ढाई हजार साल बीत चुके हैं, लेकिन एक नाम आज भी पावर, एंबिशन और कॉन्क्वेस्ट के सिंबल के तौर पर याद किया जाता है और वो नाम है एलेग्जेंडर द ग्रेट। एक ऐसा कॉनकरर जिसने अपनी छोटी सी जिंदगी में दुनिया का नक्शा बदल दिया। 20 साल की उम्र में थ्रोन संभालने के बाद कुछ ही सालों में ग्रीस से लेकर इजिप्ट, परर्शिया और इंडिया तक एलेक्जेंडर का कब्जा हो गया था। उस दौर में जब कम्युनिकेशन स्लो था, मैप्स इनकंप्लीट थे और ट्रैवल को महीने या सालों लग जाते थे। एलेग्जेंडर ने हिस्ट्री का सबसे बड़ा एंपायर खड़ा कर
दिया था। ग्रीक फिलॉसफी, पर्शियन एडमिनिस्ट्रेशन और ईस्टर्न ट्रेडिशंस का उसने ऐसा कॉकटेल बनाया कि दुनिया देखती रह गई। आखिर अलेक्जेंडर ने यह सब कैसे किया? क्या वो सच में ग्रेट था? या सिर्फ एक एंबिशियस यंग किंग जो सब कुछ जीत के भी खुद को जीत नहीं पाया। आइए जानते हैं आज के इस वीडियो में। एलेक्जेंडर का जन्म 356 बीसी में एंशिएंट ग्रीक की राजधानी पहला मेसडोनिया में हुआ था। एलेक्जेंडर के फादर थे फिलिप द सेकंड जो मैसडोन के किंग थे और उनकी मां का नाम ओलंपियस था। जो फिलिप की सात बीवियों में से एक थी।
क्योंकि एलेक्जेंडर एक प्रिंस था। उसे वो सारे प्रिविलेजेस मिले जो एक किंग के बेटे को मिलते हैं। प्लूटार्क अपनी किताब द लाइफ ऑफ एलेक्जेंडर में लिखते हैं कि एलेक्जेंडर की पढ़ाई के लिए प्राइवेट ट्यूटर्स रखे गए और इनमें से एक थे लियोनाइडस जो फिलिप के रिलेटिव थे। लियोनाइडस एक स्ट्रिक्ट टीचर थे और उन्होंने एलेक्जेंडर को कॉम्बैट हॉर्स राइडिंग और मिलिट्री टैक्टिक्स में रूथलेसली ट्रेन किया। कुछ साल बाद एक और टीचर अपॉइंट किए गए जिनका नाम लेसिमेकास था और उन्होंने एलेक्जेंडर को म्यूजिक पोट्री में ट्रेन किया और उसको पढ़ना लिखना भी सिखाया। जब एलेग्जेंडर सिर्फ 10
साल का था उनके फादर के पास एक ट्रेडर हॉर्स लेकर आया। लेकिन कोई भी उस हॉर्स को कंट्रोल नहीं कर पाया जिसको देखकर फिलिप उस ट्रेडर को मना करने ही वाले थे कि एलेक्जेंडर सामने आया और बोला कि वह इस हॉर्स को काबू कर सकता है। यह सुनकर फिलिप थोड़े हैरान हुए लेकिन वो थोड़े क्यूरियस भी थे और जानना चाहते थे कि क्या सच में एलेक्जेंडर के पास ऐसा करने की कैपेबिलिटी है तो उन्होंने एलेग्जेंडर को परमिशन दे दी। फिर एलेक्जेंडर ने हॉर्स को अप्रोच किया और उससे पहले तो धीरे से बात की। फिर उसको
