ओम श्री परमात्मने नमः ओ श्री परमात्मने नम ओमकार मंत्र ओमकार मंत्र गायत्री छंद गायत्री छंद परमात्मा ऋषि परमात्मा ऋषि अंतर्यामी देवता अंतर्यामी देवता अंतर्यामी प्रीति अर्थे अंतर्यामी प्रीति जपे विनियोग जप विनियोग ये ऐसा महामंत्र है कि इसके ऋषि भगवान नारायण स्वयं है जैसे गायत्री मंत्र के ऋषि विश्वामित्र है विश्वामित्र ने गायत्री मंत्र का सामर्थ्य का अनुभव किया ऋषियों ने मंत्र बनाए नहीं ऋषि त मंत्र दृष्ट रन करता र तो यह भगवान नारायण ने ओमकार मंत्र की महिमा का अनुभव किया तो भगवान नारायण है इसके ऋषि तो इसका देवता जैसे गायत्री मंत्र का देवता सूर्यनारायण भगवान
ऐसे इस ओमकार मंत्र का देवता अंतर्यामी परमात्मा स्वयं है यह महिलाओं को ओमकार अधिक जपने की मनाई है इसलिए वो तो हरि मिलाकर य तो थोड़ी देर जपले ईश्वर प्रीति के लिए जपने में ज्यादा खतरा नहीं वैसे अकेला ओमकार महिलाओं के लिए मना किया हुआ है थोड़ी देर जपे अधिक जपने से फिर वो भी फक्कड़ हो जाएंगे जिसको फक्कड़ बनना हो ओमकार का जप खूब करे जितना भी फक्कड़ बनने की इच्छा हो ओम अकेला है अकेला बना देगा ओम श्री परमात्मने नमः ओ श्री परमात्मने ओम श्री आनंद स्वरूपाय नमः ओ श्रीनंद स् आपके आवाज में
प्यार नहीं है झगड़ा है दिखावा है दिखावा न ककता प्रीति ओमकार [संगीत] मंत्र परमात्मा ऋषि आप प्रीति बोलो ना बजार आदमी होकर नहीं बोलोगे आप सत्संगी होकर बोलो हृदय द्रवित हो जाने आप कौन से महान परमेश्वर जगत नीयता की प्रार्थना और आनंद में प्रवेश प ओमकार मंत्र गायत्री ंदा परमात्मा ऋषि अंतर्यामी देवता अंतर्यामी प्रीति अर्थे प्रभु आनंद अर्थे प्रभु कृपा अर्थ प्रभु प्रीति अर्थे जपे विनियोगा हम प्रभु तेरी प्रीति के लिए तेरा नाम जपेंगे कृपा के लिए तेरा नाम जपे तेरे आनंद के लिए हम तेरा नाम जपते हैं दाता तू अपनी कृपा बरसाना अपने आनंद
का प्रसाद हमारे हृदय में भरना संसार के पाप ताप में हम सदियों से भटकते आए तस्मा कारु भाविन तू अपनी कृपा कर करुणा कर दे ओम ओम ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ दया सिंधु ओम परमात्मा ने ओम ओम ओम ओम ओम ओ ओ ओ ओ ओओओओ [संगीत] हरि ओम ओम ओओ ओम नमो भगवते वासुदेवा [संगीत] वासुदेवाय इष्ट देवाय आत्म देवाय प्रभु देवाय आनंद देवाय माधुर्य देवाय ओम नमो भगवते वासुदेवाय ओम नमो ओ भगवते वासुदेवाय ओ नमो भगवते वासुदेवाय वासुदेवाय प्रभु देवाय इष्ट देवाय आनंद देवाय संत देवाय भगवंत देवाय ओम
नमो भगवते वासुदेवा हरे हरे हरे हरे हरे हरे हरे हरे हरे हरि हरि हरि हरि हरि ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओम ओम ओम ओम बिन फेरे हम तेरे [संगीत] ओ नारायण नारायण नारायण नारायण नारायण नारायण नारायण आज से एक उत्तम औषध है तन मन के लिए सदैव प्रसन्न रहना ईश्वर की सर्वोपरि भक्ति हैसा महापुरुष का वचन है और यह हास्य आरोग्य को मन को मति को पुष्ट करता है ओम शांति आनंद नारायण नारायण कोई सत्कर्म ब्राह्मण करवाता तब
