ओम ओम ओम ओ य ओमकार मंत्र 21 जो बीज मंत्र है उसने का है बीज मंत्र का अर्थ जितना भी करो उतना काम है जैसे ओम नमः शिवाय का अर्थ दो जल्दी से हो जाता है हम शिव जी को नमन करते हैं ऐसे दूसरे मंत्रों का भी अर्थ समझ में आता है लेकिन बीज मंत्रों का अर्थ समझने की जरूरत नहीं और समझने के लिए कोई गति भी नहीं एक अक्षर के होते लेकिन उसका जैसे बम बम बम बम बम तो कोई बोलेगा भोलेनाथ का मंत्र कोई बोलेगा कुछ लेकिन वास्तव में यह बम बम बम बम
शरीर में वा संबंधी दोषों को रोगों को हरने में राम बाणी लाग दूसरे क्या फायदे होते होंगे उसका वर्णन मेरे पास अभी मेरे को हाथ नहीं लगा है लेकिन ये बीज मंत्र है बम बम बम ऐसे ही खम खम खम खम यह ब्रह्म का बीज मंत्र है बम बम शिव का बीज मंत्र है तो खम खम ब्रह्म परमात्मा का ओम ब्रह्म परमात्मा का और कम भी ब्रह्म परमात्मा का बीज मंत्र ब्रह्म परमात्मा उसे कहते हैं जिससे ब्रह्मा विष्णु महेश देवी देवता प्राणी मात्र सतता चेनता आनंद ता लाते ब्रह्म परमात्मा के सत अंश से अस्तित्व है
ब्रह्म परमात्मा के चि अंश से बुद्धि में ज्ञान है चाहे कीड़ी की बुद्धि हो उसमें भी ज्ञान है चाहे कीड़ी हो उसका अस्तित्व है और भगवान के आनंद अंश में जीवों को सुख का झलक मिलती रहती है रस मिलता रहता है तो अस्तित्व ज्ञातव्य और रस यह सबकी मांग है मैं बना रहू जानू और रस में रह रस नहीं आता तो पान मसाला खाएगा रस नहीं आएगा इधर उधर जाएगा तो मनुष्य जीवन में हमको सत्य ज्ञानम अनंतम ब्रह्म की प्राप्ति करनी चाहिए और वही ब्रह्म परमात्मा सर्वोपरि है और सर्व अनुसत है अनुसत माना जैसे जल
में जल तत्व अनुसत है वायु में वायु अनुसत है उत्त है शक्कर के दाने दाने में मिठास अनुसत है मिठास निकाल दो तो शक्कर क्या बचेगी ऐसे ही पंच भूतों में देवी देवताओं में ब्रह्म परमात्मा अनुसत है जागृत आया चला गया लेकिन जागृत का दृष्टा अनुसत था जागृत स्वप्ना आया स्वपना चला गया स्वपने का दृष्टा अनुचित है स्वप्ने में गहरी नींद आई चली गई लेकिन गहरी में कुछ नहीं देखा ना देखने में भी दृष्टा अनिश्चित है वो परमात्मा जैसे सूत के गांधी जी बने सूत के धागे के गांधी जी की मूर्ति बने तो चप्पल भी
सूत है और डंडा भी सूत है और गांधी का चश्मा भी सूत है रोई अनुसत है सूत के चित्र में ऐसे ही सारे चित्र विचित्र ब्रह्मांड में ब्रह्म परमात्मा अनु है उस ब्रह्म परमात्मा को कोई माने चाहे नहीं माने लेकिन कोई छोड़ नहीं सकता उसको एक सेकंड का हजारवादी सेकंड का हजार हिस्सा ब्रह्म से अलग आप नहीं हो सकते फिर भी उसके मिलने का आनंद तब आता है जब आप सत्संग में अपनी बुद्धि को विलक्षण लक्षणों से संपन्न करते दत्तात्रेय भगवान ने बताया 24 गुरु मैंने किए मैंने उसको कहा करा जो काम में इतना मशगूल
था कि धूल नगार और शहनाइयां बचती हुई जा रही ी लेकिन धिक अपना तीर बनाने में उसकी नोक कैसी होनी चाहिए पीछे का ऐसा कैसा होना चाहिए इसका रंग कैसा होना चाहिए उससे पूछा दत्तात्रेय ने कि इधर अभी बारात गई बोले मुझे मालूम नहीं तो एकाग्रता उस ब्रह्म की और बुद्धि नोक बनाना ऐसा बनाना यह ब्रह्म का चि अंश है और संतुष्टि ब्रह्म का आनंद अंश है लेकिन उसको अपना धनुष्य बनाने से जो संतोष या रस मिल रहा था है तो ब्रह्म का लेकिन निमित उसका तुच्छ है ऐसे नाचने गाने ये वो जहां भी रस
