कि वो बिरला ही मन शैतान अर्जुन उस मिला है रखना न रखें अ हेलो हेलो होमवर्क नाले में तो फिर वह बता दूं व अलाव के मधुमेह नखरा वाला तक किल नहीं ला अनुभवों से ना पर पता ही नहीं अवध में इस व्याधि निमोद काला-सफेद खंडवा खरीदनी है मोक्ष राजा से युक्त कि वह जल्दी मिलने दो उनका 1679 रा रा ए पप्पु जी ने सूरज कुमार का एक फतेह में आया यह शिवम ए आर रहमान रखेंगे कि इस मिला है रख संभावना खत्म अल हमदुलिल्ला ही रब्बुल आलमीन और रखना निर्मल सिंह ए आर रहमान और
रसूल दूसरे फायदे हैं अल्लाह ताला की अस्मा योजनाओं में से हैं को विस्मिल्लाह में पहले कि इसकी बुनियादी तस्करी के मुताबिक जून हो गई है में रख मदद से दोनों मुस्तक हैं मादा इनका रहमान है है और रखे उन लोगों तन है और पूरा अनीश तिलक में उस अतः और हत्या को कहते हैं में जो बदलाव मुआवजा अ कि किसी जरूरतमंद किसी शहर को अता किया जाता है जिससे कि उसकी बुनियादी ह जाती उस जरूरत पूरी होती हो इस पुसतक को उस छवि को भी रख मत कहते हैं और यह मलहमों विषय अता करना देना
कि जरूरतमंदों को उसकी कमी को इस सप्ताह के जरिए से पूरा करना कि अमल भी रख मत के लाता है अ को विस्मिल्लाह रहमान रखेंगे और क़ुरआने करीम के बिगर के आयात में कि यह अल्लाह के लिए वास फेड को विस्मिल्लाह रखना ने रसूल अल्लाह रहमान और अल्लाह रहीम है कि अल्लाह जी हॉल कि महमूद कि वह आखिर में मौत अलग जिसका फरमान नाफ़िज़ हो जिसकी कुदरत नाफ़िज़ हो है और जूस की इताअत की जा रही हो है जिसकी यह तो आप लाज़िम हो कि वह अल्लाह इला है है और यह दोनों सिर्फ मौत इलाज
के लिए और अल्लाह के लिए सिर्फ हैं और रख मत व रहमान व रहीम ने हैं और मुराद से यह है कि इलाहा की सुविख्यात फाइल आयत में रख मानी है और रही है यह नेता रोजा ए पर हुकूमत कि इलाका हातिम का रहमानी है वह रखनी है है और रहमत का मतलब महान माना जाता है जिसके जरिए कि किसी विषय की कमी और जरूरत पूरी होती हो का हक मिथ्यात्व इलाज धनतेरस मान्यवर हाशमी का मतलब यह है कि हां की नीयत फैला ही में हुआ हुकूमत ए इलाही में कि कार्तिक हुकूमत इला ही यह
है कि इसमें हार जरूरत मन की जरूरत में रहमानी ने एग्जाम में को पूरी हो रही है और पूरी होगी कि रखनी की तर्ज़ पर पूरी हर जरूरत उस मौजूद की पूरी होगी को दोबारा इसी सूरह में तीसरे सुरम दूसरी आयत में फिर तकरार होता है का यही मतलब आर रहमान रखेंगे है लेकिन इस मर्तबा यह वास है अरब के लिए अ है अल्हम्दुलिल्लाह शेयर और रब्बिल आलमीन और रहमानिर्रहीम अ से प्रभावित आलमीन कि अल्लाह के लिए है जिसकी बिना पर हम डे इसकी बिना पर तमाम तारीफें उस जाते इलाज के लिए हातिम के लिए
हैं है और उसकी रूबी याद रख मानी बार रही है कि रूबी जब मैं निजाम में परवरिश है हातिम का इलाका परवरिश निदान है जैसा जरा इला हालिक है है और मालिक है इसी तरह खराब है मैं फिलहाल एक है तमाम काइनात को बावजूद देना हंसती देना साथ अता करना यह उसी इलाहा और रब का आख्यान का फेल है है और को इजाद करने के बाद तमाम मामलों को परवरिश देना मैं अपने मुकरा और मुतालिक का कमाल तक पहुंचाना है कि यह रुपया है उसी इलाके की उसी जात की और वह इज्जत है कि जिस
तरह उसकी हाकिमियत रखनी है और रखनी है हुकूमत उसकी उसका तर्ज में रख मत की बुनियाद पर है मैं इसी तरह इसकी जो रूबी यादव का अंदाज और तर्ज़ भी रहमानी व रही है ए आर रहमान रहीम और रहमत के बिगर मुस्तफा नात है कि तस्वीर जो तरीकों में और तफसीर में की गई है उसमें रख मत का असल माना मुराद लेने के बजाय तू मना कर लो जमा मद्देनजर रखा गया है है और हर जगह रहमान और रहीम और रहमत का स्तर जमा मेहरबानी नरमदिली नरमी और रिक्त किया गया है कि अल्लाह रहमान ओर
रखनी है और रब रहमान व रहीम है यह निहायत रहने वाला मेहरबान है मेहर इस वर्ष है मेहर अपनी मामलों पर कि पहुंचाता है और नरम है यह रहमान सख्त नहीं है तुम नहीं है शदीद नहीं है बल्कि के नरम है नरम होता है में रख मत का माना नरमी नहीं है नरमी ला जमा है उसका और वह भी कि इंसान में कि इंसान जब किसी जरूरतमंद को देखता है हाजतमंद को शदीद हाजत में में मुब्तिला देखता है जब किसी थे फर्म ने इंसान में छोटे-बड़े में कमी बुनियादी जरूरत की कमी का एहसास करता है
कि उसे सास के नतीजे में इंसान के अंदर एकता शिविर का इन होता है इन फिलहाल पैदा होता है है और वह इन्फिडेल रिश्वत नाम रखता है इन इंसान के दिल पर इस मंजर को देखने के नतीजे में एहसास चुके इंसान हर सांस मौजूद है यह साथी है एक हिस्सा से नरमी गए ऐसा से रिक्तता पैदा होता है है और उन नरमी इंसान के लिए मोहर एक बनती है कि इंसान को उकसाती है ताकि इस जरूरतमंद की जरूरत को पूरा करें अब कि यह इंसान में और मखलूक में ऐसे होता है कि जरूरतमंद को देखकर
मैं इन्हें आली तास्सुर अहसास पैदा होता है वह इससे इंसान को तारीफ करता है है और उस अ तहरीक के नतीजे में इंसान जरूरतमंद की जरूरत पूरी कर देता है और इसे की रहमत कहते हैं यह भी रख मत ही है जिस मखलुक के हाथों किसी की जरूरत पूरी होती हो और राहु के हाथों किसी की जरूरत पूरी होती हो हा लिपटे जरिए इसी के जरूरत पूरी होती हो कि वह रख बाद ही कहलाएगी है लेकिन गर्मी हमेशा दिल की नरमी यार रिक्त उसमें हमेशा माधुरी नहीं है ना ही रहमत के माना में नरमी महसूस
है और रहमत आता है अत यह है दहिया जो कमी पूरी करें और उसकी शर्त यह है कि मुआवजा ना हो उसका अ और उसके बदले में कि यह पता करने वाला यह चीज देने वाला जरूरत पूरी करने वाला उसके बदले में कोई माध्यम मान भी सैला और मुआवजा वसूलने करता हूं इसको रहमत कहते हैं नरमी पैदा हो या ना हो यहां पर नरमी इंसान में जो के पैदा होती है और इंसानी आफ ऑल की खासियत यह है 2017 के नतीजे में इंसान तहरीक होता है और इरादा करता है और फिर अंजाम देता है कि
कुछ कि इंसानी आफ ऑल हैं जो दिल की शिद्दत से नतीजे में पैदा होते हैं जैसे यह जब है मेरे दिल के अंदर वर्षा पैदा होता है जब पैदा होता है शुद्धता जाती है है और यह शिद्दत इंसान को किसी अमल पर उकसाती है किसी फील पर उकसाती है तो बस औकात रिक्त इंसान को तारीफ करती है किसी अमल पर उकसाती है लड़ाई झगड़े जब इंसान करता है किसी से नागवार बात सुनता है कि नागवार इशारा देखता है बढ़ जाता है इंसान के अंदर एहसास शहादत के समय का कुर्ता है वह इस इंसान को अक्सर
नार्मल पर उकसाता है और इसके नतीजे में इंसान लड़ाई झगड़ा या बदजुबानी अंजाम देता है मैं इसी तरह का दूसरी तरफ इस आशय के बाद उक्त खुशगवारी या किसी को इंसान शदीद एग्जाम में देखता है कि बीमार इंसान हैं जख्मी है गिर पड़ा हुआ है प्यासा इंसान है भूखा इंसान है है या कोई जानदार है ऐसा जैसे यह बहुत सारे हैवानियत हैं को पालतू या गैर पालतू अगर वह किसी तकलीफ में मुब्तिला हो उन्हें देखकर एक अश्लील मोल एहसास है इंसान सलीम होना जरूरी है यदि डे इंसान की फितरत सालेम हो इंसान का मिजाज सालिम
