सुंदरता के गुरूर में चूर शहजादी बानो अपने मां-बाप की इकलौती संतान थी जब वह सवारी के लिए निकलती तो लोग अपने घरों में दुबक जाते दरवाजे खिड़कियां बंद कर लेते दुकानदार अपनी दुकानों के पर्दे गिरा देते राहगीर अपनी राह से हटकर गली कचों में चले जाते अगर गलती से कोई राह में रह जाता तो उनके लिए जहां है वहीं औंधे मुंह लौटने का सख्त शाही फरमान था जो बादशाह के इस शाही फरमान के खिलाफ जाता उनकी आंखों में तपते गर्म सरिए डालने का रूह कपा देने वाला कानून था एक दिन शहजादी बानो की सवारी उसके
ढेर अंग रक्षकों सहित बाजार से गुजर रही थी तभी बाजार के दूसरे रास्ते से एक बूढ़े राहगीर ने प्रवेश किया तेजी से आगे बढ़ते शहजादी के काफिले को जब बूढ़े राहगीर ने अपनी तरफ आते देखा तो उसके पास इतना समय भी नहीं था कि वह भागकर कहीं छुप जाए वो एक गरीब बूढ़ा मछुआरा था जिसके सिर पर मछलियों से भरी टोकरी थी टोकरी को फेंक कर औंधे मुंह जमीन पर लेटता तो उसकी सारी मछलियां मर जाती काफिला उसके पास आ पहुंचा शहजादी के सिपाहियों ने उसे गिरफ्तार कर लिया घमंडी शहजादी ने उसको देख अपने सिपाहियों
को आदेश दिया इस दु साहसी को कैद कर लिया जाए और शाही फरमान के अनुसार दो दिन बाद इसकी मलिन आंखों में तपता गर्म सरियां डाला जाए इतना सुनकर बूढ़ा मछुआरा थरथर कांपने लगा और बोला ए शहजादी ए मल्लिका मुझ गरीब मछुआरे की उम्र का लिहाज करते हुए मुझे रहम की बख्शीश दो पर शहजादी बानों पर बूढ़े मछुआरे की बातों का कोई असर नहीं हुआ उसने कहा इस कम भक्त की आंखें फोड़ दो इतना कहकर वह अपने काफिले के साथ आगे बढ़ गई बूढ़ा मछुआरा कांपता हुआ माफी की भीख मांगता रह गया डर के मारे
उसके हाथ पैर कांप रहे थे जिस जिससे उसकी मछलियां बिखर गई बहते नेत्रों के साथ वह मछलियां उठाने लगा तो शहजादी के सैनिकों ने धमकाते हुए कहा क्या कर रहा है बदतमीज बूढ़े तूने रास्ते को खराब कर दिया तेरे पास इन सबके लिए समय नहीं है इतने में एक नव युवक आया और बूढ़े की मछलियां इकट्ठी कर उसके टोकरे में डाल दी सिपाहियों ने गुस्से में नव युवक से कहा चल यहां से अपना रास्ता नाप नवयुवक लड़का मन ही मन शहजादी को सबक सिखाने का निश्चय कर वहां से चला गया शहजादी का खोखला घरूर तोड़ने
की ठान चुका नवयुवक जब खोजबीन करने और अंदर घुसने का रास्ता ता देखने शहजादी के महल के पास पहुंचा तो उसने देखा वहां बहुत कड़ा पहरा था कदम-कदम पर शहजादी के सिपाही उसके महल की पहरेदारी कर रहे थे अच्छी तरह से तांक झांक कर वो सही मौके के इंतजार में वापस लौट गया शहजादी अपने महल के चारों ओर इतना सख्त पहरा रखती थी रात को जब वो सोती तो उसके कमरे में भी उसके खास पहरेदार पलंग के चारों ओर खड़े होकर उसकी निगरानी करते फिर एक दिन शहजादी के दिल में पता नहीं क्या आया कि
