ये कहानी है एक आदमी और उसकी तीन बेटियों की है उसकी बीवी कुछ साल पहले वफात पा चुकी थी उसकी तीनों बेटियां बहुत खूबसूरत थी मगर सबसे छोटी बेटी अपनी बहनों में सबसे ज्यादा समझदार थी उसका नाम जैनब था करम दीन अपनी तीनों बेटियों से बहुत प्यार करता था उसने कभी अपनी बेटियों को मां की कमी महसूस नहीं होने दी वह अपनी बेटियों की हर ख्वाहिश पूरी करता था अब कम दन की बेटियां बड़ी हो चुकी थी और अपने पिता के लिए खुद से खाना बनाने लगी थी जब करम दन काम के सिलसिले में बाहर
जाता तो उसकी बेटियां उसके लिए खाना तैयार करके साथ दे देती उसी गांव में एक बेवा औरत भी रहती थी जिसकी एक बेटी थी उस बेवा की आदत थी कि वह हर घर में कुछ ना कुछ मांगने के लिए चली जाती थी जब कर्म दीन की बेटियां अपने पिता के लिए खाना बनाती तो वह औरत अक्सर उसी समय उनके घर आग मांगने के लिए आ जाती लेकिन करम दीन की सबसे छोटी बेटी जैनब को वह बेवा औरत बिल्कुल भी अच्छी नहीं लगती थी जब भी वह औरत उनके घर आती जैनब अपनी बहनों से कहती यह
औरत हमारे घर क्यों आती है यह औरत बिल्कुल भी अच्छी नहीं है बड़ी दोनों बहनें जैनब को समझाती देखो यह बेवा औरत है और गरीब है अगर हमारे घर से आग ले जाती है तो इसमें तुम्हारा क्या नुकसान है जैनब अपनी बहनों की बातें सुनकर चुप हो जाती लेकिन वह कहती देख लेना यह औरत एक ना एक दिन हम सबके लिए मुसीबत खड़ी करेगी यह सिलसिला यूं ही चलता रहा वह औरत रो रोज उनके घर से आग लेने आती और मौका पाकर कर्म दन के खाने में राख मिला देती कर्म दन ने जब अपने खाने
में खराबी महसूस की तो उसने सोचा कि उसकी छोटी-छोटी बेटियां खाना बनाती हैं इसलिए उनसे कोई गलती हो जाती होगी वह अपनी बेटियों से बहुत प्यार करता था और यह बात समझ नहीं पा रहा था कि उसकी बेटियां उसका खाना क्यों खराब कर रही हैं फिर एक दिन कम दीन ने सोचा आज मैं अपनी बेटियों पर नजर रखूंगा आखिर मेरी बेटियां अचानक से मेरे खाने में मिलाने लगी हैं जब करम दन की बेटियां खाना बनाने लगी तो वह छुपकर उन्हें देखने लगा उसकी बड़ी बेटी साफ पानी से चावल धो रही थी छोटी बेटी सालन बना
रही थी और सबसे छोटी बेटी जैनब बर्तन साफ कर रही थी जिन बर्तनों में खाना डाला जाना था कुछ ही देर में खाना पककर तैयार हो गया खाने में कोई खराबी नहीं थी करम दन परेशान था लेकिन फिर अचानक उसने जो देखा उससे उसके पैरों तले जमीन खिसक गई उस ने देखा कि वही बेवा औरत उनके घर आग लेने आई है और उसकी छोटी बेटी जैनब उससे बहस कर रही है वहीं उसकी दूसरी बहनें जैनब को समझा रही थी कोई बात नहीं जैनब यह बेवा औरत है इसे आग लेने दो बड़ी बहन ने कहा लेकिन
उस बेवा औरत ने आग लेने के बहाने नजरें बचाकर कर्म दीन के खाने में राख मिला दी और सारा खाना खराब कर दिया यह देखकर करर्म दीन को बहुत गुस्सा आया दूसरे दिन कर्म दीन ने उस बेवा औरत को अपने घर बुलाया और गुस्से में पूछा तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरा खाना खराब करने की वह औरत बड़ी नाटकीय अंदाज में क्रम दीन के पास आई और उसके सीने पर हाथ फेरते हुए कहने लगी अरे मैं तो यह देख रही थी कि तुम सच में अपनी बेटियों से प्यार करते हो या नहीं खाना खराब होने पर
