मान्यवर अभी एक फैशन होगा अभी एक फैशन होगा है आंबेडकर आंबेडकर आंबेडकर आंबेडकर आंबेडकर आंबेडकर इतना नाम अगर भगवान का लेते तो सात जन्मों तक स्वर्ग मि जाता नमस्कार मैं रवीश कुमार अमित शाह का बयान कि एक फैशन हो गया है अंबेडकर अंबेडकर करना अमित शाह ने यह बात कुछ अलग तरीके से तो कही है वह फैशन के बाद छह बार अंबेडकर का नाम लेते हैं अंबेडकर अंबेडकर अंबेडकर अंबेडकर अंबेडकर और अंबेडकर उनका इस तरह से कहना किसी को भी लग सकता है कि वे हर बात में अंबेडकर का जिक्र करने पर या उनके नाम
से सरकार को घेरने पर थोड़े झुंझला से गए हैं पहले आप खुद उनके इस बयान को सुनिए और फैसला कीजिए मान्यवर अभी एक फैशन होगा अभी एक फैशन होगा है अंबेडकर अंबेडकर अंबेडकर अंबेडकर अंबेडकर अंबेडकर इतना नाम अगर भगवान का लेते तो सात जन्मों तक स्वर्ग मिल जाता इस बयान को लेकर तृणमूल कांग्रेस ने राज्यसभा में विशेषाधिकार हनन के प्रस्ताव का नोटिस दिया है इस बयान के खिलाफ कांग्रेस ने देश भर में प्रदर्शन किया है दिल्ली में कांग्रेस के अनुसूचित जाति मोर्चे के चेयरमैन राजेश लिलोठिया के नेतृत्व में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने अमित शाह के
घर के बाहर प्रदर्शन किया कांग्रेस अध्यक्ष मलिकार्जुन खरगे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर गृहमंत्री अमित शाह को तुरंत बर्खास्त करने ने की मांग की है हम चाहते हैं कि हमारे अमित शाह राजीनामा देना चाहिए और मोदी जी को अगर थोड़ा सा भी बाबा साहब अंबेडकर के बारे में श्रद्धा है तो रात के 12 बजे के अंदर वह निकाल देना चाहिए उनको ड्रॉप कर देना चाहिए बरखास्त बरखास्त कर देना चाहिए बीजेपी अमित शाह के बयान का बचाव करती रही लेकिन बाद में अमित शाह को भी प्रेस कॉन्फ्रेंस करनी पड़ी राज्यसभा में दिया गया अमित शाह का बयान
अभी तक रिकॉर्ड पर है बात के हिस्से में उन्होंने क्या कहा इस आधार पर उनके बयान के शुरुआती हिस्से का बचाव नहीं किया जा सकता लेकिन बीजेपी दिन भर उनका बचाव करती रही मित्रों मैं आज जब आप सबके सामने उपस्थित हुआ हूं तब राज राज्यसभा में मेरे बयान को तोड़ मरोड़ कर पेश किया गया मेरा मीडिया के सभी मित्रों से ग्र कांग्रेस ने सार्वजनिक जीवन में जो पद्धति की है कि बयानों को तोड़ मरोड़ कर पेश करना हो हल्ला मचाना और भ्रांति खड़ी करना अमित शाह ने विपक्ष को बड़ा मौका दे दिया और विपक्ष ने
भी इस पर प्रतिक्रिया दिखाने में देरी नहीं की बल्कि उनके इस बयान को लेकर देश भर में आज प्रदर्शन हुआ है हमारा यह वीडियो लंबा ही होगा क्योंकि कई सारे तथ्य हैं और संदर्भ भी यह मामला ऐसा नहीं है कि छोटे में बात की जा सकती है इसलिए आपसे गुजारिश है कि वीडियो पूरा देखिए आज संसद परिसर में सभी विपक्षी दलों के नेता डॉक्ट अंबेडकर की तस्वीर लेकर आ गए और अमित शाह के बयान के खिलाफ प्रदर्शन करने लगे संजय सिंह मनोज झा रामगोपाल यादव मल्लिकार्जुन खरगे राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाडरा भी इस प्रदर्शन
में शामिल हुए सबने नारे लगाए कि अंबेडकर का अपमान नहीं चलेगा और अमित शाह के इस्तीफे की मांग की गई ममता बैनर्जी ने कहा कि यह बयान अमित शाह की दलित विरोधी और जातिवादी मानसिकता को दर्शाता है राहुल गांधी ने ट्वीट किया कि मनुस्मृति मानने वालों को अंबेडकर जी से तकलीफ बेशक होगी ही मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा गृहमंत्री अमित शाह ने जो भरे सदन में बाबा साहब का अपमान किया है उससे फिर एक बार सिद्ध हो गया है कि बीजेपी आरएसएस तिरंगे के खिलाफ थे आम आदमी पार्टी ने बीजेपी दफ्तर के बाहर इस बयान के
खिलाफ प्रदर्शन करना शुरू कर दिया सांसद संजय सिंह जमीन पर बैठ गए और नारे लगाने लगे कि बाबा साहब का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट किया कि बीजेपी वालों को इतना अहंकार हो गया है कि यह किसी को कुछ समते हां अम शाह जी बाबा साहब इस देश के बच्चे बच्चे के लिए भगवान से कम नहीं मरने के बाद स्वर्ग का तो पता नहीं लेकिन बाबा साहब का संविधान ना होता तो आप लोग तो दबे कुचले और गरीबों दलितों को इस धरती पर जीने ही ना देते चंद्रशेखर आजाद ने ट्वीट किया है