वह अकेली सोने को तैयार हो गई इसी मौके की तलाश में नवयुवक बहुत दिनों से था आधी रात को वो महल के सभी पहरेदार को चकमा देते हुए शहजादी के कमरे में दाखिल हुआ देखा शहजादी पूरे इत्मीनान से सो रही थी पूरे कमरे में एक से बढ़कर एक शाही चीजें रखी हुई थी तभी उसकी नजर वहां रखे लाल पत्थर पर गई जिसकी चमक से पूरे कमरे में रोशनी फैली हुई थी उसने चुपचाप वो हीरा उठाया और जिस रास्ते आया था उसी रास्ते महल से चला गया शहजादी की नींद खुली और कमरे में अंधेरा देखा तो
वो घबरा गई घबराकर शहजादी बिस्तर से उठ खड़ी हुई और हाथों से टटोल हुए घंटे से बंधी जंजीर तक पहुंची और जंजीर खींच दी घंटे की जोर-जोर की आवाज सुनकर शहजादी के नौकर चाकर उसकी बांध दियां तुरंत उसके पास पहुंची उधर बादशाह और मल्लिका भी घंटे की आवाज सुनकर उठ गए मल्लिका ने बादशाह से कहा हाय क्या हो गया मेरी बच्ची को जल्दी से उसके पास चलो बादशाह और मल्लिका जब शहजादी बानो के कमरे में पहुंचे तो उन्होंने देखा शहजादी के पास नौकर खड़े हुए कह रहे थे मल्लिका हमने किसी को यहां से बाहर निकलते
नहीं देखा बादशाह के पूछने पर शहजादी ने बताया कि अब्बा जान कमरे में रखे हीरा लाल को कोई चुरा ले गया बादशाह ने तुरंत सैनिकों को आदेश दिया कि जल्दी जाओ और देखो चोर अभी यही होगा पर नवयुवक तो कबका वहां से जा चुका था सुबह होते ही बादशाह ने पूरी सल्तनत में घोषणा करवा दी कि जो भी शहजादी के चोरी हुए हीरालाल को वापस लेकर आएगा या आएगी उसे मुंह मांगा इनाम दिया जाएगा नवयुवक को जब बादशाह की घोषणा का पता चला तो वह मन ही मन खुश हुआ वह अब अपने अगले कदम के
लिए तैयार था शहजादी के गुरूर को तोड़ने की नवयुवक की योजना अब उसके हिसाब से जा रही थी अपनी योजना अनुसार वह बादशाह के सम्मुख पेश हुआ और तख्त के सामने झुककर बड़ी अदब के साथ सलाम किया बादशाह ने नवयुवक से पूछा कौन हो तुम नवयुवक ने अदब के साथ कहा बादशाह सलामत मैं शहजादी के चुराए हुए हीरालाल को लेकर आया हूं अब आप अपने वायदे के मुताबिक मेरी मुंह मांगी शर्त को पूरा कीजिए बादशाह हीरे को देख खुश होता हुआ बोला कहो तुम्हें क्या चाहिए नवयुवक ने बोला बादशाह सलामत मेरी गुजारिश है कि परसों
शहजादी को देखने पर कैद किए गए वृद्ध मछुआरे की आंखें फोड़ने की सजा माफ की जाए और उन सिपाहियों की पीठ पर कोड़े लगवाए जाएं जिन्होंने उसे गिरफ्तार किया और मुझे गालियां दी बादशाह ने हैरान होते हुए पूछा उस बूढ़े मछुआरे के साथ तुम्हारा क्या रिश्ता है नव युवक बोला हुजूर ए आजम मेरा उसके साथ इंसानियत के अलावा कोई रिश्ता नहीं बस उसकी हालत देखकर मुझे उसके ऊपर रहम आ गया और वैसे भी उसके देखने भर से शहजादी का क्या बिगड़ गया नवयुवक के मुख से यह बात सुनकर बादशाह गुस्से से तिलमिला उठा उसने अपने
वजीर को आदेश दिया इस कमबख्त को कारावास में डाल दो और वायदे के मुताबिक उस बूढ़े मछुआरे को रिहा कर दिया जाए और उन सैनिकों को 50-50 कोड़े मारे जाएं नव युवक ने बादशाह का हुक्म सुन बादशाह से कहा बादशाह हुजूर आप मुझे कारावास की सजा क्यों दे रहे हो तब बादशाह बोला एक तो तुमने शहजादी के लाल हीरे को चुराया और ऊपर से शहजादी का अपमान किया है नव युवक ने बड़े अदब के साथ कहा बादशाह हुजूर हीरा मैंने बूढ़े मछुआरे को सजा से बचाने के लिए चुराया था आप ये ठीक नहीं कर रहे
