अस्सलाम वालेकुम वेलकम टू क्लास नंबर 25 बैच नंबर 40 वीएसए हम पढ़ रहे हैं और वीएसए में आपको क्लाइमेटिक एक्शन बार के बाद वह वाले टेस्ट हम बता रहे हैं कि जिनसे आपको अर्ली ट्रेड्स मिल सकती हैं। अगर सारा दिन क्लाइमेटिक एक्शन बार नहीं मिलती। जाहिर है कुछ लोग ऐसे होते हैं जो सिर्फ एक स्पेसिफिक टाइम पे ही उनको ट्रेड करने का टाइम मिलता है। बाकी टाइम पे वो नहीं कर सकते ट्रेड। कुछ लोग ऐसे होते हैं जो मैक्सिमम टाइम चार्ट पर गुजार रहे होते हैं। तो दोनों तरह के स्ट्रेटजीस हैं। अब क्लाइमेटिक एक्शन बार
में आपने देखा है कि उसमें फिर आपको ट्रेड की कंफर्मेशन के लिए काफी वेट करना पड़ता है। उसमें सेटअप्स कम भी बनते हैं। रोज एक दो सेटअप तो लाजमी बन जाते हैं छोटे टाइम फ्रेम्स पे M5 पे, M3 पे, M15 पे छोटे सेटअप्स बन जाते हैं छोटे टाइम फ्रेम पे। लेकिन जाहिर है अगर आप उसी टाइम फ्रेम पे मार्केट नहीं देख रहे हो तो फिर वो सेटअप आपसे निकल जाएगा। कुछ ट्रेड्स ऐसी होती हैं, कुछ सेटअप्स ऐसे होते हैं या कुछ टेस्ट ऐसे होते हैं कि जिन पे आपको तकरीबन हर वक्त ट्रेड मिल रही होती
है। ठीक है जी। अक्सर हाई हर हाई लो पे इन जगहों पे आपको ट्रेड्स मिल जाती हैं। उसमें एक आपको बताया था टू बार रिवर्सल वो अच्छी चीज़ है। टू बार रिवर्सल अगर आपको कंटिन्यूएशन के साथ ट्रेंड के साथ मिल जाता है तो वो बहुत अच्छी ट्रेड आपको देता है। फिर कल हमने पढ़ा था शेक आउट और अपसेस कैंडल। तो आज का जो टॉपिक है हमारा वो भी उससे रिलेटेड ही है। उससे मिलताजुलता टॉपिक है। उसी शेप की कैंडल तकरीबन मिलेगी। तो कल वाला भी आपका थोड़ा सा रिपीट हो जाएगा, रिवाइज हो जाएगा और आज
जो हमें नई चीज पढ़नी है वो भी इसमें शामिल हो जाएगी। कल हमने पढ़ा था मैं यहां पे लिख देता हूं। वैसे वो भी शेक आउट शेक आउट करना पड़ी थी कल और अब प्लस पढ़ा था। ठीक है जी। यह दो चीजें हमने कल पढ़ी थी। आज भी इससे मिलती जुलती चीज हमने पढ़नी है। वह है एफर्ट वर्सेस। अच्छा अब इनमें फर्क क्या है? पहले हम थोड़ा सा कल वाले को रिपीट करते हैं। आपको मैंने कल एक चीज बड़ी डिटेल से बताई थी कि हर कैंडल जो आप देख रहे होते हैं इसके नीचे बड़ी दिख
है। फॉर एग्जांपल ये आपके पास एक कोई ट्रेंड चल रहा है। ठीक है? बुलिश ट्रेंड चल रहा है आपके पास इस तरीके से। अब आपको यह नजर आ रहा है बड़ा क्लियर कि यह बुलिश ट्रेंड है। आपने देखना यह होता है कि ब्रेकअप स्ट्रक्चर किस-किस जगह पे होगा। अब यहां पे ब्रेकअप स्ट्रक्चर हुआ था इस जगह पे। तो ये आपको पता चल गया कि बुलिश ट्रेंड है। तो जब ब्रेकअप स्ट्रक्चर हो जाता है ना तो आपने कंफ्यूज नहीं होना कि इसका लो यहां पे है, यहां पे है, कहां पे है। आप देखें कि जब कोई
भी हाई ब्रेक हुआ है, आपके पास कोई भी हाई ब्रेक हुआ है, कोई भी विक ब्रेक हुई है, तो उससे पहले वो ब्रेक होने से पहले सबसे डीप लो कौन सा था? ये आपका सबसे डीप लो है। ठीक हो गया? तो, यह बहुत अच्छा पॉइंट ऑफ़ इंटरेस्ट है। अब, यह पॉइंट ऑफ़ इंटरेस्ट इसलिए भी अच्छा है कि एक तो, तो यहां पे इसने लिक्विडिटी क्रिएट की हुई है इस जगह पे और यह भी आपका पॉइंट ऑफ़ इंटरेस्ट अच्छा है। ठीक है? यह क्यों अच्छा क्योंकि स्ट्रक्चर लेवल है तो प्राइस यहां से भी उठ सकती है
और प्राइस नीचे आके यहां से भी उठ सकती है। तो कल जो आपने चीज़ पढ़ी थी वो भी दोनों जगहों पे वो साइंस बन सकते हैं। यहां भी बन सकता है और यहां भी बन सकता है। अब वो बेहतर कहां पे है? पहले उस पे बात कर लेते हैं। अब देखिए कल जो हमने पढ़ा था शेक आउट। पहले शेक आउट पे बात करते हैं। फिर इसी को हम इनवर्स कर लेंगे। इसमें ये आपको बताया था कि प्राइस जब नीचे आती हैं इस जगह पे पहले ड्रॉप आता है एक यानी रिट्रेसमेंट आती है। ठीक है? अच्छा
इस जगह पर रिट्रेसमेंट आने के बाद एक सपोर्ट बन सकती है। सपोर्ट बनने का मतलब क्या है कि बाय की एक कैंडल बन गई या दो बन गई। बेशक एक बन जाए, दो बन जाए। बेशक उन्होंने प्रीवियस सेल की कैंडल का हाई ब्रेक किया या नहीं किया ये चीज़ आपने इसमें नहीं देखनी। सिर्फ आपने देखना है कि एक सपोर्ट बन गई है। जब सपोर्ट बन गई तो आपने सपोर्ट के नीचे एक लाइन लगा दी कि यह आपकी सपोर्ट है। यहां से प्राइस उठ रही है। पर इसमें होता यह है कि प्राइस दोबारा नीचे आती है।
होना इसमें बाय ही होता है। लेकिन बाय होने से पहले प्राइसेस दोबारा नीचे आती हैं इस जगह पे। और यहां पे एक ऐसी कैंडल बना देती हैं जिसकी शेप कुछ इस तरह की होती है। ऐसे। ठीक है जी। यह सेल की कैंडल भी हो सकती है। यह बाय की कैंडल भी हो सकती है। और यह एक-एक दोनों कैंडल्स भी हो सकती हैं। इस तरह यानी मल्टीपल टाइम्स भी ये काम हो सकता है। ठीक हो गया? अच्छा इस तरह कम होता है। जैसे मैंने आपको बताया ना कि ये चीज़ लेकिन हो जाता है। दो दफा भी
तीन दफा भी प्राइस लो सेव कर सकती है। लेकिन आपने देखना यह है कि जो सबसे पहली कैंडल थी जैसे कि ये कैंडल है यह वाली सेल की कैंडल है ना इसने नीचे विक लगा दी है। अब जैसे इसका हाई ब्रेक होगा। पहले आपने बाय नहीं करना। जैसे इसका हाई ब्रेक हुआ यहां से आपने बाय कर लेना है। नीचे आपका इस जगह पे स्टॉप लॉस आ जाएगा। ठीक हो गया। तो, यह आपका टारगेट आ जाएगा। पहला कम से कम टारगेट। फिर प्राइस अपना ट्रेंड कंटिन्यू कर जाएगी। तो, यह आपको कल इसको ट्रेड करने का तरीका
बताया था। अब, यहां पे इसने सपोर्ट क्रिएट की। सपोर्ट क्रिएट करके उसी के लिक्विडिटी को स्वीप किया और फिर प्राइस बुलिश हो गई। तो, एक तरीका तो यह होता है। लेकिन, कई बार ऐसा भी हो जाता है कि प्राइस यहां पे कोई साइन नहीं बनाती। प्राइस आ जाती है नीचे। इस लो पे आ जाती है। ठीक है जी। अच्छा, अब यहां पे क्या होगा? सेम वही चीज़ होगी। प्राइसेस नीचे आएंगी। मज़द नीचे आएंगी। बल्कि हम रेड कैंडल से ही इसको बनाते हैं इस तरह। यहां पर आकर सपोर्ट क्रिएट करेंगे। यहां पर अगर सपोर्ट बन जाए