कि परम पूज्य बाबा साहेब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी नाम लेना कोई फैशन नहीं है बल्कि समानता स्वतंत्रता सामाजिक परिवर्तन की उस क्रांति का प्रतीक है जिसने करोड़ों दबे कुचले लोगों को न्याय और अधिकार दिलाए मान्यवर अभी एक फैशन होगा [संगीत] अभी एक फैशन होगा है अंबेडकर अंबेडकर अंबेडकर अंबेडकर आंबेडकर अंबेडकर इतना नाम अगर भगवान का लेते तो सात जन्मों तक स्वर्ग मिल जाता अच्छी बात है ना ना सुनिए तो सुनिए ना आप सुनिए ना मैं बताता हूं हमें तो आनंद है कि अंबेडकर का नाम लेते हैं अंबेडकर का नाम अभी 100 बार ज्यादा लो परंतु
में अंबेडकर जी के प्रति आपका भाव क्या है यह मैं बताता मान्यवर अंबेडकर जी को देश की पहली कैबिनेट से इस्तीफा क्यों दे दिया आंबेडकर जी ने कई बार कहा कि अनुसूचित जातियों और जन जातियों से हुए व्यवहार से मैं असंतुष्ट हूं सरकार की विदेश नीति से मैं असहमत हूं और आर्टिकल 370 से मैं असहमत इसलिए वह छोड़ना चाहते थे उनको आश्वासन दिया गया आश्वासन पूरा नहीं हुआ उन्होंने इग्नोर के चलते इस्तीफा दे दिया और एक श्री बी सी रॉय ने पत्र लिखा कि आंबेडकर और राजा जी जैसे दो महानुभव मंत्रिमंडल छोड़ेंगे तो क्या होगा
तो नेहरू जी ने उनको जवाब में लिखा है राजा जी जी के जाने से तो थोड़ा बहुत नुकसान होगा अंबेडकर के जाने से मंत्रिमंडल कमजोर नहीं होता है यही वह बयान है जिसके शुरुआती हिस्से को लेकर विपक्ष कह रहा है कि अंबेडकर का अपमान हुआ है बाद के हिस्से में अमित शाह यह दिखाना चाहते हैं कि डॉक अंबेडकर के प्रति विपक्ष का प्रेम नया है और दिखावा है विपक्ष के हमले के बाद प्रधानमंत्री भी आक्रमक हो गए आज उन्होंने इस मुद्दे पर छह ट्वीट किए हैं एक भी ट्वीट में उन्होंने अमित शाह के बयान की
आलोचना नहीं की है प्रधानमंत्री ने लिखा है अगर कांग्रेस और उसका सड़ा हुआ इकोसिस्टम सोचता है कि उनके झूठ से उनके कई साल के गुनाह छुप जाएंगे खासकर डॉक्टर अंबेडकर के साथ किए गए अपमान तो वे पूरी तरह से गलत हैं भारत के लोगों ने बार-बार देखा है कि कैसे एक पार्टी जिसका नेतृत्व एक ही खानदान ने किया है किस तरह डॉक्टर अंबेडकर की विरासत को मिटाने में शामिल रही है और अनुसूचित जाति और जनजाति का अपमान किया गया है लेकिन क्या अमित शाह का छह बार अंबेडकर अंबेडकर कहते हुए फैशन कहना सही था बाद
में डॉर अंबेडकर और नेहरू के बीच क्या इसे लेकर हजार बातें हो सकती लेकिन फैशन कहना क्या उचित था अरविंद केजरीवाल ने तो नीतीश कुमार चंद्रबाबू नायडू से भी पूछा है कि आपका इस बयान पर क्या कहना है कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस बयान को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कहा कि स्वर्ग की यह बात मनुस्मृति की विचारधारा है यह मजबूरन कहना पड़ता है कि यह लोग संविधान को नहीं मानते स्वर्ग और नरक की जब बात करते हैं तो य मनु मति की बात करते हैं इसमें ही लिखा है कि क्या क्या स्वर्ग है
क्या क्या कौन से कौन से जाति कहां जाएंगे क्या पड़े तो क्या हो जाएंगे य यह मानसिकता मोदी सरकार के कैबिनेट मिनिस्टर को और मोदी साहब को भी है और उसी ढंग से उनके जो गुरु है जो गकर गुरुजी या दूसरे जो भी है उनके फाउंडर यह सब लोग वो लोग भी यही बात बोलते थे वह उनकी कोई गलती नहीं जैसे स्कूल में पढ़ते हैं उस स्कूल का नियम उनको पालना पड़ता उसी उन्होंने यह पाला बारबार य भी कहते हैं कि हमने कांग्रेस वालों ने इंसल्ट किया अंबेडकर का तो मैं तो पार्लिमेंट में पूरा बोल
दिया हूं किस ढंग से व कांग्रेस को नीचा दिखाने के लिए नेहरू जी को लेकर नीचा दिखाने के लिए गांधी फैमिली को नीचा दिखाने के लिए वो बात करते थे रवीश कुमार ऑफिशियल youtube3 दिसंबर को हमने एक वीडियो में बताया था राजनाथ सिंह के भाषण पर कि कांग्रेस को आईना दिखा रहे थे और उसमें सूरत बीजेपी की दिखाई दे रही थी वही हाल अमित शाह के इस बयान से नजर आ रहा है अमित शाह कांग्रेस और विपक्ष पक्ष के अंबेडकर के प्रति प्रेम को दिखावा साबित करना चाहते थे लेकिन फैशन की बात कर उन्होंने खुद