हैं अगर आपने ऐसा किया तो मैं आपकी जेल से भाग जाऊंगा और आपका ताज चुरा लूंगा बादशाह बोला बेवकूफ लड़के तू मेरे ताज के आसपास भी नहीं फटक सकता बादशाह ने सिपाहियों को उसे जेल ले जाने का इशारा किया इशारा मिलते ही तुरंत सिपाही नवयुवक को पकड़कर कैद खाने ले गए और जेल में बंद कर दिया नवयुवक जेल में बैठा खुश हो रहा था जैसा वह चाहता था अब तक बिल्कुल वैसा ही हो रहा था वो अब अपने अगले कदम के लिए पूरी तरह तैयार था बादशाह शहजादी के पास गया और हीरालाल देते हुए उसे
सारी दास्तान सुनाई शहजादी ने कहा अब्बा जान उस दु साहसी की इतनी मजाल कि उसने मेरे कमरे से हीरालाल चुराया और अब आपका ताज चुराने की फिराक में है उस दुष्ट व्यक्ति को बीच चौराहे पर खड़ा करके उसके दोनों हाथों को को कटवा दीजिए ताकि फिर कभी कोई ऐसी जरूरत करने की सोचे तक नहीं बादशाह ने शहजादी से कहा बेटी तुम चिंता मत करो जैसा तुम कहती हो उसके साथ वैसा ही किया जाएगा बादशाह ने पूरे राज्य में घोषणा करवा दी कि कल सुबह राज्य का हर व्यक्ति शहर के चौराहे पर आ जाए बीच चौराहे
पर शहजादी के महल में चोरी करने वाले दुष्ट नौजवान व्यक्ति को खड़ा कर उसके दोनों हाथ कांटे जाएंगे बादशाह का वजीर जब कैद खाने जाकर नव युवक को यह खबर देता है तो नव युवक जोर-जोर से हंसने लग जाता है और कहता है तुम सब पागल हो गए हो सुबह तक यहां कौन रुकेगा मैं तो आज रात ही बादशाह का ताज लेकर यहां से फुर्र हो जाऊंगा वजीर ने कैद खाने के दरोगा को हुक्म देते हुए कहा कि आज रात कैद खाने के चारों ओर सख्त पहरा लगवा दीजिए सुबह हुई तो बादशाह ने वजीर को
हुक्म दिया जाओ जल्दी लेकर आओ उस कम भक्त को उसके हाथ कटते देखने के लिए मैं स्वयं भी बेताब हूं वजीर जी हुजूर कहकर तुरंत कारावास की ओर चल दिया उसने कारावास के दरोगा को कहा उस नवयुवक को लेकर आओ दरोगा जब जेल के अंदर जाकर देखता है तो उसे वहां सिर्फ हथकड़ियां पड़ी हुई मिलती हैं यह देखकर दरोगा के पैरों नीचे से जमीन खिसक जाती है वो भागकर वजीर के पास जाता है और बताता है कि हुजूर साहब वहां तो शिवाय हथकड़ियों के कुछ नहीं है लड़का जेल से भाग चुका है वजीर बोला बादशाह
सलामत अब तुम्हें नहीं बख्श दरोगा बोला हुजूर साहब पता नहीं उस लड़के ने कैसे किया क्योंकि आज रात तो मैं खुद उसकी निगरानी कर रहा था और थोड़ी-थोड़ी देर में जाकर उसको चेक कर रहा था वजीर बोला मुझे कुछ नहीं पता तुम बादशाह सलामत के पास चलो दरोगा को लेकर वजीर बादशाह के पास पहुंचा और सारा माजरा बताया तो बादशाह का मुंह पीला पड़ गया जैसे एकदम उसके शरीर से उसके प्राण निकल गए हो वो आनंद फानन में अपने शयन कक्ष की ओर दौड़ा देखा तो उसका मुकुट भी गायब था बादशाह को काटो तो खून