तो बहुत अच्छी बात है। ठीक है जी। सपोर्ट बन गई। अब दो तरह की लिक्विडिटीज इसमें इन्वॉल्व हो गई हैं। एक इन्वॉल्व हो गई है इस जगह पे जो लिक्विडिटी है। जो सपोर्ट बनी थी ना इस सपोर्ट में बाय की कैंडल्स आई हैं। तो यहां से बायरर्स एक्टिव हो जाते हैं। और दूसरी लिक्विडिटी होती है इसके जो एक्सटर्नल जो आपका स्ट्रक्चर लेवल था जो आपका कंफर्म हायर लो था। इस कंफर्म हायर लो की लिक्विडिटी भी यहां पे इन्वॉल्वड है। ठीक है? प्राइस ने उसको भी हिट करना है। तो यहां पे फिर एक ऐसी कैंडल बन
सकती है। चाहे वो बाय की कैंडल हो, चाहे वो सेल की कैंडल हो। इस तरीके से एक कैंडल बनती है जो कि एक स्ट्रिप करती है इसका लो। अब जैसे ही इस कैंडल के ऊपर एक और बाय की कैंडल क्लोज करेगी आप यहां से बाय कर सकते हैं। स्टॉप लॉस आपका इस जगह पर नीचे आ जाएगा। तो जो नीचे वाला पॉइंट ऑफ इंटरेस्ट है यह हमेशा ज्यादा बेहतर होता है। मुझे ज्यादा पसंद है। इसी वजह से पसंद है क्योंकि इस पे स्ट्रांग ट्रेड मिलती है। आपको प्राइस अपनी करेक्शन करती है। करेक्शन के बाद एक बड़ी
वेव आपको मिल जाती है। इसमें आपको बात समझ आ गई। कोई मुश्किल चीज नहीं है इसमें। अब इसको यह भी आपको बार-बार बता रहा हूं कि ये सेल की कैंडल और बाय की कैंडल दोनों कैंडल्स हो सकती हैं। किसी भी कैंडल से ये चीज बन सकती है। अब जरा इसको दूसरी तरीके से देखते हैं। स्ट्रक्चर को ऐसे ही बना रहने देते हैं। हम एक और तरीके से इसको देख लेते हैं। ये देखिए जी रिट्रेसमेंट आती है। ऐसे ऐसे दोबारा एक चीज़ तो आपको समझ आ गई। पीछे चीज़ समझाई है। अब यहां पे हम दोबारा वही
चीज़ बनाते हैं। रिट्रेसमेंट आ रही है। प्राइस नीचे ड्रॉप दे रही है। चलिए हम कहते हैं जी इस दफा नीचे आ गई प्राइस। हमारे इस वाले पॉइंट ऑफ इंटरेस्ट पे आ गई। जो पॉइंट ऑफ इंटरेस्ट हमारा नीचे था इस पे आ गई प्राइस। अब आखिरी कैंडल इसने बनाई सेल की। पहले सेल की एक कैंडल बना लेते हैं। ये सेल की कैंडल बन गई। ठीक हो गया जी। ये लें। अच्छा वॉल्यूम कोई भी हम इंक्लूड कर लेते हैं। चल ये वॉल्यूम आ गया था सेल की कैंडल में। इसी जगह पर एक और कैंडल बनती है बाय
की जो इसके नीचे वीक लगा लेती है जो आपको कल शेक आउट पढ़ाया था शेक आउट बन जाता है ठीक है आपको बताया था शेक आउट सेल की कैंडल बाय की कैंडल किसी में भी बन जाएगा लेकिन यहां पे जो शेक आउट बन रहा है ग्रीन कलर का बन रहा है इसने प्राइस ने नीचे एक वीक लगाई बड़ी और क्लोजिंग अपने अंदर इस जो प्रीवियस कैंडल थी इसकी बॉडी के अंदर क्लोजिंग कर दी ठीक है वॉल्यूम आ गया इसका यह पहली कैंडल से बड़ा वॉल्यूम आ गया आप लोग क्या चैट में बता सकते हैं कि
यह क्या चीज बनी है अभी किसी को आईडिया है यह क्या है लिक्विडिटी तो है ही बिल्कुल लिक्विडिटी तो है वो तो नजर आ रहा है बिल्कुल ठीक है चल जी जिन्होंने जवाब दिया है कि ये ईवीआर है यानी एफर्ट वर्सेस रिजल्ट जो चीज हमने यहां पे पढ़नी है आपको बताया था कि आज का हमारा टॉपिक ये है ये एफर्ट वर्सेस रिजल्ट बन गया अब चक्कर ये है कंफ्यूजन ये आ रही है कि अगर ये एफर्ट वर्सेस रिजल्ट है तो कल हमने क्या पढ़ा था ठीक है कल तो हमने पढ़ा था शेक आउट इसको हम
शेक आउट कह रहे थे तो आज हम एफर्ट वर्सेस रिजल्ट क्यों कह रहे हैं उसमें छोटा थोड़ा सा फर्क है वो फर्क समझ लें। फर्क ये है कि इस जगह पे जब सेल की कैंडल बनी तो नेक्स्ट कैंडल ने लिक्विडिटी स्विप की इस पूरे ज़ोन की भी और ये जो प्रीवियस कैंडल थी इसकी भी लिक्विडिटी स्वीप की। लिक्विडिटी स्वीप करने के बाद बड़े वॉल्यूम के साथ अंदर क्लोजिंग दे दी। अब हम जरा पिछली कैंडल्स का वॉल्यूम भी यहां पे आपको मैं डॉ करके दिखा देता हूं। पिछली कैंडल्स का वॉल्यूम है। जी चल ये वॉल्यूम हो
गया। ये वॉल्यूम आ गया। चलिए अब आप यह देख रहे हैं कि मुसलसल सेल के वॉल्यूम्स आ रहे हैं यानी रेड कलर के वॉल्यूम्स आ रहे हैं और मुसलसल प्राइस किधर जा रही है? प्राइस मुसलसल ड्रॉप दे रही है। तो सेल का वॉल्यूम आया प्राइस नीचे गिरी। सेलिंग हुई। फिर सेल का वॉल्यूम आया फिर प्राइस नीचे गिरी। फिर सेल का वॉल्यूम आया फिर प्राइस नीचे गिरी। यानी सेल का वॉल्यूम आता है, प्राइस नीचे आती जा रही है। अभी हमें कलर से तो नहीं पता। हमें तो नहीं पता किस कलर का वॉल्यूम सेल का है या
बाय का है। हमें तो बस ये पता है कि वॉल्यूम आता है प्राइस नीचे गिर जाती है। वॉल्यूम आता है प्राइस नीचे गिर जाती है। मतलब सेलिंग हो रही है। यहां पे भी एक वॉल्यूम आया। बड़ा वॉल्यूम आया। अगर छोटे वॉल्यूम के साथ प्राइस नीचे आई थी। छोटा वॉल्यूम था ना ये कंपेरेटिवली छोटा वॉल्यूम है। तो छोटे वॉल्यूम ने सेल की एक अच्छी स्टंग कैंडल बनाई थी। उसके बाद जो वॉल्यूम आ रहा है वो अगर यह सेल का वॉल्यूम था तो फिर एक और स्ट्रांग सेल की कैंडल बननी चाहिए थी ना। अगर यह वाला वॉल्यूम
भी सेल का ही था। यानी पिछले कैंडल में तो सेल का वॉल्यूम आया। सेलिंग हुई। अगर इस कैंडल में भी सेल का ही वॉल्यूम था तो प्राइस को कहां जाना चाहिए था? नीचे जाना चाहिए था मजीद। लेकिन प्राइस नीचे तो नहीं गई। बड़े वॉल्यूम के साथ प्राइस ने तो एक यू टर्न ले लिया। वापस मुड़ गई प्राइस तो तो इसको कहते हैं एफर्ट वर्सेस रिजल्ट। यानी एफर्ट जो लगी है और उसके अगेंस्ट रिजल्ट जो आ रहा है। एफर्ट इससे पहले जो लग रही थी वो सेल की एफर्ट्स लग रही थी। सेल इसको एफर्ट कहते हैं
ना वॉल्यूम को। एफर्ट हो रही है। ताकत लग रही है। पैसा लग रहा है। तो उसका रिजल्ट क्या आ रहा था? ऊपर सेल सेल सेल सेल सस सेल होती आ रही थी। लेकिन यहां पे आके एफर्ट तो और बड़ी लगी। पहले से बड़ी एफर्ट लगी है। लेकिन रिजल्ट पहले से डिफरेंट हो गया। पहले प्राइस नीचे आई थी। यहां पर प्राइस ने ऊपर जाना शुरू कर दिया। इसका मतलब क्या है कि यह एफर्ट वर्सेस रिजल्ट बन गया कि एफर्ट कुछ और लगी है। रिजल्ट कुछ और आया है। अच्छा यानी एफर्ट भी बदल गई है रिजल्ट भी