आता है संतुष्टि होती है है तो उस ब्रह्म का ही रस लेकिन साधन हल्के होने से जीव हल्का हो जा उसी एकाग्रता धनुष्य बनाने वाली एकाग्रता ध्यान में लगाता वही एकाग्रता अपने आनंद स्वभाव में लगाता वही एकाग्रता अपने ज्ञान स्वभाव में लगाता तो वो भगवान दत्तात्रेय जैसा ही हो जाता एवरी मैन इज द गॉड बट प्लेइंग द फूल सभी में भगवान की सतता चेतन आनंद महानता है लेकिन मूर्खों की ना जिंदगी खराब कर अगस्टिन बड़ा दार्शनिक था वो सृष्टि का सार क्या है कैसे मिले सब जगह है कैसे जाना जाए उसम उसने कई ग्रंथ पढ़
डाले शास्त्र प कई कहानिया और कई घटनाए पढ़ी विचारा और शब्दों की लंबी लंबी व्याख्या कतार उसके दिमाग में थ आगे अगस्टी नस एक दिन दो दिन नहीं कई महीने कई वर्ष अगस्तीन सृष्टि के मूल तत्व को जानना चाहता था जानते जानते जानते जानने में तो वह नहीं आया लेकिन ख्यालों खयालों में अनिद्रा जैसा हो गया कई दिन कई रातें नींद भी नहीं आई उन्हीं ख्यालों में ऐसा खो गया एक सुबह को समुद्र किनारे निकला ध्यान से सुनना बेटे ध्यान से सुनना फायदा होगा समुद्र किनारे मूड बदलने के लिए गया एक नन्हा लड़का नन्ना सा
बालक हाथ में छोटी सी प्याली लिए हुए बड़ा चिंता की मुद्रा में दिखाई दिया अगस्टी नस को आश्चर्य हुआ इतना छोटा सा बालक अभी तोत इतना चिंता में आखिर क्या है को व्हाट इज द प्रॉब्लम य य वरी लेस टेंशन लेस तो उस लड़के ने कहा यू सेड टू मी वरी लेस एंड टेंशन लेस यू आर आल्सो इन वरी एंड टेंशन तुम खुद ही तो चिंता में हो तनाव में हो क्यों चिंता में हो क्यों तनाव में हो अगस्टिन तुम तो चिंता में तनाव में हो बोले यू आर राइट लिटल बॉय र जजमेंट ज वेरी
गुड से ट्रथ सत्य बोलता है बोले तुम्हारे को क्या चिंता है क्या टेंशन है अगस्ती नस ने कहा कि मैंने कई रात्रि ं से नींद नहीं की तुम देख अरे मैं पहचान गया तुमको बहुत चिंता है आंखें तुम्हारी बता रही है ंद नहीं किया तुमने तो क्या प्रॉब्लम है तुमको बोले मैं सोचता हूं कि वह जो सारी सृष्टि ताल बद चल रही है सूरज निकलता है चंदा निकलता है धरती में धान बही आता है मां के शरीर में दूध बनता है इसके पीछे कोई जानकार ऑटोमेटिक नहीं है सूझबूझ वाले का हाथ है तो व सूझबूझ
वाले का हाथ है वह कौन है कैसे रहता है कहां रहता है और कैसे मिले तो ब बच्चा हसा बच्चे की हसी में व्यंग देखा अगस्टन ने बोला क्यों हंसते हो बोले इक्वल प्रॉब्लम है तुम्हारा हमारा एक जैसा ही प्रॉब्लम है बॉय च इज योर प्रॉब्लम क्या तुम्हारा प्रॉब्लम व्हाट इज योर प्रॉब्लम उस लड़के ने कहा कि मैं सुबह से यहां खड़ा हूं सूरज गा उसके पहले से खड़ा हूं तुम तो अभी आए लेकिन मुझे समझ में नहीं आता कि समुद्र को प्याली में कैसे ले जाऊ और मां के आगे रख दूं कि मैं समुद्र
उठा के लाया अगस्तीन राइट यू आर नॉट ऑर्डिनरी बॉय तू साधारण लड़का नहीं है मानो तेरी इस टेंशन और तेरी प्याली से मेरी समस्या का समाधान कर रहा है मैं भी अपनी एक बुद्धि में कई समुद्र कई सृष्टि पैदा करने वाले को अपनी बुद्धि में भरना चाहता हूं जैसे प्याली में समुद्र आना असंभव है ऐसे बुद्धि में परब्रह्म परमात्मा अथवा सृष्टि का सार तत्व नियामक तत्व बुद्धि में समझ में आ जाए इंपॉसिबल अगस्टिन उस का तनाव चला गया चैन की स्वास ली अब उसको भक्ति भाव होता तो उसी समय उस बच्चे को पकड़ लेता वही
