झाला कर दो कर दो कर दो कि गोरखनाथ ने कहा हसी वह खेलिबा धरिबा ध्यान में अहर्निश कथित वो ब्रह्म ज्ञान एक हंसते-खेलते कि चिंतन की धारा उन्नत कर दो में अहर्निश ब्रह्म परमात्मा की चर्चा सुनो सुनाओ सिंधी जगत के महापुरुषों ने कहा जहां पर्सन प्रिंस जो जहां पर एंड संदीप अचार्य तीन भी नहीं खाता धारक का दृश्य देखे ना करें या तो प्रभु मैं तेरी लीला को तुझे नहरों या तो तेरी लीला को नेहरू या तो तेरी लीला है आप का बयान करने वाले प्यार है संतों ने हारून ही का संग दिया कर दो
ए नर्स को देखते तो हॉस्पिटल याद आती है अब खाकी वर्दी वालों को देखते हैं तो थाना याद आता है काले कोटवाले को देखते तो कोर्ट कचहरी याद आती है और बाबा को देखते तो तेरी याद आती है यार कि कबीरा दर्शन संत के एक अभिराम दर्शन संत के साहिब है वे याद जाए दूध ले लें मैं वही घड़ी ई एम अपने वहीं खड़ी बाकी के दिन बाद जब क्रिकेट कि हमारी हरियाणा बाढ़ हां यह हरी समझ कुछ ु ु तुम्हारी समझ कुछ 19th फ्री इन थिस संपन्न इन थे मेहनत अंत सब इन थिस सदगुरु
सही नहीं सदगुरु शाम सहेलियां गीता संभावना नहीं रहती थीं कि तस्वीर व हरिहर ओम गीता कि भगवान की अनुभव को थी है श्रीमद् भागवत कि व्यास जी की समाधि भाषा से योगी जी गांव तरह की भगवत लीलाओं का का वर्णन करने वाली वाणी है कि श्रीमद्भागवत की कथा से भगवान के स्वरूप का भान जीव के स्वरूप का ज्ञान और संसार के कि नश्वरता का भोजन कराकर थिस माया दलदल में अलार्म सेट विकारों में का जन्म मृत्यु जरा व्याधि में फंसे हुए जीव को कि शब्दों से सदा के लिए निवृत्ति और परम सुख की प्राप्ति कराने
वाले है कि भगवत एक रहस्य संपन्न कथाएं को व्यासजी ने 17 पुराण रच डाले और फिर भी व्यक्ति को लगा कि मेरा कि लोक मांगल्या का कार्य कुछ अधूरा सा लगता है की सेवा करके जो पूर्णता का अहसास होना चाहिए आत्मतृप्ति संतोष होना चाहिए वह नहीं लगा तब नारद जी ने कहा कि क्या आपने कल जो के दोस्तों को ख्याल में रखते हुए कि शराबी कबाबी और दुराचारी लोगों को भी धर्म में लगाने के लिए कुछ छूट छूट और कुछ नियम व्रत में व्यवस्था बताई लेकिन व्यवस्थित कि जब तक मनुष्य को रस नहीं आएगा तब
तक कितना भी आप झूठ चार्ट दो होरेस के लिए कुछ ना कुछ को मनमाने कर्म करेगा और उसका फल उसको दुख भोगना पड़ेगा इसलिए मनुष्य जीवन की मांग है रस क्योंकि उसका मूल स्वरूप स्वरूप ईश्वर से प्रकट हुआ है रसो वै स वैश्वानर है तो व्यास जी भगवान का जो प्रेमावतार है रस मैं अवतार है कि व श्रीकृष्ण अवतार का चिंतन करते-करते समाधि तो यह और युग युग में श्रीकृष्ण की कि हास्य रस वीर रस बाहर रहस्य कारण रस लीला रस भिन्न-भिन्न रंगों के द्वारा जी जो भगवत कथा सुनने का या है तो उसको रस
आता जाएगा और भगवान के स्वरूप का भान होता जाएगा और एक बार भगवान की महिमा का पता चल जाए अथवा जगत की तुच्छता का ठीक से ज्ञान हो जाए तो जीव बेचारा बंधनों से मुक्त हो जाएगा का या पीड़ाओं से कि तनावों से कष्टों से कि इसका मंगल होगा भगवान व्यास को नारद जी के वचन और सारगर्भित लोकमांगल्य से संपन्न को आत्मसात करने जैसे लगे व्यास देव ने को एकांत आश्रम में कि उस महापुरुष व्यवसाय स्वागत किया बन गए विधि ऑफिस जाने वाला जाए तो सज्जनता से शीघ्र फल भी 525 कदम उसके साथ उसको विधायक
