ये सोच लो और ये मैं बता दूं हां पहले मैं ये सोच मुसलमान मुसलमान होने के बाद मम्मी पापा के साथ आपको बहुत अच्छा होना पड़ेगा। अभी जितना अच्छा हो उससे ज्यादा अच्छा होना पड़ेगा। अच्छा वैसे आपको ऐसा क्यों लगता है कि मुसलमान मुसलमान वही जाऊंगा कोई लॉजिकल इंसान कोई इसका इंकार कर नहीं सकता। आई डोंट सी द पॉइंट क्या आप बिना वजह आप जिद करो। हां करना चाहो तो आपकी मर्जी है। उस हम भाई इस क्रिएटर ने स्पेस टाइम को बनाया है या स्पेस टाइम पहले से था। व्हाट यू थिंक शिवा भाई? भाई इसके
बारे में वही मेरे भाई वही जवाब है जो साइंस का है कि हमें बिग बैंग से पहले का नहीं पता। और बिग बैंग वजूद में है उसके पहले का हमें नहीं पता। बिग बैंग से दुनिया का शुरू हुआ आगाज़ हुआ है। उसके पहले हम नहीं जानते। ना लॉजिकल लॉजिकल होके सोचो। जब हम कह रहे हैं कि क्रिएटर है तो डू यू थिंक स्पेस ऑफ़ टाइम का भी क्रिएटर होगा या स्पेस और टाइम का क्रिएटर नहीं होगा। लॉजिकली सोच के बताओ। भाई दोनों बातें हो सकती है। हो सकता है कि नहीं भी हो। हो सकता है
कि वो भी मे बी यस मे बी नो। ठीक है? तो हम अभी इसकी तो बात नहीं करते। क्योंकि अगर हम ये वाली बात करेंगे तो ये मेरा वाला स्टांस हो जाता है। मैं अभी इसकी बात नहीं करता हूं। ठीक है? ये आपका वाला अभी हम मे बी नो पे चलते हैं। हम बात करते हैं यहां पे शिवाजी की बात करते हैं। ठीक है? ठीक है। अगर स्पेस और टाइम का क्रिएटर नहीं है। दिस मींस ये स्पेस और ये जो टाइम है ये इटरनल हो जाएगा। इटरनल तो भाई इटरनल का मतलब ये है कि हमें
बिग बैंग से पहले का नहीं पता है। इटरनल का मतलब अगर ओ यार बिग बैंग बीच में कहां से आया था? इटरर्नल की बात करो। इटन की बात करो। इटल आपको माशा्लाह से अंग्रेजी आती है। यू नो व्हाट द इटरलन मीन्स। इटरनल मतलब हो भी सकता है। मुझे पता नहीं है। मैं क्या बोलूं? हो सकता है। अरे भाई जब एक चीज कभी बनी ना हो बस हो उसको इटरर्नल कहते हैं या नहीं कहते? हां कहते तो हैं। और जिसका कोई बनाने वाला हो जिस चीज का कोई बनाने वाला हो तो वो चीज जो बनती है
वो इटरनल होती है। नहीं नहीं होती ना। तो अगर स्पेस और टाइम का कोई बनाने वाला नहीं है तो ये स्पेस और टाइम इटरलन हुआ कि नहीं हुआ? अकॉर्डिंग टू दिस लॉजिक हुआ। दिस लॉजिक एक ही लॉजिक हो गया। लॉजिक कोई और लॉजिक है तो वो भी लेकर आओ भाई इटरलन का मतलब ये है कि जो चीज हो कर रहा हूं कि जो यूनिवर्स है वो इटनल है। आई एम नॉट क्लियरिंग दैट बट अरे ना हम हम हम इटर्नल की बात कर इटरलन का मतलब तो यही होता है ना जो चीज हो उसका कोई बनाने
