फिटनेस ज्यादा जरूरी नहीं था। मेरे लिए लुक जरूरी था। शॉर्टकट्स में स्टेरॉइड्स ये सब थे जो मैं कभी नहीं मैंने कभी सोचा नहीं है लेने का या ना मैं कभी लूंगा। बिकॉज़ उसके जो लॉन्ग टर्म साइड इफेक्ट्स है वो बहुत ज्यादा खराब है। जीएलपी जो ये सारे वेट लॉस ड्रग्स हैं। ये एक लज़र्ड के टंग से निकला था। ये लोग 25 साल से डायबिटीज के लिए ले रहे हैं। तो जो लोग यहां पे आके इन ड्रग्स को बोल रहे हैं कि ये नए ड्रग्स इट इज नॉट अ न्यू ड्रग। ये एक 40 साल 50 साल
का रिसर्च है। तो ये एक डायबिटीज के लिए था। फिर इसे वेट लॉस में यूज किया गया। वेट लॉस एक साइड इफेक्ट है। ये इतना महंगा ड्रग है। आज के दिन आपका जो राइबलिसिस जो टैबलेट्स आता है वही 7 ₹8000 का है। अगर आप मुंजारो या vigov वो 15 से ₹00 तक का आता है। तो वो एक कॉमन मैन तो अफोर्ड नहीं कर सकता। उसके बाद अगर 8 करोड़ 10 करोड़ लोग ले रहे हैं आप सोचिए कितने लोग ले रहे हैं। दुनिया में 60 हज़ार ड्रग्स हैं। उसमें से हजारों ड्रग्स ऐसे हैं जिनके बहुत सारे
साइड इफेक्ट्स हैं। 100 लोग में से खाली पांच जिन फिट हो रहे हैं। तो कैसे जिम लोगों को हेल्प कर रहा है? सेक्सुअल लाइफ इफेक्ट होती है जो जिम करते हैं। बहुत ज्यादा एक्सरसाइज करते हैं। तो उसको बैलेंस किस तरीके से किया जा सकता है? रेगुलरली आपका डिजायर बॉडी में रहना चाहिए। बिकॉज़ इट इज़ आल्सो साइन ऑफ़ ब्लड फ्लो। मर्द को एडी होता है। इरेक्टाइल डिस्फंक्शन होता है एट एन अर्ली एज। दैट इज अ सिग्नलिंग फॉर हार्ट डिजीज। वो एक एंडोथिलियल डिस्फंक्शन बोलता है जिसके कारण आपका इरेक्शन दैट इज द सेम डिजीज एज अ हार्ट
डिजीज। यंग लोगों में इडी का प्रॉब्लम है। उसके तीन से पांच साल के बाद लोगों को हार्ट अटैक होता है। तो जो यंग बच्चों में हार्ट अटैक हो रहा है दैट कैन बी सीन इफ यू हैव एन इडी प्रॉब्लम एट अ यंग एज। आपको दो-ती साल पहले अगर ईडी का प्रॉब्लम है तो दैट हैज़ बिकम्स अ कार्डियक रिस्क मार्क। आपके ब्रेन में अगर मैं यहां पे एक बीच में पेन घुसा दूं एंड एकदम सेंटर ऑफ द ब्रेन में जाऊं तो पिट्यूटरी ग्लैंड होता है। उस पिट्यूटरी ग्लैंड से सारे हॉर्मोंस बनते हैं बॉडी में ऑलमोस्ट। फैट
स्लीप में बर्न होता है। आप जब सारे दिन में हम लोग बात कर रहे हैं आपके ब्लड में फैटी एस्टर्स बर्न हो सकते हैं। फैटी एसिड्स एंड फैटी एसिड्स बट आपका फैट बर्न नहीं होगा। अगर आप फिटनेस करते टाइम मिज़रेबल है यू हैव फेड। अगर आप अपने डाइट को डाइट बोलते हो यू हैव फेड। आप जिस दिन पार्टी कर रहे हो आपको प्रोटीन दवाई के हिसाब से पीना है तो पीना है। आप जिस दिन पार्टी कर रहे हो फाइबर लेना है। आप जिस दिन पार्टी कर रहे हो वाटर लेना है। कितना भी अल्कोहल ले रहे
हो थेरेपिस्ट के पास जाने का क्या जरूरत है? जिम कर लो। 80 टू 90% जो बहुत स्ट्रांग बॉडी बिल्डिंग करते हैं वो तीन टाइप के हॉर्मोन लेते हैं। वो टेस्टोस्टरॉन लेते हैं, इंसुलिन लेते हैं और ग्रोथ हॉर्मोन लेते हैं। साइड इफेक्ट इज कि आपका हार्ट बड़ा हो जाता है या आपको हार्ट अटैक्स होते हैं। परफॉर्मेंस प्रेशर की बात करें तो उसको कैसे टैकल किया जाता है? क्योंकि वो इतना एक बड़ी इशू बन गया है। सेक्स को नॉर्मलाइज करना बहुत जरूरी है। एंड सेकंड चीज इज कि आई विश कि इंटिमेसी कोचेस भी आए व्हिच कैन हेल्प
यंगस्टर्स। 5 साल तक तो मतलब इट इज अ वे फैक्टर कि आप 5 साल तक कुछ फील नहीं कर पा रहे हैं। सिर्फ वही एक्स्ट्रा वेरिएटल अफेयर। अगर आपको सेक्सुअल लिबिडो बढ़ाना है तो दोनों पार्टनर का बढ़ाएंगे। हस्बैंड इंटरेस्टेड है, वाइफ इंटरेस्टेड नहीं है। वाइफ इंटरेस्टेड नहीं है तो क्या हुआ? हस्बैंड का भी इंटरेस्ट चला गया। एज इज द बिगेस्ट रिस्क फैक्टर इन प्रोस्टेट कैंसर। 90% ऑफ़ मैन डाई विथ प्रोस्टेट कैंसर। आप अपने बेस्ट फ्रेंड को बोल सकते हो। आई लव यू। दिन में तीन-चार बार। एंड विथ लव। बट एक मर्द एक दूसरे मर्द को
कभी नहीं बोलेगा। आई लव यू बिकॉज़ उनको लगेगा कि आई एम शोइंग माय वीकनेस। प्रोटीन को बर्न करने के लिए प्रोटीन का 30% कैलोरी बर्न करना पड़ता है। प्लीन बॉडी एंड हेल्दी होते हैं। उन लोग अपना मसल बिल्ड करने के लिए कैलोरी डेफिसिट में जाते हैं। उन लोग का टेस्टोस्टरॉन कम हो जाता है। मेरा जजमेंट का स्टाइल ही नहीं है। भाई मेरे को नहीं करना है। हाय माय नेम इज अनंत अग्रवाल। आई अ क्लीनिकल रिसर्च साइंटिस्ट एंड हेल्थ कंसलटेंट एंड यू आर वाचिंग मी ऑन फिट तक। हेलो एवरीवन, वेलकम टू अ वीकली हेल्थ पडकास्ट। प्रॉब्लम
क्या है? आज हमारे साथ हैं आनंद अग्रवाल, क्लीनिकल रिसर्च साइंटिस्ट एंड हेल्थ कंसलटेंट जो अपनी पर्सनल हेल्थ जर्नी के साथ-साथ साइंटिफिक इनसाइट्स भी हमारे साथ शेयर करेंगे। इस एपिसोड में हम बात करेंगे दुनिया के सबसे बड़े टॉपिक्स में से एक वेट लॉस। साथ ही हम डिस्कस करेंगे हार्ट हेल्थ, गट हेल्थ और सेक्सुअल हेल्थ। और यह भी समझेंगे कि आपके बॉडी के हॉर्मोंस किस तरीके से काम करते हैं क्योंकि हमारी बॉडी एक कनेक्टेड सिस्टम है। अगर आपने भी अभी तक फिट तक को सब्सक्राइब नहीं किया है तो प्लीज सब्सक्राइब करें। तो चलिए लेट्स वेलकम अनंत अग्रवाल।
अनंत आपका बहुत-बहुत स्वागत है हमारे शो में। थैंक यू सो मच। बहुत सारे सवाल हैं। बहुत सारे कंफ्यूजनंस हैं। बहुत सारे बिट्स हैं। तो आज सारे सवाल आपसे करेंगे। और उम्मीद यही है कि हमारे लोगों को अच्छी इन मिल जाए क्योंकि हमारे एनवायरमेंट में इतनी सारी चीजें हैं। लोग खुद से कंसल्ट नहीं करते हैं डॉक्टर्स को। उन्हें लगता है कि वो कुछ भी मल्टीविटामिनस ले लेंगे, कुछ भी इंजेक्शंस ले लेंगे। लेकिन फिर उसके साइड इफेक्ट्स भी बहुत ज्यादा होते हैं। तो एक-एक करके आप तो सवाल करेंगे। लेकिन सबसे पहला सवाल एक पर्सनल सवाल होगा क्योंकि
आपने खुद नजदीक से अपनी जर्नी फॉलो की है 155 केजी से और अब आप हमारे सामने एकदम फिट हैं और बहुत अच्छे भी लग रहे हैं। तो आपकी जर्नी किस तरीके से शुरू होती है? आप कैसे खुद को मोटिवेटेड आपने रखा? डिसिप्लिन क्योंकि इसमें बहुत ज्यादा जरूरी होता है। क्या कुछ आपने इंटेक किया? सब कुछ आप एक बार अगर मैं आपको सच बताऊं तो मैं 155 केजीस के पहले भी बहुत मोटा था। मतलब 155 kg के आने के पहले तक भी मैं हमेशा स्कूल में मोटा था। मैं आपको ऑनेस्टली अगर बताऊं तो मैं क्लास 10
11 में भी मैंने वीएलसीसी ज्वाइन किया था। तो मैं हमेशा लुक आउट में था। मैं बहुत बॉडी कॉन्शियस था। बिकॉज़ मेरी पूरी फैमिली में ओबेसिटी था। तो मैं बहुत ज्यादा कॉन्शियस था। एंड मैंने बहुत कुछ किया। वीगन कीटो आप जो भी बोल लीजिए। मतलब फिर मैंने वीएलसीसी भी जॉइ किया। फिर वाइब्स भी जॉइ किया। उसके बाद मैं कॉलेज जाके मैं 12 घंटा पढ़ता था तो वहां खाते-खाते मेरा 155 kg भी हो गया था। बट जिस दिन मैंने 155 केg देखा उस दिन मैं अपने मेंटर से मिला था जो मेरे फिटनेस मेंटर मैं जिनको मानता हूं।
एंड उस उस दिन मैंने डिसाइड किया था कि मैं कभी इतना मोटा नहीं रहूंगा। एंड दैट्स हाउ माय जर्नी स्टार्टेड। मतलब कि मैंने वहां से बस डिसाइड किया था कि कुछ भी करना है, कम खाना है, सब चीज ट्राई करना है। लेकिन बस वहां से मेरी एक एजुकेशन जर्नी भी स्टार्ट हुई कि मैं अपने आपको खुद को एजुकेट करूं। ऑलदो मैं बायोेडिकल साइंटिस्ट हूं बाय डिग्री। मैंने हमेशा रिसर्च एंड ड्रग्स के बारे में पढ़ा। ये जो एक पूरा एस्पेक्ट था पर्सनल हेल्थ एंड प्रिवेंटेटिव हेल्थ के बारे में जिसमें कॉलेजेस में बहुत पढ़ाया नहीं जाता है।
उसमें भी मैंने खुद छलांग मार के आई स्टार्टेड माय ओन जर्नी। तो इस पूरी जर्नी में खुद को यह समझाना कि नहीं यार अभी यह नहीं खाना है। मैं दोस्तों के साथ जा रहा हूं। मुझे अभी जंक फूड नहीं खाना है। उस डिसिप्लिन को आप कैसे फॉलो करते हैं? ऑनेस्टली मुझे खुद नहीं पता। मतलब ऐसा होता है ना कि आप स्टार्ट करते हैं एंड आपको थोड़ा सा रिजल्ट्स मिलता है। तो आप उसको जस्ट फॉलो करते जाते हो। आई थिंक मोटिवेशन एक अंदर से आता है। मेरे एक बहुत बड़े मेंटर एंड्रो ह्यूगमैन जो बहुत बड़े साइंटिस्ट
हैं ग्लोबली और उनका बहुत बड़ा पॉडकास्ट भी है। वो भी कहते हैं कि आप जो मोटिवेशन है वो सिर्फ इंटरनल से आप निकाल सकते हैं। मतलब इंटरनली आप अपने आपको मोटिवेट कर सकते हैं। एक्सटर्नल फैक्टर भी इनवॉल्वड है। लेकिन आई थिंक मेरे लिए इनिशियली ऑनेस्टली फिटनेस ज्यादा जरूरी नहीं था। मेरे लिए लुक जरूरी था कि मुझे लगता था कि भाई कपड़ों में अच्छा लगना चाहिए। सही बात है। एंड एंड दैट इज द ऑनेस्ट ट्रुथ कि मेरे माइंड में ऐसा नहीं था कि मेरे को फिट होना है। अभी अलग व्यू पॉइंट है। बट पहले खाली फिटनेस
के बारे में पहले खाली लुक के बारे में था। तो बस इनिशियली ऑनेस्टली फिटनेस ज्यादा जरूरी नहीं था। मेरे लिए लुक जरूरी था कि मुझे लगता था कि भाई कपड़ों में अच्छा लगना चाहिए। सही बात है। एंड एंड दैट इज द ऑनेस्ट ट्रुथ कि मेरे माइंड में ऐसा नहीं था कि मेरे को फिट होना है। अभी अलग व्यू पॉइंट है। बट पहले खाली फिटनेस के बारे में पहले खाली लुक के बारे में था। तो बस वही मैं फॉलो करते गया। आई विश मेरे पास शॉर्टकट्स होते। बिकॉज़ मेरे टाइम पे उतने शॉर्टकट्स नहीं थे। बिकॉज़ ये
शॉर्टकट सेफ है आपके हिसाब से। ले सकते हैं। यस। कुछ-कुछ शॉर्टकट्स सेफ है। मतलब डिपेंड करता है कि आप किस तरह से यूज़ कर रहे हैं और कौन यूज़ कर रहा है। एंड देखिए शॉर्टकट्स में आप ज्यादातर ड्रग्स की बात कर सकते हैं। जो ओज़ेमपिक या जीएलपी बन एंड मुंजारो जो अभी मार्केट में बहुत पॉपुलर है वो आज के दिन दो-ती साल में वेट लॉस के लिए आए हैं। उससे पहले शॉर्टकट्स में स्टेरॉइड्स ये सब थे जो मैं कभी नहीं मैंने कभी सोचा नहीं है लेने का या ना मैं कभी लूंगा। बिकॉज़ उसके उसके जो
लॉन्ग टर्म साइड इफेक्ट्स है वो बहुत ज्यादा खराब है। मतलब चाहे वो हार्ट अटैक्स हो, चाहे वो आपके बॉडी में एनलार्जमेंट हो या आपका पूरा हॉार्मोनल इमंबैलेंस हो जाए। जो स्टेरॉइड्स है जो टेस्टोस्टरॉन बेस्ड स्टेरॉइड्स लोग बॉडी बिल्डिंग में यूज़ करते हैं। एनाबॉलिक स्टेरॉइड्स उनको बोलते हैं जो बहुत हाई यूज़ में करते हैं। लाइक बॉडी बिल्डर्स आपका ग्रोथ हॉर्मोन, इंसुलिन एंड टेस्टोस्टरॉन ये सब हॉर्मोनस यूज़ करते हैं अपनी बॉडी बढ़ाने के लिए जो आई थिंक इज डेंजरस लॉन्ग टर्म में। बट मैंने पहले तो शॉर्टकट्स कभी यूज नहीं किया। बट ये जो करंट मेडिसिंस आए हैं
हम लोग ने भी उनके ऊपर बहुत रिसर्च किया है एंड उनके ऊपर बहुत स्टडी किया है। आई थिंक वो सही लोगों के लिए सही है। मतलब जिन ऐसे बहुत सारे लोग हैं जिनको उन ड्रग्स की जरूरत हो सकती है। एंड वो ड्रग्स लेने के लिए उनसे उनको बेनिफिट भी मिल सकता है। क्योंकि बहुत लोग ये चीज नहीं समझते हैं। लोग इसके लॉन्ग टर्म रिसर्च का सवाल उठाते हैं कि इसका लॉन्ग टर्म में क्या होगा? कोई बोलता है कैंसर हो जाएगा, कोई बोलता है कुछ हो जाएगा। बट बहुत लोगों को यह पता नहीं है कि यह
जो ओजंपिक है ये 1980 में डिस्कवर हुआ था। ये 1980 में क्यों डिस्कवर हुआ था? बहुत लोग थे जो डाइटिंग करते हैं, एक्सरसाइज करते हैं पर फिर भी वेट कम नहीं होता है। आप खुद सोचिए आप हो सकता है आप जितना खा रहे हो एक जो इंसान मोटा है वो भी उतना ही खा रहा हो। लेकिन क्या वो आपकी तरह वेट लूज़ करेगा या आपकी तरह फिटनेस रहेगा? नहीं। तो खाना इज ऑलवेज नॉट द फैक्टर। बहुत लोग होते हैं बहुत सारे आंटीज होते हैं एंड अंकल्स होते हैं जो बहुत कम खाते हैं। लेकिन फिर भी
उनका वेट बहुत ज्यादा रहता है। वो लोग एक्सरसाइज भी करते हैं तो भी वेट कम नहीं होता है। एंड ये रिसर्च आप ये रिस्चरर्स आप 1980 में ये चीज पढ़ना चाहते थे। तब उन्होंने एक हॉर्मोन डिस्कवर किया जिसका नाम था जीएलपी जो ये सारे वेट लॉस ड्रग्स हैं। ये एक लिज़र्ड के टंग से निकला था। ओके। एक लिज़र्ड था उसका नाम है सिलवा मॉन्सर। उसके टंग से निकला ये पहली बार यह उसके टंग से निकला। वो जीएलपी उन्होंने देखा कि 30% जीएलपी में कर सकता है बॉडी में। इसका 20 साल तक रिसर्च हुआ। 1990 में
इसके क्लीनिकल ट्रायल्स हुए। उसके बाद 2002 में इसका पहला वर्जन निकला। उसके बाद 2006 में नेक्स्ट वर्जन निकला। फिर 2010 में निकला। फिर 2015 में निकला। ये लोग 25 साल से डायबिटीज के लिए ले रहे हैं। तो जो लोग यहां पे आके इन ड्रग्स को बोल रहे हैं कि नए ड्रग्स दैट इज नॉट अ न्यू ड्रग। ये एक 40 साल 50 साल का रिसर्च है। तो ये डायबिटीज के लिए था। फिर इससे वेट लॉस में वेट लॉस एक साइड इफेक्ट है। ओके। मतलब अगर आपने कभी वाइग्रा का स्टोरी सुना है तो 1996 में जब फाइजर
ये ड्रग टेस्ट कर रहा था पल्मरी हाइपरटेंशन के लिए लंग्स के लिए तो उन्होंने देखा कि ये साइड इफेक्ट होता है। उन्होंने इस साइड इफेक्ट को मार्केट करके वाइग्रा निकाला। तो यह एक्चुअली जो ड्रग है जीएलपी वन यह एक्चुअली आपके इंसुलिन को कनेक्ट करने का है। जो आपकी बॉडी का चाबी है जो आपके बॉडी आपका बॉडी पतला है या मोटा है वो डिसाइड करता है। एक की फैक्टर है। तो जो चीज इंसुलिन को कंट्रोल कर सकता है वो आपके वेट को कंट्रोल कर सकता है। तो जब कोई चीज आपके इंसुलिन को ठीक से कंट्रोल करने
लगता है। आपका वेट लॉस होने लगता है। तो टेक्निकली वेट लॉस एक साइड इफेक्ट है इस मेडिसिन का। इसका एक्चुअल काम आपके इंसुलिन को करेक्ट करना है। व्हिच इज एजिंग। आप जैसे-जैसे एज करते हो, आपका इंसुलिन ऑटोमेटिकली थोड़ा सा डिस्फंक्शन होते जाता है। व्हिच इज अ नॉर्मल प्रोसेस ऑफ़ एजिंग कि आप जैसे बड़े होगे, आपका इंसुलिन थोड़ी 18 की तरह काम करेगा। तो जैसे-जैसे आपका इंसुलिन का फंक्शन खराब होते जाता है। एक तरह से आप इसको एक एंटी एजिंग ड्रग भी बोल सकते हैं जो लोग ले रहे हैं। सन। तो यह ड्रग इज वेट लॉस
जो हम लोग बार-बार इस ड्रग के लिए बात करते हैं। इट्स एक्चुअली अ साइड इफेक्ट। इट्स नॉट प्रॉब्लम सबसे ज्यादा मतलब कौन यूज कर रहा है? ज्यादातर टाइप टू डायबिटिक्स यूज़ करते हैं। लेकिन अगर कोई मॉर्बिडली ओबीस है जो बिल्कुल चल फिर नहीं सकता। जिसके बहुत ज्यादा विस्टल ऑर्गन फैट है। ऑर्गन्स में बहुत सारे फैट बहुत सारा फैट जमा हुआ है। जिनका बीएएमआई 35 40 के ऊपर है या फैट परसेंटेज बहुत 40-45 है। जो नॉर्मल हेल्दी डाइट एंड एक्सरसाइज से भी वो अचीव नहीं कर सकता जो उसको अचीव करना चाहिए। एंड उसका हार्मोनल इमंबैलेंस है।
आप कोई भी धागा को लेके अगर कहीं पे चिपकाना चाहते हैं तो आपको कहीं ना कहीं से तो पकड़ना पड़ता है ना धागा। तो बहुत बार ये मेडिसिंस काम आते हैं उस धागे को एक तरह से पकड़ने के लिए। आप अगर एक बार इंसुलिन को पकड़ लेंगे तो बाकी चीज से आपका वेट लॉस होना स्टार्ट होगा। बिकॉज़ ये मैजिक पिल नहीं है। जीएलपीस आपको पता होना चाहिए। ये सब ओपंपिक टाइप के ड्रग्स आधे लोग में काम नहीं करते हैं। बिकॉज़ उन लोग इसको मैजिक पिल की तरह लेते हैं। अगर आप मैजिक पिल की तरह लेंगे