हो को फांसी दिनों हो गया हो कि बहुत सारे लोग इन मनाज़िर से गुजर जाते हैं थे और उनके अंदर कोई रिक्तता पैदा नहीं होती है को चालू कर तड़पता हुआ देख जाते हैं इंसान मैं पढ़ता हुआ देख चाहते हैं जरूरतमंद इंसान देखते हैं उन पर कोई असर नहीं होता कि यह इंसान को अपनी सलामती को बैठे हैं हैं इनमें रहमत दी पैदा नहीं होती या बसों का जैसे बेगैरत इंसान है दयालु से इंसान हैं हैं जिनमें के रोग पैदा नहीं होती और सदी देश भी नागौरी के मुकाबले में कोई एहसास भी पैदा नहीं होता
है लेकिन दुशाले निशान है सलामती रखता है अपनी नेमत सलामती मासूस है उसकी उसके अंदर यह अहसास पैदा होना एक तभी बात है है और इससे इंसान को उकसाते हैं किसी काम पर हो कि इंसानों में चुके नरमी कि इस अमल के साथ हमेशा नजर आती है कि यदि जरूरत मन या मुमताज़ इंसान या मुख्तार जानवर कुछ जब इंसान देखता है नरमी पैदा होती है नरमी के नतीजे में उसकी कमी पूरी करता है लिहाजा 18 मत यह अमल को नरमी के साथ हमेशा देखने की वजह से नरमी को ही माना कि तौर पर रख दिया
गया है है ना मखलूक में रख मत कमाना नरमी है और ripped और ना ही खालिक में एक माना है रख मत का वह आता मिला मुआवजा जिसके जरिए से जरूरत मामी की जरूरत पूरी होती हो ए हॉलिस्टिक अल-अनी चाहने हस्ती को हल्का किया है है और इस ख़िलक़त की मुख्तलिफ चकली बनाई है मौजूदा साथ इजाद किए हैं हालत इज्जत और उसका आथित्य के नतीजे में जितने में मौजूद आत्मश्लाघा दो वजूद में आए हैं उन सबको तक चावल के लिए परवरिश के लिए बुनियादी जरूरतें बुनियादी चीजों की जरूरत है हैं और वह भी हराम जरूरी
है हर लम्हा जरूरी है थे यूनीक कि एक दफा यह बुनियादी चीज़ें कि उन्हें दे दी जाए और वह अपनी जरूरत पूरी करके फिर उसी के मुताबिक तकरार मोल और परवरिश पाते रहे परवरिश का कानून यह है है कि हर ऑन उसको पहले महाले से दूसरे महाले में पहुंचना है कि रुष्ट इस चीज का नाम है नशा पूनम का बाद इस चीज को कहते हैं न मूत्र कि अगर एक लहजा पहले एक शय एक हालत में है दूसरे लहजा उस हालत में ना हो है इसको कहते हैं नामी है यह चीज न मूव कर रही
है जो पहली लहजे में जो शायद में हो दूसरे लहजे में भी उसी हालत में हो यह जामिद है नामी नहीं है नमो नहीं है इसके अंदर कि इस की परवरिश नहीं हो रही है पर वर्ष की इसको जरूरत नहीं है आदत नहीं है इसको ए पर्सनल मूव व के लिए हर ऑन कि रूस के लिए हरा उसको जरूरत पड़ती है है और यह हर लम्हा उसको जरूरत की चीज पर हम करना कि यह रूबी थे भी है और यह रघु भैया अ पर रहमत की सूरत में है इन्हें इसका कोई मुआवजा मौजूद से मखलूकात
से वसूल नहीं किया जाता है कि हम शुरुआत एक दूसरे की पूरी करते हैं लेकिन उसके बदले में या मानवीय मुआवजा लेते हैं या माध्यमों से बजा लेते हैं कि कितने लोग हैं जो दूसरों की जरूरतें पूरी करते हैं जवाब में तनख्वाह लेते हैं कि यह रख मत नहीं है यह तिजारत है लेनदेन है जरूरत की चीज कि आपने उसको दीदी और उसने आपकी ज़रूरत की चीज़ें आपको दे दी जरूरत की चीजों का तबादला रख मत नहीं है यह वजारत है जरूरत कि शायद तरह तौर पर एक जरूरतमंद को दूसरे की जानिब से आता हो
कि यह रख मत है और यह रूबी जेतेपद बनता बारक बताना है हर आन हर मखलूक को यह अ ताण मुझसे नारियल मिल रही है जैसे मिसाल दी थी एक आम विशाल आम फेम विशाल हर आदमी जिसको समझ सकता है कि इस मिसाइल को समझने के लिए किसी तरह शिष्य की जरूरत नहीं है जैसे सांस लेते हैं हम यह हर आन हमारी जरूरत है आप सीजन इंसान की हयात के लिए हर लम्हे जरूरत है है और यह तन्हक्स पौधा नहीं है जो इंसान की मार दी जिंदगी की महक के लिए चाहिए रोस्ट के लिए चाहिए
परवरिश के लिए चाहिए इस जैसी हजारों चीज़ें व हजार हां चीज़ें मैं इसी तरह दिव्या साथ और इसी नज़्म निजाम के तौर पर इंसान को बिल्व आस्था और विश्वास का मुजफ्फर आ रही है अशुभ के जरिए से और अपने खास वसा युक्त वस्तुत से मुझे इशारा रही है जैसे की हरारत है सूरज की तरफ से इंसान को हर ऑन मुझे असर आ रही है रोशनी हरा अनुसार आ रही है यह घुमि चीजें जो हर महलों की जरूरत हैं उसे आता हो रही है कुछ खास जरूरतें हैं जो एक मौजूद की है दूसरे कि नहीं है
चेंज 1 मलूक इस चेहरे की मोहताज है दूसरी मखलूक किसी और चीज की इसके बदले भी मोहताज है इस चेहरे की मोहताज नहीं है जैसे इंसान है इसकी जरूरतें मुख्तलिफ हैं बाद जरूरतें दूसरे मौजूद हाथ से मुख्तलिफ हैं कि कुछ जरूर से मुंह तरह के इंसान की और हर इंसान की लेकिन कुछ जरूरतें इंसान की दूसरे मौजूद लार से अलाहिदा है कि यह जो अलग जरूरी जाते हैं इंसान की यह भी इंसान को हाआन हर लम्हा अल्लाह तआला की तरफ़ से अता हो रही है यह निशान है मैं निजाम मीर उलूहियत अल्लाह ताला का हुकूमत
और सल्तनत ए इलाही का निशान है उस सल्तनतें इलाही में एक तरफ भी अति शोभा है जिसको रिमूव इज्जत कहते हैं पर वर्षीय शोभा है जिसको रूबी कहते हैं है और सल्तनत लहरिया के मुताबित शोभा हैं जैसे तस्वीर देती मिसाल दी थी यह अ समायोजन और सिर्फ आते अलावा यह वजारत खाने हैं अल्लाह की हुकूमत के मजार ते हैं इन बाजार तो के वजीर अल्लाह ताला के अस्मा योजना है है कि इन बाजार तो का नाम से पाते इलाज किया है और तमाम कायनात इन्हीं के तहत चल रही है यह मुदिर हैं और यह दुसरे
काइनात हैं मैं इसमें एक अहम में शोभा रवी जात बारु इज्जत का है दुश्मन इंसान के लिए आ कि बाकी मौजूद बाद इस निलामी की हालत इज्जत से भी व्यवस्था है है और निजामु जयते अल्लाह से भी मजबूत है तमाम कायनात स चेंज 1 मलूक मौजूद ऐसा नहीं है कायनात में स्नातक तयशुदा कायनात में और गैर मुकेश गुप्ता अनगिनत में है जो अल्लाह की उलूहियत है और इलायची अत हुकूमत व सल्तनत इलाही वह मामले करते इला ही से अनुसार लिखना हो बाहिर हो पिता आत्मा करता हूं कि इंसान इस कायनात में वाहिद मखलूक है है
जो इरादा व इश्तिहार रखता है थे और कभी की मासूमियत करता है अल्लाह की सल्तनत और अल्लाह की उम्र के वह कमा जो तस्करी हैं यह इंसान के इरादे कोमल मुजरा कर इंसान के लिए मुकर्रर किए गए हैं उनकी मुखालफत करता है हैं ताकि कोई मौजूद ऐसा नहीं है कायनात में जो अल्लाह के राधे और हुकुम की नाफरमानी करता हूं इंसान भी तकनीक व मेयर में नहीं कर सकता नामुमकिन है अल्लाह के तक विनियमों आमिर व फराह खान की मुखालिफत करें तस्करी की करता है अ श्री श्याम आमिर का मतलब है कि देश में अल्लाह
का अमर है फरमान है इरादा है और अल्लाह का इरादा और फरमान यह है कि इंसान अपने इरादे और अपनी इस प्यार से यह काम करें जब भी अल्लाह का इरादा इंसान के इरादे के मुतालिक हो इसको तस्वीर या मर वो कहते हैं यह कानून की शक्ल में अमर किया जाता है तब तक भूनिए अमर मूसा उनका इरादा मनोज नहीं होता सिर्फ अल्लाह का इरादा है और अल्लाह के राधा तमाम कायनात में वाजिब लेता आते हैं और सब मौजूद आत्महंता हाथों से स्टार्ट कर रहे हैं मैं इसी तरह रूबी अल्लाह ताला की उम्मीद रखती है
