असलाम वालेकुम वेलकम टू क्लास नंबर फोर बैच नंबर 40 अच्छा जी अब आज से हम जो क्लास जो चीज हम शुरू कर रहे हैं जो आज हमारा टॉपिक है ये इस मार्केट की बैकबोन है बल्कि ये दुनिया का कोई भी काम है जब आप उसका मेन स्ट्रक्चर जब तक आप नहीं जानते ना मुकम्मल तौर पे किसी फील्ड का किसी भी डिपार्टमेंट का किस तरीके से वो काम कर रहा है उसका एक स्ट्रक्चर होता है पूरा अगर आपको वो नहीं पता तो फिर आप उसमें काम नहीं कर सकते ठीक है समझ नहीं सकते उसको यहां पे
भी अगर आप देखें इस मार्केट की जो बैकबोन है मैं आपको एक एग्जांपल दे देता हूं समझाने के लिए। ऐसा होता नहीं है। लेकिन आप एग्जांपल ज़हन में लाएंगे आपको समझ आ जाएगी। अक्सर हो भी जाता है। अतई डॉक्टर होते हैं। आप जाते हैं किसी डॉक्टर के पास। ठीक है? अब जो डॉक्टर आपको आपके आपके दिल का ऑपरेशन करता है ना खुदा ना खास्ता ऐसी कोई नौबत ना आए अल्लाह करे। लेकिन अगर कोई ऐसा मौका आता है या जो डॉक्टर्स आमतौर पे दिल के ऑपरेशन कर रहे होते हैं उनको एक-एक चीज का पता होता है।
ठीक है? दिल के कितने कौन सी वेन कहां पे है? कौन सा वाल्व किस जगह पे है, कितनी वेंस हैं, कहां पे ब्लड है, कहां पे नहीं है, यह सब चीजें एक डॉक्टर को पता होती है और वो स्ट्रक्चर होता है। कोई और डॉक्टर है या आप अक्सर आपने देखा होगा कुछ लोग हैं आप आपको कोई काम पड़ जाता है किसी डिपार्टमेंट में आप जाते हैं नादरा में जाते हैं। ठीक है? अब एक बंदा वहां पे अकाउंट्स में बैठा हुआ है। नादरा में काम करता है लेकिन उनके अकाउंट्स डिपार्टमेंट का है। आप उससे जाके पूछते
हैं जी मैंने फला कार्ड लेना है। मैंने बच्चों का बेफॉर्म बनवाना है। उसके लिए क्या चीज चाहिए होगी? अब वो बंदा उस उस वो जो बंदा है वो क्लेरिकल स्टाफ का है। ठीक है? वो एडमिन में है। अब वो क्या कहेगा वो अकाउंट्स में है। तो वो कहेगा कि नहीं मुझे नहीं पता। आप उसी डिपार्टमेंट से पूछे। उसकी वजह क्या है? क्योंकि वो उसका स्ट्रक्चर नहीं जानता। उसको पता नहीं है कि क्या-क्या रिक्वायरमेंट्स हैं। तो ये किसी भी फील्ड में होता है। ये जो फील्ड है ना फॉरेक्स ट्रेडिंग की ये अलग नहीं है किसी और
इस दुनिया से अलग नहीं है। आपको स्ट्रक्चर का पता होगा तो आप अच्छे तरीके से काम कर सकते हैं। बिल्कुल किसी किसी और डिपार्टमेंट की तरह। और अगर आपको स्ट्रक्चर का नहीं पता तो फिर आप कह लें। आपको नहीं पता चलेगा कुछ भी कि क्या हो रहा है क्या नहीं हो रहा। आमतौर पे लोग क्या कहते हैं के खास तौर पे नया बंदा ऐसी बात करता है जिसको बिल्कुल मार्केट का नहीं पता होता। वो कहता है जी आज गोल्ड पता नहीं क्या कर रहा है। ठीक है? या किसी भी मार्केट के बारे में कह देंगे
ये पता नहीं क्या कर रहा है। वो इसलिए नहीं पता क्योंकि आपको स्ट्रक्चर का नहीं पता ना इसलिए नहीं पता कि क्या कर रहा है। कोई भी वेव ऐसे नहीं है कि किसी ने बटन दबाया तो ऊपर चली गई। बटन दबाया तो नीचे आ गई। इस तरह नहीं है। ये हर चीज टेक्निकल चल रही होती है। स्ट्रक्चर के हिसाब से चल रही होती है और उसको फॉलो करती है मजबूती से। तो आज की क्लास जो हम स्टार्ट कर रहे हैं आज से इसमें हम तो अगली दो तीन क्लासेस मुसलसल स्ट्रक्चर के बारे में होंगी। जो
लोग इन पे तवज्जो रखेंगे उनको टेक्निकली मार्केट इन्हीं तीन क्लासेस में समझ आ जाएगी। अगली तीन क्लासेस में यानी आधा काम उनका समझ उनको आ जाएगा। फिर आ जाती है स्ट्रेटजीस यानी स्ट्रक्चर अलग चीज है। स्ट्रक्चर आपको पता होगा तो स्ट्रक्चर आपको बताएगा ट्रेंड की डायरेक्शन। मैं आपको इसकी थोड़ी सी एग्जांपल देता हूं यहीं पे। स्ट्रक्चर जो है ना वो आपको ये बताता है कि आपने किस डायरेक्शन में ट्रेड करनी है। ठीक है? इसका ये काम होता है। बस अब ये आपके सामने एक स्ट्रक्चर बन गया मार्केट का। अभी हम जब जाएंगे कैंडल्स पे जाएंगे
डिटेल से पढ़ेंगे तो चीज समझ आएगी। अब ये आपको कुछ बता रहा है। ठीक है? इससे आपको पता चलेगा कि आपकी डायरेक्शन क्या है? आपको जाना किस तरफ है? असल बात ये है स्ट्रेटजी फिर बाद में आएगी। दूसरे नंबर पे स्ट्रेटजी आ जाएगी। तीसरे नंबर पे फिर आपकी आ जाएगी रिस्क मैनेजमेंट जो कि हालांकि सबसे पहले वही होनी चाहिए। सबसे जरूरी चीज रिस्क मैनेजमेंट होती है। लेकिन हम उसको एंड पे जाके पढ़ेंगे। जब आपको स्ट्रेटजीज़ आ जाएंगी तो फिर मैं बताऊंगा कि अब इस आपने रिस्क कैसे लेना है। तो इसका पता होना बहुत जरूरी है।
क्लास नंबर वन में हमने इंट्रोडक्शन पढ़ा था फॉरेक्स मार्केट का। उसके बाद क्लास नंबर टू और थ्री में हमने बेसिक चीजें पढ़ी। जो हमने जो टूल्स यूज़ करने हैं इसके बारे में आपको बताया और उसका कहा था कि प्रैक्टिस कर दीजिएगा। जिन लोगों ने की है या वहां तक अभी प्रॉपर नहीं देख सके। आप लोग कोशिश जल्दी ना कीजिएगा कि आपको यह ना फील आए कि हमने वो चीज अभी मुझे अभी पूरा ट्रेडिंग व्यू यूज़ करना नहीं आया। तो ये नेक्स्ट क्लास आ गई है। एक तो हम स्लो चल रहे हैं। आगे भी स्लो ही
चलेंगे और एक-एक चीज़ इंशा्लाह कवर करेंगे आराम से ध्यान से। बिल्कुल। चलिए जी इसको अब शुरू करते हैं। सबसे पहले आपको पता होना चाहिए कैंडल क्या होती है? यह जो आपको इसमें यह जो कैंडल्स नजर आ रही हैं इस कैंडल की फॉर्मेशन आपको पता होनी चाहिए कि ये कैंडल बनती कैसे है? क्यों बनती है, कहां पे बनती है? ये सब चीजें आपको पता होनी चाहिए। देखिए जी टाइम फ्रेम का आपको बताया था। अब ये मैंने क्लिक किया हुआ है वन ऑवर पे। इसका मतलब यह है कि एक कैंडल 1 घंटे में कंप्लीट होगी। अभी जो
कैंडल खत्म हो चल रही है इस वक्त जो रनिंग कैंडल है ये रनिंग कैंडल में अभी 20 मिनट और 14 सेकंड 15 सेकंड बाकी है। 20 मिनट बाद ये कैंडल कंप्लीट हो जाएगी। नई कैंडल स्टार्ट हो जाएगी। अब इस कैंडल में नीचे एक विक आई हुई है। यह देखें ना यार लाइंस ना लगाया करें भाई। आपको पता नहीं कौन सी जुबान यार समझ आती है। मुझे तो नहीं समझ आती। लाइंस लगा के क्या करना है आपने? सारा दिन ऑन करे वहां पे लगाए लेने। ये जो कैंडल बनी है। अब देखिए इससे जो प्रीवियस कैंडल थी
7:00 बजे वाली। इस पे भी ऊपर भी एक विक है। इसके नीचे भी एक विक है। तो इस विक का क्या मतलब है? यह ग्रीन कैंडल है। इसके ऊपर एक बड़ी विक आ रही है। इसके नीचे विक थी। इन विक्स का क्या मतलब होता है? पहले यह समझ लें। उसके बाद फिर आपको बेसिक स्ट्रक्चर समझा देता हूं मैं। अच्छा जी ये कैसे बनती है? हम यहां पे बना लेते हैं। अभी पहले हम बनाते हैं एक ग्रीन कैंडल। ठीक है जी? अब हम बनाते हैं एक रेड कैंडल। एक बात तो आप याद रखें कि आप जब
ट्रेडिंग व्यू की सेटिंग्स में जाएंगे तब कल सेटिंग्स बताई थी। यहां पे 20 सेटिंग्स होती हैं। है ना? यहां पर भी सेटिंग्स यह भी सेटिंग्स आ रही है। यह वाली सेटिंग्स जब आप यहां पर जाएंगे आप चाह तो इनके कलर्स चेंज कर सकते हैं। बाय डिफॉल्ट क्या होता है? जब आप ट्रेडिंग व्यू फर्स्ट टाइम ओपन करते हैं तो बाय डिफॉल्ट जो ग्रीन कलर की कैंडल्स होती हैं ये वाली कैंडल्स इनका मतलब क्या होता है? इस इस कैंडल में इस घंटे के दौरान प्राइसेस ऊपर गई हैं। और जो रेड कैंडल्स होती हैं, जैसे कि यह कैंडल