तुम उन्हें डांटते हो या नहीं लेकिन तुम तो बड़े अच्छे इंसान निकले अपनी बेटियों से बहुत प्यार करने वाले तुमने तो मेरी चोरी फौरन पकड़ ली अब मुझे यकीन हो गया है कि तुम अपनी बेटियों से बहुत प्यार करते हो आइंदा ऐसा कुछ नहीं होगा कर्म दिन उसकी बातों और उसके नाटक पर यकीन करने लगा क्योंकि वह बेवा औरत खूबसूरत थी कर्म दन उसके व्यवहार से प्रभावित होकर कुछ भी कहने की बजाय उसे अपनी पत्नी बनाने का फैसला कर बैठा कुछ ही दिनों में उसने अपनी बेटियों की इजाजत के बिना उस बेवा औरत से शादी
कर ली और उसे अपने घर ले आया शादी के कुछ ही दिनों बाद वह बेवा औरत कर्म दन की तीनों बेटियों से सख्त नफरत करने लगी वह चाहती थी कि किसी भी तरह कर्म दीन की बेटियां इस घर से निकल जाएं उसने उन्हें घर से निकालने के लिए तरह-तरह के मंसूबे बनाने शुरू कर दिए वह सोचती थी कि अगर बेटियां घर से चली जाएंगी तो वह और उसकी अपनी बेटी आराम से ऐश की जिंदगी जी सकेंगी साथ ही कर्म दीन का पूरा ध्यान सिर्फ उसी और उसकी बेटी पर रहेगा वह जानती थी कि कर्म दन
अपनी बेटियों से बहुत मोहब्बत करता है और उन्हें जरा भी दुखी नहीं नहीं देख सकता उसकी अपनी बेटी हमेशा कीमती कपड़े पहनकर घूमती रहती थी जिससे वह मॉडर्न लगती थी लेकिन सौतेली मां ने कर्म दन की तीनों बेटियों को घर का सारा काम करने पर मजबूर कर दिया वह उन्हें ठीक से पेट भर खाना भी नहीं देती थी और धीरे-धीरे उनकी दूसरी जरूरतें भी कम कर दी तीनों बहनें हर समय दुखी रहने लगी एक दिन दो बड़ी बहनें रो रही थी तो जैनब अपनी बड़ी बहनों के पास आई और कहने लगी प्यारी बहनों आओ हम
तीनों कहीं बाहर चले ताकि हमारा दिमाग फ्रेश हो जाए फिर वह तीनों बहनें घर से निकल गई और चलते-चलते एक जंगल में जा पहुंची वहां एक घने दरख्त के नीचे बैठकर वे रो-रोकर अपनी मां को याद करने लगी इतने में उनके पास से एक अल्लाह वाले बुजुर्ग का गुजर हुआ जैनब जमीन पर बैठी रो रही थी और कह रही थी ऐ मेरे अल्लाह हम मजलूम लड़कियां हैं और बहुत दुखी हैं आप देख रहे हैं ना कि हमारी सौतेली मां हम पर कितना जुल्म करती है हम कितने दिनों से भूखे हैं अल्लाह वाले बुजुर्ग पास ही
खड़े होकर उनकी बातें सुन रहे थे फिर वे जैनब से मुखातिब होकर बोले बेटियों तुम तीनों यहां इस दरख्त के नीचे रोज आती हो तुम्हें क्या दुख है तुम मुझे बता सकती हो जैनब ने रोते हुए अल्लाह वाले बुजुर्ग को सारा वाकया सुना दिया उनकी बात सुनकर बुजुर्ग को बहुत दुख हुआ वे बोले बेटी यहां से थोड़ी दूरी पर मेरी झोपड़ी है मैं वहां रहता हूं और इबादत करता हूं मेरी झोंपड़ी के बाहर एक अनार का दरख्त लगा है जिस पर पके हुए अनार लगे हुए हैं तुम जाओ और उस दरख्त से जितने मर्जी अनार
तोड़कर खा लो यह सुनकर तीनों लड़कियां खुशी-खुशी उस झोपड़ी के पास पहुंची उन्होंने देखा कि दरख्त पर बहुत ही खूबसूरत और रसीले अनार लगे हुए हैं तीनों ने एक-एक अनार तोड़ा और बैठकर मजे से खाने लगी जब उनका पेट भर गया तो उन्होंने बुजुर्ग का शुक्रिया अदा किया और घर वापस आ गई इसके बाद जब उनकी सौतेली मां उन्हें खाना नहीं देती तो वे रोज जंगल जाती और उन अनार को खाकर अपना पेट भर लेती धीरे-धीरे उन्होंने अपनी मां का दिया हुआ खाना बिल्कुल छोड़ दिया अब उनकी सौतेली मां सोचने लगी मैं इन लड़कियों को
