दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं। एक वह जो पैसे के लिए काम करते हैं और दूसरे वह जिनके लिए पैसा काम करता है। यह सुनने में छोटा लगता है। लेकिन यही एक साधारण जिंदगी और एक असाधारण जिंदगी के बीच की दीवार है। वारेन बफेट ने कभी कहा था कि अगर तुम सोते वक्त भी पैसा नहीं कमा रहे तो तुम जिंदगी भर काम करते रहोगे। यह बात सुनकर बहुत लोग सोचते हैं [संगीत] कि यह तो सिर्फ अमीरों के लिए है। लेकिन सच यह है कि यही सोच उन्हें कभी अमीर नहीं बनने देती। असली राज
यह है कि अमीर लोग अपना पैसा किसी ऐसी जगह लगाते हैं जो उनके सोते वक्त भी बढ़ता रहे। [संगीत] वो सिस्टम बनाते हैं, एसेट्स बनाते हैं और पैसिव इनकम के रास्ते खोलते हैं। यह किताब उन्हीं रास्तों का नक्शा है जिसे अमीर लोग कभी खुलकर शय नहीं करते। आज वह नक्शा तुम्हारे हाथ में है। वारेन बफेट का जन्म 1930 में ओमाहा नेबस्का में हुआ था। बचपन से ही उनमें पैसे की गहरी समझ थी। 11 साल [संगीत] की उम्र में उन्होंने पहला शेयर खरीदा। 13 साल की उम्र में उन्होंने अखबार बेचकर इतना पैसा कमाया कि टैक्स रिटर्न
भरनी पड़ी। उनके पिता एक स्टॉक ब्रोकर थे। लेकिन बफेट की असली गुरु थी किताबें। उन्होंने बेंजामिन ग्राहम की किताब द इंटेलिजेंट इन्वेस्टर पढ़ी और उनकी जिंदगी बदल गई। बफेट की सबसे बड़ी ताकत थी उनका धैर्य। वो जानते थे कि पैसा रातोंरात नहीं बनता। वह बनता है सही जगह, सही वक्त और सही सोच से। [संगीत] उन्होंने कभी ट्रेंड्स के पीछे नहीं भागे। उन्होंने हमेशा वही खरीदा जो उन्हें समझ में आया। [संगीत] आज उनकी नेटवर्थ 100 अरब डॉलर से ज्यादा है और इसकी नींव उन्होंने सिर्फ [संगीत] एक सोच पर रखी थी। पैसे को काम पर लगाओ। खुद
उसके पीछे मत भागो। आइंस्टाइन ने कंपाउंड इंटरेस्ट को दुनिया का आठवां अजूबा कहा था। और बफेट ने इस अजूबे को अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा हथियार बनाया। कंपाउंड इंटरेस्ट का मतलब है ब्याज पर ब्याज। यानी तुम्हारा पैसा सिर्फ बढ़ता नहीं। वो बढ़ते-बढ़ते और तेजी से बढ़ने लगता है। मान लो [संगीत] तुमने 20 साल की उम्र में ₹10,000 इन्वेस्ट किए। अगर उस पर सालाना 12% रिटर्न मिले तो 40 साल की उम्र में वो पैसा लगभग ₹90,000 हो जाएगा और 60 साल की उम्र में वो लगभग ₹8 लाख सिर्फ 10,000 से ₹8 लाख बिना कुछ किए। यही
है कंपाउंड इंटरेस्ट का जादू। बफेट ने कहा, मेरी ज्यादातर दौलत 50 साल की उम्र के बाद आई। क्योंकि कंपाउंडिंग को वक्त चाहिए। इसीलिए जितना जल्दी शुरू करो उतना ज्यादा फायदा। वक्त ही सबसे बड़ा इन्वेस्टमेंट है जो तुम कर सकते हो। रॉबर्ट कियोस्की ने कहा था अमीर लोग एसेट्स खरीदते हैं। गरीब लोग लायबिलिटीज खरीदते हैं और उन्हें एसेट्स समझते हैं। यही सबसे बड़ी गलती है जो लोग करते हैं। एसेट वो चीज है जो तुम्हारी जेब में पैसा डालती है। लायबिलिटी वो चीज है जो तुम्हारी जेब से पैसा निकालती है। [संगीत] तुम्हारी नई गाड़ी एक लायबिलिटी है।
वो हर साल वैल्यू खोती है और मेंटेनेंस मांगती है। लेकिन अगर वही गाड़ी तुम Ola या Uber पर चलाते हो तो वह एसेट बन सकती है। तुम्हारा घर जिसमें तुम रहते हो एक लायबिलिटी है। लेकिन अगर तुम उसे किराए पर दो तो वो एसेट बन जाती है। बफेट ने हमेशा वही खरीदा जो उनकी जेब में पैसा डाले। उन्होंने कभी फ्लैशी जिंदगी नहीं जी। आज भी वह वही घर में रहते हैं जो उन्होंने 1958 में खरीदा था। क्योंकि वह जानते हैं कि दिखावे में पैसा जाता है। एसेट्स में पैसा आता है। दुनिया में पैसा तीन भाषाएं
बोलता है। अर्न इनकम, पोर्टफोलियो इनकम और पैसिव इनकम। अर्न इनकम वो है जो तुम काम करके कमाते हो। जब तुम काम करते हो पैसा आता है। जब नहीं करते नहीं आता। यह सबसे आम और सबसे कमजोर तरीका है। पोर्टफोलियो इनकम वो है जो शेयर्स, म्यूचल फंड्स या बॉन्ड से आती है। यहां तुम्हारा पैसा काम करता है। तुम नहीं और पैसिव इनकम वो है जो किराए, रॉयल्टीज या ऑनलाइन बिजनेस से आती है। यह वो इनकम है जो तुम सोते वक्त भी आती रहती है। बफेट की ज्यादातर इनकम पोर्टफोलियो और पैसिव है। वो बगशयार हथावे के शेयर्स
