक्सल्स का मॉडेस्ट ऑपरेंडी है किसी भी प्रकार के आम
स्ट्रगल को सस्टेन करने के लिए पैसों की आवश्यकता भी होती है इसलिए नक्सलवादी फंडिंग सिक्योर करने के लिए वही मेथड्स यूज करते हैं जो बाकी के टेरर ग्रुप्स करते हैं मनी लरिंग से लेकर ट्रांस नेशनल ऑर्गेनाइज क्रिमिनल गैंग्स के नेटवर्क का इस्तेमाल ये अपनी फंडिंग सिक्योर करने के लिए करते हैं कई दफा ये खुद डायरेक्टली ड्रग ट्रैफिकिंग ओपियम फार्मिंग बैंक रॉबरीज और इंडस्ट्रियल से एक्सटॉर्शन जैसे काम भी करते हैं आर्म स्ट्रगल के लिए लगने वाले आर्म्स का सप्लाई भी ये आर्म्स ट्रैफिकर्स के थ्रू करते हैं कई जगहों में जहां इनकी पैरेलल गवर्नमेंट्स होती हैं वहां
तो ये लोगों से टैक्सेस भी वसूलते हैं वो एरियाज जहां ये अपनी पैरेलल गवर्नमेंट्स क्रिएट करने में सफल रहते हैं उन्हें ये लिबरे जनस या फिर एरियाज बोलते हैं इसके अलावा एक जोन को गोरिला जन भी कहा जाता है जहां गवर्नमेंट और नक्सल्स के बीच लगातार स्ट्रगल चलता है और दोनों साइड्स लगभग इक्वली डोमिनेंट होते हैं और जिन एरियाज में गवर्नमेंट का कंट्रोल स्ट्रांग पर होता है उन्हें बेस एरियाज कहा जाता है खैर नक्सल आइडल जीी के स्टेट के अगेंस्ट वायलेंस करने का मेन तरीका गोरिल्ला वरफेन होता है इसके तहत नक्सलवादी स्टेट एजेंसीज के खिलाफ
सरप्राइज अटैक्स पर जंगल में छुप जाते हैं ऐसा वो इसलिए करते हैं क्योंकि उन्हें मालूम होता है कि स्टेट के सिक्योरिटी फोर्सेस के सामने वो कमजोर हैं और एक कन्वेंशनल वरफेन में वह स्टेट एजेंसी से जीत नहीं सकते इसके अलावा अपने स्फीयर ऑफ इन्फ्लुएंस के बाहर अपना दबदबा कायम करने और सपोर्ट मेंटेन करने के लिए नक्सल्स भी फ्रंट ऑर्गेनाइजेशंस का सहारा लेते हैं फ्रंट ऑर्गेनाइजेशंस का मकसद कई प्रकार का होता है यह ऑर्गेनाइजेशंस फंडिंग आइडियो जिकल सपोर्ट प्रोपेगेंडा और लोगों को रेडिकलाइज कर उन्हें नक्सल कार्डर्स में रिक्रूट करने का काम करते हैं कुछ फ्रेंट ऑर्गेनाइजेशंस
को इंटेलेक्चुअल्स भी लीड करते हैं जो बेसिकली आइडियो कल सिंपैथी इंश्योर करते हैं इसके अलावा इनमें से कई ऑर्गेनाइजेशंस अरेस्टेड नक्सल लीडर्स को लीगल लायबिलिटी से बचाने में भी हेल्प करती हैं और इन ग्रुप्स में कई लॉयर्स भी हो होते हैं मैगजींस और पंपलेट द्वारा आइडियो जीी को स्प्रेड करना आइडियो जिकल सपोर्ट और रेडिकलाइजेशन का एक मेथड माना गया है कॉर्पोरेट एक्सप्लोइटेशन से लेकर ह्यूमन राइट वायलेशंस और ट्राइबल डिस्प्लेसमेंट जैसे सेंसिटिव टॉपिक्स का गलत इस्तेमाल कर ये ग्रुप्स यंग लोगों में एक्सट्रीमिस्म फैलाते हैं और नक्सलवाद के प्रति सपोर्ट इकट्ठा करते हैं यही वजह है कि
कई यंग लोग भी इस प्रोपेगेंडा का शिकार बन जाते हैं और बिना नक्सलवादियों की आइडल जीी को पूरी तरह से समझे हुए उनके सिंपैथाइजर्स बन जा आते हैं चेंजिंग नेचर ऑफ नक्सलिज्म एंड इमर्जिंग चैलेंज दोस्तों सेंट्रल और स्टेट गवर्नमेंट्स ने इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स के बेसिस पर यह रिकॉग्नाइज किया है कि बदलते सोश इकोनॉमिक कंडीशंस और टेक्नोलॉजिकल ट्रांसफॉर्मेशन के इस दौर में लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिस्म में कई तरह के बदलाव देखने को मिल रहे हैं नक्सलिज्म जैसे इंटरनल सिक्योरिटी थ्रेट को जड़ से खत्म करने के लिए इन बदलावों को समझना बेहद जरूरी हो जाता है बदलते समय के
साथ खुद के एजिस्ट हैंस और सर्वाइवल को इंश्योर करने के लिए नक्सलवाद में जो सबसे पहला चेंज हुआ है वह है नक्सलियों द्वारा नए एरियाज में पांव पसारने की कोशिश और साथ ही साथ कोर एरियाज में खुद को और मजबूत बनाने की जद्दोजहद जी हां बंड ऑर्गेनाइजेशन सीपीआई मास ने इसके लिए कोर एरियाज में ऑर्गेनाइजेशनल रिस्ट्रक्चरिंग का सहारा लेना शुरू किया है ऐसा इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स बताती हैं इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि पिछले एक दशक में नक्सल मूवमेंट के खिलाफ सिक्योरिटी एफर्ट्स काफी स्ट्रांग रहे हैं जिसके चलते नक्सल वायलेंस कम हुआ है जैसे कि
स्टट्स और डाटा के साथ हमने पिछले वीडियो में देखा था रिपोर्ट्स बताती हैं कि बस्तर जैसे इलाकों में भी नक्सलियों को सिक्योरिटी एजेंसीज के हाथों काफी नुकसान हुआ है इस वजह से ही उन्होंने खुद के लिए नए एरियाज की तलाश शुरू की है और कोर एरियाज पर फोकस बढ़ा दिया है नक्सल कंसोलिडेशन के पोटेंशियल जनस की बात करें तो ये एरियाज दो ट्राई जंक्शंस पर लोकेटेड हैं पहला है है ट्राई जंक्शंस ऑफ महाराष्ट्र मध्य प्रदेश एंड छत्तीसगढ़ जिसे एमएमसी जोन कहा जाता है और दूसरा है केरला कर्नाटका और तमिलनाडु या केकेटी जन इस डुअल स्ट्रेटजी
का सबसे बड़ा लॉजिक है सिक्योरिटी फोर्सेस का ध्यान कोर एरिया से खींचकर नए एरियाज की तरफ शिफ्ट करना और मौके का फायदा उठाकर कोर एरियाज जैसे बस्तर और गडचिरोली में हुए नुकसान की भरपाई करना इसे स्कॉलर्स एक डायवर्जन टैक्टिक मानते हैं इसके अलावा ट्राई जंक्शंस पर नक्सल एक्टिविटीज को बढ़ाने ने की कोशिश इसलिए भी हो रही है क्योंकि ऐसे एरियाज में इंटरस्टेट पुलिस कोऑर्डिनेशन कठिन हो जाता है जिसका फायदा नक्सलियों को होता है दोस्तों नक्सलिज्म के नए ट्रेंड्स में अगला ट्रेंड है उनके द्वारा अर्बन सेंटर्स में अपनी पकड़ बढ़ाने की कोशिशें करना और वर्किंग क्लास
मूवमेंट्स को टैप करना इसी वजह से मीडिया में अर्बन नक्सलिज्म और अर्बन नक्सल जैसे टर्म्स का यूसेज बढ़ गया है हालांकि इस नए ट्रेंड के क्लेम्म वर्सी और पॉलिटिसाइजेशन होता रहा है इसे क्रिटिसाइज करने वाले सेक्शन दावा करते हैं कि नक्सलिज्म के अर्बन स्प्रेड को लेकर जो बातें होती हैं वह केवल और केवल पॉलिटिकल माइलेज को लेकर होती हैं हम आपको यह भी बता दें कि ये कंट्रोवर्सीज और ज्यादा स्ट्रन हुई जब रिसेंटली यूनियन होम मिनिस्ट्री के लेफ्ट विंग डिवीजन ने एक आरटीआई के रिस्पांस में यह कहा था कि अर्बन नक्सल टर्म का इस्तेमाल ऑफिशियल
यूसेज में नहीं है लेकिन पिछले कुछ सालों में ऐसे कई इवेंट्स हुए हैं जिनके चलते इस मुद्दे पर चर्चा जरूरी है दोस्तों अर्बन नक्सल टर्म क्लीयरली डिफाइंड नहीं है लेकिन मीडिया द्वारा इसका इस्तेमाल उन अर्बन इंटेलेक्चुअल्स और सिविल सोसाइटी मेंबर्स के लिए होता है जिन पर नक्सल सिंपैथाइजर्स होने का आरोप लगा हुआ है 2018 में हुए भीमा कोरेगांव वायलेंस और उससे रिलेटेड अरेस्ट के बाद यह मुद्दा मीडिया में खूब चर्चा में रहा खैर अर्बन नक्सल टर्म कितना सही है कितना नहीं इस डिबेट के बियोंड यह बात तो सच है कि हर आइडल जीी ड्रिवन वायलेंट
मूवमेंट अपनी आइडियो जीी को स्प्रेड और उसके लिए सपोर्ट गेन करने के लिए फ्रेंट ऑर्गेनाइजेशंस का इस्तेमाल करता है नक्सलिज्म के केस में ऐसे फ्रेंट ऑर्गेनाइजेशंस का एक्जिस्टेंस नक्सल अफेक्टेड एरियाज के अलावा अर्बन सेंटर्स में भी है और यह भी इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स का दावा है यह फ्रंट ऑर्गेनाइजेशंस प्रोपेगेंडा फैलाने से लेकर रिक्रूटमेंट और फंडिंग जोड़ने का काम सीपीआई माउस के लिए करते हैं इसके अलावा इन सिंपैथाइजर्स पर यह आरोप भी लगते हैं कि वह एंटी डेवलपमेंट एजेंडा को लेकर स्टेट डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स के खिलाफ प्रोटेस्ट और प्रोपेगेंडा करते हैं और गवर्नमेंट के डेवलपमेंट एफर्ट्स में बाधा
क्रिएट कर लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिस्म के फलने और फूलने के लिए ग्राउंड क्रिएट करने की कोशिश करते हैं अगला नया और शायद सबसे डेंजरस ट्रेंड है नक्सलियों द्वारा न्यू एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल दोस्तों जिस तरह से आईएसआईएस जैसे टेररिस्ट ऑर्गेनाइजेशंस ने नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रेडिकलाइजेशन को फ्यूल खुद को स्ट्रेंथ देन और अपने रीच को बढ़ाने का काम किया है वैसे ही अब सिक्योरिटी एजेंसीज को डर है कि आने वाले टाइम में नक्सलवादियों द्वारा भी इन टेक्नोलॉजीज का मिसयूज बढ़ गया है इकोनॉमिक टाइम्स की 2013 की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि
सिक्योरिटी फोर्सेस ने छत्तीसगढ़ में नक्सलियों से कई हाईटेक आर्म्स एम्युनिशंस और गैजेट्स रिकवर किए थे इसने सिक्योरिटी एजेंसीज के सामने एक बड़ा चैलेंज प्रस्तुत किया था जहां उनको डर था कि शायद मास्ट अब मोबाइल वरफेन स्ट्रेटजी का इस्तेमाल सिक्योरिटी एजेंसीज के अगेंस्ट कर सकते हैं जीपीएस इनेबल्ड एडवांस डायरेक्शन फाइंडर चाइना मेड बाइन कलर्स और क्लेमोर लैंडमाइन जैसे एडवांस डिवाइसेज भी इनके पास से बरामद हो चुके हैं इसके अलावा सोफिस्टिकेटेड वीएचएफ यानी वेरी हाई फ्रीक्वेंसी सेट्स और स्कैनर्स विद स्कैमर फैसिलिटी के इस्तेमाल की खबरें भी न्यूज़पेपर रिपोर्ट्स में आती रहती हैं 2019 में तो द मिंट
ने रिपोर्ट किया था कि सुकमा में मास्ट ड्रोन का इस्तेमाल करते पाए गए थे इनका इस्तेमाल मास्ट ने सीआरपीएफ कैंप्स पर नजर रखने के इंटेंशन से किया था त मिट के हिसाब से यह ड्रोन शायद मुंबई बेस्ड किसी व द्वारा अन आइडेंटिफिकेशन एजेंसीज का ईयर ओल्ड कंसर्न कि नक्सल्स न्यूटेक वेपंस का मिसयूज कर सकते हैं वह कहीं ना कहीं सच होता दिख रहा है इसीलिए सिक्योरिटी एजेंसीज को इन नए सरकमस्टेंसस के हिसाब से खुद को बेटर प्रिपेयर्ड करने की आवश्यकता है इमर्जिंग ट्रेंड्स में अगला इंपॉर्टेंट मुद्दा है नक्सल ग्रुप्स में मेमन कार्डर्स का बढ़ता नंबर
हम आपको बता दें कि ट्रेडिशनल नक्सलवाद को लीड और सस्टेन करने में मेल मेंबर्स की संख्या ही ज्यादा होती थी लेकिन पिछले कुछ दशकों में इसमें काफी बदलाव आया है और एल डब्लू अफेक्टेड एरियाज में लगभग 40 पर कार्डर में वमन मेंबर्स हैं इसके चलते नक्सल ग्रुप्स में कई वमन लेड ग्रुप्स का क्रिएशन भी होने लगा है जिन्हें बल दस्ता जैसा नाम दिया जाता है इसका एक कारण यह माना जा रहा है कि डेवलपमेंट रिलेटेड इश्यूज जैसे डिस्प्लेसमेंट इत्यादि का सबसे बड़ा शिकार विमेन होती हैं इसके अलावा एल डब्ल्यू एरियाज में वमन के अगेंस्ट राइजिंग
सेक्सुअल हरेसमेंट के केसेस के चलते भी नक्सल कार्डर्स में मेमन के नंबर्स के बढ़ने की आशंकाएं हैं दोस्तों यह था एक डिस्कशन जिसमें हमने नक्सलिज्म या एल डब्लू के चेंजिंग नेचर के बारे में बात की अब चलते हैं आगे और देखते हैं केएल डब्लू को काउंटर करने के लिए हमारी सरकार ने क्या एफर्ट्स लिए हैं गवर्नमेंट मेजर्स टू काउंटर लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिस्म दोस्तों जब हम नक्स के अगेंस्ट लिए गए गवर्नमेंट स्टेप्स की बात करते हैं तो उन्हें ब्रॉडली दो कैटेगरी में डिवाइड किया जा सकता है पहला है सिक्योरिटी रिलेटेड स्टेप्स और दूसरा है लेफ्ट विंग
एक्सट्रीमिस्म को जन्म देने वाले डेवलपमेंटल इश्यूज को सॉल्व करने की खातिर लिए गए स्टेप्स ये सारे स्टेप्स ब्रॉडली नेशनल पॉलिसी और एक्शन ऑफ प्लान 2015 के आधीन आते हैं सबसे पहले बात करते हैं सिक्योरिटी रिलेटेड स्टेप्स की सिक्योरिटी रिलेटेड स्टेप्स में हमारे देश की सिक्योरिटी एजेंसीज का रोल सबसे इंपॉर्टेंट हो जाता है नक्सलिज्म को काउंटर करने के लिए इंडिया में सिक्योरिटी एजेंसीज दो लेवल पर ऑपरेट करती हैं पहला है स्टेट लेवल पर क्योंकि इंटरनल लॉ एंड ऑर्डर प्रॉब्लम स्टेट लिस्ट का हिस्सा है और इसीलिए स्टेट पुलिस और स्टेट्स द्वारा क्रिएटेडटेड के मैंडेट में नक्सलिज्म रिलेटेड
सिक्योरिटी एफर्ट्स भी शामिल हैं उसके अलावा यूनियन के लेवल पर जो एजेंसी नक्सलिज्म को काउंटर करने का काम करती हैं वह है सीआरपीएफ जो इंडिया की पैरामिलिट्री फोर्सेस का हिस्सा है मोस्टली सीआरपीएफ के हेड्स इंडियन पुलिस सर्विसेस से अपॉइंट्स का रिक्रूटमेंट यूपीएससी द्वारा कंडक्ट कराए जाने वाले सीआपीएफ एग्जामिनेशंस के तहत होता है इसके अलावा कुछ स्टेट्स और सीआरपीएफ ने स्पेसिफिकली नक्सलिज्म रिलेटेड इंसीडेंट्स को कम करने के लिए स्पेशल फोर्सेस भी क्रिएट किए हैं उदाहरण के तौर पर हम सीआरपीएफ की फेमस कोब्रा बटालियन या फिर कमांडो बटालियन फॉर रिजॉल्यूट एक्शन की बात कर सकते हैं ऐसी
एक स्पेशल फोर्स आंध्र प्रदेश में ऑपरेट करती है जिसका नाम ग्रे हाउंड्स है जो एंटी मास्ट ऑपरेशंस में स्पेशलाइज करती है छत्तीसगढ़ में ब्लैक पैंथर कॉम्बैट फोर्स भी इसका ही एक उदाहरण है छत्तीसगढ़ में बस्तरीय बटालियन नाम की एक फोर्स भी रेस की गई है जिसमें लगभग 500 ट्राइबल यूथस को भी शामिल किया गया है जो एंटी नक्सल ऑपरेशंस को बेटर तरीके से इंफोर्स करने में पुलिस फोर्सेस की मदद कर सकते हैं इसके अलावा सेंटर स्टेट और इंटरस्टेट लेवल पर नक्सलिज्म को लेकर लिए जा रहे एफर्ट्स को कोऑर्डिनेट करने के लिए एक यूनिफाइड कमांड की
स्थापना की गई है ताकि पुलिस रिस्पांसस और इंटेलिजेंस शेयरिंग इजली और टाइम बाउंड तरीके से हो सके साथ ही साथ नक्सल्स की फंडिंग को चोक करने और आईबी एनआईए ईडी डीआरआई और स्टेट पुलिस में रिक्वायर्ड कोआर्डिनेशन को इंश्योर करने के लिए मल्टी डिसिप्लिन ग्रुप्स का फॉर्मेशन भी किया गया है यूनियन गवर्नमेंट ने सिक्योरिटी रिलेटेड एक्सपेंडिचर या फिर एसआई स्कीम के तहत स्टेट पुलिस फोर्सेस के मॉडर्नाइजेशन की ओर भी बड़ा कदम उठाया है इसके तहत यूनियन गवर्नमेंट 11 नक्सल प्रभावित स्टेट्स के पुलिस मॉडर्नाइजेशन इफेक्ट को फाइनेंशली सपोर्ट करती है नक्सल अफेक्टेड इलाकों में लोकेटेड पुलिस स्टेशंस
को फोर्टिफाइंग मेंट ने फोर्टिफाइंग या एफपीएस नामक स्कीम भी निकाली है इसके तहत लगभग 445 पुलिस स्टेशंस बनाए गए हैं जिनमें 399 एफपी और 10 एडब अफेक्टेड एरियाज में है यूनियन गवर्नमेंट ने समाधान स्कीम या फिर डॉक्ट्रिन को भी लॉन्च किया है जो एडब्ल्यू को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए एक वन स्टॉप सॉल्यूशन की तरह है समाधान डॉक्ट्रिन गवर्नमेंट की शॉर्ट टर्म पॉलिसी से लेकर लॉन्ग टर्म पॉलिसी सभी को इनकंपास करती है इसका फुल फॉर्म है एस फॉर स्मार्ट लीडरशिप ए फॉर अग्रेसिव स्ट्रेटेजी एम फॉर मोटिवेशन एंड ट्रेनिंग ए फॉर एक्शनेबल इंटेलिजेंस डी फॉर
डैशबोर्ड बेस्ड केपीआर कि की परफॉर्मेंस इंडिकेटर्स और के आरएस यानी की रिजल्ट एरियाज एच फॉर हार्नेस टेक्नोलॉजीज ए फॉर एक्शन प्लान फॉर ईच थिएटर और एन फॉर नो एक्सेस टू फाइनेंसिंग दोस्तों अब बात डेवलपमेंट रिलेटेड एफर्ट्स की जो एडब्ल्यू के रूट कॉसेस को खत्म करने के लिए लाए गए हैं इनमें सबसे पहला एफर्ट है स्पेशल सेंटर असिस्टेंसिया एससीए जिसके तहत यूनियन गवर्नमेंट एल डब्लू अफेक्टेड स्टेट्स की मदद करती है ताकि वह एल डब्लू अफेक्टेड रीजंस में पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और गवर्नमेंट सर्विसेस में क्रिटिकल गैप्स को फिल कर सकें रोड रिक्वायरमेंट प्लान के तहत एल डब्ल्यू डिस्ट्रिक्ट
में रोड इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी जोर दिया जा रहा है इसके अलावा एडब्ल्यू मोबाइल टावर प्रोजेक्ट के तहत एडब्ल्यू इफेक्टेड एरियाज में 2300 से भी ज्यादा मोबाइल टावर्स इरेक्ट किए गए हैं जो इन रीजंस की कनेक्टिविटी को बूस्ट करते हैं अनइंप्लॉयमेंट की प्रॉब्लम के साथ डील करने के लिए स्किल डेवलपमेंट पर भी ध्यान दिया जा रहा है इसके तहत लगभग 47 आईटीआई या फिर वन आईटीआई पर डिस्ट्रिक्ट और 68 स्किल डेवलपमेंट सेंटर्स या फिर टू एसडीसी पर डिस्ट्रिक्ट के क्रिएशन पर फोकस है 27 एडब्ल्यू डिस्ट्रिक्ट में स्किल डेवलपमेंट के लिए रोशनी नामक स्कीम भी लाई गई
है एजुकेशन रिलेटेड गैप्स को फिल करने के लिए नए केंद्रीय विद्यालय और जवाहर नवोदय विद्यालय खोले जाने पर भी जोर है और साथ ही साथ एकलव्य मॉडल स्कूल्स को एडब्ल्यू इफेक्टेड एरियाज में एग्रेसिवली पुश करने का प्लान है फाइनेंशियल इंक्लूजन की खातिर एल डब्लू इफेक्टेड एरियाज में सारे सिटीजंस को 5 किमी के अंदर बैंकिंग फैसिलिटी अवेल कराने की कोशिश है फॉरेस्टेड एरियाज में हो रहे ट्राइबल एलियने को रोकने और ट्राइबल राइट्स को इंफोर्स करने के लिए सरकार ने 2006 में एक बड़ा कदम उठाया था यह कदम था शेड्यूल ट्राइब्स एंड अदर ट्रेडिशनल फॉरेस्ट ट्वेल करस
रिकग्निशन ऑफ फॉरेस्ट राइट्स एक्ट 2006 या फिर फॉरेस्ट राइट्स एक्ट 2006 ये एक्ट इंडिपेंडेंस इंडिया के इतिहास में वन ऑफ द मोस्ट इंपॉर्टेंट लेजिसलेशन माना जाता है जिसने ट्राइबल एलियने की दशकों पुरानी समस्या का समाधान करने की कोशिश की है इस एक्ट के तहत ग्राम सभास को भी ए पावर किया गया है ताकि डेमोक्रेटिक डिसेंट्रलाइजेशन इंश्योर किया जा सके और टॉप डाउन डेवलपमेंटल अप्रोच की प्रॉब्लम को सॉल्व कर लोकल लेवल पर लोगों को डेमोक्रेटिक प्रोसेस और डिसीजन मेकिंग में जोड़ा जा सके इसके अलावा पुअर सोशो इकोनॉमिक कंडीशंस को फेस कर रहे डिस्ट्रिक्ट की कंडीशंस को
इंप्रूव करने के लिए 2018 में लॉन्च किए गए एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम के तहत मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स को यह टास्क दिया गया है कि वो 35 सबसे ज्यादा अफेक्टेड एल डब्ल्यू डिस्ट्रिक्ट्स को को मॉनिटर करें ताकि उनमें एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम को सही तरीके से इंप्लीमेंट किया जा सके पुलिस पैरामिलिट्री फोर्स और लोकल ट्राइब्स के बीच कोऑर्डिनेशन ट्रस्ट और बन्मी को बढ़ाने के लिए भी गवर्नमेंट ने एफर्ट्स लिए हैं यह काम सिविक एक्शन प्रोग्राम के तहत लार्जली सीआरपीएफ करती है ट्राइबल यूथ एक्सचेंज मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्पोर्ट्स टूर्नामेंट अवेयरनेस जनरेशन फॉर जॉब से लेकर क्रॉप डिस्ट्रीब्यूशन यूटेंसिल्स
ब्यूशन इत्यादि जैसे काम इस स्कीम के तह तहत किए जाते हैं यूथ के डीरेडिकलाइजेशन के लिए भी एफर्ट्स लिए गए हैं जिसमें सबसे क्रुशल है मीडिया प्लान इसके तहत भी यूथ एक्सचेंज एक्टिविटीज ऑर्गेनाइज करवाई जाती हैं इसके अलावा पंपलेट फिल्म्स और रेडियोज के थ्रू नक्सल प्रोपेगेंडा को काउंटर करने की कोशिश भी होती है यूनियन गवर्नमेंट द्वारा स्टेट को यह हिदायत भी दी गई है कि वोह द पंचायतस एक्सटेंशन टू द शेड्यूल एरियाज एक्ट 1996 या फिर पैसा एक्ट को प्रायोरिटी बेसिस पर फिफ्थ शेड्यूल ए एरिया में इफेक्टिव बनाए हम आपको बता दें कि कांस्टिट्यूशन के
फिफ्थ शेड्यूल में आने वाले ट्राइबल एरियाज में पंचायती राज सिस्टम को इफेक्टिवली इंप्लीमेंट करने के लिए पेसा एक्ट लाया गया लेकिन कई स्टेट्स में यह आज भी इफेक्टिवली इंप्लीमेंट नहीं किया गया है इसके चलते डेमोक्रेटिक डिसेंट्रलाइजेशन का प्रोसेस अभी भी अधूरा है जो लोकल ट्राइब्स में इंजस्टिस जैसी भावनाओं को जन्म देता है जिसके चलते उनमें रेडिकलाइजेशन का खतरा बढ़ जाता है इन स्टेप्स के अलावा कुछ स्टेट्स द्वारा लिए गए एंटी नक्सल एफर्ट्स ने ख्याति भी प्राप्त की है जिन्हें आप एग्जाम में बेस्ट प्रैक्टिसेस के रूप में मेंशन कर सकते हैं इनमें सबसे पहला बेस्ट प्रैक्टिस
है स्पेशलाइज बटालियंस का क्रिएशन जैसे ग्रेहाउंड्स ब्लैक पैंथर और बस्तरिया बटालियन जिनकी चर्चा हम कर चुके हैं इन फोर्सेस ने स्पेशल ऑपरेशंस के तहत नक्सलवादियों की कमर तोड़ने का काम किया है कोबरा द्वारा किया गया 2009 का ऑपरेशन ग्रीन हंट इनमें सबसे मेजर ऑफेंसिव माना जाता है इसके अलावा दंतेवाड़ा में लोन वरा टू यानी रिटर्न होम नामक एफर्ट के तहत नक्सल्स को सरेंडर करने के लिए भी इंस्पायर किया जा रहा है ताकि वह वायलेंस छोड़कर मेन स्ट्रीम सोसाइटी के साथ जुड़ जाएं दंतेवाड़ा में ही आईएस ओपी चौधरी द्वारा लिए गए एफर्ट्स भी काफी सरनी है
जनके लिए उन्हें 2011-12 में पीएम अवार्ड ऑफ एक्सीलेंस भी दिया गया था उनके कई एफर्ट्स में सबसे इंटरेस्टिंग एफर्ट में पोटा कैबिंदा वाड़ा एजुकेशन सिटी और तमन्ना स्कीम्स आते हैं इनके तहत उन्होंने दंतेवाड़ा में ट्राइबल एजुकेशन को पुश किया डिस्पाइना थ्रेट्स ताकि लोकल्स देश के डेवलपमेंट और खुद की ग्रोथ पर काम कर सके बिहार का संदेश मॉडल भी काफी इंस्पायरिंग है बिहार में संदेश ब्लॉक ने नक्सलाइट्स का ग्रैजुअली एलिमिनेशन देखा है इसमें सबसे क्रुशल फैक्टर था वहां पर रेगुलर पंचायत इलेक्शंस का होना जिसे बिहार गवर्नमेंट ने इंश्योर किया था इसने नक्सल्स और लोकल लीडरशिप के
बीच दूरी को बढ़ा दिया और सोशल प्रेशर के चलते कई नक्सलाइट्स ने आर्म्स त्याग कर फार्मिंग और बाकी की एक्टिविटीज को जॉइन कर लिया इसके अलावा बिहार के ही जहानाबाद में अद्वार प्रोजेक्ट भी एक अच्छा एग्जांपल है इस प्रोजेक्ट के तहत जब पांच नक्सलाइट इफेक्टेड पंचायतस ने सीरीज ऑफ डेवलपमेंट एक्टिविटीज को देखा जो गवर्नमेंट द्वारा वॉर फिटिंग पर करवाए गए तब वहां नक्सलिज्म का इंपैक्ट कम होने लगा इन एफर्ट्स में कंस्ट्रक्शन ऑफ सीमेंट लेंस लिंक रोड्स ट्रेंस बिल्डिंग्स फॉर स्कूल्स आंगनवाड़ी और इंडिविजुअल टॉयलेट जैसी एक्टिविटीज शामिल थी यह केस स्टडी नक्सलिज्म को ज ड़ से
उखाड़ने में डेवलपमेंटल इफेक्ट्स के क्रुशल रोल को दिखाती है दोस्तों इन एफर्ट्स के बावजूद हमारे देश से नक्सलिज्म अभी भी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है यह दिखाता है कि हमारे एफर्ट्स में अभी भी कई लूप होल्स या गैप्स हैं जिन पर काम करने की जरूरत है तो चलिए देखते हैं कि गवर्नमेंट एफर्ट्स में क्या कमी है और उन्हें कैसे सुधारा जा सकता है लिमिटेशंस ऑफ गवर्नमेंट एफर्ट्स एंड रिक्वायर्ड रिफॉर्म्स जब हम लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिस्म को काउंटर करने की स्ट्रेटेजी में प्रॉब्लम्स और उनके सॉल्यूशन की बात करते हैं तो इसे हम कई कैटेगरी के
लेवल पर एनालाइज कर सकते हैं सबसे पहला लेवल है एल डब्ल्यू काउंटर स्ट्रेटेजी एट पॉलिसी लेवल पॉलिसी लेवल पर चैलेंज में लैक ऑफ यूनिफाइड पॉलिटिकल विल लैक ऑफ हॉलिस्टिक अप्रोच टू डील विद एडब्ल्यू इंटरस्टेट एंड सेंटर स्टेट कोऑर्डिनेशन इन पॉलिसी मेकिंग एंड इंप्लीमेंटेशन एंड ओवरऑल स्ट्रक्चरल प्रॉब्लम्स रिलेटेड टू गुड गवर्नेंस जैसे मुद्दे सामने आते हैं आज इन प्रॉब्लम्स को सॉल्व करने के लिए लिए पॉलिसी मेकर्स के लिए यह जरूरी है कि वो लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिस्म जैसी प्रॉब्लम को हॉलिस्टिकली समझते हुए इसके लिए मल्टी प्रॉड एफर्ट्स और ऑल इनकंपासिंग पॉलिसीज को क्रिएट और उन्हें इंप्लीमेंट करें
हॉलिस्टिक एफर्ट से मतलब है कि एल डब्लू को ना केवल एक सिक्योरिटी इशू की तरह बल्कि डेवलपमेंटल प्रॉब्लम की तरह भी देखना यानी कि जब तक स्टेट का फोकस सिक्योरिटी और डेवलपमेंटल एफर्ट्स दोनों पर इक्वली नहीं होगा तब तक इस समस्या को जड़ से उखाड़ फेंकना मुश्किल होगा इसके लिए स्टेट के लिए यह आवश्यक है कि वो एफआर 2006 पैसा 1996 गुड गवर्नेंस इत्यादि को सीरियसली लेते हुए इन्हें प्रॉपर्ली इंप्लीमेंट करें इसके अलावा इंटरस्टेट और सेंटर स्टेट कोआर्डिनेशन को इंश्योर करने के लिए इंटरस्टेट काउंसिल्स और मल्टी डिसिप्लिन ग्रुप्स का सही तरीके से इस्तेमाल होना भी
आवश्यक है पैरो कियल पॉलिटिकल इंटरेस्ट को छोड़कर सारे स्टेकहोल्डर्स का साथ आना भी बेहद आवश्यक बन जाता है पॉलिटिकल लेवल पर एक यूनिफाइड एंड स्ट्रांग पॉलिटिकल विल अक्रॉस आइडियो जिकल स्पेक्ट्रम्स भी जरूरी है ताकि एक यूनिफाइड पॉलिसी अगेंस्ट एल डब्ल्यू को इंप्लीमेंट किया जा सके पॉलिसी के बियोंड अब हम सिक्योरिटी लेवल स्ट्रेटेजी के लिमिटेशंस और उनमें रिक्वायर्ड सुधार को देखते हैं सिक्योरिटी रिलेटेड एफर्ट्स में जो गैप्स फुलफिल करने की जरूरत है व है मॉडर्नाइजेशन ऑफ पुलिस फोर्सेस इंक्लूडिंग देयर वेपंस एंड स्ट्रेटेजी सेंसटाइजेशन ऑफ पुलिस फोर्सेस टुवर्ड्स लोकल्स यूनिफॉर्म डीरेडिकलाइजेशन एफर्ट्स इंक्लूजन ऑफ लोकल्स एंड बिल्डिंग
लोकल कैपेबिलिटीज ऑन द लाइंस ऑफ बस्तरिया बटालियन इंटीग्रेशन ऑफ टेक्नोलॉजी टू टैकल इमर्जिंग चैलेंज लाइक यूज़ ऑफ ड्रोन बाय नक्सल्स क्रिएशन ऑफ सेपरेट एनआईए वर्टिकल फॉर एडब्ल्यू क्रिएशन ऑफ डेडिकेटेड पीस बटालियंस टू इंश्योर सेफ्टी ऑफ डेवलपमेंटल प्रोजेक्ट्स किसी भी इंटरनल सिक्योरिटी थ्रेट इंक्लूडिंग नक्सलिज्म की बैकबोन यानी फंडिंग और उसके नेक्सेस और नेटवर्क को डिस्ट्रॉय करने के लिए डेडिकेटेड और कोऑर्डिनेटेड एफर्ट इत्यादि की जरूरत है डेवलपमेंटल एफर्ट्स में रिक्वायर्ड रिफॉर्म्स की बात की जाए तो हमें जिन एरियाज में काम करने की जरूरत है वो है स्पीडी रेजोल्यूशन ऑफ डेवलपमेंट इंड्यूस डिस्प्लेसमेंट एंड रिहैबिलिटेशन इश्यूज मिनरल एक्सप्लोरेशन
एरियाज में ट्राइब्स के लिए रॉयल्टी फिक्स करना लैंड रिकॉर्ड्स का अपडेशन और डिजिटाइजेशन ताकि लैंड एक्विजिशन के बाद स्पीडी और एश्योर्ड कंपनसेशन इंश्योर किया जा सके रिड्यूस्ड करप्शन इन एडमिनिस्ट्रेशन ताकि गुड गवर्नेंस इंश्योर की जा सके और करप्ट एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा लोकल्स का एक्सप्लोइटेशन कम हो सके एफआर 2006 और पैसा जैसे एक्ट्स का प्रॉपर इंप्लीमेंटेशन ताकि डेमोक्रेटिक डिसेंट्रलाइजेशन और ट्राइबल राइट्स को इफेक्टिवली इंप्लीमेंट किया जा सके फिफ्थ शेड्यूल एरियाज में ट्राइबल राइट्स के प्रति नो कॉम्प्रोमाइज पॉलिसी इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट इंश्योरिटी एजुकेशन इत्यादि जैसे एफर्ट्स की आवश्यकता है कुल मिलाकर नक्सलिज्म उसे क्रिएट करने वाले फैक्टर्स और उसे
जिंदा रखने वाले फैक्टर्स इन सबके खिलाफ स्टेट को एक कंसर्टेड और मल्टीप्रॉन्ड अप्रोच लेने की जरूरत है ताकि नक्सलिज्म के विशय साइकिल और नेवर एंडिंग चेन को तोड़ा जा सके और इस इंटरनल सिक्योरिटी थ्रेट को जड़ से खत्म किया जा [संगीत] सके दोस्तों अब हम चर्चा करेंगे अगले इंपॉर्टेंट टॉपिक नॉर्थ ईस्ट इंसर्जनल ईस्ट में चल रहे इंसर्जनल उसके इवोल्यूशन उसके कारणों पर चर्चा करते हुए गवर्नमेंट द्वारा उठाए गए कदमों की बात करेंगे जब हम नॉर्थ ईस्ट इंडिया की बात करते हैं तो यह भारत का वो हिस्सा है जिसमें इंडिया के आठ ईस्टर्न मोस्ट स्टेट्स आते
हैं यानी सिक्किम अरुणाचल प्रदेश असम मणिपुर मेघाल मिजोरम नागालैंड और त्रिपुरा इंडिया का यह रीजन मेन लैंड इंडिया से एक 21 किमी वाइड नैरो सिलगुरी कॉरिडॉर से जुड़ा हुआ है जिसे चिकन ने कॉरिडोर भी कहते हैं नॉर्थ ईस्ट रीजन चार फॉरेन कंट्रीज के साथ बॉर्डर शेयर करता है नॉर्थ में चाइना और भूटान है ईस्ट में म्यानमार है और साउथ और वेस्ट में बांग्लादेश है यह रीजन इंडिया का 7.6 पर लैंड एरिया कवर करता है विद 3.6 पर ऑफ इट्स पॉपुलेशन इस पूरे एरिया में 475 से भी ज्यादा डिस्टिंक्ट एथनिक ग्रुप्स रहते हैं जो 400 से
भी ज्यादा लैंग्वेजेस या डायलेक्ट्स बोलते हैं लेकिन इस रीजन में इनसरजेंसीज आखिर हुई कैसे चलिए देखते हैं इंसर्जनल को चूंकि नॉर्थ ईस्ट इंसर्जनल में मल्टीपल इंसर्जनल हैं और हर स्टेट की इंसर्जनल इतिहास है इसीलिए इस इतिहास को हम स्टेट वाइज कवर करने की कोशिश करेंगे हिस्ट्री ऑफ नॉर्थईस्ट इंसर्जनल बात करते हैं नागालैंड की जो इनसरजेंसीज वाले नॉर्थ ईस्टर्न स्टेट्स में सबसे पहला स्टेट भी माना जाता है दोस्तों आजादी के वक्त नागालैंड एक बड़े स्टेट यानी असम का हिस्सा हुआ करता था यह स्टेट नागा एथनिक ग्रुप्स द्वारा डोमिनेटेड है जो कोई एक सिंगल ट्राइब नहीं बल्कि
कई छोटे-छोटे ट्राइबल ग्रुप से मिलकर बना हुआ एक बड़ा ग्रुप है यह ट्राइब्स असम वर्मा बॉर्डर के पास लोकेटेड नागा हिल्स के ओरिजिनल इनहैबिटेंट्स माने जाते हैं 1946 में ही नागा नेशनल काउंसिल या फिर एनएनसी नामक एक ऑर्गेनाइजेशन का फॉर्मेशन नागाज द्वारा किया जा चुका था जिसके लीडर अंगामी जापू फिजो थे इस ग्रुप ने 14th ऑफ अगस्त 1947 यानी आजादी से एक दिन पहले नागालैंड को एक इंडिपेंडेंट देश डिक्लेयर कर दिया था इस इंडिपेंडेंस को इंश्योर करने के लिए ही 1950 में फिजो की लीडरशिप के अंडर एनएनसी ने इंडियन स्टेट के खिलाफ इंसर्जनल की एनएनसी
का गोल एक सोवन नागा स्टेट की स्थापना करना था जिसके लिए उसने 1951 में एक रेफरेंडम कंडक्ट किया जिसमें दावा किया गया कि 99 पर लोगों ने इंडिपेंडेंट नागा स्टेट को सपोर्ट किया है हालांकि इस बात में कितनी सच्चाई है और रेफरेंडम कितना फेयर तरीके से कंडक्ट किया गया उसको लेकर बाद विवाद चलते रहते हैं खैर 1952 में फिजो ने अंडरग्राउंड नागा फेडरल गवर्नमेंट या एनएफजी और नागा फेडरल आर्मी या एनएफएम मेशन किया और इसे काउंटर करने के लिए गवर्नमेंट ऑफ इंडिया ने आर्मी को भेजा इंसर्जनल करने के लिए 1958 में द आर्म्ड फोर्सेस स्पेशल
पावर्स एक्ट या एफएस पीए को एनेक्ट कर आर्मी को स्पेशल पावर्स दी गई खैर मॉडरेट फैक्न नागा पीपल्स कन्वेंशन के साथ एक 16 एग्रीमेंट के तहत जुलाई 1963 में नागालैंड को असम से अलग कर उसे एक सेपरेट स्टेट बना दिया गया इसके बाद अप्रैल 1964 में एक पीस मिशन के तहत एनएनसी के साथ पीस टॉक्स की शुरुआत हुई लेकिन ये पीस टॉक्स 1967 में सस्पेंड कर दिए गए लेकिन 1975 में एक बड़ा ब्रेकथ्रू हुआ जब शिलोंग अकॉर्ड के तहत एनएनसी और एनएफजी के एक सेक्शन ने आर्म्स गिव अप कर दिए लेकिन मविया की लीडरशिप के
अंडर 140 मेंबर्स के ग्रुप ने शिलोंग अकॉर्ड को रिजेक्ट कर दिया और 1980 में इस रिबल एनएनसी लीडर ने नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड या फिर एनएससीएन का फॉर्मेशन किया जो अब नागा इंसर्जनल करने वाला था पर 1988 में एनएससीएन में भी इंटरनल कॉन्फ्लेट के चलते दो फैक्शंस बन गए जिनमें से एक का नाम एनएससीएन इसाक मविया हुआ और दूसरे का एनएससीएन खापलांग या एनएससीएन के इयर्स ऑफ सिक्योरिटी और पॉलिटिकल एफर्ट्स के बाद एनएससीएन आईएम ने 1997 में सेंट्रल गवर्नमेंट के साथ एक सीज फायर एग्रीमेंट साइन कर लिया लेकिन एनएससीएन के आज भी एक्टिव है
और म्यानमार से ऑपरेट करता है करंट स्टेटस की बात करें तो एनएससीएन आईएम के साथ 2015 में लॉन्ग लास्टिंग पीस के लिए एक फ्रेमवर्क एग्रीमेंट साइन किया गया और 2017 में नागा नेशनल पॉलिटिकल ग्रुप्स के साथ भी एक सेटलमेंट वर्कआउट किया गया लेकिन यह पीस टॉक्स पीस एग्रीमेंट में कन्वर्ट नहीं हुए और 2019 से यह डिस्कशंस स्टेल मेट की तरफ बढ़ गए हैं दोस्तों अब चलते हैं मिजोरम की ओर नागालैंड जैसी ही सिचुएशन मिजोरम में भी डेवलप हुई स्टेट हुड के पहले मिजोरम भी असम राज्य का हिस्सा था लेकिन 1959 में हुए एक फैमन को
लेकर असम गवर्नमेंट द्वारा लिए गए एफर्ट से वहां कुछ नेता और जनता नाखुश थी इसके अलावा 1961 में जब असम ने असमीज को राज्य के ऑफिशियल लैंग्वेज का दर्जा दे दिया तो वहां मिजो नेशनल फ्रंट का फॉर्मेशन हुआ जिसकी लीडरशिप लालडेंगा के हाथों में थी एमएनएफ ने इलेक्शंस में तो पार्टिसिपेट किया ही लेकिन उसने अपना खुद का एक मिलिट्री विंग भी क्रिएट किया जिसे आर्म्स एम्युनिशन और मिलिट्री सपोर्ट ईस्ट पाकिस्तान और चाइना की तरफ से मिला मार्च 1996 में एमएनएफ ने इंडिया से खुद को इंडिपेंडेंट डिक्लेयर कर दिया और एक मिलिट्री अप स्प्रिंग की शुरुआत
हुई गवर्नमेंट ऑफ इंडिया ने इमीडिएट काउंटर इंसर्जनल लिए और कुछ ही वीक्स में इंसर्जनल कर दिया गया 1973 तक मिजोरम के कम एक्सट्रीमिस्ट नेताओं ने इंडिपेंडेंस की डिमांड पर जोर देना कम कर दिया था था और उसके रिस्पांस में इंडियन यूनियन ने मिजोरम को आसाम से अलग करके एक यूनियन टेरिटरी का दर्जा दे दिया 1970 में मिजो इंसर्जनल अपने पांव पसारे लेकिन आर्म्ड फोर्सेस ने इसे फिर से कंट्रोल कर लिया फाइनली 1986 में एक सेटलमेंट के तहत एमएनएफ ने सरेंडर करने का फैसला लिया और उसके 1 साल बाद मिजोरम को स्टेटहुड दे दिया गया लेकिन
मिजो रिकॉर्ड से मिजोरम के हमार रीजन के कुछ लीडर्स नाखुश थे जो मिजो कोर्ट के तहत एडमिनिस्ट्रेटिव ऑटोनॉमी की उम्मीद कर रहे थे इसलिए हमार ट्राइबल नेताओं ने हमार पीपल्स कन्वेंशन या एचपीसी का गठन किया और ऑटोनॉमी के लिए उन्होंने इंसर्जनल जारी रखा लेकिन 1994 में मिजोरम गवर्नमेंट ने सिलंग हिल्स डेवलपमेंट काउंसिल की स्थापना कर हमार इं सर्जेंट्स को पेसिफाई कर दिया और एचपीसी ने भी मेन स्ट्रीम पॉलिटिक्स को जवाइन कर लिया लेकिन मिजोरम पुलिस और पॉलिटिशियन का कहना है कि हमार ग्रुप के लोगों ने अपने बेस्ट वेपन पेंस कभी सरेंडर ही नहीं किए और
एचपीसी के एक ऑफशूट ग्रुप द हमार पीपल्स कन्वेंशन डेमोक्रेट्स या एचपीसीडी ने पुरानी डिमांड्स को फिर से पुश करना शुरू कर दिया है एचपीसीडी के डिमांड्स एक सेपरेट ट्राइबल ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट या फिर हमार राम नाम के एक सेपरेट स्टेट की स्थापना है परंतु यह आउटफिट लार्जली मणिपुर से ऑपरेट करता है और इसकी मिजोरम में प्रेजेंस बेहद कम है अब चलते हैं त्रिपुरा की ओर दोस्तों त्रिपुरा की इनसरजेंसीज ईस्ट पाकिस्तान से हुए माइग्रेशन में है जिसकी शुरुआत पार्टीशन से हुई माइग्रेशन ने तिप्रा में डेमोग्राफिक इंवर्जन को लेकर डिस्कंटेंट फ्यूल किया कुछ रिपोर्ट्स बताती हैं कि इस
माइग्रेशन ने ट्राइब्स टू नॉन ट्राइबल पॉपुलेशन के 7030 रेशो को 3070 बना दिया है कहते हैं कि इसी कारण वर्ष त्रिपुरा की इंसर्जनल हुआ खैर त्रिपुरा की इंसर्जनल बा समिति या फिर टीयू जेएस और 1981 में त्रिपुरा नेशनल वॉलंटस या टीएन व के फॉर्मेशन से ट्रेस करते हैं इसके अलावा नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ त्रिपुरा या एनएलएफटी का फॉर्मेशन 1989 में हुआ जिसके आर्म्ड विंग्स नेशनल होली आर्मी और ऑल त्रिपुरा टाइगर फोर्स ने इंसर्जनल किया इन आउटफिट्स के मेन एजेंडा में त्रिपुरा को सेपरेट नेशन बनाना इल्लीगल इमीग्रेंट को डिपोर्ट करना और त्रिपुरा लैंड रिफॉर्म एक्ट 1960
के तहत ट्राइब्स की लैंड्स को रिस्टोर करने जैसे मुद्दे शामिल हैं 1990 से 19 95 के बीच त्रिपुरा में इंसर्जनल स्केल में चलती रही लेकिन 1996 से 2004 के बीच इसका रैपिड राइज हुआ और उसके बाद फिर से कमजोर हो गया त्रिपुरा इनसरजेंसीज करने में त्रिपुरा स्टेट के मेजर्स का इंपॉर्टेंट रोल रहा और इसीलिए इसे त्रिपुरा मॉडल टू कंट्रोल इंसर्जनल एक मल्टी डायमेंशन अप्रोच थी जिसमें काउंटर इंसर्जनल जिकल ऑपरेशंस एंड कॉन्फिडेंस बिल्डिंग मेजर्स एक्सीलरेटेड डेवलप मेंट थ्रस्ट मैनेजमेंट ऑफ द मीडिया सिविक एक्शन प्रोग्राम्स ऑफ द सिक्योरिटी फोर्सेस पॉलिटिकल प्रोसेसेस जैसे एफर्ट शामिल थे अब बात
मेघालय की दोस्तों मेघालय स्टेट भी असम का हिस्सा हुआ करता था इसका असम से सेपरेशन वहां के मेजर ट्राइब्स के यूनिक नीड्स और डिमांड्स को सॉल्व करने के लिए हुआ था यह मेजर ट्राइब्स हैं गारो जैंतिया और खासी लेकिन यहां सुरक्षा बलों की कथित मनमानी इंटर ट्राइबल कॉन्फ्लेट्स यूथ अनइंप्लॉयमेंट नॉन ट्राइबल बिजनेसेस के साथ कंपीट करने में असमर्थता और बांग्लादेश से अवैध माइग्रेशन के कारण आदिवासियों में असंतोष बढ़ गया इससे राज्य में कई विरोधी समूहों का उदय हुआ राज्य में सक्रिय कुछ विरोधी समूह में सबसे इंपॉर्टेंट है गारो नेशनल लिबरेशन आर्मी या जीएनएलए और हनीफ
ट्रिप नेशनल लिबरेशन काउंसिल या एचएनएलसी जीएनएलए राज्य में बड़े पैमाने पर एक घरेलू विरोधी बल है यह जबरन वसूली और तस्करी की गतिविधियों से चलता है इसका गठन 2009 में में मेघालय के पश्चिमी क्षेत्रों में एक सवर्ण गैरोलैंड की स्थापना के लिए हुआ था इसके यूएलएन बीएफ जैसे उग्रवादी संगठनों से भी संबंध है वहीं दूसरी ओर एचएनएलसी मेघालय में सक्रिय एक उग्रवादी संगठन है यह खासी और जयंतिया ट्राइब्स का प्रतिनिधि होने का दावा करता है और इसका उद्देश्य मेघालय को गारो और गैर आदिवासी बाहरी लोगों के कथित वर्चस्व से मुक्त कराना है वैसे मेघालय में
इनसरजेंसीज बेहतर है लेकिन यह खत्म बिल्कुल नहीं हुई है और इसीलिए मेघालय हाई कोर्ट ने कई बार इस मुद्दे को लेकर गवर्नमेंट को सतर्क रहने की बात कही है खैर नॉर्थ ईस्ट इंसर्जनल में अब बात अरुणाचल प्रदेश की दोस्तों अरुणाचल प्रदेश नॉर्थ ईस्ट इंडिया में लगभग 83000 स् किमी के एरिया में फैला हुआ है अरुणाचल प्रदेश में सेपरेटिस्ट इंसर्जनल अरुणाचल ड्रैगन फोर्स या एडीएफ से जुड़ा हुआ है जिसे 2001 में ईस्ट इंडिया लिबरेशन फ्रंट या ईएलएम दिया गया सिक्योरिटी फोर्सेस द्वारा न्यूट्रलाइज किए जाने से पहले यह संगठन अरुणाचल प्रदेश के लोहित डिस्ट्रिक्ट में एक्टिव था
हम आपको बता दें कि सेपरेटिस्ट इंसर्जनल की इंटरनल सिक्योरिटी प्रॉब्लम का केवल एक एस्पेक्ट है इसके अलावा यहां कई और तरह के वायलेंट कॉन्फ्लेट चलते रहे हैं म्यानमार के साथ इसकी ज्योग्राफिकल प्रॉक्सिमिटी या क्लोज निस और नागालैंड के ट्राइब्स के साथ यहां के कुछ डिस्ट्रिक्ट्स के लोगों की एथनिक सिमिलरिटीज यहां की इंसर्जनल जुड़े हुए हैं यही कारण है कि असम बेस्ड और नागालैंड बेस्ड इंसर्जनल प्रदेश का इस्तेमाल अपनी एक्टिविटीज के लिए किया है परंपरागत रूप से नागालैंड की तिराप और चांगलांग के डिस्ट्रिक्ट के साथ निकटता के चलते इन्हें नागालैंड के इंसर्जनल ने इस्तेमाल किया है
एनएससीएन के और एनएससीएन आईएम दोनों ने इस रीजन में अपना वर्चस्व बढ़ाने का काम किया है इसके अलावा असम बेस्ड इंसर्जनल टेरर ग्रुप्स जैसे यूएलएन इटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम ने अरुणाचल प्रदेश को ट्रांजिट रूट की तरह इस्तेमाल किया है वैसे तो यूएएच 1980 से ही इंपॉर्टेंट रहा है लेकिन 2003 में भूटान द्वारा जब यूएलएन दिया गया तब से यूएएच और भी ज्यादा क्रुशल बन गया है ऐसा इसलिए है क्योंकि यूएलएम में अपने ऑपरेशंस के लिए म्यानमार बेस्ड अपने 28 बटालियन पर हाईली डिपेंडेंट है और वो अरुणाचल का इस्तेमाल म्यानमार और असम के बीच मूवमेंट
के लिए करता है असम अरुणाचल और म्यानमार रूट में ऑपरेट करने वाले यूएएसपी अप किए हैं जो लार्जली लोहित डिस्ट्रिक्ट में माना भूम रिजर्व फॉरेस्ट में फैले हुए हैं अरुणाचल में इंसर्जनल इंपैक्ट रहा इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स बताती हैं कि तिराप का हर गवर्नमेंट एंप्लॉई और बिजनेसमैन अपनी इनकम का 25 पर हिस्सा रिपब्लिक ऑफ नागालिम के लिए कंट्रीब्यूट करने के लिए फोर्स किया जाता है राप और चांगलांग में तो स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की ब्रांचेस को भी शट डाउन कर दिया गया था जब एनएससीएन के ने वहां एक् नोट्स भेजे थे 2001 में ऑयल इंडिया के चांगलांग
प्लांट को अपने ऑपरेशंस रोकने पड़े थे जब एनएससीएन आईएम ने लगभग 60 लाख एक्सटॉर्शन के रूप में डिमांड किए यह सब दिखाता है कि किस तरह से इंसर्जनल की डेवलपमेंट और ग्रोथ को हैंपर करती रही दोस्तों अब बात असम की दोस्तों असम में बांग्लादेश से आए इल्लीगल माइग्रेंट्स के खिलाफ शुरू हुए आंदोलन के दौर में 1979 में वहां के सबसे बड़े उग्रवादी संगठन यूएलएम हुआ 19 79 से 1985 के बीच चले असम एजुकेशन का सबसे इमीडिएट कारण 1978 में हुए इलेक्शंस में कथित मैल प्रैक्टिसेस भी बनी ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन या एएएस यू ने एक
एजिटेटेड किया और ये डिमांड किया कि 1951 नेशनल रजिस्टर फॉर सिटीजंस या एनआरसी को बनाया जाए ताकि असम में रहने वाले ओरिजिनल लोगों और इलीगल माइग्रेंट्स के बीच डिफरेंशिएबल ग्रुप य यू एलएफएन मकसद असम को वायलेंट स्ट्रगल के थ्रू एक इंडिपेंडेंट देश बनाना है यह ग्रुप असम मूवमेंट के दौर में लगभग शांत रहा लेकिन इसने असम मूवमेंट के प्रति अपना सपोर्ट दिखाया इसके अलावा कुछ और ग्रुप्स ने वहां बोडो लिबरेशन टाइगर्स नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड या एनडीएफबी यूनाइटेड पीपल्स डेमोक्रेटिक सॉलिड टी यूपीडीएफ हालिम दागा या डीएचडी मुस्लिम यूनाइटेड लिबरेशन टाइगर्स ऑफ असम या एम
यू एलटीए और मुस्लिम यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम या एमएल यू एफ ए जैसे संगठन भी बनाए हैं इनमें से कई ग्रुप्स असम के इंटरग्रुप कॉन्फ्लेट के चलते बने हैं उदाहरण के तौर पर हम बडो आउटफिट्स की बात कर सकते हैं जो असम मूवमेंट का हिस्सा तो थे लेकिन वो बाद में असमीज ग्रुप्स पर डोमिनेशन का इल्जाम लगाने लगे और उन्होंने खुद को असमीज ग्रुप से अलग कर लिया आज असम में कल्चरल इंपोजिशन और इकोनॉमिक और पॉलिटिकल कंपटीशन के चलते कई इंसर्जनल हैं जिसके चलते वहां एथ ने ग्रुप्स के बीच कई तरह के वायलेंट कॉन्फ्लेट्स
देखे जा सकते हैं इसके अलावा यूएलएन आउटफिट्स द्वारा सेटअप किए गए वायलेंस ने वहां कई कॉपी केट इंसर्जनल दिया है और इसीलिए असम की इंसर्जनल कॉम्प्लेक्शन के अलावा असमीज एक्सट्रीमिस्ट नेताओं ने लोगों में इंडियन स्टेट के खिलाफ यह भावनाएं भी फीड करने की कोशिश की है कि इंडियन गवर्नमेंट असम के ऑयल रिसोर्स और टी प्लांटेशन को एक्सप्लोइट कर रही है और बदले में उन्हें कुछ भी नहीं मिल रहा मणिपुर की बात करें तो किंगडम ऑफ मणिपुर का इंडिया में मर्जर 15th ऑफ अक्टूबर 1949 को हुआ था 1972 में यह एक राज्य बना दिया गया दोस्तों
मणिपुर में इंसर्जनल इटेड नेशन लिबरेशन फ्रंट या यूएनएलएफ के क्रिएशन से ट्रेस की जाती है यूएनएलएफ का एजिस्ट मेंस उसके दावे पर बेस था जिसके तहत वह क्लेम करता था कि मणिपुर को इंडिया में फोर्सफुली मर्ज किया गया है तब से लेकर वहां कई और इंसर्जनल का जन्म हुआ जिनमें 1977 में बना पीपल्स रिवोल्यूशन पार्टी ऑफ कांगली पार्क या प्री पार्क और 1980 में बने कांगली पार्क कम्युनिस्ट पार्टी या केसीपी जैसे ऑर्गेनाइजेशंस शामिल हैं ये सारे इंसर्जनल मणिपुर के सेपरेशन की डिमांड करते रहे हैं इसके अलावा मणिपुर नागालैंड में चल रही इंसर्जनल का एक सिग्निफिकेंट
हिस्सा एनएससीएन आईएम क्लेम करता रहा और उसे नागालिम का हिस्सा बताता है इसके अलावा म के कुग ट्राइब्स ने अर्ली 1990 में खुद की इंसर्जनल किया जो एनएससीएन आईएम के खिलाफ था यह नागाज और कुकीज के बीच अर्ली 1990 में हुए क्लैशेस का नतीजा था कई और ट्राइब्स जैसे पाइथ वाइफ और मार्स ने भी खुद के आर्म ग्रुप्स फॉर्म किए हैं इसी तरह मणिपुर में पीपल्स यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट या पीयू एलएफ जैसे इस्लामिस्ट इंसर्जनल नाम के मणिपुरी मुस्लिम ग्रुप्स के इंटरेस्ट को प्रोटेक्ट करने का दावा कर करता है आज नॉर्थ ईस्ट में मणिपुर इंसर्जनल वन
ऑफ द वर्स्ट स्टेट है जहां लगभग 12 इंसर्जनल फिट्स एजिस्ट करते हैं स्टेट होम मिनिस्ट्री की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2005 में यहां वेरियस इंसर्जनल के 12650 कार्डर्स 8830 वेपंस के साथ एक्टिव थे यूएनएलएफ पीएलए केवाई केएल प्री पार्क और केसीपी मणिपुर में सिक्योरिटी फोर्सेस पर हुए कुछ सीरियस अटैक्स में भी इवॉल्वड रहे हैं इसके अलावा और ऑर्गेनाइजेशनल भी मणिपुर के ग्रुप्स बाकी के नॉर्थईस्ट इंसर्जनल ज्यादा पावरफुल है जिसकी वजह से यहां के ग्रुप्स में सरेंडर और स्प्लिंटरिंग नहीं देखी गई है एफिशिएंट इंटेलिजेंस नेटवर्क और सुपीरियर वेपंस के साथ मणिपुर इंसर्जनल लिबरे जनस भी क्रिएट
किए हैं जहां वो अपनी ही सरकार चलाते हैं 1980 में मणिपुर एक डिस्टर्ब एरिया डिक्लेयर कर दिया गया था और वहां आर्म्ड फोर्सेस स्पेशल पावर एक्ट या एफएस पीए का इंपोजिशन भी हुआ था था इस एक्ट के इंपोजिशन के बाद से वहां कई प्रकार की सिविलियन अपराइज भी देखी गई जैसे कि इनफेमस मदर्स न्यूट प्रोटेस्ट और इरोम शर्मीला का प्रोटेस्ट फैक्टर्स रिस्पांसिबल फॉर इनसरजेंसीज ईस्ट दोस्तों नॉर्थ ईस्ट इंसर्जनल देने वाले फैक्टर्स में सबसे पहला फैक्टर है वहां के लोगों में आइसोलेशन डेप्रिसिएशन रो सिलीगुड़ी कॉरिडॉर के थ्रू कनेक्टिविटी के चलते ज्योग्राफिकल आइसोलेशन तो ऐसी भावनाओं को
जन्म देता ही है पर साथ में नॉर्थ ईस्ट स्टेट का पार्लियामेंट में रिप्रेजेंटेशन का बेहद कम होना भी वहां के लोगों की समस्याओं को बढ़ावा देता है हम आपको बता दें कि लोकसभा में 545 सीट्स में से केवल 25 सीट्स नॉर्थ ईस्टर्न स्टेट्स के पास हैं एक पार्लियामेंट्री डेमोक्रेसी में नंबर्स का रोल बेहद महत्त्वपूर्ण होता है और पार्लियामेंट में नंबर्स का कम होना नॉर्थ ईस्टन स्टेट्स की समस्याओं को कहीं ना कहीं दबा देता है जिसके चलते वहां के एस्पिरेशनल लीडर्स और जनता में डिस्क्रिमिनेशन का एक भाव उत्पन्न होता है इस तरह के माहौल में रेडिकल
और एक्सट्रीमिस्ट एलिमेंट्स का प्रभाव बढ़ने लगता है और इंसर्जनल होता है आइसोलेशन के चलते लैक ऑफ इकोनॉमिक डेवलपमेंट भी इंसर्जनल ईस्ट रीजन में लैक ऑफ इकोनॉमिक अपॉर्चुनिटी और अनइंप्लॉयमेंट के चलते वहां का युद्ध इंसर्जनल के प्रोपेगेंडा का शिकार हो जाता है और इंसर्जनल करने लगता है इंसर्जनल पैसे भी उनके लिए कई बार ओनली सोर्स ऑफ मनी बन जाते हैं जिसके चलते वो इंसर्जनल जुड़ते हैं इसके अलावा नॉर्थ ईस्ट रीजन कल्चरल काफी डावर्स और यूनिक है लेकिन यहां पिछले 70 साल में कई तरह के डेमोग्राफिक चेंजेज देखे गए हैं जिसने इंसर्जनल भी दिया है और उसे
फ्यूल भी किया है पार्टीशन के बाद से लगातार ईस्ट पाकिस्तान से असम और बाकी के इलाकों में इल्लीगल लील इमीग्रेशन लोकल्स द्वारा कंपटीशन और थ्रेट की तरह देखा जाने लगा लिमिटेड रिसोर्सेस के साथ रिफ्यूजीस और इल्लीगल इमीग्रेंट को मैनेज कर पाना भी मुश्किल हो रहा था ऊपर से लोकल्स में यह फियर भी था कि इमीग्रेंट उनके कल्चरल फैब्रिक को डिस्ट्रॉय कर सकते हैं इन सभी वजहों से एक्सट्रीमिस्ट पॉलिटिक्स नॉर्थ ईस्ट में हावी हुई जिसने इंसर्जनल दिया और आग को भड़काया नॉर्थईस्ट रीजन इंटरनली भी काफी डावर्स है जहां एक स्टेट में ही कई बड़े और कई
छोटे डिस्टिंक्ट ट्राइबल ग्रुप्स साथ में देखे जा सकते हैं इस रीजन में देश के 200 से ज्यादा अधिक ट्राइबल ग्रुप्स रहते हैं इस मल्टी एथनिक नेचर ने नॉर्थ ईस्ट में इंटर एथनिक कॉन्फ्लेट को जन्म दिया जिसके चलते नॉर्थ ईस्ट इंसर्जनल बेहद कॉम्प्लेक्शन जेंसी का एक उदाहरण हमें मणिपुर में चल रहे कुकी नागा कॉन्फ्लेट में भी देख सकते हैं अगला फैक्टर है इस रीजन की यूनिक ज्योग्राफी दोस्तों नॉर्थ ईस्टर्न इंडिया रग टोपोग्राफी माउंटेनियर और फॉरेस्टेड इलाकों से भरा हुआ है इसके चलते यहां के इंसर्जनल टेक्निक यूज करने में आसानी होती है इसके माध्यम से वह सिक्योरिटी