तो आपका मसल लॉस होगा। एंड मसल लॉस इज एक्चुअली आपका एज को बढ़ा रहा है। आपका एज को कम नहीं कर रहा है। तो अगर आपको जीएलपीस को भी सही तरीके से लेना है। उसमें भी एक तरीका होता है जहां पे इट बिकम्स मोरेंट कि जहां पे आप राइट डाइट और राइट एक्सरसाइज फॉलो करें। तो आप जब वो मेडिसिन लेते हो तो आपको वो मेडिसिन लेना है ताकि आप एक तरफ से इंसुलिन पकड़ ले कि इंसुलिन आपके फैट को स्टोर नहीं करे। एंड उसके बाद आप प्रोटीन, एक्सरसाइज ये सब अगर ठीक से करेंगे तो आपका
जेन्युइन वेट लॉस होगा। तो कॉमन मैन ले रहा नहीं ड्रग या अभी सिर्फ बिल्कुल ले रहे हैं। दुनिया में 8 करोड़ 10 करोड़ लोग ले रहे हैं दुनिया में। मतलब अगर आप देखें तो वर्ल्ड का 1% पपुलेशन हो गया। जबकि ये बहुत प्रिविलेज ड्रग है। एक्सैक्टली वेरी गुड। ये इतना महंगा ड्रग है। आज के दिन आपका जो राइबलिसिस जो टैबलेट्स आता है वही 7 ₹8000 का है। एक एक महीना का अगर आप पैकेज को अगर आप देखेंगे तो और अगर आप मुंजारो या गोभी वो 15 से ₹00 तक का आता है महीना। तो वो एक
कॉमन मैन तो अफोर्ड नहीं कर सकता। उसके बाद अगर 8 करोड़ 10 करोड़ लोग ले रहे हैं। आप सोचिए कितने लोग ले रहे हैं। मतलब ग्लोबल डाटा स्टैटिस्टिक्स है। इसके ऊपर जो लॉस सूट्स भी है लोगों को इसके बारे में ठीक से पता नहीं है। ये लॉस सूट इसलिए नहीं है कि ड्रग ने कुछ गलत किया। ये लॉस सूट्स इसलिए है कि ड्रग के बोतल में ठीक से लेबलिंग नहीं हुई। और अगर आप एक ड्रग कंपनी है, आप खुद सोचिए आपका काम जो ड्रग है, यह प्रिस्क्रिप्शन ड्रग है। यह तो डायरेक्ट पेशेंट को बेचने का
ड्रग नहीं है। आप तो जाके एक दवाई के दुकान में नहीं बोल सकते भाई मेरे को अजेंपिक दो। आप आप टेक्निकली डॉक्टर को बेच रहे हैं। तो काम तो डॉक्टर का है ना आपको एक्सप्लेन करना। तो आप अगर इसको अगर एकदम इन डेप्थ स्टडी करेंगे एंड आई एम नॉट मैं किसी फार्मा कंपनी को प्रमोट करने का कोशिश नहीं कर रहा हूं। बिकॉज़ मैं इस इंडस्ट्री में हूं। मैं रिसर्च इंडस्ट्री में हूं 14 साल से। तो मैं समझता हूं कि लॉबिंग कैसे होती है। बहुत सारे लॉ कंपनीज़ होते हैं जो क्लास एक्शन सी सूट्स करते हैं
ताकि वो कंपनी से पैसा निकाल सके। एक कंपनी बिलियंस ऑफ डॉलर्स कमाए और आप उससे थोड़ा सा पैसा नहीं निकाले। ऐसा हो नहीं सकता। तो बहुत सारे लोग हैं जो बोल रहे हैं कि आप ठीक से लेबल नहीं किए। बिकॉज़ रिसर्च में तो पब्लिश हुआ ही था कि ऐसा प्रॉब्लम हो सकता है। तो डॉक्टर को बताना चाहिए था। तो अगर डॉक्टर को बताना चाहिए था। एंड रिसर्च में जब ये पब्लिश हुआ था तो डॉक्टर एंड पेशेंट के बीच में तो वो डिटेल्स होना चाहिए। हम तो ये जितने भी लॉ सूट्स हैं जो हम लोग इतना
पॉपुलराइज कर दे कि 2 बिलियन लॉ सूट ओपंपिक फेस कर रही है। इसका नैरेटिव सेटिंग बहुत गलत होता है। एंड जो लोग ये ड्रग ले रहे हैं जो अपने वेट लॉस के लिए या डायबिटीज के लिए ले रहे हैं वो लोग डिसवेट हो जाते हैं बिकॉज़ उनको लगता है कि उनका आंख खराब हो जाएगा। उनको पैंकक्रिएटाइटिस हो जाएगा। पर ये कहा जाता है ना मतलब ये बोला जाता है कि आपको इससे साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं क्योंकि कई ऐसे इन्फ्लुएंसर्स हैं जो बताते हैं। कई ऐसे वीडियो है आप रिसर्च करेंगे तो चीजें आती है
तो लोगों में डर तो है ही। नहीं बिल्कुल है एंड इसका भी एक कॉन्टेक्स्ट सेट होना चाहिए। ऑफ कोर्स साइड इफेक्ट्स है एंड गैस्ट्रिक साइड इफेक्ट्स भी हैं एंड बहुत सारे साइड इफेक्ट्स हैं। बट इसलिए एलिजिबिलिटी बहुत इंपॉर्टेंट है। देखिए मेरा सवाल मैं बिफोर मैं साइड इफेक्ट्स के बारे में बात करूं। मैं एक बहुत जनरल कांसेप्ट के बारे में बात करना चाहता हूं। अगर आप मेडिकल एंड क्लीनिकल लिटरेचर देखेंगे तो दुनिया में 60 हजार ड्रग्स हैं। उसमें से हजारों ड्रग्स ऐसे हैं जिनके बहुत सारे साइड इफेक्ट्स हैं। आप सिर्फ ओज़ंपिक के बारे में क्यों बात
करते हैं? हम आपको क्या प्रॉब्लम है? अगर कल लोग लोगों का वेट लॉस हो रहा है तो मैं अब मैं आपको बता रहा हूं। बहुत सारे ड्रग्स हैं। बहुत सारे कीबोर्ड ड्रग्स हैं। बात कर रहे हैं उनके साइड इफेक्ट्स के बारे में। क्यों नहीं बात कर रहे हैं इन्फ्लुएंसर्स? बोल दीजिए नहीं लेना चाहिए। आज ओबेसिटी को आप एक प्रॉब्लम क्यों नहीं मानते हैं? मैं एकदम साइकोलॉजिकल कांसेप्ट में जा रहा हूं। बिकॉज़ साइड इफेक्ट्स बहुत टेक्निकल चीज है। आज के दिन अगर कोई ओबीस है जो मेहनत करता है, मैं आपको मेरे पर्सनल एग्जांपल से बता सकता
हूं। एज अ पर्सन हु हैज़ बीन ओबीज़। आई नो अ लॉट ऑफ़ ओबीज़ पीपल मेरे बहुत सारे पेशेंट्स आते हैं जो ओबीज़ हैं। ऐसा कोई ओबीस पेशेंट नहीं है जो कोशिश नहीं करता। या कभी किसी से किसी ने कोशिश नहीं की हो और हार नहीं मानी। बिल्कुल कोशिश करते हैं। उनका कॉन्फिडेंस खत्म हो जाता है कि मैं वो लोग बर्न आउट कर जाते हैं एंड उसके कारण खाने पीने लगते हैं। तो मैं बोल रहा हूं आप सिर्फ ओजेपिक के पीछे क्यों आए? मेरा सबसे पहला सवाल ये है आप और हजारों ड्रग है। हजारों डिजीज के
लिए आप ब्लड प्रेशर के लिए क्यों नहीं बोलते? आप थायरॉइड के लिए क्यों नहीं बोलते? थायरॉइड के लिए अगर मेरे को थायराइड को हार्मोन लेना है तो ठीक है। बट डायबिटीज के लिए एंड वेट लॉस के लिए अगर मेरे को इंसुलिन कंट्रोल करना है तो वो ठीक नहीं है। हर चीज का सही तरीका होता है लेने का। साइड इफेक्ट प्रोफाइल हर चीज का होता है। हम लोग सिर्फ इसी के साइड इफेक्ट के बारे में क्यों बात करते हैं? आंख का प्रॉब्लम होना 1961 से इंसुलिन से हो सकता है। इट हैज़ बीन अ नोन फैक्ट। मतलब
आज जो आप बोलते हैं आंख छह जन का ब्लाइंडनेस हुआ जिनका एवरेज एज 66 था। जिनका कैपिलरीज ऑलरेडी वीक था। हम हाउ डस दैट इंपैक्ट द होल पपुलेशन? मैं बोल रहा हूं कि आप एक जिम में जाइए। आप जिम को कमोडिटाइज कर दीजिए। आप कभी आप आई एम श्योर आप जिम गए होंगे। आप मेरे को बताइए अगर 100 लोग जिम में जाते हैं तो कितने आपको फिट लोग मिलते हैं वहां पे? एक दो% जो मैं बोलता हूं चलिए 10% बोल लीजिए। ठीक है? अगर मैं आपको एक ड्रग का स्टैटिस्टिक्स दूं कि 10% इफेक्टिव है। 90%
लोगों में इफेक्टिव है। नहीं है। आप क्या करेंगे वो चीज? यहां पर अगर मैं बोलता हूं कि यहां पर 75 टू 80% एफिकसी है एक ड्रग का बट 202% है जिनको हम लोग को धीरे-धीरे टाइट्रेट करना पड़ता है या साइड इफेक्ट्स होता है तो हटाना पड़ता है तो आप वो नहीं करना चाहते ऑलदो मैं एकदम क्लियरली स्टेट करना चाहता हूं बाय द वे कि मेरे हिसाब से मूवमेंट एक्सरसाइज और रेजिस्टेंस ट्रेनिंग इज द नंबर वन एडवाइस आई वुड गिव टू एनी ह्यूमन बीइंग ऑन अर्थ मैं किसी तरह से भी उसको डीम नाइज नहीं कर रहा।
मतलब कि आई डोंट वांट टू सेट अ रॉन्ग नैरेटिव इन दिस पडकास्ट। बट आप अगर कोई चीज को वैल्यू एंड स्टैटिस्टिक्स में मेजर करेंगे। आप जितने भी इन्फ्लुएंस को इन्फ्लुएंसर्स को देखेंगे वो लोग बोलेंगे ये न्यू इंग्लैंड जनरल ऑफ़ मेडिसिन में यह स्टडी आई है। लसेट स्टडी में ये आई है। ऑस्ट्रेलियन पेपर में ये आया है। भाई पेपर्स बहुत सारे बहुत जगह पब्लिश होते हैं। हर चीज के पीछे एक एजेंडा होता है। तो आप खाली पेपर्स को कोट करते रहते हैं। आप जिम को कमोडिटाइज करके बताइए कि कितना सक्सेसफुल है जिम? राइट? अगर आप बोल
रहे हैं 1 2% मैं बोलता हूं चलिए 510% 100 लोग में से खाली पांच जिम फिट हो रहे हैं तो कैसे जिम लोगों को हेल्प कर रहा है? क्या जिम करना बंद कर दे? पूरा आधा ऑर्थोपेडिक इंडस्ट्री आपका जिम के ऊपर है। फिजियोथेरेपी तो बंद ही हो जाएगा। अगर लोग जिम नहीं जाएंगे। अगर लोग खाली वॉक कर रहे हैं एंड बेसिक योगावोगा कर ले तो हर चीज का तो एक साइड इफेक्ट प्रोफाइल होता है। अगर आप डिटेल में जाना चाहे तो मैं ओज़पिक के डिटेल में साइड इफेक्ट्स के बारे में भी बात कर सकता हूं।
हां प्लीज। तो आपका जो जीएलपी वन होता है वो एक हार्मोन होता है। एक प्रोटीन हॉर्मोन होता है। एक नेचुरल। हां नहीं तो जैसे क्या होता है बॉडी में जो हॉर्मोंस होते हैं वो एक वो केमिकल मैसेंजर्स हैं जो आपके ब्रेन से प्रोड्यूस होते हैं जो आपके ऑर्गन्स को बोलते हैं क्या करने तो जैसे आपके ब्रेन में अगर मैं यहां पे एक बीच में पेन घुसा दूं एंड एकदम सेंटर ऑफ द ब्रेन में जाऊं तो पिट्यूटरी ग्लैंड होता है उस पिट्यूटरी ग्लैंड से सारे हॉर्मोनस बनते हैं बॉडी में ऑलमोस्ट तो वो आपके ब्रेन के बीच
में से थायरॉइड आता है आपके थायरॉइड को यहां पे बोलता है कि थायरॉइड हॉर्मोन बनाओ वो आपके जाके हर ऑर्गन में जाके बताता है कि किसको को क्या करना है? तो वो एक केमिकल मैसेंजर होता है। तो हॉर्मोन भी दो तरीके के होते हैं। एक होता है जो स्टेरॉइड हॉर्मोन होता है जो आपके सेक्स हॉर्मोंस होते हैं एंड एक होता है जो आपके प्रोटीन हॉर्मोनोंस होते हैं वो खाली एक केमिकल स्ट्रक्चर है। नेचुरल एंड अननेचुरल तो दोनों होते हैं। स्टेरॉइड भी नेचुरल चीज होता है। हल्दी भी स्टेरॉइड होता है। तो वो जो हॉर्मोनस होते हैं
जो आपका पेट है वो एक हॉर्मोन बनाता है जिसका नाम जीएलपी है। आपका जो स्टमक है। जीएलपी हॉर्मोन तब बनता है जब आपका पेट भर जाता है। राइट? क्या होता है कि बहुत जो मोटे लोग होते हैं उनका जो जीएलपी हॉर्मोन है वो ठीक से आपके ब्रेन को सिग्नल नहीं करता है कि पेट भर गया। जीएलपी हॉर्मोन कर क्या रहा है? आपका पेट जो है इतना बड़ा होता है। जब आपका पेट भर जाता है तो वो हॉर्मोन बनता है यहां पे जो आपके ब्रेन को सिग्नल करता है कि खाना बंद करो। मेरा पेट भर गया
है। लेकिन जो लोग बहुत मोटे होते हैं उनका जीएलपी सिग्नलिंग वीक होता है। एंड बहुत लोगों को ये नहीं पता कि जीएलपी ब्रेन में भी बनता है। तो वो दोनों के बीच में एक सिग्नल होता है कि भ खाना बंद करो मेरा पेट भर गया है। तो मोटे लोगों में वो सिग्नलिंग वीक हो जाती है। तो जब आप बाहर से जीएलपी इंजेक्ट करते हो तो वो जो जीएलपी अचानक से स्ट्रांग हो जाता है। तो जब आपका पेट भर जाता है तो आपको वो नजरिया फीलिंग आएगा कि मेरा पेट कैसे भर गया इतना में? मेरे लिए
तो यह नॉर्मल था। मेरे लिए यह कैसे नॉर्मल हो गया? तो उसके कारण लोग कम खाने लगते हैं। तो उनको भूख नहीं लगता शुरू-शुर में। उनको क्रेविंग्स बंद हो जाती है। उनको नजिया लगता है। यस। इसमें रियल साइड इफेक्ट्स भी है कि आपके गॉल ब्लैडर में पैंकक्रियास में प्रेशर आ सकते हैं। लेकिन उसके लिए भी एक एलिजिबिलिटी टेस्ट होता है। अगर आप सेफ्टी पैरामीटर में जाएंगे तो साइड इफेक्ट्स नहीं होंगे। वो आराम से मिटिगेट हो सकते हैं। टेस्ट के बाद हम ये ले सकते हैं। यस। आपको पूरा एक सेफ्टी पैनल कराना पड़ता है। हम लोग
एक सेफ्टी पैनल देखते हैं। आंख चेकअप कराते हैं। सब चीज चेकअप कराते हैं। थायरॉइड चेकअप कराते हैं। पैंकक्रियास चेक करवाते हैं। यूएसजी करवाते हैं। हर चीज चेक करते हैं। अगर आप सेफ नहीं है तो आप सिर्फ ओज़ंपिक छोड़िए। जैसे मैंने आपको पहले बोला आप कोई भी ड्रग नहीं ले सकते। हर ड्रग के लिए आपको सेफ्टी पैरामीटर चेक करना पड़ता है। बिकॉज़ आप प्लीज समझिए कि ड्रग एक इंटरवेंशन है। एक ऐसी चीज है जो ये लाइफस्टाइल नहीं होती है। अनलेस आपको एक ऐसा ऑटोइम डिसऑर्डर है जो लाइफ लॉन्ग रहेगा। ड्रग एक सर्टेन पीरियड ऑफ़ टाइम के
लिए दिया जाता है कि आपको स्टार्ट करना है मतलब जीरो या वन से। उसको उतने डोज़ तक लेके जाना है जितना जरूरी है ताकि आपका मैक्सिमम आउटपुट निकल जाए। लेकिन उसको जीरो भी करना है। यहां पे मेरे को लगता है कि जो पेशेंट्स हैं उनको यह समझना चाहिए कि वो लोग डॉक्टर फॉलो अप नहीं करते हैं। मैं अपने खुद के फैमिली का एग्जांपल देता हूं। मेरे फैमिली में एक बार डॉक्टर में जाके 30 साल तक वही मेडिसिन लेते रहते हैं। कभी डॉक्टर के पास जाते ही नहीं। तो वो चीज जो है वो चीज चेंज करना
जरूरी है कि कब जो दवाई है उसको बंद करने वो भी देखना बहुत जरूरी है। एक्सक्ट्ली वो होता है कि आप एक पर्टिकुलर टाइम पीरियड होता है कि फिर वो ड्रग तंग नहीं करेगा। काम अगर कर भी ले तो उसका हो सकता है जरूरत ही नहीं हो आपको बट आप लेते रहते हैं तो तो क्या पैराटर्स होंगे कि आप ये वाला ड्रग ले सकते हैं जीएलपी के तो आई थिंक जो पांच चीज है जो उनका पांच मेन साइड इफेक्ट प्रोफाइल जिसको बोलते हैं कि आपका मेडिकल हिस्ट्री चेक करना है कि आपको ब्रेस्ट कैंसर का हिस्ट्री
नहीं है। आपको थायरॉइड कैंसर का हिस्ट्री नहीं है। उसके बाद आपको पैंकक्रिएटाइटिस का हिस्ट्री नहीं है। उसके बाद हम लोग गॉल ब्लैडर भी चेक करते हैं कि आपका गॉल ब्लैडर सेफली काम कर रहा है कि नहीं। उसके बाद हम लोग आपके कभी-कभी हम लोग कुछ-कुछ पेशेंट्स का जिनका ग प्रॉब्लम्स होता है उनका एंडोस्कोपी क्लोनोस्कोपी भी कराते हैं। हम लोग आंख भी चेक कराते हैं। उसके अलावा हम लोग एक जनरल ब्लड टेस्ट पैरामीटर करवाते हैं कि आपका इन जनरल ब्लड टेस्ट पैनल क्लीन है कि नहीं। मतलब ऑब्वियसली उनके लिबर इश्यूज तो रहेंगे ही एंड थोड़े बहुत
इश्यूज रहेंगे जो ऐसे भी किसी को भी जिनको मोटापा होता है उनको होता ही है। बट ये कुछ पांच छह पैनल्स हैं जो करने के बाद हम लोग असेस कर सकते हैं कि हां ये पेशेंट को हम लोग सेफली दे सकते हैं। ओके। वेट लॉस पे अगर हम लोग फोकस करें तो क्या सेफेस्ट अप्रोच हो सकता है? हम ड्रग की बात तो कर ही रहे हैं। साइड लेकिन एक सेफेस्ट अप्रोच क्या होगा अकॉर्डिंग टू? मेरे लिए आई थिंक अगर मैं मेरे लिए सबसे जरूरी है मूवमेंट। मैं हमेशा बोलता हूं कि ऑलदो एस साइंटिस्ट हम लोग
खाने को एक लॉजिकल सेंस में देखते हैं और पढ़ते हैं और ऑब्जर्व करते हैं। हम लोग जब पब्लिक हेल्थ पॉलिसी बनाते हैं या जब एक साइंटिस्ट के नजर से देखते हैं तो हम लोग फूड को एक लॉजिकल चीज समझ के देखते हैं कि अच्छा ये कार्बोहाइड्रेट है, अच्छा ये फैट है, अच्छा ये प्रोटीन है। बट क्या लोग उसको लॉजिकल तरीके से देखते हैं? बिल्कुल भी नहीं। मुझे लगता है ऐसा इतना डिटेल्स में शायद नहीं जा पाते हैं लोग। एक कॉमन मैन एक कॉमन मैन जो है उसके लिए फोर्ड एक इमोशनल चीज है। एक्सक्टली राइट? तो
मेरे लिए वो अंडरस्टैंड करना कि एक पेशेंट का क्या माइंड व्यू है? क्या पॉइंट ऑफ व्यू है कि वो खाने को उसका खाने के संग रिलेशनशिप कैसा है? मेरे पास कोई भी पेशेंट आता है तो मैं उससे सबसे पहला सवाल पूछता हूं कि आपका खाने के संग क्या रिलेशनशिप है? हम हम लोग आपके खाने के रिलेशनशिप को चेंज करना चाहते हैं। आपको अपना बिहेवियर चेंज करना पड़ेगा। मैं हमेशा फोकस करता हूं बिहेवियर के ऊपर नॉट फूड के ऊपर। आप जो खा रहे हो उसमें इंग्रेडिएंट चेंज कर लो। आप जो खा रहे हो उसका क्वांटिटी थोड़ा
सा आगे पीछे कर लो। बिकॉज़ आपको अपना रिलेशनशिप जब तक आप चेंज नहीं करोगे। आप जब तक अपने आप को सेल्फ रिस्पेक्ट नहीं करोगे। आपका फूड डाइट कभी नहीं। मैं आपको ऑनेस्टली बता रहा हूं। नो डाइट इन द वर्ल्ड सस्टेनेबल। हम कोई डाइट आप कुछ भी लिख दीजिए कोई भी सस्टेनेबल डाइट दुनिया में नहीं है। हम इनफैक्ट रिसर्च में भी बहुत सारे मेटा एनालिसिस हुए हैं कि 90% लोग जो डाइट करके वेट लॉस करते हैं वो वापस से वेट गेन बैक कर लेते हैं। वापस से अपना वेट गेन कर लेते हैं। उसका रीज़न क्यों है?