है, जैसे कि यह कैंडल है, इसका मतलब यह होता है कि इस 1 घंटे के दौरान घंटे के दौरान नहीं जो भी टाइम फ्रेम यहां पे ऊपर है, ओपन किया हुआ है। आपने वन ऑवर ओपन किया हुआ है, इसका मतलब है कि एक कैंडल 1 घंटे की है। तो, इस 1 घंटे के दौरान प्राइसेस नीचे गई हैं। रेड कैंडल का मतलब है कि प्राइसेस नीचे गई हैं। रेट कम हुआ है। ग्रीन कैंडल का मतलब है कि प्राइसेस ऊपर गई हैं। ये बात तो यानी एक नए बंदे को भी पता होती है आमतौर पे। अच्छा। अच्छा
अब आप चाहें तो इनके कलर चेंज कर सकते हैं। अपने चार्ट का बैकग्राउंड चेंज कर सकते हैं। कैंडल्स का कलर चेंज कर सकते हैं। वो आपको सब सेटिंग में मिल जाएगा। लेकिन बाय डिफॉल्ट ग्रीन को हम कहते हैं कि ये बुलिश है और रेड को हम कहते हैं कि ये बियरिश है। अच्छा जी। अब विक्स कैसे बनती है? विक्स क्यों बनती है? इसकी एग्जांपल देखें। हम यहां से स्टार्ट करते हैं कि एक मार्केट है जो कि सुबह को ओपन होती है 9:00 बजे। ठीक है जी। सुबह को 9:00 am पे मार्केट ओपन हुई है। दिन
है जी हमारे पास 10 तारीख। कोई भी महीना रैंडम कोई भी मंथ है 10 तारीख को सुबह मार्केट 9:00 बजे ओपन पे। ग्रीन कैंडल का क्या मतलब है? ग्रीन कैंडल की जो ओपनिंग होती है हमेशा इसे कहते हैं कि यह इसका ओपन है। जो इसकी बॉडी होती है ना बॉडी का जो लो होता है इसकी लोअर बॉडी जो है ये वाली ये जो कॉर्नर बन रहा है इसे हम कहते हैं कि ये ग्रीन कैंडल का ओपन है। अब मुझे कैसे पता चला कि ओपन यहां पे हुआ है? ओपनिंग प्राइस ये क्यों है? चल जी हम
कहते हैं कि ओपनिंग प्राइस जो थी वो थी ₹100। कोई भी स्टॉक है। मैं इसमें गोल्ड की बात नहीं कर रहा। एक स्टॉक है कि जब 10 तारीख को मार्केट सुबह 9:00 बजे ओपन हुई तो उस स्टॉक का रेट था ₹100। ठीक है जी। अब 9:00 बजे मार्केट ओपन हुई है। 10:00 बजे प्राइस गई है नीचे। 10:00 बजे चली गई है या पौ:45 चली गई है या 11:00 बजे गई है। इसे मैटर नहीं करता। लेकिन इसका इंप्रेशन क्या है कि प्राइस पहले गई है नीचे। तो ये जो विक आ रही है ना ये विक ये
बता रही है कि प्राइस यहां तक आई थी। इस एक दिन के दौरान डेली की कैंडल है। इसमें प्राइस यहां तक आई थी। अगर हम इसको कहते हैं कि यह डेली की कैंडल नहीं है। 1 ऑवर की कैंडल है। तो 9:00 बजे कैंडल ये ओपन हुई। 9:00 बजे 9:15 पे 9:20 तक प्राइस यहां पहुंच चुकी थी। ठीक है? ये रेट क्या है? ये हम कहते हैं जी रेट था यहां पे 90। ठीक हो गया? अब प्राइस ने यहां से बुलिश प्रेशर लेना शुरू कर दिया। ऊपर जाना शुरू कर दिया। ऊपर जाते-जाते चलिए हम घंटे की
बात ही कर लेते हैं। 9:00 बजे ओपन हुई है। 9:15 पे यहां पे थी। 9:15 पे प्राइस ₹90 पे आ गई। उसके बाद यहां पहुंच गई। फिर ऊपर जाते-जाते जाते इस जगह तक आई प्राइस। ठीक है? ठीक है? ये अब क्या टाइम था? हम कहते हैं जी 9:40 था। 9:40 पे प्राइस यहां रखी और 10:00 बजे क्योंकि 1 घंटे की कैंडल है। 9:00 बजे प्राइस ओपन हुई थी और 10:00 बजे इसको 10:00 PM यहां पे 10 am कर देते हैं। 10 am इसको क्लोज होना था। ठीक है? तो जब 10:00 बजे सुबह के तो प्राइस
उस वक्त कहां थी? प्राइस थी जी इस जगह पे इस लेवल पे। यहां पे थी प्राइस। यह रेट था ₹100। कम हो के ₹90 पे आया। बढ़ते हुए बढ़ते हुए यह चला गया जी ₹200 पे। फॉर एग्जांपल और प्राइस क्रॉस कहां पे हुई? क्लोज हुई इस जगह पे। यहां पे क्या रेट था? यहां पे रेट था। फॉर एग्जांपल हम कहते हैं जी यहां पे रेट था 170। अब इसने इस एक कैंडल ने आपको चार प्राइसेस दिए हैं। इस एक कैंडल ने आपको चार प्राइसेस दिए हैं। जिसमें से इसको कहते हैं ओपनिंग प्राइस। अब मुझे कैसे
पता चला कि ये कैंडल यहां से ओपन हुई थी कि यहां से हुई थी। ये एक कॉमन सेंस की चीज है। एक ऑब्वियस चीज है कि अगर प्राइस बुलिश है यानी ग्रीन कैंडल बनी है। इसका मतलब क्या है? कि प्राइसेस ओपन होने के बाद ऊपर गई है। तभी ग्रीन कैंडल बनी है ना। अगर ओपन हो के नीचे आती तो कौन सी कैंडल बनती? रेड कैंडल बनती। इस 1 घंटे में प्राइस बढ़ी है। तो जब बढ़ी है इसका मतलब है कि नीचे से शुरू हुई है। ₹100 से या ₹10 से या ₹50 से किसी लोअर प्राइस
से शुरू हुई है और हायर प्राइस पे जाके क्लोज हुई है। तो आपको चार प्राइसेस नजर आ रही है। पहली प्राइस नजर आ रही है ₹100 की। क्या टाइम था? 9:00 बजे। ठीक है जी। 9:15 पे प्राइस क्या थी? ₹90। दो प्राइसेस हो गई। पहली ₹100 आ गई। दूसरी ₹90 आ गई। अब इसको क्या कहेंगे? यह तो थी ओपन। इसको क्या कहेंगे? ठीक है? अब यह तो ओपनिंग प्राइस नहीं थी। यह थी इसका लो। लो। ठीक है जी। ओपनिंग प्राइस यह इसका लो था इस इस घंटे का। उसके बाद प्राइस यहां से बढ़ना शुरू करती
है। बढ़ते-पढ़ते प्राइस चली जाती है 200 तक। अब देखें इसने प्राइस ₹100 से कम हो के 90 पे आई। लेकिन 90 पे रुकी नहीं। इसने यहां पे स्टे नहीं किया। क्लोजिंग नहीं दी बल्कि यहां से रिजेक्ट हुई। ऊपर जाना शुरू कर दिया। ऊपर जाके ₹200 तक गई। लेकिन यहां पे भी इसने स्टे नहीं किया। स्टे करने से मुराद यह क्लोज नहीं की इस जगह पे भी। यानी घंटा पूरा होने से पहले प्राइस यहां पे क्लोज नहीं हुई। बल्कि 9:40 पे यहां तक पहुंची और यहां से फिर रिजेक्ट होते-होते नीचे आई। और यहां पे जब पहुंची
तो 10:00 बज गए। ठीक है? 10:00 बज चुके थे। यहां पे प्राइस क्लोज हो गई। ठीक है? अब चार प्राइसेस कैसे मिली आपको? पहली मिली आपको ओपन। दूसरी मिली लो। तीसरी मिली हाई। यह इसका हाई था इस दौरान। इसने हाईएस्ट प्राइस ये लगाई। इसको कहते हैं हाई। और इसको कहते हैं क्लोज। ठीक है जी। प्राइस क्लोज कहां पे होती है? ओपन कहां पे होती है? लोअर बॉडी पे। अगर बुलिश कैंडल है, अप कैंडल है तो ओपन कहां पे होगी? लो से। इससे अपने ओपनिंग होगी यहां से लोअर बॉडी से। और क्लोजिंग कहां पे हो रही
है? अपर बॉडी पे इस जगह पे आके और जो यह है इसको हम कहेंगे इस कैंडल का हाई था और यह इस कैंडल का लो था। ठीक है? बिल्कुल एक सिंपल सा कांसेप्ट है। अभी अब आपको पता चल गया होगा कि विक्स क्यों बनती हैं? विक्स इसलिए बनती है विक आपको यह बता रही होती है कि प्राइस ने इस 1 घंटे के दौरान कौन-कौन सी लेवल्स को टच किया। ये तो हमें पता चल गया ओपनिंग का लेवल है। यह पता चल गया क्लोज यहां पे हो गई है। लेकिन इसी 1 घंटे के दौरान प्राइस ₹100
से कम हो के 90 तक भी आई थी। तो यह विक आपको यह बता रही है। इसका शैडो है। इसको कहते हैं शैडो। विक भी कहते हैं, शैडो भी कहते हैं। यह इसका साया है कि या इसका फिंगरप्रिंट है ठीक है? फुटप्रिंट कह लें। ये इसका फुटप्रिंट है कि प्राइस यहां तक आई थी और यहां से फिर गई है। तो जैसे कोई अच्छी जगह पे आप चलते हैं पुराने जमाने में देखते थे ना लोग फुटप्रिंट्स को देख के कि यहां पे अभी घोड़े गुजरे हैं। अभी यहां से बंदे गुजरे हैं। इतनी देर पहले गुजरे हैं।
तो ये एग्जैक्ट वही फुटप्रिंट्स हैं स्मार्ट मनी के या किसी भी मार्केट के कि प्राइस यहां तक आई थी और फिर यहां से ऊपर उठ गई थी। तो आपको पता चल गया किसी एक घंटे में ये एक्टिविटी हुई है। फिर प्राइस यहां से उठी और इस हाई तक आई। यह भी आपको कैसे पता चल रहा है? हमें तो नहीं पता चलता क्योंकि क्लज़ तो प्राइस यहां पे हुई है। तो यहां तक आई थी। यह कैसे पता चला? इस वीक से कि प्राइस यहां तक आई थी लेकिन क्लज़ होने से पहले वापस नीचे चली गई। तो