भी तिलक करते हैं और महिलाओं को तो आदेश है कि रोज तिलक करें यहां पर क्यों करते हैं पता है यहां पर तिलक करने का बहुत विशेष विशेष फायदा है अपन जो खाते हैं उससे जो रस बनता है ना वो सारे शरीर को चलाता है तो उसमें भी जो अच्छा सार रस होता है जैसे दूध से मक्खन ज्यादा कीमती होता है और मक्खन से घी ज्यादा सार होता है ऐसे रसों में भी जो सार रस होता है यहां तिलक करने से व सार रस इस केंद्र को विशेष विकसित करता है तो यहां केंद्र जो है
इसको शिव नेत्र कहते हैं विचार शक्ति का केंद्र तो ब्राह्मण लोग जब भी कोई कर्म कराते तो मंगलम भगवान हम पहले तिलक करेंगे करते ना तो यहां ऊंचे विचार और ऊंचा मनोबल विकसित होने के लिए यहां तिलक किया जाता जो बच्चे सुबह ऐसे ही अपनी उंगली यहां लगा के फिर मथा टेक कार्यक्रम करते हैं तो उनको सुबह-सुबह जो लाभ होता है यह मथा टेक कार्यक्रम से देखो हाथ मिला दिए दोनों और मथा टेक दिया देख लो दोनों हाथ ऐसे मिला दए अब पड़े रहे सिर उठाना नहीं दोनों हाथ मिल जाए हाथ जोड़ के हां सिर
धरती पर लगा रहे ओम शांति ओम आरोग्य ओम विद्या ओम ओम हमारी विद्या जागृत हो हमारे आरोग्य के कण बढ़े हमारी शक्ति का विकास हो ओम ओम ओम ओम शांति ओम आरोग्य ओम ओम ओम सफलता ओम ओम साहस मन में मन में बोलना ओम ओम विद्या शक्ति ओम ओम साहस धैर्य ओम ओम पराक्रम ओम ओम परमात्मा शक्ति जागृत हो रही है ओम ओम ओम ओम ओम ओम विचार शक्ति परमात्मा शक्ति ओम ओम ओम बस धीरे धीरे अब बैठ [संगीत] जाओ इस प्रकार रोज करें कोई विद्यार्थी ऐसा अगर कोई विद्यार्थी रोज करते हैं तो जैसे बीरबल
कितना बुद्धिमान हो गए कि नहीं हो गए दूसरे भी कई से महापुरुष बन गए तो यह केंद्र जितना ज्यादा संवेदनशील होता है उतना व आदमी ज्यादा विचार वान प्रभाव वान होता है तो महिलाओं को रोज तिलक करने को क्यों कहा कि महिलाएं बेचारी श्रद्धालु होती है थोड़ी भोली भाली होती है तो महिलाओं के भोले भाले पन का कोई दुरुपयोग ना करें और मरने के बाद भी उनकी आत्मा को कोई ऐसे आत्मा फसावे नहीं इसलिए महिलाओं का भी विचार शक्ति बढे इसलिए रोज महिलाओं को तिलक करने को कहा और संत महात्मा भी रोज तिलक करते कि
परमात्मा के विचार बढ़ेंगे तभी तो दूसरों को सत्संग सुनाएंगे और आम आदमी के लिए जब भी कोई अच्छा कर्म करते तो पहले तिलक करने तो ये तिलक क्यों करते समझ गए ना ऐसे मंदिर में घंट क्यों बजाते कि घर से चले हैं तो मन में कई विचार चलते रहते हैं जब घंट बजाना होता है तो हाथ ऊपर होता है हाथ ऊपर करने से अपना मन और प्राण भी ऊपर आएगा और फिर घंट को जोर से य मारते तो आवाज आता है तो विचारों के जो और तरंग चल रहे हैं उसको उस के विचार के व