ये कायनात के लिए है तक वीरू भैया है इंसान के लिए रूबी का एक ऐसा ही मामला भी पाया जाता है है और वह जो इंसान की तस्करी दो जिंदगी से मतलब है तस्वीर ज़िंदगी योनी जहां पर इंसान का इरादा और इंसान का इश्तिहार बीच में शामिल है इंसान ने अपने इरादे से मैं अपनी परवरिश घर का सामान करना है और अपनी परवरिश के लिए मुकर्रार निजाम अपनाना है और इस शुभ इमेज ओर उद्यत मकसूद हुसैन इंसान के लिए है मुक्ता से इंसान को इस की रहनुमाई कि यह हिदायत की गई है है जो तक
अपनी परवरिश है इंसान की रूबी यत यहां पर भी थे उसमें और अल्लाह तआला ने हर चीज को इजाद कर के उसकी तबीयत का तक अपनी निजाम बनाकर और उस मख्लूक़ को कि इंसान समेत निमित्त व्रत के सुपुर्द कर दिया है निशा मेरु पर्वत के अंदर उसको रख दिया है और वो भी निजाम उसको अपने तकनीक इंतजाम में प्रवेश कर रहा है है इसमें किसी का इरादा अल्लाह के अलावा द ख्याल नहीं है है लेकिन जहां इंसानी इरादा वापिस प्यार बीच में मालूम हो जाए वहां पर अल्लाह ताला नी रूबी अब इंसान के सामने रखी
है तालीम दी है तस्करी की यह बयान किया है और इंसान को हुक्म है कि राधा तौर पर इस तैयारी तौर पर इस रोवत अल्लाह की भिड़त को समझे और अपनाएं और उस व्रत के नियम को लागू करें और नाफिज करें मैं कटनी में मजबूर है तस्करी में इंसान का इरादा दखिल है है और इसके लिए पुलिस को हिदायत की जरूरत है रहनुमाई की जरूरत है और वह भी थे इलाहाबाद के मुताबिक लें अ कि उसे दायित्व का इन पुरानी क्रीम में ज्यादा रहनुमाई इंसान को इसी सुबह के लिए की गई है और वह भी
अपने की है कि तुम की परवरिश के मोहताज हो और तुम्हारी परवरिश तुम्हारे रब के हाथ में है परवरदिगार तुम्हारा अल्लाह है इला है जो आंखों में वही तुम्हारा भी है है और इंसान को ज्यादा उलझन भी इसी में पेश आई है कि इंसान ने कि जब अस्बाब को देखा है अल्लाह ताला ने जो रूबी त्यसमा बनाई है इन अस्बाब को मुस्तकिल अरब करार दिया इसने अ ए प्लस बाद आपको असली मौत सिर उद्यत में शुमार कर लिया अ है और जो कुछ तलकीन उसको की गई और उस तरफ पिन के मुताबिक हर इंसान ने
सब कुछ कबूल कर ली है जैसे अभी हम देखते हैं जिस माहौल में हम रह रहे हैं मतलबी दुनिया बिल्खुसुस यह मजाहिब के पैरोकार इनको जो कुछ मिलता है यह किसी ने किसी से मंसूब करते हैं कि अगर किसी बरेलवी मुसलमानों के यहां बच्चा पैदा हो है तो वह बच्चा वह अपनी मुरशद पीर वाश किसी की तरफ़ मंसूब कर देता है कि उन्होंने दिया है उनकी वजह से यह औलाद मुझे नसीब हुई है कि अगर किसी सिया के यहां औलाद पैदा हो है तो वह इसको अहलेबैत से बर्बाद कर देगा आ कि अगर कि किसी
है और मसलक के हां हो तो वह उसको किसी ने किसी दिन कि जिस तरह उसके मजहब ने उसके मसलक में उसको तल पिन किया गया है उसी से नजदीक क्रीम सबसे मजबूत में कर देता है यह इसका नतीजा है कि आम लोग भी इसी तरह अगर उनकी जरूरतें पूरी होती है तो वह किसी सियासतदान किसी हुक्मरान भी किसी सरदार किसी नवाब किसी जागिरदार का सेवन शुरू कर देते हैं कि यह सब उनके तो पहल हमें नसीब हो रहा है को इनक्रीस ज्यादा इंसान गुमराही का शिकार इन रोजमर्रा की जरूरतों में है कि मुझे हो
जाता है रोजमर्रा जरूरत है जो उसकी परवरिश के लिए जो उसकी इस्तमाल जरूरतें और अनवर आदि जरूरतें हैं इन्हीं में बुमराह का शिकार होता है है और इसी बाबत अल्लाताला नी रहनुमाई हिदायत का ज्यादा हिस्सा और रुक रुक व्यक्ति के निजाम की तरफ मोड़ दिया है और इंसान को यह निशान समझाना जरूरी करार दिया है कि यह जारी है चेहरे इसी एक आयत के अंदर रूबी का जिक्र नहीं है और के दौरान तक अगर देखें तो अल्लाह की उलूहियत के साथ-साथ कसरत से जिस हकीकत का जिक्र है ₹1 मेहकता वाला है है यह इस आइए
शरीफा में अल्हम्दुलिलाह है और अब ज़िला आलम इन ए आर रहमान रखी में रूबी दत्त के तर्ज़ व अंदाज़ का ट्यून है यह रोबोट विद उलूहियत की तरह रख मानी और रही है है और हम चुके कुरान से ज्यादातर जन्मों से ज्यादा मानव अवशेष हनी अल्लाह के कलाम से ज्यादा हम बेहतर आशना उधर जमीन के कलाम से ज्यादा मोशन इन के कलाम से ज्यादा कुनै हमारा अल्लाह के कलाम से क्योंकि उस वास्ते से हम अल्लाह ताला का कलाम समझते हैं यह फॉरएवर बे फातेहा या फातिहा के अलावा यह हिदायत मिलती है तो हम फौरन पर
जम्मू और तस्वीरों और तर्कों के नतीजे में जो तरह में या वफा हीन यह बयान कि सिर्फ और हमारे शहर में वह आ जाते हैं कि अल्लाह की रूबी यह कैसी है इस आया के मुताबिक रख मान्यवर ही में यानी निहायत रहने वाला निहायत मेहरबान और निहायत नरमी वाला है यानी मेहर और नरमी कि रूबी थे खुदा का सुकून है रूबी थे इल आया कि जो बुनियाद है वह नरमी पर है की कुंठा हम इंसानों में चुके नरमी देखी है और इंसानों से नरमी के रवैए और नरमी के नतीजे लेकर हमने अल्लाह की तरफ से
इनको मनसुख कर दिया है कि इंसान नरम दिल इंसान हमने बहुत देखे हैं है और गर्मी उनके दिलों में देखी है और उसके नतीजे में मदद भी उनकी देखी है वह कितनी लोगों की मदद करते हैं के बाद सुलैमान है जैसे हजार नसीरुद्दीन तुसी रहमतुल्ला आले कि उनके तालीमात में है बयानात में है कि इंसान कि जब तक कि तोहीद इंसान की दुरुस्त ना हो अधिकाधिक तो ही दी नजरिया तोहीद का दिन की कोई चीज बल्कि जिंदगी की कोई चीज इंसान की सीधी नहीं होती दुरुस्त नहीं होते हैं है ना यह आदत दुरुस्त है ना
अमल दुरुस्त है ना रवैया दुरुस्त है ना यह तथा दो विमान दोस्तों जब तक तोहीद का सही तसव्वर इंसान के अंदर मौजूद ना हो है तो ही शिवराज भी फतवा हिदायत नहीं है तो हीरो उनवान हैं जिसमे अल्लाह ताला की उलूहियत विलायत पहला है वह दुनियां दूसरा है और रूबी तीसरा है कि जब तक यह बुनियाद इंसान परवाज़ी नहीं होती ऊपर जो अ मारत बनेगी वह सारी मखेश रहेगी है जैसे कि हम अल्लाह ताला की रस्मों सिफ़ात पौराणिक क्रीम में हिदायत के मशहूर में कि वह साधना करते हैं और दौरान नहीं कोई बात मोहन नहीं
कि मोबीन है बयान है कि विज्ञान है कुरान है और जो चीज बयान हो उसमें यह आम नहीं हो सकता कि मुबीन कभी भी का गरबा चीज नहीं हो सकती हमेशा आवाज है बहुत है और यही किताबे मुबीन अरबी मुबीन पौराणिक मोबीन कि यह हमारे लिए दरवाजे हैं कि आम आदमी के लिए एल्बम के लिए मुख्य शरीर को उनके लिए लगता है वहां-वहां में है है तो फिर को देखें तो ऐसे लगता है कि सबसे बड़ी उलझन जिंदगी में यही कुरान समझना है कि इस तरह से मदद है इस तरह से मुताबिक जब है कि