एजेंसीज के माइट के सामने भी काफी समय तक सरवाइव कर पाते हैं इसके अलावा यह इंसर्जनल अस बॉर्डर्स का भी बड़ा फायदा उठाते हैं जिसकी मदद से वो इजली इंटरनेशनल बॉर्डर क्रॉस कर म्यानमार चाइना भूटान और बांग्लादेश के बॉर्डर एरियाज में एंटर कर खुद को इंडियन सिक्योरिटी फोर्सेस से सेव करने की कोशिश करते हैं म्यानमार के अक्रॉस चल रही फ्री मूवमेंट रेजीम का गलत इस्तेमाल भी कई बार इंसर्जनल में बात करेंगे इंसर्जनल और फंडिंग की आवश्यकता भी होती है यह सब यहां के इं सर्जेंट्स को बॉर्डर पर एक्टिव ड्रग ट्रैफिकर्स आर्म्स ट्रैफिकर्स इत्यादि से मिल
जाता है दुनिया के वन ऑफ द बिगेस्ट ओपियम प्रोड्यूस ंग जन यानी गोल्डन ट्रायंगल से प्रॉक्सिमिटी के चलते भी यहां के इंसर्जनल द मोस्ट इंपॉर्टेंट सोर्स ऑफ इनकम ड्रग ट्रैफिकिंग है इसके अलावा नेबरहुड में हॉस्टाइल्स जैसे चाइना की प्रेजेंस ने भी यहां के इंसर्जनल क्टल या इनडायरेक्टली सपोर्ट किया है 1950 और 1960 में ईस्ट पाकिस्तान द्वारा भी यहां के इंसर्जनल सपोर्ट दिया गया था यह सपोर्ट आर्म्स ट्रांसफर और ट्रेनिंग के माध्यम से नागा आर्मी को दिया गया चाइना द्वारा किया गया सपोर्ट 1967 से 1975 के बीच अपने चरम पर था जब चाइनीज फॉरेन पॉलिसी ने
पूरी दुनिया में कम्युनिस्ट क्रांति को फैलाने की बात कही थी इसके अलावा मणिपुर के इं सर्जेंट ग्रुप्स के म्यानमार बेस्ड आर्म ग्रुप्स जैसे अराकन आर्मी और यूनाइटेड वास स्टेट आर्मी के साथ अन होली नेक्स और लिंकेजेस हैं जो उन्हें चाइनीज वेपन प्रोक्योर करने में मदद करते हैं इसके अलावा इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स बताती हैं कि ईस्ट पाकिस्तान जब बांग्लादेश बना तब से पाकिस्तान ने नॉर्थ ईस्ट इंसर्जनल करने के लिए नेपाल का इस्तेमाल भी किया है जिसके रास्ते व आईएसआई एजेंट्स को नॉर्थ ईस्ट इंडिया में स्मगल करता रहा है हालांकि नेपाल ने इसे कम करने के लिए इंडिया
के साथ एक्टिवली कोलैबोरेट किया है बांग्लादेश वैसे तो एक फ्रेंडली स्टेट है लेकिन वहां पनप रहे एक्सट्रीमिस्ट ग्रुप्स और उनके आईएसआई के साथ लिंकेजेस भी कई दफा नॉर्थ ईस्ट इंसर्जनल किए जाते हैं इसके अलावा यहां के पोरस बॉर्डर्स और वहां से जन्म लेने वाले इलीगल इमीग्रेशन भी इंसर्जनल है हालांकि 2015 में साइन हुआ इंडिया बांग्लादेश लैंड बाउंड्री अकॉर्ड एक पॉजिटिव स्टेप था जिसके बाद से इल्लीगल इमीग्रेशन में कमी आने की संभावना है दोस्तों पर्सीवड एक्सेसेस बाय इंडियन आर्मी अंडर आर्म्ड फोर्स स्पेशल पावर एक्ट या एफएस पीए भी यहां पर एक बड़ा मुद्दा है जो इंसर्जनल
लोगों में सिंपैथी पैदा करता है एफएस पीए का एक्जिस्टेंस काउंटर इंसर्जनल आवश्यक है ही लेकिन इसके एलेज मिसयूज के चलते कई बार ह्यूमन राइट एक्टिविस्ट ने इस लॉ को ऑपरेसिव और ड्रैकोनियन बताया है और इसका फायदा यहां के इंसर्जनल को रेडिकलाइज करने के लिए भी उठाते रहे हैं दोस्तों अब हम आगे बढ़ते हुए नॉर्थ ईस्ट इंसर्जनल कुछ उन मेजर इश्यूज के बारे में चर्चा करते हैं जो एग्जाम पॉइंट ऑफ व्यू से काफी इंपॉर्टेंट है मेजर इश्यूज ऑफ डिबेट सबसे पहला मेजर मुद्दा है आर्म्ड फोर्सेस स्पेशल फोर्सेस पावर एक्ट यानी एफएस पीए एफएस पीए को लेकर
वाद विवाद नॉर्थ ईस्ट इंसर्जनल में काफी इंपॉर्टेंट है कई ह्यूमन राइट ग्रुप्स और लोकल प्रोटेस्ट में भी एफएस पीए का मुद्दा उठता रहा है तो ऐसा क्या है एफएस पीए में जो इसे कंट्रोवर्सीज के साथ जोड़ देता है चलिए देखते हैं दोस्तों कुछ लोगों का मानना है कि ए एफएस पीए के तहत दी गई पावर्स काफी ज्यादा एक्सेसिव हैं जो एक डेमोक्रेटिक कंट्री के सिद्धांतों के साथ फिट नहीं बैठती इसलिए इसने कहीं ना कहीं नॉर्थ ईस्ट के कई स्टेट्स के लोगों में एक नेगेटिव फीलिंग को जन्म दिया है और वहां के इंसर्जनल सपोर्ट को कमजोर
करने की बजाय और मजबूत बनाया है कुछ ह्यूमन राइट एक्टिविस्ट दावा भी करते हैं कि एफएस पीए के तहत आर्म्ड फोर्सेस को दी दी गई इम्यूनिटीज का मिसयूज फेक एनकाउंटर्स के लिए होता है जिसके खिलाफ कोई भी ग्रीवेंस रिड्रेसल मैकेनिज्म इफेक्टिव नहीं हो पाता और यह लोगों में इंजस्टिस की भावना को बढ़ावा देता है 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने फाइल एक रिड पिटीशन में एक्स्ट्रा जुडिशियस किलिंग्स के विक्टिम्स के फैमिली मेंबर्स ने यह आरोप लगाया था कि मे 1979 से म 2012 के बीच 1500 से भी ज्यादा फेक एनकाउंटर्स नागालैंड में हुए थे इसका कॉग्निजेंस
लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने में से छह केसेस की स्क्रूटनी के लिए कमीशन सेटअप करी थी कमीशन की एक रिपोर्ट ने पाया कि ये छह के छह केसेस फेक एनकाउंटर्स के केसेस थे इसके अलावा एफएसपीएल करर एक बड़ा इशू स्टेट गवर्नमेंट और सेंट्रल गवर्नमेंट के बीच इन फाइटिंग भी है जहां यह दावा किया जाता है कि एफएसपीएल करते वक्त स्टेट गवर्नमेंट की सलाह को नजरअंदाज किया जाता है 1972 में त्रिपुरा का केस यहां इंपॉर्टेंट है इसको लेकर काफी कंट्रोवर्सीज रिपोर्ट हुई थी इन सभी वजहों के चलते 2000 में मणिपुर से एफएस पीए को हटाने के
लिए सोशल एक्टिविस्ट इरोम शर्मिला ने 16 इयर्स तक हंगर स्ट्राइक करी इसके अलावा जस्टिस जीवन रेडी कमेटी 2004 में एफएस पीए को रिपील करने का रिकमेंडेशन भी दिया था और इससे एक अनडिजायरेबल लॉ और सिंबल ऑफ ऑपरेशन बताया था हालांकि सेकंड एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म्स कमीशन ने इस लॉ की नेसेसिटी को हाईलाइट करते हुए इसे एंडोर्स और सपोर्ट किया था अगला मेजर इशू है इनर लाइन परमिट दोस्तों तो इनर लाइन परमिट एक ऐसा डॉक्यूमेंट है जो एक इंडियन सिटीजन को उस स्टेट में स्टे करने की परमिशन देता है जो सिस्टम के अंदर प्रोटेक्टेड है आज की तारीख
में यह सिस्टम देश के चार स्टेट्स में लागू है अरुणाचल प्रदेश नागालैंड मिजोरम और मणिपुर इन स्टेट्स में कोई भी इंडियन सिटीजन जो इन स्टेट से बिलोंग नहीं करता वो बिना आईएल पी परमिट के एंटर नहीं कर सकता और यहां केवल उस टाइम पीरियड के लिए रुक सकता है जो आईएल पी में मेंशन है आईएल पी का यह सिस्टम एक्चुअली में कॉलोनियल एरा के एक लॉ द बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन एक्ट 18735 गर्ड करता है अगला मेजर इशू है फ्री मूवमेंट रेजीम का दोस्तों फ्री मूवमेंट रेजीम एक यूनिक ट्रैवल अरेंजमेंट है जो इंडिया और म्यानमार
के बीच एजिस्ट करता है एफएमआर यहां के लोकल ट्राइब्स को बिना किसी वीजा के बॉर्डर के उस पार 16 किमी तक ट्रेवल करने के लिए परमिट करता है एफएमआर का लॉजिक ये है कि इंडिया म्यानमार बॉर्डर पर कई ऐसी ट्राइब्स रहती हैं जिनके बॉर्डर के अक्रॉस एज ओल्ड कनेक्शंस हैं जिन्हें प्रिजर्व करना बेहद जरूरी है लेकिन कई एक्सपर्ट्स का यह मानना है कि यह फ्री मूवमेंट रेजीम मिलिटेंट्स इंसर्जनल कर्स द्वारा मिसयूज की जाती है दावा है कि एफएमआर का इस्तेमाल कर स्मगलिंग से लेकर क्राइम कमिट कर सेफ हेवनस में छिपने जैसे काम होते हैं जिसके
चलते यहां के इं सर्जेंस सरवाइव करती है इसके अलावा ब्रू रिफ्यूजी क्राइसिस का मुद्दा भी बेहद जरूरी है रिसेंटली सेंटर मिजोरम गवर्नमेंट त्रिपुरा गवर्नमेंट और ब्रू कम्युनिटी के लीडर्स के बीच एक फोर पार्टी एग्रीमेंट के तहत इस 23 साल पुरानी रिफ्यूजी क्राइसिस को खत्म करने का डिसीजन हुआ है ब्रू कम्युनिटी को रियांग भी बोलते हैं जो मिजोरम त्रिपुरा और असम के कुछ हिस्सों में रहते हैं ये मिजोरम के मिजो से एथनिक अलग हैं आज के टाइम में मिजोरम के चार डिस्ट्रिक्ट में लगभग 40000 ब्रू और त्रिपुरा के रिफ्यूजी कैंप्स में लगभग 30000 ब्रू रहते हैं
जो वहां 1997 के एथनिक क्लैशेस के बाद आए थे ब्रू और मिज़ोस के बीच सबसे पहला कॉन्फ्लेट 1995 में हुआ था जब मिजो ऑर्गेनाइजेशंस द यंग मिजो एसोसिएशन और मिजो स्टूडेंट एसोसिएशन ने ब्रूस को मिजोरम से बाहर निकालने की डिमांड की थी क्योंकि उनके हिसाब से व इंडिजन असली मिजोरम से बिलोंग नहीं करते हैं ब्रू ट्राइबल ग्रुप्स ने इसके रिटल में आर्म्ड ऑर्गेनाइजेशन ब्रू नेशनल लिबरेशन फ्रंट और पॉलिटिकल बॉडी ब्रू नेशनल यूनियन को क्रिएट किया इन्होंने डिमांड किया कि उन्हें मिजोरम के अंदर सिक्स्थ शेड्यूल के तहत और ज्यादा ऑटोनॉमी मिले और एक ब्रू ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट
काउंसिल एडीसी का क्रिएशन हो इस कॉन्टेक्स्ट में 1997 में मिजोरम में एक सीरियस एथनिक क्लैश देखा गया जिसके बाद लगभग 30000 ब्रू मिजोरम से त्रिपुरा चले गए 2020 में साइन हुए फोर पार्टी एग्रीमेंट के तहत ये डिसीजन लिया गया कि ब्रू ट्राइब के वो लोग जो त्रिपुरा में रह रहे हैं वह मिजोरम और त्रिपुरा दोनों में से एक स्टेट में रहने की डिसीजन ले सकते हैं लेकिन जो लोग 2018 के एग्रीमेंट के तहत मिजोरम चले गए हैं वह मिजोरम में ही रहेंगे ब्रूस के रिसेटलॉग्स के प्रति नॉर्थ ईस्टर्न स्टेट्स में सेंटीमेंट्स काफी स्ट्रांग रहे हैं
जिनका रिश्ता वहां के इंसर्जनल है जिसकी चर्चा हमने इस वीडियो की शुरुआत में की पर सवाल यह उठता है कि आखिर क्या है यह नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस यानी एनआरसी दोस्तों नेशनल रजिस्टर्स ऑफ सिटीजन 1951 एक रजिस्टर है जो सेंसस 1951 के साथ प्रिपेयर किया गया था इसमें हर गांव में रहने वाले लोगों का रिकॉर्ड है यह एनआरसी 1951 के बाद केवल एक बार बनाया गया था और इसे केवल असम में अपडेट किया गया और अब इसे देश भर में अपडेट करने की चर्चा भी न्यूज़ में होती रहती है एनआरसी को अपडेट करने के मुद्दे
को असम में 1971 में इंपॉर्टेंस मिली जब वहां बांग्लादेश लिबरेशन वॉर के दौर में लार्ज स्केल माइग्रेशन देखा गया इसके चलते असम में 1979 से लेकर 1985 के बीच एक 6 साल लंबा एजीटेशन देखा गया ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन या एएएस यू ने यह मूवमेंट लीड किया था जिसने एनआरसी को अपडेट कर असम से उन इल्लीगल इमीग्रेंट को डिपोर्ट करने की मांग की जो वहां 195 के बाद इलीगली आए थे यह मूवमेंट 1985 में असम अकॉर्ड के साइन होने के बाद खत्म हुआ इस अकॉर्ड के तहत मार्च 255th 1971 को एक कट ऑफ डेट डिक्लेयर
की गई जिसके बाद आए इल्लीगल इमीग्रेंट को डिपोर्ट किया जाना था इसके लिए कांस्टिट्यूशन के आर्टिकल फाइव और सिक्स में अमेंडमेंट्स भी किए गए लेकिन यह केवल असम में लागू होना था तब से लेकर आज तक एसयूआरएल करने की मांग कई बार की है इसके लिए दिसंबर 2014 में सुप्रीम कोर्ट में एक पिटीशन भी फाइल की गई जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने एनआरसी को टाइम बाउंड मैनर में अपडेट करने का ऑर्डर भी दिया एनआरसी ऑफ 1951 और इलेक्टोरल रोल ऑफ 1971 अप टू मिडनाइट ऑफ 24th मार्च 1971 मिलकर लेगासी डेटा फॉर्म करते हैं जिनमें मेंशन
लोगों और उनके डिसिडेंट्स को ही इंडियन सिटीजंस माना जाता है हालांकि केवल असम में ही एनआरसी अपडेशन हुआ है लेकिन बाकी के नॉर्थ स्टेट्स जैसे नागालैंड में ऐसी डिमांड्स उठती रही हैं उदाहरण के तौर पर नागालैंड स्टेट ने एक सिमिलर एक्सरसाइज को अंजाम देने की कोशिश की थी जब वहां 2019 में रजिस्टर ऑफ इंडिजन अस इनहैबिटेंट्स ऑफ नागालैंड प्रिपेयर करने की बात हुई थी इसके अलावा रिसेंटली मणिपुर असेंबली में भी एक रेजोल्यूशन के तहत एनआरसी को इंप्लीमेंट करने की बात कही है तो दोस्तों यह था हमारा डिस्कशन नॉर्थ ईस्ट इंसर्जनल मुद्दे को सॉल्व करने के
लिए गवर्नमेंट ने क्या एफर्ट्स लिए हैं गवर्नमेंट एफर्ट्स टू काउंटर नॉर्थ ईस्ट इं एजेंसी सबसे पहले बात कुछ यूनिक एडमिनिस्ट्रेटिव अरेंजमेंट्स की सबसे इंपॉर्टेंट स्टेप्स में मिनिस्ट्री ऑफ डेवलपमेंट ऑफ नॉर्थ ईस्ट रीजन या डीओ एनई आर की स्थापना शामिल है जिसके तहत नॉर्थ ईस्ट के डेवलपमेंट और वहां के मुद्दों को लेकर रिक्वायर्ड ओवरऑल कोऑर्डिनेशन पर ध्यान दिया जा रहा है इस मिनिस्ट्री ने नॉर्थ ईस्टर्न स्टेट्स में चल रहे प्रोजेक्ट्स और स्कीम्स के प्लानिंग एग्जीक्यूशन और मॉनिटरिंग पर ध्यान दिया है ताकि इस पूरे रीजन का ओवरऑल सोशो इकोनॉमिक डेवलपमेंट फास्ट पेस तरीके से किया जा स
सके नॉर्थ ईस्ट का डेवलपमेंट वहां के लोगों में रेडिकलाइजेशन और एलियने की फीलिंग को कम करेगा जो इनसरजेंसीज करने में कारगर साबित होगा अब बात कुछ कॉन्स्टिट्यूशन प्रोविजंस की दोस्तों आर्टिकल 244 के तहत देश के कुछ रीजंस के लिए यूनिक एडमिनिस्ट्रेटिव अरेंजमेंट्स और ऑटोनोमी का प्रावधान है देश के वो एरियाज जहां शेड्यूल ट्राइब्स की पॉपुलेशन ज्यादा है वहां फिफ्थ शेड्यूल और सिक्स्थ शेड्यूल के प्रावधान लागू होते हैं आर्टिकल 2442 के तहत सिक्सथ शेड्यूल के प्रावधान नॉर्थ ईस्ट के स्टेट्स असम मेघालय त्रिपुरा और मिजोरम में लागू किए जाते हैं जिनके तहत ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल का फॉर्मेशन
होता है इसके तहत इस रीजन में कई ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल्स बनाए गए हैं जिनमें मुख्यता है कर्बी एंगलोंग खासी हिल डिस्ट्रिक्ट चकमा डिस्ट्रिक्ट इत्यादि इसके अलावा आर्टिकल 371a के तहत नागालैंड को स्पेशल स्टेटस भी प्रोवाइड किया गया है इसके तहत इंडियन पार्लियामेंट द्वारा बनाया गया कोई भी कानून नागालैंड में अप्लाई नहीं हो सकता अगर वह नागा लोगों के सोशल और रिलीजियस प्रैक्टिसेस को अफेक्ट करता है इसके अलावा उनके कस्टमरी लॉज़ एंड प्रोसीजर एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफ़ सिविल एंड क्रिमिनल जस्टिस और ट्रांसफर और ओनरशिप ऑफ़ लैंड से रिलेटेड कानून भी पार्लियामेंट द्वारा नहीं बनाए जा सकते इसके अलावा
आर्टिकल 371b के तहत स्टेट ऑफ असम आर्टिकल 371c के तहत स्टेट ऑफ मणिपुर आर्टिकल 371f के तहत स्टेट ऑफ सिक्किम आर्टिकल 371h के तहत स्टेट ऑफ अरुणाचल प्रदेश आर्टिकल 371 जी के तहत स्टेट ऑफ मिजोरम को भी कई तरह के स्पेशल स्टेटस दिए गए हैं जो नागालैंड जितने एक्सटेंसिव नहीं है लेकिन क्रुशल है इनर लाइन परमिट या आईएल पी भी एक इंपॉर्टेंट प्रोविजन है जो इस रीजन के ट्राइब्स में आउटसाइड इंटरवेंशन को लेकर पनप रहे सेंस ऑफ इनसिक्योरिटी को बढ़ने से रोकता है और उन्हें अपने कल्चर और सोशल फैब्रिक को प्रिजर्व और प्रोटेक्ट करने का
स्पेशल अधिकार देता है इसके अलावा यूनियन गवर्नमेंट ने समय-समय पर पीस टॉक्स के तहत कई यूनिक डिसीजंस भी लिए हैं ताकि इस रीजन में बढ़ते रेडिकलाइजेशन और इंसर्जनल में एनआरसी को इंप्लीमेंट करने के लिए असम अकॉर्ड को साइन करना नागास के साथ पीस मेंटेन करने के लिए नागा अकॉर्ड और सीज फायर एग्रीमेंट साइन करना बोडोस के लिए 2003 में बोर्डो लैंड टेरिटोरियल काउंसिल या बीटीसी का क्रिएशन जैसे कई और एफर्ट शामिल हैं बॉर्डर एरियाज में रिक्वायर्ड डेवलपमेंट और सिक्योरिटी को इंश्योर करने के लिए बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट प्रोजेक्ट और हिली रीजंस में डेवलपमेंट के लिए हिल
एरिया डेवलपमेंट प्रोग्राम्स जैसे एफर्ट्स भी सराहनीय हैं इसके अलावा इंटरनेशनल लेवल पर भी गवर्नमेंट ने कई एफर्ट्स लिए हैं ताकि नॉर्थ ईस्ट में डेवलपमेंट को इंप्रूव कर वहां की सिक्योरिटी सिचुएशन को बेहतर बनाया जा सके इसमें सबसे इंपॉर्टेंट है इंडिया की एक्ट ईस्ट पॉलिसी जिसके तहत इंडिया साउथ ईस्ट एशियन कंट्रीज के साथ इकोनॉमिक स्ट्रेटेजिक और कल्चरल रिलेशंस को इंप्रूव करने की कोशिश कर रहा है इस पॉलिसी की स्पिरिट को फॉलो करते हुए इंडिया ने म्यानमार के साथ काला दन मल्टीमॉडल प्रोजेक्ट को अंजाम दिया है जो नॉर्थ ईस्टर्न स्टेट्स के ज्योग्राफिकल लिमिटेशंस को दूर करता है
और चिकन नेक पर भरते कंजेशन को कम करते हुए बे ऑफ बंगाल के रास्ते मेल लैन इंडिया को नॉर्थ ईस्ट से कनेक्ट करता है इसके अलावा म्यानमार और थाईलैंड के साथ आईएमटी ट्रालटूंगा देश के साथ भी डिप्लोमेटिक इंगेजमेंट बढ़ा रहा है ताकि इंडिया और नॉर्थ ईस्टर्न स्टेट्स के बीच कनेक्टिविटी बेहतर हो सके त्रिपुरा में इंटीग्रेटेड बॉर्डर चेकपोस्ट का क्रिएशन भी एक ऐसा ही स्टेप है जो क्रॉस बॉर्डर ट्रेड को प्रमोट कर लोगों के लाइवलीहुड को सिक्योर करता है त्रिपुरा की राजधानी अगरतला से अखौरा के बीच रेलिंग भी बनाया जा रहा है इसके अलावा नेबरिंग स्टेट्स
के साथ कई सिक्योरिटी कोऑपरेशन भी इंसर्जनल करने में मददगार साबित हो रहे हैं उदाहरण के तौर पर हम म्यानमार गवर्नमेंट द्वारा 22 आम मिलिशिया की गिरफ्तारी की बात कर सकते हैं इंडिया और म्यानमार की आर्मीज ने मिलकर दो राउंड ऑफ ऑपरेशंस भी लीड किए हैं अंडर ऑपरेशन सनराइज ताकि बॉर्डर एरियाज में पनप रहे इंसर्जनल किया जा सके बॉर्डर मैनेजमेंट के लिए इंडियन गवर्नमेंट द्वारा डेडिकेटेड फोर्सेस जैसे इंडो बांग्लादेश बॉर्डर पर बीएसएफ इंडो म्यानमार बॉर्डर पर असम राइफल्स सिनो इंडिया बॉर्डर पर इंडो तिब्बतन बॉर्डर पुलिस फोर्स या आईटीबीपी और भूटान बॉर्डर्स पर एसएसबी को तैनात किया
गया है इसके अलावा एफएसपीएल हैतू को खत्म करने के लिए आर्म्ड फोर्सेस को दी गई स्पेशल पावर्स पर चर्चा हम कर ही चुके हैं जहां रिक्वायर्ड होता है वहां आर्मी सीपीएफ और स्टेट पुलिस फोर्सेस मिलकर काउंटर इंसर्जनल हैं और स्टेट्स की सिक्योरिटी इंश्योर करते हैं दोस्तों इन सब स्टेप्स के बाद नॉर्थ ईस्ट इंसर्जनल में काफी ज्यादा सुधार आया है मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स के डाटा के हिसाब से नॉर्थईस्ट में इंसर्जनल रिलेटेड इंसीडेंट्स जहां 2014 में 824 थे वो 2020 में घटकर 162 ही थे इसके अलावा 2014 से लेकर आज तक नॉर्थ ईस्ट में इंसर्जनल डेथ्स
में 99 पर की कमी आई है हम आपको लेकर चलते हैं जम्मू एंड कश्मीर की ओर और समझेंगे वहां से इमर्ज होने वाले इंटरनल सिक्योरिटी थ्रेट के इतिहास और नेचर को हम जानते हैं कि 21 सेंचुरी में इंडिया कई इंटरनल सिक्योरिटी इश्यूज से गुजर रहा है जैसे टेररिज्म मनी लरिंग ड्रग ट्रैफिकिंग लीगल आर्म्स एंड काउंटर फेट करेंसी सप्लाई इत्यादि हालांकि इन सभी में सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंस हासिल किया है इंसर्जनल ने पोस्ट इंडिपेंडेंस में जहां अधिकतर स्टेट्स ने स्टेबल एनवायरमेंट के चलते इकोनॉमिक डेवलपमेंट हासिल किया वहीं जम्मू एंड कश्मीर मिलिटेंसी के चलते उस हिसाब से ग्रो
नहीं कर पाया जिस हिसाब से उसे ग्रो करना चाहिए था हम आपको यह भी बता दें कि आज जम्मू एंड कश्मीर मिलिटेंसी चाइना और पाकिस्तान के मेडलिंग के कारण एक बेहद कॉम्प्लेक्शन कश्मीर मिलिटेंसी कैसे ओरिजनेट और इवॉल्व हुआ साथ में हम यह भी जानेंगे कि कैसे अलग-अलग स्टेट और नॉन स्टेट एक्टर्स ने इस इशू को बढ़ावा दिया है ओरिजंस ऑफ जम्मू एंड कश्मीर मिलिटेंसी दोस्तों जम्मू एंड कश्मीर मिलिटेंसी के ओरिजिन और इवोल्यूशन को जानने से पहले चलिए पहले हम जम्मू एंड कश्मीर के बैकग्राउंड हिस्ट्री को ब्रीफ में जान लेते हैं जम्मू एंड कश्मीर की हिस्ट्री
शुरू होती है 1846 में 1846 से 1952 तक जम्मू एंड कश्मीर एक प्रिंसली स्टेट हुआ करता था अल्टीमेटली जम्मू ए कश्मीर ब्रिटिशर्स के आधिपत्य के अंदर आता था इस दौरान जम्मू एंड कश्मीर को डोगरा राजपूत डायनेस्टी ने रूल किया महाराजा गुलाब सिंह को डोगरा डायनेस्टी और जम्मू एंड कश्मीर का फाउंडर माना जाता है इंसीडेंटली गुलाब सिंह महाराजा रणजीत सिंह के अंडर नोबल हुआ करते थे उनकी कैपेबिलिटीज को देखते हुए महाराजा रणजीत सिंह ने उन्हें जम्मू एंड कश्मीर का रूलर डिक्लेयर किया महाराजा रणजीत सिंह की डेथ के बाद ब्रिटिशर्स ने सिख राज्यों पे कब्जा करने की
कोशिश की उन्होंने फर्स्ट एंग्लो सिख वॉर द्वारा सिख राज्यों पर कब्जा हासिल किया इस वॉर में में गुलाब सिंह ने ब्रिटिशर्स का साथ दिया था इसीलिए ट्रीटी ऑफ अमृतसर के तहत ब्रिटिशर्स ने गुलाब सिंह को जम्मू एंड कश्मीर का रूलर डिक्लेयर किया और बदले में 75 लाख कंपनसेशन लिया तो इस प्रकार जम्मू एंड कश्मीर स्टेट ट्रीटी ऑफ अमृतसर के तहत 1846 में एस्टेब्लिश हुआ दोस्तों करीब 100 साल हिंदू डोगरा रूलरसोंग्स में डिवाइडेड था पहला है प्रोविंस ऑफ जम्मू जो हिंदू डोमिनेटेड था दूसरा है कश्मीर वैली जो मुस्लिम डोमिनेटेड था तीसरा है लद्दाख जो बुद्धिस्ट मेजॉरिटी
था फाइनली है गिल गट और बाल्टिस्तान जो स्पर्सली पॉपुलेशन से प्रॉक्सिमिटी के कारण इनका स्ट्रेटेजिक इंपॉर्टेंस भी काफी ज्यादा था 1946 में इंडिया के पार्टीशन के दौरान ब्रिटिश गवर्नमेंट ने प्रिंसली स्टेट्स पर अपनी पैरामाउंट सी एंडन की प्रिंसली स्टेट्स को तीन ऑप्शन दिए गए इंडिया या पाकिस्तान जवाइन करें या फिर इंडिपेंडेंट रह जम्मू एंड कश्मीर के रूलर और वहां की पॉपुलेशन के बीच और जम्मू एंड कश्मीर का एक्सेशन कहां होगा इस पर काफी कॉन्फ्लेट्स थे थे और कौन कहां जाना चाहता है इसको लेकर भी काफी विवाद रहे कुछ हिस्टोरियंस के अनुसार महाराजा हरी सिंह ने
पीजेंट्स पर कुछ टैक्सेस इंपोज करना शुरू करा था इस टैक्स के खिलाफ लोकल रिवॉल्ट हुआ पर एडमिनिस्ट्रेशन ने उसे सप्रे किया इसके बाद पुंछ में जो वेस्ट पंजाब के रावलपिंडी डिवीजन को बॉर्डर करता है वहां अपराइज ंग शुरू हो गई उन्होंने ऑलमोस्ट पूरा डिस्ट्रिक्ट कंट्रोल कर लिया और अक्टूबर ड 1947 को रावलपिंडी में प्रोविजनल गवर्नमेंट एस्टेब्लिश करी गई अक्टूबर 21 को एक अहम घटना घटी नॉर्थ वेस्ट फ्र प्रोविंस के पश्तून ट्राइब्स पाकिस्तान के सपोर्ट से जम्मू एंड कश्मीर को एनेक्स करने के लिए घुसे उन्होंने मुजफ्फराबाद और बारामुला को कैप्चर किया जो श्रीनगर से सिर्फ 32
किमी की दूरी पर था अक्टूबर 24th को महाराजा ने उस वक्त के होम मिनिस्टर सरदार वल्लभ भाई पटेल से मिलिट्री असिस्टेंसिया सरदार वल्लभ भाई पटेल ने रिस्पॉन्ड करते हुए कहा कि इंडिया उनकी मदद नहीं कर सकता जब तक वह इंडिया में एक्सीड नहीं हो जाते इसलिए 26 ऑफ अक्टूबर को महाराजा हरी सिंह ने इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन साइन कर दिया और और जम्मू एंड कश्मीर को ऑफिशियल इंडिया में एक्सीड कर दिया इंडियन यूनियन को डिफेंस एक्सटर्नल अफेयर्स और कम्युनिकेशन हैंड ओवर किया गया इंडिया ने इमीडिएट ट्रूप्स श्रीनगर भेजे और इंडिया पाकिस्तान में जंग छिड़ गई और
इंडियन फोर्सेस ने पाकिस्तानी सपोर्टेड फोर्सेस को बैकफुट पर ला दिया फर्स्ट ऑफ जनवरी 1948 को इंडियन प्राइम मिनिस्टर जवाहरलाल नेहरू ने जम्मू एंड कश्मीर इशू को यूनाइटेड नेशंस में रेज किया अप्रैल 1948 में यूनाइटेड नेशन ने रेजोल्यूशन 47 पास किया इस रेजोल्यूशन द्वारा पाकिस्तानी ट्रूप्स को ममू एंड कश्मीर से विड्रॉ करने के लिए कहा गया सबसीक्वेंटली इंडिया को मिनिमम ट्रूप्स रखने का आदेश दिया गया और विड्रॉल के बाद प्लेब साइट होल्ड करने के लिए कहा गया आपको बता दें कि प्लेब साइट उस प्रक्रिया को कहा जाता है जहां वोट्स के जरिए लोगों का किसी इंपॉर्टेंट
चीज पर ओपिनियन लिया जाता है लेकिन पाकिस्तान के नॉन विड्रॉल के कारण प्लेब साइड कभी हुआ ही नहीं फाइनली 1949 में करची एग्रीमेंट द्वारा सीस फायर लाइन एस्टेब्लिश हुई और दोनों साइड्स ने अपना पोजिशनिंग एजिस्टिफाई मॉडर्न डे लाइन ऑफ कंट्रोल से मैच करता है पॉलिटिक्स पोस्ट 1947 दोस्तों मार्च 1948 में नेशनल कॉन्फ्रेंस के शेख अब्दुल्ला को जम्मू एंड कश्मीर का इंटेरिओ घोषित किया गया था 1951 के फर्स्ट लेजिस्लेटिव इलेक्शन में शेख अब्दुल्ला अनअपोज्ड चीफ मिनिस्टर बने उन्होंने कई प्रोग्रेसिव रिफॉर्म्स को इनिशिएटिव जिसने ऑर्डिनरी लोगों को बेनिफिट किया शेख अब्दुल्ला जम्मू एंड कश्मीर के पाकिस्तान एक्सेशन
के खिलाफ थे वो चाहते थे कि फॉर्मल रेफरेंडम कंडक्ट किया जाए और लोगों के ओपिनियन के अनुसार डिसीजन लिया जाए हालांकि पाकिस्तान के नॉन विड्रॉल के कारण पलबी साइड कभी हुआ ही नहीं खैर उन पर जम्मू एंड कश्मीर के फॉर्मल इंडियन एक्सेशन को डिले करने के आरोप लगे और इसी कारण इंडियन अथॉरिटीज ने स्टेट गवर्नमेंट को 1953 में डिस्मिस किया और शेख अब्दुल्ला को अरेस्ट किया गया उनके अरेस्ट के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस के कई लीडर्स ने स्टेट को लीड करने की कोशिश की पर वह पॉपुलर सपोर्ट नहीं हासिल कर पाए इस पॉलिटिक वैक्यूम को कांग्रेस
ने फिल किया उन्होंने नेशनल कॉन्फ्रेंस को सपोर्ट कर डायरेक्ट कंट्रोल हासिल किया और स्टेट में प्रो इंडियन सेंटीमेंट डेवलप करने की कोशिश की लेकिन कई एलिगेशंस जैसे मैन्युफैक्चर्ड रिग्ड इलेक्शंस ने लोगों में ट्रस्ट डेफिसिट क्रिएट किया ठीक दो डिकेड बाद फाइनली शेख अब्दुल्ला और कांग्रेस के इंदिरा गांधी के बीच एग्रीमेंट साइन हुआ और शेख अब्दुल्ला को जम्मू एंड कश्मीर का सीएम डिक्लेयर किया गया उन्होंने 1977 के इलेक्शन में मेजॉरिटी हासिल कर नेशनल कॉन्फ्रेंस को रिवाइव किया 198 टू में उनकी डेथ के बाद उनके बेटे फारूक अब्दुल्ला जम्मू एंड कश्मीर के सीएम बने फारूक अब्दुल्ला गवर्नमेंट
और तब के यूनियन गवर्नमेंट के बीच रिलेशन काफी ऑन एंड ऑफ रहा करते थे कांग्रेस के इन्फ्लुएंस में फारूक अब्दुल्ला के ब्रदर इन लॉ जीएम शाह ने जुलाई 2 1984 को नेशनल कॉन्फ्रेंस के 12 एमएलएस के साथ डिफेक्ट किया इस डिफेक्शन ने फारूक अब्दुल्ला की गवर्नमेंट को टॉपल किया उन्होंने कांग्रेस के साथ अलायंस कर सीएम पोस्ट हासिल की कहते हैं कि इस पॉलिटिकल कॉन्फ्लेट के चलते लोगों का डेमोक्रेटिक इंस्टीट्यूशंस पर पर से मनो विश्वास उठने लगा था इसी बीच 1986 में जम्मू एंड कश्मीर में कम्यून राइट्स हुए जम्मू एंड कश्मीर के कई टाउंस जैसे वन
पोह अनंतनाग सोपोर फतेहपुर अकुरा में हिंदू टेंपल्स को अटैक किया गया और कश्मीरी पंडित्स पर भी वायलेंस होने लगा जीएम शाह की गवर्नमेंट पर आरोप लगे कि वो कम्युलस को रोकने में सफल नहीं रहे थे इसलिए 12th ऑफ मार्च 1986 को गवर्नमेंट जगमोहन ने स्टेट गवर्नमेंट को डिस्मिस किया ठीक एक साल बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस के फारूक अब्दुल्ला ने कांग्रेस के राजीव गांधी के साथ अकॉर्ड साइन कर 1987 में एक साथ इलेक्शन लड़ने का डिसीजन लिया दोस्तों 1987 के इलेक्शंस जम्मू एंड कश्मीर मिलिटेंसी के राइज का टर्निंग पॉइंट माने जाते हैं एक्सपर्ट के अनुसार इन इलेक्शंस
में फ्रॉड और रिगिंग के मैसिव आरोप लगे थे इसके चलते कई एमएलएस ने आर्म्ड इंसर्जनल की शुरुआत की देखते ही देखते 1989 तक कश्मीर आर्म्ड इंसर्जनल बन गया उधर पाकिस्तान ने भी मौके का फायदा उठाया और आईएसआई ने आर्म्स एम्युनेशन सप्लाई और ट्रेनिंग फैसिलिटी प्रोवाइड कर रीजन को फर्द डिस्टेबलाइज किया इसके अलावा जम्मू एंड कश्मीर लिबरेशन फ्रंट यानी जेकेएलएफ जो पहले एक डेमोक्रेटिक फैक्स हुआ करता था उसने भी 1987 इलेक्शन को रिक्ड बताकर खुद को आर्म्ड ग्रुप में कन्वर्ट कर लिया जेकेएलएफ के लीडर यासीन मलिक ने कश्मीरी इंडिपेंडेंस के लिए वायलेंट अटैक्स कैरी किए जैसे
इंडियन सिक्योरिटी फोर्सेस पर अटैक मुफ्ती मोहम्मद सईद जो उस वक्त के होम मिनिस्टर थे उनके डॉटर रूबिया सईद की किडनैपिंग एक्सट्रा वायलेंट एटमॉस्फियर के चलते जम्मू एंड कश्मीर को गवर्नर्स रूल के अंडर रखा गया जनवरी 1990 में जेकेएलएफ ने वाइड स्प्रेड प्रोटेस्ट ऑर्गेनाइज किए जिसमें स्टोन पेल्टिंग यूज़ किया गया इन प्रोटेस्टर से डील करने के लिए बीएसएफ और सीआरपीएफ ने फोर्स का यूज किया सिचुएशन को कंट्रोल करने के लिए सेंटर ने 1990 में एफएस पीए भी इंपोज किया ठीक एक साल बाद 1991 में सोवियत यूनियन के ब्रेकडाउन के चलते अफगानिस्तान से हिज्बुल मुजाहिदीन के टेररिस्ट
ने इंडिया में घुसना शुरू किया इस प्रकार जम्मू एंड कश्मीर के वेब में फंस गया था आर्म्ड ग्रुप्स ने सिंपैथी गेन करने के लिए अलग-अलग टैक्टिक्स का इस्तेमाल किया उन्होंने पब्लिक गैदरिंग में प्रॉमिनेंट फिगर्स को मारना शुरू किया और जिहाद जैसे शब्दों को यूज़ कर वायलेंस को जस्टिफाई करने की कोशिश की 1990 में कई टेररिस्ट आउटफिट्स ने जन्म लिया जैसे लश्करए तयबा हरकत उल जिहाद इस्लामी अल बदे जैश मोहम्मद एक्सट्रा ऑपरेशन सर्प विनाश के तहत काफी हद तक वायलेंस कंट्रोल किया गया इसके बाद 2008 में यूनाइटेड नेशंस कमीशन फॉर रिफ्यूजीस के अंडर लेजिस्लेटिव इलेक्शंस कंडक्ट
हुए इसमें नेशनल कॉन्फ्रेंस के उमर अब्दुल्ला सीएम बने दोस्तों 20088 में इलेक्शन से पहले स्टेट गवर्नमेंट और सेंटर ने एग्रीमेंट साइन किया इसके चलते अनाथ शाइन के ट्रस्ट को इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए 99 एकर्स अलॉट किए जाने वाले थे इस एग्रीमेंट के पोरेशन में भी जम्मू एंड कश्मीर में स्टोन पेल्टिंग शुरू हुई प्रोटेस्ट के चलते इस एग्रीमेंट को कैंसिल किया गया लेकिन इस प्रोटेस्ट ने स्टोन पेल्टिंग को अब एक रेगुलर फीचर बना दिया 2010 के बाद कई लैंडमार्क इंसीडेंट्स ने पीस प्रोसेस को हैपर किया है जैसे 2013 में अफजल गुरु की हैंगिंग जो 2001 के
पार्लियामेंट अटैक्स का मास्टरमाइंड था 2016 में हिज्बुल मुजाहिद्दीन के मिलिटेंट बुरहान वानी को सिक्योरिटी फोर्सेस ने शूट किया इन इंसीडेंट्स को यूज़ कर सेपरेटिस्ट ग्रुप्स जैसे खरियत कॉन्फ्रेंस ने यूथ को रेडिकलाइज भी किया इसी को यूज़ कर पाकिस्तान के आईएसआई की मदद से जैशे मोहम्मद ने कई अटैक्स कैरी आउट किए जैसे 2016 उरी अटैक्स 2018 सुंजवान अटैक और 2019 पुलवामा अटैक तो दोस्तों इस प्रकार जम्मू एंड कश्मीर में मिलिटेंसी ओरिजनेट और इवॉल्व हुई जो आज इंडिया के लिए ग्रेव इंटरनल सिक्योरिटी इशू बन गया है रोल ऑफ स्टेट एंड नॉन स्टेट एक्टर दोस्तों इस मिलिटेंसी को
एग्रीवेट करने में कई स्टेट और नॉन स्टेट एक्टर्स इवॉल्वड हैं आईए हम इन पर एक नजर डालते हैं सबसे पहले हम बात करेंगे स्टेट एक्टर्स की आपको बता दें कि स्टेट एक्टर्स एक ऐसे इंडिविजुअल ऑर्गेनाइजेशन को कहा जाता है जो किसी सोवन रूलिंग गवर्नमेंट के बिहाव में एक्ट करता है दोस्तों अगर हम स्टेट एक्टर्स की की बात करें तो पाकिस्तान जम्मू एंड कश्मीर इंस्टेबिलिटी का एक अहम कंट्रीब्यूटर रहा है पाकिस्तान ने पोस्ट 1947 कई बार डायरेक्ट वॉर वेज करने की कोशिश की जैसे 1947 1965 वॉर 1973 का बांग्लादेश लिबरेशन वॉर 1999 का कारगिल वॉर इत्यादि
लेकिन इंडिया से उनको पेनफुल डिफीट का सामना करना पड़ा इसलिए 2000 के बाद उन्होंने नया टैक्टिक यूज करना शुरू किया जैसे लो इंटेंसिटी वरफेन या प्रोट्रैक्टेड स् कहा जाता है दोस्तों लो इंटेंसिटी वरफेन एक ऐसी स्ट्रेटेजी को कहा जाता है जिसमें लॉन्ग टर्म डिजायर्ड रिजल्ट अचीव करने के लिए सीरीज ऑफ स्मॉल स्केल वायलेंट स्टेप्स लिए जाते हैं ये वायलेंट स्टेप्स कई फॉर्म में नजर आते हैं जैसे आर्म्ड रिवोल्ट गोरिला वरफेन पॉलिटिकल रिवोल्यूशन जिसमें फाल्स प्रोपेगेंडा स्प्रेड किया जाता है इन सभी को ब्रॉडली नेशनल वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस के नाम देकर लेजिटिमाइज किया जाता है इस प्रकार
पाकिस्तान ने आईएसआई की मदद से केयरफुली कश्मीरी मिलिटेंसी को एग्रीवेट किया है 2015 में पाकिस्तान के फॉर्मर प्रेसिडेंट परवेज मुशर्रफ ने एडमिट भी किया था कि पाकिस्तान ने 1990 में कई कश्मीरी इंसर्जनल को सपोर्ट और ट्रेनिंग दी थी वहीं अगर हम नॉन स्टेट एक्टर्स की बात करें तो यह उन इंडिविजुअल्स या ऑर्गेनाइजेशन को कहा जाता है जिनका सिग्निफिकेंट पॉलिटिकल इन्फ्लुएंस होता है लेकिन ये किसी सोवन रूलिंग गवर्नमेंट के बिहाव पे एक्ट नहीं करते कई नॉन स्टेट एक्टर्स ने कश्मीरी इंसर्जनल दिया है जैसे पहला है ऑल पार्टीज हुर्रियत कॉन्फ्रेंस 1993 में इस ऑर्गेनाइजेशन को मेर वाइज
उमर फारूक ने एस्टेब्लिश किया हुरिया कश्मीर का प्राइमरी सेपरेटिस्ट ग्रुप माना जाता है इनकी आइडल जीी यह है कि जम्मू एंड कश्मीर एक डिस्प्यूटेड टेरिटरी है और इस पर इंडिया का कंट्रोल अनज िफर इन्होंने पब्लिक ओपिनियन मोबिलाइज करने के लिए इंडियन सिक्योरिटी फोर्सेस के खिलाफ फॉल्स नैरेटिव सेट करने की कोशिश की है पाकिस्तान हाई कमिश्नर के साथ रेगुलर हाई लेवल मीटिंग दर्शाती है कि हुरिया केवल पाकिस्तान का डमी है इन्होंने रिलीजियस अथॉरिटी को यूज कर सर्मन द्वारा एंटी इंडिया सेंटीमेंट ब्रू किया है अगला है जम्मू एंड कश्मीर लिबरेशन फ्रंट जेकेएलएफ 1976 में एस्टेब्लिश इस ऑर्गेनाइजेशन
ने 1980 में कश्मीर में अपना प्रेजेंस दिखाना शुरू किया शुरुआत में यह काफी डेमोक्रेटिक थे लेकिन 1987 के इलेक्शंस में अपनी हार से हताश होकर उन्होंने वायलेंस शुरू किया 1989 के रूबिया सईद किडनैपिंग कश्मीरी पंडित्स का मास एक्सोडस जैसे कई इंसीडेंट्स में जेकेएलएफ ने अहम रोल प्ले किया है नेक्स्ट है लश्करए यबा 1987 में इस मिलिटेंट ऑर्गेनाइजेशन को हाफिज सईद ने इस्टैब्लिशमेंट है पूरे कश्मीर को पाकिस्तान के साथ इंटीग्रेट करना रीजन को डिस्टेबलाइज करने के लिए इस आतंकवादी संगठन ने कई अटैक्स कैरी किए जैसे दिसंबर 2000 रेडफोर्ट अटैक 2001 पार्लियामेंट अटैक्स 2008 मुंबई अटैक्स 2010
पुणे बॉमिस अगला है जश मोहम्मद जेएम एक जिहादी मिलिटेंट ग्रुप है जिसे मसूद अजहर ने इस्टैब्लिशमेंट बॉर्डर इफिट्रेस द्वारा कई अटैक्स को अंजाम दिया है जैसे 2019 के पुलवामा अटैक्स फाइनली हम बात करेंगे हिज्बुल मुजाहिदीन की दोस्तों यह 1989 में लामिस मिलिटेंट्स के अंब्रेला ग्रुप को रिप्रेजेंट किया करता था प्रेजेंटली यह जमात इस्लामी के कंट्रोल में आता है इसने हिंदू टेंपल्स के डिस्ट्रक्शन और कश्मीरी पंडित एक्सोडस में इंपॉर्टेंट रोल प्ले किया है कंक्लूजन तो दोस्तों इस प्रकार हमने देखा कि कैसे जम्मू एंड कश्मीर में मिलिटेंसी ने ओरिजनेट और इवॉल्व किया साथ ही हमने देखा कि
कैसे अलग-अलग एक्टर्स ने इस स्टेट को हॉट बेट ऑफ मिलिटेंसी बनाकर रखा है अगर हमें इस मिलिटेंसी को एलिमिनेट करना है तो गवर्नमेंट को सभी पार्टीज को इवॉल्व कर कॉन्फिडेंस बिल्डिंग मेजर्स को अंजाम देना होगा 14th ऑफ फरवरी 2019 को पुलवामा डिस्ट्रिक्ट में एक इंप्रोवाइज एक्सप्लोसिव व्हीकल ने 40 सीआरपीएफ पर्सनल की जान ले ली यह 1990 की मिलिटेंसी की शुरुआत के बाद कश्मीर वैली का बिगेस्ट टेरर अटैक माना जाता है इस अटैक के बाद मानो इंडिया और पाकिस्तान फुल स्केल वॉर की ओर बढ़ने लगे इंडिया ने पुलवामा अटैक के रिटा लिशन में बालाकोट एयर स्ट्राइक्स
को अंजाम दिया इसने इंडिया के काउंटर क्रॉस बॉर्डर टेररिज्म एफर्ट्स में एक नया बेंचमार्क सेट किया रिपोर्ट के अनुसार इस सुसाइड अटैक को एक 20 ईयर ओल्ड लोकल पुलवामा रेसिडेंट ने इंप्लीमेंट किया था हिज्बुल मुजाहिदीन के बुरहान वारी से इंस्पायर होकर इस यूथ ने जैशे मोहम्मद टेरर ग्रुप जवाइन किया था दोस्तों इस इंसीडेंट की खास बात यह है कि इस अटैक को एक लोकल कश्मीरी ने कैरी आउट किया था जो कश्मीरी मिलिटेंसी के 30 इयर्स में रेयर इंसीडेंट है ये दर्शाता है कि जैसे 2016 में बुरहान वानी की किलिंग के बाद मिलिटेंसी ने अपना नेचर
चेंज करना शुरू किया है आज लोकल होम ग्रोन यूथस को इंडक्ट कर मिलिटेंसी को कश्मीर बेस डिक्लेयर किया जा रहा है एक्सपर्ट्स का मानना है कि कश्मीरी मिलिटेंसी का ओल्ड फेज 1980 में शुरू हुआ और 1996 में डिफीट हुआ वहीं न्यू मिलिटेंसी की शुरुआत बुरहान वानी के सोशल मीडिया इमेजेस और वीडियो से इंस्पायर होकर हुई अगस्त 5 2019 को सेंटर ने द कॉन्स्टिट्यूशन एप्लीकेशन टू जम्मू कश्मीर ऑर्डर 2019 के तहत जम्मू एंड कश्मीर का स्पेशल स्टेटस रिव किया साथ ही जम्मू एंड कश्मीर को दो हिस्सों में डिवाइड किया गया यूनियन टेरिटरी ऑफ जम्मू एंड कश्मीर
एंड यूनियन टेरिटरी ऑफ लद्दाख इस ऑर्डर ने जम्मू एंड कश्मीर के अनरेस्ट को नया रूप दिया है ऐसा कुछ एक्सपर्ट्स का दावा है गवर्नमेंट ने इस अनरेस्ट को कंट्रोल करने के लिए फोर्सेस को मोबिलाइज किया पॉलिटिकल लीडर्स को हाउस अरेस्ट में रखा और इंटरनेट शटडाउन किया कहते हैं कि इस अप्रोच ने जहां एक और कश्मीर की सिक्योरिटी सिचुएशन को इंप्रूव किया है वहीं इसने कश्मीरी लोकल्स को न्यू मिलिटेंसी की ओर पुश किया यानी कश्मीर मिलिटेंसी अब एक नया रूप लेने लगी है लोकल होम ग्रोन रिक्रूटमेंट सोशल मीडिया द्वारा प्रोपेगेंडा स्प्रेडिंग आइडल जिकल शिफ्ट जैसे कई
वेरिएबल हमें दर्शाते हैं कि कैसे जम्मू एंड कश्मीर मिलिटेंसी ने एक नया रूप धारण किया है तो दोस्तों चलिए आज हम इस वीडियो के माध्यम से जानते हैं कि आखिर कैसे मिलिटेंसी ने अपना नेचर चेंज किया है साथ ही हम जानेंगे कि गवर्नमेंट ने इसे रोकने के लिए क्या मेजर्स लिए हैं चेंजिंग नेचर ऑफ मिलिटेंसी दोस्तों मिलिटेंसी के चेंजिंग नेचर को हम कई फॉर्म्स में देख सकते हैं जैसे फॉरेन बेस टू लोकल होमग्रोन मिलिटेंसी दोस्तों लेट 1980 में कश्मीर मिलिटेंसी की शुरुआत हुई अफगानिस्तान के हिज्बुल मुजाहिदीन से इंस्पायर होकर पाकिस्तान ने 1980 में वाइड स्प्रेड
इंसर्जनल किया 1987 के सो कॉल्ड रिग्ड इलेक्शन ने मानो लोगों का डेमोक्रेसी पर से विश्वास उठा दिया लोकल कश्मीरी यूथ ने जम्मू एंड कश्मीर लिबरेशन फ्रंट नकर स्टेट फोर्सेस पर अटैक करना शुरू किया रिपोर्ट के अनुसार जम्मू एंड कश्मीर ने प्रोग्रेसिव वायलेंस विटनेस किया जहां 1989 में 49 इंसीडेंट्स रिकॉर्ड हुए वही 1990 में 1098 1991 में 2000 और 1992 में 3413 1993 के बाद इन इंसीडेंट्स का नंबर ग्रैजुअली कम होते हुए 2005 में 806 तक पहुंचा 2012 के मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स के डटा के अनुसार यह आंकड़ा 220 तक पहुंच गया है है एक्सपर्ट डेविड
देवदास के अकॉर्डिंग यह डिक्लाइन इस कारण हुआ क्योंकि वायलेंस से हताश होकर कश्मीरी ने मिलिटेंट्स को शेल्टर और रिसोर्स प्रोवाइड करने से मना कर दिया था लेकिन शॉकिंगली 2018 में यह ऑब्जर्व किया गया कि एनकाउंटर्स के दौरान फॉरेन मिलिटेंट्स के मुकाबले ज्यादा लोकल मिलिटेंट्स मारे गए ये इंडिकेट करता है कि मिलिटेंसी ने अपना बेस फॉरन से लोकल होम ग्रोन यूथस पर शिफ्ट किया है हमें ये ध्यान देना होगा कि बेस चेंज के साथ मोड ऑफ रिक्रूटमेंट और ट्रेनिंग में भी काफी चेंजेज देखने को मिले हैं दोस्तों 1990 में मिलिटेंसी रिक्रूटमेंट काफी इंटेंस हुआ करता था
रिक्रूट्स को एलओसी के रफ टेरेन जंगल्स को क्रॉस कर पाकिस्तान एडमिनिस्टर्ड कश्मीर में ट्रेन किया जाता था अफगानिस्तान मुजाहिदीन पाकिस्तान आर्मी के साथ उन्हें वेपंस जैसे रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड लाइट मशीन गंस की ट्रेनिंग दी जाती थी उन्हें सीवियरली डैमेजिंग अटैक्स के लिए ट्रेन किया जाता था इंटेंस ट्रेनिंग के बाद उन्हें इंडियन साइड ऑफ एलओसी में इफिल्टर करवाया जाता था वहीं अगर हम न्यू मिलिटेंसी की बात करें तो रिक्रूटमेंट प्रोसेस इजियर बन गई है एलओसी हैवली गार्डेड होने के कारण रिक्रूट्स को बॉर्डर क्रॉस नहीं करवाया जा सकता बल्कि अब सोशल मीडिया पोस्ट द्वारा उनका रिक्रूटमेंट अनाउंस
किया जाता है इस कारण मिलिटेंट्स को पब्लिसिटी मिलने लगी है जो यूथ को आकर्षित करती है सोशल अपील ने मिलिटेंसी को लोकलाइज बना दिया है खैर अच्छी बात यह है कि ओल्ड मिलिटेंसी के मुकाबले न्यू मिलिटेंसी में रिक्रूट्स पुरली ट्रेन हैं उन्हें बेसिक ट्रेनिंग देकर स्मॉल स्केल अटैक्स के लिए तैयार किया जाता है न्यू रिक्रूट ऑनलाइन पोस्ट जैसे ऑटोमेटिक राइफल के साथ सेल्फी के थ्रू कॉप्स और सिविलियंस को थ्रेटनिंग मैसेज भेजकर फियर क्रिएट करते हैं दोस्तों दूसरा इंपॉर्टेंट चेंज हमें नजर आता है फॉरेन और डोमेस्टिक मिलिटेंट्स ग्रुप के आइडियो कल सिनर्जी में 1990 में कई
मिलिटेंट ग्रुप ने जन्म लिया जैसे इंडिजन अस ग्रुप्स हिज्बुल मुजाहिदीन जेकेएलएफ अल बार्क अल जिहाद और फॉरेन ग्रुप्स जैसे लश्करए यबा जैश मोहम्मद हरकत उल अंसर एक्सट्रा इस अर्ली फेज में ग्रुप्स के बीच आइडल जिकल डिफरेंसेस क्लियर थे इंडिजन अस ग्रुप्स को सबजूगेटेड रखा जाता था इसी कारण इंटर और इंट्रा ग्रुप क्लैशेस कॉमन थे जिसने मिलिटेंट मूवमेंट को वीक बनाया लेकिन मिलिटेंसी के नए फेज में हमें लोकल और फॉरेन ग्रुप्स में आइडल जिकल यूनिटी देखने को मिल रही है सो कॉल्ड कश्मीर कॉस को यूज़ कर यूनिफाइड फाइट करने की बात हो रही है जहां पहले
कश्मीरी ने फॉरेन आउटफिट्स को शेल्टर देने से इंकार किया वहीं आज एलटी जैसे आउटफिट्स लोकल्स को रिक्रूट कर कश्मीरी इस का सपोर्ट हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं कश्मीर कॉस का नाम आगे करके एलटी जैसे आउटफिट्स ने अपना ज्योग्राफिकल प्रेजेंस बढ़ाया है जहां पहले यह ग्रुप्स कश्मीर के नदन पार्ट्स में एक्टिव थे अब ये सदन कश्मीर जैसे पुलवामा शोपिया अनंतनाग में भी डोमिनेट करने लगे हैं दोस्तों तीसरा इंपॉर्टेंट चेंज नजर आता है सोशल मीडिया के यूसेज में सोशल मीडिया न्यू मिलिटेंसी का मोस्ट पावरफुल वेपन माना जाता है जहां 1990 में प्रेस को फोर्सफुली आर्टिकल्स
प्रिंट करने को कहा जाता था आज सोशल मीडिया के तहत हजारों पिक्चर्स और वीडियोस वायरल किए जा रहे हैं देकर पब्लिक सेंटीमेंट के साथ खेलते हैं डेथ्स को ग्लोरिफाई कर यूथस को कश्मीर कॉस के लिए लड़ने के लिए कहा जाता है इन आउटफिट्स ने सोशल मीडिया वरियर्स क्रिएट कर यह दिखाया है कि जिहाद आज वर्चुअल स्पेस में पहुंच गया है इंटरेस्टिंग बुरहान वानी की किलिंग के बाद गवर्मेंट क्रैकडाउन को अवॉइड करने के लिए मिलिटेंसी ने सोशल मीडिया यूसेज में कई चेंजेज भी किए हैं जहां पहले न्यू रिक्रूट्स के फोटो अपलोड होते थे अब एनोनिमस यानी
बेनाम ऑडियो क्लिप्स द्वारा रिक्रूटमेंट अनाउंस किया जाता है मिनिमम ऑफिस कांटेक्ट करके रिक्रूट्स को लोन वुल्फ अटैक यानी सिंगल हैंडेड अटैक करने के लिए इनकरेज किया जाता है ऐसा कई रिपोर्ट्स दावा करती हैं इंटेलिजेंस एजेंसीज को गुमराह करने के लिए बड़े प्लेटफॉर्म जैसे whatsapp2 म नान बॉक्स को यूज़ किया जाता है दोस्तों फोर्थ इंपॉर्टेंट चेंज नजर आता है मिलिटेंसी के कोर आइडियो जीी में कश्मीर मिलिटेंसी ने हमेशा रीजन को यूज़ कर क्राउड को मोबिलाइज किया है लेकिन इस रिलीजन का यूसेज और एक्सटेंट सक्सेसिवली बढ़ता गया है इसे हम तीन फेजेस में डिवाइड कर सकते हैं
मिलिटेंट के पहले फेज को लीड किया था जेकेएलएफ ने जो इंडिपेंडेंट जम्मू एंड कश्मीर चाहता था जिहाद को यूज कर यह इंडिया को कश्मीर से ओवरथ्रो करना चाहता था पाकिस्तान जेकेएलएफ के इस एंटी पाकिस्तान मर्जर पॉलिसी से नाखुश था रिस्पांस में उन्होंने कई प्रो पाकिस्तान मिलिटेंट ग्रुप्स फॉर्म किए जिसने मिलिटेंसी की पूरी आइडियो जीी चेंज कर दी इस तरह मिलिटेंसी के सेकंड फेज में कई प्रो पाकिस्तानी ग्रुप्स फॉर्म हुए जिन्हें पाकिस्तान के आईएसआई ने ट्रेन कि किया यहां मिलिटेंसी की आइडल जीी में प्रो इंडिपेंडेंस से प्रो पाकिस्तान की तरफ शिफ्ट देखने को मिला जम्मू एंड
कश्मीर के बिगेस्ट रिलीजियस ग्रुप जमात इस्लामी से इंस्पायर होकर हिज्बुल मुजाहिदीन ने पैन इस्लामिक आइडल जीी को प्रमोट किया 1990 के इंटेंस वायलेंस के कारण कश्मीरी मिलिटेंसी से दूर हो गए इसी वैक्यूम को फुल करने के लिए थर्ड फेज ने जन्म लिया जे ईएम एल ईटी हरकत उल जिहाद अल इस्लामी जैसे ग्रुप्स ने इस फेज को डोमिनेट किया इस फेज में मिलिटेंसी आइडल जीी प्रो पाकिस्तान से इस्लामिक रूल एस्टेब्लिशमेंट में शिफ्ट हुआ यानी कश्मीर को खलीफ द्वारा शरिया लॉ के तहत रूल किया जाना चाहिए ऐसा इनका एम था इस आइडल जिकल शिफ्ट ने मिलिटेंसी को
ग्लोबल सपोर्ट हासिल करवाया कई ग्लोबल प्रो खलीफ ग्रुप जैसे अलकायदा गजवा तोल हिंद और आईएसआईएस का इस्लामिक स्टेट ऑफ जेएनके ने आज कश्मीर में फुटहोल्ड बनाया है इस आइडल जिकल चेंज ने इंडिया के सिक्योरिटी इश्यूज को और भी कॉम्प्लेक्टेड स ने अपना नेचर और मॉड ऑपर एंडडी चेंज किया है चलिए अब हम एक नजर डालते हैं कि गवर्नमेंट ने इस मिलिटेंसी को एड्रेस करने के लिए कौन से स्टेप्स लिए हैं स्टेप्स टेकन बाय गवर्नमेंट दोस्तों मिलिटेंसी को एड्रेस करने के लिए गवर्नमेंट ने कई हार्ड और सॉफ्ट स्टेप्स लिए हैं अगर हम हार्ड स्टेप्स की बात
करें तो सबसे पहले गवर्नमेंट ने क्रॉस बॉर्डर इफिट्रेस को टैकल करने की कोशिश की है पाकिस्तान बेस्ड टेररिस्ट ग्रुप्स नॉर्थ कश्मीर के माउंटेनस टेरेन और साउथ कश्मीर के पीर पंजाल रेंज को यूज कर कश्मीर वैली में एंटर करते रहे हैं गट ने इसे एड्रेस करने के लिए थ्री टियर काउंटर इफिल्टर ग्रिड बनाया है इसमें पहला लेयर एलओसी पर इंडियन आर्मी फॉर्म करेगी सीआरपीएफ और जम्मू एंड कश्मीर पुलिस सेकंड और थर्ड लेयर फॉर्म करेंगी इसके अलावा एंटी इफिल्टर कल सिस्टम एआईओएस फेंसिंग ड्रोन नाइट विजन इक्विपमेंट थर्मल इमेजिंग डिवाइसेज द्वारा स्मार्ट बॉर्डर मैनेजमेंट भी किया जा रहा
है दूसरा इंपॉर्टेंट मेजर है टेररिस्ट ग्रुप क्रैकडाउन गवर्नमेंट ने कई काउंटर इंसर्जनल द्वारा टेररिस्ट ग्रुप को टारगेट किया है टॉप मिलिटेंट लीडरशिप को एलिमिनेट कर मिलिटेंसी को वीक बनाया जा रहा है इसके अलावा ओवरग्राउंड वर्कर्स यानी ऐसे सिंपैथाइजर्स जो टेररिस्ट को शेल्टर मोबाइल रिचार्ज और इंफॉर्मेशन प्रोवाइड करते हैं उन पर पब्लिक सेफ्टी एक्ट अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट के तहत स्ट्रिक्ट एक्शंस लिए जा रहे हैं फरवरी 2019 में मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स ने जमात इस्लामी को अनलॉफुल ऑर्गेनाइजेशन घोषित कर उसे बैन किया था टेररिस्ट फाइनेंसिंग को रोकने के लिए मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स ने टेरर मॉनिटरिंग
ग्रुप सेट अप किया है जो टेरर फाइनेंसिंग केसेस को क्लोजरी डील करेंगे इस प्रकार मिलिटेंसी के बैकबोन को नष्ट कर एक हॉलिस्टिक वे में मिलिटेंसी को डिफीट किया जा रहा है अगर हम सॉफ्ट स्टेप्स की बात करें तो गवर्नमेंट ने कई डेवलपमेंटल इनिशिएटिव लॉन्च किए हैं जैसे पहला है उड़ान स्कीम मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स स्कीम को फंड करेगी और नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन इसे इंप्लीमेंट करेगा इस स्कीम का ऑब्जेक्टिव है जम्मू एंड कश्मीर के यूथ को स्किल प्रोवाइड कराना रंगराजन कमिटी के रिकमेंडेशन पर इस स्कीम के तहत ज जम्मू एंड कश्मीर के एजुकेटेड यूथ यानी