बदल गया। इस जगह पे आके एफर्ट और रिजल्ट दोनों चेंज हो गए हैं। एफर्ट बड़ी हो गई है पहले से और रिजल्ट पहले से उलट हो गया है। पहले सेल होती जा रही थी या बाय होना शुरू हो गई है। तो यहीं से आप इसको बाय कर लेते हैं। इसमें हाई ब्रेक होने की कोई शर्त नहीं है। शेक आउट में क्या शर्त थी कि शेक आउट लग गया। उसका हाई ब्रेक होगा तो आप बाय करेंगे। यही शर्त थी ना। इसमें ऐसी कोई शर्त नहीं है कि इसका हाई ब्रेक हो क्योंकि पिछले वॉल्यूम से बड़ा वॉल्यूम
आ गया है और प्राइस ने अपनी डायरेक्शन चेंज कर ली है। लिक्विडिटी भी स्वीप हो चुकी है। तो इसको कहते हैं एफर्ट वर्सेस रिजल्ट। इसमें आप इसी जगह से बाय करेंगे और आपका टारगेट जो है वो ट्रेंड के साथ यहां तक होगा। समझ आ गई? यह ट्रेंड के साथ का बता रहा हूं। तो कम से कम टारगेट हाई तक होना चाहिए। इसका हाई पे जाती है प्राइस दोबारा। अगर अगेंस्ट ट्रेंड ये चीज बन जाती है प्राइसेस तो नीचे आ रही हैं। यहां पे आके एफर्ट व रिजल्ट बन गया। यानी एक बन गई आपकी सेल की
कैंडल और नेक्स्ट प्राइस ने उसका लो स्वीप करने के बाद अंदर क्लोजिंग कर दी बॉडी के अंदर। ठीक है? पहली का वॉल्यूम था बड़ा और दूसरी का या जो भी वॉल्यूम था और दूसरी का वॉल्यूम उससे भी बड़ा आ गया। इसको कहते हैं एफर्ट पर्स रिजल्ट। फ़ौरन आपने बाय कर लेना है। लेकिन अब आपका टारगेट इस स्ट्रक्चर लेवल तक नहीं होगा। होगा क्योंकि यह अगेंस्ट सटन ट्रेड है। इसमें आपका जो मैक्सिमम मैक्सिमम नहीं जो इसमें आपका कंफर्म टारगेट होता है वो तो यह होता है कि जिस कैंडल में बना है ना फट बट रिजल्ट इसके
टॉप तक प्राइस आती है दोबारा यहां तक जरूर आती है। लेकिन यहीं पे अगर आप देखें इस जगह पे यहां पे इसका जो यह सपोर्ट थी तो सपोर्ट बिकम्स रेजिस्टेंस यह वाली चीज़ भी यहां पे बन सकती है। स्ट्रक्चर लेवल भी है। तो आपने बस यहां पे आके आउट हो जाना है। क्योंकि यह अगेंस्ट द ट्रेंड ट्रेड थी। इसका छोटा सा टारगेट होगा। होगा। जैसे मैं रोज़ बताता हूं कि अगेंस्ट अट ट्रेंड आपने टारगेट्स बिलकुल छोटे-छोटे लेने हैं। अगर वेदर ट्रेंड है यानी साइन ऑफ़ स्ट्रेंथ बन रहा है और प्राइस पहले ही बुलिश है तो
फिर आप इसको होल्ड कर सकते हैं बड़े टारगेट के लिए। अगर यह अगेंस्ट ट्रेंड है तो फिर आप छोटा सा टारगेट लेंगे और आप यहां से आउट हो जाएंगे। अभी तक जो मैंने यहां पे आपको खुद अपने हाथ से बना के समझाया है इसकी समझ आ गई है तो मुझे पहले चैट में बता दें कि आपको ये चीज़ क्लियर हुई है कि एफर्ट वर्सेस रिजल्ट में और शेक आउट में क्या फर्क है। मैं आपको एक बार इसमें छोटी सी बात एक और इंक्लूड कर देता हूं। वो यह है कि जब आपका शेक आउट लगता है
तो वो सेल का भी हो सकता है, बाय की कैंडल भी हो सकती है। दोनों कैंडल्स में से कोई एक कैंडल्स हो सकती है। लेकिन एफर्ट वर्सेस रिजल्ट में शर्त है कि अगर प्राइस साइन ऑफ़ स्ट्रेंथ बना रही है, नीचे गिरती है मार्केट में अगर यह एफर्ट वर्सेस रिजल्ट बना है, तो हमेशा वो बाय की कैंडल में ही बनेगा। तभी एफर्ट वर्सेस रिजल्ट बनेगा ना। यानी चीज़ उलट जानी चाहिए। शेक आउट में तो इस जगह पे आपको मैंने बताया कि सेल की कैंडल में बन जाए या बाय की कैंडल में बन जाए। बुलिश कैंडल में
बन जाए या बेयरिश कैंडल में बन जाए। एक ही बात है। लेकिन यहां पे एक बात नहीं है। प्राइस आई सेल की कैंडल के बाद बाय की कैंडल बननी चाहिए जो कि बड़ा वॉल्यूम शो करे। बड़े वॉल्यूम से बने। प्राइस लो स्वीप करे और क्लोजिंग अंदर दे मोमेंटम कैंडल के साथ। ठीक है? मोमेंटम से मुराद है कि रिक नीचे हो सकती है। ऊपर रिक नहीं आनी चाहिए। तो यहीं से आप बाय कर लेंगे। तो इसमें ये फर्क होता है कि इसमें बाय करते हुए आपने देखना है कि लाजमन अपोजिट कैंडल हो। यह सेल की कैंडल
थी तो लाजमन अगली कैंडल बाय की हो। बड़े वॉल्यूम के साथ डो स्लिप करके अंदर क्लोजिंग दे। तो यहां तक आपको अगर बात समझ आई है तो मुझे बताएं। फिर इससे अगला स्टेप आपको दिखाता हूं। बस इसमें और चीज कोई नहीं है। बस बड़े वॉल्यूम के साथ रिटर्न लेना है प्राइस ने और इसका कोई रोल नहीं है। साथ ही आप बाय कर लेंगे। लेकिन जिस तरह क्लाइमेट एक्शन बार की एक्यूरेसी होती है इसकी एक्यूरेसी उतनी नहीं है। लेकिन नॉर्मली ट्रेडिंग के लिए बड़ा अच्छा है ये रिजल्ट आपको बहुत अच्छा देगी फिर भी। आफ्टर शेक आउट
मोमेंटम कैंडल होना जरूरी है। शेक आउट तो उसमें बनेगा ही नहीं ना। हां अगर शेक आउट का क्वेश्चन पूछ रहे हैं तो शेक आउट के बाद मोमेंटम कैंडल जरूरी है। वो तो बताया जो आपको है फैसल खान को नहीं समझ आई। आप बताएं क्या इसमें समझ नहीं आया। टाइम फ्रेम वाइज कितने पिप्स लेने हैं अगर यह तो उसकी बातें हैं सारी रिस्क मैनेजमेंट की फुल स्क्रीन वाला अभी नहीं चल रहा है ना उसमें वो कोर्स लीक हो रहा है इसलिए अभी उसको थोड़ा सा स्टेट किया है थोड़े दिन बाद वो फुल स्क्रीन पे कर देंगे
अगर शेक आउट का वॉल्यूम 80% 90% हो तो भी ईवीआर होगा 890% पे पहले हम कर लेते थे ट्रेड लेकिन आप कोशिश करें कि बड़े वॉल्यूम ही आपको मिले मैसेज बहुत ज्यादा आ गए हैं अगर शेक आउट का पूछ रहे हैं कि वॉल्यूम 80 90% हो तो भी ईवीआर होगा वो एफर्ट वर्सेस रिजल्ट ही लेकिन बड़ा होना चाहिए ये पहले हम 70% पे भी कर लेते थे। यानी ये वॉल्यूम अगर 70% यहां तक भी बाय का आ गया फिर भी बाय कर सकते हैं आप। ये शुरू के जो बैचेस थे लेकिन इसकी एक्यूरेसी कम है।
जरा इसकी जो अब पढ़ा रहा हूं इसकी एक्यूरेसी बहुत ज्यादा है। ठीक है? इसमें आप अगर बड़े वॉल्यूम के साथ देखेंगे तो बहुत अच्छी ट्रेड आपको मिलेगी। क्लोज अंदर होना लाजमी है। जी बिल्कुल लाजमी है। जी ना होना लाजमी है। तो मैं कहता कि लाजमी नहीं है। अंदर ही क्लोज होगी तो वह बनेगा ना। बाय की कैंडल तो बाहर बन ही नहीं सकती। सेल की कैंडल के नीचे बाय की कैंडल कैसे बन सकती है? नीचे अंदर ही क्लोज करेगी ना उस पे यह तो लाजमी है। अच्छा जी कुछ लोगों ने नो का एक आधा और