अंतर्यामी बालक रूप होकर प्रेरणा देता है जैसे जगन्नाथ दास महाराज की सेवा करने एक लड़का आ जाया करता था और जब से उस लड़के की सेवा हुई तब शक लगा कि लड़का कोई साधारण नहीं है मुझे सोच जाना होता है तो तुम हाजिर हो जाते हो रात के दो बजे हो चाहे : बजे हो चाहे पौने बजे हो आखिर तुम कौन हो और सेवक आज तक रहे लेकिन ऐसी सेवा में तत्परता बोले जो मेरा होता है मैं उसी का होता हूं तो उसने हाथ पकड़ लिया जगन्नाथ दास ने तुम आखिर कौन हो तो भगवान प्रकट
हो गए तो तो जगन्नाथ दास बोलते हैं कि प्रभु आप मेरे को सोच ले जाते और बुढ़ापे में सोच जाते जाते कपड़े गंदे हो जाते और आप धोते तो इससे मेरा बुढ़ापा अथवा मेरा रोग क्यों नहीं मिटा दिया तो भगवान बोलते बुढ़ापा और रोग मिटाओ तो तुम्हारा आखरी जन्म है प्रारब्ध शेष कहां डालू इसलिए वह प्रारब्ध भगत रहा है और मुझे तुम्हारे जैसे संत की सेवा का अवसर मिल रहा है अगस्टिन उस भी बड़ा प्रसिद्ध संत हो गया लेकिन जग नाथ दास ने जैसे हाथ पकड़ लिया ऐसे उस बच्चे का हाथ पकड़ने में व तत्पर
नहीं रहा तो भगवान युगे अ युगे अवतरित होते रहते हमारे अंतःकरण में भगवान की प्रेरणा अवतरित होती रहती दुशासन ने साड़ी पकड़ी देखा कि इधर का सारा भीष्म पितामह और युधिष्ठिर और ये अर्जुन सब अके बके होक देखते हैं अब मेरा बल नहीं चलता जब अपनी निर्बलता महसूस होती है और भगवान के बल पर विश्वास होता है तब प्रार्थना प्रकट होती है और काम करती उसके पहले तो शब्द होते हैं अपना बल लगाकर थका अब अपना बल पूरा लगा दिया और अपनी निर्बलता का एहसास हुआ और भगवान परम समर्थ है यह पक्का हो गया उसी
समय साड़ियों का अवतार हो गया जब सब निपट गया तो श्री कृष्ण यथावत आके मिले तो बोले माधव तुमको हमने पुकारा तुम साड़ियों में अवतरित हुए अवतरण अवतार प्रेरणा अवतार जैसे आपने तपेली में पानी रखा और उसमें गैस की यहां अग्नि की गर्मा श आई तो गर्मी का आवेश हो गया पानी में पानी गर्म हो गया ऐसे नरसी अवतार आवेश अवतार साड़ियों में भगवान तुम प्रविष्ट हो गए यह प्रवेश अवतार है फिर अंतर्यामी अवतार है आप अच्छा काम करते तो सद बुद्धि देते गलती करते हो तो कुछ डांटते अथवा संत के द्वारा तुम्हारा ईगो लेस
करके तुम पर कृपा बरसाते तो यह अंतर्यामी अवतार प्रेरणा अवतार फिर भगवान का अवतार होता है जिस प्रतिमा को पूजते हो मूर्ति को पूछते हो जिस किसी को पूछते हो तो उसमें भी भगवान की सत्ता अवतरित देखी सुनी गई भागवत में आता है जड़ बत उच्च कोटि के संत थे मां काली की प्रसन्नता के लिए कोई यज्ञ कर रहे थे और उस यज्ञ में पुत्र इष्ट भावना थी किसी की बलि दो तो उसी का जीव अपने घर में बेटा होकर आएगा तो जड़ भरत को पकड़ लिया गया और जो ही वह जंगली राजा उनकी बलि