एक बात करते हैं फिर दूसरी इस्तमाल से कर देते हैं बस नहीं रुका है यह भी हो सकता है यह भी हो सकता है इन कोई जाति यकीनी चीज नजर नहीं आती है उनके बयान है कि यह Mushkil इस वजह से बनी है कि हमने है तो हित से इंसान के निशान तक सफर नहीं किया बल्कि इंसान को वर्कर इंसान की तस्करी करके इंसानी कमाल में दिक्कत करके और वहां से नतीजे लेकर अल्लाह की तरफ वंशवृद्धि है उनको से प्रभावित की भी और रहमत की भी अ कि हम नरम गूंथ नरम दिल इंसान देखिए हैं
तो उन इंसान भी देखे हैं दृष्टि इंसान देखे हैं बहुत ही औषधि निषाद इंसान भी देखें शायद पसंद देखें के नरम रवैए से वाले नरम दिल इंसान थे है जो हर एक पर मेहरबान होते हैं हर एक के ऊपर उनका लूथरा एहसान जितना उनकी कुदरत में है यह अंजाम देते हैं है और सारा दारोमदार उनके दिल की नरमी पर है की जमीन धर्मी अधर्मी अदिल और मेहर जो दिल के अंदर मौजूद है उन्हें हर भी ऐसी कुश्बू और नर्म यह दिल को ही कहते हैं कि इस महल और मेहरबानी की बुनियाद पर बना हुआ इंसानी
रवैय्या मैं इसको हम अगर कायनात की बुनियाद करार दें अ और दूसरा इंसान क्यों करते हैं मैं तुझे महज एक इत्तेफाक की उम्र हो जाएगा यह निशान नहीं है हो चुके दिल की नरमी है और इंसान का दिल नरम हो भी जाए पहले तो में नरमी को यकीनी अमर नहीं है कि जिस मंजर को देखकर रिक्तता में इस मंजर को देखकर इंसान का दिल नरम होता है अत मन बार-बार नरम हो गया हर इंसान का दिल नरम होगा अब कि कुछ लोगों के दिल नरम हो जाता है कुछ कर नहीं होता कुछ के दिल साबित
होते हैं कसावट होती है शिकायत होती है दिल में है जैसे हम देखते हैं अभी सुबह शाम है अभी कि कल ही या आज की सजा सुनाई गई यह सियालकोट में जुनूनी श्रीलंकन मैनेजर को बेदर्दी से क़त्ल किया जिन लोगों ने कि अदालत नहीं एक्चुअली अदालत ने सख्त सजा सुनाइए अ कि कुछ लोगों को सजा-ए-मौत दी है कुछ को उम्रकैद दी है और उसको भारी जुर्माने की और अपनी अपनी तरफ से सख्त सजा सुनाई अब आखिर तक पर बाकी रहती है या नहीं और पीले होंगी फिर वकील मैदान में आयेंगे र्इश्वर का निशान चलेगा फिर
आखिर में क्या होता है मालूम नहीं लेकिन रिप्लाई कदम अदालत नहीं अच्छा उठाया है कि इस मंदिर में आपने देखा कि एक मजमा है जब left सैकड़ों लोग हैं में 450 से ज़्यादा कमाई जमा है है और वह एक इंसान के ऊपर पढ़ बढ़कर प्रसिद्ध कर रहे हैं कि मेरे इनमें से किसी के अंदर नरमी नहीं थी रिक्त नहीं थे कि Bigg Boss को मार रहे हैं और न जो देख रहे हैं कि अगर नरम होती थी हैं तो या न मरते या दूसरे को रोक लेते अगर उनमें एक भी नरम दिल होता नर्म शुभ
होता रिकत उसको इस इंसान को यूं कुचलते हुए देखकर हुई होती तो वह रुकावट डालता है उसमें लेकिन ऐसा नहीं हुआ यह पूरा मजा आ था असल में अदालत नहीं यह जो सजा दी है जो मृतक के बेटे वरुण सारे मजमे को उस अ पूरी फैक्ट्री के अमले को उसके मालिक समेत सबको सजा-ए-मौत सुनाते तो भी हक बजाने बता चुके सा उसमें शामिल थे को उकसा रहा था कोई उनको मदद दे रहा था किसी ने माहौल बनाया एक फर्क भी ऐसा नहीं था कि जो का रुख रहा हूं 12 को समृद्धि में इन्होंने यह पहले
मुजरिम के तौर पर पकड़े हुए थे चांद चांद जेल में गुजार रही है फिर फौरन इनको निकाल कर धमका दिया कि यह बचा रहे थे है लेकिन उस बल्ब भी में सारे मार ही रहे थे कि कि अब यहां पर इस स्टेज तौर पर हंस सैकड़ों लोग में नरमी नहीं उनके अंदर नजर आई बाइक यह मंजर था जिसमें दिल में नरमी पैदा हो लेकिन यह नरमी नहीं पैदा हुई कि इंसान को जब कुछ धोखा दे दे वरगला दे झूठ बोले नरमी खत्म हो जाती है में यह नरमी बिल्कुल देखने को मिली ही नहीं सारे इंसान
कहलाते थे लेकिन इंसानी खूबसूरत जो रिक्त है का प्लेयर अहम मंजर देखकर वहां पर तरफ पैदा होना यह नहीं हुआ इस मद में के अंदर अ है और यह ऐसा यह अब दिन किसी और के हाथ चंद दिन पहले जो पुलिस आप चढ़ी बलवाइयों के हाथ में उन्होंने पोलीस की चढ़े और आती है व्यक्ति ही भी को यह मंजर लगता है तो छोटे-छोटे बच्चों को पकड़ के बेरहमी से कत्ल भी करते हैं उनके साथ जाती भी करते हैं औरतें ही इन वहशियों के हाथ लग जाए तो है और फिर यही जो दूसरों की बर्बरियत का
शिकार होते हैं खुद इनके हाथ को चढ़ जाए मैं तुझे भी मौत नहीं करते दूसरों को बेरहमी इंसान में किसी वक्त भी तारी हो जाती है और दूसरी तरफ से यह नरमी के बाद उक्त बिलास अब भी पैदा हो जाती है कि इंसान का दिल का हिस्सा थी क्योंकि दिल की नरमी यह सांस का नाम है कि इस इंसान में एक खिलौने की तरह है कि इंसान का एहसास खिलौने की हैसियत रखता है जिससे कोई भी खेल सकता है है और अहम सियासी दुनिया में और मतलबी दुनिया में कॉम के साथ से खिलवाड़ सुबह-शाम देख
रहे हैं हैं इनके साथ में शिद्दत भी लाई जा सकती है इनके साथ में रिश्वत भी लाई जा सकती है ए दिल की रोटी को नहीं के लिए कि शुरू नहीं कोई हकीम अंदर हो जिसे देखकर इंसान और नरमदल हो जाए रोना शुरू कर दिया बल्कि महज एक ड्रामा भी इंसान के दिल को रखिए कर देता है कि ग्रामीण वूमन ट्रेजेडी डराने ड्रामे बनाए जाते हैं जिनमें दुखिया मजमून स्टोरी उस ग्रामीण की कहानी दुखी होती है ये कहानी है फर्ज यह हुआ नहीं है से ड्रामे में एक्टिंग हो रही है है और ड्रामा देखने वाले
रो रहे होते हैं फिल्में ये दो किस्म की फिल्में होते हैं शाहिद कि कुशाल मजनुओं बिल्ली कॉमेडी फिल्में मजाकिया अस आने वाली फिल्में और रुलाने वाली फिल्म में जिनकी अंदर कहानी दुखिया किस्म की होती है कि इन फिल्मों के लोग जारों कतार रो होते हैं रो पड़ते हैं इन फिल्मों को देखकर और फिल्म देखने वाले को भी पता है कि फिल्म भेजिए वाक्य नहीं हो रहा है एक्टिंग हो रही है है और यह कसरत से हो रहा है और यहां पर इंसान का एहसास रिक्तियों कल बीसी उम्र महज एक कहानी फर्जी बात पर भी इंसान
के अंदर रिक्तता पैदा हो जाती है है और इसी तरह झूठ से दो-तीन दिन के अंदर दिक्कत पैदा की जा सकती है जो हमसे से कि एक मौलाना साहिब के बकौल के व फतवा गए हैं अनअदर रख मत कर योनि वह कहते थे कि जाकिर का नाम लेकर यह जब मुसाहिब पड़ता है तो मुझे 100 फिशर इत्मीनान होता है कि झूठ पड़ रहा है गलत पड़ रहा है लेकिन उसकी सूर्य इतनी सोचना है वह सोच में जब पड़ता है तो मुझे भी रोना आ जाता है यकीन होता है कि झूठ है सारा उस झूठ पर
भी मुझे रोना आ जाता है कि उस इंसान के साथ कि किसी भी बात से भड़काई जा सकते हैं किसी भी बात से दबाई जा सकते हैं मैं अभी सियासतदान पाकिस्तान के जिस राय साथ से खेलते हैं झूठ की बुनियाद पर धोखा फरेब और यह तारीख स्वर में होता रहा है कि इंसान के अंदर ऐसा साथ एक बहुत ही लतीफ शोभा है और खतरनाक भी है इस वजह से इंसान मार खा जाता है एक दूसरे से साफ के दरवाजे से कि हमारी ऊपर हमलावर होते हैं हमारे साथ का कंट्रोल अपने हाथ में ले लेते हैं