सहलाया और धीरे से उस पर चढ़ गया और उसको आराम से राइड करने लगा। यह मंजर देखकर फिलिप इतने इंप्रेस हुए कि उन्होंने एलेग्जेंडर से कहा, माय सन सीक अ किंगडम वर्दी ऑफ योरसेल्फ मेसडोनिया इज टू स्मॉल फॉर यू। इसके बाद उन्होंने उस हॉर्स को खरीद लिया और उसका नाम बुसेफेलस रखा। यही वो हॉर्स है जिस पर चढ़कर एलेक्जेंडर ने ना जाने कितनी बैटल्स जीती। इसके बाद जब एलेग्जेंडर 13 साल का था तब उसकी ट्रेनिंग एक अलग ही लेवल पर चली गई। जब फिलिप ने हिस्ट्री के ग्रेटेस्ट फिलॉसफर माने जाने वाले एरिस्टोटल को हायर किया।
एलेक्जेंडर को एरिस्टोटलल ने मीजा में लोकेटेड टेंपल ऑफ निम्स में डेली लेसंस दिए। यहां पर एलेक्जेंडर ने दूसरे रॉयल बच्चों के साथ पढ़ाई की। जिनमें बहुत सारे बच्चे उसके अच्छे दोस्त बने और आगे चलकर उसके जनरल्स भी बने। एरिस्टोटल ने एलेक्जेंडर को रिलीजन, आर्ट, लॉजिक और फिलॉसफी में लेसंस दिए। और इस ट्रेनिंग से किंग फिलिप इतने इंप्रेस हुए कि उन्होंने एरिस्टोटल के होमटाउन स्टाजिरा को रिबिल्ड किया जो एक वॉर में डिस्ट्रॉय हो गया था और वहां के सारे स्लेव्स को फ्रीडम भी दिलवाई। एलेक्जेंडर का पहला चैलेंज तब आया जब वह सिर्फ 16 साल का था।
किंग फिलिप ने बजेंटियम किंगडम पर वॉर डिक्लेअर कर दी थी और वह एक आर्मी को बैटल में लीड करने वाले थे। तो उन्होंने मेसडोनिया को एलेक्जेंडर के हवाले छोड़ा और बैटल के लिए निकल पड़े। 16 साल के एलेक्जेंडर के लिए यह एक बहुत बड़ी रिस्पांसिबिलिटी थी जिसका लोगों ने फायदा उठाने का सोचा। थ्रेशियन मैडी नाम के एक यूरोपियन ट्राइब ने मेसडोनिया के खिलाफ एक रिबेलियन शुरू कर दिया। यह सोचकर कि 16 साल के एलेक्जेंडर के अंडर किंगडम वीक हो गया है। एलेक्जेंडर को अंडरएस्टिमेट करने का कॉन्सक्वेंस उनको जल्दी भुगतना पड़ा जब एलेक्जेंडर ने आर्मी भेजकर
उनको अपने टेरिटोरीज से भगा दिया और वहां पर दूसरे ग्रीक सिटीजंस को सेटल करके उसको एलेक्जेंड्रोपलिस नाम दिया। जब किंग फिलिप बैटल से वापस आए और देखा कि एलेग्जेंडर ने कैसे इस रिवोल्ट को हैंडल किया तो वो काफी इंप्रेस हुए। इसके बाद उन्होंने एलेग्जेंडर को अपनी खुद की एक छोटी आर्मी अलॉट की और किंगडम के पोटेंशियल फ्यूचर रिवोल्ट्स को हैंडल करने की जिम्मेदारी दी। अगले 3 साल तक एलेक्जेंडर ने अपने पिता को उनके मिलिट्री कैंपेन में जॉइ किया। इस कैंपेन में सबसे पहले उन्होंने एलाटिया और एम्फिस्सा के किंगडम्स को हराया और फिर कैरोनिया में उनका
सामना एथेंस और थीफ्स की आर्मी से हुआ। और यहां पर शुरू हुई बैटल ऑफ कैरोनिया। फिलिप ने डिसाइड किया कि वे अपनी आर्मी की राइट विंग को कमांड करेंगे और एलेग्जेंडर लेफ्ट विंग को जिसे उसने एक्सीलेंट तरीके से लीड किया और वो यह बैटल जीत गए जिसके बाद ग्रीस का मेजॉरिटी हिस्सा फिलिप के कंट्रोल में आ गया। ग्रीस में कामयाब होने के बाद फिलिप की नजर पड़ी पर्शियन एंपायर पर और इस बार वो फिर से एलेक्जेंडर को अपने किंगडम को संभालने की जिम्मेदारी देकर गए और एलेक्जेंडर ने दोबारा इस रिस्पांसिबिलिटी को अच्छे से निभाया। जब
