यह कहानी उस शख्स की है जिसके पास दौलत थी ताकत थी शोहरत थी लेकिन एक ऐसी बीमारी थी जिसने उसकी नींदे हराम कर दी थी कई साल पहले एक बादशाह था जिसके पास दुनिया की हर नेमत मौजूद थी उसकी हुकूमत पूरे जहां पर थी तख्त ताज और दौलत उसके कदमों की धूल थी लोग उसके सामने हाथ बांधे खड़े रहते मगर बादशाह सुलेमान का दिल बुझ चुका था वह जिंदगी से बेजार था उसे जीने की कोई वजह नजर नहीं आती थी यही हाल उसकी बीवी सोनिया का भी था बादशाह ने सोनिया से मोहब्बत की शादी की
थी वह बेहद हसीन थी इतनी हसीन कि जो भी उसे देखता देखता ही रह जाता दोनों एक दूसरे से बेपनाह मोहब्बत करते थे शादी को कई बरस बीत चुके थे लेकिन इसके बावजूद उनके दरमियान कभी कोई झगड़ा नहीं हुआ मगर फिर भी उनकी आंखें हमेशा आंसुओं से लबरेज रहती मैं जीना नहीं चाहती सुलेमान मुझे लगता है कि शायद मैं ज्यादा अरसा जी नहीं पाऊंगी एक दिन सोनिया ने यह कहते हुए फूट फूट कर रोना शुरू कर दिया सुलेमान ने उसे गले से लगा लिया उन दोनों की उदासी और दर्द की वजह यह थी कि शादी
के कई बरस गुजर जाने के बावजूद उनके यहां औलाद नहीं हुई और अब तो औलाद होने की कोई उम्मीद भी नहीं बची थी बादशाह अपनी बीवी के इस गम से पूरी तरह वाकिफ था आओ मेरे साथ शिकार पर चलो तुम्हारा दिल बहल जाएगा बादशाह ने सोनिया का हाथ थामा मगर सोनिया ने इंकार कर दिया वह अपने कमरे में बैठकर रोना चाहती थी लेकिन बादशाह ने जबरदस्ती उसे अपने घोड़े पर बिठाया और महल से बाहर ले आया करीब ही एक घना जंगल था जहां शिकार के लिए जानवरों की भरमार थी लेकिन उन्हें क्या पता था कि
इस शिकार ने उनकी जिंदगी बदलनी थी बादशाह शिकार का आदि था और बड़े माहिर अंदाज में शिकार किया करता था वह कई सिपाहियों के साथ जंगल में दाखिल हुआ सामने ही कई हिरण कुलांचे भर रहे थे बादशाह को अपने सिपाहियों समेत आता दे हिरण इधर उधर भागने लगे बादशाह ने अपना तीर कमान उठाया और दूर से ही निशाना साधक एक मजबूत हिरण पर तीर चला दिया तीर जैसे ही हिरण को लगा फिजा में एक अजीब सी चीख गूंज उठी घायल हिरण लड़खड़ा आया और झाड़ियों के अंदर गायब हो गया यह आपने क्या किया आपने उस
हिरण को मार डाला सोनिया ने चीक कर कहा बादशाह घोड़े से नीचे उतर आया और बोला फिक्र मत करो वह सिर्फ एक जानवर है उसने सोनिया का हाथ पकड़ा और झाड़ियों में घायल हिरण को ढूंढने लगा मगर यह देखकर हैरानी हुई कि झाड़ियों में हिरण का कोई नामो निशान तक नहीं था यह कैसे हो सकता है बादशाह बुदबुदा आया उसने अपनी आंखों से देखा था कि तीर हिरण को लगा था हिरण ज्यादा दूर नहीं जा सकता था लेकिन सिपाहियों ने भी आसपास का सारा इलाका छान मारा फिर भी वह कहीं नहीं मिला यह क्या माजरा
है हिरण आखिर कहां जा सकता है बादशाह सोच ही रहा था कि अचानक एक तेज धमाका हुआ सोनिया और बादशाह जिस जगह खड़े थे वह जमीन अचानक हिलने लगी वे दोनों घबराकर दो कदम पीछे हट गए क्योंकि उनके सामने जमीन दो हिस्सों में बंट रही थी फटी हुई जमीन के अंदर से काले रंग का धुआं उठने लगा देखते ही देखते वह धुआ एक विशाल डरावने पेड़ का रूप लेने लगा यह कैसा पेड़ है यह इस जंगल के बाकी पेड़ों जैसा तो नहीं लगता सोनिया ने डरते हुए कहा बादशाह और सोनिया सक्ति की हालत में उस