और हम जब हमारे साथ कि न केवल उनके हाथों में चली जाती है हमें न चाहते हैं फिर झूठ के जरिए फ्रेश के जरिए एक कहानी के जरिए के जज्बात और ऐसा साथ हो है उपाय अब इस अशांत किसी के नर्म करके जैसे गधा खड़े होते हैं कि यह करार नहीं होते ज्यादा है गधा पेशावर मांगने वाले हैं और मोहताज नहीं होते सरमायादार होते हैं अक्षर मैं पिन का बिजनेस कारोबार होता है बड़ा अपना पैर बहुत कम गधा फकीर होते हैं मैं यह तक कोई गंदा फकीर नहीं होता वह बीच में इक्का-दुक्का लेकिन अक्सरियत नहीं
होते यह जो चौराहे में खड़े हुए गाड़ियों से पुलों पर मांग रहे होते हैं बैठे हुए अपनी जिस्मानी आजा को बनाया होता है खास रिक्तता मिर्च बनाया होता है है और आप आसानी से लोगों को धोखा देते हैं तब तक उनके दिल नरम कर लेते हैं और नरमी से उनसे कम पैसे वसूल कर लेते हैं कि अगर हम यह कहीं के एक निजाम मैं सिर्फ मेहरबानी और नरमी की बुनियाद पर काम किया जाए नरमी और मेहरबानी एक एहसास है है और इस एहसास की बुनियाद पर अगर कोई चीज फाइनल कर दी जाए वह कितनी देर
पास है कितनी समानता है उसके चलने की कि युवक के तक हो सकता है कि अगर यह सांस वजूद में आया है तो लोग उसे हिसाब से मुतास्सिर होकर घर के काम करेंगे अ कि इस तबीयत व परवरिश के लिए बहुत अहम है एक जरिया हैं तबीयत का हिस्सा था के पूर्व जज बात लेकिन बहुत बड़ी कमजोरी भी है इंसान की है लिहाजा यह सात को हर तरह के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है मुसीबत काम में मन भी काम में कि तिब्बत के अंदर और और जहालत के अंदर भैरवी के अंदर एक साथ को
आप किसी जगह भी भड़का सकते हैं आप और सुना भी सकते हैं ए आर रहमान का मतलब अगर हम नरमी करें मेहरबानी और नरमी तो इसका मतलब यह है कि अल्लाह ताआला नी इस सारी कायनात को हालत किया है यहां पर खेल करने के बाद इसका इलाज के लिए जो निजाम बनाया है वह महज मेहरबानी के ऊपर कि मुनासिर करार दिया है है कि सब कुछ मेहरबानी के जरिए होगा मेहरो मेहरबानी उसका निदान है और वीरु मेहरबानी हो चुके नरमी है दिल की नरमी एहसास की नरमी है कि भाषाओं का मेहरबानी शामिल हाल जाती है
किसी ऐसे शख्स के बारे में है जो स्टॉक नहीं रखता कि उक्त जहां यह साथी का माहौल हो इंसानों में है अब तालीम की शोभा को निकाल लेते हैं कि एक मुस्लिम में पड़ता है और इम्तहान लेता है है और यह मुस्लिम बहुत मेहरबान है है और मेहरबानी इसकी नरमदिली किसी ऐसे तालिबे इल्म के मुतालिक पैदा हो गई है जो और मेहनती नहीं है मुस्तैद नहीं है संजीदा नहीं है जिद्दी नहीं है किसी और वजह से है इस क्रम में वीरवार इस तालिब इल्म का इस उस्ताद के दिल में आ गया किसी भी वजह से
हो में नरमी के लिए जरूरी तो नहीं खत्म रिश्तेदार भी शामिल हो को पिक बहुत ही मुस्तैद तालिब इल्मों है लेकिन उस्ताद यह मुस्तैद तालमेल उस्ताद के मेहर को हासिल नहीं कर सका मुतास्सिर नहीं कर सका आ और उस्ताद की मेहरबानी अपनी तरफ मुतवज्जे नहीं कर सका उसकी वजह से एक नालायक तालाब एवं कि के उस्ताद के मेहर को अपनी तरफ खींच लेता है है अगर नसों में तालीम मेहरबानी की बुनियाद पर हो है कि उस्ताद करने हर ओर रेखा तो नरमी की बुनियाद पर नंबर दे है तो नतीजा क्या होगा इस क्लास का है
जहां पर मेहरो ए मोहब्बत मेहर और नरमी नालायकों ने हासिल कर ली है और जो लाइक हैं वह की तालीम में तो लाइक हैं पढ़ाई में लाइक है वहां उन्होंने भरपूर की कोशिश की है कि मतलब कुछ समझ गए हैं किताब को समझ गए हैं दर्द को समझ गए हैं अजहर भी किया हुआ है पेपर भी बेहतरीन दे सकते हैं लेकिन एक शो में में नाकाम रह गई हैं उस्ताद का बिहार और उस्ताद की रहमत और रैम और तरह रुक हासिल नहीं कर सके अब हैं और अगर हम यह के राष्ट्रपति सुंदर नर्म दिल्ली से
नंबर देने का नाम रख मत है तो नरमदिली के तहत लाइक को तो नहीं मिलेंगे क्योंकि उसके मुताबिक उस्ताद के तेल में नरमी ही पैदा नहीं हुई नरमी ना लाइक के बारे में पैदा हुई है हैं और अगर नंबर नरमी के तहत देने हैं रस मदद नरमी का नाम है तो रहमत के नंबर तो सारे उस नालायक मिलने चाहिए क्योंकि रहता उस पर आ गया है में नरमी के जरिए से अगर कि तुम हम तालीमी नंबर तक सीमित करने हैं तो इसमें जरूरी नहीं कि हम जो मुस्तहिक़ और उसको भी मिले हैं कि जुलाई के
उसको भी मिले हैं कि वुमन इन पहलों के दिनों में की कोशिश करते हैं तो लाभ सा किरदार कुसुम जो फैसलाकुन एक मंत्रालय के अधीन तेज से बोर्ड के दाहिने जिनमें अब तक होती है क्लास में दूसरी क्लास में जाना है वहां पर वह स्थानों का मेहर और तरह बहाल करने की कोशिश करते हैं है और बाद उस्ताद मुतास्सिर होकर तरह उन्हें पैदा भी हो जाता है फेल होते ताल एवं को तरह की चार नंबर देकर पास कर देते हैं या दूसरी पोजीशन पर हाईवे नंबर को तरह के जरिए पहले नंबर पर कर देते हैं
तो यह तो नाइंसाफी है कि अगर आपने साले सतन अतः को मजबूत कर देना है तरह उनके साथ नरमदिली के साथ और मेहर के साथ जोड़ देना है तो मेहर का कोई पैमाना तो नहीं है नरमी के ही भी पैदा हो सकती है किसी भी हालत पर भी नरमी पैदा हो सकती हैं कि अगर यह नरमी आ गई और आगे इस तेल का खतना हुआ तो नरमी का में पैमाना तो पूरा है मैं जार मुकम्मल है लिहाजा नरमी के तहत यह निशान दे दिया जाएगा यह काम कर दिया जाएगा कि यह मसला अब हम एक
बूंद की मजबूती निशान को देखें आज इस वक्त पाकिस्तान में कि पाकिस्तान के यह सब का बजरिया दम श्रीलंका गए थे 12 साल पहले और वह शायद वहीं पर उन्होंने बयान दिया था कि श्रीलंका के सदर ने मुझे महंगाई कंट्रोल करने का नुस्खा और कॉर्ड समझा दिया है फिर वापस आ गए और वह शायद भूल आई वहीं पर चुके मुल्क में आकर उन्होंने उसे इस्तेमाल नहीं किया और अच्छा किया नहीं किया क्योंकि श्रीलंका अभी महेश पीले हाथ से महंगाई के हाथों मुकम्मल दिवालिया हो गया है ऐलान कर दिया है यह वाहिद रियासत है आज इतने
हेलो दोस्तों मैं हूं मालिक के अंदर के जिसने ऐलान किया है कि यह फकीर हो गया है दिवालिया हो गया है मैं अपने खर्चे पूरे नहीं कर सकता अपने कब्जे नहीं उतार सकता है कि श्रीलंका में यह काम हुआ है आज हमारे प्रिय तुम सब कह रहे थे कि श्रीलंका ने मुझे समझा दिया है कि महंगाई कैसे कंट्रोल करनी है अच्छा हुआ यह भूल गए वह गुफा वरना पाकिस्तान दूसरा वॉल्व होता दिवालिया कि हमारे जो साफ बता है वजीर भोजन एवं के बाद याद के एक मुजरिम हैं कि उन्होंने बाकायदा ऐलान किया था इंजन का
काम यह दरामद इकट्ठी करनी है सरकारी तौर पर वह इदारा एपीआर कि बरामद अट्ठी करने वाला कि उसका यह बयान था कि यह बिल्कुल धीमा लिया उन्होंने पाकिस्तान के बारे में कहा था कि शबरी दी कि यह दिवालिया हो चुका है कि पाकिस्तान भी श्रीलंका से पहले लेकिन इन्होंने अनुसार नहीं किया आईएमएफ की मदद और वर्ल्ड बैंक की मदद से उन्होंने अपने आपको फर्क बाकी रखा हुआ है कि हैप्पी व्यक्ति इन 22 करोड़ अवाम को की जिंदगी के वसाइल मोहनिया करनी है रोजगार देना है दरामद के मौके देने हैं और जरूर जाते जिंदगी पूरी करने