फिलिप वापस लौटे, उन्होंने एक और शादी करने का फैसला किया। उनकी होने वाली नई वाइफ का नाम क्लियोपैट्रा यूरडसी था। इस मैरिज ने एलेग्जेंडर के नेक्स्ट किंग बनने के सपने को थोड़ा धक्का पहुंचाया क्योंकि क्लियोपट्रा प्योर मेसडोनियन थी और एलेक्जेंडर हाफ मेसडोनियन क्योंकि उसकी मां मेसडोनिया से नहीं थी और इसका मतलब यह हुआ कि अगर क्लियोपैट्रा को बेटा हुआ तो वह एलेग्जेंडर से पहले थ्रोन का सक्सेसर बन जाता। प्लूटार्क अपनी किताब में लिखते हैं कि वेडिंग के बीच क्लियोपट्रा के अंकल एटलस ने वाइन का ग्लास उठाते विश किया कि क्लियोपट्रा को जल्दी से बेटा हो
जाए। ताकि आगे चलकर मेसडोनिया को एक ट्रू मेसडोनियन किंग मिले। इसे सुनकर अलेग्जेंडर को इतना गुस्सा आया कि उसने एटलस के ऊपर अपना कप फेंक दिया और चिल्लाया यू विलन व्हाट एम आई देन अ अपने पिता को चुप बैठे देखकर एलेक्जेंडर इतना हर्ट हुआ कि वो अपनी मां को लेकर एपीरस चला गया। जहां उसके अंकल किंग एलेग्जेंडर दी वन रहते थे। उधर मसेडोनिया में किंग फिलिप को क्लियोपट्रा से एक बेटा भी हुआ लेकिन वो एलेग्जेंडर के चले जाने की वजह से काफी दुखी थे। असल में वह एलेग्जेंडर को अपने सक्सेसर की पोजीशन से हटाना नहीं
चाहते थे। फिर उन्होंने उसे मनाने के लिए मैसेज भेजकर वापस आने के ऑर्डर्स दिए और एलेक्जेंडर इन ऑर्डर्स को मानते हुए मसडोनिया वापस आ गया। लेकिन इसके बाद दोनों के बीच वो पुराना वाला इक्वेशन नहीं रहा। इसके बाद फिलिप ने अपनी बेटी जिसका नाम भी क्लियोपैट्रा था उसकी शादी एलेक्जेंडर के अंकल और खुद के ब्रदर इन लॉ किंग ऑफ एपायरस से फिक्स कर दी। और देखते-देखते शादी का दिन भी आ गया। वेडिंग शुरू हुई और जैसे ही किंग फिलिप ने थिएटर में एंट्री ली उनके एक बॉडीगार्ड ने अचानक से उनको स्टेप कर दिया जिसकी वजह
से उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इस अससिनेशन के रीजन के कई कन्फ्लिक्टिंग सोर्सेस हैं। लेकिन हिस्टोरियन डायोडस के अकॉर्डिंग वो बॉडीगार्ड जिसने अससिनेशन किया उसका नाम था पोसनियस ऑफ अरेस्टिस। और अपेरेंटली अटालस के आदमियों ने उसका शोषण किया था और वह चाहता था कि किंग फिलिप उन लोगों को पनिश करें। लेकिन ऐसा नहीं हुआ और जस्टिस ना मिलने की वजह से उसने यह एक्सट्रीम कदम उठाया। किंग फिलिप की मौत के बाद एलेक्जेंडर को मेसडोनिया का किंग डिक्लेयर कर दिया गया। अपने पिता के चले जाने से एलेग्जेंडर काफी सदमे में था। लेकिन उसको यह