अजीबो गरीब पेड़ को देखने लगे मुझे डर लग रहा है सुलेमान सोनिया ने बादशाह का हाथ कसकर पकड़ लिया अचानक पेड़ से एक भयानक हंसी की आवाज गूंजने लगी ऐसी हंसी जैसे कोई बूढ़ी औरत जोर-जोर से कहकहे लगा रही हो सोनिया ने घबराकर बादशाह का हाथ और कसकर पकड़ लिया बादशाह और उसके सारे सिपाही भी खौफ जदा हो गए थे पेड़ से निकलने वाला धुआं धीरे-धीरे एक शक्ल लेने लगा थोड़ी ही देर में वह धुआं एक चालाक डरा बूढ़ी औरत की शक्ल में बदल गया वह बिल्कुल झुकी हुई थी उसकी नाक लंबी और नुकीली थी
और उसका चेहरा झुर्रियों से भरा हुआ था उसे देखते ही सोनिया डर के मारे कांप उठी यह कौन है यह बूढ़ी औरत कहां से आई और वह हिरण कहां गया सोनिया ने कांपती आवाज में पूछा बादशाह ने हिम्मत जुटाकर वही सवाल उस बूढ़ी औरत से कर डाला बूढ़ी औरत जोर से हंसी और बोली मैं तुझे अच्छी तरह जानती हूं बादशाह सुलेमान तुझे इस जंगल तक क्या खींच लाया तेरे चेहरे पर गम के बादल क्यों छाए हैं तू औलाद के लिए तड़प रहा है लेकिन तुझे और तेरी बीवी को कभी औलाद नहीं मिलेगी तुम दोनों सारी
जिंदगी यूं ही तड़पते रहोगे और इसमें तुम्हारी कोई गलती भी नहीं इतना कहते ही बूढ़ी औरत ने फिर से जोरदार कहकहा लगाया बादशाह की आंखें हैरत से फैल गई ऐसा क्यों कह रही हो हम सारी जिंदगी बे औलाद क्यों रहेंगे सोनिया ने रोते हुए पूछा तभी बूढ़ी औरत के चेहरे से आग की लपटें निकलने लगी यह सब तुम्हारे बाप दादा के कर्मों की सजा है बूढ़ी औरत ने गुस्से से कहा जब तेरा बाप जवान था और तू सिर्फ छ महीने का था तब वह एक दिन इसी जंगल में शिकार खेलने आया था उस वक्त मैं
एक खूबसूरत लड़की थी और जंगल की फिजा का लुत्फ ले रही थी लेकिन तेरा बाप शिकार के लालच में मुझ पर तीर चला बैठा जैसे ही वह तीर मुझे लगा मैं पल भर में एक बदसूरत बूढ़ी औरत बन गई उसके बाद मैं कभी दोबारा जवान नहीं हो सकी तेरा बाप तो चला गया लेकिन मैंने उसे यह बददुआ दी कि उसकी नस्ल मिट जाएगी और वही हुआ तुम्हें और तुम्हारी बीवी को औलाद नहीं हो रही और कभी नहीं होगी बूढ़ी औरत की बात सुनकर सोनिया जोर-जोर से रोने लगी बादशाह के भी होश उड़ गए थे लेकिन
फिर भी उसने हिम्मत करके पूछा क्या इसका कोई हल है क्या हम तुम्हारे साथ हुए जुल्म का कोई कफारा अदा कर सकते हैं बूढ़ी औरत थोड़ी देर के लिए खामोश हो गई फिर उसने गहरी सांस ली और कहा एक ही रास्ता है अगर तू इस पेड़ के अंदर लगे दरवाजे को देख ले तो शायद तुझे औलाद की खुशी नसीब हो जाए लेकिन याद रखना अगर दरवाजा खोलने के बाद तुझे नजात मुक्ति नहीं मिली तो शायद तेरी पूरी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी यह तेरी किस्मत पर निर्भर करता है तू चाहे तो अपनी किस्मत आजमा सकता है