मैसेज है। वो कह रहे हैं कि नहीं समझ आई। रिपीट ना किया करें ना। एक बार आपने कर दिया तो समझ आ गई यार। रिपीट क्वेश्चन करेंगे तो फिर मैं क्वेश्चन लेना ही छोड़ दूंगा यहां पे मैसेज में। रिपीट ना करें। एक-एक बार कर दिया। मैं सब क्वेश्चन देखता हूं क्या लिखा हुआ है। शेक आउट और एफर्ट वर्सेस रिजल्ट में थोड़ा डिफरेंस बता दूं। थोड़ा डिफरेंस नहीं ज्यादा डिफरेंस बता दिया है कि एक तो शेक आउट में फर्क ये होता है कि शेक आउट किसी भी कैंडल में बन सकता है। सेल की कैंडल भी हो
सकती है, बाय की भी हो सकती है। लेकिन एफर्ट वर्सेस रिजल्ट अगर आप बाय करने लगे हैं तो लाजमीन बाय की कैंडल पे ही होगा। बनेगी बाय की कैंडल बड़े वॉल्यूम के साथ। ठीक है? तभी आपने करना है। अगर सेल इनवर्टेड हैमर हो और बाद में ग्रीन। सेल इनवर्टेड हैमर हैमर हो बाद में ग्रीन हो फिर भी। ठीक है? यानी सेल अगर आपके पास यहां बन गई है। ऐसे कैंडल बन गई है तो शर्त क्या है कि सेल की कैंडल के बाद बाय की कैंडल बनी चाहिए बड़े वॉल्यूम के साथ। बस यह शर्त है। मोमेंटम
कैंडल होनी चाहिए। अच्छा जिनको समझ नहीं आई क्या पॉइंट समझ नहीं आया। वो मैसेज कर लें। दो तीन फैसल है। एक और इफत है। आप लोगों को जो चीज समझ नहीं आई ना उसके बारे में क्वेश्चन करें कि आपको क्या पॉइंट समझ नहीं आया। अच्छा क्वेश्चन सर अगर स्माल टाइम फ्रेम में चेंज कर तो फिर हायर लो। हायर लो तो कंफर्म नहीं आप मानेंगे ना मार्केट में आपको हाई पता होना चाहिए ऊपर जाती मार्केट में हायर लो पता होना चाहिए कंफर्म क्फ्यूजन बिटवीन शेक आउट एंड ईवीआर ये मैंने दो तीन दफा बता दिया जी फिर
आप रिकॉर्डिंग देखें शायद आप लेट आए हैं मैंने दो तीन दफा ये डिफरेंस बता दिया रिपीट भी कर दिया है ठीक है जी ईवीआर में लिक्विड लेना लाजमी है जी लाजमी है इसलिए बताया कि प्राइस नीचे स्वीप करेगा स्वीप करके अंदर जाएगी ईवीआर एंड लास्ट लेक्चर में डिफरेंस यह भी बता चुका हूं। जी दोबारा रिकॉर्ड है। आप या तो लेट आए हैं या फिर ध्यान से आपने सुना नहीं है। आप दो बंदों ने डिफरेंस पहले तो बताया है बार-बार बता रहा हूं कि शेक आउट किसी भी कलर का होता है। ईवीआर किसी भी कलर का
नहीं होता। अगर बाय का ईवीआर बन रहा है तो वो हमेशा ग्रीन होगा। सेल वाले में हमेशा रेड होगा। ठीक है? एक तो यह डिफरेंस है। दूसरा डिफरेंस क्या है कि उसमें आप वॉल्यूम नहीं देखते ज्यादा। उसमें आपने देखना है कि शेक आउट लगा। इस तरह शेक आउट लग गया। चलिए मैं कैंडल ही बना देता हूं। उसमें आप क्या देखते थे? कल कल क्या पढ़ाया था कि यह कोई सपोर्ट का जोन है। ठीक है जी। यहां पर आपके पास यह शेक आउट लग गया। तो शेक आउट का हाई ब्रेक होना जरूरी है। इसके ऊपर एक
और कैंडल का ब्रेक होना भी जरूरी है। इसका वॉल्यूम थोड़ा सा बड़ा होता था रेंज से। कल यह बात पाई थी। रेंज से हल्काफुल्का बड़ा वॉल्यूम होगा। इसके ऊपर एक कैंडल और ब्रेक होगी तो आप बाय करेंगे। समझ आ गई? आज ऐसी मैंने कोई बात नहीं की। आज आपको यह बताया कि जो कैंडल एक कैंडल बन गई। प्राइस नीचे आ रही होगी। यह देखें प्राइस इस तरीके से नीचे आ रही होगी। तो सेल के बाद लाजमन बाय की कैंडल बनेगी ऐसे और सेल का वॉल्यूम छोटा होगा और बाय का वॉल्यूम बड़ा होगा। इसमें आपको दोबारा
हाई ब्रेक देखने की जरूरत नहीं है। स्ट्रेट अवे यहीं से बाय हो जाएगा। फ़ौरन से बाय है। नीचे आपका स्टॉप लॉस है। तो बस इतना सा फर्क है और कोई खास फर्क नहीं है। वॉल्यूम का फर्क है बस। अभी एग्जांपल्स देखते हैं। आपको समझ आ जाएगी और भी। चल पहले बाय के एग्जांपल्स ही देखते हैं। छोड़ें सेल को। बाय के एग्जांपल्स देखते हैं। फिर आपको आगे दोबारा समझाता हूं। में ये देखें बाय के एग्जांपल्स अब ट्रेंड बुलिश होना चाहिए। बुलिश ट्रेंड होगा तो आप साइन ऑफ़ ट्रेंड देखेंगे। ठीक है? चलिए जी। अब यहां पे देखें
इस जगह पे इस एग्जांपल पे बात करते हैं इस एग्जांपल पे। हां जी। प्राइसेस आ रही है नीचे। एक रिट्रेसमेंट की वेव आ रही है। पहले इंपल्स वेव लग चुकी है। पीछे। इंपल्स लग चुकी है। अभी रिट्रेसमेंट आ रही है। अभी आपका पॉइंट ऑफ़ इंटरेस्ट भी आ गया। पहला पॉइंट ऑफ़ इंटरेस्ट यही बताया आपको स्ट्रक्चर लेवल होता है। यहां पे आके इस जगह पे क्या बन रहा है? यह है जी सेल की कैंडल। ठीक है? पहले एक वॉल्यूम आया। ये देखिए ये वॉल्यूम था। उसमें ये सेल की कैंडल बनी। फिर वॉल्यूम आया छोटा। फिर सेल
की कैंडल बनी। अगला वॉल्यूम बड़ा आ गया है। अगला वॉल्यूम उससे भी बड़ा है। लेकिन प्राइस ने लो स्वीप किया इस कैंडल का और अंदर क्लोजिंग दे दी। ठीक है? और ये कहां पे बन रहा है? एक तो स्ट्रक्चर लेवल है। दूसरा ये आखिरी लिक्विडिटी लेवल ये था। यह स्पॉट बन रही है ना यहां पे। यह आखिर लिक्विड लेवल है। इसको मैं जरा क्लियर करके लगा देता हूं। लाइन ठहरे। अब चेक करें। हां जी। अब चेक करें क्या बन रहा है। आखरी आपके लिक्विड यही सपोर्ट बनी है ना आखरी। उसके नीचे तो फिर ये है।
इस जगह पे जो आपका स्ट्रक्चर लेवल है उस पे यही सपोर्ट है। तो प्राइस नीचे आई है। नीचे आते हुए मार्केट में सेल के वॉल्यूम्स आ रहे हैं। अब यहां पे एक कैंडल बनी है जिसने लो स्वीप किया और क्लोजिंग अंदर दे दी। और वो कैंडल का वॉल्यूम यह है। ये वाला। अब देखिए पिछला वॉल्यूम छोटा था। उससे पिछला वॉल्यूम उससे भी छोटा था। तो जब लो वॉल्यूम से इतनी बड़ी-बड़ी कैंडल्स बनती हुई आ रही है सेल की तो उसके बाद एक और बड़ा वॉल्यूम लग गया। पिछली लो वॉल्यूम से बड़ा वॉल्यूम लग गया। और
इस बड़े वॉल्यूम ने क्या किया? स्वीप करने के बाद क्लोजिंग अंदर दे दी। तो अगर यह भी सेल का वॉल्यूम होता जिस तरह पिछले सेल के वॉल्यूम थे तो क्लोजिंग कहां हो रही थी? नीचे हो रही थी। प्राइस नीचे आ रही थी। फिर सेल का वॉल्यूम आया। फिर प्राइस नीचे आ गई। अगर यह वाला वॉल्यूम भी सेल का था, तो फिर एक और सेल की कैंडल बननी चाहिए थी ना। तो इसी में तो हमें क्लियर नजर आ रहा है कि बाय का वॉल्यूम है। क्योंकि इस वॉल्यूम के बाद बाइंग आई है फ़ौरन लो सेप करके