यह भी आपको एक फुटप्रिंट मिल गया। इस फुटप्रिंट को हम कहते हैं विक। ठीक है जी। अच्छा अब हम आ जाते हैं दूसरी कैंडल पे। यह इसलिए बता रहा हूं देखने में तो ये कॉमन सी चीज है। आम लोगों को पता होती है। लेकिन मैंने ऐसा भी देखा है लोगों को कई-क साल हो जाते हैं उनको विक कैसे बनती है, क्यों बनती है नहीं पता होता। मैंने टेक्निकल रीज़न नहीं पता होती। अच्छा इसके बाद या ये नहीं पता होता कि इस कैंडल की ओपनिंग कहां से हुई है। कंफ्यूज रहते हैं। तो आपने याद रखना है
कि जो भी कैंडल जिसमें प्राइसेस ऊपर गई है, उसकी ओपनिंग कहां से होती है? उसकी बॉडी के लो से, लोअर बॉडी से। ठीक है जी? ये है इसका लोएस्ट पॉइंट। अब आ जाते हैं हम इस कैंडल पे। अब इसमें प्राइसेस गई हैं इस एक घंटे के दौरान नीचे। ठीक है? चलिए, यह हमने घंटे की एग्जांपल की है। इसकी यह हम डेली की एग्जांपल ले लेते हैं। दिन की ले लेते हैं पूरे दिन की। अब इसमें प्राइस नीचे आई हैं। इसका मतलब क्या था कि अगर रेड कैंडल बनी है, बेरिश मूवमेंट हुई है, तो प्राइस ओपन
कहां से हुई होगी? जाहिर है यहां से ओपन हुई है। जहां से इसकी पॉट शो कर रहा है। ठीक है? तो इसको हम क्या कहेंगे? जी ये इसकी है ओपनिंग प्राइस। अब देखिए इस बुलिश में और बलिश में क्या फर्क है? इसका ओपन लिखा हुआ है यहां पे। नीचे। इसका ओपन यहां पे ऊपर है। इसको हम कर देते हैं जी ओपन। ठीक है? ठीक है? आज मेरे पास असल में वो पैड नहीं है। मैं जरा पा रहा हूं। इस वजह से थोड़ा सा ये साफ नहीं लिखा जा रहा। अच्छा जी। ये है जी इसका ओपन।
ये ये टाइम क्या है? टाइम है जी ये सुबह 9:00 बजे का 9:00 am ठीक है। अच्छा 12:00 बजे तक प्राइस यहां पहुंच जाती है। रेट यहां पे क्या था? ₹100। 12:00 बजे क्या रेट चल रहा है? उसी प्रोडक्ट का सेम प्रोडक्ट का दिन 12:00 बजे क्या रेट है? ठीक है जी। क्या रेट है? फॉर एग्जांपल रेट है जी ₹150। ठीक हो गया। अच्छा अब 12:00 के बाद प्राइस 4:00 बजे शाम को यहां पर है। शाम 4:00 बजे प्राइस है जी इस जगह पे। यह है 4 PM ठीक हो गया। 4 PM प्राइस कहां पे
है? प्राइस आ गई है जी ₹20 पे। बहुत कम हो गई है। लेकिन अभी मार्केट क्लोज होती है 5:00 बजे। तो क्लोजिंग से पहले पहले प्राइस पहुंच गई यहां पे। यहां पे क्या रेट है? कोई भी रेट रख लेते हैं। हम कहते हैं जी यहां पे रेट है ₹40। यह टाइम क्या है? 5 am 5 pm सॉरी शाम के 5:00 बजे जब मार्केट क्लोज हुई है तो सुबह जब मार्केट खुली तो रेट था उस प्रोडक्ट का ₹100 ठीक है जब बंद हुई तो रेट क्या था ₹40 यह तो सिंपल है ये इसकी ओपन प्राइस ये
इसकी क्लोजिंग प्राइस तो एक दिन में प्राइस कहां तक गई ₹100 से गिर के आ गई ₹40 पे ये इसका हत्मी हतमी चीज यह है लेकिन इस दौरान और एक्टिविटी भी हुई है वो एक्टिविटी क्या थी कि 9:00 से लेके शाम 5:00 बजे तक प्राइस एक दफा 150 पे भी गई है जब इतने अच्छे रेट पे गई है लोगों ने बेच दिया होगा ठीक है लेकिन इसी दौरान प्राइस शाम 4:00 बजे इस रेट पे भी आई थी कम तरीन रेट पे भी आई थी ₹20 पे। तो यहां से लोगों ने खरीदा भी होगा। तो यहां
से लोगों ने बेचा था। उस बेचने की वजह से रिजेक्शन आई। यह जो वीक है यह बता रही है कि ऊपर से रिजेक्शन थी। रिजेक्शन आ गई। प्राइस नीचे ड्रॉप कर गई। जब शाम 4:00 बजे प्राइस यहां पे आई थी। यहां से लोगों ने खरीदा था। प्राइस नीचे गिर रही थी। नीचे आ रही थी तेजी से। लोगों ने धराधड़ खरीदना शुरू कर दिया कि बहुत अच्छा रेट मिल रहा है। उससे रिजेक्शन आई। प्राइस यहां तक पहुंच गई। बढ़ के ₹40 हो गई। तो ये कांसेप्ट होता है कि कैंडल बनती कैसे है? कहां पे ओपन होता
है? कहां पे क्लज़ होता है? उसका हाई लो क्या होता है? हाई लो दोनों का सेम है। ग्रीन कैंडल का भी ये हाई था। ऊपर ऊपर वाली वीक इसका भी यह हाई है क्योंकि हाईएस्ट प्राइस यही है इस पूरे चार्ट पे और इसका लो यह इसका लोएस्ट प्राइस है इसको कहते हैं लो ठीक है यह लो यह हाई यह ओपन ये क्लोज इसको कहेंगे क्लोज ये क्लोज अब उम्मीद है कि आपको समझ आ गई होगी कैंडल फॉर्मेशन क्या होती है ठीक है जी कैंडल इस तरीके से बनती है अच्छा अब हम चलते हैं जी आगे
अपने स्ट्रक्चर की तरफ एक मुझे बात बता दें कि जो अभी कांसेप्ट आपको दिया है इसकी कोई समझ आई है क्योंकि अगर आपको यह नहीं पता कैंडल कैसे बन रही है मुझे यस नो कर दें यह चीज क्लियर है ना? सिंपल है। चले ठीक है। जी सब कह रहे हैं कि ठीक है। समझ आ गई है। आगे चलते हैं। जी अब अच्छा अब आपने जो चीज हम स्टार्ट करेंगे पहली चीज वो मैं आपको यहां पे लिख देता हूं। इस मार्केट में कोई भी जब वेव आती है। ठीक है? प्राइसेस ऊपर जाती हैं या प्राइसेस नीचे
आती हैं तो दो तरह की वेव्स चलती हैं। इस मार्केट में दो तरह की वेव्स होती हैं। याद रखें चीजें बेशक नोट करना चाहते हैं साथ-साथ जब रिकॉर्डिंग देखेंगे नोट कर लीजिएगा। पहली जो वेव होती है उसे कहते हैं इंपल्स वेव। इंपल्स वेव। इंपल्स वेव क्या होती है? इंपल्स वेव ऐसी वेव को कहते हैं। इंपल्स क्या होता है? ताकत वाली वेव जो होती है ना उसको इंपल्स वेव कहते हैं। ठीक है? स्ट्रांग वेव को इंपल्स वेव कहते हैं। जो दूसरी तरह की वेव होती है उसको आप कह सकते हैं रिट्रेसमेंट या इसको करेक्शन भी कहते
हैं। करेक्शन और होती है, रिट्रेसमेंट और होती है। हल्का सा फर्क होता है आपको वैसे मैं बता दूंगा। ठीक है जी? दो तरह की वेव्स होती हैं। एक वेव को आप कहते हैं इंपल्स वेव, दूसरी को आप कहते हैं रिट्रेसमेंट। ठीक है? रिट्रेसमेंट जो लोग करेक्शन और रिट्रेसमेंट को एक ही चीज़ कहते हैं, उनको मैं आपको बताऊंगा। इसमें फर्क होता है। एक छोटा सा मामूली सा फर्क होता है। आपने इंपल्स वेव और रिट्रेसमेंट ही याद रखना है। ठीक है जी? अच्छा अब हम चलते हैं कि इंपल्स वेव क्या होती है? देखें जब भी मार्केट ऊपर
नीचे मूव कर रही है किसी भी तरफ तो ये जैसे प्राइस इस जगह पे आके रुक गई थी ऊपर जाती चले इसको मैं ग्रीन कर लेता हूं। प्राइसेस जो है वो ग्रीन कैंडल्स बन रही हैं इस तरह। ठीक है? ग्रीन कैंडल्स बन रही हैं। अब ये पूरी एक वेव चल रही है। उसके बाद एक रिट्रेसमेंट आती है। प्राइस थोड़ा सा नीचे आती हैं। ठीक है जी। अच्छा उसके बाद प्राइस फिर ऊपर निकल जाती है। अच्छा अब आप मुझे बताएं कि इसमें से इंपल्स वेव कौन सी है? अपने जे ज़हन में सोचें बस इंपल्स वेव कौन
सी है? याद रखें इंपल्स वेव हमेशा वो होती है जो किसी भी लेवल का किसी भी स्ट्रक्चर का ब्रेकआउट करती है। उसको हम कहते हैं कि ये इंपल्स वेव है। ठीक है? अब यहां से देखें प्राइसेस ऊपर जा रही थी। ऊपर जाने के बाद प्राइसेस नीचे आई। नीचे आने के बाद ये एक हमारे पास लेवल बन गया था। इसको कहते हैं रेजिस्टेंस। ठीक है? रेजिस्टेंस से क्या मुराद है? अब रेजिस्टेंस एक ऐसी चीज को अभी हम सपोर्ट रेजिस्टेंस नहीं पढ़ वैसे आपको बता रहा हूं क्योंकि मैं इस तरह लेके चल रहा हूं इस कोर्स को
कि जैसे एक आप बिलकुल नए बंदे हैं। आप बिलकुल आज ही आए हैं। आपको नहीं पता फॉरेस्ट ट्रेडिंग के बारे में। इसको कहते हैं इस लेवल को रेजिस्टेंस। रेजिस्टेंस से क्या मुराद है? रेजिस्टेंस कहते हैं मुज़हमत को। ठीक है? आप जैसे अभी कोई एक फौज है वो किसी जगह पे हमला करती है। आगे से भरपूर जगह भी हमला होता है। उसको कहा जाता है रेजिस्टेंस। तो यहां पे आप ये समझें कि बयरर्स की फौज थी जो कि ऊपर जाना चाह रही है। लेकिन उनको नीचे से खेला जाता है। वापस से खेला जाता है। उसको कहते