नहीं शहजादी बानो अपने पिता के महल में आती है देखा तो बादशाह उदास बैठा हुआ है शहजादी ने उनसे मायूसी का कारण पूछा तो बादशाह बोला क्या फायदा मेरे बादशाह होने का जब एक मामूली सा चोर लड़का मेरे महल में दाखिल हो जाता है और जो उसका मन करे उठा ले जाता है शहजादी बोली मुझे तो लगता है सभी नौकर उस कम भक्त से मिले हुए हैं पर आप उदास मत हो अब्बा जान एक तरीका है उसे पकड़ने का और आपका ताज फिर से पाने का आप उस बूढ़े राहगीर को फिर से कैद करवाकर पूरे
नगर में घोषणा करवा दीजिए कि बूढ़े मछुआरे की आंखें निकालकर उसे शहजादी के महल में बंदी बनाकर रखा गया है वो उसे बचाने जरूर आएगा बादशाह के हुक्म की देर थी कि कुछ ही देर में सैनिक उस बूढ़े राहगीर को पकड़ लाए बादशाह ने बूढ़े मछुआरे को आराम के साथ शाही कमरे में ठहराया और अपनी योजना अनुसार पूरे राज्य में घोषणा कर दी कि बूढ़े की आंखें निकाल उसे कैद करके रखा है नव युवक को जब पता चला तो उसके तन बदन में आग लग गई उसने खुद से कहा जब मेरे ऊपर वर्श नहीं चला
तो उस बूढ़े राहगीर को ही उठा लिया पर अब बस बहुत हुआ अब इन सब का अंत करने का समय आ गया है रात हुई तो शहजादी के महल के चारों तरफ कड़ा पहरा लगा दिया गया कदम-कदम पर शाही सैनिक अस्त्र शस्त्रों के साथ चौकन में खड़े थे खुद बादशाह भी भेष बदलकर गश्त कर रहा था पर तभी अचानक शहजादी के महल से हृदय चीर देने वाली चीख सुनाई दी बादशाह आनंद फानन में भागा भागा शहजादी के कमरे में दाखिल हुआ देखा तो शहजादी जमीन पर पड़ी हुई है और उसका पूरा का शरीर नीला पड़
गया है तुरंत शाही वैध को बुलाया गया जब वैध ने राजकुमारी को चेक किया तो उसके होश उड़ गए कांपती आवाज में बादशाह से कहा माफ करें हुजूर शहजादी अब इस दुनिया में नहीं है किसी जहरीले सांप के काटने से वो मर चुकी है बादशाह के ऊपर तो जैसे मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा वो दहाड़े मार-मार कर रोने लगा बेटी तुम मुझे छोड़ के नहीं जा सकती तुम्हारे बिना मैं भी अपने प्राण त्याग दूंगा पूरे महल में चीख पुकार मच गई तभी वजीर की नजर वहां रखी एक कुर्सी पर गई जिसके ऊपर बादशाह का शाही
ताज रखा हुआ था वजर बोला माफ करना हुजूर यह सही समय नहीं है पर यह सब किया धरा उस चोर का ही है वही यहां पर किसी जहरीले सांप को छोड़ गया और आपका ताज भी रख गया शहजादी के मौत के गम में बादशाह पूरी रात रोता है सुबह हुई तो रस्म अनुसार शहजादी बानों को दफनाया गया शहजादी के गम में पूरे नगर की आंखें नम थी हर जगह एक अजीब सा सन्नाटा पसरा हुआ था शहर की सभी दुकानें बंद थी हर कोई शहजादी के लिए दुआ कर रहा था अगले दिन बादशाह जब शहजादी की
समाधि पर फूल चढ़ाने गया तो देखा शहजादी की कब्र खुदी हुई थी शहजादी का पार्थिव शरीर कब्र से गायब था यह देख बादशाह को बड़ा भयानक सदमा लगा अपने होशो हवास खो वो जमीन पर गिर पड़ा वजीर ने जब उस पर ठंडे पानी से छिड़का किया तो उसे होश आया पर बादशाह अब भी अपने हवास में ना था वो सबकी तरफ ऐसे देख रहा था जैसे वह किसी को जानता ही ना हो चार दिन के इलाज के बाद उसका होश ठिकाने आया बादशाह को इतना गम शहजादी की मौत का भी ना था जितना उसकी मयत