खाने को कुछ नहीं देती मैं इनसे इतना काम करवाती हूं उन्हें जलील करती हूं फिर भी इनके चेहरे पर एक अजीब सी चमक है इनमें से कोई बीमार भी नहीं पड़ती बल्कि इनकी खूबसूरती बढ़ती जा रही है और मेरी बेटी जिसे मैं इतना अच्छा खाना देती हूं वह उनके आगे बदसूरत लगती है दूसरे दिन जब वह लड़कियां जंगल की तरफ गई तो सौतेली मां ने अपनी बेटी को उनका पीछा करने के लिए भेज दिया जब तीनों लड़कियां अनार तोड़कर खा रही थी तो जैनब ने अपनी सौतेली बहन को देख लिया उसने बाकी बहनों से कहा
यह लड़की हमारा पीछा कर रही है मैं इसे यहां से भगा देती हूं फिर जैनब ने अपने हाथ में पकड़ा अनार छुपा लिया और बोली अगर यह सब कुछ अपनी मां को बता देगी तो यह हमारे लिए परेशानी का कारण बन सकती है लेकिन जैनब की दूसरी बहनें बोली जैनब तुम कैसी बातें कर रही हो यह बेचारी बेकसूर है जैनब की बड़ी बहने बोली हमारी सौतेली मां तंग करती हैं यह तो हमें कुछ नहीं कहती इसके बाद तीनों बहनों ने अपनी सौतेली बहन को पास बिठाया और उसे एक अनार पकड़ा दिया लेकिन सौतेली बहन ने
अनार नहीं खाया और जल्दी से अपनी मां के पास जाकर कहने लगी मां वे लड़कियां भूखी नहीं रहती वे तो जंगल में एक दरख्त से अनार तोड़कर खा लेती हैं उसी दरख्त के पास एक बुजुर्ग भी इबादत कर रहे थे और उन्होंने भी उन्हें रोकने की कोशिश नहीं की यह सुनकर सौतेली मां को बहुत गुस्सा आया वह सोचने लगी मैं इन लड़कियों को अनार खाने से कैसे रोकूं पूरा दिन वह गुस्से में ही रही जब शाम को करम दीन काम से घर वापस आया तो उसने अपनी बीवी को परेशान देखा वह बोला तुम्हें क्या परेशानी
है क्यों इतनी उदास बैठी हो वह कहने लगी मेरे सिर में बहुत तेज दर्द है और यह किसी दवा से ठीक नहीं होगा कर्म दीन ने पूछा तो फिर कैसे ठीक होगा वह तुरंत बोली जंगल में एक अनार का दरख्त है जिस पर लाल लाल अनार लगे हैं अगर तुम उस दरख्त को जड़ से कटवा दो और उसकी जड़ें उबालकर दवा बना लो और मेरे माथे पर लगाओ तो मेरा सिर दर्द ठीक हो सकता है कर्म दीन ने कहा बस इतनी सी बात फिर उसने कुछ आदमियों को बुलाया और उन्हें पैसे देकर कहा जंगल में
एक अनार का दरख्त है तुम लोग उसे जड़ से उखाड़ फेंको को और उसकी जड़ें मुझे लाकर दो कुछ ही घंटों में वे आदमी उस दरख्त को जड़ से उखाड़कर उसकी जड़ें कर्म दीन के पास ले आए करम दीन ने जल्दी से आग जलाई और उन जड़ों से दवा बनाकर अपनी बीवी के माथे पर मलने लगा थोड़ी ही देर में उसकी बीवी कहने लगी अब मुझे आराम है अगले दिन जब तीनों बहनें जंगल गई तो उन्होंने देखा कि अनार का दरख्त किसी ने जड़ से उखाड़ दिया है यह देखकर वे बहुत परेशान हो गई और