हैं कि प्राइस को रेजिस्टेंस मिली है। ठीक हो गया जी। जब भी प्राइस गिरेगी, जब भी किसी लेवल से प्राइस नीचे आएगी, ऊपर जाते हुए किसी भी लेवल से प्राइस नीचे आएगी। जैसे यहां से भी नीचे आई, यहां से भी थोड़ी सी नीचे आई। यहां से भी नीचे आई, यहां से भी नीचे आई। जब भी प्राइस गिरेगी, चाहे वो कोई भी पेयर है, चाहे वो कोई भी स्टॉक है, जब भी प्राइसेस गिरेंगी, उसको हम कहते हैं कि ये प्राइसेस रेजिस्ट हुई हैं। ठीक है? प्राइसेस में रेजिस्टेंस आई है। इसको कहते हैं रेजिस्टेंस। और जब भी
प्राइस ऊपर जाएगी, जब भी प्राइस ऊपर उठेगी, जिस लेवल से उठेगी, उसको हम कहते हैं कि ये सपोर्ट का लेवल है। ये सपोर्ट है। ठीक है? अब यह नहीं है कि प्राइसेस अगर नीचे आ रही हैं तो अब आप कहेंगे कि जी अब चेंज हो गया यह रेजिस्टेंस है और यह सपोर्ट वो तो है ही यह रेजिस्टेंस है और यह सपोर्ट है क्योंकि नीचे आते हुए प्राइस को यहां से रेजिस्टेंस मिली प्राइस ऊपर चली गई फिर नीचे आने की कोशिश कर रही थी रेजिस्टेंस मिली फिर ऊपर चली गई ऐसा नहीं है ये गलत कांसेप्ट है
बिल्कुल कुछ लोग कर जाते हैं इस तरह की हरकत ये गलत चीज है हमेशा जो भी ट्रेंड है प्राइसेस चाहे बुलिश ट्रेंड के हैं चाहे प्राइसेस डाउन ट्रेंड में है जब भी प्राइस कहीं से गिरेगी उसको कहेंगे रेजिस्टेंस और जब भी कहीं से उठेगी चाहे कम उठी है चाहे ज्यादा उठी है ठीक है उसको कहेंगे कि यह क्या है सपोर्ट सपोर्ट ठीक हो गया। इसको यहां पे एक दफा जो लोग नए हैं आप लोग एक दफा इसको देख भी लें। ये है पहला जो वर्ड आपको बताया वो है रेजिस्टेंस। ठीक है? बल्कि आपको अभी आप
ये R और S याद रखें। ठीक है? क्योंकि हम पूरा टॉपिक पढ़ेंगे। उसमें आपको डिटेल से बताऊंगा। ऐसे नो कंफ्यूजन आ जाए बीच में कि सपोर्ट रेिस्टेंस पढ़ रहे हैं। रेजिस्टेंस जहां से प्राइस गिरेगी, सपोर्ट जहां से प्राइस उठेगी। बस इतनी बात अभी आप याद रखें। RS अच्छा अब चलते हैं जी हम वापस अपनी इंपल्स वेव पे। देखें जी दो तरह की होती हैं वेव्स। पहली वेव वह होती है कि जो एक स्ट्रांग वेव लगती है उसके बाद प्राइसेस रेजिस्टेंस लेती हैं। थोड़ा सा नीचे आती हैं। ठीक हो गया? फिर प्राइस चली जाती है ऊपर।
तो ऐसी वेव जो किसी स्ट्रक्चर का ब्रेक करती है, किसी रेजिस्टेंस को ब्रेक करती है, उसको हम कहते हैं कि यह इंपल्स वेव है। और जो ऐसी वेव जो एक स्ट्रांग वेव के बाद छोटी सी रिट्रेसमेंट आती है या प्राइसेस करेक्ट करती हैं, खुद को थोड़ा सा नीचे आती है, किसी लेवल को टैप करती हैं, इसको हम कहते हैं कि ये रिट्रेसमेंट है। ठीक है? ठीक है? ये इंपल्स वेव है जो स्ट्रंग है और जो नीचे हल्की सी आ रही है थोड़ी सी नीचे आती है इसके 50% तक आती है आमतौर पे और यहां से
फिर ऊपर चली जाती है। इसको हम कहते हैं कि ये रिट्रेसमेंट है जो छोटी वाली वेव है और जो स्टंग वेव है जिसने स्ट्रक्चर ब्रेक किया है इसको हम कहते हैं कि ये इंपल्स वेव है। पहली बात तो आपने इंपल्स वेव और रिट्रेसमेंट का फर्क याद रखना है। इनके नाम याद रखना है। चल जी अब हम आ जाते हैं अपने टॉपिक पे जो हम बकायदा शुरू करने लगे हैं। बिल्कुल आसान सा टॉपिक होगा। दो-तीन चीजें आपको बताऊंगा। जिसकी बेस अब अच्छी बन गई उसके लिए अगला सफर पूरा आसान है। जिसकी बेस ना बनी। अब इन
दिनों में थोड़ा सा रिलैक्स हो गया। उसके लिए मशाल और परेशानी है। क्लासेस को रिपीट लाजमी करना है आपने। चल जी। सबसे पहले हम बनाते हैं एक एक स्ट्रक्चर बन गया ये। ठीक है जी। एक स्ट्रक्चर और बनाते हैं। ठीक है जी। अच्छा मार्केट की जो मूवमेंट होती है वह होती है तीन तरह से। आमतौर पर मार्केट इन्हीं तीन में से आपको आम तौर पर नहीं हमेशा इन्हीं तीन फसे में से किसी एक फज़ में मिलेगी। ठीक है जी। आमतौर पे किस में मिलेगी वो भी बता देता हूं। आमतौर पे आपको मार्केट मिलेगी इस फज़
में। इस वाले फज़ में ज्यादा वक्त मार्केट इसी में रहती है। ठीक है? ये क्या है? इसको कहते हैं ये ये कौन सा ट्रेंड है? मैं आपको मार्केट ट्रेंड पढ़ाने लगा हूं। भी तीन तरह के दो तरह के ट्रेंड्स होते हैं। एक ट्रेंड होता है जी जिसमें प्राइसेस मुसलसल ऊपर जा रही होती हैं। मुसलसल ऊपर जा रही होती हैं। अब मुसलसल ऊपर जाने से मतलब ये है ना कि प्राइसेस ऐसे जा रही होती हैं। ऐसे कभी भी प्राइस नहीं जाती। ठीक है? प्राइसेस कैसे मूव करती हैं? प्राइसेस मूव करती हैं इस तरीके से। इंपल्स वेव
लगती है। फिर एक रिट्रेसमेंट आती है। फिर एक इंपल्स वेव लगती है। ये इसने स्ट्रक्चर ब्रेक कर दिया पूरा। ठीक है? फिर एक रिट्रेसमेंट आती है। फिर एक इंपल्स वेव लगती है। अब इसमें हो क्या रहा है? इसमें जो नोट करने वाली चीज़ है, वह नोट करें। नोट करने वाली चीज ये है कि प्राइस हर दफा जो भी लो लगाती है उसको सेव रखती है। उसको होल्ड करती है। देखिए ये ब्रेक नहीं हुआ। नीचे ब्रेक नहीं आया ना ये भी ब्रेक नहीं हुआ। ये भी ब्रेक नहीं हुआ। जो भी लो लग रहा है प्राइस उसको
होल्ड कर रही है। उसको ब्रेक नहीं कर रही। और जो भी हाई लग रहा है पहले एक ये हाई लगा। फिर ये हाई लगा हल्का सा। फिर एक ये बड़ा हाई लगा और फिर ये हाई लगा। तो आपने देखा कि प्राइसेस जो भी हाई लगाती हैं उसको ब्रेक कर जाती हैं। लो जितने भी लग रहे हैं उसको प्राइस होल्ड कर रही है। तो ऐसे ट्रेंड को हम कहते हैं कि ये हमारा बुलिश ट्रेंड है। टेक्निकल रीज़न क्या है? देखने में तो नजर आ रहा है प्राइसेस ऊपर जा रही हैं। किसी दूसरी क्लास के बच्चे को
पूछेंगे कि यहां पे कीमतें ऊपर जा रही है कि नीचे? वो ये एरो देख के और ये स्ट्रक्चर देख के बता देगा जी प्राइसेस ऊपर जा रही हैं। यहां पे वो बताएगा प्राइसेस नीचे आ रही हैं। लेकिन टेक्निकल रीज़न क्या है? क्यों हमें कैसे पता कि ये प्राइसेस बुलिश हैं। तो बुलिश ऐसे हैं कि प्राइस अपना हर हाई ब्रेक कर रही है। ठीक है? ठीक है? जो भी हाई लेवल लगाती है उसको ब्रेक कर देती है। अपना ही रिकॉर्ड तोड़ देती है। तो इसको कहते हैं कि यह बुलिश है। ठीक है? और जब प्राइसेस अपना
लो ब्रेक करती रहती हैं। जैसे यह लो ब्रेक किया। फिर एक यह लो लगाया ये ब्रेक कर दिया। फिर ये लो लगाया ये भी ब्रेक कर दिया। ठीक हो गया? तो इसमें क्या हो रहा है कि हाई सब सेफ हैं। देखिए ये हाई सेफ है। ये भी हाई सेफ है। ठीक है? ये भी हाई सेफ है। ये भी हाई। ये दोनों एक ही है। ये मैं आपको बाद में बताऊंगा। आप कहेंगे ना कि ये हाई सेफ नहीं है। प्राइस ऊपर गई है इसके। तो यह इसको टॉपिक को अभी छोड़ते हैं। अभी आपको पता ही नहीं
है हाई है कौन सा। असल में तो यह हाई माना नहीं जाएगा। जब तक प्राइस अपना लो ब्रेक नहीं करेगी। बहाल यह भी हमारा टॉपिक नहीं है। आप यह देखें कि हाई नहीं ब्रेक हो रहे। ठीक है? लो ब्रेक होते जा रहे हैं। यह भी लो ब्रेक, यह भी लो ब्रेक, यह भी लो ब्रेक। तो जब तक प्राइसेस अपने लो ब्रेक करती हुई, इसको हम कहेंगे कि यह बियरिश ट्रेंड है। अब इसके नाम जो लोग नए हैं आप लोग इसके नाम लिख लें। इस वाले ट्रेंड को कहते हैं बुलिश ट्रेंड। बुलिश ट्रेंड। ठीक हो गया?
