[संगीत] भगवान का एक नाम है कवि कवि जो सामने दिखता है उसको भी देखा है और भविष्य की सूझबूझ की भी उसकी नजरिया रहती तो सबसे कवियों में परम कभी तो भगवान ही गीता भी गाते-गाते भगवान अर्जुन को उपदेश देते तो गीत बन जाता है गीता हो जाति तो कभी पुराना अनुशासिकताराम और चींटी रूपम आदित्य वर्णन तमाशा परस्त भगवान कैसे हैं जो सर्वज्ञ पुराण अर्थात सबसे प्राचीन शासन करने वाले सबको सूरज चंदा हवाएं समुद्र सब उनकी आजा में चलते हैं भगवान कैसे हैं की सूक्ष्म से सूक्ष्म इतने सूक्ष्म की बैक्टीरिया में भी उनकी चेतन है
आंखों से नहीं दिखते ऐसे जीवन में भी व्याप रहे और सांप का धरण करने वाले सांप को धरण करने वाले सबका पोषण करने वाले और वो भगवान आज्ञा से अत्यंत पैर एन जान को भी जानते हैं आत्मा रूप में हम कुछ नहीं जाना था उसको भी जानते वह भगवान की सत्ता है भगवान का स्वभाव आज्ञा से अत्यंत पड़े और सूर्य की तरह जैसे सूर्य सब चीजों को प्रकाशित करता है ऐसे भगवान हमारे मां को भी प्रकाशित करते हैं बुद्धि को भी करते हैं हमको भी करते हैं शरीर को भी करते संसार को भी करते आंखों
से बाहर की चीज जान जाति है लेकिन आंखों को जालना हो तो मां से मां को जानना है तो बुद्धि से बुद्धि को जानना है तो हमसे लेकिन मां बुद्धि आंखें सब मिलकर भगवान को नहीं जान सकते भगवान उनको जानते हैं मेरा मां नहीं था मेरी बुद्धि ऐसी मेरा हमेशा वो जो का रहा है वो भागवत सत्ता से ही होता है ऐसे आज अजिंक्य स्वरूप का चिंतन करता है जो सड़क वह भक्ति युक्त पुरुष अंत समय में अचल मां से और योग बाल द्वारा भुकोटी के मध्य में प्राणों को अच्छी तरफ प्रविष्टि करके शरीर छोड़ने
पर उसे परम दिव्या पुरुष को प्राप्त हो जाता है गीता का आठवां और नौवां श्लोक ना अध्याय 9 और 10 श्लोक कबीर पुराण अनुषा सीताराम सब का अनुशासन करने वाले छोटे से छोटे और बड़े से बड़े सूक्ष्म है सर्वस्व दाताराम सबको धरण करने वाले अचिन के रूप बुद्धि प्रकृति मां बुद्धि प्रकृति से बने अप प्रकृति कोई पूरा नहीं जान सकते तो परमात्मा को क्या जानेंगे लेकिन परमात्मा का चिंतन करते-करते उसमें परमात्मा को नहीं जानते ऐसे करके परमात्मा में चुप हो जाते तब परमात्मा प्रकाश प्रकाश परमात्मा में विश्रांति पाते जैसे तलवार है इसको काटो उसको काटो
करते-करते इस दिल के खंबे को तलवार मारो तो तलवार शांत हो जाति मुट्ठी हो जाति ऐसे बुद्धिमान शांत हो जाति ऋतंभरा प्रज्ञा हो जाति जहां सूर्य का प्रकाश नहीं है वहां भी कभी कल्पना पहुंच जाति सर्वस्व आधारित वहां पहुंचे कवि और ऐसा कवि परमात्मा है की जैसे दाएं अथवा दूध से हमें पुष्ट करती है ऐसे भगवान सभी चीजों को पुष्ट करते हैं और गे के शरीर से दूध की मक्खन मलाई कैसे पैदा होती है अंगूर में रस कैसा होता है कौन बनाता है अन्य में पोषण तत्व कौन देता है पृथ्वी में गांड गन किसका है