बाइंग आ गई है। तो यहीं से आपकी बाय है। नीचे आपका स्टॉप लॉस है और ट्रेंड के साथ है क्योंकि ट्रेड तो फिर इसका टारगेट आपका बड़ा होगा। कम से कम यहां तक तो आप टारगेट लेंगे ना यहां तक। उसके बाद फिर आपके नेक्स्ट टारगेट्स चलेंगे। यह तो थी आपकी पहली एग्जांपल बाय की। दोबारा सेम एग्जांपल फिर देखें। अब यहां पे क्या बन रहा है यह? चलिए यहां पे तो वो चीज़ नहीं बन रही। आगे देखते हैं। यहां पे बन रही है। यहां पे दरमियान में कोई भी नहीं बन रही। कहीं पे भी लो स्वीप
होके प्राइस अंदर नहीं आई। बाकी चीज़ें बन रही हैं। और एविडेंस बन रहे हैं। लेकिन एफर्ट से रिजल्ट नहीं बना। वो यहां पे बन रहा है। ये लें। अब यहां पे इस जगह पे क्या चीज है? कितना बड़ा सेल का वॉल्यूम आया है। ठीक है? सेल का बड़ा वॉल्यूम आया। प्राइस नीचे आई। अगला वॉल्यूम सेम आ गया है। अगर बराबर के आ जाएंगे ना ये ये वो क्वेश्चन आ गया है कि जिन्होंने पूछा था कि अगर 90% या 80% वॉल्यूम आ जाता है तो फिर हमें बाय करना चाहिए कि नहीं करना चाहिए? तो मैंने कहा
कि पहले हम कर लेते थे। अभी जो वॉल्यूम्स आए हैं ना ये बराबर के वॉल्यूम्स कंसीडर होंगे। ठीक है? तो बराबर के वॉल्यूम पे भी आप कर सकते हैं। यानी एक बड़ा वॉल्यूम आया। नेक्स्ट सेम उससे थोड़ा सा छोटा 2 4% छोटा या 2 4% बड़ा है। यह भी बराबर काउंट होगा। यह भी बराबर काउंट होगा। यानी एक वॉल्यूम यह आ गया और एक वॉल्यूम यह आ गया तो ये भी बराबर काउंट हो रहे हैं। अगर एक वॉल्यूम ये है और दूसरा वॉल्यूम ये है तो ये भी बराबर ही काउंट होंगे। ठीक है? एक जैसे
वॉल्यूम है ना? अल्ट्रा हाई वॉल्यूम्स हैं दोनों। तो एक सेल्फी कैंडल में वॉल्यूम आया। नेक्स्ट कैंडल ने लोटव किया और डायरेक्शन चेंज कर ली। बस यहां से बाय है। नीचे स्टॉप लॉस है। ये ऐसा एविडेंस है जो आपको बार-बार ट्रेड देता है। छोटे टाइम फ्रेम पे खास तौर पे तो 15 मिनट का दिखा रहा हूं ना। छोटे टाइम फ्रेम पर 1 मिनट पर 3 मिनट पर बार-बार बनते रहते हैं। और भी पीछे कोई एग्जांपल हम देख लेते हैं। यह देखें अब यहां पे। ठीक है? अब ये मैं आपको ये बता रहा हूं ना कि हम
पहले 70% पे भी कर लेते थे कि ये बड़ा वॉल्यूम आया। अगर 70% तक दोबारा बड़ा वॉल्यूम आ जाता है और प्राइस क्लोजिंग अंदर कर देती है। यह वाली कैंडल नहीं चलेगी। मोमेंटम कैंडल नहीं है। लेकिन ये चलेगी। ठीक हो गया? कि अगर सेल के बाद अल्ट्रा हाई वॉल्यूम के बाद 70% तक बड़ा वॉल्यूम आ जाए उसके 70% तक और प्राइस लो स्वीप करके अंदर चली जाए मोमेंटम कैंडल के साथ तो आप बाय कर सकते हैं। लेकिन ये थोड़ी सी डेंजरस है। इसकी एक्यूरेसी बहुत अच्छी नहीं है। 70% तक देगी आपको। लेकिन जो मैं आपको
तरीका बता रहा हूं अगर आप वो करेंगे तो बहुत अच्छी एक्यूरेसी मिलेगी। अब यहां पे देखें ये अब ये बड़े वॉल्यूम्स आ रहे थे। इस कैंडल में बड़ा वॉल्यूम है। देखें। फिर बड़ा वॉल्यूम है। बड़ा वॉल्यूम है। बड़ा वॉल्यूम है। एक तो वॉल्यूम्स बड़े आ रहे हैं। प्राइस सेल में नहीं जा रही। तो यह वॉल्यूम कहां जा रहे हैं? यानी प्राइस तो वहीं की व खड़ी है। यह देखिए डॉजेस बनते जा रहे हैं और वॉल्यूम इतने बड़े-बड़े आ रहे हैं। तो फिर यह क्या हो रहा है? यह सिर्फ बाइंग हो रही है। जमा हो रहा
है सारा वॉल्यूम बाय के लिए। ठीक है? कंफर्म कहां पे हुआ? कंफर्म यहां पे हो गया। देखें ये सेल के वॉल्यूम थे सारे। ये चारों कैंडल सेल की हैं। उसके फ़ौरन बाद प्राइस ने इन सबका लो स्वीप किया। इकट्ठा एक ही बार। इन सब कैंडल्स का लो स्वीप किया और ऊपर क्लोजिंग दे दिया अंदर। यह देखिए बड़े वॉल्यूम के साथ। तो बस यह बाय है। यहां से पता चल गया बाइंग स्टार्ट हो रही है। नीचे आपका स्टॉप लॉस आ जाएगा। यह आपका टारगेट आ जाएगा पहला कम से कम। तो पहला टारगेट तो आपको एक ही
कैंडल ने दे दिया। बाकी तो बोनस है बाद में। समझ आ गई? तो आपको मेन आपको बात पता क्या चल रही है? पहली चीज तो आपको ये पता चल रही है कि ट्रेंड होना चाहिए बुलिश। तभी आप साइन ऑफ़ स्ट्रेंथ देखेंगे। दूसरी चीज यह पता चल रही है कि प्राइस नीचे आती है, गिरती जा रही है, गिरती जा रही है। सेल की कैंडल्स आ रही हैं। वॉल्यूम आते जा रहे हैं। इस तरह सेल के वॉल्यूम आते जा रहे हैं। अचानक से प्राइस किसी पॉइंट ऑफ इंटरेस्ट पे आके किसी अच्छी जगह पे आके जैसे ये पॉइंट
ऑफ इंटरेस्ट है या यह पॉइंट ऑफ इंटरेस्ट है। यहां पे आके प्राइस लो स्वीप करती है और क्लोजिंग अंदर कर देती है। लो स्वीप करती है। क्लोजिंग अंदर करती है और वॉल्यूम बड़ा आ जाता है पहले से। तो, यह बाय का साइन है। अगर आप ट्रेंड के साथ बैठे हुए हैं, तो यहीं से आपने बाय करना है। नीचे आपका स्टॉप लॉस होगा और यह आपका पहला टीपी होगा। जो भी स्ट्रक्चर हाई आपके लेफ्ट साइड पर आ रहा है वह आपका पैरा टीपी होगा। अब मुझे यह बताएं कि इस चीज की अब समझ आई है कि
अभी भी समझ नहीं आई। चैट में बता दें कि अभी चीज क्लियर हुई है कुछ? जब लाइव में बैठेंगे चीजें रोज देखेंगे तो और चीजें समझ आएंगी आपको आहिस्ता-आहिस्ता। ठीक हो गया। इफ साहब बताएं आपको समझ। अच्छा चल ठीक है। आपका मैसेज आ गया। फैसल खान का मैसेज आया कि नहीं आया? पता नहीं। आ गया जी। ठीक है। बस ये फर्क होता है जी। ठीक है? बाकी इसमें कोई ऐसी बड़ी चीज डिफरेंस वाली नहीं है। अच्छा आगे क्या है? जी जिस कैंडल को स्वीप करके बड़े वॉल्यूम के साथ ईवीआर बना उसकी लिक्विडिटी तो ले ली
लेकिन क्या साथ किसी अलग से सपोर्ट की लिक्विडिटी लेना भी लाजमी है? नहीं। जिस कैंडल जो सेल की कैंडल थी ना उसकी ले ली। इतना भी काफी है। लेकिन अगर एक्सटर्नल की भी ले ली है। किसी और सपोर्ट लेवल की लिक्विडिटी ले ले तो वह तो सोने पे सो गया ना। ना वो तो और स्टंग हो गया। क्वेश्चन मैं बता देता हूं। जी यहां पे इनका क्या है। एक मिनट ठहरे। यह बात बाकी लोग भी समझ लें कि अगर प्राइस यह चीज चला रही है। इस तरह चल रही है प्राइस। ठीक है? यह अब इसमें