वाला ना हो राइट हां हां हां अभी हम अभी हम मे बी नोट पर हैं जो आपने कहा था ठीक है अनुरा मुझे नहीं पता हो सकता है ये मे बी नोट का मतलब क्या है कि भाई स्पेस और टाइम का कोई क्रिएटर ना हो मे बी ये भी पॉसिबल है कि कोई उसके क्रिएटर नहीं है दिस मींस कि ये स्पेस और टाइम जो है वो इंटरनल हो जाएगी अगर उसका क्रिएटर ही नहीं है तो ठीक है ठीक है अगर ये इंटरनल हो जाती है इसका मतलब ये है कि हमारे पास टाइम भी हमारे पास
स्पेस भी और ये क्रिएटर तो मेरा है जिसको अभी हम खाते में नहीं लेकर आ रहे ये क्रिएटर तो मेरा है। हमारे पास तीन चीज़ इस वक्त इटर्नल है। एक वो टिमेट है जिसने बाकी तमाम चीजें बनाई है। इसने ये यूनिवर्स बनाई है। ठीक है? ठीक है? पर स्पेस और टाइम ये खुद में इटरनल है। समझे? अच्छा हम टाइम की बात कर रहे हैं। टाइम जो है वो पास्ट प्रेजेंट फ्यूचर में वर्क करता है। ऐसा ही है? हम कीप ऑन चेंजिंग। एक वक्त आज है वो पास्ट ऐसा बन जाएगा। आपके प्रेजेंट में एक नया वक्त
आएगा जो फ्यूचर से आता है। तो इस तरह से चीज़ चलती रहती है। ठीक है? दिस। अच्छा। अगर टाइम इटरर्नल है दिस मीन कि यह जो टाइम में आना और जाना जो है यह इनफिनिट हो जाता है। ठीक है? और ये इनफिनिट हो गई इनफिनिट रिग्रेस बनाता है। टाइम का इनफिनिट होना पॉसिबल है लॉजिकली लॉजिकल सोच सकते हो। भाई मैं इनफाइनाइट रिग्रेस मुझे सेंस नहीं बनाती है। मैं इसके बारे में पहले पढ़ा था थोड़ा सा। तो मुझे इनफाइनाइट रिग्रेस मुझे सेंस नहीं बनाती है। आप बेटा अभी तो टाइम में बता दो मुझे। मुझे पता है
आपको सेंस नहीं बनाती है जो कि बहुत अच्छी चीज है। पर आपने कहा कि हो सकता है कि टाइम जो है वो विठ्ठल अलोसा को बनाने वाला ना हो। अगर टाइम इनफिनिट हो जाए इसका मतलब क्या होगा? हम आज एक्सिस्ट कर सकते हैं। सर नहीं शायद नहीं यकीनन नहीं कर सकते हम। यकीनन हम एक्सिस्ट नहीं कर सकते। टाइम इनफिनिट हो ही नहीं सकता। उसको फाइनाइट होना मस्ट है। इनफिनिट हो ही नहीं सकता। ये इतना बड़ा केस है। ये इतना बड़ा केस है कि इसीलिए कोई भी एथिस, डायग्नोस्टिक, स्केप्टिक इवन मैं साइंस से बाहर निकल के
बात कर रहा हूं। साइंस से बाहर मैं साइंस के अंदर रह के बात नहीं कर रहा हूं। क्योंकि साइंस कभी भी इंटरनल और इंटरनेट पे बात नहीं करता। इन एब्सोल्यूट सेंस वो कभी बात नहीं करता। हम अभी एब्सोल्यूट सेंस की बात कर रहे हैं। अगर कोई भी चीता पतला बंदा भी हो ना कोई भाई मुझे बड़ी नॉलेज है। मैं आके साबित करने के लिए तैयार हूं कि टाइम जो है वो इनफिनिट है। वो नहीं कर सकता। उसको पता है कि टाइम इनफिनिट नहीं हो सकता। क्योंकि अगर टाइम इनफिनिट होता तो आज हम एक्सिस्ट कर ही