सोचने लगी अब हम क्या खाएंगे तभी वे तीनों लड़कियां वहीं बैठकर रोने लगी उनके रोने की आवाज सुनकर अल्लाह वाले बुजुर्ग अपनी झोपड़ी से बाहर आए वे समझ गए कि लड़कियां क्यों रो रही हैं वे बोले इसमें रोने की क्या बात है अल्लाह तुम्हें इससे भी बेहतर कुछ देगा फिर अल्लाह वाले बुजुर्ग ने अपनी उंगली से जमीन की तरफ इशारा किया और वहां पर एक छोटी सी नदी बन गई जिसमें पानी की जगह दूध बह रहा था उन्होंने उन लड़कियों को एक मिट्टी का प्याला दिया और कहा जहां से जितना मर्जी हो दूध पियो लड़कियां
बहुत खुश हुई और मिट्टी के प्याले में दूध भरकर पीने लगी जब उनका पेट भर गया तो वे बुजुर्ग का शुक्रिया अदा करके घर वापस आ गई इसके बाद उनका रोज का यह मामूल हो गया कि वे तालाब के पास जाती और मिट्टी के प्याले में दूध भरकर पी लेती उनकी सौतेली मां उनकी सेहत देखकर हैरान थी उसने अपनी बेटी को बुलाया और कहा मैंने तो जंगल से अनार के दरख्त का नामो निशान मिटा दिया था फिर भी इन लड़कियों की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ा मैं तो इन्हें पेट भर खाना भी नहीं देती
आखिर यह ऐसा क्या खा रही है जिससे इनकी सेहत इतनी अच्छी हो रही है उसने अपनी बेटी से कहा इनका पीछा करो और पता लगाओ कि यह क्या खाती हैं लड़की फिर से अपनी बहनों का पीछा करते हुए जंगल में गई जब तीनों मिट्टी के प्याले से दूध पी रही थी तो जैनब ने पीछे मुड़कर देखा उसने अपनी सौतेली बहन को चुपचाप खड़ा देखकर बाकी बहनों से कहा देखो यह लड़की फिर हमारा पीछा कर रही है ने अपनी बहनों से कहा तुम लोग जल्दी उठो और इसे यहां से भेजो क्योंकि अगर इसने हमारे तालाब को
देख लिया तो यह घर जाकर सब बता देगी और फिर घर में हंगामा खड़ा हो जाएगा लेकिन जैनब की बड़ी बहनों ने उसे डांटते हुए कहा तुम्हारा आखिर मसला क्या है माना कि हमारी सौतेली मां हम पर जुल्म करती है लेकिन इसमें इस बेचारी का क्या कसूर जैनब यह सुनकर चुप हो गई इसके बाद तीनों ने अपनी सौतेली बहन को नदी के पास बिठाया और के प्याले में दूध भरकर उसे दिया उस लड़की ने दूध पिया और जल्दी से अपनी मां के पास पहुंचकर तालाब और दूध वाली पूरी बात बता दी सौतेली मां को यह
सुनकर बहुत गुस्सा आया उसने अपने गांव के कुछ आदमियों को बुलाया और कहा तुम जितने पैसे चाहो मैं तुम्हें दूंगी लेकिन तुम्हें जंगल में जाना होगा वहां एक बुजुर्ग की झोपड़ी और तालाब है तुमने वह झोपड़ी खत्म कर देनी है और तालाब में मिट्टी डाल देनी है बदले में तुम्हें बहुत पैसा मिलेगा कुछ ही देर में वे आदमी उसकी मर्जी के मुताबिक सब कुछ करके लौट आए वह औरत अब बहुत खुश थी अगले दिन जब तीनों बहनें जंगल में गई तो उन्होंने देखा कि वहां ना तो तालाब है और ना ही बुजुर्ग की झोपड़ी यह
देखकर उन्हें पहाड़ जैसा दुख हुआ वे वहीं बैठकर रोने लगी और भूखी प्यासी अपने घर लौट आई उनकी सौतेली मां यह देखकर बहुत सुकून महसूस कर रही थी एक दिन वह फिर बीमारी का बहाना बनाकर लेट गई शाम को जब दन घर आया तो उसने अपनी बीवी को प्यार से कहा चाहे मेरा सब कुछ बिक जाए लेकिन मैं तुम्हें कुछ नहीं होने दूंगा तुम्हारा इलाज सबसे अच्छे डॉक्टर से करवाऊंगी लेकिन उसकी बीवी कुछ और ही चालें चल रही थी उसने कहा आपको इतना कुछ करने की जरूरत नहीं है मेरी जिंदगी बचाने के लिए बस एक