दो तरीके हैं। एक तरीका तो यह है कि प्राइस ने यहां से ड्रॉप देना शुरू किया। यह नीचे आना शुरू किया। अब यह वॉल्यूम आ रहे हैं सेल के इस तरह। चलिए तीन कैंडल्स में वॉल्यूम आ गए। यहां पे प्राइस इसी कैंडल की लिक्विडिटी सेव करती है ऐसे और क्लोजिंग देती है अंदर। ऊपर क्लोजिंग दे देती है। वॉल्यूम आ जाता है बड़ा। तो, यह ट्रेडेबल है। यहां से आप ट्रेड करेंगे, नीचे स्टॉप लॉस लगाएंगे। यहां तक टारगेट लेंगे। एक चीज़। अब एक सिनेरियो और बन सकता है। इसी के साथ पैरेलल मैं बना देता हूं। वह
यह है कि प्राइस यहां पे नहीं रुकती। प्राइस आती रहती है नीचे। यह यह मैं अलग बना रहा हूं। यह यहां तक अलग था। अब आगे मैं अलग बना रहा हूं। दोबारा यहां से स्टार्ट कर रहा हूं। प्राइस नीचे आती है। अब इस पॉइंट ऑफ इंटरेस्ट पे नहीं रुकती। अब प्राइस आती है इस नीचे वाले पॉइंट ऑफ इंटरेस्ट पे। यहां पे आती है। ये ठीक हो गया जी। सेल की कैंडल बन गई। अब यहां पे एक बाय की कैंडल दोबारा वही काम करती है। वॉल्यूम के साथ क्लोजिंग अंदर कर देती है। क्लोजिंग अंदर करती है
इसका लोप करने के बाद। और वॉल्यूम्स जो हैं वह ऐसे आते हैं कि यह सेल के वॉल्यूम आ रहे थे बड़े-बड़े छोटे बड़े जैसे भी थे। और यहां पे बाय की कैंडल में एक बहुत बड़ा वॉल्यूम आ गया ऐसे और उसने लो स्वीप की अंदर क्लोजिंग कर दी। अब इसने क्या किया? एक तो इस वाली कैंडल की लिक्विडिटी ली जो आखिरी सेल की कैंडल थी। एक तो इसकी लिक्विडिटी शीप कर ली और एक और लिक्विडिटी स्वीप की जो कि हमारे कंफर्म हायर लो की लिक्विडिटी थी वो भी स्वीप कर ली। तो दो लिक्विडिटीज़ इकट्ठी हो
गई। तो ये ज्यादा स्ट्रांग ट्रेड है। इसको अगर आप फाइव स्टार कहेंगे तो ये थ्री स्टार है। ये थ्री स्टार ट्रेड है। ठीक है? यानी कम ताकतवर है। और ये बहुत ज्यादा ताकतवर है। उसकी वजह क्या क्योंकि इसने एक्सटर्नल लिक्विडिटी को भी हंट कर लिया है। ठीक हो गया? तो, यह फर्क है इन दोनों सेटअप्स में। इस पे मैं हाई रिस्क लूंगा। इस पे मैं थोड़ा कम रिस्क लूंगा। अब यहां पे आपको मैंने बताया कि गिरती हुई मार्केट में आपको सेल के वॉल्यूम बड़े देखने हैं। सेल का बड़ा वॉल्यूम आएगा। अल्ट्रा हाई वॉल्यूम तो क्लाइमेटिक
बार बन जाएगी। उसका लो ब्रेक होगा। फिर हाई ब्रेक होगा। आप बाय कर लेंगे। यह हाई प्रोबेबिलिटी सेटअप है। लेकिन यहां पे देखें तो हाई वॉल्यूम सेल में तो नहीं आया। बाय का हाई वॉल्यूम आ गया है। लेकिन काम उसने भी वही किया है। लिक्विडिटी कर ली इसकी भी और इसमें स्ट्रक्चर की भी लिक्विडिटी की क्लोजिंग अंदर कर दी। मोमेंटम के साथ वॉल्यूम बड़ा हो गया। तो फिर यहां से बाय कर लें। तो अब आपके पास दो ऑप्शन आ गए हैं। बड़ा वॉल्यूम आ जाए गिरती हुई मार्केट में सेल का तो भी आप बाय करेंगे
और गिरती हुई मार्केट में लिक्विड रिसीव करके बाय का बहुत बड़ा वॉल्यूम आ गया तब भी आप बाय कर सकते हैं। ठीक है? दोनों ऑप्शन आपके पास हो गए हैं। अब यहां पे क्लाइमेटिक एक्शन बार तो कोई नहीं बनी। इस जगह पे आप देखें कि यहां पे क्लाइमेटिक एक्शन बार तो नहीं बनी ना। देखें सेल के वॉल्यूम तो छोटे हैं। तो कौन सा वॉल्यूम सबसे बड़ा आ गया? यह वाला वॉल्यूम सबसे बड़ा आ गया। यह वाला बस यह आपको बाय बता रहा है। यहीं से इसी जगह से बाय है। नीचे आपका स्टॉप लॉस आ जाएगा।
इनकी एक्यूरेसी उतनी अच्छी नहीं है जितनी क्लेम एक्शन बाहर की होती है। मैं बार-बार आपको बता रहा हूं। वैसे इस पे आपने रिस्क कम रखना होता है जरा। अच्छा अब हम चलते हैं जरा सेल साइड पे। अब कल आपको मैंने पढ़ाया था अपथस्ट। अपथस्ट कैसे पढ़ाया था आपको? अप्स आपको पढ़ाया था कि प्राइसेस नीचे हैं, डाउन ट्रेंड में है। ठीक है जी। अब पॉइंट ऑफ इंटरेस्ट कौन सा है? एक ये पॉइंट ऑफ इंटरेस्ट है और एक ये पॉइंट ऑफ इंटरेस्ट है। प्राइस वापस आती है अपने पॉइंट ऑफ इंटरेस्ट पे। ऐसे यह पॉइंट ऑफ इंटरेस्ट है।
तो, यहां पे क्या बनता था? यहां पे कौन सा साइन आपको बताया था कि बनेगा? यहां पे आपको बताया था कि शेक आउट बनेगा। शेक आउट कैसे बनता है? शेक आउट बनता है बाय की या सेल की किसी भी एक ऐसी कैंडल से। ठीक हो गया? बाय की या सेल की किसी भी ऐसी कैंडल से। अब इसमें वॉल्यूम कैसा आता है? निष्पतन बड़ा वॉल्यूम आता है। क्यों? क्योंकि सारे लिक्विडिटी स्वीप किए। यहां पे जिन लोगों के स्टॉप लॉसेस थे इन जगहों पे जिन्होंने कल की क्लास नहीं देखी वो लाजमी देखिएगा क्योंकि फिर ये आपको समझ
आएगी। जिनके यहां पे स्टॉप लॉसेस थे प्राइस ने उनको स्वीप किया। ये सेल की कैंडल में भी बन सकता है और ये किसी बाय की कैंडल में भी बन सकता है। ऐसे और एक-एक दोनों कैंडल्स भी आ सकती हैं। एक सेल की आ गई, एक बाय की आ गई। यह भी हो सकता है। ठीक हो गया? अब इनके वॉल्यूम कैसे होते हैं? निस्बतन बड़े वॉल्यूम होते हैं। अच्छा इसको ट्रेड कैसे करने का तरीका बताया था। जैसे ही मोमेंटम कैंडल के साथ इनका लो ब्रेक होगा, छोटे वॉल्यूम से हो जाए तो और अच्छी बात है। लेकिन
बड़े से भी हो जाए तो आप कर सकते हैं क्योंकि लिक्विड इनवर्ब हो गई है। ठीक है? तो यहां से आप सेल करेंगे। ऊपर आप स्टॉप लॉस लगाएंगे। ये आपकी ट्रेड चल पड़ेगी ट्रेंड के साथ। लेकिन दूसरी चीज़ जो आज हमने पढ़नी है वो वही है जो आज हम पढ़ रहे हैं वो है एफर्ट वर्सेस रिजल्ट। एफर्ट वर्सेस रिजल्ट अब कैसे बनेगा? उसको समझें। एफर्ट वर्सेस रिजल्ट ऐसे बनेगा कि जब प्राइस यहां से ऊपर जा रही थी ना अपने रेजिस्टेंस लेवल की तरफ या अपने पॉइंट ऑफ़ इंटरेस्ट की तरफ। तो इस तरीके से जा रही
थी। मैं यहां पे बना के दिखाता हूं। ऐसे जाएगी प्राइस ऊपर। ये प्राइस ऊपर आ गई। ठीक है जी। चल एक कैंडल कम कर देते हैं। ये ले जी। ये चली गई ऊपर। आ गई अपने पॉइंट पे। यहां पे अब क्या होगा? ये बाय की कैंडल थी। ठीक है जी। वॉल्यूम्स आपको इस तरह शो होंगे इसके। एक दो तीन चार। चलो जी। चार वॉल्यूम। चार कैंडल है। चार वॉल्यूम शो हो गया। प्राइस अपने पॉइंट ऑफ इंटरेस्ट पे आ गई। यहां पे एक सेल की कैंडल बनेगी इस तरीके से जो इसका हाई स्लीप करेगी क्लोजिंग अंदर