जल में रस स्वभाव किसका है इस परमात्मा का अग्नि और सूरज में दहकता किसकी है उसकी चंद्रमा में औषधि पोस्ट करने की सत्ता और चमचम चमकते की क्षमता अभी हम बोलते हैं तो बोलने के पीछे सत्ता किसकी है किशमिश से फल गे का गी दूध इस सात्विक भजन में सात्विकता का प्रभाव किसका है इस का कम में रस कौन बनाता है कच्चे आम में खटास किसकी प्रभु तेरी और मीठे में मिठास कौन बनाता है तेरी सत्ता अचिंत रूपम तेरी सत्ता कितनी कैसी कहां चिंतन करते-करते मां बुद्धि शांत हो जाते अजीनते रूपन प्रभु जी अत्यंत सूक्ष्म
और अत्यंत भी वो अत्यंत समर्थ और अत्यंत दयालु अत्यंत कृपा [संगीत] चिंतन शक्ति नहीं पहुंचती लेकिन विश्रांति मिल जाति है चिंतन करके तुमको नहीं जानते लेकिन चिंतन करके तुम्हारी गॉड में आया ऐसे तुम हो प्रभु जी कैसे हो की आप सब जानते हो आप सब कर सकते हो और आप सबके ही देसी हो सब जानते हो सब कर सकते हो और सबके अंदर आत्मा होकर विराज रहो रंग और दूध महाराज को तो गुजरात के लोग का अच्छी तरह जानते हैं नरेश्वर में उनका आश्रम है अभी उनका शरीर नहीं है लेकिन उनकी स्वास्थ्य सभी गुजराती तो
जानते ही हैं घर का नाम पांडुरंग था आर्थिक स्थिति कमजोर होने के करण फीस भरने के पैसे नहीं थे अब आखिरी दिन है फीस नहीं भरेंगे तो नहीं चलेगा कुछ सहपाठिया है बोले हम तुमको उधर पैसे दे देते फिर तुम्हारे पास आए तो दे देना बोले नहीं रंग अवधूत अर्थात पांडुरंग पांडुरंग विद्यार्थी में से रंग अवधूत महाराज प्रकट हुए उसमें लगे रहते तो भगवान प्रश्न होते मैं उधर नहीं लूंगा अच्छा तो उदाहरण नहीं लेते तो कोई बात नहीं बडौदा में कहानी ऐसी संस्था है जो स्कॉलरशिप देती है छात्रवृत्ति का दो फलाने संस्था वाले तो जल्दी
दे देते बोले नहीं किसी का ध्यान में नहीं लूंगा ऐसा मैंने निर्णय किया है विद्यार्थी जीवन में किसी से पैसे लेकर मेरी गुरु में निष्ठा है और भगवान में निष्ठा है तो मेरे गुरु अगर चाहेंगे मुझे पटना तो वो भेज देंगे नहीं जाएंगे तो पढ़ाई पुरी परीक्षा नहीं बैठूंगा जो ईश्वर की गुरु की मर्जी होगी तो वही फीस भेजेंगे नहीं होगी तो नहीं भेजेंगे तो नहीं पढ़ेंगे इतने में एक अनजान आदमी आया व्यक्ति प्रेम पूर्व पूछता हुआ आया और सभी विद्यार्थी टांग र के आदमी इस कमरे में कैसे पहुंच बोले पांडुरंग रहते हैं बोले तुम्हारे
से हमने पैसे लिए थे यह ले पांडुरंग मैंने किसी को पैसे दिए ही नहीं उदा आप भूलते हैं किसी दूसरे के पास जाना दूसरे विद्यार्थियों का पांडुरंग तो इस हॉस्टल में एक ही है उसे व्यक्ति ने कहा देखो आपके पिता से मेरे पिता ने पैसे लिए थे ₹300 मरते समय मेरे को भूल गए की मैं चुका नहीं सका हूं तुम मेरा बेटा है मेरा री चुका देना मैंने पिता को वचन दिया है 150 रुपए तो इकट्ठा हो गया मेरे पास वह आप ले लो बाकी के पैसे और बास सहित में चुकाऊंगा पांडुरंग की आंखें भर