को हिट विकेट कर लिया क्या प्रधानमंत्री का ट्वीट अमित शाह के इस बयान का बचाव कर रहा है मान्यवर अभी एक फैशन होगा अभी एक फैशन होगा है आंबेडकर आंबेडकर आंबेडकर आंबेडकर आंबेडकर आंबेडकर इतना नाम अगर भगवान का लेते तो सात जन्मों तक स्वर्ग मिल जाता भगवान का नाम जपने से स्वर्ग मिल जाए यह कल्पना ठीक वैसी है जैसे 370 के हटने पर यूपी बिहार में कहा जा रहा था लोग कश्मीर में प्लॉट खरीदने दौड़ पड़ेंगे उस समय हिंदी प्रदेशों में प्लॉट खरीदने की बात को लेकर खूब जोश भरा गया कितने लोग वहां जाकर अभी
प्लॉट खरीद पाए हैं इसकी संख्या सरकार ही बता दे लेकिन अमित शाह को यह समझना होगा कि डॉक्टर अंबेडकर का नाम जपना फैशन नहीं है दरअसल डॉक्टर अंबेडकर के विचारों को अगर जनता तक पहुंचाना है तो उनका नाम हजार बार लेना ही पड़ेगा और उससे ज्यादा बार उनके विचारों के बारे में यह फैशन नहीं है बल्कि आज भी इसकी बहुत जरूरत है क्योंकि आज के ही यूपी में एक दलित सिपाही की शादी पर सवर्ण समुदाय के लोगों ने हमला कर दिया 16 दिसंबर की बुलंद शहर की यह घटना तमाम अखबारों में आपको मिल जाएगी गाड़ियों
पर पत्थर मारे गए दूल्हे को घोड़ी से उतार दिया गया बारात में शामिल लोगों पर हमला हुआ एक जाति विशेष के 20-25 लोगों पर आरोप है कि उन्होंने बारात को रोका और हिंसा की पीएससी में सिपाही रॉबिन सिंह गाजियाबाद में तैनात है और उनकी शादी महिला कांस्टेबल लखवू ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर दी है मगर यह खबर अपवाद नहीं आए दिन ऐसी खबरें आती रहती हैं 11 दिसंबर की ही खबर है मध्य प्रदेश के दामों में एक दलित दुल्हा बग्गी में बैठ गया तो लोगों ने लौटने पर बग्गी वाले और घोड़ी पर हमला
कर दिया फरवरी में गुजरात में भी ऐसी घटना हुई जब चड़स गांव में एक दलित दूल्हे पर इसलिए हमला कर दिया क्यों वह घोड़ी पर बैठ गया था अगर राहुल गांधी ने हाथरस की घटना का लोकसभा में जिक्र किया इसमें क्या गलत है हाथरस की पीड़िता के परिवार को कहीं और बसाने का वादा सरकार की तरफ से किया गया था उसे क्यों नहीं अभी तक बसाया गया 4 साल गुजर गए परिवार के सदस्य को अभी तक नौकरी क्यों नहीं दी गई इन उदाहरणों से अगर अंबेडकर के सपनों को लेकर सवाल किया जा रहा है तो
इसका जवाब यह नहीं हो सकता या एकमात्र जवाब यह नहीं हो सकता कि अंबेडकर के नाम पर कितने कितने कहां-कहां पर स्मारक बना दिए गए हैं फैशन अगर कुछ था तो 2015 में था मोदी का अपने सूट पर मोदी मोदी लिखवाना बाद में राहुल गांधी के सूट बूट की सरकार के नारे के बाद इसे नीलाम कर दिया गया आप सूट पर ऊपर से नीचे तक मोदी मोदी लिखा देख सकते हैं लेकिन डॉक अंबेडकर का नाम 10 बार लेना फैशन हो जाता है कभी नेहरू के सामने पटेल तो कभी नेहरू के सामने डॉक अंबेडकर को खड़ा
करने की राजनीति बीजेपी के लिए भारी पड़ने लगी प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस कमेटी के प्रस्तावों के बाद भी पटेल को प्रधानमंत्री नहीं बनने देने की बात कह दी जो पूरी तरह सही नहीं निकली उम्मीद है इस पर आपने हमारा वीडियो देखा ही होगा जिसमें हमने बताया था कि तथ्य तो यही है कि उस समय की कांग्रेस कमेटियों के सामने किसी को प्रधानमंत्री बनाने का प्रस्ताव नहीं था और ना 1946 में आजादी के बाद की सरकार की कोई बात थी पटेल के प्रधानमंत्री नहीं बनने पर किसी भी कमेटी ने विरोध तक नहीं किया इसी तरह बीजेपी
के नेता डॉक अंबेडकर को नेहरू के सामने खड़ा करते रहते हैं डॉक अंबेडकर ने नेहरू कैबिनेट से इस्तीफा जरूर दिया लेकिन यह भुला दिया जाता है कि नेहरू और डॉक अंबेडकर ने संविधान सभा में करीब 3 साल तक मिलकर काम किया जाहिर है उस दौरान उनके बीच अनेक मुद्दों पर सहमति रही होगी और असहमति भी संविधान सभा की बहस को आप देखेंगे तो आपको गर्व होगा कि सभी सदस्य अपने विचार खुलकर रख रहे थे कोई हां में हां मिलाने या मोदी मोदी करने नहीं आया था एक ही सदस्य की किसी के साथ असहमति रही है
तो उसी के साथ दूसरे मुद्दे पर सहमति भी लेकिन बीजेपी ने पटेल और डॉक्ट अंबेडकर को नेहरू के खिलाफ खड़ा करने की जो रणनीति अपनाई है वह इतिहास के समग्र तथ्यों और समझ के आगे कमजोर पड़ जाती है इसलिए कमजोर पड़ जाती है क्योंकि जिस पटेल को बीजेपी नेहरू के खिलाफ खड़े करती है उन्हीं पटेल ने आरएसएस को लेकर क्या-क्या कहा है बीजेपी किसी को याद दिलाना नहीं चाहेगी लोकसभा और राज्यसभा में आप बीजेपी के नेताओं की बहस को ध्यान से देखिए उनके पास नेहरू पटेल और अंबेडकर को लेकर कुछ भी नया नहीं था ऐसा