देगी बिल्कुल शेक आउट की तरह शेक आउट भी ऐसे ही दिखाया था लेकिन इसमें और शेक शेक आउट नहीं अप थ्रस्ट कल अप्रस्ट पढ़ा था ना आपने तो अप थ्रस्ट भी ऐसे ही बना के दिखाया था लेकिन अप थ्रस्ट में शर्त क्या बताई थी कि प्राइस इसका लो ब्रेक करे दोबारा ठीक है लेकिन इसमें एक और ऑप्शन है एफर्ट वर्सेस रिजल्ट का वो क्या है कि बाय की कैंडल में जितना वॉल्यूम आया था इससे बड़ा वॉल्यूम सेल की कैंडल में आ जाए हाई स्वीप हो और सेल की कैंडल में उससे बड़ा वॉल्यूम आ जाए तो
अब आप यहीं से सेल कर सकते हैं स्ट्रेट अवे यहीं से सेलिंग है कोई बिल क्रिएट करने की जरूरत नहीं है। जैसे ही यह बनेगा बड़े वॉल्यूम से स्वीप करके अंदर क्लोजिंग देगा। यानी आप यह समझ लें कि है यह अपस्ट कैंडल ही। बस अगर यह सेल की है तो आप साथ ही सेल कर दें। अगर यह बाय में बनी है तो लो ब्रेक होने का वेट कर लें। इस पॉइंट को दोबारा समझे और आसान हो जाएगी चीज। ये देखें। यहां पे क्या देखना है आपने? शेक आउट देखना है ना? तो शेक आउट अगर तो
बन गया आपके पास बाय की कैंडल में ही। ऐसे ये लें। यह शेक आउट बाय की कैंडल में बन गया। वॉल्यूम बेशक बड़ा है जैसा भी है क्योंकि शेक आउट का वॉल्यूम थोड़ा बड़ा होता है। अब क्योंकि बाय की कैंडल में है इसलिए आपको एक सेल की कैंडल का वेट करना है कि लो ब्रेक करे आप सेल कर दें। समझ आ गई? ये तो बन गया शेक अपथ्रस्ट जो कल पढ़ा था हमने। अब अगर यह बाय की कैंडल में नहीं बन रहा। अपथ्रस्ट बाय की कैंडल में नहीं बन रहा बल्कि सेल की कैंडल में बन
रहा है। ऐसे और वॉल्यूम पहले से भी बड़े हो गए हैं। तो अब ये क्या कहलाएगा? एफर्ट वर्सेस रिजल्ट। क्योंकि सारी एफर्ट हो रही थी बाय की। वॉल्यूम आता है बाय की कैंडल फिर वॉल्यूम आता है फिर बाय की कैंडल। लेकिन यहां पे वॉल्यूम तो और बड़ा आ गया लेकिन प्राइस ने बाय की कैंडल बनाने के लिए सेल की कैंडल बना ली। तो इसका मतलब क्या है? ये जो सबसे बड़ा वॉल्यूम था ये सेल का वॉल्यूम है। तो जो सबसे बड़ा वॉल्यूम होगा उसी तरह प्राइस जाएगी ना अब। ठीक है? क्योंकि सबसे बड़ी एफर्ट अब
सेल की आ गई है। तो जैसे ही ये कैंडल बनती है आप सेल करें और ये सेल की आपकी ट्रेड चल पड़ी। इसकी एग्जांपल देखें आपको फिर समझ आ जाएगी। ये मैंने आपको बाय की दिखाई थी। सेल के ये देखें। यह देखें इसमें सपोर्ट आपकी रेजिस्टेंस कहां बन रही है? यह आपका रेजिस्टेंस लेवल बन रहा है। यह यही बन रहा है रेजिस्टेंस लेवल। अब हुआ क्या कि रेजिस्टेंस लेवल के ऊपर एक अपथ्रेस्ट बन गया। अपसेस्ट मैंने आपको कहा था सेल का भी हो सकता है, बाय का भी हो सकता है। तो ये अपशस्ट बन गया।
लेकिन अगर आप इस अपशस्ट का वॉल्यूम देखें तो बहुत बड़ा है। ये देखें ये वॉल्यूम आ रहा है अपथस्ट का ये वाला। तो जब अपशस्ट का वॉल्यूम बड़ा बन जाता है। सेल का अपसेस्ट बने तो आपको मैंने बताया साथ ही सेल कर दें। वॉल्यूम पहले से बड़ा आ गया और अपथस्ट सेल का बन गया। यही एफर्ट बट रिजल्ट है ना कि ये इतना सा वॉल्यूम आया छोटा वॉल्यूम आया और इतनी स्ट्रांग बाय की कैंडल बनी तो जब उससे डबल वॉल्यूम आ रहा है तो अगर यह बाय का ही वॉल्यूम था तो क्या बननी चाहिए थी
बाय की कैंडल बनी चाहिए थी स्टंग कैंडल बाय की बनी चाहिए थी लेकिन बाय की कैंडल तो नहीं बनी तो जब बाय की कैंडल नहीं बनी और सेल की कैंडल बन गई तो इसका मतलब है कि ये सारा स्ट्रांग जितना भी वॉल्यूम है सारा सेल का वॉल्यूम है। अब वह डिफ्यूज होगा। तो सेल का वॉल्यूम जैसे ही आया आपने यहां से सेल किया। ऊपर स्टॉप लॉस लगाया और इसको ट्रेड कर लिया। अच्छे लेवल पे अच्छे पॉइंट ऑफ इंटरेस्ट पे जब ये चीजें बनती हैं तो उनके रिजल्ट भी ऐसे ही आते हैं। ये देखिए समझ आ
गई। फिर ये बना दोबारा मैंने कहा था दो दफा ही बन सकता है। ये देखें सेकंड एग्जांपल इसकी ये आ गई। डाउन ट्रेंड ये रिट्रेसमेंट चल रही है। रिट्रेसमेंट में जाके ये देखें। ये देखें जी। यही आपकी आखिरी बाय की कैंडल बनी है ना स्टंग। इसके ऊपर हाई स्वीप हुआ। वॉल्यूम कैसा आ रहा है? वॉल्यूम आ रहा है जिसका आप नीचे वॉल्यूम चेक करें। ठीक है? यह वॉल्यूम आ रहा है। जैसा भी है छोटा बड़ा जो भी है वॉल्यूम चेक कर लें। नेक्स्ट कैंडल ने उसका हाई स्वीप किया। हल्का सा 15 मिनट का टाइम फ्रेम
में हल्का सा हाई स्वीप किया। वॉल्यूम उससे बड़ा आ गया। सेल की कैंडल नीचे क्लोज हो गई। नीचे ना भी क्लोज होती तो यहां से सेल था। बस ये सेल है। ऊपर आपका स्टॉप लॉस आ जाएगा और यह फिर चल पड़ा। तो यह बिल्कुल सिंपल सी चीज है एफर्ट वर्सेस रिजल्ट में और इसमें जो मेजर डिफरेंस आपने याद रखना है वह यह है के जो कल पढ़ा था अपथरेस्ट वो किसी कैंडल में भी बन जाएगा सेल की कैंडल में भी बन सकता है बाय की कैंडल में भी बन सकता है और इनका लो जैसे ही
ब्रेक होगा जैसे ही इनका लो ब्रेक होगा आप इसको सेल की तरफ ट्रेड करेंगे लेकिन एफर्ट वर्सेस सेल में क्या फर्क है कि ऊपर प्राइस जा रही होगी बाय में ऐसे बाय में जा रही होगी ठीक है और सेल कैसे होगी सेल की ही कैंडल हाई स्वीप करके अंदर क्लोजिंग कर देगी और वॉल्यूम इसका बड़ा हो जाएगा पहले से। बस यह फर्क है इन दोनों में। यह आपको फ़ौरन से अगर याद नहीं होता तो दो-तीन दफा क्लास देखेंगे तो याद होना शुरू हो जाएगा। अब इन दोनों में फर्क देख लें। इसमें वॉल्यूम का कोई चक्कर
नहीं है। पहले वाले में पहले वाले में वॉल्यूम का सिर्फ आपको यह बताया था कि जो ये अप्स बनता है ना इसका वॉल्यूम थोड़ा सा बड़ा होगा क्योंकि इसने लिक्विडिटी स्वीप की है। नेक्स्ट जो इसका ब्रेकआउट करेगी कैंडल वो लो वॉल्यूम से करेगी। बस यहां से आप सेल कर देंगे। दूसरे वाले में क्या है कि प्राइस बाय की कैंडल बनी। इसका हाई स्विप करके क्लोजिंग अंदर करेगी। सेल की कैंडल बनाएगी और बड़ा वॉल्यूम आएगा। फ़ौरन यहां से सेल कर देंगे। इसकी मैंने आपको एग्जांपल्स दिखा दी हैं। एक ये एग्जांपल दिखाई है। एक ऊपर ये एग्जांपल