होल्ड करते हैं जो हर साल बढ़ते हैं। वह खुद हर दिन ऑफिस नहीं जाते। [संगीत] उनका सिस्टम काम करता है। असली अमीरी तब आती है जब तुम्हारी पैसिव इनकम तुम्हारे एक्सपेंसेस से ज्यादा हो जाए। उस दिन तुम फाइनशियली फ्री हो। बहुत लोग सोचते हैं कि इन्वेस्ट करने के लिए बहुत पैसा चाहिए। यह सबसे बड़ा मिथ है। बफेट ने 11 साल की उम्र में सिर्फ $38 से निवेश शुरू किया था। आज तुम ₹500 में शिप शुरू कर सकते हो। पहला कदम है खर्च करने से पहले बचाओ। ज्यादातर लोग कमाते हैं, खर्च करते हैं और जो बचता
है, वह सेव करते हैं। अमीर लोग कमाते हैं, पहले सेव करते हैं और बाकी से गुजारा करते हैं। दूसरा कदम है इमरजेंसी [संगीत] फंड बनाओ। कम से कम 6 महीने के एक्सपेंसेस का पैसा एक अलग अकाउंट में रखो। [संगीत] यह तुम्हारी फाइनेंशियल सिक्योरिटी की नीव है। तीसरा कदम है इन्वेस्ट शुरू करो। इंडेक्स फंड्स, म्यूचल फंड्स या डायरेक्ट इक्विटी जो भी तुम्हें समझ आए लेकिन शुरू करो। आज अभी [संगीत] बफेट ने कहा सबसे अच्छा वक्त इन्वेस्ट करने का 10 साल पहले था। दूसरा सबसे अच्छा वक्त आज है। इंतजार मत करो। स्टॉक मार्केट का नाम सुनते ही
बहुत लोगों के मन में डर आता है। लगता है यह तो जुआ है। लेकिन बफेट के लिए स्टॉक मार्केट एक दुकान है। जहां दुनिया की सबसे अच्छी कंपनीज के हिस्से बिकते हैं। उन्होंने कहा जब बाजार गिरता है तो मैं खुश होता हूं। क्योंकि अच्छी चीजें सस्ती मिल रही है। यह सोच उन्हें बाकी सबसे अलग बनाती है। जब 2008 में पूरी दुनिया का बाजार क्रैश हुआ तो घबराए हुए लोग बेच रहे थे। बफेट खरीद रहे थे। उन्होंने गोल्ड मंसाक्स और जनरल इलेक्ट्रिक में अरबों का निवेश किया और जब बाजार वापस ऊपर आया तो उनका मुनाफा कई
गुना था। स्टॉक मार्केट में सफलता का राज है। लंबे वक्त के लिए सोचो। शॉर्ट टर्म में बाजार वोलेटाइल होता है। [संगीत] लॉन्ग टर्म में वह हमेशा ऊपर जाता है। पैनिकिक मत करो। पेशेंट रहो और सही कंपनीज में इन्वेस्ट करो। बफेट की सबसे बड़ी स्ट्रेटजी है वैल्यू इन्वेस्टिंग। इसका मतलब है किसी चीज की असली कीमत पहचानो और उसे उससे कम दाम में खरीदो। मान लो एक कंपनी की असली वैल्यू ₹1000 प्रति शेयर है। लेकिन बाजार में वह 700 में मिल रही है। वैल्यू इन्वेस्टर वहां खरीदता है। बफेट ने यह स्ट्रेटजी अपने गुरु बेंजामिन ग्राहम से सीखी।
उन्होंने कहा, प्राइस वो है जो तुम चुकाते हो। वैल्यू वो है जो तुम्हें मिलता है। दोनों हमेशा एक नहीं होते। बाजार कभी-कभी अच्छी कंपनीज को सस्ते में दे देता है। डर की वजह से, अफवाहों की वजह से या इकोनॉमिक स्लोाउन की वजह से। यही वो वक्त है जब वैल्यू इन्वेस्टर अपना सबसे बड़ा दांव लगाता है। लेकिन इसके लिए जरूरी है कंपनी को समझना। [संगीत] उसका बिजनेस मॉडल, उसकी बैलेंस शीट, उसका फ्यूचर। बिना समझे निवेश करना गैंबलिंग है। समझकर निवेश करना वेल्थ बिल्डिंग है। बफेट ने एक बार कहा स्टॉक मार्केट एक ऐसी जगह है जहां इंपेशेंट
लोगों का पैसा पेशेंट लोगों के पास जाता है। यह बात पूरी तरह सच है। ज्यादातर लोग इन्वेस्ट करते हैं और कुछ हफ्तों में पैसा बढ़ता ना देख बेच देते हैं। फिर कोई और स्टॉक लेते हैं। फिर बेचते [संगीत] हैं। इस तरह वह बार-बार नुकसान उठाते हैं। बफेट नेका कोला के शेयर्स 1988 में खरीदे थे। आज भी वह उन्हें होल्ड करते हैं। उनकी इन्वेस्टमेंट कई सौ गुना बढ़ चुकी है। उन्होंने वाशिंगटन पोस्ट में भी दशकों तक इन्वेस्ट किया। क्यों? [संगीत] क्योंकि वो उस बिजनेस को समझते थे। वो जानते थे कि यह कंपनी लंबे वक्त तक चलेगी।
इसीलिए वो रुके। धैर्य एक स्किल है जो सीखी जा सकती है और यह स्किल तुम्हें वो रिटर्न्स देती है जो बाकी कोई स्ट्रेटजी नहीं दे सकती। बफेट ने एक इंटरव्यू में कहा था सबसे अच्छा [संगीत] निवेश जो तुम कर सकते हो वो है खुद में। उनका मतलब था अपनी स्किल्स में, अपनी नॉलेज में, [संगीत] अपनी हेल्थ में। जब तुम एक नई स्किल सीखते हो तो कोई उसे तुमसे छीन नहीं सकता। मार्केट क्रैश हो सकता है, नौकरी जा सकती है, पैसा खो सकता है। लेकिन तुम्हारी नॉलेज हमेशा तुम्हारे साथ रहती है। बफेट हर रोज 5 से
छ घंटे पढ़ते हैं। उन्होंने अपनी जिंदगी में हजारों किताबें पढ़ी हैं। वो कहते हैं, मैं हर दिन थोड़ा और जानकार होता जाता हूं। और यही मेरी सबसे बड़ी दौलत है। तुम्हें भी हर दिन कुछ नया सीखना चाहिए। पडकास्ट्स, सुनो, [संगीत] किताबें पढ़ो, ऑनलाइन कोर्सेज लो। अपने फील्ड में एक्सपर्ट बनो। जितना ज्यादा तुम जानते हो उतना ज्यादा तुम कमाते हो और उतना ही बेहतर तुम इन्वेस्ट करते हो। लोग कहते हैं सभी अंडे एक टोकरी में मत रखो। लेकिन बफेट ने कहा सभी अंडे एक टोकरी में रखो और उस टोकरी को बहुत ध्यान से देखो। इसका मतलब