भी पता था कि अगर उसने कुछ कठोर डिसीजन नहीं लिए तो उसकी जान भी जा सकती है। इसके बाद एलेक्जेंडर ने कुछ ऐसे डिसीजन लिए जिसे देखकर लोगों की आत्माएं कांप उठी। हिस्टोरियन डायोडोरस के अकॉर्डिंग एलेक्जेंडर ने सबसे पहले अपनी मां के साथ मिलकर फिलिप की नई वाइफ क्लियोपट्रा और उसके न्यूबर्न बच्चे को मरवा दिया। उस वक्त एटलस एशिया माइनर में था तो एलेग्जेंडर ने वहां पर एग्जीक्यूशन ऑर्डर्स भेजकर उसको मरवा दिया और फिर एक-एक कर अपने सारे पॉलिटिकल राइवल्स को चुन-च कर मार दिया। इसके बाद जैसे ही यह न्यूज़ फैली कि फिलिप जैसा एक
स्ट्रांग और डोमिनेंट किंग अब नहीं रहा और अब उसका 20 साल का बेटा किंग बन गया है तो किंगडम में जगह-जगह रिवोल्ट्स फिर से शुरू हो गए। जैसे कि हाल ही में कंकर हुए एथेंस और थीफ्स स्टेट्स जिनको लगा कि वो अब फिर से इंडिपेंडेंट बन सकते हैं। अपने एडवाइर्स की बात ना सुनते हुए एलेग्जेंडर इन रिवोल्ट्स को खत्म करने खुद 3000 सोल्जर्स की आर्मी लेकर निकल पड़ा। सबसे पहले वो थीफ्स पहुंचा और पूरे शहर को डिस्ट्रॉय कर दिया। और इसके बाद एलेक्जेंडर का खौफ बाकी किंगडम्स में दिखने लगा और रिवोल्ट्स ठंडे पड़ने लगे। इसके
बाद एलेक्जेंडर जिस स्टेट में भी गया वहां उसका बिना अपोजिशन के स्वागत हुआ और उसने अपने आप को एक स्ट्रांग रूलर के तौर पर एस्टैब्लिश कर दिया। लेकिन एलेक्जेंडर इतने से खुश होने वाला नहीं था। एरिस्टोटलल की टीचिंग्स ने उसको बचपन से एंबिशियस बना दिया था। और अब जब वो किंग बन गया था। उसको पूरी दुनिया पर हुकूमत करनी थी। साल था 334 बीसी। एलेक्जेंडर ने ग्रीस को अपने ट्रस्टेड मिलिट्री जनरल एंटी पार्टनर के हवाले छोड़कर 400 सोल्जर्स की आर्मी लेकर परशिया की ओर निकल पड़ा। अलेक्जेंडर मानता था कि परर्शियन किंगडम गॉड की तरफ से
उसका गिफ्ट है। अलेक्जेंडर और उसकी आर्मी को परर्शिया में सबसे पहले रेजिस्टेंस का सामना करना पड़ा। बैटल ऑफ ग्रेनिकस रिवर में। यह रिवर अलेग्जेंडर की आर्मी के लिए एक बहुत बड़ी ऑब्सकल थी। परशियन आर्मी को लीड कर रहे थे उनके मिलिट्री जनरल मेमनोन ऑफ रोड्स। उन्होंने अपनी आर्मी जो लगभग एलेक्जेंडर की आर्मी से आधी थी उसको ग्रेनिकस रिवर के आसपास पोजीशन किया और एलेक्जेंडर की आर्मी का वेट करने लगे। एलेक्जेंडर ने यहां पर अपनी मिलिट्री एक्सीलेंस दिखाते हुए वेज शेप्ड असॉल्ट के टैक्टिक को इस्तेमाल किया। नदी में अपनी आर्मी को उतारा और सीधा पर आर्मी