दिखाई है। और भी सारा दिन मिलेंगी आपको एग्जांपल्स। जितनी ज्यादा ढूंढेंगे उतनी ज्यादा मिलती जाएंगी। यह देखें। एक और परफेक्ट एग्जांपल। यह वाली। ठीक है जी? प्राइस नीचे से आ रही है ना? नीचे गिर रही है। नीचे गिरती है मार्केट में। यह इसने बाय की कैंडल बनाई। बाय की कैंडल में कितना वॉल्यूम आ रहा है? यह वॉल्यूम आ रहा है। नेक्स्ट कैंडल ने इसका हाई स्वीप किया। अब ट्रेंड डाउन ट्रेंड चल रहा है ना हाई स्वीप करके क्लोजिंग अंदर कर दी। नीचे वॉल्यूम आ गया इतना बड़ा। ये देखिए ये इतना बड़ा वॉल्यूम आ गया। जैसे
ही ये वॉल्यूम आया आपने यहां से सेल करना है। ऊपर स्टॉप लॉस लगाना है। फिर सेल होगी प्राइस। तो ट्रेंड के साथ ये बड़ा रिजल्ट देगी। अगेंस्ट ट्रेंड छोटा रिजल्ट देगी। आगे ये देख लें बाय की एग्जांपल दोबारा। ये देखें। ठीक है जी। अब ये छोटा वॉल्यूम था। इसमें भी वॉल्यूम था। प्राइस नीचे आई। फिर सेल का वॉल्यूम आया। फिर प्राइस नीचे आई। अगली कैंडल ने बड़े वॉल्यूम के साथ लो स्वीप किया। क्लोजिंग अंदर दे दी। बस इसी जगह से आपका बाय है। नीचे आपका स्टॉप लॉस है। इसमें इसने प्राइस ने लिक्विडिटी को भी स्वीप
किया। ये देखिए ना साथ ये लिक्विडिटी भी इन्वॉल्व हो गई ये वाली। उसके नीचे विक लगा दी प्राइस ने। समझ आ गई? उसके बाद यहां पे देख लें। ये अब तो रेंज में है प्राइस। नीचे से बाय। ऊपर से सेल वाला काम है। यह रेंज बन चुकी है ना? यह देखें। यह बाय हो रहा है। बड़े वॉल्यूम के साथ हाई स्वीप हुआ। लो अंदर प्राइस अंदर क्लोजिंग नीचे छोटी मोटी विक आ सकती है इसमें ठीक है आपने बस देखना यह है कि बड़े वॉल्यूम से हाई ब्रेक हो हाई स्वीप हो प्राइस क्लोजिंग अंदर दे जैसे
ही कर दिया आपने सेल कर दिया ऐसे कैसे ऊपर आपका छोटा सा स्टॉप लॉस आ गया और ये प्राइस नीचे आ गई जहां पे भी आप इसको बनता देखेंगे अब आपको चीजें वो याद आ जाएंगी आपको चीजें नजर आ जाएंगी फिर बाय की एग्जांपल है ये देखिए ठीक है जी प्राइस नीचे आ रही है ये बड़ा वॉल्यूम है उसके बाद भी वॉल्यूम है प्राइस ने इन दोनों का हाई लो स्विप किया लो स्विप करके क्लोजिंग अंदर कर दी बस क्लोजिंग बड़ी के अंदर होनी चाहिए ऊपर छोटी बहुत बड़ी देखना है कि जितनी नीचे इतनी ऊपर
आ गई है। छोटी-मोटी विक आ जाती है। इसमें इसका मसला नहीं होता। यह बड़ा स्टंग सेटअप होता है इस वाले से। तो जैसे ही बड़े वॉल्यूम के साथ इस कैंडल का बड़े वॉल्यूम के साथ प्रीवियस कैंडल का इसने लो स्वीप किया। क्लोजिंग अंदर दी है। आप यहां से बाय करेंगे। नीचे आपका स्टॉप लॉस होगा इसी जगह पे और यह दोबारा बाय हो गया। 1 से ऊपर ही आपको वैसे तो ज्यादा मिल गया लेकिन चलिए 1 वन कम से कम से कम से कम से कम से कम से कम से कम आपको मिल जाएगा। चल जी।
यह फिर देख लें। यह प्राइस रिट्रेस कर रही है। रिट्रेसमेंट में यह स्ट्रांग कैंडल बनी छोटे वॉल्यूम के साथ। ऊपर बड़े वॉल्यूम के साथ प्राइस ने हाई स्वीप किया। क्लोजिंग अंदर कर दी। यहां से फिर सेल है। ऊपर इसका स्टॉप लॉस है। अब ये जितनी भी कैंडल्स मैं आपको दिखा रहा हूं ना जितनी भी ट्रेड्स तब से दिखा रहा हूं। ये पिछले 4 5 दिन की इनमें स्टॉप लॉस बन रहे हैं। 50 मिनट का टाइम फ्रेम है ना। तो 50 55 60 इतने इतने स्टॉप लॉस बन रहे हैं और टीपी 250 3300 पिप्स के हैं
सबके तो असल में मसला यह होता है लोग ट्राई करते नहीं है डरते रहते हैं प्ले नहीं करते हैं और फिर उनको लगता है कि रिवार्ड कम है और स्टॉप लॉस पड़ा है ये इनहीं दिनों की आपको दिखा रहा हूं सारी बैक टेस्टिंग चल जी इसमें अब आप मुझे ये बता सकते हैं कि आपको इसकी समझ आ गई है या नहीं समझ आई इसकी रिकॉर्डिंग को मैं यहां पे पॉज कर अच्छा जी ये जो रिकॉर्डिंग मैंने ऑफ कर दी थी ये जो ये कमेंट है कि काफी हद तक समझ आ गई है बट आई विल
हैव टू वाच दिस वीडियो मल्टीपल टाइम्स फॉर मोर अंडरस्टैंडिंग। तो मैं इसका जवाब मैंने जरूर समझा कि वो रिकॉर्डिंग में हो। एक दफा समझाने से कुछ भी समझ नहीं आता। सिर्फ एक हल्का सा कांसेप्ट क्लियर होता है और कांसेप्ट क्लियर होने का मतलब यह होता है कि आप किसी आर्मी के पर्सन को पकड़ लें जो टैंक चलाता है आर्मी में। ठीक है? और आप उसे कहें कि जी क्या कांसेप्ट है? कैसे चलाते हैं? टैंक टैंक कैसे चलता है? या एयरपोर्ट किसी पायलट को पकड़ लें। से पूछेंगे कि जहाज कैसे उड़ता है? तो वो आपको आधे
घंटे में या 1 घंटे में कांसेप्ट समझा देगा कि ये तरीकाकार होता है। इन चीजों का हम ख्याल रखते हैं। इस तरह जहाज उड़ता है। तो अब आप अगर ये कहेंगे ना कि हां ये बातें मुझे कई बार सुननी पड़ेंगी दोबारा। फिर मुझे जहाज उड़ाना आएगा। फिर भी नहीं आएगा। जब तक आप प्रॉपर उसको सुन के समझ के फिर उसको प्रैक्टिस नहीं करेंगे। कांसेप्ट तो क्लियर आप आप जिसको बाइक चलाई नहीं आती। आप किसी बाइकर को पकड़ लें। उससे पूछे कासेप्ट वो आपको बताएगा यह क्लच है। यह ब्रेक है, यह रेस है, यह गियर है।
इस तरह चलता है। कांसेप्ट आपका 10 मिनट में क्लियर हो जाएगा। लेकिन बाइक आपसे सारी उम्र नहीं चलेगी। ठीक हो गया? वही चीज यहां पे है। कांसेप्ट तो आपको क्लियर हो जाएंगे। बिल्कुल आपको बार-बार देखना पड़ेगा। मैं आपको कुछ नहीं कह रहा अदिल खान। ना मैं आपकी आपकी मिसाल से बाकियों को समझा रहा हूं। आप तो बिल्कुल ठीक कह रहे हैं कि मल्टीपल टाइम्स देखना पड़ेगा। मल्टीपल टाइम्स देखना भी पड़ेगा। इस वीडियो को भी बाकी वीडियोस को भी फिर मल्टीपल टाइम्स इन्हीं सेटअप्स को एक-एक करके ट्रेड करना पड़ेगा। फिर आपको यह समझ आएगी कि आपको
कौन सा सेटअप अच्छा लगता है। किस पे आपको ज्यादा तसल्ली है। किस पे इतने सेटअप्स आपने पढ़ लिए हैं ना? तीन चीजें वॉल्यूम की पढ़ ली है। तो आपका दिल किस पे बैठ गया है। किस पे आपकी ग्रिप बन गई है। उस पे आप उसको ट्रेड करना शुरू कर देंगे। तो यह मल्टीपल टाइम्स वाली चीजें जो है यह बार-बार आपको हर चीज करनी पड़ेगी। अच्छा और क्वेश्चन जो है एक दफा कर लें। फिर मैं इसको स्टॉप कर देता हूं।