हो सकता है कि तेरा इम्तिहान पूरा हो और मेरी बददुआ का असर खत्म हो जाए इतना कहकर बूढ़ी औरत धुएं में तब्दील होकर अचानक गायब हो गई सोनिया खौफ से कांप रही थी मेरा सिर बहुत दर्द कर रहा है मुझे यहां से ले चलो सुलेमान मैं इस जंगल में और नहीं रह सकती उसने बादशाह से मिन्नत की तभी पेड़ फिर से धुएं में तब्दील होकर वहां से गायब होने लगा बादशाह ने सोनिया का हाथ थामा और उसे लेकर महल वापस आ गया लेकिन महल लौटने के बाद भी सोनिया की बेचैनी कम नहीं हुई वह सारा
दिन इधर-उधर टहल रही उसने एक निवाला तक नहीं खाया रात को वह सोने के लिए लेटी लेकिन नींद उसकी आंखों से कोसों दूर थी इस तरह कई दिन बीत गए बूढ़ी औरत की शक्ल और उसकी बातें सोनिया के जहन में गूंजती रही एक रात वह थोड़ी देर के लिए सो गई लेकिन सोते ही उसने एक अजीब सपना देखा सोनिया ने देखा कि वह एक ऊंची पहाड़ी की छोटी पर खड़ी है और नीचे से जंगल का नजारा साफ दिख रहा है जंगल में एक रहस्यमई दरख्त था बिल्कुल वैसा ही जैसा उन लोगों ने पहले देखा था
उसकी छाल धुएं में तब्दील होकर उड़ रही थी और जैसे ही पूरी छाल गायब हुई अंदर से एक दरवाजा नजर आया मलका ख्वाब में ही चलते हुए उस दरवाजे के अंदर दाखिल हो गई अंदर दो रास्ते थे एक रास्ते पर फूलों की बारिश हो रही थी जबकि दूसरा रास्ता सुनसान और भयावह था अचानक एक आवाज गूंजी आजमाइश के बड़े रास्ते का चुनाव करो क्योंकि केवल आजमाइश ही तुम्हें तुम्हारी मंजिल तक पहुंचा सकती है मलका यह आवाज सुनकर स्तब्ध रह गई एक तरफ फूलों से भरा आकर्षक रास्ता था जो उसे अपनी ओर खींच रहा था और
दूसरी ओर वीरान बंजर और डरावना रास्ता था जहां जाने की सोच मात्र से उसका दिल बैठा जा रहा था लेकिन उसने आवाज की बात मानने का फैसला किया और दूसरे रास्ते की ओर बढ़ गई जैसे ही उसने आगे कदम बढ़ाया जगह-जगह कांटे उभर आए मलका के ऊपर राग गिरने लगी वह घबरा गई लेकिन कुछ ही देर बाद वह राख एक सुंदर बच्चे के रूप में बदल गई और मलका के सामने प्रकट हो गई यह देखकर मलका के हलक से एक जोरदार चीख निकली और वह घबरा कर जाग गई वह बुढ़िया सच कह रही थी हमारा
फूलों भरा रास्ता राख में बदल चुका है सिर्फ इसलिए कि हम पर किसी की बददुआ का असर है मलका जोर-जोर से रोने लगी उसकी चीखें सुनकर बादशाह भी घबरा गया और उठकर बैठ गया यह तुम क्या कह रही हो कौन सी बुढ़िया बादशाह तो सब कुछ भूल चुका था लेकिन मलका ने उसे सब याद दिला दिया दोनों ने फैसला किया कि वे अगले दिन फिर से उस दरख्त के पास जाएंगे अगली सुबह बादशाह सुलेमान और मलका सोनिया अपनी सिपाहियों की पूरी फौज के साथ जंगल में जा पहुंचे वह रहस्यमई दरख्त फिर से वहां अपनी शान
के साथ खड़ा था हमें इस दरख्त के अंदर जाना होगा बादशाह ने मलका का हाथ थामा और दरख्त की ओर बढ़ने लगा जैसे-जैसे वे दरख्त के करीब पहुंचे वह धीरे-धीरे धुएं में तब्दील होने लगा फिर सामने एक दरवाजा नजर आया जिसके ऐन बीच में एक बड़ी सी चाबी लटक रही वो रही चाबी हमें इस चाबी से दरवाजा खोलना होगा सोनिया ने उत्तेजित होकर कहा लेकिन जैसे ही बादशाह ने चाबी को हाथ लगाया सब कुछ धुए में बदलकर तहलील होने लगा दरख्त का कोई नामो निशान नहीं रहा अब वहां सिर्फ बादशाह और मलका अकेले खड़े थे