आई की कैसा है मेरा गुरु तत्व कैसा है प्रभु के पिता मारे थे वचन दिया था उनको आज मेरे पास पैसे नहीं है तो उनको आज प्रेरित किया [संगीत] है सोचा मैंने कहानी जाऊंगा यही बैठकें अब खाऊंगा जिसको गरज होगी आएगा सृष्टि करता खुद लेगा वही नरेश्वर के जंगल में मुझे तो सुबह विचार आया लेकिन लाने वाले बोलते हैं हमको श्रद्धा को सपना में भगवान ने यह सब गांधी दिखाई और आपका आभास हुआ हमारा कोई संत नहीं दूजा और गांव करें तुम्हारी पूजा कैसे अच्छी मेरा हृदय रसमय हो रहा है वो रस कौन देता है
और मेरे वचन आपके कानों के द्वारा अंदर जाते और रस पैदा करते तो रस तो उन जगह में व्याप्त प्रभु आप [संगीत] सब जानते हो पांडुरंग को भी नहीं मिलेगी तो नहीं पड़ेगा पांडुरंग को भी प्रेरित करने वाला वह आत्मा पांडुरंग आए ना और वो देने वाले का प्रेरक भी वही पांडुरंग विट्ठल को प्रभु [संगीत] के नाम अनंत उसका सामर्थ्यानंद मुकाम करो आंख में ठीक हो जाएगा और ठीक हो जाएगा बोला किसने [संगीत] बोला [संगीत] दूध डाला दुकान से मिठाई ली जाए की मिठाई बोले देखो ना आंखें मेरी ठीक हो गई दिखता नहीं था तो
करें खाता था डॉक्टर ने बोला ऑपरेशन सफल होना हो इस संबंध में बाबू बोल दिया गलती से लीला हो गया पहाड़ी गुफा है लेकिन आगे पत्थर से ढकीय गुफा कठिया बाबा खोजी थे जिज्ञासु थे वो पत्थर हटाए तो देखा संत बैठे ध्यान में पत्थर अतः के धीरे से और संत महापुरुष की नजदीक दंडवत प्रणाम किया तो संत का ध्यान खुला गया मानता है फोटो काठियावाड़ ने महाराज जंप [संगीत] इतना भी तो धरती पे सीधे धरती पे बाटी आराम से लेकिन पहाड़ी धरती पर गली की नई कहानी महाराज जंप महाराज पानी उदा के ले जाए उसके
पहले [संगीत] पत्थरों से टकरा के मार दे उसके बेल [संगीत] उसका [संगीत] [संगीत] [संगीत] अदृश्य हाथों में उठाया आकाश के तरफ ले और फिर देखते देखते गुफा में बिठा दिया कैसे ए गया ठीक है तुम पत्र हो बैठो महाराज ने कृपा करके उपदेश दिया कुछ विधि बताई ध्यान की प्राणायाम के कठिया बाबा महापुरुष हो गए कठिया बाबा कठियावा उनके कई कथाएं मैंने सनी हुई है आज यह कथा सनी कठियावा इतने प्रसिद्ध कैसे हो गए वृंदावन में साधुओं को जिमान के लिए [संगीत] भंडारा पकाने के लिए तो कठिया के लिए लकड़ी हो जाएगी फॉरेस्ट में से
और फॉरेस्ट का छाप पड़ा जो देने वाला था इतनी लकड़ी लाना था उसके ऊपर तो फॉरेस्ट विभाग का हम यहां भजन बन्ना है लकड़ी नहीं आए इतने में कोई खच्चर पर गधे पे लड़कियां लेते लेते घटिया बाबा कठिया बाबा का आश्रम कहां है बाबा आश्रम छोड़कर गया तो गया अरे जो रोज लड़कियां देता था वह लड़कियां ए गई भंडारा भी हो गया लकड़ी पहचाने की प्रेरणा किसने की किसने क्या रूप बनाया वह जानता है ऐसे ही वशिष्ठ गुफा में राहत था ऋषिकेश से 22 किलोमीटर ऊपर थोड़े दिन रात वहां पूर्व काल्मिक संत थे उनके जन्म