के सेंटर पर अटैक कर दिया। कुछ सोर्सेस के अकॉर्डिंग यहां पर अलेग्जेंडर खुद बैटल में उतर कर बहुत सारे पर्शियन सोल्जर्स को खुद मारा। एक सोल्जर ने उस पर एक्सिस से अटैक भी किया जिससे वो ऑलमोस्ट मरने वाला था। लेकिन वो बच गया और अपनी सुपीरियर आर्मी की वजह से एलेग्जेंडर ने यह बैटल जीत ली। इस बैटल में परियन आर्मी के लगभग 4000 सोल्जर्स मारे गए और ग्रीक की कैजुअल्टी सिर्फ 50 के आसपास रही। जिसके बाद बचे हुए पर्शियन सोल्जर्स को वहां से भागना पड़ा। कुछ पर्शियन सोल्जर्स पकड़े गए और उनमें ऐसे सोल्जर्स भी थे
जो पहले ग्रीक आर्मी में थे। जिन्हें एलेग्जेंडर ने ट्रेटर घोषित किया और उन सबको वहीं मौत के घाट उतार दिया। इसके बाद एलेग्जेंडर लिडिया किंगडम की कैपिटल सार्डिस को कैप्चर करते हुए आयोनियन कोस्ट पहुंचा। जहां पर लोगों ने उसे बिना ऑपोजिशन के वेलकम किया और एलेक्जेंडर ने यहां पर लोगों को बताया कि वह अब परर्शियन रूल से फ्री हैं और वह अब डेमोक्रेटिक तरीके से जी सकते हैं। इसके बाद वो आगे मार्च करते हुए हलिकारनासिस पहुंचा जो कि एक कोस्टल फोर्ट सिटी थी और यह परर्शियन किंगडम का एक इंपॉर्टेंट नेवल बेस भी था जिसके बड़े-बड़े
वॉल्स थे जिन्हें पार करना मुश्किल था। बैटल ऑफ ग्रेनिकस हारने के बाद मेमन ऑफ रोड्स अपनी आर्मी के साथ यहीं रुका हुआ था। अलेग्जेंडर ने इस फोर्ट को अपनी आर्मी से घेर लिया। फिर फोर्ट के बाहर टावर, रैंप्स और कैटप्ट्स बनाए और अटैक करने लगा। इसके जवाब में परर्शियंस ने रात में छुप के अटैक्स किए और एलेग्जेंडर के इक्विपमेंट्स को डिस्ट्रॉय करने की कोशिश की। लेकिन इसमें ज्यादा सक्सेस नहीं मिली। मॉडर्न हिस्टोरियंस जैसे एबी बॉसवर्थ के अकॉर्डिंग के सीज लगभग 2 महीने तक चलता रहा। जिसके बाद पर्शियंस इन अटैक्स को और नहीं रोक पाए और
फिर मेमन ऑफ रोड्स के ऑर्डर्स पर सिटी में आग लगाकर समुद्र के रास्ते से भाग गए। इसके बाद एलेक्जेंडर ने हलीकारनासिस को कैप्चर कर लिया और यहां की ओरिजिनल क्वीन आडा ऑफ कार्या जिनसे यह सिटी छीनी गई थी उन्हें वापस क्वीन बना दिया। बदले में एडा ने एलेग्जेंडर को अडॉप्ट कर लिया जिससे इनडायरेक्टली हलिका नासिस पर एलेक्जेंडर का कब्जा हो गया। इसके बाद आगे बढ़ते हुए एलेक्जेंडर गॉडियम की कैपिटल फ्रिजिया पहुंचा और यहां पर कुछ ग्रीक लेजेंड्स के अनुसार एलेक्जेंडर को वहां के कुछ लोग एक शाइन में ले गए। जहां पर एक चैरियट को एक
बहुत ही कॉम्प्लेक्स तरीके से एक रस्सी से बांधा गया था। जिससे एक कॉम्प्लिकेटेड नॉट बन गया था। फिर उन्होंने एलेक्जेंडर को बताया कि जो भी इस नॉट को खोलेगा वही एशिया का रूलर बनेगा। इसे सुनने के बाद एलेक्जेंडर ने अपनी तलवार निकाली और एक ही स्विंग में रस्सी को काट दिया। इसके बाद एलेक्जेंडर साउथ की तरफ अपनी आर्मी लेकर बढ़ा जहां पर अब उसका सामना एक बड़ी आर्मी से होने वाला था और यह आर्मी थी डारियस द थर्ड की जो परर्जिया के एककी मेनड एंपायर का किंग था। फिर दोनों के बीच एक बैटल हुई जिसे