बिकॉज़ कोई भी चीज सस्टेनेबल नहीं है। तो आपको अगर कोई चीज को हैबिट बनाना है तो मेरा एक जैसे मैंने खुद का एक फार्मूला बनाया है कि फाइव थिंग्स दैट रिमेन। हम लोग भी मेडिकल प्रोटोकॉल्स देते हैं। हमारे डॉक्टर्स हैं जो मेडिकल प्रोटोकॉल्स बनाते हैं। हमारे न्यूट्रिशनिस्ट हैं जो न्यूट्रिशन प्रोटोकॉल्स बनाते हैं। बट हम लोग क्या बोलते हैं कि यू हैव टू फॉलो जो पांच चीज रह जाएगी। आपके पांच हैबिट्स क्या होने चाहिए? नंबर वन आपका हैबिट होना चाहिए अच्छे से सोने का। स्लीप बहुत इंपॉर्टेंट है। बिकॉज़ आपको पता होना चाहिए फैट स्लीप में बर्न
होता है। आप जब सारे दिन में हम लोग बात कर रहे हैं। आपके ब्लड में फैटी एस्टर्स बर्न हो सकते हैं। फैटी एसिड्स एंड फैटी एसिस बट आपका फैट बर्न नहीं होगा। आपका फैट सोते टाइम बर्न होगा। अगर आप वो पहनोगे या कोई वो मतलब ट्रैकर पहनोगे तो आपको समझ में आएगा कि अगर आपका रात को स्लीप साइकिल अच्छा है। आप कैलोरी बर्न देखिएगा ज्यादा होगा। तो मैम जितना ज्यादा सोएंगे उतना कम होगा। अब्सोलुटली। तो अगर आप 8 घंटा 9 घंटा सोएंगे आपका फैट बर्न बेटर होगा। तो स्लीप इज वेरी इंपॉर्टेंट। सेकंड इज वाटर। आप
अपने आप को हाइड्रेट कैसे कर रहे हो और उसके संग साल्ट बैलेंस कैसा है जो लोग भूल जाते हैं। सर कैसे? वाटर एंड साल्ट का राइट बैलेंस होना चाहिए। मैं लोगों को बोलता हूं कि बहुत लोग डिहाइड्रेटेड रहते हैं या तो ओवरहाइड्रेटेड रहते हैं। तो उसके बीच में एक बैलेंस होना चाहिए। कि एक हर एक बॉडी वेट के हिसाब से कुछ वाटर होता है जो साल्ट के संग मतलब इलेक्ट्रोलाइट्स होते हैं वो लेने चाहिए लोगों को ताकि उनका बैलेंस अच्छा रहे। थर्ड इज़ फाइबर। आपके पूरे जो गट सिस्टम है जो आज के दिन लोगों का
सबसे बड़ा प्रॉब्लम क्या है? गट। मैं उसके ऊपर अभी एक बुक लिख सकता हूं। बट गट सबसे बड़ा प्रॉब्लम है। तो गट के लिए एक यू नो एनआईएच एक यूएस में एक बहुत बड़ी ऑर्गेनाइजेशन है जिनका एक द नेशनल गट माइक्रोबायोम प्रोजेक्ट हुआ था। हम मैं उसके बारे में बेसिक डिटेल्स में नहीं जाऊंगा। बट मैं आपको इतना बोलूंगा कि द वन थिंग जो ग्लोबली कंसेंस है कि फाइबर आपके शरीर के लिए अच्छा है। तो इसलिए हम मैं एकदम रूट निकाल के आपको बता रहा हूं कि आफ्टर स्लीप एंड वाटर एंड साल्ट आपका आता है फाइबर।
फाइबर के बाद आपका नेक्स्ट आता है प्रोटीन। प्रोटीन जो है आपको भी पता है। हम लोग ने बहुत पॉडकास्ट सुने हैं। बहुत इन्फ्लुएंसर्स को सुने हैं। एंड दैट इज अ नोब ब्रेनर कि आप विदाउट प्रोटीन अपना मसल्स, अपना बोनस, अपना कनेक्टिव टिश्यू नहीं बना सकते। तो प्रोटीन इनफैक्ट अगर आप मेरी पर्सनल ओपिनियन के हिसाब से अगर मैं बोलूं तो मेरे हिसाब से एक नहीं 2 ग्राम पर केजी बॉडी मास में होना चाहिए। मतलब कि अगर आप का आइडियल बॉडी वेट 60 kg है तो आपको 100 120 ग्राम लेना चाहिए। बट आई थिंक रिलेटिवली धीरे-धीरे टाइटर
करने से आपको हाई प्रोटीन जरूर चाहिए। तो उसका आपको आदत बनाना जरूरी है। एंड फिफ्थ जो मेरे लिए बहुत इंपॉर्टेंट है जो कोई बात नहीं करता जिसके बारे में जो मेरे हिसाब से हेल्थ का बिगेस्ट मार्कर है। हेल्थ का सबसे बड़ा बिगेस्ट मार्कर है। दैट इज पर्पस एंजॉय। एंड अगर आप फिटनेस करते टाइम मिरेबल है। यू हैव फेल्ड। अगर आप अपने डाइट को डाइट बोलते हो, यू हैव फेल्ड। अगर आप बोलते हो कि आई हैव टू डू इट देन यू हैव फेल्ड। विराट कोहली का एक वो डायलॉग है ना प्रेशर इज प्रिविलेज। राइट? यू गेट
टू डू समथिंग नॉट यू हैव टू डू समथिंग। यह सीखना बहुत जरूरी है। तो आपको अपने पर्पस एंड जॉय को नहीं भूलना है। आपके लिए हेल्थ एक टूल होना चाहिए। आपके लिए हेल्थ एक मिरी नहीं होना चाहिए। बिकॉज़ मेरी एक जो एक मेरे एक फेवरेट कॉमेडियन है उनका नाम जमी कार है। उनकी एक लाइन है एक पडकास्ट में एंड वो हेल्थ इंडस्ट्री में बहुत सूट करती है। हम लोग बार-बार पर्स्यूट ऑफ़ हैप्पीनेस के बारे में बात करते हैं। करेक्ट? अगर आप हेल्थ में देखें आपका पर्स्यूट डेथ है। जब आप पैदा होते हो, एक ही चीज
अनिवार्य है कि डेथ होगा। एवरीथिंग हेल्थ इज़ अ प्रोबेबिलिटी स्पेक्ट्रम। राइट? आपको कुछ नहीं पता क्या होगा। सो पर्स्यूट इज़ फॉर डेथ। आप उसको डिग्निफाइड में वे में लेना चाहते हैं तो इट इज नॉट द पर्स्यूट ऑफ हैप्पीनेस। इट इज द हैप्पीनेस ऑफ द पर्स्यूट। हम वो हैप्पीनेस ऑफ द पर्स्यूट कहां से आएगा? नॉट फ्रॉम द जर्नी और फ्रॉम द डेस्टिनेशन। इट इज फ्रॉम द पीपल यू सराउंड योरसेल्फ विद। सो आप जब तक जॉय, पर्पस, रिलेशनशिप्स नहीं बिल्ड करोगे, आप कितना भी अच्छा खा लो, आप कितना भी अच्छा एक्सरसाइज कर लो, हर चीज बिहेवियर से
आएगा हर चीज। तो, यह पांच चीज है जो मैं जॉइंट पर्पस, फाइबर, वाटर, प्रोटीन, मूवमेंट। अगर आप यह पांच चीज रह गया, आप यू विल हैव बैड डेज, यू विल गो ऑन ट्रिप्स, यू विल गो इन पार्टीज। आप सब करेंगे लाइफ में। लेकिन मैं अपने पेशेंट्स को बोलता हूं ये पांच चीज उस दिन भी करना है। आप जिस दिन पार्टी कर रहे हो, आपको प्रोटीन दवाई के हिसाब से पीना है तो पीना है। आप जिस दिन पार्टी कर रहे हो, फाइबर लेना है। आप जिस दिन पार्टी कर रहे हो, वाटर लेना है। कितना भी अल्कोहल
ले रहे हो? जैसे जिम लवर्स होते हैं उनके लिए एक स्टेटमेंट होता है कि मैं पार्टी नहीं करूंगा। मैं बाहर नहीं जाऊंगा। मुझे डाइट पे स्ट्रिक्टली फॉलो करना है मुझे डाइट। तो क्या वो एक सही रास्ता होता है? क्योंकि वो लोग बहुत अपनी पर्सनल लाइफ में भी बहुत बोरिंग हो जाते हैं ना। वो इनवॉल्व भी कर रहे हैं किसी को। वो किसी के साथ जा नहीं रहे हैं। वो बस डाइट पे स्ट्रिक्टली उसे ही फॉलो कर रहे हैं। तो क्या उससे उन्हें फायदा होता है या फिर मेंटली वो एग्जॉस्ट हो जाएंगे एक दिन? ऑनेस्टली मैं
अगर आपको अपना ऑनेस्ट आंसर बताऊं तो मैं कौन होता हूं जज करने वाला? हम देखिए आप आपका जिंदगी में क्या पपस है आप क्या अचीव करना चाहते हो सिर्फ आप जानते हो आप अगर प्रधानमंत्री मोदी हो जो नेशन को बिल्ड करना चाहते हो जो एक अकेले रास्ते में जाना चाहते हैं जिस जिनके पास हो सकता है सराउंडिंग में कोई नहीं हो तो वो आपका चॉइस है। राइट? आज के दिन अगर कोई बॉडी बिल्डर को लगता है कि उससे वह खुशी मिलती है उससे हम तो मैं कौन होता हूं जज करने वाला? बट एज अ ह्यूमन
बीइंग आई कैन टेल यू कि हम लोग सोसाइटी में रहने वाली एक स्पीशीज है जो एक संग सोसाइटी में रहती है। एक संग खुश रहती है। एक संग जॉय बनाती है। एक संग पर्पस बनाती है। एक संग एक फैमिली बनाती है। करेक्ट? तो आई डू फील कि बहुत जन एक्सट्रीम हो जाते हैं। लेकिन अगेन मैं अगर आपको एकदम शॉर्ट में बोलूं तो मैं कौन होता हूं जज करने वाला कि वो क्या करना चाहते हैं? अगर उनको खुशी मिलती है देन आई एम हैप्पी फॉर देम। अगर वो मिज़रेबल है। अगर वो सिर्फ इसलिए कर रहे हैं
कि वो दर्द में है। राइट? बहुत जन बोलते हैं कि अरे थेरेपिस्ट के पास जाने का क्या जरूरत है? जिम कर लो। ऑलदो जिम इज ग्रेट। मैं डिनाई नहीं कर रहा हूं। अगेन आई आई कीप सेइंग कि जिम सबसेेंट है। बट जिम इज नॉट अ रिप्लेसमेंट फॉर थेरेपी। अगर आप कोई ऐसे मेंटल हेल्थ इश्यूज से आप गुजर रहे हैं जिसके कारण आपको लगता है आप जिम से ठीक हो जाओगे। तो बहुत लोग कहते हैं ना कि टाइम हील्स एवरीथिंग। आई वुड से कि एक्शन एंड टाइम हील्स एवरीथिंग। आप अगर टाइम खाली देते रहोगे और कुछ
नहीं करोगे। नहीं तो अगेन आप जिन लोगों के बारे में बात कर रहे हैं आई फील कि अगर वो खुश है तो मेरे को कोई प्रॉब्लम नहीं है। लेकिन अगर वो मिजरी में है तो कई केसेस हमने ऐसे भी देखे हैं कि जो प्रॉपर बॉडी बिल्डर्स हैं जिनकी बॉडी हम आम लोगों से बहुत अलग दिखती है। लेकिन उनके केसेस में हमने देखे हैं कि हार्ट अटैक के इश्यूज भी बहुत ज्यादा होते हैं। कई ऐसे केसेस हुए हैं आए दिन मौत हो जाती है बिना कुछ किए। तो उनके केसेस में ऐसा क्या होता है? क्या वो
कुछ ऐसी चीजें ले रहे हैं जो मार्केट में अवेलेबल नहीं है या डॉक्टर्स उन्हें रेकमेंड नहीं करते लेकिन उनके प्रोफेशन के लिए वो जरूरी है। नहीं बिल्कुल आई मीन अगेन मेरे पास इसका डेटा एंड स्टैटिस्टिक्स नहीं है। बट मैं आपको अपने ऑब्जरवेशन से बता सकता हूं ऑनेस्टली कि 80 टू 90% जो बहुत स्ट्रांग बॉडी बिल्डिंग करते हैं वो तीन टाइप के हॉर्मोन लेते हैं। वो टेस्टोस्टरनॉन लेते हैं, इंसुलिन लेते हैं और ग्रोथ हॉर्मोन लेते हैं। एंड इसका लॉन्ग टर्म साइड साइड इफेक्ट इज़ कि आपका हार्ट बड़ा हो जाता है। आपको हार्ट अटैक्स होते हैं। बहुत
लोग बोलेंगे नहीं अपने परिवार में नहीं बोलेंगे, घरों में नहीं बोलेंगे। तो उनको लगेगा कि यार ये सेफली भी लिया जा सकता है। बिकॉज़ बहुत सारे लोग सेफली लेते हैं साइकिल्स में और सालों सालों तक लेते हैं। अगर आप कुछ अमेरिकन इन्फ्लुएंसर्स को फॉलो करेंगे वो 11 15 20 साल से ले रहे हैं। बट इस ये हॉर्मोंस मिला के किसको कैसे इंपैक्ट करता है और किस एज में इंपैक्ट करता है आपको समझ में नहीं आता। बिकॉज़ अगर आप एक डॉक्टर हैं जो पीएचडी कर रहा है और वो ले रहे हैं। उनको जो समझ है वो
एक यंग बॉय को बॉम्बे में दिल्ली में समझ नहीं है। तो इसके कारण वो लोग सेल्फ इंजेक्ट कर लेते हैं। बिकॉज़ यहां कोई डॉक्टर देगा नहीं। और उसके कारण उनकी और यह हुआ भी है। जैसे अभी तो जिम बहुत नॉर्मल हो गया है। जब हम कुछ पहले समय की बात करें तो जब जिम नया-नया क्रेज था में तो उनके पेरेंट्स मना करते थे नहीं कि तुम ये प्रोटीन नहीं लोगे। नहीं है। साइड इफेक्ट हो सकते हैं। हालांकि उन साइड इफेक्ट्स क्या हो सकते हैं। पर वो साइड इफेक्ट्स होते हैं। उन्हें वो मना कर देते हैं।
तो क्या अब भी ऐसा ही होता है जो प्रोटीनंस लेते हैं यंगस्टर्स। तो उनको क्या आप बताना चाहेंगे कि क्या वो सोच कर प्रोटीन ले सकते हैं? नहीं बिल्कुल। आई थिंक जिस टाइम पे बोला जाता था उस टाइम वो गलत नहीं बोला जाता था। बिकॉज़ उस टाइम कोई चेक नहीं था। हम देखिए आज के दिन कंज्यूमर अवेयरनेस बहुत बढ़ गई है। आज के दिन मतलब लोग बहुत ज्यादा अवेयर हो गए हैं कि प्रोटीन पाउडर क्या होता है? बिकॉज़ बहुत सारे प्रोटीन शेक्स भी हुए हैं जिसमें बहुत कहीं-कहीं स्टेरॉइड्स भी मिलाए हुए थे। कहीं पे कुछ
टॉक्सिसिटी भी थी। बट अब क्या है? अगर आप टॉप फाइव 10 ब्रांड्स देखेंगे इंडिया में चाहे वो आपका वेल बीइंग न्यूट्रिशन हो या आपका द होल ट्रुथ वे प्रोटीन हो या ये जो फूड फार्मा है उनकी जो ब्रांड हो ओनली व्हाट्स नीडेड एंड अभी निकुंज की जो सुपर यू ब्रांड है रणवीर सिंह की जितने भी बड़े-बड़े ब्रांड्स हैं आज के दिन उनको पता है कि प्रोटीन पाउडर का क्या रेपुटेशन है तो उस रेपुटेशन को हटाने के लिए जो आपको चेकक्स करने पड़ते हैं मोल्ड चेक होता है वेट टेस्टिंग होता है कि उसमें क्या क्वांटिटी है
क्या सेफ्टी है क्या मेजरमेंट है तो वो वो आज के दिन टॉप फाइव 10 ब्रांड्स सब करते हैं। तो जो भी आज के दिन प्रोटीन शेक लेना चाहता है बिकॉज़ हम लोग प्रोटीन साफ स्टार हैं। एंड बिकॉज़ वेजिटेरियन डाइट्स में बहुत प्रोटीन नहीं होते हैं। और अगर वो लेना चाहते हैं तो मेरे हिसाब से गलत नहीं है। लेकिन अगर आप नॉन वेजिटेरियन एंड नेचुरल डाइट से अगर आप रेगुलर प्रोटीन ले सकते हो तो उससे बेटर भी कुछ नहीं है। हम बट यस उसमें गलत भी कुछ नहीं। अगर कोई प्रोटीन शेक्स ले रहा है। बट पहले
के जमाने में इसलिए भी बोलते थे कि बहुत मिलाविटी होती भी थी। बट आज के दिन वो नहीं होती। हम तो वो डिफरेंस को एक्सेप्ट करना भी जरूरी है। वो माइंडसेट को शिफ्ट करना भी जरूरी है कि नहीं पहले प्रॉब्लम था बट अब नहीं है। क्योंकि हम जिम की बात कर रहे हैं तो कुछ छोटे-मोटे ऐसे सवाल है जो मिथ भी हो सकता है। सच्चाई भी हो सकती है जो ज्यादातर लोग जिम करते हैं। माना जाता है या उनके जो फ्रेंड सर्कल होता है वो उन्हें बोलता है कि भाई आप तुम इतना ज्यादा जिम कर
सकते हो। हो सकता है कि तुम्हारे अंदर उतनी एनर्जी ना बचे बेड में। मतलब हम सेक्सुअल लाइफ की बात कर रहे हैं तो क्या ये एक मिथ है या सच में ऐसा होता है कि उनका स्टैमिना कम हो जाता है जो इतना करते-कर करते रहते हो? आई थिंक ये एक पर्सन टू पर्सन डिपेंडेंट है बिकॉज़ आप ऐसे बहुत सारे एथलीट्स में मैंने देखा है जिनको हम लोग कोच करते हैं कि ऐसे प्रॉब्लम्स आते हैं जिम ट्रेनर्स में, एथलीट्स में। अब देखिए टेस्टोस्टरोन का अब मैं एक्चुअली मसल्स पे जाता हूं। मसल का फार्मूला क्या है? कोलेस्ट्रॉल,
प्रोटीन, टेस्टोस्टरॉन। ये जब तीन चीज बनते हैं तब आपका मसल बनता है बॉडी में। तो अगर आप मान लीजिए एक बहुत फिट इंसान हैं। एंड सडनली आप अपने को बहुत ज्यादा बर्न आउट कर रहे हैं लेकिन आप उतना कैलोरी नहीं ले पा रहे। आपको पता होना चाहिए जो एथ जो एथलीट्स होते हैं जो बहुत ज्यादा जिम करते हैं उनका प्रॉब्लम होता है उतना खाना। हम वो लोग 3000 4000 कैलोरी बर्न करते हैं दिन में एक्सरसाइज करके इंक्लूडिंग उनका जो रेस्टिंग मेटाबॉलिज्म होता है तो उतना खाना पॉसिबल नहीं होता है। तो अगर आप उतना खा नहीं
पाएंगे तो कहीं ना कहीं तो आप कहीं पे गड़बड़ कर रहे हैं। कहीं ना कहीं तो आपका कुछ तो कटेगा। तो आपका मसल मास अगर कटेगा तो आपका टेस्टोस्टरॉन भी कम होगा। आपका लिमिडो भी कम होगा। एंड बहुत लोग क्या करते हैं? ऐसे सप्लीमेंट्स लेते हैं जिससे आपका एस्ट्रोजन एंड टेस्टोस्टरॉन का वैल्यू कम हो जाता है जो आपके सेक्सुअल लिमिडो के लिए भी डिजायर के लिए भी इंपॉर्टेंट है। हम तो अगर आपका वही कम हो जाएगा तो हो सकता है। तो अगर आप वर्कआउट करना चाहे तो करिए लेकिन वर्कआउट के संग रिकवरी भी उतना ही
इंपॉर्टेंट है। हम लोग ने वर्कआउट करना तो सीख लिया लेकिन रेस्ट करना नहीं सीखा है। रेस्ट करना उतना ही जरूरी है जितना वर्कआउट करना है। बिकॉज़ मैंने आपको क्या बोला? फैट बर्न आपके रेस्ट में होता है। आपका मसल सिंथेसिस कब होगा? रेस्ट में? जितनी सीट साइकिल अच्छी है। आपका मसल सिंथेसिस कब होगा? आप आप जब वेट उठाते हैं तो आप कभी आप आपने जिम किया है? बहुत हॉट ही। कभी वेट उठाया आपने? हां। वेट उठा के हाथ थोड़ा सा टाइट हुआ। वो क्या था? आपने क्या किया अपने हाथ को? आई गेस मैं नॉर्मली उतना वेट
नहीं उठाती हूं। आपने जब उसको वेट को उठाया और अपना हाथ टाइट कर लिया। आपने अपने आप को सेल्फ इंजर्ड किया। अगर आपको कहीं लग जाएगा तो आपका फूल जाएगा ना हाथ। आप आपका हाथ या पैर फूल जाएगा। वो क्या है? आपने सेम चीज किया। आपने वेट उठा के अपने हाथ को टाइट कर लिया क्योंकि आपने मसल को इंजर्ड कर लिया। अब अगर आपका मसल इंजर्ड है तो उसको रिपेयर करने के लिए क्या चाहिए? आपके हॉर्मोंस का सिग्नल चाहिए कि उसको रिपेयर करना है और उसको टाइट करना है। बोलते हैं ना व्हाट डजंट किल यू
मेक्स यू स्ट्रंगर। तो आपके हॉर्मोंस आपके पास जाएंगे। आपका टेस्टोस्टरॉन, आपका इंसुलिन, आपका जो कार्बोहाइड्रेट है, आपका प्रोटीन है, वो जाके उसको टाइट करके वापस से स्ट्रांग बनाएंगे। तो अगर आपका न्यूट्रिशन सही नहीं है, अगर आपका हार्मोन बैलेंस सही नहीं है, वो मसल टूटा का टूटा रह जाएगा। तो बहुत सारे जो जिम वर्कआउट्स करते हैं। वो लोग एक्चुअल में अपना मसल मास खो देते हैं। हम तो अगर आप सही तरीके से जिम नहीं करते हैं तो इट कैन आल्सो बी बैड फॉर यू। तो जिम करने के लिए सही तरीके से जिम करना, सही फॉर्म में