देता है तो काली की मूर्ति गर गर गर आवाज आया उसमें से काली प्रकट हुई और महान संत का अपमान उसका दंड तुझे मिलेगा और तेरा यज्ञ भी पूरा होगा सिर काट के उसकी बलि दे दी हनुमान जी का भक्त एकांत में हनुमान जी की आराधना करता और कोई क्रूर व्यक्ति उसको मारकर उसका सब छीनना चाहता था जो उसने मारने के लिए हथियार उठाया हनुमान जी की मूर्ति टूट पड़ी और हनुमान जी प्रकट हो गए तो इस प्रकार अर्चना अवतार भी होता है तो भगवान का कब भी कहां कैसे जिस समय जैसी जरूरत होती है
ऐसा अवतार होता है अब वो अवतार नित्य अवतार नेमत का अवतार प्रेरणा अवतार आयुध अवतार यूं सुदर्शन छोड़ा और घूम के आया जिसको जो करना था करके आ गया ब्रह्मास्त्र छोड़ा तो तो प्रलय कर देव लेकिन श्री कृष्ण ने कहा हथियार छोड़ दो क्षमा मांगो सिर झुकाओ ब्रह्मास्त्र वापस गया तुम बम छोड़ो और कोई सिर झुकाए और बम वापस चला जाए यह संभव नहीं है लेकिन मात्रिक शक्ति में भगवान का अवतरण होता है मेरी मां बीमार हो गई लिवर खराब है किडनी खराब है लिवर का पोइजन ऊपर चढ़ रहा है 24 घंटे जीना मुश्किल है
दो मन के घिस गए हैं पाचन खराब हो गया आधा किलोमीटर पर महिला आश्रम में आपने देखा है मोटेरा आश्रम से आधा किलोमीटर होगा करीब तो यहां से मैं व आश्रम में गया जहां मा रही थी मां ने मेरे को हाथ जोड़े अब बोला अब मेरे को जाने दो मैंने कहा मैं कैसे जाने दूंगा तुम कैसे जाते हो मैं देखता हूं तो बोले क्या करूं कह रती मैंने मंत्र दिया और डॉक्टर हैरान हो गए अमेरिका का डॉक्टर भी आया हुआ था भक्त था एमडी किया अमेरिका में अभी उसके हॉस्पिटल वही वो चलाता और भी कई
डॉक्टर थे व हैरान हो गए कि अब यह मंत्र क्या करेगा लिवर खलास हो गया है किडनी खलास हो गया 22 20 बा 18 15 17 घंटे गिन रहे के अभी अभी भी हो जाएगा कुछ भी लेकिन 20 दिन बीते 20 महीने बीते 40 महीने बीते 80 महीने बीत गए 84 महीने बीत गए मां तो चंगी हो गई तो डॉक्टरों को चकी हो करर कहना पड़ा कि आखिर क्या है तो मेरे वैद्य ने भी मेरे को बोला कि अब कुछ नहीं हो सकता है विपरीत नाड़ी चलती उस वैद्य को मैंने बोला तू तो बोलता था
कसु नाथा कश य कैसे हो गया आयुर्वेद ग्रंथ माला जहां दवाई वैद्य सब थक जाए वहां भगवान का नाम और संत का आशीर्वाद कुछ भी कर सकता है वैद्य को चकित नहीं होना चाहिए आश्चर्य नहीं करना चाहिए तो भगवत सत्ता का प्रभाव सर्वोपरि य आयुर्वैदिक ग्रंथ बनाने वाले सुसत मुनि लिखते हैं कि जब आयुर्वेदिक उपाय उपचार शैल क्रिया सब विफल होने लगे तो भी निराश नहीं होना विफलताओं के बाद भी सफलता की कुंजी हम तुम्हारे को सुनाई देते हैं भगवान का मंत्र लिखा है उसमें सुत जी ने आयुर्वेद ग्रंथ रचता ने अता जिसका पद कभी
नहीं होता ब्रह्मा जी का पद हो जाता है विष्णु लोक शिव लोक हो जाता है फिर भी जो जू का त रहता है उसको ब्रह्मा बोलते वही अचत है अच्युताय गोविंदाय गो माना इंद्रिया जिसकी सत्ता से विचरण करते गोविंदाय अनंताय उसकी कोई सीमा नहीं है मेरे ह हृदय में है इतना ही नहीं सभी हृदयं में और ज हदय नहीं है वहा भी है जड़ चेतन तपत वही है पांच भूतों में भी वही है वही पांच भूतों की लीला कर रहा है वही मनुष्य वही पशु पक्षी राम तीर्थ को जब सत्य का साक्षात्कार हुआ तो भजन