बैटल ऑफ एसिस कहा जाता है। डेरियस की आर्मी के मुकाबले छोटी आर्मी होने के बावजूद एलेक्जेंडर के टैक्टिकल स्किल्स और ब्रेव अप्रोच ने उसे इस बैटल में जीत दिलवाई। जिसके बाद डरियस को अपना पूरा किंगडम छोड़कर वहां से भागना पड़ा। इसके बाद एलेक्जेंडर का खौफ हर जगह इतना बढ़ गया था कि जैसे ही वह किसी किंगडम की तरफ अपनी आर्मी लेकर आता वो किंगडम अपने आप सरेंडर कर देता। 332 बीसी तक अलेक्जेंडर ने सीरिया और लिवांड पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद एलेक्जेंडर की नजर टायर पर पड़ी जो कि मेडिटेटरियन कोस्ट में एक आइलैंड
था। इस आइलैंड के चारों तरफ पानी और इसके बड़े दीवारों की वजह से इसे कॉनकर करना मुश्किल था। पहले तो अलेग्जेंडर ने इस आइलैंड को सात महीनों तक घेर कर रखा। फिर अपनी ब्रिलियंस का एग्जांपल देते हुए अपनी आर्मी से पानी में ही पत्थरों से भरा एक रास्ता बनवाया और आइलैंड में आर्मी घुसाई। हिस्टोरियन एरियन ऑफ निकोमीडिया के अनुसार महीनों से वेट करने के बाद एलेग्जेंडर को इतना गुस्सा आया कि उसने आइलैंड में घुसते ही 8000 लोगों को मैसकर कर दिया। इसके बाद एलेग्जेंडर अपनी आर्मी के साथ इजिप्ट की ओर बढ़ा और इस राउट में
सारे किंगडम्स ने सरेंडर कर दिया। लेकिन एक किंगडम ने हार ना मानने की हिम्मत दिखाई और वो किंगडम था उस समय का गाजा जो कि एक पहाड़ पर स्थित था। यहां पर चढ़ाई करके सिटी में दाखिल होना काफी मुश्किल था। लेकिन एलेग्जेंडर ने ठान लिया कि उसको गाज़ा को कैप्चर करना ही है। उसकी आर्मी ने तीन बार सिटी में घुसने की कोशिश की। लेकिन वो कामयाब नहीं हुई। फिर आखिरी कोशिश में वो सिटी में घुस गए। इस दौरान एलेग्जेंडर के बहुत सारे सोल्जर्स मारे गए। खुद एलेक्जेंडर को भी अपने शोल्डर पर गंभीर चोट आई। इसके
बाद एलेग्जेंडर इजिप्ट की ओर निकला। जहां लोगों ने उसे अपना सन ऑफ गॉड और लिबरेटर मानकर स्वागत किया और उसको अपने फेरो के समान माना। यहां पर उसने एलेक्जेंड्रिया सिटी की स्थापना की जो आगे चलकर एक बहुत बड़ा ट्रेडिंग सेंटर बनने वाली थी। इजिप्ट के बाद एलेक्जेंडर बेबिलोन के लिए निकला जो परर्जिया की कैपिटल थी और यहीं पर किंग डेरियस ने बैटल हारने के बाद रिफ्यूज लिया था। एलेक्जेंडर के पास अब भी 47,000 सोल्जर्स थे। लेकिन कुछ हिस्टोरियंस मानते हैं कि डारियस के पास बैबलॉन में 10 लाख सोल्जर्स की आर्मी थी। 331 बीसी में दोनों