और जो दूसरे वाला है, इसमें प्राइस नीचे आ रही हैं। इसको हम कहते हैं बयरिश ट्रेंड। उसको कहते हैं बरिश। बेरिश नहीं होता वर्ड बियरिश होता है। यह है बयरिश ट्रेंड। अच्छा इसको बुलिश क्यों कहते हैं? बुलिश जो वर्ड है यह निकला है बुल से। बुल कहते हैं बैल को। ठीक है? और बैल दो तरह से इसको बुलिश ट्रैंड कहते हैं। एक वजह इसकी होती है कि जब बैल हमला करता है अपने अपोनेंट पे अपने दुश्मन पे या जिस पे भी हमला करेगा उसको सींग मारता है और ऊपर की तरफ फेंकता है। आपने बुल फाइट
में ये देखा होगा कि जब वो हिट करता है किसी को सींग मारता है। अपने ऊपर की तरफ उछालता है उसको। हवा में उछालता है। तो आप देखिए यहां पे प्राइसेस ऊपर जा रही हैं। तो सिंबॉलिकली इसको बुलिश ट्रेंड कहा जाता है कि एक ऐसा ट्रेंड जिसमें बैल की तरह ऊपर उछाला जा रहा है। दूसरी वजह यह होती है कि जब बेल चलता है तो अपना सर उठा के चलता है। ऊपर देख के चलता है। तो उस तरीके से भी अगर आप सिंबॉलिक इसको देखें तो आपको पता चलता है कि इसको बरिश ट्रेंड। इस वजह
से कहा जाता है बुलिश ट्रेंड। अच्छा इधर जो है इसको कहते हैं जी बयरिश ट्रेंड। बियर नीचे आती हुई मार्केट को कहते हैं बयरिश। बयरिश मार्केट। बियरिश क्यों कहते हैं? बियर जो होता है रीच को कहते हैं। रीच जब मारता है तो रीच मारता है पंजा। ठीक है? अपना हाथ बाजू मारता है और अपोनेंट को नीचे गिराता है। जमीन पे गिराता है। तो उसी मुनासबत से गिरती हुई मार्केट को कहते हैं कि ये बयरिश ट्रेंड है। रीच से मुनासती है इसको। दो तरह की मार्केट्स हो गई और ये चलता भी ऐसे जब चलता है तो
सर नीचे रख के चलता है। तो ये दो वजूहात की वजह से इसको बियरिश ट्रेंड कहते हैं। इसको बुलिश ट्रेंड कहते हैं। उसके बाद जो तीसरी तरह की मार्केट की मूवमेंट होती है वो होती है साइडवेज। अब यहां पे देखें कोई हाई ब्रेक नहीं हो रहा। ये एक रेंज बन गई है। ठीक है? कोई हाई ब्रेक नहीं हो रहा, कोई लो ब्रेक नहीं हो यानी मार्केट जो है वो एक साइड पे मूवमेंट कर रही है। डिफरेंट सिनेरियोस बनाते हुए ऐसे मूव करती रहती है एक साइड पे। कोई अपना सिग्निफिकेंट कोई इसमें एक बड़ी मूव नहीं
आ रही होती। किसी एक साइड पे इसको हम क्या कहते हैं? इसके जो नाम है इसको आप दो तीन नाम आप दे सकते हैं। इसको इसको कैसे कहां से जा सकता है? साइडवेज मार्केट भी कहते हैं। साइडवेज इसके अलावा इसको रेंज भी कहा जा सकता है कि प्राइस रेंज कर रही है। ठीक है? जैसे सिलसिला होता है ना पहाड़ी सिलसिला उसको भी रेंज कहते हैं। माउंटेन रेंज। इसी तरीके से यह भी एक रेंज है। मार्केट की रेंज है। पूरी रेंज है। इसको कोई हाई लो डेफिनेट नहीं होता इस तरीके से। इसके अलावा इसको और क्या
कहते हैं? इसको समटाइ्स इसको हम जब मार्केट के फसेस पढ़ेंगे तो इसी तरह की मूवमेंट को एक्यूमुलेशन भी कहा जाता है। ऊपर जाने से पहले नीचे गिरने से पहले मार्केट की इस कंडीशन को डिस्ट्रीब्यूशन भी कहा जाता है। लेकिन वो जब हमारे टॉपिक्स आएंगे तब हम पढ़ेंगे। अभी आप रेंज भी याद रखें तो बहुत है। तो ये तीन तरह के मार्केट के मोड्स होते हैं। मार्केट आपको ज्यादातर रेंज की शक्ल में मिलती है। ठीक है? और सम होती ट्रेंड में है। यानी बुलिश ट्रेंड चल रहा होता है। लेकिन बुलिश ट्रेंड में रेंज स्टार्ट हो जाती
है। काफी देर चलती रहती है। फिर एक बुलिश वेव आती है। फिर रेंज स्टार्ट हो जाती है। फिर बुलिश वेव आती है। फिर रेंज स्टार्ट हो जाती है। ठीक हो गया? इसको हम क्या कहते हैं? इसका भी चल बेहतर नाम यहीं पे आप पढ़ लें। याद रख लें। ये कुछ काम की चीजें हैं। इसको थोड़ा साइड पे करते हैं। जब प्राइस ये वाले काम कर रही होती है। यानी बुलिश ट्रेंड में होती है। ठीक है जी। बुलिश ट्रेंड में आके रेंज शुरू कर देती है इस जगह पे। फिर ऊपर निकल जाती है। फिर किसी जगह
पर आती है यहां पर। फिर रेन स्टार्ट कर देती है। इस तरह फिर ऊपर निकल जाती है। इसका नाम याद रख लें क्योंकि ये वर्ड हम अक्सर यूज़ करेंगे। इसको हम कहते हैं जी जो ऊपर वाली वेव होती है ना इसको कहते हैं रैली। रैली। ठीक हो गया? उसके बाद जो यह वाला ज़ोन आता है जब प्राइस ऊपर जाने के बाद एक इंपल्स वेव इंपल्स वेव बताया था ना स्टंग वेव पे इंपल्स वेव कहते हैं। तो इंपल्स वेव लगाने के बाद प्राइस रेंज शुरू कर देती है। तो इस रेंज को हम कहते हैं कि ये
प्राइस ने अपनी बेस बनाई है। इसको कहते हैं बेस। ठीक हो गया? रैली बेस। उसके बाद फिर रैली। ये फिर रैली हुई है। रैली जैसा जीप रैली होती है। ये वो वर्ड है। आपने सुना होगा ना जीप रैलीज़ होती हैं। जिसमें रेस लगती है। गाड़ियां तेज चलती हैं। इसको ये वो रैली है। उसके बाद फिर बेस ये फिर बेस हो गई। और उसके बाद फिर रैली। इसको हम क्या कहते हैं? इसको हम कहते हैं रैली बेस रैली सेटअप। यानी रैली बेस रैली के प्राइस ऊपर जाती है, बेस बनाती है, एक और रैली रहती है। फिर
बेस फिर एक और रैली। तो इस ये आपने वर्ड्स याद रखने हैं क्योंकि ये यूज़ होते हैं ट्रेडिंग में। इसी तरीके से थोड़ा सा ऊपर बना लेते हैं। जब प्राइसेस होती हैं डाउन ट्रेंड में ड्रॉप देती हैं। फिर एक बेस बनती है। फिर ड्रॉप आता है। फिर एक बेस बनती है। ट्रेंड इस तरह कंटिन्यू करता है। फिर एक बेस बनती है। फिर ड्रॉप आता है। इसको हम क्या कहते हैं? इसको कहा जाता है जी ड्रॉप। ड्रॉप के बाद बेस और फिर ड्रॉप। इसको कहते हैं ड्रॉप बेस ड्रॉप। यह ड्रॉप फिर बेस फिर ड्रॉप। अब आपको
पता चल गया कि नीचे आती है मार्केट को कहते हैं ड्रॉप बेस ड्रॉप बना रही है मार्केट। ऊपर जाती हुई मार्केट को कहते हैं कि यह रैली बेस रैली। रैली बेस रैली बना रही है। समझ आ गई? यह बिल्कुल कॉमन से कुछ कांसेप्ट्स हैं जो आपको पता होना जरूरी है। चलिए जी यह चीज कंप्लीट हो गई। मेरे ख्याल इसको मुझे यह रिमूव कर देना चाहिए और हम नेक्स्ट चीज पे चलते हैं। इसको अब हम पहले बात करेंगे बुलिश ट्रेंड की। उसके बाद फिर हम बरिश टैंड पे आ जाएंगे। चले जी। अच्छा अब ये जो इंपॉर्टेंट
चीज आ रही है इसको आपने बहुत ध्यान से पढ़ना है। ये है जी हमारे पास एक बुलिश ट्रेंड। आपको कैसे पता चला बुलिश ट्रेंड है? आपको ऐसे पता चला कि प्राइस अपने हाई को ब्रेक करती हुई जा रही है। जो भी हाई लगाती है उसको इंपल्स वेव से ब्रेक करती है। फिर नया हाई लगता है। प्राइस नीचे आके इंपल्स वेव लगाती है। फिर हाई ब्रेक कर देती है। तो आपको पता चल गया कि यह एक बुलिश ट्रेंड है। अब इस बुलिश ट्रैंड की हम मार्किंग कैसे करेंगे? डिफरेंट इसको यानी हम छोटे टुकड़ों में कैसे तोड़ेंगे?
