एक इंसान पूरी जिंदगी काम करता रहता है। सुबह उठो, काम करो, पैसे कमाओ, बिल भरो। फिर अगले महीने वही साइकिल दोबारा शुरू। लेकिन सोचने वाली बात यह है अगर सिर्फ ज्यादा मेहनत करने से लोग अमीर बनते तो दुनिया के सबसे अमीर लोग मजदूर होते। असल फर्क मेहनत में नहीं सोच में होता है। गरीब इंसान पूरी जिंदगी इनकम के पीछे भागता है। लेकिन अमीर इंसान वेल्थ बनाता है। गरीब इंसान पैसे के लिए काम करता है। जबकि अमीर इंसान पैसे को अपने लिए काम पर लगा देता है। और यही सोच दुनिया के सबसे महान इन्वेस्टर्स में से
एक इंसान को बाकी लोगों से अलग बनाती है। वारेन बफेट एक ऐसा आदमी जिसने करोड़ों नहीं अरबों डॉलर कमाए। लेकिन सबसे इंटरेस्टिंग बात यह है कि उसने यह पैसा रातोंरात नहीं बनाया। [संगीत] उसने वेल्थ बनाई धीरे-धीरे सही माइंडसेट के साथ सही एसेट्स बनाकर। आज की दुनिया में ज्यादातर लोग सैलरी बढ़ाना चाहते हैं। लेकिन बहुत कम लोग अपनी फाइनेंशियल फ्रीडम बनाना चाहते हैं। लोग नई कार खरीदने के लिए एक्साइटेड हो जाते हैं। लेकिन कोई ऐसा एसेट बनाने के बारे में नहीं सोचता जो हर महीने उनके अकाउंट में पैसा डालें। और शायद इसी वजह से बहुत लोग
जिंदगी भर काम करते रह जाते हैं लेकिन कभी फाइनेंशियली फ्री नहीं बन पाते। इमेजिन करो अगर आप एक महीने काम ना करो [संगीत] तो क्या पैसा फिर भी आपके पास आएगा? अगर जवाब नहीं है तो इसका मतलब आप अभी सिर्फ इनकम बना रहे हो। वेल्थ नहीं। इस वीडियो में हम समझेंगे कि आखिर अमीर लोग अलग क्या सोचते हैं। क्यों वारेन बफेट हमेशा एसेट्स खरीदने की बात करते हैं? क्यों रिच माइंडसेट सिर्फ ज्यादा पैसे कमाने का नाम नहीं है बल्कि पैसे को संभालने और बढ़ाने की कला है। हम बात करेंगे उन गलतियों की जो मिडिल क्लास
लोग पूरी जिंदगी करते रहते हैं। उन हैबिट्स की जो क्वाइटली इंसान को गरीब बनाए रखती हैं। और उन प्रिंसिपल्स की जिनकी मदद से एक नॉर्मल इंसान भी धीरे-धीरे [संगीत] वेल्थ बिल्ड कर सकता है। क्योंकि असली अमीरी एक्सपेंसिव क्लोथ्स बड़ी कार या दिखावे में नहीं होती। असली अमीरी होती है। जब आपका पैसा आपके बिना काम किए भी बढ़ता रहे। तो अगर आप भी सिर्फ सैलरी से जिंदगी चलाने के बजाय वेल्थ बनाना सीखना चाहते हो। अगर आप भी चाहते हो कि आने वाले सालों में पैसा आपकी सबसे बड़ी टेंशन ना रहे तो इस वीडियो को आखिर तक
जरूर देखना। क्योंकि हो सकता है आज के बाद पैसे को देखने का आपका नजरिया हमेशा के लिए बदल जाए। चैप्टर एक गरीब लोग इनकम के पीछे क्यों भागते रहते हैं? दुनिया में ज्यादातर लोगों को बचपन से सिर्फ एक ही चीज सिखाई जाती है। अच्छे मार्क्स लाओ, अच्छी नौकरी मिलेगी, फिर जिंदगी सेट हो जाएगी। लेकिन किसी ने यह नहीं सिखाया कि पैसा आखिर काम कैसे करता है। स्कूल में हमें हिस्ट्री याद करवाई जाती है। फार्मूलास रटवाए जाते हैं। लेकिन फाइनेंशियल एजुकेशन नहीं दी जाती। कोई यह नहीं बताता कि सैलरी और वेल्थ में जमीन आसमान का फर्क
होता है। और यही वजह है कि लाखों लोग पूरी जिंदगी जॉब करते रहते हैं। लेकिन फिर भी फाइनेंशियली फ्री नहीं बन पाते। बफेट एक बार कहते हैं अगर आप सोते समय भी पैसा कमाने का तरीका नहीं सीखते तो आपको जिंदगी भर काम करना पड़ेगा। अब जरा ध्यान से सोचिए। एक आदमी है जिसकी सैलरी ₹500 महीना है। हर महीने पैसा आता है और हर महीने खत्म हो जाता है। ईएमआई, बिल्स, शॉपिंग, फ्यूल, [संगीत] पार्टीज, मोबाइल रिचार्ज, बाहर खाना और फिर महीने के आखिर में अकाउंट ऑन ऑलमोस्ट खाली। अब बाहर से देखने पर लगेगा कि वह इंसान
अच्छा कमा रहा है। लेकिन सच यह है वह सिर्फ इनकम बना रहा है। वेल्थ नहीं। क्योंकि इनकम वो पैसा है जिसके लिए आपको लगातार काम करना पड़ता है। लेकिन वेल्थ वो सिस्टम है जो आपके लिए पैसा बनाता रहता है। चाहे आप काम करो या नहीं। यही वो डिफरेंस है जो गरीब माइंडसेट और रिच माइंडसेट को अलग करता है। गरीब इंसान सोचता है मैं ज्यादा पैसे कैसे कमाऊं। लेकिन अमीर इंसान सोचता है मैं ऐसा क्या बनाऊं जो लगातार पैसा बनाता रहे और यही खेल एसेट्स का है। अब यहां एक बहुत इंपॉर्टेंट सवाल आता है। आखिर एसेट