गाते थे कृष्ण बना में कंस बना में राम बना में रावण था अब वेद कसमें खाते हैं हर हर ओम ओम हर हर ओम ओम ऋषियों के आईने में मेरा नूर दर्शाया था मुझी से शायर लाते हैं हर हर ओम ओम हर हर ओम ओ तो वास्तव में आपको पूर्ण परमात्मा अनुभव चाहिए तो अभी से ही परमात्मा के तत्व का स्वीकार कर लो के सब वासुदेव है जल को देखो तो वासुदेव ही द्रवी भूत होकर जल होकर बह जिसको भी देखो वासुदेव तो सर्प को भी वासुदेव स्वरूप समझकर प्रेम से उठाओगे तो सांप भी विला
स्वभाव भूलकर तुम्हारे को भी प्रेम से देखेगा क्योंकि वासुदेव का प्रेम तो उसमें भी तो है ना तो एवरी एक्शन क्रिएट इन रिएक्शन आप भगवत बुद्धि सासु को देखो कैसी भी सासु बदल जाएगी कैसी भी बहु हो बदल जाएगी दूसरों के लिए चाहे वो कैसी रहे लेकिन आपका यह असली सच्चिदानंद स्वभाव जागृत कर तो सच्चिदानंद को जानना तो चाहते थे लेकिन बुद्धि से जानना चाहते बुद्धि का विषय नहीं है सच्चिदानंद को मानना होता है और संसारी व्यवहारों में भी श्रद्धा चाहिए पृथ्वी गोले बच्चा जानकर लिखने जाए तो नपास हो जाएगा जानकारी में व कब पहुंचेगा
अभी पेपर आया है पृथ्वी कैसी है और कैसे समझने जाए तो मुश्किल है जो सुना है श्रद्धा से लिख दे पृथ्वी गोल है तो पास हो जाएगा ठीक है कि नहीं है श्रद्धा से मानना पड़ता है ना पृथ्वी बोले शुरू शुरू में इतने राष्ट्र है य को देखने जाते क्या वो भी श्रद्धा से मानना पड़ता है फलाना देश है फलाना देश हैय कोई जानबूझ के देख के जाता है क्या य भी तो श्रद्धा से मानते और श्रद्धा से टिकट खरीदते तो श्री कृष्ण कहते श्रद्धा मयम अयम पुरुष ये पुरुष श्रद्धा में लेकिन इन चीजों में
श्रद्धा तो ऐसे ही फल सारे सार का सार परमात्मा है और वही अनेक रूपों में दिख रहा है य वासुदेव है ऐसा चिंतन करने से श्रद्धा से ज्ञान में प्रेम में शांति में जल्दी गति अगस्ट नस ने कितने वर्ष तना बुनी करके आखिर ये बात एक बच्चे के मुंह से सुनी कि मैं अपनी प्याली में समुद्र ले जाना चाहता हूं तो की हुई ईश्वर के लिए खोज का फल यह हुआ कि बच्चे की बात उसको स्वीकार हो गई जैसा तू बालक है ऐसा मैं भी बालक हूं बच्चे को बोला त जैसा तू छोटा लड़का है
बच्चा ऐसा मैं भी छोटा बच्चे जैसा व परमात्मा को अपनी बुद्धि में डालना चाहता निश्चिंत हो ग बड़े सं तत्व को उपलब्ध हो तो जगत को जानना होता है और भगवान को मानना होता है जगत को जानोगे नहीं तो विवेक होगा वैराग्य होगा दिखने में पति है पत्नी है सुंदरे है सुंदरी है लेकिन देखो तो अंदर क्या मसाला भरा है दिखने में जगत लग रहा है कि हां अपना है मेरा है लेकिन बहता जा रहा है एक साधु मुस्लिम साधु जिसको दरवेश बोलते हज करने जा रहा था रास्ते में किसी पड़ाव डालने के लिए किसी
से गाव में कौन ठीक आदमी है मैं उसका अतिथि बन तो बोले धनी लोग तो बहुत है लेकिन सबसे ज्यादा धनी पैसों से नहीं दिल का भी धनी सबसे ज्यादा धनी शकी है उसका असली नाम लोग भल शाकिर शकरी बोलते शाकिर माना एक तो होता है शाति जो शैतान होता है सताता दूसरा होता है शकि शुक्र गुजार गए शुक्र गुजार के पास और ऐसा साधु की आओ भगत की दो दिन संत रहा फकीर रहा मैं दरवेश कह तभी भी वही समझना संत फकीर दरवेश एक ही बात विदाय के समय खाना दिया खजूर दी रा के