यह सब क्या था आखिर यह सब हमारे साथ क्यों हो रहा है मलका सोनिया फूट फूट कर रोने लगी यह सब बादशाह की समझ से भी बाहर था किसी तरह वे दोनों महल वापस लौट आए लेकिन का बुरी तरह टूट चुकी थी बुढ़िया की बातें हर वक्त उसके जहन में गूंजती रहती वह हर समय अपने रब से माफी मांगती और दुआएं करती कि वह इस बददुआ का असर मिटा दे यूं ही कई दिन बीत गए एक दिन बादशाह ने एक शानदार खैरात का आयोजन किया पूरी सल्तनत से लोग बादशाह से मिलने आए बादशाह और मलका
अपने हाथों से लोगों को भोजन और उपहार दे रहे थे इसी बीच एक झुकी हुई कमर वाली बुढ़िया मलका के सामने आई और बोली ए मलका तू बहुत आदिल और नेक दिल मालूम होती है मुझे तुझसे कुछ मांगना है मलका मुस्कुराई और बोली बोलो अम्मा आपको जो चाहिए मैं दूंगी बुढ़िया हल्के से मुस्कुराई और बोली अपने गले में पहना हुआ यह खूबसूरत हार मुझे दे दे यह मुझे बहुत पसंद आया है बुढ़िया की यह बात सुनकर पूरी सल्तनत में सन्नाटा छा गया वहां मौजूद सभी लोग फुसफुसाना लगे यह कैसी बुढ़िया है जो मलका का कीमती
हार मांग रही है क्या इसे नहीं पता कि हार राजवंश की निशानी है जिसे मलका की सास ने उसे तोहफे में दिया था मगर मलका चुपचाप खड़ी रही बुढ़िया यह सब सुन रही थी लेकिन उसने कुछ नहीं कहा अचानक सभी चौक उठे मलका ने अपने गले से हार निकालकर अपने सिपाहियों की ओर देखा और सख्त लहजे में कहा खबरदार कोई भी एक शब्द ना कहे इस अम्मा ने मुझसे यह हार मांगा है और मैं इसे जरूर दूंगी यह कहकर उसने बुढ़िया को हार दे दिया बुढ़िया मुस्कुराई और बोली ए मलका तू दिल की बहुत अच्छी
है मैं जानती हूं तू औलाद के लिए तड़प रही है आज से तेरी सारी आजमाइश खत्म तू अपनी परीक्षा में सफल रही मलका अवाक रह गई बादशाह ने सोनिया का हाथ पकड़ा और कहा तुमने यह क्या किया इतना कीमती हार इस बुढ़िया को दे दिया मगर मलका चुप रही बुढ़िया ने बादशाह की बात सुनकर वजीर की ओर देखा और कहा मुझे लोहे का एक बड़ा टुकड़ा और एक बड़ा बर्तन लाकर दो बादशाह के इशारे पर वजीर तुरंत गए गया और दोनों चीजें ले आया बुढ़िया ने लोहे को बड़े बर्तन में रखा और फिर मलका के
कीमती हार को उसमें डाल दिया इसके बाद वह लोहे के टुकड़े से हार पर वार करने लगी सभी हैरान रह गए बादशाह घबरा कर उठ खड़ा हुआ और चिल्लाया ऐ बुढ़िया यह तू क्या कर रही है अगर तुझे हार नहीं चाहिए तो तू मुझसे रकम ले ले लेकिन मेरी बीवी के हार को नुकसान ना पहुंचा मगर कोई उसकी बात नहीं सुन रहा था बुढ़िया अपने काम में मग्न रही और लोहे के टुकड़े बरसा बरसा कर पूरा हार चखना चूर कर दिया अब वहां कीमती पत्थरों की धूल के सिवा और कुछ नहीं था लेकिन मलका सोनिया