ग्रेजुएट्स पोस्ट ग्रेजुएट और थ्री ईयर डिप्लोमा होल्डर्स को इंडस्ट्रियल स्किल्स देकर एंप्लॉय बल बनाया जाएगा इस तरह यूथ को एंप्लॉयमेंट देकर उनकी एनर्जी सही डायरेक्शन में चैनला इज की जाएगी दूसरा है प्रोजेक्ट हिमायत इस प्रोजेक्ट को हिमायत मिशन मैनेजमेंट यूनिट जम्मू एंड कश्मीर स्टेट रूरल लाइवलीहुड मिशन गवर्नमेंट ऑफ जम्मू एंड कश्मीर इंप्लीमेंट करेगी ये जम्मू एंड कश्मीर के अनइंप्लॉयड यूथ के लिए प्लेसमेंट लिंक्ड स्किल ट्रेनिंग प्रोग्राम है यूथ को मार्केट डिमांड के अकॉर्डिंग 3 से 12 महीनों में स्किल ट्रेनिंग दी जाएगी ट्रेनिंग के बाद उन्हें एश्योर्ड प्लेसमेंट देकर उनके 1 साल का प्रोग्रेस ट्रैक किया
जाएगा तीसरा इनिशिएटिव है प्रोजेक्ट उम्मीद ये नेशनल रूरल लाइवलीहुड मिशन के अंडर एक सबमिशन है जिसे जम्मू एंड कश्मीर स्टेट रूरल लाइवलीहुड सोसाइटी इंप्लीमेंट करता है इस प्रोजेक्ट का ऑब्जेक्टिव है स्ट्रांग ग्रास रूट इंस्टीट्यूशंस बिल्ड करना जिससे पुअर को लाइवलीहुड और डिसेंट क्वालिटी ऑफ लाइफ मिले इस डायरेक्शन में जम्मू एंड कश्मीर के 125 सिलेक्टेड ब्लॉक्स में एटलीस्ट 66 पर रूरल पॉपुलेशन को रीच आउट किया जा रहा है फोर्थ इनिशिएटिव है प्रोजेक्ट सद्भावना इसे इंडियन आर्मी ने विनिंग हार्ट्स एंड माइंड स्ट्रैटेजी या वैम स्क अंडर लॉन्च किया है यह एक इंफॉर्मेशन इनिशिएटिव है जिसके तहत ऑफिसर्स
और सोल्जर्स लोकल से इंटरेक्ट कर उनके डे टूडे इश्यूज को सॉल्व करते हैं जैसे एजुकेशन प्रोवाइड करने के लिए 55 मॉडर्न इंग्लिश मीडियम गुडविल स्कूल एस्टेब्लिश करना रूरल एरियाज में कनेक्टिविटी इंप्रूव करने के लिए फुट ब्रिजे बिल्ड करना वमन और यूथ एंपावरमेंट के लिए नेशनल इंटीग्रेट टूर्स ऑर्गेनाइज करना वाटर सप्लाई स्कीम्स इलेक्ट्रिफिकेशन एनिमल हसबेंडरी प्राइमरी हेल्थ केयर सेंटर्स द्वारा बेसिक कम्युनिटीज प्रोवाइड किए जाने की कवायद इत्यादि इसके अलावा मिशन पहल मिशन रीच आउट द्वारा लोकल्स के ग्रीवेंस को एड्रेस किया जा रहा है तो दोस्तों इस प्रकार गवर्नमेंट और इंडियन आर्मी ने मल्टी प्रंट अप्रोच को
यूज कर मिलिटेंसी इशू को टैकल किया है अब जानते हैं वे फॉरवर्ड इन स्टेप्स के बावजूद मिलिटेंसी की समस्या पूरी तरह एलिमिनेट नहीं हुई है इसे इरेडिकेट करने के लिए गवर्नमेंट कई डोमस में काम कर सकती है जैसे पहला है डिस्ट्रिक्ट डेवलपमेंट काउंसिल्स डीडीसी 5th अगस्त 2019 को जम्मू एंड कश्मीर से स्टेट रूट हटाने के बाद अब पॉलिटिकल फोकस डीडीसी और ग्रास रूट डेवलपमेंट पर शिफ्ट हुआ है कई डिकेड्स की पॉलिटिकल इंस्टेबिलिटी सहने के बाद अब डीडीसी के माध्यम से लोकल इलेक्टेड लीडर्स डेवलपमेंट इंश्योर करेंगे इस डायरेक्शन में सेंटर को उन्हें पॉलिटिकली और फाइनेंशियलीईएक्सप्रेस साथ
ही उन्हें टारगेटेड किलिंग से शील्ड करना चाहिए लोकलाइट होने के कारण लोगों का इन पर भरोसा होगा और इस ट्रस्ट को यूज कर हम रीजन में पॉलिटिकल स्टेबिलिटी और एक्सट्रीमिस्ट नरेट को काउंटर कर सकते हैं दूसरा डोमेन है सोशल मीडिया दोस्तों 21 सेंचुरी में सोशल मीडिया मिस इंफॉर्मेशन और प्रोपेगेंडा का इंपॉर्टेंट टूल बन गया है जहां तक गवर्नमेंट ने रिएक्टिव टैक्टिक्स यूज किए हैं जैसे ब्लैंकेट बैंड्स सेंसरशिप ऑफ एक्सट्रीमिस्ट कंटेंट अब जरूरत है प्रोकेट मेजर्स की आर्टिफिशियल इं इजेंस की मदद से काउंटर नैरेटिव बनाया जा सकता है जैसे अगर कोई मिस इंफॉर्मेशन सोशल मीडिया पर
पोस्ट होती है तो एआई की मदद से तुरंत एमपिर कल फैक्ट्स देकर उस इंफॉर्मेशन को झूठ प्रूफ करना चाहिए तीसरा डोमेन है टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से नॉर्मल स की सिचुएशन को क्रिएट करना मिलिटेंसी के कारण हम रीजन को [संगीत] डिमिलिटराइज्ड एरियल व्हीकल्स नाइट थर्मल कैमरा इंफ्रारेड डिवाइसेज और सैटेलाइट इमेजेस की मदद से सर्विलेंस किया जा सकता है इससे ट्रूप्स के प्रेजेंस को कम कर हम एक प्रकार का नॉर्मल स ला सकते हैं फोर्थ डोमेन है एजुकेशन अगर हमें लॉन्ग टर्म एंटी मिलिटेंसी नैरेटिव बिल्ड करना है तो एजुकेशन एक इंपॉर्टेंट टूल है 2019 से पहले जम्मू
एंड कश्मीर में एजुकेशन स्टेट गवर्नमेंट के अंडर आया करता था इस कारण जम्मू एंड कश्मीर और रेस्ट ऑफ इंडिया के करिकुलम में काफी डिफरेंस नजर आता था हिस्टोरिकल डिस्टॉर्शन और अनफैमिलियरिटी जैसे कई इश्यूज सामने आते थे 2019 के बाद एजुकेशन सेंट्रल गवर्नमेंट के अंडर आ गया अब एनसीआरटी की मदद से यूनिफॉर्म सिलेबस डिजाइन कर नेशनल सेंटीमेंट डेवलप किया जा रहा है वर्चुअल स्पेस में प्री रिकॉर्डेड एजुकेशनल वीडियोस प्रोवाइड करना चाहिए जिससे अन रिस्क दौरान एजुकेशन डिसर पट ना हो कंक्लूजन तो दोस्तों इस प्रकार हमने देखा कि कैसे मिलिटेंसी ने अपने आप को चेंज कर 21
सेंचुरी में एक नया रूप धारण किया है इसे रूट से रिमूव करने के लिए हमें सभी स्टेकहोल्डर्स को साथ में लेकर चलना होगा ट्रेस डेफिसिट हटाने के लिए डेमोक्रेटिक पार्टिसिपेशन और प्रो डेवलपमेंट पॉलिसीज को बढ़ावा देना होगा स्मार्ट बॉर्डर मैनेजमेंट गुड गवर्नेस जैसे स्टेप्स लेकर लोगों का दिल जीतकर हम जम्मू एंड कश्मीर में लास्टिंग पीस ला सकते हैं ऑर्गेनाइज्ड क्राइम के बारे में ये तो आप सभी ऑर्गेनाइज्ड क्राइम से जुड़ी फिल्में और वेब सीरीज देखकर काफी खुश होते होंगे सत्या और कंपनी से लेकर मिर्जापुर और सीक्रेड गेम्स तक सभी अपने स्पेशल जनरा की वजह से
दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय रही शायद शायद इन्हें देख के आपके मन में ये विचार भी आता होगा कि भाई वाह बहुत मकाल हो तो ऐसा हो लेकिन बाकी हर फिल्म या वेब सीरीज की तरह यह सब भी कोरी कल्पना से ज्यादा कुछ नहीं है असल में ऑर्गेनाइज्ड क्राइम की दुनिया अपने आप में एक काफी डार्क और समाज के लिए बड़ा अभिशाप है क्योंकि ना केवल ये क्राइम नेटवर्क के फैलाव को सिस्टेमेयर ऑर्गेनाइज करके दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचाती हैं बल्कि सोसाइटी का सोशल और मोरल डिग्रेडेशन भी करती हैं एक समय में किडनैपिंग एक्सटॉर्शन और
लूट से शुरू हुआ ऑर्गेनाइज्ड क्राइम आज ड्रग्स स्मगलिंग सेक्स ट्रैफिकिंग फेक मनी रैकेट्स इत्यादि से लेकर आर्म्स ट्रैफिकिंग और टेररिज्म तक जा चुका है ऐसे में यह हमारे देश के लिए तो एक इंटरनल और एक्सटर्नल सिक्योरिटी थ्रेट है ही पर साथ में यह ग्लोबल लेवल पर भी एक मैनेसिंग बिजनेस बन चुका है जिसका किसी भी अन्य मल्टीनेशनल ऑर्गेनाइजेशन की तरह ही अपना एक कॉरपोरेट सेटअप और बाकी से अलग अपना बिजनेस मॉडल है ऐसे में हमारे लिए यह जरूरी हो जाता है कि हम इस विषय की गंभीरता को समझे और साथ ही ऑर्गेनाइज्ड क्राइम के असल
रूप को पहचाने क्योंकि तभी हम इस पर काबू पा पाएंगे तो चलिए आज हम इसी विषय को करीब से जानने का प्रयास करते हैं हाउ कैन वी डिफाइन ऑर्गेनाइज्ड क्राइम दोस्तों य तो ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एक ब्रॉडर टर्म है जिसके एस्पेक्ट्स और डायमेंशन बदलते वक्त के साथ बदलते रहते हैं उदाहरण के लिए आईटी या इंटरनेट युग के पहले किसी ने इंटरनेट टेररिज्म या टेली फ्रॉड स्कैंडल रैकेट्स के बारे में सुना भी नहीं था लेकिन आज ये ऑर्गेनाइज्ड क्राइम सिंडिकेट के एक प्रॉमिनेंट एस्पेक्ट का हिस्सा है ऐसे में ऑर्गेनाइज्ड क्राइम को परिभाषित करना आसान नहीं है ना
ही इसकी कोई एक स्टैंडर्ड और इंक्लूसिव डेफिनेशन हो सकती है लेकिन फिर भी भारत के इतिहास में ऑर्गेनाइज्ड क्राइम और सो कॉल्ड अंडरवर्ल्ड सिंडिकेट से सबसे ज्यादा अफेक्टेड रहे महाराष्ट्र स्टेट द्वारा बनाए गए महाराष्ट्रा कंट्रोल ऑफ ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एक्ट 1999 में हमें ऑर्गेनाइज्ड क्राइम की डेफिनेशन देखने को मिलती है इसके अनुसार एक इंडिविजुअल द्वारा अकेले या किसी ऑर्गेनाइज्ड क्राइम सिंडिकेट के साथ मिलकर या उसके बिहाव पर किया हुआ कोई भी क्राम क्राइम ऑर्गेनाइज्ड क्राइम कहलाता है लेकिन यह जरूरी है कि इस कमिटेड क्राइम में वायलेंस किया गया हो या थ्रेट ऑफ वायलेंस या फिर इंटिमिडेशन
और कोशन या किसी भी दूसरे अनलॉफुल मींस का इस्तेमाल हुआ हो साथ ही इन सभी क्रिमिनल एक्टिविटीज को करने का अल्टीमेट एम भी पिक्यूनियरी बेनिफिट्स या कोई अनड्यू इकोनॉमिक या फिर किसी भी तरह का अनड्यू एडवांटेज हासिल करना होना चाहिए ऐसे में हम देख सकते हैं कि इस एक्ट के माध्यम से ऑर्गेनाइज्ड क्राइम को ब्रॉडेस्ट पॉसिबल वे में डिफाइन करने की कोशिश की गई है वहीं यूएन कन्वेंशन अगेंस्ट ट्रांस नेशनल ऑर्गेनाइज्ड क्राइम द्वारा हमें ऑर्गेनाइज्ड क्रिमिनल ग्रुप की भी डिटेल डेफिनेशन देखने को मिलती है इसे परिभाषित करते हुए यूएनसी टीसी बताती है कि एक स्ट्रक्चर्ड
ग्रुप तीन या उससे ज्यादा लोगों का ऐसा समूह है जो एक टाइम पीरियड में मिलजुलकर एक या उससे ज्यादा सीरियस क्राइम्स या ऑफेंसेस को अंजाम देते हैं जिसके पीछे उनका उद्देश्य डायरेक्टली और इनडायरेक्टली फाइनेंशियल और दूसरे मटेरियल बेनिफिट्स ऑब्टेन करना होता है वहीं यूएनसी सीओसी अपने द्वारा दी गई ऑर्गेनाइज्ड क्राइम की इस डेफिनेशन में प्रयुक्त हुए कुछ टर्म्स को भी क्लियर डिफाइन करता है जिसके अनुसार स्ट्रक्चर्ड ग्रुप वो ग्रुप है जिसमें फॉर्मल हारर की या मेंबरशिप की कंटिन्यूटी रिक्वायर्ड नहीं है इसीलिए वो सभी लूजली एफिलेटेड ग्रुप्स जिसमें इनके मेंबर्स के लिए फॉर्मली डिफाइंड रोल्स या
डिफाइंड हारर की नहीं होती है वो सब भी ऑर्गेनाइज्ड क्राइम केस अंब्रेला टर्म के अंडर आते हैं यही नहीं यूएनसी टी ओसी उन सभी क्राइम्स को सीरियस क्राइम्स मानता है जिसके अंडर कम से कम 4 साल के इंप्रिजनमेंट का प्रावधान है जबकि भारत के कानून के अनुसार सीरियस क्राइम के कैटेगरी इजेशन के लिए इंप्रिजनमेंट का ये टर्म कम से कम 5 साल का है इसके अलावा ऑर्गेनाइज्ड क्राइम कन्वेंशन ऑर्गेनाइज्ड क्राइम के ट्रांसनेट एस्पेक्ट को भी डिफाइन करता है जिसके अनुसार एक ऑफेंस या क्राइम तब ट्रांस नेशनल माना जाना चाहिए अगर वो एक से ज्यादा नेशंस
या स्टेट में कमिट किया गया हो या फिर भले ही वो एक ही नेशन में कमिट किया गया हो लेकिन उसकी प्रिपरेशन प्लानिंग डायरेक्शन और कंट्रोल का सब्सटेंशियल पार्ट किसी अन्य नेशन या स्टेट में किया गया हो या फिर भले ही उसे एक नेशन पे कमिट किया गया हो लेकिन इस क्राइम एक्टिविटी में इवॉल्वड या इसके लिए रिस्पांसिबल ऑर्गेनाइज्ड क्रिमिनल ग्रुप एक से ज्यादा नेशंस में एक्टिवली ऑपरेट करते हैं या फिर भले ही य को किसी एक स्टेट या नेशन में कमिट किया गया हो लेकिन इस क्रिमिनल एक्ट का सब्सटेंशियल इफेक्ट दूसरे स्टेट या नेशन
पर भी पड़ा हो इन सभी स्थितियों में एक एक्ट ऑफ क्राइम को ट्रांस नेशनल क्राइम माना गया है दोस्तों अब यह तो हुई और ऑर्गेनाइज्ड क्राइम ऑर्गेनाइज्ड क्रिमिनल ग्रुप्स और ट्रांस नेशनल क्राइम की डेफिनेशन की बात अब हम अपने इस डिस्कशन में आगे बढ़ते हैं और देखते हैं कि ऑर्गेनाइज्ड क्राइम और टेररिज्म में क्या सिमिलरिटीज और डिफरेंसेस हैं सिमिलरिटीज एंड डिफरेंसेस बिटवीन ऑर्गेनाइज क्राइम एंड टेररिज्म दोस्तों हम आपको बता दें कि ऑर्गेनाइज्ड क्राइम को ऑर्गेनाइज्ड क्राइम मेनली दो वजहों से कहा जाता है पहला कारण यह कि ऑर्गेनाइज क्राइम का पूरा नेटवर्क एक वेल डिफाइंड सिस्टम
के तहत चलता है जहां हर एक्टर के रोल्स और ड्यूटीज डिफाइंड होते हैं दूसरा ये कि ये पूरा ऑर्गेनाइज सिस्टम या ऑर्गेनाइजिंग प्रिंसिपल वेल डिफाइन होता है अगर हम ऑर्गेनाइज क्राइम और टेरर ग्रुप्स में अंतर ढूंढने की कोशिश करें तो हम पाते हैं कि जहां एक और टेररिस्ट का मेन मकसद आइडियो कल और पॉलिटिकल गोल्स अचीव करना होता है वहीं ऑर्गेनाइज्ड क्राइम का मेन मकसद इकोनॉमिक और प्रॉफिट अर्निंग होता है इसके अलावा ऑर्गेनाइज्ड क्राइम के लिए वायलेंस का इस्तेमाल केवल इकोनॉमिक इंटरेस्ट को सर्व करने के लिए होता है पर वायलेंस का इस्तेमाल य गैंग्स जनरली
एक्सट्रीम सरकमस्टेंसस में ही करते हैं कई ऐसे प्रकार के ऑर्गेनाइज गैंग्स भी होते हैं जो बिना वायलेंस के भी अपने इंटरेस्ट और गोल्स को अचीव करते हैं जबकि टेररिज्म के लिए यह वायलेंस एसेंशियल रिक्वायरमेंट है और वायलेंस उसका इंट्रिसिक हिस्सा है इसके अलावा हम यह भी कह सकते हैं कि जिस प्रकार से बिजनेस ऑर्गेनाइजेशंस अपने प्रॉफिट मोटिव्स को अचीव करने के लिए एक सिस्टमिक तरीके से अपने रूल्स और रेगुलेशन को फॉलो करते हैं और ट्रस्ट बेस सिस्टम को एब्लिश करते हैं वैसे ही ऑर्गेनाइज्ड क्राइम भी एक वेल ऑर्गेनाइज्ड सिस्टम के तहत ट्रस्ट बेस्ड सिस्टम है
फर्क केवल इतना है कि नॉर्मल बिजनेसेस लीगल डोमस में ऑपरेट करते हैं लेकिन ऑर्गेनाइज्ड क्राइम इलीगल डोमेन में होता है वहीं टेररिज्म लार्जली कोशन और थ्रेड का इस्तेमाल कर अपने गोल्स को अचीव करता है और टेररिज्म ऑर्गेनाइज भी हो सकता है और अनऑफिशियल का इस्तेमाल अपने गोल्स को अचीव करने के लिए करते हैं यही नहीं आज के दौर में तो ऑर्गेनाइज क्राइम नेटवर्क और टेररिस्ट दोनों एक दूसरे के नेटवर्क का इस्तेमाल करते हुए एक सिंबायोटिक रिलेशनशिप स्टैब्स कर चुके हैं कई एरियाज में तो टेररिस्ट ग्रुप ने खुद को सस्टेन करने के लिए ऑर्गेनाइज्ड क्राइम नेटवर्क
में खुद को झोंक दिया है वही कई जगहों में ऑर्गेनाइज्ड क्रिमिनल ग्रुप्स ने टेरर का सहारा लेकर खुद को सस्टेन करने की कोशिश की है ऐसे में टेररिस्ट गैंग्स और ऑर्गेनाइज क्रिमिनल गैंग्स में क्लियर अंतर बना पाना लार्जली थोरेट्स बट इन प्रैक्टिस यह काम आज काफी कठिन हो गया है उदाहरण के तौर में हम अफगानिस्तान की बात कर सकते हैं जहां तालिबान और उसके कई नेता डायरेक्टली और इनडायरेक्टली ओपियम ट्रेड में इवॉल्वड पाए गए हैं नॉर्थ ईस्ट इंडिया के बारे में इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स बताती है कि वहां के कई इं सर्जेंट्स और टेरर ग्रुप्स आज एक्टिवली
और डायरेक्टली ऑर्गेनाइज्ड क्राइम का हिस्सा है और दोनों में डिफरेंशिएबल ज्म के बीच रिलेशनशिप को समझने की कोशिश करें तो वो ब्रॉडली तीन प्रकार के हैं पहला प्रकार वो जहां टेरर ग्रुप्स और ऑर्गेनाइज्ड क्राइम में कोई लिंक नहीं होता और दोनों इंडिपेंडेंटली ऑपरेट करते हैं ये फिनोम लार्जली तब देखा जाता था तब टेररिज्म की एक्चुअल शुरुआत हुई थी यानी कि 80 और 90स के दशक में दूसरा प्रकार है जहां टेरर ग्रुप्स और ऑर्गेनाइज क्रिमिनल गैंग्स अपनी इंडिपेंडेंट आइडेंटिटी को मेंटेन करते हैं लेकिन वो आपस में एक सिंबायोटिक रिलेशनशिप शेयर करते हैं और एक दूसरे की
मदद से फलते फूलते हैं एक दूसरे के कांटेक्ट और नेटवर्क्स का इस्तेमाल करना फंडिंग और नेटवर्क्स का प्रोवाइड करना यह सब इस तरह के रिलेशनशिप में देखा जाता है तीसरा और आखिरी टाइप वो है जहां ये दोनों ग्रुप्स आपस में मर्ज हो जाते हैं और दोनों की इंडिपेंडेंट आइडेंटिटी टैब्लिक्स हो जाता है यानी कि टेरर ग्रुप्स ऑर्गेनाइज क्राइम भी करते हैं और ऑर्गेनाइज गैंग्स टेररिस्ट भी बन जाते हैं कहते हैं कि डी कंपनी ने 1993 की मुंबई ब्लास्ट के बाद यही रूप अपनाया था जहां एक ऑर्गेनाइज्ड गैंग एक टेररिस्ट ग्रुप में तब्दील हो गया ऐसा
ही नॉर्थ ईस्ट के टेरर ग्रुप्स धीरे-धीरे ऑर्गेनाइज गैंग्स भी बन गए दोस्तों अब आगे बढ़ते हुए हम देखते हैं कि ऑर्गेनाइज क्राइम के कितने टाइप्स है हालांकि जैसा हमने आपको बताया कि ऑर्गेनाइज क्राइम के डायमेंशन को नलिस्ट करना कोई आसान काम नहीं है क्योंकि आज के बदलते समय में यह भी अपने स्ट्रक्चर और मॉडल्स ऑपरेंडी में बदलाव कर रहे हैं फिर भी हम यह समझने की कोशिश करेंगे कि आखिर कन्वेंशनली ऑर्गेनाइज क्राइम ग्रुप्स के प्रकार कौन-कौन से हैं टाइप्स ऑफ ऑर्गेनाइज क्राइम सबसे पहला है ड्रग अब्यूड़ोस की लत आज ना केवल हमारे युवा वर्ग का
भविष्य बर्बाद कर रही है बल्कि सारी दुनिया में इस क्राइम से जुड़े ऑर्गेनाइज क्रिमिनल ग्रुप्स फैले हुए हैं लेकिन शायद आपको यह बात जानकर आश्चर्य होगा कि ये सभी किसी ना किसी रूप में आपस में जुड़े हुए हैं ऐसे में ये दुनिया के सबसे सीरियस और सबसे वाइडल फैली ट्रांस नेशनल ऑर्गेनाइज क्राइम्स में से एक है अगर हम भारत की ज्योग्राफिकल लोकेशन पर ही गौर करें तो हम पाएंगे कि ये गोल्डन ट्रायंगल और गोल्डन क्रिसेंट में मौजूद कंट्रीज के पास ही स्थित है ऐसे में भारत को यहां से वेस्टर्न वर्ल्ड भेजे जाने वाले नारकोटिक ड्रग्स
के लिए एक ट्रांजिट पॉइंट की तरह इस्तेमाल किया जाता है दोस्तों यह हम आपकी जानकारी के लिए बता दें कि थाईलैंड लाओस और म्यानमार से मिलकर बना गोल्डन ट्रायंगल और अफगानिस्तान ईरान और पाकिस्तान से मिलकर बना गोल्डन क्रिसेंट एशिया में ओपीएम प्रोडक्शन और सप्लाई चेन के लिए जाने जाते ते हैं ऐसे में इनके बीच स्थित भारत के लिए अपने आप को इस ड्रग सप्लाई चेन से दूर रखना मुश्किल हो रहा है इससे एक तरफ सोसाइटी में ड्रग मैनेज बढ़ता जा रहा है तो वहीं दूसरी ओर ड्रग स्मगलिंग और ट्रेड दूसरे क्राइम्स के लिए भी एक
फाउंडेशन का काम करते हैं यही नहीं गोल्डन क्रिसेंट से होने वाले ड्रग बिजनेसेस यहां के टेरर ऑर्गेनाइजेशंस के लिए रेवेन्यू और इनकम का मुख्य जरिया है ऐसे में इस पर काबू पाना भारत की इंटरनल और एक्सटर्नल सिक्योरिटी इंश्योर करने के लिए ही नहीं बल्कि वर्ल्ड मेंटेन करने के लिए भी बेहद जरूरी है स्मगलिंग दोस्तों क्लैंड स्टीन या गुपचुप तरीके से किए जाने वाले अनरिकॉर्डेड ट्रेड को स्मगलिंग कहा जाता है यह एक प्राइम इकोनॉमिक ऑफेंस तो है ही इसके अनरिकॉर्डेड नेचर की वजह से इसके माध्यम से इल्लीगल सब्जेक्ट जैसे आर्म्स करेंसी ड्रग्स इत्यादि को भी एक
स्थान से दूसरे स्थान पहुंचाने का काम किया जाता है ऐसे में यह बाकी सभी इलिसिट ट्रेड के लिए स्मगलिंग एक सप्लाई चेन की तरह काम करता है अब भारत जिस की कोस्ट लाइन 7500 किमी से भी ज्यादा की है और साथ में नेपाल और भूटान के साथ जिसके ओपन बॉर्डर्स हैं और म्यानमार और बांग्लादेश के साथ जिसके पोरस बॉर्डर्स हैं उसके लिए स्मगलिंग पर रोक लगाना और भी ज्यादा जरूरी हो जाता है क्योंकि जब तक इस पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई जाएगी तब तक भारत के इंटरनल सिक्योरिटी के दूसरे इश्यूज और कंसर्न्स भी पूरी
तरह सॉल्व नहीं हो पाएंगे क्योंकि चाहे वो इशू ड्रग्स का हो या फिर नक्सलाइट्स को मिलने वाले आर्म्स का या फिर लीगल चाइनीज प्रोडक्ट्स और काउंटर फिट करेंसी का सब के तार स्मगलिंग से ही जुड़े हैं अगला मुद्दा है मनी लरिंग और हवाला का दोस्तों मनी लरिंग और हवाला का प्रयोग इलीगली ड्राइव ब्लैक मनी को अलग-अलग जरि हों से वाइट एंड इल्लीगल करेंसी में कन्वर्ट करने का एक जरिया है ऐसे में जहां एक और ये टैक्स इजन से जुड़ा एक फाइनेंशियल फ्रॉड तो है ही वहीं दूसरी ओर यह बाकी सभी इलिसिट ट्रेड्स और ऑर्गेनाइज क्राइम
के लिए सीड कैपिटल प्रोवाइड करने का भी काम करता है इसके बारे में हमने डिटेल में चर्चा अपने पिछले वीडियो में ऑलरेडी करी हुई है अब बात करते हैं आर्म्स प्रोलिफिक की दोस्तों लाइट आर्म्स प्रोलिफिक एक ग्लोबल फेनोमेन है जिसके फुटप्रिंट्स हमें अलग-अलग स्केल पे दुनिया के हर रीजन में देखने को मिलते हैं जिसके चलते ऑर्गेनाइज्ड क्राइम के सेगमेंट में ह्यूमन लाइव्स के साथ-साथ हमारे सोशो इकोनॉमिक डेवलपमेंट पर भी इतना बुरा असर डाला है कि उसे शायद हम ठीक तरीके से कैलकुलेट भी नहीं कर सकते यह जहां एक और सभी तरह के इल्लीगल क्राइम सिंडिकेट
को फायर पावर प्रोवाइड करता है तो वहीं दूसरी ओर आर्म्ड कॉन्फ्लेट और ग्लोबल टेररिज्म को भी बूस्ट देता है ऐसे में हम समझ सकते हैं कि इसे रोका जाना कितना जरूरी है किडनैपिंग फॉर रैंस सम भी एक तरह का ऑर्गेनाइज क्राइम है दोस्तों आपने फिरौती के लिए किडनैपिंग की घटनाओं के बारे में तो सुना ही होगा कि कैसे कुछ क्रिमिनल्स इलिसिट मॉनेटरी बेनिफिट्स के लिए हाई प्रोफाइल इंडिविजुअल से लेकर कॉमन इंडिविजुअल्स तक की किडनैपिंग करके रैंस सम कलेक्ट करते हैं बल्कि इस काम में तो हाईली ऑर्गेनाइज्ड क्राइम सिंडिकेट्स और गैंग भी एक्टिव हैं जो कभी-कभी
इंटरस्टेट किडनैपिंग्स को भी अंजाम देते हैं इसके अलावा कांट्रैक्ट किलिंग्स भी क्रुशल ऑर्गेनाइज्ड क्राइम की लिस्ट में आता है दोस्तों आर्म्स और ब्लैक मनी प्रोलिफ्ट ही ऑर्गेनाइज्ड क्राइम की एक सब कैटेगरी डेवलप हुई है जिसके अंदर मॉनेटरी कंसीडरेशंस या इलिसिट पॉलिटिकल पावर अचीव करने के लिए कांट्रैक्ट किलिंग्स को अंजाम दिया जाता है जिसे कांट्रैक्ट किलिंग या आम बोलचाल की भाषा में सुपारी किलिंग कहते हैं इसके लिए सिस्टेमेयर शूटर्स को रिक्रूट करने से लेकर प्रोफेशनल गैंग बिल्डिंग तक सब कुछ किया जाता है एक टाइम में इंडिया का कमर्शियल कैपिटल मुंबई इस तरह की कांट्रैक्ट किलिंग का
हब हुआ करता था लेकिन आज ये देश के रूरल और अर्बन एरियाज तक भी पहुंच गया है जहां आपसी लड़ाई झगड़े से लेकर बिजनेसमैन से होने वाले एक्सटॉर्शन तक में कांट्रैक्ट किलिंग का सहारा लिया जाता है यही नहीं भारतीय राजनीति के इतिहास में बहुत से सो कॉल्ड बाहुबली नेता भी इस क्राइम से डायरेक्टली या इनडायरेक्टली जुड़े पाए गए हैं अब चर्चा ह्यूमन ट्रैफिकिंग फॉर प्रोस्टिट्यूशन एंड ऑर्गन हार्वेस्टिंग की दोस्तों ऑर्गेनाइज क्राइम के इस दलदल में एक इंसान दूसरे इंसान को भी बेचने के लिए तैयार है यही कारण है कि आज दुनिया भर में प्रोस्टिट्यूशन और
ह्यूमन ऑर्गन्स के हार्वेस्टिंग के लिए मानव तस्करी एक फुल फ्लेज बिजनेस बन चुका है जो सोसाइटी के लिए एक मैनक तो है ही लेकिन मोरल ग्राउंड्स पर भी किस कदर डिस्टोर्टेड है यह शायद आप खुद ही समझ रहे होंगे दोस्तों य तो आप काले धन या मनी के बारे में जानते ही होंगे कि कैसे लोग गैर कानूनी तरीकों से कमाया हुआ पैसा या फिर अपनी इनकम पर देने वाले लीगल टैक्स को बचाने के लिए अलग-अलग इलिसिट फज के जरिए धन संचय करते हैं जिसे ब्लैक मनी कहा जाता है अब इसे ब्लैक मनी की संज्ञा देने
का एक कारण यह भी है कि इस तरह का पैसा कभी आसानी से खर्च नहीं किया जा सकता क्योंकि जैसे ही यह इलीगली स्टक्ड मनी लॉ इंफोर्समेंट एजेंसीज की नजरों में आएगा वैसे ही इनके ओनर के अगेंस्ट लीगल एक्शंस उठा लिए जाएंगे उनके बारे में आप आए दिन खबरों में पढ़ते ही होंगे कि कैसे भारत की लॉ इंफोर्समेंट एजेंसीज टैक्स एवेजन या इल्लीगल एक्टिविटीज से इकट्ठा की हुई संपत्ति के अगेंस्ट एक्शंस लेती रहती हैं जिनके बारे में हम अपने आने वाले लेक्चर में डिटेल में चर्चा करेंगे लेकिन ब्लैक मनी की इन खबरों के बीच में
आपने खबरों में मनी लरिंग के बारे में भी जरूर सुना होगा वही जिससे रिलेटेड केसेस के चलते बीते एक साल में देश की बहुत सी जानी-मानी सेलिब्रिटीज और एक्ट्रेसेस के नाम मनी लरिंग से जुड़े केसेस में सामने आते रहे हैं पर आखिरकार होती क्या है यह मनी लरिंग आइए हम सबसे पहले यह जान लेते हैं व्हाट इज मनी लरिंग दोस्तों जब आपके कपड़े गंदे हो जाते हैं तो आप क्या करते हैं अब आप कहेंगे कि यह कैसा सवाल है जाहिर सी बात है कि गंदे कपड़ों को फिर से इस्तेमाल में लेने के पहले उन्हें अच्छी
तरह से धोना या लडर करना जरूरी होता है ठीक वैसे ही इल्लीगल एक्टिविटीज या एक्चुअल लीगल इनकम को छुपाकर टैक्स इ वेजन करके जमा की गई डर्टी या ब्लैक मनी को लीगली इस्तेमाल करने के पहले क्लीन या वाइट मनी में कन्वर्ट करना जरूरी है और ब्लैक या डर्टी मनी के वाइट या क्लीन मनी में कन्वर्जन को ही मनी लरिंग कहते हैं हालांकि यह प्रोसेस उतनी आसान नहीं है जितनी सुनाई देती है बल्कि ये एक कॉम्प्लेक्शन है जिसके बहुत से अलग-अलग सबसेट्स हैं ऐसे में प्रश्न यह उठता है कि आखिर ऐसे ब्लैक मनी को वाइट मनी
में लर कैसे किया जाता है तो चलिए अब हम इस गुथी को भी सुलझा लेते हैं द मॉडेस्ट ऑपर एंडटी ऑफ मनी लरिंग दोस्तों कन्वेंशनली मनी को लॉडर करने के तीन स्टेजेज माने जाते हैं आइए हम एक-एक करके इनके बारे में भी डिटेल में चर्चा कर लेते हैं प्लेसमेंट स्टेज मनी लरिंग की पहली स्टेज है प्लेसमेंट स्टेज ये मनी लरिंग की पूरी प्रोसेस की सबसे रिस्क स्टेज है क्योंकि इसमें गैर कानूनी तरीकों से डिराइवर सिस्टम में इंट्रोड्यूस करने से लॉ इंफोर्समेंट एजेंसीज के नजरों में आने का खतरा बना रह रहता है यही कारण है कि
इस इलिसिट मनी के लार्ज कैश अमाउंट्स के छोटे-छोटे हिस्से करके उन्हें स्मॉलर अमाउंट्स में धीरे-धीरे या अलग-अलग रास्तों से फाइनेंशियल सिस्टम में इंट्रोड्यूस किया जाता है इसके लिए छोटे अमाउंट्स को बैंक में डायरेक्ट कैश डिपॉजिट करने से लेकर चेक्स और मनी ऑर्डर्स जैसे मॉनेटरी इंस्ट्रूमेंट्स का भी प्रयोग किया जाता है इन तरीकों का इस्तेमाल करके एक बार य इलिसिट कैश प्लेसमेंट स्टेज में फाइनेंशियल स्टेज में इंट्रोड्यूस हो गया तो फिर बारी आती है दूसरी स्टेज की तो चलिए अब हम मनी लरिंग के सेकंड स्टेज के बारे में भी जान लेते हैं सेकंड स्टेज है लेयरिंग
स्टेज दोस्तों मनी लरिंग के इस स्टेज में पहली स्टेज से फाइनेंशियल सिस्टम में इंट्रोड्यूस की गई इलिसिट मनी के सोर्स को छुपाने का काम किया जाता है इसके लिए इस मनी के एक्चुअल इलीगल सोर्स को अनट्रेसेबल बनाने के लिए लेयरिंग या कैमफ्लेज टेक्नीक का इस्तेमाल होता है जिसके जरिए इन ट्रांजैक्शंस को ऐसे कॉम्प्लेक्टेड फाइनेंशियल पाइपलाइंस के जरिए घुमाया जाता है कि लॉ इंफोर्समेंट एजेंसीज द्वारा इस ब्लैक मनी के सोर्स को फॉलो करना नामुमकिन हो जाए इस लेयरिंग के लिए मनी लांडरर्स अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल करते हैं तो आइए हम उनके तरीकों को भी समझ लेते
हैं सोर्स की लेयरिंग के लिए बड़े कैश को स्मॉल अमाउंट्स में डिवाइड करके बहुत से वेरिएबल अमाउंट के बैंक ट्रांजैक्शंस किए जाते हैं इन बैंकिंग ट्रांजैक्शन को वायर ट्रांसफर के जरिए अलग-अलग अमाउंट में अलग-अलग बैंक्स और कई बार अलग-अलग खाताधारकों या बैंक अकाउंट होल्डर्स के नाम से मल्टीपल साइकिल में डिपॉजिट किया जाता है जिसमें अक्सर ऐसे बैंक अकाउंट का इस्तेमाल होता है जो अलग-अलग देशों में हो ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि यह ट्रांजैक्शन किसी एक इंफोर्समेंट एजेंसी के अधिकार क्षेत्र में ना आकर मल्टीपल रेगुलेटिंग अथॉरिटीज के बीच के उलझे हुए नेटवर्क से बचकर निकल
जाएं यही नहीं कंट्री के चेंज हो जाने से करेंसी ऑफ डिपॉजिटर भी अपने आप चेंज हो जाता है उदाहरण के लिए इंडिया से यूएसए भेजा गया पैसा भले ही रुपी के फॉर्म में फाइनेंशियल सिस्टम में इंट्रोड्यूस हुआ हो लेकिन अगर अकाउंट होल्डर इस पैसे को यूएसए के अपने अकाउंट से विथड्रावल होगा जिससे इस ब्लैक मनी की ट्रेसेबल और भी मुश्किल हो जाएगी इस ब्लैक मनी के लेयरिंग के लिए सिर्फ कन्वेंशनल फाइनेंशियल सिस्टम या बैंक अकाउंट्स ही नहीं बल्कि हाई वैल्यू आइटम्स भी यूज़ किए जाते हैं उदाहरण के लिए हाउसेस पेंटिंग्स याच डायमंड्स विंटेज कार और
गोल्ड को खरीदकर ब्लैक मनी को इन हाई वैल्यू आइटम्स में बदल दिया जाता है यही नहीं अक्सर ब्लैक मनी ट्रांसफर को गुड्स और सर्विसेस के पेमेंट के तौर पर भी दिखाया जाता है उदाहरण के लिए अगर पर्सन ए को पर्सन बी तक ब्लैक मनी पहुंचाना है तो पर्सन ए ट्रांजैक्शन डॉक्यूमेंट के माध्यम से शो करेगा कि उसने पर्सन बी से उसकी बनाई हुई एक पेंटिंग खरीदी है भले ही पर्सन बी की पेंटिंग की एक्चुअल मार्केट वैल्यू मिट्टी के समान हो लेकिन उसे गोल्ड स्टैंडर्ड पर खरीदकर इलिसिट मनी ट्रांसफर को जस्टिफाई किया जाता है दोस्तों इन
तरीकों का इस्तेमाल करके लेयर किए हुए ब्लैक मनी को अब थर्ड स्टेज पे पहुंचाया जाता है तो चलिए अब हम मनी लरिंग की इस थर्ड स्टेज के बारे में भी जान लेते हैं थर्ड स्टेज है इंटीग्रेशन स्टेज दोस्तों मनी लरिंग के इस स्टेज पर इसके पहले दो स्टेजेस पे अलग-अलग तरीकों से डिसोसिएट किए हुए ब्लैक मनी को फिर से इंटीग्रेट करके फाइनली लेजिटिमेसी पूरी ब्लैक मनी लेजिटिमेसी में अब उसके इस्तेमाल में कोई कानूनी अड़चन नहीं रह जाती क्योंकि अलग-अलग रास्तों से बीते दो स्टेजेस पे लडर होने के बाद इलेजिटिमेसी सोर्स ट्रेस नहीं किया जा सकता
यही कारण है कि बीते दो स्टेजेस में यूज किए गए डिफरेंट रूट्स के कॉम्प्लेक्टेड ट्रेल्स को इकट्ठा किए बिना लॉ इंफोर्समेंट बॉडीज के लिए मनी लरिंग के इस थर्ड स्टेज पे ब्लैक मनी को ट्रेस करना लगभग इंपॉसिबल हो जाता है दोस्तों यहां तक हमने मनी लरिंग की मॉडज ऑपरेंडी की वेरियस स्टेजेस के बारे में समझा अब हम डिस्कस करते हैं मनी लरिंग करने की अलग-अलग टेक्निक्स के बारे बारे में डिफरेंट टेक्निक्स यूज फॉर मनी लरिंग पहला है थर्ड पार्टी चेक दोस्तों हालांकि ये टेक्नीक काफी पुरानी है और बैंकिंग रूल्स के चेंज हो जाने की वजह
से अब चलन में नहीं है लेकिन फिर भी हमारे इस डिस्कशन की सबसे पहली मनी लरिंग टेक्नीक है थर्ड पार्टी चेक्स के माध्यम से होने वाली मनी लरिंग आप बैंकिंग सिस्टम में यूज़ होने वाली चेक्स के बारे में तो जानते ही होंगे जिसमें एक पर्सन या ऑर्गेनाइजेशन किसी दूसरे पर्सन या ऑर्गेनाइजेशन को कैश में पेमेंट देने के बजाय पेबल अमाउंट का एक चेक रिलीज करती है जिस चेक को रिसीव करने वाली पार्टी बैंक को देकर इनडोर्स अमाउंट क्लेम कर सकती है लेकिन इसी सिंपल सी प्रोसेस में कई बार एक कैच ऐड कर दिया जाता है
उसके द्वारा रिसीवर के नाम या अकाउंट की जगह किसी थर्ड पार्टी के लिए वो चेक रिलीज कर दिया जाता है इस तरह के काउंटर चेक को थर्ड पार्टी चेक कहते हैं हालांकि इस तरह के चेक्स को बहुत से बैंकिंग सिस्टम स्वीकार नहीं करते या अगर करते भी हैं तो इनमें ओरिजिनल चेक रिलीज करने वाले व्यक्ति का एंडोर्समेंट जरूरी है लेकिन फिर भी अभी भी कुछ बैंकिंग सिस्टम इस तरह के चेक्स एक्सेप्ट करते हैं और इससे मनी लरिंग का जरिया बनते हैं दूसरी टेक्नीक है कैनोज एक समय में कैनोस के कैश इंटेंसिव बिजनेस को भी मनी
लरिंग का अड्डा माना जाता था खास तौर पर नॉर्थ अमेरिका के कैसीनो अपनी पॉपुलर की वजह से हाई ट्रांजैक्शन वॉल्यूम और फ्रीक्वेंसी के चलते मनी लरिंग का एक आसान माध्यम बन गए थे दोस्तों नॉर्थ अमेरिका के कैसीनो बिजनेस और इनके इनॉरमस कैश पाइल्स का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि 2010 तक ग्लोबल कैसीनो बिजनेस का 50 पर अकेले नॉर्थ अमेरिका में होता था टेक्निक नंबर तीन है स्मर्फिंग एंड क्रेडिट कार्ड्स दोस्तों जैसा हमने आपको मनी लरिंग के स्टेजेस को डिस्कस करते समय बताया कि अलग-अलग बैंक अकाउंट्स में छोटे अमाउंट के डिपॉजिट्स के
जरिए वाइट किया जाता है जनरली ऐसा करने के लिए मल्टीपल डिपॉजिटर्स या स्मर्फ का इस्तेमाल किया जाता है जो अलग-अलग नामों से छोटे-छोटे अमाउंट डिपॉजिट करके एक लार्ज अमाउंट को ब्लैक से वाइट में कन्वर्ट करते हैं टेक्नीक नंबर चार क्रेडिट कार्ड इसी तरह कैश पेमेंट के जरिए क्रेडिट कार्ड से क्रेडिट क्रिएट करके मनी लरिंग की जाती है यही नहीं टॉप अप या प्रीपेड कार्ड जैसे गिफ्ट कार्ड्स के जरिए भी ब्लैक कैश को लीगल वाइट मनी में बदला जाता है टेक्नीक नंबर पांच ओपन मार्केट सिक्योरिटीज दोस्तों सिक्योरिटीज मार्केट में कुछ इंस्ट्रूमेंट ऐसे भी हैं जिनमें इन्वेस्टमेंट
के सोर्स के डिस्क्लोजर को लेकर आज भी अप्रोच फ्लेक्सिबल है इसका फायदा उठाकर इन इंस्ट्रूमेंट्स के जरिए भी मनी लरिंग की जाती है उदाहरण के लिए मनी लांडरर्स अक्सर पार्टिसिपेटरी नोट्स और हेज फंड्स के जरिए ब्लैक मनी को सिक्योरिटी मार्केट में इन्वेस्ट कर देते हैं टेक्निक नंबर सिक्स शेल कंपनीज दोस्तों अक्सर आप न्यूज़ में शेल कंपनीज या पेपर कंपनीज के बारे में पढ़ते ही होंगे कि कैसे स्मॉल स्केल कंपनी से लेकर बड़े-बड़े कॉरपोरेट हाउसेस भी फेक या डमी पेपर कंपनीज बनाकर अपने प्रॉफिट के ऑफ सेटिंग से लेकर ब्लैक मनी को हाइड करने का काम करते
हैं ऐसे में शेल कंपनीज भी मनी लरिंग का एक प्रॉमिनेंट मीडियम बन जाती हैं टेक्निक नंबर सात हवाला इन सभी इंस्ट्रूमेंट के अलावा मनी लरिंग का एक ऐसा जरिया भी है जिसका इतिहास सैकड़ों साल पुराना है जी हां यह शुरू तो लॉन्ग डिस्टेंस मनी ट्रांसफर या रेमिटेंस के एक माध्यम के रूप में हुआ था लेकिन आज मनी लरिंग में इसकी टेंटेड रेपुटेशन की वजह से इसे इल्लीगल नोटिफाई कर दिया गया है हम बात कर रहे हैं हवाला की दोस्तों ऐसा माना जाता है कि हवाला सिस्टम के वशन की शुरुआत इंडिया में ही एथ सेंचुरी में
हुई थी जब इंडिया और अरब ट्रेडर्स के बीच पेमेंट सेटलमेंट के लिए इस मेथड को यूज किया जाता था यहां हम आपको याद दिला दें कि भारत हमेशा से ही वर्ल्ड ट्रेड का एक एपीसेंटर रहा है यही नहीं एंसेट सिल्क रोड और समुद्री रास्तों के जरिए दुनिया भर में भारत से बहुत सा सामान लाया और ले जाया जाता रहा है ऐसे में लॉजिस्टिक इश्यूज और लूट से बचने के लिए व्यापारी बड़े पेमेंट के सेटलमेंट हवाला के माध्यम से ही किया करते थे चलिए हम इस हवाला ट्रांजैक्शन को एक एग्जांपल के माध्यम से समझने की कोशिश
करते हैं और ध्यान रहे कि यह कहानी उस समय की है जब दुनिया में फॉर्मल बैंकिंग या फाइनेंशियल सिस्टम मौजूद नहीं था मान लीजिए कि अहमदाबाद में रहने वाले रमेश को दुबई में रहने वाले महेंद्र के पास कुछ पैसे भेजने हैं तो ऐसे में रमेश अहमदाबाद के हवाला ब्रोकर या हवाला दार के पास जाकर अपने पैसे जमा कर देता है साथ ही वह उस हवाला दार के पास एक खुद का बनाया हुआ पासवर्ड भी देता है जिसके बाद अहमदाबाद का हवाला दार दो दुबई में बैठे अपने हवाला दार तक यह संदेश और पासवर्ड पहुंचा देता
है अब दुबई में अगर महेंद्र को यह पैसे लेने होते थे तो वह दुबई के हवाला दार के पास जाकर रमेश द्वारा उसे बताया गया पासवर्ड बताकर भेजा हुआ पैसा कलेक्ट कर सकता था इस पूरे ट्रांजैक्शन के लिए दोनों हवाला दार रमेश और महेंद्र से अपना-अपना कमीशन कलेक्ट किया करते थे अब आप कहेंगे कि सिस्टम में ऐसा क्या खास है तो हम आपको बता दें कि सिस्टम में एक पैसा भी इधर-उधर नहीं होता यानी अहमदाबाद के हवाला दार ने अपने संदेश वाहक से केवल पासवर्ड और अमाउंट की वैल्यू ही दुबई में बैठे हवाला दार को
पहुंचाई थी ना कि एक्चुअल मनी ऐसे में सिस्टम के लिए एक फेमस फ्रेज इस्तेमाल किया जाता है वो है मनी ट्रांसफर विदाउट मनी मूवमेंट क्योंकि ये पूरा सिस्टम हवाला दार के बीच के इंटरनल ट्रस्ट और लेटर डेट पे ट्रांजैक्शन सेटलमेंट पर आधारित है जिसमें पैसे भेजने और रिसीव करने वाले के बारे में किसी तरह का कोई पेपर ट्रेल या रिकॉर्ड नहीं रखा जाता है लेकिन आपको शायद यह जानकर आश्चर्य होगा कि सैकड़ों साल पहले फाइनेंशियल सिस्टम और ट्रेडिशनल बैंकिंग फैसिलिटी के अभाव में शुरू हुआ यह हवाला सिस्टम आज भी बना हुआ है जिसके माध्यम से
आज भी इल्लीगल मनी ट्रांसफर और रेमिटेंस सेंड और रिसीव किए जाते हैं जिससे यह मनी लरिंग का एक इंपॉर्टेंट एस्पेक्ट बन गया है यही कारण है कि इस प्रोसेस को इंडियन लॉस के अकॉर्डिंग इल्लीगल माना जाता है दोस्तों जैसा हमने आपको बताया कि हवाला की मदद से होने वाले ट्रांजैक्शन में किसी भी तरह का कोई भी पेपर ट्रेल यह रियल ट्रांजैक्शन नहीं होता जिस वजह से इस सिस्टम में मनी की मूवमेंट और उसमें इवॉल्वड पार्टीज को इंटरसेप्ट करना मुश्किल हो जाता है लेकिन उससे ताज्जुब की बात यह है कि सैकड़ों साल से फैला हुआ यह
नेटवर्क आज अपने आप में एक पैरेलल बैंकिंग सिस्टम ही नहीं बल्कि बुलियन और जेम मार्केट बन गया है जिसकी अपनी एक पैरेलल इकोनॉमी चल रही है यही कारण है कि यह हवाला दार सिर्फ पैसे में ही नहीं बल्कि गोल्ड डायमंड्स और दूसरे वैल्युएबल आइटम्स में भी ट्रांजैक्शन करने लगे हैं इसका एक बड़ा कारण रिलायबल और हेसल फी ट्रांजैक्शन और हवाला द्वारा कन्वेंशनल बैंकिंग और रेमिटेंस सिस्टम से बेटर एक्सचेंज रेट्स प्रोवाइड करना भी है ऐसे में अब यह सिर्फ मनी लरिंग का जरिया ही नहीं बल्कि इलिसिट ट्रेड और डार्क इकोनॉमी का भी प्राइम सेंटर बनते जा
रहा है दोस्तों अब तक हमने जाना मनी लरिंग और उसे परफॉर्म करने की कन्वेंशनल टेक्निक्स के बारे में अब हम अपने इस डिस्कशन में आगे बढ़ते हुए डिस्कस करेंगे मनी लरिंग के न्यूली इवॉल्विंग मेथड्स और मनी लरिंग के इल इफेक्ट्स और नेगेटिव रिपर कुशंस के बारे में तो चलिए बिना किसी देरी के हम आज का अपने ये डिस्कशन आगे बढ़ाते हैं इवॉल्विंग टेक्निक ऑफ मनी लरिंग राउंड ट्रिपिंग थ्रू टैक्स हेवनस दोस्तों टक्स हेवन उन कंट्रीज को कहा जाता है जो फॉरेन बिजनेसेस और इंडिविजुअल्स को उनके बैंक डिपॉजिट्स या बिजनेस ट्रांजैक्शन इन कंट्रीज के थ्रू करने
पर मिनिमल या जीरो टैक्स लायबिलिटी की सुविधा प्रोवाइड कराती हैं उदाहरण के लिए ब्रिटिश वर्जन आइलैंड केमन आइलैंड बरमूडा इत्यादि जैसे देश फॉरेन बिजनेसेस और इंडिविजुअल्स को इस तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं इसीलिए इन कंट्रीज को टैक्स हेवन कहा जाता है क्योंकि जैसा हमने आपको बताया कि बिजनेस एंटिटीज और इंडिविजुअल्स को अपने ट्रांजैक्शंस और डिपॉजिट्स यहां शिफ्ट करने पर मैक्सिमम टैक्स बेनिफिट्स होते हैं अगर आप टैक्स हेवन कंट्रीज की लिस्ट पर गौर करें तो आप पाएंगे कि इनमें से ज्यादातर कंट्रीज छोटे या आइलैंड नेशंस हैं जिनकी इकोनॉमी मुख्यता टूरिज्म पर ही बेस्ड है एसेम
इन कंट्रीज द्वारा ऐसी सुविधा प्रोवाइड कराने का एक बड़ा रीजन अपने देश में फॉरेन इन्वेस्टमेंट और बिजनेस डिपॉजिट्स को बढ़ावा देना है ताकि इनके माध्यम से व अपनी इकोनॉमी को बूस्ट दे सकें वहीं बीते कुछ दशकों में इन सो कॉल्ड टैक्स हेवन देशों की तेजी से बढ़ोतरी हुई है जिसके चलते बिजनेस एंटिटीज और इंडिविजुअल्स के लिए अथॉरिटीज की नजरों से बचकर अपनी टैक्स लायबिलिटीज का एवेजन करना या इनके थ्रू टैक्स ररूटिंग करके अपनी ब्लैक मनी को लडर करना आसान हो गया है राइजिंग ईपेमेंट सर्विसेस दोस्तों क्या आपने कभी गौर किया है कि आजकल हम सभी
ईपेमेंट सर्विसेस का प्रयोग किस धड़ल्ले से कर रहे हैं जहां हम पहले कैश को स्टोर करने या किसी पेमेंट के लिए उसे सेफली कैरी करने के लिए परेशान रहते थे वहीं अब हमारी ये सारी दिक्कतें ईपेमेंट्स के जरिए आसान हो गई हैं यही नहीं कैश के घटते प्रयोग से गवर्नमेंट एजेंसीज के लिए भी ट्रांजैक्शंस को मॉनिटर करना आसान हो गया है लेकिन इस ईज ऑफ सर्विस का एक फ्लिप साइड भी है नॉन कैश पेमेंट मेथड्स जैसे प्रीपेड कार्ड्स इंटरनेट पेमेंट्स और मोबाइल पेमेंट्स ने मनी लॉडर्स के लिए अपने काम को अंजाम देने के नए रास्ते
भी खोल दिए हैं लगातार तेज होती ट्रांजैक्शन स्पीड और ट्रांजैक्शन इनिशिएटिव पर के बीच मिनिमल फेस टू फेस इंटरेक्शन ने इन न्यू पेमेंट मोड्स को मनी लरिंग एक्टिविटीज के लिए और भी ज्यादा वल्नरेबल बना दिया है ट्रेड बेस्ड मनी लांडरर्स ट्रेड सिस्टम की कॉम्प्लेक्शन और खास तौर पर इंटरनेशनल कॉन्टेक्स्ट में मल्टीपल पार्टीज और जूरिस जिक्स के इवॉल्वमेंट का फायदा उठा लेते हैं यही नहीं कॉम्प्लेक्शन की वजह से चैलेंजिंग सीसीडी यानी कंज्यूमर ड्यू डिलिजेंस प्रोसीजर्स और एएमएल यानी एंटी मनी लरिंग चेक्स के लूप होल्स आसानी से धूड़ लेते हैं जिसकी वजह से ऑपरेशनल ट्रांसपेरेंसी और फाइनेंशियल
ईज को बढ़ाने के लिए लाई गई डिजिटल और ई सर्विसेस टेक्नोलॉजी इनके हाथों का हथियार बन जाती है अब बात क्रिप्टो करेंसी की राइज ऑफ क्रिप्टो क्रिटो करेंसी एंड मनी लरिंग दोस्तों आपने क्रिप्टोकरेंसीज जैसे बिटकॉइन इथरियस इत्यादि के बारे में तो सुना ही होगा अगर नहीं भी सुना तो हम आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी पर बेस्ड ये अनरेगुलेटेड करेंसीज बीते कुछ सालों में तेजी से पॉपुलर हुई हैं यही नहीं इन्हीं की तरह ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी पर बेस्ड एनएफटी यानी नॉन फंबल टोकेंस भी आजकल करेंसी या एसेट अमूलेट्स की तरह इस्तेमाल होने लगी
हैं ऐसे में पब्लिक के बीच इनकी बढ़ती पॉपुलर और अनरेगुलेटेड स्ट्रक्चर की वजह से ये क्रिप्टोकरेंसीज और एनएफटी मनी लरिंग का सोर्स और डेस्टिनेशन दोनों बनती जा रही हैं यानी लांडरर्स जहां एक और ब्लैक मनी को क्रिप्टो करेंसी में कन्वर्ट करके उनका अनरेगुलेटेड यूज कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर ये अपने इलीगली ऑक्यूपाइड एसेट्स को एनएफटी में बदलकर स्टोर भी कर रहे हैं यही नहीं लॉ इंफोर्समेंट एजेंसीज की पड़ताल में यह बात भी सामने आई है कि दुनिया भर में बढ़ते ब्लैक मार्केट्स एक्सटॉर्शन रैकेट्स रॉबरीज आर्म्स डीलिंग इत्यादि में भी धड़ल्ले से क्रिप्टोकरेंसीज का इस्तेमाल
हो रहा है चलिए अब ये तो बात हुई मनी लरिंग के न्यूली इमर्जिंग तरीकों की अब हम अपने डिस्कशन में आगे बढ़ते हैं मनी लरिंग के इंपैक्ट्स की तरफ जिसके चलते ये इंटरनल सिक्योरिटी के टॉपिक के लिए इंपॉर्टेंट हो जाता है हम यह भी जानने की कोशिश करेंगे कि आखिर मनी लरिंग ने कैसे क्राइम का अपना एक पूरा मल्टीवर्स बना रखा है इंपैक्ट ऑफ मनी लरिंग दोस्तों चूंकि मनी लरिंग के प्रभाव मल्टी डायमेंशन है तो हम इन्हें एक-एक करके समझने की कोशिश करते हैं मनी लरिंग एंड इकोनॉमिक रिपर कशंस दोस्तों अगर हम मनी लरिंग के
इकोनॉमिक एस्पेक्ट से होने वाली इंपैक्ट की बात करें तो हमें इसके मल्टी डायमेंशन रिपेक शंस देखने को मिलते हैं अगर हम इसे नेशनल लेवल पर गेज करने की कोशिश करें तो हम पाएंगे कि इन रिप केशन में सबसे बड़ा है हमारे देश के टैक्स कलेक्शन में आने वाली कमी और इसके चलते होने वाला फिस्कल प्लान का फेलियर जब भी गवर्नमेंट देश के सोशल या इकोनॉमिक डेवलपमेंट के लिए कोई पॉलिसी या प्लान बनाती है तो उसे फंड करने के लिए वो टैक्सेस या दूसरे नॉन टैक्स सोर्सेस से रेवेन्यू जनरेट करने के लिए भी एक ब्रॉड स्केल
प्लान डेवलप करती है लेकिन मनी लरिंग और टैक्स इ वेजन प्रैक्टिस की वजह से जहां एक और देश का राजकोषीय घाटा या फिस्कल डेफिसिट बढ़ जाता है तो वहीं फंड की कमी की वजह से पूरे प्लान का इंप्लीमेंटेशन भी फेल हो जाता है यही नहीं इस वजह से सोसाइटी में इकोनॉमिक डेप्रोसिस बिलिटी क्रिएट करता ता है और इंटरनल सिक्योरिटी थ्रेट्स पड़ जाते हैं ऐसे में पॉलिसी डिस्टॉर्शन को रोकने के लिए गवर्नमेंट अपने बिजनेस अकाउंट और वर्किंग स्क्रूटनी फ्रेमवर्क को और ज्यादा मजबूत करना पड़ता है जिसके चलते हमारे देश का ईज ऑफ डूइंग बिजनेस कोश नेगेटिवली
इफेक्ट होता है इसे हम ऐसे समझ सकते हैं कि इन सब की वजह से बेईमानों की गलती की सजा ऑनेस्ट बिजनेस ओनर्स भी चुकाते हैं यही नहीं मनी लरिंग की वजह से बढ़ती अनअकाउंटेड करेंसी के कारण टैक्सेशन का बर्डन भी ईमानदार जनता पर पड़ता है वहीं अगर हम मनी लरिंग के रिपर कशंस को इंटरनेशनल लेवल के पर्सपेक्टिव से देखें तो हम पाएंगे कि मनी लरिंग करने के लिए फाइनेंशियल नेटवर्क से लार्ज अमाउंट में पैसा यहां से वहां भेजने की वजह से इंटरनेशनल फाइनेंशियल मार्केट की वोलेट भी बढ़ जाती है यही नहीं इस अनअकाउंटेड मनी के
सर्कुलेशन से बढ़ी इस मार्केट वोलेट की वजह से इन्वेस्टर्स का मार्केट में कॉन्फिडेंस भी नेगेटिवली इफेक्ट होता है जो लॉन्ग टर्म में पूरे मार्केट को नुकसान पहुंचाता है क्योंकि इससे इन्वेस्टर्स और मार्केट दोनों के पोटेंशियल पर बुरा असर पड़ता है वहीं दूसरी ओर मनी लरिंग करने के लिए किए जा रहे फाइनेंशियल फ्रॉड की वजह से दुनिया भर की फाइनेंशियल सिस्टम की रेगुलेटिंग बॉडीज और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन की रेपुटेशन पर भी बुरा असर पड़ता है मनी लरिंग एंड सिक्योरिटी कंसर्न्स दोस्तों कोई भी बिजनेस स्टार्ट करने के लिए एक व्यक्ति की कुछ ना कुछ कैपिटल रिक्वायरमेंट होती है
जिसे पूरा करने के लिए वह या तो अपनी निजी संपत्ति बेचकर पैसे जुटा आता है या फिर बैंक से लोन लेता है इस इनिशियल कैपिटल अमाउंट को सीड कैपिटल कहा जाता है ठीक उसी तरह ब्लैक मनी और मनी लरिंग की यह जोड़ी के माध्यम से कायम हुआ पैसा ऑर्गेनाइज्ड क्राइम और दूसरी इल्लीगल एक्टिविटीज के लिए सीट कैपिटल का काम करता है यही नहीं बहुत से एक्सपर्ट रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि दुनिया भर में फैली आर्म्स डीलिंग ऑर्गेनाइज्ड माफिया क्राइम टेरर फाइनेंसिंग ड्रग एंड सेक्स ट्रैफिकिंग जैसी लार्ज स्केल इलीगल एक्टिविटीज मनी लरिंग के
द्वारा ही फाइनेंस की जाती हैं ऐसे में हम कह सकते हैं कि इन सभी का रूट कॉज मनी लरिंग ही है ऐसे में जब तक मनी लरिंग और ब्लैक मनी के क्रिएशन को नहीं रोका जाएगा तब तक इन इल्लीगल एक्टिविटीज को रोकना नामुमकिन है फंडिंग देश के ऑलमोस्ट सभी तरह के इंटरनल सिक्योरिटी थ्रेट्स को सस्टेन करती है और मनी लरिंग उस फंडिंग का ही एक जरिया है जिसे रोकना इंटरनल सिक्योरिटी को इंश्योर करने के लिए एक बड़ा उपाय है मनी लरिंग एंड पॉलिटिकल इंबैलेंस दोस्तों ब्लैक मनी का क्रिएशन और फिर मनी लरिंग के थ्रू इसका
लीगलाइजेशन जहां एक और ऑर्गेनाइज क्राइम को बढ़ावा देता है तो वहीं दूसरी ओर भारत के राजनीतिक तंत्र को भी खोखला बनाने का काम कर करता है क्योंकि इलिसिट मनी क्रिएशन और टैक्स एवेजन से जहां एक और देश का लॉस ऑफ रेवेन्यू होता है वहीं दूसरी ओर इसकी वजह से जो पैसा जनता की भलाई के लिए खर्च होना चाहिए था वो लीगल मनी सप्लाई से ही गायब हो जाता है ऐसे में अंतता इसका खामियाजा जनता को ही भुगतना पड़ता है यही नहीं अक्सर इस इलिसिट मनी से ऑर्गेनाइज्ड क्राइम का ऐसा नेटवर्क बना लिया जाता है जो
देश के पॉलिटिकल स्ट्रक्चर के लिए भी खतरा बन जाता है उदाहरण के लिए हम देश के कुछ हिस्सों में फैले नक्सलिज्म और इंसर्जनल ज्म की बात कर सकते ते हैं जो ब्लैक मनी और मनी लरिंग के इसी कुचक्र के बल पर फल फूल रहे हैं जो इसी मनी पावर के बल पर एक पैरेलल गवर्नमेंट तक बना लेते हैं जो इसी इलीगल मनी के बल पर देश की चुनी हुई सरकार को टक्कर देने लगते हैं वहीं दूसरी ओर अनअकाउंटेड मनी और मनी लरिंग पूरी इलेक्शन प्रोसेस को भी नेगेटिवली अफेक्ट करता है जनवरी 2020 में छपी द