है कि अंधाधुंध डायवर्सिफिकेशन से बेहतर है। कुछ अच्छी कंपनीज़ को गहराई से समझकर उनमें इन्वेस्ट करना। अगर तुमने 50 कंपनीज में पैसा लगाया है तो तुम किसी को भी ठीक से नहीं जानते। लेकिन अगर तुमने पांच से 10 बेहतरीन कंपनीज चुनी है जिन्हें तुम पूरी तरह समझते हो तो तुम्हारा पोर्टफोलियो कहीं ज्यादा मजबूत है। हालांकि शुरुआती इन्वेस्टर्स के लिए इंडेक्स फंड्स सबसे सेफ ऑप्शन है। इसमें तुम एक साथ बाजार की सैकड़ों कंपनीज में इन्वेस्ट करते हो। बफेट ने खुद कहा है कि ज्यादातर लोगों के लिए [संगीत] लो कॉस्ट इंडेक्स फंड सबसे अच्छा इन्वेस्टमेंट है। जब
तक तुम खुद इंडिविजुअल स्टॉक्स को अच्छे से एनालाइज नहीं कर सकते। [संगीत] इंडेक्स फंड तुम्हारा सबसे अच्छा दोस्त है। अमीर बनने की राह में सबसे बड़ी रुकावट है। डे यानी कर्ज। लेकिन हर कर्ज बुरा नहीं होता। बफेट ने समझाया गुड डे वो है जो तुम्हारे लिए पैसा कमाता है। जैसे बिजनेस लोन लेकर बिजनेस बढ़ाना या होम लोन लेकर किराए पर देने वाली प्रॉपर्टी लेना। बैड डे वो है जो सिर्फ तुम्हारी जेब खाली करता है। जैसे क्रेडिट कार्ड से लग्जरी शॉपिंग करना, ईएमआई पर टीवी या फोन लेना जो कोई इनकम नहीं देते। बफेट ने हमेशा बैड
डे से दूरी बनाई। उन्होंने कभी अननेसेसरी लेवरेज नहीं लिया। वह कहते हैं जो इंसान डे में डूबा है वह कभी फ्रीली इन्वेस्ट नहीं कर सकता क्योंकि उसकी सारी इनकम लोन चुकाने में जाती है। इसीलिए पहला काम करो बैड डे खत्म करो। क्रेडिट कार्ड बैलेंस जीरो करो। पर्सनल लोन चुकाओ। जब तुम डे फ्री होते हो तभी असली वेल्थ बिल्डिंग शुरू होती है। अमीर बनना सिर्फ पैसा कमाना नहीं है। अमीर रहना भी उतना ही जरूरी है। और इसके लिए जरूरी है सही फाइनेंशियल प्रोटेक्शन। एक एक्सीडेंट, [संगीत] एक बीमारी, एक नेचुरल डिजास्टर। यह सब कुछ बर्बाद कर सकता
है अगर तुम्हारे पास सही इंश्योरेंस नहीं है। बफेट की कंपनी बशायर हथावे खुद इंश्योरेंस बिजनेस में है। वो जानते हैं कि रिस्क मैनेजमेंट वेल्थ बिल्डिंग का एक अभिन्न हिस्सा है। टर्म लाइफ इंश्योरेंस लो यह सस्ता होता है और तुम्हारे परिवार को प्रोटेक्ट करता है। हेल्थ इंश्योरेंस लो। एक बड़ी बीमारी सालों की सेविंग्स मिटा सकती है और यह सब इसीलिए जरूरी है क्योंकि तुम्हारी सबसे बड़ी एसेट तुम खुद हो। अगर तुम काम नहीं कर सके तो इनकम बंद हो जाएगी। इंश्योरेंस उस रिस्क को कवर करता है। बफेट ने हमेशा वर्स्ट केस सारियो के लिए तैयार रहने
की बात कही है। [संगीत] प्रोटेक्शन पहले फिर ग्रोथ। रियल एस्टेट वो इन्वेस्टमेंट है जिसे हर अमीर इंसान [संगीत] किसी ना किसी रूप में करता है। वारेन बफेट ने कहा अगर मैं छोटा इन्वेस्टर होता तो मैं रेंटल प्रॉपर्टीज में इन्वेस्ट करता। [संगीत] रियल एस्टेट के दो फायदे होते हैं। पहला अप्रिसिएशन यानी समय के साथ प्रॉपर्टी की वैल्यू बढ़ती है। दूसरा रेंटल इनकम यानी हर महीने किराए से इनकम आती है। यह वो पैसिव इनकम है जो तुम्हारे सोते वक्त भी काम करती है। लेकिन रियलस्टेट में स्मार्ट इन्वेस्ट करना जरूरी है। लोकेशन सबसे जरूरी फैक्टर है। वो एरिया
चुनो जहां पपुलेशन बढ़ रही हो। इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप हो रहा हो और जॉब ओपोरर्चुनिटीज हो। ऐसी जगहों पर प्रॉपर्टी की वैल्यू तेजी से बढ़ती है। रील एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स [संगीत] यानी आरआईटीस एक और तरीका है। इसमें तुम बिना प्रॉपर्टी खरीदे रील एस्टेट में इन्वेस्ट कर सकते हो। यह उन लोगों के लिए बढ़िया है जिनके पास बड़ा कैपिटल नहीं है। बफेट ने कहा, अगर तुम किसी बिजनेस के मालिक नहीं हो, तो तुम हमेशा किसी और के सपने के लिए काम करते रहोगे। यह बात कड़वी है लेकिन सच है। नौकरी इनकम देती है। बिजनेस वेल्थ देता है। फर्क
यह है कि नौकरी में तुम्हारा वक्त बिकता है। बिजनेस में तुम्हारा सिस्टम काम करता है। लेकिन बिजनेस शुरू करने के लिए लाखों रुपए की जरूरत नहीं है। आज डिजिटल दुनिया में तुम बहुत कम इन्वेस्टमेंट से बिजनेस शुरू कर सकते हो। फ्रीलांसिंग, ब्लॉगिंग, YouTube चैनल, [संगीत] ऑनलाइन कोर्सेज, ई-कॉमर्स यह सब ऐसे रास्ते हैं जो बिना बड़े कैपिटल के शुरू हो सकते हैं। बफेट ने खुद बचपन में चूइंग गम बेचकर न्यूज़पेपर्स डिलीवर करके बिजनेस शुरू किया था। उन्होंने हर मौके को पहचाना और उस पर काम किया। तुम्हारे आसपास भी ऐसे मौके हैं। बस नजर खोलनी है और