छोटा सा काम करो कर्म दीन बोला जल्दी बताओ क्या करना है मैं वही करूंगा उसकी बीवी बोली तुम अपनी तीनों बेटियों का खून निकालकर मेरे हाथों और पैरों की हथेलियों पर मल दो तभी मैं ठीक हो सकती हूं यह सुनकर कर्म दन की आंखों में आंसू आ गए क्योंकि वह अपनी बेटियों से बेहद मोहब्बत करता था वह चुपचाप कमरे से बाहर निकला और अपनी बेटियों को ढूंढने लगा लेकिन बेटियां घर में नहीं थी वह परेशान होकर उन्हें ढूंढते ढूंढते कब्रिस्तान पहुंचा वहां उसने देखा कि उसकी तीनों बेटियां अपनी मां की कब्र के पास बैठकर रो
रही हैं यह देखकर करम दन का दिल कांप गया एक तरफ उसकी बीवी की ख्वाहिश थी और दूसरी दूसरी तरफ उसकी बेटियों की जिंदगी कर्म दीन को समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करें उसने सोचा कि उसकी बीवी उसकी बेटियों से कभी खुश नहीं होगी और उसकी बेटियां अपनी सौतेली मां के साथ खुश नहीं है इसलिए उसने फैसला किया कि बेटियों को कहीं दूर ले जाएगा उसने अपनी बेटियों को गले लगाया और कहा ए बेटियों तुम क्यों परेशान होती हो मैं तुम्हें कहीं और ले चलता हूं वह अपनी बेटियों को एक घने जंगल
में ले गया वहां उसने मिट्टी का चूल्हा बनाया और बेटियों को खाना बनाकर खिलाया जब बेटियों ने पेट भरकर खाना खा लिया तो वे एक दरख्त के नीचे सो गई करम दीन ने अपनी बेटियों को वहीं सोते हुए छोड़ दिया और वहां से भाग गया उसके दिल में यही ख्याल था कि कम से कम मेरी बेटियां जिंदा तो रहेंगी और अपनी सौतेली मां के जुल्म से बची रहेंगी रास्ते में उसने एक हिरण का शिकार किया और उसका खून लेकर अपनी बीवी को दे दिया उसकी बीवी ने वह खून अपने हाथों और पैरों पर लगाया और
खुश होकर कहा अब मुझे आराम है उसे यकीन हो गया कि कर्म दीन ने अपनी बेटियों को मार दिया दूसरी तरफ जब तीनों बहनें जागी तो उन्होंने देखा कि उनका बाप उन्हें छोड़कर जा चुका है वे अपने बाप को पुकारने लगी जंगल में जंगली जानवरों की आवाजें सुनकर वे डर गई और रोने लगी इत्तेफाक से उसी जंगल में तीन दोस्त शिकार के लिए आए थे जब वे शिकार करके लौटने लगे तो उनमें से एक दोस्त जिसका नाम नासिर था कहने लगा मुझे लगता है नासिर ने कहा यहां कोई मुसीबत में है क्या तुम लोग किसी
के रोने की आवाज नहीं सुन रहे मुझे तो किसी के रोने की आवाज आ रही है चलो जल्दी से देखते हैं शायद किसी को हमारी मदद की जरूरत हो फिर तीनों दोस्त आवाज की दिशा में चल पड़े आगे जाकर उन्होंने देखा कि तीन खूबसूरत लड़कियां बैठी हुई रो रही हैं नासिर आगे बढ़ा और उनसे पूछा तुम यहां अकेली क्या कर रही हो और इतना क्यों रो रही हो जैनब ने नासिर को अपनी पूरी कहानी सुना दी लड़कों को उन पर बड़ा तरस आया वे आपस में कहने लगे क्यों ना हम इन लड़कियों से शादी कर
ले इन्हें एक छत मिल जाएगी और हमारी जिंदगी भी सुकून से गुजरने लगेगी फिर उन तीनों लड़कों ने उन तीनों लड़कियों से शादी कर ली जैनब की शादी नासिर के साथ हो गई संयोग से उन तीनों दोस्तों के घर पासपास थे तीनों बहनें खुशी-खुशी अपने अपने घरों में रहने लगी एक साल के बाद जैनब के घर में बेटे की पैदाइश हुई यह देखकर नासिर के दोस्त और जैनब बहने बहुत खुश हुई धीरे-धीरे जैनब का बेटा दो साल का हो गया एक दिन नासिर ने अपने दोस्तों से कहा मेरा आज फिर जंगल में शिकार करने का