आर्मीज़ का सामना हुआ गगमेला में। अपनी आर्मी की सबसे आगे की लाइन में डेरियस ने चैरियट्स और हाथियों को रखा ताकि वो एलेग्जेंडर की आर्मी को कुचल सके। इसके जवाब में एलेग्जेंडर ने अपने ट्रूप्स को आगे रखा ताकि वो ठीक से चैरियट्स पर निशाना लगा सके। डेरियस खुद एक चैरियट में था और बैटल के दौरान वो अपनी चैरियट से गिर पड़ा और फिर एक घोड़े पर बैठकर वो फिर से बैटल से भाग गया। जिसे देखकर उसके सोल्जर्स भी भागने लगे। और एलेग्जेंडर एक बार फिर बैटल जीत गया। इसके बाद एलेक्जेंडर ने दूसरे सिटीज जैसे सू
परसेपुलस को कैप्चर किया और वहां सब कुछ लूट लिया। फिर उसने डेरियस को ढूंढकर उसको मारने का फैसला किया ताकि डेरियस उसके खिलाफ और कोई चाल ना चल सके। लेकिन इससे पहले ही डेरियस के एक खास आदमी बेसिस ने उसको मार दिया और उसकी जगह ले ली। इसके बाद एलेक्जेंडर बेसिस को ढूंढते हुए एशिया में आगे बढ़ता रहा और इस दौरान अपने नाम से उसने कई सिटीज की स्थापना की। इवेंचुअली बेसस को उसी के जनरल्स ने धोखा देकर एलेक्जेंडर को सौंप दिया और उसको मार दिया गया। इसी कैंपेन के दौरान 327 बीसी में एलेग्जेंडर ने
बैक्टीरिया को कैप्चर किया और इस रीजन में स्ट्रांग अलायंसेस बनाने के लिए वहां के एक रूलर ऑक्सक्सियाटिस की बेटी रोसाना से शादी की। अब एलेग्जेंडर की नजर पड़ी इंडिया पर। सबसे पहले उसने डेलीगेट्स भेजकर इंडियन किंग्स को सरेंडर करने के ऑर्डर्स दिए। कुछ छोटे किंगडम्स ने सरेंडर कर दिया और जिन्होंने मना किया उनको एलेक्जेंडर की वायलेंट आर्मी का सामना करना पड़ा। उनके विलेजेस और सिटीज को बड़ी बर्बरता से जला दिया गया। इसके बाद एलेग्जेंडर को सबसे चैलेंजिंग अपोजिशन मिला पंजाब के रीजन के किंग पोरस से जो पौरावा किंगडम के किंग थे। फिर दोनों आमीज के
बीच बैटल ऑफ हाइडस्पीस हुई। अरियन ऑफ निकोमीडिया अपनी किताब एनबासिस एलेग्जेंड्री में लिखते हैं कि इस बैटल में एलेग्जेंडर की जीत हुई जिसके बाद पोरस को कैप्चर कर लिया गया। लेकिन बैटल के दौरान एलेक्जेंडर पोरस की मिलिट्री टैक्टिक्स और ब्रेवरी से इतना इंप्रेस्ड हुआ कि उसने पोरस को को-रूलरशिप ऑफर की। फिर दोनों के बीच एक डील हुई जिसमें यह डिसाइड हुआ कि एलेक्जेंडर पावरावा का नया किंग होगा। लेकिन पुरुष उसके अंडर में रूल करेंगे। इसके बाद एलेक्जेंडर ने हिस्ट्री में किसी भी रूलर से ज्यादा टेरिटरी ककरर कर ली थी। लेकिन उसका एंबिशन अब भी कम
नहीं हुआ था और वो आर्मी को लेकर इंडिया में आगे बढ़ना चाहता था। लेकिन उसकी आर्मी बैटल्स लड़ते-लड़ते अब थक चुकी थी। तो उन्होंने आगे जाने से मना कर दिया। जिसकी वजह से आर्मी में रिवोल्ट्स शुरू हो गए। एलेक्जेंडर के एक जनरल ने उसे बताया कि सोल्जर्स अपने फैमिलीज, अपने बच्चे और अपने होमलैंड को देखने के लिए तरस रहे हैं। यह सुनकर एलेक्जेंडर को अपने सोल्जर्स के लिए सिंपैथी महसूस हुई और उसने वापस जाने का फैसला किया। लेकिन एलेक्जेंडर अपनी आदत से मजबूर था और वापस लौटते वक्त भी वो छोटे-छोटे विलेजेस को कैप्चर करता गया।