जयंती के लिए भंडारा बन रहा था पंजाब के भगत है आलू मटर पंजाबी खान को बनाते बनाते बाबा की रात है कल रविवार है बाबा ने बोला पुरुषोत्तम गिरी महाराज बोले गंगा जी से ले आओ 20 डब्बे गंगा जी का पानी वाटर वो भर के कढ़ाई में डाला और पकोड़े तैयार हो रहे हैं मालपुआ तैयार हो रहे हैं द्वारा को और जो हुए व्यक्तियों में से एक बुध व्यक्ति को मैंने पूछा की तुमने भी खाया था बोले सोमवार को फिर दुकान खली मांगा के पुरुषोत्तम गिरी महाराज ने बोला गंगा जी में अर्पण कर दो उनसे
भी आता होगा जो कष्ट सहकार भी नियम पूरा करते हैं उनका मनोबल बढ़ता है शास्त्र गुरु और ईश्वर की सहायताओं को जल्दी रक्षा जल्दी होती उनकी पूर्ण श्रद्धा है नियम से नियम में दृढ़ हो जाते संकट के समय घबराए नहीं संकट के समय अपने सको पर भी ध्यान देकर उनको भी तो संकट है ऐसे कई कई जैसे नव में बैठे तो बहुत लोग हैं लेकिन इतने सारे बैठे हैं जो भी होगा इनका अपना होगा तो संकट के समय अपने शरीरों पर ध्यान देने से संकट जलना की ताकत आई और प्रेम से मुदित मां भर कर
जाप करने से नमोचरण करने से संकट हरि भगवान मैं तो 10 सेकंड में किस देवता को बाहर से बुलाओ और बचाओ इतनी साड़ी पब्लिक को भी चटनी बना देता हेलीकॉप्टर भी ग जाए तो आदमी कहानी ना कहानी गिर जाए इतनी भीड़ के बीच हेलीकॉप्टर गिरा तो अंदर बैठे उनको तो नहीं लगा लेकिन बाहर वाले को भी किसी को नहीं लगा तो इसमें किसका हाथ है कोई कम पीएम के आप का हाथ है इस का हाथ पर परमेश्वर का ओम ओम परमेश्वर के नाम से बड़ी-बड़ी आप बताएं ताल जाति भगवान करने में समर्थ हैं ना करने
में समर्थ है अन्यथा करने में समर्थ है और सब जानते हैं और कब क्या करना चाहिए वो भगवान जानते हैं ऐसा कोई नहीं जानता [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] धाम करने के पीछे भी तुम्हारी लोगों को मार्गदर्शन देने का एक सत्संग [संगीत] [संगीत] निराकार निर्गुण [संगीत] [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] है प्रभु हम तुम्हारे हैं पक्का करना प्रभु आप सब जानते हैं प्रभु आप सर्व समर्थ और सभी को भला करने वाले हो मेरे ऊपर इतना पक्का करो एकदम बंगाल करोड़पति बन्ना चाहे तो उसको तो बहुत परिश्रम पड़ेगा लेकिन वो बंगाल करोड़पति का दत्तक हो जाए गॉड में
चला जाए तो इस समय करोड़पति ऐसे ही भगवान की गॉड में चल गया भगवान के गॉड में चले जो है प्रभु है हरि है नारायण गोविंद योग करते हैं तो व्यक्ति निशीथ हो जाते हैं व्यक्ति निशीथ हो जाते हैं भगवान छठ जाता है भगवान की भक्ति छठ जाति रश्मि जीवन सुख जाता है अपनी मेहनत पर मजदूरी करते रहो मिलता है अच्छे हैं ठीक है लेकिन भगवान के निर्भर होकर कुछ करते तो कर चंद ग जाते आए हैं प्रभु जी प्यार जी मेरे [प्रशंसा] ओम नमो भगवते वासुदेवाय वासुदेव आओ प्रीति दिव्य अप पुरुषोत्तम गिरी महाराज बोले
गंगा जी से ले आओ 20 दिन में भगवान सब करेंगे [संगीत]