होता क्या है? सिंपल भाषा में समझो। जो चीज आपके पॉकेट में पैसा डाले वो एसेट [संगीत] है और जो चीज आपके पॉकेट से पैसा निकाले वो लायबिलिटी है। लेकिन दुनिया की सबसे बड़ी प्रॉब्लम यह है कि लोग लायबिलिटीज को ही एसेट्स समझ लेते हैं। नई कार खरीद ली। महंगा iPhone [गला साफ़ करने की आवाज़] ले लिया। बड़ा घर ईएमआई पर ले लिया। लोगों को लगता है वह रिच बन रहे हैं। लेकिन रियलिटी क्या है? कार हर साल वैल्यू लूज करती है। फोन कुछ महीनों में पुराना हो जाता है। और बड़ा घर अगर इनकम जनरेट नहीं
कर रहा तो उसका मेंटेनेंस, ईएमआई और खर्च आपकी कमर तोड़ देता है। यानी दिखने में रिच लेकिन अंदर से फाइनेंशियली वीक। इसीलिए कई लोग अच्छी सैलरी होने के बाद भी स्ट्रेस्ड रहते हैं क्योंकि उनका लाइफस्टाइल बढ़ता जाता है लेकिन एसेट्स नहीं बढ़ते और यही मिडिल क्लास ट्रैप है। जैसे ही सैलरी बढ़ती है वैसे ही एक्सपेंसेस बढ़ जाते हैं। पहले 10,000 का फोन चाहिए था। अब 1 लाख वाला चाहिए। पहले बाइक ठीक लगती थी, अब एसयूवी चाहिए। पहले नॉर्मल लाइफ ठीक थी। अब लोगों को इंप्रेस करना जरूरी लगने लगता है। धीरे-धीरे इंसान अपनी जिंदगी का कैदी
बन जाता है। उसकी पूरी जिंदगी ईएमआई और बिल्स भरने में निकल जाती है। और सबसे डेंजरस बात यह है उसे लगता है कि वह प्रोग्रेस कर रहा है। लेकिन असली प्रोग्रेस क्या होती है? जब आपके एसेट्स बढ़ रहे हो। जब आपका पैसा इन्वेस्ट हो रहा हो। जब आपके पास ऐसे सिस्टम्स हो जो फ्यूचर में इनकम जनरेट करें। बफेट ने अपनी जिंदगी में कभी फ्लैशी लाइफस्टाइल कोेंस नहीं दी। अरबपति बनने के बाद भी वह सालों तक उसी पुराने घर में रहे क्योंकि उनका फोकस दिखावे पर नहीं एसेट्स बनाने पर था। आज सोशल मीडिया ने लोगों की
थिंकिंग और भी डेंजरस बना दी है। हर कोई रिच दिखना चाहता है लेकिन रिच बनना बहुत कम लोग चाहते हैं। लोग लग्जरी दिखाते हैं लेकिन लोंस नहीं दिखाते। महंगी वॉच दिखाते हैं, लेकिन क्रेडिट कार्ड का बिल नहीं दिखाते और धीरे-धीरे सोसाइटी कंपैरिजन के जाल में फंस जाती है। लेकिन फाइनेंशियली स्मार्ट लोग एक अलग गेम खेलते हैं। वो शुरुआत में सिंपल लाइफ जीते हैं लेकिन क्वाइटली एसेट्स बनाते रहते हैं। क्योंकि उन्हें पता होता है आज सैक्रिफाइस कर लिया तो फ्यूचर में फ्रीडम मिलेगी। याद रखिए रिच बनने का मतलब सिर्फ ज्यादा पैसा कमाना नहीं है। रिच बनने
का मतलब है ऐसी फाइनेंशियल पोजीशन बनाना जहां पैसा आपकी जिंदगी को कंट्रोल ना करे और यह जर्नी शुरू होती है एक सिंपल डिसीजन से। इनकम के पीछे भागना बंद करो। वेल्थ बनाना शुरू करो। चैप्टर दो। अमीर लोग पैसे को अलग नजर से क्यों देखते हैं? दुनिया का सबसे बड़ा फर्क पैसे में नहीं पैसे को देखने के नजरिए में होता है। एक गरीब माइंडसेट वाला इंसान जब पैसा कमाता है तो सबसे पहले सोचता है अब मैं क्या खरीदूं लेकिन रिच माइंडसेट वाला इंसान सोचता है इस पैसे से मैं ऐसा क्या बनाऊं जो और पैसा पैदा करे।
यही वो छोटी सोच है जो आगे चलकर जिंदगी का पूरा फ्यूचर तय कर देती है। मान लो दो दोस्तों को एक साथ ₹1 लाख मिले। पहला इंसान क्या करेगा? नया फोन, महंगे शूज, पार्टी, थोड़ी शॉपिंग और कुछ दिनों बाद अकाउंट फिर खाली। अब दूसरा इंसान क्या करेगा? वह सोचेगा। क्या मैं इस पैसे को कहीं इन्वेस्ट कर सकता हूं? क्या मैं कोई स्किल सीख सकता हूं? क्या मैं ऐसा एसेट खरीद सकता हूं? जो फ्यूचर में पैसा बनाए और यही डिफरेंस धीरे-धीरे एक इंसान को फाइनेंशियली स्ट्रांग बनाता है और दूसरे को हमेशा स्ट्रगल में रखता है। बफेट
बचपन से ही पैसे को अलग नजर से देखते थे। जब दूसरे बच्चे टॉयज और गेम्स में बिजी थे। तब वारेन बफेट छोटी उम्र में ही बिजनेस और इन्वेस्टिंग सीख रहे थे। उन्होंने बचपन में चिंग गम और कोका कोला तक बेचने शुरू कर दिए थे। क्योंकि उन्हें जल्दी समझ आ गया था कि सिर्फ पैसे खर्च करने से इंसान रिच नहीं बनता। पैसा मल्टीप्लाई करना सीखना पड़ता है और यही चीज ज्यादातर लोग कभी नहीं सीख पाते। हमारी सोसाइटी हमें कंज्यूमर बनाती है। क्रिएटर नहीं हर जगह आपको सिर्फ खरीदने के लिए मोटिवेट किया जाता है। न्यू सेल, न्यू
फैशन, न्यू फोन, न्यू कार, पूरी दुनिया आपका पैसा निकालने में लगी हुई है। लेकिन रिच लोग इस गेम को समझते हैं। वो इमोशन से शॉपिंग नहीं करते। वो हर चीज से पहले एक सवाल पूछते हैं। क्या यह चीज फ्यूचर में मेरे लिए वैल्यू क्रिएट करेगी? अब इसका मतलब यह नहीं कि अमीर लोग कभी एक्सपेंसिव चीजें नहीं खरीदते। वह खरीदते हैं, लेकिन पहले एसेट्स बनाते हैं। पहले पैसा उनके लिए काम करता है। फिर वह उस पैसे से लाइफस्टाइल एंजॉय करते हैं। लेकिन मिडिल क्लास अक्सर इसका उल्टा करती है। पहले लाइफस्टाइल बनाते हैं। फिर पूरी जिंदगी उस