इसके बाद एलेक्जेंडर जब परर्शिया वापस आया तब उसको लोगों ने किंग ऑफ किंग्स बुलाते हुए स्वागत किया। एलेक्जेंडर को पर्शियन कस्टम्स बहुत पसंद आए और उसने पर्शियन हैबिट्स और ड्रेसिंग को एडप्ट करना शुरू किया जो एलेग्जेंडर के जनरल्स को बहुत अजीब लगा। यहां से वापस जाते समय अलेक्जेंडर ने अपने पहले कैप्चर किए हुए रीजंस में जाकर खुद के जनरल्स को एग्जीक्यूट किया जो करप्शन और इनजस्टिस में शामिल थे। 324 बीसी में अलेक्जेंडर परर्शिया के सू रीजन पहुंचा। जहां उसने परर्शिया से रिलेशंस को और मजबूत करने के लिए अपने जनरल्स और परर्शियन नोबल वुमेन की मास
शादियां करवाई और खुद स्टेट एरा और पेरिसाटिस नाम की दो रॉयल पर वुमेन से शादी की। हालांकि एलेग्जेंडर की तीन बीवियां थी कुछ हिस्टोरियन जैसे रॉबिन लेन फॉक्स और पॉल कार्टलेज के। अकॉर्डिंग एलेक्जेंडर के मर्दों के साथ भी रिलेशन रहे। खासकर अपने क्लोजेस्ट फ्रेंड हिफेशियन के साथ। इसके बाद एलेक्जेंडर बैबलॉन पहुंचा और वहां कुछ दिन रुकने का डिसीजन लिया। यहां पर एलेक्जेंडर अरेबिया को कंकर करने का प्लान बनाने लगा। इस दौरान एलेक्जेंडर रोज पार्टीज करता और खूब शराब पीता। फर्स्ट जून 323 बीसी की रात एलेग्जेंडर एक पार्टी में शराब पीकर नशे की हालत में अपने
कमरे में आया और सो गया। रात को अचानक उसको बहुत जोर बुखार चढ़ा और उसकी हालत बिगड़ने लगी। हिस्टोरियन एररियन के अनुसार अगले 12 दिन एलेक्जेंडर की हेल्थ बिगड़ती रही। उसको बचाने की पूरी कोशिश की जा रही थी। लेकिन कोई भी दवा काम नहीं आई और आखिर में सिर्फ 32 साल की उम्र में एलेक्जेंडर ने दम तोड़ दिया। कुछ सोर्सेस यह भी क्लेम करते हैं कि एलेक्जेंडर को शायद किसी ने जहर देकर मारा था। दुनिया के सबसे बड़े किंग की मौत से पूरा एंपायर शॉक में था। लोगों को यकीन नहीं आ रहा था कि इतना
स्ट्रांग और ब्रेव किंग इतनी कम उम्र में चला गया। एलेक्जेंडर को एलेक्जेंड्रिया में दफनाया गया। आने वाले सेंचुरीज में एलेक्जेंडर का नाम ब्रेवरी के साथ एसोसिएट किया जाने लगा और कई एपररर्स दूर-दूर से उसको श्रद्धांजलि देने उसकी कब्र पर आते। कहा जाता है कि रोमन एपरर ऑगस्टस भी उसकी बॉडी देखने आए थे। आज अलेक्जेंडर की टम की लोकेशन दुनिया की एक मिस्ट्री बनकर रह चुकी है। अगर आपको यह वीडियो अच्छा लगा तो लाइक, शेयर एंड सब्सक्राइब जरूर कीजिए। ऐसे वीडियोस बनाने में बहुत मेहनत और टाइम लगता है। इसलिए आपका सपोर्ट हमारे मोटिवेशन के लिए बहुत
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