करना, सही पोश्चर में करना ये सारी चीजें बहुत जरूरी है। हम तो आप कहना यह चाह रहे हैं कि अगर आप जिम कर रहे हैं, ट्रेनिंग ले रहे हैं, आपके साथ ट्रेडर होना चाहिए। आप बस जिम चले गए और आपने एक्सरसाइज कर एटलीस्ट इनिशियली सेल्फ इंजरी एटलीस्ट इनिशियली आपको शुरू शुरू में सीखना ही पड़ेगा अगर आपको लगता है कि आप रेगुलरली जिम जैसी एक चीज करना चाहते हैं दिस इज माय पर्सनल पॉइंट ऑफ व्यू और हो सकता है बहुत मेरे पीछे आए बोलने के लिए लेकिन आप जब जिम चालू करते हैं अगर आपको ये नहीं
पता है कि आपको किस फॉर्म में किस ब्रीथिंग टेक्निक में किस लेवल पे आपको जिम करना चाहिए ताकि आपके लिए सेफ हो आपको इंजरी नहीं हो आप रिकवर कर सकें एंड आपका सबसे बेस्ट मसल डेवलपमेंट नहीं हो सके तो उसके बिना आप अपने को इंजर करोगे ही करोगे। हम अभी आपने एक टर्म यूज़ किया लबिडो तो लिविडो और डेली डिजायर्स जो होती है हमारी अभी जैसे हम बात कर रहे थे सेक्सुअलाइज इफेक्ट होती है जो जिम करते हैं बहुत ज्यादा एक्सरसाइज करते हैं। तो उसको बैलेंस किस तरीके से किया जा सकता है? क्या इंपैक्ट पड़ेगा
एक कपल पर? आई थिंक यह बहुत इंटरेस्टिंग सवाल है बिकॉज़ मैं हमेशा बोलता हूं कि आपके सेक्सुअल डिजायर आपके अंदर रेगुलरली रहने चाहिए। आपने पडकास्ट में कहा गया। मैंने कहा था कि हो सकता है वो मैंने थोड़ा एक्सट्रीम में भी कह दिया था कि ऐसा नहीं कि एक दिन भी नहीं हुआ तो प्रॉब्लम है। बट मेरा ओवरऑल कहने का मतलब था कि आपको रेगुलरली आपका डिजायर बॉडी में रहना चाहिए। बिकॉज़ इट इज़ आल्सो साइन ऑफ़ ब्लड फ्लो। हम इनफैक्ट मैं आपको एक इंटरेस्टिंग स्टडी बताता हूं कि जो मर्द को इडी होता है, इरेक्टाइल डिस्फंक्शन होता
है एट एन अर्ली एज दैट इज अ सिग्नलिंग फॉर हार्ट डिजीज। आपके हार्ट में बड़े वेसल्स होते हैं दो से 4 एमएम के और जिनके इडी का प्रॉब्लम होता है आपके पीनस में एक से दो एमएम का आर्टरीज होता है। तो वो जब क्लॉग हो जाते हैं तो एक वैस्कुलर प्रॉब्लम के कारण ब्लड फ्लो नहीं होता है। इडी होता क्या है? आधा तो साइकोजेनिक प्रॉब्लम है बिकॉज़ एंग्जायटी होता है बहुत लोगों को बच्चों को उतना एक्सपोज़र नहीं होता है। बट उसके अलावा इट इज़ आल्सो कि आपका वो आर्टरीज क्लग हो रहा है जिसके कारण आपका
वो एक एंडोथिलियल डिस्फंक्शन बोलता है जिसके कारण आपका इरेक्शन ठीक से नहीं हो रहा है। दैट इज द सेम डिजीज एज अ हार्ट डिजीज। तो अगर आप प्रिंस्टन के जो नए स्टैंडर्ड कंक्लूजंस को पढ़ेंगे तो प्रिंस्टन यूनिवर्सिटी के हिसाब से इट इज एक्चुअली अगर यंग लोगों में ईडी का प्रॉब्लम है उसके तीन से पांच साल के बाद लोगों को हार्ट अटैक होता है। तो जो यंग बच्चों में हार्ट अटैक हो रहा है दैट कैन बी सीन इफ यू हैव एन ईडी प्रॉब्लम एट अ यंग एज। यू कैन चूज टू करेक्ट इट। सो दे आर नाउ
स्क्रीनिंग द हार्ड स्क्रीनिंग्स कि आपको दो-ती साल पहले अगर ईडी का प्रॉब्लम है तो दैट हैज़ बिकम्स अ कार्डियक रिस्क मार्क। तो वो कैसे यंग जनरेशन से कैसे पता चलेगा? कैसे उसे कलेक्ट कर पाएंगे? आई थिंक ईडी एक ऐसा प्रॉब्लम है जिसकी आई मीन लाइफस्टाइल सबसे पहला चीज है। बिकॉज़ आप कोई भी मेडिसिन डॉक्टर के पास भी जाएंगे तो वो सबसे पहले बोलेगा कि आपके ब्लड पैनल को कराएंगे। आपका टेस्टोस्टरॉन चेक करेंगे, एस्ट्रोजन चेक करेंगे। एंड वो बोलेंगे कि भले अपना यू नो लाइफ स्टाइलाइल फूड चेंज करते हैं, प्रोटीन बढ़ाते हैं, मूवमेंट बढ़ाते हैं। जो
मैंने बोला फाइबर बढ़ाते हैं, वाटर बढ़ाते हैं, स्लीप बढ़ाते हैं। उसके बाद मे बी कभी-कभी थेरेपी भी करते हैं। बिकॉज़ बहुत सारे चीज को ए्जायटी से भी जोड़ा जाता है। बेसिकली ये सारे चीज लाइफस्टाइल इशू से सबसे पहले किए जाएंगे। अगर वो लाइफस्टाइल इशू नहीं काम आता है, अगर कोई मेडिकल इंटरवेंशन किया जाता है, तब ऑब्वियसली उसके बहुत सारे मेडिसिंस हैं एंड यू नो हॉर्मोनल थेरेपीस हैं जिससे उनको कनेक्ट किया जा सकता है। बिकॉज़ मर्दों के लिए ये कनेक्ट करना फिर भी रिलेटिवली इजी होता है। आई मीन कुछ-कुछ प्रॉब्लम्स बहुत सीिवियर हो सकते हैं। बट
मर्दों के लिए प्रॉब्लम रिलेटिवली इजी है। बट आपको पता होना चाहिए कि वुमेन में भी सेक्सुअल डिस्फंक्शन बहुत कॉमन है। हम देयर आर आल्सो लाइक इफ आई से कि 100% ऑफ़ मेन गो थ्रू अ प्रॉब्लम ऑफ़ एडिया एट सम पॉइंट इन देयर लाइफ। बट इसका मतलब ये नहीं कि सबको हार्ट डिजीज है। बट 100% ऑफ़ वुमेन विल आल्सो गो थ्रू दैट इन देयर लाइफ। कि कभी ना कभी कि उनका कभी ब्रेकअप हुआ या इमोशनल डिस्ट्रेस है। देयर विल बी टाइम्स कि जहां पे उनको भी नहीं फील होता है। तो वुमेन का कॉम्प्लिकेटेड होता है बिकॉज़
उनका साइकिल्स अलग होता है 28 डे का। तो मैन का एवरीडे डिस्ट्रोस्ट्रोन प्रोड्यूस होता है तो हम लोग के लिए सिंपल है उसको समझना एंड ट्रीट करना बट वुमेन का प्रॉब्लम्स के बारे में सबसे कम रिसर्च है व्हिच आई फील शुड बी फंडेड एंड रिसर्ड तो उनका भी लाइफस्टाइल की वजह से बिल्कुल आई मीन देखिए एट द एंड ऑफ़ द डे इंसुलिन इज़ अ मार्क ऑफ़ ऑन ह्यूमन बीइंग्स नॉट जस्ट मेल फीमेल तो इंसुलिन करेक्ट करना वेट करेक्ट करना मसल्स को स्ट्रांग करना द फाइव थिंग्स दैट रिमेन जो मैंने बोला वो अगर आप फार्मूला फॉलो
करते हैं फॉर अ लॉन्ग पीरियड ऑफ़ टाइम हम अगर आप वो आपका लाइफस्टाइल या हैबिट बन जाता है तो आप 90% प्रॉब्लम्स को अवॉयड कर सकते हैं। लेकिन जो बाकी 10% है उसको आप ऑब्वियसली मेडिसिन सप्लीमेंट्स एंड थेरेपी सिक्योरिटी परफॉर्मेंस प्रेशर की बात करें तो उसको कैसे टैकल किया जाता है क्योंकि वो इतना एक बड़ी इशू बन गया है। बड़ी चीज बन गई यंगर जनरेशंस में मे बी आगे भी ऐसा होता होगा तो उसको कैसे टैकल किया? अब आपने जो क्वेश्चन पूछा आई थिंक उसका मैं भी सशन चाहता हूं। बिकॉज़ मैं चाहता हूं कि इंडिया
में भी इंडमेंसी कोचेस आए। बिकॉज़ बहुत बार क्या होता है? इंडिया में इतने सारे यंग बच्चे हैं जिनको सेक्सुअल एक्सपोज़र अभी ज्यादा मिल रहा है। रिलेटिव टू से 20-30 इयर्स एगो। राइट? बिकॉज़ पहले लोग शादी जल्दी कर लेते थे। आजकल हमेशा जरूरी नहीं है कि शादी जल्दी करें। हम्म। आजकल हो सकता है शादी 30 35 में करते हैं एंड अपना करियर में इतना ज्यादा इन्वेस्टेड रहते हैं कि हम लोग खाली वो एक% एलट पॉपुलेशन के बारे में बात करते हैं जो भाई रेगुलरली भाई स्कूल कॉलेज से दे आर हैविंग सेक्स कि उन लोग का मतलब
बहुत अच्छा वो फिल्मी बॉलीवुड लाइफस्टाइल काइंड ऑफ़ थिंग है। लेकिन बहुत बड़ा एक पॉपुलेशन इंडिया का वो भी है जिनके लिए सेक्सुअल प्रेशर एक बहुत ज्यादा बड़ा प्रेशर है। आई थिंक सेक्स एजुकेशन क्लासेस होने चाहिए स्कूल में जहां पे सेक्स को नॉर्मलाइज करना बहुत जरूरी है। एंड सेकंड चीज इज़ कि आई विश कि इंटिमेसी कोचेस भी आए व्हिच कैन हेल्प यंगस्टर्स एंड व्हाई जस्ट यंगस्टर्स देयर आर पीपल जो लोग ओल्ड भी हैं जिनको मतलब एंग्जायटी के बाद भी उनको प्रॉब्लम मतलब मेडिसिंस के बाद भी उनको प्रॉब्लम होता है। इतना डीप साइकोलॉजिकल फियर एंड इशू रहता
है। आपको पता होना चाहिए दे माइट बी मेरे पास कितने सारे लोग हैं जो बोलते थे बचपन में कोई प्रॉब्लम नहीं था। मतलब स्कूल कॉलेज में या बिय्ड दैट बट शादी के बाद इंटरेस्ट चला गया उसके बाद नहीं हुआ तो अब 5 साल से नहीं हो रहा तो अगर एक आपको इंजरी या ट्रॉमा हो जाए एंड उसके बाद आपको चार साल तक वो ट्रॉमा रहे तो उसके बाद आप वापस से कैसे स्टार्ट करोगे दैट इटसेल्फ इज अ ट्रॉमा तो पांच साल तक तो मतलब इट इज अ बिग फैक्टर कि आप पांच साल तक कुछ फील
नहीं कर पा रहे हैं फिर वही एक्स्ट्रा वेरिटल अफेयर हो जाएगा तो फिर प्रॉब्लम एंड आपको आपको पता है कि इसमें इतना कॉम्प्लिकेटेड होता है अगर आप अमेरिकन न्यूरोलॉजिकल एसोसिएशंस का अगर आप नोट्स पढ़ेंगे तो उसमें बोला जाता है कि अगर आपको सेक्सुअल लिबिडो बढ़ाना है तो दोनों पार्टनर का बढ़ाएं। बहुत बार ऐसा होता है कि हस्बैंड वाइफ हस्बैंड इंटरेस्टेड है वाइफ इंटरेस्टेड नहीं है। तो वाइफ इंटरेस्टेड नहीं है तो क्या हुआ? हस्बैंड का भी इंटरेस्ट चला गया। तो हस्बैंड का लिबिडो खो गया। अब अगर आप हस्बैंड का लिबिडो ट्रीट कर दोगे और वाइफ इंटरेस्टेड
नहीं है। एंड वो और कहीं नहीं जाना चाहता है तो फिर आप क्या करोगे? तो बहुत बार अगर आप जो अमेरिकन न्यूलॉजिकल एसोसिएशन है उसमें जो नोट्स में लिखा जाता है कि आपको इनक्रीस करना है तो दोनों को इनक्रीस करो। तो ये होता कैसे है? तो ऑनेस्टली लाइक फीमेल्स का जैसे मैंने बोला रिसर्च बहुत कॉम्प्लिकेटेड है। देयर आर सम ड्रग्स जो मतलब यूज़ करके वो लोग ट्राई कर रहे हैं हॉर्मोनल थेरेपीस के थ्रू। आजकल वुमेन मेडिकल हॉर्मोनल थेरेपी बहुत कॉमनली प्रैक्टिस होने लग गया है। मेंस हॉर्मोनल थेरेपी जो टेस्टोस्टरनॉन रिप्लेसमेंट थेरेपी वो बहुत कॉमनली प्रैक्टिस
होने लग गया है। इन अ लॉट ऑफ़ मेल जिनका लिबिडो कम हो जाता है। तो आज के दिन आप 50 की उम्र में भी जो नेचुरल लिबिडो खो देते हैं वो भी वापस गेन कर सकते हैं। जो 50-60 के उम्र में ऑलदो मतलब इसके बारे में पहले बहुत ज्यादा कंट्रोवर्सी थी कि इस सिर्फ प्रोस्टेट कैंसर हो जाता है या ऐसे ब्रेस्ट कैंसर हो जाता है वुमेन को। मतलब नहीं। सो प्रोस्टेट कैंसर के बारे में मैं आपको एक बहुत इंटरेस्टिंग चीज बताता हूं। एज इज द बिगेस्ट रिस्क फैक्टर इन प्रोस्टेट कैंसर। 90% ऑफ मैन डाई विद
प्रोस्टेट कैंसर। अगर आप डेथ के अगर आप डेथ के पास हैं तो आपको प्रोस्टेट कैंसर मर्द को होगा ही होगा। अगर आपका प्रोस्टेट है तो आपको प्रोस्टेट कैंसर तो होगा ही। आपके प्रोस्टेट प्रोस्टेट में कैंसर सेल्स तो बनेंगे ही। इट इज द मोस्ट कॉमन थिंग। आप जब मरोगे तो आपके प्रोस्टेट में कैंसर सेल्स निकलेंगे। तो टेस्टोस्टरॉन इज नॉट अ रिस्क ऑफ प्रोस्टेट कैंसर। एज इज अ रिस्क फॉर प्रोस्टेट कैंसर। लेकिन अगर आपके प्रोस्टेट कैंसर हो गया तब टेस्टोस्टरॉन उसको बढ़ा सकता है। बिकॉज़ टेस्टोस्टरॉन ग्रोथ फैक्टर देता है। लेकिन अगर आपको लेकिन अगर आपका प्रोस्टेट में
कैंसर नहीं है तब टेस्टोस्ट्रॉन विल नॉट कॉज प्रोस्टेट कैंसर। तो प्रोस्टेट कैंसर एक ऐसी चीज है जो हर इंसान को एक ओल्डर एज में होगी ही होगी। अगर आपके अगर आपके घर में कोई 70 80 90 है तो देयर इज अ 90% चांस उनको प्रोस्टेट कैंसर है। ओके बिकॉज़ एज फैक्टर एज फैक्टर है बिकॉज़ हम लोग कैंसर को एक सिंगल डिजीज मानते हैं। कैंसर इज़ नॉट अ सिंगल डिजीज। कैंसर इज़ थाउजेंड्स ऑफ डिजीजेस। मतलब आप जो बैक्टीरियास जो टॉक्सिंस ले रहे हैं इंफेक्शंस आपको हो रहे हैं वो कहां क्या किस तरह से आपको क्या कैंसर
मतलब जो बच्चे आज के दिन सेक्स कर रहे हैं 15 टू 20 के बीच में एंड उनको जो हेपेटाइटिस जो एचपीवी वायरस जो उनको होता है वो 20 साल बाद ओवेरियन कैंसर बनती है। वो 20 साल बाद एंडोथेनियल कैंसर बनती है। तो आज जिनको एच पाइलोरी गट में इंडिया में 25 30% पॉपुलेशन को एच पाइलोरी बैक्टीरिया पॉजिटिव आएगा। राइट? तो वो जिनको भी स्टमक कैंसर होता है वो ज्यादा से ज्यादा लोग एच पाइलोरी से जाते हैं। आप देखें तो इंडिया के 95% पापुलेशन को एफस्टन वायर वायरस कभी ना कभी इनफेक्ट किए। अगर आप स्टडी करोगे
आप सबका ब्लड टेस्ट करो तो सबके एंटीबॉडीज निकलेंगे एफस्टीन बार वायरस के। तो इनफेक्शियस डिजीजसेस हम लोग पूरे हम लोग इंडिया में वी आर सराउंडेड बाय टॉक्सिंस, बैक्टीरिया वायरसेस। आपको कौन क्या किस तरह से कैसे ट्रिगर करता है यू नेवर। जैसे आपने बोला लवो का ग्राफ काफी गिरता हुआ चला जा रहा है। तो क्या ऐसा होता है कि हम इंटरेस्टेड नहीं है किसी दूसरी वजह से पार्टनर के साथ लेकिन हम एक उसको स्टेटमेंट दे देते हैं कि यार बहुत थके हुए हैं, जिम कर लिया है, थक गए हैं। काम कर लिया है, बहुत ज्यादा थक
गए हैं। तो क्या यह वही फैक्टर होता है या वो एक लड़का है जो वो कोई बताना नहीं चाहता है। आई थिंक ज्यादातर मर्ज पाते हैं बिकॉज़ हम लोग ने एक नैरेटिव बना दिया सोसाइटी में कि यू आर लेस मैस्कुलिन अगर आपका लिबिडो स्ट्रांग नहीं है या अगर आप सेक्सुअली परफॉर्म नहीं कर सकते बिकॉज़ आप अगर स्कूल कॉलेज में जाएंगे तो ऑल द जोक्स आर अराउंड दैट या कि किसी का अगर इरेक्शन प्रॉब्लम है या किसी का अगर वैसा इंटरेस्ट नहीं है या कोई पोर्न नहीं देखना चाहता है या मेरा बोलने का मतलब है कि
हम लोग ने एक स्कूल कॉलेज में एक नैरेटिव बना दिया है कि अगर आपको वुमेन में उस तरह से बहुत स्ट्रांग डिज़ायर एंड इंटरेस्ट नहीं है। तो इसका मतलब आप वो आप आप में प्रॉब्लम है या आप लेस मैस्कुलिन है। एंड वो नैरेटिव कुछ लोगों में बहुत ज्यादा प्रेशर डाल देता है। बिकॉज़ एंग्जायटी मेरे हिसाब से एक इमोशनल हैबिट है। आप कोई इवेंट में कैसे रिसोंड करते हो वो आपका एक हैबिट होता है। तो अगर किसी को ए्जायटी का आदत होगा वो हर चीज में ए्जायटी लेगा। अगर किसी को रोने का आदत होगा वो हर
चीज में रोएगा। अगर किसी को अगर आप एक क्रायर हो तो आपको खुशी में भी आप रोओगे। आप दुख में भी रहोगे। आप एक्साइटमेंट में भी रहोगे। हम अगर आप तो जैसे बहुत सारे यंग एलेसेंट्स को या बच्चों को उनको जो ए्जायटी होता है परफॉर्मेंस का बिकॉज़ उनको एंजाइटटी लेने का आदत है तो उनको वो कोचिंग देना एंड उनको एंजायटी कम करना बहुत जरूरी है। हम अगर हम हॉर्मोन्स की बात करें तो एक लड़की में और एक लड़के में डिफरेंसेस होते हैं हॉर्मोनस को लेकर क्योंकि एक साइकिल होती है लड़कियों में तो उसको लेकर आप
क्या कुछ बताना चाहेंगे कि जैसे लड़कियों की एंजायटी अलग टॉपिक्स में होती है। लड़कों की एंजाइटी एक टॉपिक आपने बता दिया। दूसरा वर्क प्रेशर भी होता है वो भी हो गया। तो इन दोनों के जो डिफरेंसेस हैं वो जब आपस में क्लैश करते हैं तो एक बहुत बड़ा इशू बन जाता है। तो उसको लेकर आप क्या कुछ बताना चाहेंगे कि उसको नॉर्मलाइज कैसे किया जाएगा? क्योंकि एक लड़का समझने के लिए तैयार नहीं होता है। अरे यार तुम्हारा तो वही साइकिल है। रोज रोना ये सुनाना वो सुनाना मैं नहीं अब छीन सकता। तो वो चीज एक
नॉर्मलाइज होनी चाहिए हमारी जनरेशन में या यंगर जनरेशन में भी। आई थिंक जजी ऑलरेडी कर रही है। मतलब दे आर टॉकिंग सो मच अबाउट एंजाइटटी। जेजी बहुत क्यूट हो गई है इस बार। हां मतलब जेंजी बहुत ए्जायटी के बारे में इतना डिस्कस कर रही है। मेंटल हेल्थ के बारे में इतना बात कर रही है। आई थिंक हॉर्मोंस मैं इसको जनरलाइज नहीं करना चाहूंगा बिकॉज़ यू नो हम लोग हमेशा ये जनरलाइज करते हैं कि वुमेन की एंजाइटटी होता है। मैन के एंजाइटटी नहीं होता है या वुमेन के अलग टाइप का ए्जायटी होता है। मैन के अलग