लाइफस्टाइल को मेंटेन करने के लिए काम करते रहते हैं। यही रीजन है कि कई लोग सैलरी बढ़ने के बाद भी फाइनेंशियली फ्री नहीं बन पाते। क्योंकि उनकी इनकम बढ़ती है लेकिन फाइनेंशियल इंटेलिजेंस नहीं बढ़ती और बिना फाइनेंशियल इंटेलिजेंस के ज्यादा पैसा भी इंसान को रिच नहीं बना सकता। कई लॉटरी विनर्स कुछ सालों बाद फिर गरीब हो जाते हैं। क्यों? क्योंकि वेल्थ सिर्फ पैसे से नहीं बनती। वेल्थ माइंडसेट से बनती है। अगर माइंडसेट वीक है तो पैसा हाथ में टिकता नहीं। और अगर माइंडसेट स्ट्रांग है तो छोटा पैसा भी धीरे-धीरे बड़ी वेल्थ बन सकता है। यही
कारण है कि कुछ लोग छोटी शुरुआत करके भी करोड़पति बन जाते हैं। जबकि कुछ लोग पूरी जिंदगी अच्छी सैलरी के बावजूद स्ट्रगल करते रहते हैं। क्योंकि रिच लोग इनकम को एंड नहीं मानते। वह उसे शुरुआत [संगीत] मानते हैं। उनके लिए हर कमाया हुआ रुपया एक वर्कर की तरह होता है। वह चाहते हैं कि उनका हर रुपया बाहर जाए और अपने साथ और पैसे लेकर वापस आए। यही इन्वेस्टिंग का रियल माइंडसेट है। अब यहां एक चीज बहुत डीपली समझने वाली है। गरीब लोग टाइम के बदले पैसा कमाते हैं। लेकिन अमीर लोग सिस्टम्स बनाते हैं। अगर गरीब
इंसान काम करना बंद कर दे तो इनकम रुक जाती है। लेकिन रिच माइंडसेट वाला इंसान ऐसी चीजें बनाता है जो उसके बिना भी चलती रहे। जैसे इन्वेस्टमेंट्स, बिजनेसेस, स्टक्स, रियलस्टेट, डिजिटल एसेट्स, स्किल्स, कंटेंट, रॉयल्टीज यानी शुरुआत में मेहनत करो लेकिन धीरे-धीरे ऐसा सिस्टम [संगीत] बनाओ जो फ्यूचर में फ्रीडम दे और यही फाइनेंशियल फ्रीडम का असली मतलब है। फाइनेंशियल फ्रीडम का मतलब करोड़पति बनना नहीं है। फाइनेंशियल फ्रीडम का मतलब है आपके डिसीजंस पैसे के डर से कंट्रोल ना हो। आप जॉब सिर्फ मजबूरी में ना करो। आप जिंदगी सिर्फ बिल्स भरने के लिए ना जियो। आपके पास
चॉइस हो और चॉइस तभी आती है जब आपके पास एसेट्स होते हैं। इसीलिए रिच लोग सैलरी से ज्यादा एसेट्स पर फोकस करते हैं। क्योंकि उन्हें पता है सैलरी आपको सर्वाइव करा सकती है। लेकिन एसेट्स [संगीत] आपको फ्री बनाते हैं। चैप्टर तीन वारेन बफेट का सबसे बड़ा सीक्रेट श कंपाउंडिंग की ताकत। अगर बफेट से कोई पूछे कि उनकी सबसे बड़ी ताकत क्या थी? तो शायद आंसर होगा पेशेंस और कंपाउंडिंग। दुनिया के ज्यादातर लोग जल्दी अमीर बनना चाहते हैं। फास्ट मनी, इंस्टेंट सक्सेस, ओवरनाइट करोड़पति लेकिन बफेट [संगीत] ने वेल्थ धीरे-धीरे बनाई। उन्होंने शॉर्टकट नहीं ढूंढे। उन्होंने कंपाउंडिंग
को समझा। अब सवाल है, आखिर कंपाउंडिंग इतनी पावरफुल क्यों है? सिंपल भाषा में समझो। मान लो आपने एक छोटा सा पौधा लगाया। पहले दिन कुछ खास नहीं दिखेगा। एक महीने बाद भी ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। लेकिन अगर आप उसे लगातार पानी देते रहो सालों तक तो वही छोटा पौधा एक विशाल पेड़ बन जाता है। कंपाउंडिंग भी बिल्कुल ऐसा ही काम करती है। शुरुआत में ग्रोथ छोटी लगती है लेकिन टाइम के साथ ग्रोथ एक्सप्ललोड होने लगती है और यही चीज रिच लोग समझते हैं। जबकि बाकी लोग बीच रास्ते में हार मान लेते हैं। आज की दुनिया
का सबसे बड़ा प्रॉब्लम यह है कि लोगों में पेशेंस खत्म हो चुका है। लोग जिम ज्वाइन करते हैं। 7 दिन में बॉडी चाहिए। बिजनेस शुरू करते हैं। [गला साफ़ करने की आवाज़] 1 महीने में सक्सेस चाहिए। इन्वेस्टिंग करते हैं। 2 हफ्ते में डबल पैसा चाहिए। लेकिन वेल्थ ऐसे नहीं बनती। वेल्थ धीरे-धीरे बनती है। साइलेंटली बनती है। इयर्स लगते हैं। और यही रीजन है कि बहुत कम लोग ट्रूली रिच बन पाते हैं। क्योंकि ज्यादातर लोग प्रोसेस पर ट्रस्ट नहीं करते। बफेट ने अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा एडवांटेज जल्दी शुरुआत करके लिया। ध्यान देने वाली बात यह
है कि उनकी वेल्थ का बहुत बड़ा हिस्सा उन्हें लाइफ के लेटर इयर्स में मिला। यानी कंपाउंडिंग ने समय के साथ उनकी वेल्थ को एक्सप्पोनेंशियली बढ़ाया। यानी शुरुआत छोटी थी लेकिन कंसिस्टेंसी ने उसे जॉइंट बना दिया। अब इसे रियल लाइफ में समझते हैं। मान लो दो लोग हैं। पहला इंसान 25 साल की उम्र से हर महीने थोड़ा-थोड़ा इन्वेस्ट करना शुरू करता है। दूसरा इंसान सोचता रहता है। अभी तो टाइम है बाद में शुरू करेंगे। 10 साल निकल जाते हैं। अब दूसरा इंसान भी इन्वेस्टिंग शुरू करता है। लेकिन तब तक पहला इंसान कंपाउंडिंग का सबसे वैल्यूुएबल एसेट