शुरुआत करनी है। वारेन बफेट और चार्ली मुंगेर ने हमेशा कहा वेल्थ बाहर नहीं बनती पहले अंदर बनती है। तुम्हारा माइंडसेट ही तुम्हारी सबसे बड़ी एसेट या सबसे बड़ी लायबिलिटी हो सकती है। अगर तुम सोचते हो [संगीत] मैं कभी अमीर नहीं बन सकता तो तुम सही हो। और अगर तुम सोचते हो [संगीत] मैं सीखूंगा, मैं बदलूूंगा, मैं बनाऊंगा तो तुम भी सही हो। माइंडसेट की यही ताकत है। स्केरसिटी माइंडसेट वाला इंसान हर जगह [संगीत] कमी देखता है। अबंडेंस माइंडसेट वाला इंसान हर जगह मौका देखता है। बफेट का माइंडसेट हमेशा ग्रोथ ओरिएंटेड रहा। उन्होंने रिसेशन में भी
ओपोरर्चुनिटी देखी। उन्होंने फेलियर में भी लेसन देखा। उन्होंने कभी मार्केट को ब्लेम नहीं किया। गवर्नमेंट को ब्लेम नहीं किया। उन्होंने हमेशा खुद से पूछा। मैं इस सिचुएशन में क्या कर सकता हूं? यही सवाल तुम्हें भी पूछना है। बफेट आज भी वही घर में रहते हैं जो उन्होंने 1958 में $1500 में खरीदा था। वो McDonalds में ब्रेकफास्ट खाते हैं। वो सेकंड हैंड चीजें खरीदते हैं। दुनिया के सबसे अमीर लोगों में से एक और इतनी सिंपल जिंदगी। क्यों? क्योंकि वह जानते हैं कि दिखावे में पैसा जाता है, एसेट्स में पैसा आता है। आज की जनरेशन सोशल मीडिया
देखकर [संगीत] दूसरों जैसी जिंदगी जीने की कोशिश करती है। नया फोन, नई गाड़ी, ब्रांडेड कपड़े। यह सब लायबिलिटीज है। हर अननेसेसरी खर्च एक इन्वेस्टमेंट का मौका है जो तुमने गवाया। इसका मतलब यह नहीं कि जिंदगी का मजा मत लो। इसका मतलब है कॉन्शियसली खर्च करो। हर खर्च से पहले पूछो क्या यह मेरी जिंदगी को बेहतर बनाता है या सिर्फ ईगो को सेटिस्फाई करता है? यह एक सवाल तुम्हारी जिंदगी बदल सकता है। अमीर लोग टैक्स से नहीं डरते। [संगीत] वो टैक्स को समझते हैं और वो उसे लीगली मिनिमाइज करते हैं। बफेट ने कहा, इट्स नॉट व्हाट
यू मेक। इट्स व्हाट यू कीप। यानी तुम कितना कमाते हो यह जरूरी नहीं। [संगीत] जरूरी यह है कि कितना बचाते हो। कैपिटल गेंस टैक्स, डिविडेंड टैक्स, इनकम टैक्स यह सब पैसे कमाने के अलग-अलग तरीकों पर अलग-अलग दरों से लगते हैं। लॉन्ग टर्म कैपिटल ग्स पर टैक्स कम होता है। इसीलिए बफेट लंबे वक्त के लिए होल्ड करते हैं। टैक्स सेविंग इंस्ट्रूमेंट्स जैसे ईएलएसएस, [संगीत] पीपीएफ, एनपीएस। यह सब लीगल तरीके हैं जिनसे तुम टैक्स बचा सकते हो। [संगीत] एक अच्छा सीए या फाइनेंसियल एडवाइजर रखो जो तुम्हारी टैक्स प्लानिंग करें। बहुत लोग टैक्स बचाने में इतना पैसा छोड़
देते हैं जो उनकी साल भर की सेविंग से ज्यादा होता है। टैक्स को समझना वेल्थ बिल्डिंग का एक क्रूशियल हिस्सा है। बफेट ने अपनी 99% दौलत चैरिटी में देने का वादा किया है। उन्होंने बिल गेट्स के साथ मिलकर दी गिविंग प्लेज बनाई। एक मूवमेंट जहां दुनिया के अमीर लोग अपनी ज्यादातर दौलत समाज के लिए देने का वादा करते हैं। बफेट का मानना है जो समाज ने मुझे दिया वो वापस करना मेरी जिम्मेदारी है। यह सोच बहुत जरूरी है। जब तुम सिर्फ लेने की सोचते हो तो एक सीमा [संगीत] आती है। लेकिन जब तुम देने की
सोचते हो तो यूनिवर्स तुम्हें और देता है। जेनेरोसिटी एक स्पिरिचुअल लॉ है। जो बांटता है वो बढ़ता है। इसके अलावा बफेट ने अपनी लेगसी की भी बात की। वह चाहते हैं कि उनके बाद भी उनका काम चलता रहे। तुम भी सोचो तुम्हारे जाने के बाद तुम क्या छोड़ जाना चाहते हो? पैसा, वैल्यूस [संगीत] या एक ऐसी लेगसी जो दूसरों की जिंदगी बेहतर बनाए। यह किताब, यह ज्ञान [संगीत] यह सब तभी काम आएगा जब तुम एक कदम उठाओगे। आज अभी बफेट ने कहा, " द बेस्ट टाइम टू प्लांट अ ट्री वास 20 इयर्स एगो। द सेकंड
बेस्ट टाइम इज नाउ। तुम्हारी उम्र चाहे 20 हो या 50 शुरुआत करने में कभी देर नहीं होती। आज एक सिप शुरू करो। [संगीत] आज एक किताब खरीदो जो फाइनेंस सिखाए। आज अपने एक्सपेंसेस का हिसाब लगाओ। आज एक छोटा सा इन्वेस्टमेंट अकाउंट खोलो। यह छोटे-छोटे कदम ही एक दिन बड़ी दौलत बनते हैं। याद [संगीत] रखो अमीर लोगों के पास कोई जादू नहीं होता। उनके पास होती है सही जानकारी, सही आदतें और सही माइंडसेट। यह तीनों चीजें तुम भी हासिल कर सकते हो। और इस किताब में वह सब कुछ है जो तुम्हें शुरुआत करने के लिए चाहिए।