करना यह शालिनता है कि व्यास जी ने नारद जी को विधायक निधि शालिनता पुत्र व्यास भगवान में आठ घंटे समाधि करने में व्यस्त थे उस महापुरुष ने संकल्प किया कि वह ज्ञान युग-युग में अवतार लेकर आते हैं मंद सुगंध हवाएं चलती दिशाएं में मंगल अब मैं भगवान का कि मानव दीदार करने के लिए अपने पूरे उत्साह से भर आती है कि पक्षियों के किल ऑल एक फूल खिले हैं धरती में सार तत्व की अधिकता है यहां तक कि कुएं चारा चिकना भूल जाऊं हर कष्ट को निहारने लग जाए बछड़े आज दूध पीना भूल जाए और
टुकुर टुकुर देखते रह ऐसा प्रेमावतार कि कैसे कैसे धरती पर आता है और क्या क्या लाइक करता है इस संकट से वह महापुरुष समाधि तो अ कि अ हैं तो धीरे-धीरे हमें लाइन दिखने लगी उन लीलाओं का स्लोक बंद करके अ कि ग्रंथ बनाना तो बार-बार समाधि करना और बार-बार गंध बनाने के लिए श्लोकबद्ध लिखना है का प्रावधान सा लग रहा था भगवान गणपति जी को संबोधित करके महिमा वर्णन किया और लोकमांगल्य के लिए हे गजानंद प्रभु को कि आपकी मती है और संयम अद्भुत है ने पार्वती से बढ़कर कोई सतीश आदमी नहीं और गणेश
दत्त परोल वशी कि गणेश प्रश्न गणेश जी से बढ़कर कोई इंद्रिय संयम में की बराबरी नहीं कर सकते आप संयम की मूर्ति है है और आपके नाम का गं गणपतए नमः का जप करने वाले के विज्ञान हटाने की मति गति और उसके राय तैयार हो जाती प्रभु मुझे इस लोक मांगल्या में आप सहायता करें गणपति जी ने ऐसा हर व्यक्ति का सुझाव स्वीकार किया व्यवस्थित समाधि में बोलते जाएं और भगवान गजानंद लिखते जाएं कि लिखते-लिखते 18 हजार श्लोक जिसके 12 स्कंधों बने 335 अध्याय बने वर्क रंधावा श्रीमद् भागवत भागवत के 41 तो श्रीमद् भागवत दूसरा
भागवत महापुराण 17 पुराणिक ने Bigg Boss भगवत भगवत राशि कि भगवत्सुख से भगवत माधुरी से भगवत्तत्त्व से भरा हुआ था अर्जियों को हंसते-खेलते ध्यान ज्ञान गोपियों के रहे गोपी का अर्थ है योगी समाधि करता है तब परमात्मा शांति का सुख पीता है लेकिन गोपियां खुले आ रस पी रही है कि गोट पर गोपियों की विशेषता है कि इंद्रियों के द्वारा भी व्यापक गोत्रास भगवत आनंद पा रहे हैं कि गोपी गीत का वर्णन आता है भागवत वेणु गीत का वर्णन आता है भिक्षुक गीत का वर्णन आता है गीत गाते-गाते समाधि-सुख संगीत और योग तो आंख मूंद
लो कहना बंद करो समाधि करो सन्नाटे में तब रस पाते लेकिन गीत गाते-गाते भगवत्कृपा ऐसा ग्रंथ इसलिए इसका नाम है श्रीमद्भागवत महापुराण है तीसरा नाम है परमहंस संहिता शुकदेवजी मुनि इतने उच्च कक्षा के समाधान उठ महापुर है कि जब चलते जा रहे तो पिता व्यास जी बेटा बेटा आप कहां जा रहे हो पुत्र अ मैं अशोक देव जी आत्म भाव से संपन्न हैं उनके बदले में वृक्षों ने उत्तर दिया और शुकदेव जी को भोग लगाते तो वृक्षों के आगे पात्र कर देते तो कि ने फल वृक्षों से फल उभरते और उसकी भिक्षापात्र पढ़ते ऐसे समर्थ