जीत चुका होता है। टाइम और इन्वेस्टिंग की दुनिया में। टाइम हमेशा पैसे से ज्यादा पावरफुल होता है। यही वजह है कि छोटे-छोटे इन्वेस्टमेंट्स भी फ्यूचर में ह्यूज वेल्थ बन सकते हैं। लेकिन लोग गलती कहां करते हैं? वो कंसिस्टेंसी छोड़ देते हैं। मार्केट गिरा डर गए। प्रॉफिट कम मिला छोड़ दिया। दोस्त ने क्रिप्टो में ओवरनाइट पैसा बनाया तो लॉन्ग टर्म इन्वेस्टिंग बोरिंग लगने लगी। यही इमोशनल डिसीजंस इंसान को फाइनेंशियली वीक बना देते हैं। रिच लोग इमोशंस से इन्वेस्ट नहीं करते। वो लॉजिक से इन्वेस्ट करते हैं। [गला साफ़ करने की आवाज़] उन्हें पता होता है कि वेल्थ
बोरिंग होती है। हां, सही सुना आपने। असल वेल्थ अक्सर बोरिंग प्रोसेस से बनती है। रेगुलर इन्वेस्टिंग, पेशेंस, डिसिप्लिन, लॉन्ग टर्म थिंकिंग, कोई फ्लैशी चीज नहीं। कोई ओवरनाइट मैजिक नहीं। लेकिन प्रॉब्लम यह है कि सोशल मीडिया ने लोगों का दिमाग खराब कर दिया है। हर कोई लग्जरी दिखा रहा है। हर कोई फास्ट सक्सेस दिखा रहा है। हर कोई करोड़पति बनने का शॉर्टकट बेच रहा है। लेकिन कोई यह नहीं दिखाता कि रियल वेल्थ बिल्ड करने में सालों लगते हैं। और यही कारण है कि लोग [संगीत] जल्दी एक्साइटमेंट में फैसले लेते हैं और बाद में फाइनेंशियली टूट जाते
हैं। बफेट हमेशा कहते हैं कि स्टॉक मार्केट एक ऐसा टूल है जो इंपेशेंट लोगों से पैसा लेकर पेशेंट लोगों को देता है। और यह बात सिर्फ इन्वेस्टिंग पर नहीं पूरी जिंदगी पर लागू होती है। अगर आप रोज थोड़ा-थोड़ा सीखते हो तो कुछ साल बाद नॉलेज पावरफुल बन जाती है। अगर आप रोज थोड़ा पैसा इन्वेस्ट करते हो तो फ्यूचर में वेल्थ पावरफुल बन जाती है। अगर आप रोज डिसिप्लिन फॉलो करते हो तो जिंदगी बदल जाती है। लेकिन लोग डेली प्रोग्रेस को इग्नोर करते हैं क्योंकि वह स्लो होती है। उन्हें इंस्टेंट रिजल्ट चाहिए। याद रखिए स्लो ग्रोथ
बोरिंग लग सकती है। लेकिन वही लॉन्ग टर्म में अनस्टॉपेबल बनती है। और शायद यही वारेन बफेट माइंडसेट का सबसे पावरफुल लेसन है। रिच लोग जल्दी रिच बनने की कोशिश नहीं करते। वो परमानेंटली रिच बनने की कोशिश करते हैं। चैप्टर चार एसेट्स [संगीत] बनाओ दिखावा नहीं आज की दुनिया में एक बहुत खतरनाक बीमारी फैल चुकी है। रिच दिखने की बीमारी लोगों को रिच बनना कम है। रिच दिखना ज्यादा है। महंगी कार, लेटेस्ट आई, [संगीत] ब्रांडेड क्लोथ्स, लग्जरी कैफेस, सोशल मीडिया फोटो। आज कई लोग अपनी पूरी इनकम सिर्फ लोगों को इंप्रेस करने में खर्च कर देते हैं।
[संगीत] लेकिन सबसे शॉकिंग बात यह है जिन चीजों को लोग अमीरी समझते हैं वही चीजें अक्सर उन्हें फाइनेंशियली वीक बना रही होती हैं। बफेट दुनिया के सबसे अमीर लोगों में से एक हैं। लेकिन उनका लाइफस्ट देखकर शायद कोई बिलीव भी ना करे। ना फ्लैशी कार्स का ऑब्सेशन ना अननेसेसरी लग्जरी का शो ऑफ। क्यों? क्योंकि ट्रूली रिच लोगों को खुद को प्रूव करने की जरूरत नहीं पड़ती। जो लोग अंदर से इनसिक्योर होते हैं, वही अक्सर बाहर से ज्यादा शो ऑफ करते हैं। अब इसका मतलब यह नहीं कि पैसा होने के बाद अच्छी चीजें एंजॉय नहीं करनी
चाहिए। बिल्कुल करनी चाहिए। लेकिन प्रॉब्लम तब शुरू होती है जब लाइफस्टाइल आपकी इनकम से बड़ा हो जाता है। आज कई लोग सैलरी आने से पहले ही मेंटली पैसा खर्च कर चुके होते हैं। सैलरी आते ही ईएमआई कट गई। क्रेडिट कार्ड बिल चला गया। शॉपिंग हो गई। बाकी पैसा खत्म। और फिर वही लाइन यार पैसा टिकता ही नहीं लेकिन पैसा टिकेगा कैसे? जब हर कमाया हुआ रुपया लायबिलिटीज में जा रहा है। यही वह जगह है जहां फाइनेंशियली स्मार्ट लोग अलग डिसीजंस लेते हैं। वो पहले एसेट्स खरीदते हैं। फिर लाइफस्टाइल अपग्रेड करते हैं। क्योंकि उन्हें पता होता
है अगर एसेट्स स्ट्रांग है तो फ्यूचर सिक्योर है। अब सवाल है आखिर कौन-कौन सी चीजें एसेट्स बन सकती हैं? बहुत लोग सोचते हैं कि एसेट मतलब सिर्फ करोड़ों की प्रॉपर्टी नहीं। एसेट कोई भी ऐसी चीज हो सकती है जो फ्यूचर में पैसा जनरेट करें या आपकी वैल्यू बढ़ाए। जैसे इन्वेस्टमेंट्स, स्टक्स, बिजनेस, स्किल, YouTube चैनल, डिजिटल प्रोडक्ट्स, [संगीत] बुक्स, रेंटल इनकम, इवन नॉलेज। हां, नॉलेज भी एसेट है क्योंकि सही नॉलेज फ्यूचर में ओपोरर्चुनिटीज बनाती है। लेकिन प्रॉब्लम यह है कि लोग एसेट्स बिल्ड करने के बजाय कंसमशन में फंस जाते हैं। उन्हें अर्निंग से ज्यादा स्पेंडिंग में