नहीं सकते थे। आज का टाइम कभी हो ही नहीं सकता था। तो अगर आज का टाइम नहीं हो सकता था बट वी नो के अरे कैपिटल में क्यों लिख दिया? ये बदतमीजी होती थी। पता है अगर सारी चीजें कैपिटल में लिख दूं तो एक बदतमीजी हो जाती है। पता है ना ये कि नहीं पता? हां ये पता है उसको बोलते हैं हमारे यहां बताते थे कि जो गुस्से में मैसेज लिखते हैं उस तरह से उसको कैपिटल लेटर में लिखा जाता है। हां ये अच्छी चीज होती है ना जब आप किसी पढ़े लिखे बंदे से बात
कर रहे होते हैं उसको सारी छोटी-छोटी चीजें समझ में आ रही होती है। फिर मजा भी आता है उसे बात करने में। हमें ये आपने अगर हम इस पॉसिबिलिटी को मान लें जो भी लोग देख रहे हैं प्लीज मेरे साथ फॉलो करो। ये एग्स्टिक स्कैपिंग बनने में कोई फायदा नहीं है। अकल इस्तेमाल कर लो। अगर हम ये कहते हैं कि भाई टाइम का बनाने वाला कोई नहीं है और हम अगर इस चीज को लेके चल रहे हैं इस डाउट को लेके चलते हैं। दिस मींस क्या टाइम जो है वो इटरनल हो जाता है। अगर टाइम
इटरनल है दिस मींस क्योंकि टाइम जो है वो प्रेजेंट पास्ट फ्यूचर इसमें रन कर रहा होता है। तो ये एक इनफिनिट रिग्रेस बनाता है। इनफिनिट चेन बनाता है। जिसका मतलब ये होता है कि आज कुछ भी एक्सिस्ट नहीं होता। अगर टाइम इनफिनिट हो जाए। मगर हम जानते हैं कि हम आज एक्सिस्ट करते हैं। हम जानते हैं ना ये चीज हम तो तो क्या कंक्लूड हुआ? टाइम इनफिनिट है। ओ सॉरी टाइम इंटरनल है। लाइट टाइम इटरनल है यार। यहां पे मैं थोड़ा-थोड़ा फस रहा हूं। क्या बोलूं? अरे फंसने वाला नहीं यार। क्या मोहब्बत से बात कर
रहे हो? टेंशन ना लो यार। टेंशन ना लो। देखो सीधी सी बात है यार। इटर्नल तो नहीं है भाई। मैं तो यही कहूंगा कि नहीं है इटरर्नल। देयर मस्ट बी अ बिगिनिंग। हां। तो देयर मस्ट बी बिगिनिंग। तो जब इसकी बिगिनिंग है तो इटन नहीं है। जो चीज़ इटरर्नर है फिर उसका क्रिएटर है या नहीं है? अगेन भाई फिर से वही बात। आई डोंट नो। मतलब ऐसा कैसे मैं बोलूं कि क्रिएटर है जब मुझे पता ही नहीं है तो ओ नो नो नो अब पता है ना अगर क्रिएटर नहीं है तो इटरर्नर होगा अगर वो
इटरनल नहीं है तो वो बना है और जब कोई चीज बनती है तो उसको कॉज चाहिए होता है डिअर हम चाहिए कॉज नहीं चाहिए मैं क्रिएटर को कॉज कर लेता हूं यार टेंशन ना लो यार मैं चलो यार अभी क्रिएटर में मजा नहीं आ रहा ना हम उसको कॉज कर लेते हैं सी फॉर क्रिएटर सी फॉर कॉज और भाई ये जस्ट एक अजमशन है फिर इसका क्या प्रूफ होगा अगर हम मान भी ले कि दे ओके अगर हम मान भी लेते हैं कि अगर एक कॉज होना चाहिए तो हमारे पास उस कॉज को एविडेंस ही
नहीं है हम लॉजिकली हम तस्लीम कर सकते हैं बट शायद कुछ ऐसी साइंटिफिक थ्योरी हो इसके बियों्ड नहीं चाहती हो तो हम कैसे बोल कुछ भी तस्लीम कर लेंगे उसमें साइंस में जाते हैं ना अभी आप लॉजिकली तो एडमिट कर लो ना हर चीज लॉजिक पे करी है ना साइंस भी लॉजिक पर है कि इलॉजिकल है साइंस लॉजिक पर ही है ना हम तो बस तो एक चीज अगर लॉजिकली प्रूव हो जाए तो साइंस उसको डिस्रूव कर सकती है तो आपके पास एविडेंस के लॉजिकली कोई चीज प्रूव हो गई हो साइंस ने उसको डिस्पू किया