टाइप का ए्जायटी होता है। ये मेरा पर्सनल ओपिनियन है। इवन दो मैं साइकोलॉजिस्ट नहीं हूं। मेरे हिसाब से या साइकेट्रिस्ट नहीं हूं। मेरे हिसाब से मोस्ट मैन के उतने ही ए्जायटी होते हैं जितने वुमेन के होते हैं। मेन बस छुपाते हैं उनको। आमीन। क्योंकि अगेन जैसे मैंने बोला उनका नैरेटिव बिल्ड हो गया है कि मैं अपने ए्जायटी को दिखाऊंगा तो मैं वीक हूं। आमीन। बिकॉज़ वो उस प्रेशर को दिखाना नहीं चाहते कि वो उसको इतना इफेक्ट हो रहा है। वो स्ट्रांग बनना चाहते हैं। एंड वुमेन आप देखेंगे वुमेन में दे कैन इज़ली टेल देर फ्रेंड्स
दैट दे लव देम। आप कभी एक मर्द को दूसरे मर्द को बोलते हुए देखेंगे। आई लव यू। कभी नहीं बोलेंगे। बिल्कुल। मजाक में बोल सकते हैं लव यू ब्रो। हम कभी ये नहीं बोलेंगे आई लव यू। आप अपने बेस्ट फ्रेंड को बोल सकते हो। आई लव यू। दिन में तीन-चार बार। एंड वि लव बट एक मर्द एक दूसरे मर्द को कभी नहीं बोलेगा आई लव यू बिकॉज़ उनको लगेगा कि आई एम शोइंग माय वीकनेस तो आप अगर एक बॉन्ड नहीं बनाने के लिए रेडी हो एंड आई एम टॉकिंग अबाउट द बेस्ट पीपल हियर राइट अगर
आप एक बॉन्ड बनाने के लिए तैयार नहीं हो अगर आप एक किसी के संग रिलेशनशिप बनाने के लिए तैयार नहीं हो आप अपने आपको एवरीडे सबड्यू करते हो एंड दिस इज़ फॉर 90% ऑफ़ द पीपल तो सम फॉर्म ऑफ़ एंजाइटटी सब में रहता है। इट्स जस्ट मेरे हिसाब से मर्ज छुपाते ज्यादा है। लेकिन जेंजी भी तो वही है। वो फिर इतना क्यों बता देता है? वो ओपन अप है। ओपन है सबके लिए। वो बता देता है कि हां ऐसा है। आई थिंक जजी को समझना भी बहुत डिफिकल्ट चीज है। लेकिन अगर आप जजी इतना ओपनली
एंजाइटटी के बारे में बात कर रहे हैं व्हिच इज ग्रेट। जिसके कारण पूरा एक नया कल्चर बन रहा है, नया सिस्टम बन रहा है कि कैसे एंजाइटी को ट्रीट किया जा सकता है। बट मेरे हिसाब से एक आर्ट जो कम्युनिकेशन का है या वह बहुत जरूरी है इंप्लीमेंट करना टू गेट रिड ऑफ़ एंजाइटटी जो जेंजी आज के दिन कर रहा है जो अगर आप अगर आप ए्जायटी के बारे में बात करते हैं हम आपको कभी ना कभी सशन मिलेगा हां बिकॉज़ वो बोलते हैं ना पॉलिटिक्स में कि आप जब आप रिबेल होते हो तो आप
लेफ्ट विंग से चालू करते हो बट जब बिल्स पे करने होते हैं तो आप राइट विंग बन जाते हो तो वो एक स्पेक्ट्रम आता है तो आई थिंक जजी में भी वो आएगा। उन लोग अभी एंजाइटटी के बारे में बात करें उसका समिशन भी आएगा। टू जनरेशंस ये डिफरेंट होगा कि अगर हम अपने दादाजी लोगों की बात करें तो उनका एक अलग पर्सपेक्टिव था। फिर मिडिल एज में आ जाए तो उनका अलग अलग पर्सेक्टिव है और ओल्ड एज में अलग पर्सेक्टिव है। पता है। मैं आपको एक बुक के बारे में बताता हूं। उसका नाम है
सेम एज एवर। अगर आपने एक बहुत फेमस किताब है साइकोलॉजी ऑफ़ मनी। मॉर्गन हाउज़ल ने लिखी है। उनकी और एक किताब है। इट्स कॉल्ड सेम एज एवर। आई वुड रियली रेकमेंड एवरी जजी टू डरी इट बिकॉज़ उस बुक में उन्होंने बात किया है कि क्या चीज ऐसी है जो कभी चेंज नहीं होती फ्रॉम द 16th सेंचुरी टू टुडे क्या नहीं चेंज होती है लव लस्ट एंगर फियर जॉय पर्पस आप जबभी भी कोई भी चीज करते हो यू आर सेलिंग अ फीलिंग | यू आर नॉट सेलिंग अ प्रोडक्ट और सर्विस आई एम नॉट सेलिंग हेल्थ आई
एम सेलिंग फियर ऑफ डेथ और अगर मैं प्रिवेंटिव हेल्थ में हूं, आई एम सेलिंग होप। यू आर सेलिंग यू नो अगर आप जर्नलिज्म में हैं या यू आर सेलिंग करंट अफेयर्स एज अ फीलिंग ऑफ व्हाट्स गोइंग ऑन इन द वर्ल्ड। नो हाउ या नॉलेज या विज़डम जो भी मतलब कि एवरीवन इज़ सेलिंग अ फीलिंग टू ईच अदर। एवरीवन इज़ टॉकिंग तो फीलिंग्स चेंज नहीं होते हैं। फीलिंग्स को एक्सप्रेस करने के लिए एंग्जायटी पहले भी उतनी ही थी जितनी आज के दिन। हां। तो अगर आप उसको एज अ स्पेक्ट्रम देखोगे तो इट इज वेरीेंट कि आप
ए्जायटी के लिए अपना कम्युनिकेशन को ऑन रखो। तो जैसे हम फीलिंग्स की बात करते हैं इनफ हो गया इमोशंस जैसे आप किसी भी बात को सुनकर रोना आ जाना तरह-तरह के जो इमोशंस होते हैं लस्ट हो गया डिजायर्स हो गई वो हर जेंडर में अलग-अलग होता है। एज वाइज अलग-अलग होता है। जनरेशन वाइज अलग-अलग होता है या एक पर्टिकुलर सेम ही रहता है। आई थिंक आपके इकोसिस्टम एंड एनवायरमेंट से बहुत फर्क पड़ता है कि आप किसके अराउंड हैं? आपका फैमिली एनवायरमेंट कैसा है? आप यू नो आप किससे मिलते हैं अपने लाइफ में। आई थिंक एक
जनरेशन में हमेशा जो लव का डेफिनेशन होता है आई थिंक वो मीडिया से आता है। मतलब हम लोग के टाइम में डीडीएलजे वाज़ द डेफिनेशन ऑफ लव। लाइक अगर आप करंट मॉडर्न जनरेशन में देख ले तो मैं भी ये जवानी है दीवानी या रॉकी एंड रानी की प्रेम कहानी। मतलब दीज़ आर द मूवीस दैट डिफाइन हाउ जनरली जजी लव्स। और पहले के जमाने में कैसे? आई थिंक मीडिया बहुत इंपॉर्टेंट है रोल डिफाइन करने के लिए। इनफैक्ट एक एक्ट्रेस का इंटरव्यू देख रहा था मैं जहां उन्होंने कहा था कि रोम कॉम्स नहीं बनते बॉलीवुड में। तो
हम लोग ने नहीं बनते हैं। बिकॉज़ अब नहीं बनते। हम लोग टेक्स्टिंग भूल गए कैसे करते हैं। अब हम लोग को पता नहीं है कि लोग रोमांटिसिज्म कैसे करते हैं। बिकॉज़ लोगों को बिकॉज़ पहले हम लोग सीखते ही रोमांटिसिज्म मूवीज से थे। कि अरे रोमांटिक कैसे बोला? वो डायलॉग क्या बोला? वो क्या बोली। मतलब हम लोग जो भी टेक्स्ट करते थे अपने गर्लफ्रेंड्स को, बॉयफ्रेंड को उसी के बेसिस पे करते थे। अब वो इतना पुराना हो गया अब क्योंकि रॉमकम नहीं निकलते। खाली मार्वल के मूवीस निकलते हैं। तो यू डोंट नो व्हाट टू टेक्स्ट? यू
डोंट नो हाउ टू कम्युनिकेट। तो रॉमकम मूवीस एक्चुअली कल्चरली भी बहुतेंट है। हमारे किचन में कुछ ऐसी चीजें होती हैं जो हम नॉर्मली इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन कुछ ऐसी चीजें होती है जो हमें अवॉइड करनी चाहिए। क्योंकि हम फिट रहना पसंद करते हैं। जैसा आपने कहा कि मुझे हर कपड़े में अच्छा लगना है। तो उसके लिए हम क्या कुछ चीजें अवॉयड कर सकते हैं? घर में रहकर जो हम नॉर्मल डाइट ले रहे हैं। आई थिंक मैं इसके लिए आपको एक पर्सेक्टिव देना चाहूंगा पहले कि हम लोग के बॉडी में ना कोई फिल्टर नहीं होता
है। हम आप मतलब अगर आप एक फूड को लॉजिकली देखो तो उसमें आपके कार्बोहाइड्रेट्स हैं जिनको हम लोग शुगर बोलते हैं। प्रोटीनंस हैं और फैट्स हैं और बहुत सारे माइक्रोोनट्रिएंट्स हैं। राइट? आप किचन में कुछ भी रखिए। अगर आप खाना खा रहे हो तो आपको सिर्फ प्रोटीन पर फोकस करना है कि आप कितना दिन में प्रोटीन खा रहे हो। उसके अलावा आप कुछ भी खा सकते हो। मैंने इनफैक्ट यूएस में एक बहुत बड़ी रिसर्च है जहां पे उन्होंने दिखाया कि अगर आप कैलोरी डेफिसिट में हो तो आप ओरियो कुकी भी खा लीजिए। कोई प्रॉब्लम नहीं
है। आप फिर भी वेट लूस करोगे आपका कोलेस्ट्रॉल भी कम होगा। आपका डाइट भी बेटर होगा। आपका मसल मास भी बनेगा। आपका टेस्टोस्टरॉन भी बढ़ेगा। आपका इंसुलिन भी कम होगा। आप प्रोटीन अगर खा लिए और उसके बाद आपका जो भी कैलोरी बचता है आपकी कैलोरी डेफिसिट में आप कुछ भी खा सकते हो। कुछ नहीं होगा। तो ये जो एक नैरेटिव है फूड का मैं बहुत मैं चेंज करना चाहता हूं कि फूड नहीं बिहेवियर को जज करिए। आप अगर आप प्रोटीन खाएंगे। चलिए मैं आपको और एक एग्जांपल देता हूं। मान लीजिए आप एक बहुत अच्छे ढाबा
में यहां पे अह दिल्ली में काके दी हट्टी बहुत फ़ेमस ढाबा है। अब मान लीजिए कि आप एक बहुत जामा मस्जिद में काके दी हड्डी में बहुत आप ढाबा का खाना खा के मैं अगर आपको बोलता हूं कि आपको दो प्रोटीन शेक लेना है खाना खाने के बाद या दो स्क्रूप आइसक्रीम लेना है। आप क्या लेंगे? आइसक्रीम। आइसक्रीम लेंगे। आप दो प्रोटीन शेक पी नहीं पाओगे। अब मैं आपको साइंटिफिकली बताता हूं। दोनों में 500 कैलोरी है। तो क्यों? आप 500 कैलोरी का आइसक्रीम ले सकते हैं बट 500 कैलोरी का प्रोटीन शेक नहीं ले सकते हो।
राइट? क्योंकि प्रोटीन आपकी बॉडी को सेटिएट कर देता है। आप जब अगर प्रोटीन लोगे तो आपके बॉडी में थर्मोजेनेसिस होगा। इनफैक्ट बहुत सारे ऐसे पब्लिकेशंस भी हैं जिनको मैं वेरीफाई नहीं कर सकता। बट आपको प्रोटीन को बर्न करने के लिए प्रोटीन का 30% कैलोरी बर्न करना पड़ता है। इसका मतलब है कि 500 कैलोरीज फ्रॉम प्रोटीन विल एक्चुअली बी 350 कैलोरीज। हम जो आपके दोस्को से कम है तो क्योंकि आपको सिटीएट कर देता है आप उतना खा ही नहीं पाते हो तो अगर आप फाइबर एंड प्रोटीन जैसे मैंने बोला फाइव थिंग्स दैट रिमेन अगर आप प्रोटीन
एंड फाइबर खाते हैं आप किचन में कुछ भी रखिए उसके बाद आप जो खा सकते हैं आप खाइए। पर ये तो बहुत कैलकुलेट करके खाना पड़ेगा। प्रोटीन में हम लोग हमेशा बोलते हैं। मैं हमेशा बोलता हूं कि तीनचार चीज ऐसे रखो जो आपके खाने के पार्ट का हिस्सा नहीं हो। जैसे फॉर एग्जांपल अगर आप वेजिटेरियन हो आप अगर सुबह एक प्रोटीन शेक पीते हो मेरे प्रोटीन आटा का दो रोटी बना लेते हो एंड शाम को एक दही खा लेते हो तो आपका 60 70 ग्राम प्रोटीन हो गया अच्छा आपको और कोई चीज का रिक्वायरमेंट ही
नहीं है हम लोग मंचिंग करते हैं तो कर सकते हैं पुष्प का देखिए अगेन मैं कैलकुलेटिव होने नहीं बोल रहा हूं बट मंचिंग का भी आप देखिए अपने आपको किस चीज से सराउंड करते हैं वो बहुत इंपॉर्टेंट है मैं अगर खाली हेल्थ की बात करें अगर आप किचन में अवॉयड करने की बात करें तो यस अगर आप सारा दिन अल्ट्रा प्रोसेस्ड अल्ट्रा केमिकल फील्ड अगर आप खाना खाते रहोगे तो यस वो जरूर आपकी सेहत के लिए खराब है। लेकिन आप घर में घर की बनाई हुई चीजें अगर आप स्नैक्स की तरह रखते हो तो मेरे
हिसाब से कोई प्रॉब्लम नहीं है। क्योंकि प्रॉब्लम आपके जो ग में जो डिसबायोसिस होता है या जो आपके मतलब जो बैक्टीरिया का बैलेंस को बिगाड़ता है वो बहुत सारे बहुत अल्ट्रा प्रोसेस फूड जो होता है नॉट प्रोसेस्ड और इसका मतलब ये नहीं कि आप थोड़ा सा खाएंगे तो प्रॉब्लम हो जाएगा। इसका मतलब यह है कि अगर आप सारा दिन वही खाते रहेंगे तो प्रॉब्लम होगा। और अगर हम पूरा दिन प्रॉपर डाइट ले रहे हैं और उसके बाद हमने दिन में एक बार हफ्ते में एक बार हमने बर्गर खा लिया। कोई प्रॉब्लम नहीं है। कोई प्रॉब्लम
नहीं है। बिल्कुल कोई प्रॉब्लम नहीं है। एंड अगर कोई बोलता है तो बहुत गलत बोल रहा है। मैं रोज चॉकलेट आइसक्रीम खाता हूं। कोई एवरीडे मैं दिन में कम से कम ढाई से तीन या 3000 कैलोरी बर्न करता हूं। मैं जिम करता हूं या पिकल बॉल खेलता हूं या वर्कआउट करता हूं। मैं अपने मैं मेरे को वॉक करने का आदत है। एंड अगेन मेरा जो हैबिट वॉक करने का ज्यादा है। देन पिकल बॉल एंड जिम। मैं 14 साल के बाद भी बोलता हूं मेरे को जिम का हैबिट नहीं है। मेरे को आज भी तकलीफ होती
है जिम जाने में। आज भी तकलीफ होती है। मतलब मेरे को इंटेंस वर्कआउट करने में। हैबिट मूवमेंट का है। तो मेरा अगर ढाई 3000 कैलोरी मैं रोज बर्न कर रहा हूं तो व्हाई शुड आई नॉट ईट? हम मेरा कभी कोई प्रॉब्लम नहीं है। और अगर जैसे किसी की रीन बॉडी है और वो पर्टिकुलर बंदा जिम नहीं कर रहा है तो क्या तब भी वो घर का खाना खा रहा है पूरा दिन उसके बाद अगर वो वीक में एक बार कुछ बाहर का खा लेता है तो कोई प्रॉब्लम नहीं है। इनफैक्ट मैं आपको बताऊं जो लीन
बॉडी एंड हेल्दी होते हैं उन लोग अपना मसल बिल्ड करने के लिए कैलोरी डेफिसिट में जाते हैं। उन लोगों का डिस्ट्रोस्ट्रॉन कम हो जाता है। ओके। तो जो लोग बहुत एथलेटिक होते हैं और लीन होते हैं उन लोग कैलोरी डेफिसिट में रह जाता है। इसलिए उनका डिस्ट्रॉशन कम होता है। ओके। बिकॉज़ उतना कैलोरी खाना डिफिकल्ट होता है। अच्छा कुछ लोग जिम करते हैं, जिम की शुरुआत करते हैं। उनकी बॉडीज फिट हो जाती है। उसके बाद छ महीने बाद उन्होंने जिम छोड़ दिया तो क्या फिर से उसी बॉडी में आना बहुत डिफिकल्ट हो जाएगा या नॉर्मल
प्रोसेस है। नहीं आई थिंक पर्सन टू पर्सन डिपेंड करता है कि आपने कितना मसल बिल्ड किया और कितना खोया। बट यह जरूर है कि अगर आप मसल बिल्ड करते हो तो इनफैक्ट मैं आपको इसका बहुत अच्छा एनालॉजी दूंगा बिकॉज़ हम लोगों ने स्टार्टिंग किया था ओज़पिक से जीएलपी जीएलपी वन से हम लोगों ने स्टार्ट किया था एंड एक कॉमन उसका सबसे बड़ा जो क्वेश्चन आता है जीएलपी वन का इसकी मैं जब जीएलपी वन लेना बंद कर दूंगा या बंद कर दूंगी तो मेरा वेट बढ़ जाएगा मैं उनको यही बोलता हूं अगर आप जिम करना छोड़
देंगे तो क्या आपका वेट मेंटेन रह जाएगा? अगर आप हेल्दी खाना छोड़ दोगे तो क्या आपका वेट कम ही रह जाएगा? अगर आप ज्यादा कैलोरी खा रहे हो तो तो इट इज द सेम थिंग। आप ड्रग छोड़ते हो लेकिन उसके बाद अगर आपका कैलोरी नहीं बढ़ रहा है तो आपका क्यों वेट बढ़ेगा? अगर आप जिम कर रहे हो तो आपका क्यों वेट बढ़ेगा? तो ये चीज बहुत जरूरी है कि अगर आप जिम छोड़ते हो डिपेंड करता है कि अब उसके बाद क्या कर रहे हो? अगर मैं मान लीजिए जिम छोड़ता हूं। लेकिन फिर भी मैं
रोज स्ट्रेच करता हूं तो टोनिंग करता हूं। घर में थोड़ा बहुत मैं यू नो लिफ्ट कर लेता हूं या थोड़ा बहुत ऊपर नीचे स्टेयर्स में मूवमेंट कर लेता हूं। हो सकता है मेरा उतना मसल लॉस नहीं हो। अगर मैं मेरा फूड डाइटिंग अच्छा है। लेकिन अगर आप एकदम यू गिव इन टू लाइफ कि भाई वेकेशन कर रहे हैं, चिप्स खा रहे हैं रोज, फ्र्राइ खा रहे हैं, कुछ भी आलू पराठा मॉर्निंग को खा रहे हैं तो आपका अगर मसल लूज हो जाएगा तो यस आपको वापस से सेम प्रोसेस जीरो टू वन स्टार्ट करना पड़ेगा। बिल्कुल।
अच्छा और एक और सवाल जैसे कॉर्पोरेट में ज्यादातर क्या होता है? आपको स्ट्रेस हो रहा है, ए्जायटी हो रही है, आप फटाफट से ब्रेक लेते हैं। हम बाहर जाते हैं और आप स्मोक करके आ जाते हैं और आपका एकदम स्ट्रेस कम हो जाता है। उसके पीछे क्या यह सिर्फ साइकोलॉजी है या सच में ऐसा कुछ होता है आपकी बॉडी के अंदर? तो बेसिकली अगर आप स्मोकिंग के हिसाब से देखें तो स्मोकिंग में तीन एस्पेक्ट है। एक नेकोटीन है। एक आपका जो कोल्ड टार ये सब होता है। एंड एक हैबिट है। राइट? अगर मैं हैबिट से
स्टार्ट करूं तो हैबिट में तीन फैक्टर होते हैं। एक होता है क्यू, एक होता है प्रोसेस और एक होता है रिवॉर्ड। रिव क्यू क्या है? आप बोर हो रहे हैं। प्रोसेस क्या है? सिगरेट। रिवॉर्ड क्या है? बोर्डम खत्म। अगर आप सारे डॉक्टर्स की मानें। ये मेडिकल हैबिट्स है बाय द वे। आपका क्यू एंड रिवॉर्ड नहीं चेंज हो सकता। आपको प्रोसेस चेंज करना पड़ेगा हैबिट ब्रेक करने के लिए। तो वो हो गई हैबिट। बिकॉज़ आपको हैंड एंड माउथ एक्शन है। जैसे आई यूज्ड टू स्मोक 30 सिगरेट्स अ डे। 25 30 सिगरेट्स अ डे। आई मैंने चार
साल पहले आई वेंट कोल्ड टर्की। राइट? तो मैं अभी भी कभी-कभी पेन पकड़ता हूं तो मेरा मैं ऐसे पेन पकड़ता हूं। क्योंकि वो मसल मेमोरी है। मसल मेमोरी में है। राइट? तो एक हैबिट होती है। तो एक होता है कि स्मोकिंग का मैंने हैबिट एस्पेक्ट के बारे में बात किया कि आपको हैबिट में रिलैक्सेशन मिलता है। बिकॉज़ वो आपका हैबिट बन जाता है। तो इट्स अ साइकोलॉजिकल थिंग। हम नाउ लेट्स कम टू टार। टार इज वै हार्मफुल फॉर यू। राइट? टार कभी भी आपको कोई चीज में हेल्प नहीं कर सकता। निकोटीन इज अ डिवाइडेड साइंटिफिक