बस एक कदम उठाओ और फिर रुकना मत। अमीर लोगों की सबसे बड़ी आदत होती है उनका सुबह का रूटीन। वारेन बफेट हर सुबह उठकर सबसे पहले अखबार पढ़ते हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल, फाइनेंशियल टाइम्स और कई बिजनेस पब्लिकेशंस। वह जानकारी को अपनी सबसे बड़ी ताकत मानते हैं। उन्होंने कहा, मैं अपना 80% वक्त पढ़ने और सोचने में लगाता हूं। यह सुनकर बहुत लोग चौंकते हैं। दुनिया का सबसे अमीर इन्वेस्टर पढ़ने में वक्त लगाता है। मीटिंग्स में नहीं। इसका मतलब यह है कि डिसीजन मेकिंग के लिए जानकारी सबसे जरूरी है। जो इंसान ज्यादा जानता है, वो बेहतर फैसले
लेता है और बेहतर फैसले बेहतर रिजल्ट्स देते हैं। तुम्हारा सुबह का रूटीन क्या है? अगर तुम फोन स्क्रॉल करके दिन शुरू करते हो तो तुम अपना सबसे कीमती वक्त बर्बाद कर रहे हो। सुबह का एक घंटा पढ़ने में लगाओ। यह आदत तुम्हारी जिंदगी बदल देगी। बफेट की सबसे अनोखी बात यह है कि उन्होंने हमेशा वही किया जो वह समझते थे। उन्होंने इसे अ सर्कल ऑफ कॉम्पिटेंस कहा। इसका मतलब है अपनी एक्सपर्टीज की सीमाएं जानो। जब 1990s में बूम आई तो सब लोग टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में पैसा लगा रहे थे। बफेट ने नहीं लगाया क्योंकि वह कहते
थे मुझे टेक्नोलॉजी बिजनेस ठीक से समझ नहीं आता इसलिए मैं उसमें इन्वेस्ट नहीं करूंगा। लोगों ने उनका मजाक उड़ाया। लेकिन जब 2000 में डॉ.com बबल फटा और लाखों लोगों का पैसा डूबा तो बफेट का पैसा सुरक्षित था। बाद में उन्होंने Apple में इन्वेस्ट किया। जब उन्हें समझ आया कि Apple एक टेक्नोलॉजी कंपनी नहीं एक कंज्यूमर ब्रांड है। यही विज़डम है। अपनी स्ट्रेंथ को पहचानो, अपनी लिमिटेशंस को जानो और हमेशा उसी दायरे में काम करो [संगीत] जहां तुम एक्सपर्ट हो। बफेट ने एक बार कहा हमारा फेवरेट होल्डिंग पीरियड है फॉर एवर। यह बात सुनकर लगता है
कि यह ज्यादा हो गया। लेकिन इसके पीछे एक गहरी विडम है। जब तुम किसी कंपनी में इसलिए इन्वेस्ट करते हो कि अगले महीने प्रॉफिट होगा तो तुम ट्रेडर हो। जब तुम इसलिए इन्वेस्ट करते हो कि यह कंपनी अगले 20 साल में बहुत बड़ी होगी तो तुम इन्वेस्टर हो। यह फर्क बहुत बड़ा है। ट्रेडिंग में ज्यादातर लोग पैसा खोते हैं। लॉन्ग टर्म इन्वेस्टिंग में ज्यादातर लोग पैसा बनाते हैं। बफेट नेका कोला में 1988 में इन्वेस्ट किया और आज भी होल्ड करते हैं। [संगीत] उनका रिटर्न हजारों% है। अमेरिकन एक्सप्रेस, वेल्स फ्गो, Apple सब लॉन्ग टर्म होल्स है।
यह स्ट्रेटजी काम करती है क्योंकि अच्छी कंपनी समय के साथ बढ़ती है। इकॉनमी बढ़ती है और कंपाउंड इंटरेस्ट अपना जादू दिखाता है। लॉन्ग टर्म सोचो, लॉन्ग टर्म जीतो। इनफ्लेशन वह दुश्मन है जो चुपचाप तुम्हारे पैसे की वैल्यू खाता रहता है। अगर इनफ्लेशन 6% है और तुम्हारे सेविंग्स अकाउंट में 4% इंटरेस्ट मिल रहा है तो असल में तुम हर साल 2% गरीब हो रहे हो। यह बात बहुत कम लोग समझते हैं। बफेट ने कहा, इनफ्लेशन एक टैक्स है जो हर किसी पर लगता है। लेकिन जो इन्वेस्ट नहीं करते उन पर ज्यादा। इनफ्लेशन से लड़ने का सबसे
अच्छा तरीका है। ऐसी जगह इन्वेस्ट करो जो इनफ्लेशन से ज्यादा रिटर्न दे। इक्विटी यानी शेयर बाजार हिस्टोरिकली इनफ्लेशन को हराता है। रियल एस्टेट भी इनफ्लेशन के साथ या उससे ज्यादा ग्रो करती है। गोल्ड भी एक इनफ्लेशन हैेज है। बफेट ने बिजनेसेस में इन्वेस्ट किया जो अपनी प्राइसेस बढ़ा सकती है। जैसे कोकाला जब कॉस्ट्स बढ़ते हैं वो प्राइस बढ़ा देती है। इसीलिए ऐसी कंपनीज में इन्वेस्ट करो जिनकी प्राइसिंग पावर हो। 2008 का फाइनेंशियल क्राइसिस दुनिया भर में पैनिकिक लेमन ब्रदर्स का कोलैप्स हर तरफ डर घबराहट और बिकवाली [संगीत] उस वक्त बफेट ने न्यूयॉर्क टाइम्स में एक
आर्टिकल लिखा बाय अमेरिकन आई एम जब पूरी दुनिया बेच रही थी उन्होंने खरीदने की बात कही और उन्होंने सिर्फ कहा नहीं किया भी उन्होंने उस क्राइसिस में अरबों डॉलर इन्वेस्ट किए नतीजा जब बाजार वापस आया तो उनका मुनाफा कई गुना था। पेशेंस की सबसे बड़ी परीक्षा तब होती है जब बाजार गिरता है जब तुम्हारे इन्वेस्टमेंट्स रेड में होते हैं। जब हर तरफ से आवाजें आती है। बेच दो बाहर निकलो। उस वक्त जो पेशेंट रहता है वो जीतता है। बफेट ने कहा ओपोरर्चुनिटीज कम इन फ्रीक्वेंटली। [संगीत] व्हेन इट रेस गोल्ड पुट आउट द बकेट नॉट द