के लिए हुकूमत को सारा निजाम पर हम करना है कि यह उक्त की बुनियाद जिम्मेदारियां है की तालिम सेहत रोजगार क्रश रोटी-कपड़ा-मकान सफर हिफाजत सलामती यह सारी चीजें लोगों की बुनियादी जरूरतें हैं कि इन बुनियादी जरूरत तो हर फर्द को मूल के हर फर्द को यह जरूरत हासिल होना जितने भी अपराधी छोटे हैं बड़े बच्चे हैं और तो यह किसी मजहब से तालुक रखते हैं मुस्लिम हजार मुस्लिम है रियासत के फराइज में से है हुकूमत की जिम्मेदारियों में से है कि हर फर्द को उसकी जरूरत की चीज पर हम करें मैं पिन को रोजगार फ्रॉम
करें ताकि दरामद के जरिए खुद अपनी जरूरतें पूरी करें अगर रोजगार नहीं है तो फिर इन्हें द्वारा अपनी मुआवजे के बगैर इनको सारी जरूर जात हुकूमत पर हम करें अ इन सब का हुकूमत नहीं एक में रख बानी जो तरह मी की तरह मानी न जानता किया लंगर खाने से है क्योंकि मैं डिस्टर्ब तो नहीं कर सके लोगों की जरूरतें पूरी नहीं कर सके को रोजगार नहीं दे सके बल्कि अपनी पॉलिसियों की वजह से अपने ना तजुर्बाकारी की वजह से कि अगर मध्यावधि ना कहीं हम ना तजुर्बाकारी की वजह से और में गफलत की वजह
से अनाड़ीपन की वजह से कुछ नहीं कर सके जो रोजगार था खाओ वह भी खत्म हो गया मसलन जो कुछ तो करो ना नहीं खत्म कर दिया कुछ हुकूमत की पॉलिसियों में खत्म कर दिया कुछ इनके को आर्मी ब्वॉय जॉब आर्मी अदाओं से के हुए थे उन्हें खत्म कर दिया नतीजा यह हुआ कि अब लोगों को मैं अपनी एक मुतबादिल निजाम दिया है में रोजगार के बजाय लंगर खाना बना दिया लंगर खाने हर शहर में बनाए कि शहर के चांद हिस्सों में शेड बनाए कमरे बनाए और वहां पर खाना पकता है दो टाइम का सुबह
दोपहर और शायद नाश्ता भी मिलता है मुझे नहीं मालूम कि वहां पर खाना पड़ता है और अक्सर लोग रोजगार वाले भी बेरोजगार भी कभी भी इधर-उधर के वहां के वहां जाकर खाना खा लेते हैं कि यह एक हमारे साहब का हुकूमत नहीं महिष्मति कदम उठाया है में लंगर खाने बनाकर अ को खूब यह लंगर खाने कि अगर देखिए तू कि यह किस तरह की मैयत है इसको क्या नाम दे हम मैं इसमें इशरत को इस तरह से कॉम की परवरिश करना इस तरह से लोगों की जरूरतें पूरी करना में लंगर खाने के तरीके से इन
सारे लोग जाति वसीयत में आप तमाम को खराब हो जाएंगे मालूम हो जाए उनके पास खाने की रोटी ना हो फिर हुकूमत खाने पकाकर तक SIM करें है इसका नतीजा यह है कि यह सारे लोग फकीर बनाएं पहले इस निलामी मईशत में मैं पहले सबको पत्र की हद तक पहुंचा यहां कि ऐसा इंतजाम बनाए कि यह सारे अपना रोजगार अपना कारोबार अपनी बरामद कर सारा जरिया खो बैठे हैं है और जब मालूम होने के बाद बाद मरना शुरू हो भूखे कि वह जाए और भूख से तड़प ना शुरू हो चीखना शुरू करें और फिर इन
का पेट भरने के लिए आप उम्मीद दस्तरखान पर शहर के सेंटर में और यह सफेद लगाएं लाइन लगा है वहां खाना लेने के लिए खाना लेकर वाकई फिर इनकी तस्वीरें आप लगाएं और न शेयर करें कि हम अपने अवाम का इतना खयाल रखते हैं कि यह तर्जे हुकूमत इस तरह बुद्धि तर्जे हुकूमत है तरफ घूमी हर्ज हुकूमत तर्जे हुकूमत है यह तर्ज मईशत है इस तरह हमसे क्या बुरा है वही जो आप लोगों ने किया है नरमदिली रिश्वत और मैहरो में नरमी वाली की हालत के अवाम की हालत तरफ मेष हो जाए और हुक्मरानों में
रहमान जाए अब हम को देखकर और फिर हम रात रख दिल बने नरम दल बने मेहरबान हो और बैतुलमाल से इनको खाना पकाकर इस तरह से तक सिंह करेंगे 176 पेजेस से बहिष्कृत इन होनी सरमायादारी निजाम से सीखा है कि यह अल्लाह का रहमानिर रहीम इंतजाम नहीं है कल सुबह इसको है बल्कि पुत्र यादव ने आखिरी दिनों में है एक तो सब कजरिया सनी नारा लगाया था कि पाकिस्तान को रियासतें मदीना बनाएंगे इस्लामी बम लेकर और दूसरा किस्मत और लीला आलमीन कमेटी भी बनाई थी का रस मिथुन लीला आलमी मुजरिम सैफरन मदन लाल मित्तल ऑफिस
नहीं कर सकते थे यह लव ज़बान से अदाणी निकलता था वह में लेकिन उन्होंने बना दी है यह कमेटी जो नहीं कल ऑफिस हो सकता था उनसे रक्षकों ले आलम इन रसूलल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम का लगवाने जो अल्लाह ताला नहीं तोड़ा ने खरीदने दिया है है जिससे यह तो सूर्य मिलता था कि रियासतें मदीना का और रहमत और नेल आलम हिना का जो इनके जहन में तसव्वर आया है जो उनको समझाया गया है वह यह निशान है लंगर वाला लंगर खाने वाला और तरफ घूम इंतजाम अ कि यह तरह हम इंतजाम कि
सरमायादारी निजाम से पैदा हुआ है यह तर्ज मे shatt-al-arab और समझदारी निशान हम जिस मी कि आप तमाम दुनिया की सरवत समेट के अपने पास जमा कर लें अ का हक रे आपको सरमायादारी निशान इजाजत देता है कि चंद अपराध या एक फाड़ दिया खानदान तमाम लिखित की सरवत समेटने में में जूट से मकर से फरेब से कोशिश से मेहनत से हर हर बे से इस्तेफ़ादा करके सारी दुनिया की सर्वोच्च समेटे अपने को शुरू कर डाले अपने खजाने में बंद कर ले अब है कुछ लोग यह सब कि सर्वसमाज के अपने घर ले आइए तो
यह बाकी क्या करेंगे उनकी सर्वत्र ओं कि आप ने ले ली अब वह क्या करेंगे अपनी जरूरतें कैसे पूरी करेंगे कि उनकी जरूरतें पूरी करने के लिए इन्होने एक तरफ बीम सिस्टम बनाया है एनजीओस के नाम से अ 20 नियर हुकूमत इदारे की दाल गवर्नमेंट ऑर्गेनाइजेशन सरकारी ड्यूटी गैर-सरकारी कि सरमायादार फैक्ट्रियों के मालिक मिलों के मालिक कारखानों के मालिक कंपनियों के मालिक इंतजार तो के बड़े-बड़े मालकिन कि यह चुके शर्मा या तो इन इशारा जमा कर लिया अपने पास सारा पूरे मामले कतका अ कि अब बाकी लोग जिनका शरमाया इन्होंने उनसे ले लिया है यह
क्या खाएं हैं हैं उनके लिए इन्होने एक है रात इदारा बनाया है वो गर्म दिल्ली मेहरबानी की बुनियाद पर यह मेहरबानी है कि कि बसंत जितनी बड़े-बड़े सरमायादार हैं 1971 फाऊंडेशन भी बनाई हुई है है जैसे बिलगेट और उसकी बीवी अब अलग हो गए हैं लेकिन फाऊंडेशन दोनों मिलकर चला रहे हैं यह मदद करते हैं लोगों की थी कि किसी को मुर्गियां खरीद के देते हैं किसी को बकरियां खरीद कर देते हैं यह वज्रासन साहब ने हमारे जो मुर्गियों बकरियों की महत्वता आरोप करवाई थी उन्हीं की रहनुमाई में की थी कि आप तरीका यह है
कि पूरी कौम का पैसा सरवत मुखतलिब वाहनों से आप सरमायेदार जमा करने फिर कब मरेगी ना मरने भी नहीं देंगे हम खैराती इदारे बनाकर और इनको खैराती किरदारों के जरिए से मेहरबानी और तरह हम के दस्तरखान बनाकर उन पर बिठाकर तो इनको इतना खिलाते रहे कि जिंदगी गुजारते रहें लेकिन कि यह किसी चीज के मालिक ना हो किसी चीज का इश्तिहार ना हो किसी चीज की इनके जो उनकी बुनियादी जरूरतें है वह उनके पास मौजूद ना हो नहीं के पास इतनी इस्तेताअत हो इस तेज दर्द हो ताकत हो माली के वह अपनी बुनियादी जरूरतें हासिल