प्रिंट की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में 2500 से ज्यादा पॉलिटिकल पार्टीज रजिस्टर्ड थी इस आंकड़े को देखते हुए देश के इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया से इन पार्टीज के रेगुलेशन को लेकर कदम उठाने की मांग की थी क्योंकि आईटी डिपार्टमेंट को शक था कि इनमें से ज्यादातर पॉलिटिकल पार्टीज केवल फंड्स की हेरफेर और मनी लरिंग करने के लिए बनाई गई हैं यही नहीं सितंबर 2022 में आईटी डिपार्टमेंट में 25 अन रिकॉग्नाइज पॉलिटिकल पार्टीज के खिलाफ मनी लरिंग के केसेस में सैकड़ों करोड़ रुपए की जपती भी की थी ऐसे में हम कह
सकते हैं कि यह मनी किस तरह से हमारे देश के डेमोक्रेटिक स्ट्रक्चर को अंदर से खोखला कर रहा है मनी ल ंग एंड मोरल डिग्रेडेशन ऑफ सोसाइटी दोस्तों जैसा हमने अब तक के अपने डिस्कशन में देखा कि कैसे मनी लरिंग सोसाइटी में बहुत से क्राइम्स और दूसरे इलीगल एक्टिविटीज का रूट कॉस है जो इन सबके लिए एक फ्यूल का काम करता है ऐसे में जहां इससे एक और सोसाइटी में क्राइम ड्रग एडिक्शन स्मगलिंग जैसे क्राइम्स बढ़ते हैं तो वहीं दूसरी ओर इसे सोसाइटी का मोरल डिग्रेडेशन भी देखने को मिलता है क्योंकि सोसाइटी में इकोनॉमिक पावर
राइट और लीगली रनिंग बिजनेस के हाथों से निकलकर इलीगली रनिंग रैकेट्स और डिस्टोर्टेड बिजनेस प्रैक्टिसेस अपनाने वाले लोगों के हाथों में चली जाती है जिससे करप्टेड और क्रिमिनल मेंटालिटी को बढ़ावा मिलता है जो लंगर टर्म में किसी भी सोसाइटी के इकोनॉमिक और मोरल डेवलपमेंट के लिए घातक है दोस्तों अब बात ग्लोबलाइजेशन और मनी लरिंग के बीच के रिश्ते की इंपैक्ट्स ऑफ ग्लोबलाइजेशन ऑन मनी लरिंग दोस्तों बीते एक दशक में फाइनेंशियल इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और कम्युनिकेशन के फील्ड में आए डेवलपमेंट की वजह से आज पलक झपकते ही दुनिया में कहीं भी बैठे-बैठे पैसे को एक एक जगह
से दूसरी जगह भेजा जा सकता है लेकिन फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन की फील्ड में आई इस क्रांति की वजह से ही मनी लरिंग जैसे क्राइम को रोकना और भी जरूरी हो गया है क्योंकि इलिसिट वे से कमाया हुआ यह ब्लैक मनी इन ट्रांजैक्शन चैनल्स के थ्रू इंटरनेशनल बैंकिंग सिस्टम में जितना डीप पहुंचता जाएगा इसके ओरिजिन को आइडेंटिफिकेशन एट द एंड डॉलर में कन्वर्ट होती है ऐसे में मनी लरिंग के ट्रेल को ट्रेस करना और भी मुश्किल होता जा रहा है साथ में जैसा हमने अपने डिस्कशन में देखा न्यूली इमर्जिंग डिजिटल टेक्नोलॉजीज और तेजी से बढ़ती डिजिटल इकोनॉमी
इस काम को और भी मुश्किल बना रही हैं ऐसे में मनी लरिंग को ट्रेस करना और उसे रोकना बेहद जरूरी है जिसके लिए आज के ग्लोबलाइज्ड वर्ल्ड में ग्लोबल मैकेनिज्म और ग्लोबल एफर्ट की जरूरत है अब हम आगे बढ़ेंगे और देखेंगे कि आखिर ऑर्गेनाइज्ड क्राइम इन रियलिटी किस तरीके से फंक्शन करता है और उसके रिश्ते टेररिज्म के साथ किस तरह से ऑपरेट करते हैं हम ऑर्गेनाइज्ड क्राइम के टेररिज्म के साथ लिंकेजेस को इवेलुएट करेंगे साथ में हम एग्जांपल्स के थ्रू यह भी जानेंगे कि आखिर ग्लोबल लेवल पर और इंडियन सिचुएशन में यह किस तरह से
एजिस्ट करता है और अलग-अलग रीजंस में इस लिंकेज का नेचर किस तरह से अलग या सिमिलर है तो चलिए शुरू करते हैं नीड टू एग्जामिन द लिंकेजेस टेररिज्म और ऑर्गेनाइज्ड क्राइम के बीच के लिंकेजेस को समझना हमारे लिए इसीलिए आवश्यक है क्योंकि एक एस्पायरिंग पॉलिसी मेकर के लिए इस पूरी समस्या को ठीक तरह से समझना उसे इफॉर्म डिसीजंस लेने में हेल्प करता है और इंटरनल सिक्योरिटी थ्रेट्स के खिलाफ लड़ने में मददगार साबित होता है नेशनल और इंटरनेशनल लेवल पर एक रोबट एंटी टेररिस्ट और एंटी क्रिमिनल पॉलिसी इस बात पर निर्भर करती है कि जिस समस्या
के खिलाफ हम लड़ रहे हैं उससे जुड़े हर एक छोटे-बड़े मुद्दे को हम डिटेल में समझे और साथ में उन मुद्दों के कोरिले शंस को भी जाने स्कॉलर्स का कहना है कि टेररिज्म और ऑर्गेनाइज्ड क्रिमिनल नेटवर्क्स के बीच के रिश्ते कई प्रकार के हो सकते हैं हैं उन कनेक्शन को हम एसोसिएशन यूनियन कोऑपरेशन सिंबायोसिस कवरेज और मेटामिनडी के रिश्ते काफी कॉम्प्लेक्शन हैं कुछ जगहों में आप देखेंगे कि यह दोनों एक दूसरे से अलग-अलग यानी सिलोज में ऑपरेट करते हैं और इनके बीच में कोई खास संबंध नहीं होता लेकिन आज के दौर में यह रेयरली ही
होता है कुछ जगहों में आप पाएंगे कि इनके बीच एक अलायंस एजिस्ट करता है जहां ये दोनों एक दूसरे के नेटवर्क्स का इस्तेमाल करते हैं और एक दूसरे की मदद करते हैं थ्रू फाइनेंसिंग सोर्सिंग ऑफ वेपंस एक्सट्रा और कुछ जगह आप यह भी पाएंगे कि इन दोनों में कोई खास अंतर नहीं होता और एक टेररिस्ट ग्रुप और ऑर्गेनाइज्ड क्राइम ग्रुप में अंतर एस्टेब्लिश कर पाना कठिन हो जाता है इस सिचुएशन को हम कन्वर्जेंस कहते हैं और कुछ स्कॉलर्स इसे ब्लैक होल सिंड्रोम भी कहते हैं एक मॉडल के हिसाब से टेरर ग्रुप्स और ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एक
इवोल्यूशनरी पाथ को फॉलो करते हैं पहले स्टेज में वो दोनों सिलोज में ऑपरेट करते हैं दूसरे स्टेज में वो एलायंसेज फॉर्म करते हैं तीसरे स्टेज में वो एक दूसरे के मेथड्स का इस्तेमाल करते हैं अपने गोल्स को अचीव करने के लिए फॉर एग्जांपल ऑर्गेनाइज्ड क्रिमिनल ग्रुप्स टेरर का इस्तेमाल अपने कमर्शियल गोल्स के लिए करते हैं या फिर टेरर ग्रुप्स ऑर्गेनाइज्ड क्राइम में इवॉल्व होकर फाइनेंसिंग सिक्योर करते हैं और अपने पॉलिटिकल गोल्स को अचीव करने की कोशिश करते हैं चौथे स्टेज में कन्वर्जेंस होता है औरन दोनों ग्रुप्स को डिफरेंशिएबल टेररिस्ट गैंग से बिल्कुल भी अलग नहीं
होता अब बात करते हैं कुछ एग्जांपल्स की जिसके थ्रू हम इस पूरे फिनोम को अच्छे से समझ पाएंगे एग्जांपल्स फ्रॉम इंडिया एंड द वर्ल्ड दोस्तों इवोल्यूशनरी मॉडल को समझने का सबसे अच्छा एग्जांपल है डी कंपनी का जिसकी शुरुआत छोटे-छोटे एक्सटॉर्शन किडनैपिंग और स्मगलिंग जैसे बिजनेसेस से हुई थी धीरे-धीरे इसने अपने गैंग को एक्सपेंड किया और आईएसआईई उसके द्वारा फंडेड संगठनों के साथ एलायंसेज फॉर्म किए और उन्हें वेपंस और फाइनेंसिंग प्रोवाइड करने लगा फिर एक समय ऐसा आया जब वह खुद टेररिस्ट ग्रुप्स की तरह बिहेव करने लगा और 1993 के मुंबई ब्लास्ट में उसका सीधा-सीधा हाथ
दुनिया के सामने आया ऐसा ही सिमिलर एग्जांपल तालिबान का है तालिबान जो पहले एक इंसर्जनल था उसने धीरे-धीरे खुद के एलायंसेज लोकल ड्रग लॉट्स के साथ बिल्ड किए फाइनेंसिंग सिक्योर करने के लिए फिर एक समय ऐसा आया जब कई तालिबान लीडर्स खुद ड्रग ट्रैफिकिंग बिजनेसेस और ओपीएम प्रोडक्शन में इवॉल्व हो गए यूएनओडीसी की रिपोर्ट के हिसाब से धीरे-धीरे अफगानिस्तान का 86 पर ओपीएम प्रोडक्शन तालिबान के कंट्रोल में चला गया अफ्रीका में बोको हरम नामक डेंजरस टेरर ग्रुप एक्टिवली स्मगलिंग से लेकर चाइल्ड ट्रैफिकिंग ऑर्गन ट्रैफिकिंग और ह्यूमन ट्रैफिकिंग जैसे ऑर्गेनाइज्ड क्राइम नेटवर्क के साथ जुड़ा हुआ
पाया गया है कुछ रिपोर्ट्स का दावा है कि 2015 में हुए पेरिस अटैक्स में इंवॉल्वड अटैकर्स एक्टिवली ऑर्गेनाइज्ड क्राइम में इवॉल्व थे आईएसआईएस के लिंक्स ऑयल स्मगलिंग सोमालिया में एक्टिव टेररिस्ट ग्रुप अल शबाब के लिंक्स शुगर और चारकोल स्मगलिंग के साथ जोड़े जा चुके हैं साउथ अमेरिका में एक्टिव एआई क्यूएम खुद के फाइनेंसर्स को ड्रग ट्रैफिकिंग और बाकी के ऑर्गेनाइज क्रिमिनल गैंग से टैक्सेस वसूल करके करता हुआ आया है अब हम इंडिया के तीन मेजर एरियाज की तरफ चलेंगे जहां इंटरनल सिक्योरिटी थ्रेट सबसे ज्यादा है लिंकेजेस इन इंडिया स्टोरी ऑफ नॉर्थ ईस्ट जम्मू एंड कश्मीर
एंड लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिस्म दोस्तों सबसे पहले बात नॉर्थ ईस्ट की नॉर्थ ईस्ट इंडिया में एक्टिव टेरर ग्रुप्स का मेन सोर्स ऑफ फाइनेंसिंग एक्सटॉर्शन और किडनैपिंग जैसी एक्टिविटीज हैं जो ऑर्गेनाइज क्राइम ग्रुप्स के तरीके हैं इसके अलावा ह्यूमन ट्रैफिकिंग ड्रग ट्रैफिकिंग और गन रनिंग भी इस एरिया में काफी कॉमन है इस इलाके में इनसरजेंसीज रीजंस में यह देखा गया है कि ये टेरर ग्रुप्स गवर्नमेंट ऑफिशल्स को थ्रेटें करके या फिर ब्राइब करके उन्हें फोर्स करते हैं कि वह टेरर ग्रुप्स द्वारा पटनाइट्स बिजनेसमैन को गवर्नमेंट कांट्रैक्ट्स अवार्ड करें इसके अलावा ये ग्रुप्स कई तरह की एसेंशियल कमोडिटीज
जैसे राइस और फ्यूल को इलीगली चुराते हैं और उन्हें जनता को हायर प्राइसेस में बेचकर प्रॉफिट्स अर्न करते हैं यानी यहां इवोल्यूशन का तीन स्टेज देखा जा सकता है जहां टेरर ग्रुप्स ऑर्गेनाइज क्राइम के मेथड्स का इस्तेमाल करते पाए जाते हैं खैर कुछ स्कॉलर्स का दावा है कि नॉर्थ ईस्ट में टेररिज्म और ऑर्गेनाइज क्राइम अब कन्वर्जेंस के लेवल पर भी पहुंच गया है उदाहरण के तौर पर हम पीएलए जैसे टेररिस्ट ग्रुप की बात कर सकते हैं जो मणिपुर में एक्टिव है इसके चाइनीज स्मगलर्स और म्यानमार ऑर्गेनाइज गैंग्स के साथ लिंक्स तो है ही पर साथ
में यह खुद भी एक्टिवली ड्रग ट्रैफिकिंग से लेकर वेपन स्मगलिंग जैसे धंधों में लिप्त पाया गया है स्कॉलर्स का दावा है कि नॉर्थईस्ट के कई स्टेट्स में इंसर्जनल ने पास्ट में पैरेलल गवर्नमेंट एस्टेब्लिश किए थे जिसके चलते टेरर और ऑर्गेनाइज्ड क्राइम में कन्वर्जेंस आसान हो गया जम्मू एंड कश्मीर के सिक्योरिटी लैंडस्केप की बात करें तो वहां हम अलायंस के एग्जांपल ज्यादा दे पाते हैं और कन्वर्जेंस के एग्जांपल्स कम ऐसा इसलिए है क्योंकि जम्मू एंड कश्मीर में टेररिस्ट पैरेलल गवर्नमेंट इस्टैब्लिशमेंट टेरर ग्रुप्स जैसे इंडियन मुजाहिदीन जैश मोहम्मद और लश्करए तयबा लार्जली टेररिस्ट ग्रुप्स हैं और यह
डायरेक्टली ऑर्गेनाइज क्राइम में इवॉल्व होने की बजाय ऑर्गेनाइज क्राइम के साथ अलायंस बिल्ड करके खुद को सस्टेन करते हैं इसका एक कारण यह भी है कि इन्हें एक्टिवली बॉर्डर पार्ट से आईएसआई जैसे ऑर्गेनाइजेशंस फंडिंग प्रोवाइड करते रहे हैं और इस एक्सटर्नल सोर्स ऑफ फंडिंग के चलते उन्हें खुद के फंड्स को जनरेट करने की जरूरत नहीं पड़ी इसीलिए यहां लूटिंग किडनैपिंग जैसी एक्टिविटीज भी कम देखी जाती हैं पर नॉर्थ ईस्ट में एक्सटर्नल फंडिंग के सोर्सेस लिमिटेड होने के चलते उन्हें खुद को इवॉल्व करना पड़ा और ऑर्गेनाइज्ड क्राइम में एक्टिवली लिप्त होना पड़ा खैर जम्मू एंड कश्मीर
में काउंटर फिट करेंसी ड्रग ट्रैफिकिंग और हवाला चैनल्स के रास्ते फंडिंग को सिक्योर करना ये मेजर ऑर्गेनाइज्ड क्राइम्स हैं जिसके तहत टेररिस्ट खुद की फं इंश्योर करते हैं लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिस्म या फिर नक्सल प्रभावित इलाकों की बात करें तो वहां पर हमें और भी कॉम्प्लेक्शन देखने को मिलती है कुछ इलाकों में खुद की पैरेलल गवर्नमेंट चला रहे नक्सली एक्टिवली और डायरेक्टली ऑर्गेनाइज्ड क्राइम में लिपट पाए गए हैं कुछ रिपोर्ट्स ने तो यह भी दावा किया है कि झारखंड और उड़ीसा के कुछ इलाकों में नक्सल्स खुद के ओपियम फार्म्स भी मेंटेन करते रहे हैं इसके अलावा
ये अलायंस का इस्तेमाल भी करते हैं जैसे कि मणिपुर के पीएलए की मदद से यह वेपंस को सोर्स करते हैं यही नहीं इनके लिंक सिमी एलटी और जेएम जैसे टेरर ग्रुप्स के साथ भी रहे हैं ऐसा कुछ रिपोर्ट्स का दावा है नक्सल्स किडनैपिंग बैंक लूटिंग गन रनिंग ड्रग्स ट्रैफिकिंग इत्यादि की मदद से खुद को सस्टेन करते आए हैं इसीलिए हम कह सकते हैं कि आइडियो जिकल ग्राउंड्स पर शुरू हुआ यह उग्रवाद या एक्सट्रीमिस्म अब प्रॉफिट मोटिव्स और ऑर्गेनाइज क्राइम ग्रुप्स की तरह ऑपरेट करने लगा है तो दोस्तो हम आपको बता दें कि ड्रग ट्रैफिकिंग एक
अवैध व्यापार है जिसमें हीरोइन कोकेन मेरिज वाना स्मैक और रेगुलेटेड ड्रग्स जैसे मॉर्फिन का इल्लीगल ट्रेड शामिल है ये ड्रग्स उसका कंजमेट कर रख देते हैं इसके अलावा देश की इकोनॉमी और उसकी सिक्योरिटी सिचुएशन को भी बुरी तरह प्रभावित करते हैं ड्रग ट्रैफिकिंग ऑर्गेनाइज्ड क्राइम का सबसे बड़ा जरिया माना जाता है जिसके रास्ते टेररिस्ट अपनी फंडिंग को भी सोर्स करते हैं तालिबान जैसे ग्रुप्स पर तो आरोप है कि उसका पूरा सर्वाइवल ही ओप की खेती और उसके व्यापार पर टिका हुआ है लेकिन ये ड्रग्स की सोर्सिंग आखिर होती कहां से है चलिए देखते हैं दोस्तों
इन नशील पदार्थों या ड्रग्स का सोर्स अक्सर उन क्षेत्रों में होता है जहां यह उगाए जाते हैं इनमें गोल्डन ट्रायंगल यानी थाईलैंड लाउस और म्यानमार का ट्राई जंक्शन और गोल्डन क्रेसें जो अफगानिस्तान पाकिस्तान और ईरान के ट्राई जंक्शन में स्थित है यह एरियाज शामिल हैं ये दोनों इलाके एशिया में प्रमुख अफीम या ओपियम प्रोड्यूस ंग एरियाज हैं इसके अलावा अफीम की खेती और उसका व्यापार साउथ अमेरिका में भी होता रहा है लेकिन जैसे-जैसे वहां इंसर्जनल पड़ी ओपियम का व्यापार भी कम हुआ और यही वजह है कि अफगानिस्तान के पास स्थित गोल्डन क्रिसेंट आज के समय
में दुनिया का सबसे बड़ा ओपियम प्रोड्यूस ंग एरिया माना जाता है यूएनओडीसी की कई रिपोर्ट्स की माने तो गोल्डन क्रिसेंट में लोकेटेड अफगानिस्तान के इलाके दुनिया के 90 पर से भी ज्यादा ओपियम को सप्लाई करते हैं खैर भारत में नशीले पदार्थों की तस्करी मुख्य रूप से पाकिस्तान अफगानिस्तान और म्यानमार जैसे पड़ोसी देशों के साथ-साथ चाइना ईरान और गोल्डन क्रिसेंट के अन्य देशों से भी होती है यह देश ओपियो इड कैनाबिस और सिंथेटिक ड्रग्स जैसे अवैध प्रोडक्ट के प्रमुख उत्पादक हैं जिनकी जमीन से समुद्री एयर रूट और बॉर्डर्स के रास्ते भारत में इनकी तस्करी की जाती
है इल्लीगल ट्रांसबॉर्डर क्रिमिनल ग्रुप्स के साथ-साथ यह ट्रैफिकिंग पोस्टल सेवा और कोरियर कंपनीज के थ्रू भी होती आई है इसके अलावा नेपाल और बांग्लादेश के साथ पोरस बॉर्डर्स के माध्यम से भी इंडिया में ड्रग्स की तस्करी होती रही है कुछ ड्रग्स का प्रोडक्शन भारत के भीतर भी किया जाता है विशेष रूप से पूर्वोत्तर राज्यों और गोल्डन ट्रायंगल से आते इलाकों में और इन्हें वहां के इंसर्जनल है कुछ रिपोर्ट्स ये भी दावा करती हैं कि नक्सल प्रभावित इलाकों में भी सिक्योरिटी फोर्सेस ने कई बार ओपियम फार्म्स नोटिस किए हैं जिन्हें नक्सलवादियों का सपोर्ट मिलता है इसके
अलावा इंडिया में रेगुलेटेड ड्रग्स की फार्मिंग स्ट्रिक्ट रेगुलेशंस के अंडर कुछ कु जगहों में होती रही है जिसका इस्तेमाल मेडिकल फील्ड में होता है लेकिन इन प्रोडक्ट्स में भी अक्सर तस्करी की रिपोर्ट सामने आ जाती हैं इंडिया दुनिया का सबसे बड़ा जेनरिक मेडिसिन प्रोड्यूसर भी है और कुछ रिपोर्ट्स का दावा है कि यहां यूज होने वाले इंग्रेडिएंट्स को भी इलीगल तरीके से ड्रग एब्यूज मार्केट की तरफ सोर्स किया जाता है खैर सबसे बड़े सोर्स यानी गोल्डन क्रिसेंट की बात करें तो वो पश्चिमी और मध्य एशिया का एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें अफगानिस्तान ईरान और पाकिस्तान
जैसे देश शामिल हैं ये दुनिया के सबसे बड़े अफीम उत्पादक क्षेत्रों में से एक होने के लिए जाना जाता है अफगानिस्तान दुनिया में अफीम का सबसे बड़ा उत्पादक है और हीरोइन का एक प्रमुख सोर्स जबकि ईरान और पाकिस्तान में भी अफीम और हीरोइन का उत्पादन होता है लेकिन अफगानिस्तान से कम इन देशों में अवैध अफीम का उत्पादन एक कॉम्प्लेक्शन ऑफ फैक्टर्स की वजह से होता है जिसमें गरीबी इकोनॉमिक बैकवार्डनेस पॉलिटिकल इंस्टेबिलिटी टेररिज्म और ऑर्गेनाइज्ड क्रिमिनल ग्रुप्स का एक्जिस्टेंस शामिल है हम आपको बता दें कि इंडिया में अधिकांश नशीले पदार्थों की तस्करी पाकिस्तान के माध्यम से
होती है नशीली पदार्थों की तस्करी दोनों देशों के बीच लार्जली पोरस बॉर्डर से होती है और कई दफा यह हवाई और समुद्री मार्गों से भी होती है गोल्डन ट्रायंगल की बात करें तो वह साउथ ईस्ट एशिया का एक ऐसा इलाका है जिसमें थाईलैंड लाओस और म्यानमार शामिल है यह भी दुनिया के सबसे बड़े अफीम उत्पादक क्षेत्रों में से एक है और हीरोइन के प्रमुख सोर्स के रूप में जाना जाता है कहते हैं कि एक समय पर यह दुनिया का सबसे बड़ा अफीम उत्पादक क्षेत्र था लेकिन आज अफगानिस्तान ने इसे पीछे छोड़ दिया है गोल्डन ट्रायंगल
में अफीम को पहाड़ी क्षेत्रों में उगाया जाता है जहां इसे हीरोइन में सिंथेसाइज कर दुनिया भर में बेचा जाता है दोस्तों अब हम इंडिया के ड्रग एब्यूज प्रॉब्लम को समझने की कोशिश करते हैं ड्रग एब्यूज प्रॉब्लम ऑफ इंडिया ड्रग्स का भारत में उपयोग एक बड़ी समस्या है देश में इन इल्लीगल ड्रग्स के यूजर्स की एक बड़ी आबादी एजिस्ट करती है एम्स में स्थित नेशनल ड्रग डिपेंडेंस ट्रीटमेंट सेंटर या एनडीडीटीसी के अनुसार इंडिया में लगभग 33 लाख लाख ओपियम यूजर्स और लगभग 85 लाख कैनाबिस यूजर्स के होने की आशंका बताई जाती है वर्ल्ड ड्रग रिपोर्ट 2022
की माने तो 2020 में इंडिया में फोर्थ लार्जेस्ट क्वांटिटी ऑफ ओपियम और थर्ड लार्जेस्ट अमाउंट ऑफ मॉर्फिन सीज हुए थे वर्ल्ड ड्रग रिपोर्ट 2021 का दावा यह भी है कि इंडिया में मेडिकली प्रिसक्राइब ड्रग्स और उनके इंग्रेडिएंट्स को डाइवर्ट कर उन्हें ड्रग अब्यूड़ोस और जेनरिक ड्रग मैन्युफैक्चरर है ड्रग अब्यूड़ोस के डेमोग्राफिक डिविडेंड का नुकसान होना ड्रग एब्यूज प्रॉब्लम को लेकर आज के वक्त में पंजाब सबसे ज्यादा बदनाम है जहां के यंगस्टर्स इसकी चपेट में आते जा रहे हैं हेल्थ ड्यूरेशन के मामले में ड्रग अब्यूड़ोस प्रॉब्लम सबसे अहम है हेल्थ पर इंपैक्ट पड़ने के साथ-साथ इन
ड्रग्स का इंपैक्ट लोगों की लॉन्ग टर्म कैपेबिलिटीज और प्रोडक्टिविटी पर भी पड़ता है जिससे उनकी एंप्लॉय बिलिटी कम होती है और समाज में बेरोजगारी बढ़ती है जो एक बड़ी सामाजिक समस्या है ड्रग ओवरडोज के चलते मृत्यु होने का खतरा भी बना रहता है इसके अलावा ड्रग एब्यूज सोशल डिसऑर्डर और सोसाइटी के एथिकल फ्रेमवर्क को भी डिस्ट्रॉय कर देता है जिसके चलते अपराध सामाजिक लेवल पर फैल जाता है और सिक्योरिटी प्रॉब्लम्स बढ़ती ही जाती हैं ऑर्गेनाइज ग्रुप द्वारा छेड़े गए खतरे को मैनेज करना पुलिस के लिए फिर भी कंपेरटिवली आसान होता है लेकिन जब क्राइम एक
सोसाइटी के लेवल पर प्रोलिफिक हो जाए तो उसे रोक पाना बहुत बड़ा चैलेंज बन जाता है खैर ड्रग अब्यूड़ोस के चलते एक पैरेलल इलीगल इकोनॉमी का जन्म होता है यूएनओडीसी की माने तो ड्रग ट्रैफिकिंग से जन्म लेने वाली पैरेलल इकोनॉमी की वैल्यू दुनिया की जीडीपी का लगभग 2 टू 5 पर है ये पैरेलल इकोनॉमी देश की फॉर्मल इकोनॉमी के लिए एक बड़ा खतरा बन जाती है आरबीआई द्वारा लिए जाने वाले इंफ्लेशन कंट्रोल मेजर्स कमजोर पड़ जाते हैं और देश में मैक्रो इकोनॉमिक चैलेंज बढ़ जाते हैं बॉर्डर सिक्योरिटी और उस पर तैनात सिक्योरिटी एजेंसीज के भी
चैलेंज ड्रग अब्यूड़ोस और ऑर्गेनाइज माफिया द्वारा फैलाई जा रही अराजकता ऑलरेडी एक बड़ा सिक्योरिटी मुद्दा है द क्यूरियस केस ऑफ पंजाब दोस्तों नॉर्थ वेस्ट इंडिया में लोकेटेड इंडिया का बॉर्डर स्टेट पंजाब पिछले कुछ सालों से ड्रग अब्यूड़ोस का सामना कर रहा है पंजाब में ओपी ऑइड और सिंथेटिक ड्रग के उपयोग का स्केल हमें 2015 में कंडक्ट किए गए एक सर्वे से पता चलता है द पंजाब ओपिड डिपेंडेंस सर्वे पीओएस यूनियन गवर्नमेंट द्वारा कमीशन किया गया था विद द हेल्प ऑफ एनजीओ सोसाइटी फॉर प्रमोशन ऑफ यूथ एंड मासेज एसपी वाई एम एंड एम्स एक्सपर्ट इसके अनुसार
पंजाब में लगभग 2.32 लाख ड्रग डिपेंडेंट्स हैं यानी पंजाब की पॉपुलेशन का 1.2 पर ड्रग यूजर्स की संख्या लगभग 4 . 5 पर है जिसमें मोस्ट लोग यंग पॉपुलेशन में आते हैं लेकिन कुछ एक्सपर्ट्स कहते हैं कि ये नंबर और भी ज्यादा हो सकता है क्योंकि कई केसेस रिपोर्ट नहीं किए जाते पंजाब में राइजिंग ड्रग अब्यूड़ोस एग्रीकल्चरल क्राइसिस लॉस ऑफ प्रोडक्टिविटी ऑफ लैंड और इंक्रीजिंग इंटरेस्ट ऑफ पाकिस्तान इन डिस्टेबलाइजिंग पंजाब जैसे फैक्टर्स शामिल हैं चलिए अब बात करते हैं इंडियन गवर्नमेंट द्वारा लिए गए कुछ स्टेप्स की जो सिक्योरिटी एजेंसीज को ड्रग ट्रैफिकिंग को कंट्रोल करने
में मदद करते हैं स्टेप्स टेकन टू कॉम्बैट ड्रग ट्रैफिकिंग सबसे पहला और मेजर स्टेप है नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉनिक्स और फाइंस इंपोज करता है फाइंस की मैक्सिमम लिमिट ₹2000000 की जेल से लेकर 20 साल की जेल तक है डिपेंडिंग ऑन इंटेंसिटी एंड स्केल ऑफ क्राइम एनडीपीएस एक्ट के तहत नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की स्थापना भी की गई है जो इस एक्ट को इंप्लीमेंट करने के लिए प्रमुख एजेंसी है इसके अलावा एनसीबी इंडिया के इंटरनेशनल एग्रीमेंट्स को भी फुलफिल करने की जिम्मेदारी निभाती है जिसमें सिंगल कन्वेंशन ऑन नारकोटिक ड्रग्स कन्वेंशन ऑन साइकोट्रॉनिक्स एंड साइकोट्रॉनिक्स आईएमएस एनसीबी का
एक ईपोर्टल है जो ड्रग ऑफेंसेस और ड्रग ऑफेंडर्स का एक ऑनलाइन डेटाबेस क्रिएट करेगा ताकि सिक्योरिटी एजेंसीज की फंक्शनिंग स्ट्रीमलाइन हो सके प्रिवेंशन ऑफ इलिसिट ट्रैफिक इन नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉनिक्स से खरीदी हुई प्रॉपर्टी को सीज करने की पावर एजेंसीज को देता है ताकि ड्रग ट्रैफिकिंग में इवॉल्वड माफिया को कंट्रोल किया जा सके इसके अलावा द इंडियन कस्टम्स एक्ट ऑफ 1962 कस्टम्स डिपार्टमेंट को इलीगल सब्सटेंसस इंक्लूडिंग ड्रग्स को सीज करने की पावर और उसकी ट्रैफिकिंग को कंट्रोल करने की जिम्मेदारी भी देता है सिमिलर पावर्स इंडियन कोस्टगार्ड एक्ट के तहत कोस्ट गार्ड्स के पास भी है
मनी लरिंग एक्ट ऑफ 2002 ड्रग ट्रैफिकिंग और रिलेटेड इल्लीगल एक्टिविटीज से जन में इल्लीगल पैसों को सेज करने की पावर एजेंसीज को देता है और इससे रिलेटेड मनी लरिंग को रोकने की व्यवस्था भी क्रिएट करता है नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के अलावा सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स या सीबीएन भी एक इंपॉर्टेंट एजेंसी है जो नारकोटिक ड्रग्स के प्रोडक्शन कल्टीवेशन और मूमेंट को कंट्रोल करता है फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट एफ आईयू को ड्रग रिलेटेड फंड्स के फ्लो की इंफॉर्मेशन को टैप करने और इससे जुड़े हुए नेटवर्क को डिसर पट करने की पावर दी गई है ताकि इसके खिलाफ प्रीवेंटिव
एक्शन लिए जा सके नेशनल ड्रग डिपेंडेंस ट्रीटमेंट सेंटर या एनडीडीटीसी का क्रिएशन एम्स में किया गया है जो ड्रग अब्यूड़ोस ल्स को ड्रग एब्यूज को ट्रीट करने की ट्रेनिंग देता है नार्को कोऑर्डिनेशन सेंटर या एनसीओ आरडी जो 2016 में बनाया गया था वह इंटरएजेंसी इंटरस्टेट और सेंटर स्टेट कोआर्डिनेशन को इंप्रूव कर ड्रग ट्रैफिकिंग समस्या से लड़ने में सिक्योरिटी एजेंसीज की मदद करता है इसके अलावा 2016 में यूनियन गवर्नमेंट ने फाइनेंशियल असिस्टेंसिया इव किया था जिसके तहत स्टेट्स को ड्रग एब्यूज प्रॉब्लम से लड़ने के लिए फंडिंग दी जाएगी नेशनल ड्रग एब्यूज सर्वे के तहत गवर्नमेंट एक
कंप्रिहेंसिव ड्रग एब्यूज सर्वे कंडक्ट कराती है ताकि ड्रग एब्यूज ट्रेंड्स को मॉनिटर कर उसके खिलाफ साइंटिफिक तरीके से पॉलिसी मेकिंग की जा सके यह सर्वे मिनिस्ट्री ऑफ सोशल जस्टिस एंड एंपावरमेंट एम्स के साथ मिलकर कंडक्ट करती है जिसके डटा की चर्चा हमने इस वीडियो में भी करी है दोस्तों प्रोजेक्ट सनराइज मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर द्वारा लॉन्च एक स्कीम है जो नॉर्थ ईस्ट में प्रिवेंट ड्रग एब्यूज को काउंटर करने की कोशिश करती है स्पेशली उन लोगों के लिए जो इंजेक्टिव ड्रग यूज करते हैं और एचआईवी से पीड़ित हैं नशा मुक्त भारत कैंपेन के तहत
गवर्नमेंट कम्युनिटी आउटरीच पर फोकस करती है और देश में ड्रग अब्यूड़ोस सिक्योरिटी से रिलेटेड एफर्ट्स भी लिए जा रहे हैं ताकि ट्रांस बॉर्डर ट्रैफिकिंग को रोका जा सके इसमें सीआईबस स्कीम सबसे क्रुशल है जो बॉर्डर मैनेजमेंट को स्मार्ट बनाने की कोशिश है सेंसर्स और ड्रोन के इस्तेमाल से यह प्रोजेक्ट बॉर्डर सिक्योरिटी में ह्यूमन एरर्स को कम करेगा बॉर्डर सिक्योरिटी के स्फीयर में इंडिया ने फ्रेंडली स्टेट्स के साथ बॉर्डर्स को इंप्रूव करने के स्टेप्स भी लिए हैं स्पेशली विद बांग्लादेश नेपाल म्यानमार और भूटान बॉर्डर इंफ्रा को बूस्ट करने के एफर्ट्स भी इसमें कारगर साबित होंगे इसके
अलावा इंडिया कई इंटरनेशनल ट्रीटीज और कन्वेंशंस का भी पार्ट है जो ड्रग ट्रैफिकिंग को इंटरनेशनल लेवल पर कंट्रोल करने के लिए बनाए गए हैं इनमें यूएन कन्वेंशन ऑन नारकोटिक ड्रग्स 1961 यूएन कन्वेंशन ऑन साइकोट्रॉनिक्स यूएन कन्वेंशन अगेंस्ट इलिसिट ट्रैफिक इन नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉनिक्स को जड़ से उखाड़ने के लिए हमें ना सिर्फ सप्लाई साइड को कंट्रोल करने की जरूरत है बल्कि हमें डिमांड साइड पर भी फोकस करने की जरूरत है इसके लिए अवेयरनेस जनरेशन पर स्पेशल फोकस और ड्रग एब्यूज रिलेटेड प्रॉब्लम्स को स्कूल करिकुलम में इंक्लूड करने की आवश्यकता है इसके अलावा ड्रग ट्रैफिकिंग में
इवॉल्वड क्राइम सिंडिकेट के खिलाफ टाइम बाउंड एक्शन भी बेहद जरूरी है ताकि ऑर्गेनाइज्ड क्राइम की कमर तोड़ी जा सके इंडिया में प्रोड्यूस होने वाले ड्रग्स और रेगुलेटेड ओपियम जो मेडिसिन में यूज होता है उसके फ्लो पर सर्विलेंस को इंक्रीज करना भी बेहद आवश्यक है ताकि इंटरनल सोर्सेस से जनरेट हो रहे ड्रग मैनेस को रोका जा सके अब ऐसे में आपके मन में ये सवाल उठ रहा होगा कि अगर मनी लरिंग सभी इल्लीगल एक्टिविटीज का एक रूट कॉज या फंडिंग सोर्स है तो आखिर इसे रोकने के लिए देश और दुनिया में क्या प्रयास हो रहे हैं
तो चलिए आज हम मनी लरिंग के नेशनल और इंटरनेशनल एफर्ट्स और लेजिसलेटिव फ्रेमवर्क को जानने की कोशिश करेंगे साथ ही हम यह भी जानने की कोशिश करेंगे कि आखिर वो क्या चैलेंज हैं जो मनी लरिंग के इस ऑर्गेनाइज्ड क्राइम को रोकने में बाधा पहुंचाते हैं और इन बाधाओं को दूर करने और मनी लरिंग से इफेक्टिवली डील करने के लिए और कौन-कौन से कदम उठाए जा सकते हैं तो चलिए बिना किसी देरी के हम आज के अपने डिस्कशन को आगे बढ़ाते हैं फ्रेमवर्क टू कॉम्बैट मनी लरिंग प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लरिंग एक्ट 2002 पीएमएलए दोस्तों पीएमएलए भारत
की पार्लियामेंट द्वारा एनेक्ट किया हुआ एक कंप्रिहेंसिव लॉ है जिसका उद्देश्य मनी लरिंग को रोकने के साथ-साथ मनी लरिंग के माध्यम से डिराइवर की गई प्रॉपर्टी को पहचान कर उसे कॉन्फिनेट या जब्त करना है इसके लिए इस एक्ट में बहुत से प्रावधान किए गए जैसे यह एक्ट मनी लरिंग से जुड़े मैटर्स में प्रॉपर्टी के अटैचमेंट और कॉन्फिन से डील करने के लिए एक थ्री मेंबर एजुकेटिंग अथॉरिटी के फॉर्मेशन के रिगार्डिंग भी गाइडलाइंस नोटिफाई करता है यही नहीं मनी लरिंग के क्रॉस बॉर्डर क्राइम से जुड़े केसेस में यह एक्ट सेंट्रल गवर्नमेंट को एंपावर करता है कि
वह यूएन कन्वेंशन अगेंस्ट करप्शन के प्रोविजंस को इंप्लीमेंट करते हुए कॉन्फिडेड प्रॉपर्टी को रिक्वेस्टिंग कंट्री को रिटर्न करने की दिशा में कार्य कर सके साथ ही इस एक्ट और उसके अंडर नोटिफाई किए गए रूल्स के द्वारा बैंकिंग कंपनीज फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस और इंटरमीडियरीज को उनके क्लाइंट्स की आइडेंटिटी वेरीफाई करने रिकॉर्ड्स को मेंटेन करने और इंफॉर्मेशन को एफ आईयू आई एनडी यानी फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट इंडिया द्वारा प्रिसक्राइब्ड फॉर्मेट में प्रेजेंट करने के लिए ऑब्लिगेटरी बना दिया गया यही नहीं इस एक्ट के द्वारा कुछ फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस जैसे फुल फ्लेश मनी चेंजर्स मनी ट्रांसफर सर्विसेस और मास्टर कार्ड इत्यादि
को रिपोर्टिंग रेजीम में शामिल किया गया जिससे इनकी कार्यप्रणाली पर सुनिश्चित नजर बनाई रखी जा सके साथ ही इस एक्ट के शेड्यूल के पार्ट ए और पार्ट बी में मनी लरिंग से जुड़े कुछ क्राइम्स को एनालिस्ट भी किया गया है इसके अलावा 2019 में लाए गए पीएमएलए अमेंडमेंट एक्ट के बाद पीएमएलए के अंडर इनलिस्टेड सारे ऑफेंसेस कॉग्निजेबल और नॉन बेलेबल घोषित कर दिए गए हैं जिसके चलते अब इंफोर्समेंट डायरेक्टरेट के पास यह अधिकार है कि कुछ कंडीशंस में वह बिना वारंट के ही एक्यूज्ड को सीधे गिरफ्तार कर सकती है यही नहीं इस अमेंडमेंट एक्ट के
द्वारा पीएमएलए में दी गई प्रोसीड्स ऑफ क्राइम की ओरिजिनल डेफिनेशन को भी वाइडन कर दिया गया है जिसके चलते अब इसमें वह सभी प्रॉपर्टीज और एसेट्स भी इंक्लूड किए जाएंगे जो केवल प्रिवेंशन ऑफ मनी लरिंग एक्ट के अंडर किए गए क्रिमिनल एक्टिविटीज से ही नहीं बल्कि उससे एसोसिएटेड क्राइम्स या रिलेटेबल ऑफेंस के अंडर किए गए क्राइम से जनरेट की गई हो जैसे करप्शन से इकट्ठा की गई प्रॉपर्टी चलिए दोस्तों यह तो बात हुई पीएमएलए या प्रिवेंशन ऑफ मनी लरिंग एक्ट की बात अब हम बढ़ते हैं देश में फाइनेंशियल क्राइम्स को मॉनिटर करने वाली एजेंसीज की
तरफ फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट इंडिया एफ आईयू गवर्नमेंट ऑफ इंडिया के डिपार्टमेंट ऑफ रेवेन्यू के अंडर आने वाला फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट इंडिया प्रिवेंशन ऑफ मनी लरिंग एक्ट 2002 के अंडर किए गए फाइनेंशियल ऑफेंसेस से जुड़ी फाइनेंशियल इंटेलिजेंस को इकट्ठा करने का काम करता है इसके लिए एफ आईयू अलग-अलग रिपोर्टिंग एंटिटीज द्वारा मिलने वाली कैश ट्रांजैक्शन रिपोर्ट्स सीटीआर नॉन प्रॉफिट ऑर्गेनाइजेशन ट्रांजैक्शन रिपोर्ट्स एनटीआर क्रॉस बॉर्डर वायर ट्रांसफर रिपोर्ट्स सीबी डब्ल्यूटीए रिपोर्ट्स ऑन परचेज और सेल ऑफ इमूवेबल प्रॉपर्टी आईपीआर सस्पिशंस क्शन रिपोर्ट एसटीटीआर जैसी रिपोर्ट को रिसीव करने वाली नोडल एजेंसी की भूमिका भी निभाती है यही नहीं
एफ आईयू इन रिपोर्ट्स को एनालाइज करने और उनके सेंट्रल रिपोजिटरी की भूमिका निभाने के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर पीएमएलए 2002 के वायलेशन पर पिटि एक्शंस लेने के लिए भी स्वच्छंद है साथ ही एफ आईयू इंडिया को नेशनल और इंटरनेशनल इंटेलिजेंस इन्वेस्टिगेशन और इंफोर्समेंट एजेंसीज में कोऑर्डिनेट करने और मनी लरिंग के ख खिलाफ उट रहे कंबाइंड ग्लोबल एफर्ट्स को स्ट्रन करने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है साथ ही आपकी जानकारी के लिए हम बता दें कि नवंबर 2004 में गठित एफ आईयू डायरेक्टली इकोनॉमिक इंटेलिजेंस काउंसिल ईआईसी को रिपोर्ट करती है जिसे भारत के फाइनेंस मिनिस्टर हेड
करते हैं इंफोर्समेंट डायरेक्टरेट ईडी इंफोर्समेंट डायरेक्टरेट भारत की इकोनॉमिक क्राइम से डील करने वाली एजेंसी है यह भारत में इकोनॉमिक लॉस को इंफोर्स करने और इकोनॉमिक क्राइम से लड़ने का काम करती है इंफोर्समेंट डायरेक्टरेट का प्राइम ऑब्जेक्टिव फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट 1999 फेमा प्रिवेंशन ऑफ मनी लरिंग एक्ट 2002 पीएमएलए और द फूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर्स एक्ट 2008 एफ ओए जैसे गवर्नमेंट ऑफ इंडिया के एक्ट्स का इंफोर्समेंट करना है यही नहीं भारत में मनी लरिंग को चेक करना और उसकी रोकथाम करना भी ईडी की ही जिम्मेदारी है ईडी गवर्नमेंट ऑफ इंडिया की मिनिस्ट्री ऑफ फाइनेंस के डिपार्टमेंट
ऑफ रेवेन्यू का पार्ट है वहीं अगर हम इसके कंपटीशन की बात करें तो ये इंडियन रेवेन्यू सर्विस इंडियन पुलिस सर्विस और इंडियन एडम टिव सर्विस के साथ-साथ अपने खुद के कार्डर के प्रमोटेड ऑफिसर से मिलकर बनी है डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस डीआरआई डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस या डीआरआई भारत की प्रमुख एंटी स्मगलिंग इंटेलिजेंस इन्वेस्टिगेशंस और ऑपरेशंस एजेंसी है डीआरआई भारत की नेशनल और इकोनॉमिक सिक्योरिटी को सुरक्षित रखने के लिए फायर आर्म्स गोल्ड नारकोटिक्स फेक इंडियन करेंसी नोट्स एंटीक्स वाइल्ड लाइफ और एनवायरमेंटल प्रोडक्ट्स के कंट्रा बैंड्स की स्मगलिंग को रोकने का काम करती है साथ ही
यह ब्लैक मनी ट्रेड बेस्ड मनी लरिंग और कमर्शियल फ्रॉड को रोकने के लिए भी मैंडेटेड है इस काम को करने वाले डीआरआई के ऑफिसर्स सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेस एंड कस्टम्स सीबीआई से लिए जाते हैं ये ऑफिसर्स इंडिया की अलग-अलग जोनल यूनिट्स में पोस्टेड होने के साथ-साथ विदेशों में स्थित इंडियन एंबेसीज में भी कस्टम्स ओवरसीज इंटेलिजेंस नेटवर्क की तरह काम करते हैं दोस्तों यहां तक तो बात हुई मनी लरिंग के खिलाफ बनाए गए नेशनल लॉज और भारत के इंटरनल फ्रेमवर्क की की चलिए अब हम आगे बढ़ते हैं और इस दिशा में किए जा रहे ग्लोबल
एफर्ट्स और इंटरनेशनल बॉडीज को समझते हैं ग्लोबल फ्रेमवर्क टू कॉम्बैट मनी लरिंग दोस्तों जैसा कि हमने आपको बताया कि मनी लरिंग एक क्रिटिकल इंटरनेशनल इशू है ऐसे में सबके सहयोग से इसे रोकने के लिए ग्लोबल लेवल पर बहुत से इनिशिएटिव ऑर्गेनाइजेशंस और कन्वेंशन सेटअप किए गए हैं तो चलिए अब हम इन्हें भी एक-एक करके समझने की कोशिश करते हैं विएना कन्वेंशन मनी लरिंग के खिलाफ दिसंबर 1988 में हुआ यह दुनिया का पहला मेजर इनिशिएटिव था इस कन्वेंशन के माध्यम से मनी लरिंग को रोकने में मेंबर स्टेट्स की भूमिका को सुनिश्चित करने के लिए ग्राउंड वर्क
एस्टेब्लिश किया गया जिसके अंडर मेंबर स्टेट्स को मनी लरिंग को क्रिमिनलाइज करने के लिए लाइज किया गया साथ ही मनी लरिंग के इन्वेस्टिगेशन और मेंबर स्टेट्स के बीच एक्सपेडिन को इंश्योर करने के लिए जरूरी इंटरनेशनल कोऑपरेशन को भी प्रमोट करने की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम उठाए गए उदाहरण के लिए इस कन्वेंशन ने यह प्रिंसिपल एस्टेब्लिश किया कि किसी भी मेंबर स्टेट के डोमेस्टिक बैंक के सीक्रेसी प्रोविजंस इंटरनेशनल क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन से इंटरफेयर नहीं करने चाहिए द काउंसिल ऑफ यूरोप कन्वेंशन 1990 में हुए काउंसिल ऑफ यूरोप कन्वेंशन में मनी लरिंग से रिलेटेड एक कॉमन पॉलिसी एस्टेब्लिश की
गई इस पॉलिसी का मकसद मनी लरिंग के रिगार्डिंग इन्वेस्टिगेटिव असिस्टेंट सर्च सीजर और प्रोसीड्स के कॉन्फिन में इंटरनेशनल कॉपरेशन को फैसिलिटेट करना था इस कन्वेंशन में मनी लरिंग को कॉमनली डिफाइन करने और उससे डील करने के मेजर्स डेवलप किए गए बासेल कमिटी स्टेटमेंट ऑफ प्रिंसिपल्स दिसंबर 1988 में बासेल कमिटी ऑन बैंकिंग रेगुलेशंस एंड सुपरवाइजरी प्रैक्टिसेस ने एक स्टेटमेंट ऑफ प्रिंसिपल इशू किए जिसका एम था बैंकिंग सेक्टर को एक कॉमन पोजीशन अडॉप्ट करने के लिए इनकरेज करना जिससे बैंक्स के थ्रू होने वाले मनी लरिंग को रोका जा सके साथ ही क्रिमिनल एक्टिविटीज से एक्वायर किए हुए
फंड्स को बैंकिंग सिस्टम में हाइड करने की प्रैक्टिस पे रोक लगाई जा सके फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स एफएटीएफ एफएटीएफ 1989 में पेरिस में हुए g7 समिट के दौरान इस्टैब्लिशमेंट बॉडी है जिसका ऑब्जेक्टिव है मनी लरिंग से लड़ने के लिए इफेक्टिव स्टैंडर्ड्स और लीगल रेगुलेटरी और ऑपरेशनल मेजर्स के इफेक्टिव इंप्लीमेंटेशन को प्रमोट करना ताकि मनी लरिंग पर रोक लगाकर टेररिस्ट फाइनेंसिंग और इंटरनेशनल फाइनेंशियल सिस्टम की इंटीग्रिटी पर मनरा रहे दूसरे थ्रेट्स को डिफ्यूज किया जा सके इसी की दिशा में एफएटीएफ ने एक सीरीज ऑफ रिकमेंडेशंस डेवलप की हैं जो कि मनी लरिंग और टेरर फाइनेंसिंग से
डील करने के लिए इंटरनेशनल स्टैंडर्ड्स की तरह रिकॉग्नाइज्ड है यही कारण है कि मनी लरिंग से लड़ने के लिए इंटरनेशनली इन्हीं रिकमेंडेशंस के अकॉर्डिंग कोऑर्डिनेटेड रिस्पांस बिल्ड किए जाते हैं इसी कड़ी में मनी लरिंग एंड टेरर फाइनेंसिंग में संदिग्ध भूमिका होने की वजह से एफएटीएफ ने पाकिस्तान सीरिया टर्की म्यानमार फिलिपिंस साउथ सूडान युगांडा इत्यादि कंट्रीज को अपनी ग्रे लिस्ट में डाल रखा है यूनाइटेड नेशंस ग्लोबल प्रोग्राम अगेंस्ट मनी लरिंग जी पीएमएल 1997 में जी पीएमएल को मनी लरिंग के अगेंस्ट उठाए जा रहे इंटरनेशनल एक्शंस की इफेक्टिव को इंक्रीज करने के लिए इस्टैब्लिशमेंट के लिए एक
कंप्रिहेंसिव टेक्निकल कोऑपरेशन सर्विस प्रोवाइड करने की भी योजना थी यही नहीं इसके अलावा मनी लरिंग और उससे एसोसिएटेड क्राइम से लड़ने के लिए तीन कन्वेंशंस भी बनाए गए थे पहला 1991 में बनाया गया इंटरनेशनल कन्वेंशन फॉर द सप्रे ऑफ द फाइनेंसिंग ऑफ टेररिज्म दूसरा 2000 में बनाया गया यूएन कन्वेंशन अगेंस्ट ट्रांस नेशनल ऑर्गेनाइज्ड क्राइम तीसरा 2003 में बनाया गया यूएन कन्वेंशन अगेंस्ट करप्शन दोस्तों इन ऑर्गेनाइजेशंस और इन कन्वेंशन के अलावा भी कुछ इंटरनेशनल बॉडीज ऐसे हैं जो ग्लोबल लेवल पर मनी लरिंग को रोकने के लिए इंटरनेशनल कोऑपरेशन बढ़ाने की दिशा में प्रयासरत हैं उदाहरण के
लिए यूएन ऑफिस ऑन ड्रग्स एंड क्राइम्स द्वारा एडमिनिस्टर्ड इंटरनेशनल मनी लरिंग इंफॉर्मेशन नेट नेटवर्क आईएमओ एल आई एन एक इंटरनेट बेस्ड नेटवर्क है जो कि गवर्नमेंट्स ऑर्गेनाइजेशन और यहां तक कि इंडिविजुअल्स को भी मनी लरिंग से लड़ने में असिस्टेंसिया है जो कि नेशनल एंटी मनी लरिंग लेजिसलेशंस का जूरिस जिक्स एनालाइज करता है इसके अलावा बर्लिन बेस्ड एनजीओ ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने 11 इंटरनेशनल प्राइवेट बैंक्स के साथ मिलकर मनी लरिंग करप्शन और दूसरे रिलेटेड सीरियस क्राइम से लड़ने के लिए 11 नॉन बाइंडिंग प्रिंसिपल्स दिए इन प्रिंसिपल्स को वाल्सबर्ग एबल प्रिंसिपल कहा जाता है जो प्राइवेट बैंकर्स और
उनके क्लाइंट्स के बीच प्रैक्टिस गाइडलाइन इस्टैब्लिशमेंट ऑर्गेनाइजेशन है जिसके 41 मेंबर कंट्रीज या जूरिस जिक्स एंटिटीज हैं यही नहीं इसमें कुछ इंटरनेशनल और रीजनल ऑब्जर्वर्स हैं जैसे यूनाइटेड नेशंस आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक इत्यादि एी पीजी के ये सारे मेंबर्स एफएटीएफ के मनी लरिंग और टेरर फाइनेंसिंग से लड़ने के लिए बनाए गए इंटरनेशनल स्टैंडर्ड्स के इफेक्टिव इंप्लीमेंटेशन के लिए वचनबद्ध हैं चलिए अब ये तो बात हुई मनी लरिंग के लिए उठाए जा रहे ग्लोबल एफर्ट्स और इंटरनेशनल ग्रुपिंग्स की अब हम बढ़ते हैं उन चैलेंज की ओर जो मनी लरिंग के खिलाफ लड़ी जा रही इस लड़ाई
में सबसे बड़ी बाधा हैं चैलेंज इन प्रिवेंशन ऑफ मनी लरिंग जैसा हमने आपको बताया कि 21 सेंचुरी में फाइनेंशियल फ्रॉड और मनी लरिंग को रोकने में सबसे बड़ा रोड़ा साइबर टेक्नोलॉजी में तेजी से आ रहे चेंजेज हैं जिनके फास्ट पेस की वजह से लॉ इंफोर्समेंट एजेंसीज और फाइनेंशियल मॉनिटरिंग बॉडीज इनसे कैच अप करने में खुद को असमर्थ पा रही हैं इसके अलावा आज भी मनी लरिंग जैसे क्राइम और इनमें छुपी ऑर्गेनाइज क्राइम सिंडिकेट के जड़ों को लेकर अवेयरनेस का अभाव है जिसकी वजह से इससे लड़ने में वैसी गंभीरता नहीं दिखाई जा रही जैसी दिखाई जाने
की जरूरत है यही नहीं इस काम में सो कॉल्ड टैक्स हेवन कंट्रीज भी मनी लरिंग के एक्क में एक सहयोगी की भूमिका निभा रही हैं ऐसे में इंटरनेशनल कॉपरेशन की कमी भी मनी लरिंग पर अंकुश लगाने की राह पर रोड़ा है वहीं बैंक्स द्वारा केवाईसी नॉर्म्स के इफेक्टिव इंप्लीमेंटेशन में बरती जाने वाली ढिलाई और कुछ बैंक्स द्वारा बैंक क्लाइंट के बीच एग्रीड प्रोविजन ऑफ फाइनेंशियल कॉन्फिडेंशियल्टी क्लॉज भी मनी लरिंग के फलने फूलने में अहम सहयोग दे रहा है अब ऐसे में प्रश्न ये उठता है कि समस्या को रोकने के लिए क्या किया जाए तो चलिए
अब हम इस बारे में भी डिस्कस करते हैं दोस्तों टैक्स एवेजन ब्लैक मनी और मनी लरिंग के इस कुचक्र को तोड़ने के लिए ग्राउंड लेवल से लेकर ऊपर तक काम किए जाने की जरूरत है यही नहीं इसके वाइडर पर्सपेक्टिव को देखते हुए लोकल गवर्नेंस को मजबूत करने से लेकर इंटरनेशनल कोऑपरेशन को इंश्योर करने के लिए भी कुछ ठोस कदम उठाए जाने की जरूरत है उदाहरण के लिए भारत को अपने प्रिवेंशन ऑफ मनी लरिंग एक्ट 2002 के इफेक्टिव इंप्लीमेंटेशन को इंश्योर करने की जरूरत है यही नहीं मनी लरिंग इस पूरी प्रोसेस में बैंक बैंकर्स और अकाउंटेंट्स
की संदिग्ध भूमिका को देखते हुए उनकी अकाउंटेबिलिटी और आंसरेबिलिटी को भी इंश्योर किया जाना चाहिए साथ ही एसेट्स और टेक्नोलॉजीज के बदलते ट्रेंड्स और मनी लरिंग के बदलते स्वरूप के बीच इंफोर्समेंट और इन्वेस्टिगेशन एजेंसीज को आपस में अपने इंफॉर्मेशन नेटवर्क को दुरुस्त करने की जरूरत है साथ ही एजेंसीज को भी लेटेस्ट टेक्नोलॉजीज को इफेक्टिवली एक्सप्लोइट करने की दिशा में कोऑपरेटिव गवर्नेंस बढ़ाने की जरूरत है यही नहीं ग्लोबल कोऑपरेशन से मनी लरिंग का नया हथियार बनकर सोबरे डिजिटल करेंसी और एसेट्स को रेगुलेट किए जाने की दिशा में भी कदम उठाए जाने की जरूरत है और इस
काम में एफएटीएफ एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है 7516 किमी यह लंबाई है इंडिया की कोस्टलाइन की जो इसके नौ राज्यों यानी गुजरात महाराष्ट्र गोवा कर्नाटका केरला तमिलनाडु आंध्र प्रदेश उड़ीसा और वेस्ट बंगाल समेत लक्षदीप अंडमान एंड निकोबार पुड़ री और दव एंड दमन को मिलाकर कुल चार केंद्र शासित प्रदेशों यानी यूनियन टेरिटरी से होकर गुजरती है दोस्तों अपने विशाल कोस्टलाइन और हिंद महासागर में सेंट्रल पोजीशन की वजह से इंडिया हमेशा से ही इस रीजन के सी रूट्स का एपीसेंटर रहा है यही कारण है कि इंडियन ओशन वो अकेला महासागर है जिसका नाम किसी देश
के नाम पर पड़ा है हड़प्पा सिविलाइजेशन के समय से ही इन रूट्स के थ्रू होने वाले इंडिया के इन हिस्टोरिकल ट्रेड रिलेशंस का ही नतीजा है कि इंडियन सिविलाइजेशन कभी एकांकी या आइसोलेटेड नहीं रही और हमेशा से दूसरे सिविलाइजेशन और कल्चर से इसका परस्पर मेलजोल बना रहा है जिससे इंडियन कल्चर तो समृद्ध हुआ ही साथ ही साथ हमारी इकोनॉमी भी लगातार ग्रो करती रही इसी वजह से चेरा पांड्या और माइटी चोला से लेकर शिवाजी तक ने इंडियन सीपोर्ट्स और उसकी कोस्टलाइन की सिक्योरिटी दुरुस्त करने पर विशेष ध्यान दिया बहुत से हिस्टोरियंस का यह मत है
कि चूंकि मिडिवल एज में मुगल्स ने अपने नेवल और मैरीटाइम फोर्स पर कोई खास ध्यान नहीं दिया इसीलिए वह ब्रिटिशर्स फ्रेंच और पोर्टिकल जैसे नेवल पावर्स का सामना नहीं कर पाए और यहीं से भारत में उनके कॉलोनियलिज्म की शुरुआत हुई वहीं अगर हम आज की बात करें और 2021 के आंकड़ों पर नजर डालें तो हम पाएंगे कि वॉल्यूम के हिसाब से इंडिया का 90 पर इंटरनेशनल ट्रेड सी ट्रांसपोर्ट के जरिए ही किया जाता है और इसीलिए इसके महत्व को समझते हुए इंडिया के विस्तृत कोस्टलाइन पर 13 मेजर पोर्ट्स और 150 से ज्यादा माइनर पोर्ट्स डेवलप
किए गए हैं यही नहीं करंट गवर्नमेंट द्वारा इंडिया के पोर्ट्स के फर्द डेवलपमेंट और एक पोर्ट लड इकोनॉमी क्रिएट करने के लिए सागरमाला प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है और हाल ही में मिनिस्ट्री ऑफ शिपिंग ने मेरीटाइम विजन 2030 पॉलिसी भी रिलीज की है दूसरी ओर बहुत से इंपॉर्टेंट इंडस्ट्रियल सेंटर्स के अलावा इंडिया के सैटेलाइट स्टेशंस मिसाइल लॉन्चिंग पॉइंट्स नेवल बेसेस और न्यूक्लियर पावर प्लांट्स जैसे बहुत से क्रिटिकली इंपॉर्टेंट इंफ्रास्ट्रक्चर भी इंडिया की कोस्टलाइन से जुड़े हुए हैं अब ऐसे में अगर इंडिया की कोस्टलाइन उसके लिए इतनी इंपॉर्टेंट एसेट है तो उसकी सिक्योरिटी को मजबूत करना
भी इंपॉर्टेंट हो जाता है आफ्टर ऑल 7500 किलोमीटर से ज्यादा लंबी इंडिया की कोस्टलाइन को अनअकाउंटेड इफिल्टर बॉर्डर की तरह तो नहीं छोड़ा जा सकता इसीलिए इस दिशा में भारत ने विशेष इंतजाम किए हैं तो चलिए आज हम इंडिया के इसी कोस्टलाइन सिक्योरिटी फ्रेमवर्क को डिटेल में डिस्कस करते हैं साथ ही ये जानने का प्रयास करते हैं कि इंडिया की मेरीटाइम सिक्योरिटी को इंश्योर करने में क्या चैलेंज या थ्रेट्स हैं और इन्हें दूर करने के लिए क्या स्टेप्स लिए जा रहे हैं थ्रेट्स एंड चैलेंज ज्योग्राफिकल डायवर्सिटी दोस्तों भारत जैसे विशाल देश की ज्योग्राफिकल डायवर्सिटी की
वजह से उसकी कोस्टलाइन भी यूनिफॉर्म नहीं है जैसा हमने आपको बताया कि भारत की कोस्टलाइन नौ राज्यों से होकर गुजरती है ऐसे में हर स्टेट की ज्योग्राफिकल डाइवर्सिटी कोस्टलाइन की सिक्योरिटी के लिए एक नया चैलेंज खड़ा करती है इंडियन कोस्टलाइन की टोपोग्राफी की डाइवर्सिटी की वजह से इसमें क्रीक्स लगूनस बैक वाटर्स डेल्टास बेस जैसे ढेरों ज्योग्राफिकल फीचर्स देखने को मिलते हैं यही नहीं लक्षद्वीप और अंडमान एंड निकोबार के अलावा भी इंडिया में लैंड की कोस्टलाइन के पास ढेरों छोटे-छोटे इन्हेबिटेड और अनइनहैबिटेड आइलैंड्स भी मौजूद हैं जिन्हें सुरक्षित रखना इंडिया के लिए बेहद जरूरी है ताकि
इसका इस्तेमाल एंटी सोशल या एंटी नेशनल एक्टिविटीज के लिए ना किया जा सके साथ ही इन्हें सिक्योर रखना इंडिया की सोवर निटी के लिए बेहद जरूरी है ऐसे में इस ज्योग्राफिकल डाइवर्सिटी की वजह से सर्वेस और ट्रैकिंग के लिए भी वन साइज फिट्स ऑल की तरह की पॉलिसी नहीं अपना नहीं जा सकती जो कोस्टल सिक्योरिटी और उसकी पॉलिसी मेकिंग के लिए एक बड़ा चैलेंज है अनसेट मेरीटाइम बॉर्डर इश्यूज दोस्तों इसी तरह का एक बड़ा चैलेंज इंडिया और उसके नेबर्स के बीच का अनसेट मेरीटाइम बाउंड्रीज का भी है 1947 में जाते-जाते ब्रिटिशर्स द्वारा किए गए आर्बिट्री
बाउंड्री डिमार्केट की वजह से आजादी के 75 साल बीत जाने के बाद भी इंडिया के उसकी नेबरिंग कंट्रीज खास तौर पे पाकिस्तान से सर क्रीक को लेकर और बांग्लादेश से बे ऑफ बंगाल में अभी भी मैरिटाइम बाउंड्रीज को लेकर डिस्प्यूट्स चल रहे हैं जिसकी वजह से दोनों ही देशों की फोर्सेस के लिए डीलिमिटेशन लाइन निर्धारित करना मुश्किल हो जाता है जिससे दो तरह की समस्याएं उत्पन्न होती हैं एक तो पाकिस्तान जैसे अनफ्रेंडली नेशन के केस में दोनों देशों की फोर्सेस के पर्सीवड ओवरलैप ऑफ जूरिस इक्स की वजह से कॉन्फ्लेट की स्थिति पैदा हो जाती है