योगी उनको क्या पढ़िए फिर भी भागवत जब लिखा गया तो व्यास जी ने देखा कि उसका बयान कोण वर्णन करें छोड़ अपने शिष्यों को श्लोक कंठस्थ कर आएं वन में विचरण करते जाओ और ऐसे ढंग से लोगों का गाउन करो पे शुकदेव जी के कान पड़े जो सब त्याग के समाधि में बैठे हैं वह समाधि त्याग कर भगवान के लिए लाश चरित्रों का गान करने में सक्षम मेरे शुकदेवजी आ जाए में शुकदेव जी के कान पड़े यह भागवत के श्लोक तो शुकदेवजी समाधि-सुख छोड़कर श्रीमद्भागवत का पाठ करने और सुनाने में लग गए इसलिए इसे कहते
हैं परमहंस संहिता शुकदेवजी जैसे परमहंस व्यक्तियों को भी इस भागवत की कथा से शांति आनंद और ब्रह्मानंद में अभिवृद्धि होती है हरिकथा ही तथा बाकी सब जग की व्यथा मैं तुम्हारी कथा नहीं सुनोगे तो जगत की वार्ता सुनोगे पति मर गया उसको याद कर कर के दुख बढ़ आओगे तो आप तो दुखी हो गए घर में भी दुख का वातावरण हो जाएगा मायूसी छा जाएगी अ और प्रसंता कुमार खुशी उबारो कि तुम चले गए कुछ लेकर नहीं गए हमें संत देखे सत्संग देखे गए हैं ने बहुत कुछ देखा है आपका आत्मा अमर है हमारा आत्मा
भी अमरों आप संसार में फंसे नहीं और अपनी यात्रा पूरी करके भगवत चरणों में लंबी यात्रा करते-करते भगवत ध्यान में आ जाएं ॐ आनंद ॐ आनंद ऐसा चिंतन घर के लोगों को करना चाहिए ताकि बच्चे बच्ची पुत्र और बहू MB उस ढंग से आनंदित रहे हाय मेरा पति चला गया या हाय मेरी पत्नी चली गई है मेरा बेटा चला गया है मेरा भाई चला गया हाय है ना करो हरी-हरी करो अब हरि को भजे सो हरि का होई तो तीसरा नाम परमहंस संहिता कि चौथा नाम है भागवत का कॉल पथरों जिससे श्रद्धा से जिस भावना
से भगवत कथा सुनेगा देर-सवेर व श्रद्धा वह भावना प्ले करो हुआ है मैं अहमदाबाद में माणक चौक है माणक नाथ जोगी का वहां आश्रम था कि अहमद को कर्णावती नगर का जलवायु चाचा तो वह टीम दरवाजे जो अभी भी भद्रकाली के पास कि खड़े हैं उस बात की साक्षी देर उसने वहीं कि अपना वोट का घेरा कराया है कि माणिकनाथ को लगा किए अहमद का बच्चा क्या समझता है हमारे आश्रम की भूमि हड़प करता है कि अहमद के आदमी दिनभर दीवार चुने आरोप बाबा दिनभर साबरी मंत्र जप शाम तो गोगरी में से वह धागा कि
शाबरी मंत्र जपते हुए गोधड़ी से शाम हो तो गोदरी से दागा खींचे फुटर देव्पल टपकाया उतरा बच्चा गुरु ने बोला पूरी दीवार तय है एक रोज दीवार चुनाई हो सैकड़ों कारीगर लगे और रोज बाबा संकल्प कर संकल्प करके गोधड़ी से और अपना साबरी मंत्र के सिद्ध के प्रभाव से दीवार आखर अहमद को पता चला बाबा को पटाने में वह सफल हुआ बाबा आप तो अल्लाह हैं आप तो भगवान हैं आप तो यह तो बाबा ने कहा कि अहमद का बच्चा तू क्या समझता है मैं तेरे पास राजदंड है यार आज भाई बहुत हमारे पास हृदय
से दिया है कई राजे-महाराजे की ऐसी-तैसी करने का सामर्थ्य रखते फकीर है और हनुमान जी का नाम सुनावै नासै हनुमान जी जैसे निर्णय हो जाते बड़े हो जाते हैं वह अपनी मां गरिमा सिद्धि भी हम रखते हैं समझे यह लोटे में हम घुस जाएं यह से सुरसा के मुंह में हनुमान जी चालक है और वापस आए ऐसे में लोटे में जाकर वापस आ सकती बोले सुभानल्लाह दिखाया जाए करिश्मा विचार है माणक नाथ जोगी ने हुए लोटे में घुस जाए तो शराबी ने टक्कर मार दिया अजय को कि अ डागा ने लड़कियां वाले क्या करता है