लिए सुविधा में जैसी सेवा कर दरवेश ने कहा शाकिर जैसा सुना था उससे भी ज्यादा तुम्हारी सज्जनता देखी अल्लाह तुम्हें और भी खुशहाल रखे शाकिर ने कहा यह भी तो नहीं रहेगा दरवेश चौका उस्ताद ने बताया कोई कुछ कहे तो तुरंत उसका उत्तर देने की उधेड़ बुंद में मत पड़ना उसकी बात को गहरे सोचना हज करते सो गया कि शाकिर ने कहा आखिर यह नहीं रहेगा करीब दो वर्ष के बाद जब वहीं से वापस गुजरा तो देखा तो शाकिर का महल मिला नहीं क्या हुआ लोगों ने कहा बाढ़ आई थी शाकिर की संपत्ति शाकिर का
मकान सब बह गया उसका जो कुछ था सब बह गया अब किसान के हम दद जमीदार है बड़ा उसके य वो काम करता है झोपड़ में रहता है फटे कपड़े पहनता है बैल हकता है जोतता है बोता है पानी पिलाता है घास काटता है उसकी औरत भी मजदूरी करती लड़कियां बड़ी हो गई है शादी की चिंता भी उसे घेरी होगी दरवेश ने सोचा जिसके यहां मैंने सुविधा पाई अब वो कठिनाई में मुझे जाना चाहिए शाकिर ने उसका स्वागत तो किया लेकिन झोपड़े में बिस्तर तो नहीं फटा टाट पर आराम किया रूखी रोटी से सेवा कर
ली दरवेश की आंखों में आंसू आ गए कि कहां था और कहां अल्लाह ने पहुंचा दिया शाकिर मुस्कुराता हुआ बोलता है कि यह भी तो नहीं रहेगा दरवेश विदाय हुए अमीर था तो बोला यह नहीं रहेगा एकदम कंगाल हो गया तभी बोलता यह नहीं रहेगा दो साल की अवधि में कुछ बाकी थे दरवेश फिर शाकिर का दीदार हो जाएगा दर्शन हो जाएगा क्या नहीं रहेगा हज का बहाना बनाकर चला तो देखा कि शाकिर झोपड़े वाला शाकिर नहीं है अभी तो नगर सेठ है हम दात गुजर गया और उसकी जमीन जागीर और छुपा हुआ गड़ा हुआ
खजाना सब शाकिर के हवाले हो गया पहले से भी शाकिर बड़ा अमीर हो गया बड़े घरानों में शादी हो गई बेटियों की दरवेश बड़ा खुश हुआ शाकिर अच्छा कहा तुमने यह भी नहीं रहेगा गरीबी नहीं रही अब तुम सुखी रहना शाकिर कहता यह भी तो नहीं रहेगा नवे सोचता आखिर क्या तुमने ठान लि बोले नहीं ऐसे ही है कुछ भी नहीं रहता चांद सफर में सितारे सफर में दरिया सफर में दरिया के किनारे सफर में हर स्वास शरीर सफर में क्या कहता है एक वही रहता है जो सुना है फकीरों से साक्षी चैतन्य परमात्मा बाकी
सब प्रकृति के बड़ में बह जाता है दरवेश गया हज करने को आ गया जब लौटा तो अमीर शाकिर के यहां लौटना था लेकिन देखा अमीर शाह के कब्रस्तान में पहुंच गया है लड़किया तो शादी करके गई बूढ़ी औरत है नौकरों के हवाले अब मैं कब्र पर जाऊंगा फूल चढ़ाऊ अल्लाह से उसकी दुआ मांगूंगा कबर पर क्या देखता है कि बड़े पत्थर पर लिखा है यह भी नहीं रहेगा दरवेश ने सिर पटा के आखिर कबर कहां चली जाएगी अमीरी गई गरीबी गई शरीर गया लेकिन कबर कहां जाएगी उसे पता नहीं कि कई बार कब्रस्तान भी
चले गए फिर दो साल के बाद आया तो देखा कबर नहीं है पूछा कहां गई कबर बोले जलजला आया था भूकंप कब चली गई फिर निर्माण हुआ यहां बस्ती है ज यह बस्ती दिखती वही वह कब्रस्तान था और शाकिर की कबर भी उसी में थी तब मानना पड़ता है कि संसार का कुछ भी स्थिर नहीं रहता है य अयोध्या के राम जी जा जन्म होंगे वह जगह नहीं है कृष्ण जहा प्रकट हुए थे वह जगह नहीं है तो बाद में सब निर्माण हो गया है कई बार य पथ उथल पथल हो इसलिए मगन निवास चगन