मजा आता है और कंपनीज़ इसी साइकोलॉजी से अरबों रुपए कमाती हैं। आपने नोटिस किया होगा जैसे ही सैलरी आती है। ऑनलाइन शॉपिंग एड्स अचानक ज्यादा अट्रैक्टिव लगने लगते हैं। क्यों? क्योंकि पूरी दुनिया चाहती है कि आप कंज्यूमर बने रहो। क्योंकि कंज्यूमर हमेशा काम करता रहेगा और हमेशा पैसा खर्च करता रहेगा। लेकिन रिच माइंडसेट वाला इंसान सिर्फ कंज्यूमर नहीं होता। वो ओनर बनने की कोशिश करता है। वो सिर्फ प्रोडक्ट्स खरीदता नहीं कंपनीज में ओनरशिप भी लेता है। यही रीजन है कि अमीर [संगीत] लोग बिजनेसेस और इन्वेस्टमेंट्स पर फोकस करते हैं। अब यहां एक बहुत डीप बात
समझो। गरीब इंसान प्राइस देखता है। लेकिन रिच माइंडसेट वाला इंसान वैल्यू देखता है। गरीब माइंडसेट पूछता है, यह कितना महंगा है? लेकिन रिच माइंडसेट पूछता है, क्या यह फ्यूचर में मुझे रिटर्न देगा? और यही सोच धीरे-धीरे फाइनेंसियल डेस्टिनी बदल देती है। मान लो किसी इंसान ने ₹1 लाख का फोन खरीद लिया। अब कुछ महीनों बाद उसकी वैल्यू आधी रह जाएगी। लेकिन अगर वही पैसा किसी यूजफुल स्किल, बिजनेस या इन्वेस्टमेंट में लगाया जाए तो फ्यूचर में वह पैसा कई गुना बढ़ सकता है। यही डिफरेंस है कंजमशन और एसेट बिल्डिंग में। आज कई लोग बाहर से रिच
दिखते हैं लेकिन अंदर से फाइनेंशियली स्ट्रेस्ड होते हैं क्योंकि उनकी लाइफ स्टाइल एक्सपेंसिव है लेकिन कैश फ्लो वीक है और कैश फ्लो वीक होते ही जिंदगी स्ट्रेस से भर जाती है। फिर इंसान जॉब छोड़ने से डरता है। रिस्क लेने से डरता है। नई ओपोरर्चुनिटीज ट्राई करने से डरता है। क्योंकि उसे पता है उसकी पूरी जिंदगी मंथली इनकम पर टिकी हुई है। लेकिन एसेट्स फ्रीडम देते हैं। एसेट्स आपको ऑप्शंस देते हैं। [संगीत] कॉन्फिडेंस देते हैं, सिक्योरिटी देते हैं। यही कारण है कि रिच लोग शुरुआत में साइलेंटली एसेट्स बनाते हैं। [नाक से की जाने वाली आवाज़] हो
सकता है शुरुआत में उनकी लाइफ ग्लैमरस ना दिखे। लेकिन फ्यूचर में वही लोग फाइनेंशियली स्ट्रांगेस्ट बनते हैं। याद रखिए लग्जरी आपको रिच दिखा सकती है। लेकिन एसेट्स आपको ट्रूली रिच बनाते हैं। चैप्टर पांच गरीब और अमीर की डेली हैबिट्स में सबसे बड़ा फर्क कई लोग सोचते हैं कि रिच लोग लकी होते हैं। कुछ लोग कहते हैं उसके पास अपॉर्चुनिटी थी। उसका बैकग्राउंड स्ट्रांग था। उसकी किस्मत अच्छी थी। लेकिन सच यह है कि वेल्थ सिर्फ बड़े मौके से नहीं बनती। वो छोटी डेली हैबिट से बनती है। आप हर दिन जो करते हो धीरे-धीरे वही आपकी जिंदगी
बन जाता है। बफेट की जिंदगी को अगर ध्यान से देखो तो एक चीज बहुत क्लियर दिखाई देती है। सिंपलीसिटी और डिसिप्लिन। आज भी वह अपना ज्यादातर टाइम पढ़ने, सोचने और सीखने में बिताते हैं। क्योंकि उन्हें पता है माइंडसेट जितना स्ट्रांग होगा डिसीजंस उतने पावरफुल होंगे। अब जरा कंपेयर करके देखिए। गरीब माइंडसेट वाला इंसान खाली टाइम में मोस्टली एंटरटेनमेंट कंज्यूम करता है। आवर्स तक स्क्रोलिंग, [संगीत] रैंडम वीडियोस, गसिप, कंपैरिजन, टेंपरेरी डोपमिन। लेकिन रिच माइंडसेट वाला इंसान अक्सर नॉलेज कंज्यूम करता है। बुक्स, बिजनेस, स्किल्स, इन्वेस्टिंग, सेल्फ ग्रोथ। क्यों? क्योंकि वह समझता है कि नॉलेज फ्यूचर इनकम बन
सकती है और यही छोटी आदतें टाइम के साथ ह्यूज डिफरेंस क्रिएट करती हैं। अब यहां एक बहुत इंटरेस्टिंग बात समझो। गरीब लोग अक्सर शॉर्ट टर्म खुशी चूज़ करते हैं। लेकिन रिच माइंडसेट वाले लोग लॉन्ग टर्म फ्रीडम चूज़ करते हैं। यही रीजन है कि कई लोग पैसा आते ही खर्च कर देते हैं। उन्हें वेट करना मुश्किल लगता है। इंस्टेंट प्लेजर ज्यादा अट्रैक्टिव लगता है। लेकिन फाइनेंशियली स्मार्ट लोग इमोशंस को कंट्रोल करना सीखते हैं। क्योंकि उन्हें पता होता है हर छोटा डिसीजन फ्यूचर को शेप कर रहा है। मान लो दो लोग हैं। पहला इंसान हर महीने पैसा
आते ही अननेसेसरी चीजों पर खर्च कर देता है। दूसरा इंसान पहले इन्वेस्टिंग करता है। फिर बाकी पैसा खर्च करता है। शुरुआत में दोनों की लाइफ ऑलमोस्ट सेम लगेगी। लेकिन 10 से 15 साल बाद डिफरेंस शॉकिंग होगा। क्योंकि स्मॉल हैबिट्स कंपाउंड होती हैं। जैसे छोटी इन्वेस्टमेंट्स कंपाउंड होती हैं, वैसे ही हैबिट्स भी कंपाउंड होती हैं। अगर रोज थोड़ा आलस करो तो फ्यूचर एवरेज बन जाता है। अगर रोज थोड़ा डिसिप्लिन रखो तो फ्यूचर पावरफुल बन जाता है। यही कारण है कि रिच लोग हैबिट्स पर इतना फोकस करते हैं। अब यहां एक और डेंजरस हैबिट आती है कंपैरिजन।