तरंग तोड़ देंगे भगवान के दर्शन कर तो उसकी खुशी और उसकी प्रार्थना का प्रभाव अपने पास रहेगा जैसे थाली में परोस तो पहले साफ कर देते हैं ऐसे ही अपने दिल दिमाग में कुछ भगवान की कृपा को भरना है तो दिल दिमाग को साफ करने के लिए घंटी बजाई जा तो मंदिर में आरती में दिया क्यों जलाते हैं भगवान के अंधेरा है अपन जाकर उजाला करते ऐसा है क्या भगवान का तो तो उजाला है दिया इसलिए जलाते हैं कि वातावरण में जो जर्म स होते हैं वातावरण में जो हल्के परमाणु होते हैं वे मि और
दिया मोमबत्ती जलाते ना तो कार्बन पैदा होता है लेकिन दीप जलाते हैं तो दीप ज्योति उससे सात्विकता पैदा होती है तो दीप ज्योति परब्रह्मा जैसे अंतरात्मा ज्योति स्वरूप है उसको नहीं जाना तो बाहर की ज्योति जगाई ज्योति से ज्योत जगाओ सतगुरु मेरा अंतर तिमिर मिटाओ अंतर में युग युग से सोई चिति शक्ति को जगाओ तो यह अंदर की जत जगाने के लिए बाहर की जत भी जगाते हैं और बाहर का वातावरण में भी लाभ होता है तो बोले बाबा जी यह तो समझ में आ गया बहुत बढ़िया अच्छा जन है भगवान के यहां फूल क्यों
ले जाते हैं शिव जी के यहां बिली पत्र ले जाते हैं शंकर भगवान के पास बिली पत्र लेकिन विष्णु भगवान के पास तो बिली पत्र नहीं ले जाते और हनुमान जी के पास तो आकड़े के फूल ले जाते हैं तो ऐसा क ये सीख लोगे तो दूसरे विद्यार्थियों से पूछोगे उनको आएगा नहीं फिर तुम बताना तो बोलले के बहुत जानते तुम उनके मुखिया बन जाओगे समझ गए तो बोले भगवान के यहां फूल क्यों ले जाते हैं गुरु के पास भगवान के पास तो भगवान का ज्ञान और आनंद की सुवास से गुरु के ज्ञान और आनंद
की सुवास से हमको फाय होता है तो हम तो उनको ज्ञान और आनंद की सुवास नहीं दे सकते तो हम फूलों की सुवास उनके आगे अर्पण करते ताकि उनकी सुवास के बदले में हम यह अर्पण करें और उनके ज्ञान की सुवास हमको मिले और फिर गुलाब के फूल सबसे ज्यादा प्यारे क्यों है सभी फूलों में गुलाब के फूल का ज्यादा तो गुलाब के फूल में जो सुग वो दिमाग को पुष्ट करती है सुगंधिम पुष्टि वर्धनम द से दूसरी बात है कि गुलाब के फूलों में वायु पित्त और कफ तीन प्रकार के दोषों से ही बीमारी
होती है व तीनों प्रकार के दोषों को शमन करता है गुलाब के फूल जैसे आंवला स्वास्थ्य के लिए है ऐसा सुगंधि में और स्वास्थ्य में गुलाब का फूल दूसरे फूल का गुलकंद नहीं बनता गुलाब के फूलों का गुलकन बनता है गुलाब के फूलों को धो के उनकी पंखुड़ियां निकाल के फिर उनको निचो देते हैं मशीन है पानी से अलग फिर में शक्कर मिलाकर तपे में रख देते हैं चंद्रमा की चांदनी रोज पड़े कपड़ा बांध देते सूरज के किरण पड़े दो महीने तक चंद्रमा की चांदनी और सूर्य के किरणों से गुलाब के फूलों में जो शक्कर
मिश्रित है ये दोनों का मिश्रण हो जाएगा और सूर्य तत्व और चंद्र तत्व यह दोनों उस गुलकंद में आएगा फिर तमाल पिसती और दूसरी कुछ जो चीजें बूटियां वह डालते हैं तो यह खाने से शरीर में जो गर्मी है महिलाओं की जो भी स्त्री संबंधी तकलीफें है मासिक की हैय व उसमें फायदा होता है और पुरुषों को भी गर्मी संबंधी तकलीफ है फायदा होता है इसलिए गुलाब के गुलकन का महत्व है लेकिन गुलकंद बनाने की विधि है कि जैसे सूर्य के किरणों से चंद्रमा के किरणों से अपना ये वृक्ष फल फूल लान सारे पुष्ट होते