प्रतीत होता है कि सरकार की तरफ से सारा भाषण नेहरू बनाम पटेल और नेहरू बनाम अंबेडकर में ही खत्म हो गया नेहरू को छोटा दिखाने के चक्कर में डॉक्टर अंबेडकर के महान योगदान को भी छोटा कर दिया गया डॉकर अंबेडकर और पटेल ने तो हिंदू राष्ट्र की अवधारणा का भी विरोध किया है क्या अमित शाह उनकी बातों को दोहरा सकते हैं संविधान को लेकर प्र प्रधानमंत्री गृहमंत्री और रक्षा मंत्री कसमें खाते रहे एक बार यही कह देते हिंदू राष्ट्र की अवधारणा से हम सहमत नहीं हैं भारत को हम हिंदू राष्ट्र नहीं बनने देंगे क्योंकि पटेल
और अंबेडकर दोनों इसके खिलाफ थे उनसे यह बात क्या कही जाएगी पूछकर देखिए डॉकर अंबेडकर की एक किताब है पाकिस्तान या भारत का विभाजन 1945 में प्रकाशित इस किताब के पेज नंबर 344 355 पर लिखा है अगर हिंदू राज सच्चाई बन जाता है तो इसमें कोई शक नहीं कि यह इस देश के लिए सबसे बड़ी विपदा होगी हिंदू राज को हर हाल में रोका जाना चाहिए आज कई संगठन हिंदू राष्ट्र की मांग को लेकर कार्यक्रम करते रहते हैं अमित शाह को बताना चाहिए गृहमंत्री हैं कि इन संगठनों को बाबा साहब के विचार से प्रेरित करने
के लिए क्या किया गया क्या कभी इनके हिंसक नारों के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई क्या अमित शाह भूल गए कि लोकसभा में शपथ लेते हुए बीजेपी के सांसद छत्रपाल सिंह गंगवार ने हिंदू राष्ट्र का जयकारा किया बीजेपी के सांसद लोकसभा के भी हिंदू राष्ट्र का जयकारा लगा गए क्या उनके खिलाफ कोई कार्यवाई हुई हिंदू राष्ट्र की मांग करना क्या संविधान को बदलना नहीं है उसकी भावना और उसके निर्माता की सोच से खिलवाड़ नहीं है डॉक अंबेडकर ही नहीं सरदार पटेल ने भी इसका विरोध किया था फरवरी 1949 में सरदार पटेल ने हिंदू राज यानी
हिंदू राष्ट्र की चर्चा को एक पागलपन भरा विचार बताया था 1950 में उन्होंने अपने श्रोताओं को संबोधित करते हुए कहा हमारा एक धर्म निरपेक्ष राज्य है यहां हर एक मुसलमान को य महसूस करना चाहिए कि वह भारत का नागरिक है और भारतीय होने के नाते उसका समान अधिकार है यदि हम उसे ऐसा महसूस नहीं करा सकते तो हम अपनी विरासत और अपने देश के लायक नहीं हैं हम अमित शाह का यह बयान फिर से सुना रहे हैं ताकि आगे उस पर बात कर सकें मान्यवर अंबेडकर जी को देश की पहली कैबिनेट से इस्तीफा क्यों दे
दिया आंबेडकर जी ने कई बार कहा कि अनुसूचित जातियों और जन जातियों से हुए व्यवहार से मैं असंतुष्ट हूं सरकार की विदेश नीति से मैं असहमत हूं और आर्टिकल 370 से मैं असहमत इसलिए वह छोड़ना चाहते उनको आश्वासन दिया गया आश्वासन पूरा नहीं हुआ उन्होंने इग्नोर के चलते इस्तीफा दे दिया और एक श्री बी सी रॉय ने पत्र लिखा कि अंबेडकर और राजा जी जैसे दो महानुभव मंत्रिमंडल छोड़ेंगे तो क्या होगा तो नेहरू जी ने उनको जवाब में लिखा है राजा जी के जाने से तो थोड़ा बहुत नुकसान होगा अंबेडकर के जाने से मंत्रिमंडल कमजोर
नहीं होता आपने नोट किया होगा कि अमित शाह के बयान से आपको पता ही नहीं चला कि डॉक्टर अंबेडकर ने हिंदू कोर्ट बिल के कारण इस्तीफा दिया लेकिन अमित शाह अन्य कारण गिनाने लग जाते हैं जिनमें 370 भी है और विदेश नीति भी है डॉ आनंद तेल तोंडे ने डॉ अंबेडकर की जीवनी लिखी है जिसका नाम है [संगीत] आइकोनोग्राफी का मुख्य कारण बना देते हैं जबकि डॉकर अंबेडकर ने नेहरू को जो त्याग पत्र लिखा था उसमें हिंदू को बिल को ही मुख्य कारण बताया था अपने इस्तीफे का नेहरू ने भी उन्हें जवाब देते समय हिंदू
कोर्ट बिल का हवाला दिया जरूर जब डॉ अंबेडकर ने सदन में भाषण दिया तब उसमें विदेश नीति और 370 की बात की डॉ तिल तुंडे ने अपने किताब में डॉक अंबेडकर के इस्तीफे के कारणों में कश्मीर को नहीं गिना है रामचंद्र गुहा की यह किताब देखिए इंडिया आफ्टर गांधी इसमें लिखा है कि आरएसएस ने हिंदू कोर्ट बिल का जोरदार विरोध किया दिसंबर 19 49 में दिल्ली के रामलीला मैदान में आरएसएस का सम्मेलन हुआ जिसमें कई वक्ताओं ने एक के बाद एक हिंदू कोर्ट बिल की निंदा की एक वक्ता ने इस कोट बिल को एटम बम