हो कभी हुआ ऐसा मेरी जानकारी में नहीं है फिर यही तो मैं भी कह रहा हूं लॉजिकली चलो यार ठीक है मैंने तो क्रिएटर से कॉज भी कर दिया हां जी तो टाइम का कॉज है या नहीं है ठीक है है तो अब आप मे बी नो से निकल के मे बी नो करना चाहिए था मे बी नो नहीं करना चाहिए था आप बोलोगे यार नो नो क्या नोट करो उसको मे बी नो से निकल के मे बी यस में आ गए हम बट अगेन जस्ट लॉजिकली नॉट प्रूफ नॉट प्रूव अरे मेरे भाई आप लॉजिकली
आ गए ना अभी मैं आ जाता हूं प्रूफ अभी मैं प्रूफ की दुनिया में आ जाऊंगा ना तो क्या लॉजिकल रीजनिंग्स प्रूफ नहीं होते कई बार तो नहीं होते हैं कई बार नहीं होते भाई नहीं होते भाई हमारी प्रिमाइस ही अगर गलत हो हमारी प्रिमाइस ही बिना प्रूफ के हो तो फिर आगे चलके उसका कंक्लूजन थोड़ी हो ही जाएगा अरे यार उस बात नहीं कर रहे हां ओ भाई अभी हम प्रिलिमिस के अंदर गलती की बात करें। अभी हमने सही सेट किया ना सब कुछ। अभी हमने कौन सी गलती की है? अब तो सबको सेट
सही किया ना हमने। अगर हां तो अगर लॉजिक देखो अगर लॉजिकल रीजनिंग को पढ़ाओगे ना तो फिर तो साइंस भी नहीं बचती है। क्योंकि साइंस के जितने भी रिपोर्ट्स और डेटा होते हैं उसको वेरीफाई कौन करता है? लॉजिक करती है या कोई साइंस अलग से चीज चल फिर के आती है वो आपको बताती है। भाई फिर इस पे डिपेंड करता है। इंपेरिकल एविडेंसेस क्या है? मतलब मुझे साइंस एविडेंससेस को वेरीफाई कौन करता है? अकल करती है या साइंस खुद से कर रही होती है? अकल करती है। तो फिर खत्म हो गई बात। हर चीज आप
एंड पे आके अलक पे बैठे हो ना यार। अभी हम अकली तौर पे इसको कर रहे हैं ना। बात ही खत्म हो गई। यही तो कह रहे हैं। अभी हम इसको भी और अच्छे से हल कर लेंगे। टेंशन ना लो। सारी चीज़ अकल पे आके रुकती है। हां। तो आ गए। मे बी एस पे आ गए। टाइम का क्रिएटर है कॉज है। मान गए या अभी भी डाउट है। भाई डाउट तो तब तक रहेगा जब तक मुझे एविडेंस ना मिले। बाकी हां अरे सेक ऑफ़ आर्गुमेंट आर्गुमेंट के लिए मैं एडमिट कर लेता हूं कि ठीक
है। ना फॉर द सेक ऑफ लॉजिकल आर्गुमेंट। बोलो। ओके। फॉर द सेक ऑफ़ लॉजिकल आर्गुमेंट दैट दे मस्ट बी अ बिगिनिंग। क्योंकि इनफाइनाइट दिख रहे थे। हम अभी एक्सिस्ट ही नहीं करेंगे। सेंस नहीं बनेगा। हां हां हां फिर हम हम पहले इंप जाएंगे ना बाद में जाएंगे ना पहले हम इसी को खत्म कर लेते हैं। अब सिर्फ एक रखिए स्पेस। हम ठीक है? अच्छा स्पेस जो है ना स्पेस दो पॉइंट्स के बीच के फासले का नाम है। हां। ठीक है। एग्री। तो अगर मैं कहता हूं कि जो मेरा स्पेस है ये इटरलन है। क्योंकि अगर