इंडस्ट्री। बिकॉज़ जो निकोटीन है वो आपके फैट रिसेप्टर्स को फाइव टाइम्स एक्टिवेट करता है। दैट इज द हाईएस्ट फैट सेल बर्नर। उसको बोलते हैं एएमपी के एक्टिवेशन। मैं उसका लिंक भेज दूंगा अगर कोई ऑडियंस पढ़ना चाहे तो उसके बारे में। निकोटीन स्मोकिंग से फैट बर्न होगा। यस। तो निकोटीन से। अच्छा निकोटीन। जो निकोटीन होता है वो इट इज एक्चुअली वन ऑफ द हाईएस्ट फैट बर्नर्स जो आपको मिल सकता है बिकॉज़ फाइव टाइम्स फैट एक्टिवेशन होता है एकदम सेल्यूलर लेवल पे उसको एएमपी के एक्टिवेशन बोलते हैं जो हम लोग माइस में या माउस में स्टडी करते
हैं तो उससे आपका फैट आप देखेंगे जब भी कोई सिगरेट छोड़ेगा उसका वेट बढ़ जाएगा बिकॉज़ उसका निकोटीन विथड्रॉल होता है बॉडी से तो जब आपने छोड़ा था तो आपका वेट बढ़ा 100% लेकिन मैं उस टाइम फिटनेस में था तो मेरा वेट सॉर्ट ऑफ समझ लीजिए कम नहीं हो वाला था। ओके। तो जब आप सिगरेट छोड़ते हो तो उसमें निकोटीन का विड्रॉल होगा ही होगा कुछ महीनों तक। हम तो एनीवे निकोटीन कैन एक्चुअली बी हेल्दी इफ टेकन विद वाटर। बहुत सारे साइंटिस्ट अमेरिका में जो अपने खुद के लैब में बना के लेते हैं फोकस के
लिए, डोपामिन के लिए, फैट एक्टिवेशन के लिए। बिकॉज़ आप जितना फैट बर्न करोगे फैट किसके लिए? फ्यूल है ब्रेन के लिए। हम तो निकोटीन से लोगों को वो रश मिलता है जहां पर आपका एएमपी के एक्टिवेशन से आपके जो फैट सेल्स है इट बिकम्स मोर अवेलेबल टू योर ब्रेन एंड प्लीज आई डोंट वांट टू बी मिस कोटेड मैं कहीं से भी स्मोकिंग को प्रमोट नहीं कर रहा हूं या स्मोकिंग कहीं से भी हेल्पफुल नहीं है बिकॉज़ जो टार है दैट इज व्हाट कॉजेस कैंसर आप देखिए क्लीनिकल ट्रायल तो कर नहीं सकते मैं तो आपको बुला
नहीं सकता आप एक काम करिए आप 10 साल तक सिगरेट लीजिए मैं फिर देखूंगा आपको कैंसर होता है कि नहीं ये तो मैं कर नहीं सकता हम लोग सिर्फ ऑब्जरवेशन स्टडी से बता सकते हैं कि भाई होता है कि नहीं। नाउ इट इज़ विदाउट डाउट द होल वर्ल्ड नोज़ कि मोस्ट लंग कैंसर पेशेंट्स एंड मोस्ट हार्ट डिजीजेस लोग लंग कैंसर के बारे में बात करते हैं। हार्ट डिजीज के बारे में बात नहीं करते हैं। बिकॉज़ वो एक आपके वेसल्स को रिस्ट्रिक्ट करता है। तो जिससे आपको हार्ट अटैक्स होते हैं। तो स्मोकिंग इज द नंबर वन
किलर बसाइड्स ओबेसिटी। हम ओबेसिटी को छोड़ के अगर आप देखें तो वो स्मोकिंग नंबर वन किलर है। बट निकोटीन इज़ नॉट द विलन। हां। द टार एंड द स्मोक एंड द बर्न इज। तो अगर जेंडर वाइज अगर हम इसे क्लासिफाई करें तो महिलाओं में स्मोकिंग ज्यादा डेंजरस होता है एस कंपेयर टू मेन। यस मेडिकलली अगर आप देखें तो अल्कोहल एंड स्मोकिंग में अनफॉर्चूनेटली एंड आई एम नॉट मैं जेंडर बायस के हिसाब से नहीं बोल रहा हूं। बट अनफॉर्चुनेटली मेडिसिन में थोड़े बहुत जेंडर बायसिस होते हैं। जहां पे फीमेल्स में उनके साइकिल्स, इंसुलिन, हॉर्मोनस बिकॉज़ फीमेल्स
के मसल मास भी रिलेटिवली मेन से कम होते हैं। तो बिकॉज़ ऑफ़ दैट स्मोकिंग उनके जब वेसल्स को डाइलेट करता है तो उनके ऊपर जो इंपैक्ट आता है, इट इज़ स्लाइटली हायर देन मैन। तो वुमेन व्हेन दे स्मोक एंड ड्रिंक, इट क्रिएट्स अ मोर नेगेटिव इंपैक्ट उनके बॉडी पे देन कंपेयर टू मेन जिनके मसल मास हाई होता है। और ये इंपैक्ट कितने वक्त बाद दिखने लगता है? क्योंकि इनिशियली अगर आप स्मोक कर रहे हैं तो ऐसा कुछ हां मतलब देखिए वो पर्सन टू पर्सन डिपेंड करता है आपके स्किन में सबसे पहले दिखना चालू होगा मेरे
हिसाब से मतलब आपके स्किन में दिखना चालू होगा आपको ड्राई स्किन होने लगेगा आपके स्किन में आपको वो हल्का सा व्रिंकल सेट आना दिखना दिखने लगेगा मतलब आई थिंक बिकॉज़ वुमेन का हॉर्मोन जो ओवुलेटरी साइकिल के थ्रू जाता है मतलब इट बिकम्स कि स्मोकिंग बिकम्स जो आपके वेसल्स को डलेट रिस्ट्रिक्ट कर देता है तो आपके स्किन का स्ट्रक्चर जो है वो खराब जो मेन मेन में कम दिखता है बिकॉज़ उनके बॉडी ज्यादा मस्कुलर होते हैं। तो उनके बहुत बाद में दिखता है। एंड अ लॉट ऑफ़ वुमेन लाइक दैट। मतलब वो बोलते हैं ना कि मेन
एज लाइक फाइन माइन समटाइम्स। तो वो उनमें हल्का सा रिंकल्स आना, वुमेन माइट लाइक बट वुमेन में रिंकल्स आना मेन माइट नॉट लाइक। बिकॉज़ वो बोलते हैं ना कि मेन लाइक व्हाट दे सी, वीमेन लाइक व्हाट दे हियर। राइट। तो, फॉर देम, अट्रैक्शन इज़ व्हाट दे आर हियरिंग। फॉर मेन, व्हाट दे लाइक इज़ सी। सो वो डिफरेंस में आई थिंक कभी-कभी बट एनीवे स्मोकिंग से जहां तक रिलेटेड है इट डस अफेक्ट वुमेन मोर देन मैन। ओके। तो कैसे आप ये साइकिल को चेंज कर सकते हैं? जैसे आपने बताया ना एक हैबचुअल हो जाता है इंसान।
क्योंकि आपके पास उस बॉर्डर को खत्म करने के लिए कुछ नहीं है। तो या तो आप उसे किसी चीज से रिप्लेस करें। बिल्कुल। जैसे मैंने आपको बोला कि अगर इनफैक्ट हैबिट्स का मेरा जो सबसे फेवरेट बुक है द पावर ऑफ हैबिट जो चार्ल्स डोहिक का लिखा हुआ है उस बुक में उन्होंने हैबिट को इसी तरह से डिफाइन किया था बिकॉज़ अगर आप एक इंटरेस्टिंग स्टोरी सुनना चाहेंगे कि हैबिट डिस्कवर कैसे हुए थे मेडिकल हैबिट्स एक आदमी था अमेरिका में जो जिसका लड़का सुबह आने वाला था घर एंड उसकी वाइफ ने बोला कि हमारा लड़का आने
वाला है कि चलो हम लोग उसको पिकअप करने चलते हैं एंड उसको अपने बेटे का नाम याद नहीं उसको याद नहीं था तो वाइफ घबरा गई उसको हॉस्पिटल लेके गई और पता चला उसको इंसेफाइटिस है जो ब्रेन में फोर ब्रेन डैमेज हो जाता है तो उसका फोर ब्रेन डैमेज हो गया डॉक्टर के पास गए तो जो न्यूरोलॉजिस्ट है उन्होंने बोला कि ठीक है आपको तो 10 साल का मेमोरी नहीं है एंड दिस इज रियल ये पूरा रियल है कि इंसेफिस हो गया उनको पांच 10 साल का कोई मेमोरी नहीं था बट डॉक्टर्स ने देखा कि
ये वैसे ही चल सकता है इसका तो पूरा फोर ब्रेन डैमेज हो गया वैसे ही चल सकता है वैसे ही बात कर सकता है सारे लेटर्स अल्फाबेट्स हैबिट्स वॉकिंग िंग सब याद है। दैट इज व्हेन दे रियलाइज़ कि हैबिट्स आपके ब्रेन स्टेम में रहते हैं जो इनवोलंटरी होते हैं। आप जब उठते हैं आपको पता नहीं है कि आप किस साइड से उठते हैं। बट आपका हैबिट है आप एक सर्टन साइड से उठते हैं। आप एक सर्टेन साइड से मूव करते हैं। आपका एक सर्टेन तरीका है बैठने का या जो आपके पेरेंट्स से या किसी से
मिलताजुलता होगा। तो वो सब चीजें बहुत इंपॉर्टेंट होती है। तो इन द सेम वे कि आपने जो बोला कि हैबिट्स को ब्रेक कैसे करने हैं? हैबिट का जो क्यू है, जो ट्रिगर है एंड जो रिवॉर्ड है वो कभी चेंज नहीं हो सकता। दो ही चेंज हो सकते हैं। एक प्रोसेस है और एक चौथा चीज है बिलीफ जो लोग अब मैं बात करूंगा एक नॉर्मल हैबिट की और एक एडिक्टिव हैबिट की। एक नॉर्मल हैबिट में आप प्रोसेस को चेंज कर सकते हैं। अगर मेरे लिए स्मोकिंग या ड्रिंकिंग एक नॉर्मल हैबिट है। मैं उसको चेंज कर सकता
था कि भई मैं कोई और चीज से रिप्लेस कर दूं। मैं कंबूचा से रिप्लेस कर दूं। सो चार साल पहले मैंने स्मोकिंग ड्रिंकिंग एक संग बंद किया था। तो उस टाइम मेरा विक्टिम मेंटालिटी था। आप मेरे से पूछते कि भाई तुम्हारे हाथ में ड्रिंक क्यों नहीं है? तो मैं बोलता कि भ आई जस्ट क्विट। आप मेरे से आज पूछिए कि मैं ड्रिंक क्यों नहीं करता? मैं बोलूंगा कि आई डोंट ड्रिंक। वो बहुत बड़ा माइंडसेट डिफरेंस होता है फ्रॉम अ विक्टिम मेंटालिटी। तो एक तो होता है माइंडसेट शिफ्ट करना। दूसरा होता है प्रोसेस शिफ्ट करना। अब
मैं कंबूचा ले लूंगा या कोई सोबरिस्की ले लूंगा। बिकॉज़ मेरे लिए कन्वर्सेशन वही है। मैं ड्रिंक करके वही सेम कन्वर्सेशन करूंगा आपके साथ जो एक विदाउट ड्रिंक मैं आपके संग कन्वर्सेशन करूंगा। मेरी बॉडी लैंग्वेज में कोई फर्क नहीं आएगा। उस बॉडी लैंग्वेज के फर्क आने में टाइम लगता है। तो ये हो गया नॉर्मल हैबिट की बात जहां पे आपको प्रोसेस चेंज करना है। बट व्हाट अबाउट एडिक्शन? अगर आप एडिक्शन एक बहुत इंटरेस्टिंग चीज है। एंड इवन दो आई एम अ मैन ऑफ़ साइंस मैं फिर भी बोल रहा हूं। दे बिलीव कि जो सबसे सक्सेसफुल प्रोग्राम
है एडिकशंस के लिए जो कुकेन, हेरोइन एंड जो बड़े-बड़े एडिकशंस होते हैं इज़ एक्चुअली थिंग्स लाइक जो चर्च के प्रोग्राम्स होते हैं 12 स्टेप प्रोग्राम, 10 स्टेप प्रोग्राम्स जहां पे दे हेल्प यू फाइंड गॉड बोलते हैं कि द ओनली वे यू कैन लीव अ डीप हैबिट इज़ इफ यू फाइंड द पर्पस हायर देन दैट। अगर आप कोई ऐसे पर्पस में नहीं बिलीव करते जो आपके हैबिट से बड़ा है। लाइक अगर मैं आपको एक एग्जांपल दूं। मान लीजिए आप स्मोकिंग नहीं छोड़ सकते। हम बट गॉड फॉरबिट आपका बेटा या बेटी है जिसको कैंसर हो गया। एंड
उन्होंने बोला कि आई वांट यू टू लीव द हैबिट। इफ यू बिलीव इन योर डॉटर सेविंग हरसेल्फ, योर सन सेविंग हरसेल्फ, अगर आपके लिए वो इतना बड़ा चीज हो जाए जो आपके हैबिट के ऊपर हो। आप तब छोड़ सकते हो। उसके बिना आप नहीं छोड़ सकते। तो बोलते हैं ना कि जब तक आप बॉटम नहीं जब तक आप रॉक बॉटम नहीं हो तब तक आप बिकॉज़ व्हेन यू आर इन रॉक बॉटम एवरीथिंग इज अप। तो आप जब तक रॉक बॉटम हिट नहीं करोगे यू विल नॉट गो आप दैट इज अ डीप होल ऑफ एडिक्शन। कि
मैं कभी-कभी बहुत लोगों को बोलता हूं। लोग बोलते हैं मैं 10 सिगरेट, 15 सिगरेट लेता हूं। मैं उनको कभी-कभी बोलता हूं। आई विश यू हैड अ माइनर हार्ट अटैक। हम अब मैं आई एम ऑनेस्ट द यंग पीपल जो लोग स्मोकिंग छोड़ रहे हैं आर द वंस जिनको माइनर हार्ट अटैक है जो पता भी नहीं चलता कभी-कभी वो ट्रॉपटी टेस्ट में आता है हॉस्पिटल में जाके कि थोड़ा सा चेस्ट पेन हुआ तो ट्रॉपटी टेस्ट करा ली तो पता चल गया राइट तो मैं तो बोलता हूं कि आई विश यू हैड सिम्टम्स मेरे पास कितने पेशेंट्स आते
हैं जो बोलते हैं कि मैं तो 5:00 बजे रात को सोती हूं मैं तो दिन में 5 को पीती हूं या वगैरह वगैरह जो भी तो मैं उनको बोलता हूं कि आई विश आपके सिम्टम्स होते हैं बिक बिकॉज़ आपके अर्ली एज में सिम्टम्स होता तो आपको करेक्ट करने का एक मोटिवेशन होता एंड आपको पता होता कि क्या करेक्ट करना है। बिकॉज़ अगर आपको 50 साल में सिम्टम्स आए ना एवरीथिंग विल गो रोंग। पर आजकल जैसे हम लोग सोशलाइज करते हैं पार्टीज होती है। इतना कुछ होता है। तो उसमें आप ये चीजें अवॉइड कैसे करेंगे? मतलब
यूजुअली आप सबके साथ होते हैं। अवार्ड फंक्शनंस हुए, कॉर्पोरेट पार्टीज हो गई, वेडिंग्स हो गई। हर जगह ड्रिंक्स है, स्मोकिंग है, आपका फ्रेंड सर्कल ऐसा है, सब कुछ हो रहा है। तो उस पर्टिकुलर जगह पर आप उस चीज को कैसे कंट्रोल करेंगे? आप मेरे को एक चीज बताइए। एंड दिस इज लाइक अ पर्सनल क्वेश्चन आल्सो कि आई वास आल्सो वन ऑफ़ दोज़ पीपल। राइट? मैं वो सेम ग्रुप्स में जाता हूं। मैं वो सेम कन्वर्सेशंस करता हूं। आप अपने आप को चूज़ नहीं कर पा रहे हो। आप जब बोलते हो कि मेरे ग्रुप में सब करते
हैं। आप मेरे को यह बोल रहे हो कि वो लोग मेरे को एक्सेप्ट कैसे करेंगे इसके बिना। हम आप अगर खुद को एक्सेप्ट नहीं करोगे तो लोग आपको नहीं एक्सेप्ट करेंगे। मैंने आपको क्या बोला? मैं विक्टिम मेंटालिटी था कि नहीं यार मैं छोड़ रहा हूं या मैंने क्विट किया है। बट आज मैं बोलता हूं कि मैं करता ही नहीं हूं। यू हैव टू एक्सेप्ट योरसेल्फ फर्स्ट। कि नहीं आई एम नॉट दैट पर्सन। अगर वो आपके संग सोशलाइज नहीं कर रहे हैं या आपके संग बात नहीं कर रहे हैं तो देन एज देयर लॉस। एंड बी
वो आपका प्रॉब्लम नहीं है। वो उनका प्रॉब्लम है। एंड सी यू डोंट डिर्व देम। तो राइट? इफ योर फ्रेंड्स इफ योर फैमिली चूज़ यू फॉर ड्रिंकिंग एंड स्मोकिंग देन यू वि द रोंग पीपल। तो मतलब आपको या तो अपने फ्रेंड सर्कल को समझाना चाहिए या उसे चेंज कर देना चाहिए या मुझे ऐसा लगता है आपको खुद नहीं चेंज क्यों करना है? आपको खुद के ऊपर इतना कॉन्फिडेंस होना चाहिए कि आप उनहीं लोगों के साथ बैठे तब भी आप छोड़ सकते हैं। मेरे फ्रेंड्स अगर स्मोक ड्रिंक कर रहे हैं मैं क्यों उनको जज करूं। मेरा जजमेंट
का स्टाइल ही नहीं है। भाई, मेरे को नहीं करना है। मैं हूं कि सबका अपना लाइफ है। सब अपना जज करते हैं। हेल्थ वाइज़ एवरीवन नोज़ कि खराब है। आज के दिन किसको नहीं पता है। हम लोग 1950 में तो रहने हैं जहां पे स्टेटस सिंबल है। अरे वो बॉक्स पे लिखा होता है। इट इज़ सबको पता है। लिखा है। तो सबको पता है कि ये हेल्थ के लिए खराब है। ऐसा एक भी पर्सन नहीं है। आपके फैमिली में, फ्रेंड्स में, फ्रेंड ग्रुप में जो एक भी ऐसा पर्सन है जो नहीं ड्रिंक करता है, आप
क्या उसको जज करते हो? कि वो ड्रिंक नहीं करता है तो वो बेवकूफ होगा या वो मेरे फ्रेंड होने के लायक नहीं है। करते हैं अपन इट इज अ प्रेशर ऑन जजी अगर आप पे वो प्रेशर है तो आप कितना प्रेशर लेते हो या आपका क्या चॉइससेस है लाइफ में देखिए आप खुद डिफाइन करते हो अगेन अभी आपने देखा न्यू ईयर पार्टी में कितनी सारी खबरें आती है लोग गिर रहे हैं उनको उठाकर लेकर जा रहे हैं तो ये होता है ये प्रेशर है कि आपको उनके मैं देखिए प्रैक्टिकली आपका पूरा बात मान रहा हूं
मैं ऑनेस्टली मैं आपको यहां पे बैठ के ज्ञान दे रहा हूं आई कंप्लीटली अंडरस्टैंड कि प्रैक्टिकली ये सब होता है बट ये सारे इंडिविजुअल लाइफ चॉइससेस है जो आपको मैंने बोला ना कि अगर आपको सिम्टम्स होंगे ना तो आप वो लाइफस्टाइल चॉइससेस चेंज करोगे विदाउट इट व्हाई वुड यू केयर बिकॉज़ मैंने आपको क्या बोला दी ओनली थिंग यू नो इज़ दैट यू आर गोइंग टू डाई तो आपको लगता है कि मैं यंग एज में नहीं करूंगा या करूंगी डॉक्टर हूं सो द प्रॉब्लम इज कि इट इज अ हम लोग के ना सेल में एक अपोप्टसिस
बोल के एक प्रोसेस है जिसका नाम है सेल डेथ वी आर मेंट टू सेल्फ डिस्ट्रक्ट मरना तो है ही तो वी ऑलवेज टेंड टुवर्ड्स सेल्फ डिस्ट्रक्शन राइट और जो बहुत बड़ा बायो हैकर है ग्लोबली ब्राइन जॉनसन जिनका नाम है उनका जो प्रोसेस का नाम है वो उनका एक ब्रांड का नाम है डोंट डाई हम इट इज़ फोकसिंग ऑन दैट ओनली राइट बहुत आइरोनिकल है कि जो लोग हेल्थ के बारे में इतना ध्यान देते हैं वो भी पहले मरते हो सकता है मैं ही पहले मर जाऊं इवन दो मैं एंटी एजिंग के बारे में पढ़ता हूं
बट आप सेल्फ डिस्ट्रक्ट हमेशा अपने आपको करोगे इट इज अ रियलिटी मैं एक क्लीनिकल रिसर्च साइंटिस्ट हूं मेरे मेरे पास वो लग्जरी नहीं है टू सी द वर्ल्ड कि कैसा होना चाहिए। मैं देखता हूं कि कैसा है। आपके इकोसिस्टम में आपको कैसे चेंज किया जा सकता है। आपको कैसे बदला जा सकता है। आपके लाइफ को कैसे डिफरेंशिएट किया जा सकता है। बिकॉज़ आप अपने हेल्थ के बारे में अपने खुद के डिसिशन मेकर हैं। आपको सब पता है आज के दिन कि आपके हेल्थ के लिए अच्छा है कि क्या खराब है। लेकिन आप अपने चॉइससेस को
कब कैसे कोस्ट करेक्ट करते हो? आपका लाइफ में गोल क्या है? मोटिवेशन क्या है? हाउ एोगेंट आर वी टू बिलीव कि ऑल 100% पीपल विल हैव गोल्स एंड एम्स एंड पर्पससेस इन लाइफ। जब दुनिया में वेल्थ इनकिटी आप देखें तो 1% ओन्स 99% ऑफ वेल्थ तो कहां से 99% के वो आएंगे। वो लोग तो सब करेंगे जो कर रहे हैं। अगेन मैं ये नहीं बोल रहा हूं कि ऐसा होना चाहिए। बट मैं भी तो एक यूटोपियन वर्ल्ड में नहीं रहता। मेरे को एक्सेप्ट करना पड़ेगा कि ये वर्ल्ड ऐसा है। लेकिन आप क्या करते हो? अगर