आज सोशल मीडिया ने लोगों को मेंटली गरीब बना दिया है। हर समय कंपैरिजन उसके पास क्या है? उसकी कार कैसी है? उसका लाइफस्टाइल कैसा है? धीरे-धीरे इंसान अपनी खुशी खो देता है। और सबसे बड़ी बात कंपैरिजन इंसान को इररेशनल स्पेंडिंग की तरफ धकेल देता है। लोग जरूरत से नहीं दूसरों को देखकर खर्च करने लगते हैं। यही लाइफस्टाइल इनफ्लेशन है। इनकम बढ़ती है तो एक्सपेंसेस उससे भी फास्टर बढ़ जाते हैं। और फिर इंसान सोचता है इतना कमाने के बाद भी पैसा बच क्यों नहीं रहा? क्योंकि प्रॉब्लम इनकम में नहीं हैबिट्स में है। रिच माइंडसेट वाले लोग
अपने पैसे को डायरेक्शन देते हैं। वह जानते हैं कि पैसा अगर बिना कंट्रोल के छोड़ दिया जाए तो क्वाइटली गायब हो जाता है। इसलिए वह बजटिंग करते हैं, इन्वेस्टिंग करते हैं। लॉन्ग टर्म सोचते हैं और सबसे इंपॉर्टेंट वो डिलेड ग्रेटिफिकेशन समझते हैं। मतलब आज थोड़ी सैक्रिफाइस करो ताकि फ्यूचर में फ्रीडम मिले। लेकिन ज्यादातर लोग इसका उल्टा करते हैं। आज प्लेजर चाहिए फ्यूचर बाद में देखेंगे और यही सोच आगे चलकर रिग्रेट बन जाती है। बफेट एक बार कहते हैं अगर आप छोटी चीजों में डिसिप्लिन नहीं रख सकते तो बड़ी वेल्थ को भी हैंडल नहीं कर पाओगे।
और यह बात बिल्कुल सच है। क्योंकि पैसा इंसान को बदलता नहीं। पैसा सिर्फ उसका असली कैरेक्टर रिवील करता है। अगर हैबिट्स वीक हैं तो ज्यादा पैसा भी जल्दी खत्म हो जाएगा। लेकिन अगर हैबिट्स स्ट्रांग हैं तो छोटी शुरुआत भी बड़ी वेल्थ बन सकती है। याद रखिए फाइनशियल सक्सेस अचानक नहीं आता। वो रोज के छोटे डिसीजंस से बनता है। आपकी डेली हैबिट्स ही सीक्रेटली आपका फाइनेंसियल फ्यूचर लिख रही होती हैं। चैप्टर छ क्यों ज्यादातर लोग कभी अमीर नहीं बन पाते? यह सुनने में थोड़ा हार्श लग सकता है। लेकिन सच यह है कि ज्यादातर लोग जिंदगी भर
पैसे के पीछे भागते रहेंगे। फिर भी फाइनेंशियली फ्री नहीं बन पाएंगे। और इसका रीजन सिर्फ कम इनकम नहीं है। असल रीजन है गलत माइंडसेट। आज बहुत लोग पैसे कमाना चाहते हैं लेकिन पैसे को समझना नहीं चाहते। उन्हें लगता है बस सैलरी बढ़ जाए जिंदगी सेट हो जाएगी। लेकिन रियलिटी क्या है? अगर सिर्फ ज्यादा इनकम से लोग रिच बनते तो हाई सैलरी वाले हर इंसान करोड़पति होते। लेकिन ऐसा नहीं है। कई लोग लाखों कमाने के बाद भी फाइनेंशियली स्ट्रेस्ड हैं। और कुछ लोग नॉर्मल इनकम के बावजूद वेल्थ बिल्ड कर रहे हैं। डिफरेंस कहां है? डिफरेंस डिसीजंस
में है। बफेट कहते हैं कि वेल्थ सिर्फ इंटेलिजेंस से नहीं बनती। बिहेवियर से बनती है। और यही बिहेवियर ज्यादातर लोगों को गरीब बनाए रखता है। अब ध्यान से समझिए। पहली गलती लोग अर्निंग पर फोकस करते हैं। लर्निंग [गला साफ़ करने की आवाज़] पर नहीं। उन्हें जल्दी पैसा चाहिए। लेकिन स्किल बिल्ड करने का पेशेंस नहीं। [संगीत] आज की दुनिया में हाई इनकम स्किल्स सबसे बड़ा एसेट बन चुकी है। कम्युनिकेशन, सेल्स, बिजनेस अंडरस्टैंडिंग, इन्वेस्टिंग [संगीत] नॉलेज, कंटेंट क्रिएशन, टेक्नोलॉजी यह सारी चीजें फ्यूचर ओपोरर्चुनिटीज क्रिएट करती हैं। लेकिन लोग अपना टाइम सिर्फ एंटरटेनमेंट में वेस्ट कर देते हैं।
और फिर कंप्लेन करते हैं कि लाइफ चेंज क्यों नहीं हो रही? याद रखिए अगर आपकी नॉलेज नहीं बढ़ रही तो आपकी इनकम भी लिमिटेड रहेगी। दूसरी गलती [संगीत] फियर। बहुत लोग रिस्क से डरते हैं। वह हमेशा सेफ खेलना चाहते हैं। अब इसका मतलब यह नहीं कि ब्लाइंडली [संगीत] रिस्क लो। लेकिन जिंदगी में कैलकुलेटेड रिस्क लिए बिना ग्रोथ पॉसिबल नहीं है। कई लोग बिजनेस शुरू करना चाहते हैं, लेकिन डरते हैं, इन्वेस्टिंग करना चाहते हैं, लेकिन मार्केट गिरने से डरते हैं। नई स्किल सीखना चाहते हैं, लेकिन फेलियर से डरते हैं और धीरे-धीरे फियर उनकी जिंदगी का परमानेंट
हिस्सा बन जाता है। रिच माइंडसेट वाले लोग भी डरते हैं। लेकिन वह फियर के बावजूद एक्शन लेते हैं। यही उन्हें अलग बनाता है। [संगीत] तीसरी गलती लोगों को तुरंत रिजल्ट चाहिए। पेशेंस ऑलमोस्ट खत्म हो चुका है। अगर 3 महीने में रिजल्ट नहीं मिला तो लोग क्विट कर देते हैं। लेकिन वेल्थ मैराथन है। स्प्रिंट नहीं। वारेन बफेट ने डेकेड्स तक पेशेंस रखा। उन्होंने इमोशंस से नहीं लॉजिक और लॉन्ग टर्म विज़न से डिसीजंस लिए। लेकिन आज लोग सोशल मीडिया देखकर इंपेशेंट हो चुके हैं। हर कोई ओवरनाइट सक्सेस देखना चाहता है। कोई प्रोसेस नहीं देखना चाहता। कोई बोरिंग