हैं चंद्रमा के और सूरज के किरण से खेती को खोराक मिलता है ना तो चंद्रमा और सूर्य के किरण उस गुलकन में पड़े 60 दिन तक 70 दिन तक कभी-कभी 80 दिन तक रखते ऐसे ही बाहर पड़ा रहता था हिलाते थे सूरज के किरणों में चचंदा अच्छा तो स्वामी जी माता-पिता को प्रणाम करने से क्या फायदा होता है मां-बाप को प्रणाम क्यों करें बो वैसे ही माता-पिता तो दयालु होते हैं बच्चे का अच्छा चाहते हैं ना लेकिन उनको प्रणाम करने से उनका हृदय और भी प्रसन्न होता है तो उनका आशीर्वाद मिलता है तो फिर बच्चों
क्योंकि आयु विद्या यश और बल चत्वारि वर्धन ते आयु विद्या यशो बलम हा आयु विद्या यशो बलम बढ़ता तो सूर्य नारायण को अर्घ क्यों देते हैं याद शक्ति याद शक्ति आरोग्य तो जल कैसे दिया जाता कि लोटा इतना ऊंचा करके ताकि सूर्य के किरण यहां आ ग तो यहां ज्ञान शक्ति का केंद्र है उसमें बल प जाए अच्छा जी अब एक था राजा एक थी रानी शुरू हो गई कहानी कौन था राजा कौन थी नी क्या थी कहानी बोलो बच्चा कौन था राजा कौन थी रानी क्या थी कहानी बोले आत्मा परमात्मा था राजा और उसकी
माया है रानी और यह दुनिया है कहानी बचपन कहानी हो गया कि नहीं हो गया दो साल पहले की बात अभी कहानी हो गई दो दिन पहले की बात कहानी हो गई तो यह राजा आत्मा जागता है तब उसकी वृति विचार संख उठते हैं रानी और जगत की कहानी शुरू हो जाती फिर रानी राजा के चरणों में शांत हो जाती जगत की कहानी [संगीत] उस समय कुछ भी कहानी नहीं जब जगाओ तो फिर कहानी शुरू हो जाती है ना तो आत्मा है राजा आत्मा परमात्मा है राजा और उससे जो विचार की धारा उठती है वह
है रानी और फिर विचार की धारा से जो व्यवहार होता है जगत का वह है कहानी यह तो तुम बचपन में सीख रहे हो तुम्हारे मां-बाप तो इस उम्र में भी यह बात पहली बार सुनते हैं उनको भी विचारों को ऐसा ज्ञान नहीं मिलता था जो तुमको मिल रहा है ना बाल संस्कार केंद्र से वो तुम्हारे बाप को और मां को भी नहीं मिला था उस उम्र में जितना तुमको अ भी मिल रहा है सच्ची बात है ना कि पूर्णिमा का व्रत क्यों रखते हैं अथवा पूर्णिमा को चंद्रमा ज्यादा आनंदित आनंद देने वाला कैसे लगता
है पूर्णिमा को चंद्रमा ज्यादा आनंद बरसाने वाला क्यों लगता है कि पूर्णम के दिन चंद्रमा की 16 कला से चंद्रमा विकसित होता है और 16 कला से जो चंद्रमा विकसित है उसको देखने से व खुद अपने आप में जैसे खा पी के आदमी खुश होता है ना ऐसे ही चंद्रमा 16 कलाओं से तृप्त होता है तो उस दिन अपने को भी खुशी ज्यादा होती चंद्रमा के दर्शन करने से तो चंद्रमा अपने मन के साथ चंद्रमा का संबंध है और अपनी बुद्धि के साथ सूर्यनारायण का संबंध है तो बुद्धि के देवता कौन है और मन के