कर सकें अ कि यह सरमायादारी ने जामनी मैं अपनी ने उस जुल्म है और कस्बे के जवाहर मी अपने जमीर को तसल्ली देने के लिए लोगों को धोखा देने के लिए कि यह एक शरारती तरह चूमती नियम भी बनाया हुआ है है और उसमें फिर साल में मुख्तलिफ लोगों पर जाकर के मुल्कों में जाकर इन फकीर लोगों की लाइनें लगा करें इनमें कुछ फिजूल छुआरे बांटते हैं है और कपड़े के जोड़े कभी बता दे तभी चूड़ियां कभी खिलौने कभी औरतों को कभी मर्दो को फिर उनकी फिल्में बनाते हैं और कि यह नश्वर करते हो खुद
फिर बहुत खुश होते हैं कि हम दुनिया के जरूरतमंदों फकीरों और भूखों की इतनी मदद कर रहे हैं को शुरू कर दी गई इनकी नसीब होती और दुनिया भी उनकी बड़ी तारीफ हैं करती है कि यह निजाम अल्लाह ताआला पानी नहीं रखा अपनी मामले कत के लिए और अपने महलों के लिए ना कायनात के लिए नहीं इंसान के लिए यह तरह बात इंतजाम नहीं है कि यह रख मानी निजाम नहीं है मैं इसको नीचे तेरा ख़त है कि लोगों के बुनियादी हकों को उनसे छीन ले कि उनकी बुनियादी जरूरतें हैं उनसे छीन ली रोजगार और
छीन ले शर्मा या उनसे छीने और उनका जो हक बनता है एक शहरी होने के नाते वह मुझसे ले ले वह सारा चैनल पर आपके पास जमा हो जाए और फिर लोगों को आप चेहरा तीर्थस्थल खानों पर लाकर बिठा दें यह बदतरीन मईशत इंतजाम है कोई दिन के नाम पर बनाए का मुख्य जोर के नाम पर बनाए और यही इस वक्त तकरीबन हो चुका है सरमायादार दुनिया निखार के ऊपर आ चुकी है सरमायेदार तब का दुनिया में मौजूद में आ गया है पहले को बनने में मसरूफ थे सरमायादारी की दौड़ थी पहले सरमायेदारी की दौड़
में सब कोशिश कर रहे थे जिन्होंने दौड़कर बनालिया बनालिया है अब दूसरों के लिए मैं वाकई बहुत कम रह गई है कि दूसरों को बहुत जतन करने पढेंगे बहुत मेहनत करना पड़ेगी कि इनकी संख्या शामिल हो की जमीन तक SIM तकरीबन अंजाम पा चुकी है सरमायेदार तब का पूरी दुनिया में निखर के ऊपर आ गया है ताकि जो चुका है वसाए ले जिंदगी पर इंसानी व साल के ऊपर बाकी सारी इंसानियत इन के रहमों करम पर है हैं अब इनके दिल नरम होंगे इंसानियत के लिए यह नर्म यह दिल और रेखा बिल्कुल भी के नतीजे
में बाकी मानता इंसानियत के लिए खैराती दस्तरखान बनाएंगे अंजुमन ए बनाएंगे एनजीओस बनाएंगे और उन्हें कभी राशन तक सिंह करेंगे कभी दवाई तक सिंह करेंगे कभी क्या और बाकी दुनिया जो 99% कि इंसानियत है वह सब इन के रहमोकरम पर हैं पाकिस्तान में यह जो साहब का हुकूमत नहीं काम अंजाम लिए अलग रख खानी यह इस तरह से ज़िंदगी का नतीजा है या उसकी अम्मा जी करता है है कि जो भी हुकूमत लंगर खाने बनाती है तो इसका मतलब है कि अवाम को यह पैगाम है कि आप अभी गधों की तरह इन खैराती दस्तरखान ऊपर
पेट भर होंगे यह उम्मीद दिल से निकाल दो कि आप अपने घर में भी दस्तरखान बचा कर खा सकते हो या अपनी जरूरतें अपने घर में अपने कारोबार से और अपने तजुर्बे से हासिल कर सकते हो तो यह दूसरे लक्षणों में यह उसके अंदर पहला है कि यह तरह बातें यह तरह का मतलब नरमदिली और यह रहमत के लिए देखिए तो यह सबसे बड़ा रहमानी ने ग्रामीणों ने बनाया अगर रहमत का मतलब नरमदिली करें आप अगर रहमत का मतलब रखत निकल भी करें तो यह सबसे आइडियलिज्म यह बनता है कि तमाम इंसानियत महरूम हो जाए
बुनियादी हकों से फिर इकट्ठे कल भी आपकी उम्र यह साकुरे इतने लोग मर रहे हैं जैसे अभी अफगानिस्तान में किया उन्होंने अफगानिस्तान में कि वहां मुदाख़िलत करके और मूलांक 1 जून तबके के हवाले कर दिया है है और अवाम से बाकी तमाम मैदान ने बगावत का मैदान से संसद का मैदान तालीम का मैदान कारोबार का मैदान छीन लिया है और उनको बिल्कुल नेता करके भूखा करके अब उनके लिए खुदाई शुरू हो गई है कि अफगानी मरने वाले हैं उनके लिए राशन भेजें ने हजार ट्रक भर के अभी सउदी अरब से छुआरे आ रहे होते हैं
कभी हमारा आपसे खजूरिया रही है कभी इंडिया सेवन के लिए पाठ पढ़ा रहे हैं कभी उनसे चाइना के लिए उनके लिए बिस्किट आ रहे हैं यह उनका मदद शुरू कर दिया अफगानिस्तान की यह दर्द है और कितनी नरम दिल लोग हैं देखेंगे यह कि मुसलमान बल्कि गैर मुस्लिम मूल कितनी मदद कर रहे हैं कि यह अरब क्षेत्र में मदद कर रहे हैं कि पश्चिम भी होती है उसके लिए मैं सिर्फ और सिर्फ तरीन अजीब है यह माना रहमत का यह किया आपने नरमदिली और रिक्त और नरमदिली और रिक्त के मंजर को याद करो ताकि इंसान
का दिल नरम हो अगर रिक्तता मिर्च मनाज़िर ही ना हुए तो रेखा बिल्कुल भी कब्ज पैदा होगी अगर मोहताज और मिस्कीन और यह फकीर लोग इन हुए तो दिल नरम किसका होगा तो पहले दिल नरम करने के लिए तो इंसानियत को इस दर्जे तक पहुंचो कि ताकि अमीरों के दिल नरम हो सरमायादारों के दिल नरम हो और अल्लाह का रस मानी निगम यह नहीं है और अल्लाह का निशान में रूबी थे इलेक्शन जीत का निशान हुकूमत और रघु भैया दोनों रहमानी है व रही है लेकिन न रेखा तो नरमी की बुनियाद पर बना हुआ निशान
बल के इस प्रकार की बुनियाद पर बना हुआ निजाम के अल्लाह ताला इन को पैदा किया है हल ह किया है किस तरह अलग पिया है इससे दांत देकर खनक किया है सलाहियत देकर कमाल देकर हालत नहीं किया इसलिए देख-देख कर खोल किया है कमाल हासिल करने के लिए पैदा किया है कि इंसान बनाकर पैदा नहीं किया इंसान बनने के लिए पैदा किया है में उपलब्ध पैदा ही इनको सलाहियत स्पेस दर्द स्टॉक देकर पैदा किया है तो अब यह सिद्धांत कमाल में कैसे बदलेगी मैं पहले सलाहियत दिए कमाल नहीं दिया कमाल से खाली बीच पैदा
किया है इस बीच ने परवरिश पाकर कमाल तक पहुंचना है मैं तुझे जो सामान वसाइल जिनके जरिए से इस बीच ने कामिल होना है वह सारी जरूरतें इसकी इस तरह की बुद्धि जरूरत बन जाती है जाति जरूरत है इसकी ई जो व्यक्ति द आपका दिल नरम होगा तो इसको आता होगा ना कि वह इसकी जाति जरूरत है क्योंकि साथ में यह फेरदे कब पैदा हुआ है हैं और इसमें कमाल तक पहुंचना है कि इसकी तक का मूल्य जीरी इसकी मुस्तक मिली अत का तकाजा यह है कि इसको हर चीज पर हम की जाए इसलिए खुद
आवर तबारक व तआला का फ़रमान है कि को पता बुलंदशहर रखना पुरावत द्वारा को तालिबानी अपनी ऊपर रहमत को वाजिब लाज़िम क़रार दिया है वर्ष मति वसीयत खुला 6 और मेरी राह मत हाथ से के लिए न यह जो चीज नरमी रिक्त पैदा कर सकी हैं जो कभी आप हो जाए अल्लाह में नरमी पैदा करने का उसके लिए तो अल्लाह नरम और मेहरबान है लेकिन जो नहीं कामयाब हो सका अल्लाह के नरमी का जज्बा या रख मत नहीं भर सका वह मालूम रहेगा ना ना कि मुझे इस हालत में भी है जिस चीज का मोहताज
डुबी तौर पर वह चीज अल्लाह की तरफ से उसे हटा होगी और किसी मुआवजे के बदले भी नहीं होगी इन यूनियन के अलग की तरफ से यह चीजें आपको मिल रही हैं तो इसके बदले में आपने अल्लाह के लिए यह काम करना है कि यह आपका जाती इस्तेखार है यह आपका बुद्धि इस तरह के भी इन्हीं आपकी हस्ती जिस तरह से बनाई गई यह गंदम का दाना कंडोम का बीज इसको जरूरत है किस चीज की जरूरत है मिट्टी की जरूरत है नमी की जरूरत है खाद की जरूरत है रोशनी की जरूरत है हवा की जरूरत