और दूसरा कई बार इसी ओवरलैप की वजह से दोनों फोर्सेस कॉन्फ्लेट अवॉइड करने के लिए मैरीन एरिया की सर्विलेंस में ढिलाई बरती देखी जाती हैं जिसकी वजह से अक्सर इस नो मैनस लैंड या सी का फायदा नॉन स्टेट एक्टर्स इल्लीगल एक्टिविटीज के लिए उठा लेते हैं यही नहीं इन डिस्प्यूट की वजह से इंडिया अपने ऑफशोर डेवलपमेंट को भी अपनी इच्छा अनुसार इंप्लीमेंट नहीं कर पाता जिस वजह से हमारी कोस्टलाइन जो हमारे देश के लिए एक की एसेट है वह अन यूटिलाइज रह जाती है हालांकि इस दिशा में भारत सरकार और दूसरे देशों की सरकारों के
बीच लगातार प्रयास जारी हैं और इसी वजह से बांग्लादेश के साथ काफी सारे कॉन्फ्लेट्स रिजॉल्व भी हो चुके हैं लेकिन पाकिस्तान से अभी भी कुछ डिस्प्यूट्स बाकी हैं जिन्हें सुलझाए जाने की जरूरत है स्ट्रेइंग ऑफ फिशरमैन बियोंड द मेरीटाइम बाउंड्री इसके अलावा आपने अक्सर न्यूज़ में सुना होगा कि मछुआरे अक्सर खराब मौसम समुद्र में आए तूफान या कहे सिर्फ अपना रास्ता भटक कर इंटरनेशनल मेरीटाइम बाउंड्री लाइन क्रॉस कर देते हैं जिस वजह से पाकिस्तान और श्रीलंकन फोर्सेस द्वारा पकड़ लिए जाते हैं और साथ ही उनकी बोट्स और ट्रोलर्स भी जब्त कर ली जाती हैं बहुत
से सिक्योरिटी एनालिस्ट का मानना है कि ये इंडिया के लिए एक सिक्योरिटी थ्रेट साबित हो हो सकता है क्योंकि पाकिस्तान इन मछुआरों की मदद से इंडिया के लैंडिंग पॉइंट्स पोर्ट्स और दूसरी क्रुशल इंफॉर्मेशन इकट्ठा कर सकता है साथ ही वो इन पकड़े हुए ट्रोलर्स और फिशरमैन की मदद से अपने टेरर ऑपरेटिव्स या वेपंस भारत में भेज सकता है यही नहीं इंडिया और श्रीलंका के बीच भी फिशरमैन का एक दूसरे की टेरिटरी में घुसकर फिशिंग करना एक मेजर पॉइंट ऑफ कॉन्फ्लेट रहा है क्योंकि अक्सर ये फिशरमैन ज्यादा मुनाफा कमाने के जुनून में बॉटम ट्रोलर्स की मदद
से ज्यादा से ज्यादा फिशर्स कैप्चर करने के लिए एक दूसरे की टेरिटरी में ट्रेस पास करते हैं जिससे दोनों देशों के इकोनॉमिक इंटरेस्ट तो अफेक्ट होते ही हैं साथ ही इन ट्रॉलर से एनवायरमेंट को भी भारी नुकसान पहुंचता है वल्नरेबल ड्यू टू नेबर्स लैंड और वाटर दोनों से जुड़े होने की वजह से पाकिस्तान बांग्लादेश और म्यानमार हमेशा से इंडिया के लिए एक पॉइंट ऑफ कंसर्न रहे हैं यही कारण है कि इन देशों की पॉलिटिकल इंस्टेबिलिटी के अलावा इनका टेररिज्म क्रॉस बॉर्डर क्राइम और इलिसिट ट्रेड में इनकी भूमिका हमेशा से संदिग्ध रही है उदाहरण के लिए
गुजरात के सर क्रीक में ही एक वाटर चैनल नाला के नाम से मशहूर है जो इंडिया में ओरिजनेट होता है और पाकिस्तान से होता हुआ फिर से भारत की सीमा में रीएंटर करता है सिक्योरिटी फोर्सेस के मुताबिक इफिल्टर और स्मगलर्स अक्सर इस रूट का इस्तेमाल अपनी गैरकानूनी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए करते हैं यही नहीं हाल के सालों में भारत के पड़ोसी देशों में बिगड़ते हालातों के बीच इन देशों से सी रूट्स के थ्रू भारत में इल्लीगल इफिल्टर काफी बढ़ गया है ऐसे में भारत के लिए अपने मेरीटाइम बॉर्डर्स को सिक्योर रखना और भी
जरूरी हो जाता है पायरेसी एंड इलिसिट ट्रेड इसके अलावा इंडियन मैरीटाइम टेरिटरी के कुछ रीजंस ऐसे भी हैं जो आर्म्ड रॉबरी और पायरेसी के लिए कुख्यात है स्पेशली वेस्ट बंगाल के सुंदरबन रीजन में अक्सर फिशरमैन की किडनैपिंग और कार्गो बोट्स की रॉबरी की खबरें आती हैं यही नहीं म्यानमार थाईलैंड और इंडिया के साउथ ईस्ट में स्थित आइलैंड नेशंस के थ्रू इंडिया में गोल्ड इलेक्ट्रॉनिक गुड्स नारकोटिक्स और आर्म स्मगलिंग भी की जाती है ऐसे में इस पायरेसी और इलिसिट ट्रेड को रोकना भी इंडियन मेरीटाइम सिक्योरिटी के लिए जरूरी है जिओ पॉलिटिक्स एंड मेरीटाइम ट्रेड दोस्तों यह
तो आप जानते ही होंगे कि चाइना कैसे साउथ चाइना सी में अपने स्ट्रिंग ऑफ पल्स के डॉक्ट्रिन को फॉलो करते हुए अपना डोमिनेंस बढ़ा रहा है यही नहीं अब वो इंडियन सबकॉन्टिनेंट को इनसर्किल करने के उद्देश्य से धीरे-धीरे इंडियन ओशन रीजन में भी अपने कदम बढ़ा रहा है ऐसे में अगर इंडिया को अपने सिक्योरिटी और इकोनॉमिक पॉलिसी की डेवलपमेंट को इंश्योर करना है तो उसे अपने मेरीटाइम सिक्योरिटी को और भी अधिक चुस्त दुरुस्त रखने की जरूरत है यही नहीं जैसे-जैसे इंडियन इकोनॉमी का साइज बढ़ रहा है उसका इंटरनेशनल ट्रेड और मैरीटाइम ट्राफिक भी बढ़ता जा
रहा है ऐसे में इंडिया के लिए मैरीटाइम ट्रेड की सिक्योरिटी और जिओ स्ट्रेटेजिक इंटरेस्ट को इंश्योर करना और भी जरूरी है तो चलिए अब हम इंडिया के कोस्टल सिक्योरिटी आर्किटेक्चर को भी जान लेते हैं कि कैसे इंडिया इस दिशा में अपने कदम आगे बढ़ा रहा है कोस्टल सिक्योरिटी आर्किटेक्चर भारत की आजादी के कुछ समय बाद ही मेरीटाइम सिक्योरिटी से रिलेटेड जिस पहली समस्या से भारत सरकार को दो चार होना पड़ा वो थी समुद्री रास्तों से बढ़ते इलिसिट ट्रेड और स्मगलिंग की लेट 1960 और 70 में गुजरात गोवा कोलकाता और मुंबई के आसपास के समुद्री तटों
का प्रयोग तेजी से स्मगलिंग के लिए किया जाने लगा था आप उस दौरान इस बढ़ती समस्या का अंदाजा सिर्फ इस बात से लगा सकते हैं कि उस समय बॉलीवुड में भी स्मगलिंग और सीबोर्न इलिसिट ट्रेड को मेस्ट्री सिनेमा में धड़ल्ले से दिखाया जाने लगा था इसी के चलते 1974 में नाग चौधरी कमेटी की सिफारिश पर सीएमओ यानी कस्टम्स मैरीन ऑर्गेनाइजेशन का गठन किया गया सीएमओ एक टेंपरेरी बॉडी थी जिसका काम एंटी स्मगलिंग ऑपरेशंस कंडक्ट करना था लेकिन इसके टेंपरेरी नेचर की वजह से गवर्नमेंट द्वारा इस ऑर्गेनाइजेशन के स्ट्रक्चर पर कोई खास ध्यान नहीं दिया गया
साथ ही इस कमी को दूर करने के लिए और मेरीटाइम सिक्योरिटी के मैंडेट को और भी इंक्लूसिव बनाने के लिए फर्स्ट ऑफ फरवरी 1977 को आईसीजी या इंडियन कोस्टगार्ड का गठन किया गया और इसे मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस के अंडर रखा गया इसके बाद 18th ऑफ अगस्त 1978 को इंडियन कोस्टगार्ड एक्ट 1978 के एनेक्टमेंट के साथ ही ये ऑर्गेनाइजेशन फॉर्मली इंडिया की फोर्थ आर्म्ड फोर्स के तौर पर इस्टैब्लिशमेंट एक्टिविटीज को रोकने इंडिया के आर्टिफिशियल आइलैंड्स को प्रोटेक्शन क् देने और ऑफशोर टर्मिनल को प्रोटेक्ट करने मैरीन एनवायरमेंट और मैरीन पोल्यूशन कंट्रोल करने के साथ-साथ डिस्ट्रेस फिशरमैन को
असिस्टेंसिया गया इसी बीच 1990 में इंडियन नेवी ने ऑपरेशन ताशा लॉन्च कर दिया जिसके माध्यम से इंडियन मेरीटाइम सिक्योरिटी में पहली बार लेयर्ड सर्विलेंस का कांसेप्ट इंट्रोड्यूस किया गया था जिसके अंतर्गत मेरीटाइम सिक्योरिटी की होल एंड सोल जिम्मेदारी केवल आईसीजी को सौंपने के बजाय अलग-अलग सुरक्षा घेरे बनाए जाने का प्रस्ताव रखा गया ऑपरेशन ताशा का मकसद श्रीलंका से आ रहे एलटीटी मिलिटेंट्स के इल्लीगल इमीग्रेशन और इफिल्टर को रोकना था साथ ही श्रीलंका से भारत और भारत से श्रीलंका जा रहे स्मगल्ड वेपंस पर रोक लगाना था इसी तरह 1993 में हुए मुंबई धमाकों के बाद गुजरात
और महाराष्ट्र में इल्लीगल इफिल्टर स्मगल्ड वेपन और कंट्रा बैंड को रोकने के लिए भी ऑपरेशन स्वान चलाया गया था इसके बाद मेरीटाइम सिक्योरिटी की बदलती परिस्थितियों और 21 सेंचुरी में इसके थ्रेड्स और चैलेंज में आए पैराडाइम शिफ्ट के बीच 2005 में कोस्टल सिक्योरिटी स्कीम इंप्लीमेंट की गई जिसे मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स के डिपार्टमेंट ऑफ बॉर्डर मैनेजमेंट द्वारा इंप्लीमेंट किया गया इस सीएसएस का प्रमुख लक्ष्य था कोस्ट के नजदीक के शैलो एरियाज में पेट्रोलिंग और सर्विलेंस इंफ्रास्ट्रक्चर को स्ट्रेंथ करना यही नहीं सीएसएस के अंडर ही कोस्टल की सिक्योरिटी के लिए थ्री लेयर्ड सिक्योरिटी सिस्टम बनाया गया
जिसमें इंडिया के टेरिटोरियल वाटर यानी समुद्री तट से 12 नॉटिकल माइल तक के सर्वेस और पेट्रोलिंग के लिए 2005 में ही मैरीन पुलिस को गठित किया गया इसे इंडियन कोस्टगार्ड के साथ हब एंड स्पोक मॉडल पर मिलकर काम करना था क्योंकि कोस्ट से 12 नॉटिकल माइल से 200 नॉटिकल माइल तक के रीजन की सिक्योरिटी की जिम्मेदारी इंडियन कोस्ट गार्ड्स को सौंपी गई साथ ही जगह-जगह कोस्टल पुलिस स्टेशंस खोले गए जिन्हें संभालने की जिम्मेदारी मैरीन पुलिस फोर्स के पास है वहीं 200 नॉटिकल माइल ऑनवार्ड्स सर्विलेंस की जिम्मेदारी इंडियन नेवी ने संभाली लेकिन इसी बीच 2008 में
2611 मुंबई अटैक हो गए जिसमें समुद्र के रास्ते छोटी नावों के जरिए मुंबई में दाखिल हुए टेररिस्ट ने सारे देश को दहला कर रख दिया इस घटना ने देश दुनिया के सामने पाकिस्तान को बेनकाब कर उसके द्वारा फैलाए जा रहे टेररिज्म का खौफनाक चेहरा तो दिखाया ही लेकिन इसने भारत की मेरीटाइम सिक्योरिटी के लूप होल्स को भी उजागर कर दिया साथ ही अब तक जहां कोस्टल सिक्योरिटी को इंडिया की नेशनल सिक्योरिटी का एक एसेंशियल कंपोनेंट नहीं माना जाता था वहीं इस घटना के बाद इस माइंडसेट में भी अंतर आया जिसके चलते इस घटना के बाद
इंडिया के मैरीटाइम फ्रेमवर्क में भी काफी बड़े बदलाव किए गए तो चलिए अब हम इन चेंजेज के बारे में भी जान लेते हैं कोस्टल सिक्योरिटी आर्किटेक्चर पोस्ट 2611 हालांकि 2005 में सीएसएस ने थ्री लेयर्ड सिक्योरिटी सिस्टम एस्टेब्लिश किया था लेकिन वो इस घटना के पहले केवल गुजरात तक ही सीमित था था वहीं अब इसकी जगह एक और भी ज्यादा डेंस मल्टी लेयर्ड सिक्योरिटी सिस्टम को इस्टैब्लिशमेंट जाने लगे जिसके लिए इंडियन नेवी को कोस्टल एरिया से लेकर ऑफशोर सिक्योरिटी इंश्योर करने के लिए डेजिग्नेट अथॉरिटी बना दिया गया साथ ही कोस्टल डिफेंस की इस रिस्पांसिबिलिटी के लिए
उसे इंडियन कोस्टगार्ड मैरीन पुलिस और दूसरी सेंट्रल और स्टेट एजेंसीज का असिस्टेंसिया गया डायरेक्टर जनरल कोस्टगार्ड को कमांडर कोस्टल कमांड नियुक्त कर दिया गया साथ ही उन्हें कोस्टल सिक्योरिटी इंश्योर करने के लिए सेंट्रल और स्टेट एजेंसीज कोआर्डिनेशन एस्टेब्लिश करने की जिम्मेदारी दे दी गई यही नहीं आईसीजी को मैरीन पुलिस द्वारा पेट्रोल किए जा रहे टेरिटोरियल वाटर्स की एडिशनल रिस्पांसिबिलिटी भी असाइन कर दी गई गुजरात के क्रीक्स और वेस्ट बंगाल के सुंदरबंस में बेटर सर्विलेंस करने के लिए बीएसएफ यानी बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स के आठ फ्लोटिंग बॉर्डर आउटपोस्ट बना दिए गए इसी तरह इंडिया के मेजर पोर्ट्स
को फिजिकल सिक्योरिटी प्रोवाइड करने की जिम्मेदारी सीआईएसएफ यानी सेंट्रल इंडस्ट्री सिक्योरिटी फोर्स को सौंप दी गई यही नहीं 1993 में मुंबई ब्लास्ट के बाद लोकल फिशरमैन कम्युनिटी की मदद से बनाए गए इनफॉर्मल सर्विलेंस ब्रिगेड सागर सुरक्षा दल को फॉर्मलाइज करके फिर से एक्टिव कर दिया गया ताकि कोस्टलाइन की सिक्योरिटी को इंश्योर करने के लिए लोकल कम्युनिटी का सपोर्ट लिया जा सके लोकल फिशरमैन ग्रुप से बने इस दल में ट्रेन वॉलेट्स नियुक्त किए गए जिनका काम था समुद्र और कोस्टल वाटर्स को मॉनिटर करना और यहां होने वाली किसी भी सस्पिशंस के बारे में लॉ इंफोर्समेंट एजेंसीज
को जानकारी देना इस घटना के बाद भारत ने लेटेस्ट टेक्नोलॉजी की मदद से अपने सर्विलेंस सिस्टम को भी पहले से ज्यादा दुरुस्त किया सभी मेजर और कुछ माइनर पोर्ट्स पर वेसल ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम वीटीएम इस्टैब्लिशमेंट फिक को मॉनिटर और रेगुलेट करने के साथ-साथ पोटेंशियली डेंजरस शिप्स को डिटेक्ट किया जाता है यही नहीं 450 करोड़ से ज्यादा के इन्वेस्टमेंट से nc3 आ नेटवर्क यानी नेशनल कमांड कंट्रोल कम्युनिकेशन इंटेलिजेंस नेटवर्क एस्टेब्लिश किया गया ये इंटेलिजेंस ग्रिड सिस्टम एक इंस्टीट्यूशनलाइज मैकेनिज्म के थ्रू रडार्स स्पेस और टेरेस्ट्रे ऑटोमेटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम्स और वर्ल्ड शिप रजिस्ट्री की मदद से इंडियन ओशन
रीजन में हो रही सारी एक्टिविटीज की एक कॉमन रियल टाइम ऑपरेशनल पिक्चर क्रिएट करता है इस सिस्टम का नोडल सेंटर भी हरियाणा के गुरुग्राम में बनाया गया है साथ ही इंडिया के सर्विलेंस सिस्टम को और भी अधिक धारदार बनाने के लिए 2018 में इनफॉर्म फ्यूजन सेंटर फॉर द इंडियन ओशन रीजन आईएफसी आईआर की भी स्थापना की गई यही नहीं 2017 से ही इंडियन नेवी आर्मी इंडियन एयरफोर्स और कोस्टगार्ड के इंटीग्रेटेड स्ट्रक्चर के रूप में एक मेरीटाइम थिएटर कमांड एमटीसी को स्टैब्स करने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं जिसके माध्यम से समय के
साथ हमारे देश की कोशल सिक्योरिटी से जुड़ी बदलती जरूरतों और डावर्स थ्रेट्स और चैलेंज से निपटने के लिए एक नेट सेंट्रिक वरफेन मॉडल इस्टैब्लिशमेंट जा रहा है जिसके तीनों सेनाओं के इंटीग्रेटेड अप्रोच और फिजिकल और आईटी बेस्ड एडवांस रिसोर्सेस के कंप्रिहेंसिव यूज से इंडिया की मेरीटाइम सिक्योरिटी को इंश्योर करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं साथ ही इंडियन फोर्सेस के बीच इंटर ऑपरेबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए समय-समय पर सागर कवच सी विजिल और ट्रॉपिक्स जैसी इंटरएजेंसी मेरीटाइम एक्सरसाइजस भी कंडक्ट कराई जाती हैं इस तरह भारत समय-समय पर अन्य देशों के साथ भी
मिलान और कॉर्पोरेट जैसी मेरीटाइम एक्सरसाइजस करता रहता है ताकि वह अपनी प्रिपेयर्स को चेक करने के साथ-साथ अन्य देशों के सहयोग से अपना स्किल एंड टेक्नोलॉजी एनहांस मेंट कर सके लेकिन इस सबके बाद भी इंडियन मेरीटाइम सिक्योरिटी की प्रिपेयर्स में कुछ लूप होल्स हैं जिन्हें दूर किए जाने की जरूरत है तो चलिए अब हम इन कमियों और उनकी कमियों को दूर करने के लिए उठाए जा रहे कदमों के बारे में जान लेते हैं व्हाट मोर शुड बी डन मल्टीपलीसिटी ऑफ एजेंसीज अगर हम इंडियन कोस्टल सिक्योरिटी के फ्रेमवर्क पर गौर करें तो इंडियन कोस्टलाइन और इसमें
मौजूद वेरियस इंफ्रास्ट्रक्चर को प्रोटेक्ट करने के लिए इसमें लगभग 15 डिफरेंट एजेंसीज इवॉल्वड हैं जिनकी वजह से इनके बीच जूरिस जिक्स और इंटर ऑपरेबिलिटी को लेकर एक कंफ्यूजन बना रहता है उदाहरण के लिए अगर हम इंडिया के ऑफशोर ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर की सिक्योरिटी की ही बात करें तो लीगली आर्टिफिशियल आइलैंड्स और ऑफशोर टर्मिनल्स को सिक्योरिटी प्रोवाइड करने की जिम्मेदारी इंडियन कोस्ट गार्ड्स की है लेकिन क्रूड ऑयल इंपोर्ट के लिए इस्तेमाल होने वाले सिंगल पॉइंट मूरिंग्स को सिक्योरिटी देने की जिम्मेदारी सीआईएसएफ की है जबकि उसके पर्सनल ऑफशोर फंक्शंस के लिए एडिक्ट ट्रेन भी नहीं होते ऐसे में
इंडियन कोस्टल सिक्योरिटी के मल्टी लेयर डिफेंस सिस्टम को बनाए रखते हुए उसके फ्रेमवर्क को थोड़ा स्ट्रीमलाइन किए जाने की जरूरत है अंडर स्टाफ्ड मैरीन पुलिस अगर हम इंडियन कोस्टल सिक्योरिटी सिस्टम को करीब से देखें तो हम पाएंगे कि इसकी सबसे कमजोर कड़ी मैरीन पुलिस ही है जबकि इंडिया का डावर्स जियोग्राफिक टेरेन और कोस्टल एरिया में सी और लैंड दोनों पर ऑपरेशन करने की रिक्वायरमेंट के चलते इस फोर्स का काम सबसे ज्यादा डिमांडिंग है ऐसे में करेंटली स्टेट के सेंट्रल पूल से मांड होने वाली मैरीन पुलिस फोर्स हमेशा अंडर स्टाफ्ड रहती है जिस वजह से सर्विलेंस
के लिए सबसे जरूरी ग्राउंड वर्क ही एफिशिएंटली नहीं हो पाता ऐसे में मैरीन पुलिस को स्ट्रेंथ देन करने के लिए सरकार को इनोवेटिव अप्रोच अपनाने की जरूरत है और इस फोर्स को प्रोफेशनल स्टेट पुलिस के साथ-साथ लोकल फिशरमैन कम्युनिटी से भी मैड करने की जरूरत है ताकि उनकी लोकल नीड्स और थ्रेड्स की अंडरस्टैंडिंग को एफिशिएंटली एक्सप्लोइट किया जा सके जिससे इंडिया के इस सिक्योरिटी एफर्ट में उसकी कोस्टल कम्युनिटी के पार्टिसिपेशन को भी बढ़ाया जा सकेगा मोर अटेंशन ऑन पोर्ट सिक्योरिटी इंडिया के कोस्टल सिक्योरिटी आर्किटेक्चर में उसके पोर्ट्स पर अभी वह अटेंशन नहीं दिया जा रहा
है जैसा देने की जरूरत है इंटेलिजेंस ब्यूरो की एक लेटेस्ट रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई थी कि भारत के 37 माइनर पोर्ट्स पूरी तरह डिफेंसलेस हैं वहीं मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स के आंकड़ों के अनुसार इंडिया के 203 माइनर पोर्ट्स में से 45 नॉन ऑपरेशनल हैं जबकि 75 में किसी भी तरह की कोई सिक्योरिटी फीचर्स प्रोवाइड नहीं किए गए हैं ऐसे में हमारे लिए समझना मुश्किल नहीं है कि इन पोर्ट्स का प्रयोग किसी भी गैरकानूनी गतिविधि के लिए आसानी से किया जा सकता है इसलिए सरकार को चाहिए कि वह मेजर पोर्ट्स के साथ-साथ इन
माइनर पोर्ट्स की सुरक्षा भी इंश्योर करें अनको अपरे स्टेट गवर्नमेंट कोस्टल सिक्योरिटी स्कीम के अनुसार इंडिया के कोस्टल स्टेट्स और यूनियन टेरिटरीज को ये जिम्मेदारी दी गई है कि व कोस्टल पुलिस स्टेशंस को टैब्लिक्स और सर्वेस के लिए जरूरी इंस्ट्रूमेंट्स भी उपलब्ध कराए लेकिन लगातार स्टेट की ओर से इस दिशा में उदासीनता दिखाए जाने की रिपोर्ट सामने आती रही हैं जहां इस काम के लिए ना तो प्रॉपर रिसोर्स एलोकेट किए जा रहे हैं ना ही स्टेट पूल से पर्सनल्स के अपॉइंटमेंट हो रहे हैं हैं ऐसे में इंडियन कोस्टल सिक्योरिटी सिस्टम की जड़ें ही कमजोर हो
रही हैं जिन्हें मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए जाने की जरूरत है स्पेंड मोर ऑन द नेवी अगर हम इंडियन डिफेंस बजट पर नजर डालें तो हम पाएंगे कि इसका केवल 15 पर ही इंडियन नेवी पर खर्च किया जाता है बजट 2022 में भी आर्मी और नेवी के बजट के बीच में तीन गुना से ज्यादा बड़ा अंतर था जबकि इंडियन ओशन रीजन के बदलते डायनेमिक्स के बीच इंडियन नेवी को खुद को मजबूत करने के लिए और हर मुश्किल में भारतीय तट की सुरक्षा करने के लिए और ज्यादा रिसोर्सेस की जरूरत है ऐसे में इंडियन
डिफेंस बजट को भी रैशन आइज करने की जरूरत है भारत जैसे विशाल देश को चाइना और पाकिस्तान जैसे राइवल्स और म्यानमार श्रीलंका और बांग्लादेश जैसे अस्थिर पड़ोसियों के बीच अगर अपनी संप्रभुता बनाए रखना है तो उसके लिए अपने रक्षा तंत्र को अभेद करना बेहद जरूरी है इस जरूरत को समझते हुए भारत ने एक मल्टी लियर्ड सिक्योरिटी सिस्टम एस्टेब्लिश किया है जिसमें सुरक्षा के कई घेरे हैं इसके पीछे हमारा यह प्रयास है कि देश के बाहर बैठे और धोखे से अंदर घुस चुके दुश्मनों से देश और देशवासियों की जान और माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा
सके ऐसे में देश की ज्योग्राफिकल डायवर्सिटी और थ्रेट्स को समझते हुए भारत के पास अपनी स्पेशलाइज सिक्योरिटी फोर्सेस का एक व्यापक सैन्य बल तो है ही उनके बीच थिंक टैंक और पॉलिसी मेकिंग बॉडीज का एक लंबा चौड़ा नेशनल सिक्योरिटी आर्किटेक्चर भी है ऐसे में भारत के सिक्योरिटी फोर्सेस और उनकी मैंडेट को समझने से पहले यह जरूरी हो जाता है कि हम अपने इस लेक्चर की शुरुआत भारत के इसी नेशनल सिक्योरिटी आर्किटेक्चर को समझने से करें ताकि हमारी इस टॉप डाउन अप्रोच में हम इस पूरे तंत्र को करीब से जान सकें तो आइए अब अपना यह
लेक्चर हम शुरू करते हैं कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी सीसीएस दोस्तों नेशनल सिक्योरिटी से जुड़े इंपॉर्टेंट एग्जीक्यूटिव एक्शंस लेने वाली सीसीएस इंडिया के नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रक्चर की एपिक्स बॉडी है नेशनल सिक्योरिटी से जुड़ी डिसीजन मेकिंग में देश की चुनी हुई सरकार का पॉलिटिकल कंट्रोल और कंट्री के सिविलियंस का डेमोक्रेटिक कंट्रोल इंश्योर करने के लिए ही सीसीएस का गठन किया गया है यही वजह है कि नेशनल सिक्योरिटी और डिफेंस पॉलिसी से जुड़े अहम फैसलों में आखिरी मोहर लगाने के अलावा नेशनल सिक्योरिटी ऑरेटर्स के सीनियर अपॉइंटमेंट और डिफेंस एक्सपेंडिचर से जुड़ी पॉलिसीज भी सीसीएस ही डिसाइड करती है
ऐसे में हम देख सकते हैं कि सीसीएस इंडिया की नेशनल सिक्योरिटी एस्पेक्ट्स के एपीसेंटर की भूमिका निभाता है अब अगर हम सीसीएस की कंपटीशन की बात करें तो इसे लीड करने की जिम्मेदारी देश की चुनी हुई सरकार के रियल हेड यानी प्रधानमंत्री की होती है साथ ही देश के होम मिनिस्टर डिफेंस मिनिस्टर फाइनेंस मिनिस्टर और मिनिस्टर ऑफ इकोनॉमिक अफेयर्स इसके मेंबर होते हैं यही नहीं नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर कैबिनेट सेक्रेटरी और देश के डिफेंस सेक्रेटरी भी सीसीएस की मीटिंग्स अटेंड करते हैं और इनके लिए जरूरी एडवाइजरी इनपुट्स प्रदान करते हैं नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल अब हम चलते
हैं नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल की ओर यहां हम आपकी जानकारी के लिए बता दें कि लगभग सीसीएस जैसी मेंबरशिप ही देश की नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल की भी है बस सीसीएस से अलग एनएससी में नीति आयोग के वाइस चेयरमैन को भी शामिल किया जाता है इसे 19th ऑफ नवंबर 1998 में अटल बिहारी वाजपेई की सरकार के दौरान टैब्लिक्स का काम प्राइम मिनिस्टर्स ऑफिस को देश से जुड़े रक्षा संबंधी विषयों पर सलाह प्रदान करना है देश की इंटरनल और एक्सटर्नल सिक्योरिटी कन्वेंशनल और नॉन कन्वेंशनल डिफेंस मिलिट्री अफेयर्स काउंटर इंसर्जनल और हाई टेक्नोलॉजी इकोनॉमी काउंटर टेररिज्म और एनवायरमेंट जैसे
गंभीर मुद्दों पर भी एनएससी पीएमओ के एक थिंक टैंक की तरह काम करता है जिसके लिए एनएससी को एक थ्री लेयर्ड स्ट्रक्चर प्रोवाइड किया गया है जिसके तीन मुख्य घटक हैं पहला स्ट्रेटेजिक पॉलिसी ग्रुप दूसरा नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजरी बोर्ड और तीसरा जॉइंट इंटेलिजेंस कमेटी का एक सेक्रेटेरिएट य हम आपको बता दें कि सीसीएस की तरह ही नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के हेड भी पीएम ही होते हैं जबकि इसके सेक्रेटरी की भूमिका देश के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर निभाते हैं हालांकि मौजूदा सरकार में एनएससी और सीसीएस के ओवरलैपिंग रोल की वजह से एनएससी की एसिस्टेंसिया नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर
नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर का पद भी एनएससी के साथ ही 1998 में अस्तित्व में आया और बृजेश मिश्रा को देश का पहला एनएसए नियुक्त किया गया एनएसए देश के रक्षा मामलों में प्रधानमंत्री के सलाहकार की भूमिका अदा करते हैं जिस काम में तीन डिप्टी एनएसए मिलिट्री एडवाइजर स्ट्रेटेजिक पॉलिसी ग्रुप और एक लंबा चौड़ा ऑर्गेनाइज सिस्टम उनकी मदद करता है यही नहीं रॉ आईबी एनटीआरओ जैसे ढेरों सीग्रेड एजेंसी और स्ट्रेटेजिक ऑर्गेनाइजेशन से भी एनएसए को इनपुट्स दिए जाते हैं और इनके अनुसार ही एनएसए प्रधानमंत्री के रक्षा सलाहकार की भूमिका निभाते हैं य हम आपकी जानकारी के लिए
बता दें कि एनएसए का कोई फिक्स टेन्योर नहीं होता और यह प्रधानमंत्री के डिसरेशन पर ही नियुक्त किए जाते हैं कन्वेंशनली 1998 से अब तक इस पद के लिए इंडियन पुलिस सर्विसेस या इंडियन फॉरेन सर्विसेस के अफसरों को ही जगह मिलती रही है यही नहीं करंट एनएसए श्री अजीत डवाल को सरकार द्वारा कैबिनेट मिनिस्टर की रैंक भी दी गई है डिफेंस प्लानिंग कमिटी इस दिशा में अप्रैल 2018 में डिफेंस प्लानिंग कमीशन का भी गठन किया गया जिसका चेयर पर्सन नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर को बनाया गया उस कमिटी में मेंबर्स के तौर पर फॉरेन सेक्रेटरी डिफेंस सेक्रेटरी
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ चीफ ऑफ द आर्मी स्टाफ चीफ ऑफ द एयर स्टाफ चीफ ऑफ द नेवल स्टाफ के साथ-साथ मिनिस्ट्री ऑफ फाइनेंस एक्सपेंडिचर सेक्रेटरी को भी जगह दी गई यही नहीं चीफ ऑफ द इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ सीआईडीएम के मेंबर सेक्रेटरी के तौर पर एस्टेब्लिश किया गया डीपीसी की रिस्पांसिबिलिटीज का दायरा काफी ब्रॉड है जैसे देश की नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रेटेजी का ड्राफ्ट प्रिपेयर करना कैपेबिलिटी डेवलपमेंट प्लान करना डिफेंस डिप्लोमेसी इश्यूज और देश के डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को बेटर करने के लिए होने वाली प्लानिंग भी डीपीसी की ही जिम्मेदारी है यहां हम आपकी जानकारी के लिए
बता दें कि डीपीसी यह सारे रिपोर्ट्स डिफेंस मिनिस्टर को सबमिट करती है और रक्षा मंत्री के प्रति जवाबदेह है ऐसे में हम देख ही सकते हैं कि भारत ने कितना व्यापक पॉलिसी मेकिंग सिस्टम एस्टेब्लिश किया है जिसके चलते देश के लोकतांत्रिक स्तंभ को बनाए रखते हुए ही सैन्य और रक्षा संबंधी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है लेकिन उसके बाद भी देश के इस नेशनल सिक्योरिटी आर्किटेक्चर में कुछ खामियां हैं तो क्या है वो खामियां और इन्हें दूर करने के लिए क्या प्रयास किए जा सकते हैं आइए अब हम इस
बारे में भी संक्षेप में चर्चा कर लेते हैं लूप होल्स इन द स्ट्रक्चर एंड देर रेमेडीज एनएससी सीसीएस कॉन्फ्लेट जैसा हमने आपको बताया कि नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल और कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी की मेंबरशिप लगभग एक सी है ऐसे में एनएससी ऑब्सोलेटे ऑर्गेनाइजेशन बनती जा रही है क्योंकि ना ही इसके बैठकों को नियमित तरीके से ऑर्गेनाइज कराया जा रहा है और ना ही इसका अपना कोई स्वतंत्र अस्तित्व देखने को मिलता है ऐसे में इन ओवरलैपिंग ऑर्गेनाइजेशंस के कॉन्फ्लेट को सुलझाए जाने की जरूरत है ताकि एक स्ट्रीम लाइंड ऑर्गेनाइजेशनल स्ट्रक्चर बनाया जा सके अन अकाउंटेबिलिटी ऑफ एनएसए
अगर आप भारत के सिक्योरिटी आर्किटेक्चर पर गौर करें तो आप पाएंगे कि इसमें नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर एक अहम भूमिका निभाते हैं यही कारण है कि करंट गवर्नमेंट ने एनएसए को कैबिनेट मिनिस्टर का दर्जा प्रदान किया है लेकिन इसके बाद भी एनएसए पार्लियामेंट के प्रति आंसरेबल नहीं है वहीं दूसरी ओर गवर्नमेंट के एलोकेशन ऑफ बिजनेस रूल के अकॉर्डिंग एनएसए के पास कोई इंडिपेंडेंट लीगल पावर भी नहीं है ऐसे में कई एक्सपर्ट्स दावा करते हैं कि इस पद का वर्चस्व बढ़ना इंडिया के डेमोक्रेटिक और रिस्पांसिबल गवर्नेंस सिस्टम के अनुरूप नहीं है ऐसे में एनएसए के बढ़ते कद
के बीच इसकी पार्लियामेंट के प्रति जवाबदेही भी तय होनी चाहिए लैक ऑफ कोआर्डिनेशन हमारे सिक्योरिटी आर्किटेक्चर में पॉलिटिकल रिस्पांसिबिलिटी और प्रोफेशनल एडमिनिस्ट्रेशन बनाए रखने के लिए एक ऐसे सेटअप का निर्माण किया गया है जिसमें एक और कैबिनेट मिनिस्टर के रूप में जनता द्वारा चुने हुए प्रतिनिधि हैं तो वहीं दूसरी ओर डिफेंस और सिक्योरिटी से जुड़े ऑफिसर्स भी लेकिन इस वजह से इन दो अलग-अलग घटकों के बीच अक्सर लैक ऑफ कोऑर्डिनेशन देखने को मिलता है पॉलिटिसाइजेशन ऑफ द एक्शंस ऑफ द आर्म्ड फोर्सेस सुरक्षा से जुड़े मामलों में पॉलिटिकल सुप्रीमेसी की वजह से अक्सर आर्म्ड फोर्सेस द्वारा
उठाए गए कदमों को राजनैतिक चश्मों से देखा जाता है हाल के सालों में ऐसी घटनाएं अक्सर देखने को मिलती हैं उदाहरण के लिए गलवान इंसीडेंट या बालाकोट एयर स्ट्राइक को आर्म्ड फोर्सेस द्वारा उठाया गया कदम कम और एक पॉलिटिकल स्टेप ज्यादा कहा गया जिससे डिफेंस फोर्सेस का तो मनोबल गिरता ही है साथ ही देश की रक्षा से जुड़े मामलों में इस तरह का राजनीतिकरण देश के आंतरिक वातावरण के लिए भी ठीक नहीं है लैक ऑफ स्पेशलाइजेशन भारत के सिक्योरिटी आर्किटेक्चर की टॉप डिसीजन मेकिंग में कैबिनेट सिक्योरिटी समेत विभिन्न पदों पर बैठी आईएएस लॉबी का एक
बड़ा हाथ होता है लेकिन यहां समझने वाली बात यह है कि इन आईएएस ऑफिसर्स के पास सिक्योरिटी या डिफेंस से रिलेटेड कोई फर्स्ट हैंड एक्सपीरियंस नहीं होता ऐसे में इन्हें स्पेशलाइजेशन प्रोवाइड करना या इसके लिए एक नए कार्डर का निर्माण करने की जरूरत है लैकिंग टैलेंट एक्विजिशन भारत जैसे विशाल देश के लिए बदलते सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस सेटअप के बीच जरूरी है कि वह बेस्ट टैलेंट को सिक्योरिटी फोर्सेस या इंटेलिजेंस एजेंसीज की तरफ अट्रैक्ट कर सके ऐसे में इससे जुड़ी मैनपावर या ह्यूमन रिसोर्स पॉलिसी को भी दुरुस्त किए जाने की जरूरत है अगर भारत इन इशू
को रिजॉल्व करने में कामयाब हो जाता है तो हमारा मजबूत सिक्योरिटी आर्किटेक्चर और भी ज्यादा अभेद्य हो जाएगा लेकिन इसके अलावा भी कुछ मुद्दे ऐसे हैं जो इंडिया की सिक्योरिटी और उसके एडमिनिस्ट्रेशन के पर्सपेक्टिव से लगातार ज्वलनशील बने हुए हैं ऐसे में हमारे लिए इन्हें भी जानना बेहद जरूरी हो जाता है इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड अगर हम इंडियन आर्म्ड फोर्सेस का करंट स्ट्रक्चर देखें तो हम पाएंगे कि आर्म्ड फोर्सेस आर्मी के सेवन एयरफोर्स के सेवन और नेवी की तीन कमांड्स को मिलकर कुल 17 कमांड्स में बटी हुई है इनके अलावा इंडियन आर्म्ड फोर्सेस के स्ट्रक्चर में
अलग से दो और ट्राई सर्विस कमांड्स भी हैं ऐसे में इंडिया के आर्म्ड फोर्सेस का स्ट्रक्चर डिफेंस एरियाज के ज्योग्राफिकल नीड्स के अकॉर्डिंग इंडिपेंडेंट तो है लेकिन इसी इंडिपेंडेंस की वजह से अक्सर इसमें इंटर ऑपरेबिलिटी का अभाव देखने को मिलता है उदाहरण के लिए इंडिया के नॉर्दर्न वेस्टर्न और ईस्टन एरियाज को आर्मी प्रोटेक्ट करती है वहीं कोस्टल एरियाज और मैरीटाइम बॉर्डर्स की जिम्मेदारी नेवी की है साथ ही एयरफोर्स जरूरत पड़ने पर इन दोनों फोर्सेस को ओवरऑल सपोर्ट प्रोवाइड करता है लेकिन इन सब के बाद भी स्ट्रेटेजिक इंपॉर्टेंस रखने वाले एरियाज खासतौर पर पाकिस्तान और चाइना
से लगने वाले लैंड और मैरीटाइम बॉर्डर्स में इन तीनों फोर्सेस के मेल से बने इंटीग्रेटेड कमांड की जरूरत महसूस की जा रही है ताकि इन इंटीग्रेटेड कमांड को एक कमांडर के अंडर प्लांस के एग्जीक्यूशन की सीधी जिम्मेदारी दी जा सके जिससे जरूरत पड़ने पे तेजी से एक वेल कोऑर्डिनेटेड एक्शन लिया जा सके इससे इन फोर्सेस के बीच सिनर्जी तो बढ़ेगी ही साथ ही एक बेहतर डिफेंस को भी इंश्योर किया जा सकेगा यही नहीं इंटीग्रेटेड कमांड की व्यवस्था से हम एरिया स्पेसिफिक स्ट्रेटेजिक नीड्स के अकॉर्डिंग अपने डिफेंस रिसोर्सेस का ऑप्टिमम यूटिलाइजेशन भी इंश्योर कर पाएंगे जिससे
इकोनॉमिक एफिशिएंसी भी बेटर होगी लेकिन ऐसे थिएटर कमांड को एस्टेब्लिश करने में कुछ अड़चन भी हैं जैसे ये इंटर सर्विस कंपटीशन को फ्यूल कर सकता है जिसके चलते फोर्सेस के बीच इंटर ऑपरेबिलिटी को बेटर करने के बजाय ये इंटीग्रेशन एक दूसरे को पछाड़े का अखाड़ा भी बन सकता है दूसरी ओर इन सर्विसेस के ट्राई जंक्शन के रूप में डेवलप हो रहे इन इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड के स्ट्रक्चर ऑफ कमांड को लेकर भी क्लेरिटी नहीं है यही नहीं इंडिया के ओवरऑल डिफेंस एंड सिक्योरिटी एडमिनिस्ट्रेशन सेटअप में आर्मी के डोमिनेंस की वजह से यह कयास लगाए जा रहे
हैं कि इन इंटीग्रेटेड कमांड्स में मेजॉरिटी में भी इंडियन आर्मी ही डोमिनेट करेगी जबकि बाकी दोनों सर्विसेस ऑक्सल भूमिका में रहेंगे जो नेवी और एयरफोर्स के जवानों के मनोबल के लिए बुरा साबित हो सकता है साथ ही इंडियन डिफेंस के लिमिटेड सोर्सेस के बीच ऐसे इंटीग्रेटेड का गठन करना अपने आप में एक टेढ़ी खीर है फिर भी इंडियन डिफेंस सिस्टम को रीऑर्गेनाइज करने की दिशा में यह एक अहम कदम साबित हो सकता है चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ 2019 में भारत को जनरल विपिन रावत के रूप में अपना पहला सीडीएस मिला लेकिन इस पद की नीव
साल 2000 में ही रख दी गई थी जब कारगिल रिव्यू कमेटी ने इस पद को बनाए जाने की अनुशंसा की जिस पर इसके बाद 2011 में बनने वाली नरेश चंद्र कमेटी और 2016 की शे कातक कमेटी ने भी मोहर लगा दी एयरफोर्स आर्मी और नेवी के इंटीग्रेशन के लिए बनाए गए सीडीएस की पोस्ट को इन तीनों सेनाओं के टॉप मोस्ट अधिकारी द्वारा रोटेशन बेसिस पर फिल किया जाएगा सीडीएस रक्षा मंत्री के प्रिंसिपल मिलिट्री एडवाइजर की भूमिका में उन्हें ट्राई सर्विस मैटर्स पे इंपॉर्टेंट इनपुट्स प्रोवाइड करेंगे यही नहीं वह डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री अफेयर्स और चीफ ऑफ
स्टाफ कमिटी को भी हेड करेंगे साथ ही डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल के मेंबर होने के अलावा फाइव ईयर डिफेंस कैपिटल एक्विजिशन प्लान डी स सी एपी और टू ईयर रोल ऑन एनुअल एक्विजिशन प्लान के इंप्लीमेंटेशन की जिम्मेदारी भी सीडीएस की होगी ऐसे में ये उम्मीद लगाई जा रही है कि वॉर में क्विक डिसीजन मेकिंग और डिफेंस एक्विजिशंस को अकाउंटेबल और स्ट्रीमलाइन बनाने के साथ-साथ सीडीएस के पोस्ट के इंट्रोडक्शन से तीनों सर्विसेस के बीच कोऑर्डिनेशन में भी इंप्रूवमेंट होगा लेकिन इसके बीच यह कयास भी लगाए जा रहे हैं कि कहीं पॉलिटिकल इंटरफेरेंस के बीच यह पोस्ट भी
एक सेरेमोनियल पोस्ट बनकर ना रह जाए या फिर हायर डिफेंस एडमिनिस्ट्रेशन और एक्विजिशन में सिविलियन ब्यूरोक्रेसी के डिमिनिशिंग रोल के बीच सीडीएस को उस ओर से भी रेजिस्टेंस ना झेलना पड़े यही नहीं सीडीएस के प्रोक्योरमेंट से रिलेटेड रोल के चलते किसी पर्टिकुलर फोर्स के रिसोर्स एनरिचमेंट को लेकर फेव ज्म का चैलेंज भी खड़ा हो सकता है लेकिन इस सबके बावजूद इतने सालों से पेंडिंग सीडीएस के पोस्ट से रिलेटेड रिफॉर्म इंप्लीमेंट करने से इंडिया भी दुनिया की बहुत सी मेजर कंट्रीज जैसे इटली फ्रांस चाइना यूके यूएसए इत्यादि की कतार में खड़ा हो गया है जहां यह
व्यवस्था पहले से ही चल रही है विमन एंड कॉम्बैट रोल फरवरी 2020 में जब सुप्रीम कोर्ट ने अपने लैंडमार्क डिसीजन में विमेन कैंडिडेट्स के लिए आर्मी में परमानेंट कमीशन के दरवाजे खोल दिए तो इसे विमेन एंपावरमेंट और राइट टू इक्वलिटी की जीत के तौर पर देखा गया लेकिन आर्म्ड फोर्सेस में महिलाओं के लिए अभी भी कॉम्बैट रोल में इंडक्शन के दरवाजे बंद हैं जिसे एक और विमेन को वीकर जेंडर मानकर पेट्रिया केल सोसाइटी के स्टीरियोटाइप माना जा रहा रहा है वहीं दूसरी ओर इसे महिलाओं को आगे बढ़ाने और पुरुषों के समान ही देश के लिए
सर्वस्व बलिदान करने के रास्ते में रोड़े के तौर पर देखा जा रहा है इसके पीछे एक बड़ा कारण परंपरागत रूप से आर्म्ड फोर्सेस में महिलाओं का मामूली प्रेजेंटेशन भी है लेकिन अगर हम कॉम्बैट रोल में महिलाओं के इंडक्शन से रिलेटेड इश्यूज की बात करें तो हम पाएंगे कि ऐसा करने में ऑपरेशनल प्रैक्टिकल और कल्चरल प्रॉब्लम्स खड़ी हो सकती हैं उदाहरण के लिए साथ में लड़ने वाली कॉम्बैट फोर्सेस में प्रवेश या डिफिकल्ट टेरेंस और हार्श कंडीशंस में महिलाओं के लिए पर्टिकुलर ट्रीटमेंट प्रोवाइड नहीं किया जाना प्रैक्टिकली फीजिबल नहीं है यही नहीं प्रेगनेंसी या मेंस्ट्रुअल साइकिल्स के
दौरान भी महिलाओं के लिए हार्श सर्विसेस को फुलफिल करना कठिन होगा वहीं आर्म फोर्सेस में प्रोलों फिजिकल फिटनेस एक्सपेक्ट की जाती है जो जेंडर डिफरेंस की वजह से और हार्मोनल और बायोलॉजिकल मेकअप डिफरेंसेस की वजह से महिलाओं के लिए मेंटेन रख पाना मुश्किल माना जाता है ऐसे में आर्म्ड फोर्सेस में महिलाओं को बराबर मौका देने के लिए इन सभी चैलेंज से डील करना काफी जरूरी है ताकि वह भी देश के प्रति अपना दायित्व निभा सकें अब हम बढ़ते हैं इंडिया के आर्म्ड फोर्सेस और पार्लियामेंट्री फोर्सेस के मैंडेट्स की तरफ और जानने की कोशिश करते हैं
कि भारत के सुरक्षा तंत्र में यह क्या भूमिका निभाते हैं सबसे पहले बात इंडिया के पैरामिलिट्री फोर्सेस की जिनका सीधा संबंध इंडिया के इंटरनल सिक्योरिटी से है सेंट्रल आर्म पुलिस फोर्स दोस्तों भारत में सेवन सीपीएफ या सेंट्रल आर्म पुलिस फोर्सेस हैं जो है बीएसएफ या बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स सीआईएसएफ या सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स सीआरपीएफ या सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स आईटीबीपी या इंडो तिब्बतन बॉर्डर पुलिस एसएसबी या सशस्त्र सीमा बल असम राइफल्स और एनएसजी या नेशनल सिक्योरिटी गार्ड्स यह सभी फोर्सेस मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स के डायरेक्ट कंट्रोल में है इनमें से असम राइफल्स इंडो तिब्बतन बॉर्डर
पुलिस फोर्स सशस्त्र सीमा बल और बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स बॉर्डर डिंग फोर्सेस हैं यानी इनका काम देश की सीमा की रक्षा में अपना योगदान देना है जबकि सीआरपीएफ या सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स और सीआईएसएफ या सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स इंटरनल सिक्योरिटी फोर्सेस हैं वहीं एनएसजी या नेशनल सिक्योरिटी गार्ड्स एक स्पेशल टास्क फोर्स है अब आइए हम एक-एक करके भारत के इन सिक्योरिटी फोर्सेस को जरा और करीब से जानने की कोशिश करते हैं असम राइफल्स असम राइफल्स देश की सबसे पुरानी पैरामिलिट्री फोर्स है जिसे 1835 में कछार लेवी के नाम से गठित किया गया था लेकिन आज
नॉर्थ ईस्ट इंडिया में बॉर्डर सिक्योरिटी काउंटर इंसर्जनल लॉ एंड ऑर्डर सिचुएशंस को हैंडल करने की जिम्मेदारी असम राइफल्स की ही है यही नहीं सेंट्रल गवर्नमेंट की एक्टिंग ईस्ट पॉलिसी के अंतर्गत अपने सिविल एक्शन प्लांस के माध्यम से असम राइफल्स भी अपना पूरा सहयोग देती हैं नॉर्थ ईस्ट रीजन में होने वाले इंपॉर्टेंट प्रोग्राम्स या एक्टिविटीज जैसे कम्युनिटी हॉल्स का कंस्ट्रक्शन वाटर सप्लाई स्कीम्स का इंप्लीमेंटेशन वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर का इस्टैब्लिशमेंट जैसे बहुत से सामाजिक कार्यों में भी असम राइफल्स अपना सहयोग देती है यही कारण है कि असम राइफल्स को फ्रेंड्स ऑफ द नॉर्थ ईस्ट पीपल के नाम
से भी जाना जाता है वहीं दूसरी ओर 1643 किमी लंबे इंडो म्यानमार बॉर्डर की रखवाली भी असम राइफल्स ही करती हैं ऐसे में असम राइफल्स मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स के एडमिनिस्ट्रेशन के अंडर आती है जबकि इसकी बॉर्डर गार्डिंग ड्यूटी की वजह से असम राइफल्स का ऑपरेशनल कंट्रोल इंडियन आर्मी के हाथों में ही है सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स क्राउन रिप्रेजेंटेटिव पुलिस के नाम से मध्य प्रदेश के इमेज में 1939 में एस्टेब्लिश हुई सीआरपीएफ या सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स को मुख्य रूप से स्टेट गवर्नमेंट्स और यूनियन टेरिटरीज में एक्सट्रीम लॉ एंड ऑर्डर सिचुएशन को हैंडल करने इलेक्शंस
के दौरान डिस्टर्ब एरियाज के लार्ज स्केल सिक्योरिटी अरेंजमेंट्स का ओवरऑल कोआर्डिनेशन करने राइट्स और क्राउड कंट्रोल करने नेचरल कैलेमिटीज के दौरान रेस्क्यू और रिलीफ ऑपरेशन करने इत्यादि के लिए डेवलप किया जाता है सीआरपीएफ स्टेट्स और यूटी के पब्लिक ऑर्डर को मेंटेन करते हुए देश की इंटरनल सिक्योरिटी और काउंट र इनसरजेंसीज में भी अहम भूमिका निभाती है साथ ही हम आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सीआरपीएफ देश की अकेली पैरामिलिट्री फोर्स है जिसमें छह महिला बटालियन भी इंक्लूडेड हैं यही नहीं अक्टूबर 1992 में सीआरपीएफ की ही 15 स्पेशलाइज बटालियन को मिलाकर रैपिड एक्शन फोर्स का
भी निर्माण किया गया था इसका काम कम्यून राइट्स और रिलेटेड सिविल अनरेस्ट सिचुएशंस में मिनिमम टाइम में मैक्सिमम फोर्स के साथ रिस्पॉन्ड करना है इसी तरह 2008 में सीआरपीएफ से ही एक स्पेशल ऑपरेशन यूनिट कमांडो बटालियन फॉर रेजोल्यूशन या कोबरा का गठन किया गया था जिसका काम देश के नक्सलाइट मूवमेंट से डील करना था अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभाते हुए आज तक कोबरा ने चार शौर्य चक्र और एक कीर्ति चक्र अपने नाम किया है इंडो तिब्बतन बॉर्डर पुलिस आईटीबीपी 1962 में हुए सिनो इंडिया वॉर के बाद उसी साल गठित हुई आईटीबीपी या इंडो तिब्बतन बॉर्डर
पुलिस भारत की एक बॉर्डर पेट्रोल ऑर्गेनाइजेशन है इसे भारत और चाइना के तिब्बत ऑटोनॉमस रीजन के बीच लद्दाख के काराकोरम पास से लेकर अरुणाचल प्रदेश के जेलेपला तक बॉर्डर की सुरक्षा के लिए तैनात किया गया है हालांकि ओरिजनली आईटीबीपी को एक गोरिला कम इंटेलिजेंस कम फाइटिंग फोर्स के रूप में कांसेप्चुअल किया गया था लेकिन आज आईटीबीपी कन्वेंशनल बॉर्डर गार्डिंग फोर्स होने के अलावा एक मल्टी डायमेंशन फोर्स है जिसके मुख्य रूप से पांच फंक्शंस हैं पहला भारत के नॉर्दर्न बॉर्डर्स की निगरानी करने के साथ-साथ किसी भी बॉर्डर वायलेशन को डिटेक्ट और प्रिवेंट कर ते हुए लोकल
जनता में सेंस ऑफ सिक्योरिटी को प्रमोट करना सेकंड हाई वेलोसिटी स्टॉर्म्स स्नो ब्लीजार्ड्स एवलांचेस और लैंड स्लाइट्स जैसी नेचुरल क्लाइमेटिक एक्सट्रीमिटीज के बीच बॉर्डर पर इल्लीगल इमीग्रेशन और ट्रांस बॉर्डर स्मगलिंग पर अंकुश लगाना थर्ड देश के राष्ट्रपति भवन वाइस प्रेसिडेंट हाउस सिक्किम के रोमटक मॉनेस्ट्री मसूरी में स्थित लबा सना इत्यादि जैसे कुछ सेंसिटिव इंस्टॉलेशंस और थ्रेटें वीआईपी को सिक्योरिटी प्रोवाइड कराना फोर्थ किसी भी इवेंट ऑफ डिस्टरबेंस में अपने गार्डेड एरिया में में ऑर्डर रिस्टोर और प्रिजर्व करना फिफ्थ अपने तैनाती के क्षेत्र में पीस बनाए रखना यही नहीं 1981 से आईटीबीपी हर साल होने वाली कैलाश
मानसरोवर यात्रा के तीर्थ यात्रियों को भी सुरक्षा उपलब्ध कराती है साथ ही आईटीबीपी यूएन पीसकीपिंग ऑपरेशंस का भी अभिन्न हिस्सा बनी रही है सशस्त्र सीमा बल एसएसबी आईटीबीपी की तरह ही सनो इंडिया वॉर के आफ्टर मैथ में 1963 में एनिमी ऑपरेशंस के अगेंस्ट देश के बॉर्डर एरियाज की सिक्योरिटी को मजबूत करने के उद्देश्य से स्पेशल सर्विस ब्यूरो नाम से बनाई गई यह फोर्सेस 2001 से सशस्त्र सीमा बल के नाम से जानी जाती हैं एसएसबी बॉर्डर गार्डिंग फोर्स की भूमिका नेपाल और भूटान से लगी भारतीय सीमा रेखा में निभाती है जो भारत के उत्तराखंड यूपी बिहार
वेस्ट बंगाल सिक्किम असम और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों में तैनात है यहां रहते हुए बॉर्डर को सिक्योर रखना ट्रांस बॉर्डर क्राइम्स स्मगलिंग और दूसरी इलीगल एक्टिविटीज को रोकना भी एसएसबी की ही जिम्मेदारी है यही नहीं एसएस भी जम्मू एंड कश्मीर के काउंटर इनसरजेंसीज और झारखंड बिहार और छत्तीसगढ़ में एंटी नक्सल ऑपरेशंस में भी इंवॉल्व रहती है बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स 1स्ट ऑफ दिसंबर 1965 में बनी बीएसएफ या बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स इंडिया की बॉर्डर गार्डिंग फोर्स है जो कि प्राइमर इंडिया के पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगे बॉर्डर्स पर तैनात रहती है कन्वेंशनली बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स की ड्यूटीज
को दो अलग-अलग भागों में बांटा जा सकता है एक तो वो रिस्पांस एबिलिटीज जो बीएसएफ युद्ध के दौरान निभाती हैं और दूसरी व जो पीस टाइम के दौरान निभाई जाती हैं पीस टाइम में बीएसएफ का काम है ट्रांस बॉर्डर क्राइम्स स्मगलिंग और इंडियन टेरिटरी में किसी भी तरह की अनऑथराइज्ड एंट्रीज या यहां से होने वाली एग्जिट को रोकना यही नहीं बीएसएफ अपनी प्रेजेंस से बॉर्डर एरियाज के लोगों में एक सेंस ऑफ सिक्योरिटी का प्रसार करने का भी काम करती है वहीं युद्ध के दौरान बीएसएफ की कैपेबिलिटीज और लोकल लॉ फ्रंट सिचुएशन को मॉनिटर करते हुए
कम खतरे वाले सीमावर्ती इलाकों में ग्राउंड होल्ड करने के उद्देश्य से भी बीएसएफ की तैनाती की जाती है ताकि जब आर्मी एक्टिव वॉर फ्रंट पर भीषण युद्ध में उलझी हो तब बीएसएफ रिलेटिवली कम एक्टिव बॉर्डर एरियाज को सिक्योर रख सके अगर युद्ध के बीच परिस्थिति बदलती है और बीएसएफ का गार्डेड रीजन एक्टिव वॉर ज जोन बन जाता है तो आर्मी की ओर से बीएसएफ को एडेड रिइंफोर्समेंट प्रोवाइड कराया जाता है वहीं अगर युद्ध के हालात और बिगड़ते हैं तो इन एरियाज की सिक्योरिटी की जिम्मेदारी बीएसएफ से लेकर आर्मी को दे दी जाती है यही नहीं
युद्ध के दौरान बीएसएफ आर्मी की मेन डिफेंस लाइन के फ्लैंक को एक्सटेंशन देने का काम भी करती है साथ ही अपने तैनाती के एरिया से परिचित होने की वजह से युद्ध के समय बीएसएफ आर्मी को गाइड और लोकल सर्च ऑपरेशंस करने में अहम भूमिका भी निभाती है यही नहीं युद्ध के दौरान अरेस्ट किए हुए प्रिजनर्स ऑफ वॉर को एस्कॉर्ट करने और रिफ्यूजीस को कंट्रोल करने में असिस्टेंसिया दोस्तों 1969 में एस्टेब्लिश हुई सीआईएसएफ 13 प्राइवेट सेक्टर यूनिट्स के साथ-साथ देश की कुल 356 इंडस्ट्रियल यूनिट्स और गवर्नमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट जैसे एटॉमिक पावर प्लांट्स स्पेस इंस्टॉलेशंस माइंस ऑयल
फील्ड्स एंड रिफाइनरी मेजर पोर्ट्स हैवी इंजीनियरिंग स्टील प्लांट्स बैराजस फर्टिलाइजर यूनिट्स ताज महल और लाल किला जैसे हेरिटेज मॉन्यूमेंट्स और हाइड्रोइलेक्ट्रिक या थर्मल पावर प्लांट्स को सिक्योरिटी प्रोवाइड करने का काम करती हैं यही नहीं देश के 60 से ज्यादा इंटरनेशनल और डोमेस्टिक एयरपोर्ट्स और दिल्ली मेट्रो को सुरक्षा प्रदान करने की जिम्मेदारी भी सीआईएसएफ की ही है साथ ही सीआईएसएफ की एक फायर विंग भी है जो देश के इंडस्ट्रियल अंडरटेकिंग और इंस्टॉलेशंस को फायर हजार्ड से सुरक्षित रखने का काम भी करती है इसके अलावा z प् z x वा क्लासिफाइड प्रोटेक्शन प्राप्त लोगों को भी सीआईएसएफ
का स्पेशल सिक्योरिटी ग्रुप सुरक्षा प्रोवाइड कराता है नेशनल सिक्योरिटी गार्ड एनएसजी इंडियन आर्मी सेंट्रल आर्म पुलिस फोर्सेस और स्टेट पुलिस फोर्सेस के सिलेक्टेड पर्सनल से मिलकर बनी एनएसजी का जन्म 1984 में हुए ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद फैले डिस्टरबेंसस को टैकल करने टेररिस्ट एक्टिविटीज से लड़ने और इंटरनल डिस्टरबेंसस से स्टेट की रक्षा करने के उद्देश्य से हुआ था ब्लैक कैट्स के नाम से मशहूर इंडिया की एक काउंटर टेररिज्म यूनिट लैंड और एयर में होने वाली किसी भी हाईजैकिंग सिचुएशन को हैंडल करने में सक्षम है यही नहीं किसी भी तरह के टेररिस्ट थ्रेट्स बॉम्ब्स और आईईडी