देवता चंद्रमा प्राणायाम क्यों करना पड़ता है प्राणायाम से क्या लाभ होता है और प्राणायाम कैसे करने चाहिए बोलो प्राणायाम क्यों करते हैं प्राणायाम से क्या लाभ होता है और प्राणायाम कैसे करना चाहिए बढ़िया ज्ञान है ना ये ज्ञान अच्छा लगता है [संगीत] प्राणायाम क्यों करना चाहिए बोलो आयुष्य आरोग्य पुष्टि ठीक और म मन में शांति पूजा में मन लगता है शरीर के रोग दूर होते ठीक है और स्वास की प्रक्रिया स्वासो स्वास गति का नियमन होने से भी आयुष्य बढती है ठीक [संगीत] और सक्षम नारी का द्वार खुलने में मदद मिलती है जो सूक्ष्म ईश्वर
से मिलाने में बड़ी महत्त्वपूर्ण नाड़ी है और देखो जी प्राणायाम करने से यह सब जो बोले वो फायदे तो लेकिन एक और फायदा होता है विशेष रूप से ठीक है यह भी ठीक बात [संगीत] है वरवा और तेजवान होते ठीक है ये बात भी जो शरीर के अव निष्क्रिय जैसे हो जाते हैं या रक्त का प्रसारण ठीक नहीं होता प्राणायाम करने से वह भी ठीक होने लगता रोग प्रतिकार शक्ति बा ठीक है देखो यह सब कर करा के प्राणायाम से केवली कुंभक जिसका केवली कुंभक हो जाता है उसकी इच्छा तो पूरी हो जाती लेकिन उसके
नाम की मनौती मानने वाले की भी इच्छा पूरी हो जाती केवली कुंभक प्राणायाम करने करके एक केवली कुंभक तक पहुंच जाए तो उस आदमी की जो भी इच्छाएं होगी व पूरी हो जाएगी लेकिन उसके नाम की कोई मनौती भी करेगा ना तो उसकी भी इच्छा पूरी जाए ऐसे एक लड़का एलएल भी किया था कहीं प्रैक्टिस नहीं हो रही थी खूब वकील भी बहुत हो गए आजकल सत्संग में यह बात सुनी उसने और केवली कुंभक किया उसने प्राणायाम करके धीरे-धीरे केवली कुंभक तक पहुंच गया मतलब प्राण शांत हो जाए पहले करे रोके छोड़े ऐसा अभ्यास करते
करते फिर चुप बैठे फिर श्वास अंदर जाए गिने ओ बाहर आए तो एक ऐसे श्वास गिनते गिनते भी भूल जाए फिर शांत तो केवली कुंभक मतलब या तो बाहर स्वास रह गया या तो अंदर रह गया आधा मिनट पौना मिनट बस इतने ही हो गया तो केवली कुंभक की सिद्धि आ जाती उस केवली कुंभक वाले महापुरुष का प्रभाव अद्भुत होता है राजे महाराज तो क्या प्रधानमंत्री भी उनसे आशीर्वाद लेकर प्रधानमंत्री बन जाते लोग ऐसा महात्मा को जानते हो तुमने देखा है कभी तो सब प्राणायाम की गुरु कृपा की शक्ति का प्रभाव होता है आत्मज्ञान का
प्राणायाम से ईश्वर साक्षात का भी शीघ्र होता है और सहज में होता है लेकिन प्राणायाम एक दिन 20 करे दूसरे दिन 15 करे तीसरे दिन 22 करे तो बीमार हो जाएगा एक दिन 20 पांच करें फिर हफ्ता तक पांच फिर धीरे धीरे सात आठ फिर सात नहीं करे न करे तो बाद में आठ नहीं करें फि 10 11 प्राणायाम सुबह करे तो 11 पही रोज करें एक दिन 13 एक दिन 11 ऐसा नहीं फिर व केवली कुंभक तक भी पहुंच जाएगा और निरोग भी रहेगा और प्राणायाम करने से क्लास में और विद्या विद्यालय में और
सब जगह सबसे कुछ अलग होगा