अब उसके लिए तरीका सुने देखें जी सबसे पहले यह था हमारा लो ठीक हो गया जी जब यह हमारा लो था तो ये कौन सा पॉइंट हुआ इसको क्या कहेंगे ये था हाई अभी आपने याद रखना है लोग इसमें बहुत कंफ्यूज होते हैं ये था हमारा हाई सिंपल सी बात है लो और हाई ठीक है ये क्या है ये कौन सा पॉइंट है याद रखें आपने किसी चक्कर में नहीं पड़ना आपने कहना है जी ये भी लो है देखिए ना प्राइस ने ये हाई लगाया था ना फिर एक और लो लगा दिया तो ये क्या
है इसको भी आप कहेंगे कि ये लो है। लेकिन अब मसला बन गया। मसला ये बन गया कि ये भी लो है तो फिर ये भी लो है। हमें कैसे पता चलेगा कि ये कौन सा लो है? ये यानी कैसे डिफरेंशिएट कैसे करेंगे? ठीक है? यानी दो भाई हैं। किसी बंदे के दो बच्चे हैं। वो दोनों का एक ही नाम रख देता है। इसका नाम भी लो है। इसका नाम भी लो है। अब एक को बुलाएगा दोनों बोलेंगे जी। जी पाजी। ठीक है? तो मसला बनेगा। अब इसके बचने के लिए तरीका ये है कि नाम
थोड़ा-थोड़ा चेंज कर देते हैं। ये लो है। ये क्या है? यह लो क्योंकि इससे थोड़ा सा ऊपर है। यह तो लो है। लेकिन जो अगला लो लगा है यह पिछले लो से हाई है। इसको हम कहेंगे कि यह हमारा हायर लो है। हायर लो। ठीक हो गया? आसान हो गया ना काम कि आपने सिर्फ हाई लो मार्क करना है। ये लो और ये हाई। फिर लो फिर हाई। ये भी हाई है। ये भी हाई है। ठीक हो गया? जैसे ये हाई था। ऐसे ही ये हाई है। अब फिर मसला आ गया कि कौन से वाले
को जब हम बात कर रहे होंगे तो कैसे समझेंगे? तो इसका मतलब क्या है? हम कहेंगे कि ये जो हाई है ये पीछे वाले हाई से ऊंचा है तो इसके साथ हम हायर लगा देंगे। यानी ऊंचे वाला हाई। समझ आ गई? लो हाई हायर लो हायर हाई। यानी हम क्या कर रहे हैं कि सिर्फ हाई और लो मार्क कर रहे हैं। लेकिन चकि ट्रेंड ऊपर जा रहा है। हायर साइड पे जा रहा है। तो फिर हम हर पॉइंट के साथ हायर का इजाफा कर देंगे। बस ये अब हायर लो बन गया। इससे ऊपर एक और
हाई था। अब इससे पीछे हम एक और हाई का हायर का इजाफा कर देंगे। तो ये क्या बन गया? अब इसको दोबारा देखें। लोगों को यह समझ नहीं आती कि हायर लो कहना है या लोअर हाई कहना है। लोअर हाई कहना है या हायर लो कहना है। पॉइंट का नाम क्या रखना है? तो आसान तरीका सुन लें। लो और हाई फिर लो फिर हाई। फिर लो सिंपल है। फिर हाई कितना आसान है। देखें अब करना क्या है कि पहले दो को छोड़ के लो हाई को छोड़ के। क्योंकि ये तो वाकई लो हाई हैं। इनके
अलावा जितने भी लो और हाई लग रहे हैं वो सब पीछे वाले पॉइंट से तो ऊंचे हैं। तो साथ हायर का वर्ड यूज़ कर लें। HL H फिर HL फिर H उससे पहले जो आप हाई लो मार्क करते हैं उससे पहले वर्ड ऐड कर देंगे एक तो ये क्या बन गया लोअर हाई हायर लो हायर हाई हायर लो हायर हाई सिंपल तरीके से आपने इसको छोटे पार्ट्स में कंप्लीट कर लिया समझ आ गई अच्छा अब इसी तरीके से मार्केट आती है नीचे डाउन आती है इसको मैं डिलीट कर दूं इसका मुझे जरा मैसेज में यस
नो कर दें इसके का्सप्ट की समझ आई है मैंने बिल्कुल आसान करके आपको बताया इस दफा तो कि हायर लो हायर हाई कैसे लगाना है? समझ आ गई है? चल बस मैं ज्यादा लंबा नहीं खींचूंगा इस काम को। आहिस्ताआहिस्ता सिंपल करके जो चीजें जरूरत है बस वो बताता रहूंगा आपको। अच्छा जी। अब आ जाते हैं इसको जरा डिलीट करते हैं। जो चीज मिस हो जाए कुछ रह जाए। हो सकता है किसी को आवाज दे दी। किसी ने किसी का बच्चा रो रहा है। तो कोई मसला नहीं है। रिकॉर्डिंग देखेंगे तब भी आपको सीधी समझ आएगी।
अब यहां पे देखें जी। अभी बेयरिश टैंड है। इसमें भी आपने कुछ भी नहीं पढ़ना कि हायर हाई क्या है? हायर लो क्या है? लोअर हाई क्या है? उसी में लोग फंसे रहते हैं कि लोअर हाई है या हायर लो है ये नहीं समझ आ रही होती तो क्या तरीकाकार है ये हाई था अब सिंपल हो जाएगा अब आप खुद कर लेंगे ये लो था ठीक है ये फिर हाई लग गया फिर लो लग गया फिर हाई लग गया फिर लो लग गया अब एक सिंपल सी चीज देखनी है कि ये जो लो था नेक्स्ट
लो इसके नीचे है ना लो साइड पे बना है तो आप एक और लोअर का इजाफा कर दें ये ले लोअर लो बन गया देखिए पता चल गया आपको यह भी हाई है लेकिन ये पॉइंट भी हाई है यह भी हाई था यह भी हाई है लेकिन यह वाला हाई नीचे है लोअर साइड पे है तो आप एक एल का इजाफा कर दें। लोअर हाई बन गया। फिर लोअर लो। फिर एक और एल का इजाफा कर दें। लोअर हाई फिर लोअर लो। इतना सिंपल है ये। इसमें लोग 6-6 महीने लगा देते हैं। ये इतना सिंपल
है। आपको मेरा ख्याल है कांसेप्ट समझ आ गया होगा कि जब भी प्राइसेस नीचे गिर रही हैं। अब आपने करना क्या है? सिर्फ हाई लो मार्क करने हैं। अब देखना है कि नीचे जा रही हैं। तो सबके साथ पहले लोअर लगा दें। सब पॉइंट के साथ पहले लोअर लगा दें। आगे लो लिख दें। ये लोअर लो बन गया। ये भी लोअर लो बन गया। ये भी लोअर लो बन गया। ठीक है? और जो हाई है ये लोअर हाई। यह वाला भी लोअर हाई। यह वाला भी क्योंकि बेसिकली तो हमने हाई लो मार्क करना है। हाई
लो मार्क कर दिया है। ट्रेंड नीचे जा रहा है, लोअर साइड पर जा रहा है, लोअर डायरेक्शन में जा रहा है। तो आप सबसे पहले एक-ए कैल का इजाफा कर दें। लोअर हाई बन गया। ठीक है जी? बिल्कुल सिंपल कांसेप्ट। तो ये तो हो गई इसकी मार्किंग। अब आपने करना ये है कि आगे आपको दो छुट्टियां भी आ रही हैं। सैटरडे संडे आपको ऑफ होगा और बीच में हम मंडे को क्लास करेंगे। शायद आगे एक दो छुट्टी आपको और मिले क्योंकि मुझे जरा यहां पे मैं नहींऊंगा लेकिन आपको मैं काम देके जाऊंगा और क्लास पूरी
करवा के जाऊंगा और होगी क्लास। आपकी सिर्फ बुध को ऑफ होगा। तो तब तक हम स्ट्रक्चर कंप्लीट कर चुके होंगे। तो ये दिन जाया नहीं करने हैं। सिर्फ इस तरह की मार्किंग जो आपको बता रहा हूं सिर्फ चार्ट पे जाके ये देख लेनी है। आज का आखिरी पॉइंट आज का आखिरी पॉइंट ये है कि जो सबसे टेक्निकल चीज है इनमें बिल्कुल सिंपल-सिंपल चीजें हैं। एक-एक स्टेप बाय स्टेप लेके चल रहे हैं। अच्छा यही चीज़ है जो अभी पड़ी है वही चीज़ है। दोबारा वही चीज़ है। ये देखें। बस थोड़ा सा इसमें शक्कर बदल देंगे क्योंकि
इतनी आसान खीर मिलती नहीं है। आप कहेंगे ना खीर है यह तो तो ऐसी खीर आपको मिलेगी नहीं मार्केट में। खीर थोड़ी सी टेढ़ी होगी। आपको मार्केट नजर आएगी कुछ इस तरह से। अभी भी मैंने आसान बनाई है। ठीक है? आपको कैसे नजर आएगी? आपको नजर आएगी ऐसे। ठीक है? तो थोड़ी सी डिफिकल्ट शेप में आ जाती है मार्केट। तो हम इसको आहिस्ता-आहिस्ता फौरन से इतना मुश्किल नहीं करेंगे। आसान तरीके से पढ़ते हुए इसको आहिस्ता-आहिस्ता उसी कॉम्प्लेक्स जगह पे ले जाएंगे। अच्छा जी। अब आपने पहले हायर लो मार्क करना है। ये तो था आपका लो।
ये था आपका हाई। ठीक हो गया जी। सिंपल हो गई बात। अब आपका हाई जब लग गया ना तो आपने अपना हाई मार्क कर लेना है। आपने एक लाइन लगा लेनी है कि जी यह मेरा हाई है। यह आपका हाई है। चलिए ठीक हो गया। अच्छा अब आपका हाई ब्रेक हो गया। किस वेव ने ब्रेक किया? इस वेव को क्या कहते हैं? जरा मुझे जल्दी से कमेंट में बता दें कि जिस जिस वेव ने स्ट्रक्चर ब्रेक किया है, इस वेव को ये कौन सी वेव होती है? इसका नाम पता है आपको? जल्दी से ट्राई करते
हैं जरा एक 30 सेकंड के अंदर-अंदर। इंपल्स वेव होती है। ठीक है जी। किसी ने पता नहीं एक रिट्रेसमेंट भी लिखी है। जी ठीक है जी। रिट्रेसमेंट नहीं होती। इंपल्स वेव होती है। जो वेव भी जैसे यह वेव लगी है। इस वेव ने जब ये स्ट्रक्चर ब्रेक कर दिया प्रीवियस हाई ब्रेक कर दिया। अब आप कहेंगे कि जी हाई तो ये भी था। ठीक है? तो ये हाई नहीं है। हाई तो पहले लग चुका है। ये लगा हुआ है। जो भी हाईएस्ट पॉइंट होगा इंपल्स वेव का जो भी हाईएस्ट पॉइंट होगा उसको आप कहेंगे ये