डिस्पोजल पोस्ट ब्लास्ट इन्वेस्टिगेशन परफॉर्म करने के साथ-साथ एनएसजी किडनैप सिचुएशंस में से हॉजेस को बचाने में भी पूरी तरह इक्विप्ड है वहीं एनर्जी डेजिग्नेट प्रोटेक्टीस को क्लोज प्रोटेक्शन प्रोवाइड कराने का भी दायित्व निभाती है एनर्जी के कमांडोज अपने स्पेसिफिक सिलेक्शन प्रोसेस और टॉप क्लास ट्रेनिंग की वजह से बेस्ट अमंग द बेस्ट माने जाते हैं यही कारण है कि इन्हें हाई रिस्क सिचुएशंस को टैकल करने के लिए तैयार किया जाता है दोस्तों यहां तक तो हमने बात की इंडिया की पैरा मिलिट्री फोर्सेस के बारे में लेकिन इनके अलावा एक फोर्स ऐसी भी है जिसका जन्म एक
स्पेसिफिक रिस्पांसिबिलिटी निभाने के लिए हुआ था तो चलिए अब हम उसके बारे में भी जान लेते हैं स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप एसपीजी 1985 में एस्टेब्लिश हुई एसपीजी हमारे देश के प्रधानमंत्री को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी निभाती है एसपीजी की जिम्मेदारी देश के साथ-साथ प्रधानमंत्री के विदेश दौरों के दौरान भी बनी रहती है यही नहीं प्रधानमंत्री के साथ उनके ऑफिशियल रेजिडेंस में रहने वाले परिवार जनों की सुरक्षा और अपने पद से हटने के पांच साल तक पूर्व प्रधानमंत्री और उनके ऑफिशियल रेजिडेंस में रहने वाले उनके परिवार को सुरक्षा देने की जिम्मेदारी भी एसपीजी की ही होती है
लेकिन देश के आर्म पुलिस फोर्सेस से अलग एसपीजी की गवर्निंग बॉडी कैबिनेट सेक्रेटेरिएट होती है लेकिन अब शायद आपके मन में यह प्रश्न उठ रहा होगा कि आखिर यह सेंट्रल आर्म पुलिस फोर्सेस इंडियन आर्मी से किस तरह अलग हैं तो चलिए अब हम आपके इस प्रश्न का भी निदान कर देते हैं हाउ आर द आर्म्ड पुलिस फोर्सेस डिफरेंट फ्रॉम द इंडियन आर्मी दोस्तों जैसा हमने अभी तक के डिस्कशन में देखा देश की आर्म पुलिस फर्स फोर्सेस इंडिया की सिक्योरिटी इंश्योर करने में एक बड़ी ही अहम भूमिका निभाती हैं और उसके लिए उन्हें कई तरह की
अलग-अलग रिस्पांसिबिलिटीज दी गई जहां कुछ फोर्सेस देश की सीमा पर पहरा देती हैं तो कुछ हमारे देश की इंटरनल सिक्योरिटी को मजबूत करती हैं वहीं कुछ फोर्सेस की रिस्पांसिबिलिटी और भी ज्यादा स्पेसिफिक है लेकिन इस सब के उलट इंडियन आर्मी का मैंडेट काफी हद तक एक्सटर्नल थ्रेट से देश की रक्षा करने का है हां यह बात सही है कि जब भी किसी वैरी रोल जैसे डिजास्टर मैनेजमेंट या रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान देश को उनकी जरूरत पड़ती है तो इंडियन आर्मी इसके लिए भी तत्पर खड़ी दिखाई देती है लेकिन फिर भी युद्ध के समय देश को
बाहरी हमलों से सुरक्षित रखना और उसका मुंहतोड़ जवाब देना इंडियन आर्मी का मुख्य लक्ष्य है यही वजह है कि जहां इंडिया की आर्म्ड पुलिस फोर्सेस मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स के डायरेक्ट कंट्रोल में है वहीं इंडियन आर्मी मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस के अंदर आती हैं इसी के चलते जहां देश की आर्म फोर्सेस को जनरली थ्री स्टार डीजीपी रैंकड आईपीएस ऑफिसर्स लीड करते हैं तो वहीं इंडियन आर्मी को जनरल रैंक के समतुल्य एक फोर स्टार आर्मी ऑफिसर लीड करते हैं हमारा मानना है कि अब आपको इनके बीच का अंतर समझ आ गया होगा तो चलिए अब हम आर्म
फोर्सेस से जुड़े कुछ इश्यूज के बारे में भी जान लेते हैं साथ ही हम इन परेशानियों के सॉल्यूशंस ढूंढने की भी कोशिश करेंगे इश्यूज फेस्ड बाय द आर्म्ड पुलिस फोर्सेस एंड देयर रेमेडीज दोस्तों हमने अब तक अपने डिस्कशन में देखा कि आर्म पुलिस फोर्सेस या पैरामिलिट्री फोर्सेस देश की इंटरनल सिक्योरिटी को इंश्योर करने के लिए किस तरह के डिफरेंट रोल और रिस्पांसिबिलिटीज निभाती हैं अगर वो आईटीबीपी की तरह हिमालयन रेंजेस के कोल्ड क्लाइमेट में प्रेजेंट है तो बीएसएफ की तरह राजस्थान के हॉट डेजर्ट में भी प्रेजेंट हैं अगर वो सीआईएसएफ की तरह इंडस्ट्रियल इंस्टॉलेशंस की
रक्षा कर रही हैं तो सीआरपीएफ की तरह जंगल्स में एंटी नक्सल ऑपरेशंस भी चला रही हैं लेकिन इन डायवर्सिफाइड रिस्पांसिबिलिटीज को निभाने के बाद भी सीएपीएसआइसीआइसीआइ उन्हें मूलभूत फैसिलिटी भी नहीं मिल पाती जहां एक और आर्मी के कैंटोनमेंट एरियाज और बॉर्डर के पास स्थित उनके इंस्टॉलेशंस को इस्टैब्लिशमेंट एम्युनिशंस की शॉर्टेज से जूझना पड़ता है ऐसे में हॉस्टाइल्स में अपनी ड्यूटी करते इन जवानों को अक्सर अपनी मूलभूत जरूरत की चीजों के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है वहीं दूसरी ओर इनके ग्रीवेंस की भी अक्सर कहीं कोई सुनवाई नहीं होती जैसा कि हमने देखा कि इन आर्म
पुलिस फोर्सेस को जनरली थ्री स्टार आईपीएस लीड करते हैं ऐसे में इन फोर्सेस के हायर पोस्ट मोस्टली इंडियन पुलिस सर्विस से डेपुटेशन पर आए हुए ऑफिसर्स ही फिल करते हैं जिस वजह से अक्सर इस फोर्स के डिसीजन मेकर्स में ब्यूरोक्रेटाइजेशन देखने को मिलता है और वह अपने काडर के लोअर लेवल ऑफिसर्स और फोर्सेस से कटे हुए दिखाई पड़ते हैं ऐसे में वह उनकी समस्याएं समझने और उन्हें सुलझाने में उदासीनता दिखाते हैं यही नहीं इन फोर्सेस में पुअर इनहाउस ग्रीवेंस रिड्रेसल मैकेनिज्म के चलते इन फोर्सेस में मेंबर्स जो ऑलरेडी एक स्ट्रेस्ड और फिजिकली डिमांडिंग जॉब कर
रहे हैं उनके लिए अपनी प्रॉब्लम्स का रेजोल्यूशन ढूंढना और भी मुश्किल हो जाता है इसीलिए हाल के सालों में इन फोर्सेस के मेंबर्स अक्सर सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी परेशानियां उजागर करने की कोशिश करने लगे हैं जबकि यहां विडंबना यह है कि उनका ऐसा करना भी फोर्स के पैरामीटर्स के अकॉर्डिंग इन डिसिप्लिन माना जाता है ऐसे में इन आर्म फोर्सेस के पर्सनल के लिए जॉब सेटिस्फैक्ट्रिली एक सॉलिड मैकेनिज्म बनाए जाने की जरूरत है यही नहीं आर्मी की ही तरह आर्म पुलिस फोर्स में भी इन सर्विस हायरर की को सेट किए जाने की जरूरत है
साथ ही इन फोर्सेस में होने वाले कार्डर रिव्यू को भी और अधिक तेज करने की जरूरत है ताकि इसमें डेपुटेशन पर आए आईपीएस ऑफिसर्स की हेजम को खत्म किया जा सके साथ ही आर्म पुलिस फोर्सेस को वेल इक्विप्ड रखने और उनकी स्पेसिफिक नीड्स के अकॉर्डिंग वेपनाइजिंग रिसर्च एंड डेवलपमेंट यानी कि आर एनडी विंग बनाए जाने की जरूरत है जिससे इन फोर्सेस को मॉडर्नाइज करने में भी मदद मिल सके यही नहीं आर्म पुलिस फोर्स को रिस्ट्रक्चर करने की भी जरूरत है अगर हम सीआरपीएफ की रिस्पांसिबिलिटीज पर गौर करें तो इसे देश भर में अलग-अलग तरह के
फंक्शंस फुलफिल करने पड़ते हैं जिसके चलते ये इलेक्शंस कराने से लेकर नक्सलिज्म से लड़ने तक का काम करती है ऐसे में ऐसी फोर्सेस के लिए वन साइज फिट्स ऑल जैसी अप्रोच नहीं रखी जा सकती बल्कि जरूरत के हिसाब से इन फोर्सेस को और भी अधिक सेगर गट करने की जरूरत है साथ ही स्टेट्स की अपनी लॉ एंड ऑर्डर सिचुएशंस को रिजॉल्व करने के लिए इन आर्म्ड फोर्सेस पर होने वाला ओवर डिपेंडेंस को भी कम करने की जरूरत है ताकि जो काम स्टेट पुलिस की मदद से किए जा सकते हैं उनमें आर्म पुलिस फोर्स को इवॉल्व
ना करना पड़े इससे इन फोर्सेस के पर्सनल को ट्रेनिंग और रेस्ट दोनों के लिए उचित समय मिल पाएगा जिससे इनमें जॉब सेटिस्फेक्शन तो बढ़ेगा ही पर साथ ही जरूरत के समय पर यह फोर्सेस अपनी जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से निभा पाएंगी दो अब हम चलते हैं सिक्योरिटी एजेंसीज ऑफ इंडिया के हम अपने देश की सिक्योरिटी को इंश्योर करने में अहम भूमिका निभाने वाले इंटेलिजेंस और लॉ इंफोर्समेंट नेटवर्क के बारे में चर्चा करेंगे शुरुआत करते हैं इंटेलिजेंस ब्यूरो से दोस्तों इंटेलिजेंस ब्यूरो इंडिया की डोमेस्टिक इंटरनल सिक्योरिटी और काउंटर इंटेलिजेंस एजेंसी है इसका जन्म 1887x आती है
लेकिन आईबी के डायरेक्टर स्ट्रेटेजिक पॉलिसी ग्रुप का पार्ट होने के साथ-साथ नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल की जॉइंट इंटेलिजेंस कमिटी में भी सम्मिलित हैं और इसलिए वह सीधे प्राइम मिनिस्टर को भी रिपोर्ट कर सकते हैं अगर हम आईबी की रिस्पांसिबिलिटीज की बात करें तो यह ऑर्गेनाइजेशन इंटेलिजेंस कलेक्शन और उस कलेक्टेड इंफॉर्मेशन को सेंट्रल और स्टेट गवर्नमेंट के रिलेटेड ऑर्गेनाइजेशंस तक प्रसारित करने का काम करती हैं साथ ही इस रिस्पेक्ट में आईबी सेंट्रल और स्टेट गवर्नमेंट के सिक्योरिटी एडवाइजर की भूमिका भी निभाती हैं ऐसे में देश में टेररिज्म को काउंटर करने के लिए आईबी देश भर से इंटेलिजेंस
कलेक्ट करती है जिसके लिए आईबी सस्पेक्टेड इंडिविजुअल्स ग्रुप्स और ऑर्गेनाइजेशंस के मूवमेंट्स और कम्युनिकेशंस को भी मॉनिटर करती हैं आईबी के काउंटर टेररिज्म मैंडेट में सेपरेटिस्ट और खास तौर पर नॉर्थ ईस्ट इंडिया में होने वाले वायलेंट पॉलिटिकल मूवमेंट्स को काउंटर करने का काम आता है उसके इस काम में स्टेट सब्सिडियरी इंटेलिजेंस ब्यूरोस भी एक अहम भूमिका निभाते हैं इस तरह हम देख सकते हैं कि देश के अंदर काउंटर इंटेलिजेंस से लिंक्ड लगभग सारा काम आईबी के ही जिम्मे हैं यही नहीं 1951 की हिम्मत सिंह जी कमेटी जिसे नॉर्थ एंड नॉर्थ ईस्ट बॉर्डर कमेटी के नाम
से भी जाना जाता है उसकी रिकमेंडेशंस के चलते आईबी बॉर्डर एरियाज में इंटेलिजेंस कलेक्शन का काम भी करती है जोकि 1947 में भारत की आजादी के पहले मिलिट्री इंटेलिजेंस ऑर्गेनाइजेशंस का काम था एंड जस्ट टू मेंशन 1968 तक आईबी डोमेस्टिक और फॉरेन इंटेलिजेंस दोनों ही हैंडल करती थी लेकिन 1968 में रिसर्च एंड एनालिसिस विंग के फॉर्मेशन के बाद फॉरेन इंटेलिजेंस की जिम्मेदारी रॉ को सौंप दी गई अपनी रिस्पांसिबिलिटीज को पूरा करने के लिए आईबी में पर्सनल रिक्रूटमेंट डायरेक्टली नहीं होता बल्कि इसमें काम करने वाले ज्यादातर पर्सनल इंडिया की लॉ इंफोर्समेंट एजेंसीज और खास तौर पर
इंडियन पुलिस सर्विसेस के कैडर से आते हैं लेकिन इस सबके बीच आईबी के इर्दगिर्द कुछ कंट्रोवर्सीज भी देखने को मिलती हैं जिसमें सबसे प्रमुख आरोप यह लगता है कि आईबी बिना किसी वारंट के फोस के वायर टैपिंग या किसी भी तरह के कन्वर्सेशन की स्नूपिंग करने की स्वच्छंदता रखती है इसे कई स्कॉलर्स और एक्टिविस्ट इंटेलिजेंस और इंटरनल सिक्योरिटी की आड़ में फंडामेंटल राइट्स का हनन भी मानते हैं वहीं किसी भी ओवर साइट मैकेनिज्म की अब्सेंस में इसे पॉलिटिकल सर्विलेंस से जोड़कर भी देखा जाता है हालांकि इन कंट्रोवर्सीज को रिजॉल्व करने के लिए समय-समय पर कुछ
सजेशंस और रेमेडीज भी सुझाए जाते हैं उदाहरण के तौर पर फॉर्मर कैबिनेट सेक्रेटरी नरेश चंद्रा की अध्यक्षता में बनी द टास्क फोर्स ऑन नेशनल सिक्योरिटी ने एक नेशनल इंटेलिजेंस कोआर्डिनेटर या इंटेलिजेंस जार को नियुक्त करने की रिकमेंडेशन दी थी जिसका काम अलग-अलग इंटेलिजेंस एजेंसीज पर निगरानी रखने के साथ-साथ उनके बीच एक इफेक्टिव कोऑर्डिनेशन को फैसिलिटेट करना था ताकि पावर का मिसयूज कम हो सके इसके अलावा आईबी को नेशनल सिक्योरिटी त रिस्ट्रिक्टर करने और पॉलिटिकल सर्विलेंस से दूर रखने के लिए भी समय-समय पर रिफॉर्म्स फॉरवर्ड किए जाते रहे हैं चलिए अब हम भारत की डोमेस्टिक इंटेलिजेंस
एजेंसी से फॉरेन इंटेलिजेंस एजेंसीज की ओर बढ़ते हैं और चर्चा करते हैं रॉ की रिसर्च एंड एनालिसिस फिंक रॉ धर्मो रक्षति रक्षता का मोटो लिए 21 ऑफ सितंबर 1968 में स्थापित हुई रिसर्च एंड एनालिसिस पिंग या रॉ भारत की फॉरेन इंटेलिजेंस एजेंसी है 1962 में सनो इंडिया वॉर के दौरान हुई फॉरेन इंटेलिजेंस फेलर के बाद पहली बार तत्कालीन प्राइम मिनिस्टर जवाहरलाल नेहरू ने एक डेडिकेटेड फॉरेन इंटेलिजेंस एजेंसी को एस्टेब्लिश करने की तरफ काम किया वहीं 1965 के इंडो पाकिस्तान वॉर के बाद चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल जयंतो नाथ चौधरी ने भी और ज्यादा इंटेलिजेंस गैदरिंग
की बात सामने रखी ऐसे में 1966 का साल खत्म होते-होते एक सेपरेट फॉरेन इंटेलिजेंस एजेंसी के इस्टैब्लिशमेंट की ओर कॉंक्रीट स्टेप शुरू हो चुके थे जिसके बाद फाइनली इंदिरा गांधी गवर्नमेंट ने 1968 में रिसर्च एंड एनालिसिस विंग को एस्टेब्लिश कर दिया और फॉरेन इंटेलिजेंस का टास्क इंटेलिजेंस ब्यूरो से लेकर रॉ को दे दिया गया इस एजेंसी का प्राइमरी फंक्शन फॉरेन इंटेलिजेंस गैदर करने के साथ-साथ काउंटर टेररिज्म काउंटर के फॉरेन स्ट्रेटेजिक इंटरेस्ट को बढ़ावा देने की दिशा में पॉलिसी मेकर्स को एडवाइस देने का है यही नहीं रॉ भारत के न्यूक्लियर प्रोग्राम्स के सिक्योरिटी में भी इवॉल्वड
है अपने इस्टैब्लिशमेंट के बाद बीते पांच दशक में रॉ ने विश्व में इंडियन डिप्लोमेसी के डोमिनेंस को एस्टेब्लिश करने में एक अहम भूमिका निभाई है बहुत से एक्सपर्ट्स का मानना है कि रॉ के पावर्स और इंडियन फॉरेन पॉलिसी में उसका रोल बदलती सरकारों और पीएम के अनुसार ही बदलता रहा है वहीं रॉ के पास इंडिया की बहुत सी फॉरेन पॉलिसी सक्सेस का भी क्रेडिट जाता है जैसे 1971 में पाकिस्तान का विभाजन और बांग्लादेश का निर्माण 1975 में सिक्किम का भारत में विलय कोल्ड वॉर के दौरान हुए अफ्रीकन लिबरेशन मूवमेंट्स अफगानिस्तान में भारत का बढ़ता डोमिनेंस
लेकिन इन सबके बाद भी रॉ पे कुछ प्रश्न उठाए जाते हैं जैसे रॉ के राइट टू इंफॉर्मेशन के अंडर ना होने से इसकी वर्किंग और ऑब्जेक्टिव को लेकर ट्रांसपेरेंसी और अकाउंटेबिलिटी का अभाव है जिसके चलते रॉ और इसके ऑफिशल्स पर करप्शन और एब्यूज ऑफ पावर से जुड़े आरोप भील ते हैं वहीं कुछ देश कई बार रॉ पर उनके देश की पॉलिटिक्स पर इंटरफेरेंस का आरोप भी लगाते हैं हालांकि इंडियन गवर्नमेंट इसे नकारते रही है खैर आईबी की तरह ही रॉ की खामियों को दूर करने के लिए भी समय-समय पर एक ओवर साइट मैकेनिज्म को बनाए
जाने की अनुशंसा की जाती रही है दोस्तों अब आगे बढ़ते हुए हम अगले इंपॉर्टेंट ऑर्गेनाइजेशन नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो को समझते हैं नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो एनसीबी अगर आप इंडियन कॉन्स्टिट्यूशन के आर्टिकल 47 को को देखेंगे तो यह पाएंगे कि हमारे संविधान के लिए डीपीएस पीज में यह बात मेंशन है कि स्टेट को मेडिकल पर्पसस को छोड़कर स्वास्थ्य के लिए हानिकारक सभी तरह के इंटॉक्सिकेटिंग ड्रग्स के यूज़ को प्रोहिबिट करने की दिशा में प्रयास करने चाहिए वहीं दूसरी ओर इंडिया ड्रग्स कंट्रोल से रिलेटेड बहुत से इंटरनेशनल कन्वेंशंस का भी सिग्नेटरी है जैसे कन्वेंशन ऑन नारकोटिक्स ड्रग्स 1961
जिसे 1972 में अमेंड करके प्रोटोकॉल बना दिया गया कन्वेंशंस ऑन साइकोट्रॉनिक्स 1971 और यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन अगेंस्ट इलिसिट ट्रैफिक इन नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉनिक्स एंड साइकोट्रॉनिक्स ट्रैफिकिंग इन नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉनिक्स कंट्रोल ब्यूरो का गठन किया गया था यहां हम आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कि नारकोटिक्स और ड्रग्स से रिलेटेड इन लॉज का इंप्लीमेंटेशन इंडिया के इंटरनेशनल ऑब्लिगेशंस को पूरा करने के लिए हुआ था यही नहीं एनसीबी इस काम में फॉरेन कंट्रीज की कंसर्न अथॉरिटीज को भी असिस्टेंसिया और इंटरनेशनल कोआर्डिनेशन से ड्रग्स एंड सब्सटेंसस के इलिसिट ट्रैफिक को प्रिवेंट और सप्रे किया जा
सके साथ ही एनसीबी नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉनिक्स और मॉड ऑपरेंडी को समझकर उससे रिलेटेड इंटेलिजेंस को स्टेट पुलिस और कस्टम्स को ट्रांसफर किया जा सके नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स के अंडर आती है और देश की इकोनॉमिक इंटेलिजेंस काउंसिल का भी पार्ट है यहां हम आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एनसीबी के ऑफिसर्स को डायरेक्ट रिक्रूटमेंट प्रोसेस से लेकर इंडियन रेवेन्यू सर्विस इंडियन पुलिस सर्विस और पैरामिलिट्री फोर्सेस से भी लिया जाता है नेशनल टेक्निकल रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन एनटीआरओ एनटीआरओ या नेशनल टेक्निकल रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन भारत की डेडिकेटेड टेक्निकल इंटेलिजेंस एजेंसी है 1999 की कारगिल
वॉर के बाद जब इसके एनालिसिस के लिए सुब्रमण्यम कमेटी का गठन हुआ तो इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में इंडिया की इंटेलिजेंस गैदरिंग और नेशनल सिक्योरिटी सेटअप की वीकनेसेस को उजागर किया जिके बाद तत्कालीन डिप्टी प्राइम मिनिस्टर एल के अडवाणी की अध्यक्षता में बनी ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स ने एनटीएफ यानी नेशनल टेक्निकल फैसिलिटी ऑर्गेनाइजेशन के सेटअप को हरी झंडी दे दी जो आगे जाकर एनटीआरओ या नेशनल टेक्निकल रिसर्च र् के नाम से जानी गई एनटीआरओ रिमोट सेंसिंग एस आईजीआई एनटी डेटा गैदरिंग एंड प्रोसेसिंग साइबर सिक्योरिटी जिओ स्पेशियल इंफॉर्मेशन गैदरिंग क्रिप्टोलॉजी स्ट्रेटेजिक हार्डवेयर एंड सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट एंड
स्ट्रेटेजिक मॉनिटरिंग जैसे मल्टीपल डिसिप्लिन की इंटेलिजेंस एनालाइज करने वाली एक स्पेशलाइज एजेंसी है एनटीआरओ टेक्नोलॉजी एक्सपेरिमेंट सेटेलाइट्स टीएस काटो सेट 2a ए सेट एंड काटो सेट 2b के अलावा दो रडार इमेजिंग सेटेलाइट्स आरई सेट व एंड आरई सेट टू की मदद से ऑपरेट करती है साथ ही एनटीआरओ इंडियन एयरफोर्स के साथ मिलकर बहुत से वेरी लॉन्ग रेंज ट्रैकिंग रडार वीएल आरटीआर सिस्टम्स भी ऑपरेट करती है दोस्तों आपके लिए जानना दिलचस्प होगा कि वीएल आरटीआर का प्रयोग मिसाइल मॉनिटरिंग और स्पेस बोन थ्रेड के डिटेक्शन के लिए किया जाता है यही नहीं एनटीआरओ इंडियन नेवी की मदद
से इंडियन ओशन के सर्विलेंस के लिए आईएनएस ध्रुव का इस्तेमाल भी करती है यहां हम आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एशिया में अपनी तरह की फर्स्ट ऑर्गेनाइजेशन नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ क्रिप्टोलॉजी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एनआईआईडी और नेशनल क्रिटिकल इंफॉर्मेशन इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोटेक्शन सेंटर भी एनटीआरओ के अंडर ही आते हैं जो सेटेलाइट्स अंडरवाटर बियोस ड्रोन वी सेट टर्मिनल लोकेटर्स और फाइबर ऑप्टिक केबल नोडल टैप पॉइंट्स जैसे सेंसर्स और प्लेटफार्म के जरिए गैदर्ड इंटेलिजेंस को मॉनिटर इंटरसेप्ट और एसेस करके देश के क्रुशल इंफ्रास्ट्रक्चर और दूसरे वाइटल इंस्टॉलेशंस के थ्रेट को एनालाइज करती है एनटीआरओ प्राइम मिनिस्टर्स ऑफिस
में नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर के अंडर आती है और वो सभी नॉर्म्स ऑफ कंडक्ट जो कि इंटेलिजेंस ब्यूरो और रिसर्च एंड एनालिसिस विंग रॉ पर लागू होते हैं वही एनटीआरओ पर भी लागू होते हैं ऐसे में देश के इंटेलिजेंस सेटअप में एनटीआरओ के स्टेचर और इंपॉर्टेंस को समझना मुश्किल नहीं है नेशनल इंटेलिजेंस ग्रेड ड ग्रेड 2008 में मुंबई में हुए 2611 अटैक्स ने भारत के इंटेलिजेंस गैदरिंग और एक्शन नेटवर्क्स के लूप होल्स को उजागर कर दिया ऐसे में तभी से ट ग्रिड के इस्टैब्लिशमेंट को लेकर प्रयास किए जा रहे थे और उसके बाद से ही यह
अलग-अलग फेजेस में ऑपरेशनलाइज होना शुरू हुआ इसके चलते फाइनली 31 ऑफ दिसंबर 2020 से ऑपरेशनल हुआ नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड या ट ग्रिड एक इंटीग्रेटेड इंटेलिजेंस मास्टर डेटाबेस स्ट्रक्चर है नाट ग्रिड एक टूल की तरह है जिसमें गवर्नमेंट ऑफ इंडिया के अंडर की 21 डिफरेंट कोर सिक्योरिटी एजेंसीज के इंटेलिजेंस और रिपोर्ट से कलेक्टेड डाटा को स्टोर किया जाता है नाट ग्रेड केपोल डाटा में स्पेसिफिक इंटेलिजेंस इनपुट्स के अलावा जनरल इमीग्रेशन एंट्री और एग्जिट बैंकिंग ऑन फाइनेंशियल ट्रांजैक्शंस क्रेडिट कार्ड परचेसेस टेलीकॉम इंडिविजुअल टैक्स पेयर्स एयर फ्लायर्स ट्रेन ट्रैवलर से रिलेटेड डाटा भी स्टोर्ड रहेगा ताकि इफेक्टिव काउंटर
टेररिज्म के लिए इंटेलिजेंस ब्यूरो रॉ सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन सीबीआई इंफोर्समेंट डायरेक्टरेट ईडी डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस डीआरआई फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट एफ आईयू सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस सीबीडीटी सेंट्रल बोर्ड ऑफ एक्साइज एंड कस्टम्स सीबीईसी डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सेंट्रल एक्ससाइज एंड इंटेलिजेंस डीजीसीआई एंड नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो एनसीबी जैसी इंडिया की 10 सिक्योरिटी और इंटेलिजेंस एजेंसीज इसे 247 एक्सेस कर सकें लेकिन इस डेटा पूलिंग के चलते ही नाट ग्रिड पर प्राइवेसी के पॉसिबल वायलेशंस और कॉन्फिडेंशियल पर्सनल इंफॉर्मेशन के लीकेज से जुड़े प्रश्न भी उठाए जाते रहे हैं जिनके जवाब में ट ग्रिड का क्लेम है कि
सभी डाटा बहुत से स्ट्रक्चरल और प्रोसीजरल सेफगार्ड्स और ओवर साइट मैकेनिज्म जैसे एक्सटर्नल ऑडिट्स और टेक्नोलॉजी सेफगार्ड के बीच पूरी तरह सुरक्षित है हालांकि यदि डगा केस क्लेम को और उसके क्वेश्चनेबल स्ट्रक्चर को डाटा प्रोटेक्शन से रिलेटेड एक स्टैचुअरी बकिंग मिल जाए तो शायद इस तरह के सभी प्रश्नों पर पूर्ण विराम लगाया जा सकेगा नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी एनआईए दोस्तों आपने amazon2 में हुए मुंबई हमलों से सबक लेते हुए देश की पार्लियामेंट ने नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी एनआईए एक्ट 2008 के तहत नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी को गठित किया एनआईए भारत की प्राइमरी काउंटर टेररिस्ट टास्क फोर्स है जो
कि मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स के एक प्रोक्लेमेशन से राज्यों से बिना किसी स्पेशल परमिशन के भी राज्यों में टेरर रिलेटेड क्राइम्स के इन्वेस्टिगेशन के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है अपने इन इन्वेस्टिगेशंस को इंडिपेंडेंटली और एक्सट्रीमली प्रोफेशनली परफॉर्म करते हुए एनआईए इंटरनेशनल स्टैंडर्ड्स को फॉलो करती है साथ ही वह टेररिस्ट और उनसे जुड़ी इंफॉर्मेशन के स्टोर हाउस को डेवलप करने में भी एक इंपॉर्टेंट रोल प्ले करती है यही नहीं इन्वेस्टिगेशंस के बाद इससे रिलेटेड केसेस भी एनआईए स्पेशल कोर्ट के सामने ही रखे जाने का प्रावधान है ऐसे में हम देख सकते हैं कि इस आग के
जरिए टेररिज्म और उससे जुड़े क्राइम से निपटने के लिए एक पूरे इंडिपेंडेंट सेटअप को ही गठित किया गया है लेकिन एनआईए के इसी इंडिपेंडेंस के चलते राज्य सरकारों द्वारा इसे इंडिया के फेडरल स्ट्रक्चर के लिए एक थ्रेट के तौर पर देखा जाता है वहीं लैक ऑफ फाइनेंशियल ऑटोनॉमी और के लिए एक सेपरेट काडर ऑफ सर्विस का ना होना भी वो कुछ समस्याएं हैं जिन्हें दूर किए जाने की जरूरत है दोस्तों यहां तक हमने देखा भारत की काउंटर टेररिज्म इंटेलिजेंस एजेंसीज और उनके मैंडेट के बारे में लेन अब हम चलते हैं उन ऑर्गेनाइजेशंस की तरफ जो
भारत में रेवेन्यू इंटेलिजेंस से जुड़ी हुई हैं क्योंकि फंडिंग एक इंपॉर्टेंट सोर्स है जिसके दम पर टेड ऑर्गेनाइजेशन सरवाइव करती हैं और इसीलिए रेवेन्यू और फाइनेंशियल इंटेलिजेंस नेटवर्क पर चर्चा जरूरी है इंफोर्समेंट डायरेक्ट रेट ईडी इंफोर्समेंट डायरेक्टरेट भारत की इकोनॉमिक क्राइम से डील करने वाली एजेंसी है यह भारत में इकोनॉमिक लॉस को इंफोर्स करने और इकोनॉमिक क्राइम से लड़ने का काम करती है इंफोर्समेंट डायरेक्टरेट का प्राइम ऑब्जेक्टिव फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट 1999 फेमा प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लरिंग एक्ट 2002 पीएमएलए और द फ्यूरेट इकोनॉमिक ऑफेंडर्स एक्ट 2018 एफ ओए जैसे गवर्नमेंट ऑफ इंडिया के एक्ट्स का
इंफोर्समेंट करना है यही नहीं भारत में मनी लरिंग को चेक करना और उसकी रोकथाम भी ईडी की ही जिम्मेदारी है ईडी गवर्नमेंट ऑफ इंडिया की मिनिस्ट्री ऑफ फाइनेंस के डिपार्टमेंट ऑफ रेवेन्यू का पार्ट है वहीं अगर हम इसके कंपोजिशन की बात करें तो ये इंडियन रेवेन्यू सर्विस इंडियन पुलिस सर्विस और इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस के साथ-साथ अपने ही कार्डर के प्रमोटेड ऑफिसर से मिलकर बनी है डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस डीआरआई डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस या डीआरआई भारत की प्रमुख एंटी स्मगलिंग इंटेलिजेंस इन्वेस्टिगेशन और ऑपरेशंस एजेंसी है डीआरआई भारत के नेशनल और इकोनॉमिक सिक्योरिटी को सुरक्षित रखने
के लिए फायर आर्म्स गोल्ड नारकोटिक्स फेक इंडियन करेंसी नोट्स एंटीक्स वाइल्डलाइफ और एनवायरमेंटल प्रोडक्ट्स के कंट्रा बैंड्स की स्मगलिंग को रोकने का काम करती है साथ ही यह ब्लैक मनी ट्रेड बेस्ड मनी लरिंग और कमर्शियल फ्रॉड को रोकने के लिए भी मैंडेटेड है इस काम को करने वाले डीआरआई के ऑफिसर्स सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेस एंड कस्टम्स सीबीआई से लिए जाते हैं ये ऑफिसर्स इंडिया की अलग-अलग जनल यूनिट्स में पोस्टेड होने के साथ-साथ विदेशों में स्थित इंडियन एंबेसीज में भी कस्टम्स ओवरसीज इंटेलिजेंस नेटवर्क की तरह काम करते हैं फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट एफ आईयू गवर्नमेंट ऑफ
इंडिया के डिपार्टमेंट ऑफ रेवेन्यू के अंडर आने वाला फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट इंडिया एफ आईयू आई एनडी प्रिवेंशन ऑफ मनी लरिंग एक्ट 2002 के अंडर किए गए फाइनेंशियल ऑफेंसेस से जुड़ी फाइनेंशियल इंटेलिजेंस इकट्ठा करने का काम करती है इसके लिए एफ आईयू अलग-अलग रिपोर्टिंग एंटिटीज द्वारा मिलने वाली कैश ट्रांजैक्शन रिपोर्ट्स सीटीआर नॉन प्रॉफिट ऑर्गेनाइजेशन ट्रांजैक्शन रिपोर्ट्स एनटीआर क्रॉ कॉस बॉर्डर वायर ट्रांसफर रिपोर्ट्स सीबी डब्ल्यूटीए रिपोर्ट्स ऑन परचेस और सेल ऑफ इमूवेबल प्रॉपर्टी आईपीआर और सस्पिशंस क्शन रिपोर्ट यानी एसडीआर जैसी रिपोर्ट को रिसीव करने वाली नोडल एजेंसी की भूमिका भी निभाती है यही नहीं एफ आईयू इन
रिपोर्ट्स को एनालाइज करने और इनके सेंट्रल रिपोजिटरी की भूमिका निभाने के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर पीएमएलए 2002 के वायलेशन पर पटव एक्शंस लेने के लिए भी स्वच्छंद है नवंबर 2004 में गठित एफ आई यू डायरेक्टली इकोनॉमिक इंटेलिजेंस काउंसिल ईआईसी को रिपोर्ट करती है जिसे भारत के फाइनेंशियल मिनिस्टर हेड करते हैं डायरेक्टरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस डीजीजीआई दोस्तों डायरेक्टरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस डीजीजीआई मिनिस्ट्री ऑफ फाइनेंस के अंदर आने वाली एक लॉ इंफोर्समेंट एजेंसी है जो भारत में टैक्स एवेजन को फाइट करने का काम करती है 1979 में डायरेक्टरेट जनरल ऑफ एंटी एवेजन के नाम से
गठित ही ऑर्गेनाइजेशन बाद में डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सेंट्रल एक्ससाइज इंटेलिजेंस के नाम से जानी जाने लगी वहीं गुड्स एंड सर्विसेस टैक्स के इंट्रोड्यूस होने के बाद इसका नाम बदलकर डायरेक्टरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस डीजीजीआई कर दिया गया यहां हम आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ये एजेंसी नाड ग्रिड का भी पार्ट [संगीत] है दोस्तों भारत जैसे देश के लिए अपने बॉर्डर्स को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है अब आप पूछेंगे कि भला भारत जैसे देश से हमारा क्या मतलब है तो जस्ट टू मेंशन भारत की 15600 किमी लंबी लैंड बाउंड्री है और उसके पड़ोस में
पाकिस्तान जैसा फेल्ड स्टेट और चाइना जैसा एक्सपेंशनरी पॉलिसी फॉलो करने वाला देश है वहीं दूसरी ओर हमारा पड़ोसी बांग्लादेश जिससे हमारी सबसे लंबी सीमा जुड़ी हुई है और म्यानमार जिससे हमारे पोरस बॉर्डर्स हैं यानी यह भी हमारी बॉर्डर सिक्योरिटी के लिए इश्यूज क्रिएट करता है इनके अलावा जैसे हर पड़ोसी के बीच छोटी-मोटी ही सही पर कुछ ना कुछ नोक झोक बनी ही रहती है ठीक वैसे ही हमारे फ्रेंडली नेबर्स नेपाल और भूटान से लगी सीमा पर भी छोटे-मोटे इश्यूज बने ही रहते हैं वहीं हम इन सबके साथ-साथ इंडिया के मैरीटाइम बॉर्डर से जुड़े हमारे पड़ोसी
देश श्रीलंका से चल रहे बॉर्डर इश्यूज के बारे में भी जानेंगे तो चलिए आज हम भारत की बॉर्डर सिक्योरिटी और उससे जुड़े मुद्दों के बारे में जरा विस्तार में चर्चा करते हैं और ये समझने की कोशिश करते हैं कि आखिर अपनी सीमा को सुरक्षित रखने के लिए आज हम क्या कदम उठा रहे हैं इस कड़ी में सबसे पहले हम अपने इस डिस्कशन की शुरुआत भारत के वेस्टर्न और नॉर्थ वेस्टर्न बॉर्डर से करते हैं जहां पाकिस्तान द्वारा कश्मीर के एक हिस्से को इलीगली ऑकुपाड़ा की सीमा केवल पाकिस्तान से ही मिलती है यह भारत का सबसे ज्वलनशील
बॉर्डर है जो भारत के पश्चिम में गुजरात से लेकर उत्तर में जम्मू और कश्मीर तक फैला हुआ है इंडो पाकिस्तान बॉर्डर दोस्तों येय तो भारत और पाकिस्तान के बीच के इंटरनेशनल बॉर्डर की लंबाई को लेकर कोई आम सहमति नहीं है और उसका एक बड़ा कारण यह है कि पाकिस्तान ने भारत के कश्मीर का एक हिस्सा इलीगली ऑकुपाड़ा है इसके चलते इस हिस्से में दोनों के बीच के बॉर्डर को इंटरनेशनल बॉर्डर ना मानते हुए एलओसी यानी लाइन ऑफ कंट्रोल कहा जाता है है लेकिन फिर भी अगर हम एक रिलायबल रिसोर्स के हवाले से बात करें तो
अमेरिकन पब्लिश ब्रॉडकास्टर पब्लिक ब्रॉडकास्टिंग सर्विस के मुताबिक दोनों के बीच के बॉर्डर की कुल लंबाई 3323 किमी है जो अमेरिकन न्यूज़ पब्लिकेशन ग्रुप फॉरेन पॉलिसी द्वारा 2011 में रिलीजड एक आर्टिकल के अनुसार दुनिया के सबसे डेंजरस इंटरनेशनल बॉर्डर्स में से एक है यही नहीं अगर हम गुजरात से लेकर राजस्थान और पंजाब से होते हुए जम्मू एंड कश्मीर तक फैले इस भारत पाकिस्तान के बॉर्डर पर गौर करें तो हम पाएंगे कि यह फि ली और ज्योग्राफिकली भी दुनिया के सबसे डायवर्सिफाइड बॉर्डर्स में से एक है क्योंकि यहां यह गुजरात में बेलोसी लेवल से शुरू होता है
तो वहीं थार डेजर्ट से होते हुए यह हिमालयन रेंजेस में दुनिया की सबसे ऊंची चोटियों में से एक से होकर गुजरता है यही नहीं आजादी के बाद से ही भारत पाकिस्तान के सख्त रिश्तों और उस वजह से समय-समय पर आए बदलाव की वजह से भारत पाकिस्तान का ये बॉर्डर मुख्यत तीन हिस्सों में बंटा हुआ है तो चलिए अब हम तीन हिस्सों के बारे में भी जान लेते हैं इंटरनेशनल बाउंड्री यह भारत पाकिस्तान के बॉर्डर का लगभग 2300 किमी लंबा व हिस्सा है जिसे दोनों ही देश इंटरनेशनली रिकॉग्नाइज करते हैं भारत पाक सीमा के इस हिस्से
को रेडक्लिफ लाइन भी कहा जाता है सेकंड लाइन ऑफ कंट्रोल या एलओसी यह भारत के कश्मीर और पाकिस्तान द्वारा इलीगली ऑक्यूपाइड या फिर कहें पाकिस्तान एडमिनिस्टर्ड कश्मीर के बीच की वो डी फैक्टो बाउंड्री है जिसे 1972 में हुए शिमला एग्रीमेंट में डिमार्केट किया गया था ये लगभग 770 किमी लंबी है थर्ड एक्चुअल ग्राउंड पोजीशन लाइन और एजीपीएल दोस्तों जम्मूकश्मीर में स्थित भारत के लिए स्ट्रेटजिकली सबसे इंपॉर्टेंट पॉइंट्स में से एक सियाचिन रीजन में भारत और पाकिस्तान के ट्रूप्स की करंट पोजीशन को डिवाइड करने वाली लाइन को एक्चुअल ग्राउंड पोजीशन लाइन कहा जाता है ये लगभग
110 किमी लंबी लाइन है जो nj9842 के नॉर्थ में इंदिरा कॉल तक जाती है लेकिन भारत पाक विभाजन रेखा के इन तीन विभाजन के अलावा भी एक चौथा विभाजन है जिसे यह नाम यूनाइटेड नेशंस ने दे दिया है तो चलिए इसके बारे में भी थोड़ा हम जान लेते हैं और वह है वर्किंग बाउंड्री दोस्तों पाकिस्तान के पंजाब और इंडियन एडमिनिस्ट्रेट जम्मू एंड कश्मीर के बीच स्थित लगभग 200 किमी लंबी वर्किंग बाउंड्री को यूएन द्वारा यह नाम इसलिए मिला क्योंकि इंटरनेशनल फोरम्स पर पाकिस्तान इंडिया के जम्मू एंड कश्मीर को भी अपना ही अंग मानता रहा है
वहीं दूसरी तरफ भारत अखंड कश्मीर को अपना हिस्सा मानता है ऐसे में इस डिस्प्यूटेड नेचर की वजह से यूएन ने इस बॉर्डर को वर्किंग बाउंड्री माना है चलिए तो अब जब आप भारत पाक बॉर्डर और उसके डिविजंस के बारे में जान चुके हैं तो अब इस बॉर्डर से रिलेटेड कुछ इंपॉर्टेंट डिस्प्यूट्स और बॉर्डर इश्यूज के बारे में भी जान लेते हैं मेन इश्यूज ऑन इंडो पार्क बॉर्डर दोस्तों अगर आप भारत के मानचित्र पर गौर करें तो आप पाएंगे कि सिया चन एक त्रिभुजाकार या ट्रायंगुलर शेप्ड लैंड है जो कि पाकिस्तान ऑक्यूपाइड कश्मीर और पाकिस्तान द्वारा
चाइना को द दिए हुए कश्मीर के हिस्से के बीच में पड़ता है चाइना और पाकिस्तान के बीच इसकी इसी ज्योग्राफिकल पोजीशन की वजह से सिया चन एक बहुत ही इंपॉर्टेंट स्ट्रेटेजिक पॉइंट है यही कारण है कि पाकिस्तान की ओर से समय-समय पर सियाचिन को हथियाने के प्रयास होते रहे हैं क्योंकि अगर पाकिस्तान ने सियाचिन पर अपना अधिकार कर लिया तो ना केवल उसके लिए चाइना तक पहुंचने का एक सीधा मार्ग खुल जाएगा बल्कि यहां से वो पूरे लद्दाख रीजन और क्रुशल ले श्रीनगर हाईवे पर स्ट्रेटेजिक ओवर साइट रख पाएगा जिससे भारत के लिए एक बड़ा
खतरा खड़ा हो जाए जाएगा यही कारण है कि भारत पाक के बीच हुए 1947 48 वॉर के बाद 1949 में हुए कराची सीज फायर एग्रीमेंट के एमिगस वडिंग का फायदा उठाकर वो सियाचिन पर अपना अधिकार जताता रहता है यही नहीं 1983 में पाकिस्तान ने अपने ट्रूप्स को भेजकर सियाचिन पर कब्जा करने की कोशिश भी की थी लेकिन तब भारतीय सेना ने ऑपरेशन मेघदूत चलाकर उसकी कोशिश नाकाम कर दी अगर हम आज की बात करें तो सिहासन के पूरे ग्लेशियर के साथ-साथ यहां के सॉल्टरो रिच के तीनों इंपॉर्टेंट पासेस सियाला बेलफल और गनला भी भारत के
ही अधिकार में है सेकंड इशू गिल गट बाल्टिस्तान इशू दोस्तों कश्मीर को लेकर 1947 48 में भारत पाकिस्तान के बीच हुए पहले युद्ध के बाद यूनाइटेड नेशंस के रेजोल्यूशन ने एक टेंपररी सीस फायर लाइन एस्टेब्लिश कर दी जिसके चलते कश्मीर पाकिस्तान एडमिनिस्टर्ड रीजन और इंडियन एडमिनिस्टर्ड रीजन में बट गया उसके बाद इन दोनों ही रीजंस में यूएन द्वारा जल्द से जल्द रेफरेंडम की व्यवस्था की जानी थी लेकिन ये पोजीशन आज भी जस की तस बनी हुई है क्योंकि रेफरेंडम की कंडीशन के लिए पहले पाकिस्तान अपने ट्रूप्स को कश्मीर से स्पीच लेगा क्योंकि रेफरेंडम की कंडीशन
यह थी कि पहले पाकिस्तान अपने ट्रूप्स को कश्मीर से पीछे लेगा लेकिन उसने ये आज तक नहीं किया है अगर हम आज की स्थिति में देखें तो पूरा जम्मूकश्मीर और लद्दाख का रीजन जो कि भारत का अभिन्न अंग है वोह तीन हिस्सों में बटा हुआ नजर आता है पहला इंडियन कंट्रोल इस वक्त भारत के अधिकार में पूरे जम्मूकश्मीर का लगभग 45 पर पोशन मौजूद है जो कि इस अनडिसाइडेड स्टेट का सदन और ईस्टन पार्ट है सेकंड पाकिस्तान कंट्रोल्ड पाकिस्तान का ये एरिया लगभग तीन एरियाज में डिवाइडेड है एक एरिया जिसे पाकिस्तान आजाद कश्मीर कहता है
गिल गट और बाल्टिस्तान य अन डिवाइडेड जम्मू एंड कश्मीर का नॉर्दर्न और वेस्टन पोर्शन है जो कि टोटल एरिया के नजरिए से लगभग 35 पर है थर्ड पोर्शन है चाइना कंट्रोल्ड दोस्तों अनडिसाइडेड जम्मू एंड कश्मीर का ईस्टर्न रीजन चाइना के कंट्रोल में है ये रीजन अक्साई चिन्ह कहलाता है और टोटल एरिया का लगभग 20 पर है ऐसे में एक ही स्टेट के इस तरह के डिवीजन की समस्या अपने ही तरह की यूनिक सिचुएशन खड़ी कर देती है जहां तीनों कंट्रीज एक दूसरे के कंटेंशन में खड़ी नजर आती हैं यही कारण है कि यह मुद्दा इंटरनेशनल
फोरम्स पर भी गर्म बना रहता है जबकि यूनाइटेड नेशंस ने भी इस पूरे रीजन को डिस्प्यूटेड एरिया मानकर ठंडे बस्ते में डाल रखा है जिसकी वजह से इसे रिजॉल्व करने की दिशा में कोई पहल नहीं की जा रही नतीजा यह है कि भारत इस पूरे रीजन का राइटफुल ओनर होने के बाद भी अपने अभिन्न भाग को तीन हि हिस्सों में बटा देखने के लिए मजबूर है रिवर डिस्प्यूट्स दोस्तों ये तो आप जानते ही हैं कि हिमालयन रेंजेस बहुत सी पेरिनियल रिवर्स का सोर्स है साथ ही जम्मूकश्मीर में मौजूद हिमालयन रेंजेस का प्राकृतिक ढाल पाकिस्तान की
ओर होने से यहां से ओरिजनेट होने वाली रिवर्स जम्मूकश्मीर या हिमाचल प्रदेश से निकलकर पंजाब होते हुए पाकिस्तान पहुंचती हैं ऐसे में इन रिवर्स के इंटरनेशनल स्टेटस की वजह से इन दोनों देशों के बीच इन रिवर्स के वाटर शेयरिंग और खास तौर पर भारत की ओर से बनाए जा रहे हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट्स को लेकर विवाद बना रहता है हालांकि वर्ल्ड बैंक की मध्यस्थता से 1960 में हुए इंडस वाटर ट्रीटी ने यहां की मुख्य नदियों सतलुज ब्यास रवि चेनाब और झेलम के वाटर शेयरिंग की स्थिति को काफी हद तक साफ कर दिया जिनके अंतर्गत तीनों पूर्वी नदियों
सतलज ब्यास और रवि का अधिकार भारत को और तीनों पश्चिमी नदियों इंडस चिनाब और झेलम का अधिकार पाकिस्तान को दे दिया गया लेकिन अब भारत की जनता की एनर्जी रिक्वायरमेंट्स को पूरा करने और घाटी में फ्लग की समस्या से निपटने के लिए भारत की ओर से इन रिवर्स पर बनाए जा रहे हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट्स पर पाकिस्तान ने ऑब्जेक्शंस उठाए हैं जबकि यह काम करना इंडिया को इंडस वाटर ट्रीटी के तहत अलाउड है इस दिशा में मार्च 2022 में पाकिस्तान ने भारत के 10 हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट्स पर सवाल खड़े किए थे जिनमें किशन गंगा हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट पकाल
दुल लोअर कलना डर बुक और नीमू चिलिंग प्लांट्स प्रमुख थे ऐसे में ये इश्यूज ऑलरेडी सेंसिटिव भारत पाकिस्तान बॉर्डर इश्यूज को और भी ज्यादा वोलेटाइल बना देते हैं नंबर फोर सर क्रीक डिस्प्यूट अरब सागर में भारत के गुजरात और पाकिस्तान में सिंध प्रोविंस को डिवाइड करने वाली 96 किमी लंबी टाइडल शरी सर क्रीक का यह नाम उस ब्रिटिश रिप्रेजेंटेटिव के नाम पर पड़ा है जिसने यहां के ओरिजिनल लोकल रूलरसोंग्स को लेकर ये डिस्प्यूट ब्रिटिश काल से चला आ रहा है और इसी सिलसिले में 1908 में कच्छ के रूलर राव और सिंध गवर्नमेंट के बीच पहली
बार क्रीक एरिया से फायरवुड कलेक्शन को लेकर विवाद हुआ जिसे रिजॉल्व करने की दिशा में 1914 में बॉम्बे प्रोविंस की गवर्नमेंट ने एक एंबीस सा फैसला सुना दिया जिसके चलते यह विवाद सुलझने के बजाय और ज्यादा उलझ गया वैसे इसी फैसले में और क्लेरिटी लाने के उद्देश्य से 1925 में सिंध और कच्छ के बीच हॉरिजॉन्टल सेक्टर में लैंड बाउंड्री के डिमार्केट के लिए 67 पिलर्स एस्टेब्लिश कर दिए गए लेकिन फिर भी सरक्रीक के कुछ हिस्सों को लेकर अभी भी नहीं आ पाई वहीं आजादी के बाद 1968 में इंडिया पाकिस्तान ट्रिब्यूनल ने कच्छ बॉर्डर को लेकर
इंडिया के 90 पर क्लेम को सही माना लेकिन फिर भी स्पेसिफिकली सरक्री के मुद्दे का कोई निष्कर्ष नहीं निकल पाया यही कारण है कि आज भी भारत और पाकिस्तान 1914 में हुए फैसले और 1925 में हुए डिमार्केट की अंबिग्विटी के चलते सरक्रीक को लेकर अपना-अपना दावा पेश करते हैं लेकिन सरक्रीक का यह हिस्सा सिक्योर रखना भारत के नजरिए से बेहद अहम है इसका पहला कारण है यहां पर मौजूद एनर्जी रिसोर्सेस इस एरिया में सीबेड के नीचे ऑयल एंड गैस के बहुत से भंडार होने की बात सामने आती है ऐसे में अगर भारत पाकिस्तान का क्लेम
मान लेता है तो उसे अपने एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जन में लगभग 250 स्क्वायर माइल्स का नुकसान उठाना पड़ेगा जो कि भारत के एनर्जी सिक्योरिटी के लिए एक बहुत बड़ा ब्लंडर होगा वहीं दूसरी ओर यह एरिया एक बहुत ही इंपॉर्टेंट फिशिंग ग्राउंड भी है जिसके चलते यहां भारत और पाकिस्तान दोनों ही देशों के मछुआरे फिशिंग करते हैं ऐसे में एरिया पाकिस्तान को दे देना यहां के लोकल फिशरमैन के लिए भी काफी घातक होगा यही नहीं एक इकोलॉजिकली सेंसिटिव जन होने की वजह से सरकरी की इकोलॉजी को भी रिस्पांसिबली एक्सप्लोइट करना जरूरी है लेकिन इन कारणों के अलावा
भी भारत के लिए इस एरा को सुरक्षित रखना जरूरी है इसका कारण यह है कि सालों से पाकिस्तान की ओर से सरकरी का इस्तेमाल ड्रग्स आर्म्स और दूसरे प्रोडक्ट्स के स्मगलिंग के लिए किया जाता रहा है दलदली क्षेत्र होने की वजह से यहां पर पेट्रोलिंग करना काफी मुश्किल है और इसका फायदा उठाकर यहीं से टेररिस्ट को भी इफिल्टर किया जाता है उदाहरण के लिए 2611 में हुए हमले के दौरान भी टेररिस्ट ने मुंबई में दाखिल होने के लिए जिस इंडियन फिशिंग वेसल कुबेर का इस्तेमाल किया था उसे यहीं से कैप्चर किया गया था ऐसे में
भारत के लिए इस मुद्दे को सुलझाना और इस एरिया को सुरक्षित करना भी बेहद जरूरी है दोस्तों इन स्पेसिफिक इश्यूज के अलावा भी भारत पाकिस्तान के बॉर्डर के कुछ इश्यूज ऐसे हैं जो लोकेशन स्पेसिफिक ना होते हुए भी इस पूरे बॉर्डर पर फैले देखे जा सकते हैं आफ्टर ऑल भारत पाकिस्तान बॉर्डर को दुनिया का सबसे वोलेटाइल और डेंजरस बॉर्डर ऐसे ही थोड़ी बुलाया जाता है अगला इशू है इ फिल्ट्रेशन इसी कड़ी में सबसे पहला मुद्दा है इफिल्टर 1947 के बाद से ही भारत में अपने मिलिट्री बैग्ड टेररिस्ट इफिल्टर करने की कोशिश करता रहा है आफ्टर
ऑल 1947 48 में जब पाकिस्तान ने धोखे से जम्मूकश्मीर के एक हिस्से पर कब्जा किया तब भी उसने इसी हत खंडे का सहारा लिया था और तभी से वह लगातार सीमा पर भारत में अशांति फैलाने के लिए इफिल्टर रहा है क्रॉस बॉर्डर इंस्टेबिलिटी दोस्तो भारत पाकिस्तान की सीमा पर हर समय सीज फायर के उल्लंघन देखने को मिलते हैं ये सीज फायर उल्लंघन कभी-कभी छुटपुट फायरिंग से लेकर मॉडरेट स् क्रमश तक बढ़ जाती हैं जिसके चलते सीमा के किनारे बसे गांव भी सुरक्षित नहीं है ऐसे में मासूम जनता भी डर के साई में जीने को मजबूर
है अगला इशू है प्रोलिफिक एक्टिविटीज पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज आए बिना सीमा पार से बहुत स इलीगल एक्टिविटीज करने की साजिश रचता रहता है उदाहरण के लिए गुजरात से लेकर कश्मीर तक फैले बॉर्डर से अक्सर नारकोटिक्स और आर्म्स की तस्करी की खबरें मिलती रहती हैं जिसके लिए जहां पहले ट्रेडिशनल तरीकों का इस्तेमाल किया जाता था तो वहीं अब इसके लिए हाईटेक ड्रोन तक का इस्तेमाल होने लगा इसी तरह पाकिस्तान की ओर से फेक करेंसी रैकेट्स भी चलाए जा रहे हैं दोस्तों अब जब हम पाकिस्तान और इंडिया के बीच के बॉर्डर से जुड़े मेन इश्यूज
के बारे में जान ही चुके हैं तो चलिए अब हम यह भी जान लेते हैं कि आखिर इन्हें सॉल्व करने की दिशा में हमारी सरकार की ओर से क्या-क्या इनिशिएटिव लिए गए हैं इट टेकन बाय गवर्नमेंट पहला फेंसिंग भारत और पाकिस्तान के बीच के बॉर्डर्स की एक्सेसिबिलिटी कम करने और इनके पोरस नेचर को दूर करने के लिए 2011 में ही भारत सरकार द्वारा सारे बॉर्डर्स को फेंस कर दिया गया था वहीं एलओसी के हाईली सेंसिटिव बॉर्डर पर तो डबल रो फेंसिंग का काम भी पूरा किया जा चुका है दूसरा यूज ऑफ टेक्नोलॉजी इसी तरह इंडो
पार्क बॉर्डर की सुरक्षा को और अच्छा करने के लिए अब कंप्रिहेंसिव इंटीग्रेटेड बॉर्डर मैनेजमेंट सिस्टम सीआई बीएम के अंतर्गत हाई ग्रेड टेक्नोलॉजी का भी इस्तेमाल किया जा रहा है जिके लिए सेंट्रल गवर्नमेंट ने फाइव लेयर सिक्योरिटी प्लान अप्रूव किया है जिसमें क्लोज सर्किट टेलीविजन कैमरा थर्मल इमेजेस अंडरग्राउंड मॉनिटरिंग सेंसर्स और लेजर बैरियर्स को भी बॉर्डर पर प्लेस किया जा रहा है ताकि बॉर्डर पर होने वाले हर मूवमेंट को ट्रैक किया जा सके अपने मल्टी लेयर सेटअप की वजह से फेल र की स्थिति में यह सभी डिवाइसेज एक दूसरे को कंप्लीमेंट करेंगे यही नहीं इंडिया पाकिस्तान
बॉर्डर पर किए गए इलेक्ट्रिफिकेशन और 5000 से ज्यादा फ्लड लाइट सेटअप के चलते 2017 में पंजाब में अमृतसर के पास अटारी में एक इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट भी एस्टेब्लिश किया गया इसी तरह बाकी स्पेसिफिक इश्यूज को जल्द से जल्द रिजॉल्व करने के लिए भी सरकार की ओर से डिप्लोमेटिक फ्रंट्स पर काम किए जा रहे हैं उदाहरण के लिए गवर्नमेंट ने माधव गोडबोले की अध्यक्षता में एक टास्क फोर्स ऑन बॉर्डर मैनेजमेंट भी एस्टेब्लिश की जिसने अपनी रिपोर्ट में नेबरिंग कंट्रीज के साथ पेंडिंग बॉर्डर डिस्प्यूट को रिजॉल्व करने के अलावा बॉर्डर गार्डिंग फोर्सेस को एक्सक्लूसिवली बॉर्डर पर रखने
और उन्हें इंटरनल सिक्योरिटी ड्यूटीज जैसे नक्सलिज्म के खिलाफ फाइट्स इत्यादि में डिप्लॉयड थी फिफ्थ डेवलपमेंट ऑफ बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर बॉर्डर सिक्योरिटी को इंश्योर करने के लिए बॉर्डर एरियाज में रोड्स और दूसरे क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को डेवलप करने का काम भी तेजी से किया जा रहा है जिसके लिए बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन को एक लाबेट रोड मैप बनाने और उसे इंप्लीमेंट करने का काम सौंपा गया है 2021 में पाकिस्तान बॉर्डर्स पर फोर्सेस के स्विफ्ट मूवमेंट को इंश्योर करने के लिए बीआरओ ने लगभग 24 ब्रिजे और तीन रोड्स बनाई [संगीत] थी अपने डिस्कशन में आगे बढ़ते हुए भारत के नॉर्थ
और नॉर्थ ईस्टन बॉर्डर के बारे में चर्चा करेंगे जहां भारत की सीमा चाइना नेपाल और भूटान से मिलती है साथ ही हम जानने का प्रयास करेंगे कि इस सीमा पर आखिर वह कौन से ऑन गोइंग मुद्दे हैं जिन्हें सुलझाए जाने की जरूरत है सबसे पहले चर्चा इंडिया और चाइना बॉर्डर्स की सिनो इंडिया बॉर्डर दोस्तों भारत और चाइना के बीच की सीमा रेखा लगभग 3488 किमी लंबी है जो लद्दाख हिमाचल प्रदेश उत्तराखंड और सिक्किम से होते हुए अरुणाचल प्रदेश तक जाती है सिनो इंडिया बॉर्डर्स की करंट कॉम्प्लिकेशंस मेनली 1950 में हुए चाइनीज एनेक्सेशन ऑफ तिब्बत से