थिंबल। यानी मौका आए तो बड़े पैमाने पर काम करो। घबराओ मत। बफेट ने एक बात बहुत साफ कही। किसी ऐसे इंसान की बात मत सुनो जिसका फायदा तुम्हारे इन्वेस्टमेंट से नहीं [संगीत] तुम्हारे ट्रांजैक्शन से हो। इसका मतलब है वो फाइनेंसियल एडवाइर्स जो हर बार कुछ नया प्रोडक्ट बेचते हैं। वो तुम्हारा नहीं अपना फायदा देख रहे हैं। एक अच्छा फाइनेंसियल एडवाइजर वो है जो फी ओनली हो। यानी वह तुमसे फ्लैट फी लेता है। कमीशन नहीं। कमीशन बेस्ड एडवाइर्स हमेशा वह प्रोडक्ट्स रेकमेंड करते हैं जिनमें उनका कमीशन ज्यादा हो। चाहे वह तुम्हारे लिए बेस्ट हो या ना
हो। इसके अलावा अपने फाइनेंससेस को खुद भी समझो। फाइनेंशियल लिटरेसी कोई लग्जरी नहीं। जरूरत है। बेसिक इन्वेस्टिंग, टैक्स प्लानिंग, इंश्योरेंस यह सब तुम्हें खुद समझना चाहिए। जो इंसान अपने पैसे को समझता है, उसे कोई बेवकूफ नहीं बना सकता। और जो नहीं समझता उसे हर कोई बना सकता है। पैसिव इनकम वो इनकम है जो तुम्हारे एक्टिव काम के बिना आती है। बफेट की ज्यादातर इनकम पैसिव है। तुम भी पैसिव इनकम बना सकते हो। पहला रास्ता है डिविडेंड स्टॉक्स। ऐसी कंपनीज के शेयर्स जो हर साल डिविडेंड देती है। दूसरा है रेंटल प्रॉपर्टी। घर या दुकान किराए पर
देना। तीसरा है आरईआईटीस। रियल एस्टेट में बिना प्रॉपर्टी खरीदे इन्वेस्ट करना। चौथा है डिजिटल प्रोडक्ट्स। एक बार बनाओ, बार-बार बेचो। जैसे ई-बुक, ऑनलाइन कोर्स या सॉफ्टवेयर। पांचवा है [संगीत] एफिलिएट मार्केटिंग। दूसरों के प्रोडक्ट्स रिकमेंड करो और कमीशन पाओ। छठा है YouTube या पडकास्ट। [संगीत] कंटेंट बनाओ जो ऐड से इनकम देता रहे। सातवां है पियर टू पीियर लेंडिंग। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर दूसरों को लोन दो और ब्याज पाओ। इनमें से कोई भी रास्ता रातोंरात फल नहीं देता। लेकिन एक दो साल की मेहनत के बाद यह रास्ते ऐसी इनकम देते हैं जो जिंदगी बदल देती है। बफेट का
एक बहुत फेमस कांसेप्ट है इकोनॉमिक मोड। जैसे किले के चारों तरफ खाई होती है जो दुश्मन को दूर रखती है। वैसे ही कुछ कंपनीज के पास ऐसी ताकत होती है जो कंपिटिटर्स को दूर रखती है। मोड कई तरह की होती है। ब्रांड मोड जैसे कोकाला। इसका नाम इतना स्ट्रांग है कि [संगीत] कोई कॉम्पिटिट इसे हटा नहीं सकता। कॉस्ट मोड जैसे Amazon वो इतने सस्ते में डिलीवर करती है कि कोई कमपीट नहीं कर सकता। नेटवर्क मोड जैसे Facebook जितने ज्यादा लोग यूज करते हैं उतना ज्यादा यूजफुल हो जाता है। स्विचिंग कॉस्ट मोड जैसे Microsoft एक बार
उनका सॉफ्टवेयर यूज करो तो स्विच करना मुश्किल हो जाता है। बफेट ने हमेशा ऐसी कंपनीज में इन्वेस्ट किया जिनके [संगीत] पास मजबूत मोड थी। क्योंकि ऐसी कंपनीज लंबे वक्त तक प्रॉफिटेबल रहती है। यही उनकी सबसे बड़ी इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटजी का कोर है। बहुत लोग सोचते हैं रिटायरमेंट तो 30 साल बाद है। अभी क्या सोचना? यही सबसे बड़ी गलती है। जितनी जल्दी रिटायरमेंट प्लानिंग शुरू करो, उतना कम पैसा लगाना पड़ता है। [संगीत] कंपाउंडिंग की वजह से। 25 साल की उम्र में अगर तुम हर महीने ₹5,000 इन्वेस्ट करो तो 60 साल तक यह करोड़ों में बदल सकता है।
[संगीत] लेकिन अगर 40 साल में शुरू करो तो वही कॉर्पस बनाने के लिए तुम्हें हर महीने कई गुना ज्यादा इन्वेस्ट करना होगा। पीपीएफ, एनपीएस, ईपीएफ यह सब टैक्स हैविंग रिटायरमेंट इंस्ट्रूमेंट्स है। इनमें रेगुलर इन्वेस्ट करो। बफेट ने कहा रिटायरमेंट का मतलब काम बंद करना नहीं है। रिटायरमेंट का मतलब है कि तुम्हें काम करने की जरूरत ना हो लेकिन तुम फिर भी करो क्योंकि तुम्हें पसंद है। यह तभी होगा जब तुम्हारे पास इनफ पैसिव इनकम और सेविंग्स हो। और उसकी नींव आज रखनी है। बफेट ने बहुत सारी गलतियां की है। उन्होंने बगशयर हथावे को एक फेलिंग
टेक्सटाइल कंपनी से खरीदा था जो उनके अनुसार उनकी सबसे बड़ी गलती थी। उन्होंने यूस एयर में इन्वेस्ट किया और पैसा गवाया। उन्होंने डेक्सर शू कंपनी खरीदी जो बाद में बर्बाद हो गई। लेकिन बफेट ने इन गलतियों से भागा नहीं। उन्होंने ओपनली इन्हें स्वीकार किया और इनसे सीखा। उन्होंने अपने शेयरहोल्डर्स को हर साल एक लेटर [संगीत] लिखते हैं जिसमें वह अपनी गलतियां भी बताते हैं। यह ट्रांसपेरेंसी और अकाउंटेबिलिटी ही उन्हें महान बनाती है। गलती करना गलत नहीं है। गलती से ना सीखना गलत है और वही गलती दोबारा करना सबसे बड़ी मूर्खता है। हर सक्सेसफुल इन्वेस्टर ने