आप प्रेशर में कर रहे हो तो देन आई थिंक आपको चेंज करना चाहिए। लेकिन अगर आप एंजॉय कर रहे हो इट इज योर चॉइस। इट इज योर चॉइस। यंगर जनरेशन को आप क्या कुछ एडवाइस देना चाहेंगे? उनकी लाइफस्टाइल के लिए, उनके डाइट के लिए, उनके हेल्दी रिलेशनशिप्स के लिए वन लाइनर एडवाइस अगर आप कुछ देना चाहे यंगर जनरेशन? ऑनेस्टली थोड़ी अन ऑर्थोडॉक्स एडवाइस है बट आई वुड से ऑलवेज चूज़ लव। आई थिंक बहुत लोग बहुत कैलकुलेटिव हो गए हैं टुवर्ड्स रिलेशनशिप्स, टुवर्ड्स कैलोरीज, टुवर्ड्स वर्क, टुवर्ड्स मनी, टुवर्ड्स एवरीथिंग। आई थिंक समवेयर डाउन द लाइन वी
फॉरगॉटन दैट इमोशन ऑफ़ लव बिकॉज़ यू कैन सॉल्व ऑल प्रैक्टिकल प्रॉब्लम्स इन लाइफ इफ यू चूज़ लव। तो, आई नो इट्स अ वैरी वियर्ड थिंग टू से बट लेट देम एंड डू इट एनीवेयर। हम अभी जो क्योंकि हम लोग एआई काफी ज्यादा इस्तेमाल करते हैं और यूजुअली क्या करते हैं हमें कुछ भी सवाल होता है हमें कुछ भी हुआ है ए्जायटी भी हो रही है इनफैक्ट तो हम एआई से बात करना शुरू कर देते हैं उससे पूछ लेते हैं क्या ये मतलब ठीक है कि आप डॉक्टर के बजाय आपने एआई से पूछ लिया उसके बाद
आप खुद को सेल्फ हील कर पा रहे हैं या आप कोई भी मेडिसिन भी लोग आजकल नहीं लेते आपने Google किया फटाफट से और आपने मेडिसिन दे दी ली तो क्या खुद से चीजें करना अपने साथ जस्टिफाइड है क्योंकि क्योंकि आजकल तो आप रिसर्च इतनी कर लेते हो Google पे तो ऐसा तो नहीं है Google पे सब कुछ ही खराब है। आप रिसर्च करके भी खा लेते हैं। आप रिसर्च करके खुद को सेल्फ हील भी कर लेते हैं। तो उसके बारे में आप क्या कहेंगे? मैं आई थिंक ये दो पार्ट क्वेश्चन है जिसमें मैं अगर
दवाई के बारे में बोलूं तो आई डोंट थिंक कि प्रिस्रिप्शन ड्रग्स किसी को भी विदाउट प्रिस्क्रिप्शन लेने चाहिए। बिकॉज़ क्लीनिकल जजमेंट और Google जजमेंट बहुत अलग होता है। मे बी कहीं-कहीं सही भी हुआ होगा। हम लेकिन आपको एआई जो जजमेंट देता है वो आपको बिना जाने बिना फिजिकल किए देता है एंड बिना अंडरस्टैंडिंग के देता है या लिटरेचर के ऊपर देता है कि भ पेपर में ऐसा लिखा है तो तुम ये लो बट सबके बॉडीज अलग होते हैं एंड आपको पता होना चाहिए 90% ऑफ रिसर्च जो आता है वो बाहर देशों से आता है तो
इंडियंस के ऊपर तो आधा ऐसे ही नहीं अप्लाई होता है बिकॉज़ आपको क्यों ऐसा कैसे हो सकता है कि आपको भी क्रोसिन 500 मेरे को भी क्रोसिन 500 इनको भी क्रोसन 500 हम लोग तीनों अलग बॉडी वेट हैं आपको हो सकता है क्रोसन 362 लेना चाहिए 362 mg मेरे को हो सकता है 546 एमg लेना चाहिए। तो हम लोग तो फिक्स्ड डोस कॉम्बिनेशंस दे देते हैं सबको। तो मेडिसिन एक ऐसा चीज है जो डॉक्टर के जजमेंट में लेना चाहिए। नो डाउट। लेकिन जहां तक आपने बोला कि जो एआई के थेरेपी की तरह यूज़ करते हैं।
इस टाइम मेरा टेक थोड़ा सा डिफरेंट है। आई थिंक हर जनरेशन में ना हम लोग ने कुछ ना कुछ अलग किया है। अच्छा। मतलब पहले लोग कंप्यूटरटर्स के भी अगेंस्ट थे। उनको लगता था कंप्यूटरर्स जॉब ले लेंगे। आज के दिन लगता है एआई जॉब ले लेंगे। कल के दिन बोलेंगे 3D मेटावर्स हम लोग का जॉब ले लेगा। बट आप जितना जॉब्स लेते हो आप उतना क्रिएट भी कर रहे हो। डिसरप्शन इज द नेम ऑफ मूविंग फॉरवर्ड। तो जहां तक थेरेपी का बात है अगर किसी को वैलिडेशन मिलता है या किसी को मन में शांति मिल
जाती है कुछ देर के लिए। मतलब इज इट अ ट्रू सेंस ऑफ मेंटल हेल्थ? आई डोंट थिंक सो मेरे हिसाब से ह्यूमन कनेक्शन से बड़ा कुछ नहीं है। जैसे मैंने बोला चूज़ लव? अगर आप ह्यूमन कनेक्शन को तोड़ दें तो हाउ आर यू ह्यूमन? बीइंग ह्यूमन इज बीइंग फ्लॉड। एआई इज टू परफेक्ट। राइट तो लेकिन अब जैसे एआई से हम लोग सवाल करते रहते हैं। आप रात वर्ड चैट कर रहे हैं। आप फोन का इस्तेमाल कर रहे हैं। वो आपकी हेल्थ को किस तरीके से अफेक्ट कर रहा है? आपकी बॉडी को आपके ब्रेन सेल्स को
उन तमाम चीजों को कैसे अफेक्ट करता है? आई थिंक देखिए ये आपने जो एक सवाल पूछा ये एक बहुत लंबा सवाल है बिकॉज़ जो स्लीप एंड आपका जो पूरा बॉडी साइकिल है वो लाइट से इन्फ्लुएंस्ड है। आपका जो स्लीप साइकिल है और वेक्स साइकिल है तो आप रात को कुछ भी कर रहे हो वो गलत है। यू आर फोर्सिंग योर ब्रेन हॉर्मोन्स टू चेंज बिकॉज़ आप जागते कैसे हो? जब आपका सनलाइट आता है तो आपको कॉर्टिसोल रिस्पांस होता है। अगर आप एक अंधेरे रूम में लेटे हुए हो आप सोए हुए हो। अचानक से मैं सारा
लाइट आकर जला लूं। आप उठेंगे कि नहीं उठेंगे? क्यों उठेंगे? आपका ब्रेन ने लाइट को रिसोंस किया। मैंने आपको चिल्लाया नहीं, हवा में बात नहीं किया। आपको उठाया नहीं, मारा नहीं, कुछ नहीं किया। आप सिर्फ एंड आप सोचिए लाइट से आपका ब्रेन उठा है। आपका तो आंख बंद था। आपने लाइट को देखा कैसे? हम इसका मतलब ब्रेन देख सकता है। आपको पता होना चाहिए आंख आपके ब्रेन का स्क्वीज़्ड पार्ट है। हम लोग आई को एक डिफरेंट ऑर्गन बोलते हैं। बट टेक्निकली तो ब्रेन से आ रहा है। राइट? तो आपका आंख बंद था। फिर भी आपका
ब्रेन लाइट को रिसोंड किया। बिकॉज़ क्या हुआ? को कॉर्टिसोल रिस्पांस हुआ। तो जो कॉर्टिसोल है उससे आप उठते हो सुबह को। रात को जब अंधेरा होता है आपका मेटोनिन बनता है। जब हम स्क्रीन्स यूज़ करते हो हम लोग कर क्या रहे हैं? हम लोग अपने मेलिटोनिन को सप्रेस कर रहे हैं। जो लोग सप्लीमेंट्स में लेते हैं। आप जितने भी सप्लीमेंट्स का जो स्लीप साइकिल के लिए आप यूज़ कर रहे हो वो इसलिए यूज़ कर रहे हो क्योंकि आप जो एक्टिविटीज कर रहे हो। बट अगेन मैं बोलता हूं कि मैं कौन होता हूं जज करने वाला।
इन द सेंस कि जैसे-जैसे एज एंड जनरेशन चेंज हो रहे हैं। आई फील कि हम लोग एक ऐसे भी टाइम पे जाएंगे जहां पे वी विल गो बैक टू एग्रीकल्चर। लाइक मेरे को लगता है एआई इतना बड़ा हो जाएगा वो आपके पूरे बिज़नेस को हैंडल करने लगेगा। तो यूनिवर्सल इनकम ऐसे ही जनरेट कर देगा। अगर आप एआई में ट्रूली एक एल्गो ट्रेडिंग ला सके तो व्हाट मेक्स यू से कि गवर्नमेंट एक एल्गो ट्रेडिंग करके सबको यूनिवर्सल इनकम नहीं दे। अगर आपको यूनिवर्सल इनकम देंगे आप तो खेती में चले जाएंगे ना वापस से। सो आई फील
कि ऐसा भी एक टाइम आएगा आई डोंट नो मे बी 100 साल बाद जहां पे मेरे हिसाब से एआई इतना बड़ा हो जाएगा कि अगर सबका यूनिवर्सल इनकम आने अगर यूनिवर्सल इनकम आने लग गया तो ऐसे भी आई थिंक हम लोग एग्रीकल्चर में चले जाएंगे बिकॉज़ फिजिकल लेबर जॉब्स रहेंगे खाली बिकॉज़ मेंटल बिकॉज़ एआई इज़ नॉट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इट इज़ कलेक्टिव इंटेलिजेंस इट इज़ द इंटेलिजेंस ऑफ़ ऑल ह्यूमन बीइंग्स। तो आपको इंटेलेक्चुअल जॉब्स करने की जरूरत क्यों होगी? स्पेशली अगर अभी क्वांटम कंप्यूटिंग आ गई तो एंड बहुत हमने अपने पूरे सेगमेंट में बच्चों की बात
नहीं की। छोटे बच्चों को लेकर अगर हम बात करें तो एक तरह से मदद का ये मानना था कि अगर उनका बच्चा हेल्दी है तो ही इज़ एक्चुअली हेल्दी। मतलब चवी है तो वो हेल्दी है। क्या ये एक मिथ है या ऐसा होता है कि हां अगर बच्चे थोड़े बहुत मोटे हो जाते हैं तो मतलब ठीक है। हम लोग कंसीडर कर सकते हैं कि हां वो हेल्दी बच्चा है। दूसरी चीज एक और सवाल इसी में हमने आजकल देखा है कि छोटे बच्चों को ना चश्मे बहुत ज्यादा लगने लगे। उनकी आईसाइट बहुत ज्यादा वीक होने लगी
है। तो क्या वो एक ऐसा फैक्टर है कि इतनी इनिशियल ऐज में ही ऐसा कुछ होने लगा है? तो आई थिंक जहां तक चश्मों की बात है आई थिंक बिकॉज़ बहुत बार आजकल मदर्स एंड फादर्स अपने बच्चों को खाना खिलाने के लिए स्क्रीन बहुत दिखाते हैं। उनका जो रेटिना होता है जो सॉरी कॉर्निया होता है वो फिक्स हो जाता है। कभी टेढ़ा फिक्स हो जाता है, कभी आगे पीछे फिक्स हो जाता है। तो जो हम लोग ने पढ़ा है, जो हम लोग ने थोड़ा बहुत रिसर्च किया है, उसके हिसाब से उसके कारण उनके आंख में
बहुत इंपैक्ट आ रहा है। बिकॉज़ वो बाईफोकल लेंस एंड लेंस आपका बिकॉज़ आप ऐसे देख रहे हो कोई चीज को खाते टाइम बिकॉज़ आप फोकस कर रहे हो। आप खाने को भी देख रहे हो और आप स्क्रीन को भी देख रहे हो। तो आई थिंक दैट इज वन ऑफ़ द रीज़ कि जहां जिसके कारण बहुत लोगों को चश्मे का प्रॉब्लम हो रहा है। जहां तक मोटापे का बात है आई थिंक उसमें एक वेट मेजरमेंट है पीडिएट्रिशंस का कि मतलब किसको जुनाइल ओबेसिटी बोलते हैं और किसको नहीं बोलते हैं। बट वो एक बहुत नवांस टॉपिक है
जिसमें मतलब आपके वेट मेजरमेंट आपके खाने पीने का स्टाइल उसमें बहुत इंपैक्ट है टू सी कि वेदर दैट इज नॉर्मल ऑ नॉट हम और आप यंगर जनरेशन की भी बात करें और बच्चों की भी बात करें गट हेल्थ काफी एक बड़ा मुद्दा बन चुका है क्योंकि गट हेल्थ ज्यादातर ही सबका खराब है तो उसको कैसे क्योर किया जा सकता है और किन वजहों से वो खराब हो जाती है मैं चलिए ग हेल्थ एकदम इनफेंट्री से स्टार्ट करता हूं राइट आप अगर पहले जमाने में देखते तो 90% वजाइनल बर्थ होते थे। राइट? बच्चों के 10% सी
सेक्शन होते थे। आज के दिन मैं बोलूंगा अर्बन सिटीज में तो 90% सी सेक्शन होते हैं। राइट? तो आपका जो गट माइक्रोबायोम आता है वो कहां से आता है? आपकी मदद से। आप जब आप जब एक बच्चे को अपने सी सेक्शन से पेट से निकालते हो तो उसका 90% जो माइक्रोबायोम है वो स्किन से आया है। मदर के स्किन से आया है। उनके वाइना या उनके एनल एनल एरिया से नहीं आया है। तो आजकल साइंटिस्ट लोग एक नैपकिन बना रहे हैं कि जो मां जो मदर्स जिनके बच्चे होंगे सी सेक्शन में उनका वजाइनल सोब लेके
नैपकिन में लेके बच्चों को रैप कर देंगे। बिकॉज़ जो बच्चे सी सेक्शन में पैदा हुआ है दे आर मोर प्रोन टू डायबिटीज। दे आर मोर प्रोन टू ऑटो इम्यून डिसऑर्डर्स बिकॉज़ दे डोंट हैव द मदर्स वजाइनल माइक्रोबायोम बिकॉज़ माइक्रोबायोम सिर्फ गट में नहीं होते हैं। आपके नोज में होते हैं। आपके माउथ में होते हैं। आपके गले में होते हैं। आपके पूरे गट सिस्टम में होते हैं। तो ऐसा भी टेक्नोलॉजी बनाया जा रहा है। तो माइक्रोबायोम वहां से स्टार्ट करते हैं। माइक्रोबायोम एक बहुत मिस्टीरियस चीज है। माइक्रोबायोम में सिर्फ बैक्टीरिया नहीं होते हैं। माइक्रोबायोम में वायरसेस
भी होते हैं। इनफैक्ट आपके बॉडी में अगर से टेक्निकली 10 टू द पावर 13 सेल्स ऑफ बैक्टीरिया होते हैं ऑन एन एवरेज और उसके 10 टाइम्स ज्यादा वायरसेस होते हैं आपके गट में सो वो वायरसेस आपको इनफेक्ट नहीं करते हैं। आपके बैक्टीरिया को इनफेक्ट करते हैं। सारे बैक्टीरिया अच्छा होते हैं। हम लोग बोलते हैं ना गुड बैक्टीरिया बैड बैक्टीरिया। आपको पता होना चाहिए कभी-कभी बैड बैक्टीरिया भी आपके लिए अच्छा हो सकता है। एच पाइलोरी को हम लोग बहुत बैड बैक्टीरिया मानते हैं। जिन पापुलेशंस में एच पाइलोरी बैक्टीरिया होता है उनको अस्थमा कम होता है। उसको
एक्टिवेट करने के लिए वायरसेस उनको इनफेक्ट करते हैं जिसके कारण आपको एच पाइलोरी डेंजरस हो जाता है। एंड एक्टिवेशन कहां से आता है? स्ट्रेस, हॉर्मोनल इमंबैलेंस, इंसुलिन ये सब चीजों से आपको आपके जो वायरसेस हैं आपके बैक्टीरिया को इनफेक्ट करते हैं। तो ग का जो सिस्टम है आपके नोज से स्टार्ट होता है, माउथ से स्टार्ट होता है, आपके फूड पाइप में होता है। आपके कोन में होता है, आपके इंटेस्टाइन में होता है। आपके स्टमक में होता है। एंड वो पूरा का जो पूरा ग सिस्टम है, उसमें सबसे इंपॉर्टेंट होता है कि आप अपने बैक्टीरिया एंड
वायरसेस को खाना दिखाना क्या है? फाइबर जो मैंने आपको शुरू में बोला था। द फाइव थिंग्स आर रिमेन। कि आपको फाइबर देना जरूरी है। दैट इज दी मोस्ट नोन थिंग। आपको पता होना चाहिए कि ये जो मैंने आपको नैपकिन के बारे में बात किया जो स्टूल ट्रांसप्लांट के बारे में बात करते हैं कि आप किसी का स्टूल लेके उसका बैक्टीरिया निकाल के एक हेल्दी पापुलेशन को अगर एक अनहेल्ी पापुलेशन को दे दे तो उनका बैक्टीरिया अच्छा हो जाएगा। लेकिन यही सेम चीज प्रोबायोटिक्स में नहीं होता है। अगर आप जितने भी गैस्ट्रोसर्जन के पास जाएंगे अमेरिका
में या यूरोप में या इंडिया में उन लोग प्रोबायोटिक्स आधा से ज्यादा टाइम तो उन लोग खाली आपके प्लस इफेक्ट के लिए देते हैं। आपको नहीं पता है प्रोबायोटिक्स काम करेगा क्या? प्रोबायोटिक्स में कौन सा बैक्टीरिया आपके किस कॉलोनी को कैसे बढ़ाता है? आप कैसे जनरलाइज कर सकते हो? सबका प्रोबायोटिक्स अलग होता है। सबका माइक्रोबायोम पापुलेशन अलग होता है। जापान में जो हेल्दी रहता है वही अमेरिका में जाके हार्ट डिजीज हो जाता है। जो मतलब अगर आप इंडिया में हेल्दी हैं। आप अमेरिका में बिकॉज़ आपका माइक्रोबायोम चेंज हो रहा है। हम तो आपके एनवायरमेंट से,
आपके टच से, आपके किसी के किस करने से या आपके किसी के हग करने से, आपका स्किन माइक्रोबायोम एक्सचेंज होता है। आपका फेशियल माइक्रोबायोम एक्सचेंज होता है। आपको पता होना चाहिए जो कपल्स होते हैं उनका माइक्रोबायोम सिमिलर हो जाता है। वो कैसे होगा? बिकॉज़ दे आर इंटिमेट विद ईच अदर। तो आपका माइक्रोबायोम सिमिलर होगा ही। आप ट्रांसफर कर रहे हैं। आपको तो बैक्टीरिया एंड वायरसेस एक दूसरे के संग एक्सचेंज हो गई। तो आपका जो माइक्रोबायोम है इट इज़ एन एक्सट्रीमली सिमबायोटिक थिंग। इट इज़ समथिंग दैट बाइंड्स द वर्ल्ड। आपके सिर्फ बैक्टीरिया नहीं है, वायरसेस है,
कुछ टाइप के फंगस भी है, कुछ टाइप के प्रोटोजोआस भी है। तो वो पूरा एक दुनिया है। अगर आपका बॉडी वन ट्रिलियन सेल्स है, आपका जो ग बैक्टीरिया है वो 1 ट्रिलियन ट्रिलियन सेल्स है। इनफैक्ट कुछ साइंटिस्ट में ऐसा डिबेट चलता है कि आर वी कैरिंग ग बैक्टीरिया और इस ग बैक्टीरिया कैरिंग अस। क्योंकि बहुत ही ज्यादा क्रूशियल हो गया था ना इस टाइम पे क्योंकि हम देखते हैं बच्चों में भी आप देख लीजिए, डॉक्टर में भी आप देख लीजिए। यह बहुत ज्यादा इफेक्ट करता है। मतलब ये आपको हर तीसरे इंसान में खराब ही मिलेगा
और फिर आपका पूरी पूरा बॉडी आपका सब कुछ डिसबैलेंस हो जाता है। आप क्या खा रहे हैं वो भी ठीक नहीं रहता है। आपको ए्जायटी होने लगती है। आपके हॉर्मोंस अलग तरीके से काम करने लगते हैं। तो इसको क्योर किस तरीके से किया जा सकता है? तो इसका साइंटिफिक एक्सप्लेनेशन मैं अगर दूंगा तो हम लोग ने देखा है कि दो चीज बहुत इंपॉर्टेंट है। अ अगर आपका फर्स्ट जनरेशन डिसबैलेंस है मतलब कि जैसे मान लीजिए आपकी मदद या फादर को ग प्रॉब्लम नहीं है। आपको ग प्रॉब्लम है तो आप लाइफस्टाइल मॉडिफिकेशंस और फाइबर्स से उसको
ठीक कर सकते हैं। काफी हद तक वो अपने आप कॉलोनाइज हो जाता है। फाइबर्स में क्या-क्या ले सकते हैं? फाइबर में जैसे दो टाइप के फाइबर होते हैं। एक जिसको बोलते हैं वाटर सॉलुबल फाइबर और एक होता है इनसॉलीबल फाइबर। तो जो वाटर सॉलबल फाइबर होता है उसको पीएजी बोलते हैं। वो पीएजीजी आप ले सकते हैं। अगर आपको लगता है कि आपको फाइबर की और जरूरत है या आप ईसप गोल्ड ले सकते हैं जो नॉर्मली कॉमन घरों में भी मिलती है वो आप फाइबर ले सकते हैं। उसके अलावा चिया सीड्स है, ओट्स है, होल फ्रूट्स