जुड़ी हुई हैं 1950 में जब चाइना ने तिब्बत को ऑकुपाड़ा बताता है तब से इंडो तिब्बत बॉर्डर सिनो इंडिया बॉर्डर में कन्वर्ट हो गया तिब्बत जब से चाइना का हिस्सा बना है तब से ही सेनो इंडिया बॉर्डर पर जगह-जगह पर अलग-अलग डिस्प्यूट्स इंटेंसिफाई होने लगे और 1954 से चाइना अनडिसाइडेड जम्मूकश्मीर स्टेट के ईस्टर्न पार्ट यानी अक्साई चिन्ह उत्तराखंड राज्य के कुछ हिस्से और पूरे अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा पेश कर रहा है इसके पहले कि हम सिनो इंडिया बॉर्डर्स की कॉम्प्लेक्शन को समझे हमें कुछ हिस्टोरिकल फैक्ट समझ लेने चाहिए और इसके लिए हमें सिनो इंडिया
बॉर्डर डिस्प्यूट्स के साथ जुड़ी हुई कुछ इंपॉर्टेंट हिस्टोरिकल बॉर्डर लाइंस को समझना जरूरी है इन लाइंस में सबसे पहली है जॉनसन लाइन जॉनसन लाइन लद्दाख में सर्वे ऑफ इंडिया के डब्ल्यू एच जॉनसन द्वारा में ड्रॉ की गई इंडिया और चाइना के शिजांग के बीच की बॉर्डर लाइन है यह लाइन क्लियर ली अक्साई चिन्ह को इंडियन टेरिटरी मानती है और इंडिया ऑफीशियली लगभग इसी लाइन को लद्दाख एरिया में अपना इंटरनेशनल बॉर्डर मानता है जबकि चाइना 1993 में ड्रॉ ई मकार्टनी मैकडोन लाइन को मानते हुए यह दावा करता है कि एक्साई चिन उसकी टेरिटरी है इसके अलावा
एक और हिस्टोरिकल लाइन है जो 1914 के शिमला कन्वेंशन के तहत एजिस्ट मेंस में आई थी और उसका नाम है मैकमोहन लाइन यह लाइन ब्रिटिश इंडिया और तिब्बत के बीच साइन हुई थी और इसके तहत सेनो इंडिया का ईस्टर्न बॉर्डर डिमार्केट किया गया था इस लाइन के तहत अरुणाचल प्रदेश पूरी तरह से इंडिया का अभिन्न हिस्सा है लेकिन तिब्बत ऑक्यूपेशन के बाद से चाइना ने इस लाइन को रिकॉग्नाइज करने से मना कर दिया और पूरे अरुणाचल प्रदेश में अपना दावा ठोकने लगा जो सरासर गलत है चाइना यह दावा इस बात की तर्ज पर ठोकता है
कि जब मैकमोहन लाइन ड्रॉ हुई तो ब्रिटिशर्स ने ट्रीटी तिब्बत के साथ की थी जबकि उन्हें ये ट्रीटी चाइना के साथ करनी चाहिए थी खैर इंटरनेशनल बॉर्डर के के अलावा एक और इंपॉर्टेंट लाइन है जिसे हम एलएसी कहते हैं इस लाइन का इतिहास 1962 में हुए सिनो इंडिया वॉर से जुड़ा हुआ है 1962 में चाइना ने एसिस्टिंग बॉर्डर्स को पार करते हुए अक्साई चिन्ह पर कब्जा कर लिया और तभी से भारत और चाइना द्वारा एक्चुअली कंट्रोल टेरिटरीज को डिवाइड करने वाली रेखा को लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल या एलएसी कहा जाता है हम आपको बता दें
कि एलएसी और इंटरनेशनल बॉर्डर्स में अंतर यह है कि एलएसी ऑन ग्राउंड ट्रूप्स और कंट्रोल ऑफ टेरिटरी से डिटरमाइंड होती है जबकि इंटरनेशन बॉर्डर्स हमारी ऑफिशियल पोजीशन क्लेम्म जुड़ी हुई हमारी उन टेरिटरी से डिटरमाइंड होती है जिन पर भले ही हमारा एक्चुअल कंट्रोल ना हो लेकिन हम उन्हें अपने देश का अभिन्न हिस्सा मानते हैं मैं आपको यह भी बता दूं कि सिनो इंडिया बॉर्डर डिस्प्यूट्स की कॉम्प्लेक्टेड जाती हैं क्योंकि इंडिया और चाइना के बीच ना तो इंटरनेशनल बॉर्डर्स को लेकर कोई क्लियर सहमति है और ना ही एलसी को लेकर जी हां यही वजह है कि
एलसी के अक्रॉस ट्रू मूवमेंट्स को लेकर समय-समय पर कॉन्फ्लेट्स होते रहे हैं दोनों देशों ने कई बार एलएसी को डिफाइन करने की कोशिशें की हैं लेकिन इस पर कोई खास सहमति अभी तक नहीं हो पाई है तो दोस्तों अब जब आप भारत और चाइना के बॉर्डर की ब्रीफ हिस्ट्री को समझ चुके हैं तो चलिए अब हम इस बॉर्डर के स्पेसिफिक डिस्प्यूट्स को और डिटेल में देखते हैं और इनसे जुड़े कुछ स्पेसिफिक इश्यूज के बारे में भी डिटेल में बात करते हैं इश्यूज अलोंग द चाइना बॉर्डर बॉर्डर डिस्प्यूट्स एक्साइटन वेस्टर्न सेक्टर दोस्तों जब 18653 की सीमाएं
निर्धारित करने वाले अपने सर्वे में अक्साई चिन्ह को जम्मू एंड कश्मीर का पार्ट माना जिके चलते इसे जॉनसन लाइन द्वारा शिंज से अलग किया गया तब शिनयांग पर चाइना का कंट्रोल नहीं था और इसलिए उस समय ब्रिटिश सरकार द्वारा चाइना से इस पर सहमति नहीं ली गई फिर जब 1980 में चाइना ने शिनयांग पर अपना कंट्रोल रीस्टैब्लिश किया तो उसने जॉनसन स् लाइन को मानने से इंकार कर दिया साथ ही वो अक्साई चिन्ह के इस हिस्से को अपना हिस्सा बताने लगा फल स्वरूप ब्रिटिश सरकार की ओर से 18999 मेंट के सामने अक्साई चिन्ह की बाउरी
को रीडिफाइन करते हुए मकार्टनी मैकडोल लाइन का प्रपोजल भेजा गया लेकिन चाइनीज गवर्नमेंट के द्वारा इस प्रपोजल के बारे में कोई रिस्पांस नहीं भेजा गया ऐसे में अक्साई चिन्ह एक ग्रे एरिया बना रहा जिसको लेकर ब्रिटिश और चाइनीज गवर्नमेंट के बीच कोई क्लियर अंडरस्टैंडिंग एस्टेब्लिश नहीं हो पाई और ब्रिटिश इंडिया ने लैक ऑफ चाइनीज रिस्पांस के चलते फिर से जॉनसन लाइन को अपना बॉर्डर मान लिया जिसके चलते जब 1947 में भारत आजाद हुआ तो उसने अपनी ऑफिशियल बाउंड्री निर्धारित करते समय जॉनसन लाइन के आधार पर अक्साई चिन्ह को भारत का हिस्सा मान लेकिन 1950 में
चाइना द्वारा जॉनसंस लाइन को पार करते हुए इस रीजन में रोड बनाने का काम शुरू कर दिया गया और इसी के बाद अक्साई चिन्ह को लेकर दोनों देशों के बीच सीमा पर झड़प का दौर शुरू हो गया इन्हीं क्लैशेस ने आगे जाकर 1962 में सिनो इंडो वॉर का रूप ले लिया इसके बाद चाइना ने अक्साई चन रीजन को इलीगली अपने कब्जे में ले लिया और तभी से यथा स्थिति बनी हुई है यही कारण है कि 1962 के वॉर के बाद से ही वेस्टर्न सेक्टर के सेनो इंडिया बॉर्डर को एलएसी यानी यानी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल
कहते हैं जो इन दोनों देशों के बीच के इंटरनेशनल बॉर्डर को डिफाइन करने के बजाय एरिया ऑफ कंट्रोल को डिफाइन करता है हालांकि शुरू में एलएसी शब्द का इस्तेमाल केवल इसी वेस्टर्न सेक्टर के बॉर्डर को डिफाइन करने के लिए किया जाता था लेकिन 1990 के बाद से ही पूरे सिनो इंडिया बॉर्डर को एलएसी से ही डिफाइन किया जाने लगा जो आज भी जारी है अगला कॉन्फ्लेटिंग सेक्टर है हिमाचल प्रदेश एंड उत्तराखंड यानी कि मिडिल सेक्टर दोस्तों सिनो इंडिया बॉर्डर का ये हिस्सा लगभग पूरी तरह वेल डिफाइंड है और इसी के चलते हां पर चाइना से
कोई खास सीमा विवाद नहीं है साथ ही इस सेक्टर को लेकर दोनों देशों के बीच एग्रीड मैप्स भी एक्सचेंज हो चुके हैं केवल छोटे-मोटे क्लैशेस बारा होती प्लेंस को लेकर होते रहे हैं अरुणाचल प्रदेश ईस्टर्न सेक्टर दोस्तों जैसा हमने पहले भी देखा कि 1914 में तिब्ब दन ब्रिटिश और चाइनीज गवर्नमेंट के बीच लंबे दौर की बैठकों और नेगोशिएशंस के बाद शिमला अकॉर्ड साइन किया गया जिसके जरिए इन तिब्बत ब्रिटिश इंडियन टेरिटरी और चाइना की सीमाओं के निर्धारण करते हुए सर्वसम्मति से मैकमोहन लाइन को को खींचा जाना था लेकिन एन मौके पर चाइना के रिप्रेजेंटेटिव डिप्लोमेट
इवान चन ने इस अकॉर्ड पर साइन करने से इंकार कर दिया इसके बाद फिर से नेगोशिएशंस का एक लंबा दौर चला लेकिन चाइना अपनी जिद से टस से मस ना हुआ अंतता ब्रिटिश और तिब्बत के बीच एक बायलट अकॉर्ड साइन हुआ और टेरिटरीज को डिफाइन करते हुए मैकमोहन लाइन को खींच दिया गया इसके फल स्वरूप अरुणाचल प्रदेश को इंडियन टेरिटरी माना गया तभी से चाइना शिमला अकॉर्ड और मैकमोहन लाइन दोनों के प्रति अपनी असहमति व्यक्त करते हुए अरुणाचल प्रदेश को अपना हिस्सा बताता रहा है लेकिन ताजुब की बात यह है कि जिस मैकमोहन लाइन को
अस्वीकार करते हुए चाइना अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा पेश करता है उसी मैकमोहन लाइन को स्वीकार करते हुए वो म्यानमार से अपने बॉर्डर्स डिफाइन करता है ऐसे में एक ही लाइन और एक ही अकॉर्ड को लेकर चाइना के डबल स्टैंडर्ड्स साफ देखे जा सकते हैं खैर इन सब कॉन्फ्लेट्स और कंफ्यूजन के चलते लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल की वोलेट बनी हुई है और चाइना की ओर से लगातार इसे पीछे ढकल की कोशिश की जा रही है इसके चलते भारत को चाइना से लगी अपनी 3488 किमी लंबी बॉर्डर पर पैनी नजर रखनी पड़ती है क्योंकि भारत की
ओर से जरा सी ढिलाई और चाइना की ओर से डोकलाम और गलवान जैसी और भी नापाक हरकतें देखने को मिल सकती हैं ऐसे में भारत की ओर से बॉर्डर की सुरक्षा की जिम्मेदारी बहुत सी एजेंसीज मिलजुलकर संभालती हैं जिनमें आईटीबीपी यानी इंडो तबेत बॉर्डर पुलिस स्पेशल फ्रंटियर फोर्सेस असम राइफल्स इंडियन आर्मी एंड प्रपोज्ड सिक्किम स्काउट शामिल है अब कुछ और इश्यूज को देखते हैं चाइना पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडॉर सीबीईसी दोस्तों चाइना और पाकिस्तान के बीच बढ़ती नजदीकियों के चलते ही चाइना ने पाकिस्तान द्वारा इलीगली ऑक्यूपाइड से सीपीसी का काम शुरू कर दिया है ऐसे में इस
अनधिकृत कॉरिडॉर के निर्माण से भारत की मुश्किलें और बढ़ गई हैं क्योंकि भले ही चाइना इसके कंस्ट्रक्शन के पीछे इकोनॉमिक ईज और बिजनेस कार्गोज के इजी मूवमेंट का हवाला दे रहा हो लेकिन ये चाइना के लिए एक स्ट्रेटजिकली स्ट्रांग पॉइंट बनता जा रहा है क्योंकि भविष्य में किसी किसी भी कॉन्फ्लेट के दौरान चाइना कभी भी इस रूट के जरिए अपने ट्रूप्स को मोबिलाइज कर पाएगा ऐसे में यह भारत के लिए गंभीर विषय है इसके बाद आते हैं वाटर डिस्प्यूट्स में भारत के नॉर्थ ईस्ट में बहने वाली बहुत सी नदियों का सोर्स चाइना में है जिनमें
ब्रह्मपुत्र जैसी विशाल इंटरनेशनल रिवर और उसकी ट्रिब्यूटरीज प्रमुख हैं ऐसे में चाइना अक्सर इस बात का फायदा उठाते हुए भारत के लिए मुश्किलें खड़ी करता रहा है कभी वो पावर प्रोजेक्ट्स और डम्स के डेवलपमेंट के माध्यम से भारत के नॉर्थ ईस्ट के लिए आने वाले रिवर फ्लो को कट ऑफ कर देता है तो कभी इन्हीं के माध्यम से नॉर्थ ईस्ट में आर्टिफिशियल फ्लड डेवलप कर देता है इसी तरह चाइना एक दूसरी ट्रांस बाउंड्री रिवर मेकांग पर भी तेजी से डम्स डेवलप करके म्यानमार लाओस और वियतनाम जैसी कंट्रीज के लिए भी मुश्किलें बढ़ा रहा है ऐसे
में हम देख सकते हैं कि चाइना अपने नेबर कंट्रीज के अगेंस्ट डम्स और रिवर्स तक का इस्तेमाल करता है स्मगलिंग दोस्तों भारत और चाइना के बीच के बॉर्डर पॉइंट्स के माध्यम से चाइनीज इलेक्ट्रॉनिक्स और दूसरे कंज्यूमर गुड्स की स्मगलिंग भी देखने को मिलती है जो एक बड़ी समस्या है पहले ही चाइनीज गुड्स का डंपिंग करके चाइना ने इंडिया की इकोनॉमिक प्रॉब्लम्स को बढ़ाया है और ऊपर से यह स्मगल्ड गुड्स एक पैरेलल इकोनॉमी को जन्म देते हैं जो इंडिया के फाइनेंशियल सिस्टम के लिए बड़ा खतरा है दोस्तों इन सारे इश्यूज को जानने के बाद चलिए अब
बात करते हैं सेनो इंडिया बॉर्डर्स पर स्थिति को ठीक करने के लिए इंडिया द्वारा क्या-क्या कदम उठाए जा रहे हैं इनिशिएटिव टेकन बाय द गवर्नमेंट बॉर्डर टॉक्स दोनों देशों के बीच के बॉर्डर इश्यूज को सुलझाने के लिए 1981 में हाई लेवल बॉर्डर टॉक्स इनिशिएटिव के बीच एग्रीमेंट ऑन द मेंटेनेंस ऑफ पीस एंड ट्रैक्व अलोंग द एलएसी साइन किया गया वहीं 1996 में एग्रीमेंट ऑन कॉन्फिडेंस बिल्डिंग मेजर्स इन द मिलिट्री फील्ड अलोंग द एलएसी साइन हुआ 2005 में प्रोटोकॉल ऑन द मोडालिटीज ऑफ द इंप्लीमेंटेशन ऑफ कॉन्फिडेंस बिल्डिंग मेजर्स इन द मिलिट्री फील्ड अलोंग द एलएसी 2012
में एग्रीमेंट ऑन द इस्टैब्लिशमेंट ऑफ अ वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कोआर्डिनेशन ऑन इंडिया चाइना बॉर्डर अफेयर्स और 2013 में बॉर्डर डिफेंस कोऑपरेशन एग्रीमेंट इन पांचों एग्रीमेंट्स ने दोनों देशों के बीच मिलिट्री और पॉलिटिकल लेवल्स पर डिप्लोमेटिक इंगेजमेंट के लिए मॉडर स्प्रेंडी प्रोवाइड करने का काम किया है साथ ही इनके जरिए किसी भी एस्केलेशन के दौरान लिए जाने वाले काउंटर डिप्लोमेटिक एक्शंस को भी डिफाइन किया गया है इनके अलावा दोनों देशों के बीच कॉन्फिडेंस बिल्डिंग मेजर्स के तौर पर दोनों देशों के आर्मी हेड क्वार्टर्स और फील्ड कमांड्स के बीच रेगुलर इंटरेक्शंस और एडिशनल बॉर्डर पर्सनल
मीटिंग पॉइंट्स को भी इंश्योर किया जा रहा है इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट एट द बॉर्डर दोस्तों लंबे समय से पहले ही चाइना की तरफ से बॉर्डर पर मास स्केल इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ रेल रोड नेटवर्क्स डेवलप किए गए थे क्योंकि चाइनीज साइड में हिमालयाज का स्लोप तिब्बतन प्लेट के चलते उतना स्टीप नहीं है जितना वो इंडियन साइड पर है इस कॉन्टेक्स्ट में भारत की ओर से डिफिकल्ट टेरेन थिक फॉरेस्ट कवर और लैक ऑफ फंड एलोकेशन की वजह से एप्रोप्राएसी में इस समस्या को दूर करने के लिए अब गवर्नमेंट द्वारा इस ओर विशेष रूप से ध्यान दिया जा रहा
है साथ ही कॉन्फ्लेट के दौरान तेजी से ट्रूप्स और इक्विपमेंट को बॉर्डर एरियाज में पहुंचाने के लिए बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन की मदद से ऑल वेदर रोड्स भी डेवलप किए जा रहे हैं यह काम बीआरओ अपने प्रोजेक्ट्स जैसे प्रोजेक्ट हिमांक प्रोजेक्ट वर्तक इत्यादि के तहत कर रहा है दोस्तों चाइना के बाद अब हम आगे बढ़ते हैं और समझते हैं इंडिया और नेपाल बॉर्डर को इंडो नेपाल बॉर्डर दोस्तों मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स के मुताबिक भारत और नेपाल 1751 किमी लंबा बॉर्डर शेयर करते हैं जो कि उत्तराखंड उत्तर प्रदेश बिहार और वेस्ट बंगाल से होते हुए सिक्किम जाता
है इन दोनों देशों के फ्रेंडली रिलेशंस की वजह से 1950 में दोनों देशों के बीच हुई एक ट्रीटी की वजह से ये एक ओपन बॉर्डर है जिस कारण दोनों ही देशों के लोग एक दूसरे में फ्रीली आ जा सकते हैं साथ ही नेपाली सिटीजंस आसानी से भारत में आकर रह सकते हैं यहां प्रॉपर्टी खरीद सकते हैं और जॉब्स भी पा सकते हैं यह सब ट्रीटी ऑफ पीस एंड फ्रेंडशिप ऑफ 1950 के तहत होता है चकि नेपाल एक लैंडलॉक्ड कंट्री है उसके लिए सी का सबसे क्लोजेस्ट एक्सेस भारत के थ्रू ही है ऐसे में नेपाल का
ज्यादातर इंपोर्ट भारत के थ्रू ही होता है जिसके लिए भारत ने नेपाल को बॉर्डर पर 15 ट्रांजिट पॉइंट्स और 22 ट्रेडिंग पॉइंट्स दिए हैं लेकिन इसके बावजूद कुछ इश्यूज हैं जो इंडिया के लिए सिक्योरिटी प्रॉब्लम्स क्रिएट करते हैं इश्यूज बिटवीन इंडिया एंड नेपाल सेफ हेवन फॉर द क्रिमिनल्स दोस्तों इंडिया नेपाल के बीच ओपन ब र होने की वजह से भारत के इंसर्जनल और बहुत से हार्डकोर क्रिमिनल्स भारत से बचकर नेपाल भाग जाते हैं ऐसे में भारत के लिए इन्हें ढूंढना या पकड़ना मुश्किल हो जाता है इसके चलते नेपाल इंडियन क्रिमिनल्स के लिए एक सेफ हेवन
की तरह बनता जा रहा है पाकिस्तान एंगल भारत और नेपाल के बीच के ओपन बॉर्डर का पाकिस्तान गलत फायदा उठाता रहा है जिके थ्रू व अपनी एंटी इंडिया एक्टिविटीज कैरी आउट करते हुए इसी रास्ते से भारत में आर्म्स और फेक करेंसी पुश करता है कई टेररिस्ट को भी नेपाल के रास्ते उसने इंडिया में दाख दाखिल करवाने की कोशिश की है इशू ऑफ लैंड ग्रैबिंग बॉर्डर के दोनों ओर से बॉर्डर में बढ़ती जाने वाली ढिलाई और इजी गोइंग बिजनेस ट्रांजैक्शन की वजह से अक्सर फोर्स लैंड ग्रबिंग की खबरें भी सुनने में आती रहती हैं चाइना एंगल
एंड बॉर्डर इशू हाल के सालों में ऐसा देखने को मिल रहा है कि नेपाल गवर्नमेंट पर चाइनीज इन्फ्लुएंस बढ़ता जा रहा है ऐसे में हमेशा से इंडिया का फ्रेंड रहा नेपाल समय-समय पर चाइनीज अलाप करता नजर आता है बॉर्डर इशू अभी कुछ साल पहले ही नेपाल गवर्नमेंट ने एक नया पॉलिटिकल मैप रिलीज कि किया उत्तराखंड के स्ट्रेटजिकली इंपोर्टेंट पॉइंट काला पानी लिंपिया अधूरा और लिपलोक को नेपाल ने अपना पार्ट बताया था हालांकि इसके लिए नेपाल ने 1816 में काठमांडू के गुरखा रूलर और ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच साइन हुई ट्रीटी ऑफ सुगौली को आधार बताया
था जबकि 19 सेंचुरी के एडमिनिस्ट्रेटिव और रेवेन्यू रिकॉर्ड्स भी यही दिखाते हैं कि कालापानी का यह हिस्सा भारत का ही भाग रहा है यही नहीं 1950 से ही ये टेरिटरी भारत के कंट्रोल में ही रही है और भारत ने यहां काफी इंफ्रास्ट्रक्चर भी डेवलप किया है इस मुद्दे मु को रिजॉल्व करने के लिए 1998 में ही इंडियन एंड नेपाली ऑफिशल्स की एक जॉइंट टेक्निकल कमेटी बना दी गई लेकिन फिर भी अभी तक ये मुद्दा पूरी तरह रिजॉल्व नहीं हुआ है और समय-समय पर नेपाल द्वारा उठाया जाता रहा है इनिशिएटिव टेकन बाय द इंडियन गवर्नमेंट बॉर्डर
डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेशन कमिटी इंडो नेपाल बॉर्डर से लार्ज डिस्ट्रिक्ट्स के रीजनल इश्यूज को रिजॉल्व करने और कोआर्डिनेशन को बढ़ाने की दिशा में बीडीसीसी मैकेनिज्म डेवलप किया गया भारत और नेपाल के बॉर्डर को सुरक्षित रखने के लिए और यहां पर जनरल विजिलेंस रखने के लिए सशस्त्र सीमा बल की 25 टुकड़िया तैनात की गई बायलट टॉक्स दोनों देशों के बीच आपसी संबंध मधुर बनाए रखने और म्यूचुअल कंसर्न्स को रिजॉल्व करने के उद्देश्य से होम सेक्रेटरी लेवल पर बातचीत और जॉइंट वर्किंग ग्रुप का मैकेनिज्म डेवलप किया गया इन सब के अलावा इन जनरल इंडिया नेपाल रिलेशंस को मजबूत बनाए
रखने के लिए कई इंफ्रास्ट्रक्चर और इन्वेस्टमेंट प्रोजेक्ट्स भी लॉन्च किए गए हैं जैसे अरुण थ हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट इंडो भूटान बॉर्डर दोस्तों भारत और भूटान के बीच बीच वर्म बायलट टाइज और स्ट्रांग बॉर्डर कोऑर्डिनेशन है भूटान जैसी लैंड लॉक कंट्री जो लगभग तीन ओर से चाइना जैसे एक्सपेंशनरी पॉलिसी फॉलो करने वाले देश से घिरा हुआ है उसके लिए अपने और अपने सिटीजंस के इंटरेस्ट को सेफ रखने में भारत एक एक्सट्रीमली इंपॉर्टेंट एलाई हो जाता है यही कारण है कि 2007 में भारत और भूटान ने एक इंपॉर्टेंट स्टेप लेते हुए नई फ्रेंडशिप ट्रीटी भी साइन की
साथ ही इंडिया और भूटान के बीच 1961 से चली आ रही बॉर्डर डिमार्केट की प्रोसेस भी 2006 में कंप्लीट हो गई अब इंडिया भूटान और चाइना ट्राई जंक्शन को छोड़कर इन देशों के बीच बॉर्डर को लेकर कोई कंफ्यूजन या कॉम्प्लेक्शन के बीच कुछ इश्यूज ऐसे हैं जिन्हें सॉल्व करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं तो चलिए इन्हें हम एक-एक करके समझते हैं इश्यूज बिटवीन इंडिया एंड भूटान बॉर्डर डोकलाम इशू डोकलाम प्लेट भूटान का अभिन अंग है जिस पर चाइना भी अपना दावा पेश करता है चाइना के दावे के पीछे एक बड़ा कारण यह
है कि ये रेस्ट ऑफ इंडिया को नॉर्थ ईस्ट इंडिया से जोड़ने वाले सिलिगुरी कॉरिडॉर या चिकन स्नेक के बेहद करीब है ऐसे में अगर चाइना डोकलाम पर कब्जा कर लेता है तो ये उसके लिए बहुत बड़ा स्ट्रेटेजिक एडवांटेज क्रिएट कर देगा इस कोशिश में कुछ साल पहले चाइना द्वारा डोकलाम रीजन में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप करने और रोड बनाने का काम शुरू हुआ था जो एक तरह से भारत के लिए भी खुली चुनौती थी कि वह भूटान को सिक्योर रखने में सक्षम नहीं है लेकिन सही समय पर भारत ने आर्मी ट्रूप्स डिप्लॉयडी पीपल्स लिबरेशन आर्मी के रोड
वर्क को रुकवा दिया ये पहली बार था जब इंडिया ने भूटान के टेरिटोरियल इंटरेस्ट को सिक्योर करने के लिए अपने ट्रूप्स डिप्लॉयड के ऊपर भूटान से इंडिया का बॉर्डर ओपन होने की वजह से भूटान के रास्ते बड़ी मात्रा में चाइनीज मेड गुड्स भूटानी कैनाबिस लिकर और फॉरेस्ट प्रोडक्ट्स को बड़ी मात्रा में भारत में स्मगल किया जाता है वहीं भारत से भी फ्रूट्स ग्रोसरी और लाइव स्टॉक को स्मगल करके भूटान पहुंचाया जाता है ऐसे में दोनों कंट्रीज के लिए यह एक बड़ा रेवेन्यू लॉस और क्रिमिनल एक्टिविटी का सोर्स बन जाता है अब बात करते हैं माइग्रेशन
या इफिल्टर के बीच कंपेरटिवली इजी बॉर्डर और आने जाने के लिए वीजा रिक्वायरमेंट्स ना होने की वजह से मास स्केल माइग्रेशन भी देखने को मिलता है जिसके चलते खास तौर पर दोनों ओर से यहां के बॉर्डर एरियाज के लोग एक दूसरे के देश में काम ढूंढने या बिजनेस के उद्देश्य से आ जाते हैं लेकिन इस लार्ज स्केल मूवमेंट से दोनों ही देशों की डेमोग्राफिक्स ल्टर हो रही हैं यही नहीं इस माइग्रेशन से रिसोर्स एलोकेशन में भी दिक्कतें देखी जा रही हैं और लोकल कॉन्फ्लेट भी जन्म लेते रहे हैं क्रिमिनल एक्टिविटी एंड इंसर्जनल माइ और इफिट्रेस
पर अक्सर डिफॉरेस्टेशन पोचिंग और वाइल्ड लाइफ स्मगलिंग के आरोप भी लगाए जाते रहे हैं इसके अलावा फॉरेस्टेड बॉर्डर्स और ओपन बॉर्डर्स का मिसयूज नॉर्थ ईस्ट के कई इंसर्जनल इंडिया के प्रॉब्लम्स बढ़ जाती हैं लेकिन अच्छी बात यह है कि इस मुद्दे पर भूटानी गवर्नमेंट ने इंडिया के साथ कोऑपरेट किया है और कई बार ऐसे इंसर्जनल क्रॉस बॉर्डर कार्यवाही की गई है अब बात करते हैं इनीशिएटिव्स टेकन बाय द इंडियन गवर्नमेंट के बारे में इंडिया भूटान बॉर्डर और भूटान की सिक्योरिटी को इंश्योर करने के लिए लिए भारत द्वारा इस बॉर्डर पर सशस्त्र सीमा बल को डिप्लॉयडी
एफ की मदद से यहां की सुरक्षा को दुरुस्त रखने का काम करती हैं बायलट कोऑपरेशन इन दोनों फ्रेंडली नेशंस के बीच संबंध सुगम बनाए रखने और माइनर इश्यूज को टाइमली रिजॉल्व करने के उद्देश्य से एक सेक्रेटरी लेवल बायलट मैकेनिज्म डेवलप किया गया है बॉर्डर डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेशन मीटिंग बीडीसीएम इंडो भूटान बॉर्डर से लार्ज डिस्ट्रिक्ट के रीजनल इश्यूज को रिजॉल्व करने और कोआर्डिनेशन को बढ़ाने की दिशा में बीडीसीएम मैकेनिज्म डेवलप किया गया है इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट भूटान के इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट में भारत एक की रोल प्ले करता है वहां डेवलप होने वाले बहुत से हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्लांट्स ट्रांसमिशन लाइंस
और रोड्स भारत के ही सपोर्ट से बनाए जाते हैं यही नहीं इनकी डेवलपमेंट के लिए 60000 से ज्यादा इंडियंस भूटान में एंप्लॉयड हैं इंडो बांग्लादेश बॉर्डर भारत और बांग्लादेश के बीच के इंटरनेशनल बॉर्डर की कुल लंबाई लगभग 4096 किमी है जी हां आप सही समझे भारत की सबसे लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा बांग्लादेश से लगी हुई है बांग्लादेश और भारत के बीच का ये इंटरनेशनल बॉर्डर भारत के पांच राज्य वेस्ट बंगाल असम मेघाल त्रिपुरा और मिजोरम से लगा हुआ है और यह अपने आप में निराला है क्योंकि जहां एक र इसे 54 ट्रांस बाउंड्री रिवर्स काटती हैं
वहीं दूसरी ओर यह हैवली पॉपलेट एरिया है चलिए अब हम इन दोनों देशों के बीच के बॉर्डर के बारे में ब्रीफ समझ ही चुके हैं तो आगे बढ़कर इनके बीच के बॉर्डर इश्यूज को भी जान लेते हैं इश्यूज अलोंग द बांग्लादेश बॉर्डर दोस्तों बीते कुछ सालों में भारत और बांग्लादेश ने एक्सटेंसिव डिप्लोमेटिक चैनल्स और कोऑपरेशन से बहुत से बॉर्डर इश्यूज सुलझा लिए हैं उदाहरण के लिए आजादी के बाद से ही दोनों देशों के बीच एनक्लेव्स का एक मुद्दा चला आ रहा था जिसे रिजॉल्व करने के लिए दोनों देशों के बीच हुए म्यूचुअल एग्रीमेंट के बाद
इंडिया ने लैंड बाउंड्री एग्रीमेंट 2015 और 100 कॉन्स्टिट्यूशन अमेंडमेंट एक्ट एनेक्ट करके इस मुद्दे को भी सुलझा दिया दिया इसी तरह दोनों देशों के बीच गंगा नदी के वाटर शेयरिंग और मैरीटाइम बाउंड्री को लेकर चल रहे मुद्दे भी म्यूचुअल कोऑपरेशन से रिजॉल्व हो चुके हैं लेकिन फिर भी अभी भी कुछ मुद्दे हैं जो इन दोनों देशों के बीच ज्वलनशील हैं जैसे कि तीस्ता रिवर डिस्प्यूट दोस्तों तीस्ता रिवर सिक्किम के पहरी या तीस्ता कांसे ग्लेशियर से ओरिजनेट होकर वेस्ट बंगाल से होते हुए बांग्लादेश तक जाती है यहां यह ब्रह्मपुत्र रिवर से जाकर मिलती है जिसे बांग्लादेश
में जमुना नाम से जाना जाता है यह नदी पैडी या धान की खेती के लिए फेमस बांग्लादेश के रंगपुर रीजन के इरिगेशन का प्राइम सोर्स है दोनों देशों के बीच 1983 में वाटर शेयरिंग को लेकर हुए एक एड हॉक एग्रीमेंट के अकॉर्डिंग बांग्लादेश को इस नदी का 36 पर और भारत को 39 पर वाटर प्रोवाइड किया गया था जबकि रिमेनिंग 25 को अनलोकेटेड रखा गया लेकिन ये एग्रीमेंट इंप्लीमेंट नहीं हो पाया क्योंकि बांग्लादेश 1996 की गंगा वाटर ट्रीटी की तर्ज पर तीस्ता रिवर के पानी का भी इक्विटेबल डिस्ट्रीब्यूशन चाहता था इसके चलते 2011 में एक
बार फिर भारत और बांग्लादेश के बीच एक एग्रीमेंट को फाइनलाइज करने की कोशिश की गई जिसमें भारत के लिए 42.5 और बांग्लादेश के लिए 37.5 वाटर डिवीजन सुनिश्चित किया गया जबकि रिमेनिंग 20 पर को रिवर का मिनिमम वाटर फ्लो मेंटेन रखने के लिए अनडिसाइडेड छोड़ दिया गया लेकिन यह एग्रीमेंट भी वेस्ट बंगाल स्टेट के अपोजिशन की वजह से साइन नहीं हो पाया और तब से यह मुद्दा अभी भी दोनों देशों के बीच सॉल्व नहीं हो पाया है तिपाई मुख हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट दोस्तों मणिपुर नागालैंड मिजोरम और असम से होते हुए बांग्लादेश में एंटर करने वाली
बराक रिवर पर मणिपुर में प्लान तिपाई मुख हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट पर बांग्लादेश का कड़ा तराज है बांग्लादेश का ऑब्जेक्शन है कि इस डैम के बनने से रिवर का वाटर फ्लो कम हो जाएगा जिससे ना केवल बराक नदी का सीजनल रिदम डिसर पट होगा बल्कि इससे इस रीजन में डाउन स्ट्रीम एग्रीकल्चर फिशरीज और इकोलॉजी भी नेगेटिवली इफेक्ट होगी हालांकि इस मुद्दे पर भारत ने बांग्लादेश को यह विश्वास जताया है कि भारत की ओर से ऐसा कोई भी यूनिलैटरल स्टेप नहीं लिया जाएगा जिससे बांग्लादेश का नुकसान हो बॉर्डर फेंसिंग इशू इंडो बांग्लादेश बॉर्डर पर कई जगह प्रॉपर
फेंसिंग इंस्टॉल करने का काम नहीं हो पाया है जो एक बड़ा सिक्योरिटी कंसर्न है इस फेंसिंग इशू के पीछे बहुत से कारण है जैसे बॉर्डर पर रिवन फ्लो या लो एरियाज की मौजूदगी बॉर्डर के नजदीक पॉपुलेशन का डेंसली पॉपुलेशन एक्विजिशन केसेस इत्यादि ऐसे में बॉर्डर के फेंस को प्रॉपर्ली इंस्टॉल करने से पहले इन लोकलाइज इश्यूज को रिजॉल्व करने की जरूरत है इशू ऑफ इलीगल इफिल्टर आप मैप पर इंडो बांग्लादेश बॉर्डर को ट्रेस करें तो आप पाएंगे कि पूरा बॉर्डर बहुत से डावर्स ज्योग्राफिकल फीचर से भरा हुआ है जहां एक और इस इंटरनेशनल बॉर्डर को 50
से ज्यादा रिवर्स का कट करती हैं तो वहीं दूसरी ओर यह डेंसली फॉरेस्टेड एरियाज और पैडी फील्ड से भी घिरा हुआ है यही नहीं यह पूरा रीजन दुनिया के सबसे डेंसली पॉपुलेशन इश्यूज की वजह से इंडो बांग्लादेश बॉर्डर एक हाईली पोरस बॉर्डर है इसका फायदा उठाकर बीते कई दशकों में लाखों बांग्लादेशी सिटीजंस इलीगली भारत में इफिल्टर कर चुके हैं जो भारत के लिए एक बड़ा सिक्योरिटी कंसर्न है इल्लीगल इमीग्रेशन ने नॉर्थ ईस्ट के कई स्टेट्स के डेमोग्राफिक करैक्टर को भी इंपैक्ट किया है जिसके चलते इन स्टेट्स में कई प्रकार के कॉन्फ्लेट्स और सोशल मूवमेंट्स होते
रहे हैं इनमें सबसे फेमस असम एजीटेशन रहा है इसके अलावा इल्लीगल इमीग्रेंट के प्रोलिफिक्स इंडो बांग्लादेश बॉर्डर के जरिए कैटल स्मगलिंग का गोरख धंधा भी बड़े जोर शोर से चलाया जाता है इसके मास केल का अंदाज आप इस बात से लगा सकते हैं कि बॉर्डर पर हर साल लाखों कैटल्स को बीएसएफ द्वारा पकड़ा जाता है फिर भी इस इल्लीगल बिजनेस को खत्म नहीं किया जा सका है एक रफ एस्टीमेट के अनुसार यह बिजनेस हजारों करोड़ों रुपयों का है और इसमें दोनों ओर के लोकल पॉलिटिशियन तक इवॉल्वड है अगस्त 2022 में ही इसी कैटल स्मगलिंग रॉकेट
से जुड़े वेस्ट बंगाल के एक पॉलिटिशियन की गिरफ्तारी के बाद यह बात और भी ज्यादा साफ हो गई यही कारण है कि अब बीएसएफ भी इस और शक्ति के साथ काम ले रही है छोटे से लेकर बड़े एलिजी इंवॉल्वड लोकल पॉलिटिशियन और हिस्ट्री चार्ज शीटर्स के अगेंस्ट धरपकड़ की कार्यवाही जोरों पर है इसके चलते जहां मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स के आंकड़ों के अनुसार 2016 तक हर साल एक से 5 लाख कैटल्स को बॉर्डर पार पकड़ा जाता था वहीं अब ऐसे इंसीडेंट्स में लगातार कमी आ रही है जिससे साल दर साल इन आंकड़ों में भी कमी
आती जा रही है लेकिन फिर भी इन पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए इसी तरह के और भी ठोस कदम उठाने की जरूरत है इसी के साथ चलिए अब एक नजर डालते हैं गवर्नमेंट द्वारा लिए गए कुछ इनिशिएटिव पर इनिशिएटिव टेकन बाय द गवर्नमेंट कंप्रिहेंसिव बॉर्डर मैनेजमेंट प्लान जुलाई 2022 में इंडिया और बांग्लादेश ने कंप्रिहेंसिव बॉर्डर मैनेजमेंट प्लान को इफेक्टिवली इंप्लीमेंट करने का साझा फैसला किया था इसका मकसद स्मगलिंग ऑफ ड्रग्स एंड नारकोटिक्स आर्म्स एंड एम्युनिशन फेक करेंसी इत्यादि से रिलेटेड क्रॉस बॉर्डर क्राइम्स को इफेक्टिवली रोकने का है इसके लिए भारत की ओर से
बीएसएफ यानी बड सिक्योरिटी फोर्स और बांग्लादेश की तरफ से बीजीबी यानी बॉर्डर गार्ड्स बांग्लादेश ने एक जॉइंट रिकॉर्ड ऑफ डिस्कशन भी साइन किया है ताकि इस फील्ड में दोनों देश प्रॉपर्ली कोऑर्डिनेट और कोऑपरेट कर पाएं बॉर्डर प्रोटेक्शन ग्रिड दोस्तों बांग्लादेश की तरफ से होने वाले इल्लीगल माइग्रेशन और क्रॉस बॉर्डर क्रिमिनल एक्टिविटीज को रोकने के लिए सरकार ने मल्टी प्रंग और फुल प्रूफ मैकेनिज्म के तौर पर इंडो बांग्लादेश बॉर्डरिंग स्टेट्स में बॉर्डर प्रोटेक्शन ग्रिड लगाने का फैसला किया है जिसके लिए ब बीपीजी को फिजिकल और नॉन फिजिकल बैरियर्स सर्विलेंस सिस्टम्स इंटेलिजेंस एजेंसीज स्टेट पुलिस बीएसएफ दूसरे
स्टेट और सेंट्रल एजेंसीज के कंपटीशन से इंटीग्रेटेड सर्विलेंस और मॉनिटरिंग सिस्टम डेवलप किया जा रहा है बोल्ड क्विट इसी तरह 2018 में बीएसएफ के इंफॉर्मेशन और टेक्नोलॉजी विंग ने बोल्ड क्यूआई यानी बॉर्डर इलेक्ट्रॉनिकली डोमिनेटेड क्यू आईटी इंटरसेप्शन टेक्नीक प्रोजेक्ट इंप्लीमेंट करने का फैसला किया था जिके अंदर इंडो बांग्लादेश बॉर्डर पर वेरियस टेक्निकल सिस्टम्स इंस्टॉल किए गए थे साथ ही बॉर्डर पर ब्रह्मपुत्र और उसके ट्रिब्यूटरीज के अनफेड रिवन एरियाज में भी सेंसर्स लगाए गए थे दोस्तों दोनों देशों के बीच में इनके अलावा भी बहुत से फ्रंट्स पे एक साथ काम चल रहा है उदाहरण के लिए
स्मार्ट फेंसिंग बॉर्डर रोड कंस्ट्रक्शन और इंटीग्रेटेड चेकपोस्ट के डेवलपमेंट इत्यादि को लेकर भी दोनों देश परस्पर सहयोग से बॉर्डर इश्यूज को रिजॉल्व करने के लिए प्रयत्नशील हैं इंटीग्रेटेड चेकपोस्ट की बात करें तो इनके कुछ उदाहरण हैं सुतार कंड इन असम घोजाडांगा इन वेस्ट बंगाल अगरतला अखौरा इन त्रिपुरा एक्सट्रा इसके अलावा रोड कंस्ट्रक्शन पर भी ध्यान दिया जा रहा है ताकि बॉर्डर्स पर पेट्रोलिंग आसान हो सके इसके तहत अब तक 4000 किमी से भी ज्यादा लंबी बॉर्डर पेट्रोल रोड्स बनाई जा चुकी हैं साथ में एक बॉर्डर मैनेजमेंट डिपार्टमेंट भी सेटअप किया गया है जो बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर
पर स्पेशल ध्यान देता है बॉर्डर मैनेजमेंट को लेकर इंडिया और बांग्लादेश ने एक बॉर्डर मैनेजमेंट प्लान भी साइन किया है जिसके तहत जॉइंट पेट्रोल्स और इंफॉर्मेशन शेयरिंग पर ध्यान दिया जाता है इल्लीगल अनऑथराइज्ड ट्रेट की प्रॉब्लम को दूर करने के लिए जगह-जगह बॉर्डर हार्ट्स का कांसेप्ट भी शुरू किया गया है ह्यूमन ट्रैफिकिंग को रोकने के लिए और कोस्ट गार्ड्स के बीच कोऑपरेशन के इंप्रूवमेंट के लिए भी एमओयू साइन किए जा चुके हैं तो दोस्तों चलिए अब आखिर में म्यानमार के साथ इंडियन बॉर्डर इश्यूज को समझ लेते हैं इंडो म्यानमार बॉर्डर दोस्तों भारत और म्यानमार के
बीच की 1643 किमी की अंतरराष्ट्रीय सीमा भारत के चार राज्यों के बॉर्डर्स लगी हुई है ये राज्य है अरुणाचल प्रदेश नागालैंड मणिपुर और मिजोरम लेकिन दो अलग-अलग देश होने के बाद भी इनके बीच का बॉर्डर अपने आप में खास है ऐसा इसलिए क्योंकि दोनों देशों के बॉर्डर एरियाज में रहने वाले ट्राइब्स के इस सीमा पर एफएमआर यानी फ्री मूवमेंट रेजीम परमिटेड है असल में इन बॉर्डर एरियाज में रहने वाले ट्राइब्स जैसे नागास सिंपो कुकीज मिज़ोस इत्यादि क्रॉस बॉर्डर रिलेशन शेयर करते हैं जिसके चलते बॉर्डर के दोनों ओर इन ट्राइबल ग्रुप्स के एंसेल रिलेटिव्स पाए जाते
हैं ऐसे में ऐसे ट्राइबल ग्रुप्स के जेनुइन इश्यूज को रिजॉल्व करने के लिए ही एफएमआर की यह व्यवस्था की गई थी ताकि उनके अपने किथ एंड किन से ट्रांस बॉर्डर लिंकेजेस बरकरार रह सकें इस व्यवस्था के अंतर्गत बॉर्डर एरियाज में रहने वाली ट्राइब्स को बिना किसी वीजा रिस्ट्रिक्शन के बॉर्डर के दोनों ओर 16 किमी के दायरे में ट्रेवल करने की स्वच्छंदता है ज जहां म्यानमार नेशनल्स को भारत अपने यहां बिना वीजा के 72 आवर्स तक रन करने की अनुमति देता है वहीं म्यानमार में भारतीयों को केवल 24 आवर्स के लिए रुकना अलाउड है चलिए अब
म्यानमार बॉर्डर के अक्रॉस सिक्योरिटी समस्या को समझते हैं इश्यूज अलोंग द म्यानमार बॉर्डर बाउंड्री डिस्प्यूट दोनों देशों के बीच के इंटरनेशनल बॉर्डर को 1967 में हुए बाउंड्री एग्रीमेंट द्वारा फॉर्मली डिमार्केट कर दिया गया था लेकिन जमीन पर इसके क्लियर इंप्लीमेंट ना होने से इसे लेकर अभी भी छोटे-मोटे विवाद की स्थिति बनी रहती है खास तौर से मणिपुर के पिलर डिमार्केट को लेकर यह समस्या अक्सर खड़ी होती रही है डिफिकल्ट टेरेन अगर आप इंडो म्यानमार बॉर्डर पर गौर करें तो आप पाएंगे कि ये पूरा बॉर्डर डेंसली फॉरेस्टेड एरियाज और हिली टेरेन से होकर गुजरता है ऐसे
में बॉर्डर फोर्सेस के लिए इस बॉर्डर को इफेक्टिवली गार्ड करना मुश्किल हो जाता है इंसर्जनल म्यानमार के बीच के बॉर्डर पर एफएमआर का सिस्टम और डिफिकल्ट टेरेन होने की वजह से से यहां पर बॉर्डर सिक्योरिटी काफी कॉम्प्लिकेशंस का सामना करती है वहीं एफएमआर की वजह से बॉर्डर के दोनों ओर ट्राइब्स का फ्री मूवमेंट भी जारी है एसएमस का फायदा उठाकर कई इंसर्जनल म्यानमार को सेफ हेवन की तरह यूज करते हैं और इसी के जरिए इंटर बॉर्डर क्राइम जैसे ड्रग ट्रैफिकिंग आर्म्स स्मगलिंग वमन ट्रैफिकिंग इत्यादि के साथ-साथ इंडियन सोइल पर मास्ट और इंसर्जनल देते हैं एनएससीएन
से लेकर मणिपुर का पीएलए जैसे इंसर्जनल बॉर्डर का मिसयूज किया है ड्रग मेनेस भारत और म्यानमार की यह सीमा ड्रग्स मार्केट के गोल्डन ट्रायंगल के एज पे लोकेटेड है ऐसे में पोरस बॉर्डर्स के जरिए यहीं से ड्रग्स भारत भेजे जाते हैं खास तौर पर पास्ट में मणिपुर के बॉर्डर टाउन मुरे के जरिए बल्क में हीरोइन भारत में एंटर होती रही है जो यहां से अगर एक बार देश में दाखिल हुई तो फिर इंटरस्टेट ट्रैफिकिंग के जरिए पूरे देश में फैला दी जाती है पास्ट में इलिसिट ड्रग्स के ट्रांजिट पॉइंट के रूप में डेवलप होते सीजन
के बारे में द यूनाइटेड नेशंस ड्रग कंट्रोल प्रोग्राम य एनडीसीपी और इंटरनेशनल नारकोटिक्स कंट्रोल बोर्ड आईएनसीबी ने भी अपनी रिपोर्ट्स में आगाह किया हुआ है ऐसे में इस पर जल्द से जल्द रोक लगाए जाने की जरूरत है रोहिंग्या मुस्लिम्स दोस्तों बीते कुछ सालों में म्यानमार के रखन स्टेट में रहने वाले मुस्लिम्स के एथनिक पर्सीक्यूशन की वजह से यह इंडो म्यानमार बॉर्डर उनके एक्सोडस का जरिया बन गया है म्यानमार से भागे रोहिंग्या मुस्लिम्स इसी बॉर्डर के जरिए बड़ी संख्या में भारत में दाखिल हुए हैं जिससे भारत के लिए समस्या कई गुना बढ़ गई है तो चलिए
इन समस्याओं को समझने के बाद अब चर्चा करते हैं गवर्नमेंट द्वारा किए गए एफर्ट्स की इनिशिएटिव टेकन बाय गवर्नमेंट डिप्लॉयडी केटेड फोर्सेस 2002 से इंडो म्यानमार बॉर्डर की सुरक्षा की जिम्मेदारी असम राइफल्स के कंधों पर है जो इंडियन आर्मी के कमांड में बॉर्डर को सुरक्षित रखने के साथ-साथ इस रीजन में एंटी इंसर्जनल एफएमआर इंडो म्यानमार बॉर्डर पर चले आ रहे फ्री मूवमेंट रेजीम से होने वाले बॉर्डर इशू से निपटने के लिए अब इसके रिवीजन को लेकर भी विचार किया जा रहा है टैब्लिक्स दोनों देशों के बीच रीजनल कनेक्ट डेवलप करने और ऑर्गेनाइज लेजिटिमेसी [संगीत] चेकपोस्ट
आईपीस स्टैब्लाज़ हैं जिन्हें एस्टेब्लिश करने की दिशा में तेजी से काम चल रहा है एक्ट ईस्ट पॉलिसी एंड रीजनल कनेक्टिविटी नॉर्थ ईस्ट रीजन और इंडो म्यानमार बॉर्डर में पनप रही सिक्योरिटी कंसर्न्स का एक कारण नॉर्थ ईस्ट का पुअर डेवलपमेंट और आइसोलेशन भी है इसे सॉल्व करने के लिए इंडिया ने काला दन मल्टीमॉडल प्रोजेक्ट और इंडिया म्यानमार थाईलैंड हाईवे को लेकर भी एक्टिव एफर्ट्स लिए हैं जो सरानी है दोस्तों अब हम भारत के बॉर्डर इश्यूज के बारे में समझ ही चुके हैं तो चलिए अब हम बॉर्डर सिक्योरिटी से आगे बढ़ते हुए बॉर्डर मैनेजमेंट के बारे में
भी कुछ बातें जान लेते हैं बॉर्डर मैनेजमेंट दोस्तों बॉर्डर मैनेजमेंट एक अंब्रेला टर्म है जिसमें ना केवल बॉर्डर को सुरक्षित रखने पर ध्यान दिया जाता है बल्कि इसमें बॉर्डर के आसपास के क्षेत्र और यहां रहने वाले लोगों के भी डेवलपमेंट पर समांतर रूप से ध्यान दिया जाता है मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स के अंडर आने वाला डेवलपमेंट ऑफ बॉर्डर मैनेजमेंट इसी पर ध्यान देते हुए लैंड और कोस्टल एरियाज दोनों में ही भारत की अंतरराष्ट्रीय मा के आसपास बॉर्डर पुलिसिंग और गार्डिंग को मजबूत करने के साथ-साथ यहां पर एप्रोप्राएटनेस फ्लड लाइटनिंग और दूसरे जरूरी इंतजाम किए जाते
हैं इसके लिए डिपार्टमेंट ऑफ बॉर्डर मैनेजमेंट बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट प्रोग्राम बीडीपी चलता है दोस्तों 21 सेंचुरी में इंटरनेट एक डबल एज्ड स्वाट बन गया है यानी जहां एक तरफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसे टूल्स को यूज करके हमारा डे टू डे लाइफ आसान बनता जा रहा है वहीं दूसरी तरफ साइबर अटैक्स द्वारा इंटरनेट एक डेंजरस स्पेस बन गया है नवंबर 2022 को दिल्ली का एम्स अस्पताल रसम वेयर अटैक का शिकार बना आपको बता दें कि रसम वेयर एक ऐसा मलेशियन सॉफ्टवेयर होता है जिसकी मदद से हैकर्स विक्टिम्स के डाटा को इलीगली एक्सेस और
ब्लॉक कर सकते हैं और यदि विक्टिम्स उस डेटा को एक्सेस करना चाहते हैं तो उन्हें एक रैंस सम या अमाउंट पे करना होगा रिपोर्ट्स के अनुसार इस अटैक में करीब 4 करोड़ पेशेंट प्रोफाइल्स सेंसिटिव मेडिकल रिकॉर्ड्स एक्सट्रा कंप्रोमाइज हुए इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम सीआरटी आईन के इंडियन रसम रिपोर्ट 2022 के अनुसार इन रसम वेयर अटैक द्वारा मल्टीपल सेक्टर्स में 51 पर इंक्रीज देखने को मिला है वहीं एआई कंपनी क्लाउड सेक के अकॉर्डिंग 2021 में इंडिया ने सेकंड हाईएस्ट हेल्थ केयर साइबर अटैक्स फेस किए जिसमें वर्ल्ड के 7.7 पर और एशिया पैसिफिक के 29.7 पर
अटैक्स अकेले इंडिया में दर्ज हुए 2022 में अगर हम गवर्नमेंट एजेंसीज की बात करें तो इंडिया वाज द मोस्ट टारगेटेड कंट्री कई इंसीडेंट्स जैसे 2016 का यूनियन बैंक ऑफ इंडिया फिशिंग अटैक 2017 वना क्राई अटैक 2017 बैंक ऑफ महाराष्ट्र एक् अटैक अक्टूबर 2020 मुंबई पावर ग्रेड अटैक अप्रैल 2022 लद्दाख पावर ग्रीड अटैक हमें दर्शाते हैं कि आज कई सारे क्रिटिकल सेक्टर साइबर अटैक मेन टारगेट बन गए हैं दोस्तों भारत ने डिजिटलाइजेशन को पुश करने के लिए डिजिटल इंडिया मिशन स्मार्ट सिटी मिशन जैसे इनिशिएटिव लांच किए हैं फरवरी 2019 में मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड आईटी ने
इंडिया को 2025 तक डिजिटल इकोनॉमी को 200 बिलियन से 1 ट्रिलियन इकोनॉमी बनाने का टारगेट रखा है ऐसे में साइबर सिक्योरिटी की इंपॉर्टेंस और भी बढ़ जाती है तो चलिए आज हम इस वीडियो के माध्यम से जानते हैं कि आखिर साइबर सिक्योरिटी क्या है डिफरेंट साइबर थ्रेड्स चैलेंज गवर्नमेंट मेजर्स पर भी हमें एक नजर डालेंगे दोस्तों साइबर सिक्योरिटी के अलग-अलग डायमेंशन को देखने के पहले चलिए पहले हम बेसिक टर्मिनोलॉजी को जान लेते हैं पहला है साइबरस्पेस साइबरस्पेस एक ऐसा ग्लोबल इंटरनेट इकोसिस्टम है जिसमें कई आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर यानी इंटरनेट टेलीकॉम नेटवर्क कंप्यूटर सिस्टम प्रोसेसर कंट्रोलर आपस
में इंटरकनेक्टेड होते हैं ये एक वर्चुअल फील्ड की तरह होता है जिसमें सभी साइबर एक्टिविटीज कैरी की जाती हैं दूसरा है साइबर सिक्योरिटी साइबर सिक्योरिटी टेक्निक्स उन्हें कहा जाता है जिनकी मदद से हम साइबर स्पेस को अनऑथराइज्ड एक्सेस मिसयूज डैमेज और एस्पिना आज एक्सेट्रा से प्रोटेक्ट करते हैं तीसरा है क्रिटिकल इंफॉर्मेशन इंफ्रास्ट्रक्चर आईटी एक्ट 2000 के सेक्शन 71 के अकॉर्डिंग सीआईआई एक ऐसा कंप्यूटर रिसोर्स होता है जिसके डिस्ट्रक्शन से हमारी नेशनल सिक्योरिटी इकोनॉमी पब्लिक हेल्थ और सेफ्टी पर डीप इंपैक्ट पड़ता है इनमें कई सेक्टर्स को इंक्लूड किया जा सकता है जैसे बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर
पावर हॉस्पिटल टेलीकम्युनिकेशंस फाइनली हम बात करेंगे साइबर अटैक की एक इंडिविजुअल या ऑर्गेनाइजेशन द्वारा किया गया मेलिश अस अटैक होता है जैसे दूसरे इंडिविजुअल्स या ऑर्गेनाइजेशंस की इंफॉर्मेशन सिस्टम डैमेज या ब्रीज होती है इन बेसिक टर्मिनोलॉजी को देखने के बाद चलिए अब हम साइबर अटैक्स के टाइप्स पर एक नजर डालते हैं पहला है साइबर क्राइम साइबर क्राइम एक ऐसा अनलॉफुल एक्ट होता है जिसमें कंप्यूटर को टारगेट या टूल की तरह यूज किया जाता है कमर्शियल या इकोनॉमिक गेंस के लिए कंप्यूटर द्वारा क्रिमिनल एक्टिविटीज को बढ़ावा दिया जाता है जैसे थेफ्ट फ्रॉड फ्रोजर और डिफेमेशन दूसरा
टाइप है साइबर टेररिज्म साइबर टेररिज्म एक लार्ज स्केल अटैक होता है जिसमें मालवेयर की मदद से गवर्नमेंट एजेंसीज को टारगेट किया जाता है अनलाइक साइबर क्राइम यहां पर अल्टीमेट गोल पॉलिटिकल गेन होता है तीसरा है साइबर वरफेन साइबर स्पेस पर एक नेशन द्वारा दूसरे नेशन पर होने वाले अटैक्स को साइबर वरफेन कहा जाता है इस पॉलिटिकली मोटिवेटेड अटैक में इंटरनेट को यूज कर फॉरेन नेशन के क्लासिफाइड डाटा को स्टील या ऑल्टर किया जाता है फाइनली हम बात करेंगे साइबर एस्पिना आज की एक ऐसा अटैक होता है जिसमें राइवल नेशन के नेटवर्क सॉफ्टवेयर कंप्यूटर को डिसेबल
कर कॉन्फिडेंशियल डाटा को चुराया जाता है इसका मोटिव मिलिट्री पॉलिटिकल या फाइनेंशियल गेन भी हो सकता है दोस्तों डिफरेंट टाइप्स ऑफ साइबर अटैक्स को देखने के बाद चलिए अब हम जानते हैं कि आखिर इन साइबर अटैक्स के लिए किन मेथड्स या टूल्स का यूसेज होता है टूल्स ऑफ साइबर अटैक पहला है मालवेयर मालवेयर या मिशिस सॉफ्टवेयर एक ऐसा सॉफ्टवेयर होता है जिससे सिंगल कंप्यूटर सर्वर या नेटवर्क को डैमेज करने के लिए डिजाइन किया जाता है मैलवेयर कई प्रकार के होते हैं जैसे पहला है रसम वेयर जो एक ऐसा मालवेयर है जहां जहां अटैकर होस्ट कंप्यूटर
की फाइल्स और डाटा को एंक्रिप्ट या हैक कर देता है और फिर डाटा रिटर्न करने के लिए रैंस सम या अमाउंट डिमांड करता है दूसरा है वायरस एक ऐसा प्रोग्राम होता है जो दूसरे प्रोग्राम को इनफेक्ट कर उन्हें मॉडिफाई करता है और अपनी एक इवॉल्वड कॉपी उसमें इंसर्ट कर देता है तीसरा है वर्म्स जहां वायरस अपने आप को होस्ट फाइल्स में इफिल्टर करते हैं वहीं वर्म एक ऐसा मैलवेयर है जो अपनी कॉपी बनाकर सिस्टम टू सिस्टम स्प्रेड होता है अगर हम ट्रोजन की बात करें तो ट्रोजन एक मैलवेयर होता है जिसकी मदद से सिक्योर कंप्यूटर
नेटवर्क में बैक डोर या लूप होल क्रिएट किया जाता है ताकि हैकर्स इस सिक्योर नेटवर्क को एक्सेस कर सकें फाइनली हम बात करेंगे स्पाइवेयर की जो ऐसा मालवेयर है जो अनसस्पेक्टेड ईमेल्स के तौर पे एंट्री करता है यूजर के क्लिक करने पर यह सॉफ्टवेयर यूजर की एक्टिविटीज को उनके कंसेंट के बिना मॉनिटर करता है दोस्तों दूसरा इंपॉर्टेंट टूल है फिशिंग यहां पर एक फेक वेबसाइट या ईमेल क्रिएट करके यूजर्स को यूजर नेम और पासवर्ड एंटर करने को कहा जाता है जैसे ही यूजर्स अपना पर्सनल डेटा एंटर करते हैं हैकर्स इन्हें स्टील या डैमेज कर देता
है थर्ड टूल है डिनायल ऑफ सर्विस यानी डीओएस अटैक एक ऐसा अटैक है जिसमें होस्ट के नेटवर्क या सर्वर को यूजलेस और इनवैलिड ऑथेंटिकेशन रिक्वेस्ट से फ्लड करके इवेंचर पूरे नेटवर्क को डाउन किया जाता है मैसेजेस के फ्लड के कारण यूजर्स ऑनलाइन सर्विसेस को यूज नहीं कर पाते फोर्थ है स्ट्रक्चर्ड क्वेरी लैंग्वेज एसक्यूएल इंजेक्शन दोस्तों एसक्यूएल एक प्रोग्रामिंग लैंग्वेज है जिसकी मदद से डेटा बेसस के साथ कम्युनिकेट किया जाता है कई सर्वर्स एसक्यूएल को यूज करके क्रिटिकल डाटा मैनेज करते हैं एसक्यूएल इंजेक्शन अटैक में हैकर्स इन्हीं सर्वर्स को मेलिश कोड द्वारा अटैक करते हैं और
सेंसिटिव इंफॉर्मेशन को चुराते हैं फिफ्थ टूल है वेलिंग अटैक यहां पर साइबर क्रिमिनल्स कंपनी के सीनियर या इंपॉर्टेंट मेंबर्स को टारगेट कर कंपनी की सेंसिटिव इंफॉर्मेशन जैसे फाइनेंशियल डिटेल्स और लाई डिटेल्स को स्टील करते हैं टारगेट्स वेल की तरह बड़े होते हैं इसलिए इसे वेलिंग अटैक के नाम से जाना जाता है सिक्स टूल है बनेट दोस्तों बनेट एक नेटवर्क ऑफ कंप्यूटर को कहा जाता है जिन्हें मैलवेयर द्वारा इफेक्ट कर अटाक कंट्रोल करता है इंडिविजुअल मशीन को बॉट कहा जाता है इस अटैक के माध्यम से अटैकर सिंगल कमांड पर मिलियंस ऑफ बॉट्स को इफेक्ट कर लार्ज
स्केल अटैक करवा सकता है फाइनली सेवंथ टूल है सोशल इंजीनियरिंग अटैक यहां पर यूजर के इमोशनल ट्रस्ट को इस्तेमाल कर उन्हें ट्रिक किया जाता है और उनसे सेंसिव इंफॉर्मेशन जैसे पासवर्ड और ईमेल एड्रेस स्टील किए जाते हैं तो स इस प्रकार हमने देखा कैसे डिफरेंट टूल्स को यूज करके साइबर अटैक्स को अंजाम दिया जाता है इन टूल्स को देखने के बाद चलिए अब हम जानते हैं कि आखिर इन्हें टैकल करने में किन चैलेंज का सामना करना पड़ता है चैलेंज ऑफ साइबर सिक्योरिटी सबसे पहला है प्रॉफिट फ्रेंडली इंफ्रास्ट्रक्चर माइंड सेट दोस्तों 1991 के एलपीजी रिफॉर्म्स के