गायब होने का था उसने दूसरे राज्यों से स्पेशल जासूसों की पूरी टुकड़ी बुला ली और शहजादी की मैयत का पता लगाने को कहा शहर के चप्प चपे चप्पे में अब जासूस फैल चुके थे पर उन्हें क्या पता था शहजादी का चोर तो कब का मुल्क से बाहर जा चुका था कब्र खोदकर शहजादी की लाश को बाहर निकालने वाला कोई और नहीं बल्कि वो नवयुवक ही था जो शहजादी के गुरूर को तोड़कर ध्वस्त करने की ठान चुका था शहजादी की लाश को अपने घोड़े पर लिए वो बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा था चलते-चलते वह बगदाद
शहर के बाहर पहुंच गया शहजादी की लाश को झाड़ियों में छुपा वो एक संदूक ले आया संदूक में शहजादी को लिटा शहर के अंदर गया और उसने एक सराय का कमरा किराए पर लिया जब रात हुई और सब सो गए तो नव युवक ने बखे को खोला और कुछ मंत्र बोलकर एक सांप बन गया सांप बने नव युवक ने शहजादी के कांटे हुए स्थान से सारा जहर चूस लिया और फिर से अपने असली रूप में आ गया कुछ ही समय बाद आह भरती हुई शहजादी उठकर बैठ गई उसने पानी मांगा तब नवयुवक ने उसे पानी
पिलाया पानी पीकर शहजादी के होश कुछ ठिकाने आए तो वह बोली मैं कहां हूं तुम कौन हो मैंने अभी-अभी एक बहुत भयानक सपना देखा कि एक सांप के कांटने से मेरी मृत्यु हो जाती है मुझे दफना दिया जाता है फिर तुम आकर मुझे कब्र से निकाल कर एक सफ घोड़े पर यहां ले आए पर वो सपना एक सपना ना होकर हकीकत था तुम मुझे यहां क्यों लेकर आए तुम्हारा मकसद क्या है और इतने सारे सिपाहियों के होते हुए तुम महल में घुसकर चोरी कैसे करते हो बौखलाई शहजादी ने एक साथ सवालों की बौछार कर दी
तब नव युवक बोला सुनो शहजादी अगर तुम जानना ही चाहती हो तो मेरा नाम बिन मुस्तफा है मेरे अब्बा जान बहुत बड़े जादूगर थे जिन्होंने मुझे अपनी विद्या से सांप का रूप बदलने की विधि सिखाई है मैं तुम्हारे महल में सांप के रूप में अंदर जाता था जिस सांप के काटने से तुम्हारी मृत्यु हुई थी वो भी कोई और नहीं बल्कि मैं ही था मैं जानता था सांप के कांटे हुए मनुष्य का अगर तीन दिन के अंदर जहर चूस कर निकाल दिया जाए तो वह फिर से जिंदा हो जाता है यह सब मैंने तुम्हें सबक
सिखाने और तुम्हारे खोखले गुरूर को तोड़ने के लिए किया और अब तुम सदा के लिए मेरी दासी बनकर मेरे साथ रहोगी यही तुम्हारी सजा है शहजादी सब कुछ सुन एकदम सन रह गई उसे कुछ बोलते ना सुझा कुछ देर चुप्पी के बाद शहजादी ने माफी मांगते हुए कहा मैंने ताकत के गुरुर में चूर पता नहीं कितने ही लोगों का अनिष्ट किया है मुझे माफ कर दो पर नव युवक के ऊपर शहजादी की पश्च ताप भरी बातों का कोई असर नहीं हुआ शहजादी को अपने घर लाकर एक बंदी या फिर यह कहे एक दासी की तरह
नवयुवक रखने लगा कुछ दिन तक तो शहजादी ने नवयुवक से मिन्नतें की कि वो उसे उसके पिता के पास छोड़ आए पर नव युवक को उसके ऊपर विश्वास ना था उसे लगता था शहजादी यह सब मजबूरी में और उसकी कैद से छुटने के लिए बोल रही है समय बीतता गया शहजादी अब अपना पूरा अहंकार त्याग कर एक पत्नी की तरह घर का सारा काम करती और नव युवक की हर छोटी से छोटी बात का ख्याल रखती धीरे-धीरे नव युवक के दिल में भी शहजादी के प्रति कठोरता की जगह नरमी ने ले ली वो उसे चाहने