इसका क्रिएटर नहीं है तो ये इटरर्नल हो जाएगा। हम और अगर ये इटरनल है तो एटलीस्ट एटलीस्ट मेरे पास दो पॉइंट्स तो होने चाहिए। हम वरना स्पेस तो रहेगा नहीं ना यार। अच्छा ये दो ये जो दो पॉइंट्स हैं ये क्या बनाते हैं हमारे पास? 2D बनाते हैं हम 3D में। तो अगर हम 3D के अंदर हैं तो मिनिमम कितने पॉइंट्स चाहिए मुझे? 3D हम मैं पूछ रहा हूं मिनिमम थ्री या फोर चाहिए? मुझे पता नहीं है। यहां फाइव चाहिए। लंबाई लंबाई, चौड़ाई, ऊंचाई यार सिक्स है। हां। अब देख रहे हो ना? पॉइंट्स चेंज हो
रहे हैं। अब आप मान लो चलो सिक्स है। ठीक है? सॉरी। ठीक है? पॉइंट्स चेंज हो गए। ठीक है? तो स्पेस बनने के लिए ये छह पॉइंट्स चाहिए आपको कम से कम क्योंकि हम 3D वर्ल्ड के अंदर हैं। हम इससे ज्यादा की बात नहीं कर रहे। ये जो छह पॉइंट है ये स्पेस के अंदर है। स्पेस से बाहर हैं। छह पॉइंट स्पेस के अंदर है या बाहर हैं। स्पेस के स्पेस के क्या बोलूं मैं? स्पेस के स्पेस के अंदर ही होंगे। बट स्पेस के एज पे भाई। देखो ये है एक पॉइंट। हां हां एक मिनट
यार। मैं x लिखता हूं क्योंकि वो मुझे करने नहीं देगा। हां ठीक है। ठीक है। ठीक है। ये एक पॉइंट है। ये दो पॉइंट है। इन दो पॉइंट्स के बीच में मेरे पास स्पेस है। ठीक है? हम अगर ये दो पॉइंट हो ही ना मेरे पास स्पेस बनती नहीं है। तो ये दो पॉइंट स्पेस के बाहर होंगे। स्पेस के अंदर नहीं हो सकते। क्योंकि अगर मैं कहूं कि ये ये अगर x भी स्पेस के अंदर आ जाएगा तो यानी इसके बाहर स्पेस मौजूद है ना। और अगर इसके बाहर स्पेस मौजूद है तो फिर इसके बाहर
मुझे एक और x चाहिए होगा। मुझे एक अब मैं अगर मैं उसको चलो y से है ना वो कर देता हूं। रिप्रेजेंट कर देता हूं इसको। तभी तो इसके अंदर ये दो x रहेंगे। वरना क्या ऐसे दो x रहेंगे? तो मैं कह रहा हूं कि शायद इसके बाहर अगर मैं इसके बाहर ये y करता हूं तो फिर मेरा सवाल ये हो जाएगा। अच्छा ये y जो स्पेस बना रहा है ये y दोनों उस स्पेस के अंदर के बाहर है। अगर आप कहते हो स्पेस के अंदर है तो फिर इस y के बाहर भी मुझे कुछ
और चाहिए। हम तो ये तो ये आप फिर से एक इनफिनेट चेन बनाना शुरू कर दोगे। हम हम जो कि पॉसिबल ही नहीं है। ठीक है? और अगर आप कहते हो कि यार भाई ये फाइनल Z है। ये Z स्पेस के बाहर है। मगर ये Z खुद किसी स्पेस में नहीं है। क्योंकि अब अगर मैं इसको स्पेस में लेके जाऊंगा तो मुझे फिर एक और इनफिनिटी के लिए शुरू करना होगा। तो अगर ये दोनों Z जो है लेट्स सपोज़ कि आप कह रहे हो कि ये जो हमारे पास जी है ये आउट ऑफ स्पेस है