हमारा हाई है। यह ब्रेक हो गया। ठीक है? ब्रेक होता आपने देख लिया। आपको पता है कि ऊपर निकल गई प्राइस। तो, जब यह ब्रेक हो गया, अब आपने आ जाना है इस पूरे ज़ोन में। इस ज़ोन में आ जाना है। ठीक है? यह पूरी रिट्रेसमेंट थी। यह वाली रिट्रेसमेंट थी। अब इस ज़ोन का जो सबसे डीप पॉइंट है, उसको मार्क कर दें। मैं उस पे एक लाइन लगा देता हूं। सबसे डीप लो ये है। यही है जी। यही है ना? इसमें कोई शक की बात तो नहीं है। पहले एक लो ये था। फिर यह
भी लो था। तो हमने कौन सा देखना है? जो ये रिट्रेसमेंट लगी है। ठहरे मैं इसको डिलीट कर दूं इस दायरे को। चल जी। अब देखें आप साफ कर दिया मैंने। जब इंपल्स वेव इंपल्स वेव कब लगी? कैसे पता चला? जब तक यह हाई ब्रेक नहीं होगा ना, इंपल्स वेव नहीं है। अगर आप कहेंगे कि यह इंपल्स वेव थी यह वाली तो आपका जवाब बिल्कुल गलत है। क्यों? क्योंकि इंपल्स वेव हमेशा वो होती है जो किसी स्ट्रक्चर का ब्रेकआउट करती है। एक्सटर्नल स्ट्रक्चर का ब्रेकआउट। ये इसका हाई था। सबसे हाईएस्ट पॉइंट ये है इस वेव
का। तो जब वो ब्रेक हो गई, एक और न्यू इंपल्स वेव लग गई। जैसे ही नई इंपल्स वेव आई, आप उसके डीप लो पे आ जाएंगे। चाहे वो यहां पे हो, चाहे वह यहां पे हो, कहीं पे भी हो। ठीक है? सबसे डीप लो पे आना है। डीप लो यह था, तो आप कहेंगे कि यह हमारा नेक्स्ट लो है। अब क्योंकि प्राइसेस ऊपर जा रही हैं, अप ट्रेंड में है तो आप कहेंगे कि यह हमारा हायर लो है। हायर लो निकालना आ गया। सबसे आसान है हायर लो निकालना। कैसे आसान है कि जब ब्रेक हो
गया ना यह ब्रेक होने से पहले तो आपने ढूंढना ही नहीं ना। ब्रेक होने से पहले क्यों नहीं ढूंढना? यह देखें। अभी यह ब्रेक नहीं हुआ। यह हमारा हाई है। अभी यह ब्रेक नहीं हुआ। यहां तक प्राइस पहुंची। आपने कहा जी मुझे तो हायर लो मिल गया। ठीक है? किसी को नहीं मिला। आपको मिल गया। फिर प्राइस ऊपर जाएगी और नीचे आ जाएगी। अब क्या आपका आपका जो बात थी कि मुझे मिल चुका है हायर लो। वह वैलिड है? नहीं वैलिड क्योंकि इंपल्स वेव तो अभी तक यह जो हाई था यह तो ब्रेक ही नहीं
हुआ। ठीक है? फिर प्राइस ऊपर जाती है। आप कहते हैं कि नहीं यह मार्केटिंग गलत थी। यह ठीक है। यह हायर लो है। प्राइस फिर और नीचे आ जाती है। आपका जवाब फिर गलत हो गया। आपने वेट करना है कि यह वाला हाई कब ब्रेक होगा? यह चाहे 10 दिन में ब्रेक हो, चाहे 10 मिनट में ब्रेक हो। जब यह ब्रेक हो गया, अब आप आ जाए डीपेस्ट लो पे। सबसे डीप लो कौन सा था? ये था कि ये था कि ये था। जो भी सबसे डीप लो है, इसको मार्क कर लें। ये आपका हायर
लो बन गया। जैसे यहां पे आपको दिखा दिया। समझ आ गई? तो जब तक हाई ब्रेक ना कर ले ये वाला एक्सटर्नल हाई ये वाला हाई नहीं ना ये वाला हाई एक्सटर्नल हाई जो सबसे हाई पे था पॉइंट जब तक उसको ब्रेक ना कर ले तब तक आपका हायर लो कंफर्म नहीं है जैसे ही ब्रेक हो ये हायर लो आपका कंफर्म हो गया अब एक बात याद रखें कि अप ट्रेंड में सबसेेंट पॉइंट आपका हायर लो होता है। आपको यह पता होना बहुत जरूरी है। अपने हायर लोस का पता होना खासतौर पे लेटेस्ट हायर लो
का पता होना बहुत जरूरी है। वरना आप ट्रेंड को फॉलो नहीं कर सकेंगे। आप ट्रेंड पढ़ ही नहीं सकेंगे। ठीक है? अब उसके बाद इंप इंपल्स लग गई। अब नया हाई कौन सा आपका आ गया? पहले यह हाई था। अब नया हाई यह लग गया। लेकिन क्योंकि यह वाला हाई पीछे वाले हाई से ऊपर है तो फिर हम इसको हायर हाई कह देंगे। अब प्राइस ने फिर रिट्रेसमेंट लेना शुरू कर दी। थोड़ा सा नीचे आती है। ऊपर जाती है। आप कहते हैं ये जी मुझे अपना नया हायर लो मिल गया। तो ये जवाब गलत है।
यहां भी नहीं मिला। यहां भी नहीं मिला। यहां भी नहीं मिला। कब मिलेगा? जब प्राइस आपका प्रीवियस जो एक्सटर्नल सबसे ऊंचा हाई था जब उसको प्राइस ब्रेक नहीं करती। यहां पे इसने ब्रेक कर लिया। इस वेव को क्या कहेंगे? इंपल्स वेव। इंपल्स वेव लग गई। अब इंपल्स वेव लगने के बाद सबसे डीप लो कौन सा है? यह वाला है। यह भी नहीं है। यह वाला है। तो, यह जवाब ठीक है। यह आपका सबसे डीप लो था। इंपल्स वेव लगने से पहले इस पूरे रीजन में ढूंढना है आपने। इस पूरे ज़ोन में ढूंढना है आपने। इस
पूरे ज़ोन में सबसे डीप लो मार्क कर लेना है। वहां पे हम लाइन लगा लेते हैं। सबसे डीप लो आपका बन रहा है। जी। अब यह वाला। यह सबसे डीप लो है। ठीक हो गया? अब इसकी मार्किंग करते हैं जरा। यह क्या था? यह था आपका लो। इसकी आप स्क्रीनशॉट लेंगे जब तो आपको इसका आईडिया हो जाएगा। अच्छा ये क्या था हमारा? हाई। उसके बाद ये क्या है? जी हमारा ये ये क्या है हमारा? ये है हमारा लोअर लो। ठीक है? आसान हो गया ना आपका? बिल्कुल। उसके बाद ये क्या है? आपका हाई लग गया।
नया हाई लग गया। तो जब आपका नया हाई लगेगा तब आपने कहना है कि यह हमारा लोअर लो है। इसको अभी मैं साइड पर कर देता हूं। अभी हमें नहीं पता लोअर लो कौन सा है। ठीक है? सॉरी हायर लो। अप ट्रेंड देख रहे हैं ना अभी हम हायर लो हमारा कौन सा है? अभी हमें नहीं पता। कब पता चलेगा? इसको हमने साइड पे कर दिया है। जब प्राइस अपना हाई ब्रेक कर देगी। इसने हाई ब्रेक कर दिया। जब हाई ब्रेक कर दिया तो अब हमें हाई ब्रेक होने के बाद सबसे डीप पॉइंट देखना है।
सबसे डीप पॉइंट यह है। इसको मार्क किया और यहां पे लिख दिया कि यह हमारा हायर लो है। ठीक है? और जब जहां तक प्राइस गई थी इसको हम क्या कहेंगे? हमारा ये क्या पॉइंट है? ये है हमारा हायर हाई। ये बस इतनी सी बात होती है। अब जब भी इंपल्स वेव लगे देखें। अब इंपल्स वेव कब लगेगी? इंपल्स वेव वो होगी जो हमारा ये सबसे ऊंचा पॉइंट ब्रेक कर देगी। तो इंपल्स वेव लग गई। इंपल्स वेव लगने से के बाद देखें सबसे डीप पॉइंट कौन सा था? सबसे डीप पॉइंट ये है। इसको आप उठा
के कर लेंगे कि हमारा अब लेटेस्ट हायर लो ये बन गया। फिर ये हाई लगा। प्राइस नीचे आना शुरू हो गई। तो यह हायर हाई बन गया और यह हमारा बन गया हायर लो। यह कैसे बना? क्योंकि प्राइस ने अपना यह वाला हाई ब्रेक कर दिया था। जब यह वाला हाई प्राइस ने ब्रेक किया तो सबसे डीप पॉइंट पे इसको भी साइड पे कर देते हैं। अब आप यहां पे अगर देखें, तो प्राइस ने यह वाला अपना हाई ब्रेक कर दिया। जब हाई ब्रेक कर दिया, इंपल्स स्टार्ट हुई है यहां से। तो, यहां से नहीं
आपने नापना। आपने देखना है कि इस पूरे ज़ोन में पिछले हाई से ये जो हायर लो है पिछले हायर लो से अंदर-अंदर इधर इस साइड पे सबसे डीप पॉइंट कौन सा है? सबसे डीप पॉइंट ये है। तो आपने इसको मार्क करने के बाद यहां पे आपने लिख देना है कि ये आपका हायर लो बन गया ये पॉइंट। बस ये इतनी सिंपल चीज है। ठीक है जी। अब इसमें इंपल्स वेव की निशानी बताएं कौन सी है? इंपल्स वेव आपने मार्क करवानी है। यह है जी इंपल्स वेव यह वाली। ये पूरी इंपल्स वेव थी। क्यों थी इंपल्स
वेव? क्योंकि इसने स्ट्रक्चर हाई ब्रेक किया। अगली इंपल्स वेव कहां पे लग रही है? अगली इंपल्स वेव लग रही है आपकी ये। यहां से स्टार्ट हुई और यहां तक। ठीक है जी। यानी ये पूरी इंपल्स वेव आपकी मानी जाएगी। असल में इंपल्स वेव वो आखिरी वाली वेव होती है जो ब्रेक करती है। असल में तो इंपल्स वेव ये है। ये आपकी इंपल्स वेव है। आखिरी वाली जो मैं आपको बताता हूं यहां से यहां तक। यहां से स्टार्ट हो रही है। ठीक है जी? यहां से स्टार्ट हो रही है और यहां तक। असल में तो इंपल्स