लगा फिर सोचा मैं कहां एक छोटे से जादूगर का लड़का और वह मुल्क की शहजादी फिर एक दिन ऐसा आया जब नवयुवक ने शहजादी को परखने के लिए घर पर अकेला छोड़ दिया और भागने का पूरा मौका दिया और सोचा रात को जब लौटूंगा तब शहजादी मुझे मिल गई तो उसके सामने अपने दिल की बात कह दूंगा रात तक का समय नव युवक ने बड़ी मुश्किल से कांटा रात हुई तो वो धड़कते दिल के साथ घर की ओर चल दिया उसके मन में ढेरों विचार एक साथ चल रहे थे थे नवयुवक जब रात में घर
आया तो उसने देखा शहजादी कहीं नहीं गई बल्कि रोजमर्रा की तरह अपने कामों में तल्लीन थी आज पूरा दिन सोचने समझने और विचार करने के बाद उसने फैसला लिया कि शहजादी के साथ उसका कोई भविष्य नहीं है उन दोनों के बीच प्रतिष्ठा और रुतबे की बहुत बड़ी दीवार है तो वो उसे सही सलामत बादशाह के पास ही छोड़ आएगा सुबह हुई तो शहजादी को लेकर वो बादशाह के पास गया जब बादशाह ने अपनी बेटी को सही सलामत देखा तो उसकी आंखों से खुशी की अश्रु धारा बह निकली उसने शहजादी को गले लगा लिया और ढेरों
सवार एक साथ दाग दिए तब नवयुवक ने बादशाह से माफी मांगते हुए सारा किस्सा कह सुनाया सब सुनकर बादशाह ने अपने वजीर को हुक्म दिया कि इसे अभी फांसी के तख्ते पर चढ़ा दो पर शहजादी ने अपने पिता से कहा नहीं अब्बा जान इसने मेरा अहंकार नष्ट करने के लिए यह सब किया अब मैं इसे अपने हृदय से अपना पति मान चुकी हूं अगर इसे कुछ हुआ तो मैं भी अपने प्राण त्याग दूंगी बेटी के मोह में मजबूर बादशाह ने दोनों का निगाह करवा दिया अब पहले जैसा कोई कानून नहीं रहा प्रजा भी अब खुशी
से रहने लगी इधर शहजादी और नव युवक भी एक दूसरे के साथ खुश थे निष्कर्ष सच्ची शक्ति और महानता केवल बाहरी ताकत राज या सामर्थ्य में नहीं बल्कि आत्म साक्षात्कार विनम्रता और अपने भीतर की अच्छाई को पहचानने में है शहजादी बानो जो अपने शक्ति और सौंदर्य के अहंकार में चूर थी अपनी गलतियों और असलियत को स्वीकारने के बाद खुद को बदलने का प्रयास करती है नवयुवक जो पहले केवल प्रतिशोध और सजा के विचार से प्रेरित था धीरे-धीरे अपनी कठोरता और गुस्से से बाहर निकलता है और उसे माफ करके एक नया दृष्टिकोण अपनाता है यह कहानी
यह भी सिखाती है कि सच्ची सजा किसी को शारीरिक रूप से दंडित करने में नहीं है बल्कि उसे मानसिक और आत्मिक रूप से आत्म सुधार की दिशा में मार्गदर्शन करने में है नवयुवक का कदम शहजादी को सजा देने की बजाय उसे एक मौका देना यह दिखाता है कि जब किसी व्यक्ति को आत्मग्लानि और पश्चाताप का एहसास होता है तो उसकी सुधार की प्रक्रिया शुरू होती है इंसानियत की सबसे बड़ी शक्ति सच्चाई को पहचानने उसे स्वीकार करने और दूसरों के लिए अपना दृष्टिकोण बदलने में है दोनों पात्रों की यात्रा दर्शाती है कि जब हम अपने अंदर
की अच्छाई को पहचानते हैं और उसे अपने जीवन में उतारते हैं तभी हम सचमुच महान बन सकते हैं