निवास मेरा नाम इस प्रपंच में मत पढ़ो मेरा नाम इस मरने वाले शरीर का नाम की परवाह ना करो लेकिन वो ब्रह्म परमात्मा को जानने उसको जानना है तो उसके उपदेश को मान लो उसका उपदेश है मम वांस जीव लोके जीव भूत सनातन तुम मेरे वंशज हो जीव होकर अपने को मान रहे हो वास्तव में तुम्हारा आत्मा मेरा आत्मा एक ही है जैसे तरंग का पानी और समुद्र का पानी एक है घड़े का आकाश महाकाश एक है व्यक्ति का शवास और समष्टि हवा एक है व्यक्ति जहां बैठा है वो भूमि और पूरे विश्व की भूमि
एक है ऐसे व्यक्ति जिसकी सत्ता से स्वास लेता है वह सत्ता पशु पक्षियों में भी वही की वही है सब वासुदेव है ओम ओम वासुदेव ओम ओम शाश्वत देव ओम ओम ज्ञान स्वरूपा ओम ओम चैतन्य रूपा ऐसा करके भगवान में शांत होता जाए तो भगवान का का सामर्थ्य आएगा समर्थ चाहते हो और ज्ञान भी आएगा प्रज्ञा में दिव्य ज्ञान आ और आप रस भी चाहते हो आप रस भी चाहते हो ज्ञान भी चाहते हो और अपना अस्तित्व भी चाहते हो तो शरीर के अस्तित्व की ममता छ शास्त्रों में प्रश्न उत्तर हुए बुद्धिमान कौन है जिसने
बहुत सार किताब पढ़ ली बहुत सारी डिग्री है उसको बुद्धिमान कहते हैं बोले नहीं बुद्धिमान वह है जो मरण धर्मा शरीर को मैं नहीं मानता और शरीर मरने के बाद भी जो रहता है उस चैतन्य को मैं मानता है वह बुद्धिमान है व धनवान है यूनान का अगस्टिन उस पहले तो विद्वान था लेकिन बाद में उस छोटे लड़के के संपर्क में आने के बाद बवास बुद्धिमान हो गया आप भी पहले कुछ भी हो अब बुद्धिमान बन जाओ महात्मा गांधी हरिजन उद्धार के लिए प्राण त्याग तक का संकल्प लेकर बैठ गए उपवास मेरे लीला श प्रभु
को पता चला अपने सेवकों को बुलाया शह नाथपुर के एकांत में डेढ़ दो मना रहे थे बोले गांधी के प्राण ना जाए गांधी जिए और उनका काम बने ऐसा अपन संकल्प करते और संकल्प में बड़ी ताकत है जिए गांधी जी वाह गांधी वाह जिए गांधी जी जब भी टाइम मिले ऐसा बोल दिया करो अब लोगों को तो ये बात साधारण लगी लेकिन जिस भक्त ने अपना अनुभव खा है साईं जी का साई लाशा का संकल्प और हम लोगों के भावना में गांधी जी को सफलता भी दिलाई और जिए भी बहुत साल बाद में नहीं तो
अखबारों में अभी गए गांधी जीी ऐसा कड़ा उपवास अ जल छोड़ने वाला उपवास अभी गए गांधी जी अभी गए लेकिन लीलाशाह साई ने शह दपु में बैठे बैठे दोहराया ऐसे मेरी तबीयत 60 साल में तो हाथों से जा रही थी और आप लोगों ने साधक मांगे मांगना प्रभु दीज महे दोय बाप हमारे स्वस्थ हो आयु लंबी हो अब तो सबके सिर पर चढ़ के बोल रहा हूं है ना यह तुम्हारा संकल्प इस शरीर से ना जाने क्या क्या काम करवा रहा है तो सारे संकल्पों की दुनिया है मैं बीमार हूं मैं बीमार हूं तो बीमारी
बढ़ेगी जिन्होंने नहीं सुना यह जयपुर की घटना उनके लिए बोलता हूं जयपुर में राजस्थान में लगभग मारवाड़ी लोग रक्षा बंधन के दिन अपनी दीवारों पर स्वस्तिक शुभ लाभ देवी देवा देवता के चित्र खींचते थे बाई ने अपना लाल रंग लोटे में भिगा रखा गर और लोटा पति के खाट के नीचे रख दिया और पति सुबह सुबह उठे तो देखा लोटा उधर नहीं यही पड़ा है उठाया तो भरा हुआ है अब उसको पता नहीं लाल रंग का भरा हुआ है व तो लोटा पानी का भरा समझ के गया अंधेरे में जब उसने अपना प्रयोजन पूरा किया