कंसिस्टेंसी नहीं चाहता। लेकिन ट्रुथ यह है बोरिंग कंसिस्टेंसी ही एक्स्ट्राऑर्डिनरी रिजल्ट्स बनाती है। चौथी गलती लोग एक्टिव इनकम पर पूरी जिंदगी डिपेंड रहते हैं। यानी अगर काम बंद तो इनकम बंद और यही फाइनेंशियल ट्रैप है। क्योंकि इंसान हमेशा काम नहीं कर सकता। [संगीत] एज बढ़ती है, एनर्जी कम होती है, सिचुएशंस बदलती हैं। अगर एसेट्स नहीं है तो फ्यूचर इनसिक्योर हो जाता है। इसीलिए रिच लोग मल्टीपल इनकम सोर्सेस बनाते हैं। वो सिर्फ सैलरी पर डिपेंड नहीं रहते। उन्हें पता होता है एक इनकम सोर्स सिक्योरिटी नहीं देता। और पांचवी सबसे डेंजरस गलती लोग दूसरों को इंप्रेस करने
में अपनी फाइनेंशियल लाइफ बर्बाद कर देते हैं। महंगे कपड़े, लग्जरी लाइफस्ट, [संगीत] फेक स्टेटस सिर्फ इसलिए ताकि लोग उन्हें सक्सेसफुल समझें। लेकिन अंदर से स्ट्रेस, ईएमआई, फाइनेंशियल प्रेशर यानी बाहर चमक, अंदर पैनिकिक। और दुख की बात यह है कि सोसाइटी भी अक्सर दिखावे को सक्सेस समझ लेती है। लेकिन रियल सक्सेस क्या है? पीस, फ्रीडम, चॉइस। वो एबिलिटी कि आप पैसे के डर के बिना डिसीजंस ले सको। यही रियल वेल्थ है और यही रीजन है कि ट्रूली रिच लोग अक्सर सिंपल दिखाई देते हैं क्योंकि उनका फोकस अपीयरेंस पर नहीं ओनरशिप पर होता है। याद रखिए गरीबी
सिर्फ बैंक बैलेंस की प्रॉब्लम नहीं होती। कई बार गरीबी सोच में होती है और जब सोच बदलती है तभी जिंदगी बदलनी शुरू होती है। चैप्टर सात फाइनेंशियल फ्रीडम का असली मतलब क्या है? जब लोग अमीर शब्द सुनते हैं तो उनके दिमाग में क्या आता है? बड़ी कार, लग्जरी हाउस, एक्सपेंसिव वॉचेस, फॉरेन ट्रिप्स। लेकिन सच कहें तो यह फाइनेंशियल फ्रीडम नहीं है। कई लोग बाहर से रिच दिखते हैं, लेकिन अंदर से फाइनेंशियली ट्रैप्ड होते हैं। उनके एक्सपेंसेस इतने बड़े होते हैं कि उन्हें लगातार काम करना ही पड़ता है। अगर इनकम रुक जाए तो पूरी लाइफस्टाइल हिल
जाती है। यानी बाहर लग्जरी, अंदर फियर। लेकिन वारेन बफेट के अकॉर्डिंग असली वेल्थ वो है जो आपको फ्रीडम दे। फ्रीडम मतलब आप अपने डिसीजंस पैसे के डर से ना लो। आप सिर्फ बिल्स भरने के लिए जॉब ना करो। आप जिंदगी सिर्फ सर्वाइव करने के लिए ना जियो बल्कि आपके पास चॉइस हो। यही फाइनेंशियल फ्रीडम है। अब यहां एक बहुत डीप बात [संगीत] समझो। फाइनेंशियल फ्रीडम सिर्फ करोड़पति बनने का नाम नहीं है। कई करोड़पति लोग भी मेंटली स्ट्रेस्ड रहते हैं। क्योंकि उनकी डिजायर्स कभी खत्म नहीं होती। एक कार ली अब उससे बड़ी चाहिए। एक हाउस लिया
अब उसे लग्जरी चाहिए। एक अचीवमेंट मिली। अब कंपैरिजन शुरू यानी पैसा बढ़ता जाता है। लेकिन सेटिस्फेक्शन नहीं आती और यही एंडलेस रेस इंसान को अंदर से खाली कर देती है। रिच माइंडसेट वाले लोग सिर्फ पैसा नहीं कमाते। [संगीत] वह पीएस भी बिल्ड करते हैं। उन्हें पता होता है। अगर माइंड हमेशा कंपैरिजन में रहेगा तो कभी इनफ फील नहीं होगा। इसलिए वह धीरे-धीरे ऐसी लाइफ बनाते हैं जहां जरूरत से ज्यादा दिखावा ना हो। लेकिन स्टेबिलिटी स्ट्रांग हो। अब इमेजिन करो सुबह आप उठो और आपको यह टेंशन ना हो कि अगले महीने बिल्स कैसे भरेंगे। आपको कोई
काम सिर्फ मजबूरी में ना करना पड़े। आप अपने फैमिली के साथ टाइम स्पेंड कर सको। आप किसी टॉक्सिक सिचुएशन में सिर्फ पैसों के लिए फंसे ना रहो। यही फ्रीडम है और यही फ्रीडम एसेट्स देते हैं क्योंकि एसेट्स आपको टाइम वापस देते हैं और जिंदगी में सबसे वैल्यूुएबल चीज पैसा नहीं टाइम है। आज बहुत लोग पैसा कमाने के चक्कर में अपनी पूरी जिंदगी बेच देते हैं। सुबह से रात तक [संगीत] काम स्ट्रेस, प्रेशर, नो पीस और फिर सोचते हैं कि एक दिन जिंदगी एंजॉय करेंगे। लेकिन कई लोगों का वह एक दिन [संगीत] कभी आता ही नहीं।
इसीलिए रिच माइंडसेट वाले लोग सिर्फ इनकम नहीं टाइम फ्रीडम भी बिल्ड करते हैं। वह चाहते हैं कि फ्यूचर में उनका पैसा उनके लिए काम करें। [संगीत] यही कारण है कि इन्वेस्टिंग इतनी इंपॉर्टेंट है। अब यहां एक और पावरफुल चीज समझिए। फाइनेंशियल फ्रीडम का मतलब लेजी होना नहीं है। रिच लोग काम करना बंद नहीं करते बल्कि वो वो काम करते हैं जो उन्हें पर्पस देता है। डिफरेंस सिर्फ इतना है कि उन्हें सर्वाइवल के लिए काम नहीं करना पड़ता। और यही सबसे बड़ी लग्जरी है। आज दुनिया का सबसे बड़ा डर क्या है? अगर नौकरी चली गई तो