तो फिर मेरा सवाल ये है कि ये जो आपका दो जो जी है ये आउट ऑफ स्पेस कैसे एक्सिस्ट कर रहे हैं? क्योंकि आपका जो प्राइमरी सवाल था वो ये था कि भाई ये खुदा स्पेस से बाहर कैसे? स्पेस और टाइम के बाहर यू रिमेंबर हम अब क्या करना है? खुदा को मानना है कि इस जेड को आउट ऑफ स्पेस मानना है क्या करना है वो आपकी मर्जी आप जो बोलो भाई सिस्टम कैसे खुदा को मान ले अभी सवाल तो अभी वही है कि खुदा बनाने से पहले था कहां स्पेस को आ गया आप नहीं
मानो ना भाई मैं तो कह रहा हूं क्रिएटर को कॉज कर लो मैंने कौन सा जबरदस्ती की है मैं तो कह रहा हूं उसको कॉज मान लो भाई आप अगर स्पेस को कहते हो कि ये इटरनल है अगर इटरनल है ये मुझे कोई मसला नहीं है प्रॉब्लम आपके लिए है क्योंकि हमने कहा कि मिनिमम दो पॉइंट्स तो चाहिए वरना स्पेस को तो एक्सिस्ट कर नहीं सकती स्पेस मोहताज है कम से कम दो पॉइंट्स का दो पॉइंट से बल्कि 2D भी दो पॉइंट से नहीं बनता। वन डी बनता दो पॉइंट से तो ये भी मैंने गलत
लिखा है। 2D भी नहीं बनेगा। वन डी बनेगा। हम है 3D में। 3D के लिए हमें चाहिए छह पॉइंट्स कम से कम। हम जब वो छह पॉइंट्स से हमने जो 2D बनाया तो हमने कहा यार अगर ये X के अंदर भी है तो ये X खुद किसी स्पेस में है या स्पेस से बाहर है। आपने कहा ये X स्पेस के अंदर है। तो यानी इसके बाहर स्पेस मौजूद थी। अगर इसके बाहर स्पेस थी तो वो हमने Y से ले लिया। फिर हमने कहा अच्छा ये Y जो था ये खुद किसी स्पेस में है या ये
भी स्पेस से बाहर है। अब आप उसको स्पेस से बाहर कर नहीं सकते थे। क्योंकि स्पेस से बाहर करोगे तो फिर वो कॉज़ वाली बात आ जाएगी। वो अभी मानी ही नहीं हमने। तो हमने यहां पर भी बोला बाहर स्पेस से इसे बाहर निकालो। तो फिर Z आ गया। फाइनली आप थक गए। आपने बोला यार ये तो मैं तो मैं तो मैं तो मैं तो मैं तो मैं तो मैं तो मैं तो मैं तो मैं इनफिनिटी ग्रेस की तरफ जा रहा हूं। वो तो हो ही नहीं सकता। तो आपने कहा मैं Z को ही कह
देता हूं कि यार ये जो जी है हमारा ये स्पेस के बाहर है। तो जब जी स्पेस के बाहर है तो फिर मेरा सवाल है कि ये स्पेस के बाहर कैसे एक्सिस्ट कर रहा है? जबकि ये जी जो है अभी हमारे पास एक से ज्यादा है। मल्टीपल जी हैं क्योंकि हमें छह पॉइंट चाहिए। तो हमारे पास ये कितने हो गए? ये कम से कम छह हो गए हमारे पास। आप इन कम से कम छह Z को या जी को आउट ऑफ स्पेस मानने के लिए तैयार हो। और एक cos को मानने के लिए तैयार नहीं
थे। एक कॉस के इंकार के लिए आप छह को मान रहे हो। अब डिसाइड कर लो। एक को मानना है, छह को मानना है। अभी भी भाई मैं कुछ भी मानने को तैयार नहीं हूं। चलो अब इसको सोचना। इसको सोचना। मैं एक काम करूंगा इसका स्क्रीनशॉट लेके मैं आपको दे भी दूंगा। इसको फिर से सुनना। कहीं ना कहीं तो आपको रुकना होगा। ना आप ये नहीं कह सकते कि मैं मानने के लिए तैयार नहीं हूं। दोनों में से कुछ भी। तो तीसरा क्या मानोगे? फिर तो वो ज़िद वाली बात हो जाएगी। मुझे मानना ही कुछ