प्रयोजन समझते ना डबल कर लिया और खोल के बोलू क्या पेट सा साफ कर लिया लोटे का उपयोग हो गया उठा तो सूर्य की रोशनी में देखा इतना लाल खून निकल गया मेरा चकराने लगा चलते चलते चक्कर आए गिर पड़ा लोगों ने खाट पर डालकर घर छोड़ दिया कमला छोरी थी मंगनी हो गई थी प्रेम कुम बोलते थे कुमरी मां कुम कुम कुमरी मां अओ व मंगल सूत्र बनाया है तीन तीन चूड़ी बनाईया हैम को कन्यादान में तेरा भाई और तू मिलक दे दी जो मैं जा रहा [संगीत] हू हमारे जीना मुश्किल है भाई घबरा
गई इसी जवानी में मैं विधवा बनूंगी आप का कर रहे हो बोले अब नहीं गा वो समझता था कि इतना सारा खून निकल गया शरीर से बाई घबराई मु का अब शुकन हो रहा है व मैंने रात को लोटा भगाया था गड़ आक ज दी वालों पर देवी देवता का भगवान का नाम लिखू तेरे बाप की तबीयत ठीक हो जाए मां लोटा कहां रखा था बोले तेरे बाप के खाट के नीचे रखा था मा क्या था उसम बोले वो लाल रंग गड़वा भगाया था उस बोले लोटा तेने रखा था बोले उसम का भगोड़ था बोले
गे लाल र हस पड़ा उठ के खड़ा हुआ बोले मैं ठीक हूं ठीक मानना पड़ेगा जैसा मन सोचता शरीर पर उसकी असर पड़ती है तो मन सोचे मैं भगवान का वो तो सोच विचार झूठी थी खून नहीं बहाता फिर भी खून बहा यह मान लिया और यह भगवान ब्रह्मा का अक्षर है ओम ब्रह्मा है ब्रह्मा है मैं कय सच्ची बात है सच्ची बात को पका करो सब पक्का कर दो सब वासुदेव है तो सर्प विशी ले प्यार से वश में बाबा तेरे आगे राधे राधे गोविंद गोविंद मान अपमान की चोट लगती तो भी तुम बबलू
मान की इच्छा वाले को अपमान का दुख होता है जिसको मान की इच्छा नहीं उसको अपमान का दुख नहीं होगा धन की इच्छा वाले को निर्धन का भय है जिसको धन की इच्छा नहीं उसको निर्धनता का भय अपने को मरने वाला शरीर मानता है तो मृत्यु की भय जब अपने को ओम स्वरूप आत्मा मानेगा तो मृत्यु का भय भी [संगीत] गायब सुख के लोप को दुख का भ लेकिन जो आनंद स्वरूप हो गया उसको दुख और सुख कुछ भी नहीं [संगीत] आनंद आता रहेगा हम भगवान के भगवान हमारे हैं और भगवान आनंद स्वरूप प्रेम स्वरूप
जैसे बच्चा मां के साथ आठ खेली करता ऐसे हम परमात्मा से कर रहे हैं परमात्मा हमसे कर रहे हैं वो तो झूठा था ग वो सचमुच में खून नहीं था लेकिन य तो सचमुच में चैतन्य है उसी से ऊ होता है और वही सुनता है वही ऊ करवाता है ये बिल्कुल सच्ची बात है जब झूठा गड़वा आदमी को मौत के घाट उतार सकता है तो सच्चा आदमी को ईश्वर के घाट पहुंचा दे ईश्वर के आनंद में गा दे तो इसमें संदेह मत करना अभी अभी आनंद आएगा गुरु चरण चित लाए [संगीत] आनंद [संगीत] माधुर्य हंसी
आएगी कुछ का कुछ होने लगेगा हम प्याली में भगवान को नहीं भरेंगे अपने को भगवान में डुबा देंगे बस तरंग सागर में डू गया सागर कता तरंग कहते सागर है अंतर्यामी कृष्ण तरंग है तुम्हारी बुद्धि इसमें बुद्धि में दिव्य ज्ञान [संगीत] आए सत्यता का अनुभव और रसमय जीवन होगा अी अभी रस जीवन कल की बात नहीं निरस आदमी पान मसाला खाता है निरस आदमी शराब पीता है रस आदमी अपनी पत्नी दूसरी पत्नी की सत्यानाश करने में रस लेने में लगता है लेकिन आत्मा के रस के आगे संसार के विकारी रस क्या होते [संगीत] हैं हम