बाद प्राइवेट सेक्टर ने आईटी इलेक्ट्रिसिटी टेलीकम्युनिकेशन सेक्टर में इंट्रूजन किया इन प्राइवेट एंटिटीज ने प्रॉफिट ओरिएंटेशन के चलते साइबर अटैक प्रिपेयर्स सिक्योरिटी इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा प्राइवेसी को इग्नोर किया इसी लूप होल को यूज कर अटैकर्स ने आम लोगों को टारगेट किया है दूसरा है ट्रांस नेशनल नेचर ऑफ साइबर अटैक्स दोस्तों इंटरनेट के बॉर्डरलेस होने के कारण साइबर अटैक्स कहीं से भी कैरी आउट किए जा सकते हैं आज टी साइबर अटैक्स फॉरेन टेरिटरी से रिपोर्ट किए जाते हैं इन्हें ट्रैक और इन्वेस्टिगेट करना बहुत मुश्किल है इसके लिए दूसरे कंट्रीज के साथ कोऑर्डिनेट करना एक बड़ा चैलेंज
बन जाता है तीसरा है लिमिटेड एक्सपर्टीज और अथॉरिटी इंडिया में ज्यादातर साइबर अटैक्स जैसे क्रिप्टो करेंसी रिलेटेड अटैक्स अनरिपोर्टेड होते हैं इन ऑफेंसेस से डील करने के लिए स्टेट्स के पास रिक्विजिट एक्सपोर्ट अथॉरिटी और इंफ्रास्ट्रक्चर लैकिंग है ऐसे में जहां इन अटैक्स का नेचर कांस्टेंटली चेंज हो रहा है वहां साइबर सिक्योरिटी की इंपॉर्टेंस और भी बढ़ जाती है फोर्थ चैलेंज है अब्सेंस ऑफ सेपरेट प्रोसीजर इंडिया में साइबर या कंप्यूटर रिलेटेड ऑफेंसेस से डील करने के लिए कोई सेपरेट प्रोसीजर नहीं है इस लकना ने कंफ्यूजन क्रिएट कर सेंटर स्टेट और इंटर स्टेट लेवल पर कोऑर्डिनेशन इशू
क्रिएट किया है इसी कोऑर्डिनेशन की कमी का फायदा कई साइबर क्रिमिनल्स उठाते हैं इसमें सबसे अच्छा एग्जांपल दिल्ली के पास लोकेटेड रीजन मेवात का है जो तीन स्टेट्स के ट्राई जंक्शन पर स्थित एक एरिया है और साइबर क्राइम के लिए बदनाम है साइबर क्रिमिनल्स इस ट्राई जंक्शन का फायदा उठाकर इजली दूसरे स्टेट में एंटर कर क्राइम करते हैं और वापस अपने स्टेट में जाकर छिप जाते हैं और अथॉरिटीज ब्यूरोक्रेटिक प्रोसीजर्स में फंसकर रह जाती हैं फिफ्थ मेजर चैलेंज है एक्सपेंडिंग डिजिटल इकोसिस्टम 2014 के बाद पीएम मोदी ने कई मिशंस जैसे डिजिटल इंडिया मिशन स्मार्ट सिटी
मिशन स्मार्ट यूपी इंडिया मिशन द्वारा इंडिया के डिजिटलाइजेशन को काफी पुश किया है वहीं एआई और आईओटी जैसी टेक्नोलॉजी अजीज ने मानो इंटरनेट का फेस ही बदल दिया हो कंपनीज ने फॉरेन पप सर्विस प्रोवाइडर से कोलैबोरेट करना शुरू किया है यह सर्विस प्रोवाइडर्स इंडिया में फॉरेन सोर्स हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर को यूज करते हैं और डाटा को फॉरेन बेस में स्टोर करते हैं ये इंडिविजुअल प्राइवेसी और इंडियन साइबर स्पेस के लिए सिग्निफिकेंट थ्रेट है इसके अलावा एक मेजर चैलेंज है रैपिड ट्रांसफॉर्मेशन इन टेक्नोलॉजी दोस्तों साइबर रिलेटेड टेक्नोलॉजी में हर दिन इनोवेशंस हो रही हैं और इन
इनोवेशंस के साथ हर दिन नए लूप होल्स और चैलेंज भी इमर्ज हो रहे हैं इस चेंजिंग नेचर ऑफ टेक्नोलॉजी के हिसाब से साइबर सिक्योरिटी इंफ्रास्ट्रक्चर को ढाल पाना एक बड़ा चैलेंज है इंडिया में यह और भी बड़ा मुद्दा है क्योंकि आईटी रिलेटेड फैक्टर से डील करने वाला हमारा लॉ आईटी एक्ट साल 2000 में एनेक्ट किया गया था और तब से लेकर आज तक साइबर टेक्नोलॉजी में कई मेजर बदलाव आ चुके हैं ऐसे में जरूरी है कि लॉस को भी कंटीन्यूअस बेसिस पर रिफॉर्म किया जाए दोस्तों इस प्रकार हमने देखा कि कैसे इंडिया कई साइबर सिक्योरिटी
चैलेंज से गुजर रहा है गवर्नमेंट ने इ एड्रेस करने के लिए कई मेजर्स लिए हैं आइए हम उन पर भी एक नजर डालते हैं गवर्नमेंट मेजर्स अगर हम लेजिस्लेटिव मेजर्स की बात करें तो सबसे पहले आता है आईटी एक्ट 2000 इस एक्ट को इंडियन साइबर एक्ट भी कहा जाता है इस एक्ट के तहत ई-कॉमर्स ट्रांजैक्शंस के लिए लीगल इंफ्रास्ट्रक्चर क्रिएट किया गया है इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन डिजिटल सिग्नेचर को लीगली रिकॉग्नाइज किया गया है साइबर क्राइम रोकने के लिए जस्टिस डिस्पेंसेशन सिस्टम साइबर रेगुलेटरी एडवाइजरी कमीशन क्रिएट किया गया है आईटी एक्ट 2000 को साइबर प्रूफ
बनाने के लिए 2008 में इसे अमेंड किया गया और इसमें कई नए प्रोविजंस ऐड किए गए जैसे डेटा प्राइवेसी इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी पर फोकस डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को इलेक्ट्रॉनिक सिग्नेचर से रिप्लेस कर एक्ट को टेक्नोलॉजिकल न्यूट्रल बनाना सेक्शन 43a के तहत कॉरपोरेट बॉडीज को कस्टमर्स के सेंसिटिव पर्सनल डाटा को प्रोटेक्ट करने को को कहा गया वहीं सेक्शन 66a टू 66f के तहत ऑबसीन इलेक्ट्रॉनिक मैसेज ट्रांसमिशन चीटिंग वायलेशन ऑफ प्रवेसींचंडी किया गया दोस्तों अगर हम इंस्टीट्यूशनल मेजर्स की बात करें तो कई इंस्टीट्यूट्स द्वारा साइबर सिक्योरिटी को अंजाम दिया जाता है जैसे पहला है नेशनल साइबर कोऑर्डिनेट सेंटर एनसीसीसी
यह सीआरटी आई एन के अंडर मल्टी स्टेकहोल्डर साइबर सिक्योरिटी एंड ई सर्विलेंस एजेंसी है इन्हें फर्स्ट लाइन ऑफ डिफेंस कहा जाता है क्योंकि इनका काम है इनकमिंग इंटरनेट ट्रैफिक को स्कैन करना थ्रेट डिटेक्ट करना और ऑर्गेनाइजेशन को उसके बारे में इफॉर्म और कोऑर्डिनेट करना दूसरा है नेशनल क्रिटिकल इंफॉर्मेशन इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोटेक्शन सेंटर एनसीआईआईपीसी यह नेशनल टेक्निकल रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन के अंडर एनएसए द्वारा कंट्रोल एजेंसी है इनका काम है क्रिटिकल सेक्टर्स जैसे बैंकिंग हेल्थ एनर्जी टेलीकम्युनिकेशन में सिक्योरिटी थ्रेट्स को एस और टैकल करना तीसरी इंपॉर्टेंट एजेंसी है साइबर एंड इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी डिवीजन मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स कंडर इस
नए डिवीजन के तहत साइबर क्राइम्स जैसे साइबर थ्रेड्स चाइल्ड पोर्नोग्राफी ऑनलाइन स्टॉकिंग को टैकल किया जा रहा है इस डिवीजन के अंदर इंडियन साइबर क्राइम कोआर्डिनेशन सेंटर 14 सी साइबर वरियर पुलिस क्रिएट किया गया है फोर्थ इंपॉर्टेंट एजेंसी है सीआरटीआई एन इस एजेंसी की मदद से भारत के कम्युनिकेशन और इंफॉर्मेशन इंफ्रास्ट्रक्चर को प्रोकेट सिक्योरिटी प्रोवाइड की जा रही है गवर्नमेंट ने इसी डायरेक्शन में फाइनेंशियल सेक्टर के लिए फिन सीआरटी और गवर्नमेंट यूटिलिटीज के लिए नेशनल इंफॉर्मेशन सेंटर एनआईसी सीआरटी क्रिएट किया है फिफ्थ एजेंसी है डिफेंस साइबर एजेंसी जो मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस द्वारा मिलिट्री साइबर सिक्योरिटी
के लिए क्रिएट की गई डेडिकेटेड विंग है सिक्सथ इंपॉर्टेंट मेजर है साइबर सुरक्षित भारत इनिशिएटिव मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड आईटी ने 2018 में इस इनिशिएटिव को लांच किया था इसके तहत प्राइवेट एक्सपर्ट्स से कोलैबोरेशन चीफ इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी ऑफिसर्स का क्रिएशन फ्रंटलाइन आईटी गवर्नमेंट ऑफिशल्स की कैपेसिटी बिल्डिंग और साइबर क्राइम अवेयरनेस जैसे काम किए जा रहे हैं फाइनली अब हम बात करेंगे साइबर सुरक्षित केंद्र की यह सीईआरटीआई एन और मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड आईटी के अंडर क्रिएट किया गया बनेट क्लीनिंग एंड मालवेयर एनालिसिस सेंटर है इस एजेंसी की मदद से इंडियन सिटीजंस को अपना मोबाइल फोन
कंप्यूटर और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेोकंट्रोल इशू बन गया है इसे टैकल करने के लिए कई ग्लोबल मेजर्स भी लिए गए हैं जैसे पहले हम इंटरनेशनल मेजर्स की बात करते हैं पहला है बुडापेस्ट कन्वेंशन और साइबर क्राइम 2001 इस कन्वेंशन के तहत साइबर क्राइम से डील करने के लिए नेशनल लॉज को हार्मोनाइज करने की बात की गई थी इसके थ्रू इन्वेस्टिगेशन के लिए ग्लोबल कोऑपरेशन मुमकिन हो पाए इस कन्वेंशन को यूएस यूके ईयू समेत 56 नेशंस ने साइन किया था हालांकि इंडिया ने इसे साइन नहीं किया है अगला इनिशिएटिव है ग्लोबल सेंटर फॉर साइबर सिक्योरिटी यह एक जेनेवा
बेस्ड वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम द्वारा क्रिएट किया गया सेंटर है इसकी मदद से एक ग्लोबल प्लेटफार्म क्रिएट किया जाएगा जहां गवर्नमेंट एक्सपर्ट्स बिजनेसेस लॉ इफोर्स एजेंसीज कोलैबोरेट करके कंप्रिहेंसिव रेगुलेटरी मैकेनिज्म डेवलप करेंगे और साइबर थ्रेट्स को टैकल करेंगे तीसरा इनिशिएटिव है ग्लोबल कॉन्फ्रेंस ऑन साइबर स्पेस इस इनिशिएटिव द्वारा गवर्नमेंट प्राइवेट सेक्टर सिविल सोसाइटी कोलैबोरेट करके साइबर स्पेस कोऑर्डिनेशन और साइबर कैपेसिटी बिल्डिंग मेजर्स डेवलप करते हैं 2011 में इस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत हुई और यह हर दो साल बाद कन्वीन होता है अब बात करते हैं वे फॉरवर्ड की दोस्तों इन नेशनल और ग्लोबल एफर्ट्स के बावजूद आज
साइबर क्राइम बहुत कॉम्प्लेक्टेड सॉल्यूशन द्वारा साइबर सिक्योरिटी स्ट्रेंथ कर सकता है जैसे पहला है सेंटर स्टेट नेक्सस दोनों पुलिस और पब्लिक ऑर्डर स्टेट लिस्ट में आते हैं ऐसे में क्राइम को डिटेक्ट और टैकल करना स्टेट की प्राइमरी रिस्पांसिबिलिटी है सभी स्टेट्स के डिफरेंट इन्वेस्टिगेशन प्रोसीजर्स के कारण कंफ्यूजन क्रिएट होता है अगर हम यूनिफॉर्म स्टैचुअरी गाइडलाइंस डेवलप करें तो सेंटर स्टेट के बीच बेटर कोआर्डिनेशन करके साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन को एफिशिएंट बना सकते हैं दूसरा है इंक्रीजिंग कैपेसिटी बिल्डिंग गवर्नमेंट हर डिस्ट्रिक्ट और रेंज में सेपरेट साइबर पुलिस स्टेशन या हर पुलिस स्टेशन में टेक्निकल एक्सपर्टीज को एंप्लॉय
कर साइबर थ्रेट्स को क्विकली और बेटर तरीके से टैकल किया जा सकता है केरल द्वारा लच किया गया साइबर डोम प्रोजेक्ट इसी मामले में एक अच्छा उदाहरण बन सकता है थर्डली साइबर लैब्स को टेक्नोलॉजिकल अपडेट करना बहुत जरूरी है नेशनल साइबर फॉरेंसिक लैब और दिल्ली पुलिस के अंडर साइबर प्रिवेंशन अवेयरनेस एंड डिटेक्शन सेंटर जैसे प्रोग्रेसिव स्टेप्स को हमें बढ़ावा देना चाहिए फाइनली रेगुलर बैकिंग अप ऑफ डाटा एआई और आईओटी की मदद से रियल टाइम साइबर थ्रेट एनालिसिस डिजिटल लिटरेसी जैसे मेजर्स लेकर लॉन्ग टर्म साइबर सिक्योरिटी प्रोवाइड की जा सकती है दोस्तों साइबर सिक्योरिटी पर चर्चा
के बाद अब हम बात करेंगे 21 सेंचुरी में मीडिया और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के चलते जन्म लेने वाले सिक्योरिटी चैलेंज की सबसे पहले बात सोशल मीडिया की सोशल मीडिया को हमें कैसे वेब या मोबाइल बेस प्लेटफॉर्म की तरह देख सकते हैं जो इंडिविजुअल या ग्रुप्स को अक्रॉस द ग्लोब कम्युनिकेट और इंटरेक्ट करने में मदद करता है ये प्लेटफॉर्म्स लोगों को सेकंड्स में इंफॉर्मेशन एक्सचेंज करने में मदद करता है हैं सोसाइटी को ग्लोबलाइज करने से लेकर पॉलिटिक्स को डेमोक्रेटाइज करने और गवर्नेंस को इंप्रूव करने तक यह सब सोशल मीडिया के कुछ फायदे हैं लेकिन
आज के दौर में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स कई प्रकार के इंटरनल सिक्योरिटी थ्रेट्स को भी जन्म दे रहे हैं जिनमें साइबर टेररिज्म फ्रॉड क्राइम स्प्रेडिंग वायलेंस रेडिकलाइजेशन टेररिस्ट रिक्रूटमेंट फेक न्यूज़ और एसोसिएटेड वायलेंस भी शामिल है कुछ रिपोर्ट्स दावा करती हैं कि कई तरह के राइट्स में सोशल मीडिया हैंडल्स का मिसयूज किया जा चुका है उदाहरण के तौर पर हम 2020 के दिल्ली दंगों की बात कर सकते हैं जिसमें कई whatsapp2 20133 की एनुअल सिक्योरिटी रिपोर्ट बताती है कि ऑनलाइन सिक्योरिटी थ्रेड्स का हाईएस्ट कंसंट्रेशन ऐसी ही मास ऑडियंस वेबसाइट्स हैं जिसमें सोशल मीडिया भी शामिल है
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की ग्लोबल रिस्क रिपोर्ट में कई बार सोशल मीडिया द्वारा फैलाई जा रही रैपिड फॉल्स इंफॉर्मेशन एक इमर्जिंग रिस्क की तरह आइडेंटिफिकेशन कोई खास इंटरनल सिक्योरिटी थ्रेड क्रिएट नहीं करते बल्कि एंटी सोशल एलिमेंट्स द्वारा इनके मिसयूज के चलते यह थ्रेट्स जन्म लेते हैं सोशल मीडिया पर लिमिटेड गवर्नमेंट ओवरसाइज लिमिटेड इंडस्ट्री स्टैंडर्ड्स या फिर इंसेंटिव्स टू एजुकेट यूजर्स ऑन सिक्योरिटी लैक ऑफ प्राइवेसी और आइडेंटिटी प्रोटेक्शन एक्सट्रा के चलते यह थ्रेड्स और भी ज्यादा बढ़ जाते हैं इसके अलावा यह प्लेटफॉर्म्स लोगों की कॉन्फिडेंशियल यूजर इंफॉर्मेशन भी कलेक्ट करते हैं जिन पर अगर हैकर्स का अटैक
हु हु तो उनकी प्राइवेसी और उनका डाटा खतरे में पड़ जाता है जो एक मैसिव सिक्योरिटी थ्रेट है तो चलिए इस टॉपिक को डिटेल में समझते हैं और सबसे पहले बात करते हैं सोशल मीडिया से जन्म लेने वाले अलग-अलग इंटरनल सिक्योरिटी थ्रेट्स की डिफरेंट इंटरनल सिक्योरिटी थ्रेट्स ड्यू टू सोशल मीडिया सबसे पहला है साइबर टेररिज्म दोस्तों सोशल मीडिया से जन्म लेने वाले सबसे बड़े थ्रेट में साइबर टेररिज्म शामिल है आज टेररिस्ट और टेररिस्ट ग्रुप्स सोशल मीडिया को एक टूल की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं जिसकी मदद से वह नेशन स्टेट्स और गवर्नमेंट्स को डिस्मेंटल करने
का प्रयास करते हैं सोशल मीडिया का इस्तेमाल वह अपनी आइडियो जीी को स्प्रेड करने और रेडिकलाइजेशन को फैलाने के लिए करते आए हैं जिसमें आईएसआईएस का उदाहरण सबसे इंपॉर्टेंट है जिसने दुनिया भर से कई हजारों टेररिस्ट रिक्रूट करने के लिए सोशल मीडिया के थ्रू अपनी आइडियल को स्प्रेड करने की कोशिश की सोशल मीडिया के मैसिव रीच अफॉर्डेबिलिटी और कन्वीनियंस के चलते इन प्लेटफॉर्म्स ने टेररिस्ट के लिए एक कॉस्ट इफेक्टिव अल्टरनेट प्रोवाइड किया है जिसके इस्तेमाल से वह दुनिया के किसी भी कोने में बैठकर अपने गोल्स को अचीव करने में कामयाब हो सकते हैं इसके अलावा
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल इन ग्रुप्स ने अपने अटैक्स और प्लांस को कोऑर्डिनेट करने के लिए भी किया है कई ग्रुप्स ने तो आज खुद की वेबसाइट्स भी बनाई है जिसकी मदद से वोह सोसाइटी में रेडिकलाइजेशन को फैलाने का काम करते हैं कुछ रिपोर्ट्स दावा करती हैं कि टेरर ग्रुप्स के सामने काफी पॉपुलर हो गए हैं सोशल मीडिया के इंक्रिप्टेड और ग्लोबल नेचर के चलते टेररिस्ट के मॉडेस्ट ऑपरेंडी को ट्रेस कर पाना और उन्हें रोक पाना खुद में एक चैलेंजिंग टास्क बन जाता है स्पेशली तब जब ग्लोबल लेवल पर सोशल मीडिया को लेकर इंटरनेशनल कोऑपरेशन
बेहद कमजोर हैं दोस्तों अगला सिक्योरिटी थ्रेड है सोशल मीडिया फ्रॉड सोशल नेटवर्किंग साइट्स का मिसयूज आज कई प्रकार के क्रिमिनल्स और फ्रॉड स्टर्स लोगों को डिसीव करने के लिए कर रहे हैं कोविड क्राइसिस के टाइम पर कई आईपीएस और आईएएस ऑफिसर्स की फेक प्रोफाइल्स बनाकर लोगों से फ्रॉड स्टर्स ने कोविड क्राइसिस में फंसे लोगों की मदद करने के नाम पर उनके साथ फ्रॉड किया इसके अलावा सोशल मीडिया का मिसयूज फेक प्रोडक्ट्स और इल्लीगल गुड्स को बेचने के लिए भी एक्टिवली किया जाता रहा है सोशल मीडिया से लोगों की इंफॉर्मेशन को लेकर कई फ्रॉड स्टर्स उन्हें
फेक कॉल्स कर उनके बैंक अकाउंट से पैसा निकालने जैसे काम भी करते हैं इस तरह की एक्टिविटीज इंडिया में मेवात और जमता जैसे एरियाज में आज भी हो रही हैं दोस्तों अगला बड़ा चैलेंज है प पॉलिटिकल टोल्स राइटिंग और प्रोपेगेंडा दोस्तों लैक ऑफ रेगुलेशन और सोशल मीडिया पर सर्कुलेट हो रही मैसिव स्केल ऑफ इंफॉर्मेशन के चलते सोशल मीडिया कंटेंट और इंफॉर्मेशन की ऑथेंटिसिटी को चेक कर पाना लगभग नामुमकिन सा हो गया है इसका फायदा एंटी सोशल एलिमेंट्स समाज को बांटने और अपने पेटी पॉलिटिकल गोल्स को अचीव करने के लिए करते आए हैं जिससे मैसिव सिक्योरिटी
थ्रेट्स का जन्म होता है इसका सबसे बड़ा उदाहरण 2010 में शुरू हुआ अरब स्प्रिंग है जिसमें सोशल मीडिया का एक्टिव यूज देखा गया था हालांकि अरब स्प्रिंग डिक्टेटोरियल रूल के खिलाफ एक आउटरेज भी माना जाता है लेकिन उस दौरान सोशल मीडिया में फैल रही इंफॉर्मेशन की ऑथेंटिसिटी को लेकर सवाल उठते रहे हैं इसके अलावा इंडिया में कई लोगों के मॉब लिंचिंग इंसीडेंट्स में भी सोशल मीडिया में फैलाई गई मिस इंफॉर्मेशन का रोल रहा है सीएए प्रोटेस्ट के वक्त हुए दिल्ली राइट्स में लेकर फैलाई गई मिस इंफॉर्मेशन भी चर्चा में थी जिसके चलते सोसाइटी में अनरेस्ट
की स्थिति पैदा हो रही है इसी प्रकार 2012 में सोशल मीडिया रूमर्स के चलते बेंगलुरु से नॉर्थ ईस्ट के माइग्रेंट्स आउट ऑफ फियर अपने घर की ओर लौटने लगे थे कई फ्रेंच ग्रुप्स सोशल मीडिया का इस्तेमाल करके कास्टि कम्युलस आइडियाज को भी फैलाने की कोशिश करते हैं जिसके चलते इंडिया जैसे डावर्स देश में सोशल डिवाइड बढ़ने का खतरा रहता है जो वायलेंस को जन्म दे सकता है यह सारी प्रॉब्लम्स देश की पॉलिटिकल स्टेबिलिटी और लॉ एंड ऑर्डर सिचुएशन को थ्रेटें करने का पोटेंशियल रखते हैं साइबर हैकिंग भी एक मेजर थ्रेट है हैकर्स रेडीमेड कंप्यूटर प्रोग्राम्स
को यूज़ करके टारगेट कंप्यूटर सिस्टम्स को अटैक करते हैं सोशल मीडिया के दौर में जिस प्रकार से गवर्नर्स लैंडस्केप चेंज हुआ है उसमें सोशल मीडिया का मेजर रोल है आज हर गवर्नमेंट डिपार्टमेंट खुद का सोशल मीडिया हैंडल और वेबसाइट मेंटेन करता है ऐसे में हैकिंग से एंटी सोशल एलिमेंट्स और टेररिस्ट इंडियन गवर्नमेंट लैंड स्केप को हैंपर कर सकते हैं इससे सिक्योर और कॉन्फिडेंशियल डाटा की सिक्योरिटी भी खतरे में पड़ सकती है यह एक वैसे ही वॉर फेयर का रूप ले सकता है जो बिना आर्म्स एंड अमिनेशन के एक देश को घुटनों में ला सकता है
और इसीलिए ये एक बड़ा चैलेंज है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे कंप्यूटर इनोवेशंस ने इस समस्या को और भी ज्यादा बड़ा बना दिया है क्योंकि एआई के मिसयूज से हैकिंग और भी आसान बन गई है दोस्तों ये तो बात हुई सोशल मीडिया से इमर्ज होने वाले इंटरनल सिक्योरिटी थ्रेट्स की अब हम कन्वेंशनल मीडिया यानी कि प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े नेशनल सिक्योरिटी इश्यूज भी देख लेते हैं नेशनल सिक्योरिटी एंड कन्वेंशनल मीडिया दोस्तों इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और प्रिंट मीडिया कन्वेंशनल मीडिया की कैटेगरी में रखे जा सकते हैं आर्टिकल 19 के तहत इंडियन सिटीजंस को मिलने वाले फ्रीडम ऑफ
स्पीच के अंडर प्रेस का फ्रीडम होना भी एक अहम फंडामेंटल राइट है जिसके इस्तेमाल से समाज और लोग रूलिंग क्लास को अकाउंटेबल ठहराने का काम करते हैं और इस सेंस में ये मीडिया प्लेटफॉर्म्स वॉच डॉग्स ऑफ डेमोक्रेसी की तरह एक्ट करते हैं इंफॉर्मेशन डिसेमिनेशन से लेकर अवेयरनेस जनरेशन और एसेंशियल पॉलिसीज को लोगों तक पहुंचाने में मीडिया ने एक इंपॉर्टेंट रोल प्ले किया है जब भी देश में कोई मेजर गवर्नेंस फेलियर क्राइम या करप्शन होता है तो मीडिया इन मुद्दों पर अवेयरनेस फैलाकर लोगों को इफॉर्म सिटीजन बनाने में मदद करता है कोल स्कैम से लेकर निर्भया
केस जिनके बाद कई गवर्नेंस रिफॉर्म्स गवर्नमेंट ने किए ये सब मीडिया के पॉजिटिव्स को दिखाते हैं लेकिन नेशनल सिक्योरिटी डोमेन में मीडिया का रोल कई बार क्रिटिकली इवेलुएट किया जाता है और यह सब इलेक्ट्रॉनिक्स मीडिया को लेकर ज्यादा होता है क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का रीच और स्पीड ऑफ डिसेमिनेटिंग इंफॉर्मेशन प्रिंट मीडिया से कहीं ज्यादा होता है इंडिया में टेलीविजन न्यूज़ पर अगर हम नजर डालें तो पाएंगे कि देश में कई मीडिया चैनल्स एजिस्ट करते हैं और व्यूअरशिप को लेकर कंपीट करते हैं जितनी ज्यादा व्यूअरशिप उतने ज्यादा एडवरटाइजमेंट्स और उतना ज्यादा रेवेन्यू ऐसे में व्यूअरशिप को
बढ़ाने के लिए ब्रेकिंग न्यूज़ सेंसेशन जैसे आइडियाज का जन्म हुआ जिनके चलते न्यूज़ को ड्रामे बनाने की होड़ सी लग गई इसके चलते फैक्ट्स ओपिनियन और स्पेकल शंस के बीच का डिस्टिंक्शन लगातार खत्म सा होता गया रेटिंग्स के होड में न्यूज़ चैनल्स कई ऐसे काम कर जाते हैं जो सिक्योरिटी थ्रेट्स को जन् देते हैं 2611 को लेकर हुई टीवी मीडिया रिपोर्टिंग इसका एक बड़ा उदाहरण है लाइव कवरेज के नाम पर मीडिया चैनल्स ने कई ऐसी इंफॉर्मेशन फैलाई हैं जिसका इस्तेमाल पाकिस्तान में बैठे टेररिस्ट के सरगना ने किया और 2611 में इवॉल्वड टेररिस्ट को फायदा पहुंचाया
सबसे पहले और सबसे ज्यादा सेंसेशन आइज तरीके से न्यूज़ को फैलाने के होड़ में न्यूज़ रिपोर्ट्स की ऑथेंटिसिटी को चेक करने का काम मानो जैसे बली चढ़ गया और फेक न्यूज़ का दौर शुरू हुआ ऐसे फेक न्यूज़ और हाईली चार्ज डिबेट्स हमेशा कम्युलस जैसे थ्रेड्स को जन्म देने की ताकत रखते हैं स्पेशली सेंसिटिव इश्यूज जैसे रिलीजस और कास्ट को लेकर डिस्कशन इसके अलावा कई सेंसिटिव नेशनल सिक्योरिटी इश्यूज पर डिस्कशंस भी मीडिया मैच्योर तरीके से नहीं करता और ये इंटरनेशनल लेवल पर इंडिया के दूसरे देशों के साथ रिश्तों को भी नेगेटिवली इंपैक्ट कर सकता है उदाहरण
के तौर पर हम मीडिया चैनल्स द्वारा की जा रही चाइना और रशिया पर रिपोर्टिंग को देख सकते हैं इसके अलावा मीडिया ट्रायल्स भी आज आम बात हो गई है जुडिशियस प्रिंसिपल्स ही कहते हैं कि जब तक कोई इंसान कोर्ट ऑफ लॉ में कन्विंसेस नहीं बोला जा सकता लेकिन मीडिया ने आज इस प्रिंसिपल को भी खत्म कर दिया है एक पॉसिबल एक्यूज का मीडिया ट्रायल कर इंडिविजुअल्स का मेंटल हैरेसमेंट और उनके सोशल बॉयकॉट में मीडिया का बड़ा रोल है लैक ऑफ सेल्फ रिस्ट्रेंट के चलते कई बार ऐसा भी देखा गया है कि मीडिया रिपोर्ट्स एक्टिवली लॉ
एंड ऑर्डर फंक्शंस के साथ इंटरफेयर करती हैं जब 2005 से 2008 के बीच देश भर में इंडियन मुजाहिदीन ने बॉम ब्लास्ट की झड़ी लगा दी थी और देश की एजेंसीज उसके आतंकवादियों को पकड़ने की हर संभव कोशिश कर रही थी तब कई मीडिया चैनल्स और लोकल न्यूज़ पेपर्स ने बिना इस मुद्दे की सेंसिटिविटी को समझते हुए ऐसे रिपोर्ट्स पब्लिश किए जिसका फायदा आतंकवाद ने उठाया और उनमें से कई आतंकवादी अलर्ट होकर पाकिस्तान भाग गए खैर अब हम आगे बढ़ते हुए मीडिया और सोशल मीडिया रेगुलेशन से रिलेटेड कुछ एसिस्टिंग मैकेनिज्म और फ्रेमवर्क्स को देख लेते हैं
सोशल मीडिया रेगुलेशन दोस्तों करेंटली सोशल मीडिया के मिसयूज को रोकने के लिए गवर्नमेंट एक फुल फ्लेश पॉलिसी पर काम कर रही है जिसका ब्रॉड एम सोशल मीडिया पर हो रही एंटी नेशनल एक्टिविटीज पर विजिलेंस करना होगा ताकि इसका मिसयूज देश की सिक्योरिटी के खिलाफ ना हो सके और यह सब सोशल मीडिया पर लोगों के फ्रीडम ऑफ स्पीच को बरकरार रखते हुए किया जाएगा लेकिन करेंटली गवर्नमेंट सोशल मीडिया के लिए केवल एक लिस्ट ऑफ डू एंड डोंट्स मेंटेन करती है पर इसे एक फुल फ्लेज गाइडलाइन की तरह डेवलप करना जरूरी है सुप्रीम कोर्ट ने भी कई
बार उसके कंसर्न्स रेज किए हैं यह कंसर्न्स अनचेरिल कमेंट्स ट्रोल्स और अग्रेसिव रिएक्शंस ऑन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को लेकर है जो जुडिशियस प्रोसीडिंग्स के साथ भी इंटरफेयर करते हैं इसके अलावा आईटी एक्ट 2 एक ओवरर्चिंग लॉ है जो आईसीटी और सोशल मीडिया को रेगुलेट करता है इसके बारे में हमने पिछले लेक्चर में भी चर्चा की और इस लेक्चर में हम केवल आईटी एक्ट को सोशल मीडिया के पर्सपेक्टिव से ही समझेंगे सेक्शन 69 और 69a ऑफ आईटी एक्ट 2000 गवर्नमेंट को एंपावर करते हैं कि वह किसी भी इंफॉर्मेशन के पब्लिक एक्सेस को ब्लॉक इंटरसेप्ट मॉनिटर और
डिक्रिप्शन को लेकर सोशल मीडिया वेबसाइट्स को डायरेक्शन दे सकती है अगर वो इंफॉर्मेशन देश की सिक्योरिटी के साथ जुड़ी हुई है इसके अलावा आर्टिकल 69 भी ऑफ द आईटी एक्ट 2000 गवर्नमेंट एजेंसीज को एंपावर करता है कि वह साइबर सिक्योरिटी के लिए किसी भी कंप्यूटर सोर्स से ट्रैफिक डाटा को कलेक्ट और उसे एनालाइज और मॉनिटर कर सके ताकि साइबर सिक्योरिटी को इंप्रूव किया जा सके उसके अलावा आईटी एक्ट 2000 के तहत न्यू आईटी रूल्स 2021 रिलीज किए गए हैं इन रूल्स के अंदर एक इंटरमीडियरी गाइडलाइंस और मेटा एथिक्स कोड को क्रिएट किया गया है आइए
इस रूल के कुछ इंपॉर्टेंट प्रोविजंस को समझते हैं पहला इंपॉर्टेंट पॉइंट यह है कि अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और इंटरमीडियरीज की यह ड्यूटी होगी कि वह गवर्नमेंट को किसी भी मेलिश अस इंफॉर्मेशन के ओरिजनेटर को आइडेंटिफिकेशन कंटेंट को रिमूव करने की भी उनकी ड्यूटी होगी हर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए आपसे एक ग्रीवेंस ड्रेसल ऑफिसर और चीफ कंप्लायंस ऑफिसर अपॉइंटमेंट है इसके अलावा किसी भी फॉरेन सोशल मीडिया के यूजर्स अगर 50 लाख से ज्यादा हैं तो उन्हें कंपलसरेली इंडिया में अपनी एक सेपरेट कंपनी इस्टैब्लिशमेंट थ्रेट्स को काउंटर करने के लिए बनाए गए इंस्टीट्यूशंस वही हैं
जिनके बारे में हमने पिछले वीडियो में देखा था ये ऑर्गेनाइजेशंस है सीआरटीआई एन एनसीआईआईपीसी साइबर स्वच्छता केंद्र साइबर सिक्योरिटी कांसेप्ट लैब्स नेशनल साइबर सिक्योरिटी कोऑर्डिनेशन सेंटर एक्सट्रा यह सारे इंस्टीट्यूशंस ब्रॉडली साइबर सिक्योरिटी को इंश्योर करने का काम करते हैं चलिए अब बात करते हैं कन्वेंशनल मीडिया के रेगुलेशंस की रेगुलेशंस फॉर कन्वेंशनल मीडिया मीडिया को रेगुलेट करने के लिए देश में कई लॉज हैं जैसे कि प्रेस काउंसिल एक्ट ऑफ 1978 जो प्रेस की फंक्शनिंग को गवर्न करने के लिए कई बॉडीज नॉमिनेट करता है इसके तहत प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया क्रिएट की गई है जिसके पास जर्नलिस्टिक
एथिक्स और प्रोफेशनल कंडक्ट को वायलेट करने वाले एडिटर्स और जर्नलिस्ट की कंप्लेन रिसीव करने की पावर है इसके अलावा नेशनल सिक्योरिटी एक्ट ऑफ 1980 इंडियन प्रेस पर रिस्ट्रिक्शंस डालता है कि वह कोई ऐसी इंफॉर्मेशन ब्रॉडकास्ट नहीं कर सकते जो देश की स्टेबिलिटी और सिक्योरिटी को थ्रेटें कर स सके इसके अलावा इमरजेंसी के वक्त आर्टिकल 19 को सस्पेंड करने की पावर्स गवर्नमेंट के पास होती है सिविल डिफेंस कोर्ट 1968 के तहत गवर्नमेंट किसी भी ऐसे डॉक्यूमेंट बुक या न्यूज़पेपर के पब्लिकेशन को रोक सकती है अगर वह देश के डिफेंस को डैमेज करने की ताकत रखता है
न्यूज़ ब्रॉडकास्टिंग स्टैंडर्ड अथॉरिटी एक इंडिपेंडेंट बॉडी है जिसे न्यूज़ ब्रॉडकास्टर्स एंड डिजिटल एसोसिएशन ने सेटअप किया है और इसे टास्क दिया गया है कि वह न्यूज़ ब्रॉडकास्टिंग से रिलेटेड कंप्लेंट्स को इन्वेस्टिगेट कर सके ये बेसिकली एक सेल्फ रेगुलेटिंग मैकेनिज्म है ऐसे ही एक मैकेनिज्म इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन ने भी डेवलप किया है जिसका नाम है सेल्फ रेगुलेटरी कंटेंट गाइडलाइंस फॉर नॉन न्यूज़ एंड करंट अफेयर्स टेलीविजन चैनल ये कोड 2611 में हुई मीडिया रिपोर्टिंग के बाद डेवलप किया गया है अब बात करते हैं कि सोशल मीडिया और मीडिया से इमर्ज होने वाले चैलेंज को टैकल करने के
लिए आगे और क्या कदम उठाए जा सकते हैं मतलब व्हाट मोर नीड्स टू बी डन दोस्तों सबसे पहली बात तो यह है कि मीडिया एसोसिएट्स को अपने एथिकल कोड्स को और स्ट्रेंड करने की जरूरत है ताकि मीडिया चैनल्स रिपोर्टिंग में एक्यूरेसी ऑब्जेक्टिविटी और न्यूट्रलिज्म भी उन चैनल्स की रिस्पांसिबिलिटी होनी चाहिए इसके अलावा नेशनल सिक्योरिटी से रिलेटेड मुद्दों पर मीडिया को एक्स्ट्रा सावधानी बरतनी चाहिए ताकि देश की इंटीग्रिटी और सिक्योरिटी खतरे में ना पड़े प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया की पावर्स को स्ट्रेंथ करना चाहिए ताकि वो न्यूजपेपर्स और उनके एडिटर्स पर जर्नलिस्टिक एथिक्स को वायलेट करने के
लिए पेनल्टी पोज कर पाएं इसके अलावा गवर्नमेंट को न्यूज़ ब्रॉडकास्टर्स एंड डिजिटल एसोसिएशन एनबीडीएस चुरी स्टेटस देना चाहिए ताकि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को भी न्यूज़पेपर की तरह रेगुलेट किया जा सके सोशल मीडिया के डोमेन में भी हमें कई स्टेप्स लेने की जरूरत है सबसे पहले हमें एक डिजिटल डेटा प्रोटेक्शन लॉ को इक्ट करने की जरूरत है जो देश के लोगों के डाटा को सिक्योर कर सके और प्राइवेसी ब्रीज के खिलाफ देश की एजेंसीज को एंपावर कर सके इसके अलावा हमें एक नेशनल सोशल मीडिया पॉलिसी को इंस्टीट्यूशनलाइज करने की जरूरत है या फिर नेशनल साइबर सिक्योरिटी पॉलिसी
को रिवाइज कर उसके अंदर ही सोशल मीडिया को एड्रेस करने की जरूरत है मिस इंफॉर्मेशन को प्रिवेंट करने के लिए हमें यूरोपियन यूनियन की तरह एक कोड ऑफ प्रैक्टिस डेवलप करने की जरूरत है जो एजेंसीज को एंपावर करेगा कि वह मिस इंफॉर्मेशन फैलाने वाले सोशल मीडिया हैंडल्स को फाइनेंशली पनला कर सके उनके रेवेन्यू जनरेशन मेथड्स पर रोक लगा सके और कंज्यूमर्स को एंपावर कर सके कि वो ऐसे हैंडल्स को रिपोर्ट कर सके इसके अलावा आईसीटी रिलेटेड कैपेबिलिटी बिल्डिंग की भी जरूरत है ताकि हम हमारे एजेंसीज और उनके पर्सनल्स टेक इनेबल हो सके इसके लिए गवर्नमेंट
एजेंसीज का इंडस्ट्री और रिसर्च इंस्टीट्यूशंस के साथ इंटरेक्शन बढ़ाना होगा और करंट ट्रेनिंग प्रोग्राम्स को टेक फ्रेंडली बनाना होगा देश के लोगों की साइबर लिटरेसी को इंप्रूव करने पर ध्यान देना भी बेहद आवश्यक है जिसके लिए एजुकेशनल करिकुलम में सुधार से लेकर अवेयरनेस कैंपस और सिविल सोसाइटी इंगेजमेंट्स का सहारा लिया जा सकता है हमें कुछ ऐसे सोशल मीडिया टूल्स पर भी काम करने की जरूरत है जो फेक न्यूज़ जैसे आइटम्स को स्प्रेड और वायरल होने से रोकने में एजेंसीज की मदद कर सके इसके लिए गवर्नमेंट को इंडस्ट्री के साथ इंगेज करना होगा सोशल मीडिया से
फैलने वाले क्रिमिनल नेटवर्क और टेररिज्म एक ग्लोबल फिनोम है और इसे रोकने के लिए बायलट मल्टीलेटरल और इंटरनेशनल कोऑपरेशन भी बेहद जरूरी है यह ना सिर्फ आईसीटी रेगुलेशंस में होना है बल्कि लॉ इंफोर्समेंट में भी आवश्यक है ऐसे में हमें उन एग्रीमेंट्स पर काम करना होगा जो लॉ इंफोर्समेंट इन सोशल मीडिया और आईसीटी को फैसिलिटेट और स्मूथन कर सके [संगीत] हम चर्चा करेंगे न्यूक्लियर वेपंस और उनसे इमर्ज होने वाले इंटरनल सिक्योरिटी थ्रेट्स की इस वीडियो में हम भारत की न्यूक्लियर पॉलिसी और न्यूक्लियर वेपन प्रोग्राम के इवोल्यूशन के साथ-साथ न्यूक्लियर वेपंस के प्रोलिफिक के लिए एजिस्टिफाई
वल देशों से इमर्ज होने वाले पॉसिबल न्यूक्लियर वरफेन के खतरों को झेलने में सक्षम है अंत में हम भारत की नो फर्स्ट यूज न्यूक्लियर डॉक्ट्रिन और उसको लेकर चल रहे डिबेट्स पर भी एक नजर डालेंगे हम आपको यह बता दें कि जब न्यूक्लियर एनर्जी को हार्नेस करने की बात करते हैं तो उसके दो पहलू हैं सिविल न्यूक्लियर एनर्जी और दूसरा मिलिट्री न्यूक्लियर एनर्जी सिविल न्यूक्लियर एनर्जी का उदाहरण न्यूक्लियर पावर प्लांट से जनरेट की जा रही इलेक्ट्रिकल एनर्जी है पर यह सेगमेंट हमारे आज की वीडियो का फोकस पॉइंट नहीं है आज के वीडियो में हम केवल
न्यूक्लियर वेपंस के मिलिट्री यूसेज की चर्चा करेंगे खैर इससे पहले कि हम न्यूक्लियर थ्रेट और उससे रिलेटेड इश्यूज को समझे चलिए सबसे पहले हम बात करते हैं उन इंटरनेशनल ट्रीटीज की जो न्यूक्लियर वेपंस को रेगुलेट और कंट्रोल करने की कोशिश करती हैं न्यूक्लियर वेपंस एंड इंटरनेशनल अरेंजमेंट्स दोस्तों वर्ल्ड वॉर सेकंड के दौरान 1945 में जब यूएसए द्वारा हिरोशिमा और नागासाकी में न्यूक्लियर बॉम्ब्स का सबसे पहला और अब तक का इकलौता न्यूक्लियर वेपन यूज़ किया गया तब से ही न्यूक्लियर वेपंस के पॉसिबल डेंजर्स और सिक्योरिटी थ्रेड्स पर डिबेट चल रहे हैं हिरोशिमा और नागासाकी में हुए
डिस्ट्रक्शंस और रेडिएशन के लॉन्ग टर्म इफेक्ट्स को देखते हुए ग्लोबल कम्युनिटी के सामने सबसे बड़ा चैलेंज ये था कि अगर ये वेपंस किसी इरिस्पांसिबल स्टेट या फिर नॉन स्टेट एक्टर्स जैसे टेररिस्ट ग्रुप्स के हाथ लग गए तो उसका अंजाम पूरी दुनिया के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है इसी बात को ध्यान में रखते हुए इंटरनेशनल कम्युनिटी द्वारा न्यूक्लियर वेपंस के प्रोलिफ्ट को लिमिट करने और रोकने के लिए नॉन प्रोलिफ्ट या फिर ट्रीटी ऑन द नॉन प्रोलिफिक्स वेपंस को क्रिएट किया गया जिसका मेन एम न्यूक्लियर वेपन टेक्नोलॉजी के स्प्रेड को रोकना है ये ट्रीटी 1968 में
यूएसए यूएसएसआर और यूके जैसे न्यूक्लियर पावर देशों के साथ-साथ 59 अन्य कंट्रीज द्वारा साइन की गई जिसके तहत कई सिग्नेटरी नेशन स्टेट्स ने खुद ही डिसाइड किया कि वो न्यूक्लियर वेपंस की तरफ बढ़ना नहीं चाहते आज इस ट्रीटी के अंडर 190 कंट्रीज आती हैं लेकिन इंडिया इजराइल नॉर्थ कोरिया पाकिस्तान और साउथ सूडान ने इसे साइन करने से मना कर दिया है इसके अलावा ईरान जो इस ट्रीटी का सिग्नेटरी है उस पर लगातार य आरोप लगते रहे हैं कि वह एनपीटी के अंडर किए गए अपने कमिटमेंट्स को फुलफिल नहीं कर रहा है और न्यूक्लियर वेपंस बनाने
के प्लांस बना रहा है यूएन की स्पेशलाइज्ड बॉडी इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी या आईएईए एक ओवरर्चिंग इंटरनेशनल बॉडी है जो न्यूक्लियर एनर्जी के मिसयूज को रोकने का काम करती है यह बॉडी एनपीटी सिग्नेटरी नेशंस के न्यूक्लियर फैसिलिटी पर भी नजर रखती है और एनपी ए पीटी देशों के कमिटमेंट्स को वेरीफाई करती है जो कंट्रीज एनपीटी के सिग्नेटरीज नहीं है वह अगर चाहे तो आईएईए के एडिशनल प्रोटोकॉल को साइन करके अपने सिविल न्यूक्लियर फैसिलिटी को आईएईए के सेफगार्ड्स और चेक्स के अंडर ला सकते हैं ध्यान रखिए कि एडिशनल प्रोटोकॉल के अंडर नॉन एनपीटी देशों के मिलिट्री
न्यूक्लियर फैसिलिटी नहीं आते इंडिया ने खुद के रिस्पांसिबल न्यूक्लियर पावर होने के सबूत दुनिया को तब दिया जब उसने आईएईए के इस प्रोटोकॉल को 2009 में साइन किया खैर 1974 में इंडिया द्वारा अपने पहले न्यूक्लियर वेपन को टेस्ट करने के कॉन्टेक्स्ट में एक और इंटरनेशनल अरेंजमेंट का जन्म हुआ जैसे एनएसजी कहा जाता है न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप यह ग्रुप एनपीटी को कंप्लीमेंट करता है और यह एक मल्टीलेटरल एक्सपोर्ट कंट्रोल रेजीम है जिसके तहत न्यूक्लियर मटेरियल और न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी सप्लाई करने वाले देश न्यूक्लियर मटेरियल और न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी के इरिस्पांसिबल एक्सपोर्ट को कंट्रोल करने के कमिटमेंट्स करते हैं
ऐसे में कुछ प्रोविजंस मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रेजीम या एमटीसीआर के अंडर भी आते हैं जिसके तहत न्यूक्लियर वेपंस कैरी करने के लिए कैपेबल मिसाइल्स के प्रोलिफिकेसी और एनएसजी का मेंबर नहीं है लेकिन वो एमटीसीआर का मेंबर है न्यूक्लियर वेपंस को कंट्रोल और लिमिट करने के लिए यूएसए और यूएसएसआर जो अब रशिया है इनके बीच भी कई सीरीज ऑफ बायलट ट्रीटीज एजिस्ट करती हैं जिसके तहत इन दो पावर्स ने खुद के न्यूक्लियर आर्सेनल्स को भी रिड्यूस किया है इन ट्रीटीज में सबसे लेटेस्ट है न्यू सार ट्रीटी जो 2011 में फोर्स में आई एक और इंपॉर्टेंट ट्रीटी
है लिमिटेड बैंड ट्रीटी जिसे यूएस यूके और यूएसएसआर ने 1963 में साइन किया था ये ट्रीटी केवल अंडरग्राउंड न्यूक्लियर टेस्टिंग अलाउ करती है यानी कि ग्राउंड अंडर वाटर और स्पेस में किसी भी प्रकार के न्यूक्लियर टेस्ट को यह प्रोहिबिट करती है इंडिया ने भी इस ट्रीटी को रटिफिकेशन बॉडीज में किसी भी प्रकार के न्यूक्लियर टेस्ट को बैन कर दिया गया है इसके अलावा कंप्रिहेंसिव टेस्ट बैन ट्रीटी या सीटीबीटी हर प्रकार के न्यूक्लियर एक्सप्लोजंस को बैन करने का एम रखती है और इसे 24th सितंबर 1996 में शुरू किया गया था तब से लेकर आज तक 180
से भी ज्यादा देशों ने इसे साइन कर दिया है लेकिन इंडिया ने इसे साइन नहीं किया है और यूएसए और चाइना जैसे देशों ने इसे रटिफिकेशन अभी तक फोर्स में नहीं आई है यह ट्रीटी केवल तब फोर्स में आएगी जब nx2 में लिस्टेड सारे 44 स्टेट्स इसे रटिफिकेशन एग्रीमेंट है जो हाईली एनरेज यूरेनियम और प्लूटोनियम के प्रोडक्शन को ही प्रोहिबिट करने का एम रखती है हालांकि इस टीटी के डिटेल्स और टर्म्स ऑफ एग्रीमेंट अभी तक फ्रेम ही नहीं किए गए हैं तो दोस्तों यह था एक ओवरव्यू जिसमें हमने न्यूक्लियर वेपंस रिलेटेड कुछ मेजर इंटरनेशनल एग्रीमेंट्स
और इंस्टीट्यूशंस को समझा अब हम आगे बढ़ते हैं और समझते हैं इंडिया के न्यूक्लियर वेपन प्रोग्राम और उसकी न्यूक्लियर कैपेबिलिटीज को इंडियाज न्यूक्लियर वेपंस प्रोग्राम दोस्तों आपने देखा कि कैसे कई देशों ने खुद ही न्यूक्लियर वेपंस के खतरे को समझते हुए नॉन प्रोलिफ्ट साइन की लेकिन इंडिया ने एनपीटी को साइन करने से साफ इंकार कर दिया और इसे डिस्क्रिमिनेटरी बताया इंडिया ने एनपीटी के डिस्क्रिमिनेटरी नेचर को उजागर करते हुए यह कहा कि वो न्यूक्लियर वेपंस के नॉन प्रोलिफिक्स यूनिवर्सलीस देश पर अप्लाई होनी चाहिए और ना कि केवल उन स्टेट्स पर जिनके पास न्यूक्लियर वेपंस नहीं
है हम आपको बता दें कि एनपीटी के अंदर दो कैटेगरी बनाई गई हैं जिसके अंदर पांच न्यूक्लियर वेपन स्टेट को न्यूक्लियर पावर बोला गया है और बाकी देशों को नॉन न्यूक्लियर स्टेट एनपीटी के अंडर वो देश जिनके पास ऑलरेडी न्यूक्लियर वेपंस हैं उन पर किसी भी प्रकार के मेजर रिस्ट्रिक्शंस नहीं है एनपीटी के हिसाब से नॉन प्रोलिफिक्स बिलिटी मेनली नॉन न्यूक्लियर स्टेट्स के ऊपर ही है और इसके इंप्लीमेंटेशन से पांच रिकॉग्नाइज न्यूक्लियर पावर्स यूएसए रशिया फ्रांस चाइना और यूके न्यूक्लियर वेपंस को मोनोपलाइज कर रहे हैं इंडिया इसी प्रोविजन के खिलाफ है क्योंकि वो जानता है
कि ये न्यूक्लियर पावर देश अपनी न्यूक्लियर कैपेबिलिटीज का गलत इस्तेमाल कमजोर देशों के खिलाफ बारया निंग चिप के रूप में करके अपनी हेजम को इंश्योर कर सकते हैं इसके अलावा इंडिया का नेबरिंग कंट्री चाइना जिसने इंडिया के अगेंस्ट एक अग्रेसिव स्टेंस लेते हुए 1962 में वॉर छेड़ दिया था वह खुद 1964 में एक न्यूक्लियर पावर बन गया था और ऐसे में इंडिया एनपीटी को साइन कर खुद को कमजोर नहीं करना चाहता है पाकिस्तान और चाइना जैसे अग्रेसिव देशों के मध्य भारत की एक्जिस्टेंस ने उसे न्यूक्लियर वेपंस को एक्वायर करने के लिए मजबूर किया है और
यही वजह है कि इंडिया आज एक मेजर न्यूक्लियर पावर बनकर उभरा है पाकिस्तान के नापाक इरादों को लेकर भी इंडिया हमेशा से अपने ऑप्शंस को खुले रखना चाहता है और भारत का शक तब से ही निकला जब 1998 में पाकिस्तान ने भी अपना न्यूक्लियर वेपन टेस्ट किया और तो और पाकिस्तान ने तो 1972 में ही अपना न्यूक्लियर प्रोग्राम शुरू कर दिया था इस कॉन्टेक्स्ट में न्यूक्लियर वेपंस को डेवलप करना इंडिया की इंटरनल सिक्योरिटी के लिए वरदान से कम नहीं है इंडिया की बात करें तो उसने फ्यूचर वॉर्स और अग्रेशन को डिटर करने और खुद की
इंटरनल सिक्योरिटी को मजबूत रखने के लिए अपना न्यूक्लियर प्रोग्राम 1967 में स्टार्ट कर दिया और उसने अपना पहला न्यूक्लियर वेपन टेस्ट 1974 में ऑपरेशन स्माइलिंग बुद्धा के तहत किया नेशनल इंटरेस्ट को ध्यान में रखते हुए इंडिया ने अपने मिलिट्री प्रोजेक्ट को जारी रखा और 1998 में ऑपरेशन शक्ति के अंदर एक और न्यूक्लियर टेस्टिंग की जिसके बाद यूएसए और जापान जैसे देशों ने इंडिया पर सैंक्शंस इंपोज कर दिए आज के वक्त में इंडिया ने अपने न्यूक्लियर आर्सनल के साइज को लेकर कोई ऑफिशियल स्टेटमेंट रिलीज नहीं किए है लेकिन रफ एस्टिमेट्स के हिसाब से भारत के पास
शायद 150 से 160 न्यूक्लियर वेपंस हैं साथ में इंडिया के के पास 200 और न्यूक्लियर वेपंस बनाने के लिए वेपन ग्रेड प्लूटोनियम भी मौजूद है कुछ एस्टिमेट्स के हिसाब से इंडिया के पास आज इनफ प्लूटोनियम है जिससे वो शायद हजार से भी ज्यादा न्यूक्लियर वेपंस क्रिएट कर सकता है लेकिन एक रिस्पांसिबल न्यूक्लियर पावर होने के चलते वो केवल उतने ही वेपंस मेंटेन करता है जो न्यूक्लियर डिटेरेंस को इंश्योर कर सके हम आपको बता दें कि भारत ने हमेशा न्यूक्लियर मिलिटराइजेशन से होने वाले खतरे को समझाए और यही वजह है कि भारत नो फर्स्ट यूज पॉलिसी
फॉलो करता है इसके हिसाब से इंडिया कभी भी न्यूक्लियर वॉर को पहले स्टार्ट नहीं करेगा इसके अलावा हम आज मिनिमम क्रेडिबल डिटेरेंस डॉक्ट्रिन को भी फॉलो करते हैं जो न्यूक्लियर वेपंस को लेकर हमारे इंटेंशंस गोल्स और रिस्पांसिबिलिटी को काफी क्लीयरली एक्सप्लेन करता है इस डॉक्ट्रिन के तहत भारत सिर्फ उतने ही न्यूक्लियर वेपंस प्रोड्यूस करेगा जितने उसे अपने एडवर्सरीज को डिटर करने के लिए बनाने पड़े उसके अलावा इंडिया आज एक न्यूक्लियर ट्रायड देश भी है यानी कि वह न्यूक्लियर वेपंस को लैंड सी और एयर तीनों प्लेटफॉर्म से लॉन्च कर सकता है दोस्तों ये तो बात हुई
इंडिया के न्यूक्लियर प्रोग्राम के ओवरव्यू की अब हम आगे बढ़ते हैं और समझते हैं कि भारत किस प्रकार के न्यूक्लियर थ्रेड्स फेस करता है और वो किस हद तक इन्हें काउंटर करने में सक्षम है इंडियाज न्यूक्लियर थ्रेड एंड एनालिसिस ऑफ इट्स मिलिट्री न्यूक्लियर आर्सनल दोस्तों न्यूक्लियर वेपन से इंडिया के लिए इमर्ज होने वाले थ्रेट्स की जब हम बात करते हैं तो हमारे सामने सबसे पहले इंडिया के दो पड़ोसी देशों की इमेज आती है चाइना और पाकिस्तान रफ एस्टिमेट्स की बात करें तो आज दुनिया में लगभग 13500 न्यूक्लियर वॉर हेड्स हैं लेकिन इनमें से 90 पर
वेपंस रशिया और यूएसए को बिलोंग करते हैं अगर कंट्री वाइज कंपैरिजन करें तो रशिया के पास सबसे ज्यादा वॉर हेड्स हैं लगभग 6000 इसके बाद आता है यूएसए जिसके पास 5800 वॉर हेड्स हैं चाइना के पास लगभग 300 और पाकिस्तान के पास लगभग 150 ऐसे वेपंस हैं इंडिया के पास भी लगभग 150 टू 160 वॉर हेड्स हैं न्यूक्लियर वेपंस के नंबर को देखकर तो यही लगता है कि इंडिया और उसके दोनों न्यूक्लियर कैपेबल पड़ोसी देश लगभग सिमिलर लेवल्स पर हैं लेकिन नंबर से ज्यादा इन देशों के इंटेंट को लेकर सवाल उठते हैं चाइना और इंडिया
ऑफिशियल तो नो फर्स्ट यूज पॉलिसी मेंटेन करते हैं लेकिन पाकिस्तान ने आज तक इस पर कोई पहल नहीं की जो उसके इंटेंशंस को दर्शाता है इसके अलावा पिछले कई सालों में चाइना द्वारा न्यूक्लियर मिसाइल्स को स्टोर करने के लिए एनोनिमस मिसाइल सिलोज बनाए जाने की भी खबरें आती रही हैं जो यह दिखाता है कि वह भी अपने न्यूक्लियर वेपंस के डेवलपमेंट में अग्रेसिव अप्रोच लेकर चल रहा है ऐसे में इंडिया के लिए इन चैलेंज के हिसाब से अपने न्यूक्लियर पॉलिसी को ट्वी करने की आवश्यकता है हालांकि हम आपको बता दें कि पाकिस्तान के कंपैरिजन में
इंडिया एक कदम आगे है क्योंकि इंडिया एक न्यूक्लियर ट्रायड नेशन है लेकिन पाकिस्तान अभी तक यह अचीव नहीं कर पाया है खैर इन दोनों देशों के अलावा एक और बड़ा न्यूक्लियर थ्रेट इंडिया के सामने आकर खड़ा हो जाता है और यह है नॉन स्टेट टेररिस्ट ग्रुप्स का पाकिस्तान और अफगानिस्तान में डोमिनेशन और राइज जी हां एक नेशन स्टेट हमेशा एक नॉन स्टेट एक्टर से ज्यादा ही रिस्पांसिबल होता है इंडिया के एक्सपर्ट्स को डर है कि कि जिस तरह से पाकिस्तान की पॉलिटिकल और इकोनॉमिक सिचुएशन खराब होती जा रही है और जिस प्रकार से वहां पाकिस्तान
तालिबान आईएसआईएस और लश्करए तयबा जैसे एंटी इंडिया टेरर ग्रुप्स रैपिड खुद को एक्सपें कर रहे हैं ये सिचुएशन भारत के लिए अलार्मिंग है ऐसा इसलिए क्योंकि अगर ये एक्टर्स कभी भी पाकिस्तानी न्यूक्लियर वेपन फैसिलिटी को अपने कब्जे में लेने में कामयाब हो जाते हैं तो उसका अंजाम काफी ज्यादा खतरनाक हो सकता है ऐसी सिचुएशन में कई बार इंडिया की न्यूक्लियर डॉक्ट्रिन यानी नो फर्स्ट यूज पॉलिसी को रिवाइज करने की भी डिबेट्स होती रही हैं चलिए इस डिबेट को भी हम समझते हैं इवैल्यूएशन ऑफ नो फर्स्ट यूज पॉलिसी दोस्तों सबसे पहले हम एनएफ यू के एडवांटेजेस
देखते हैं और समझते हैं कि हमें इस पॉलिसी को क्यों फॉलो करते रहना चाहिए सबसे पहला बेनिफिट तो यह है कि ये पॉलिसी हमें रिस्पांसिबल न्यूक्लियर पावर की तरह दुनिया के सामने प्रेजेंट करती है जिसके चलते ही हमारे साथ कई एनपीटी देशों ने सिविल न्यूक्लियर एग्रीमेंट्स किए हैं जबकि हम एक नॉन एनपीटी देश हैं इसके अलावा कुछ स्कॉलर्स दावा करते हैं कि इंडिया अगर एनएफ को लेकर स्ट्रिक्ट रहेगा तो एनर्जी जैसे ग्रुप्स की मेंबरशिप और यूएनएससी में परमानेंट सीट्स के हमारे दावे और भी मजबूत हो जाएंगे इसके अलावा एनएफ पॉलिसी आर्म रेस पर भी चेक
रखती है और एक पॉसिबल न्यूक्लियर वरफेन को रोकती है अब देखते हैं कि नो फर्स्ट यूज पॉलिसी के नुकसान क्या हैं सबसे पहला इशू तो यह है कि कई न्यूक्लियर स्टेट्स इंक्लूडिंग पाकिस्तान और यूएसए एनएफ यू को फॉलो नहीं करते हैं तो फिर इंडिया को इस डॉक्ट्रिन को फॉलो करने की क्या जरूरत है इसके अलावा एनएफ यू का एसिस्टेंसिया देता है क्योंकि हम न्यूक्लियर वेपन को एक एंटीडोट या डिटेरेंस की तरह नहीं यूज करते पाकिस्तान और चाइना के कॉन्टेक्स्ट में ये पॉलिसी इंडिया की पोजीशन को वीक बना सकती है पाकिस्तान सालों से इंडिया के खिलाफ
एक प्रॉक्सी वॉर चला रहा है और यह सब वह अपने न्यूक्लियर वेपन के दम पर करने की कोशिश करता है ऊपर से जब इंडिया एनएयर है तो पाकिस्तान जानता है कि इंडिया न्यूक्लियर वेपंस पहले यूज नहीं करेगा और और वो अपने प्रॉक्सी वॉर को बिना किसी बड़े चैलेंज के जारी रख पाता है अगर इंडिया एनएफ यू को गिव अप कर दे तो स्कॉलर्स का मानना है कि पाकिस्तान के प्रॉक्सी वॉर्स में कमी आ सकती है इन दोनों पक्षों को समझने के बाद हम ये कह सकते हैं कि इस इशू के ऊपर कोई भी डिसीजन एक
कंप्रिहेंसिव एनालिसिस ऑफ कॉस्ट एंड इफेक्ट के बाद ही हो सकता है इसके अलावा हमें चाइना फैक्टर को भी कंसीडर करना पड़ेगा जो खुद एनएफ यू पॉलिसी फॉलो करता है इंडिया का एनएफ यू को गिव अप करना चाइना को प्रवोक कर सकता है और शायद व खुद भी अपनी एनएफ यू पॉलिसी को गिव अप करके एग्रेसिवली अपने न्यूक्लियर वेपंस को इंक्रीज करने लगे जो पूरे साउथ एशिया के रीजनल पीस के लिए बड़ा खतरा बन सकता है स्टडी आईक्यू आईएस अब तैयारी हुई अफोर्डेबल