नहीं है। नहीं नहीं भाई। जिद बिल्कुल नहीं है लेकिन कैसे मान लूं कि कि कोई क्रिएटर बियों्ड एक्सिस्ट कर रहा है। मुझे वो नहीं समझ में आ रहा है। लिटरली मुझे पता है आपको समझ में नहीं आ रहा। हम मुझे पता है आपको समझ में आपको पता है कि समझ में नहीं आ रहा। आप इमेजिन करने की कोशिश कर रहे हो। हमें इमेजिन नहीं करना। हमें समझना है। आप कह रहे हो कि मुझे समझ में नहीं आ रहा पर आप असल में समझ ही नहीं रहे। आप उसको इमेजिन कर रहे हो। हम इमेजिन नहीं कर
सकते। हमें सिर्फ समझना है। जब आप समझने के लिए आए हो तो आपके सामने पूरा ही लॉजिकल फ्लो हमने यहां पे बनाया। आप खुद देख रहे हो कि मैं एक्सेप्ट ही नहीं कर सकता इस चीज को कि स्पेस इटर्नल हो। स्पेस इटरर्नल हो ही नहीं सकती है। आपने देख लिया। जब कोई चीज एक्सटर्नल नहीं है दिस मींस कि इसके पीछे कोई कॉज मौजूद है। हम अब आपकी अकल कह रही है कि सुनो शिवा बेटा कोई कॉज मौजूद है। आप कह रहे हो कि यार मुझसे इमेजिन नहीं हो रहा। और आपकी अकल बार-बार कह रही है
इमेजिन नहीं करना आपने क्योंकि हम देखो टाइम और स्पेस में बाउंड है। हम इमेजिन कर ही नहीं सकते कि इसके बाहर कोई चीज कैसे हो सकती है। हम इमेजिन नहीं कर सकते। पर इमेजिनेशन में और अंडरस्टैंड करने में फर्क है। आप पढ़े लिखे आदमी हो। टू अंडरस्टैंड समथिंग टू इमेजिन समथिंग। डिफरेंट है दोनों चीजें। दोनों चीजें एक नहीं है। मैं इमेजिन करूं कि शिवा कैसा दिखता है या मैं अंडरस्टैंड करूं कि शिवा कैसा दिखता है। दोनों में जमीन आसमान का फर्क है। शिवा एक इंसान है। तो मैं उस अंडरस्टैंडिंग के बेस पर मैं समझ सकता
हूं कि अच्छा शिवा कैसा दिखता होगा। पर क्योंकि मैंने रियलिटी में अगर नहीं देखा तो मैं इमेजिन ही नहीं कर सकता कि हकीकत में शिवा कैसा दिखता होगा। मैं कभी नहीं इमेजिन कर सकता क्योंकि मैं आपको देखा ही नहीं है। पर मैं एज अ इंसान आपको अंडरस्टैंड तो कर सकता हूं ना यार सब दो हाथ दो पांव एक सर दो आंखें सब कुछ होंगी। ये तो मैं कर सकता हूं ना। हम अंडरस्टैंडिंग की बात कर रहे हैं। आपका टाइम अल्हम्दुलिल्लाह फारग हो गया वो आपके सामने है। ठीक है? स्पेस आप खुद देख रहे हो। अगर
आप एक कॉज को नहीं मानते आप कहते हो हर चीज को स्पेस के अंदर होना चाहिए तो वहां पर आप देख रहे हो कि वहां पर आप बहुत बुरे तरीके से फंस रहे हो। अभी हम सिर्फ छिपका के रुके ये सर्कल ऐसे चलता चला जाएगा और ये सर्कल फैलता चला जाएगा रुकेगा ही नहीं कहीं पर इनफिनिटी रिग्रेस हो जाएगा और आपको पता है कि इनफिनिट रिग्रेस नहीं हो सकता। दिस मीन एंड ऑफ़ द डे आपको कहीं ना कहीं पे रुकना होगा जहां पर आप एक ऐसे फाइनल कॉज को मानोगे एक ऐसे फाइनल कॉज को मानोगे
कि जो इटरनल है हम अब ये आप सोचो