वेजिटेबल्स हैं। इससे आपको फाइबर मिल सकता है। ये सारे जो फाइबर इंग्रेडिएंट्स हैं उससे आप अपना फाइबर इनक्रीस कर सकते हैं जिससे आपको बैक्टीरिया को खाना मिलेगा। राइट? नाउ जो सेकंड चीज है हम लोगों ने देखा कि अगर दो-तीन जनरेशन से ग के प्रॉब्लम्स हैं तो वहां पे तभी ये स्टूल ट्रांसप्लांट का कांसेप्ट आया कि अगर आप तीनचार जनरेशन से लोगों को गट का प्रॉब्लम है तो उनमें अच्छा बैक्टीरिया कॉलोनाइज होना बहुत डिफिकल्ट होता है। तो वहां पे अगर मैं अच्छा बैक्टीरिया इंजेक्ट कर दूं पहले प्रोबायोटिक से ट्राई हुआ। अब स्टूल ट्रांसप्लांट इंजेक्शन से ट्राई
हो रहा है। तो हो सकता है कि आपका माइक्रोबायोम अच्छा हो जाए। एंड ये माइस में देखा गया कि इट इज़ सक्सेसफुल। ह्यूमंस में इट हैज अ वैरिड रिस्पांस। अभी तक उसका बहुत ज्यादा डाटा पब्लिश नहीं हुआ है। ओके? तो अब जैसे हमारी बॉडीज अलग तरीके से काम करती है तो स्ट्रेस हॉर्मोंस हो गए, लव हॉर्मोंस हो गए। ये किस तरीके से काम करते हैं हमारी बॉडीज में? अलग-अलग जैसे आप हैं, हम इतने सारे लोग हैं। सबकी बॉडीज में अलग तरीके से काम करते हैं या इन जनरल ही रहता है। नहीं देखिए ऐसे तो देखिए
हर बॉडी अपना है। आपका पर्सनालिटी आप यू नो वो बोलते हैं ना आप अपना पर्सनालिटी चूज़ करते हैं। आप मेरे संग हो सकता है एकदम अलग पर्सनालिटी के हो। बिकॉज़ मेरा और आपका जो रिलेशनशिप है या आप मेरे संग जिस तरह से बात करते हैं, मैं जिस तरह से आपके संग बात करता हूं, हो सकता है यू चूज़ अ कंप्लीटली डिफरेंट पर्सनालिटी विथ मी। तो आप भी बहुत सारे पर्सनालिटीज वेयर करते हैं। आप एक पर्सनालिटी नहीं वेयर करते हैं। आप अपने बॉस के संग जो बात करेंगे, आप जो मेरे संग बात करेंगे, आप अपने बॉयफ्रेंड
के संग जो बात करेंगे, आप अपने ब्रदर के संग जो बात करेंगे, यू कुड बी डिफरेंट पीपल टू डिफरेंट पर्संस। राइट? तो बेसिकली अगर आप एक ओवरऑल सारा दिन का देखें तो डोपामिन एक मोटिवेशन हॉर्मोन होता है जो आप सुबह-सुबह जब आप उठते हैं सनलाइट के कारण तो आपके बॉडी में डोपामिन प्रोड्यूस होता है। तो वो डोपामिन मोटिवेशन है क्या? मोटिवेटेड फील करते हैं कि आप अपने पार्टनर के संग टाइम स्पेंड करें या रिलेशनशिप बनाए। यह लव हॉर्मोन होता है। नहीं, यह मोटिवेशन हॉर्मोन होता है। बिकॉज़ यू नीड एवरीथिंग। यू नीड अगर आप मोटिवेटेड फील
नहीं कर रहे हैं, अगर आप डाउन फील कर रहे हैं, यू डोंट वांट टू डू एनीथिंग विथ योर पार्टनर। राइट? तो वो डोपामिन आपका 8 9 घंटे तक चलता है। उसके बाद जब शाम तक होता है, तो वो सेरोटोनिन एंड ऑक्सीटोसिन जो हम लोग जिनको लव हॉर्मोनस या वेल बीइंग हॉर्मोन बोलते हैं। बिकॉज़ दोनों का बैलेंस इंपॉर्टेंट है। बिकॉज़ अगर आपको कोई चीज से स्ट्रेस हो रहा है, तो वो लव नहीं है। राइट? हम कि क्या बात होगा कैसे होगा वो रिप्लाई करेगा कि नहीं या वो ऐसा रिप्लाई किया इसका क्या मतलब है एम आई
राइटिंग द सेम राइट थिंग वो गलत कुछ लिख दिया मैं कुछ गलत लिख दी राइट तो ये सारा कन्वर्सेशंस होता है इससे आपका स्ट्रेस स्पाइक होता है राइट लव एक्चुअल में तब होता है जब आपका नर्वस सिस्टम काम डाउन हो जाता है हम दैट इज़ व्हाट इज़ एन एक्चुअल लव लव इज़ नॉट ट्रांजैक्शन आप काउंट नहीं करते हो बट आपके लिए लव इज़ेंट बिकॉज़ आप जब लव को चूज़ करते हो एंड यू प्रैक्टिस इट एवरीडे देन देन योर नर्वस सिस्टम कम्स डाउन बिकॉज़ देन व्हेन द रियल अट्रैक्शन एंड द रियल बिकॉज़ अगर आप एक नर्वस
ब्रेक हो या आप ए्जायटी में हो तो दैट इज़ नॉट लव। राइट? तो इन द सेम वे व्हाई स्ट्रेस नॉट इंपॉर्टेंट। हम लोग कॉर्टिसोल को बहुत गाली देते हैं कि कॉर्टिसोल बढ़ जाएगा। कॉर्टिसोल हाई होने से ये होता है। कॉर्टिसोल क्यों नहीं इंपॉर्टेंट है? कॉर्टिसोल आपके ब्रेन के लिए फूड अवेलेबल करता है। कॉर्टिसोल आपके ब्रेन के लिए एनर्जी अवेलेबल करता है। अगर आप दिन में स्ट्रेस नहीं है तो आप तो मर गए। क्रॉनिकली हाई कॉर्टिसोल इज बैड। क्रॉनिकली लो कॉर्टिसोल इज बैड। बट कॉर्टिसोल इज नॉट बैड। अगर आपके कॉर्टिसोल आप अगर आज आप अगर इंडिया
टुडे के टॉप टीवी जर्नलिस्ट बनना चाहते हैं एंड उसके लिए आपका मोटिवेशन हॉर्मोन बढ़ता है एंड आप उसमें आपको कॉर्टिसोल बढ़ता है। तो व्हाट इज रॉन्ग विथ दैट? तो कभी-कभी किसी चीज के लिए स्ट्रेस होना है। कभी-कभी नहीं एवरीडे होना चाहिए। मैं बोलता हूं क्रॉनिकली हाई नहीं होना चाहिए। क्रॉनिकली मतलब इन टाइम मतलब आप 10 घंटा स्ट्रेस में नहीं होने चाहिए। फाइन। अगर आप बोलते हो कि नहीं उठो यार मेरे को मैं 8:00 बजे पहुंचना ही पहुंचना है तो मैं 7:00 बजे उठी है। मेरे को 8:00 बजे तक पहुंचना है। राइट? तो वो आपको 5
मिनट के लिए स्ट्रेस होगा। जब आप निकल गए तो आपको थोड़ी स्ट्रेस होगा। हम तो मेरा मतलब है कि आपके जो छोटे-छोटे स्पाइक्स होते हैं थ्रू द डे। दैट इज़ व्हाट मेक्स यू ह्यूमन बीइंग। अगर आप स्ट्रेस नहीं लोगे जिसको मैं पॉजिटिव स्ट्रेस बोलता हूं तो देन यू हैव नो पर्पस एंड जॉय इन लाइफ। जॉय में भी तो स्ट्रेस होना चाहिए ना। अगर आप आप व्हाट डू यू एम फॉर पीस? नॉट हैप्पीनेस ऑल द टाइम। आप अगर एक मेरी राउंड में या अगर आप रोलर कोस्टर राइड में जाओगे राइट? आप स्ट्रेस्ड में हो। राइट? आप
एंजॉय उसको बाद में करते हो। यू ऑलवेज लाइक हैप्पीनेस इन रेट्रोस्पेक्ट। नॉट इन द करंट मोमेंट बट यू कैन फील सैड करेंटली। जैसे आप घर से एक एग्जांपल जैसे घर से दोस्तों के साथ निकले आप पास में कहीं जाने के लिए आप पहुंच गए मनाली उस टाइम आपको स्ट्रेस है लेकिन जब आप वो ट्रिप करके आ चुके हैं तब आपको हैप्पीनेस तब आपको हैप्पीनेस मैं बोल रहा हूं ये एक वियर्ड पैराडॉक्स है कि आप हैप्पीनेस को करेंटली लिव नहीं कर सकते हां क्योंकि करेंटली हैप्पीनेस इज़ स्ट्रेस लेकिन आप सैड फील कर सकते हो करेंटली अगेन
लेकिन बाद में वो कन्वर्ट हो जाएगा हैप्पीनेस में वो बोलते हैं ना हम लोग सारे रियलिटीज को सुपरज करते एक साथ आज आप और मैं बात कर रहे हैं। हो सकता है आप इंप्रेस्ड हो कि मेरे पास कुछ नॉलेज है या नहीं है। कल को कोई ऐसा आर्टिकल आ जाए जो मेरे कन्वर्सेशन को डिनाई कर दे तो आप ये भी बोल सकते हैं कि मेरे को पता था उस टाइम भी कि कुछ गलत बोल रहा था। राइट? अगर मेरा पॉइंट प्रूव हो जाए तो आप हो सकता है कुछ बाद में बोलेंगे कि हां बहुत स्मार्ट
था। मतलब समझ में आ रहा था जब बात कर रहा था। राइट? हम लोग क्या करते हैं? हम लोग एक संग बहुत सारे रियलिटीज जी रहे हैं। बिकॉज़ आप अपने ब्रेन को कन्विंस कर लोगे कुछ पॉइंट बाद। बेस्ड ऑन योर वैलिडेशन ऑफ दैट करंट टाइम पॉइंट। अगर एक साल बाद मैं बहुत पॉपुलर हो गया। आप हो सकता है एक साल बाद अपने फ्रेंड्स के संग मिले तो आप बोलोगे कि ओ मेरे को पता था ये इतना पॉपुलर होगा। देखना ये बहुत अच्छा बात कर रहा था और ये बहुत स्मार्ट है। इसका अंडरस्टैंडिंग अच्छा था। एंड
वहीं पे अगर मैंने बंद कर दिया आप बोलोगे मेरे को उसी टाइम समझ में आ गया था। यू विल कन्वस योर ब्रेन एंड यू विल बी जेनुइनली ऑथेंटिक विद व्हाट यू आर सेइंग। यू विल नॉट बी लंग। सो व्हाट हैपेंस इज एज ह्यूमन बीइंग्स हम लोग अपने रियलिटी को सुपरइंपोज कर लेते हैं। एंड एक इवेंट जिसमें 10 दोस्त बैठे हैं। दैट विल बी 10 डिफरेंट थिंग्स टू 10 डिफरेंट पीपल एट 10 डिफरेंट टाइम पॉइंट्स। तो जब हम लोग इनफाइनाइट रियलिटीज़ के बारे में बात करते हैं। दैट इज़ व्हाट इनफाइनाइट रियलिटीज़ आर। बिकॉज़ आप एक ग्रुप
में अगर हम लोग यहां पे 10 जन बैठ के 10 कॉन्वर्सेशन करें। वही हर साल चेंज होगा। हर साल हर जन का पर्सपेक्टिव चेंज होगा। व्हाट बिकम्स द कोरियलिटी? द कोरियलिटी वास दैट 10 पीपल वर प्रेजेंट इन अ रूम एट वन गिवन टाइम पॉइंट। हम बट द एक्चुअल रियलिटी ऑफ़ हु वर सिटिंग वेयर क्या कन्वर्सेशन क्या आप सब चेंज कर दोगे? दैट्स हाउ यू हील योर ब्रेन। बिकॉज़ डीप डाउन वी ऑल नो वी आर एक्टिंग। खुद को सेटिस्फाई करने के लिए हम बिल्कुल। बिकॉज़ हाउ हाउ एल्स कैन यू मूव ऑन इन लाइफ इफ यू डू
यू डू यू डू यू फॉरगिव योरसेल्फ? आपको नहीं लगता कि आपने कुछ लाइफ में गलत किया होगा। इफ यू डोंट फॉरगिव योरसेल्फ, हाउ डू यू मूव ऑन? आप अपने को फॉरगिव कैसे करोगे? कुछ तो कन्वेंस करना पड़ेगा ब्रेन को। राइट? जो लोग ज्यादा एशियस होते हैं, अपने को फॉरगिव नहीं कर पाते। थेरेपिस्ट क्या करता है? आपको वैलिडेट करता है कि नहीं कोई बात नहीं। राइट? आई एम जस्ट सेइंग कि इट इज़ माइंडसेट शिफ्ट बिहेवियर इज़ मोरेंट टू मी देन फिजिकल थिंग्स। तो क्या थेरेपी जब आप किसी इंसान को देते हो तो आप उसको एक तरह
से गुमराह करना होता है कि आप उसको रियलिटी चेक नहीं करा रहे हो? व्हाट इज गुमराह एंड रियलिटी? एनीथिंग दैट यू बिलीव इन योर हेड इज रियलिटी। अगर आप अपने आप को चूज़ नहीं करते हो। बिकॉज़ मैं बोलता हूं फीलिंग एक प्रैक्टिस होती है। यू कैन नॉट फील लव। यू हैव टू चूज़ लव। इवन व्हेन यू डोंट वांट टू। राइट? अगर आप किसी को चूज़ करके आप उसको डेली चूज़ करते हो कि आई वांट टू लव दिस पर्सन एवरीडे बिकॉज़ ऐसा क्या हो सकता है कि आपको मेरे से या किसी और से बेटर इंसान नहीं
मिलेगा। किसी के पास ज्यादा सिक्योरिटी होगा, किसी के पास ज्यादा रिसोर्सेज होगा, किसी के पास ज्यादा कोई देखने में बेटर होगा। कोई लुक्स में बेटर होगा, कोई रिसोर्सेज बहुत सारे रीज़ंस हो सकते हैं। बट यू हैव टू चूज़ व्हाट यू वांट। राइट? इट इज़ द सेम थिंग वि थेरेपी। अगर मैं आपको गुमराह भी कर रहा हूं तो व्हाई कैन नॉट दैट बी ऑन न्यू रियलिटी? हम लोग सब डलजनल है। हम लोग सब एक्टिंग कर रहे हैं यहां पे। कौन है जो एक्टिंग नहीं कर रहा है? डीप डाउन हम लोग जो इंपोस्टर सिंड्रोम फील करते हैं।
अगर मैं आपको कल बोलूं कि आपको इंडिया में बेस्ट एंकर ऑफ द ईयर मिल गया। यू विल फील लाइक द बिगेस्ट स्कैम। लाइक टुमारो अगर मेरे पास आप मेरे को अगर अनंत अंबानी एज अ पेशेंट दे दे मेरे को। आई विल फील लाइक आई एम रनिंग अ मेडिकल स्कैम। मेरे को लगा कि मेरे में ऐसा क्या है कि अनंत अंबानी मेरा पेशेंट है। राइट? तो आई थिंक यू हैव टू चूज़ योर फीलिंग। चूज़ द वे यू वांट टू फील। अगर आपको लगता है कि आप किसी तरह फील कर रहे हो एंड दैट्स नॉट करेक्ट। और
आप थेरेपिस्ट से बात करके आप अपना उस फीलिंग को चेंज कर सकते हो तो व्हाई इज़ डल्यूजन नॉट अ रियलिटी? राइट? इट कैन बी डलू फॉर समवन एल्स? सी बट इट हैज़ टू बी अ रियलिटी फॉर यू बिकॉज़ यू आर लिविंग इट। हाउ डू यू केयर इफ आई थिंक इज़ डलूजनल? अभी एक आपका वीडियो था जिसमें गत ब्रेन सेक्स कनेक्शन के ऊपर आपने कुछ कहा था। उसके बारे में कुछ बताइए। किस तरीके से वो कनेक्शन होता है हमारी बॉडी में? आप कपल है आप इंटिमेट हो रहे हैं तो वो कैसे ब्रेन सेल्स उसको एक्टिव करते
हैं? तो मैं इसके लिए आपको चार स्टेटमेंट बताता हूं। पहला स्टेटमेंट है कि आपका जो टोटल बॉडी वेट है वो आपकी कैलोरीज से डिटरमाइन होता है। आप कितना खा रहे हैं? अगर आप जितना बर्न कर रहे हैं उससे ज्यादा खा रहे हैं तो आपका वेट गेन होगा। आप उससे कम खा रहे हैं तो वेट लॉस होगा। सेकंड थिंग इज कि आपका क्वालिटी ऑफ कैलोरीज जो होता है कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, फैट उससे आपका बॉडी कंपोजशन डिसाइड होता है। इसका मतलब है कि अगर आप 80 kg के हैं, अगर मान लीजिए आप 50-55 kg के हैं तो मैं
आपको और एक फीमेल 55 kg की दिखाऊंगा जो आपकी सेम हाइट की है लेकिन उसमें 50% बॉडी फैट है। आप में 20% बॉडी फैट है। राइट? तो आपका प्रोटीन, कार्ब्स एंड फैट से डिसाइड होता है वो कंपोज़िशन। थर्ड होता है आपके माइक्रोोनट्रिएंट्स से आपका परफॉर्मेंस डिसाइड होता है। फोर्थ क्या होता है? आपका जो हॉर्मोंस है वो बाकी पहला तीन चीज डिसाइड करता है। तो ये जो हॉर्मोंस है वो है आपका ग ब्रेन सेक्स एक्सेस। हम लोग हमेशा बोलते थे ग ब्रेन कनेक्टेड है एक दूसरे से। इसका मतलब है कि अगर आपको एशियसनेस फील होगा आपको
गट में चर्न होगा। आपका पेट गुड़गुड़ करेगा कि आपको वो ए्जायटी फील होगा। आपको पेट में दर्द होगा। अगर आपको कोई बहुत सदमा लगता है। आपको पेट में दर्द होता है। राइट? नाउ ये सेम चीज अगर आप देखें अगर आपको सेक्सुअल ए्जायटी होगा तो भी आपको पेट में दर्द होगा। टीचिंग अगर आपको सेक्सुअल ए्जायटी होगा तो अगर आपको सेक्सुअल ए्जायटी होगा अगर आप परफॉर्म नहीं कर पाएंगे तो आपको कहां पर इफेक्ट होगा? आपके ब्रेन में एशियसनेस आएगा। तो आप देख रहे हैं थ्री वे स्ट्रीट है। आपका ब्रेन में जो इंपैक्ट है वो आपके गट में
जाता है। आपका जो ब्रेन का इंपैक्ट है अगर आप डिप्रेस्ड है क्या आप सेक्स कर सकते हैं? हम तो आपका ब्रेन में इंपैक्ट ग में जाता है तो सेक्स में भी जाता है। सेक्स का इंपैक्ट ब्रेन में जाता है और गट में भी जाता है। ग में इंपैक्ट होने से ब्रेन में भी इंपैक्ट होता है आपको दर्द में। एंड आप सेक्स भी नहीं कर सकते। आप आप देख रहे हो थ्री वे स्ट्रीट है। तो ये शुरू किससे हो रहा है? ब्रेन से शुरू हो रहा है गट से शुरू हो। ये चिकन एंड एक पैराडॉक्स है
कि पहले चिकन आया कि एग राइट। और एक और सवाल जैसे ए्जायटी होती है। किसी भी इशू से रिलेटेड हो सकती है। उस टाइम पे आपको ग में प्रॉब्लम होने लगती है। आप कुछ स्ट्रेस ले रहे हैं। आपको एंजाइटटी हुई तो वो ग से क्या उसका कनेक्शन? पूरा हार्मोनल कनेक्शन है आपका जितना भी ग का अगर आप हंगर हॉर्मोन देख लें अगर आपका सटाइटटी हॉर्मोन देख लें जितने भी हॉर्मोनस है गलेन होता है लेप्टिन होता है जीएलपी वन होता है जिसके बारे में हमने जिस बात की ओमपिक के बारे में आपका सब ब्रेन एंड ग
से कनेक्टेड है तो अगर आपके ब्रेन में बहुत ज्यादा ए्जायटी है तो आपका स्टमक को चर्न करने लगता है बिकॉज़ आपके हॉर्मोनस केओस में जाने लगते हैं तो अगर आपको कोई चीज का सदमा लगेगा आपको सबसे पहले अपने गट में फील होगा फील होगा बिकॉज़ वो जो ए्जायटी है वो जो हॉर्मोनस है वो केओस में चले जाते हैं आपके ब्रेन के हम एंड उसके कारण आपके गट में सबसे ज्यादा इंपैक्ट आता है। ओके तो एक आखिरी सवाल या आखिरी कोई एडवाइस आप यंगर जनरेशन को या किसी भी जनरेशन को देना चाहे कि वो हेल्दी रहे,
हेल्दी डाइट ले और पीसफुल रहे, ज्यादा एंजायटी ना हो। स्ट्रेस तो आपने कहा जैसे स्ट्रेस पॉजिटिव भी होता रहे। तो वो क्या एडवाइस आप? मैं ऑनेस्टली मैं आई विल गो बैक टू द फाइव थिंग्स दैट रिमेन। आप मूव करते रहिए। हम आप फाइबर खाइए, आप प्रोटीन अच्छे से लीजिए। आप पानी अच्छे से ड्रिंक करिए। एंड उसके साथ-साथ आप अपने स्लीप को मेंटेन रखिए। अगर आप ये पांच चीज कर सकते हैं कंसिस्टेंटली ओवर टाइम आपको और कोई एडवाइस का जरूरत नहीं है। इफ दीज़ आर द फाइव थिंग्स यू कैन डू। तो मुझे लगता है हमने सारे
सेगमेंट्स अपने इंक्लूड कर रखे हैं। लोगों को काफी ज्यादा आंसर्स मिल जाएंगे। मुझे काफी चीजें पता चली। तो थैंक यू सो मच फॉर जॉइनिंग अस। एंड होपफुली नेक्स्ट टाइम फिर आपसे मुलाकात होगी। तो कुछ और सवालों के साथ आपके साथ। थैंक यू सो मच फॉर इनवाइटिंग मी। तो आज हमने जाना कि आपकी बॉडी में हॉर्मोन्स कैसे काम करते हैं? ब्रेन सेल्स कैसे काम करते हैं। आपका गट सिस्टम आपसे क्या कहता है और आप वेट लॉस कैसे कर सकते हैं? तो हमारे अगले एपिसोड में आपके साथ मुलाकात होगी। तब तक के लिए स्टे फिट, स्टे हेल्दी।