वेव यही होती है। देखिए वेव्स और भी लगी हैं। ये भी एक वेव लगी। यहां तक फिर यहां से नीचे से लेके इस पॉइंट तक ये भी एक वेव लगी। फिर इस लो से यहां तक ये भी एक वेव लगी। इसने स्ट्रक्चर भी ब्रेक किया। देखिए पीछे। लेकिन ये इंपल्स वेव्स नहीं मानी जाती। ठीक है? क्या? इंपल्स वेव वही वेव ये सब वेव्स डिफरेंट वेव्स हैं। छोटी-छोटी वेव्स हैं। इंपल्स वेव वही होगी जो स्ट्रक्चर ब्रेक करती है। लेकिन हायर लो की शर्त यह होती है कि आपने सबसे जो डीप पॉइंट होगा उसको मार्क करके हायर
लो मार्क करना है। ये सेफ तरीका होता है। कुछ लोग यहां पे भी मार्क कर देते हैं कि जी ये इंपल्स वेव थी। इसके लो पे मार्क कर लें। लेकिन ये तरीका ठीक नहीं है। इसमें आपको बहुत गलतियां और बहुत स्टॉप लॉसेस मिलेंगे। आपने डीप पॉइंट को देख लेना है। उसको मार्क कर लेना है। यहां तक बात समझ आई? अभी हम सिर्फ बुलिश ट्रेंड को देख रहे हैं। अब अगली चीज पे चलते हैं। अब हम चार्ट पे देखेंगे। इसको खत्म करते हैं। अब हम चार्ट पे चलते हैं। अच्छा अच्छा इसको यहां से करते हैं डिलीट।
ये आखिरी पॉइंट समझ लें बस सिर्फ चार्ट वाला और फिर बंद करते हैं क्लास। इसको जब दोबारा देखेंगे तो और अच्छी समझ आएगी और इत्मीनान से देखेंगे जो आपके पास टाइम हो। भागते दौड़ते नहीं देखना। ये वो चीजें आपको बता रहा हूं कि जिनको अगर आप याद कर लेंगे तो आपको जिंदगी भर कोई काम करने की जरूरत नहीं है। ये मैं आपको वादा करके कहता हूं। सिर्फ इस पे एक दो दफा 6 महीने लगा लें। टिक है। आपको जिंदगी में कोई और काम करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। जहां पे आप बैठेंगे लैपटॉप ऑन करेंगे। अपना
काम शुरू कर देंगे। अच्छा अब देखिए जी। अब मैं आपको पहले यहां पे ना मार्क करके दिखाता हूं कि कैसे आपने मार्किंग कैसे करनी है। ये देखिए इंपल्स वे। चलिए इसको छोड़ देते हैं हम पहले। हम कहते हैं कि ये हमारा लो और ये हमारा हाई। अभी हम सिर्फ बारीकी में नहीं जा रहे। ठीक है? उसके बाद प्राइस नीचे आई। चले हम यहां से दूसरा एरो ले लेते हैं। यह पास वाला। यह लें जी। यह हमारा एक वेव लगी। प्राइस ने रिट्रेसमेंट ली। फिर एक और वेव लगा दी। ठीक है? अब इस वेव ने क्या
किया? इस वेव ने जो प्रीवियस हमारा स्ट्रक्चर था, इसको ब्रेक कर दिया। यह ब्रेक हो गया ना? तो यह ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर कहलाएगा। तो हमारी इंपल्स वेव कौन सी थी? ये वाली पूरी। तो इंपल्स वेव जब लग जाती है यानी स्ट्रक्चर आपका प्रीवियस हाई ब्रेक हो गया। इसका डीपेस्ट पॉइंट कौन सा है? वो ये है। इसको अब आप मार्क कर लेंगे यहां पे। इस तरीके से एक लाइन लगा लेंगे और आप कहेंगे कि ये हमारा अब ये आपका क्या था? लो। अब ये देखिए मैं मार्क करता हूं यहां पे। ये था हमारा लो। ये क्या
था हमारा हाई। ठीक है? उसके बाद प्राइस नीचे आई। उसने एक लो लगाया और फिर एक और हाई लगा दिया। प्रीवियस हाई ब्रेक कर दिया। तो हम कहेंगे कि ये भी हमारा लो था। लेकिन पीछे वाले से हाई था तो इसको हम हायर लो कह देंगे। ये हमारा हायर लो और ये हमारा हायर हाई। ठीक हो गया? हायर हाई। फिर प्राइस नीचे आ गया। रिट्रेसमेंट लेके यहां तक उसने रिट्रेसमेंट ली और एक और इंपल्स लेवल लगा दी। ऊपर ये जो बीच में जो ये गन बंद हो रहा है इसको छोड़ दें। ये मैं आपको बाद
में समझाऊंगा। अभी आप इसको मोटा-मोटा देखें। लो लगाया। लो लगाने के बाद यह वाला हाई फिर ब्रेक कर दिया। इस कैंडल पे ब्रेक कर दिया। इस कैंडल पे देखें एक बात याद रखनी है आपने। ब्रेकआउट का मतलब यह होता है कि लेवल के ऊपर कैंडल क्लोज़ करे। यह जो लेवल था ना इसके ऊपर कैंडल ऐसे क्लज़ हो। अगर सिर्फ विक लगी है जैसे ये विक लगी है इसका मतलब ब्रेकआउट नहीं होता। ब्रेकआउट तभी माना जाएगा जब इस हाई के ऊपर जाके प्राइस कैंडल क्लोज़ कर देगी। इस तरह की भरी हुई कैंडल आ जाएगी। इंपल्स वेव
में एक मोमेंटम कैंडल आएगी। मोमेंटम कैंडल क्या होती है? बाद में बताएंगे। ठीक है जी। यहां तक प्राइस ने ऊपर क्लोजिंग कर दी है। तो जब ऊपर निकल गई है तो ये हमारी पूरी इंपल्स वेव जहां तक भी ये गई है वहां तक हमारी इंपल्स वेव है। तो अब हम कहेंगे कि एक और लो बन गया। इस लो से पहले आप H लगा दें। यानी ये आपका हायर लो है। ऊपर आपका नया हायर हाई बन गया। ठीक है? तो ये बिल्कुल इतना आसान सा तरीका है। इसी तरीके से अब आपने कुछ स्ट्रक्चर मार्क करने हैं।
जो हमारी नेक्स्ट क्लास होगी इंशााल्लाह। उस नेक्स्ट क्लास में हम ये पढ़ेंगे कि रिट्रेसमेंट कब स्टार्ट होती है? यानी अगर यहां पे मैं कहूं कि ये इस तरह बनाऊं इसको। अभी आपको एक कंफ्यूजन आ जाएगी छोटी सी फौरन से। इसमें आपने कंफ्यूज नहीं होना। ठीक है? कंफ्यूजन क्या आएगी? मैं आपको बता देता हूं। अभी शायद आपको ना ही हो। लेकिन जैसे ही मैं दिखाऊंगा आपको आ जाएगी। फौरन से क्फ्यूजन। लेकिन मैं यह भी तो कह सकता हूं कि जी यह हमारा लो यह हाई फिर यह लो और फिर यह हायर हाई ऐसे कह सकता हूं
कि जो मैंने मार्क किया है आप बताएं यस नो करें ये ठीक है या नहीं अगर ठीक है तो आप लिखें यस अगर गलत है तो फिर आप लिखें नो यस नो करें मुझे आईडिया हो जाएगा कि आपको पहले से कितनी समझ है इस चीज की मिक्स आएगा जवाब मुझे पता है नो नो नो नो नो नो यस यस यस अच्छा जी ज्यादा लोग नो वाले हैं और ये अच्छी बात है। ठीक है? इसका मतलब है कि आपने कुछ रिकॉर्डिंग्स देखी है। पहले स्ट्रक्चर के बारे में जानते हैं। जिनका जवाब नो है, आप लोगों का
जवाब बिल्कुल ठीक है। जिन्होंने कहा है कि यस यह ठीक मार्क किया हुआ है। आपकी गलती नहीं है। आपने अपने हिसाब से ठीक कहा है। बिल्कुल। लेकिन मसला ये है कि आपने डिटेल से पढ़ा नहीं है। अभी और रिकॉर्डिंग्स भी शायद आपने अभी नहीं देखी होंगी वहां तक। तो नेक्स्ट क्लास में आपको मैं समझा दूंगा कि इसको मैं रिट्रेसमेंट क्यों नहीं मानता और इसको मैं रिट्रेसमेंट क्यों मानता हूं। चीज़ तो एक जैसी है। इसको मैं कह रहा हूं कि ये ठीक नहीं है। ये गलत है। और इसको मैं कह रहा हूं कि ये ठीक है।
हालांकि देखा जाए तो दोनों एक जैसी चीजें हैं। तो ये ठीक कैसे है और यह गलत कैसे ये इंशाल्लाह हमारी नेक्स्ट क्लास का भी टॉपिक होगा और इसको हम मजीद थोड़ी सी डिटेल में जाके पढ़ेंगे। थोड़ा-थोड़ा करके इसलिए पढ़ा रहा हूं क्योंकि यह बैच आगे पूरा साल चल रहा है। ठीक है? इसकी रिकॉर्डिंग चलनी है आगे पूरा साल। तो उनको भी आसानी हो और आपके लिए भी इतनी डिटेल से चीजें हो जाए कि आप आगे दूसरों की हेल्प कर सकते हैं। काफी बड़ा बैच है माशा्लाह ये। ये आप लोग डिस्कर्ड पे जाएं तो लोग पूछते
हैं चीजें एक दूसरे से हेल्प मांगते हैं। तो आपको इतनी चीजें पता होनी चाहिए डिटेल से। ठीक है जी। रिकॉर्डिंग को स्टॉप करते हैं यहां पे। अभी क्वेश्चन आंसर नहीं मैं किसी का ले रहा। उसकी वजह ये है कि अभी हम बिल्कुल बेसिक चीजों पे हैं। थोड़ा सा पढ़ लेंगे तो आपका एक पूरा सेशन कर देंगे। इंशाल्लाह क्वेश्चन आंसर का उसमें आपकी चीजें कंप्लीट होंगी। और दूसरा ये है कि अभी आपने साथ-साथ लिखें। बाकियों की तरह नहीं करना आपने कि जो चीज़ समझ नहीं आ रही फ़ौरन से मुझे फोन मुझे मैसेज फ़ौरन से सवाल नहीं
थोड़ा सा खुद सर्च करें खुद ढूंढें कि क्या हो रहा है। खुद से जो जवाब आपको मिलेगा वो पक्की सारी उम्र आपके ज़हन में रहेगा। मैं बताऊंगा तो शायद आप दो दिन बाद फिर भूल जाएंगे। 10 दिन बाद फिर भूल जाएंगे। खुद से कोशिश करें खुद से जवाब निकालें। मैं आपका एक एक सवाल क्लियर करके जाऊंगा यहां से इंशा्लाह जब भी ठीक है जी। मिलते हैं इंशा्लाह नेक्स्ट क्लास में मंडे को। तब तक के लिए अल्लाह हाफज़।