गलतियां की है। लेकिन उन्होंने हर गलती से [संगीत] एक लेसन लिया और आगे बढ़े। तुम भी यही करो। बफेट ने कहा तुम्हारी नेटवर्थ तुम्हारे नेटवर्क का रिफ्लेक्शन है। लेकिन इसका मतलब ज्यादा से ज्यादा लोगों को जानना नहीं है। इसका मतलब है सही लोगों को जानना। बफेट का सबसे बड़ा पार्टनर चार्ली मुंगेर है। वो उनका बिजनेस पार्टनर भी है। दोस्त भी और सबसे बड़ा क्रिटिक भी। चारली उन्हें हमेशा चैलेंज करते हैं। [संगीत] उनकी सोच को और शार्पन करते हैं। यही असली नेटवर्क है। ऐसे लोग जो तुम्हें बेहतर बनाएं। [संगीत] अपने आसपास ऐसे लोग रखो जो तुमसे
ज्यादा जानते हो। जो तुम्हें इंस्पायर करें जो तुम्हारी गलतियां बताएं और जो तुम्हारी ग्रोथ में जेनुइनली इंटरेस्टेड हो। फेक कनेक्शन से कोई फायदा नहीं। एक सच्चा मेंटोर, एक ऑनेस्ट फ्रेंड, एक ट्रस्टवर्दी बिजनेस पार्टनर। यह तीन रिश्ते तुम्हारी जिंदगी को पूरी तरह बदल सकते हैं। हर बड़ा क्राइसिस एक बड़ा ओपोरर्चुनिटी लेकर आता है। 1929 का ग्रेट डिप्रेशन, 2000 का डॉट क्रैश, 2008 का फाइनेंसियल क्राइसिस, [संगीत] 2020 का कोविड क्रैश। हर बार जिन लोगों ने पैनिकिक नहीं किया और जिन्होंने सही जगह इन्वेस्ट किया, वह बड़े विनर्स बने। बफेट ने कोविड क्रैश के दौरान एयरलाइन स्टॉक्स बेचे क्योंकि
उन्हें लगा कि यह इंडस्ट्री लंबे वक्त तक सफर करेगी। लेकिन साथ ही उन्होंने दूसरी जगह इन्वेस्ट किया। क्राइसिस में दो तरह के लोग होते हैं। एक जो डरते हैं और सब कुछ बेच देते हैं। दूसरे जो समझते हैं [संगीत] और सही चीजें खरीदते हैं। बफेट हमेशा दूसरे टाइप के रहे हैं। इसके लिए जरूरी है इमरजेंसी फंड। अगर तुम्हारे पास 6 महीने का इमरजेंसी फंड है तो क्राइसिस में तुम्हें पैनिक करने की जरूरत नहीं। तुम शांति से सोच सकते हो और सही फैसला ले सकते हो। बफेट की जिंदगी का सबसे बड़ा लेसन है सिंपलीसिटी। वो कहते
हैं कॉम्प्लेक्सिटी तुम्हारा दुश्मन है। जो इन्वेस्टमेंट तुम समझ नहीं सकते उसमें पैसा मत लगाओ। जो बिजनेस तुम तीन सेंटेंसेस में एक्सप्लेन नहीं कर सकते उसमें इन्वेस्ट मत करो। बहुत लोग कॉम्प्लिकेटेड फाइनेंसियल प्रोडक्ट्स में फंस जाते हैं। डेरिवेटिव्स, स्ट्रक्चर प्रोडक्ट्स, हैेज फंड्स जिन्हें वह खुद नहीं समझते और फिर पैसा खोते हैं। बफेट का पोर्टफोलियो सिंपल है। बड़ी समझ में आने वाली कंपनीज़ लंबे वक्त के लिए। [संगीत] लो कॉस्ट फंड्स के जरिए। यही है उनकी स्ट्रेटजी। सिंपल लेकिन पावरफुल। जिंदगी में भी यही काम करता है। जो इंसान अपनी प्रायोरिटीज को सिंपल रखता है। हेल्थ, फैमिली, फाइनेंशियल ग्रोथ
वो ज्यादा फोकस्ड और ज्यादा सक्सेसफुल होता है। कॉम्प्लेक्सिटी में एनर्जी बर्बाद होती है। सिंपलीसिटी में एनर्जी फोकस होती है। बहुत लोग सोचते हैं कि [संगीत] या तो बिजनेस करो या इन्वेस्ट करो। लेकिन सच यह है कि दोनों साथ-साथ चल सकते हैं। बफेट खुद एक एंटरप्रेन्योर भी हैं [संगीत] और इन्वेस्टर भी। उन्होंने बशायर हथावे को एक होल्डिंग कंपनी बनाया जो दूसरी कंपनीज को खरीदती है और उन्हें चलाती है। [संगीत] यह एंटरप्रेन्योरशिप और इन्वेस्टिंग का परफेक्ट कॉम्बिनेशन है। तुम भी यह कर सकते हो। दिन में नौकरी करो या बिजनेस चलाओ और हर महीने अपनी इनकम का एक
हिस्सा इन्वेस्ट करो। धीरे-धीरे तुम्हारा इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो [संगीत] इतना बड़ा हो जाएगा कि वो तुम्हारी इनकम का एक बड़ा हिस्सा बन जाएगा। यही फाइनेंशियल फ्रीडम का रास्ता है। [संगीत] एंटरप्रेन्योरशिप तुम्हें एक्टिव इनकम देता है। इन्वेस्टिंग तुम्हें पैसिव इनकम देता है। जब दोनों मिल जाते हैं तो तुम्हारी फाइनेंशियल जर्नी तेज [संगीत] हो जाती है। बफेट ने कहा इन्वेस्टिंग में सबसे बड़ा दुश्मन तुम्हारा अपना दिमाग है। फेयर और ग्रीड यह दो इमोशंस हैं जो ज्यादातर इन्वेस्टर्स को बर्बाद करते हैं। जब बाजार ऊपर जाता है तो ग्रीड आती है और खरीद लो और बढ़ेगा। जब बाजार गिरता है तो
फियर आती है। बेच दो और गिरेगा। यही दोनों सबसे बड़ी गलतियां है। बफेट ने कहा जब दूसरे लालची हो तो डरो। जब दूसरे डरे तो लालची बनो। यह काउंटर इंट्यूएटिव लगता है। लेकिन यही सच है। बाजार के पीक्स पर खरीदना और बॉटम्स पर बेचना यही आम इन्वेस्टर करता है और पैसा खोता है। इसीलिए इमोशंस को इन्वेस्ट करने से अलग रखना जरूरी है। सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी सिर्फ इसीलिए अच्छा है क्योंकि यह ऑटोमेटिक है। मार्केट ऊपर हो या नीचे तुम इन्वेस्ट करते रहते हो। आज का दौर डिजिटल है और इस डिजिटल दौर ने वेल्थ बिल्डिंग के