मुस्कुराते हुए इत्मीनान से अपने तख्त पर बैठी थी बादशाह को शदीद गुस्सा आ चुका था बुढ़िया पलटी और बोली इस हार के बदले जो कुछ तुम लोगों को मिलेगा उसका तो तुम्हें तसव्वुर भी नहीं फिर वह मुस्कुराई और तेजी से चलती हुई महल से बाहर चली गई बादशाह समेत सभी लोग हैरान रह गए थे मगर मल मुस्कुरा रही थी ऐसा लग रहा था जैसे उसने कुछ पहचान लिया है उस रात जब वह सोने के लिए लेटी तो उसे ख्वाब में वही बुढ़िया नजर आई ए मलका तूने अच्छा किया जो अपना हार मेरे हवाले कर दिया
बददुआ का असर इसी हार में था मैंने इसे चखना चूर करके बद्दुआ को जायल कर दिया यह तेरी आजमाइश थी जिसमें तू पूरी उतरी है अब तुझे औलाद जरूर होगी मलका खुश होकर उठ बैठी जल्दी उठो अल्लाह ने हमारी सुन ली सारी आजमाइश खत्म हो गई मलका ने कहा तो बादशाह भी हैरानी से उठकर बैठ गया बुढ़िया की बात दुरुस्त थी चंद ही महीनों बाद मलका को यह खुशखबरी मिली कि वह मां बनने वाली है नौ महीने पलक झपकते ही गुजर गए और मलका सोनिया व बादशाह सुलेमान के यहां एक खूबसूरत शहजादे ने जन्म लिया
वह खूबसूरती में बिल्कुल अपनी मां पर गया था और जहान व बहादुरी में बिल्कुल अपने बाप जैसा बादशाह और मलका अपने शहजादे को पाकर बेहद खुश थे पूरी सल्तनत में खुशियां मनाई जा रही थी हर कोई मुतमइन था कि अब उनका बादशाह और मलका बे औलाद नहीं रहे उन्हें वारिस मिल चुका था जो कल को अपने बाप की जगह लेगा और तख्त नशीन होगा बादशाह ने अपने बेटे का नाम शहजादा अलबर रखा वह बेइंतहा जहीन भी था छोटी उम्र में ही उसने कई जबाने सीख ली बाप की तरह तीरंदाजी और मां की तरह खुश मिजाजी
उसकी गुठी में पड़ी थी वकत गुजरता रहा शहजादा अलबर बड़ा होता रहा उसे सल्तनत में गहरी दिलचस्पी थी लोग भी उसे दिलो जान से चाहते थे बिल्कुल उसी तरह जैसे उसके मां-बाप को चाहते थे जब शहजादा अलबर 20 बरस का हुआ तो बादशाह ने इंतहा खुशी से अपने सर का ताज उतार कर बेटे के सर पर रख दिया मैं चाहता हूं कि अब इस तख्त की नुमाइंदगी तुम करो यह तख्त अब तुम्हारा है मैं बूढ़ा हो चुका हूं मैंने बहुत अरसा इस सल्तनत की खिदमत की है लेकिन अब जिम्मेदारी उठाने का वक्त आ गया है
बादशाह ने मोहब्बत से शहजादे अलबर के कंधे पर हाथ रखा मलका सोनिया ने भी मुस्कुरा करर अपने बेटे को दुआ दी वह इस नई जिम्मेदारी पर बेहद खुश था लोग उसे पहले से ही पसंद करते थे और अब बादशाह बनने के बाद तो और भी ज्यादा मोहब्बत करने लगे थे उसने अपनी अकल मंदी से सल्तनत के लिए ऐसे फैसले लेने शुरू किए कि लोग हैरान रह जाते जो काम उसका बाप भी ना कर सका वह बादशाह अलबर करने लगा लेकिन खुशकिस्मती की तकदीर में बदकिस्मती छुप थी चंद रोज गुजरे तो बादशाह अलबर को अपनी तबीयत
कुछ बोझल बोझल सी महसूस होने लगी जब वह सुबह नींद से जागा तो उसे यूं महसूस हुआ जैसे उसका पूरा जिस्म दर्द से दुख रहा हो वह खाना खाने के लिए बैठा उसके सामने कई तरह के मुर्गन गजा थी भूख तो लग रही थी उसने पेट भरकर खाना खा लिया लेकिन खाने के फौरन बाद उसकी तबीयत खराब होनी शुरू हो गई भारी कदमों से उठा और कमरे में जाकर सो गया वजीर ने आकर उसे इला दी कि कई जरू मसले अभी बाकी हैं मगर बादशाह को नींद आ रही थी वह फिर से सो गया उसे