कह दिया इसकी तुलना राउले एक्ट से की गई यह भी कहा कि अगर यह हिंदू कोट बिल पास हो गया तो जो विरोध होगा उससे नेहरू की सरकार गिर जाएगी इस किताब में यह भी लिखा है कि तब आरएसएस ने 12 दिसंबर 1949 को डॉक अंबेडकर और नेहरू के पुतले जलाए थे राम रमेश ने अपने ट्वीट में भी इसका उदाहरण दिया है अमित शाह यह नहीं बताते कि हिंदू कोट बिल का आरएसएस ने क्यों विरोध किया आज भी नहीं कहते सही था या नहीं लेकिन इस बिल के गिर जाने पर डॉकर अंबेडकर के इस्तीफे को
अपनी राजनीति का हथियार बनाते हैं उसमें भी कारण कुछ और बताते हैं हिंदू कोट बिल नहीं अमित शाह को बताना चाहिए कि हिंदू कोट बिल पर संघ ने जो विरोध किया उस पर आज उनकी क्या राय है अमित शाह बंगाल के मुख्यमंत्री बीसी रॉय को लिखा नेहरू के पत्र का हवाला देते हैं लेकिन डॉक्टर अंबेडकर को लिखे नेहरू के पत्र के बारे में नहीं बताते हैं बीसी रॉय को नेहरू ने लिखा है वह काफी लंबा पत्र है उसके एक वाक्य को लेकर अमित शाह संसद में बयान देते हैं इस पत्र का फोकस छोड़कर जाने वाले
मंत्रियों के बाद अगली नियुक्तियों पर है लेकिन अमित शाह ही बता सकते हैं कि वे जब बीसी रॉय के पत्र का जिक्र कर रहे हैं तो नेहरू ने डॉकर अंबेडकर को जो लिखा है उसका जिक्र क्यों नहीं कर रहे हैं विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर बाबा साहब की लेखनी का पूरा संकलन आपको मिल जाएगा इसके भाग 15 के पेज नंबर 826 27 पर नेहरू का जवाब है नेहरू ने डॉ अंबेडकर को अपने पत्र में लिखा था उसे पढ़कर तो कतई नहीं लगता अंबेडकर के इस्तीफे से नेहरू बहुत खुश थे 27 सितंबर 1951 को डॉ अंबेडकर
नेहरू को त्याग पत्र भेजते हैं नेहरू उसी दिन डॉ अंबेडकर को वापस लिखते हैं इसका अनुवाद मैंने किया है और अब मैं पढ़ूंगा भी अमित शाह ने बीसी रॉय को लिखा नेहरू का पत्र का हवाला दिया लेकिन यह भी बता देते कि नेहरू ने इस्तीफे को लेकर अंबेडकर को जो पत्र लिखा उसमें क्या था अगर डॉक्टर अंबेडकर के प्रति आदर नहीं होता तो क्या नेहरू उसी दिन डॉक्टर अंबेडकर को पत्र लिखते जिस दिन उन्होंने अपना त्याग पत्र नेहरू को भेजा आप इस पत्र को ध्यान से सुनिए फिर बताइए कि नेहरू अंबेडकर के इस्तीफा देने से
कहां खुश थे नेहरू अपने पत्र में लिखते हैं कि दो दिन पहले आपके इस्तीफे की खबर प्रेस में छपी थी बल्कि मैं हैरान हो गया था सत्र की शुरुआत में आपने मुझसे अपने खराब स्वास्थ्य की बात की थी और मुझे भी पता है कि आपकी तबीयत बेहतर नहीं रहती है आपके खराब स्वास्थ्य और कैबिनेट से इस्तीफा देने की इच्छा को देखते हुए मैं आपको पद पर बने रहने के लिए जोर नहीं दूंगा बल्कि इन वर्षों के दौरान जिस तरह से आपने मिलकर काम किया है उसकी मुझे तारीफ करनी चाहिए हम कई बार एक दूसरे से
सहमत नहीं थे लेकिन इससे आपने जो अच्छे काम किए हैं उसे लेकर मेरा नजरिया नहीं बदल जाता है मुझे वाकई बहुत दुख है कि आप जा रहे हैं मैं आपकी की इस घोर निराशा को ठीक से समझ सकता हूं कि इस सत्र में हिंदू कोड बिल नहीं पास हो सका यही नहीं विवाद और तलाक का हिस्सा स्थगित करना पड़ा मुझे अच्छी तरह पता है कि आपने इसे लेकर कितनी मेहनत की थी और आपको कितना धक्का पहुंचा होगा नेहरू आगे लिखते हैं जबकि मैं इस बिल से बहुत करीब से नहीं जुड़ा था लेकिन मैं बहुत पहले
से सहमत था इसकी जरूरत है और चिंतित भी था कि इसे पास हो जाना चाहिए मैंने बहुत कोशिश की लेकिन किस्मत और संसद के नियम हमारे खिलाफ हैं मुझे तो लगता है कि इस सत्र में पास कराने को लेकर हम कुछ भी नहीं कर सकते हैं निजी तौर पर मैं इस लड़ाई को नहीं छोड़ सकता क्योंकि मैं मानता हूं कि इसका संबंध तो उस विकास से है जो हम सभी चाहते हैं आप चाहते हैं कि आपका इस्तीफा तुरंत स्वीकार कर लिया जाए लेकिन मेरा सुझाव है आप तब तक रुकने के बारे में विचार कर सकते
हैं जब तक आपके नाम से प्रस्तावित कुछ बिल और प्रस्तावों पर विचार हो रहा है मैं खुद इन मामलों को देखूंगा वैसे भी यह सत्र 6 अक्टूबर तक ही चलेगा एक हफ्ता से जरा अधिक समय अभी और है इन बचे हुए कुछ दिनों में अपनी प्राथमिकताओं के लिए बहुत कम जगह बची है हम कोशिश करेंगे कि आपके बिल और प्रस्तावों पर चर्चा हो सके इसलिए मैं उम्मीद करता हूं कि आप सत्र के अंत तक बने रहेंगे आपको मेरी शुभकामनाएं यह नेहरू डॉ अंबेडकर को लिखते हैं इसीलिए हमारा वीडियो लंबा हो जाता है कई लोग कहते