यही डर लोगों को कॉम्प्रोमाइज करवाता है। रिस्क लेने से रोकता है। ड्रीम्स छोड़ने पर मजबूर करता है। लेकिन जब आपके पास एसेट्स होते हैं, इन्वेस्टमेंट्स होते हैं, मल्टीपल इनकम सोर्सेस होते हैं, तो कॉन्फिडेंस ऑटोमेटिकली बढ़ने लगता है। क्योंकि अब आपकी जिंदगी सिर्फ एक सैलरी पर डिपेंड नहीं रहती और यही मेंटली भी इंसान को पावरफुल बना देता है। वारेन बफेट ने वेल्थ को सिर्फ नंबर्स की तरह नहीं देखा। उन्होंने उसे फ्रीडम की तरह देखा। इसीलिए वह हमेशा लॉन्ग टर्म सोचते थे क्योंकि शॉर्ट टर्म प्लेजर जल्दी खत्म हो जाता है। लेकिन लॉन्ग टर्म फ्रीडम पूरी जिंदगी बदल
देती है। याद रखिए गरीब माइंडसेट तुरंत खुशी चाहता है। लेकिन रिच माइंडसेट परमानेंट फ्रीडम चाहता है। और जो इंसान फ्रीडम को प्रायोरिटी बना लेता है। धीरे-धीरे उसकी पूरी जिंदगी बदलने लगती है। फाइनल चैप्टर वारेन बफेट माइंडसेट जिसने दुनिया बदल दी अगर इस पूरी वीडियो को सिर्फ एक लाइन में समझना हो तो शायद वह लाइन यह होगी रिच लोग पैसे के लिए काम नहीं करते वो पैसे को अपने लिए काम पर लगाते हैं। यही माइंडसेट वारेन बफेट को दुनिया के सबसे सक्सेसफुल इन्वेस्टर्स में से एक बनाता [संगीत] है। उन्होंने कभी जल्दी अमीर बनने की कोशिश नहीं
की। उन्होंने कभी दिखावे को सक्सेस नहीं माना। उन्होंने कभी इमोशंस में डिसीजंस नहीं लिए। उन्होंने सिर्फ एक सिंपल गेम खेला। सीखते रहो, पेशेंस रखो, एसेट्स बनाओ और कंपाउंडिंग को टाइम दो। बस। लेकिन दुख की बात यह है कि ज्यादातर लोग इस सिंपल ट्रुथ को समझ ही नहीं पाते। क्योंकि दुनिया आपको हर दिन कंज्यूम करना सिखाती है। लेकिन क्रिएट करना नहीं, आपको स्पेंड करना सिखाया जाता है। लेकिन इन्वेस्ट करना नहीं, आपको रिच दिखना सिखाया जाता है। लेकिन रिच बनना नहीं। और शायद इसी वजह से इतने लोग पूरी जिंदगी मेहनत करने के बाद भी फाइनेंशियली फ्री नहीं
बन पाते। लेकिन अच्छी बात यह है फाइनेंशियल फ्रीडम किसी स्पेशल इंसान के लिए रिजर्व नहीं है। यह सिर्फ माइंडसेट का खेल है। हां, शुरुआत छोटी हो सकती है। शायद अभी आपकी इनकम कम हो। शायद अभी रिस्पांसिबिलिटी ज्यादा हो। शायद अभी लाइफ परफेक्ट ना हो। लेकिन वेल्थ हमेशा स्मॉल डिसीजन से शुरू होती है। हर महीने थोड़ा इन्वेस्ट करना, नई स्किल सीखना, अननेसेसरी खर्च रोकना, फ्यूचर के लिए एसेट्स बनाना। यही छोटी चीजें धीरे-धीरे जिंदगी बदलती हैं। और सबसे पावरफुल बात आपको ओवरनाइट करोड़पति बनने की जरूरत नहीं है। आपको बस फाइनेंशियली स्मार्टर बनना है। हर साल थोड़ा बेटर
बनना है। क्योंकि असली वेल्थ स्पीड से नहीं कंसिस्टेंसी से बनती है। इमेजिन करो अगर आज से 5 साल बाद आपके पास ऐसी इन्वेस्टमेंट्स हो जो पैसा जनरेट कर रही हो। ऐसी स्किल्स हो जिनकी डिमांड बढ़ रही हो। [संगीत] ऐसे एसेट्स हो जो आपकी इनकम बढ़ा रहे हो। तो आपकी जिंदगी कितनी अलग हो सकती है। यही लॉन्ग टर्म थिंकिंग रिच माइंडसेट की पहचान है। [संगीत] आज सैक्रिफाइस ताकि फ्यूचर सिक्योर हो। आज डिसिप्लिन ताकि कल फ्रीडम मिले। और यही वो चीज है जो एवरेज लोगों को एक्स्ट्राऑर्डिनरी लोगों से अलग बनाती है। याद रखिए महंगी चीजें खरीद लेना
अमीरी नहीं है। अमीरी है स्ट्रेस के बिना जी पाना। अमीरी है चॉइससेस होना। अमीरी है अपने फैमिली के साथ टाइम स्पेंड कर पाना। अमीरी है। पैसे के डर से फैसले [संगीत] ना लेना। और सबसे बड़ी बात वेल्थ बैंक बैलेंस से पहले दिमाग में बनती है। अगर सोच गरीब है तो पैसा टिकेगा नहीं। लेकिन अगर माइंडसेट रिच है तो छोटी शुरुआत भी बड़ी सक्सेस बन सकती है। इसलिए आज से सिर्फ इनकम बढ़ाने के बारे में मत सोचो। वेल्थ बिल्ड करने के बारे में सोचो। सिर्फ सैलरी मत कमाओ। [संगीत] एसेट्स बनाओ। सिर्फ आज के लिए मत जियो।
ऐसा फ्यूचर बनाओ जहां आपका पैसा आपके लिए काम करें क्योंकि जिंदगी बदलती है जब इंसान खर्च करने से ज्यादा ओनरशिप के बारे में सोचना शुरू कर देता है और शायद यही वारेन बफेट माइंडसेट का सबसे बड़ा लेसन है। तो दोस्तों अगर यह वीडियो पसंद आई हो तो वीडियो को लाइक कीजिए और चैनल को सब्सक्राइब कीजिए। धन्यवाद दोस्तों।