मन हो रहा है चलो शिकार पर चलते हैं लेकिन उसके दोस्तों ने मना कर दिया और कहा हमें तो किसी जरूरी काम से जाना है हम तुम्हारे साथ जंगल नहीं जा सकते नासिर ने जैनब से इजाजत ली और अकेला ही जंगल में शिकार के लिए चला गया लेकिन इसके बाद कई दिन गुजर गए और नासिर घर वापस नहीं आया जन बहुत परेशान हो गई उसकी बहने भी उसकी चिंता देखकर चिंतित हो गई जैनब के जीजा नासिर के दोस्त ने उसे तसल्ली देते हुए कहा तुम फिक्र मत करो हम नासिर को ढूंढकर जरूर वापस लाएंगे लेकिन
करनी खुदा की यह हुई कि नासिर के दोस्त भी उसे ढूंढने जंगल गए लेकिन वे भी वापस नहीं लौटे उन तीनों बहनों पर एक बार फिर से गम का पहाड़ टूट पड़ा एक दिन जैनब अपने बेटे को सुला रही थी कि दरवाजे पर दस्तक हुई उसने जल्दी से जाकर दरवाजा खोला तो क्या देखती है कि एक बुजुर्ग फकीर जिसने हरे रंग के कपड़े पहने हुए थे दरवाजे पर खड़ा है जैनब उसे देखकर बोली बाबा मेरा शौहर घर पर नहीं है मैं आपको घर में आने की इजाजत नहीं दे सकती जब मेरा शौहर आएगा तब आप
आ जाना उस पर फकीर बोला बेटी मुझे बहुत भूख लगी है किसी भूखे को खाना खिलाने में क्या हर्ज है जैनब ने मजबूरी में उस फकीर को घर में बुला लिया और उसके लिए खाना बनाने लगी लेकिन वह जादूगर फकीर बुरी नजरों से जैनब को देखता रहा फिर वह जादूगर उठकर जैनब के करीब आया और बोला सुनो लड़की तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो अपने बेटे को छोड़ दो और मुझसे शादी कर लो जैनब डर के मारे कांपने लगी और बोली बाबा आप कैसी बातें कर रहे हैं मैं शादीशुदा हूं और एक बच्चे की मां
हूं आपकी हिम्मत कैसे हुई ऐसा कहने की यह सुनकर जादूगर फकीर को गुस्सा आ गया उसने अपने जादू से जैनब को कुतिया बना दिया और उसके गले में रस्सी डालकर खींचते हुए ले जाने लगा इधर जैनब का बेटा जोर-जोर से रो रहा था जैनब की बहनों ने जब उसके बेटे के रोने की आवाज सुनी तो वे भागती हुई उसके घर आई उन्होंने जल्दी से जैनब के बेटे को गले लगाया और अपनी बहन को घर में ढूंढने लगी लेकिन उन्हें जैनब कहीं नजर नहीं आई उनकी सौतेली मां के बाद अब जैनब भी गायब हो चुकी थी
वक्त इसी तरह गुजरता रहा अब जैनब को गुम हुए भी 14 साल का लंबा वक्त गुजर चुका था इस दौरान जैनब का बेटा जवान हो चुका था उ उसकी दोनों खाला हों ने मिलकर पाला था एक दिन जैनब की खाला हों ने उसे उसकी मां के बारे में सारी सच्चाई बताई यह सुनकर वह बहुत परेशान हो गया और बोला खाला आज मैं अपने मां-बाप को जरूर ढूंढने जाऊंगा उसकी खाला हों ने उसे समझाते हुए कहा बेटा जो होना था वह हो चुका जिन्हें जाना था वे चले गए अब हम तुम्हें नहीं खोना चाहती हमारे शौहर