हैं रील की तरह छोटा बना दीजिए लेकिन क्या रील की तरह बनाने पर इतनी बातें सामने आ सकेंगी इस पर भी हम दावा कभी नहीं करते कि हमने सारी बातें बता दी हैं क्योंकि 20 से 40 मिनट के वीडियो में ऐसा करना संभव भी नहीं है उम्मीद है आप वीडियो पूरा देख रहे हैं और देखेंगे हिंदू कोर्ट बिल एक अलग विषय है इसके पास होने और नहीं पास होने को लेकर अलग से बात होनी चाहिए इसका अपना अलग और बहुत दिलचस्प और बहुत जरूरी इतिहास है हम अभी हिंदू कोर्ट बिल के प्रसंग में नहीं जाना
चाहते लेकिन डॉक अंबेडकर के त्याग पत्र के जवाब में नेहरू के पत्र से आप समझ सकते हैं कि इस्तीफा देने के बाद भी डॉटर अंबेडकर और नेहरू के बीच इस तरह का विरोध नहीं था कि इस्तीफा दिया नहीं कि अंबेडकर के घर ईडी पहुंच गई आयकर विभाग छापे डालने लगा गोदी मीडिया उनके घर के बाहर कैमरा लगाकर चिल्लाने लगा आप डॉकर अंबेडकर को लिखें नेहरू के पत्र को दोबारा से पढ़िए कि नेहरू किस तरह से डॉकर अंबेडकर से संवाद कर रहे हैं क्या नेहरू के पत्र से पूरी बात साफ हो जाती है शायद नहीं दोनों
के रिश्ते में आखिर में कड़वाहट आ गई थी यह भी सच है आनंद तेल तोंडे ने अपनी किताब में लिखा है कि जब डॉक्टर अंबेडकर को अपने इस्तीफे का भाषण पढ़ना था तब स्पीकर ने कहा अपने भाषण की प्रति भेजिए उससे नाराज होकर डॉक्टर अंबेडकर सदन से बाहर चले गए इससे यह पता चलता है कि उनका इस्तीफा एक सहज घटना नहीं थी अपने वक्तव्य में उन्होंने कहा कि वे कानून मंत्रालय दिए जाने से असंतुष्ट थे डॉक्टर अंबेडकर नाराज थे इससे कोई इंकार नहीं कर सकता लेकिन इतिहास को देखने का यह तरीका ठीक नहीं जैसा अमित
शाह बता रहे हैं डॉकर अंबेडकर अपने खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हैं नेहरू उनसे कह रहे हैं सत्र के आखिर तक रुक जाइए डॉकर अंबेडकर ने इस्तीफे से एक महीना पहले 10 अगस्त को नेहरू को एक पत्र में लिखा था मेरा स्वास्थ्य बिगड़ गया है और डॉक्टर के अनुसार इलाज शुरू करना चाहिए इसके बदले में नेहरू ने कहा आई सजेस्ट यू टेक थिंग्स अ लिटिल इजी यानी आराम से काम कीजिए स्वास्थ्य का ध्यान रखिए वगैरह वगैरह यह एक तथ्य है कि नेहरू और डॉक्टर अंबेडकर के बीच कई मुद्दों पर असहमति थी लेकिन तथ्य तो यह
भी है कि दोनों ने लंबे समय तक एक साथ काम किया है संविधान सभा में ही दोनों ने 2 साल 11 महीने और 17 दिन एक साथ काम किया नेहरू की कई नेताओं से सहमति रही और कई नेता खुलकर नेहरू का विरोध करते रहे केवल पटेल और डॉकर अंबेडकर जैसे कद्दावर नेता ही नहीं बल्कि दूसरे सदस्य भी नेहरू से असहमति रख सकते थे रखते थे कि आज इस तरह की असहमति रखना संभव है कभी आपने सुना है मोदी सरकार की किसी नीति से अलग किसी सांसद या मंत्री को अपनी राय रखते हुए क्या आप नहीं
जानते कोई ऐसा करेगा तो उसकी क्या हालत होगी कायदे से अमित शाह को इस खबर पर जवाब देना चाहिए था या मोदी सरकार के किसी मंत्री को जवाब देना चाहिए था कि जब से मोदी जी की सरकार आई है आईआईटी और केंद्रीय संस्थानों में दलित पिछड़ों का प्रतिनिधित्व क्यों नहीं बढ़ा द हिंदू की खबर है देश के आठ आईआईटी और सात आईआईएम में 80 फी फैकल्टी जनरल कैटेगरी से हैं दो आईआईटी और तीन आईआईएम में 90 फीसद फैकल्टी जनरल कैटेगरी से हैं अलग-अलग आरटीआई की यह जानकारी है मोदी सरकार इन पदों पर आरक्षण क्यों नहीं
लागू कर सकी दलित और पिछड़े नेता कब से मांग कर रहे हैं कि उनके समाज का प्रतिनिधित्व नहीं है अपर कास्ट जो अल्पमत में है वही इन पदों पर बहुमत में नजर आता है सामाजिक न्याय समाज के अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गों को न्याय दिलाने का बड़ा अस आरक्षण था उसे समाप्त कर दिया गया है आउटसोर्सिंग और कांट्रैक्ट बेसिस पर थोड़ी बहुत नौकरियां जो दी जा रही हैं उनमें दलितों और पिछड़ों का कोई आरक्षण नहीं है शिक्षण संस्थाओं और विश्वविद्यालय में प्रोफेसर्स और वाइस चांसलर के चयन के समय इनके आगे लिख दिया