नए रास्ते खोले हैं जो पहले के लोगों के पास नहीं थे। क्रिप्टो करेंसी, एनएफटीस, एआई पावर्ड इन्वेस्टिंग टूल्स, रोबो एडवाइज़र्स, [संगीत] माइक्रो इन्वेस्टिंग एप्स यह सब नए टूल्स हैं। बफेट खुद क्रिप्टो के बारे में स्केप्टिकल रहे हैं। उन्होंने कहा, मैं वो नहीं खरीदता जो कोई वैल्यू प्रोड्यूस नहीं करता। लेकिन टेक्नोलॉजी कंपनीज में उन्होंने Apple में बड़ा इन्वेस्टमेंट किया। डिजिटल एज में तुम्हारे पास ओपोरर्चुनिटीज है जो पहले नहीं थी। तुम घर बैठे ग्लोबल मार्केट्स में इन्वेस्ट कर सकते हो। युग स्टक्स, इंटरनेशनल ईटीएफ, डिजिटल गोल्ड सब कुछ एक ऐप पर अवेलेबल है। लेकिन इन ओपोरर्चुनिटीज के साथ
रिस्क भी है। इसीलिए बफेट का रूल याद रखो। वही खरीदो जो तुम समझते हो। डिजिटल टूल्स को यूज करो। लेकिन बिना समझे उनके पीछे मत भागो। बफेट ने अपने बच्चों को बहुत पैसा नहीं दिया। उन्होंने कहा, मैं उन्हें इतना दूंगा कि वह कुछ भी कर सकें, लेकिन इतना नहीं दूंगा कि उन्हें कुछ करने की जरूरत ना पड़े। यह फिलॉसोफी बहुत जरूरी है। पैसा देना लेगसी नहीं है। फाइनेंशियल एजुकेशन देना लेगसी है। अपने बच्चों को बचपन से ही पैसे की समझ दो। [संगीत] उन्हें बताओ कि पैसा कैसे कमाते हैं? कैसे बचाते हैं? और कैसे बढ़ाते हैं।
उन्हें पिग्गी बैंक दो। फिर सेविंग्स अकाउंट दो। [संगीत] उन्हें छोटे-छोटे फाइनेंशियल डिसीजंस खुद लेने दो। यह स्किल्स उनकी जिंदगी में किसी डिग्री से ज्यादा काम आएंगी। आज के स्कूल सिस्टम में फाइनेंशियल एजुकेशन नहीं है। इसलिए यह जिम्मेदारी पेरेंट्स की है। अगर तुम आज यह सीख रहे हो तो यह ज्ञान अपने बच्चों तक जरूर पहुंचाओ। वारेन बफेट ने हमेशा कहा कि चार्ली मुंगेर उनके सबसे बड़े टीचर हैं। चार्ली मुंगेर का अप्रोच था इनवर्ट ऑलवेज इनवर्ट। यानी सीधे मत [संगीत] सोचो, उल्टा सोचो। सवाल यह मत पूछो कि मैं अमीर कैसे बनूंगा? सवाल यह पूछो कि मैं गरीब
क्यों रहूंगा और उन कारणों को कैसे रिमूव करूं? यह थिंकिंग बिल्कुल अलग रिजल्ट्स देती है। मुंगेर ने मेंटल मॉडल्स का कांसेप्ट दिया। उन्होंने कहा अगर तुम्हारे पास सिर्फ एक टूल है तो तुम हर प्रॉब्लम को उसी से सॉल्व करने की कोशिश करोगे। इसीलिए फिजिक्स, साइकोलॉजी, हिस्ट्री, इकोनॉमिक्स सब कुछ से सीखो। जितने ज्यादा मेंटल मॉडल्स तुम्हारे पास होंगे, उतनी बेहतर तुम्हारी डिसीजन मेकिंग होगी। और बेहतर डिसिशनंस का मतलब है बेहतर फाइनेंसियल आउटकम्स। [संगीत] मुंगेर ने 99 साल की उम्र तक पढ़ना बंद नहीं किया। यही उनकी और बफेट की असली ताकत थी। बफेट ने एक इंटरव्यू में
कहा, मैं मेजर और सक्सेस को इस बात से नहीं करता कि मेरे पास कितना पैसा है। मैं इससे करता हूं कि मुझे कितने लोग जेनुइनली प्यार करते हैं। यह बात एक ऐसे इंसान की है जिसके पास 100 अरब डॉलर से ज्यादा है। असली अमीरी सिर्फ बैंक बैलेंस नहीं है। असली अमीरी है। सुबह उठकर वह काम करना जो तुम्हें पसंद हो। ऐसे लोगों के साथ वक्त बिताना जो तुम्हें पसंद हो। अच्छी हेल्थ, मानसिक शांति और एक ऐसी जिंदगी जिसमें तुम्हें किसी के सामने झुकना ना पड़े। पैसा इन सब चीजों को आसान बनाता है। लेकिन खुद में
यह चीजें नहीं है। इसीलिए वेल्थ बिल्डिंग के साथ-साथ रिलेशनशिप्स, हेल्थ और पर्सनल ग्रोथ पर भी ध्यान दो। [संगीत] जो इंसान सिर्फ पैसे के पीछे भागता है, वह एक दिन थक जाता है। जो इंसान पर्पस के पीछे चलता है, वह कभी नहीं थकता। यह पूरी किताब, यह सारे चैप्टर्स, यह सब ज्ञान इसका एक ही मकसद था। तुम्हें यह बताना कि अमीर बनना किसी खास इंसान के लिए नहीं है। यह उस इंसान के लिए है जो सीखने को तैयार है, बदलने को [संगीत] तैयार है और शुरू करने को तैयार है। वारेन बफेट ने 11 साल की उम्र
में शुरू किया था। तुम्हारी उम्र चाहे जो हो, तुम्हारी कहानी आज से शुरू हो सकती है। पहला कदम आज ₹500 की शिप शुरू करो। दूसरा कदम एक फाइनेंशियल किताब पढ़ो। तीसरा कदम अपने खर्चों का हिसाब लगाओ और एक बजट [संगीत] बनाओ। चौथा कदम एक स्किल सीखो जो तुम्हारी इनकम बढ़ाए। यह छोटे-छोटे कदम एक दिन बड़ी मंजिल बन जाते हैं। बफेट का सबसे आखिरी और सबसे जरूरी मैसेज यह है। द बेस्ट इन्वेस्टमेंट यू कैन मेक इज इन योरसेल्फ। खुद में इन्वेस्ट करो। खुद पर ट्रस्ट करो और शुरू करो। क्योंकि तुम्हारी कहानी अभी शुरू होती है।