अपनी तबीयत में हर वक्त एक कवायत सी महसूस होने लगी हर वक्त उसका जी चाहता कि या तो वह सोता रहे या फिर खाता रहे धीरे-धीरे जिंदगी से उसका दिल ने लगा उसे हर चीज बुरी लगने लगी वह अपने कमरे से बाहर निकलने पर भी राजी ना होता पूरे महल में जो भी उसकी यह हालत देखता हैरान और परेशान रह जाता वह बादशाह जो पहले सल्तनत का हर मसला खुद निपटाया करता था अब कोई मसला सुनने को भी तैयार ना था क्योंकि अब वह बिस्तर से उठकर बैठने के भी लायक नहीं रहा था कई लोग
मिलकर उसे सहारा देकर उठाते तो वह हाफ होता हुआ उठता और चंद घूंट पानी पीकर दोबारा लेट जाता उसे तो सांस भी मुश्किल से आती थी बूढ़ा सुलेमान और सोनिया उसकी हालत देखकर आंसू बहाते उन्हें यकीन नहीं आता था कि उनका शानदार बेटा आखिर किस मर्ज में मुब्तला हो गया है मगर वह क्या करते मर्ज तो उनके सामने था उसके वजूद पर गोश्त की कई तह चढ़ चुकी थी वह इस कदर भारी हो चुका था कि अपने बिस्तर से एक कदम भी नीचे नहीं रख सकता था क्योंकि उससे तो चला ही नहीं जाता था एक
रात वह अपने बिस्तर पर पड़ा हाफ रहा था यह तुम्हारा क्या हाल हो गया सोनिया दुख से आंसू बहाती और सुलेमान पूरी सल्तनत में नित नए हकीम को बुलवा मगर किसी हकीम के पास बादशाह अलबर का कोई इलाज ना था सुलेमान ने कोई ऐसा हकीम नहीं छोड़ा जिसे उसने दरबार में ना बुलवाया हो मगर अब अब वह आजिज आ चुका था क्योंकि कोई हकीम भी बादशाह अलबर का इलाज करने में नाकाम था आखिरकार एक रोज दोपहर के वक्त एक अजीब और गरीब हालात में हकीम दरबार में आया वजीर ने आकर सुलेमान को इत्तला दी हुजूर
एक ऐसा हकीम आया है जो कहता है कि वह बादशाह का इलाज कर सकता है वजीर की बात सुनकर सुलेमान चौक गया और आदेश दिया उसे हाजिर करो लेकिन यह बता दो कि अगर उसने बादशाह का इलाज ना किया तो मैं उसका सर कलम कर दूंगा क्योंकि पहले ही बहुत से लोग लालच और दौलत के लिए हमारा वक्त छाया कर चुके हैं वजीर ने यह संदेश हकीम को दे दिया हकीम मुस्कुरा दिया कुछ देर बाद उसे बादशाह अलबर के सामने पेश कर दिया गया जब हकीम ने बादशाह को देखा तो उसका रंग पीला पड़ गया
जर्द क्यों हो गए हकीम साफ-साफ बताओ क्या मेरा इलाज कर सकते हो या नहीं अगर तुमने कोई झूठा दिलासा दिया तो मैं अभी तुम्हारी गर्दन उड़ा दूंगा बादशाह अलबर ने कहा हकीम फिर भी मुस्कुराया और बोला आप फिक्र ना करें आप चाहे तो मुझसे लिखवा ले मैं आपका इलाज शुरू करूंगा और 10 दिन के अंदर-अंदर आप बिल्कुल ठीक हो जाएंगे हकीम की बात सुनकर बादशाह के चेहरे पर उम्मीद की रौनक लौट आई अगर ऐसा है तो जल्दी इलाज शुरू करो मैं जल्द से जल्द ठीक होना चाहता हूं बादशाह ने कहा हकीम ने बादशाह का इलाज
शुरू कर दिया बादशाह उसकी दी हुई दवाइयां खाने लगा लेकिन उसे अपने अंदर कोई फर्क महसूस नहीं हुआ एक दिन गुजरा दो दिन गुजरे यहां तक कि पूरे नौ दिन गुजर गए मगर बादशाह की हालत पहले से भी बदतर हो गई देखा मैंने कहा था ना यह हकीम झूठा है इससे मेरा इलाज नहीं होगा बादशाह अलबर फूट फूट कर रोने लगा सुलेमान और सोनिया को भी शदीद गुस्सा आया मैं अभी और इसी वक्त इस हकीम का सिर कलम कर दूंगा सुलेमान ने कहा वह सिपाहियों को आदेश देने ही वाला था कि हकीम ने दोनों हाथ