भी जंगल गए थे और वे भी कभी वापस नहीं आए अगर तुम भी चले गए तो हम किसके सहारे जेंगे लेकिन लड़के ने कहा खाला आप फिक्र मत कीजिए मैं अपने बाप और बाकी सबको ढूंढकर वापस जरूर लाऊंगा फिर वह लड़का जंगल की तरफ निकल पड़ा कई दिनों तक जंगल में इधर-उधर भटकता रहा लेकिन उसे कुछ समझ नहीं आया कि वह अपने मां-बाप को कहां ढूंढे इसी तरह तलाश करते करते वह एक ऐसे इलाके में पहुंचा जो पूरी तरह पत्थरों का इलाका था वहां उसने पत्थर की इमारतें देखी और एक खूबसूरत छोटा सा पत्थर का
घर देखा वह गौर से उस घर को देख रहा था कि तभी उस घर से एक बुजुर्ग बाहर आए और बोले बेटा तुम यहां नए लगते हो तुम्हें इस खतरनाक इलाके में आने की क्या जरूरत थी लड़के ने जवाब दिया बाबा जी मैं अपने मां बाप और ताया जी को ढूंढने के लिए यहां आया हूं मेरी मां को एक जादूगर ने कुतिया बनाकर अपने साथ ले गया था अल्लाह वाले बुजुर्ग बोले बेटा यह इलाका एक बहुत बड़े जादूगर का है वह बहुत ताकतवर है जो भी उससे पंगा लेता है या उसे बेइज्जत करता है वह
उसे पत्थर का बना देता है यह जो तुम अपने इर्दगिर्द पत्थर देख रहे हो यह भी कभी इंसान थे जादूगर ने इन्हें पत्थर बना दिया कुछ साल पहले यहां एक नौजवान आया था उसके बाद उसके पीछे दो और नौजवान आए जादूगर ने उन्हें पेड़ और पत्थर में बदल दिया और उसने एक नेक पाकीजा लड़की को भी 12 साल से कैद करके रखा है वह जादूगर उस लड़की से शादी करना चाहता है लेकिन वह लड़की किसी भी तरह मान नहीं रही बुजुर्ग की बातें सुनकर लड़का सोचने लगा यकीनन यह लड़की मेरी मां है और यह लोग
मेरे ही परिवार के लोग हैं आखिरकार मैंने अपनों को ढूंढ ही लिया इसके बाद लड़के ने बुजुर्ग को अपनी सारी कहानी बताई और कहा बाबा जी आप मेरी मदद करें इन लाचार लोगों को बचाने का कोई तरीका बताएं बुजुर्ग जिनकी झोपड़ी को कभी जैनब की सौतेली मां ने जला दिया था मुस्कुराए और बोले बेटा अल्लाह हमेशा नेक दिल वालों की की मदद करता है तुम्हें हिम्मत नहीं हार चाहिए अल्लाह वाले बुजुर्ग मजबूरन इस खतरनाक इलाके में आकर रहने लगे उन्होंने लड़के से वादा किया मैं तुम्हारा साथ जरूर दूंगा बुजुर्ग सोचने लगे क्या पता इस लड़के
की मां को छुड़वाने से बाकी कैदियों को भी जादूगर की कैद से आजादी मिल जाए बुजुर्ग ने बाकी गांव वालों को बताया यह मेरा पोता है जो दूसरे गांव से मुझसे मिलने आया है जब जादूगर को शक हुआ कि गांव में कोई नया लड़का आया है तो व तुरंत अल्लाह वाले बुजुर्ग के पास पहुंचा और पूछने लगा यह कौन है बुजुर्ग ने जवाब दिया यह मेरा पोता है इस तरह जादूगर और लड़के की मुलाकात हुई लड़का अपनी पहचान छुपाकर जादूगर से मिलने लगा जादूगर ने लड़के को देखकर कहा तुम बहुत समझदार लगते हो और अपने
दादा की तरह नेक और मासूम हो कल तुम मेरा एक काम करोगे मैं तुम्हें एक इमारत में भेजूंगा जहां एक लड़की को मेरा पैगाम देना है मैं उससे शादी करना चाहता हूं लड़का समझ गया कि वह अपनी मां से मिलने जा रहा है वह बहुत खुश हुआ और सोचने लगा कि वह अपनी मां के लिए फूल ले जाएगा उसने योजना बनाई कि वक्त आने पर वह अपनी मां को पहचानने के लिए अपनी पहचान जाहिर करेगा जैनब की शादी के वक्त नासिर ने उसे एक अंगूठी दी थी जिस पर उसका नाम लिखा हुआ था बाद में