जाता है एक नया श का इजात हुआ एनएफएस नॉट फाउंड सूटेबल सरकारी उपक्रम बेज दिए प्राइवेट उपक में कोई आरक्षण नहीं है अमित शाह ने कहा कि फैशन हो गया है अंबेडकर अंबेडकर करना अंबेडकर का नाम 10 बार लेने से उनकी झुंझलाहट हो सकती है लेकिन विपक्ष को घेर हुए वे जो उदाहरण दे रहे हैं काफी नहीं है आज के समय में भी सरकारी नौकरियों में दलित कहां है वह दिखाई क्यों नहीं देते अमित शाह इसकी संख्या क्यों नहीं बताते राहुल गांधी कब से सचिवों को लेकर सवाल उठा रहे हैं भारत सरकार के सचिवों में
दलित ना के बराबर हैं अमित शाह को इन बातों पर तथ्यों के साथ जवाब देना चाहिए था लेकिन लगे स्मारकों के नाम गिनाने अंबेडकर जी के स्मारक कब बने जब भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आई तब मऊ में डॉक्टर अंबेडकर के जन्म स्थान पर स्थानक बना लंदन में अध्ययन करते थे वहां स्मारक बना नागपुर में शिक्षा दीक्षा लित वहां बना दिल्ली में महा परिनिर्वाण स्थल पर बना और मुंबई में चैत्य भूमि में भी बन रहा है हमने पांच तीर्थ बनाए महामानव और मैं मानता हूं मान्यवर मैं मानता हूं कि अंबेडकर की आंबेडकर जी के सिद्धांतों
पर चलना नहीं और वोट के लिए उनकी गुहार लगा देना 14 अप्रैल को राष्ट्रीय समरसता दिवस घोषित किया हमने 26 नवंबर को संविधान दिवस घोषित किया उस वक्त भी इसका विरोध कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने किया हर सरकार अपनी तरह से स्मारक बनाती है बीजेपी ने भी बनाया लेकिन अगर स्मारकों के नाम पर ही राजनीति होनी है तब बीजेपी को अपने नेताओं के पुराने बयान निकालने चाहिए जब मायावती लखनऊ और यूपी भर में दलित समाज के नायकों की मूर्तियां और स्मारक बनवा रही थी आज प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया है कि उनकी सरकार ने मुंबई की
चैत्य भूमि के मामले को सुलझाया और वहां पर सम्मान व्यक्त किया लेकिन यह खबर देखिए नवंबर 2013 की है जो कई जगह छपी है इसमें लिखा है कि मनमोहन सिंह कैबिनेट ने मुंबई की हिंदू मिलकी जमीन को महाराष्ट्र सरकार को हस्तांतरित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है इस जमीन पर डॉक अंबेडकर के लिए स्मारक बनाने की बात थी कैबिनेट ने यह फैसला प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्ष में लिया था अब यह खबर 2012 की है मुंबई की चैत्य भूमि में जहां डॉक अंबेडकर का अंतिम संस्कार हुआ वहां अंबेडकर स्मारक बनाने के लिए मनमोहन
सिंह ने राज्य सरकार को हिंदू मिलकी जमीन देने का वादा किया खबरों में लिखा है कि यहां स्मारक बनाने की मांग कई दलों ने की है दिसंबर 20122 में तब के कपड़ा मंत्री आनंद शर्मा लोकसभा में इसकी घोषणा करते हैं इसके लिए रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के रामदास अठावले के नेतृत्व में एक डेलिगेशन तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिलने गया यह तस्वीर उसी वक्त की है तमाम नेता डॉकटर मनमोहन सिंह का धन्यवाद कर रहे हैं अब यह खबर अगस्त 2016 की है प्रधानमंत्री मोदी मंत्रिमंडल ने डॉक्टर अंबेडकर के स्मारक के नियमों को मंजूरी दी तो
नियम तय करने में मोदी सरकार को 2 साल लग गए यानी देरी मोदी सरकार में भी हुई बल्कि ठीक से देखिए तो इसके बाद भी सात महीने लगे महाराष्ट्र सरकार को हिंदू मिल की जमीन मिलने में यह हाल तो मोदी सरकार का है जो मनमोहन सरकार की आलोचना कर रही है मगर मुंबई महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण एमएमआरडीए की वेबसाइट पर हमें एक और जानकारी मिलती है एमएमआरडीए को इस जमीन का स्वामित्व 25 मार्च 2017 को दिया गया मगर इसी पेज पर यह भी लिखा है कि 11 अक्टूबर 2015 को प्रधानमंत्री मोदी ने यहां आकर भूमि
पूजन किया यानी महाराष्ट्र सरकार को जमीन मिलने से 2 साल पहले ही भूमि पूजन हो गया क्या कमाल की बात है यह हाल तो मोदी सरकार का है जो मनमोहन सरकार की आलोचना कर रही है पहले यही भाजपा के लोग आरएसएस के लोग गांधी जी को गाली देते थे कपूरी जी को गाली देते थे अब नेहरू जी को गाली दे रहे हैं और अब अंबेडकर जी को गाली देने का काम कर इन आरएसएस और भाजपा के पास कोई महापुरुष तो है नहीं आजादी में इनका कोई योगदान तो रहा नहीं केवल नफरत फैलाना भाई को भाई