जोड़ दिए माफ कीजिएगा हुजूर मगर मैं ऐसे शख्स का इला आज क्या करूं जिसकी मौत 40 रोज के अंदर होने वाली है उसकी बात सुनते ही दरबार में सन्नाटा छा गया सबके चेहरे का रंग उड़ गया यह क्या कह रहे हो बादशाह अलबर ने पूछा हकीम ने शांत भाव से जवाब दिया जी हां हुजूर आपकी मौत 40 दिन के अंदर हो जाएगी मैं आपका इलाज नहीं कर सकता भला मौत को भी कोई टाल सकता है अब आपके पास सिर्फ 40 दिन है जैसा चाहे अपनी जिंदगी जी ले हकीम की बात सुनते ही बादशाह का चेहरा
जर्द पड़ गया सुलेमान और सोनिया भी फूट फूट कर रोने लगे या अल्लाह यह कैसी आजमाइश है बरसों की दुआओं के बाद हमें औलाद नसीब हुई और अब वह फिर से हमारे हाथों से जा रही है सोनिया गिड़गिड़ा कर रोने लगी दिन गुजरते गए और बादशाह पर मौत का खौफ हावी हो गया वह दिन रात रोता रहता पहले जो बिस्तर से हिलने तक से कासिर था उसने बिस्तर पर ही जाय नमाज मंगवाई और नमाज अदा करने लगा वजू और गस्ल कर की ख्वाहिश होती तो जैसे तैसे गुस्ल खाने तक जाने लगा महंगे खाने उसके सामने
आते लेकिन यह सोचकर हाथ कांप जाते कि चंद रोज बाद तो वह मर जाएगा हलक से निवाला तक ना उतरता और वह दोबारा से नमाज पढ़ने लगता उसने अपनी दौलत और जायदाद लोगों में तकसीम करनी शुरू कर दी क्या फायदा ऐसी दौलत का जब मैं जिंदा ही ना रहूंगा वह रोते हुए कहता और जो भी गरीब आता उसे कीमती हीरे और जवाहरात दे देता दिन गुजरते रहे सबको बादशाह के मरने का डर सताने लगा लेकिन बादशाह का दिल अब कमरे में पड़े पड़े उकता गया उसने सोचा कि मरने से पहले वह जी भरकर खुला आसमान
देख ले वह अपने पैरों पर चलकर बाहर आया और घंटों खुली फिजा में बैठा रहा धूप सेकता परिंदों को उड़ते देखता और यह सब उसे खुशी देने लगा वह धीरे-धीरे अपने बाग में भी चलने लगा 38 दिन गुजर चुके थे एक दिन वजीर उस हकीम के पास आया तुम्हें बादशाह अलबर और उनके वालिद ने याद किया है तुरंत हाजिर हो हुक्म के मुताबिक हकीम दरबार में पहुंच गया वहां सिपाही तलवारें ताने खड़े थे पूरा दरबार लोगों से भरा था सुलेमान गमगीन चेहरा लिए अपनी कुर्सी पर बैठा था सोनिया भी जर्द चेहरा ली बैठी थी लेकिन
बादशाह अलबर वह अब पहले जैसा नहीं रहा था उसके जिस्म पर चढ़े मोटे-मोटे मांस की तह गायब हो चुकी थी उसके चेहरे की जर्दी अब हल्की हो गई थी पहले जो कपड़े उसके भारी शरीर के लिए बनाए गए थे अब उसके पतले बदन पर झूल रहे थे तूने बादशाह को ठीक करने का वादा किया था लेकिन तू नाकाम रहा अब बता तेरा क्या किया जाए तूने भी बाकी हकीमो की तरह हमें धोखा दिया सुलेमान गस्से से बोला और आगे बढ़ा लेकिन अचानक ही वह फूट फूट कर रोने लगा सिर्फ दो दिन बचे हैं मेरा बेटा
