झाड़ियों के पीछे मौजूद एक पिशाच की नजर विक्रमादित्य पर जा पड़ी विक्रमादित्य का शरीर देखकर वह समझ गया कि यह कोई साधारण मानव नहीं है वह तुरंत वहां से गया और थोड़ी ही देर में नरभक्षी पिशाच की सेना ने विक्रमादित्य पर हमला कर दिया विक्रम के क्रोध की सीमा ना रही और वह अकेला वीर उन दैत्यों पर टूट पड़ा देखते ही देखते विक्रम ने संपूर्ण पिशाच का नरसंहार कर दिया समय बहुत कम था इसलिए विक्रम उस औषधि की तलाश में तुरंत आगे बढ़ चले तभी अचानक एक दैत्य का अजगर ने उन्हें अपना ग्रास बना लिया
जं ही वे अजगर के पेट में पहुंचे उन्होंने अपनी तलवार के एक ही वार से अजगर का पेट चीर दिया और बाहर निकल आए गर्मी और थकान के कारण विक्रम का बुरा हाल हो गया धीरे-धीरे अंधेरा घिर आया रात गुजारने के लिए विक्रम एक वृक्ष पर चढ़ गए और विश्राम करते हुए सुबह होने का इंतजार करने लगे आगे की कहानी जानने के लिए चैनल को सब्सक्राइब जरूर करें