वह बस व ना होगा बांस न बजेगी बांसुरी अब तुम सांप नहीं दे सकते तुमने तो उसे ध्यान दिखाने के बल में आकर दिखा है तो आपको गुरु का जो वरदान था वह बाधित हो गया मैंने सारी जांच की है गुरु का स्मरण किया तो गिरने का बेटा मैं काशी में नहीं हूं अभी मैं कैलाश में मेरा शरीर छूट गया है में गुरु-शिष्य का संबंध शरीर छूटने के बाद भी रहता है क्योंकि गुरु-शिष्य का संबंध केवल शारीरिक संबंध तो भाई-बहन पिता-पुत्र का पति पत्नी का होता है गुरु शिष्य का शारीरिक संबंध का महत्व नहीं होता
आत्मिक संबंध हो जाता है शेष किसी भी लोक में जाएं लेकिन गुरु का संबंध उसका अमर हु की हानि बुरा हो के गया तो वह जाने बाकी गुरु का मंत्र लेकर गया तो फिर हम यह मनसा सभी मानती विशुद्ध साथ में समर्थ ज्ञानी गुरु अपने शिष्य के लिए जिस जिस लोग की भावना करें उस लोक में उसकी सद्गति करने का उसका संकल्प काम करता है कि एक नेता का टेलीफोन पूरे प्रांत में पूरे राज्य में काम कर सकता है तो ब्रह्मवेता गुरु का पूरे ब्रह्मांड में संकल्प काम करता है राजनेता तो बिल्कुल छोटी रेंज में
होते हैं वह अंधेरे में ओम नारायण नारायण नारायण गुरु ने का बेटा यह अहमद कोई साधारण व्यक्ति नहीं है कि अगले जन्म जन्म में इस अहमद ने भागवत कथा अपने मित्र में भाग लिया था भगवत शांति के लिए नहीं भगवत प्राप्ति के लिए नहीं मुझे सत्ता मिले मेरा नाम हो है तो भगवत कथा जिस बहाव से सुनी जाती है देर-सवेर स्रोताओं कि श्रीमद् भागवत कल्पद्रुम के हिसाब से देर-सबेर श्रोता को उस फल की प्राप्ति होती तो इस अहमद ने अगले जन्म में भगवत कथा में रस लिया था सेवा अवधि के थी उसके पुण्य प्रताप से
यह राजा बनेगा तो उसको आशीर्वाद तब माणिकनाथ जोगी ने कहा कि अहमद यह कर्णावती नगर तुम्हारे नाम से अहमदावाद नाम से बड़ा फलेगा-फूलेगा में विकसित होगा उसमें आशाराम बापू भी आएंगे यह में मिलावट कर दिया है हुआ है जूठी बात है उसमें से कहा था मैंने मिला है तुम को हंसाने के लिए आ 153 हेलो करते नहीं इधर उधर की बात में फिर अपने मतलब के बाद डरते थे मैं नहीं है मतलब इबादत कि बहन जी मैं तो अहमदाबाद नगर तेरे नाम से फलेगा-फूलेगा तूने अगले जन्म में भगवत कथा की सेवा की कि भगवत कथा
श्रवण मुक्ति के लिए नहीं लेकिन यश और सत्ता के लिए किया था वह तेरा पुण्य फल है और आज भी कि वह जगह अहमद ने कहा बाबा तो मैं आपको वचन देता हूं जब आप दुआ करते तो मुझे गुस्ताख़ी व्रण मेरी में गुस्ताखी माफ हो मुझे दुआ करते तुम्हें भी वचन देता हूं कि मैदान हम आपके नाम से रखेंगे माणक नाथ जोगी के नाम से ही माणक चौक नाम रखेंगे आज तक रिलीफ रोड के नाम बदल गए तिलक मार्ग है लेकिन माणक चौक का नाम बदलने की किसी की हिम्मत नहीं होती बुद्धि नहीं होती क्योंकि
फकीर की दुआ से जो नाम मिला है ना बाय कि बाकी तो अहमदाबाद के कई सड़कों के नाम बदल गए कई Area on के नाम बदल गए हैं हैं हिमांशु का भी माणक चौक है है तो भगवत कथा आयु आरोग्य और पोस्टिंग को देने वाली है श्रीमद् भागवतम् पुनः श्रीमद भगवतम पधारोगे पुष्टि दं ू आरोप की पुष्टि द्रवणांक पटना तपिश स्वर्णा पटना साथ सर्व पे प्रमुख अतिथि पानी प्रमुख स्थिति श्रीमद् भागवत कथा आयु अकाल मृत्यु को टालने वाली आरोग्यप्रद दयनीय है श्रवण मनन और सुनने से अकाल मृत्यु से तो पार होता है लेकिन व्यर्थ के
पाप-ताप मैं चिंतन से अशांति से भी जीव बच जाता है कर दो [संगीत] कर दो हुआ है