है यह सारी चीजें बीज को काम मिल होने के लिए चाहिए और यह सारी चीजें रख बात है इस बीच के लिए क्योंकि यह बीच को मिलेगी तो यह बीच पौधा बनेगा है न कि बीज अगर मेहरबानी और मेहर पैदा करने में कामयाब हुआ नरमी और रिक्त इजाद करने का विवाह हुआ तो फिर तो इसको यह सारी चीजें मिल जाएगी लेकिन जो बीज यह तड़प पैदा नहीं कर सका अपनी हालत ऐसी नहीं बना सके रिक्तता पैदा ही नहीं हुई था लेकिन मेरा अपनी ना फिर रिबेका इनायत रिक्त के हिसाब से उबर रहा है मजा है
रिक्त में सिर्फ 34 अलविदा में शहद लगाएं इसमें से है सिर दिक्कत कमालात नहीं है इंसान अगर रफीकुल काल भैरव तंत्र ने बहुत अच्छा इंसान है लेकिन रिक्त एक नक्श है ताकि शुगर है इन्फिडेल है एक कमी है फाइल के अंदर जो रिक्त की सूरत में समाया होती है अल्लाह की जार में यह इन फिर हालात नहीं है तास्सुरात नहीं है हफ्ता आलम यह व्यक्ति कल भी व नर्म यह दिल इस तरह नहीं जैसे मखलूक में है आप माना रख मृत का महलों की कैफियात से हासिल करके फिर उसको खा ले की तरफ रिश्वत देकर
फिर खाना लेकर निजाम को भी नरमी ओं मेहरबानी की मात्रा में करते हैं अल्लाह का निजाम रूबी पर वर्षी तमाशा के लिए है इंसान के लिए भी है है और पिक जमीन हिसाब है अल्लाह ताला का जिसमें कोई मालूम नहीं है कि कोई ऐसा मौजूद नहीं है जैसे अल्लाह ने पैदा किया हो और वह अपनी परवरिश के सामान से महरूम हो इंसान भी तक जमीनी तौर पर भी महरूम नहीं है किस चीज से और प्रसिद्ध तौर पर भी अपनी हिदायत और परवरिश के निजाम से महरूम में ही है सब कुछ रहमान और रहीम ने कि
उस तक आ जाए रूबी के तहत वर्ष पर्वत की बिना पर इंसान के लिए मुठिया कर दिया है लेकिन इंसान का जो तस्करी की निजाम है परवरिश का उसमें इंसान ने इस निर्णय में रूबी में कुछ शामिल होना है इसका हिस्सा बनाना है और इसको अपना ना है तक विनी तौर पर तो नहीं है जैसा तक जमीनी तौर पर कि इंसान रुष्ट करता है इंसान के जिस्म में खून बनता है इंसान के जिस्म में रजा जाती है यह खजूर उसके जिस्म का हिस्सा बनती है कि यह कहो हक में खुदा है उस अभाव में खुदा
है और अंजाम पा रहा है खुद का तरीके से इंसान का अमल दखल इसमें बहुत कम है है लेकिन बाकी जो इंसान की परवरिश के मसाइल है जो अलार्म दिया कि यह लेकिन इंसान नहीं उनको हासिल करना है उन तक पहुंचना है यह खुद इंसान ने बढ़कर हासिल करना है यहां पर अल्लाह ही अल्लाह की रहमत यह है कि खुदा वन तबारक व ताला नहीं वह सब कुछ मुहैया कर दिया है जरूरत की हर चीज रहमत है क्योंकि बिना मुआवजा है विला अवध है इस वजह से यह रख मत है यह मैं इसमें जैसे के
अल्लाह है कि रिक्त 22 बनी है कि खुदा की हाल आपकी आदत खुदा से देखी नहीं जा रही है इस वजह से खुदा ने यह सब कुछ पैदा की है ना इस वजह से भी ना कि वह आपके हालत देखकर खुद आप बहुत मूड फाइल है अल्लाह की जात महा जला मुतास्सिर है बड़ा शदीद नागवार गुजर रहा है अल्लाताला को आपकी कैफियात देखकर और फिर अल्लाह की नरमी कसम अंदर तूफान में आता है मौज में आता है और यह सारी रहमतें खुदावंद द्वारा तथा लाकर देता है ना इस वजह से कि वह खा लेते हैं
आपका उसने शिरकत की है शिरकत किस तरह की है इससे ज्यादा पैदा की हैं कि अब अगर तू कामिल पैदा करता तो शायद आगे ऊपर वर्ष की जरूरत होती है क्योंकि हर चीज का मिल पैदा की है इस तेज आधी पैदा की यह तो यह से दाएं परवरिश मानती है इनकी परवरिश के लिए अब अल्लाह रहा है परवरदिगार है परवरिश धंधा है परवरिश कैसे देगा रहमतों रही मित के जरिए देगा यानि इनकी जितनी जरूरतें हैं वह सारी की सारी बिला अवश्य मिला मुआवजा इनको अल्लाह ताला ने आता करनी है वह दो तरह की है तक
कमीनी इनको खुद का तरीके से मिलती रहेगी तस्वीर के लिए इनको अपना शोर इस तैयार और इरादा इस्तेमाल करना पड़ेगा उसको उन्हें समझना अगर उस तक पहुंचना होगा यह कि यह अल्लाह ताला का निशान ही रूबी है रहमानी व रश्मि रमानी ब्राह्मी को हम यह समझें कि अल्लाह ताला ने कायनात को एनजीओस की तरह चलाना है कि पहले सारी मखलूक ए खुदा मजलूमों महरूम हो वो प्यासी वह भूखी हो और बेरोजगार हो जरूर जाते जिंदगी की मोहताज हो फिर अल्लाह को इन पर रह माय फिर हम करते हुए उनके पेट बार दे सदा यह नहीं
है रखना नहीं लेते खुदा रस मानिए के अलावा यह है कि जूही इनको पैदा किया है इनके तक इनको मुस्तक मेल पैदा किया कमाल वजीर पैदा किया है और इनकी पैदा करने के बाद इनके परवरिश के तमाम वसाइल खुदा ने मोह लिया कर दिए हैं इनके लिए इनकी कमी दूर करने के लिए इनका गलत दूर करने के लिए हर चीज अल्लाह ताला नहीं पर हम कर दी है वह उसमें एक हिस्सा फाल इनको अल्लाह के इरादे से नसीब होता है दूसरा हिस्सा इनके इरादे से और इनकी कोशिश हे बोरेन के शोर से इनको नसीब होगा
और यह सब कुछ जो अलार्म जाता है किया है यह जरूरत की हर चीज बिल आप अवश्य मिला मुआवजा है इसलिए यह परवरिश का रख बानी वा रोशनी में इंतजाम है है और यही इंसान ने भी लागू करना है इलाही रूबी निजाम इंसान ने चुके इंसान अल्लाह की हुकूमत खान करने के लिए जमीन पर आया है अल्लाह के हाथ में यह नोटिस करने के लिए आया है 22 कि खुद अल्लाह के मुकाबले में अपना निशाना बनाकर ऑफिस करिए और अल्लाह से दुआ मांगी अल्लाह जो निजाम बनाया है वही इंसान ने लागू करना है यानि जो
रूबी निजाम अल्लाह नहीं काम किया है वह जो इंसान के इरादे और प्यार से मजबूत है उसको इंसान ने जमीन पर नाफ़िज़ करना है अल्लाह की रूबी रख मान्यवर हिंदी ड हुकूमत को यह घुमाते इला ही और यह दौलतें इस्लामी बनती है दौड़ते करीमा बिजनेस में हर इंसान अपनी मानवीय एवं आधी जरूरत अपने पास मोहल्ला रखता है लेकिन यूनिक उसे सब कुछ किए बगैर कोशिश के मिलेगा ले लें निशान एवं आशा इंसान इरादा वर्ष यार जो लेकर आया है यह बहुत सारी इन चीजों तक इंसान को खुद पहुंचना होगा फिर हम कर दिए मोह लिया
कर दिए लेकिन हूं सूर्य के लिए इंसान को तो गुर्दों करनी होगी यह है और यह अल्लाह तआला का फ़रमान है इस बुराई मुबारका फतेह में अल्हम्दुलिल्लाह शेयर रब्बिल आलमीन और रब्बुल आलमीन कौन है और रहमानिर्रहीम जो रहमान है और रही में रहमान रहीम टेरिफिक बयान किया है रहमान लोकायतन उसका माना है जिसके अंत में अतिथियों में फ़रावानी हो शिद्दत हो मुबालगा हो और रहीम का मतलब है जिसमें समाप्त हो तलाश हो ज़ूम हो यानी तसलसुल हो बगैर वक्फ के यह रहमत होगी तो यह रहीम है और फिर ऑन है यह रहमान हैं तो यह
फाइव वन रहमत और टाइम ही रख मतवल आजमी व साबित रखना यह न कि प्रभावित का अंदाज़ है जो इंसान के लिए अलार्म नी मुकर्रर किया है कि आगे इस आयात दिगर है मालिकों ने दिन इला आखिर इन बाद में बयान करूं सल्लल्लाहो ना मोहम्मदीन वा आले है तो यह भी लगता है