से लड़ाना यही काम में लगे रहते हैं लोग अब चाहते हैं जो महापुरुष हैं उनके नाम को जो है बदनाम किया जाए तो इसका हम लोग करा विरोध हम लोग जो है पूरी तरीके से करते हैं बाबा साहब अंबेदकर हम लोगों के फैशन भी है पैशन भी है मोटिवेशन भी है बाबा साहब अंबेडकर तो किसी भी कीमत पर बाबा साहब अंबेडकर का हम लोग जो है अपमान जो है झेलने वाले नहीं हैं राजनीति का एक सच यह भी है कि अगर इसके पटल पर मान्यवर कांशीराम जैसे नेता नहीं आते तो आज डॉक्टर अंबेडकर के नाम
से सारे दल इतनी कसमें नहीं खा रहे होते हम यह नहीं कह रहे कि मोदी सरकार ने अंबेडकर के नाम से कोई स्मारक नहीं बनवाया लेकिन यह भी देखना चाहिए कि मायावती ने क्या कोई कमी कर दी थी कितनी ही मूर्तियां बनवा दी और स्मारक की राजनीति को वैचारिक आधार दिया एक सांस्कृतिक पूंजी के तहत उनका निर्माण कराया तब भी केवल इसी से किसी को भी श्रेय नहीं मिलना चाहिए कि उसने उनका सम्मान कर दिया बल्कि यह भी देखना चाहिए कि उस दल की सरकार ने किसी भी महापुरुष के सपनों का भारत बनाने के लिए
क्या किया जब दलितों पर अत्याचार हुआ तब योगी सरकार ने क्या किया मोदी सरकार ने क्या अलग किया उनके विचारों के प्रसार के लिए पढ़ाई लिखाई के क्षेत्र में क्या किया गया पत्रकार पी साईनाथ ने एक संस्था बनाई है ग्रामीण पत्रकारिता की इसका नाम है पीपल्स आर काइ ऑफ रूरल इंडिया संक्षेप में इसे पारी कहते हैं आप इसके वेबसाइट पर जाकर जरूर पढ़ा कीजिए शानदार रिपोर्ट मिलेगी और गोदी मीडिया देखना तुरंत बंद कीजिए परी की वेबसाइट का जिक्र हमने इसलिए किया क्योंकि हम बताना चाहते हैं कि बाबा साहब अंबेडकर के विचारों को फैलाने का काम
केवल स्मारकों से नहीं हो सकता है उसका भी रोल है लेकिन असली लड़ाई उनके विचारों के प्रसार की है पोस्टर के आगे तो सब झुकते हैं लेकिन उनके विचारों को अगर आपने ठीक से नहीं उतारा तो वही होगा जो अमित शाह ने कहा है है अच्छा होता अमित शाह यह भी बताते कि 1976 में शंकर राव चौहाण की सरकार ने एक बड़ा फैसला किया था यह सरकार किसकी थी कांग्रेस की आज उनके बेटे अशोक चौहाण बीजेपी में चले गए हैं 1976 में महाराष्ट्र की कांग्रेस सरकार ने फैसला किया डॉक्टर अंबेडकर के कामों का संकलन किया
जाएगा छापा जाएगा इसके लिए कमेटी बनाई गई इस कमेटी में राज्य के शिक्षा मंत्री के अलावा कई शिक्षाविद रखे गए 1978 में दलित कार्यकर्ता और लेखक वसंत मून भी इसका हिस्सा बने जिसके बाद तय हुआ कि डॉक्ट अंबेडकर की अप्रकाशित रचनाओं को भी इस संकलन में शामिल किया जाएगा 1979 में महाराष्ट्र के शिक्षा मंत्रालय ने 22 खंडों में अंबेडकर के लेखों और भाषणों का प्रकाशन किया जनवरी 2014 में केंद्र में कांग्रेस की सरकार के तहत डॉक अंबेडकर फाउंडेशन ने उस श्रृंखला को फिर से छापा यह सब पारी की वेबसाइट पर लिखा है 22 खंडों में
डॉक अंबेडकर के लेखों पत्रों का यह संकलन बहुत बड़ा काम है अ अज में इसे छापा गया डॉक्टर अंबेडकर की 125 वं साल ग्रह पर 2015 में देवेंद्र फडणवीस की सरकार के समय इसे फिर से छापा गया अमित शाह के बयानों में जितनी बातें कही गई सभी तथ्यों की जांच यहां संभव नहीं है हम आपको यह भी बताना चाहते हैं कि इस वीडियो के लिए स्क्रिप्ट लिखने में ही 5 घंटे से ज्यादा समय लगे लगातार 5 घंटे तक हम तीन लोग काम करते रहे पढ़ते रहे और हिंदी में लिखते रहे तब भी पूरी बातों की
जांच नहीं कर सकते सिर्फ लिखने की बात बता रहा हूं इसे रिकॉर्ड करने में यानी लिखे हुए को रिकॉर्ड करने में जिस तरह से आप मुझे देख रहे हैं और उसके बाद एडिटिंग के समय को जोड़ लें तो इस एक वीडियो को बनने में सात से ठ घंटे लग गए एक नेता के बयान को अगर समझना है इतनी मेहनत करनी होगी हमारा मकसद किसी को झट से झूठा साबित करना नहीं है बल्कि आपको बताना है कि इतिहास से जुड़े मुद्दों को कैसे देखना चाहिए किस तरह से जानकारी पता करनी चाहिए और अंत अंत तक किसी
भी जवाब से संतुष्ट नहीं होना चाहिए गृह मंत्री अमित शाह जानते हैं हजारों करोड़ रुपए के गोदी मीडिया में आज के दिन कोई भी पत्रकार उनके इस बयान पर इतनी मेहनत नहीं करेगा इसलिए उनकी ही बात मुख्य रूप से और एक तरफा तरीके से जनता में पहुंच जाएगी यह भी आज का ही सच है नमस्कार मैं रवीश कुमार