जैनब ने वह अंगूठी अपने बेटे को पहना दी थी सालों बाद वह अंगूठी बढ़ाकर दोबारा बनाई गई और लड़के ने अब भी वही अंगूठी पहनी हुई थी अल्लाह वाले बुजुर्ग ने लड़के से कहा अपनी अंगूठी को फूलों के गुलदस्ते में छुपा दो जब तुम्हारी मां इसे देखेगी तो वह तुरंत तुम्हें पहचान लेगी लेकिन यह काम आसान नहीं होगा जादूगर ने जैनब की निगरानी के लिए एक चौकीदार तैनात कर रखा है जो हर वक्त सख्ती से नजर रखता है जादूगर अल्लाह वाले बुजुर्ग की बहुत इज्जत करता था और उनके पोते को नेक समझता था उसने लड़के
को गुलदस्ता देकर रोजाना जैनब के पास भेजना शुरू कर दिया लड़के की कम उम्र महज 14 साल की वजह से जादूगर को उस पर कोई शक नहीं हुआ जैनब को एक कमरे में कैद करके रखा गया था जहां किसी मर्द को जाने की इजाजत नहीं थी लड़का रोजाना गुलदस्ता लेकर जैनब के पास जाता और वहां जादूगर की एक दासी हमेशा जैनब के साथ रहती एक दिन किस्मत ने लड़के का साथ दिया ऐसा मौका मिला जब कमरे में जैनब के सिवा कोई नहीं था लड़के ने जल्दी से अपनी उंगली से अंगूठी उतारी और फूलों के गुलदस्ते
में छुपाकर जैनब के कदमों में रख दिया जैसे ही गुलदस्ता जमीन पर रखा अंगूठी की आवाज हुई जैनब ने हैरानी से गुलदस्ता उठाया और फूलों में बंधी अंगूठी को पहचान लिया यह वही अंगूठी थी जो उसने सालों पहले अपने बेटे को पहनाई थी जैनब की नजरें फौरन गुलदस्ता लाने वाले लड़के की तरफ उठी दोनों की नजरें मिलते ही हकीकत साफ हो गई जादूगर ने जैनब को कैद कर रखा था लेकिन उसका बेटा अपनी मां को आजाद कराने का मंसूबा बनाने लगा जैनब ने जादूगर से शादी की रजामंदी जताई और उसकी ताकत का राज मालूम किया
जादूगर ने बताया कि उसकी जान एक तोते में है जो एक पिंजरे में बंद है और एक घने जंगल के दरख्त के नीचे सख्त पहरे में रखा गया है जैनब ने यह राज अपने बेटे को बताया लेकिन उसे खतरे से बचाने के लिए जाने से मना किया फिर भी बेटे ने अपनी मां को यकीन दिलाया कि वह कामयाब होकर लौटेगा कई दिनों की मशक्कत के बाद वह जंगल में पहुंचा एक मौका देखकर उसने तोते को प से निकाल लिया और जादूगर की इमारत तक वापस ले आया जादूगर उसे देखकर तोते की वापसी की भीख मांगने
लगा लड़के ने चालाकी से जादूगर से सभी कैदियों को आजाद करवाया इसके बाद उसने तोते के पंख खींचे जिससे जादूगर की ताकत खत्म हो गई अंत में उसने तोते की गर्दन मरोड़ दी जिससे जादूगर मर गया लड़के ने अपनी मां जैनब पिता नासिर और बाकी सभी कैदियों को आजाद कराया फिर वह सब अल्लाह वाले बुजुर्ग के पास पहुंचे सबने बुजुर्ग का शुक्रिया अदा किया और अपने घर लौट आए जैनब की बहनें अपने शौहर से मिलकर बहुत खुश हुई जो जादूगर की कैद में सालों तक रहे थे उनके पिता जो अपनी बेटियों को खोने के गम
में डूबे थे उन्हें सही सलामत देखकर खुशी से रोने लगे उन्होंने बेटियों से माफी मांगी और बताया कि उनकी बीवी की साजिशों की वजह से यह सब हुआ बेटियों ने अपने पिता को तसल्ली दी और कहा हम अपनी जिंदगियों से खुश हैं उनके पिता ने बताया कि उनकी की सौतेली मां जो उन पर जुल्म करती थी एक गंदी बीमारी का शिकार होकर इस दुनिया से चली गई इसके बाद सबने खुशी और सुकून के साथ अपनी जिंदगी गुजारनी शुरू की