मेरी आंखों के सामने मरने वाला है हम सब शदीद गमजदा हैं दरबार चीख से गूंज उठा तमाम लोग फूट फूट कर रोने लगे लेकिन सबके बीच सिर्फ एक शख्स था जो मुस्कुरा रहा था हकीम सुलेमान की निगाह उस पर पड़ी और वह बोला हम सब बादशाह के मरने का गम मना रहे हैं और तू मुस्कुरा रहा है आखिर इसकी वजह क्या है हकीम मुस्कुराया और बोला क्या तुम लोग देख नहीं रहे जिस मर्ज में बादशाह मुब्तला था वह अब खत्म हो चुका है मैंने उसे सिर्फ इतना कहा था कि 40 दिन के अंदर वह मर
जाएगा और मेरे सिर्फ इतना कहने से ही वह ठीक हो गया सुलेमान स्तब्ध रह गया वाकई उसने गौर नहीं किया था कि बादशाह अलबर जो पहले गोश्त का लोथरा बन चुका था अब पूरी तरह स्वस्थ हो गया था वह दुबला पतला नौजवान बादशाह अब घंटों बाग में चहल कदमी कर सकता था मेहनत वाले काम कर सकता था वह आराम से सांस लेता था और खाना भी खा सकता था हकीम ने बादशाह का इलाज कर दिया था बादशाह अलबर हैरत से अपनी जगह से उठ खड़ा हुआ य तो उसने भी नहीं सोचा था क्या मैं मरने
वाला नहीं हूं मेरी वह बीमारी जिससे मुझे मौत आने वाली थी वह कहां गई उसने हैरत से पूछा तो हकीम हंस दिया बादशाह सलामत आपको कोई बीमारी नहीं थी आपको सिर्फ मोटापे ने कमजोर कर दिया था जिसकी वजह से आप काहिल और सुस्त हो गए थे यही सुस्ती आपकी जान ले सकती थी लेकिन मौत के खौफ ने आप पर ऐसा असर किया कि आपने गम में खाना पना छोड़ दिया मेहनत करने लगे चलने फिरने लगे धू ूप और रोशनी में उठने बैठने लगे इससे आपकी सेहत खुद बखुदा ठीक हो गई मैंने तो बस आपका इलाज
किया हां मेरा तरीका अलग था हकीम की बात पर पूरे दरबार में खुशी की लहर दौड़ गई शहजादा अलबर बेताबी से अपने जिस्म का जायजा लेने लगा वाकई वह अपने अंदर एक नई तवाना महसूस कर रहा था अब जब उसने सुना कि वह मरने वाला नहीं है तो खुशी की एक नई लहर उसके अंदर दौड़ गई सोनिया लपक कर आगे बढ़ी और अपने बेटे को सीने से लगाकर बोली मेरा बेटा मरने वाला नहीं है अल्लाह इसे लंबी जिंदगी दे मैं कितनी खुशकिस्मत हूं कि अल्लाह ने एक बार फिर मुझे औलाद की खुशी से नवाजा सोनिया
और सुलेमान दोनों खुशी से झूम उठे तुम वाकई एक काबिल हकीम हो मुझे यकीन नहीं था कि तुम मेरे बेटे की बीमारी को पकड़ पाओगे लेकिन तुमने ना केवल बीमारी का पता लगाया बल्कि इसका इलाज भी कर दिया तुम्हें तुम्हारी जहान का इनाम जरूर मिलना चाहिए सुलेमान बेहद खुश था उसके इशारे पर ही बादशाह अलबर ने अपनी सल्तनत का आधा हिस्सा उस हकीम के नाम कर दिया हकीम इतनी बड़ी सल्तनत पाकर बेहद खुश था लेकिन बादशाह अलबर ने उसके लिए कुछ और भी सोच रखा था दरबार में सभी हकीम की अकल मंदी की तारीफ कर
रहे थे तभी बादशाह अल्बर मुस्कुराया और हकीम को अपने दरबार में सबसे ऊंची जगह दे दी उसने हकीम को अपना मशी खास विशेष सलाहकार बना लिया हकीम खुश था उसने एक बादशाह को वक्त से पहले नाकारा होने से बचा लिया उसके अच्छे और अकलमंद फैसलों ने साबित कर दिया कि वह सच में उस ऊंचे ओहदे के लायक था जबकि बादशाह अलबर ने अब दिल ही दिल में अहद संकल्प कर लिया था कि वह खुद को कभी नाकारा नहीं होने देगा और अपनी सल्तनत के लिए एक अच्छा बादशाह साबित करेगा